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राप्तीनगर में सीएम ग्रिड योजना के तहत बनी स्मार्ट सड़क का मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण

गोरखपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राप्तीनगर में सीएम ग्रिड (चीफ मिनिस्टर ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट) योजना के तहत राप्तीनगर में बनी स्मार्ट सड़क का निरीक्षण किया। निर्माण कार्य पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि बेहतरीन यूटिलिटी डक्ट से युक्त यह स्मार्ट सड़क नगर निगम की निश्चित आय का जरिया भी बनेगी। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने नगर आयुक्त से इसके सभी पहलुओं, पार्किंग, बेंच, यूटिलिटी डक्ट, ग्रीनरी, बनाने की तकनीकी आदि की विस्तार से जानकारी ली। नगर आयुक्त ने बताया कि पहले चरण में यह स्मार्ट सड़क पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बनी है। निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत में सीएम योगी ने कहा कि स्मार्ट सड़क में स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट के साथ ही यूटिलिटी डक्ट भी बनाया गया है। इससे पाइपलाइन डालने के लिए बार बार सड़क की खोदाई नहीं करनी पड़ेगी। यह स्मार्ट सड़क इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यूटिलिटी डक्ट नगर निगम के लिए निश्चित आय का आधार भी बनेगा। यूटिलिटी डक्ट का उपयोग जिन संस्थाओं द्वारा अपने कार्य के लिए पाइपलाइन (बिजली, गैस) आदि डालने के लिए किया जाएगा, वे नगर निगम को इसके लिए किराया देंगी। सीएम ग्रिड की स्मार्ट सड़क नगर निगम को सालाना दो करोड़ रुपये का आय कराने में सफल होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा यह स्मार्ट सड़क मॉडल रोड है। इससे नगर निकायों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। सीएम योगी ने कहा कि सामूहिक प्रयास के अच्छे परिणाम सामने आते हैं। जब सबका सहयोग मिलता है तो महानगर, जनपद और प्रदेश विकास की बुलंदियों को छूता है। गोरखपुर में विकास इसी रूप में देखने को मिल रहा है।

पुनर्वासन योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का योगी सरकार का निर्देश

  दिव्यांगजनों को शिक्षा, कौशल और रोजगार में समान अवसर देना सरकार की प्राथमिकता लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के सर्वांगीण पुनर्वासन को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार का लक्ष्य है कि दिव्यांगजन शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों में समान भागीदारी प्राप्त कर सकें और समाज की मुख्य धारा से जुड़ते हुए आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। इसी क्रम में “दिव्यांगजन के सर्वांगीण पुनर्वासन हेतु स्वैच्छिक संस्थाओं को सहायता योजना” लागू की गई है, जिसके तहत पात्र स्वैच्छिक संस्थाओं को अनुदान प्रदान किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए सहायता प्रदान की जाएगी, जबकि मानसिक मंदित एवं मानसिक रूप से रुग्ण दिव्यांगजन इस योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं। सरकार का उद्देश्य विभिन्न श्रेणियों के दिव्यांग बच्चों और युवाओं को प्रारंभिक हस्तक्षेप, शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास की सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनके पुनर्वासन की एक सुदृढ़ व्यवस्था तैयार करना है। सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने बताया कि योगी सरकार की प्राथमिकता है कि दिव्यांगजन शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य और रोजगार के प्रत्येक क्षेत्र में समान अवसर प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकें। दिव्यांगजनों के सर्वांगीण पुनर्वासन हेतु स्वैच्छिक संस्थाओं को सहायता प्रदान करने की योजना के माध्यम से प्रदेश सरकार सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा दे रही है। इस योजना के अंतर्गत दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में उल्लिखित 21 प्रकार की दिव्यांगताओं से प्रभावित व्यक्तियों के लिए संचालित पुनर्वासन परियोजनाओं को अनुदान दिया जा रहा है, जिससे दिव्यांग बच्चों और युवाओं को प्रारंभिक हस्तक्षेप, शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास की समुचित सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने बताया कि मानसिक मंदित एवं मानसिक रूप से रुग्ण दिव्यांगजनों को छोड़कर अन्य दिव्यांग वर्गों के लिए यह योजना प्रभावी रूप से लागू की जा रही है। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना है उद्देश्य योजना के अंतर्गत अर्ली इंटरवेंशन सेंटरों की स्थापना, डे-केयर सेंटरों एवं प्री-प्राइमरी विद्यालयों का संचालन, प्राथमिक से हाईस्कूल स्तर तक विशेष विद्यालयों का संचालन, दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम, पाठ्य सामग्री निर्माण, ब्रेल एवं सहायक उपकरणों की उपलब्धता तथा दिव्यांगजनों से संबंधित पुस्तकालयों के संचालन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को सहायता अनुदान के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य दिव्यांगजनों की प्रारंभिक अवस्था से ही पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना है। पारदर्शी एवं तकनीक आधारित आवेदन प्रक्रिया मंत्री ने बताया कि योगी सरकार की  नीति है कि दिव्यांगजनों के पुनर्वासन में केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि अनुभवी और समर्पित स्वैच्छिक संस्थाओं की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसी उद्देश्य से पात्र स्वैच्छिक संस्थाओं के लिए पारदर्शी एवं तकनीक आधारित आवेदन प्रक्रिया निर्धारित की गई है। केवल वही संस्थाएं योजना के अंतर्गत पात्र होंगी, जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत हों, नीति आयोग के एनजीओ दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण के साथ विशिष्ट पहचान संख्या रखती हों तथा दिव्यांगजनों के क्षेत्र में न्यूनतम दो वर्षों का कार्यानुभव रखती हों। सहायता केवल वास्तविक, सक्रिय एवं प्रभावी संस्थाओं को उन्होंने यह भी कहा कि योजना के अंतर्गत प्रस्तुत प्रस्तावों का परीक्षण जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा, जिसके पश्चात निदेशालय स्तर पर स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सहायता केवल वास्तविक, सक्रिय एवं प्रभावी संस्थाओं को ही मिले और सरकारी धन का समुचित एवं परिणामोन्मुखी उपयोग हो सके। योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर मंत्री ने बताया कि सभी मण्डलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जनपदों में इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कराएं, ताकि अधिक से अधिक स्वैच्छिक संस्थाएं आगे आकर दिव्यांगजनों के पुनर्वासन के इस अभियान में सहभागी बन सकें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के संकल्प के साथ दिव्यांगजनों को सशक्त, शिक्षित और स्वावलंबी बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।

‘खेती की बात खेत पर’ थीम के साथ हुई ‘किसान पाठशाला-8.0’

12 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी से किया था शुभारंभ 12.62 लाख पुरुष व 7.53 लाख महिला किसानों को योजनाओं, तकनीक, नवाचार आदि से किया गया प्रशिक्षित लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसान पाठशाला लगाकर किसानों को आधुनिक खेती, सरकार की योजनाओं व खेती में नवाचार के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। कृषि विभाग के तत्वावधान में इस वर्ष भी किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। ‘खेती की बात खेत पर’ थीम के साथ किसान पाठशाला 8.0 रबीः (2025-26) हुई। इसमें 20.15 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 दिसंबर को पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के गांव दौलतपुर, बाराबंकी से किसान पाठशाला का शुभारंभ किया था। 12.62 लाख पुरुष व 7.53 लाख महिला किसानों को नवाचार का दिया गया प्रशिक्षण कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि रबी सीजन में कृषि विज्ञान केंद्र, पैक्स सोसाइटी, ग्राम पंचायत सचिवालय, प्रगतिशील किसानों के साथ ही प्रदेश के 21 हजार ग्राम पंचायतों में किसान पाठशाला का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश के कुल 20.15 लाख किसानों ने हिस्सा लिया। इसमें 12.62 लाख पुरुष व 7.53 लाख महिला किसानों को कृषि व सहवर्ती विभागों की योजनाओं के साथ ही कृषि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों व कृषि विज्ञान केंद्रों में किए जा रहे नवाचारों से प्रशिक्षित किया गया। 2017-18 से अब तक दो करोड़ से अधिक किसान किए जा चुके प्रशिक्षित कृषि विभाग के मुताबिक किसान पाठशाला के अंतर्गत 2017-18 से अब तक दो करोड़ से अधिक किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। किसान पाठशाला का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती के लिए शिक्षित करना और उनकी आय दोगुनी करना है। योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, प्राकृतिक खेती, फसल प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और आय बढ़ाने के तरीकों की व्यावहारिक ट्रेनिंग देना है, जिससे वे कम लागत में बेहतर पैदावार कर सकें और आत्मनिर्भर बनें। इसमें फसल सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य, बागवानी, नई तकनीक समेत विभिन्न पहलुओं पर जानकारी भी दी जाती है।

माननीय मुख्यमंत्री जी ने अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए दिया यह आदेश

माननीय मुख्यमंत्री प्रदेश में होने वाली समस्त भर्तियों, चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण बनाए रखने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध   लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में होने वाली समस्त भर्तियों/चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण बनाए रखने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप नकल माफियाओं के विरुद्ध अभिसूचना संकलन करते हुए एस.टी.एफ. उ०प्र० को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या-51 के अंतर्गत सहायक आचार्य पद हेतु अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा के संबंध में अनियमितताओं/धांधली एवं अवैध धन वसूली से जुड़ी सूचनाएँ प्राप्त हुईं। प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश द्वारा मामले की गोपनीय जाँच के आदेश दिए गए। प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कार्यवाही करते हुए दिनांक 20-04-2025 को एस०टी०एफ० उ०प्र० को उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग प्रयागराज द्वारा दिनांक 16-04-2025 व 17-04-2025 को आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गैंग के तीन अभियुक्तों- महबूब अली, बैजनाथ पाल एवं विनय पाल-को परीक्षा में धांधली एवं अवैध धन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उक्त संबंध में एस०टी०एफ० उ०प्र० द्वारा थाना विभूतिखंड, जनपद लखनऊ पर मु.अ.सं. 144/25, धारा 112, 308(5), 318(4) भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.), 2023, अभियोग पंजीकृत कराया गया। जाँच की निष्पक्षता एवं गोपनीयता सुनिश्चित रखने के उद्देश्य से तत्कालीन आयोग की अध्यक्ष से त्यागपत्र लिया गया था चूँकि अभियुक्त महबूब अली निवर्तमान आयोग की अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था। पूछताछ के दौरान अभियुक्त महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसके द्वारा मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान ही विभिन्न विषयों के प्रश्न पत्र निकाल लिए गए थे, जिन्हें उसने कई अभ्यर्थियों को विभिन्न माध्यमों से धन लेकर उपलब्ध कराया। अभियुक्त महबूब अली की स्वीकारोक्ति की एसटीएफ द्वारा गहन विवेचना एवं डेटा एनालिसिस से पुष्टि हुई है। जाँच के क्रम में गिरफ्तार अभियुक्तों तथा उनसे संबंधित अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों का डाटा विश्लेषण एवं मुखबिर तंत्र से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम एवं मोबाइल नंबर प्रकाश में आए। इस संबंध में आयोग को पत्र लिखकर संदिग्ध अभ्यर्थियों का डाटा माँगा गया। प्राप्त डाटा के मिलान में यह तथ्य सामने आया कि उक्त परीक्षा की शुचिता भंग हुई है। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उक्त परीक्षा को निरस्त किए जाने के आदेश दिये गए हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया है कि उपरोक्त परीक्षा का आयोजन शीघ्रातिशीघ्र, पूर्णतः निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से सुनिश्चित किया जाए।

सरकार की प्रभावी नीतियों से उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट में 53% की वृद्धि

यूपी में बढ़ा निवेशकों का भरोसा, एक साल में 309 परियोजनाएं पंजीकृत बेहतर हुई टाउनशिप नीति तो पूंजी निवेश 44 हजार करोड़ से बढ़कर 68 हजार करोड़ तक पहुंचा धार्मिक पर्यटन के विकास से रियल एस्टेट को मिली गति, छोटे शहरों की ओर भी रुख कर रहे हैं निवेशक लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उप्र सरकार द्वारा प्रदेश की टाउनशिप नीति को बेहतर करने का नतीजा यहां रियल एस्टेट के क्षेत्र में अद्वितीय वृद्धि के रूप में देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में प्रदेश के रियल एस्टेट में 68 हजार 328 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है जो 2024 में 44 हजार 526 करोड़ रुपये था। यानी निवेश में 53.5% की प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज हुई है। प्रदेश में बीते एक वर्ष में रिकॉर्ड 309 परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं जो उप्र सरकार की नीतियों के प्रति निवेशकों के भरोसे को दर्शाती हैं। सरकार ने बीते वर्ष टाउनशिप नीति में परिवर्तन करके बिल्डरों के लिए न्यूनतम 25 एकड़ में टाउनशिप बनाने की बाध्यता समाप्त की थी और ये छूट दी गई थी कि वे न्यूनतम 12.5 एकड़ पर टाउनशिप बना सकेंगे। इसके अलावा नई टाउनशिप नीति में आवंटियों के हितों का ध्यान भी रखा गया। 25 एकड़ की टाउनशिप को तीन साल में और इससे ज्यादा की टाउनशिप को अधिकतम 5 साल में पूरा करने के नियम बनाए गए। जबकि पहले की नीतियों के चलते कई परियोजनाएं 8 से 12 साल की अवधि में भी पूरी नहीं हो पाईं और आवंटियों का पैसा फंस गया। टाउनशिप नीति में बदलाव निवेशकों के साथ-साथ आवंटियों के लिए राहत देने वाला सिद्ध हो रहा है। एनसीआर ही नहीं, छोटे शहर भी कर रहे आकर्षित कुछ समय पहले तक एनसीआर यानी नेशनल कैपिटल रीजन उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था, लेकिन वर्ष 2025 के आंकड़े ये बताते हैं अब निवेशकों का रुझान गैर-एनसीआर जिलों और उप्र के छोटे जनपदों की ओर भी बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में पंजीकृत हुई कुल 308 परियोजनाओं में से 122 एनसीआर में और 186 परियोजनाएं गैर-एनसीआर क्षेत्रों में स्वीकृत हुईं हैं। इससे स्पष्ट होता है कि उप्र सरकार द्वारा किए गए बुनियादी ढांचे के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और टियर-2 शहरों के विस्तार का रियल एस्टेट के क्षेत्र में सकारात्मक असर पड़ा है। राजधानी लखनऊ बनी केन्द्र उप्र की राजधानी लखनऊ बीते वर्ष में 67 परियोजनाओं के साथ एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है। वहीं अन्य शहरों की बात करें तो बरेली में 15 और आगरा में 14 परियोजनाएं रजिस्टर्ड हुई हैं। इसके अलावा बुलंदशहर, रामपुर, चंदौली, उन्नाव, गोंडा, मऊ, मिर्जापुर जैसे शहरों तक बिल्डर नए प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रहे हैं। धार्मिक पर्यटन से मिल रहा है विस्तार उत्तर प्रदेश में बढ़ते धार्मिक पर्यटन के चलते भी इन शहरों में रियल एस्टेट निवेश बढ़ा है। श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में साल 2025 में 23 परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं। वहीं श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में 5, बाबा काशी विश्वनाथ के धाम वाराणसी में 9, संगमनगरी प्रयागराज में 7 परियोजनाओं का पंजीकरण हुआ है। उप्र सरकार के प्रयासों से ये शहर बेहतर कनेक्टिविटी, शहरी पुनर्विकास योजनाओं और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि के साथ रियल एस्टेट विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के मजबूत केंद्र के रूप में उभर रहा है उत्तर प्रदेश

ईसीएमएस के तीसरे चरण में उत्तर प्रदेश को मिली अहम हिस्सेदारी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में औद्योगिक निवेश को मिल रही है नई गति डिस्प्ले मॉड्यूल और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से आत्मनिर्भरता की ओर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश त्वरित गति से देश के अग्रणी औद्योगिक प्रदेशों में अपनी पहचान सशक्त बनाता जा रहा है। केंद्र सरकार की “इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस)” के तीसरे चरण के अंतर्गत हाल ही में 22 प्रस्तावों की स्वीकृति में उत्तर प्रदेश का नाम सम्मिलित होना इसी बदले हुए औद्योगिक परिदृश्य की तस्वीर है। ईसीएमएस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 04 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश उन 11 राज्यों में शामिल है जहां इस योजना के अंतर्गत परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र की ओर से 41,863  करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश और 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इसका प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था और युवाओं को भी मिलेगा। योगी सरकार ने पिछले वर्षों में निवेश अनुकूल वातावरण को मजबूती देने का काम किया है। वर्ष 2017 में अधिसूचित “उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति” और “इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग पालिसी 2025” के माध्यम से उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीतने में सफल रहा है। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, पारदर्शी नीतियां और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण उत्तर प्रदेश आज इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई टेक मैन्युफैक्चरिंग के मामले में पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी मोबाइल विनिर्माण केंद्र बन गया है, जो देश के 55% से अधिक स्मार्टफोन और 50-60% मोबाइल कंपोनेंट्स का उत्पादन करता है। ईसीएमएस के अंतर्गत प्रदेश में स्थापित होने वाली इकाइयां इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने में भी विशेष भूमिका निभाएंगी। इन परियोजनाओं के जरिये पीसीबी, डिस्प्ले मॉड्यूल, लीथियम आयन सेल और अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्माण किया जाएगा। इससे न केवल मोबाइल और आईटी हार्डवेयर इंडस्ट्री को दृढ़ता मिलेगी, प्रदेश में हाई वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार भी होगा। योगी सरकार की मंशा है कि उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर भारत में योगदान देने वाला अग्रणी प्रदेश बनाया जाए। इसी सोच को लेकर प्रदेश सरकार ने निवेशकों को हर स्तर पर सहयोग देने का एक इकोसिस्टम बनाया है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश में बड़े राष्ट्रीय और वैश्विक ब्रांड निवेश के लिए आगे आ रहे हैं। ईसीएमएस के तहत जो स्वीकृति मिली है वह इस भरोसे को और मजबूती प्रदान करती है। ईएसडीएम सेक्टर से जुड़ी 200 से अधिक कंपनियां कार्यरत प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम) क्षेत्र से जुड़ी 200 से अधिक कंपनियां कार्यरत हैं। इनमें वीवो, ओप्पो, सैमसंग, लावा, हायर और एलजी जैसी अग्रणी कंपनियों के साथ-साथ होलिटेक, ट्रांसशन, जाह्वा, सनवोडा और सैमक्वांग जैसे कंपोनेंट आपूर्तिकर्ताओं ने भी उत्तर प्रदेश में अपनी इकाइयां स्थापित की हैं।

यूपी में नया आदेश: सीएम योगी ने मकान मालिक और किरायेदारों के लिए आसानियां बढ़ाईं

लखनऊ यूपी में लोगों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसा फैसला लिया है, जिससे मकान मालिक, किरायेदार और पारिवारिक संपत्ति विवादों से जूझ रहे लोग सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे. योगी सरकार ने किराया रजिस्ट्रेशन और पैतृक संपत्ति के बंटवारे से जुड़े नियमों को न सिर्फ सरल बनाया है, बल्कि उन्हें बेहद सस्ता भी कर दिया है. सरकार का दावा है कि इस एक निर्णय से जहां आम लोगों का समय और पैसा बचेगा, वहीं पारदर्शिता बढ़ेगी और लंबे समय से चले आ रहे विवादों में भी कमी आएगी. योगी सरकार ने किराया एग्रीमेंट के रजिस्ट्रेशन को लेकर एक बड़ा सुधार किया है. अब तक मकान मालिक और किरायेदार रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण से बचते रहे हैं, क्योंकि स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क काफी अधिक था. इसी वजह से अधिकतर लोग कच्चे या अनरजिस्टर्ड समझौते पर ही मकान किराये पर दे देते थे, जिससे बाद में विवाद की स्थिति पैदा होती थी. अब योगी सरकार ने स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क में 90 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है. नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग किराया अवधि और वार्षिक किराये की श्रेणियों के अनुसार शुल्क तय किया गया है, जो पहले की तुलना में बेहद कम है. इससे अब आम नागरिक भी बिना किसी झिझक के अपना रेंट एग्रीमेंट पंजीकृत करा सकेगा. मकान मालिक और किरायेदार दोनों को फायदा सरकार के इस फैसले से मकान मालिक और किरायेदार, दोनों को कई स्तर पर राहत मिलेगी. रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट होने से मकान मालिक को यह सुरक्षा मिलेगी कि किरायेदार समय पर किराया देगा और तय अवधि के बाद मकान खाली करेगा. वहीं किरायेदार को भी मनमानी किराया वृद्धि या जबरन मकान खाली कराने जैसी समस्याओं से बचाव मिलेगा. सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कानूनी सुरक्षा मजबूत होगी. साथ ही अवैध और कच्चे समझौतों पर भी रोक लगेगी, जो अक्सर विवाद की जड़ बनते हैं. उत्तर प्रदेश में किराये और संपत्ति से जुड़े विवाद लंबे समय से अदालतों में लंबित रहते हैं. रेंट एग्रीमेंट के रजिस्टर्ड होने से किरायेदार और मकान मालिक के अधिकार और जिम्मेदारियां साफ होंगी, जिससे विवाद की गुंजाइश काफी हद तक कम हो जाएगी. सरकार को उम्मीद है कि इससे अदालतों पर भी बोझ घटेगा. पैतृक संपत्ति के बंटवारे में बड़ी सहूलियत योगी सरकार ने सिर्फ किराया रजिस्ट्रेशन ही नहीं, बल्कि पैतृक संपत्ति के बंटवारे से जुड़े नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है. अब पैतृक संपत्ति के बंटवारे के लिए महंगे खर्च और जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा. नए नियमों के तहत अब पैतृक संपत्ति के बंटवारे की रजिस्ट्री मात्र 10 हजार रुपये में कराई जा सकेगी. इसमें 5,000 रुपये स्टांप ड्यूटी और 5,000 रुपये निबंधन शुल्क शामिल होंगे. पहले इसी प्रक्रिया में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का खर्च आ जाता था, जिसकी वजह से लोग आपसी सहमति से बंटवारा नहीं करा पाते थे. किन संपत्तियों पर लागू होगा नियम यह सुविधा केवल पैतृक अचल संपत्ति पर लागू होगी. इसमें कृषि भूमि, आवासीय संपत्ति और वाणिज्यिक संपत्ति शामिल हैं. सरकार ने स्पष्ट किया है कि संपत्ति का बंटवारा उत्तराधिकार कानून के तहत प्राप्त हिस्से के अनुपात में ही किया जाएगा. यह व्यवस्था तीन पीढ़ियों से अधिक पारंपरिक वंशजों के बीच लागू होगी, जिससे बड़े संयुक्त परिवारों को खासतौर पर फायदा मिलेगा. उत्तर प्रदेश में पारिवारिक संपत्ति विवाद एक बड़ी सामाजिक समस्या रहे हैं. अक्सर जमीन या मकान के बंटवारे को लेकर भाई-भाइयों और रिश्तेदारों के बीच सालों तक मुकदमे चलते रहते हैं. योगी सरकार का मानना है कि बंटवारे की सस्ती और सरल प्रक्रिया से लोग समय रहते कानूनी रूप से संपत्ति का विभाजन करा लेंगे, जिससे विवाद की स्थिति ही पैदा नहीं होगी. योगी सरकार इन सुधारों को ईज ऑफ डूइंग लिविंग की दिशा में एक बड़ा कदम बता रही है. जिस तरह व्यापार और उद्योग के लिए नियम सरल किए गए हैं, उसी तरह अब आम नागरिकों के रोजमर्रा के कानूनी काम भी आसान बनाए जा रहे हैं. सरकार का कहना है कि किराया रजिस्ट्रेशन और पैतृक संपत्ति बंटवारे में पारदर्शिता आने से कानून व्यवस्था भी मजबूत होगी. जब समझौते और बंटवारे कानूनी दायरे में होंगे, तो विवाद और अपराध की संभावनाएं अपने आप कम होंगी.

मुख्यमंत्री ने ‘विकसित भारत-गारण्टी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ अधिनियम-2025 पारित करने के लिए प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार प्रकट किया

मुख्यमंत्री ने विकसित भारत-जी राम जी कानून-2025 के सम्बन्ध में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित किया मुख्यमंत्री ने ‘विकसित भारत-गारण्टी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ अधिनियम-2025 पारित करने के लिए प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार प्रकट किया  इस अधिनियम के माध्यम से ग्रामीण भारत प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत/2047 के विजन के अनुरूप राष्ट्र निर्माण में और अधिक सक्रिय भूमिका का निर्वहन कर सकेगा : मुख्यमंत्री प्रदेश सरकार इस कानून को पूर्ण संवेदनशीलता, पारदर्शिता तथा  प्रभावशीलता के साथ राज्य में लागू कर रोजगार की नयी गारण्टी प्रदान करेगी  राज्य सरकार का संकल्प प्रत्येक पात्र को समय पर काम, प्रत्येक गांव में टिकाऊ परिसम्पत्तियों का निर्माण तथा प्रत्येक श्रमिक को सम्मान, सुरक्षा व खुशहाली प्रदान करना यह अधिनियम भारत के ग्रामीण विकास की दृष्टि से मील का पत्थर  साबित होगा, देश के श्रमिकों, किसानों तथा गांवों के विकास के हित  में उठाये गये इस कदम का स्वागत व समर्थन किया जाना चाहिए वी बी-जी राम जी अधिनियम-2025 रोजगार गारण्टी प्रदान करते हुए  ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा इस अधिनियम में रोजगार गारण्टी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गयी, मानदेय  का साप्ताहिक भुगतान होगा, भुगतान में देरी पर मुआवजे की भी व्यवस्था की गयी किसानों को मजदूरों की कमी दूर करने के लिए राज्यों को बुआई व  कटाई के समय 60 दिन तक कार्य विराम का अधिकार प्रदान किया गया जल संरक्षण की स्थायी व्यवस्था के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, चेकडैम  और उससे जुड़ी अन्य सुविधाओं को गांवों में विकसित किया जा सकता टेक्नोलॉजी को कानूनी अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की गयी, सेटेलाइट  इमेजनरी के माध्यम से स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण की निगरानी की जाएगी कैग के मानकों के अनुरूप प्रत्येक 06 माह में अनिवार्य सोशल ऑडिट, डिजिटल एवं बहुस्तरीय समयबद्ध शिकायत निवारण तथा जिला लोकपाल की व्यवस्था सम्मिलित यह अधिनियम वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ  संघीय संतुलन को बनाये रखने में बेहतर योगदान देगा लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में ग्रामीण क्षेत्र में स्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन के लिए ‘विकसित भारत-गारण्टी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ अधिनियम-2025 पारित किया गया है। प्रदेश सरकार इस कानून को पूर्ण संवेदनशीलता, पारदर्शिता तथा प्रभावशीलता के साथ राज्य में लागू कर रोजगार की नयी गारण्टी प्रदान करेगी। राज्य सरकार का संकल्प प्रत्येक पात्र को समय पर काम, प्रत्येक गांव में टिकाऊ परिसम्पत्तियों का निर्माण तथा प्रत्येक श्रमिक को सम्मान, सुरक्षा व खुशहाली प्रदान करना है। मुख्यमंत्री जी आज यहां विकसित भारत-जी राम जी कानून-2025 के सम्बन्ध में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह अधिनियम भारत के ग्रामीण विकास की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा। देश के श्रमिकों, किसानों तथा गांवों के विकास के हित में उठाये गये इस कदम का स्वागत व समर्थन किया जाना चाहिए। इस अधिनियम के माध्यम से ग्रामीण भारत प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत/2047 के विजन के अनुरूप राष्ट्र निर्माण में और अधिक सक्रिय भूमिका का निर्वहन कर सकेगा। उत्तर प्रदेश को विकसित भारत-जी राम जी से अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अस्थायी और अधूरी सम्पत्तियों का दीर्घकालीन लाभ नहीं होता है। वी बी-जी राम जी अधिनियम-2025 रोजगार गारण्टी प्रदान करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा। यह कार्य विकसित भारत की आधारशिला मजबूत करेगा। विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब राज्य विकसित होंगे। राज्य तब विकसित होंगे, जब हमारी आधारभूत इकाई गांव विकसित होंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, किसान आत्मनिर्भर होगा व श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा व सम्मान मिलेगा। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस अधिनियम में रोजगार गारण्टी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गयी है। मानदेय का साप्ताहिक भुगतान होगा। भुगतान में देरी पर मुआवजे की भी व्यवस्था की गयी है। समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अब कानूनी अधिकार बन चुका है। खेती के मौसम में किसानों को मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्यों को बुआई व कटाई के समय 60 दिन तक कार्य विराम का अधिकार प्रदान किया गया है। उस समय वी बी-जी राम जी के कार्य स्थगित रहेंगे। इसके माध्यम से किसान और मजदूर दोनों के हित सुरक्षित रहेंगे। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ग्राम पंचायतें इस अधिनियम के अन्तर्गत किये जाने वाले कार्यां की चार श्रेणियां निर्धारित कर सकेंगी। अधिनियम के तहत जल संरक्षण की स्थायी व्यवस्था के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, चेकडैम और उससे जुड़ी अन्य सुविधाओं को गांवों में विकसित किया जा सकता है। ग्रामीण बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर के अन्तर्गत सड़क, नाली आदि का विकास किया जा सकता है। गांवों में खेल का मैदान, ओपन जिम, बाजार, दुकानों जैसे आजीविका सम्बन्धी इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा सकता है। प्रतिकूल मौसम की घटनाओं से निपटने तथा आपदा प्रबन्धन की तैयारी हेतु कार्य किये जा सकते हैं। परिणामस्वरूप, बाढ़ प्रबन्धन के लिए किये जाने वाले छोटे-छोटे कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों की शासन पर निर्भरता कम हो जाएगी। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस अधिनियम में टेक्नोलॉजी को कानूनी अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की गयी है। इनमें बायोमैट्रिक उपस्थिति, जियो टैगिंग, रियल टाइम मोबाइल ऐप मॉनीटरिंग, ए0आई0 से निगरानी तथा डिजिटल भुगतान जैसी युक्तियां सम्मिलित हैं। अब हाजिरी भरने की औपचारिकताएं नहीं होंगी, बल्कि बायोमैट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। सेटेलाइट इमेजनरी के माध्यम से स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण की निगरानी की जाएगी। डिजिटल भुगतान के माध्यम से श्रमिकों के खाते में मानदेय की धनराशि भेजी जाएगी।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस अधिनियम में कैग के मानकों के अनुरूप प्रत्येक 06 माह में अनिवार्य सोशल ऑडिट, डिजिटल एवं बहुस्तरीय समयबद्ध शिकायत निवारण तथा जिला लोकपाल की व्यवस्था सम्मिलित है। यह अधिनियम वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ संघीय संतुलन को बनाये रखने में बेहतर योगदान देगा। इसमें केन्द्र व राज्य की साझेदारी 60ः40 की होगी। स्पष्ट वार्षिक बजट के साथ कार्य मांग आधारित रहेगा। राज्यों को अधिक वित्तीय भागीदारी, स्वामित्व व गुणवत्ता सुधार का अधिकार दिया गया है। राज्यों को अब इस अधिनियम के माध्यम से 17,000 करोड़ रुपये अधिक धनराशि प्राप्त हो सकती है।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि … Read more

कानूनी पत्नी होते हुए भी प्रेमी संग विवाह, मासूम बच्चे के जन्म के बाद धरने पर बैठा पीड़ित पति

सहारनपुर यूपी के सहारनपुर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव रामनगर के रहने वाले एक युवक की पत्नी ने उसको तलाक दिए बिना ही प्रेमी से दूसरी शादी कर ली है। उधर, पीड़ित पति ने पुलिस पर पत्नी द्वारा अवैध रूप से की गई शादी को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। पीड़ित बीमारी से भी परेशान है और वह जिलाधिकारी कार्यालय पर धरने पर बैठा है। वहीं, मामले में जिलाधिकारी से कार्रवाई करने की मांग की है।   देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव रामनगर को रहने वाले रवि कुमार का कहना है कि उसकी शादी गांव छिदबना की रहने वाले युवती के साथ 2018 में हुई थी। पत्नी की ओर से अदालत में दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दायर किया था, लेकिन अदालत ने उसके पक्ष में फैसला देते हुए पत्नी को शादी के कर्तव्यों को पूरा करने का आदेश दिया था। आरोप है कि उसकी पत्नी और ससुरालियों ने देहात कोतवाली पुलिस के साथ सांठगांठ कर ली है। वह रसौली की बीमारी से परेशान है। उसके सोने-चांदी के जेवरात, कीमती कपड़े और 50 हजार रुपये की नगदी भी आरोपियों अपने पास रख ली है। तलाक दिए बिना प्रेमी से कर ली शादी आरोप है कि आरोपियों ने एक राय होकर बिना तलाक दिए उसकी पत्नी की शादी अवैध रूप से दूसरे युवक से करा दी, जिससे उसको एक संतान भी पैदा हुई है। इसीलिए आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। पीड़ित का कहना है कि उसके माता-पिता का भी देहांत हो चुका है, वह अकेला ही रहता है। वहीं, मामले में एसएसपी और उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। पीड़ित ने जिलाधिकारी से मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उधर, सीओ मनोज कुमार का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी ने ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत राज्य में अब तक हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की

सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम को बनाएं अनिवार्य: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी ने ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत राज्य में अब तक हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की मुख्यमंत्री ने कहा- सभी विभाग अपनी आवश्यकता के अनुरूप अपना पाठ्यक्रम बनाकर आईगॉट पोर्टल पर करें अपलोड बोले मुख्यमंत्री- विभागों एवं सरकारी संस्थाओं के पाठ्यक्रम में एआई और साइबर सिक्योरिटी को अनिवार्य रूप से करें शामिल मुख्यमंत्री ने कहा- ‘मिशन कर्मयोगी’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिवर्तनकारी पहल है बोले मुख्यमंत्री- सभी ट्रेनिंग सेंटर्स के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग पाठ्यक्रम अवश्य बनाएं सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए सात दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम को अनिवार्य बनाएं- मुख्यमंत्री आईगॉट कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है प्रदेश से 18.8 लाख से अधिक कार्मिक प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं वर्ष 2025 में देश भर में हुई कुल ऑनबोर्डिंग का 93 प्रतिशत है लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को उच्च स्तरीय बैठक में ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत राज्य में अब तक हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में मिशन के क्रियान्वयन, प्रशिक्षण ढांचे, डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्थिति और विभिन्न विभागों में क्षमता संवर्धन से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान ने उत्तर प्रदेश में मिशन के क्रियान्वयन की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ‘मिशन कर्मयोगी’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य वैश्विक दृष्टिकोण के साथ भारतीय संस्कृति के लोकाचार में निहित मूल्यों को आत्मसात करते हुए ऐसे सक्षम मानव संसाधन तैयार करना है, जो प्रदेश और देश के विकास की प्रेरक शक्ति बने। उन्होंने कहा कि यह पहल शासन व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रही है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी को अवगत कराया गया कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत केंद्र में 30 लाख से अधिक सिविल सेवकों, राज्यों में लगभग 2.2 करोड़ कार्मिकों तथा शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 50 लाख कार्मिकों को क्षमता संवर्धन से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस मिशन के माध्यम से देश भर के 790 से अधिक सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाया जा रहा है। सभी सिविल सेवकों के सतत एवं समग्र ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए आईगॉट (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्थापना की गई है। आईगॉट प्लेटफॉर्म आज विश्व का सबसे बड़ा सरकार-प्रेरित क्षमता निर्माण मंच बन चुका है। इस पर अब तक 1.45 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं। प्लेटफॉर्म पर कुल 4,179 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिनमें 840 से अधिक पाठ्यक्रम हिंदी में तथा 15 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में 540 से अधिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। अब तक 6.7 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं, जबकि पाठ्यक्रम पूर्णता दर 70 प्रतिशत से अधिक रही है, जो इस मंच की व्यापक स्वीकृति और प्रभावशीलता को दर्शाती है। आईगॉट ऐप को 50 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। आईगॉट कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश से 18.8 लाख से अधिक कार्मिक प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं, जो वर्ष 2025 में देश भर में हुई कुल ऑनबोर्डिंग का 93 प्रतिशत है। वहीं, प्रदेश के 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं ने कम से कम एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। अब तक उत्तर प्रदेश से 72 लाख से अधिक पाठ्यक्रम पूर्ण किए जा चुके हैं, जो वर्ष 2025 में देश भर में हुई कुल पाठ्यक्रम पूर्णताओं का 99 प्रतिशत है। यह उपलब्धि प्रदेश में सुशासन, दक्ष प्रशासन और नागरिक-केंद्रित सेवा प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी विभाग एवं सरकारी संस्थाएं आवश्यकता अनुरूप अपना पाठ्यक्रम बनाकर भारत सरकार के ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म आईगॉट पोर्टल पर अपलोड करें। उन्होंने यह भी कहा कि सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए सात दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम को अनिवार्य बनाएं। साथ ही इसे उनके प्रमोशन एवं एसीआर से भी जोड़ें।  मुख्यमंत्री ने कहा कि उपाम सहित प्रदेश में संचालित सभी ट्रेनिंग सेंटर्स के लिए समय की आवश्यकता को देखते हुए कैपेसिटी बिल्डिंग पाठ्यक्रम बनाएं, जिससे ट्रेनिंग सेंटर में ही नव प्रशिक्षणार्थियों की कार्यदक्षता को और बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी विभागों एवं सरकारी संस्थाओं के पाठ्यक्रम में एआई और साइबर सिक्योरिटी को अनिवार्य रूप से शामिल करें। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आईगॉट के केस स्टडी प्लेटफॉर्म ‘अमृत ज्ञान कोश’ में विश्व की केस स्टडीज उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश में भी विभिन्न विभागों में अच्छी केस स्टडीज हैं, जिन्हें अमृत ज्ञान कोश पर अपलोड करना चाहिए। उन्होंने नई सोच और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि ज्ञान, कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण के समन्वय से ही जनसेवा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार संभव है। ‘मिशन कर्मयोगी’ इसी लक्ष्य के साथ कार्य संस्कृति को सुदृढ़ करता है और जनभागीदारी की भावना को मजबूती प्रदान करता है, जिससे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की समयबद्ध और प्रभावी पूर्ति सुनिश्चित होती है। मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता, नियमित मूल्यांकन और व्यावहारिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि इसका लाभ शासन की प्रत्येक इकाई तक पहुंचे और जनसेवा के मानकों में निरंतर सुधार हो। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत अभियंताओं को नई डिजाइन एवं नई तकनीकि का ज्ञान प्राप्त हो सके, इसके दृष्टिगत कैपेसिटी बिल्डिंग का पाठ्यक्रम अवश्य बनाएं। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देशित किया कि मिशन कर्मयोगी के तहत एएनएम, आशा कार्यकर्ता, पुलिस कांस्टेबल, पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों से जुड़े फील्ड कर्मियों के लिए व्यवहारिक, कार्य-आधारित और जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाए, ताकि जमीनी स्तर पर सेवाओं की प्रभावशीलता और संवेदनशीलता मजबूत हो।