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ताजमहल पर कुमार विश्वास का तीखा बयान: युवाओं के लिए अयोध्या हो प्राथमिकता

लखनऊ  मशहूर कवि कुमार विश्वास पिछले दिनों अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने ताजमहल, महात्मा गांधी, दिल्ली प्रदूषण समेत तमाम मामलों का जिक्र किया। कुमार विश्वास ने आगरा में स्थित दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल को कब्रिस्तान बताते हुए कहा कि अब युवा उसकी बजाए अयोध्या जा रहे हैं, जोकि एक बड़ा परिवर्तन हुआ है। कार्यक्रम में कुमार विश्वास ने कहा, ''यहां नए साल पर पहली बार ऐसा हो रहा है कि जो आगरा में कब्रिस्तान है, उसे देखने के बजाए युवा ज्यादा संख्या में आगरा की बजाए अयोध्या, वृंदावन में जा रहे हैं। परिवर्तन हो रहा है। बदलने में देर लगेगी और तर्क का उत्तर दिया जा सकता है, कुतर्क का नहीं दिया जा सकता।'' हालांकि, विश्वास ने ताजमहल शब्द का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा ताजमहल ही था। उन्होंने आगे कहा कि जिन्हें लगता है कि सेक्युलर देश है, इसमें इतना राम क्यों, रामनवमी क्यों, धर्मनिरपेक्ष देश है, इसीलिए तो सब चल रहा है। अटल जयंती की पूर्व संध्या पर यूपी की राजधानी लखनऊ में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीएम योगी आदित्यनाथ, ब्रजेश पाठक समेत तमाम नेता मौजूद थे। अयोध्या के राम मंदिर मामले पर बोलते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि यह देश अदभुत है। यहां राम हुए हैं, या नहीं हुए, इस बात पर सुप्रीम कोर्ट में केस 30 साल तक चला। न्याय के देवता को न्याय के मंदिर में ही पुष्टि करवानी पड़ी कि वे वहीं पैदा हुए जहां उनका मंदिर था। अद्भुत देश है। जब आखिरी चरण में मुकदमा था तब उसी दिनों रामनवमी की छुट्टी पड़ गई। सुप्रीम कोर्ट बंद हो गया। हमने मिलॉर्ड से फोन करके पूछा कि जब नहीं हुए थे तो छुट्टी क्यों हुई और अगर छुट्टी हुई है तो हुए ही होंगे।'' दिल्ली पलूशन, महात्मा गांधी पर क्या बोले विश्वास कुमार विश्वास ने कार्यक्रम में दिल्ली में जारी पलूशन पर भी तंज कसा। उन्होंने बताया कि दिल्ली में तीनों सरकारें भाजपा की हैं, जिसके बाद भी अद्भुत हवा उपलब्ध करवाई जा रही। उन्होंने कहा, ''रक्षा मंत्री दिल्ली रहते हैं, हम भी दिल्ली रहते हैं। अब तो तीन तल की सरकार आ गई। नगर पालिका, राज्य और केंद्र में भी आप ही हो। डॉक्टर कह रहे कि एक आदमी बाहर बैठ जाए तो 100 सिगरेट पी लेता है। कितनी अद्भुत हवा उपलब्ध करवाई है।'' वहीं, महात्मा गांधी, सरदार पटेल पर कहा कि (तुम) कांग्रेस तो अपने नानाजी, पापा जी और मम्मी जी में लगे रहे। पटेल बाहर बैठे थे तो वे ले गए। मैं तो कहता हूं कि महात्मा गांधी को भी ले लो। वे आयुर्वेद भी कह रहे, खादी पहन रहे, स्वदेशी कह रहे और गीता भी पढ़ रहे। सारे वे काम कह रहे जो आप कहते हो। वहां कोई पूछ भी नहीं रहा गांधी जी को। उनके पास अपने ही तीन फर्जी गांधी बहुत हैं।''  

प्राकृतिक आंनद के लिए नेचर वॉक ट्रेल और बांस की गोल हट का किया जा रहा है निर्माण

कुकरैल वन क्षेत्र में हो रहा ईको टूरिज्म सुविधाओं का विकास, मिलेगा प्रकृति का आनंद  प्राकृतिक आंनद के लिए नेचर वॉक ट्रेल और बांस की गोल हट का किया जा रहा है निर्माण बच्चों के मनोरंजन के लिए चिल्डेन पार्क, प्ले स्टेशन और ओपन जिम का हो रहा निर्माण  पर्यटकों की सुविधा के लिए वन क्षेत्र में कैफेटेरिया और पार्किंग का जल्द शुरू होगा संचालन    लखनऊ लखनऊ के इंदिरानगर में स्थित कुकरैल वन क्षेत्र में सीएम योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पर्यटन गतिविधियों का विकास किया जा रहा है। कुकरैल वन क्षेत्र में एक ओर वन और पर्यटन विभाग कुकरैल नाइट सफारी का विकास कर रहा है, साथ ही नाइट सफारी के आस-पास के क्षेत्र में यूपी ईको टूरिज्म बोर्ड भी पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विकास कर रहा है। इस क्रम में यूपी ईको टूरिज्म बोर्ड बच्चों के लिए चिल्ड्रेन पार्क, प्ले स्टेशन के साथ बांस की गोल हट, नेचर वॉक ट्रेल, ओपिन जिम और कैफेटेरिया का विकास कर रहा है। साथ ही पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्किंग और शौचालय का भी निर्माण कर रहा है।  यूपी ईको टूरिज्म बोर्ड करा रहा है पर्यटन सुविधाओं का विकास  सीएम योगी के विजन के अनुसार प्रदेश की राजधानी लखनऊ में टूरिज्म की गतिविधियों के विकास के लिए कुकरैल नाइट सफारी का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही यूपी ईको टूरिज्म बोर्ड, कुकरैल वन क्षेत्र में मगरमच्छ, घड़ियाल और कछुआ अभ्यारण्य की सैर करने आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विकास कर रहा है। यूपी ईको टूरिज्म बोर्ड के एडिशनल डारेक्टर पुष्प कुमार ने बताया कि बोर्ड कुकरैल वन क्षेत्र में 2 करोड़ रुपये की लागत से पर्यटन सुविधाओं का विकास कर रहा है। जो कि कुकरैल वन क्षेत्र के अभ्यारण्यों और नाइट सफारी में आने वाले पर्यटकों को सुखद अनुभव प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि इस क्रम में बोर्ड कुकरैल वन क्षेत्र में बच्चों के लिए चिल्ड्रेन पार्क और प्ले स्टेशन का निर्माण कर रहा है। जहां बच्चों के लिए एडवेंचरस गेमस्, झूले और ओपेन जिम भी लगाया जाएगा।  बांस की गोल हट और नेचर वॉक ट्रेल का जल्द पूरा होगा निर्माण  बोर्ड के एडिशनल डायरेक्टर ने बताया कि प्राकृतिक संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पर्यटकों को प्रकृति की आनंद दिलाने के लिए बांस से गोल हट बनाई जा रही हैं। साथ ही नेचर वॉक ट्रेल को भी विकसित किया जा रहा है, जहां पर्यटक कुकरैल नदी के आस-पास के क्षेत्र में पेड़, पौधों, पक्षियों के समीप से प्राकृतिक गतिविधियों का आनंद ले सकेगें। इसके अलावा पर्यटकों की सुविधा के लिए वन क्षेत्र में कैफेटेरिया, शौचालय और पार्किंग का भी निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य शुरू हो चुके हैं, जो जल्द ही पूरे कर लिए जाएंगे। नये साल के शुरूआती महीनों में कुकरैल वन क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों को इन सुविधाओं का लाभ मिलेगा। ये गतिविधियां जहां एक ओर ईको टूरिज्म का विकास करेंगी साथ ही राजस्व और स्थानीय लोगों के रोजगार में भी बढ़ोतरी करेगी।

शीतलहर के बीच योगी सरकार का राहत अभियान जारी, प्रदेश में अब तक 1247 रैन बसेरे स्थापित

प्रदेश में शीतलहर को लेकर योगी सरकार अलर्ट, गरीबों और निराश्रितों के लिए की संवेदनशील पहल शीतलहर के बीच योगी सरकार का राहत अभियान जारी, प्रदेश में अब तक 1247 रैन बसेरे स्थापित सभी जनपदों में सार्वजनिक स्थल पर अलाव के लिए 1.75 करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित समस्त जनपदों को कम्बल खरीद के आदेश जारी, 75 जनपदों ने 1.40 लाख से ज्यादा कम्बल किए वितरित लखनऊ उत्तर प्रदेश में पड़ रही भीषण शीतलहर और घने कोहरे को देखते हुए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने आमजन को राहत पहुंचाने के लिए व्यापक और सुनियोजित व्यवस्थाएं की हैं। प्रदेश के सभी जनपदों में रैन बसेरा, अलाव और कंबल वितरण की व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है, ताकि ठंड से किसी भी नागरिक को असुविधा न हो। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शीतलहर के दौरान कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति ठंड से पीड़ित न रहे। जिला प्रशासन, नगर निकाय और संबंधित विभागों को पूरी संवेदनशीलता के साथ राहत कार्यों को संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। रैन बसेरों की व्यवस्था प्रदेशभर में अब तक 1247 रैन बसेरे स्थापित किए जा चुके हैं। इन रैन बसेरों में 9949 जरूरतमंद लोग अब तक आश्रय ले चुके हैं। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि रैन बसेरों में साफ-सफाई, गर्म पानी, प्रकाश और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कंबल वितरण को प्राथमिकता प्रदेश सरकार द्वारा शीतलहर से बचाव के लिए कंबल वितरण को प्राथमिकता दी गई है। पिछले 03 वर्षों में औसतन 10,65,889 कंबलों की खरीद की गई है। इस पर लगभग 44.38 करोड़ रुपये की औसत धनराशि व्यय हुई है। चालू व्यवस्था के अंतर्गत सभी जनपदों को 17.55 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है। 75 जनपदों द्वारा कंबल खरीद के लिए क्रयादेश जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 75 जनपदों में 3,78,884 कंबलों की आपूर्ति पूर्ण हो चुकी है। अब तक सभी जनपदों द्वारा 1,40,364 कंबलों का वितरण जरूरतमंदों को किया जा चुका है। शेष कंबलों को वितरण किया जा रहा है।  सभी जनपदों में अलाव की समुचित व्यवस्था ठंड से बचाव के लिए सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने की भी व्यापक व्यवस्था की गई है। सभी जनपदों को अलाव जलाने के लिए 1.75 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। जनपदों में प्रतिदिन जलाए जा रहे अलावों की स्थिति की नियमित फीडिंग राहत पोर्टल पर की जा रही है, जिससे शासन स्तर पर सतत निगरानी बनी रहे। कोहरे को लेकर अलर्ट कोहरे के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सरकार द्वारा तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है। राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा सचेत ऐप एवं वेब पोर्टल के माध्यम से अब तक 33.27 करोड़ अलर्ट एसएमएस जारी किए जा चुके हैं। ये संदेश प्रभावित जनपदों के अधिकारियों के साथ-साथ आमजनमानस को भी भेजे गए हैं। इसके अतिरिक्त संबंधित विभागों जैसे यूपीडा, एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी द्वारा जिलाधिकारियों एवं जिला पुलिस को ई-मेल के माध्यम से कोहरे से संबंधित अलर्ट लगातार जारी किए जा रहे हैं।

महिला सशक्तिकरण में यूपी मॉडल देश में नंबर 1, सुरक्षा से स्वावलंबन के क्षेत्र में प्रदेश का लहराया परचम

योगी आदित्यनाथ सरकार में बदला उत्तर प्रदेश का सामाजिक चेहरा, महिलाओं के जीवन में ऐतिहासिक परिवर्तन महिला सशक्तिकरण में यूपी मॉडल देश में नंबर 1, सुरक्षा से स्वावलंबन के क्षेत्र में प्रदेश का लहराया परचम  योगी सरकार में महिलाओं के सपनों को उड़ान, कल्याणकारी योजनाओं से क्रांतिकारी बदलाव  लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा महिलाओं के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं ने देश में सफलता का दमदार यूपी मॉडल प्रस्तुत किया है। महिलाओं की सुरक्षा और विकास अब केवल योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि एक ठोस सामाजिक परिवर्तन का दस्तावेज बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले एक साल में प्रदेश में महिलाओं, किशोरियों और बालिकाओं के जीवन में जो बदलाव आए हैं, वे आंकड़ों में भी दिखते हैं और जमीन पर भी। यह बदलाव सिर्फ सहायता का नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्वावलंबन, सम्मान और अवसर का है।  बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का क्रांतिकारी प्रभाव इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष कुल 13612 गतिविधियों के माध्यम से 25.5 लाख महिलाओं तथा बालिकाओं को जागरूक किया गया है। इसका उद्देश्य बालिकाओं के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना, लिंग-चयन की प्रक्रिया को समाप्त कर बालिकाओं को सुरक्षित करना और बाल लिंग अनुपात में सुधार लाना है। इस योजना ने शिक्षा के माध्यम से बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उनकी उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बालिकाओं से जुड़े विषयों यथा सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य आदि के संबंध में जागरूकता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।  मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से प्रभावी बदलाव कन्या सुमंगला योजना योगी सरकार की सबसे प्रभावशाली सामाजिक योजनाओं में शामिल हो चुकी है। इस वर्ष योजना के अंतर्गत 130.03 करोड़ रुपये की धनराशि से 3.28 लाख कन्याओं को लाभान्वित किया गया। जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक छह चरणों में मिलने वाली सहायता ने बेटियों के प्रति सामाजिक सोच को बदला और बालिका शिक्षा को नई मजबूती दी।  निराश्रित महिलाओं के लिए आर्थिक संबल निराश्रित महिला पेंशन योजना के तहत 38.58 लाख महिलाओं को नियमित मासिक सहायता दी जा रही है। इस वर्ष योजना पर लगभग 1200 करोड़ रुपये रुपये खर्च हुए हैं। अभी हाल ही में पेश हुए अनुपूरक बजट में भी इस योजना के लिए लगभग 535 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। योगी आदित्यनाथ सरकार की इस योजना से विधवा, परित्यक्ता और असहाय महिलाओं को सम्मानजनक जीवन का आधार मिला। पारदर्शी चयन प्रक्रिया और डीबीटी व्यवस्था ने यह सुनिश्चित किया कि लाभ सीधे वास्तविक पात्रों तक पहुंचे। रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष के अंतर्गत इस साल 3519 पीड़िताओं को लगभग 116.36 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति धनराशि प्रदान की गई।  मिशन शक्ति से महिलाओं को मिला सुरक्षा कवच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा, सशक्तिकरण और सम्मान के उद्देश्य से चलाई जा रही मिशन शक्ति अपने पांचवे चरण में है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मिशनशक्ति अभियान के अंतर्गत लगभग 9 करोड लोगों तक पहुंचकर उन्हें प्रदेश में महिलाओं तथा बच्चों हेतु संचालित कल्याणकारी योजनाओं, सुविधाओं तथा कानूनों के बारे में संवेदनशील करने का प्रयास किया गया है। मिशन शक्ति के अंतर्गत प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग, गृहविभाग सहित 28 विभागों, समाज सेवी संस्थाओं तथा शैक्षणिक सस्थानों द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन तथा जनसामान्य के मध्य दूरी को कम करने तथा महिलाओं को खुलकर अपनी समस्यायें व सुझाव रखने हेतु “हक की बात जिलाधिकारी के साथ’’ और "स्वावलंबन कैम्प’’ का आयोजन सफलतापूर्वक हो रहा है।  महिलाओं को मिल रहा है त्वरित न्याय हिंसा पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सा, कानूनी परामर्श और पुलिस सहायता प्रदान करने के लिए प्रदेश में 75 से अधिक वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं। इस साल 24671 महिलाएं इन केंद्रों से सहायता प्राप्त कर चुकी हैं। यह व्यवस्था महिला सुरक्षा के मामले में योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का सफलतम उदाहरण है। 181 महिला हेल्पलाइन अब प्रदेश की महिलाओं के लिए भरोसेमंद सुरक्षा कवच बन चुकी है। 24 घंटे संचालित इस सेवा के माध्यम से आपात स्थिति में त्वरित सहायता दी जा रही है। घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और आपात सहायता से जुड़े मामलों में इस साल 56507 महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वुमेन के अंतर्गत महिलाओं, किशोरियों और बालिकाओं को उनके लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक किया जा रहा है। कामकाजी और निराश्रित महिलाओं को सुरक्षित आश्रय निराश्रित, परित्यक्त और कामकाजी महिलाओं के सुरक्षित आवास में भी योगी आदित्यनाथ सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। माता अहिल्याबाई होल्कर श्रमजीवी महिला हॉस्टल योजना के तहत 7 जनपदों नें 500-500 क्षमता के हॉस्टल बनाए जा रहे हैं। श्रमजीवी महिला छात्रावास के अंतर्गत लखनऊ, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में 8 कामकाजी महिला छात्रावास का निर्माण हो रहा है। प्रदेश के 8 जनपदों में राजकीय महिला शरणालय चल रहे हैं। मथुरा में निराश्रित महिलाओं के लिए 1000 की क्षमता वाला कृष्ण कुटीर चल रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार इसी तरह प्रदेश में 14 शक्ति सदन और 13 सखी निवास के माध्यम से महिलाओं को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध करा रही है।

योगी मॉडल का असर: भूमि से उद्योग तक यूपी बना निवेशकों की पहली पसंद

भूमि से उद्योग तक: यूपी टॉप, योगी के विजन पर निवेशकों का भरोसा मजबूत औद्योगिक भूमि के प्रभावी उपयोग में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में 33,327 हेक्टेयर भूमि पर संचालित हैं 286 औद्योगिक पार्क यूपी बना भरोसेमंद परिणाम देने वाला औद्योगिक गंतव्य लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने देश के औद्योगिक मानचित्र पर मजबूती के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। इसकी ठोस झलक औद्योगिक भूमि के उपयोग के आंकड़ों में दिखाई देती है। जहां देश के कई प्रमुख राज्यों में औद्योगिक पार्कों की बड़े क्षेत्रफल में भूमि आज भी निष्क्रिय पड़ी है, वहीं उत्तर प्रदेश में उपलब्ध कराई गई औद्योगिक भूमि का अधिकांश हिस्सा उद्योगों के लिए उपयोग हो चुका है। प्रदेश में अब तक 286 औद्योगिक पार्क विकसित किए जा चुके हैं। इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों की सक्रियता यह स्पष्ट करती है कि निवेश प्रस्ताव केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहे। यही कारण है कि देश और विदेश के निवेशक उत्तर प्रदेश को एक भरोसेमंद और परिणाम देने वाले औद्योगिक गंतव्य के रूप में देख रहे हैं। उद्योग जगत के विशेषज्ञ एसके आहूजा का कहना है कि उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में देश के बड़े औद्योगिक पावरहाउस के रूप में उभर रहा है। उत्तर प्रदेश में 286  विकसित औद्योगिक पार्कों का कुल क्षेत्रफल 33,327 हेक्टेयर है। इनमें लगभग पूरी औद्योगिक भूमि पर उद्योग या तो स्थापित हो चुके हैं या स्थापना की प्रक्रिया में हैं। इससे जहाँ उत्पादन गतिविधियों को बल मिल रहा है और वहीँ बड़ी संख्या में रोजगार के अवसरों का भी सृजन हो रहा है। यदि देश के अन्य राज्यों की स्थिति पर दृष्टिपात किया जाए तो अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। जैसे कि तेलंगाना में 157 औद्योगिक पार्कों में 30,749  हेक्टेयर भूमि आज भी निवेश के लिए उपलब्ध है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने औद्योगिक नीति को स्पष्ट दिशा प्रदान करने का काम किया है। सरकार का फोकस केवल भूमि आवंटन पर ही नहीं वरन उद्योगों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण देने पर भी रहा है। कानून-व्यवस्था में सुधार, प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण और बुनियादी ढांचे का तेज विस्तार इस नीति के मुख्य स्तंभ बने। एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट और बेहतर कनेक्टिविटी ने उद्योगों के संचालन को आसान बनाया जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है। प्रदेश भर में संतुलित औद्योगिक विस्तार एक जनपद, एक उत्पाद (ओडीओपी), डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, मेडिकल डिवाइस पार्क, फार्मा पार्क और टेक्सटाइल हब जैसी योजनाओं ने औद्योगिक विकास को केवल कुछ शहरों तक सीमित नहीं रहने दिया। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी उद्योग स्थापित हुए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और क्षेत्रीय असमानता में कमी आई है। राष्ट्रीय औद्योगिक परिदृश्य में उत्तर प्रदेश आज ठोस परिणामों के साथ अग्रणी प्रदेश के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। प्लग एंड प्ले मॉडल पर जोर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार अब उद्योगों को गति देने के लिए ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल पर विशेष जोर दे रही है। इसके अंतर्गत निवेशकों को पहले दिन से ही तैयार अवसंरचना मिलेगी। यही मॉडल उत्तर प्रदेश को औद्योगिक मामले में अन्य राज्यों से आगे लेकर जाएगी।

किशोरों के लिए सख्त फैसले: बागपत खाप पंचायत ने स्मार्टफोन और हाफ‑पैंट पर रोक लगाई

बागपत यूपी के बागपत जिले की खाप पंचायत ने किशोरों के लिए स्मार्टफोन और लड़कों‑लड़कियों दोनों के लिए हाफ‑पैंट पर पाबंदी लगाने का फैसला किया है। पंचायत ने इसे पश्चिमी प्रभावऔर सांस्कृतिक मूल्यों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। साथ ही, पंचायत ने शादियों के लिए भी नई गाइडलाइन लागू की हैं। पंचायत की गाइडलाइन के मुताबिक विवाह समारोह केवल गांव या घर में आयोजित होंगे, मैरिज हॉल में नहीं। इसके अलावा अतिथि सूची सीमित होगी और खर्च नियंत्रित रखा जाएगा। अब शादी के निमंत्रण व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जाएंगे। वहीं, 18 से 20 साल से कम उम्र के किशोरों के लिए स्मार्टफोन का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए हाफ‑पैंट पर रोक होगी। पंचायत का कहना है कि यह कदम पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देने और अवांछित प्रथाओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। लड़कियों को मोबाइल देने से पड़ सकती हैं गलत आदतें खाप सदस्य चौधरी ब्रजपाल सिंह ने कहा, "समाज का निर्णय सर्वोपरि है। राजस्थान में लिए गए फैसले की हम भी सराहना करते हैं। बच्चों को परिवार और बुजुर्गों के साथ बैठकर उचित शिक्षा और सामाजिक मार्गदर्शन मिलना चाहिए। 18-20 साल के लड़कों को फोन की ज़रूरत नहीं है। इस फैसले को बढ़ावा देने के लिए गांवों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।" वहीं, दगड़ खाप के चौधरी ओमपाल सिंह ने कहा, "लड़कियों को मोबाइल देने से गलत आदतें पड़ सकती हैं। यही नियम लड़कों पर भी लागू होगा। फोन केवल घर में ही रखा जाना चाहिए।" पूरे प्रदेश में फैसला लागू करने चलेगा अभियान स्थानीय निवासी नरेश पाल ने कहा, “यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। स्कूल में मोबाइल अलग है, घर पर इसे नियंत्रित करना जरूरी है। यह फैसला समय पर और उचित है।” पंचायत ने यह निर्णय पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करने और अन्य खापों के साथ समन्वय कर राज्यव्यापी अभियान चलाने का भी फैसला किया है। इस कदम के माध्यम से पंचायत पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक अनुशासन को बढ़ावा देने की योजना बना रही है।

नोएडा केस: चचेरे भाई पर गंभीर आरोप, युवती की तबीयत बिगड़ने से हुई मौत

 नोएडा उत्तर प्रदेश के नोएडा से रिश्तों को शर्मसार करने वाला संवेदनशील मामला सामने आया है. यहां चचेरे भाई से शारीरिक संबंध बनने के बाद 18 साल की लड़की प्रेग्नेंट हो गई. इसके बाद उसे गर्भपात की दवा खिला दी गई, जिससे तबीयत बिगड़ने के बाद उसकी मौत हो गई. लड़की ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया. सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. परिजनों का आरोप है कि लड़की को जबरन गर्भपात की दवा खिलाई गई, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई और इलाज के दौरान उसकी जान चली गई. इस मामले को लेकर मृतका के पिता ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज करवाया है. परिवार के द्वारा पुलिस से की गई शिकायत में कहा गया है कि लड़की के अपने चचेरे भाई से शारीरिक संबंध थे, जिसके बाद वह गर्भवती हो गई थी. आरोप है कि उसके चेचेरे भाई ने गर्भ छिपाने के लिए युवती को गर्भपात की दवा खिला दी. दवा खाने के बाद युवती की तबीयत अचानक खराब हो गई. इस दौरान लड़की के परिजनों ने 18 दिसंबर को लड़की को नोएडा के अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसकी नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक इलाज के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया. वहां कई दिनों तक चले इलाज के बावजूद 23 दिसंबर को लड़की की मौत हो गई. इस पूरे मामले को लेकर मृतका के पिता ने थाना सेक्टर-39 में लिखित शिकायत दी. शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी चचेरे भाई के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मामले की और गहनता से जांच की जा रही है और जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

माघ मेला : मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश, मुख्य स्नान पर्वों पर कोई वीआईपी प्रोटोकॉल नहीं

माघ मेला केवल आयोजन नहीं, सनातन परंपरा और प्रशासनिक दक्षता का जीवंत प्रतीक: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश, मुख्य स्नान पर्वों पर कोई वीआईपी प्रोटोकॉल नहीं 31 दिसम्बर तक सारी तैयारियां पूरी कर लें, संबंधित प्रमुख सचिव/सचिव और एडीजी एलओ 31 दिसम्बर को मौके पर जाकर करें समीक्षा: मुख्यमंत्री 44 दिनों तक चलेगा माघ मेला-2026, 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना इस वर्ष मेला क्षेत्र 800 हेक्टेयर तक विस्तारित, घाटों की लंबाई में 50% वृद्धि अब तक 4599 संस्थाओं को भूमि  आवंटन पूरा एआई आधारित सर्विलांस और रीयल टाइम मॉनिटरिंग से होगा भीड़ व सुरक्षा प्रबंधन माघ मेला-2026 में पहली बार ऐप आधारित बाइक टैक्सी, क्यूआर कोड और हाई-टेक नवाचार स्वच्छता पर विशेष फोकस: सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध, 16,650 शौचालय, 3300 सफाई मित्र 24×7 होंगे तैनात अफवाह फैलाने वालों पर हो सख्ती, ट्रैफिक और क्राउड मैनेजमेंट के लिए बनाएं बहुस्तरीय योजना: मुख्यमंत्री माघ मेला बनेगा ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज मॉडल, नदियों की पवित्रता सर्वोपरि 19वीं-20वीं शताब्दी के माघ मेलों के लोक अभिलेख और दुर्लभ पांडुलिपियां बनेंगी आकर्षण नाविकों से संवाद, खान-पान और सेवाओं के शुल्क नियंत्रण के निर्देश लखनऊ मां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर प्रयागराज में आयोजित होने वाले माघ मेला-2026 की तैयारियों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि माघ मेला केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, सामाजिक अनुशासन और प्रशासनिक दक्षता का सजीव उदाहरण है। उन्होंने निर्देश दिए कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित वातावरण मिले, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संगम पर कल्पवास, स्नान और साधना की परंपरा भारतीय सांस्कृतिक चेतना की आत्मा है। इस वर्ष 15 से 25 लाख श्रद्धालु केवल कल्पवासी होंगे। महाकुम्भ के सुव्यवस्थित आयोजन के बाद माघ मेला-2026 को लेकर देश और दुनिया में विशेष उत्साह है। यह मेला समाज को संयम, समरसता और सेवा का संदेश देता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि व्यवस्थाओं में आध्यात्मिक गरिमा बनी रहे, लेकिन किसी भी स्तर पर अव्यवस्था या असुविधा न हो। उन्होंने गृह विभाग को निर्देश दिए कि प्रमुख स्नान पर्वों पर किसी तरह का वीआईपी प्रोटोकॉल न दिया जाए, इन संबंध में आवश्यक सूचना जारी कर दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि माघ मेले से जुड़े सभी विभागों के प्रमुख सचिव/सचिव स्तर के अधिकारी और अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था स्वयं मेला क्षेत्र जाकर तैयारियों की समीक्षा करें। 31 दिसम्बर तक सारी तैयारी पूरी कर ली जाए। बैठक में मंडलायुक्त प्रयागराज ने बताया कि माघ मेला-2026 का आयोजन 3 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक कुल 44 दिनों तक होगा। इस दौरान पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख स्नान पर्व पड़ेंगे। पूरे मेला काल में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, जबकि मौनी अमावस्या जैसे प्रमुख पर्व पर एक ही दिन में साढ़े तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के संगम स्नान की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाएं उसी अनुरूप की जा रही हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि मेला क्षेत्र का विस्तार बढ़ाकर लगभग 800 हेक्टेयर किया गया है। सेक्टरों की संख्या 5 से बढ़ाकर 7 कर दी गई है। स्नान घाटों की कुल लंबाई में पिछले माघ मेले की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 42 पार्किंग स्थल, 9 पांटून पुल, बेहतर आंतरिक सड़क व्यवस्था और सुगम आवागमन की विस्तृत कार्ययोजना पर काम अंतिम चरण में है। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने ट्रैफिक एवं क्राउड मैनेजमेंट के लिए ठोस और बहुस्तरीय कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। पुलिस आयुक्त, प्रयागराज कमिश्नरेट ने बताया कि मेला अवधि के लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। लगभग 450 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनमें से 250 कैमरे स्थापित किए जा चुके हैं। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी तैनात की जाएंगी। मेला क्षेत्र में एआई आधारित सर्विलांस एवं क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पुलिसकार्मिकों के बेहतर व्यवहार और श्रद्धालु-संवेदनशील दृष्टिकोण के लिए आवश्यक प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेट्स के सहयोग को भी व्यवस्थाओं में शामिल करने को कहा। साथ ही नाविकों के साथ संवाद और समन्वय बनाए रखने तथा श्रद्धालुओं के लिए खान-पान एवं विभिन्न सेवाओं के शुल्क को नियंत्रित रखने के निर्देश भी दिए। नवाचारों पर विशेष बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि माघ मेला-2026 को सुविधाओं और तकनीक के स्तर पर एक नया मानक बनना चाहिए। बैठक में बताया गया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऐप आधारित बाइक टैक्सी सेवा, दिशा सूचक संकेतों का व्यापक विस्तार, विद्युत पोलों पर क्यूआर कोड आधारित पहचान प्रणाली, निर्बाध विद्युत आपूर्ति हेतु रिंग मेन यूनिट, कटाव रोकने के लिए जियो-ट्यूब तकनीक तथा पूर्वनिर्मित सीवेज शोधन संयंत्र जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ये सभी नवाचार ज़मीनी स्तर पर प्रभावी रूप से दिखाई देने चाहिए। मुख्यमंत्री ने सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रतिबंध पर जोर देते हुए कहा कि माघ मेला स्वच्छता का उदाहरण बने। बैठक में जानकारी दी गई कि मेला क्षेत्र में कुल 16,650 शौचालयों की स्थापना की जा रही है, जिनमें महिलाओं के लिए पृथक और पर्याप्त सुविधाएं शामिल हैं। लगभग 3300 सफाई मित्रों की 24 घंटे तैनाती की जाएगी। उनके लिए सैनीटेशन कॉलोनी, बच्चों हेतु आंगनबाड़ी और प्राथमिक विद्यालय जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि मेले में कार्यरत स्वच्छताकर्मियों के मानदेय का भुगतान प्रत्येक दशा में 15 दिवस के भीतर कर दिया जाए। नगर विकास विभाग को मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मेला क्षेत्र में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे गंगा-यमुना की पवित्रता अक्षुण्ण बनी रहे। स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में बताया गया कि मेला क्षेत्र में 20-20 बेड के दो अस्पताल, 12 प्राथमिक उपचार केंद्र, 50 एंबुलेंस तथा आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सा इकाइयां स्थापित की जा रही हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति … Read more

उन्नाव रेप केस: सजा निलंबन पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBI, दिल्ली HC के फैसले पर सवाल

उन्नाव उन्नाव रेप कांड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की है, जिसमें हाईकोर्ट ने दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करते हुए उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. इंडिया टुडे को CBI की यह याचिका हाथ लगी है, जिसमें हाईकोर्ट के फैसले को कानून के विपरीत, त्रुटिपूर्ण और पीड़िता की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया है. CBI ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित करते समय कानून की मंशा और POCSO एक्ट के उद्देश्य को पूरी तरह नजरअंदाज किया. एजेंसी के मुताबिक, हाईकोर्ट यह समझने में विफल रहा कि एक मौजूदा विधायक होने के नाते सेंगर सार्वजनिक विश्वास और सत्ता के पद पर था, जिससे उसकी जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है. 'सिटिंग MLA होने के नाते सेंगर पर जनता का भरोसा' CBI ने दलील दी है कि एक सिटिंग विधायक सार्वजनिक सेवक (Public Servant) होता है और उसे अपने पद की वजह से भरोसा और अधिकार प्राप्त होता है. ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया कदाचार सिर्फ व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक भरोसे का उल्लंघन है. एजेंसी ने कहा कि हाईकोर्ट को POCSO एक्ट की व्याख्या करते हुए उद्देश्यपरक नजरिया अपनाना चाहिए था, जो कानून की मूल भावना को आगे बढ़ाता. 'POCSO और भ्रष्टाचार निवारण कानून की साझा मंशा' CBI ने अपनी याचिका में यह भी स्पष्ट किया कि POCSO एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम दोनों की विधायी मंशा एक जैसी है. दोनों कानूनों का उद्देश्य सत्ता, पद और अधिकार रखने वाले लोगों को उनके कदाचार के लिए जवाबदेह ठहराना है. ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराते समय 'लोक सेवक' की जो परिभाषा अपनाई थी, वो भ्रष्टाचार निवारण कानून से ली गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने नजरअंदाज कर दिया. हाईकोर्ट का आदेश 'विकृत और कानून के विपरीत' CBI ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश पूरी तरह विकृत और कानून के खिलाफ है. एजेंसी के मुताबिक, हाईकोर्ट यह समझने में नाकाम रहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति जनता और समाज के प्रति विशेष जिम्मेदारी रखता है. एक सिटिंग विधायक के पास मतदाताओं पर प्रभाव और अधिकार होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 'सेंगर प्रभावशाली, पैसे और बाहुबल का इस्तेमाल कर सकता है' CBI ने याचिका में यह भी कहा कि कुलदीप सिंह सेंगर बेहद प्रभावशाली व्यक्ति है और उसके पास पैसे और बाहुबल दोनों की ताकत है. अगर उसे जेल से रिहा किया जाता है तो पीड़िता और उसके परिवार की जान और सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है. एजेंसी के अनुसार, इस मामले में सुरक्षा जोखिम को हाईकोर्ट ने पर्याप्त महत्व नहीं दिया. 'दोष सिद्धि के बाद जेल नियम, जमानत अपवाद' CBI ने सुप्रीम कोर्ट को याद दिलाया कि दोष सिद्धि के बाद जेल ही सामान्य नियम होता है और जमानत या सजा निलंबन अपवाद. एजेंसी के मुताबिक, हाईकोर्ट ने इस स्थापित कानूनी सिद्धांत को भी दरकिनार किया, जबकि मामला POCSO जैसे गंभीर कानून के तहत दोष सिद्धि से जुड़ा हुआ है. POCSO एक्ट का उद्देश्य सिर्फ सजा नहीं, सुरक्षा भी CBI ने अपनी याचिका में POCSO एक्ट के उद्देश्य पर जोर दिया और कहा कि यह कानून सिर्फ बच्चों के संवैधानिक अधिकारों की मान्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें यौन शोषण और उत्पीड़न से वास्तविक सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है. कानून की धाराएं साफ तौर पर उन सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को दंडित करने के लिए हैं, जो अपनी सत्ता, स्थिति या प्रभाव का दुरुपयोग कर बच्चों का शोषण करते हैं. क्या है पूरा मामला उन्नाव रेप कांड में कुलदीप सिंह सेंगर को दिसंबर 2019 में 25 लाख रुपये के जुर्माने के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने यह फैसला दिया था. सेंगर ने जनवरी 2020 में दिल्ली हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी. इसके बाद मार्च 2022 में उसने सजा निलंबन के लिए अलग से याचिका दाखिल की. 23 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की सजा निलंबित करते हुए उसकी अपील के लंबित रहने तक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. हालांकि, फिलहाल वो जेल में ही है क्योंकि पीड़िता के पिता की हत्या के एक अन्य CBI मामले में उसे 10 साल के कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है. सुप्रीम कोर्ट में पहले से चुनौती इस बीच, दिल्ली की दो महिला वकीलों ने भी दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहले ही विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर रखी है. अब CBI की याचिका के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चर्चा में आ गया.

SIR डेट बरकरार, यूपी में बड़ा एक्शन तय; 2.89 करोड़ नाम हटेंगे, 1.11 करोड़ मतदाताओं को नोटिस

लखनऊ  यूपी में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) की तारीख शुक्रवार को खत्म हो गई। पहले दो बार एसआईआर की तारीख बढ़ाई जा चुकी है लेकिन तीसरी बार इसे नहीं बढ़ाया गया। अब गणना प्रपत्र भरकर जमा करने का कार्य पूर्ण हो गया है। अभी मतदाता सूची में 15.44 करोड़ नाम हैं और इसमें से अब 2.89 करोड़ नाम काटे जाएंगे। वहीं 1.11 करोड़ वोटरों को नोटिस भेजा जाएगा।   जिन 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जाएंगे, उनमें 1.26 करोड़ स्थानांतरित, 46 लाख मृत, 23.70 लाख डुप्लीकेट, 83.73 लाख अनुपस्थित व 9.57 लाख अन्य श्रेणी के मतदाता हैं। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि 31 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी। ड्राफ्ट मतदाता सूची पर 31 दिसंबर से 30 जनवरी 2026 तक दावे व आपत्तियां ली जाएंगी। वहीं 31 दिसंबर से ही लेकर 21 फरवरी 2026 तक नोटिस चरण में गणना प्रपत्रों पर निर्णय और दावों एवं आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। फिर 28 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी। बीते 11 दिसंबर को एसआईआर की तारीख दूसरी बार दो हफ्ते बढ़ाकर 26 दिसंबर कर दी गई थी। चुनाव आयोग ने दो हफ्तों में उन मतदाताओं को ढंढ़ने का कार्य किया जो स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट, अनुपस्थित व अन्य श्रेणी में शामिल थे। सभी जिलों में बूथ लेवल आफिसर (बीएलओ) के साथ-साथ राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) को बूथवार ऐसे मतदाताओं की सूची सौंपकर घर-घर जाकर फिर से सत्यापन कराया गया, जिससे कहीं कोई गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। शुक्रवार को दो हफ्ते का समय भी समाप्त हो गया और तीसरी बार एसआईआर की तारीख चुनाव आयोग ने बढ़ाना उचित नहीं समझा। 11 दिसंबर को कटने वाले मतदाताओं की संख्या 2.96 करोड़ थी, जिसमें से करीब सात लाख मतदाताओं को तलाश लिया गया। ऐसे में अब ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर आगे की प्रक्रिया यथावत की जाएगी। मैंपिंग का कार्य भी पूरा कर लिया गया यही नहीं वर्ष 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान मतदाता सूची की मैपिंग का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान मतदाता सूची में शामिल करीब 91 प्रतिशत लोगों का मिलान कर लिया गया है। ऐसे मतदाताओं का खुद उनके नाम से, माता-पिता, दादा-दादी या फिर नाना-नानी के नाम से मिलान किया गया है। अब मात्र नौ प्रतिशत लोगों को ही चुनाव आयोग की ओर से नोटिस भेजी जाएगी। करीब 1.11 करोड़ लोगों के घर चुनाव आयोग की ओर से नोटिस भेजी जाएगी। जिन्हें मतदाता होने की पहचान के रूप में दस्तावेज आयोग को देना होगा। फिलहाल शुद्ध मतदाता सूची के प्रकाशन को लेकर सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। सभी जिलों के डीएम को आदेश दिए गए हैं कि वह ड्राफ्ट मतदाता सूची पूरी सावधानी के साथ जारी करें। आगे दावे व आपत्तियों के निस्तारण में भी पूरी पारदर्शिता बरती जाए। नए मतदाताओं का नाम जोड़ने का काम तेज यूपी में अभी तक करीब 11 लाख से अधिक लोग मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए फॉर्म भर चुके हैं। एक जनवरी 2026 को जिन युवाओं की आयु 18 वर्ष पूरी हो रही है वह भी फॉर्म भर सकते हैं। नए मतदाता को फॉर्म-6 भरवाया जा रहा है। यही नहीं सभी बीएलओ को पर्याप्त संख्या में फॉर्म-6 छपावाकर देने के निर्देश मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से सभी डीएम को दिए गए हैं। फॉर्म के साथ घोषणा पत्र भी भरवाया जा रहा है।