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यात्रियों को बड़ी राहत: यूपी रोडवेज में मोबाइल ऐप से सीट बुकिंग शुरू, बस की लाइव लोकेशन भी मिलेगी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश रोडवेज बस अड्डों पर बस का इंतजार कर रहे यात्रियों को अब बार-बार जानकारी लेने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने मोबाइल ऐप के माध्यम से बसों की सीट बुकिंग और लाइव लोकेशन की सुविधा शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली है। रेलवे की तर्ज पर अब यात्री यात्रा से पहले ही अपनी पसंद की सीट आरक्षित कर सकेंगे। इसके साथ ही बस की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी मोबाइल पर ही उपलब्ध होगी। मोबाइल ऐप्स से सीट बुकिंग, लाइव ट्रैकिंग यात्री यूपीएसआरटीसी, यूपी राही और मार्गदर्शी जैसे आधिकारिक मोबाइल ऐप्स के जरिए सीट बुकिंग के साथ-साथ बस की लाइव ट्रैकिंग कर सकेंगे। इसके लिए निगम की बसों में जीपीएस सिस्टम लगाया जा रहा है। जीपीएस के जरिए प्रत्येक बस की सटीक लोकेशन यात्रियों को उनके स्मार्टफोन पर दिखाई देगी।   मोबाइल ऐप के माध्यम से यह भी पता चल सकेगा मोबाइल ऐप के माध्यम से यह भी पता चल सकेगा कि कौन-सी बस किस समय नजदीकी बस स्टैंड पर पहुंचेगी या पहुंच चुकी है। इससे यात्रियों को लंबे समय तक बस अड्डे पर खड़े रहकर इंतजार करने की परेशानी से राहत मिलेगी। यह सुविधा खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। सभी प्रमुख मार्गों पर सुविधा शुरू की जाएगी नई व्यवस्था लागू होने के बाद रोडवेज की सेवाएं और अधिक आधुनिक व सुविधाजनक हो जाएंगी। जल्द ही जिले के सभी प्रमुख मार्गों पर चलने वाली बसों को इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा यात्री इसका लाभ उठा सकें। रायबरेली के क्षेत्रीय प्रबंधक आर.के. त्रिपाठी ने बताया कि डिजिटल व्यवस्था से बस संचालन में पारदर्शिता आएगी और समय पालन में भी सुधार होगा। यात्री घर बैठे मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सीट बुक कर सकेंगे और यात्रा से पहले ही बस की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर पाएंगे। उम्मीद है कि यह सुविधा फरवरी से शुरू हो जाएगी। 

सांसद खेल महोत्सव में अव्यवस्था, पुरस्कार वितरण के वक्त बढ़ा तनाव, पुलिस ने संभाली स्थिति

फिरोजाबाद  उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले स्थित दाऊदयाल स्टेडियम में आयोजित सांसद खेल प्रतियोगिता के दूसरे व अंतिम दिन शनिवार शाम करीब छह बजे पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान हंगामा हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कार्यक्रम को बीच में ही रोकना पड़ा, जिससे कई खिलाड़ियों को पुरस्कार नहीं मिल सके। नाराज खिलाड़ियों ने स्टेडियम का मुख्य गेट बंद कर नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने खिलाड़ियों को समझा-बुझाकर करीब दो घंटे बाद स्थिति को नियंत्रित किया। खिलाड़ियों ने नारेबाजी करते हुए विरोध किया शनिवार को कुश्ती, कबड्डी, फुटबॉल और जूडो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। जूनियर, सीनियर और सब-जूनियर वर्ग में महिला एवं पुरुष वर्ग की स्पर्धाओं में कई स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता संपन्न होने के बाद जिला क्रीड़ा अधिकारी मुकेश कुमार की देखरेख में पुरस्कार वितरण शुरू हुआ, लेकिन कुछ ही खिलाड़ियों को पुरस्कार दिए जा सके थे कि तभी कुछ खिलाड़ियों ने नारेबाजी करते हुए विरोध शुरू कर दिया। क्या है खिलाड़ियों का आरोप? खिलाड़ियों का आरोप था कि विजेता टीम के सभी सदस्यों को पुरस्कार नहीं दिए जा रहे हैं। साथ ही पुरस्कार के रूप में दिए जा रहे ट्रैकसूट, लोअर और टी-शर्ट की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए। खिलाड़ियों ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी नाराजगी जताई। इन्हीं मुद्दों को लेकर हंगामा बढ़ गया और पुरस्कार वितरण समारोह रोकना पड़ा।  क्या कहना है अधिकारियों का? वहीं, इस मामले को लेकर जिला क्रीड़ा अधिकारी ने बताया कि प्रतियोगिता शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई है। कुछ खिलाड़ियों द्वारा बैनर पर सांसद की फोटो न होने और आगरा में सांसद की ओर से पुरस्कार दिए जाने, जबकि फिरोजाबाद में ऐसा न होने को लेकर भी आपत्ति जताई गई। इसी कारण कुछ खिलाड़ियों को पुरस्कार नहीं मिल पाए, जिन्हें बाद में उपलब्ध करा दिए जाएंगे। 

इन्वेस्ट यूपी से बदली निवेश की तस्वीर, यूपी बना निवेशकों का भरोसेमंद ठिकाना

निवेशकों के लिए बना सिंगल-पॉइंट संपर्क केंद्र, निवेश सारथी और निवेश मित्र से पूरी तरह डिजिटल हुई निवेश प्रक्रिया लखनऊ वर्ष 2025 के समापन के साथ उत्तर प्रदेश में निवेश, उद्योग और विदेशी पूंजी आकर्षण के लिए लागू किए गए संस्थागत, डिजिटल और नीतिगत उपाय पूरे वर्ष चर्चा में रहे। योगी सरकार के नेतृत्व में इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से निवेश सुविधा और हैंडहोल्डिंग को जिस तरह सशक्त किया गया, जो इस वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2025 के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेश प्रोत्साहन को प्रशासनिक प्राथमिकता में रखा। सरकार का फोकस निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, स्पष्ट नीति और समयबद्ध सुविधा उपलब्ध कराने पर रहा, जिससे राज्य उद्योग और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में उभरता गया। इन्वेस्ट यूपी : निवेश की शुरुआत से क्रियान्वयन तक राज्य की समर्पित निवेश प्रोत्साहन एजेंसी इन्वेस्ट यूपी ने पूरे वर्ष निवेशकों को परियोजना की अवधारणा से लेकर ग्राउंड इम्प्लीमेंटेशन तक सहायता प्रदान की। निवेशक सुविधा, हैंडहोल्डिंग और समस्या समाधान की एकीकृत व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाया। डिजिटल प्लेटफॉर्म से आसान हुआ निवेश निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए निवेश सारथी पोर्टल को प्रभावी रूप से लागू किया गया। इस प्लेटफॉर्म के जरिए एमओयू साइनिंग, निवेश इंटेंट पंजीकरण, शिकायत निस्तारण और परियोजना अनुश्रण एक ही स्थान पर संभव हुआ। वहीं निवेश मित्र के अंतर्गत ऑनलाइन इंसेंटिव मैनेजमेंट सिस्टम से प्रोत्साहन आवेदन और ट्रैकिंग पूरी तरह डिजिटल हो गई। मुख्यमंत्री उद्यमी मित्र: व्यक्तिगत हैंडहोल्डिंग योगी सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी मित्र योजना वर्ष 2025 में निवेशकों के लिए मजबूत सहारा बनी। प्रत्येक निवेशक को एक समर्पित उद्यमी मित्र उपलब्ध कराया गया, जो विभागीय समन्वय, नीति मार्गदर्शन और स्थानीय स्तर पर समस्या समाधान में सहयोग करता रहा। सभी जनपदों और औद्योगिक प्राधिकरणों में इसकी मौजूदगी से निवेशकों को त्वरित सहायता मिली। सेक्टोरल डेस्क से उद्योग-विशेष फोकस वर्ष 2025 के दौरान इन्वेस्ट यूपी के अंतर्गत पांच सेक्टोरल डेस्क (वस्त्र एवं परिधान, ऑटोमोबाइल एवं ई-मोबिलिटी, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स और GCC) सक्रिय रहे। इन डेस्कों के माध्यम से रोड शो, राउंडटेबल और उद्योग संवाद को बढ़ावा मिला और सेक्टर-विशेष निवेश रणनीति को मजबूती मिली। कंट्री डेस्क से वैश्विक निवेश को बढ़ावा विदेशी निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से इन्वेस्ट यूपी के तहत छह कंट्री डेस्क (रूस, जर्मनी-फ्रांस, UAE-सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया-ताइवान और यूनाइटेड किंगडम) सक्रिय रहीं। इन डेस्कों ने वैश्विक कंपनियों और निवेशकों के साथ संपर्क को संस्थागत रूप दिया। निवेशकों के लिए ड्रीम डेस्टिनेशन बना यूपी वर्ष 2025 में योगी सरकार ने निवेश को नीति से आगे बढ़ाकर एक प्रभावी सिस्टम में बदला। इन्वेस्ट यूपी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, उद्यमी मित्र और वैश्विक आउटरीच के जरिए उत्तर प्रदेश निवेशकों के लिए भरोसेमंद, पारदर्शी और अवसरों से भरपूर राज्य के रूप में स्थापित हुआ।

सीएम ने पुलिस अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों से संवाद पर दिया जोर, बोले- हमने दी आपको कार्य करने की स्वतंत्रता

"पुलिस मंथन" कॉपी -2 बोले- प्रधानमंत्री ने दिया था स्मार्ट पुलिस का विजन, यह सूत्र कानून परिवर्तन के लिए भविष्य की चुनौतियों का करता है मार्गदर्शन  बोले, जनता दर्शन से पता चलती है जमीनी हकीकत, अधिकांश हकीकत ह्यूमन इंटेलिजेंस से ही चलती है पता  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून के राज को सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि कानून का राज ही वह आधार है, जिसने यूपी में लोगों के मन से असुरक्षा का भाव दूर किया और विश्वास का वातावरण बनाया। यहां सुरक्षा और कानून का राज है, इसलिए प्रदेश निवेश का ड्रीम डेस्टिनेशन भी बना है। कानून का राज ही विश्वास पैदा करता है और लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। सीएम योगी ने पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि देश भर में यूपी मॉडल की चर्चा है। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को पुलिस हेडक्वार्टर में आयोजित "पुलिस मंथन" वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन-2025 के समापन समारोह में कही। मुख्यमंत्री ने पुलिस मंथन के अभिनव प्रयास के लिए डीजीपी व उनकी टीम को बधाई दी। इस दौरान उन्होंने पदक अलंकरण समारोह में पुलिस अधिकारियों व कार्मिकों को सम्मानित किया और सभी 11 सत्र की चर्चा की।  लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि महत्वपूर्ण कड़ी, उनसे संवाद जरूरी  मुख्यमंत्री ने कहा कि ह्यूमन इंटेलिजेंस हम सबका सबसे बड़ा हथियार है, इसका बेहतर उपयोग कर सकते हैं। सीएम ने संवाद पर जोर देते हुए कहा कि थानाध्यक्ष, हल्का दरोगा, सर्किल इंचार्ज, जिले के कप्तान, रेंज व जोन के अधिकारियों को भी अलग-अलग तबके के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। त्योहारों पर पीस कमेटी की बैठक बुलाते हैं, लेकिन अन्य अवसरों पर भूल जाते हैं। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि महत्वपूर्ण कड़ी हैं। महीने में उनके साथ बैठें। कोई भी जनप्रतिनिधि गलत कार्य के लिए नहीं बोलता है। उन्हें वास्तविक स्थिति से अवगत कराएं, उनका फोन रिसीव करें। साथ ही समाज के अलग-अलग पृष्ठभूमि (धर्माचार्यों, उद्यमियों, व्यापारियों) से भी संवाद करें। इससे धरातल की हकीकत पता चलेगी। केवल मुख्यालय पर बैठकर पुलिसिंग नहीं हो सकती।  थाना, सर्किल, पुलिस लाइन में भी बेहतर समन्वय पर सीएम का जोर  सीएम योगी ने थाना, सर्किल, पुलिस लाइन में भी बेहतर समन्वय पर जोर दिया। बोले-घटना घटित होती है तो थाना इंचार्ज को जवाबदेह बनाते हैं। सर्किल की भूमिका और समन्वय में कितना योगदान दे रहा है, हमने कभी उस पर ध्यान नहीं दिया। यदि तीनों में बेहतर समन्वय बना लें तो सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में यह बड़ा योगदान दे सकता है। पुलिस बल का दोस्ताना व्यवहार व संवेदना आमजन की समस्या का समाधान करती है और उनके मन में पुलिस के प्रति बेहतर धारणा भी बनाती है।  सीएम ने पुलिस अधिकारियों से कहा- आपको कार्य करने की दी गई स्वतंत्रता  सीएम बोले, हमने प्रयास किया कि राजनीतिक हस्तक्षेप न्यूनतम रहे। आपको कार्य करने की स्वतंत्रता दी गई है, ताकि आप परफॉर्म कर सकें। सीएम ने पुलिस कर्मियों के दायित्व पर भी चर्चा की। अब औसतन पुलिस अधिकारी न्यूनतम दो वर्ष तक जनपद-रेंज में सेवा देते हैं, पिछले आंकड़ों बताते हैं कि पहले एक महीने, तीन-चार महीने या कुछ ही दिन में स्थानांतरण हो जाता था। जब तक वह सामाजिक और भौगोलिक स्थिति को समझते, उससे पहले ही बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता था। इससे अव्यवस्था पैदा होती थी, लेकिन अब स्थिरता दी गई।  अपने आचरण व व्यवहार से बनाएं जगह  मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि मैं अलग-अलग तबके से बात करता हूं। अच्छे पुलिस अधिकारी का स्थानांतरण होता है तो आमजन सिफारिश करते हैं कि अच्छा अधिकारी था, लेकिन जब गलत व्यक्ति को हटाया जाता है तो पब्लिक हमें धन्यवाद देती है कि इस बला को टाल दिया। हम दोनों स्थितियों को फेस करते हैं और आमजन से कहते हैं कि अच्छे अधिकारी को दूसरी जगह भी काम करना चाहिए। अन्य जगहों पर भी अच्छाई का लाभ मिले। प्रयास करना चाहिए कि अपने आचरण और व्यवहार से उसे और सुदृढ़ करें।  विकसित व आत्मनिर्भर भारत के लिए राज्यों की भी भूमिका तय   सीएम योगी ने कहा कि 2047 तक भारत विकसित व आत्मनिर्भर हो, इसमें केवल भारत सरकार ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारों की भी भूमिका है। उन्होंने कहा कि साढ़े आठ वर्षों में हमारे प्रति धारणा बदली है। यदि यूपी में ऐसे ही दंगे, गुंडागर्दी, अराजकता, कर्फ्यू रहता तो हमारे बारे में भी धारणाएं नहीं बदलतीं। धारणा बदलने के लिए हमने प्रयास किया। हर व्यक्ति को कानून के दायरे का अहसास कराया, इसलिए अब हर व्यक्ति मानता है कि यूपी में परिवर्तन हुआ है। सुरक्षा नहीं होती तो इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं होता। देश का 55 फीसदी एक्सप्रेसवे यूपी में है, यह सभी पिछले साढ़े 8 वर्ष में तैयार किए गए हैं। यूपी में एयर क्नेक्टिविटी का सबसे बड़ा नेटवर्क है। अगले महीने देश के सबसे बड़ा एयरपोर्ट का शुभारंभ भी होगा। यूपी में 16 हजार किमी. का रेल नेटवर्क है। सर्वाधिक शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा यूपी के पास है। देश की पहली रैपिड रेल व वाटरवे यूपी में संचालित हो रहा है। 

मुख्यमंत्री ‘पुलिस मंथन’, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन– 2025 के समापन सत्र में हुए शामिल

धार्मिक उन्माद और जातिय विद्वेष फैलाने वालों के विरूद्ध पुलिस करे सख़्त कार्रवाई : मुख्यमंत्री आतंकी गतिविधियों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिये सख्त एक्शन लिया जाए  मुख्यमंत्री ने सीमा सुरक्षा एवं आतंकवाद निरोधक तंत्र तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने के दिये निर्देश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘पुलिस मंथन’ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन– 2025 के दूसरे दिन रविवार को समापन अवसर पर प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिये। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विशेष रूप से सोशल मीडिया और साइबर क्राइम पर सख़्त निगरानी रखने के निर्देश दिये। उन्हाेंने सोशल मीडिया पर कानून-व्यवस्था, जातीय एवं धार्मिक सौहार्द प्रभावित करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने को कहा। उन्होंने पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल की ओर से प्रदेश में बढ़ने वाली आतंकी गतिविधियों और नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए सीमा सुरक्षा एवं आतंकवाद निरोधक तंत्र को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने के निर्देश दिये। साथ ही गो-तस्करी और धर्मांतरण के लिए चलाए जा रहे संगठित गिरोह पर सख्त कार्रवाई करने को कहा।        सोशल मीडिया और साइबर अपराध पर सख़्त निगरानी के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग, दुष्प्रचार, डीपफेक, डार्कवेब, साइबर अपराध एवं आतंकी नेटवर्क जैसी चुनौतियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस एवं इंटेलिजेंस तंत्र को निर्देशित किया कि सोशल मीडिया पर कानून-व्यवस्था, जातीय एवं धार्मिक सौहार्द को प्रभावित करने वाले किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट पर तत्काल संज्ञान लेकर त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जाति या धर्म के नाम पर समाज को विभाजित करने, पुलिस पर दबाव बनाने अथवा अराजकता फैलाने वाले तत्वों के प्रति किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। ऐसे पोस्ट, फेक अकाउंट एवं संगठित दुष्प्रचार अभियानों की पहचान कर उनके विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व महापुरुषों के नाम का दुरुपयोग कर नए-नए संगठन बनाकर अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस को ऐसे संगठनों की पृष्ठभूमि की गहन जांच कर उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने तथा कानून के दायरे में सख़्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।   धार्मिक कन्वर्जन की घटनाओं पर विशेष सतर्कता मुख्यमंत्री ने धार्मिक कन्वर्जन को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि बलरामपुर जैसी घटनाएं संकेत हैं कि ऐसे प्रयास संगठित रूप से किए जा रहे हैं। पुलिस एवं इंटेलिजेंस को निर्देश दिए कि धार्मिक कन्वर्जन से जुड़ी गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जाए, सोशल मीडिया के माध्यम से इंटेलिजेंस को और मजबूत किया जाए तथा ऐसी किसी भी घटना को प्रारंभिक स्तर पर ही प्रभावी ढंग से रोका जाए। उन्होंने पुलिस के अब तक के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान परिदृश्य में इंटेलिजेंस, लोकल इनपुट और तकनीकी निगरानी को और अधिक सक्रिय व प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। प्रदेश में शांति, सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया की प्रत्येक गतिविधि पर पैनी नजर रखते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सीमा सुरक्षा एवं आतंकवाद निरोधक तंत्र को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं नेपाल से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से उत्पन्न हो रही आतंकवादी गतिविधियों के नए आयामों का गहन विश्लेषण करते हुए सीमा निगरानी (सर्विलांस) को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया। उन्होंने ‘अंतरराष्ट्रीय अनुदानित धर्मान्तरण रैकेट’ की रोकथाम के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वित्तीय ट्रेल, तकनीकी विश्लेषण एवं आधुनिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग को और मजबूत करने के निर्देश दिए।  नशीले पदार्थों की तस्करी एवं संगठित अपराध पर निरंतर करें सख़्त कार्रवाई मुख्यमंत्री ने प्रदेश में आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी एवं संगठित अपराध के विरुद्ध पुलिस द्वारा की गई अब तक की कड़ी कार्रवाई की सराहना की। उन्हाेंने कहा कि इसे और अधिक प्रभावी व निर्णायक बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए विभागीय समन्वय एवं सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा अपराधी नेटवर्क का मनोबल तोड़ने के निर्देश दिए।  गो-तस्करी एवं अपराधी नेटवर्क के मास्टरमाइंड पर प्रहार की रणनीति मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गो-तस्करी के मामलों में केवल त्वरित गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क एवं उसके मास्टरमाइंड की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए। इससे प्रदेश में ऐसे संगठित अपराधों के विरुद्ध कड़ा संदेश जाएगा और गो-तस्करी एवं उससे जुड़े अपराधों पर प्रभावी रोक सुनिश्चित हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में इस तरह के मामलों में पुलिस की कार्रवाई की सराहना की। पुलिस मंथन कार्यक्रम के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों में इन विषयों का किया गया प्रस्तुतिकरण पुलिस मंथन कार्यक्रम के तहत सत्र 8 में आपदा प्रबंधन, सिविल डिफेंस एवं होम गार्ड्स (Disaster Management, Civil Defence and Home Guards), सत्र 9 में विशाल जनसमूह (भीड़) प्रबंधन (Large Crowd Management), सत्र 10 में खुफिया तंत्र एवं उभरती चुनौतियां जैसे सोशल मीडिया/एनजीओ तथा नेपाल सीमा (Intelligence and Emerging Challenges like Social Media/NGOs and Nepal Border), सत्र 11 में आतंकवाद-रोधी, मादक पदार्थ, गो-तस्करी एवं अन्य संगठित अपराध (Anti-Terror, Narcotics, Cattle-Theft and Other organized Crimes)आदि विषयों पर प्रस्तुतिकरण किया गया।

उत्तर प्रदेश सरकार के एआईएफ फंड से मिली मजबूती, नेफेड के लिए करती हैं प्रोडक्ट तैयार

दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई करके अपने गांव लौटीं और गांव की ही महिलाओं को दे रहीं रोजगार किसानों को प्रशिक्षण देकर करवाती हैं प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और प्रेरणा से उत्तर प्रदेश की बेटियां न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बनाने को तैयार हैं। मिलेट्स आधारित ऑर्गेनिक फूड स्टार्टअप के जरिए यूपी की दो बेटियों ने ऐसा काम कर दिखाया है, जो प्रदेश की नई उद्यमशील शक्ति का प्रतीक बन रहा है। दिल्ली-एनसीआर में मजबूत पकड़ बनाने के बाद अब इनका लक्ष्य गल्फ कंट्रीज का बाजार है, जहां ऑर्गेनिक और मिलेट्स उत्पादों की धाक जमाने की पूरी तैयारी है। इसके लिए विशेष तौर पर किसानों को प्रशिक्षण देकर प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती करवाई जा रही है। डीयू से लौटीं बेटियां, अपने गांव की महिलाओं को दिया रोजगार दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद पारंपरिक करियर की राह छोड़कर गांव लौटने वाली शिखा सिंह चौहान और सोम्या सिंह ने सामाजिक उद्यमिता का रास्ता चुना। किसानों और ग्रामीण महिलाओं को साथ लेकर उन्होंने ऑर्गेनिक और मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में कदम रखा। आज उनकी यूनिट में 15 से अधिक महिलाएं उत्पादन, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का जिम्मा संभाल रही हैं। शिखा सिंह चौहान दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट और नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी गांधीनगर, गुजरात से फूड टेक्नोलॉजी में पोस्ट-ग्रेजुएट हैं। वहीं, सोम्या सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय से फूड टेक्नोलॉजी में बी.टेक हैं। महिला-नेतृत्व वाला एग्रीबिजनेस मॉडल हो रहा मजबूत सोम्या सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के सहयोग से प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट का विस्तार हुआ। इससे न सिर्फ उत्पादन क्षमता बढ़ी, बल्कि महिला-नेतृत्व वाले एग्रीबिजनेस मॉडल को भी मजबूती मिली। यही कारण है कि दिल्ली-एनसीआर में ऑर्गेनिक फूड के बाजार में इनका ब्रांड तेजी से उभरा है। खेत से थाली तक पारदर्शी मॉडल सोहा ऑर्गेनिक्स की को-फाउंडर शिखा सिंह चौहान नागली वाजिदपुर, सेक्टर 130, गौतम बुद्ध नगर की रहने वाली हैं। जबकि उनकी पार्टनर सोम्या सिंह बागपत जिले की निवासी हैं। रासायनिक खाद्य पदार्थों और उनसे होने वाली समस्याओं से लोगों को बचाने के लिए उन्होंने मिलेट्स-ऑर्गेनिक फूड स्टार्टअप की शुरुआत की। यह स्टार्टअप फार्म-टू-फोर्क मॉडल पर काम करता है। छोटे किसानों से सीधे कच्चा माल खरीदा जाता है और उन्हें उचित मूल्य दिया जाता है। बिचौलियों के हटने से सप्लाई चेन पारदर्शी बनी है, वहीं उपभोक्ताओं को शुद्ध, रसायन-मुक्त और पोषण से भरपूर उत्पाद मिल रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर से नेफेड तक सप्लाई ऑर्गेनिक दालें, मसाले, घी, मिलेट पास्ता, मिलेट नूडल्स, मल्टीग्रेन और सत्तू चीला समेत तमाम तरह के उत्पाद यहां से सीधे मार्केट में जाते हैं। इसके बदले किसानों को उनका उचित मूल्य भी दिया जाता है। इसमें बड़े पैमाने पर बागपत से खांडसारी शुगर का उत्पाद लोगों के बीच पहुंचाया जाता है। वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ नेफेड (NAFED) को भी उत्पादों की आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा सरकारी पोषण कार्यक्रमों के लिए विशेष उत्पाद विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है, जिससे कमजोर वर्गों तक सुरक्षित और पौष्टिक भोजन पहुंच सके। गल्फ कंट्रीज पर नजर, ‘मेड इन यूपी’ की तैयारी शिखा सिंह चौहान ने बताया कि ऑर्गेनिक और मिलेट्स उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए अब अगला लक्ष्य गल्फ देशों का बाजार है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पैकेजिंग और क्वालिटी कंट्रोल पर खास फोकस किया जा रहा है, ताकि विदेशों में भी उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया जा सके। स्वास्थ्य, सततता और महिला सशक्तिकरण से निकली यूपी की बेटियों की सफलता की कहानी बताती है कि सही नीति, सरकारी सहयोग और दृढ़ संकल्प हो, तो हमारी बेटियां वैश्विक मंच पर भी परचम लहरा सकती हैं। मिलेट्स ऑर्गेनिक फूड स्टार्टअप के जरिए उभरती यह पहल न सिर्फ एक कारोबार है, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नई पहचान भी है।

स्मार्ट मीटरिंग और निगरानी से मजबूत हुई बिजली वितरण प्रणाली

15,26,801 डीटी मीटर स्वीकृत, 2,29,898 स्थापित, बिजली वितरण प्रणाली में तकनीकी मजबूती 25,224 फीडर मीटर  स्थापित, फीडर स्तर पर निगरानी से लाइन लॉस पर नियंत्रण लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ऊर्जा के क्षेत्र में जिस गति और स्तर पर तकनीकी परिवर्तन का साक्षी बन रहा है, वह न केवल प्रदेश का बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बनता जा रहा है। वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में स्मार्ट मीटरिंग के जरिए पारदर्शिता, दक्षता और उपभोक्ता हितों के संरक्षण का वर्ष साबित हुआ है। यूपी में अब तक लगभग 68,24,654 (68 लाख, 24 हजार, 654) स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश लगातार अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अभी तक प्रदेश में पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत 3,20,187 सौर ऊर्जा इंस्टॉलेशन हो चुके हैं। यही नहीं यूपी सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में सुधार को प्राथमिकता देते हुए उपभोक्ताओं के हितों को केंद्र में रखकर काम किया है। डिजिटल तकनीक आधारित ‘स्मार्ट मीटरिंग प्रोजेक्ट’ के अंतर्गत न केवल बिजली वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आई है, बल्कि राजस्व संग्रहण में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्मार्ट मीटरिंग से पारदर्शिता और नियंत्रण उत्तर प्रदेश में 3,09,78,280 (3 करोड़, 9 लाख 78 हजार 280) स्मार्ट मीटर स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से 68,24,654 (68 लाख 24 हजार 654) मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। प्रदेश सरकार ने बिजली उपभोग को डिजिटल रूप से ट्रैक करने और बिलिंग प्रक्रिया को सटीक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। स्मार्ट मीटरों से उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग, वास्तविक खपत का आकलन और बिजली चोरी पर अंकुश जैसे अनेक लाभ मिल रहे हैं। पहले जहां अनुमान आधारित बिलिंग से उपभोक्ताओं को शिकायतें रहती थीं, वहीं अब वास्तविक उपयोग के आधार पर पारदर्शी बिल मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार कहा है, “स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम न केवल तकनीकी सुधार है, बल्कि उपभोक्ता के प्रति जवाबदेही का प्रतीक भी है।” डीटी मीटरों से बिजली वितरण में सुधार बिजली वितरण को और अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए योगी सरकार ने डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (डीटी) मीटरिंग पर विशेष ध्यान दिया है। अब तक 15,26,801 (15 लाख 26 हजार 801) डीटी मीटर स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 2,29,898 (2 लाख 29 हजार 898) मीटर स्थापित हो चुके हैं। यह व्यवस्था हर ट्रांसफॉर्मर पर बिजली के प्रवाह और खपत की निगरानी को सटीक बनाती है। डीटी मीटर से यह पता लगाना आसान होता है कि किन क्षेत्रों में बिजली की हानि सबसे अधिक है और कहां पर तकनीकी सुधार की आवश्यकता है? इस तकनीक के माध्यम से बिजली चोरी में कमी आई है और लाइन लॉस कम हो रहा है। फीडर मीटरिंग से मजबूत हुआ बिजली आपूर्ति नेटवर्क उत्तर प्रदेश में बिजली नेटवर्क को सशक्त बनाने के लिए 25,224 फीडर मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक फीडर स्तर पर बिजली आपूर्ति और उपभोग का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहे। फीडर मीटरिंग से आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और ग्रामीण व शहरी दोनों इलाकों में बिजली वितरण की विश्वसनीयता बढ़ी है। उपभोक्ताओं के हित में तकनीक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का लक्ष्य केवल तकनीकी उन्नयन ही नहीं, उपभोक्ताओं के हितों को भी सशक्त बनाना है। स्मार्ट मीटर से अब उपभोक्ता अपने मोबाइल या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए बिजली उपयोग का रियल टाइम डेटा देख सकते हैं। इससे बिलिंग विवाद घटे हैं और उपभोक्ता अपनी खपत पर खुद नियंत्रण रख पा रहे हैं। साथ ही भुगतान प्रणाली को भी ऑनलाइन और पारदर्शी बनाकर सरकार ने डिजिटल इंडिया के विजन को दृढ़ता प्रदान करने का काम किया है। बिजली बिल राहत योजना का उपभोक्ताओं को मिल रहा लाभ  बिजली बिल राहत योजना में 16 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराया है। 1323 करोड़ की राजस्व धनराशि प्राप्त हुई। सबसे अधिक पूर्वांचल डिस्काम में 6 लाख से ज्यादा पंजीकरण हुआ है।

जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठी अयोध्या, दर्शन के लिए लगी लंबी कतारें

अयोध्या साल 2025 खत्म होने वाला है और नया साल 2026 दस्तक देने को तैयार है। इस बीच, नए साल की शुरुआत आध्यात्मिक तरीके से करने के लिए देशभर से श्रद्धालु तीर्थ स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं। शनिवार को भारी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा और लंबी कतारों में खड़े भक्त मंदिर में प्रवेश करने के लिए आतुर नजर आए। उनके चेहरों पर वह ताजगी और उत्साह साफ झलक रहा था, मानो कुछ ही पलों में भगवान राम से मिलने का उनका सपना पूरा होने वाला हो। प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में चल रहे आयोजनों और नए साल के अवसर पर अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी आमद हो रही है। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, जिसमें दर्शन समय बढ़ाना और अतिरिक्त कतारें शामिल हैं। कुछ पर्यटकों के साथ आईएएनएस ने बातचीत की। एक पर्यटक ने कहा कि हम लाइन में काफी देर से हैं। राम मंदिर के बारे में काफी सुना है, इसीलिए उन्हें देखने की लालसा कोलकाता से मुझे यहां खींचकर लाई है। उन्होंने कहा कि अब तक सब अच्छा लग रहा है। हम बस अंदर जाने वाले हैं और यह बहुत अच्छा होगा। अलग-अलग जगहों से लोग आए हैं, यह अच्छी बात है। अब तक कोई दिक्कत नहीं हुई है। लोग आध्यात्मिकता में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं और भगवान के विभिन्न रूपों के दर्शन कर रहे हैं। एक अन्य पर्यटक ने बताया कि मैं अभी अंदर जा रहा हूं; अंदर जाने के बाद मैनेजमेंट का पता चलेगा। मैं पहली बार आया हूं। मेरी यह यात्रा मेरे परिवार के लिए अच्छी हो, सबके लिए अच्छी हो। एक भक्त ने कहा कि यहां बहुत अच्छा लग रहा है। हम नए साल की शुरुआत यहीं करने का प्लान बना रहे हैं। अभी बहुत ठंड है, लेकिन हम देखेंगे कि दिन कैसा बीतता है और दर्शन कैसे होते हैं। राम मंदिर के अलावा नए साल से पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। शनिवार होने के कारण भीड़ और बढ़ गई है। गोरखपुर से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से अच्छी व्यवस्थाएं की गई हैं। एक भक्त ने बताया कि भीड़ बहुत ज्यादा है; हम आधे घंटे लाइन में लगे रहे, लेकिन व्यवस्था अच्छी है।  

यूपी पुलिस आज अपराधियों के लिए भय और नागरिकों के लिए विश्वास का बनी है प्रतीक: योगी आदित्यनाथ

"पुलिस मंथन" वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन-2025   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित सम्मेलन में साझा किया 'स्मार्ट पुलिसिंग का विजन मुख्यमंत्री योगी बोलेः साढ़े आठ वर्षों में यूपी पुलिस की छवि, संरचना और कार्यप्रणाली में ऐतिहासिक परिवर्तन सम्मेलन में बीट पुलिसिंग से साइबर सुरक्षा तक तकनीक आधारित पुलिसिंग पर व्यापक मंथन डेटा आधारित, वैज्ञानिक और नागरिक केंद्रित पुलिसिंग पर मुख्यमंत्री योगी का रहा फोकस लखनऊ पुलिस मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन- 2025 ‘पुलिस मंथन’ का शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुआ। मुख्यमंत्री योगी द्वारा अपने सम्बोधन में यूपी पुलिस के अब तक के कार्य, सुधार और उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले साढ़े आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपने परसेप्शन और कानून-व्यवस्था की छवि में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रयासों से उत्तर प्रदेश को आज देश-दुनिया में एक रोल मॉडल की तरह देखा जा रहा है और परिवर्तन की यह पहचान जनता के अनुभवों से सिद्ध होती है, न कि आत्मप्रशंसा से। इस दौरान उन्होंने स्मार्ट पुलिसिंग का विजन साझा करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि वर्ष 2017 से अब तक पुलिसिंग के हर स्तर पर व्यापक बदलाव हुए, भर्ती, प्रशिक्षण, अवसंरचना, तकनीक, साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक क्षमता, पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था, UP-112, सेफ सिटी मॉडल, महिला पुलिस भर्ती, और प्रीडिक्टिव पुलिसिंग की दिशा में निर्णायक प्रगति की गई है। पहले जहां प्रशिक्षण क्षमता सीमित थी, वहीं आज बड़े पैमाने पर 60,000 से अधिक आरक्षियों का प्रशिक्षण प्रदेश के अन्दर ही कराया जा रहा है। 75 जनपदों में साइबर थाने, 12 एफएसएल लैब और फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी जैसे संस्थागत बदलाव प्रदेश की नई सोच को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि आज यूपी पुलिस अपराधियों के लिए भय और आम नागरिकों के लिए विश्वास व सम्मान का भाव स्थापित कर रही है। पुलिस की भूमिका अब केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि प्रो-एक्टिव और प्रीडिक्टिव पुलिसिंग की ओर बढ़ चुकी है। उनके द्वारा बेस्ट प्रैक्टिसेस साझा करने, नवाचार अपनाने और समयबद्ध व बिंदुवार कार्य प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। अंत में मुख्यमंत्री योगी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह दो दिवसीय पुलिस मंथन कार्यक्रम नीति, रणनीति और बेहतर क्रियान्वयन के जरिए समग्र पुलिसिंग को नई दिशा देगा और यूपी पुलिस अपने कार्यों को उसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाती रहेगी। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सम्मेलन में दो दिन उपस्थित रहकर मार्गदर्शन देने हेतु हृदय से आभार व्यक्त किया । उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के गरिमामयी इतिहास में यह एक विशिष्ट क्षण है, जब माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर इस मंथन में सहभागिता की है। उनकी उपस्थिति यह भरोसा देती है कि राज्य नेतृत्व पुलिसिंग की चुनौतियों को समझता है, सुधार की प्रक्रिया में मार्गदर्शक है और परिणामों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।      पुलिस महानिदेशक ने विभिन्न सत्रों की रूपरेखा एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए, 2017 के बाद  मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस की परिवर्तनकारी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने भर्ती, प्रशिक्षण, आधारभूत संरचना, तकनीक-आधारित नागरिक सेवाओं, फॉरेंसिक सुदृढ़ीकरण, cyber policing, मिशन शक्ति केन्द्र, विशेष इकाइयों के गठन तथा अपराध के प्रति zero tolerance नीति के प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि सम्मेलन का लक्ष्य प्रत्येक सत्र से स्पष्ट उत्तरदायित्व, निर्णयों की स्पष्ट timeline और ठोस परिणाम सुनिश्चित करना है, ताकि यह मंथन कक्षों से निकलकर फील्ड में दिखाई दे और नागरिकों तक बेहतर, responsive एवं citizen-first police service पहुँचे। सम्मेलन के प्रथम दिवस कुल 07 सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रत्येक सत्र के  07 नोडल वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एवं उनकी टीम द्वारा विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया ।   शनिवार को आयोजित सत्रों का सार * सत्र- 01 में Beat Policing विषय के नोडल अधिकारी एस०के० भगत, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा बीट पुलिसिंग से सम्बन्धित समस्या तथा उसके समाधान एवं Best practices के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया गया । तत्पश्चात माननीय मुख्यमंत्री जी के द्वारा यक्ष ऐप का लोकार्पण किया गया । ‘यक्ष ऐप’- AI और Big Data Analysis की सहायता से तैयार किये गये बीट बुक का डिजिटल स्वरूप है। इसके माध्यम से बीट पर अपराध, अपराधियों तथा संवेदनशील क्षेत्रों का समग्र डाटा उपलब्ध होगा, जिससे पुलिस कार्यवाही अधिक तथ्यात्मक, विश्लेषणात्मक एवं लक्षित रूप में की जा सकेगी। यह ऐप बीट कर्मियों के रोज़मर्रा के कार्यों को आसान, सुव्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने में भी मददगार होगा । •सत्र- 02 में Crime Against Women, Children and Human Trafficking विषय की नोडल अधिकारी पद्मजा चौहान, अपर पुलिस महानिदेशक, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा प्रदेश में महिलाओं एवं बच्चों से सम्बन्धित प्रमुख कार्य, उपलब्धियां, चुनौतियां एवं भावी कार्ययोजना जिसमें नवस्थापित मिशन शक्ति केन्द्र, समुदाय स्तर पर किये जा रहे जागरूकता कार्यक्रम एवं पारिवारिक विघटन के साथ लैंगिक अपराधों से पीड़ित बालिकाओं की देखभाल एवं संरक्षण, मिशन-शक्ति के द्वारा महिलाओं एवं बाल-सुरक्षा, मिशन-शक्ति केन्द्र के द्वारा सकारात्मक बदलाव, Family Dispute Resolution Clinic (FDRC), एवं बलात्कार के प्रकरणों में कानून प्रवर्तन पर प्रस्तुतीकरण दिया गया ।  

सरकारी कार्यालयों, सामुदायिक सभागारों, ग्राम पंचायत भवनों और ग्राम सभा स्थलों पर लगेंगे पोस्टर

विकसित भारत की संकल्पना साकार करने के लिए सीएम योगी ने अफसरों को दिए निर्देश लखनऊ उत्तर प्रदेश में रोजगार को लेकर योगी सरकार की सोच जमीन पर उतरती दिख रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत “विकसित भारत जी राम जी” योजना के जरिए गांव-गांव रोजगार, प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर देने की ठोस पहल शुरू हो गई है। सरकार का लक्ष्य है कि हर परिवार तक काम की गारंटी पहुंचे और रोजगार की जानकारी गांव-गांव लोगों को चौपाल लगाकर दी जाए। सीएम योगी ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। इस दिशा में प्रदेश भर में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत सरकारी कार्यालयों, पंचायत भवनों, सामुदायिक केंद्रों और ग्राम सभाओं में पोस्टर, बैनर और वाल पेंटिंग के जरिए लोगों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा। साथ ही चौपालों पर संवाद के जरिए सीधे आम लोगों को रोजगार संबंधित योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा सीधा लाभ इस अभियान के तहत रोजगार एवं आजीविका गारंटी अधिनियम (VB-G RAM G) को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ योजना बनाना नहीं, बल्कि हर पात्र व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचाना है। इसके तहत चौपाल पर चर्चा के साथ घर-घर योजना की जानकारी दी जाएगी। गांव-गांव लगने वाली इन चौपालों में लोगों को रोजगार की योजनाओं, काम के अवसरों और अधिकारों के बारे में बताया जाएगा। अपनी जरूरतें और सुझाव सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे पोस्टर, बैनर और वाल पेंटिंग से योजना का प्रचार किया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों, पंचायत भवनों, स्कूलों, सामुदायिक हॉल और सार्वजनिक स्थलों पर प्रचार सामग्री लगाई जाएगी। जिससे कोई भी व्यक्ति इसकी जानकारी से अछूता न रहने पाए। रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी संदेश से संबंधित लोगो लगाए जाएंगे। सभी तक जानकारी पहुंचाने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर प्रचार प्रसार का निर्णय लिया गया है। योगी सरकार का प्रयास है कि रोजगार से जुड़े फैसलों में आमजन की भागीदारी रहे। चौपालों के माध्यम से लोग अपनी जरूरतें और सुझाव सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में साबित होगा बड़ा कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अधिकारियों को स्पष्ट संदेश है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब गांव मजबूत होंगे और हर हाथ को काम मिलेगा। इसी सोच के साथ प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि हर जरूरतमंद तक पहुंचें। यह अभियान न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देकर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।