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मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उम्मीद पोर्टल पर यूपी ने किया देश में सर्वाधिक 92,832 वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन

उम्मीद पोर्टल पर यूपी ने रचा इतिहास, ऑनलाइन वक्फ संपत्ति रजिस्ट्रेशन में यूपी सबसे आगे मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उम्मीद पोर्टल पर यूपी ने किया देश में सर्वाधिक 92,832 वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन  उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के रजिस्ट्रेशन की अवधि 6 माह बढ़ी, यूपी रहा रजिस्ट्रेशन में सबसे आगे   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने वक्फ संपत्तियों के डिजिटल रजिस्ट्रेशन के मामले में देश में पहला स्थान हासिल किया है। भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा 6 जून 2025 को शुरू किए गए 'उम्मीद' पोर्टल पर 05 दिसंबर 2025 तक सभी वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन का आदेश जारी किया गया था। इस क्रम में उत्तर प्रदेश में कुल 92,832 वक्फ संपत्तियों का सफलतापूर्वक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा कर लिया है, जिसमें 86,347 सुन्नी और 6,485 शिया वक्फ संपत्तियां शामिल हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की तिथि को 6 माह के लिए बढ़ा दिया है। लेकिन उत्तर प्रदेश की ये उपलब्धि न केवल सीएम योगी आदित्यनाथ के कुशल और पारदर्शिता प्रशासन को दर्शाती है, साथ ही वक्फ बोर्डों की संपत्तियों के संरक्षण और विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। उम्मीद पोर्टल पर यूपी में हुआ सर्वाधिक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उम्मीद पोर्टल के देशव्यापी आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत में अब तक हुए कुल वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन में उत्तर प्रदेश का योगदान सर्वाधिक है। हालांकि केंद्र सरकार ने उम्मीद पोर्टल में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की अवधि को बढ़ा दिया है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार की सक्रियता से यह लक्ष्य न केवल समय पर पूरा हुआ, बल्कि निर्धारित अवधि से पहले ही हासिल कर लिया गया। इस क्रम में उत्तर प्रदेश में 'उम्मीद' पोर्टल पर क्रमशः 86,347 सुन्नी और 6,485 शिया वक्फ संपत्तियों के साथ कुल 92,832 वक्फ संपत्तियों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हुआ है। प्रदेश सरकार की ओर से चलाए गये जागरूकता अभियान और प्रशासनिक सहयोग से अधिकांश मुतवल्लियों ने वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन समय पर पूरे करवा लिये हैं। शिया वक्फ रजिस्ट्रेशन में लखनऊ, तो सुन्नी वक्फ रजिस्ट्रेशन में बराबंकी अव्वल  उम्मीद पोर्टल के जनपदवार विवरण से पता चलता है कि, शिया वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में लखनऊ सबसे आगे रहा, जहां 625 शिया वक्फ संपत्तियां दर्ज हुई हैं। उसके बाद 539 शिया वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के साथ जनपद अमरोहा दूसरे और 533 वक्फ संपत्तियों के साथ  मेरठ तीसरे स्थान पर रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर सुन्नी वक्फ संपत्तियों के उम्मीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के मामले में 4,940 वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन के साथ बाराबंकी पहले नंबर पर रहा। तो वहीं सीतापुर, दूसर और आजमगढ़ तीसरे स्थान पर रहा। जबकि बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ, और जौनपुर जनपद भी सुन्नी वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के मामले में अग्रणी जनपद  हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की यह उपलब्धि सीएम योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और प्रशासन दक्षता को प्रदर्शित कर रही है, साथ ही वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने, इसके दुरुपयोग को रोकने और साथ ही उनके संरक्षण और विकास कार्यों को भी गति प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन मॉडल में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिल रहा त्वरित न्याय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन मॉडल में सेवानिवृत्त कार्मिकों को मिल रहा त्वरित न्याय पेंशनरों की समस्याओं के निस्तारण के लिए शक्ति भवन में शनिवार को लगी पेंशन अदालत अदालत में कुल 14 प्रकरण सुनवाई के लिए रखे गए लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन मॉडल के तहत उत्तर प्रदेश में सेवानिवृत्त कार्मिकों के कल्याण और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में शनिवार को लखनऊ स्थित शक्ति भवन में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन मुख्यालय पर त्रैमासिक पेंशन अदालत का आयोजन किया गया। यह पहल प्रदेश सरकार की उस संवेदनशील सोच को दर्शाती है, जिसमें सेवा निवृत्ति के बाद भी कार्मिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। पेंशन अदालत में कुल 14 प्रकरणसुनवाई के लिए रखे गए। पेंशन अदालत का आयोजन उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष कुमार गोयल के निर्देश पर किया गया। शक्ति भवन में आयोजित इस पेंशन अदालत की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड के अपर सचिव (प्रथम) विनोद कुमार मिश्र ने की, जिसमें पावर कॉरपोरेशन और पारेषण निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। पेंशन अदालत में कुल 14 प्रकरण रखे गए। इनमे से पांच प्रकरणों का त्वरित निस्तारण मौके पर ही कर दिया गया। शेष का जल्द से जल्द करने के स्पष्ट निर्देश अधिकारियों को दिए गए। यह त्रैमासिक पेंशन अदालत मार्च, जून, सितम्बर और दिसम्बर में नियमित रूप से आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य किसी भी पेंशनर को अनावश्यक परेशानी से बचने के लिए है। यही मॉडल प्रदेश के सभी डिस्कॉम और केस्को में भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट संदेश है कि शासन केवल कार्यरत कर्मियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा भी सरकार की जिम्मेदारी है। पेंशन अदालत जैसी व्यवस्थाएं उत्तर प्रदेश को संवेदनशील और जवाबदेह शासन की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। पेंशन अदालत में अपर सचिव-तृतीय  कैलाश चन्द्र जोशी, संयुक्त सचिव दिनेश प्रताप गुप्ता, संयुक्त सचिव अनिल कुमार, अधीक्षण अभियन्ता रजनीकान्त मिश्रा, उप सचिव राम सूरत सहित अन्य अधिकारीगण इस मौके पर मौजूद रहे।

वायु प्रदूषण की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम

जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लॉन्च करेंगे उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना वायु प्रदूषण की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम मुख्य सचिव होंगे परियोजना के अध्यक्ष, प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव सदस्य लखनऊ उत्तर प्रदेश को स्वच्छ, स्वस्थ और आर्थिक रूप से अधिक सक्षम राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार निरंतर ठोस कदम उठा रही है। वायु प्रदूषण की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी माह जनवरी 2026 में उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना (यूपीसीएएमपी) का शुभारंभ करेंगे। इस परियोजना के शासी निकाय की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव करेंगे, जबकि प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव सदस्य के रूप में नामित होंगे। वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के उद्देश्य से योगी सरकार विश्व बैंक के सहयोग से यूपीसीएएमपी परियोजना का कार्यान्वयन कर रही है। इसी क्रम में हाल ही में यूपीसीएएमपी प्राधिकरण के शासी निकाय की दूसरी बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि परियोजना के कार्यान्वयन से जुड़े सभी आवश्यक कदमों की समयबद्ध प्रगति की अद्यतन जानकारी आगामी बैठक में प्रस्तुत की जाए। इस परियोजना को लेकर बीते 3 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए), विश्व बैंक और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच परियोजना वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी। इसके पश्चात 10 दिसंबर 2025 को विश्व बैंक के निदेशक मंडल द्वारा परियोजना को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई। शासी निकाय को परियोजना की संरचना, वित्तपोषण व्यवस्था और विशेष प्रयोजन वाहन के रूप में गठित यूपीसीएएमपी प्राधिकरण के माध्यम से कार्यान्वयन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी गई। यूपीसीएएमपी भारत की अपनी तरह की पहली वायुक्षेत्र-आधारित वायु गुणवत्ता प्रबंधन परियोजना है, जिसे इंडो-गंगा के मैदानों में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को लक्षित करते हुए एक बहु-क्षेत्रीय कार्यक्रम के रूप में विकसित किया गया है। यह परियोजना विश्व बैंक द्वारा IIT कानपुर, IIT दिल्ली और नॉर्वेजियन इंस्टीट्यूट फॉर एयर रिसर्च (NILU) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से किए गए व्यापक वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है। इसमें ऑस्ट्रिया के IIASA द्वारा विकसित GAINS मॉडल का उपयोग किया गया है। यूपीसीएएमपी का कुल परिव्यय 304.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिसमें 299.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण (लगभग 46,188 करोड़ येन के बराबर) और 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान शामिल है। इस परियोजना को वर्ष 2025 से 2031 तक छह वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। परियोजना उद्योग, परिवहन, कृषि, सड़क की धूल, अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ खाना पकाने जैसे प्राथमिक क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिससे उत्सर्जन में कमी के लिए एक समन्वित और प्रभावी रणनीति अपनाई जा सके। इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य वायुक्षेत्र आधारित वायु गुणवत्ता प्रबंधन को सुदृढ़ करना और विभिन्न क्षेत्रों में उत्सर्जन को कम करना है। इसके तहत लगभग 39 लाख परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने के समाधान उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर में 15,000 इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि 13,500 प्रदूषणकारी भारी वाहनों के प्रतिस्थापन के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। कृषि और पशुधन प्रबंधन के क्षेत्र में परियोजना के अंतर्गत पोषक तत्व उपयोग दक्षता प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए खेतों में नाइट्रोजन निगरानी प्रणालियों की तैनाती, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ करना, तथा खाद आधारित उर्वरकों और बायोगैस स्लरी के मानकीकृत उपयोग के माध्यम से पशुधन अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र में यूपीसीएएमपी संसाधन-कुशल ईंट निर्माण और टनल भट्टों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन देगा। इसके साथ ही औद्योगिक क्लस्टरों के लिए स्वच्छ वायु प्रबंधन योजनाएं तैयार की जाएंगी तथा मिनी बॉयलर से सामान्य बॉयलर सुविधाओं में परिवर्तन के लिए नीति निर्माण और व्यवहार्यता अध्ययन किया जाएगा। वायु प्रदूषण में प्रभावी कमी लाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार पड़ोसी राज्यों के साथ सहयोग बढ़ाकर सीमा-पार उत्सर्जन से निपटने की रणनीति भी अपनाएगी, जिससे कम लागत में अधिक प्रभावी परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

वित्तीय वर्ष 2025-2026 में समय पर किया गया 97 फीसदी से अधिक का भुगतान

मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों को मिल रही प्राथमिकता मनरेगा के जरिए मजबूत हुआ ग्रामीण रोजगार, योगी सरकार में बन रहे रिकॉर्ड लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रोजगार सृजन को लेकर सकारात्मक और ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 48 लाख से अधिक परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इनमें 31 प्रतिशत से अधिक परिवार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं, जो सामाजिक समावेशन और समान अवसर की दिशा में योगी सरकार के प्रयासों और प्राथमिकता को दर्शाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में मनरेगा के तहत 97 प्रतिशत से अधिक श्रमिकों को समय पर भुगतान किया जा चुका है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में भरोसा बढ़ा है और श्रमिकों को उनकी मेहनत का पूरा और पारदर्शी लाभ मिल रहा है। योगी सरकार ने 6703 करोड़ रुपए की धनराशि व्यय की है, जिससे गांवों में आय के नए स्रोत तैयार हुए हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के परिवारों को मनरेगा में विशेष प्राथमिकता योगी सरकार की प्राथमिकता है कि लोगों को रोजगार के साथ सम्मान भी मिले। इसी सोच के तहत अनुसूचित जाति-जनजाति के परिवारों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि पलायन पर भी प्रभावी रोक लगी है। उत्तर प्रदेश में समावेशी विकास और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में रोजगार सृजन का बेहतर माहौल बन रहा है। मनरेगा के जरिए गांवों में विकास कार्यों को गति मिल रही है और लाखों परिवार आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। यह मॉडल उत्तर प्रदेश में समावेशी विकास और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहा है।

एएनटीएफ को मिलेंगे 150 से नये ज्यादा जांबाज, विभाग की कार्रवाई में आएगी तेजी

अवैध नशे पर लगाम और ड्रग माफियाओं की कमर तोड़ने का सीएम योगी ने लिया फैसला लखनऊ प्रदेश के युवाओं को नशे के आगोश में धकेलने वाले अवैध नशे के सौदागरों की अब खैर नहीं। योगी सरकार अवैध नशे के सौदागरों पर बड़ा एक्शन लेने जा रही है। इसके लिए योगी सरकार ने एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स (एएनटीएफ) को और मबजूत करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में एएनटीएफ में पुलिस कर्मियों को प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया गया है। इसके अलावा विभाग में नियतन के हिसाब से फोर्स भी कम है। ऐसे में योगी सरकार ने एएनटीएफ को और मजबूत करने के लिए रेग्युलर पुलिस कर्मियों की तैनाती और नियतन के अनुसार फोर्स उपब्लध कराने का निर्णय लिया है। इससे जहां एएनटीएफ को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर अवैध नशे के सौदागरों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आएगी। एएनटीएफ यूनिट पर 18 और थानों पर 28 पदों पर तैनाती का है नियतन एएनटीएफ आईजी अब्दुल हमीद ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में अवैध नशे पर नकेल कसने और ड्रग माफियाओं के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने के लिए वर्ष 2022 में एएनटीएफ का गठन किया था। इस दौरान 6 थाने और 8 यूनिट का गठन किया गया। इन थानों में 28 पुलिसकर्मियों की तैनाती का नियतन रखा गया। इसमें एक निरीक्षक, 4 उपनिरीक्षक, 3 कंप्यूटर ऑपरेटर, 3 मुख्य आरक्षी, 12 आरक्षी, 2 आरक्षी चालक और 3 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। इसी तरह यूनिट में 18 पुलिस अधिकारियों समेत कर्मचारियों की तैनाती का नियतन रखा गया। इसमें एक पुलिस उपाधीक्षक, 1 निरीक्षक, 2 उप निरीक्षक, 1 कंप्यूटर ऑपरेटर, 2 मुख्य आरक्षी, 8 आरक्षी, 2 आरक्षी चालक, 2 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में उच्च अधिकारियों के साथ एएनटीएफ की समीक्षा बैठक की थी।  वर्तमान में 236 पदों पर तैनात हैं अधिकारी-कर्मचारी, 150 और मिलेंगे नये जांबाज बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बताया कि वर्तमान में एएनटीएफ में फोर्स को प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया गया है। वहीं मानक के अनुरूप फोर्स भी नहीं है। इस पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने उच्च अधिकारियों को एएनटीएफ में सभी पुलिसकर्मियों को रेग्युलर तैनाती के निर्देश दिये। साथ ही नियतन के अनुसार जल्द से जल्द फोर्स तैनात करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ड्रग माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए विभाग का गठन किया गया। ऐसे में उन्हे ड्रग माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए फोर्स के साथ आधुनिक उपकरण तत्काल उपलब्ध कराएं जाएं। आईजी ने बताया कि एएनटीएफ में पुलिस अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों की नियुक्ति का नियतन 386 है। इसमें राजपत्रित अधिकारी 15, मुख्यालय पर 59, 6 थानों पर 168, 8 यूनिट पर 144 पदों पर तैनाती का नियतन है। वर्तमान में विभाग में 236 पदों पर तैनाती की गयी है जबकि 150 पद खाली हैं। सीएम योगी के निर्देश के बाद जल्द सभी खाली पदों पर तैनाती की जाएगी।

शादी मंडप में ड्रामा: 20 लाख और कार की डिमांड पर दुल्हन ने कराई दूल्हे की गिरफ्तारी

बरेली  यूपी के बरेली से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां शुक्रवार देर रात एक बारात में दहेज को लेकर हंगामा हो गया। दरअसल, सात फेरों से पहले दूल्हे ने कार और 20 लाख रुपए मांग रख दी। वर पक्ष ने कहा कि ऐसा न होने पर सात फेरे नहीं होंगे। वधू पक्ष ने भारी भरकम रुपये और कार देने पर असमर्थता जाहिर कर दी। इस पर हंगामा हो गया और पुलिस पहुंच गई। तब दूल्हा सात फेरे लेने के स्थान पर हवालात में पहुंच गया। पुलिस ने दूल्हा समेत छह मामला दर्ज कर लिया है। कैंट स्थित युगवीणा में धूमधाम से एक बारात पहुंची। वधू पक्ष ने जोरदार स्वागत भी किया लेकिन शादी में फेरों से पहले दूल्हा और उसके परिवार लोग ब्रेजा कार और 20 लाख रुपए मांगने पर अड़ गए। काफी समझाने बाद भी दहेज लोभी नहीं माने। जिसको लेकर बारात में हंगामा हो गया। जानकारी पर कैंट पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने दूल्हा उसके पिता और जीजा को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बताया कि दुल्हन पक्ष की ओर से तहरीर मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, कैंट थाना क्षेत्र सदर बाजार निवासी मुरली मनोहर की बेटी ज्योति की शादी करीब आठ माह पहले नई बस्ती थाना प्रेम नगर निवासी ऋषभ साथ तय हुई थी। मई महीने में लड़की पक्ष ने शहर के एक बड़े होटल में सगाई की थी। जिसमें लड़की पक्ष का तीन लाख खर्च हुआ था। इसके साथ लड़की पक्ष ने लड़के को सोने की अंगूठी चेन और 5 लाख नगद दिए थे। गुरुवार को लड़की पक्ष लग्न लेकर पहुंचे। इस दौरान लड़की पक्ष ने एसी, फ्रिज और वाशिंग मशीन साथ ही बतौर शगुन एक लाख बीस हजार रुपए नगद दिए।   प्रेमिका के साथ पति को रंगे हाथ पकड़ा, पत्नी ने चप्पलों से की जमकर धुनाई शुक्रवार देर रात लड़का पक्ष बारात लेकर पहुंचा। जहां लड़की पक्ष ने काफी धूमधाम से बारात का स्वागत किया। शादी के दौरान फेरों से पहले दूल्हा पक्ष 20 लाख रुपए नगद और एक ब्रेजा कार लेने पर मांग पर अड़ गए। काफी समझाने के बाद भी दूल्हा और उसके परिवार के लोग नहीं माने। आधी रात तक कार न मिलने की बात कहने पर कर का भी नगद भुगतान करने की मांग करने लगे। इसको लेकर बारात में हंगामा हो गया। दूल्हा पक्ष बारात कैंसल कर वापस लौटा कर ले जाने लगे। सूचना पर पहुंची कैंट पुलिस ने दूल्हा ऋषभ उसके पिता राम अवतार और जीजा को हिरासत में ले लिया। लड़की पक्ष का आरोप है कि शादी लगाने वाले इंद्रपाल ने भी उन्हें लगातार गुमराह किया। लड़की पक्ष ने बताया कि शादी में भी करीब 15 लाख रुपए खर्च आया है। इसके साथ ही रस्म के तौर पर बारात में भी दूल्हे को और उसके परिजनों को सोने की चेन अंगूठी और नकदी दी गई है। कैंट पुलिस ने बताया कि तहरीर आधार पर दूल्हा समेत 6 पर मामला दर्ज कर लिया है।  

यूपी बीजेपी का बड़ा दांव: नए अध्यक्ष के सहारे 2024 की भरपाई, अखिलेश यादव की रणनीति पर सीधा वार

लखनऊ   दो साल के इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश को जल्द ही नया बीजेपी अध्यक्ष मिलने वाला है। शनिवार यानी आज चुनाव का ऐलान और नामांकन की प्रक्रिया हो सकती है। वहीं रविवार को नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा की संभावना है। इस बीच बड़े नेताओं के लखनऊ पहुंचने का सिलसिला शूरू हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बड़े कार्यक्रम और धूमधाम के साथ नए अध्यक्ष का ऐलान हो सकता है। हालांकि यूपी बीजेपी की कमान किसे मिलने वाली है इसपर सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है। जमीनी रिपोर्ट्स की मानें तो बीजेपी इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए ऐसे नेता को पार्टी की कमान दे सकती है जो कि अखिलेश यादव के पीडीए फार्मुले का तोड़ बन जाए। ऐसे में संभावना किसी ओबीसी नेता को यह बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। सूत्रों की मानें तो ओबीसी और ब्राह्मण समुदाय के नेता इस रेस में हैं। बताया जा रहा है कि ओबीसी समाज से आने वाले केंद्यीर राज्य मंत्री पंकज चौधरी के नामांकन का पूरा प्लान है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री धर्मपाल लोधी और बीएल वर्मा के नाम पर भी चर्चा की गई है। कयास बहुत लगाए जाते हैं पर बीजेपी ऐसी पार्टी है जो कि हर फैसले में लोगों को चौंका देती है। ऐसे में यूपी में बीजेपी की दशा और दिशा तय करने की अहम जिम्मेदारी किसे दी जाएगी इसपर स्पष्टता से कुछ नहीं कहा जा सकता। बीजेपी निकालेगी एसपी के पीडीए की काट? 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कुर्मी चेहरों को ज्यादा तवज्जो दी थी। इस वजह से बीजेपी को कुर्मी वोटों को नुकसान उठाना पड़ा था। 2022 तक यह वोट बीजेपी के ही साथ था। बीजेपी चाहती है कि यह वोटबैंक फिर से पार्टी के साथ आ जाए। पूर्वांचल के करीब 20 जिलों में कुर्मी वोटों को खूब दबदबा है। इनकी आबादी करीब 9 फीसदी बताई जाती है। यादवों के बाद सबसे ज्यादा कुर्मियों की आबादी है। इसके अलावा बीजेपी अपना दल के दबाव को भी कम करना चाहती है। बीजेपी चाहती है कि वह संदेश दे कि वह सभी वर्गों का खयाल रखती है। इस रेस में धर्मपाल लोधी का नाम भी आगे है। कल्याण सिंह के बाद उत्तर प्रदेश में लोधी समाज से कोई बड़ा चेहरा आगे नहीं आया। जबकि यह समाज बीजेपी के साथ ही खड़ा है। पश्चिम और मध्य यूपी में लोधी समाज का अच्छा दखल है। ऐसे में इसमें भी अश्चर्य नहीं होगा कि बीजेपी को लोध समाज से नया अध्यक्ष मिल जाए। बात निषाद समाज की हो तो बीजेपी की पकड़ इस समाज पर कमजोर है। इस वजह से बीजेपी को गठबंधन का सहारा लेना पड़ता है। इसमें आश्चर्च नहीं होगा अगर बीजेपी इस समाज से अपना अध्यक्ष चुनती है। बिहार चुनाव में निरंजन ज्योति को बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं ब्राह्मण चेहरे की बात करें तो पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी और यूपी बीजेपी महामंत्री गोविंद शुक्ला को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। हालांकि इसमें कोई शक नहीं है कि 2027 के चुनाव को ध्यान में रखकर ही यूपी बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा।  

धान किसानों को 4500 करोड़ से अधिक का भुगतान

धान खरीद (2025-26) : 3.15 लाख से अधिक किसानों से हुई 19.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद  योगी आदित्यनाथ सरकार का किसानों की ‘आर्थिक समृद्धि’ पर जोर  धान किसानों को 4500 करोड़ से अधिक का भुगतान  धान खरीद सत्र में पंजीकृत हुए 7.83 लाख से अधिक किसान  धान बिक्री के लिए पूरे प्रदेश में स्थापित किए जा चुके हैं 4645 धान क्रय केंद्र  35 हजार से अधिक किसानों से हुई बाजरा खरीद, 421.39 करोड़ रुपये हुआ भुगतान  लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार का अन्नदाता किसानों की ‘आर्थिक समृद्धि’ पर विशेष जोर है। योगी सरकार एक तरफ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के लिए 4645 क्रय केंद्र स्थापित कर सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है तो वहीं दूसरी ओर डीबीटी के माध्यम से किसानों को सीधे अकाउंट में पैसे भी भेज रही है। आंकड़ों पर ध्यान दें तो 3.15 लाख से अधिक किसानों से 19.14 लाख मीट्रिक टन धान खरीद हो चुकी है। इसके एवज में किसानों को 4500 करोड़ से अधिक का भुगतान भी किया जा चुका है। यही नहीं, बाजरा बिक्री करने वाले 35 हजार से अधिक किसानों को 421.39 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश में ‘श्रीअन्न’ की खरीद पहली अक्टूबर से हो रही है। पहली अक्टूबर से पश्चिम उत्तर प्रदेश व पहली नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान खरीद हो रही है।  पिछले सत्र से अधिक किसानों ने कराया पंजीकरण  योगी सरकार साल दर साल अपने ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में 13 दिसंबर तक 6.70 लाख किसानों ने धान बिक्री के लिए पंजीकरण कराया था, जबकि 2025-26 में अब तक यह आंकड़ा 7.83 लाख से अधिक है। बाजरा बिक्री के लिए पिछले वर्ष इस अवधि तक 21630 किसानों का पंजीकरण हुआ था, जो इस वर्ष में 80 हजार से अधिक हो गया है। वहीं ज्वार व मक्का में भी पंजीकरण बढ़ गया। ज्वार बिक्री के लिए पिछले साल 12 हजार किसानों ने पंजीकरण कराया था, इस साल 16 हजार से अधिक किसानों का पंजीकरण हो चुका है। बाजरा खरीद 33 व ज्वार खरीद 11 जनपदों में हो रही है।  धान किसानों को 4500 व बाजरा किसानों को 421 करोड़ से अधिक का भुगतान खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ धान की बिक्री, किसानों को भुगतान, क्रय केंद्र की व्यवस्था आदि को लेकर निरंतर समीक्षा बैठक कर रहे हैं। उन्होंने किसानों को समय से भुगतान करने का निर्देश दिया है। शनिवार दोपहर 12 बजे तक 3.15 लाख किसानों से 19.14 लाख मीट्रिक टन धान खरीद हो चुकी है। इस एवज में यूपी के किसानों को 4541.94 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अब तक 4645 क्रय केंद्र भी स्थापित हो चुके हैं। वहीं ‘श्रीअन्न’ की बात करें तो बाजरा किसानों को 421.39 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है, पिछले वर्ष इस अवधि तक 187.98 करोड़ रुपये भुगतान हुआ था। सीएम योगी की मॉनीटरिंग से इस वर्ष किसानों को तेजी से भुगतान किया जा रहा है।  31 दिसंबर तक होगी ‘श्रीअन्न’ की खरीद  ‘श्रीअन्न’ की खरीद पहली अक्टूबर से शुरू हुई थी, जो 31 दिसंबर तक चलेगी। श्रीअन्न के अंतर्गत बाजरा 33, मक्का 25 व ज्वार खरीद 11 जनपदों में हो रही है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी व पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी तक धान खरीद होगी। धान (कॉमन) का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 व (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। ज्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य (मालदांडी) 3749, ज्वार (हाईब्रिड) 3699 रुपये प्रति कुंतल, बाजरा का 2775 व मक्का का 2400 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है।

पंकज चौधरी ने भरा यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद का नामांकन, योगी–केशव का मिला समर्थन

लखनऊ   उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 18वें अध्यक्ष के चुनाव के लिए चल रही अटकलों पर आज उस वक्त विराम लग गया, जब केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पंकज चौधरी के नाम का प्रस्ताव किया। संगठन चुनाव प्रभारी महेंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि पंकज चौधरी ने चार सेट में अपना नामाकन पत्र दाखिल किया है। इन पर योगी आदित्यनाथ और कैशव मौर्य के अलावा डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, स्मृति ईरानी, स्वतंत्र देव सिंह, सूर्य प्रताप शाही, सुरेश खन्ना और बेबी रानी मौर्य बतौर प्रस्तावक हस्ताक्षर किए हैं। पार्टी के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, शनिवार को नामांकन पत्र दाखिल करने का दिन था। सुबह से ही लखनऊ स्थित बीजेपी मुख्यालय पर गहमागहमी रही। शनिवार सुबह तक दिल्ली में रहे पंकज चौधरी लखनऊ पहुंचे और वहां से पार्टी कार्यालय पहुंचकर अपना नामांकन पत्र भरा। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के अलावा पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े और महेंद्र नाथ पांडेय पहले से मौजूद रहे। विनोद तावड़े की उपस्थिति में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री जैसे शीर्ष नेताओं के प्रस्तावक बनने से यह साफ हो गया है कि पंकज चौधरी का नाम केंद्रीय नेतृत्व द्वारा सर्वसम्मति से तय किया गया है। पंकज चौधरी की ताजपोशी क्यों अहम पंकज चौधरी महाराजगंज से सात बार के अनुभवी सांसद हैं और कुर्मी (OBC) समुदाय से आते हैं। उनकी ताजपोशी के पीछे पार्टी की गहरी राजनीतिक रणनीति है। पंकज चौधरी को अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने विपक्ष खासकर सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट करेगी और प्रदेश में ओबीसी वोट बैंक पर अपनी पकड़ और मजबूत करेगी। ओबीसी नेता को सौंपकर पार्टी ने सत्ता और संगठन के बीच जातीय संतुलन को प्रभावी ढंग से साध लिया है। पूर्वांचल पर फोकस पंकज चौधरी का मजबूत आधार पूर्वांचल है, जो आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए निर्णायक क्षेत्र है। पूर्वांचल में ही लोकसभा चुनाव के दौरान सपा को बड़ी जीत मिली थी। ऐसे में पंकज चौधरी के जरिए सपा बड़ा दांव खेला गया है। कल होगी औपचारिक घोषणा संगठन चुनाव प्रभारी डॉ. महेंद्रनाथ पाण्डेय द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब 14 दिसंबर को नए प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की जाएगी। चूंकि नामांकन केवल पंकज चौधरी ने ही किया है और उन्हें शीर्ष नेतृत्व का समर्थन प्राप्त है, इसलिए उनका निर्विरोध निर्वाचन होना तय है। पंकज चौधरी की ताजपोशी से प्रदेश भाजपा में एक नए युग की शुरुआत होगी, जिसकी सीधी चुनौती 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए बड़ी जीत हासिल करना होगा।  

उत्तर प्रदेश बीजेपी में आज खत्म होगा अध्यक्ष पद का सस्पेंस, पंकज चौधरी का नाम तय होने की संभावना

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में बीजेपी को आज नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है. आज प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में नामांकन होना है. सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का नाम लगभग तय माना जा रहा है और अगर उनके अलावा किसी और उम्मीदवार का नामांकन नहीं होता है तो आज ही प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर मुहर लग सकती है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक पंकज चौधरी का चुनाव लगभग तय माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि आज दोपहर 2 बजे तक उनके नाम का अनौपचारिक ऐलान भी हो सकता है. इसकी वजह यह है कि पंकज चौधरी के अलावा किसी दूसरे नेता के नामांकन की संभावना बेहद कम मानी जा रही है. सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पंकज चौधरी के प्रस्तावक होंगे. अगर अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ एक ही नामांकन होता है और चुनाव की स्थिति नहीं बनती है तो आज ही यह साफ हो जाएगा कि उत्तर प्रदेश बीजेपी का अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा. हालांकि प्रदेश अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा बीजेपी रविवार को करेगी. रविवार दोपहर 12 बजे लखनऊ के एक बड़े सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जहां राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नाम का भी ऐलान किया जाएगा. ज्यादातर सांसद भी आज लखनऊ में ही रहेंगे. उन्हें राष्ट्रीय परिषद के नामांकन के लिए बुलाया गया है. दूसरे नाम भी रेस में, लेकिन संभावना कम हालांकि पंकज चौधरी के अलावा कुछ और नाम भी चर्चा में रहे हैं. इनमें केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा और पूर्व सांसद निरंजन रंजन ज्योति का नाम भी रेस में बताया जा रहा है. लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन नामों के नामांकन की संभावना फिलहाल बेहद कम है. ओबीसी चेहरे पर बीजेपी का फोकस दरअसल, प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर सस्पेंस बनाए रखकर बीजेपी ने इसे लगभग एक बड़े राजनीतिक इवेंट का रूप दे दिया है. पार्टी ने यह लगभग तय कर लिया है कि इस बार उत्तर प्रदेश में ओबीसी चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा. इसे बीजेपी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है. पंकज चौधरी ओबीसी वर्ग की कुर्मी बिरादरी से आते हैं और वे सात बार सांसद रह चुके हैं. ऐसे में अगर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है तो यह यूपी की राजनीति में एक बड़ा संदेश होगा. पूर्वांचल फैक्टर… सूत्रों के मुताबिक अगर पंकज चौधरी ही प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं तो मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों पूर्वांचल से होंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से आते हैं, जबकि पंकज चौधरी महाराजगंज से हैं. दोनों जिले एक-दूसरे से सटे हुए हैं. ऐसे में जहां एक ओर बीजेपी ओबीसी और खासकर कुर्मी वोटरों को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष का लगभग एक ही इलाके से होना कुछ सवाल भी खड़े कर रहा है. 2024 की नाराजगी साधने की कोशिश? बीजेपी को 2024 के लोकसभा चुनाव में ओबीसी वर्ग और खासकर कुर्मी समाज की नाराजगी का सामना करना पड़ा था. अब पंकज चौधरी के नाम के जरिए पार्टी इस वर्ग को फिर से अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रही है.