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फैजाबाद के ‘डंका शाह’ की कहानी, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जगाई आजादी की आग

 अयोध्या  जिले के फैजाबाद शहर की शहादत की एक कहानी अनसुनी है। यह कहानी एक बागी संत मौलाना अहमदुल्लाह शाह की है जिन्होंने देश की आजादी के लिए बलिदान दे दिया था। उनको 156 साल पहले 5 जून 1858 को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों के इशारे पर धोखा देकर मार दिया गया था। नगाड़ा साथ लेकर चलते थे मौलाना मौलाना अहमदुल्लाह शाह की कहानी उस साहस और बलिदान को याद दिलाती है, जिसने भारत की आजादी की 1857 की पहली महान लड़ाई को आकार दिया था। मौलाना अहमदुल्लाह शाह को 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था। कहा जाता है कि वे अपने साथ एक नगाड़ा लेकर चलते थे जिससे लोगों को उनके आगमन का संकेत मिलता था। जीवन आजादी के लिए समर्पित करने की प्रेरणा बताया जाता है कि अहमदुल्लाह शाह के आध्यात्मिक गुरु एक हिंदू साधु थे, जिन्होंने उन्हें देश को आजादी दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित करने के लिए प्रेरित किया था। उनके बारे में 'अवध एब्स्ट्रैक्ट प्रोसीडिंग्स' सहित अन्य अभिलेखीय रिकॉर्ड में लिखा गया है कि उनका प्रभावशाली व्यक्तित्व था और वे जोशीले भाषण देते थे। वे अपने भाषणों से लोगों में जोश भर देते थे और उनको अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने को प्रेरित करते थे। वे बिना थके अलग-अलग इलाकों का दौरा करते थे और जहां भी जाते थे, लोगों का समर्थन जुटाने में सफल होते थे। मौलाना को अंग्रेज मानते थे बड़ा खतरा अंग्रेज मौलाना अहमदुल्लाह शाह को एक गंभीर खतरा मानते थे। एक समय उनके लखनऊ और आगरा जैसे बड़े शहरों में प्रवेश पर रोक लगाने के आदेश भी जारी किए गए थे। उनकी मौजूदगी से ही अंग्रेजी शासन के अधिकारी सतर्क हो जाते थे। सार्वजनिक सभाओं के दौरान उन्हें सेना के जवान घेर लेते थे। सन 1857 की क्रांति के दौरान क्रांतिकारियों ने उन्हें अपनी 22वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट का नेता नियुक्त किया था। हालांकि कर्नल लेनॉक्स ने उन्हें पकड़कर मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन बागियों ने उन्हें छुड़ा लिया था। फैजाबाद उनका मुख्य केंद्र था। वे यहीं से पूरे अवध में अंग्रेजी शासन के विरोध की गतिविधियां चलाते थे। शाहजहांपुर के राजा ने कराई थी हत्या जब उनकी सेना लखनऊ की ओर बढ़ी तो वहां उनका फिर से अंग्रेजों से सामना हुआ। उन्हें विशेष रूप से चिनहट की लड़ाई (30 जून 1857) में उनकी भूमिका के लिए याद किया जाता है। उनके बढ़ते प्रभाव के चलते वे औपनिवेशिक शासन के मुख्य निशाने पर आ गए थे। जब वे औपनिवेशिक शासन के विरोध में संघर्ष के लिए समर्थन मांगने जा रहे थे, तब शाहजहांपुर के राजा जगन्नाथ सिंह ने उनकी हत्या कर दी थी। यह घटना 5 जून 1857 को हुई थी।  

मुख्यमंत्री ने किए मां पाटेश्वरी के दर्शन

लखनऊ/बलरामपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार सुबह तुलसीपुर में देवी शक्तिपीठ मां पाटेश्वरी मंदिर में दर्शन, पूजन-अर्चन किया। उन्होंने मां की आरती उतारी और सुखी, स्वस्थ व समृद्ध उत्तर प्रदेश की कामना की। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और श्रद्धालुओं का अभिवादन भी किया।  सीएम योगी शुक्रवार को बलरामपुर पहुंचे। यहां विकास कार्यों के लोकार्पण- शिलान्यास के बाद मंदिर में रात्रि विश्राम किया। शनिवार सुबह दर्शन-पूजन के बाद मंदिर में आये श्रद्धालुओं का अभिवादन भी किया। सीएम ने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा व स्वच्छता की समुचित व्यवस्था का भी निर्देश दिया।  स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों, संतों आदि से मुलाकात भी की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने गोंडा के लिए प्रस्थान किया।  दर्शन-पूजन के दौरान महंत मिथिलेश नाथ योगी, कालीबाड़ी गोरखपुर के महंत रविंद्र दास जी, विधायक पलटूराम, कैलाश नारायण शुक्ल आदि भी मौजूद रहे।

शिक्षकों के लिए खुशखबरी: तदर्थ सेवा अवधि अब पेंशन गणना में शामिल होगी

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तदर्थ (एडहॉक) सेवा अवधि को पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना में शामिल करने के मामले में शिक्षकों को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने कानपुर के उप शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) द्वारा छह मई 2026 को पारित उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ताओं को तदर्थ सेवाओं का लाभ देने से इनकार किया गया था। हाई कोर्ट के इस निर्णय से प्रभावित शिक्षकों को सीधा लाभ होगा। उन्हें हाई कोर्ट के इस निर्णय का फायदा पेंशन में मिलेगा। रमेश सिंह चौहान और तीन अन्य शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी संपूर्ण सेवा अवधि, जिसमें तदर्थ सेवाकाल भी शामिल है, को पेंशन, चयनित ग्रेड और पदोन्नति संबंधी लाभों की गणना में जोड़ने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके दावे को केवल इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के दायरे में है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि तदर्थ सेवाओं को पेंशन प्रयोजन के लिए मान्य करने का मुद्दा पहले ही नंद लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में तय हो चुका है। अदालत ने माना कि वर्तमान मामला पूर्व में दिए गए निर्णयों से पूरी तरह आच्छादित है। इसके बाद कोर्ट ने उप शिक्षा निदेशक को तदर्थ सेवा अवधि जोड़कर पेंशन की पुनर्गणना करने, समस्त बकाया भुगतान सुनिश्चित करने और आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने के दो महीने के भीतर पूरी कार्रवाई संपन्न करने का निर्देश दिया। साथ ही याचिका का निस्तारण कर दिया गया। जाहिर है कि इस आदेश के बाद अब संबंधित शिक्षकों की तदर्थ (एडहॉक) सेवा अवधि को भी पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना में शामिल किया जाएगा।

“राम नाम पर पहले पाबंदी थी” – गोंडा में विपक्ष पर जमकर बरसे सीएम योगी

गोंडा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोंडा को 515.6 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का उपहार दिया। उन्होंने इस मौके पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले यहां पर भगवान श्रीराम का नाम लेने पर प्रतिबंध था। भगवान का नाम लेने वाले श्रद्धालुओं पर डंडे बरसते थे। अब ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अब अगर कोई उत्सव के रंग में भंग डालने का काम करेगा तो उसका भविष्य स्वाहा हो जाएगा। सीएम योगी ने गोंडा में परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करने के बाद जनसभा को संबोधित किया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद गोंडा का विकास तुष्टीकरण, अराजकता, भाई-भतीजावाद और जातिवाद की भेंट चढ़ गया था। उसी का खामियाजा गोंडा को भुगतना पढ़ा। जहां सरयू मैया की असीम कृपा रहनी चाहिए थी। जहां फसले लहलहाते हुए देश के पेट को भरने का कार्य करती। वह जनपद पिछड़ता गया। सीएम योगी ने कहा कि महाराज सुहेलदेव हमारे लिए प्रेरणा है। आक्रांताओं को दहलाने वाला शौर्य कैसा होना चाहिए, महाराज सुहेलदेव उसके प्रतीक हैं। विदेशी आक्रांताओं के साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए, विदेशी आक्रांताओं का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए इसकी प्रेरणा महराज सुहेलदेव ने हम सबको एक हजार वर्ष पहले दी थी। देश की आजादी में कैसे त्याग और बलिदान होना चाहिए गोंडा उसका प्रतीक है। आज गोंडा के पास अपना इंजीनियरिंग और एग्रीकल्चर कॉलेज है। कम्पोजिट विद्यालय और अस्पताल बन रहे हैं। गोंडा में जहां जो चाहिए वो विकास किया जा रहा है। विकास के कार्य, गरीब कल्याणकारी कार्य, विरासत से जुड़े हुए कार्य, नौजवानों के लिए नौकरी और निवेश के माध्यम से रोजगार हो। यह तब संभव हो पा रहा है, जब आपने कमल का बटन दबाया। अच्छी सरकार चुनोगे तो अच्छे परिणाम आएंगे। सीएम योगी ने कहा कि अब तो श्री अयोध्या धाम में राम भक्त के अलावा कोई 'रामद्रोही' घुस ही नहीं सकता है। ऐसी व्यवस्था कर दी गई है। आज अयोध्या चमक रही है। एक नई अयोध्या का मॉडल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि 2015-16 में भी दुर्गा पूजा के समय गोंडा में दंगे का प्रयास किया गया था। मां दुर्गा की पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन नहीं किया जाता था। उत्सव के पहले उपद्रव होता था। उन्होंने कहा कि बेटी सुरक्षित नहीं। व्यापारी सुरक्षित नहीं। और सत्ता में बैठे लोग 2017 के पहले इन दंगाई और पेशेवर गुंडो के सामने नतमस्तक होते थे। प्रदेश में कर्फ्यू रहता था। अब उत्सव के रंग में किसी ने भंग डालने का काम किया तो उसका वर्तमान तो जाएगा ही, उसका भविष्य भी स्वाहा हो जाएगा। 500 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है। अब उत्तर प्रदेश में कानून का राज है और कोई भी अपराधियों के रंग में भंग नहीं डाल सकता। अयोध्या में अब रामभक्तों के अलावा कोई रामद्रोही कदम भी नहीं रख सकता।

ऑनलाइन सीट बुकिंग कर स्टेज कैरिज की तरह चल रहीं बसों पर होगी सख्त कार्रवाई

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अखिल भारतीय पर्यटक परमिट (AITP) के तहत संचालित उन बसों के खिलाफ परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीटवार बुकिंग कर स्टेज कैरिज की तरह संचालन कर रही हैं। परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश के निर्देश पर 9 से 11 जून तक प्रदेशव्यापी विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण ने बताया कि अभियान के तहत प्रदेश के प्रमुख मार्गों, एक्सप्रेस-वे और टोल प्लाजाओं पर 24 घंटे प्रवर्तन दल तैनात रहेंगे। विशेष रूप से यमुना एक्सप्रेस-वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर सघन जांच अभियान चलाया जाएगा, ताकि नियमों के विपरीत संचालित हो रही बसों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। अवैध यात्री परिवहन पर रहेगी विशेष नजर परिवहन विभाग के अनुसार, कुछ पर्यटक परमिट धारक बसें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग यात्रियों को सीटवार टिकट बेचकर स्टेज कैरिज की तरह संचालन कर रही हैं, जो परिवहन नियमों के अनुरूप नहीं है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने और अवैध यात्री परिवहन को नियंत्रित करने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। संयुक्त टीमें करेंगी कार्रवाई डॉ. उदित नारायण ने बताया कि अभियान के दौरान परिवहन विभाग, यात्रीकर अधिकारियों और रोडवेज अधिकारियों की संयुक्त टीमें विभिन्न स्थानों पर जांच करेंगी। चेकिंग के दौरान दस्तावेजों, परमिट की शर्तों और संचालन प्रणाली की गहन पड़ताल की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर चालान, जुर्माना और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। गौतमबुद्ध नगर में पहले से जारी है कार्रवाई उन्होंने बताया कि गौतमबुद्ध नगर में प्रवर्तन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। मई माह के दौरान 242 बसों की जांच की गई, जिनके खिलाफ विभिन्न मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब एक लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसके अलावा वाहनों पर बकाया 67 लाख रुपये का कर भी जमा कराया गया। यात्रियों की सुरक्षा और नियमों के पालन पर जोर परिवहन विभाग का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अवैध यात्री परिवहन पर प्रभावी रोक लगाना, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और परिवहन नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराना है। विभाग को उम्मीद है कि विशेष चेकिंग अभियान के माध्यम से नियमों के विरुद्ध संचालित हो रही बसों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।  

अच्छे जनप्रतिनिधियों से बहती है विकास की धारा: मुख्यमंत्री

माफिया को चुनकर भेजोगे तो गरीबों का खून चूसेगा: मुख्यमंत्री सीएम योगी ने बलरामपुर में 300 करोड़ से अधिक की योजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास अच्छे जनप्रतिनिधियों से बहती है विकास की धारा: मुख्यमंत्री अब किसी गरीब का राशन नहीं खा सकता है माफिया: सीएम योगी सीएम बोले- बेटी या व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों को छोड़ेंगे नहीं बलरामपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास की प्रक्रिया तब आगे बढ़ती है, जब जनता अच्छे लोगों को चुनती है। माफिया को चुनकर भेजोगे तो गरीबों का खून चूसेगा। हमने माफिया को तबाह किया, उसकी जमीनों पर गरीबों के लिए मकान बना रहे हैं। डबल इंजन की सरकार डबल स्पीड के साथ काम कर रही है। किसान, व्यापारी, महिला को सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। आज हर जनपद विकास की मुख्यधारा से जुड़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर के मध्यनगर बिलोहा में शुक्रवार को 300 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण व अन्य शासकीय योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित भी किया गया। सीएम ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। उन्होंने प्रगति के पथ पर अग्रसर बलरामपुर के विकास मॉडल पर जनता से सीधा संवाद भी किया। गोरखपुर से आकर करता था मदद मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से नौ वर्ष पूर्व बलरामपुर में जब भी दुर्गा पूजा होती थी, पचपेड़वा, गैसड़ी, बलरामपुर, उतरौला आदि जगहों पर दंगे होते थे। मुझे गोरखपुर से आकर लोगों की मदद करनी पड़ती थी। आज उत्तर प्रदेश के 75 जनपद, 350 तहसीलें और 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें दंगामुक्त हैं। विकास की प्रक्रिया के साथ प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। बलरामपुर के लोग 2017 से पहले कहीं जाते थे तो पहचान का संकट था। लोग माफिया से जोड़कर देखते थे। लेकिन, माफिया आज मिट्टी में मिल गए, कोई पहचान का संकट नहीं। आज बाहर जाएं और कहें कि आप यूपी से हैं तो आपको पूरा सम्मान मिलेगा। अब किसी गरीब का राशन नहीं खाता माफिया मुख्यमंत्री ने कहा कि याद करिए 2017 के पहले गरीब को राशन नहीं मिलता था। सपा के गुंडे राशन खा जाते थे। अब हर गरीब को फ्री में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। गांवों में आय, निवास प्रमाण पत्र की भी सुविधा दी जा रही है। गरीब के उपचार के लिए आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। एक ओर गरीब कल्याणकारी योजनाएं और दूसरी ओर विकास कार्य बढ़ाए गए। सभी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव दिया जा रहा है। पीएम मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ विजन के तहत काम हो रहा है। सुरक्षित माहौल में हो रहा निवेश मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी ने बेटी या व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो फिर उसको छोड़ेंगे भी नहीं। यही सरकार की घोषित नीति है। प्रदेश के सुरक्षित माहौल में आज निवेश हो रहा है। बलरामपुर सौभाग्यशाली है कि चीनी मिल द्वारा प्लास्टिक जैसे एक मैटीरियल का निर्माण हो रहा है, जो उपयोग के बाद मिट्टी में मिल जाएगा। देश का सबसे युवा राज्य है यूपी मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यूपी की पहचान सबसे ज्यादा निवेश, रोजगार, देश के सबसे युवा राज्य के रूप में हो रही है। यूपी को अयोध्या, काशी, मां पाटेश्वरी, मां शाकम्भरी, नैमिषारण्य, श्रावस्ती, जैन तीर्थंकरों की भूमि के रूप में नई पहचान मिल रही है। यह सम्मान आपको इसलिए मिल रहा है, क्योंकि आपने अच्छे जनप्रतिनिधियों को चुनकर भेजा है। आपने कैलाशनाथ शुक्ला, राम प्रताप वर्मा, पलटूराम को जिताया।  तुलसीपुर गैसड़ी बॉर्डर पर जनसभा की बड़ी वजह मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मैं गैसड़ी और तुलसीपुर विधानसभा के बॉर्डर पर आया हूं। मैं 2007 में तुलसीपुर आया था, तब मांग हो रही थी कि मथुरा घाट में राप्ती नदी पर पुल बने। जैसे ही आपने कैलाश नाथ शुक्ला को तुलसीपुर से विधायक बनाया, मथुरा घाट पर भी पुल की स्वीकृति मिल चुकी है। तुलसीपुर और बलरामपुर में विकास हो रहा है। गैसड़ी में शैलेंद्र सिंह शैलू विधायक होते तो तेजी से विकास लाते। अच्छे लोग चुनेंगे तो अच्छे परिणाम आएंगे। जब आप परिवारवाद से ऊपर उठे और सत्ता परिवर्तन किया तो सरकार ने गरीब को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा। विकास, सुरक्षा व सुशासन दिया। विश्वविद्यालय दिया, गरीब बच्चों को स्कॉलरशिप दी। बलरामपुर की उपलब्धियां और पर्यावरण संरक्षण का संदेश मुख्यमंत्री ने बलरामपुर की उपलब्धियों के साथ पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रेरित करता है कि जल है तो कल है। अगर हम जलस्रोत गंदा करते हैं या वन की कटान करते हैं तो पर्यावरण की क्षति होती है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की कीमत मानव को चुकानी होगी। आज तुलसीपुर को 300 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। नौ वर्ष पूर्व यह आकांक्षात्मक जनपद था। नीति आयोग के मानकों में देश के सबसे पिछड़े जनपदों में यह जिला था। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने डबल स्पीड से काम किया तो यह जनपद विकसित होने की ओर तेजी से बढ़ा है। सीएम योगी ने कहा कि एक समय बलरामपुर में बिजली, सड़क, सरयू राष्ट्रीय परियोजना, मेडिकल कालेज या हर घर नल योजना साकार होने के बारे में कोई सोच नहीं सकता था। किसी ने थारू संग्रहालय या मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बनाने की बात नहीं सोची होगी। हमने मां पाटेश्वरी के नाम पर विश्वविद्यालय बनाया। अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर मेडिकल कालेज का निर्माण और नानाजी देशमुख की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखते हुए थारू संग्रहालय बनाया। वनटांगिया गांवों के लोगों को आवासीय या जमीन के पट्टे देकर नागरिकता दी। आज थारू जनजाति के लोगों के पास अपना मकान और बच्चों के लिए स्कूल है।  सर्वाधिक नामांकन बलरामपुर में हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष सर्वाधिक नामांकन बलरामपुर में हुए हैं। यह शुभ लक्षण है। सीमावर्ती जनपद होने के नाते, विकास की प्रक्रिया के साथ तेजी से बढ़ रहा बलरामपुर विकास का मॉडल बन रहा है। बलरामपुर में विकास परियोजनाओं का शिलान्यास/लोकार्पण कुल परियोजनाएं: 126 लोकार्पण: 89 शिलान्यास: 37 कुल लागत: 392.25 करोड़ लोकार्पण की योजनाओं की लागत: 301.50 करोड़ शिलान्यास वाली योजनाओं की … Read more

KCC योजना: किसानों की खेती को मजबूत बनाने वाला बड़ा वित्तीय साधन

लखनऊ खेती में खर्चों का सिलसिला फसल बेचने से पहले शुरू हो जाता है। किसान को बीज खरीदने होते हैं। खाद और सिंचाई का इंतजाम करना होता है। मजदूरी और मशीन का खर्च भी कई बार तुरंत आ जाता है। ऐसे समय में किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को समय पर कर्ज़ लेने में मदद करता है। इससे उन्हें महंगे कर्ज़ पर निर्भर रहने की जरूरत कम होती है और गांव की कमाई और खेती से जुड़ी गतिविधियां मजबूत होती हैं। किसानों तक पहुंच रही कर्ज़ की सुविधा वर्ष 2017 से 2025 तक उत्तर प्रदेश में खेती के लिए 13,42,978.3 करोड़ का कर्ज़ दिया गया। इसके साथ ही नवंबर 2025 तक 492.46 लाख किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए। यह दिखाता है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में किसानों तक खेती के लिए कर्ज़ की सुविधा पहुंची है। किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए कर्ज़लेने में मदद करता है। यह सुविधा बुवाई, फसल की देखभाल और कटाई की तैयारी के समय बहुत काम आती है। कई बार किसान को फसल बेचने से पहले ही पैसों की जरूरत पड़ती है। किसान क्रेडिट कार्ड इसी जरूरत को पूरा करता है। गांवों के लिए क्यों जरूरी है किसान क्रेडिट कार्ड गांव में खेती रुकती है तो कई छोटे काम भी रुक जाते हैं। किसान बीज खरीदता है तो दुकान चलती है। मजदूरी देता है तो गांव में आमदनी बढ़ती है। मशीन किराए पर लेता है तो स्थानीय कामकाज को भी सहारा मिलता है। किसान क्रेडिट कार्ड अचानक आने वाली खेती की जरूरतों में भी मदद करता है। किसान को फसल बिकने का इंतजार नहीं करना पड़ता। वह जरूरी खर्च के लिए कर्ज़ का उपयोग कर सकता है। इससे खेती का काम बिना रुकावट आगे बढ़ता है। किसान क्रेडिट कार्ड की मुख्य जानकारी ये आंकड़े बताते हैं कि किसान क्रेडिट कार्ड और फसल ऋण उत्तर प्रदेश की गांव की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन रहे हैं। छोटे और सीमांत किसानों को मदद किसान क्रेडिट कार्ड छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत उपयोगी है। ऐसे किसानों के पास अक्सर बचत कम होती है। खेती का खर्च फसल से होने वाली कमाई से पहले आ जाता है। किसान को बीज, सिंचाई, डीजल, खाद या मजदूरी के लिए तुरंत पैसों की जरूरत पड़ सकती है। कर्ज़ की सुविधा मिलने से किसान बिना समय गंवाए खेती का काम जारी रख पाते हैं। प्रदेश में किसानों के लिए दूसरे कदम भी उठाए गए हैं। वर्ष 2017 के बाद 86 लाख से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को पुराने कर्ज़ का बोझ कम करने में मदद मिली। पीएम-किसान के तहत 3.12 करोड़ किसानों को 22 किस्तों में 99,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली। इन कदमों से किसानों को सीधी आर्थिकमदद मिली और खेती की जरूरतों में सहारा मिला। फसल नुकसान पर मदद खेती में कर्ज़ सुविधा तब और उपयोगी होती है जब फसल नुकसान के समय भी किसानों को सहायता मिले। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2017-18 से 2025-26 के बीच 353.14 लाख बीमा वाले किसानों को 5,660.33 करोड़ रुपये की मदद राशि मिली। इससे फसल खराब होने पर किसानों पर आर्थिक दबाव कम होता है। किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसानऔर फसल बीमा मिलकर किसानों को मजबूत सहारा देते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड खेती से पहले और खेती के दौरान पैसों की सुविधा देता है। पीएम-किसान सीधी आर्थिक मदद देता है। फसल बीमा नुकसान के समय सहारा देता है। सहकारी बैंकों से बढ़ी कर्ज़ की सुविधा गांवों में ककर्ज़ सुविधा को सहकारी बैंकों से भी मजबूती मिलती है। वर्ष 2017 से 2025 के बीच उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक का कर्ज़ वितरण 9,190 करोड़ रुपये से बढ़कर 23,061 करोड़ रुपये हो गया। बैंक का शुद्ध लाभ 32.82 करोड़ रुपये से बढ़कर 100.24 करोड़ रुपये हो गया। जिला सहकारी बैंकोंका कुल कारोबार भी 28,349 करोड़ रुपये से बढ़कर 41,234 करोड़ रुपये हो गया। सहकारी बैंक गांवों और किसानों से सीधे जुड़े होते हैं। जब ये बैंक मजबूत होते हैं, तो किसानों और गांव के छोटे कारोबारों को कर्ज़ लेना आसान होता है। इससे खेती, छोटे व्यापार और स्थानीय कामकाज को मदद मिलती है। बीज और खेती की जरूरतों में मदद खेती के लिए कर्ज के साथ अच्छे बीज और जरूरी सामग्री भी समय पर मिलनी चाहिए। वर्ष 2017-18 से 2025 तक किसानों को 546.85 लाख क्विंटल अच्छी गुणवत्ता वाले बीज बांटे गए। इससे किसानों को बेहतर बीज की सुविधा मिली। जब किसानों को कर्ज और खेती की सामग्री दोनों समय पर मिलते हैं, तो खेती की तैयारी बेहतर होती है। किसान बुवाई और फसल की देखभाल की योजना सही तरीके से बना पाते हैं। पाठकों के लिए नोट: यह लेख एचटी ब्रांड स्टूडियो द्वारा ब्रांड की ओर से तैयार किया गया है और इसमें हिंदुस्तान की कोई भी संपादकीय या पत्रकारिता भागीदारी नहीं है।

मई में GST ग्रोथ का नया रिकॉर्ड: यूपी ने सभी बड़े राज्यों को छोड़ा पीछे

लखनऊ देश भर में मई के दौरान जीएसटी संग्रह में सुस्ती रही और राष्ट्रीय स्तर पर इसमें तीन फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। वहीं, उत्तर प्रदेश ने इस चुनौतीपूर्ण माहौल में खुद को सबसे तेज बढ़ने वाला बड़ा राज्य साबित किया और जीएसटी ग्रोथ में पूरे देश में नंबर वन पर रहा। मई में यूपी का संग्रह जीएसटी संग्रह (एसजीएसटी+सीजीएसटी+ आईजीएसटी) बढ़कर 8,728 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल मई के मुकाबले 13 फीसदी अधिक है। इसी अवधि में तमिलनाडु में 15 प्रतिशत, राजस्थान में 11 प्रतिशत, बिहार में 7 प्रतिशत और उत्तराखंड में 19 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। जबकि महाराष्ट्र में वृद्धि शून्य रही तो गुजरात व कर्नाटक में सिर्फ एक प्रतिशत की वृद्धि हुई। यानी जब अधिकांश बड़े राज्यों की ग्रोथ धीमी या नकारात्मक रही तो यूपी ने दो अंकों की वृद्धि दर्ज कर सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। यूपी शुद्ध जीएसटी संग्रह में देश में दूसरे स्थान पर जीएसटी संग्रह का एक और महत्वपूर्ण पैमाना शुद्ध जीएसटी संग्रह माना जाता है। इसमें से रिफंड घटाकर वास्तविक राजस्व देखा जाता है। इसमें भी यूपी ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। एसजीएसटी व आईजीएसटी सेटलमेंट जोड़ने और केंद्र से मिले एसजीएसटी रिफंड को घटाने के बाद यूपी का शुद्ध जीएसटी संग्रह 17,169 करोड़ रुपये रहा, जिससे प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। इस सूची में महाराष्ट्र 36,825 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर और कर्नाटक 16,177 करोड़ रुपये के साथ तीसरे नंबर पर रहा। राज्य कर आयुक्त ने बताया कि डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि पहले राज्य कर विभाग की कर वृद्धि भारत सरकार की ग्रोथ के मुकाबले कम थी। इस बार जहां ऑल इंडिया ट्रेंड -3 फीसदी रहा, वहीं यूपी ने दोहरे अंकों की ग्रोथ हासिल की है। उपभोक्ता ही राज्य की बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। विभाग उन कारोबारियों पर फोकस कर रहा है, जो टैक्स दे सकते हैं। छोटे-छोटे व्यापारियों को सहूलियतें देने पर जोर है, इसीलिए नए करदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।   एसजीएसटी संग्रह में भी मजबूत प्रदर्शन राज्य के अपने कर संग्रह यानी एसजीएसटी में भी यूपी ने मजबूती दिखाई। मई 2026 में एसजीएसटी संग्रह 3,070 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 फीसदी अधिक है। यह वृद्धि दर कई बड़े राज्यों से अधिक रही। एसजीएसटी संग्रह की कुल राशि के मामले में महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात आगे रहे लेकिन वृद्धि दर के लिहाज से यूपी शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा।  

नेपाल सीमा पर स्वास्थ्य जांच चौकियों की मांग, इबोला खतरे के बीच बढ़ी सतर्कता

लखनऊ  इबोला से प्रभावित देशों से वापस भारत आए यात्रियों की यूपी में भी निगरानी की जा रही है। इबोला सर्विलांस एंड पैसेंजर मॉनिटरिंग की लाइन लिस्ट में बस्ती मंडल के दो यात्रियों का नाम शामिल है। पूरे प्रदेश में विदेश से आने वाले कुल 95 यात्रियों की सूची तैयार कराई गई है। यह वह यात्री हैं, जो किसी न किसी तरह से इबोला वॉयरस से प्रभावित देश से वापस भारत में आए हैं। मंडल के जो दो यात्री हैं, उसमें एक बस्ती और दूसरा संतकबीरनगर का है। स्वास्थ्य विभाग ने दोनों यात्रियों को होम क्वारंटाइन करा दिया है। उधर, पूर्वांचल में विशेषज्ञ उत्तर प्रदेश से लगी नेपाल सीमा पर स्थायी स्वास्थ्य जांच चौकियां बनाने का सुझाव दे रहे हैं ताकि इस ओर से आने वाले विभिन्न देशों के नागरिकों के स्वास्थ्य पर निगरानी रखी जा सके। बस्ती जिले के सल्टौआ ब्लॉक के एक गांव का 22 वर्षीय युवक बंग्लादेश की राजधानी ढाका से हवाई यात्रा कर दिल्ली पहुंचा है। यह किसी इलेक्ट्रानिक उपकरण का व्यापार करता है। दिल्ली उतरने के साथ ही इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दे दी गई थी। संतकबीरनगर जिले के बघौली ब्लॉक का रहने वाला दूसरा यात्री यूगांडा के इंटेबी शहर से मुम्बई पहुंचा था। वहां पर एक दशक से रहकर मजदूरी का काम करता है। दोनों का नाम बस्ती की लाइन लिस्ट में शामिल है। सीएमओ बस्ती ने संतकबीरनगर के यात्री की सूचना सीएमओ संतकबीरनगर को पत्र के माध्यम से दे दी है। अफ्रीका के कुछ देशों में इन दिनों इबोला बीमारी का प्रकोप फैला हुआ है, इसे देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से अलर्ट जारी कर दुनिया के सभी देशों के लिए हेल्थ गाइड लाइन जारी की गई है। इसके तहत इबोला प्रभावित क्षेत्र से आपके देश में कोई यात्री जाता है तो उसे आम लोगों से अलगक्वारंटाइन में रखकर उस पर नजर रखी जाएगी। सीमा पर स्थापित हों स्थायी स्वास्थ्य जांच चौकियां मिशन सेव इंडिया के संस्थापक और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.आरएन सिंह ने सरकार से भारत-नेपाल सीमा के सभी स्थलीय प्रवेश द्वारों (लैंड पोर्ट्स) पर स्थायी स्वास्थ्य जांच चौकियां स्थापित करने की मांग की है। डॉ.सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेजी से फैलने वाली संक्रामक और घातक वायरल बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत की सीमाओं पर स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाना समय की आवश्यकता है। डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर यात्रियों की स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था तो कर दी है लेकिन लैंड पोर्ट्स पर भी सतर्कता बेहद जरूरी है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने की वजह से हर रोज हजारों लोग विभिन्न लैंड पोर्ट्स और सीमा चौकियों के जरिए आते और जाते हैं। ऐसे में यदि किसी संक्रामक बीमारी का संक्रमण सीमा पार फैलता है तो सीमा पर चौकसी के जरिए उसका अपने देश में प्रवेश रोका जा सकता है। डॉ.सिंह ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी संक्रामक रोग के प्रसार को रोकने के लिए प्रारंभिक स्तर पर निगरानी और जांच व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। दूसरों की आईडी से सिम लेने के मामले पूर्वी यूपी में सबसे ज्यादा दूसरों के पहचान पत्र से सिम कार्ड हासिल करने के मामले पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं यहां से मोबाइल नंबर से जुड़ीं 32 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं इनमें से करीब 16 लाख लोगों की आईडी का गलत इस्तेमाल कर सिम कार्ड जारी किए गए दूसरों के पहचान पत्र से सिम कार्ड हासिल करने के मामले पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं। यहां से मोबाइल नंबर से जुड़ीं 32 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से करीब 16 लाख लोगों की आईडी का गलत इस्तेमाल कर सिम कार्ड जारी किए गए। इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में का नंबर आता है। दूरसंचार विभाग से जुड़े एक अधिकारी कहते हैं कि शुरुआत में मोबाइल नंबर सिर्फ आधार या दूसरी कोई आईडी लेकर जारी कर दिए जाते थे। ऐसे में काफी बड़ी संख्या में लोगों ने किसी दूसरे की आईडी लेकर मोबाइल नंबर को जारी कर लिया। ऐसे नंबर साइबर ठगी व अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए हासिल किए गए।

बदायूं, गोरखपुर और लखनऊ महिला पीएसी परिसर में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, झलकारीबाई तथा उदा देवी की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित होगी: मुख्यमंत्री

आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित बल और मजबूत अवसंरचना से सशक्त होगी प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था: मुख्यमंत्री पीएसी में तैयार होगा आईसीसीसी, एक ही डिजिटल नेटवर्क में जुड़ेंगी सभी वाहिनियां पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के निर्देश बदायूं, गोरखपुर और लखनऊ महिला पीएसी परिसर में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, झलकारीबाई तथा उदा देवी की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित होगी: मुख्यमंत्री पीएसी बैंड कार्मिकों के समयबद्ध पदोन्नति के लिए नियमावली तैयार करें: मुख्यमंत्री कानून-व्यवस्था से आपदा प्रबंधन तक, सुरक्षा तंत्र के व्यापक आधुनिकीकरण पर मुख्यमंत्री का जोर, कहा सिविल पुलिस से मिलता-जुलता नहीं, विशिष्ट हो पीएसी का गणवेश संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने की कार्ययोजना की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ के सुदृढ़ीकरण पर मुख्यमंत्री का फोकस लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी सुरक्षा बल की वास्तविक शक्ति उसके प्रशिक्षित, अनुशासित और तकनीकी रूप से दक्ष कार्मिक होते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक व्यवहारिक और तकनीक आधारित बनाया जाए, ताकि सुरक्षा बलों के जवान हर परिस्थिति में प्रभावी और त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हों। गुरुवार को उत्तर प्रदेश प्रांतीय आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी), एसडीआरएफ तथा उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (यूपीएसएसएफ) के आधुनिकीकरण, क्षमता विस्तार, प्रशिक्षण, अवसंरचना विकास एवं भावी कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कहा कि पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ प्रदेश की सुरक्षा प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और इन्हें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने पीएसी बल का गणवेश सिविल पुलिस से अलग करने की आवश्यकता भी जताई। मुख्यमंत्री ने पीएसी के डिजिटलीकरण एवं तकनीकी उन्नयन की समीक्षा करते हुए कहा कि आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि सभी पीएसी वाहनों में जीपीएस एवं डैशकैम स्थापित करने तथा त्वरित प्रतिक्रिया वाहनों की व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के समक्ष उत्तर प्रदेश पीएसी एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) परियोजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई। इसके माध्यम से प्रदेश की सभी पीएसी वाहिनियों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। जीपीएस आधारित वाहन ट्रैकिंग, ड्रोन एवं एआई आधारित निगरानी, लाइव कमांड एवं कंट्रोल सेंटर तथा सुरक्षित संचार प्रणाली विकसित किए जाएंगे। इससे कानून-व्यवस्था, चुनावी तैनाती, महिला सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन में बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से महिला बटालियनों के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बदायूं, लखनऊ और गोरखपुर में महिला बटालियनों का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने तीनों बटालियन परिसर में क्रमशः वीरांगना अवंतीबाई, वीरांगना उदा देवी और वीरांगना झलकारी बाई की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने के निर्देश दिए। यह भी बताया गया कि बलरामपुर, मीरजापुर और जालौन में नई महिला वाहिनियों से संबंधित कार्यवाही भी आगे बढ़ाई जा रही है।  मुख्यमंत्री ने आगामी मानसून को देखते हुए बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 16 मई से 30 जून तक विभिन्न नदी तटों पर 17 पीएसी कंपनियों का विशेष बाढ़ राहत प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए मुख्यमंत्री ने सभी उपकरणों की नियमित जांच और उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में एसडीआरएफ की उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि इसकी टीमें वर्तमान में 12 जनपदों में तैनात हैं तथा संभावित बाढ़ परिस्थितियों को देखते हुए 15 जनपदों में अतिरिक्त तैनाती का प्रस्ताव तैयार किया गया है। एसडीआरएफ कर्मियों को एनडीआरएफ अकादमी नागपुर, नादिया, पश्चिम बंगाल तथा नंदा देवी इंस्टीट्यूट ऑफ एयरो रेस्क्यू सहित विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।  बैठक में मुख्यमंत्री ने पीएसी बैंड के कार्मिकों के समयबद्ध पदोन्नति की नियमावली तैयार करने के निर्देश दिए, साथ ही एसडीआरएफ को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से खोज एवं बचाव कार्यों के लिए ह्यूमन लिफ्टिंग ड्रोन की उपयोगिता पर विचार को भी कहा। उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एयरपोर्ट, मेट्रो नेटवर्क, आरआरटीएस, न्यायालय परिसरों, महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों तथा प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के क्षेत्र में इसकी जिम्मेदारी निरंतर बढ़ रही है। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में यूपीएसएसएफ 11 एयरपोर्ट, 4 मेट्रो नेटवर्क, मेरठ आरआरटीएस, लोकभवन, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तथा 5 जनपदीय न्यायालयों की सुरक्षा का दायित्व निभा रहा है।  मुख्यमंत्री ने एसएसएफ में तैनाती के लिए मानकीकरण के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि एयरपोर्ट सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के माध्यम से एयरपोर्ट सुरक्षा संबंधी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाते हुए प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता को और मजबूत किया जाए। मुख्यमंत्री ने यूपीएसएसएफ की विभिन्न वाहिनियों के निर्माण कार्यों की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि मुख्यालय एवं प्रथम वाहिनी, लखनऊ के निर्माण कार्य में लगभग 77 प्रतिशत प्रगति हो चुकी है। गोरखपुर स्थित द्वितीय वाहिनी का निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रयागराज, मथुरा, सहारनपुर एवं अयोध्या में प्रस्तावित वाहिनियों से संबंधित कार्यवाहियां भी प्रगति पर हैं।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पीएसी, एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ के आधुनिकीकरण, क्षमता विस्तार, तकनीकी उन्नयन, प्रशिक्षण, अवसंरचना विकास तथा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण से जुड़े सभी प्रस्तावों एवं परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।