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आजम खां ने वाई श्रेणी सुरक्षा लेने से किया इनकार, कहा- लिखित आदेश तक नहीं लूंगा

रामपुर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां ने वाई श्रेणी की सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आदेश नहीं मिलता तब तक वह सुरक्षा स्वीकार नहीं करेंगे। जेल से रिहा होने के बाद आजम ने कहा कि उन्हें सुरक्षा दिए जाने की कोई आधिकारिक जानकारी या दस्तावेज नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से उन्होंने कहा है कि पहले वह सरकार का आदेश लेकर आएं तभी वह इस व्यवस्था को मानेंगे। सपा नेता ने कहा कि जब एक बार के विधायक को केंद्र सरकार के कमांडो मिल सकते हैं तो मुझे केवल वाई श्रेणी की सुरक्षा क्यों दी गई है। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि वाई श्रेणी की सुरक्षा में गाड़ी और अन्य खर्च का प्रावधान होता है, जिसका खर्च वह देने की स्थिति में नहीं हैं। जेल से बाहर आने के बाद से आजम लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। अब सुरक्षा को लेकर दिया गया यह बयान एक बार फिर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। आजम पहले वापस कर चुके हैं सुरक्षा सपा नेता पूर्व में 27 माह तक सीतापुर जेल में रहे थे। उस वक्त जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद उनको सुरक्षा वापस दे दी थी,लेकिन उस वक्त सपा नेता ने सुरक्षा वापस कर दी थी। छह पुलिस कर्मियों की निगरानी में चौबीस घंटे रहेंगे 23 माह बाद जेल से रिहा होने के सपा नेता आजम खां को पूर्व में दी गई वाई श्रेणी की सुरक्षा को वापस कर दिया गया है। वह छह पुलिस कर्मियों की निगरानी में चौबीस घंटे रहेंगे। सपा नेता आजम खां दस बार के विधायक, एक बार के लोकसभा सदस्य व राज्यसभा के सदस्य के साथ ही पांच बार प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। 2012-2017 तक कैबिनेट मंत्री रहे आजम खां की मुश्किलें भाजपा सरकार आने के बाद 2019 से बढ़नी शुरू हुई थीं। उन पर कानूनी शिकंजा कसता चला गया। एक के बाद एक सौ से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए। डूंगरपुर,यतीमखाना बस्ती को खाली कराने के नाम पर लूटपाट, चोरी व डकैती के साथ ही मारपीट समेत अन्य धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए। 23 माह पहले उन्हें बेटे के जन्म प्रमाणपत्र के मामले में कोर्ट से सजा हुई थी,जिसके बाद बेटे अब्दुल्ला आजम खां व पत्नी डॉ. तजीन फात्मा के साथ जेल चले गए थे। हालांकि अब सभी जमानत पर रिहा हो चुके हैं। उनको डूंगरपुर केस में भी सजा हो चुकी है। फिलहाल 23 माह बाद 23 सितंबर को सीतापुर जेल से रिहा हो गए थे। जेल जाने से पहले उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी, जिसे अब वापस कर दिया गया है। पुलिस अफसरों के मुताबिक वाई श्रेणी की सुरक्षा के तहत पांच पुलिस कर्मियों की एक गारद आवास पर तैनात होगी, जबकि तीन सुरक्षा कर्मी सपा नेता के साथ रहेंगे। सपा नेता को पहले से ही वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी। इसे खत्म नहीं किया गया था। अब फिर से सुरक्षा दे दी गई है। – विद्या सागर मिश्र, एसपी  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लोकभवन में उज्जवला योजना के तहत माताओं-बहनों को देंगे निशुल्क सिलेंडर का उपहार

प्रदेश की करोड़ों माताओं और बहनों को योगी सरकार का दीपावली गिफ्ट  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लोकभवन में उज्जवला योजना के तहत माताओं-बहनों को देंगे निशुल्क सिलेंडर का उपहार  यूपी की 1.86 करोड़ माताओं-बहनों को मिलेंगे दो मुफ्त एलपीजी रिफिल सिलेंडर, त्योहार पर महंगाई से मिलेगी बड़ी राहत वर्ष 2025-26 में योजना को लागू करने के लिए योगी सरकार की ओर से 1500 करोड़ रुपए की धनराशि का प्रावधान  दो चरणों में होगा वितरण, पहला चरण अक्टूबर 2025 से दिसंबर 2025 तक और दूसरा चरण जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक  पहले चरण में आधार प्रमाणित 1.23 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा लाभ, लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर होगी सब्सिडी  योजना के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए हर जिले में सख्त मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण तंत्र सक्रिय लखनऊ  योगी सरकार दीपावली के अवसर पर उत्तर प्रदेश की करोड़ों माताओं-बहनों के चेहरों पर मुस्कान लाने जा रही है। प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित परिवारों को राहत देते हुए दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लोकभवन सभागार में इस योजना का शुभारंभ करेंगे और पात्र महिलाओं को मुफ्त सिलेंडर रिफिल का उपहार सौंपेंगे। यह कदम राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह गरीबों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ ईंधन और आर्थिक संबल देने की दिशा में लगातार काम कर रही है।  1.86 करोड़ परिवारों को मिला कनेक्शन उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की गई थी, ताकि वे ग्रामीण और वंचित परिवार जो अब तक लकड़ी, कोयला, गोबर के उपले जैसे पारंपरिक ईंधन का उपयोग कर रहे थे, उन्हें एलपीजी जैसे स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिल सके। इस योजना ने ग्रामीण भारत की रसोई को न केवल धुएं से मुक्त किया, बल्कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को भी कम किया। उत्तर प्रदेश इस योजना के क्रियान्वयन में अग्रणी राज्य रहा है. यहां अब तक 1.86 करोड़ परिवारों को उज्ज्वला कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। दो चरणों में मिलेगा निःशुल्क रिफिल राज्य सरकार ने उज्ज्वला लाभार्थियों को प्रति वर्ष दो निःशुल्क एलपीजी रिफिल देने का निर्णय लिया है। यह वितरण वित्तीय वर्ष 2025-26 में दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण अक्टूबर 2025 से दिसंबर 2025 तक और दूसरा चरण जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश सरकार ने ₹1500 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया है। आधार प्रमाणित लाभार्थियों को प्राथमिकता पहले चरण में आधार प्रमाणित लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में 1.23 करोड़ उज्ज्वला लाभार्थियों का आधार प्रमाणन पूरा हो चुका है। योजनान्तर्गत तीनों ऑयल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) के माध्यम से यह वितरण सुनिश्चित कराया जा रहा है। राज्य स्तरीय समन्वयकों द्वारा मांगी गई ₹346.34 करोड़ की अग्रिम धनराशि ऑयल कंपनियों को प्रदान कर दी गई है, ताकि वितरण में किसी प्रकार की देरी न हो। ऐसे मिलेगा निःशुल्क रिफिल लाभार्थी अपने स्तर से प्रचलित उपभोक्ता दर (सब्सिडी सहित) के अनुसार 14.2 किग्रा एलपीजी सिलेंडर रिफिल खरीदेंगे। इसके बाद मात्र 3–4 दिनों के भीतर सब्सिडी की राशि उनके आधार प्रमाणित बैंक खातों में ऑयल कंपनियों द्वारा अंतरित कर दी जाएगी। केंद्र सरकार की और राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी की राशि अलग-अलग लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी। जिनके पास 5 किग्रा के सिलेंडर हैं, वे चाहें तो 14.2 किग्रा के सिलेंडर भी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, जिनके पास केवल एक कनेक्शन है, उन्हें भी योजना का लाभ मिलेगा। आधार प्रमाणन के लिए विशेष अभियान जिन लाभार्थियों का आधार अभी प्रमाणित नहीं हुआ है, उनका प्रमाणन प्रशासन और ऑयल कंपनियों के सहयोग से अभियान चलाकर किया जा रहा है। ऑयल कंपनियों द्वारा लाभार्थियों को एसएमएस भेजे जा रहे हैं ताकि वे शीघ्र अपना आधार सत्यापित करा सकें। आधार प्रमाणन हेतु विशेष एप विकसित किया जा रहा है, और वितरकों के यहां अतिरिक्त लैपटॉप लगाए जा रहे हैं। प्रत्येक वितरक के यहां बैनर, फ्लेक्सी और कैम्प के माध्यम से प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है। लाभार्थियों की सुविधा के लिए रोस्टर आधारित आधार प्रमाणन प्रणाली लागू की गई है। कड़ी मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण व्यवस्था योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए दो स्तरों पर समितियां गठित की गई हैं। राज्य स्तर पर खाद्यायुक्त कार्यालय में गठित समिति योजना की नियमित समीक्षा करेगी। वहीं, जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति साप्ताहिक समीक्षा बैठकें करेगी। साथ ही, शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। पूर्ण मात्रा में गैस वितरण की निगरानी यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को पूर्ण मात्रा (14.2 किग्रा) में गैस मिले। यदि किसी सिलेण्डर का वजन कम पाया जाता है, तो वितरक अपने संसाधनों से सिलेण्डर रिप्लेस करेगा। बांट माप विभाग और जिला प्रशासन को समय-समय पर जांच के आदेश जारी किए गए हैं। महिलाओं को महंगाई से राहत और स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के बीच राज्य सरकार का यह निर्णय गरीब परिवारों को महंगाई से राहत देने वाला कदम है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन के प्रयोग की प्रवृत्ति बढ़ेगी और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

2024-25 में रिकॉर्ड 4,000 नई फैक्ट्रियां हुईं स्थापित, कुल संख्या पहुंची 27,000 के पार

औद्योगिक क्रांति की राह पर उत्तर प्रदेश, योगी मॉडल से बदला उद्योग जगत का नक्शा 2024-25 में रिकॉर्ड 4,000 नई फैक्ट्रियां हुईं स्थापित, कुल संख्या पहुंची 27,000 के पार  फैक्ट्री की संख्या में वृद्धि नए उत्तर प्रदेश के आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रतीक निवेश, रोजगार और औद्योगिक विश्वास में नित नए इतिहास बना रहा है उत्तर प्रदेश  विगत साढ़े 8 वर्षों में योगी सरकार ने उद्योगों के लिए तैयार किया विशेष पारिस्थितिकी तंत्र  निवेशकों को आकर्षित करने के साथ ही उन्हें जोड़े रखने में भी सफलता प्राप्त कर रहा प्रदेश  लखनऊ  कभी पिछड़ेपन और बेरोजगारी के प्रतीक के रूप में देखा जाने वाला उत्तर प्रदेश आज उद्योगों का नया ग्रोथ सेंटर बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने जिस गति से औद्योगिक विकास की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, उसने पूरे देश को चकित किया है। वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड 4,000 नई फैक्ट्रियां स्थापित हुईं, जिससे प्रदेश में कुल फैक्ट्रियों की संख्या 27,000 के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। यह केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि नए उत्तर प्रदेश के आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रतीक है। योगी सरकार ने विगत साढ़े 8 वर्षों में उद्योगों के लिए एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है जो निवेशकों को न केवल आकर्षित करता है बल्कि उन्हें लंबे समय तक जोड़े रखता है। राज्य में निवेश से संबंधी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और निवेशक-हितैषी बनाया है, जिसके कारण उत्तर प्रदेश आज देश का “न्यू इनवेस्टमेंट हब” बन गया है। यहां स्थापित फैक्ट्रियों में इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, केमिकल और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं। तेज रफ्तार से बढ़ा औद्योगिक आधार वर्ष 2003 में उत्तर प्रदेश में सिर्फ 8,980 फैक्ट्रियां थीं। 2021 में यह संख्या बढ़कर 16,503 तक पहुंच गई। 2022 में यह संख्या 17,481 से होते हुए 2023 में 19,100 का आंकड़ा पार कर गई। 2025 में अब यह 27,000 तक पहुंच गई है जो उल्लेखनीय वृद्धि है। यह वृद्धि केवल संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक भूगोल में एक संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत है। अब निवेश केवल नोएडा, ग्रेटर नोएडा या लखनऊ तक सीमित नहीं, बल्कि बरेली, कानपुर, झांसी, गोरखपुर, आजमगढ़ और प्रयागराज जैसे शहरों तक फैल चुका है। निवेश और रोजगार का नया युग 2023-24 की एएसआई रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश देश के टॉप-15 औद्योगिक राज्यों में चौथे स्थान पर पहुंच गया था। 2023-24 तक राज्य में 22,141 फैक्ट्रियां संचालित थीं, जो देश की कुल फैक्ट्रियों का 8.5 प्रतिशत हिस्सा थीं। इन इकाइयों में 12.80 लाख से अधिक वर्कर्स कार्यरत थे जो देशभर के औद्योगिक वर्कफोर्स का 8.3 प्रतिशत था। फैक्ट्री ग्रोथ की वार्षिक दर 16 प्रतिशत और वर्कर्स की संख्या में 8 प्रतिशत की वृद्धि ने दर्शाया कि प्रदेश में न केवल उद्योग बढ़ रहे हैं, बल्कि रोजगार के अवसरों में भी लगातार विस्तार हो रहा है। 2025 में 27 हजार फैक्ट्रीज की संख्या इसी का प्रमाण है।  गांवों तक पहुंची औद्योगिक क्रांति सरकार का लक्ष्य केवल शहरी औद्योगिक विकास नहीं, बल्कि ग्राम्य औद्योगिकरण को भी बढ़ावा देना है। एमएसएमई इकाइयों और स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन देने के लिए अनुदान, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और निर्यात सुविधा जैसे कदम उठाए गए हैं। आज यूपी के कई ग्रामीण इलाकों में छोटे उद्योग आत्मनिर्भर भारत की जड़ें मजबूत कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की यह औद्योगिक कहानी केवल विकास का नहीं, बल्कि विश्वास, पारदर्शिता और परिवर्तन का उदाहरण बन रही है।   

कुशीनगर में जर्जर सड़कों की सुध, 4 मुख्य मार्गों सहित 11 सड़कों के कायाकल्प को हरी झंडी

 राजापाकड़ क्षेत्र के सेमरा हर्दोपट्टी, बसंतपुर रामलगन राय, मठिया भोकरिया, बेनीभार गांव की सड़कों सहित फाजिलनगर विधानसभा क्षेत्र की 11 जर्जर सड़कों का कायाकल्प होगा। 8.9 किमी लंबाई वाली सड़कों के लिए 208.52 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं, शासन ने 104.20 लाख रुपये की प्रथम किस्त अवमुक्त भी कर दी है। विधायक सुरेंद्र कुमार कुशवाहा ने इसका प्रस्ताव भेजा था। इन सड़कों का होगा कायाकल्प 1150 मीटर सेमरा हर्दोपट्टी संपर्क मार्ग के लिए 16.17 के सापेक्ष 8.09 लाख रुपये, 400 मीटर मठिया भोकरिया मुसहर टोला मार्ग के लिए 5.88 लाख के सापेक्ष 2.94 लाख रुपये, 150 मीटर रामलगन राय संपर्क मार्ग के लिए 2.98 लाख के सापेक्ष 1.49 लाख रुपये व बेनीभार संपर्क मार्ग लंबाई 800 मीटर के लिए 21.61 लाख के सापेक्ष 10.81 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त हुई है। इसके अतिरिक्त विधानसभा क्षेत्र में बीसीटी से लोहार पट्टी 500 मीटर मार्ग के लिए 25.12 लाख के सापेक्ष 12.56 लाख रुपये, कोकिलपट्टी पांडेय टोला संपर्क मार्ग लंबाई 1600 मीटर के लिए 39.21 लाख के सापेक्ष 19.61 लाख, पटहेरवा पिपरा कनक से चैनपट्टी गगलवा संपर्क मार्ग लंबाई 200 मीटर के लिए 7.53 लाख के सापेक्ष 3.77 लाख, करमैनी का मजरा नूरखार टोला संपर्क मार्ग लंबाई 700 मीटर के लिए स्वीकृत 17.84 लाख रुपये के सापेक्ष 8.92 लाख, फाजिलनगर बघौचघाट मार्ग से नरायनपुर संपर्क मार्ग लंबाई 1000 मीटर के लिए स्वीकृत 22.81 लाख रुपये के सापेक्ष 11.32 लाख, समऊर नोनिया पट्टी मार्ग से परसौनी खुर्द पश्चिम टोला संपर्क मार्ग लंबाई 1500 मीटर के लिए स्वीकृत 26.73 लाख रुपये के सापेक्ष 13.37 लाख और नरायनपुर खास टोला संपर्क मार्ग लंबाई 900 मीटर के लिए स्वीकृत धनराशि 22.64 लाख रुपये के सापेक्ष 11.32 लाख रुपये अवमुक्त हुए हैं।

कोर्ट में हिंसक वारदात, अधिवक्ता और पुलिसकर्मी घायल; पीलीभीत में दो आरोपी पकड़े गए

पीलीभीत पीलीभीत के कोर्ट परिसर में मंगलवार सुबह अधिवक्ता पर बांके से हमला कर दिया गया। उन्हें बचाने पहुंचे दरोगा भी घायल हो गए। घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया है। वहीं, पुलिस ने हमला करने के दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक हत्या के मामले में नामजद अधिवक्ता ओमपाल निवासी गांव खरदाई (थाना दियोरिया) मंगलवार को मुकदमे की तारीख पर कोर्ट पहुंचे थे। इसी दौरान मुकदमे के दूसरे पक्ष के लोग वहां पहुंच गए और अचानक बांके से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। कचहरी परिसर में मचा हड़कंप हमले में अधिवक्ता ओमपाल गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे बचाने पहुंचे कोर्ट परिसर में तैनात दरोगा अरविंद त्यागी भी बांके के प्रहार से घायल हो गए। घटना से कचहरी परिसर में अफरा-तफरी मच गई। दोनों घायलों को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया। सूचना पर एसपी अभिषेक यादव भी अस्पताल पहुंचे और घटना की जानकारी ली। बताया जा रहा है कि हमला करने के आरोपी कचहरी के पीछे खुले रास्ते से अंदर दाखिल हुए थे। बांका छिपाकर लाए थे। घायल अधिवक्ता बीसलपुर में प्रैक्टिस करता है और हत्या के एक मुकदमे में आरोपी है। एसपी अभिषेक यादव ने बताया कि दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

मुख्यमंत्री के विशेष निर्देश पर रखा जाएगा एक एक व्यक्ति के स्वास्थ्य का ख्याल

दीपोत्सव 2025 अयोध्या दीपोत्सव के लिए बनाए जा रहे 15 अस्थायी चिकित्सालय मुख्यमंत्री के विशेष निर्देश पर रखा जाएगा एक एक व्यक्ति के स्वास्थ्य का ख्याल  दीपोत्सव 2025 को अविस्मरणीय बनाने के लिए युद्धस्तर पर जुटी योगी सरकार – समारोह में आने वाले लोगों की देखभाल के लिए संपूर्ण मेला क्षेत्र में 10 स्थानों पर एंबुलेंस रहेंगी तैनात – अयोध्या के अलावा अमेठी, अम्बेडकरनगर, बाराबंकी और सुल्तानपुर से बुलाई गई विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम – सभी चिकित्सालयों में आवश्यक दवाएं, पैरामेडिकल स्टाफ और विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध रहेंगे अयोध्या दीपोत्सव 2025 को अविस्मरणीय और पूर्णतः सुरक्षित बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने अयोध्या में पुख्ता इंतजाम किए हैं। इस बार दीपोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए 15 अस्थायी चिकित्सालय बनाए जा रहे हैं। साथ ही संपूर्ण मेला क्षेत्र में 10 स्थानों पर चौबीसों घंटे एंबुलेंस की तैनाती की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विशेष निर्देश पर इस वर्ष नौवें संस्करण के दीपोत्सव के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। इस आयोजन में एक-एक व्यक्ति के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाएगा। अयोध्या के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील कुमार बानियान ने बताया कि दीपोत्सव के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पूरी सतर्कता बरती जाएगी। सभी चिकित्सालयों में आवश्यक दवाएं, पैरामेडिकल स्टाफ और विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध रहेंगे। इन स्थानों पर तैनात रहेंगी एंबुलेंस कंट्रोल रूम, श्री राम जन्मभूमि परिसर, श्री हनुमानगढ़ी, श्री कनक भवन मंदिर परिसर, पक्का घाट, बंधा तिराहा (वीणा चौराहा), हनुमानगुफा (श्री राम कथा संग्रहालय), साकेत पेट्रोल पंप, अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन और श्री नागेश्वर नाथ मंदिर पर एंबुलेंस हर समय मौजूद रहेंगी। तीन प्रमुख अस्पतालों में 50 बेड आरक्षित 1. स्वशासी राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज, अयोध्या नगर में 20 बेड आरक्षित। 2. जिला चिकित्सालय अयोध्या (पुरुष) में 20 बेड आरक्षित। 3. श्री राम चिकित्सालय अयोध्या में 10 बेड आरक्षित। इन 15 स्थानों पर बनाए जा रहे अस्थायी प्राथमिक उपचार केंद्र कंट्रोल रूम (साकेत डिग्री कॉलेज के सामने), श्री राम जन्मभूमि निकास द्वार, श्री राम जन्मभूमि निकास द्वार (पीएफसी), श्री हनुमानगढ़ी मंदिर, बंधा तिराहा (विकास प्राधिकरण कार्यालय), पक्का घाट (08 बेड अस्थायी चिकित्सालय), श्री नागेश्वरनाथ मंदिर, साकेत पेट्रोल पंप, हनुमानगुफा (श्री राम कथा संग्रहालय), अंतर्राष्ट्रीय बस स्टॉप अयोध्या धाम, कारसेवकपुरम, दशरथ महल, अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन, कनक भवन मंदिर परिसर और झनकी घाट पर चिकित्सा शिविर लगाए जा रहे हैं। अन्य जनपदों से आएंगी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमें दीपोत्सव में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिए अमेठी, अंबेडकरनगर, बाराबंकी और सुल्तानपुर जनपदों से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीमें भी अयोध्या पहुंचेंगी। ये टीमें संपूर्ण आयोजन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर तैनात रहकर श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगी।

14.82 लाख राज्य कर्मचारियों को मिलेगा बोनस, ₹1,022 करोड़ का व्ययभार वहन करेगी राज्य सरकार

उत्तर प्रदेश सरकार के कार्मिकों को दीपावली से पहले मुख्यमंत्री योगी का बड़ा उपहार 14.82 लाख राज्य कर्मचारियों को मिलेगा बोनस, ₹1,022 करोड़ का व्ययभार वहन करेगी राज्य सरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का निर्णय, कर्मचारियों के परिश्रम का सम्मान समयबद्ध भुगतान के निर्देश, परिवारों में उत्साह का माहौल लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली के शुभ अवसर पर राज्य कर्मचारियों को बड़ा उपहार देते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए बोनस देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों के परिश्रम और निष्ठा के प्रति राज्य सरकार की सराहना का प्रतीक है। प्रदेश की प्रगति में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, और सरकार हर स्तर पर उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राज्य सरकार के कर्मचारियों को उत्पादकता असम्बद्ध बोनस अनुमन्य किया गया है। यह बोनस मासिक परिलब्धियों की अधिकतम सीमा ₹7,000 के आधार पर 30 दिनों की परिलब्धियों का आगणन करते हुए दिया जाएगा, जिससे प्रत्येक पात्र कर्मचारी को ₹6,908 का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपावली से पहले यह आर्थिक लाभ कर्मचारियों के परिवारों के लिए आनंद और उत्साह लेकर आएगा तथा शासन-प्रशासन में नई ऊर्जा का संचार करेगा। इस निर्णय से राज्य सरकार के लगभग 14 लाख 82 हजार कर्मचारी लाभान्वित होंगे, जिस पर कुल व्ययभार लगभग ₹1,022 करोड़ आएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि पात्र कर्मचारियों को बोनस का भुगतान समयबद्ध रूप से सुनिश्चित किया जाए ताकि सभी परिवार इस पर्व को उल्लासपूर्वक मना सकें। राज्य सरकार द्वारा अनुमन्य बोनस के दायरे में वे पूर्णकालिक अराजपत्रित कार्मिक शामिल हैं जिनके पद का वेतन मैट्रिक्स लेवल-8 (₹47,600- ₹1,51,100) तक है (सादृश्य ग्रेड वेतन ₹4,800 तक)। इसमें राज्य कर्मचारी, राज्य निधि से सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं के कर्मचारी, स्थानीय निकायों और जिला पंचायतों के कर्मचारी, राजकीय विभागों के कार्यप्रभारित एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी सम्मिलित हैं। बता दें कि भारत सरकार द्वारा भी वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए बीते 29 सितम्बर, 2025 द्वारा बोनस प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है।

हमारे नगर केवल इमारतें नहीं, जीवंत सामाजिक संरचनाएं हैं: मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश में बनेगी व्यापक 'शहरी पुनर्विकास नीति' शहरों के समग्र पुनर्जागरण की दिशा में बड़ा कदम हमारे नगर केवल इमारतें नहीं, जीवंत सामाजिक संरचनाएं हैं: मुख्यमंत्री नई नीति में होगा आधुनिकता, परंपरा और मानवता तीनों का संतुलित समन्वय: मुख्यमंत्री नई नीति में भूमि पुनर्गठन, निजी निवेश व पारदर्शी पुनर्वास व्यवस्था पर होगा विशेष फोकस राज्य स्तरीय पुनर्विकास प्राधिकरण, सिंगल विंडो अप्रूवल प्रणाली और पीपीपी मॉडल को मिलेगी प्राथमिकता हर परियोजना में जनहित सर्वोपरि, प्रभावित परिवारों की आजीविका की होगी पूर्ण सुरक्षा: मुख्यमंत्री ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और हरित भवन मानकों के संरक्षण के साथ होगा शहरी कायाकल्प भूमि के लोकेशन और उपयोग के आधार पर तय होगा बाह्य विकास शुल्क मुख्यमंत्री का निर्देश, बाह्य विकास शुल्क गणना को व्यावहारिक और जनहित के अनुकूल बनाएं विकास प्राधिकरण वर्तमान में सभी प्रकार के भूमि उपयोग आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और कृषि पर समान शुल्क दरें लागू हैं, अब बदलेगी व्यवस्था नगर निकाय सीमा के भीतर और नगर निकाय सीमा के बाहर की भूमि पर भी शुल्क की दरों में होगा अंतर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के नगरों के तीव्र गति से बदलते विकास स्वरूप को देखते हुए अब एक व्यापक 'शहरी पुनर्विकास नीति' की आवश्यकता है। यह नीति केवल भवनों के पुनर्निर्माण तक सीमित न रहकर शहरों के समग्र पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे नगर केवल इमारतों का समूह नहीं, बल्कि जीवंत सामाजिक संरचनाएँ हैं। इनके पुनर्जीवन के लिए ऐसी नीति आवश्यक है, जो आधुनिकता, परंपरा और मानवता तीनों का संतुलित समन्वय करे। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को आवास विभाग की बैठक में कहा कि नई नीति का उद्देश्य पुराने, जर्जर और अनुपयोगी क्षेत्रों को आधुनिक शहरी बुनियादी ढाँचे, पर्याप्त सार्वजनिक सुविधाओं और पर्यावरणीय संतुलन के साथ विकसित करना है। उन्होंने कहा कि नीति में ऐसे प्रावधान किए जाएँ, जिनसे निवास योग्य, सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित नगरों का निर्माण सुनिश्चित हो। उन्होंने निर्देश दिए कि नीति में भूमि पुनर्गठन, निजी निवेश को प्रोत्साहन, पारदर्शी पुनर्वास व्यवस्था और प्रभावित परिवारों की आजीविका की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। हर परियोजना में 'जनहित सर्वोपरि' की भावना हो तथा किसी की संपत्ति या जीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसके लिए न्यायसंगत और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति में राज्य स्तरीय पुनर्विकास प्राधिकरण, परियोजनाओं की सिंगल विंडो अप्रूवल प्रणाली तथा पीपीपी मॉडल को प्राथमिकता दी जाए। निवेशकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश, प्रोत्साहन और सुरक्षा दी जाए, ताकि निजी क्षेत्र पुनर्विकास में सक्रिय भागीदारी कर सके। साथ ही हर परियोजना में हरित भवन मानक, ऊर्जा दक्षता और सतत विकास के प्रावधान अनिवार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरों की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए। पुराने बाजारों, सरकारी आवास परिसरों, औद्योगिक क्षेत्रों और अनधिकृत बस्तियों के लिए क्षेत्रवार अलग रणनीति तैयार की जाए। नीति में सेवानिवृत्त सरकारी आवासों, पुरानी हाउसिंग सोसाइटियों तथा अतिक्रमण प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि नई नीति का मसौदा जनप्रतिनिधियों, नगर निकायों और आम नागरिकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम रूप से तैयार किया जाए और शीघ्र मंत्रिपरिषद के अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जाए। बैठक में नगरीय क्षेत्रों में विकास प्राधिकरणों द्वारा लिए जाने वाले बाह्य विकास शुल्क पर भी चर्चा हुईं मुख्यमंत्री ने बाह्य विकास शुल्क को व्यावहारिक और जनहित के अनुरूप बनाए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सभी प्रकार के भूमि उपयोग आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और कृषि पर समान शुल्क दरें लागू हैं, जो व्यावहारिक नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नई व्यवस्था में स्थान और भूमि उपयोग के आधार पर शुल्क दरों में अंतर रखा जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कृषि एवं औद्योगिक उपयोग की भूमि पर बाह्य विकास शुल्क, आवासीय और व्यावसायिक उपयोग की तुलना में कम होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय नगर निकाय सीमा के भीतर और नगर निकाय सीमा के बाहर की भूमि पर भी शुल्क की दरों में अंतर किया जाए, ताकि निवेशकों और आम नागरिकों दोनों के हितों का संतुलन बना रहे। मुख्यमंत्री ने बाह्य विकास शुल्क की गणना प्रणाली में पारदर्शिता और सरलता लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें सामान्य व्यक्ति भी बिना किसी परेशानी के स्वयं अपने शुल्क की गणना कर सके। इसके लिए शुल्क निर्धारण का फॉर्मूला स्पष्ट, ऑनलाइन और न्यूनतम मानव हस्तक्षेप वाला होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाह्य विकास शुल्क से प्राप्त धनराशि का उपयोग वास्तव में बाह्य बुनियादी सुविधाओं जैसे; सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज, विद्युत व अन्य जनसुविधाओं के विकास में ही किया जाए। इसके लिए विकास प्राधिकरणों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने आवास विभाग को निर्देश दिया कि बाह्य विकास शुल्क से संबंधित वर्तमान प्राविधानों की समीक्षा कर, जनसुलभ, पारदर्शी और व्यवहारिक नीति का प्रारूप शीघ्र तैयार किया जाए, ताकि नगरीय विकास योजनाओं में गति आए और नागरिकों को वास्तविक लाभ मिले।

पंचायतों को आर्थिक आत्मनिर्भर बनाने के लिए पारदर्शिता, तकनीक और स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर बल

ग्राम पंचायतें केवल प्रशासनिक इकाइयाँ नहीं, ग्रामीण विकास की आत्मा हैं: मुख्यमंत्री पंचायतों को आर्थिक आत्मनिर्भर बनाने के लिए पारदर्शिता, तकनीक और स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर बल स्थानीय कर एवं यूज़र चार्ज संग्रह की प्रक्रिया ऑनलाइन, पंचायतों की स्वनिधि बढ़ाने के लिए सुधारात्मक कदम जारी जिला पंचायतों में भवन मानचित्र स्वीकृति हेतु सिविल इंजीनियर या आर्किटेक्ट की तैनाती के निर्देश ग्राम सचिवालयों में आधार केंद्र खोलकर पंचायतों की आय वृद्धि और नागरिक सुविधा दोनों सुनिश्चित होंगी: मुख्यमंत्री तालाबों/पोखरों का हो समयबद्ध पट्टा, प्राप्त राशि से जल संरक्षण व ग्राम्य हित के कार्य: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम पंचायतों को आर्थिक आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्यों से नवाचारों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया है। मंगलवार को पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतें केवल प्रशासनिक इकाइयाँ नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की आत्मा हैं। इन इकाइयों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पारदर्शिता, तकनीक और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। बैठक में प्रस्तुत विवरण के अनुसार, पंचायतों की स्वनिधि बढ़ाने के लिए विभिन्न सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय कर एवं यूज़र चार्ज संग्रह की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है। पंचायतों की आय वृद्धि के लिए विभिन्न नवाचारों पर कार्य जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शिता और तकनीकी उपयोग के माध्यम से ग्राम पंचायतों की राजस्व प्राप्ति और जनसेवा की गुणवत्ता दोनों में सुधार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि विकास प्राधिकरणों के अतिरिक्त जिला पंचायतों के अधीन क्षेत्रों में भवन मानचित्र स्वीकृति के लिए जिला पंचायतों के पास दक्ष मानव संसाधन की उपलब्धता होनी चाहिए। इस हेतु प्रत्येक जिला पंचायत में सिविल इंजीनियर अथवा आर्किटेक्ट की तैनाती की व्यवस्था की जाए, जिससे स्थानीय निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए ग्राम सचिवालयों में आधार केंद्र खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड निर्माण, संशोधन, बायोमेट्रिक अपग्रेडेशन आदि कार्यों के लिए यह सुविधा उपलब्ध कराई जाए, जिससे नागरिकों को सुविधा मिले और मिलने वाले शुल्क से ग्राम पंचायत की आय में भी वृद्धि हो। बैठक में यह भी बताया गया कि पंचायती राज विभाग द्वारा तालाबों/पोखरों की सूचीकरण और उपयोग नीति पर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ग्राम पंचायत तथा जिला पंचायत के अधीन तालाबों/पोखरों का समयबद्ध पट्टा किया जाए और इनसे प्राप्त राशि को हर घर नल, जल संरक्षण तथा ग्राम्य हित के कार्यों में ही उपयोग किया जाए। उन्होंने इस हेतु एक स्पष्ट नियमावली तैयार करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायतों के पास जितनी अधिक स्व-वित्तीय क्षमता होगी, उतनी ही तेजी से ग्रामीण विकास के कार्य आगे बढ़ेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पंचायत प्रतिनिधियों को वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल सेवा वितरण और जनसुविधा संचालन के विषय में प्रशिक्षण दिया जाए। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि “ग्राम पंचायतों की समृद्धि ही आत्मनिर्भर भारत की नींव है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि हर ग्राम पंचायत सेवा, स्वच्छता और स्वावलंबन की प्रतीक बने।”

सीएम योगी के मिशन शक्ति 5.0 के तहत एक बार फिर तेज की गई अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

मिशन शक्ति 5.0 :योगी सरकार की पुलिस ने अब तक 256 दुर्दांत अपराधियों को किया ढेर, मेरठ जोन अव्वल  सीएम योगी के मिशन शक्ति 5.0 के तहत एक बार फिर तेज की गई अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई  पिछले बीस दिनों में अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए एक दर्जन से अधिक एनकाउंटर की कार्रवाई हुई  – योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जारी है एनकाउंटर की कार्रवाई – सबसे अधिक मेरठ में 85 अपराधी किए गए ढेर, अपराधियों को ढेर करने में मेरठ जोन पहले स्थान पर    – एनकाउंटर की कार्रवाई में दूसरे नंबर पर है वाराणसी जोन और तीसरे नंबर पर है आगरा जोन  लखनऊ योगी सरकार की यूपी पुलिस ने मिशन शक्ति 5.0 के तहत एक बार फिर अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पिछले बीस दिनों में एक दर्जन से अधिक एनकाउंटर की कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दौरान कई अपराधियों को यमलोक का रास्ता दिखाया जबकि कई को हॉफ एनकाउंटर में दबोचा। यूपी पुलिस ने बीते सोमवार को मेरठ में एक बच्ची के साथ दरिंदगी के मामले में 25 हजार के इनामी बदमाश शहजाद उर्फ निक्की को ढेर किया जबकि कुछ दिन पहले बरेली में अभिनेत्री दिशा पाटनी के घर पर फायरिंग करने वाले बदमाशों को करारा जवाब दिया।       एनकाउंटर में मेरठ जोन ने मारी बाजी, पूरे प्रदेश में एनकाउंटर में पहले स्थान पर योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेश में पिछले साढ़े आठ वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड कार्रवाई करते हुए एनकाउंटर में 256 दुर्दांत अपरधियों को मुठभेड़ में ढेर कर यमलोक पहुंचाया है। इस दौरान पुलिस ने कुल 15,726 मुठभेड़ की कार्रवाइयां कीं, जिनमें 31,960 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। एनकाउंटर की कार्रवाई में 10,324 अपराधी घायल हुए। वहीं अपराधियों से लोहा लेते हुए 18 पुलिसकर्मी शहीद हो गये जबकि 1,754 पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रदेश में सबसे अधिक मुठभेड़ मेरठ ज़ोन में दर्ज की गईं, जहां पुलिस ने 4,453 कार्रवाई की। इस कार्रवाई में 8,312 अपराधी दबोचे गये जबकि 3,131 अपराधी घायल हुए। वहीं, 85 कुख्यात अपराधियों को मौके पर ही मार गिराया गया। इस दौरान 461 पुलिसकर्मी घायल हुए जबकि अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए दो पुलिसकर्मी शहीद हो गये। एनकाउंटर कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में मेरठ जोन पहले स्थान पर रहा है। इसी तरह, वाराणसी ज़ोन में 1,108 मुठभेड़ हुईं, जिनमें 2,128 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया जबकि 27 अपराधियों को मुठभेड़ में ढेर किया गया। इस दौरान 688 अपराधी और 99 पुलिसकर्मी घायल हुए। पूरे प्रदेश में वाराणसी जोन एनकाउंटर कार्रवाई में दूसरे स्थान पर है। वहीं, एनकाउंटर कार्रवाई में पूरे प्रदेश में आगरा जोन तीसरे स्थान पर है। यहां 2,374 एनकाउंटर की कार्रवाई की गईं, जिनमें 5,631 अपराधियों को दबोचा गया। इस दौरान 816 अपराधी घायल हुए जबकि 22 अपराधी मार गिराए गए। मुठभेड़ के दौरान 59 पुलिसकर्मी घायल हुए।  कमिश्नरेट में सबसे अधिक गाजियाबाद कमिश्नरी ने मारी बाजी, 13 अपराधी किये ढेर एनकाउंटर आंकड़ों पर नजर डालें तो लखनऊ ज़ोन में 846 मुठभेड़ के दौरान 17 दुर्दांत अपराधियों को मारा गया। वहीं प्रयागराज ज़ोन में 572 मुठभेड़ के दौरान 10 अपराधी मारे गए। बरेली ज़ोन में 2,059 मुठभेड़ में 17, कानपुर जोन में 717 मुठभेड़ में 12 और गोरखपुर जोन में 642 मुठभेड़ में 8 अपराधियों को मारा गया। इसी तरह, लखनऊ कमिश्नरी में 138 मुठभेड़ में 12, गौतमबुद्ध नगर में 1,117 मुठभेड़ में 9, वाराणसी कमिश्नरी में 131 मुठभेड़ में 7, कानपुर कमिश्नरी में 234 मुठभेड़ में 4, आगरा कमिश्नरी में 458 मुठभेड़ में 7, गाजियाबाद कमिश्नरी में 736 मुठभेड़ में 13 और प्रयागराज कमिश्नरी में 141 मुठभेड़ में 6 अपराधियों को ढेर किया गया। पुलिसिया एक्शन ने अपराधियों को प्रदेश छोड़ने पर किया मजबूर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढ़े आठ वर्षों में यूपी पुलिस ने अपराधी या तो जेल में होगा या प्रदेश से बाहर के मंत्र को धरातल पर उतारा। इससे अपराधियों में भय और आम जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। यही वजह है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। योगी सरकार की नीति के तहत पुलिस ने संगठित अपराध, माफियागीरी और अवैध वसूली पर सख्त प्रहार किया है। मुठभेड़ के साथ ही संपत्ति कुर्की, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और एनएसए जैसे कानूनों के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अपराधियों के खिलाफ चला यह साढ़े आठ वर्षीय अभियान न सिर्फ आंकड़ों में बल्कि जमीनी हकीकत में भी कानून का राज स्थापित करने में सफल रहा है। पुलिस की त्वरित, कठोर और साहसिक कार्रवाई ने अपराधियों को प्रदेश छोड़ने पर मजबूर कर दिया है और उत्तर प्रदेश अब भयमुक्त और सुरक्षित राज्य के रूप में अपनी पहचान को सशक्त कर रहा है।