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यूपी में बढ़ेगा कनेक्टिविटी नेटवर्क, 22 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू होंगी 1,540 बस रूट्स

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में परिवहन की समस्या से गुजर रहे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अच्छी खबर हैं. जल्द ही ग्रामीण इलाकों को जिले के डिपो मुख्यालय से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री जनता बस सेवा का संचालन शुरू किया जाएगा. शुरुआती दौर में पहले चरण में 22 जिलों में इस परिवहन सेवा का संचालन शुरू होगा. जिससे गांवों की कनेक्टिविटी बढ़ेगी और लोगों का आना-जाना आसान होगा.  पहले चरण में ये कोशिश की जाएगी कि एक जिले के सबसे बड़े ब्लॉक तहसील को दूसरे जिले के साथ कनेक्ट किया जाए. यहां एक महीने तक बस सेवा का संचालन किया जाएगा. इस बीच अगर किसी तरह की परेशानी या कमियां दिखाई देती हैं तो उन्हें दूर किया जाएगा और फिर इसके दायरे को बढ़ाया जाएगा.  गांवों को मुख्य शहरों से जोड़ने की तैयारी तमाम कमियों को दूर करने के बाद पूरे प्रदेश में 1540 मार्गों पर मुख्यमंत्री जनता बस सेवा का संचालन शुरू कर दिया जाएगा. सीएम योगी आदित्यनाथ ने 6 सितंबर को ही कई बसों को संचालन भी शुरू किया था और अब परिवहन विभाग में ग्रामीणों के लिए जनता बस सेवा के संचालन पर भी मंथन किया जा रहा है.  इस प्रस्ताव के तहत परिवहन विभाग द्वारा गांवों को मुख्य शहरों से जोड़ने के लिए प्रथम जिला व डिपो मुख्यालय तक बसें चलाईं जाएंगी. जो कम किराये में ग्रामीणों के लिए उपलब्ध होंगी. इन बसों में दूसरी बसों के मुकाबले किराया भी कम होगा.  पहले चरण में 22 जिलों में जनता बस सेवा का संचालन होगा. इनमें लखनऊ, कानपुर, आगरा, शाहजहांपुर, सीतापुर, हरदोई, बरेली, मथुरा, नोएडा, ग़ाज़ियाबाद, एटा, फिरोजाबाद, वाराणसी, जौनपुर और बलिया जैसे जिलों को शामिल किया गया है.  परिवहन विभाग के मुताबिक इन बसों के संचालन के लिए सिंगर क्रू संचालन व्यवस्था लागू होगी. ये बसें चार चक्कर लगाएंगी. इनकी दूरी 60-80 किमी तक रहेगी. इसके साथ भी ये भी प्लान है कि बस का ठहराव गाँव में होना जरूरी होगा. किसी भी मार्ग पर तीन या तीन से ज्यादा बसों को संचालन जरूरत के हिसाब से किया जा सकेगा.    

UP पुलिस का बड़ा फेरबदल: 79 दारोगा अब DSP, जानें आपकी जिले की क्या स्थिति

लखनऊ  उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए 79 दारोगाओं (इंस्पेक्टर और आरआई) को पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर प्रोन्नत किया है। इस प्रोन्नति में 70 इंस्पेक्टर और 9 रिजर्व इंस्पेक्टर (आरआई) शामिल हैं। सभी अधिकारियों ने अब डिप्टी एसपी की जिम्मेदारी संभाल ली है। यह फैसला 29 अगस्त को हुई विभागीय प्रोन्नति समिति (DPC) की बैठक में लिया गया। हालांकि अभी ये सभी अधिकारी अपने वर्तमान स्थानों पर ही तैनात रहेंगे, लेकिन भविष्य में जरूरत के अनुसार उनका तबादला किया जा सकता है। कौन-कौन अधिकारी हुए प्रोन्नत? – विनोद कुमार दुबे – चुनार, मिर्जापुर – विपिन कुमार – मुरादाबाद – राकेश कुमार शर्मा – सुल्तानपुर – भैया संतोष कुमार सिंह – सोनभद्र – विकास राय – लखनऊ कमिश्नरेट – सुनील कुमार सिंह – हमीरपुर इनके अलावा, चंदौली, रामपुर, जौनपुर, कुशीनगर, हाथरस, मेरठ, बस्ती, कानपुर, गाजीपुर, लखनऊ मुख्यालय, सीतापुर, नोएडा, बुलंदशहर, अयोध्या, बलिया, भदोही, बरेली, सहारनपुर, बहराइच, और PAC व विशेष सुरक्षा वाहिनी (Special Security Force) के कई अधिकारी इस प्रोन्नति सूची में शामिल हैं।   पिछले 2 सालों में सबसे बड़ी प्रोन्नति प्रक्रिया यह प्रोन्नति प्रक्रिया उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में पिछले 2 सालों में डीएसपी पद पर हुई सबसे बड़ी पदोन्नति मानी जा रही है। इससे पहले, दो साल पहले 117 इंस्पेक्टरों को डीएसपी बनाया गया था। हाल ही में, 21 पीपीएस अधिकारियों को आईपीएस संवर्ग में भी प्रोन्नत किया गया है। यह सिलसिला पुलिस प्रशासन को अनुभव और नेतृत्व क्षमता से भरपूर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। प्रोन्नति से क्या होगा असर? इस फैसले से प्रदेश में पुलिस व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को नया नेतृत्व मिलेगा। अपराध नियंत्रण में अनुभवी अफसरों की भागीदारी बढ़ेगी। अधिकारियों को करियर में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। पुलिस महकमे में अनुशासन और संगठनात्मक मजबूती आएगी। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सभी अधिकारी अपने वर्तमान तैनाती स्थल पर बने रहेंगे ताकि प्रशासनिक संतुलन बना रहे। लेकिन समय और जरूरत के अनुसार इनका तबादला भी किया जा सकता है।  

ज्ञानदायिनी, भक्ति से जोड़ने वाली और मुक्ति का मार्ग दिखाने वाली कथा है श्रीमद्भागवत : सीएम योगी

युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत कथा के विराम पर बोले मुख्यमंत्री गोरखपुर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर परिस्थिति में सनातन धर्म के प्रति समर्पण का भाव बना रहे, यही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का वास्तविक मर्म है। श्रीमद्भागवत कथा जीवन के ज्ञान का भान कराने वाली, भक्ति से जोड़ने वाली और मुक्ति का मार्ग दिखाने वाली कथा है।  सीएम योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में बुधवार शाम श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के विराम सत्र पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मंदिर के दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में कथा श्रवण करने तथा व्यासपीठ के समक्ष श्रद्धावनत होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा पांच हजार वर्ष पहले पहली बार स्वामी शुकदेव जी ने महाराजा परीक्षित को मृत्यु के भय से अभय करने के लिए सुनाई थी। तबसे यह कथा कोटि-कोटि सनातन धर्मावलंबियों की मुक्ति का माध्यम बन रही है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा उद्घोष करती है कि भारत में जन्म लेना दुर्लभ है। उसमें भी मनुष्य रूप में जन्म लेना और भी दुर्लभ है। सनातन भारत ने ही ज्ञान, भक्ति और मुक्ति की दाता, जीवन के रहस्यों का उद्घाटन करने वाली श्रीमद्भागवत कथा का उपहार दिया है। उन्होंने कहा कि कथा का वास्तविक मर्म यह है कि हम हरहाल में अपने धर्म और देश के प्रति अडिग रहें। किसी भी परिस्थिति में बिना झुके, बिना रुके, बिना डिगे सनातन और भारत के प्रति समर्पण का भाव बनाए रखें।  व्यासपीठ पर विराजमान कथा व्यास, परिधान पीठ गोपाल मंदिर श्रीअयोध्याधाम से पधारे जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने अत्यंत सरलता और सहजता से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। इसका आनंद यहां आए श्रद्धालुओं के साथ मीडिया के जरिये लाखों लोगों ने प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी रामदिनेशाचार्य जी रामानंदाचार्य परंपरा से आते हैं। अगले वर्ष उनके श्रीमुख से यहां श्रीराम कथा का भी श्रवण कराया जाएगा।  कथा के विराम पर मुख्यमंत्री, संतजन व यजमानगण ने श्रीमद्भागवत महापुराण और व्यासपीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर मस्तनाथ पीठ रोहतक हरियाणा के महंत राजस्थान विधानसभा के विधायक बालकनाथ, जूनागढ़ गुजरात से आए महंत शेरनाथ, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, काशी से आए जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा, नैमिषारण्य से आए स्वामी विद्या चैतन्य, हनुमानगढ़ी अयोध्या से आए महंत राजूदास, यज्ञमान पूर्व विधायक अतुल सिंह, अजय सिंह, महेश पोद्दार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।

सपा विधायक मनोज पारस की मुश्किलें बढ़ीं: पेश नहीं होने पर कोर्ट ने दी जेल की सजा

बिजनौर  नगीना से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक मनोज पारस को 2020 के हत्या के प्रयास के एक मामले में जमानत याचिका खारिज होने के बाद जेल भेज दिया गया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) जितेंद्र चौहान ने बताया कि रसीदपुर गढ़ी निवासी छतर सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 29 सितंबर, 2020 को झालू रोड पर उन पर चाकुओं से हमला किया गया था।  समाजवादी पार्टी के कुछ अन्य नेताओं के साथ, पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक पारस को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया था। बाद में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए। चौहान ने बताया कि मंगलवार को पारस न्यायाधीश शांतनु त्यागी की अदालत में पेश हुए, जिन्होंने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी और उन्हें जेल भेज दिया।   

आजम खान की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला, डूंगरपुर केस में कोर्ट ने जताई सहानुभूति

प्रयागराज इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने समाजवादी पार्टी (सपा) नेता आजम खान को कथित डूंगरपुर मामले में बुधवार को जमानत दे दी। इस मामले में एक रिहायशी कॉलोनी को कथित तौर पर बलपूर्वक खाली कराया गया था। रामपुर की एमपी-एमएलए (सांसद-विधायक) अदालत ने आजम खान को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। न्यायमूर्ति समीर जैन ने आजम खान द्वारा दायर जमानत याचिका पर यह आदेश पारित किया। इससे पूर्व, 12 अगस्त को अदालत ने आजम खान और बरकत अली नाम के एक ठेकेदार की जमानत याचिका पर निर्णय सुरक्षित रख लिया था। बरकत अली ने भी उच्च न्यायालय में एक आपराधिक अपील दायर की है। कथित डूंगरपुर मामले में अबरार नाम के एक व्यक्ति ने आजम खान, पुलिस से क्षेत्राधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए आले हसन खान और ठेकेदार बरकत अली के खिलाफ अगस्त, 2019 में रामपुर के गंज पुलिस थाने में एक मामला दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आजम खान, आले हसन खान और बरकत अली ने दिसंबर, 2016 में उसकी पिटाई की थी और उनके घर में तोड़फोड़ करते हुए उसे जान से मारने की धमकी दी थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इसके साथ ही इन तीनों ने उसका घर भी ध्वस्त करा दिया था। इस मामले में रामपुर की एमपी..एमएलए विशेष अदालत ने 30 मई, 2024 को आजम खान को 10 वर्ष और बरकत अली को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। डूंगरपुर बस्ती में रह रहे लोगों ने कॉलोनी खाली कराने का आरोप लगाते हुए 12 मामले दर्ज कराये थे। ये मामले गंज थाने में लूट, चोरी और मारपीट सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज कराये गए थे।

ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बोले गोरक्षपीठाधीश्वर

योग्य गुरु मिले तो कोई भी मनुष्य अयोग्य नहीं : सीएम योगी युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में श्रद्धाजंलि समारोह ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बोले गोरक्षपीठाधीश्वर समाज और राष्ट्र को दिशा दिखाई गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय ने : मुख्यमंत्री गोरखपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है। अगर कोई मनुष्य अयोग्य है तो मानकर चलिए उसे योग्य योजक नहीं मिला। योग्य गुरु मिलने पर मनुष्य अयोग्य हो ही नहीं सकता। इस परिप्रेक्ष्य में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की सर्वस्वीकार्य प्रतिष्ठा सुयोग्य योजक की रही है।   सीएम योगी को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धाजंलि समारोह के अंतर्गत बुधवार (आश्विन कृष्ण तृतीया) को महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर अपनी भावाभिव्यक्ति कर रहे थे। ‘अमन्त्रमक्षरं नास्ति, नास्ति मूलमनौषधम्, अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः’ का उद्धरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा कोई अक्षर नहीं है जिसमें मंत्र बनने का सामर्थ्य न हो और ऐसी कोई वनस्पति नहीं है जिसमें औषधीय गुण न हो। ऐसे ही कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, जरूरत होती है व्यक्ति की योग्यता को पहचान कर उसे सही दिशा देने वाले गुरु की। गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय ने सदैव योजक की भूमिका का निर्वहन कर समाज और राष्ट्र को दिशा दिखाई। पूर्ववर्ती दोनों पीठाधीश्वरों युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्र संत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज का पूरा जीवन देश और धर्म के लिए समर्पित था। साधु अकेला, समाज उसका परिवार, सनातन ही उसकी जाति मुख्यमंत्री ने कहा कि साधु अकेला होता है। समाज उसका परिवार, राष्ट्र उसका कुटुंब होता है और उसकी जाति सिर्फ सनातन होती है। उन्होंने कहा कि संतों के संकल्प में पवित्रता, दृढ़ता होती है, संकल्प में उसकी साधना के अंश होते हैं। और, जब सच्चा संत कोई संकल्प लेता है तो उसके परिणाम अवश्य आते हैं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ऐसे ही संकल्पों वाले संत थे। अयोध्या के श्रीराम मंदिर निर्माण के उनके संकल्प और संकल्प के प्रति किए गए संघर्ष का परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है।  हिंदुआ सूर्य महाराणा प्रताप की परंपरा से गोरखपुर आए महंत दिग्विजयनाथ मुख्यमंत्री ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति को नमन करते हुए कहा कि महंतका जन्म इतिहास प्रसिद्ध मेवाड़ की उस कुल परंपरा में हुआ था जिसने विदेशी आक्रांताओं के सामने कभी समर्पण नहीं किया। वह हिंदुआ सूर्य महाराणा प्रताप की परंपरा से गोरखपुर आए। उनका जीवन सिर्फ आध्यात्मिक उन्नयन तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने धर्म के अभ्युदय के साथ समाज और राष्ट्र के हित में सांसारिक उत्कर्ष को भी शिक्षा और सेवा के माध्यम से आमजन के लिए महत्व दिया। यही कार्य महंत अवेद्यनाथ जी ने भी किया। सीएम योगी ने कहा कि सच्चा साधु धर्म के अभ्युदय और निः श्रेयस, दोनों को साथ लेकर चलता है।  गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी और शैक्षिक क्रांति के पुरोधा थे महंत दिग्विजयनाथ मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ जी गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी थे। उन्होंने इसे सनातन परंपरा के वैभवशाली मंदिर के रूप में स्थापित किया। इसके साथ ही उनकी ख्याति पूर्वी उत्तर प्रदेश में शैक्षिक क्रांति के पुरोधा के रूप में भी है। 1932 में उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना के साथ ही गोरखपुर में विश्वविद्यालय स्थापित करने का संकल्प लिया था। देश की आजादी के बाद जब गोरखपुर में विश्वविद्यालय स्थापित करने की बात आगे बढ़ी तो बहुत से लोग पीछे हट गए। तब महंत दिग्विजयनाथ जी ने अपने दो डिग्री कॉलेज दान में देकर विश्वविद्यालय की स्थापना सुनिश्चित कराई। उन्होंने बालिका शिक्षा के केंद्र को भी स्थापित करने का संकल्प बालिका विद्यालय बनवाकर पूरा किया।  गुलामी के प्रतीकों को हटाने का लिया था संकल्प सीएम योगी ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी ने गुलामी के प्रतीकों का हटाने का संकल्प लिया था। अयोध्या में गुलामी की निशानी ढांचे को हटाकर भव्य श्रीराम मंदिर बनाना उनका और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी का संकल्प और सपना था। आज दोनों आचार्यों का यह संकल्प गुलामी के निशान को हटाकर पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज ऐसा कौन भारतीय होगा जिसे अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर देखकर गर्व न होता हो। कोई ऐसा होगा तो उसके भारतीय होने पर ही संदेह होगा। विकसित भारत केवल राजनीतिक संकल्प नहीं, भारत और भारतीयता का मंत्र अपने संबोधन में सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए विकसित भारत के उद्घोष का भी उल्लेख किया। कहा कि विकसित भारत केवल राजनीतिक संकल्प नहीं है बल्कि यह भारत और भारतीयता का मंत्र है। वसुधैव कुटुम्बकम की दृष्टि से कभी भारत ने दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराया था। कोई आपस में लड़े न, यह भारत की परंपरा है। ऐसा फिर से हो, इसके लिए विकसित और आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता है। इसलिए, हर भारतीय को विकसित भारत के संकल्प से जुड़ना होगा।  जब संकल्प अंतःकरण से होता है तो वह अवश्य पूरा होता है।  परंपराएं हमारी विरासत, सीख लेने की जरूरत मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्षपीठ में पूज्य आचार्यों की स्मृति में साप्ताहिक आयोजन पीठ की परंपरा का हिस्सा है। मंदिर के अलावा आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की सभी संस्थाओं में भी पूज्य आचर्यद्वय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए आयोजन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि परंपराएं हमारी विरासत होती हैं। वर्तमान और भावी पीढ़ी को इनके जरिये प्रेरणा और सीख लेने की जरूरत होती है। विरासत के संदर्भ में उन्होंने अखंड भारत में दुनिया के पहले विश्वविद्यालय, प्रभु श्रीराम के भाई भरत के पुत्र तक्ष के नाम पर स्थापित तक्षशिला विश्वविद्यालय का उल्लेख भी किया। बताया कि पाणिनि का व्याकरण इसी तक्षशिला विश्वविद्यालय से आगे बढ़ा। महर्षि सुश्रुत और चरक जैसे आयुर्वेद के जनक इसी विश्वविद्यालय से निकले। आयुर्वेद, व्याकरण, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, कृषि सहित अनेक क्षेत्रों के लिए यही प्राचीनतम विश्वविद्यालय रहा।  महंत दिग्विजय नाथ और महंत अवेद्यनाथ न होते तो राम मंदिर बनता ही नहीं : डॉ. रामविलास … Read more

योगी राज में बेटी और व्यापारी हुए सुरक्षित, तो दिखने लगा प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर

विकसित यूपी @2047 :  आत्मनिर्भर हो रही नारी, बम्पर हुआ व्यापार'  यूपी ले रहा नया अवतार : लक्ष्मी हुईं सुरक्षित तो बढ़ने लगा अर्थ-व्यापार  – योगी राज में बेटी और व्यापारी हुए सुरक्षित, तो दिखने लगा प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर – 2017 से पहले महिला श्रम भागीदारी दर सिर्फ 13.5%, आज बढ़कर 34.5% – औद्योगिक ऋण 3.54 लाख करोड़ से बढ़कर 9.24 लाख करोड़ पहुंचा  – 2047 तक महिला भागीदारी दर पुरुषों के बराबर लाने का योगी सरकार का लक्ष्य – विनिर्माण निर्यात और एफडीआई में देश में नंबर-1 बनेगा यूपी – 2047 तक यूपी की जीडीपी 6 ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य, देश की अर्थव्यवस्था में देगा 20% का योगदान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बीते साढ़े आठ साल में किये गये लगातार प्रयासों के फलीभूत प्रदेश में आज बेटी और व्यापारी दोनों सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि लक्ष्मी स्वरूप महिलाएं स्वयं को तेजी से सशक्त बना रही हैं, साथ ही प्रदेश में उद्योग-व्यापार का माहौल स्थापित होने लगा है। इसी सोच के साथ अब सीएम योगी ने "विकसित यूपी @2047" का विजन सामने रखा है, जिसमें आत्मनिर्भर नारी और बम्पर व्यापार को राज्य की प्रगति का मूल आधार माना गया है। 2017 से पहले की स्थिति साल 2017 से पहले प्रदेश कई चुनौतियों से घिरा हुआ था। गुंडाराज, माफिया तंत्र और अपराध ने प्रदेश में सबसे ज्यादा परेशान महिलाओं और उद्यमियों तथा व्यापारियों को कर रखा था। बेटियां स्कूल-कॉलेज जाने से भी डरती थीं, तो वहीं व्यापारी या तो गुंडा टैक्स और रंगदारी देने के मजबूर थे या प्रदेश से पलायन करने को बाध्य। बेरोजगारी दर 6.2 प्रतिशत थी और लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (एलएफपीआर) मात्र 44.6 प्रतिशत रह गया था। सबसे बड़ी चिंता महिला श्रम भागीदारी दर की थी, जो सिर्फ 13.5 प्रतिशत पर अटकी हुई थी। निवेशक प्रदेश में आने से हिचकिचा रहे थे और कई फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर पहुंच चुकी थीं। औद्योगिक गतिविधियां ठप पड़ने लगी थीं और रोजगार का संकट गहराता जा रहा था। 2017 से 2025 : बदलाव की नई इबारत योगी सरकार ने बीते साढ़े आठ साल में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। अपराधी या तो जेल की सलाखों के पीछे नजर आने लगे या परलोक सिधार गये, बचे खुचे अपनी जान की परवाह करते हुए प्रदेश छोड़कर भाग खड़े हुए। इसके बाद महिला सुरक्षा के साथ ही महिलाओं के सशक्तिकरण के द्वार तो खुले ही निवेश के क्षेत्र में भी व्यापक तौर पर बुनियादी बदलाव दिखने शुरू हो गये। प्रदेश का एलएफपीआर 44.6 प्रतिशत से बढ़कर 56.9 प्रतिशत हो गया। महिला श्रम भागीदारी दर में भी ऐतिहासिक उछाल आया और यह 13.5 से बढ़कर सीधे 34.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। बेरोजगारी दर घटकर 3 प्रतिशत पर आ गई और अकेले एमएसएमई सेक्टर से 1.65 करोड़ रोजगार सृजित हुए। औद्योगिक ऋण 3.54 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 9.24 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा। इसी दौरान 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर समझौते हुए, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं जमीन पर उतर भी चुकी हैं। उद्योग और व्यापार को मिली नई पहचान योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को नया जीवन मिला है। पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या 14,169 से बढ़कर 27,295 तक हो गई हैं। 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना के अंतर्गत 77 उत्पादों को जीआई टैग मिला है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर पहुंच गया है। एमएसएमई इकाइयों की संख्या 96 लाख हो गई, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। यह न सिर्फ रोजगार सृजन का बड़ा जरिया बना, बल्कि वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश की पहचान भी मजबूत हुई है। 2047 का विजन : आत्मनिर्भर नारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि 'विकसित यूपी @2047' का सबसे अहम स्तंभ महिला सशक्तिकरण है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक प्रदेश में महिला श्रम भागीदारी दर 50 प्रतिशत हो और 2047 तक यह पुरुषों के बराबर पहुंचे। इसके लिए महिलाओं को 'स्टेम' (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथेमेटिक्स) शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। किशोरी कल्याण, पोषण व स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त किया जाएगा। महिला श्रमिकों के लिए 2030 और 2047 तक उनकी जरूरत के हिसाब से हर शहर में हॉस्टल की व्यवस्था की जाएगी। 2047 का विजन : बम्पर व्यापार और निवेश सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक विनिर्माण निर्यात में उत्तर प्रदेश देश में नंबर एक बने और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के मामले में भी शीर्ष पर पहुंचे। प्रदेश की पांच औद्योगिक कंपनियों को फॉर्च्यून ग्लोबल 500 की सूची में शामिल कराने का रोडमैप तैयार है। इसके लिए एयरोस्पेस, डिफेंस प्रोडक्शन, अपैरल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेमीकंडक्टर को रणनीतिक स्तंभ बनाया गया है। ग्रीन और टेक्नोलॉजी आधारित विकास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में भविष्य का उद्योग केवल रोजगार नहीं देगा, बल्कि सतत विकास का मॉडल भी बनेगा। इसी दिशा में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर, नीतिगत ढांचा, टेक्नोलॉजी एडॉप्शन और एमएसएमई को ग्लोबल वैल्यू चेन में शामिल करने पर खास जोर दिया जा रहा है। 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य 'विकसित यूपी @2047' के तहत राज्य ने 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए 2025 से 2047 तक औसतन 16 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखनी होगी। वर्तमान में प्रदेश की जीडीपी 353 बिलियन डॉलर है, जो 2030 तक 1000 बिलियन, 2036 तक 2000 बिलियन और 2047 तक 6000 बिलियन डॉलर तक पहुंचाई जाएगी। उस समय प्रति व्यक्ति आय 26 लाख रुपये तक होगी और यूपी देश की कुल जीडीपी में 20 प्रतिशत योगदान देगा।  

आश्विन कृष्ण चतुर्थी, गुरुवार को महंत अवेद्यनाथ जी की स्मृति में होगी श्रद्धांजलि सभा

सामाजिक समरसता और राम मंदिर के लिए युगों तक याद रहेंगे राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ आश्विन कृष्ण चतुर्थी, गुरुवार को महंत अवेद्यनाथ जी की स्मृति में होगी श्रद्धांजलि सभा गोरखनाथ मंदिर में जारी श्रद्धांजलि सप्ताह का होगा समापन, सीएम योगी सहित कई संतजन रहेंगे मौजूद गोरखपुर  गोरक्षपीठ में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि पर जारी साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह गुरुवार (11 सितंबर) को संपन्न हो जाएगा। आश्विन कृष्ण चतुर्थी, गुरुवार को वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूज्य गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के विराट व्यक्तित्व का स्मरण कर उन्हें शब्दों और भावों की श्रद्धांजलि दी जाएगी। सामाजिक समरसता को ही आजीवन ध्येय मानने वाले श्रीराम मंदिर आंदोलन के नायक ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ का स्मरण सदैव एक ऐसे संत के रूप में होता है जिनमें समूचे राष्ट्र के सनातनियों की आस्था है।  नाथपंथ की लोक कल्याण की परंपरा को धर्म के साथ राजनीति से भी संबद्ध कर महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने पांच बार मानीराम विधानसभा और चार बार गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी किया।  श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए हुए आंदोलन को निर्णायक पड़ाव देने के लिए इस राष्ट्रसंत को निश्चित ही युगों-युगों तक याद किया जाएगा। 18 मई 1919 को गढ़वाल (उत्तराखंड) के ग्राम कांडी में जन्में महंत अवेद्यनाथ का बचपन से ही धर्म, अध्यात्म के प्रति गहरा झुकाव था। उनके इस जुड़ाव को विस्तृत आयाम नाथपंथ के विश्वविख्यात गोरक्षपीठ में महंत दिग्विजयनाथ के सानिध्य में मिला। गोरक्षपीठ में उनकी विधिवत दीक्षा 8 फरवरी 1942 को हुई और वर्ष 1969 में महंत दिग्विजयनाथ की आश्विन तृतीया को चिर समाधि के बाद 29 सितंबर को वह गोरखनाथ मंदिर के महंत व पीठाधीश्वर बने। योग व दर्शन के मर्मज्ञ पीठाधीश्वर के रूप में उन्होंने अपने गुरुदेव के लोक कल्याणकारी व सामाजिक समरसता के आदर्शों का फलक और विस्तारित किया। यह सिलसिला 2014 में आश्विन कृष्ण चतुर्थी को उनके चिर समाधिस्थ होने तक अनवरत जारी रहा। अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों का योगदान स्वर्णाक्षरों में अंकित है। महंत दिग्विजयनाथ ने अपने जीवनकाल में मंदिर आंदोलन में क्रांतिकारी नवसंचार किया तो उनके बाद इसकी कमान संभाली महंत अवेद्यनाथ ने। नब्बे के दशक में उनके ही नेतृत्व में श्रीराम मंदिर आंदोलन को समग्र, व्यापक और निर्णायक मोड़ मिला। आंदोलन की ज्वाला गांव-गांव तक प्रज्वलित हुई। महंत अवेद्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति और श्रीराम जन्मभूमि निर्माण उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष के रूप में आंदोलन में संतो, राजनीतिज्ञों और आमजन को एकसूत्र में पिरोया। यह भी सुखद संयोग है कि पांच सदी के इंतजार के बाद अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण उनके शिष्य योगी आदित्यनाथ की देखरेख में हुआ है। महंत अवेद्यनाथ वास्तविक अर्थों में धर्माचार्य थे। धर्म के मूल मर्म सामाजिक समरसता को उन्होंने अपने जीवनपथ का उद्देश्य बनाया। आजीवन उन्होंने हिन्दू समाज से छुआछूत और ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त करने के लिए वृहद अभियान चलाया। अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बरहपंथ योगी महासभा के अध्यक्ष के रूप में महंतजी ने देशभर के संतों को भी अपने इसी अभियान से जोड़ा। अपने स्पष्ट विचारों के चलते पूरे देश के संत समाज में अति सम्माननीय रहे महंत अवेद्यनाथ दक्षिण भारत के मीनाक्षीपुरम में दलित समाज के सामूहिक धर्मांतरण की घटना से बहुत दुखी हुए। इस तरह की पुनरावृत्ति उत्तर भारत में न हो, इसी कारण से धर्म के साथ उन्होंने राजनीति की भी राह चुनी। उनका ध्येय हिन्दू समाज की कुरीतियों को दूर कर पूरे समाज को एकजुट करना था। इसे लेकर उन्होंने दलित बस्तियों में सहभोज अभियान शुरू किया जहां जातिगत विभेद से परे सभी लोग एक पंगत में भोजन करते। काशी में डोमराजा के घर संत समाज के साथ भोजन कर महंतजी ने सामाजिक समरसता का देशव्यापी संदेश दिया। सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने दलित कामेश्वर चौपाल के हाथों राम मंदिर के भूमिपूजन की पहली ईंट रखवाई। महंत अवेद्यनाथ सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए प्रभु श्रीराम और देवी दुर्गा के उद्धरणों से संदेश देते थे। ऐसे संदेश उनकी दिनचर्या में शामिल थे। महंतलोगों को व्यावहारिक रूप में समझाते थे कि प्रभु श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर खाए, निषादराज को गले लगाया, गिद्धराज जटायु का अंतिम संस्कार अपने हाथों किया, वनवास के दौरान वनवासियों से मित्रता की तो इसके पीछे उनकी सोच समरस समाज की स्थापना ही थी। वह बताते थे कि देवी दुर्गा की आठ भुजाएं समाज के चारों वर्णों से दो-दो भुजाओं की प्रतीक हैं। समाज के ये चारों वर्ण एकजुट हो जाएंगे तो वह भी देवी दुर्गा की भांति इतने सशक्त होंगे कि किसी भी शक्तिशाली पर नियंत्रण पा लेंगे। ठीक वैसे ही जैसे अष्टभुजी देवी दुर्गा सबसे तेज तर्रार और शक्तिशाली जीव शेर पर सवारी करती हैं।  महंत अवेद्यनाथ के नाम राजनीति के क्षेत्र में भी अनूठा रिकार्ड है। उन्होंने पांच बार (1962, 1967, 1969, 1974 व 1977) मानीराम विधानसभा सीट और चार बार (1970, 1989,1991 व 1996) गोरखपुर सदर संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व किया था। वह अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के उपाध्यक्ष व महासचिव के रूप में भी प्रतिष्ठित रहे।

राहुल गांधी वापस जाओ! रायबरेली पहुंचते ही विरोध, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने संभाला मोर्चा

रायबरेली लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष एवं सांसद राहुल गांधी बुधवार को अपने संसदीय क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे। उनके दौरे का प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने विरोध किया। लखनऊ प्रयागराज हाईवे पर बैठकर राहुल के काफिले को रोक दिया। हाईवे पर समर्थकों के साथ मंत्री दिनेश हाईवे पर बैठ गए। इस दौरान नारेबाजी होने लगी है। राहुल गांधी वापस जाओ के नारे लगाए। करीब 20 मिनट तक का काफिला रुका रहा। इस दौरान पुलिस प्रशासन के हाथ पैर फूल गए। सांसद राहुल गांधी बुधवार को दिवसीय दौरे पर रायबरेली पहुंचे। लखनऊ से रायबरेली आते समय हरचंदपुर क्षेत्र के गुलुपुर के पास उनका विरोध किया गया। प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह और कार्यकर्ता लखनऊ प्रयागराज हाईवे पर बैठ गए। राहुल गांधी वापस जाओ के नारे लगाए। करीब 20 मिनट तक राहुल गांधी का काफिला रुका रहा। इस दौरान कार्यकर्ता उत्तेजित हो गए। हालांकि मंत्री ने उन्हें समझाया तब जाकर समर्थक शांत हुए। मंत्री दिनेश सिंह ने कहा कि राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए। बिहार में उनकी मौजूदगी में प्रधानमंत्री की मां को गाली दी गई। यह किसी तरह से समाज के लिए ठीक नहीं है। प्रदेश सरकार के मंत्री के विरोध के चलते पुलिस प्रशासन के हाथ पैर फूल गए। काफी देर तक वहां अफरातफरी का माहौल रहा। पुलिस को हालात सामान्य करने में काफी समय लगा। किसी तरह राहुल के काफिले को आगे बढ़ाया गया। इससे पहले राहुल गांधी लखनऊ एयरपोर्ट पहुचे थे। लखनऊ एयरपोर्ट पर कोंग्रेसियों ने भव्य स्वागत किया।. राहुल लखनऊ एयरपोर्ट से रायबरेली के लिए रवाना हुए थे। राहुल गांधी सड़क मार्ग से रायबरेली पहुंचे थे।  

सीएम योगी का बड़ा कदम: नेपाल में फंसे भारतीयों के लिए हेल्पलाइन नंबर, 4 बॉर्डर जिलों में हाई अलर्ट

लखनऊ  नेपाल में दो दिनों से हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं. राजधानी काठमांडू से लेकर छोटे कस्बों तक Gen-Z आंदोलनकारियों का विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है. पथराव, आगजनी से शुरू हुआ ये बवाल अब बढ़ता ही जा रहा है. नेपाल की इस अस्थिरता का असर अब खासकर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों तक भी महसूस किया जाने लगा है. नेपाल सीमा से सटे बहराइच, श्रावस्ती, लखीमपुर और महाराजगंज को हाई अलर्ट पर डाल दिया गया है. व्यापार, पढ़ाई और रोजमर्रा की आवाजाही के कारण नेपाल से लगे जिले हमेशा से संवेदनशील रहे हैं. यही कारण है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा को कड़ा कर दिया है योगी सरकार की सख्त तैयारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण को निर्देश दिया कि नेपाल से सटी पूरी सीमा पर 24 घंटे पुलिस अलर्ट पर रहे. आदेश मिलते ही सभी संबंधित जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. गश्त बढ़ा दी गई है, सीमा चौकियों को और मजबूत किया गया है और सुरक्षा एजेंसियों को हर छोटी-बड़ी सूचना पर सतर्क रहने को कहा गया है. बताया जा रहा है कि सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवानों को विशेष रूप से यह हिदायत दी गई है कि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई करें और किसी भी आपात स्थिति से निपटने में देरी न हो. इसके लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) को सक्रिय कर दिया गया है. इसके अलावा ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके. नेपाल में फंसे भारतीयों के लिए मदद का इंतजाम नेपाल में जारी उथल-पुथल की वजह से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक फंस गए हैं. इनमें व्यापारी, छात्र, तीर्थयात्री और पर्यटक शामिल हैं. इनकी सुरक्षा और वापसी के लिए यूपी पुलिस मुख्यालय लखनऊ में एक विशेष नियंत्रण कक्ष (Control Room) बनाया गया है. यह कंट्रोल रूम अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) की देखरेख में काम करेगा और 24×7 सक्रिय रहेगा. हेल्पलाइन नंबर और व्हाट्सएप नंबर जारी किए गए हैं, जिन पर फंसे नागरिक सीधे संपर्क कर सकते हैं. हेल्पलाइन नंबर जारी हुए: – 0522-2390257 – 0522-2724010 – 9454401674 – WhatsApp नंबर: 9454401674 इन नंबरों पर आने वाली कॉल्स को हैंडल करने के लिए प्रशिक्षित टीम लगाई गई है, जो तुरंत संबंधित विभागों से संपर्क कर मदद पहुंचाएगी. अधिकारियों ने कहा है कि नेपाल में मौजूद भारतीयों को किसी भी हाल में असहाय नहीं छोड़ा जाएगा. सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी नेपाल में हालात बदलते ही अफवाहों का बाजार भी गर्म हो गया है. गलत सूचनाओं से माहौल बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए यूपी पुलिस मुख्यालय की सोशल मीडिया इकाई को सख्त निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि नेपाल से जुड़ी किसी भी संवेदनशील सूचना या पोस्ट पर लगातार नजर रखी जाए. अगर कोई भ्रामक पोस्ट या अफवाह सामने आती है तो तुरंत कार्रवाई की जाए. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे. नेपाल की स्थिति और बढ़ती चिंता नेपाल में सोमवार तक आंदोलन का चेहरा छात्रों और युवाओं का था, जो सोशल मीडिया बैन का विरोध कर रहे थे. लेकिन मंगलवार को स्थिति ने अचानक करवट बदली. हथियारबंद लोग भीड़ में शामिल हो गए और विरोध हिंसा में बदल गया. इससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह टकराव हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की यह अस्थिरता लंबे समय तक बनी रह सकती है, क्योंकि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव अब खुला संघर्ष बन चुका है. ऐसे में भारत के लिए विशेष सतर्कता जरूरी है, क्योंकि दोनों देशों की खुली सीमाएं सुरक्षा के लिहाज से चुनौती बन सकती हैं. मुख्यमंत्री योगी की सख्त निगरानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ले रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि सीमावर्ती जिलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और कहा गया है कि नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की हर संभव मदद की जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि सीमा पर आवागमन को नियंत्रित किया जाए और जरूरत पड़ने पर अस्थायी तौर पर आवाजाही बंद कर दी जाए. यही कारण है कि कई जगह स्थानीय प्रशासन ने बॉर्डर पर चेकिंग सख्त कर दी है और संदिग्ध लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है. नागरिकों के लिए संदेश पुलिस और प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक हेल्पलाइन या प्रशासनिक चैनल से मिली जानकारी पर भरोसा करें. सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वालों से कहा गया है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें.