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यूपी का लक्ष्य : 2030 तक फसल उत्पादकता में देश में नंबर एक, 2047 तक दुनिया में अग्रणी

‘विकसित यूपी @2047’ योगी सरकार का संकल्प, 2047 तक यूपी बनेगा कृषि उत्पादकता में वैश्विक लीडर यूपी का लक्ष्य : 2030 तक फसल उत्पादकता में देश में नंबर एक, 2047 तक दुनिया में अग्रणी  कृषि निर्यात में भी यूपी दिखाएगा दम, 2030 तक भारत में नंबर 1 और 2047 तक वैश्विक स्तर पर शीर्ष देशों में – भंडारण, प्रोसेसिंग, फूड पार्क और कोल्ड चेन इंफ्रा से किसानों को मिलेगा अधिक लाभ – पीएसीएस, एफपीओ और मेगा फूड पार्क से बदलेगा यूपी का कृषि परिदृश्य – नवाचार और वैज्ञानिक तकनीकों से योगी सरकार बना रही है ‘सस्टेनेबल एग्रीकल्चर’ का मॉडल – फसल विविधीकरण और शोध पर जोर, यूपी कृषि शिक्षा और रिसर्च का हब बनने की ओर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश को “विकसित यूपी @2047” बनाने का संकल्प लिया है, जिसके तहत आने वाले 22 वर्षों में कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बड़ी रणनीति बनाई गई है। इस विजन का सबसे अहम हिस्सा है कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार और तकनीक आधारित विकास। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि कृषि और औद्योगिक विकास मिलकर यूपी को विकसित भारत के ग्रोथ इंजन में बदलेंगे। आने वाले समय में प्रदेश न केवल भारत के किसानों के लिए, बल्कि वैश्विक कृषि जगत के लिए भी रोल मॉडल बनकर उभरेगा। भविष्य का लक्ष्य (विजन 2047) योगी सरकार ने 2030 तक यूपी को देश में फसल उत्पादकता में नंबर-1 बनाने का लक्ष्य तय किया है, जबकि 2047 तक प्रदेश दुनिया के अग्रणी देशों, मैक्सिको, चीन, फ्रांस और अमेरिका के बराबर खड़ा होगा। यही नहीं, कृषि निर्यात के क्षेत्र में भी यूपी 2030 तक भारत में प्रथम स्थान पर पहुँचेगा और 2047 तक रूस, ऑस्ट्रेलिया व कनाडा जैसे वैश्विक कृषि निर्यातकों की श्रेणी में शामिल होने का संकल्प ले चुका है। इसके लिए राज्य सरकार ने फोकस एरिया तय किए हैं, जिनमें भंडारण और मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर (PACS, FPOs, मेगा फूड पार्क, कोल्ड चेन), कृषि शिक्षा, नवाचार और रिसर्च, सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, वैज्ञानिक तकनीकों का विस्तार और फसल विविधीकरण प्रमुख हैं। बीते साढ़े आठ साल में हुए बड़े बदलाव 2017 से पहले प्रदेश की स्थिति बेहद पिछड़ी हुई थी। कृषि उत्पादन सीमित था, वैज्ञानिक तकनीक का प्रयोग नगण्य था और किसान अपनी उपज का सही मूल्य नहीं पा पाते थे। कोल्ड चेन और फूड प्रोसेसिंग जैसी सुविधाएं लगभग न के बराबर थीं। लेकिन पिछले साढ़े आठ साल में तस्वीर बदल चुकी है। योगी सरकार ने किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, मंडी व्यवस्था को मजबूत करने, स्टोरेज और कोल्ड चेन सुविधाओं को बढ़ाने और एफपीओ मॉडल को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया। परिणामस्वरूप आज प्रदेश कृषि उत्पादकता और विविधता दोनों में नई ऊंचाइयां छू रहा है।    

अखिलेश यादव छात्रों के सवालों से भाग रहे: अभाविप का आरोप

लखनऊए श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय में व्याप्त शैक्षिक भ्रष्टाचार की जांच तथा छात्रों पर लाठीचार्ज में दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर अब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ;अभाविपद्ध पूरे प्रदेशभर में हस्ताक्षर अभियान शुरू करेगी। इसके अलावा अभाविप के कार्यकर्ता जिलों में मानव श्रंखला बनाकर विरोध जतायेंगे। वहीं अभाविप ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्षएवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के उस बयानए जिसमें उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि छात्र अभाविप की पिटाई का वीडियो देखकर दुखी हुए होंगेए की कड़ी आलोचना की। अभाविप ने अखिलेश यादव को लेकर तंज कसा कि सूप बोले तो बोलेए चालनियां बोले जिसके 72 छेद।  अभाविप के प्रान्त मंत्री अंशुल विद्यार्थी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि अखिलेश यादव जिस तरह से छात्रों के मुद्दे पर अठखेलियां करते हुए स्वार्थ की राजनीतिक रोटी सेकने का प्रयास कर रहें हैं ये दुर्भाग्यपूर्ण हैए छात्र समाज जागरुक है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव जिस तरह से बेसिर पैर की चर्चा कर रहे हैं उससे पूरे प्रदेश की जनता आपकी गंदी मानसिकता को देख रही है और समझ रहीए कि आप किस तरह से आपदा को अवसर बनाने में लगे हो। आपकी केवल सत्ता के लोलुपता की मानसिकता की जो गंदी सोच है वो जगजाहिर है। सब को समझ आ रहा कि एक तरफ छात्रों पर लाठीचार्ज की निंदाए वही दूसरी तरफ छात्रों को गुंडा कहने पर एक कैबिनेट मंत्री का छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन करने पर जाति का कार्ड खेलकर समाज को बांटने व दूषित करने की मानसिकता भी उजागर हो रही है। हालांकि मंत्री को अपनी गलती का एहसास हुआए जिसकी माफ़ी का वीडियो भी जारी हुआ और छात्रों का हाल चाल जानने के लिए अस्पताल में एडमिट छात्रों को देखने भी मंत्री के सुपुत्र अस्पताल पहुंचे जिसकी फुटेज सोशल मीडिया पर देखी जा सकतीए इससे आपकी एक और गंदी राजनीति असफ़ल हुई।  प्रान्त संगठन मंत्री ने कहा कि असल में आप कभी भी छात्रों के और प्रदेश की जनता के हितैषी रहे ही नहींए केवल मुखौटा ओढ़े रहे। आपके इस मुखौटे की वज़ह से भ्रमित छात्र और जनता आपको सत्ता में लाई थी। उस समय आप गिरगिट से भी तेज रंग बदले। फिर शुरू हुआ प्रदेश में गुंडाराजए महिलाओं पर अत्याचारए समाज में लूट खसोटए अवैध वसूलीए अपहरणए छात्रों का शोषणए उनपर लाठी चार्ज आदि अनेक कुकृत्य करवाए और फिर इन्हीं छात्र समाज और जनता का भ्रम टूटा और उन्होंने फिर आपकी औकात बताते हुए आपको सत्ता से बाहर किया। अब फिर फरेब कर सत्ता हथियाना चाहते होए जो आपकी ये मंशा अब कभी कामयाब नहीं होगी। आप इस प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे और इस प्रदेश की जनता का दुर्भाग्य रहा है।  

योगी सरकार ने अक्षय ऊर्जा और वृक्षारोपण को बनाया जनआंदोलन

‘विकसित यूपी @2047’ सीएम योगी का संकल्प, 2047 तक यूपी के सभी बड़े नगर होंगे 'सोलर सिटी'   योगी सरकार ने अक्षय ऊर्जा और वृक्षारोपण को बनाया जनआंदोलन -2030 तक 15% वक्षाच्छादन और 50% नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य  ग्रीन हाइड्रोजन व अक्षय ऊर्जा में यूपी ने रखा वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य – 2047 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का सीएम योगी का संकल्प लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘विकसित यूपी@2047’ विजन के तहत उत्तर प्रदेश को ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में नई दिशा देने का खाका तैयार किया है। उनका सबसे बड़ा लक्ष्य आने वाले 22 वर्षों में प्रदेश के सभी प्रमुख नगरों को ‘सोलर सिटी’ के रूप में विकसित करना है। इसके साथ ही यूपी को जलवायु सहिष्णु और शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला राज्य बनाने का भी संकल्प लिया गया है। योगी सरकार ने अक्षय ऊर्जा को दिया है बढ़ावा  योगी सरकार ने 2017 के बाद इस स्थिति को बदलने की दिशा में बड़े कदम उठाए। अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने, हरित परिवहन को प्रोत्साहित करने और वृक्षारोपण को जनांदोलन का रूप देने में सफलता मिली। इसी दौरान ‘सोलर सिटी’ की अवधारणा को भी आगे बढ़ाया गया, जिसके तहत अयोध्या से शुरुआत कर सभी बड़े नगरों को सौर ऊर्जा पर आधारित शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। बता दें कि 2017 से पहले प्रदेश का ऊर्जा उत्पादन लगभग पूरी तरह थर्मल आधारित था। प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कोई ठोस कार्ययोजना नहीं थी। वृक्षारोपण अभियान सीमित था और अक्षय ऊर्जा का योगदान बेहद कम था।  लघु अवधि (2030) के लक्ष्य योगी सरकार ने लघु अवधि (2030) के लक्ष्य तय कर दिए हैं। इनमें अयोध्या सहित सभी प्रमुख नगरों को ‘सोलर सिटी’ में बदलना, वक्षाच्छादन को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करना, थर्मल ऊर्जा पर निर्भरता घटाकर 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा सुनिश्चित करना और सभी पर्यावरणीय एसडीजी लक्ष्यों को प्राप्त करना शामिल है। मध्यम और दीर्घ अवधि (2047) के लक्ष्य  मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप सरकार ने मध्यम और दीर्घ अवधि (2047) में सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश को जलवायु सहिष्णु राज्य के रूप में विकसित किया जाए। इस दौरान वक्षाच्छादन को 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा और वन क्षेत्र का राष्ट्रीय योगदान 3 प्रतिशत तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों को ‘सोलर सिटी’ में तब्दील करने, शून्य कार्बन उत्सर्जन सुनिश्चित करने और ग्रीन हाइड्रोजन व अक्षय ऊर्जा में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट मत है कि 'सोलर सिटी' की परिकल्पना न केवल ऊर्जा सुरक्षा का आधार बनेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि का भी मजबूत जरिया साबित होगी। ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और वृक्षारोपण जैसे अभियान प्रदेश को 2047 तक न सिर्फ ‘विकसित यूपी’ बल्कि ‘ग्रीन यूपी’ भी बनाएंगे।

पैसे नहीं, समय से करें लेन-देन! कानपुर का नया टाइम बैंक और इसके फायदे

कानपुर  जब भी बैंक का नाम आता है, हमारे मन में पैसों के लेन-देन की तस्वीर उभरती है. लेकिन कानपुर शहर में पहली बार ऐसा बैंक खुला है, जहां रुपये-पैसे का कोई काम नहीं होगा. यहां हर सदस्य अपने खाते में समय जमा करेगा और जरूरत पड़ने पर समय ही निकाल सकेगा. इस अनोखे प्रयोग का नाम है- टाइम बैंक. इस बैंक की खासियत यह है कि इसमें सदस्य अपनी सेवाओं के बदले घंटे जमा करते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर कोई सदस्य किसी बुजुर्ग की सेवा में दो घंटे लगाता है, तो उसके खाते में उतने घंटे दर्ज हो जाते हैं. बाद में जब उसे खुद किसी काम में मदद चाहिए होगी, तो वह उन्हीं घंटों को अपने खाते से निकाल सकता है. जानकारी के अनुसार, टाइम बैंक की शुरुआत सबसे पहले जापान में हुई थी. वहां बुजुर्गों की देखभाल के लिए परिवारजन समय नहीं निकाल पाते थे, तो समाज के लोगों ने मिलकर यह व्यवस्था बनाई. धीरे-धीरे यह मॉडल कई देशों में फैल गया. आज भारत में भी सात हजार से अधिक लोग टाइम बैंक से जुड़े हुए हैं और अब कानपुर भी इस पहल का हिस्सा बन गया है. कानपुर के महेश कुमार, जो इस प्रयोग के सक्रिय सदस्य हैं, बताते हैं कि यह बिल्कुल सेविंग अकाउंट की तरह है. फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें रुपये की जगह घंटे जमा होते हैं. विदेशों में तो सरकारें टाइम बैंक को समर्थन भी देती हैं और सदस्यों को सेवा कार्यों के लिए निर्देशित करती हैं. कानपुर में फिलहाल इसे समाजिक पहल के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है. करवानी पड़ेगी रजिस्ट्रेशन महेश कुमार बताते है कि इस सेवा की प्रक्रिया वेबसाइट और ऐप से शुरू होती है. सबसे पहले अपने रजिस्ट्रेशन कराना होता है और ई-केवाईसी होती है. इसके बाद आप एक दूसरे की सेवा या समय ले सकते है. उदाहरण के तौर पर अगर कोई अस्पताल में भर्ती है और उसको दो घंटे या इससे ज्यादा भी सेवा करने के लिए किसी की आवश्यकता है तो वह अपनी डिमांड भेज सकता है. जो इस सेवा के लिए राजी हो जाएगा उसको सेवा करनी होगी. सेवा खत्म होने के बाद जितने घंटे सेवा की उतने उसके खाते में जुड़ जाएंगे जिसका इस्तेमाल वो अपनी सेवा के लिए कभी भी कर सकता है. यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है. कानपुर में करीब 25 लोगों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है. अब जैसे ही एडमिन की नियुक्ति होगी वैसे ही यहां भी सेवा शुरू हो जाएगी. बैंककर्मी और डॉक्टर भी जुड़े कई रिटायर्ड बैंककर्मी और डॉक्टर भी इस बैंक से जुड़ चुके हैं. उनका कहना है कि यह पहल सेवानिवृत्त लोगों और अकेलेपन से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है. इससे न केवल मदद मिलती है, बल्कि समाज में आपसी जुड़ाव और सेवा की भावना भी मजबूत होती है. सदस्य बनने के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है, जिसमें आधार, पैन या अन्य पहचान पत्र देना होता है. इसके बाद सदस्य का खाता खोला जाता है और उसमें समय दर्ज होने लगता है. खास बात यह है कि यहां हर व्यक्ति के समय की बराबर कीमत है. कानपुर का टाइम बैंक अब धीरे-धीरे और लोगों को जोड़ने की तैयारी में है. इसका उद्देश्य सिर्फ सेवा देना ही नहीं, बल्कि समाज में यह संदेश फैलाना है कि असली दौलत समय है और हर व्यक्ति का समय समान रूप से मूल्यवान है.  

250 बसों से शुरू हुई ग्रामीण जनता सेवा, योगी ने कम किया किराया 20 प्रतिशत

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में परिवहन विभाग की विभिन्न सेवाओं का शुभारंभ और डिजिटल लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इस दौरान सीएम योगी ने ग्रामीण जनता सेवा का तोहफा दिया। इसके तहत यूपी के गांवों में 250 बसें संचालित की जाएंगी। प्रत्येक डिपो की 10% फ्लीट जनता सेवा की होगी। ये बसें 75-80 किमी दूरी के दायरे में आने वाले गांवों तक चलेंगी। इसका किराया 20 प्रतिशत तक कम होगा। ग्रामीणों को सस्ती यात्रा सुविधा देने के लिए ग्रामीण जनवा सेवा बसों की शुरुआत की गई है। इसमें सफर करने के लिए किराया भी कम लगेगा। यूपी रोडवेज की अन्य बसों में अभी 1.30 रुपये प्रति किलोमीटर के अनुसार किराया तय किया जारा है। वहीं, अब शुरू हुईं ग्रामीण जनता सेवा बसों में 1.04 रुपये प्रति किलोमीटर के अनुसार किराया तय होगा। इसके अलावा सीएम योगी ने आरटीओ कार्यालय से जुड़े 48 कामों के आवेदन के लिए डेढ़ लाख जन सुविधा केंद्रों की भी घोषणा की है। उन्होंने विभाग को बधाई देते हुए कहा कि परिवहन विभाग प्रदेश के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सबसे बड़ा माध्यम है और इसे विकसित भारत की परिकल्पना का सारथी बनना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के पास देश में सबसे बड़ा बेड़ा है। इतनी बड़ी संख्या में सेवाएं देना अपने आप में एक उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ ही चुनौतियां भी कम नहीं हैं। उन्होंने रक्षाबंधन पर बहनों को तीन दिनों तक मुफ्त बस यात्रा उपलब्ध कराने की पहल को सराहनीय बताया और कहा कि विभाग भविष्य में इस तरह की सेवाओं का प्रचार-प्रसार और प्रभावी तरीके से करे। सीएम योगी ने चालकों के लिए घोषणा करते हुए निर्देश दिए कि बस चालकों का नियमित मेडिकल और फिजिकल फिटनेस टेस्ट हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से कराया जाए। विशेष रूप से आंखों की जांच जरूरी है ताकि दृष्टि दोष के कारण दुर्घटनाएं न हों। उन्होंने कहा कि सड़क पर अंदाजे से गाड़ी चलाने की छूट नहीं दी जा सकती। सीएम योगी ने हेलमेट, सीट बेल्ट, नशे में ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग जैसी स्थितियों पर कड़े नियम लागू करने और मीडिया—डिजिटल, प्रिंट, सोशल व विजुअल—के माध्यम से प्रचार-प्रसार बढ़ाने पर जोर दिया। आधुनिक बस स्टेशन, इलेक्ट्रिक बसें और स्क्रैपिंग नीति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परिवहन विभाग को समय की मांग के अनुसार अपनी सेवाओं को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाना होगा। बस स्टेशन विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस हों, बसें सड़कों पर अव्यवस्थित खड़ी न रहें और यात्रियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित माहौल मिले—इसके लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बस सेवा से पर्यावरण संरक्षण के साथ बेहतर यात्रा अनुभव भी संभव है। चार्जिंग स्टेशनों के लिए निजी क्षेत्र को जोड़ा जा सकता है। साथ ही, पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग को बढ़ावा देना होगा ताकि प्रदूषण और सड़क हादसों का खतरा कम हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स को और सुदृढ़ किया जाए और विभाग जवाबदेही के साथ काम करे। प्रयागराज महाकुंभ जैसे आयोजनों में भी परिवहन विभाग ने लाखों यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुँचाकर अपनी क्षमता साबित की है। अब जरूरत है कि शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म प्लानिंग के जरिए विभाग प्रदेश के विकास का सारथी बने। इस अवसर पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक जय देवी, अमरेश कुमार, ओपी श्रीवास्तव, योगेश शुक्ल, विधान परिषद सदस्य रामचंद्र प्रधान, मुकेश शर्मा, प्रमुख सचिव (परिवहन) अमित गुप्ता, परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह, परिवहन निगम के एमडी मासूम अली सरवर आदि मौजूद रहे।  

पैरोल पर शादी का विवाद, बाहुबली नेता डीपी यादव के बेटे विकास यादव ने रचाई हर्षिका यादव से शादी

गाजियाबाद नीतीश कटारा मर्डर केस में पिछले 23 सालों से जेल में बंद और उम्र कैद की सजा काट रहे विकास यादव की शादी हो गई. कार्ड पर शादी की जगह चीनी मिल कम्पाउंड, मानपुर नगरिया, न्यौली, कासगंज लिखा था. लेकिन शादी डीपी यादव के राजनगर, गाजियाबाद में मौजूद आवास पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ  बड़े सादा अंदाज में हुई. इस साल अप्रैल से ही विकास यादव जमानत पर बाहर है. हालाकि ये अंतरिम जमानत विकास को शादी के लिए नही बल्कि अप्रैल में इसलिए मिली थी ताकि वो अपनी बीमार मां की देखभाल कर सके. इसी बीच विकास यादव के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में शादी का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की मियाद बढ़ाने की गुजारिश की थी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने विकास यादव की अंतरिम जमानत एक हफ्ते के लिए और बढा दी. इससे विकास यादव की शादी का रास्ता साफ हो गया था और अब वो 9 सितंबर तक अंतरिम जमानत पर आजाद है. सगाई, शादी और विवाद! हालांकि 2002 में जिस नीतीश कटारा मर्डर केस में विकास यादव को उम्र कैद की सजा मिली उन नीतीश कटारा की मां नीलम कटारा के वकील ने विकास यादव की अंतरिम जमानत बढ़ाए जाने का ये कहकर विरोध किया कि विकास यादव की शादी पहले ही हो चुकी है. इस सिलसिल में कोर्ट के सामने दो तस्वीरें पेश की गईं. नीलम कटारा के वकील का दावा था कि विकास यादव की शादी 5 जुलाई को ही हो चुकी है. उन तस्वीरों के कोर्ट में पेश किए जाने के बाद विकास यादव के वकील ने दावा किया कि ये तस्वीरें शादी की नहीं बल्कि सगाई की हैं. असल में उस तस्वीर में ऐसी कई चीजें हैं, जिसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि ये तस्वीर सचमुच सगाई की है या विकास यादव की शादी पहले ही हो चुकी है. अगर सिलसिलेवार उस तस्वीर को देखें तो उसमें कई चीजें ऐसी हैं जो अमूमन पश्चिमी यूपी के इस इलाके में सगाई के दौरान देखने को नहीं मिलती. सबसे पहले तो तस्वीर में विकास यादव और उसकी होने वाली दुल्हन या हो चुकी दुल्हन हर्षिका के आगे हवन कुंड रखा हुआ है. हवन कुंड में बाकायदा अग्नि जल रही है. शादी में इसी अग्नि को साक्षी मानकर फेरे लेने की रस्म पूरी की जाती है. विकास और हर्षिका ने जो कपड़े पहने है वो शादी का ही जोड़ा है. सगाई में इस तरह के कपड़े अमूमन नहीं पहने जाते. दुल्हन ने गुलाबी रंग का जोड़ा पहना है. जिसपर लाल रंग का दुपट्टा है. दूल्हे ने सफेद रंग की शेरवानी पर गुलाबी रंग का फेटा पहना है. दुल्हन का दुपट्टा और दूल्हे का फेटा आपस में बंधा हुआ है. अमूमन ऐसा फेरे के वक्त ही किया जाता है. क्योंकि इस गांठ को गठबंधन कहा जाता है. विकास यादव ने दाएं हाथ में सफेद रंग का रुमाल बांध रखा है जिसे कंगना कहा जाता है. और ये भी शादी के वक्त ही बांधा जाता है. दुल्हन ने सिर पर एक मुकुट पहन रखा है जिसे इस इलाके में मोहरी कहा जाता है. दुल्हन शादी के वक्त ही सिर पर मोहरी पहनती है ना कि सगाई के वक्त.  खैर इस तस्वीर के बाहर का सच ये है कि शुक्रवार यानी पांच सितंबर को विकास यादव की अब ऐलानिया शादी हो गई. खबरों के मुताबिक इस शादी को बेहद गोपनीय रखा गया. सिर्फ परिवार के खास और बेहद करीबी रिश्तेदार ही इस शादी में शिरकत करने आए थे. शादी का ये कार्ड भी इसलिए बाहर आ गय़ा क्योंकि ये कार्ड कोर्ट में अंतरिम ज़मानत की मियाद बढ़ाने के लिए एफिडेविट के तौर पर जमा किया गया था.  शादी के कार्ड पर कासगंज जिले का जो पता है और जिस शुगर मिल में शादी होनी थी वो शुगर मिल डीपी यादव की ही है. हालांकि वारदात की टीम गुरूवार को जब उस जगह पर पहुंची थी तो वहां ऐसी कोई खास हलचल नजर नहीं आई थी. ना ही शादी जैसा कोई माहौल दिखा और ना कोई साज-सजावट. आसपास के लोग भी शादी के बारे में बात करने से कतराते नजर आ रहे थे. नीतीश कटारा मर्डर केस की पूरी कहानी 23 साल तक जेल में रहने के बाद 5 सितंबर 2025 को विकास यादव शादी हो गई. इत्तेफाक देखिए कि 23 साल पहले वो भी शादी का ही एक मौका था, जब विकास यादव ने नीतीश कटारा को अगवा करने के बाद उसका कत्ल किया था. वो 16 फरवरी 2002 की रात थी. डीपी यादव की बेटी भारती और भारती का दोस्त नीतीश कटारा गाजियाबाद में एक शादी में शामिल होने पहुंचे थे. शादी भारती और नीतीश की कॉमन फ्रेंड शिवानी गौड़ की थी.  उस शादी में भारती का भाई विकास यादव अपने कजिन विशाल यादव और उनका साथी सुखदेव पहलवान भी पहुंचा था. विकास यादव को अपनी बहन भारती और नीतीश की दोस्ती पसंद नहीं थी. दोनों को शादी में एक साथ देखकर उसे गुस्सा आ गया. चश्मदीदों के बयान के मुताबिक कत्ल की रात शादी के फंक्शन में नीतीश और भारती ने साथ डांस किया था. जिसे देखकर विकास मौके पर ही आगबबूला हो गया था. नीतीश से विकास की ये अदावत अदालत में कत्ल की वजह साबित करने के लिये काफी थी. वारदात की रात नीतीश को आखिरी बार विकास यादव की टाटा सफारी में विशाल यादव और साथी सुखदेव पहलवान के साथ जाते देखा गया था. विकास ने पहले नीतीश को किसी काम के बहाने बाहर बुलाया. फिर एक सोची समझी साज़िश के तहत नीतीश को विकास और उसके साथी धोखे से गाड़ी में बिठा कर ले गए. देर रात तक नीतीश जब घर नहीं लौटा तो उसके घरवालों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. लेकिन तब भी नीतीश का कोई सुराग नहीं मिला. अचानक पांच दिन बाद 21 फरवरी को बुलंदशहर के खुर्जा इलाके में नीतीश की अधजली लाश मिली थी. जब ये हादसा हुआ तब विकास यादव यूपी के बिसौली इलाके में विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहा था. लेकिन नीतीश की हत्या की खबर अख़बारों में छपते ही वो सबकुछ छोड़ कर ग़ायब हो गया. हालांकि चुनाव में उसकी ज़मानत ज़ब्त हो गई. पुलिस के … Read more

मेरठ में धर्म आधारित विवाद: अब्दुल्ला रेजीडेंसी पर एंट्री रोक का आरोप, सरकार जांच में जुटी

मेरठ  यूपी में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के पास बन रही अब्दुल्ला रेजीडेंसी को लेकर विवाद हो गया है। आरोप लग रहा है कि इस कॉलोनी में केवल धर्म विशेष के लोगों को ही जगह दी जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि कॉलाेनी में अघोषित रूप से हिंदुओं को जगह देने पर रोक है। इसकी शिकायत मिलने पर स्थानीय विधायक और प्रदेश के ऊर्जा राज्य मंत्री डा.सोमेन्द्र तोमर ने डीएम और आवास विकास को जांच कराकर कार्रवाई के लिए कहा है। मंत्री ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि कोई बिल्डर धर्म विशेष को लेकर आवंटन की बात कैसे कर सकता है? इसके साथ ही उक्त जमीन के स्वामित्व का भी मामला है। उधर, अब्दुल्ला रेजीडेंसी के बिल्डर महेन्द्र गुप्ता ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। रेजीडेंसी में किसी को संपत्ति खरीदने पर कोई रोक नहीं है। इस बीच शनिवार को नायब तहसीलदार की अगुवाई में एक टीम ने मौके पर पहुंचकर अपने स्तर पर मामले की जांच भी की। हापुड़ रोड स्थित अब्दुल्ला रेजीडेंसी का काम पिछले कुछ सालों से चल रहा है। अब यह विवादों में है। आरोप है कि इस रेजीडेंसी में केवल धर्म विशेष के लोगों को ही प्रॉपर्टी खरीदने की सुविधा है। हाल में ही कॉलोनी में मस्जिद भी बनाई गई है। यह मामला जब ऊर्जा राज्य मंत्री डा.सोमेन्द्र तोमर के सामने आया है तो उन्होंने डीएम और आवास विकास को मामले की जांच के लिए कहा है। मंत्री का कहना है कि धार्मिक आधार पर किसी रेजीडेंसी का निर्माण नहीं किया जा सकता है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब आवास विकास ने आसपास की जमीन का अधिग्रहण किया तो उक्त जमीन अधिग्रहण से मुक्त कैसे हो गई। उधर, चर्चा है कि यह जमीन जेल में बंद एक गैंगस्टर से जुड़ी है। हालांकि डेवलपर्स कोई और है। फिलहाल प्रशासन और आवास विकास ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब्दुल्ला रेजीडेंसी की ओर से आई ये सफाई बिल्डर महेन्द्र गुप्ता ने कहा कि अब्दुल्ला रेजीडेंसी को लेकर जो भी आरोप लगाये जा रहे हैं तो वे गलत और निराधार हैं। अब्दुल्ला रेजीडेंसी में किसी को संपत्ति खरीदने पर कोई रोक नहीं है। आवास विकास और रेरा से स्वीकृत कॉलोनी है। कुछ लोगों ने वेवजह इस तरह के आरोप लगाये हैं। उन्होंने कहा कि वह जांच के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।  

मुख्यमंत्री ने किया परिवहन विभाग की विभिन्न सेवाओं का शुभारंभ, डिजिटल लोकार्पण एवं शिलान्यास

परिवहन विभाग बनेगा विकसित उत्तर प्रदेश का सारथीः सीएम योगी  मुख्यमंत्री ने किया परिवहन विभाग की विभिन्न सेवाओं का शुभारंभ, डिजिटल लोकार्पण एवं शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी बोले – समय की गति से पीछे जाना मतलब हमेशा पीछे रह जाना परिवहन विभाग ने 2019 कुंभ और कोरोना काल में प्रवासियों को सुरक्षित पहुंचायाः सीएम  हर साल सड़क हादसों में कोरोना से ज्यादा जानें जाती हैं, यह बड़ी चुनौती: मुख्यमंत्री बस चालकों की हर 3 महीने में मेडिकल और फिटनेस जांच अनिवार्य होः सीएम योगी  आईआईटी खड़गपुर और पुलिस के सहयोग से सड़क सुरक्षा को बनाया जाए उपयोगीः मुख्यमंत्री  प्रधानमंत्री के नेट ज़ीरो एमिशन लक्ष्य के लिए इलेक्ट्रिक बसें होंगी महत्वपूर्ण: योगी गांव-गांव कनेक्टिविटी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से 3 लाख रोजगार सृजित हो सकते हैंः सीएम  विश्वस्तरीय बस स्टेशन बनाने और पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग पर मुख्यमंत्री ने दिया जोर शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म प्लानिंग से विभाग को आगे बढ़ना होगाः मुख्यमंत्री  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में परिवहन विभाग की विभिन्न सेवाओं का शुभारंभ और डिजिटल लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने विभाग को बधाई देते हुए कहा कि परिवहन विभाग प्रदेश के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सबसे बड़ा माध्यम है और इसे विकसित भारत की परिकल्पना का सारथी बनना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के पास देश में सबसे बड़ा बेड़ा है। इतनी बड़ी संख्या में सेवाएं देना अपने आप में एक उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ ही चुनौतियां भी कम नहीं हैं। उन्होंने रक्षाबंधन पर बहनों को तीन दिनों तक मुफ्त बस यात्रा उपलब्ध कराने की पहल को सराहनीय बताया और कहा कि विभाग भविष्य में इस तरह की सेवाओं का प्रचार-प्रसार और प्रभावी तरीके से करे। समय की रफ्तार से कदम मिलाना जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति, समाज या राष्ट्र यदि समय की गति से पीछे जाता है तो हमेशा के लिए पीछे रह जाता है। लेकिन यदि वह समय की गति से दो कदम आगे चलने की क्षमता रखता है, तो विजयश्री का ध्वज फहराता है।  उन्होंने परिवहन विभाग से अल्पकालिक (3 वर्ष), मध्यम अवधि (10 वर्ष) और दीर्घकालिक (22 वर्ष) योजनाएं तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने सख्त निर्देश दिया कि फाइल को लटकाने की आदत बंद करनी पड़ेगी। जनसुनवाई को तेजी से आगे बढ़ाना पड़ेगा। विभाग में टीम वर्क को और सशक्त बनाना पड़ेगा तो परिणाम आने में देर नहीं लगेगी।  संकट काल में भी परिवहन विभाग रहा भरोसेमंद साथी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परिवहन विभाग ने समय-समय पर अपनी सेवाओं से मिसाल पेश की है। 2019 के प्रयागराज कुंभ और 2020 की वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान जब करोड़ों कामगार और श्रमिक अपने-अपने राज्यों और गांवों की ओर लौट रहे थे, तब विभाग ने उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि बिहार, झारखंड, ओडिशा, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड तक प्रवासियों को सुरक्षित पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इसी वर्ष आयोजित प्रयागराज महाकुंभ में भी विभाग ने रेलवे स्टेशनों और अन्य स्थानों पर उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करते हुए करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित ढंग से उनके गंतव्य तक पहुंचाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर संकट की घड़ी में परिवहन विभाग ने समय का सच्चा साथी बनकर प्रदेश और समाज की सेवा की है। सड़क सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सड़क सुरक्षा प्रदेश के लिए एक गंभीर चुनौती है। कोरोना काल के तीन वर्षों में जितनी जानें नहीं गईं, उससे अधिक लोग हर साल सड़क हादसों में मारे जाते हैं। इनमें अधिकतर युवा होते हैं, जिससे परिवार उजड़ जाते हैं। यह समाज और सरकार दोनों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है। यदि किसी यात्री की जान बचती है तो यह विभाग की सकारात्मक छवि बनाता है, लेकिन लापरवाही से जान जाने पर न केवल विभाग की बदनामी होती है, बल्कि आर्थिक क्षति भी होती है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बस चालकों का नियमित मेडिकल और फिजिकल फिटनेस टेस्ट हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से कराया जाए। विशेष रूप से आंखों की जांच जरूरी है ताकि दृष्टि दोष के कारण दुर्घटनाएं न हों। उन्होंने कहा कि सड़क पर अंदाजे से गाड़ी चलाने की छूट नहीं दी जा सकती। जागरूकता और समन्वय से ही समाधान मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाना होगा। इसके लिए IIT खड़गपुर जैसी संस्थाओं की तकनीकी मदद, पुलिस और अन्य विभागों का समन्वय, साथ ही स्कूलों में ट्रैफिक नियमों पर शिक्षा जरूरी है। उन्होंने हेलमेट, सीट बेल्ट, नशे में ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग जैसी स्थितियों पर कड़े नियम लागू करने और मीडिया—डिजिटल, प्रिंट, सोशल व विजुअल—के माध्यम से प्रचार-प्रसार बढ़ाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून कभी-कभी कठोर लगता है, लेकिन यही कानून अंततः आपकी सुरक्षा और जीवन की गारंटी है। प्रकृति के अनुरूप विकास और सड़क सुरक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार या विभाग की नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग—गांव-शहर, युवा-बुजुर्ग, महिला-पुरुष—की साझा जिम्मेदारी है। जब सभी लोग इसमें जुड़ेंगे तो सड़क हादसों को न्यूनतम स्तर तक लाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा विकसित एक ऐप के जरिए अत्यधिक दुर्घटना वाले क्षेत्रों की पहचान की गई, जिससे कई स्थानों पर हादसों की संख्या घटकर महीने में 18 से घटकर 3 तक हो गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों के पालन के साथ-साथ हमें प्रकृति के अनुरूप विकास करना होगा। प्रधानमंत्री के नेट ज़ीरो एमिशन लक्ष्य को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल महत्वपूर्ण माध्यम हैं। परिवहन और नगर विकास विभाग गांव-गांव कनेक्टिविटी और बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के जरिए न सिर्फ प्रदूषण कम कर सकते हैं, बल्कि 3 लाख तक नए रोजगार भी सृजित कर सकते हैं। आधुनिक बस स्टेशन, इलेक्ट्रिक बसें और स्क्रैपिंग नीति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परिवहन विभाग को समय की मांग के अनुसार अपनी सेवाओं को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाना होगा। बस स्टेशन विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस हों, बसें सड़कों पर अव्यवस्थित खड़ी न रहें और यात्रियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित माहौल मिले—इसके लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बस सेवा से पर्यावरण … Read more

हिंदू महिलाओं के साथ धोखा: UP में चांद का लव जिहाद पकड़ा गया

रामपुर यूपी के रामपुर से लव जिहाद का मामला सामने आया है। एक युवक ने हिंदू बनकर कई महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाए और सभी को अपना गलत नाम बताया। इसके बाद उन महिलाओं को छोड़ दिया और फरार हो गया। केमरी क्षेत्र में प्रेमजाल में फंसाने के बाद शारीरिक संबंध बनाने के साथ धर्मान्तरण कराने के आरोप में पुलिस ने शुक्रवार को एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इसके पास से छह फर्जी आधार कार्ड भी बरामद किए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह हिन्दू बनकर मोबाइल पर बात करता था और उसके बाद महिलाओं के साथ संबंध बनाता था। गो रक्षा सेवा समिति के जिलाध्यक्ष अमित गंगवार के साथ अन्य लोगों ने तहरीर दी थी, जिसमें कहा था कि केमरी निवासी चाचा-भतीजे सोशल मीडिया के माध्यम से हिन्दू बनकर महिलाओं और युवतियों को अपने प्रेमजाल में फंसाकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं। तहरीर में लव जिहाद फैलाने के लिये विदेशों से फंडिंग, गिरोह का लिंक धर्मान्तरण में शामिल छांगुर बाबा के गिरोह से होने की प्रबल संभावना जताई थी। थानाध्यक्ष हिमांशु चौहान ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी चांद ने बताया कि वह काफी दिनों से अपना नाम बदलकर महिलाओं व लड़कियों से मोबाइल पर बातें करता था। वाट्सऐप काल करके अश्लील बातें कर उन्हें कभी भी अपने पास बुलाकर शारिरिक संबंध बनाता था। इसके बाद वो वहां से फरार हो जाता या मोबाइल नंबर बदल लेता था। सभी को अलग-अलग नाम बताता था। इसके लिए उसने कई आधार कार्ड भी बनवा रखे थे। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और कहा कि उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

IGRS रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के जिलों का जलवा, बलरामपुर और श्रावस्ती टॉप पर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की निगरानी के लिए एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS) की अगस्त की रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट में बलरामपुर और श्रावस्ती ने संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया, दोनों जिलों ने 140 में से 137 अंक प्राप्त किए। शाहजहांपुर 134 अंकों के साथ दूसरे और हमीरपुर 132 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह रैंकिंग प्रशासनिक दक्षता और शिकायत निवारण में इन जिलों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को दर्शाती है। बलरामपुर के जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुसार, जिले में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के लिए साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। जन शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाता है और संतुष्टिपूर्ण फीडबैक के बाद ही मामले को बंद माना जाता है। इस दृष्टिकोण ने बलरामपुर को IGRS रैंकिंग में शीर्ष स्थान दिलाया। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता रहेगी। टॉप-10 सूची में कौन-कौन जिला श्रावस्ती के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि IGRS रिपोर्ट प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन के आधार पर जिलों का मूल्यांकन करती है। श्रावस्ती ने मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्यों के दम पर यह स्थान हासिल किया। जिला पिछले कई महीनों से IGRS और सीएम डैशबोर्ड की टॉप-5 सूची में बना हुआ है। टॉप-10 में पीलीभीत (चौथा), सोनभद्र (पांचवां), बरेली, अमेठी, हाथरस, औरैया और चंदौली भी शामिल हैं। कैसे तय होती है जिलों की रैंकिंग IGRS प्रणाली के तहत हर महीने 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की समीक्षा विभिन्न मानकों पर की जाती है, जिसके आधार पर जिलों की रैंकिंग तय होती है। यह प्रक्रिया प्रशासनिक पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है। बलरामपुर और श्रावस्ती की इस उपलब्धि ने अन्य जिलों के लिए एक मिसाल कायम की है। योगी सरकार की यह पहल जन शिकायतों के त्वरित निस्तारण और विकास कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।