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आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के विकास को मंजूरी

18 शहरों में 1725 एसी इलेक्ट्रिक बसें चलाएगी योगी सरकार जीसीसी मॉडल पर होगा संचालन, नगरीय परिवहन को मिलेगा आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल स्वरूप यात्रियों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं, निजी निवेश से बढ़ेगी सेवा गुणवत्ता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में कुल 24 प्रस्तावों को मिली स्वीकृति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में  आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य नगरीय परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और यात्री सुविधाओं के अनुरूप बनाना है। योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी तथा नोएडा (जेवर सहित) में 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की कुल 1725 एसी ई-बसों का संचालन किया जाएगा। इन बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों द्वारा जीसीसी मॉडल पर किया जाएगा और अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन तिथि से 12 वर्ष होगी। कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कुल 24 प्रस्तावों को कैबिनेट की ओर से स्वीकृति दी गई। जीसीसी मॉडल के अंतर्गत बसों की खरीद, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना, चालक एवं तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता, बसों का संचालन और अनुरक्षण की पूरी जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों की होगी। निर्धारित मानकों के आधार पर उन्हें संचालन एवं अनुरक्षण शुल्क का भुगतान किया जाएगा। योजना के तहत 12 मीटर ई-बस पर 40 लाख रुपये तथा 9 मीटर ई-बस पर 35 लाख रुपये प्रति बस की दर से अनुदान भी दिया जाएगा। परियोजना के लिए आवश्यक डिपो निर्माण हेतु भूमि संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। किराया एवं उपयोगकर्ता शुल्क का निर्धारण राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। इस योजना से सार्वजनिक परिवहन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और यात्रियों को आरामदायक, सुरक्षित एवं समयबद्ध परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही निजी निवेश के माध्यम से सरकारी वित्तीय भार कम होगा तथा प्रदेश के शहरों में आधुनिक शहरी परिवहन तंत्र को नई मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि अभी 15 नगर निगमों में नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है। आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के विकास को मंजूरी प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये जारी होंगे  कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए धनराशि स्वीकृत करने और व्यय संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय से प्रदेश में आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नगरीय विकास को नई गति मिलेगी। प्रदेश सरकार द्वारा तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शहरों के नियोजित विस्तार के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। योजना के संचालन के लिए 6 अप्रैल 2023 को विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। योजना के तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 वर्षों के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इससे विकास प्राधिकरणों और संबंधित एजेंसियों को बड़े पैमाने पर नगरीय अवसंरचना विकसित करने में सुविधा मिलेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 3500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसी के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में प्रस्तावित नए शहरों के विकास हेतु संबंधित अभिकरणों को कुल 355.06 करोड़ रुपये तक की सीड कैपिटल अनुमन्य की गई है। इसके सापेक्ष प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त करने का निर्णय लिया गया है। बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु पर मुआवजा नीति को मंजूरी आश्रितों को समयबद्ध व त्वरित सहायता होगी सुनिश्चित  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश के कारागारों में निरुद्ध बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में मृतक बंदियों के आश्रितों अथवा निकटस्थ परिजनों को मुआवजा भुगतान के लिए "उत्तर प्रदेश बंदी मृत्यु एवं मुआवजा भुगतान नीति" बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। नई नीति का उद्देश्य बंदियों के मानवाधिकारों की रक्षा, कारागार प्रशासन में पारदर्शिता तथा पीड़ित परिवारों को समयबद्ध राहत सुनिश्चित करना है। वर्तमान में बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली की संस्तुतियों के आधार पर मुआवजा भुगतान की व्यवस्था प्रचलित है। हालांकि इस प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर अनुमोदन और औपचारिकताओं के कारण मृतक बंदियों के आश्रितों को मुआवजा मिलने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग जाता था। इसी समस्या के समाधान के लिए योगी सरकार ने एक स्पष्ट और संस्थागत नीति बनाने का निर्णय लिया है। नई नीति के तहत कारागारों में निरुद्ध बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु होने पर उनके आश्रितों अथवा निकटस्थ परिजनों को निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान अधिक त्वरित और सुव्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा। इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे, जिससे सभी मामलों में एक समान और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित हो सके। विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों से स्वीकृत मानचित्रों के विनियमतीकरण को मंजूरी महायोजना विहीन क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति के लिए बनेगी एसओपी  योगी कैबिनेट ने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत किए गए मानचित्रों के विनियमतीकरण तथा विकास क्षेत्र, विस्तारित विकास क्षेत्र एवं विनियमित क्षेत्रों में, जहां अभी महायोजना तैयार नहीं है, वहां मानचित्र स्वीकृति के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। इस निर्णय से लंबे समय से लंबित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विकासात्मक समस्या का समाधान होगा। विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा पूर्व में स्वीकृत किए गए मानचित्रों की वैधता को लेकर जो प्रश्न उठ रहे थे, उन्हें विनियमतीकरण के माध्यम से दूर किया जा सकेगा। इससे आम नागरिकों, भू-स्वामियों और निर्माणकर्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार जिन विकास क्षेत्रों, विस्तारित विकास क्षेत्रों अथवा विनियमित क्षेत्रों की महायोजना अभी तैयार नहीं हुई है, वहां मानचित्र स्वीकृति के लिए एक स्पष्ट और … Read more

सिपाही भर्ती परीक्षा से पहले योगी सरकार का तोहफा, उम्मीदवारों को मिलेगी किराए में रियायत

लखनऊ यूपी में सिपाही बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए राहत भरी खबर है. प्रदेश में होने जा रही आरक्षी नागरिक पुलिस भर्ती परीक्षा से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभ्यर्थियों की सुविधाओं को लेकर कई अहम निर्देश दिए हैं. सबसे बड़ा फैसला यह है कि परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए रियायती किराये पर विशेष बसों का संचालन किया जाएगा, ताकि उन्हें परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश की कानून-व्यवस्था, पुलिस भर्ती परीक्षा और आगामी जनभागीदारी कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भर्ती परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि आरक्षी नागरिक पुलिस और समकक्ष पदों की भर्ती परीक्षा 8, 9 और 10 जून को आयोजित होगी. परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में कराई जाएगी।  सबसे अहम बात यह है कि इस भर्ती परीक्षा में करीब 29 लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है. इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासनिक तैयारियां भी युद्धस्तर पर की जा रही हैं. परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन, निगरानी तंत्र और कानून-व्यवस्था को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण मुख्यमंत्री के सामने रखा गया. मुख्यमंत्री ने सभी व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।  धूप में खड़ा नहीं रहेगा कोई अभ्यर्थी बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ऐसा निर्देश दिया, जिसकी चर्चा अब युवाओं के बीच हो रही है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी अभ्यर्थी को धूप में खड़ा रहने की नौबत नहीं आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, छाया, बैठने की व्यवस्था, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध रहनी चाहिए. लाखों युवाओं का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा है, इसलिए प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा देने आने वाला हर अभ्यर्थी व्यवस्था से संतुष्ट होकर वापस जाए. यही सरकार और प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।  बस किराए में छूट, विशेष बसें भी चलेंगी परीक्षा के दौरान सबसे बड़ी समस्या अक्सर यात्रा को लेकर सामने आती है. कई अभ्यर्थियों को अपने जिले से दूसरे जिले में जाकर परीक्षा देनी पड़ती है. ऐसे में परिवहन खर्च और समय दोनों बड़ी चुनौती बन जाते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को निर्देश दिया कि अभ्यर्थियों के लिए अंतर्जनपदीय विशेष बसों का संचालन किया जाए. साथ ही रियायती किराये की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।   सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर सख्ती मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया की लगातार निगरानी की जाए. यदि कोई व्यक्ति अफवाह फैलाने या भ्रामक जानकारी प्रसारित करने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए. सरकार का उद्देश्य है कि अभ्यर्थियों के बीच किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने और परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो।  6 जून को होगा पूर्वाभ्यास मुख्यमंत्री ने परीक्षा से पहले 6 जून को पूर्वाभ्यास कराने के निर्देश भी दिए हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा के दिन किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या सामने न आए. सेक्टर मजिस्ट्रेट, स्टेटिक मजिस्ट्रेट और केंद्र व्यवस्थापकों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्व का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से करे. गर्मी के मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी परीक्षा केंद्रों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. यदि कहीं बिजली बाधित होती है तो उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी पहले से तैयार रखी जाएगी. इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जाएगी. परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती रहेगी और संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी की जाएगी।  पर्यावरण अभियान को भी मिलेगी रफ्तार बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी कार्यक्रमों की भी समीक्षा की. उन्होंने कहा कि 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत प्रदेशभर में कम से कम 5 करोड़ पौधे लगाए जाएं. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पौधों की उपलब्धता, जियो टैगिंग और संरक्षण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल पौधारोपण कार्यक्रम नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मातृत्व सम्मान का प्रतीक अभियान बनना चाहिए. मुख्यमंत्री ने सभी ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जनआंदोलन बनाया जाना चाहिए।  12 साल पूरे होने पर जनसंवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 5 जून से 21 जून तक प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इन कार्यक्रमों में शिक्षाविदों, चिकित्सकों, उद्योगपतियों, वकीलों, युवा उद्यमियों और स्टार्टअप इनोवेटर्स के साथ संवाद किया जाएगा. सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होगी. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि चौपाल लगाने के निर्देश दिए. इन चौपालों में लोगों की समस्याएं सुनी जाएंगी और सरकारी योजनाओं की समीक्षा की जाएगी।  उन्होंने कहा कि मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी गांवों में रात्रि प्रवास भी करें, ताकि स्थानीय समस्याओं को नजदीक से समझा जा सके. बैठक के अंत में मुख्यमंत्री का फोकस एक बार फिर भर्ती परीक्षा पर ही रहा. उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा को पूरी पारदर्शिता, सुरक्षा और संवेदनशीलता के साथ संपन्न कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 

हरित कौशल विकास के लिए हुई ऐतिहासिक पहल

UPCAMP प्राधिकरण और 15 क्षेत्रीय ज्ञान केंद्र के बीच एमओयू हरित कौशल विकास के लिए हुई ऐतिहासिक पहल एमओयू के तहत अगले पांच वर्ष में हज़ारों युवाओं को हरित कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा यह पहल प्रदेश को वायु प्रदूषण से निपटने और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी लखनऊ, विश्व बैंक के सहयोग से क्रियान्वित उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनिज्मन्ट प्रोजेक्ट (UPCAMP) अथॉरिटी और 15 क्षेत्रीय ज्ञान केंद्रों के बीच बुधवार को पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय में एमओयू हुआ। इसका उद्देश्य राज्य में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और हरित कौशल बल के विकास को सुदृढ़ करना है। यह एमओयू पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।  इस एमओयू के तहत अगले पांच वर्ष में हज़ारों युवाओं को हरित कौशल प्रशिक्षण प्रदान किए जाने की योजना है। साथ ही, सरकारी अधिकारियों और स्थानीय निकायों के लिए नियमित क्षमता निर्माण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। यह पहल उत्तर प्रदेश को वायु प्रदूषण से निपटने और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी की अध्यक्षता में यह आयोजन हुआ। इसमें विभिन्न क्षेत्रीय ज्ञान केंद्र (विभिन्न विश्वविद्यालय एवं इंस्टीट्यूट) अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, मदन मोहन मालवीय विश्वविद्यालय, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी, चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड यूनिवर्सिटी, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी, दिल्ली इंस्टिट्यूट ऑफ एनवायरनमेंट एण्ड सस्टैनबल डेवलपमेंट, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी रूड़की, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अकबरपुर, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बिजनौर, मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी प्रयागराज के साथ UPCAMP की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी चंद्रकला ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इन केंद्रों की भागीदारी से पूरे प्रदेश में हरित अर्थव्यवस्था के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने का मार्ग प्रशस्त होगा। UPCAMP के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद राहिब ने परियोजना के बारे मे सभी संस्थानों को जानकारी दी| मुख्य उद्देश्य क्षमता निर्माण: राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन से संबंधित विषयों पर सरकारी अधिकारियों, स्थानीय निकायों एवं समुदायों की क्षमता का विकास करना। हरित कौशल बल का विकास: युवाओं को हरित रोज़गार के अवसरों के लिए तैयार करते हुए सक्षम एवं प्रशिक्षित हरित कौशल बल (ग्रीन स्किल फोर्स) का निर्माण करना। ज्ञान साझाकरण: क्षेत्रीय ज्ञान केंद्रों के माध्यम से शोध, नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रसार करना।

राज्य विधि अधिकारियों की फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति

मोहनलालगंज में बनेगा नया उप निबंधक कार्यालय लखनऊ  योगी कैबिनेट ने जनपद लखनऊ के मोहनलालगंज में नए उप निबंधक कार्यालय के निर्माण हेतु भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस निर्णय से क्षेत्रीय नागरिकों को भूमि, भवन, विवाह, किरायानामा, गिफ्ट डीड तथा अन्य दस्तावेजों के पंजीकरण संबंधी सेवाएं अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित ढंग से उपलब्ध हो सकेंगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार ग्राम मऊ, परगना एवं तहसील मोहनलालगंज स्थित कुल 953 वर्गमीटर भूमि राजस्व विभाग से स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को हस्तांतरित की जाएगी। इस भूमि पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त उप निबंधक कार्यालय भवन का निर्माण किया जाएगा, जिसमें सब-रजिस्ट्रार कक्ष, रजिस्ट्रेशन कक्ष, अभिलेखागार, प्रतीक्षालय, पेयजल एवं महिला-पुरुष शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्रदेश सरकार के अनुसार स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग राज्य का प्रमुख राजस्व अर्जित करने वाला विभाग है और प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख विलेखों का पंजीकरण करता है। बढ़ती जनसंख्या और पंजीकरण कार्यों की संख्या को देखते हुए नए कार्यालय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि राजस्व विभाग द्वारा स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग को उक्त भूमि हस्तांतरण से संबंधित पट्टा विलेख पर स्टाम्प शुल्क तथा पंजीकरण शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान की जाएगी। इससे विभागीय प्रक्रिया सरल होगी और भवन निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। राज्य विधि अधिकारियों की फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति उच्चतम न्यायालय से लेकर जिला न्यायालयों तक पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं को मिलेगा लाभ कैबिनेट बैठक में राज्य विधि अधिकारियों को दी जाने वाली रिटेनरशिप एवं प्रति सुनवाई फीस में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार से संबंधित मुकदमों और वादों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रदेश सरकार की ओर से विभिन्न जिला न्यायालयों, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ तथा उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में आबद्ध राज्य विधि अधिकारी राज्य के हितों की रक्षा और प्रभावी विधिक प्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं। वर्तमान में उन्हें देय रिटेनरशिप एवं बहस शुल्क का निर्धारण 10 से 15 वर्ष पूर्व जारी शासनादेशों के आधार पर किया जा रहा था। बदलते समय, बढ़ती पेशेवर जिम्मेदारियों और न्यायिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं को देखते हुए राज्य सरकार ने इन शुल्कों में वृद्धि का निर्णय लिया है। योगी सरकार के इस फैसले से अनुभवी एवं दक्ष अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन मिलेगा तथा विभिन्न न्यायालयों में राज्य सरकार के पक्ष की और अधिक प्रभावी पैरवी सुनिश्चित हो सकेगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही न्याय विभाग द्वारा की जाएगी। मक्का खरीद नीति को मंजूरी, 15 जून से 31 जुलाई तक 25 जिलों में होगी एमएसपी पर खरीद खरीदे गए मक्का का मूल्य यथासंभव 48 घंटे के भीतर किसानों को हस्तांतरित किया जाएगा  कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 (रबी फसल) के लिए मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत मक्का खरीद नीति को मंजूरी प्रदान की गई। सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार प्रदेश में मक्का खरीद 15 जून 2026 से 31 जुलाई 2026 तक की जाएगी। इसके लिए फिरोजाबाद, आगरा, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, हाथरस, एटा, बदायूं, शाहजहांपुर, रामपुर, संभल, बुलंदशहर, हापुड़, कानपुर नगर, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हरदोई, उन्नाव, बहराइच, बलिया, गोंडा, फतेहपुर और मिर्जापुर कुल 25 जनपदों में 150 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश में 25 हजार मीट्रिक टन मक्का खरीद का कार्यकारी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों से खरीद कंप्यूटरीकृत सत्यापित खतौनी, आधार कार्ड एवं फोटोयुक्त पहचान पत्र के आधार पर की जाएगी। इसके साथ ही भूमि और बोए गए रकबे का सत्यापन भूलेख पोर्टल से ऑनलाइन कराया जाएगा। योगी सरकार ने किसानों को त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की है कि क्रय एजेंसियों द्वारा खरीदे गए मक्का का मूल्य पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से किसानों के आधार लिंक एवं एनपीसीआई मैप्ड बैंक खातों में यथासंभव 48 घंटे के भीतर हस्तांतरित किया जाएगा। 1460 करोड़ रुपये से पांच नए जिला कारागारों का होगा निर्माण योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में प्रदेश के पांच जनपदों- मुरादाबाद, कानपुर नगर, औरैया, ललितपुर और भदोही में नवीन जिला कारागारों के निर्माण की परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई। इन परियोजनाओं पर 1460 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। सरकार का उद्देश्य कारागारों में भीड़भाड़ कम करना, बंदियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा कारागार प्रशासन को अधिक आधुनिक और व्यवस्थित बनाना है। निर्णय के अनुसार मुरादाबाद में 2000 बंदी क्षमता का नया जिला कारागार 386.91 करोड़ रुपये की लागत से, कानपुर नगर में 2030 बंदी क्षमता का कारागार 384.05 करोड़ रुपये की लागत से तथा औरैया में 1056 बंदी क्षमता का कारागार 264.96 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया जाएगा। इसी प्रकार ललितपुर में 552 बंदी क्षमता की नई जेल 225.06 करोड़ रुपये तथा भदोही में 574 बंदी क्षमता की नई जेल 209.18 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी। नए कारागारों के निर्माण से बंदियों के आवास, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुधारात्मक गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध होगा।  इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी झांसी में गोआश्रय और पशु सेवा केंद्र के लिए एमओयू को मंजूरी, पशुपालन विभाग की 5 एकड़ भूमि पर निजी संस्था के सहयोग से संचालित होंगी पशु कल्याण गतिविधियां कानपुर में ईएसआई अस्पतालों के हस्तांतरण को मंजूरी, राज्य सरकार द्वारा संचालित पांडुनगर अस्पताल भारत सरकार को और भारत सरकार द्वारा संचालित जाजमऊ अस्पताल राज्य सरकार को सौंपा जाएगा

गरीबों का हक छीनने, व्यापारियों को धमकाने और बेटी की इज्जत से खिलवाड़ करने वालों को छोड़ेगी नहीं सरकार: सीएम योगी

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास और उद्यम के लिए सुरक्षा सर्वाधिक जरूरी है। सुरक्षा के बिना न सुशासन आ सकता है और न ही समृद्धि। 2017 के बाद से सरकार अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ आगे बढ़ी है। इस नीति से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जीरो टॉलरेंस की नीति न मानने वाले जिस बोली-भाषा में समझेंगे, उसी में समझा दिया जाएगा, लेकिन किसी को नौजवानों के रोजगार पर डकैती नहीं डालने दी जाएगी।  सीएम योगी बुधवार को गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के सेक्टर-13 में 42.50 करोड़ रुपये की लागत से बने पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले और प्रदेश के दूसरे फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण तथा गीडा में सेवायोजित कामगारों के लिए ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवासीय परिसर का उद्घाटन करने के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने गीडा के विभिन्न सेक्टर्स के लिए करीब 208 करोड़ रुपये के 71 विकास कार्यों का लोकार्पण व शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने ईडब्ल्यूएस व एलआईजी भवन के आवंटियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। औद्योगिक भूमि के आवंटियों को भी मुख्यमंत्री के हाथों आवंटन पत्र प्राप्त हुए। सीएम ने नाइलिट से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को भी प्रमाण पत्र प्रदान किए।  पाताल से भी खोजकर निकाल लाएंगे दुस्साहस करने वालों को अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद से यूपी ने सुरक्षा का एक मॉडल उपलब्ध कराया है। इससे औद्योगिक विकास हुआ और लाखों नौजवानों को रोजगार मिला। अकेले गीडा में पिछले कुछ वर्षों में 50 हजार युवाओं को रोजगार मिला है। सुरक्षा का माहौल बने बिना यह संभव नहीं था। सरकार ने तय किया है कि विकास की प्रक्रिया सतत जारी रहेगी, सुरक्षा सबको मिलेगी और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव सबको मिलेगा। पर, किसी ने गरीबों का हक छीनने की कोशिश की, व्यापारियों को धमकाने की कुत्सित प्रयास किया या बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करने का दुस्साहस किया तो सरकार छोड़ेगी नहीं। ऐसे लोगों को पाताल से भी खोजकर निकाल लाएंगे। यूपी में जीरो टॉलरेंस के भाव से यही कार्य किया जा रहा है।  सुरक्षा का माहौल बना तो मिले 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में बने सुरक्षा के माहौल से सरकार को 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इनमें से 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतारे जा चुके हैं और 7.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव ग्राउंड ब्रेकिंग के लिए तैयार हैं। बड़े पैमाने पर हुए निवेश से लाखों लोगों को नौकरी और रोजगार मिला है। एमएसएमई को प्रोत्साहन मिलने से 3 करोड़ लोगों को उनके गांव-क्षेत्र में ही रोजगार प्राप्त हुआ है।  हर जिले के नौजवान को मिली सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ ही सरकार ने भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ भी जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। इसका परिणाम है कि प्रदेश में 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी गईं हैं। प्रदेश के सभी जिलों के युवाओं को सरकारी नौकरी मिली हैं। प्रदेश में सरकारी नौकरियों में भर्ती के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।  अच्छी सरकार से ही बेहतरीन उपलब्धि संभव सीएम योगी ने कहा विकास, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में बेहतरीन उपलब्धि तभी संभव है, जब अच्छी सरकार आती है। अच्छी सरकार तब बनती है, जब जनता अच्छे जनप्रतिनिधि चुनती है। 2014 में जनता ने जब नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाया तो उनके नेतृत्व में भारत के प्रति दुनिया का दृष्टिकोण बदला है। नए भारत में विकास के साथ विरासत का संरक्षण हो रहा है। पीएम मोदी के आह्वान पर 2017 में यूपी की जनता ने भाजपा की सरकार बनाई तो इस सरकार ने जनता की आकांक्षाओं से दो कदम आगे बढ़कर कार्य किया। मुख्यमंत्री ने अच्छे जनप्रतिनिधि के चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जनता ने रविकिशन को सांसद, विपिन सिंह और प्रदीप शुक्ल जैसे नेताओं को विधायक चुना तो विकास प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी।  9 वर्षों में बदल गया है गीडा   मुख्यमंत्री ने गीडा में हो रहे औद्योगिक विकास पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बीते 9 वर्षों में गीडा बदल गया है। यहां के उद्योगों में स्टील, पाइप, अच्छे कपड़े बन रहे हैं। पेप्सिको की फ्रेंचाइजी वरुण बेवरेज व बिसलेरी की भी यूनिट लगी है। नए-नए उद्योग आ रहे हैं। अच्छी डिस्टिलरी लग रही है। गीता प्रेस का संस्थान भी यहां बन रहा है। उद्योग केवल उत्पादन के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे रोजगार भी ला रहे हैं। गीडा के नाइलिट सेंटर से मिल रही ट्रेनिंग युवाओं को यहीं रोजगार उपलब्ध होने की गारंटी भी है। धुरियापार क्षेत्र तक हो रहा गीडा का विस्तार मुख्यमंत्री ने कहा कि गीडा का विस्तार अब धुरियापार क्षेत्र तक हो रहा है। धुरियापार क्षेत्र में 7 हजार एकड़ में इंडस्ट्रियल टाउनशिप बन रही है। वहां सीमेंट, पेंट की फैक्ट्री आ रही है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस से उद्योग जगत को भी बड़ा फायदा हो रहा है। इससे गोरखपुर से लखनऊ जाने में लगने वाला समय 7-8 घंटे से कम होकर तीन-साढ़े तीन घंटे रह गया है। फ्लैटेड फैक्ट्री एमएसएमई के लिए ‘रेडी टू यूज’ का बेहतरीन मॉडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फ्लैटेड फैक्ट्री को एमएसएमई यूनिट्स के लिए रेडी टू यूज यानी प्लग एंड प्ले का बेहतरीन मॉडल बताया। इसे गीडा का अभिनव प्रयास बताते हुए सीएम ने कहा कि जिन युवाओं के पास जमीन खरीदने और फैक्ट्री लगाने का पैसा नहीं है, वे सीधे यहां आकर काम शुरू कर सकते हैं। छोटी पूंजी लगाकर भी यहां अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। रेडीमेड गारमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक और अन्य एमएसएमई यूनिट्स के लिए यह बेहतरीन मॉडल साबित होगा। उन्होंने दूरदराज से आकर गीडा में सेवायोजित कामगारों के लिए सस्ते दर पर बेहतरीन आवासीय सुविधा देने के लिए भी गीडा की तारीफ की। सीएम योगी के नेतृत्व में इंडस्ट्रियल हब बन रहा गीडा: रविकिशन समारोह में सांसद रविकिशन ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में गीडा बड़ा इंडस्ट्रियल हब बन रहा है। यह युवाओं के रोजगार के लिए बड़ा केंद्र बन रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए सहजनवा के विधायक प्रदीप शुक्ल ने कहा कि सीएम योगी … Read more

यूपी में रोजगार और पर्यावरण पर बड़ा फोकस, 5 से 21 जून तक चलेगा विशेष कार्यक्रम

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बड़ा अभियान चलाने जा रही है। श्रम एवं सेवायोजन विभाग प्रदेश में पांच से 21 जून तक '12 साल विश्वास के, विकास के' जनकल्याण अभियान चलाएगा। अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण, श्रमिक कल्याण योजनाओं के प्रचार, रोजगार सेवाओं, ईएसआई कवरेज विस्तार और योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसकी तैयारियों को लेकर मंगलवार को योगी सरकार में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को विस्तृत निर्देश दिए गए। श्रम मंत्री ने निर्देश दिए कि पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर विभागीय कार्यालयों, अटल आवासीय विद्यालयों, विहान विद्यालयों तथा ईएसआई अस्पतालों में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान चलाया जाएगा। परिसर को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए विशेष अभियान भी संचालित होगा। आठ से 14 जून तक विशेष जनसंपर्क अभियान के तहत श्रम संहिताओं, श्रमिक समस्याओं और ईएसआई सेवाओं पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जानकारी देने के लिए शिविर लगाए जाएंगे पात्र श्रमिकों को ईएसआई योजना से जोड़ने और योजनाओं की जानकारी देने के लिए शिविर लगाए जाएंगे। इसी अवधि में जनकल्याण मेले आयोजित कर रोजगार संगम पोर्टल, सेवामित्र योजना, विदेशों में रोजगार के अवसर और बाल श्रम उन्मूलन अभियान की जानकारी दी जाएगी। श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। 17 से 20 जून तक विभागीय योजनाओं की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जबकि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सभी कार्यालयों, अस्पतालों और फैक्ट्रियों में योग कार्यक्रम आयोजित होंगे। बैठक में प्रमुख सचिव डा. एमके शन्मुगा सुंदरम, विशेष सचिव, अपर श्रमायुक्त, सेवायोजन निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा योजना के निदेशक, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड और असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश भर में 07 जून तक चलेगा विश्व दुग्ध दिवस अभियान वहीं विश्व दुग्ध दिवस’ के अवसर पर प्रदेश भर में 1 से 7 जून तक ‘विश्व दुग्ध दिवस अभियान’ चलाया जा रहा है। सभी गौशालाओं में विशेष जागरूकता अभियान चल रहा है। अभियान के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला दुग्ध उत्पादकों को सम्मानित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं डेयरी गतिविधियों से जुड़ कर आत्मनिर्भर बन सकें। इसके साथ ही प्रदेश की सभी गौशालाओं में स्वच्छता, पशु कल्याण, गोसंवर्धन एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, गोसंवर्धन और पशु स्वास्थ्य के प्रति व्यापक जनजागरूकता पैदा करने के लिए प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया गोरखपुर, आजमगढ़ व बस्ती की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी-2026 का शुभारंभ

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 12 वर्षों में खेती-किसानी के क्षेत्र में आए परिवर्तन के कारण अन्नदाता किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। किसान समाज व राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ते हुए आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त कर रहे हैं। देश की सबसे अच्छी उर्वरा भूमि और सर्वाधिक सिंचित भूमि (86 फीसदी) यूपी में है। रबी-खरीफ व जायद की तीनों फसलों से किसानों को अच्छा दाम भी मिल रहा है। यह किसानों की मेहनत का परिणाम है कि यूपी का बीमारूपन दूर हुआ और राज्य समृद्ध बना। किसानों ने कृषि विकास दर को 8 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित गोरखपुर, आजमगढ़ व बस्ती की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी-2026 का शुभारंभ करने के उपरांत उपस्थित जन-समूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को  सम्मानित किया और उन्हें ट्रैक्टर की चाबी व केसीसी प्रमाण पत्र प्रदान किए। संगोष्ठी का संचालन चारूशीला सिंह ने किया। 2005-2014 के बीच देश में अनगिनत किसानों ने की आत्महत्या सीएम योगी ने कहा कि 12 वर्ष पहले किसान आत्महत्या पर मजबूर थे। 2005 से 2014 के बीच देश में अलग-अलग स्थानों पर अनगिनत किसानों ने आत्महत्या की थी। इसके पीछे भी त्रासदी थी, उनके लिए अच्छी क्वालिटी के बीज, उचित एमएसपी, आपदा से बचाव के उपयुक्त प्रबंध नहीं थे। लागत अधिक-उत्पादन कम था। यदि किसान ने मेहनत से अन्न उत्पादन किया भी तो उसके क्रय की उचित व्यवस्था नहीं थी।  धरती माता के स्वास्थ्य का भी परीक्षण करा रही सरकार सीएम ने कहा कि पहली बार कोई सरकार कह रही है कि जैसे हम अपने उत्तम स्वास्थ्य के लिए हेल्थ चेकअप करवाते हैं, ऐसे ही धरती माता के स्वास्थ्य का भी परीक्षण होना चाहिए। पीएम मोदी ने 2014 से अनिवार्य रूप से फ्री में सॉइल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना लागू हुईं। दलहन-तिलहन आयात में सरकार को लाखों-करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन किसानों को अच्छे बीज देकर दलहन-तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विशेष अभियान प्रारंभ किया।  हमारी सरकार ने किसानों के लिए उठाए अभूतपूर्व कदम सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ दिया गया, जिससे अन्नदाता किसान साहूकार के सामने हाथ नहीं फैलाए और न ही कर्ज से दबे। मंडी में व्यापक रिफॉर्म किया गया। प्रदेश में जब डबल इंजन सरकार आई तो उसने भी इसे मजबूती से बढ़ाया। किसानों के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए। 2017 में पहली कैबिनेट मीटिंग में कर्ज से दबे किसानों को राहत दी गई। फसल ऋण की विशेष योजना प्रारंभ की गई। प्रयास रहा कि किसानों को लागत का डेढ़ गुना दाम प्राप्त हो। जगह-जगह सरकारी क्रय केंद्र खोलकर उनकी उपज को खरीदा गया। दशकों से लंबित परियोजनाएं पूरी हुईं  सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में दशकों से लंबित सिंचाई परियोजनाओं को प्रारंभ करने के साथ बाणसागर, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, बुंदेलखंड आदि से जुड़ी परियोजनाओं को पूरा कराया गया। 24 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सरकार निजी नलकूप में भी किसानों को फ्री बिजली देती है और इसके लिए 3000 करोड़ रुपये का भुगतान भी करती है।  यूपी ने खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को किया प्राप्त  सीएम ने कहा कि यूपी क्षेत्रफल में देश में चौथे स्थान पर है, इसके बावजूद खाद्यान्न, चीनी, एथेनॉल, आलू, सब्जी व दुग्ध का सर्वाधिक उत्पादन कर रहा है। सरकार के साथ किसानों की मेहनत का परिणाम सामने है। सरकार रबी, खरीफ के समय गोष्ठी के माध्यम से किसानों को बीज, तकनीक, शासन की योजनाओं के बारे में बताती है और उनके सुझावों/परेशानियों की जानकारी लेती है।  आत्मनिर्भरता का लक्ष्य प्राप्त करने का माध्यम बनेगा किसान मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने का माध्यम बनेगा। सरकार का काम है कि किसान शोषण-अभाव से मुक्त हो, उसके सामने चुनौती न हो, उनके कार्यों में बाधाओं को हटाया जाए। उन्हें अच्छा बीज मिल सके, सुविधा संपन्न करने के साथ उन्हें मंडी से जोड़ा जाए और समय पर उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति की जाए। उत्तर प्रदेश में यह सब संभव हो पा रहा है। यूपी के पास देश की कुल कृषि योग्य भूमि में केवल 11 फीसदी भूमि है, लेकिन वह कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 फीसदी योगदान कर रहा है। यूपी की आबादी देश की कुल जनसंख्या का 16-17 फीसदी है। खाद्यान्न, सब्जी, औद्यानिक फसलों में यूपी देश को लीड कर रहा है, इसके बावजूद कई चुनौतियां भी हैं। परिजनों को 24 घंटे में पांच लाख की सहायता सीएम ने कहा कि यूपी में किसानों, सह किसानों (बटाईदारों) व उनके पारिवारिक सदस्यों को भी किसी हादसे की स्थिति में मुख्यमंत्री कृषक बीमा दुर्घटना योजना का लाभ दिया गया है। इस पर सरकार हर वर्ष एक हजार करोड़ रुपये खर्च करती है। किसान अतिवृष्टि, अनावृष्टि, लू, आकाशीय बिजली, वन्यजीव संघर्ष का शिकार हुआ तो सरकार 24 घंटे के अंदर पांच लाख रुपये की सहायता परिवार को उपलब्ध कराती है। लखनऊ में सीड पार्क, कुशीनगर में कृषि विश्वविद्यालय का निर्माण जारी सीएम योगी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के नाम पर लखनऊ में सीड पार्क तथा कुशीनगर में कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का निर्माण किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र उत्तम तकनीक व बीज की क्वालिटी के बारे में जानकारी के माध्यम बने हैं। इसके बाद भी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। जितना किसानों ने उत्पादन बढ़ाया है, इसमें अभी लगभग तीन गुना और वृद्धि कर सकते हैं। हमें बीज की क्वालिटी, तकनीक और समय पर खेतीबाड़ी-फसल चक्र को अपनाना पड़ेगा। इससे उत्पादन बढ़ेगा। किसान इस दिशा में कार्य प्रारंभ करें। सीएम ने चुनौतियों पर भी चर्चा की सीएम ने चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि उत्पादन का पहला चरण यह है कि किसानों को सही बीज प्राप्त हों। सीएम ने क्वालिटी पर जोर देते हुए कहा कि कितना भी उत्पादन कर लें, यदि उत्पाद एक्सपोर्ट के लायक नहीं तैयार किया गया तो उचित मुनाफा नहीं होगा। आम का यहां 40-50 … Read more

NFHS-6 रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश में शराब और तंबाकू सेवन बढ़ा, गांवों में ज्यादा असर

लखनऊ यूं तो देश के कई राज्यों में शराब के शौकीनों की संख्या बहुत अधिक है। मगर यूपी में शराब पीने वालों की संख्या सबसे तेजी से बढ़ी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट इसकी गवाही दे रही है। यह बढ़ोतरी 4.2 फीसदी की है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इस मामले में गिरावट आई है। यूपी में शहरों से ज्यादा गांवों में शराब पीने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। इससे हाई ब्लड शुगर और हाइपरटेंशन जैसी दिक्कतें बढ़ रही हैं। खास बात यह है कि प्रदेश में शराब की शौकीन महिलाओं का आंकड़ा स्थिर बना हुआ है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में शराब पीने की प्रवृत्ति में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। एनएफएचएस-5 में प्रदेश में 15 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में शराब पीने वाले पुरुषों की संख्या 14.5 प्रतिशत थी। वहीं एनएफएचएस-6 की रिपोर्ट बताती है कि यूपी के पुरुषों में यह आंकड़ा बढ़कर 18.7 फीसदी हो गया है, जो राष्ट्रीय औसत के बराबर है। यह वृद्धि देश में सर्वाधिक है। महिलाओं में नहीं बढ़ी शराब की लत जबकि महिलाओं के मामले में यूपी की स्थिति यथावत बनी हुई है यानि 2019 से 2021 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 0.3 फीसदी था, जो 2023-24 की रिपोर्ट में भी जस का तस है। वहीं यदि राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो देश में शराब के शौकीन पुरुषों की संख्या 18.9 फीसदी से घटकर 18.7 प्रतिशत हो गई है जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 1.3 फीसदी से घटकर 1.1 फीसदी पर आ गया है। राष्ट्रीय स्तर पर शराब पीने वालों के आंकड़े देखें तो अरुणाचल प्रदेश के पुरुष और महिलाएं इस फेहरिस्त में शीर्ष पर हैं। शराब पीने के मामले में देश के पांच शीर्ष राज्यों की स्थिति राज्य पुरुष महिलाएं अरुणाचल प्रदेश- 50.2 फीसदी 23.2 फीसदी तेलंगाना- 43.9 फीसदी 7.1 फीसदी सिक्किम- 42.2 फीसदी 19.9 फीसदी हिमाचल प्रदेश- 30.2 फीसदी 0.6 फीसदी उत्तराखंड- 27.2 फीसदी 0.3 फीसदी देश में घटे पर यूपी में बढ़े तंबाकू खाने वाले स्त्री-पुरुष यूपी में तंबाकू खाने वालों की बात करें तो पुरुष और महिलाओं दोनों में ही इसकी लत बढ़ी है। खासतौर से ग्रामीणों में यह बढ़ोत्तरी अधिक देखी गई है। प्रदेश में 15 साल से अधिक आयु की तंबाकू का सेवन करने वाली महिलाओं की संख्या वर्ष 2023-24 में 9.6 फीसदी रही। यह पहले 8.5 प्रतिशत थी। वहीं इसी आयु वर्ग के तंबाकू खाने वाले पुरुषों का आंकड़ा 45.2 फीसदी है, जो इशारा करता है कि लगभग हर दूसरा व्यक्ति तंबाकू या उससे जुड़े उत्पादों का सेवन करता है। पुरुषों में पहले यह 44.0 फीसदी था। वहीं यदि तंबाकू खाने वालों के राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़े देखें तो महिलाओं और पुरुषों में इसमें कमी दर्ज की गई है। तंबाकू खाने वाली महिलाओं की संख्या 2019-21 की तुलना में 2023-24 में 8.9 प्रतिशत से घटकर 8.4 फीसदी रही है। पुरुषों में तंबाकू खाने की लत 38 प्रतिशत से घटकर 36.3 फीसदी रह गई है।

योगी सरकार के ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था लक्ष्य को नई गति देगा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम के रूप में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2026 का आयोजन किया जा रहा है। पिछले तीन संस्करणों की सफलता के बाद यह आयोजन अब उत्तर प्रदेश के उत्पादों, सेवाओं, तकनीक और नवाचारों को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला एक प्रमुख मंच बन चुका है। इसके माध्यम से प्रदेश के उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप और निर्यात क्षेत्र को नए अवसर मिलने की उम्मीद है। 4.50 लाख आम नागरिकों की उपस्थिति का अनुमान यूपीआईटीएस-2026 में 2400 से अधिक प्रदर्शकों के भाग लेने का अनुमान है, जबकि 85 देशों से 550 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के आने की संभावना है। इसके अलावा 1.50 लाख से अधिक घरेलू बी-टू-बी खरीदार और लगभग 4.50 लाख आम नागरिकों की उपस्थिति का अनुमान लगाया गया है। यह आयोजन प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के साथ-साथ निवेश और व्यापारिक साझेदारियों को भी नई ऊंचाई देगा। 4000 से अधिक एमओयू होने की संभावना ट्रेड शो के दौरान 4000 से अधिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिनका अनुमानित मूल्य ₹3200 करोड़ से अधिक हो सकता है। इसके अतिरिक्त ₹13,500 करोड़ से अधिक के संभावित व्यापारिक लीड और पूछताछ उत्पन्न होने का अनुमान है। इससे प्रदेश के एमएसएमई, ओडीओपी इकाइयों, निर्यातकों और उद्यमियों को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। औद्योगिक, निर्यात और निवेश प्रोत्साहन नीतियों का प्रदर्शन करीब 1.10 लाख वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र में आयोजित होने वाला यह मेगा आयोजन योगी सरकार की औद्योगिक, निर्यात और निवेश प्रोत्साहन नीतियों का प्रदर्शन भी करेगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह आयोजन प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से आगे निकला उत्तर प्रदेश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बिजली व्यवस्था लगातार मजबूत बनी हुई है। भीषण गर्मी के बीच प्रदेशवासियों को निर्बाध और पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। डिमांड के अनुरूप बिजली आपूर्ति के मामले में उत्तर प्रदेश ने तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों को पीछे छोड़ दिया है और लगातार डिमांड बिजली आपूर्ति कर रहा है। फिलहाल प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग के बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली उपलब्ध करा रहा है।  प्रदेश में 2-3 जून की रात को 12:21 बजे 28,770 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई। इसी तरह रात 1 बजे 28,321 मेगावाट, 3 बजे 26,830 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई है। 3 जून की सुबह 6 बजे 23,459 मेगावाट, सुबह 9 बजे 22,452 मेगावाट, 10 बजे 24,074 मेगावाट, 11 बजे 24,897 मेगावाट और दोपहर 12 बजे 25,076 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई है। यूपी में लगातार डिमांड बिजली आपूर्ति की जा रही आंकड़ों के अनुसार 2 जून को उत्तर प्रदेश में 27,976 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। यह आंकड़ा कई बड़े राज्यों की तुलना में कहीं अधिक था। इसी दिन तमिलनाडु में 19,198 मेगावाट, कर्नाटक में 13,848 मेगावाट और आंध्र प्रदेश में 13,018 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति दर्ज की गई थी। वहीं केवल एक दिन ही नहीं बल्कि लगातार कई दिनों से उत्तर प्रदेश बिजली आपूर्ति के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। 1 जून को भी प्रदेश में 27,260 मेगावाट और 31 मई को 24,610 मेगावाट की डिमांड के अनुरूप बिजली उपलब्ध कराई गई थी।  किसान, व्यापारी और औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत बढ़ती गर्मी और एयर कंडीशनर, कूलर व अन्य विद्युत उपकरणों के बढ़ते उपयोग के बावजूद प्रदेश की बिजली व्यवस्था स्थिर बनी हुई है। इससे आम उपभोक्ताओं, किसानों, व्यापारियों और औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत मिल रही है। हालांकि हाल ही में प्रदेश के कई हिस्सों में आए आंधी-तूफान और बारिश के कारण कुछ स्थानों पर विद्युत व्यवस्था प्रभावित हुई थी। इसके बावजूद बिजली विभाग ने तेजी से काम करते हुए अधिकांश क्षेत्रों में आपूर्ति बहाल कर दी है। जबकि मऊ, गाजीपुर और सोनभद्र के कुछ इलाकों में अभी भी प्रभावित स्थलों पर मरम्मत और रखरखाव का कार्य जारी है।  आपूर्ति प्रभावित होने की जानकारी मीडिया और उपभोक्ता को दी जाए विभागीय टीमें लगातार फील्ड में मौजूद रहकर बिजली व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य बनाने में जुटी हुईं हैं। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा और उप्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जहां भी बिजली आपूर्ति प्रभावित हो, उसकी सूचना तत्काल मीडिया और उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जाए। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. गोयल ने यह भी निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में रात्रि के समय अचानक लोड बढ़ जाता है, वहां विशेष जांच अभियान चलाया जाए, ताकि किसी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो। 1912 पर आने वाली शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो। बिजली आपूर्ति के लिए यूपीपीसीएल पूरी तत्परता के साथ काम कर रहा- निदेशक वितरण यूपीपीसीएल के निदेशक (वितरण) ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने कहा कि उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पावर कारपोरेशन पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रहा है। बढ़ती गर्मी के बावजूद लगातार डिमांड के अनुरूप बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। जहां कहीं भी आंधी-तूफान की वजह से आपूर्ति प्रभावित है, वहां हमारी टीमें लगातार फील्ड में मौजूद रहकर मरम्मत एवं बहाली कार्य कर रही हैं। पावर कारपोरेशन का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक उपभोक्ता को निर्धारित शेड्यूल के अनुसार निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए।