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यूपी में बिजली आपूर्ति सुधार पर जोर, फीडर-वाइज मॉनिटरिंग के आदेश

लखनऊ यूपी में भीषण गर्मी में बिजली संकट और राजधानी लखनऊ से लेकर छोटे जिलों तक मचे हाहाकार को देखते हुए सीएम योगी ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। सीएम योगी ने रविवार को बिजली अधिकारियों को तलब कर आपूर्ति से लेकर वितरण तक की स्थिति जानी। अलग-अलग इलाकों के बारे में विश्लेषण किया और व्यवस्था सुधारने के लिए कई निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को बिजली संकट का सामना न करना पड़े। इसके लिए सभी स्तरों पर सतत मॉनिटरिंग की जाए। फीडर वाइज मॉनिटरिंग करें और जवाबदेही भी तय करें। बैठक में ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत के साथ ही ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन व सभी डिस्कॉम भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता को और सुदृढ़ बनाने और गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए उत्पादन इकाइयों की अधिकतम क्षमता का उपयोग किया जाए और सभी संयंत्रों में तकनीकी दक्षता और रखरखाव व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। ट्रांसमिशन नेटवर्क को करें मजबूत मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क को और अधिक मजबूत, आधुनिक एवं भरोसेमंद बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था की मजबूती के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा को न्यूनतम रखने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय विद्युत गृहों की 9,120 मेगावाट क्षमता शामिल है, जबकि जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट क्षमता उपलब्ध है। इसके अलावा मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं से संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से 3,742 मेगावाट क्षमता राज्य को प्राप्त हो रही है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022 की तुलना में वर्ष 2026 तक उत्पादन निगम की स्थापित क्षमता में 86 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा गैर पारंपरिक ऊर्जा विकल्पों से लगभग 10 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन हो रहा है। वितरण व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह के साथ ही उपभोक्ता केंद्रित बनाया जाए। उन्होंने फीडर वाइज जवाबदेही तय करने के निर्देश देते हुए कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित होने या शिकायत निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आंधी-तूफान और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों के बावजूद त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखा जाए। बिजली खरीद और आपूर्ति प्रबंधन दुरुस्त करें मुख्यमंत्री ने बढ़ती मांग के अनुसार बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी संभावित स्रोतों से खरीद और आपूर्ति प्रबंधन के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने भविष्य की मांग को देखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर बनाने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने उपभोक्ता सेवाओं को और अधिक तकनीक आधारित तथा पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। सही जानकारी उपभोक्ताओं को दें मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को हेल्पलाइन कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण कर व्यवस्था की पड़ताल करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में आमजन को समयबद्ध और सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर केवल समस्या दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को यह भी स्पष्ट रूप से बताया जाए कि समाधान कब तक होगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पीएम पोषण योजना से बदल रही उत्तर प्रदेश की तस्वीर

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में अब पढ़ाई के साथ-साथ पोषण, संस्कार और उज्ज्वल भविष्य की नई कहानी लिखी जा रही है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (पीएम पोषण योजना) आज प्रदेश के करोड़ों बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह योजना केवल 'मिड-डे मील' तक सीमित नहीं रही, बल्कि 'पोषण से राष्ट्र निर्माण' का व्यापक अभियान बन गई है। प्रदेश के लगभग 1.42 लाख राजकीय, परिषदीय एवं सहायता प्राप्त प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 1.46 करोड़ से अधिक बच्चों को प्रतिदिन गर्म, ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यह व्यवस्था बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, मानसिक विकास और नियमित विद्यालय उपस्थिति को सुनिश्चित कर रही है। विद्यालयों में बढ़ी उपस्थिति, मजबूत हुआ भरोसा पीएम पोषण योजना का सकारात्मक प्रभाव विद्यालयों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। योजना के प्रभाव से नामांकन और उपस्थिति में निरंतर सुधार हुआ है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना बच्चों की शिक्षा को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सामाजिक समरसता और समानता का संदेश विद्यालयों में एक साथ बैठकर भोजन करने की व्यवस्था सामाजिक समरसता और समानता का भी सशक्त संदेश दे रही है। विभिन्न वर्गों और समुदायों के बच्चे एक साथ भोजन कर 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूत कर रहे हैं। 3.53 लाख रसोइयां बनीं ‘पोषण प्रहरी’ प्रदेश में पीएम पोषण योजना के सफल संचालन में 3.53 लाख से अधिक रसोइयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ये रसोइयां प्रतिदिन स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन तैयार कर बच्चों के स्वास्थ्य की मजबूत आधारशिला रख रही हैं। रसोइयों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता योगी सरकार ने रसोइयों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय के अतिरिक्त ₹1000 अतिरिक्त मानदेय उपलब्ध कराया है। साथ ही, परिधान मद में ₹500 प्रति रसोइया की सहायता भी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश की 93 प्रतिशत से अधिक रसोइयों को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जा चुका है, जिससे उन्हें और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिल रहा है। गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष जोर प्रदेश सरकार द्वारा पीएम पोषण योजना में गुणवत्ता और स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। भोजन की नियमित मॉनिटरिंग के साथ-साथ रसोइयों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। स्वच्छ भोजन निर्माण, पोषण संतुलन और खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। रसोई से मंच तक पहुंची प्रतिभा  योगी प्रदेश सरकार रसोइयों को भोजन तैयार करने वाली कार्यकर्ता से आगे बढ़कर 'पोषण प्रहरी' के रूप में पहचान दे रही है। इसी उद्देश्य से विभिन्न जनपदों में ‘रसोइया पाक-कला प्रतियोगिताओं’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रथम पुरस्कार 3500 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 2500 रुपये एवं तृतीय पुरस्कार 1500 रुपये के अलावा प्रतिभाग करने वाली सभी रसोइयों को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। वाराणसी में आयोजित पाक-कला प्रतियोगिता में रसोइयों ने स्वाद, स्वच्छता और पौष्टिकता के उत्कृष्ट समन्वय का प्रदर्शन किया। विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित कर सरकार ने यह संदेश दिया कि बच्चों के भविष्य को संवारने वालों का सम्मान सर्वोपरि है। पोषण से विकसित उत्तर प्रदेश का मजबूत संकल्प पीएम पोषण योजना आज उत्तर प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी मॉडल बन चुकी है। यह योजना बच्चों को बेहतर पोषण, नियमित शिक्षा और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे तक बेहतर पोषण, प्रत्येक विद्यालय तक गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं और प्रत्येक परिवार तक शिक्षा व्यवस्था के प्रति विश्वास को मजबूत किया जाए। इसी उद्देश्य के अंतर्गत विद्यालयों में पोषण, गुणवत्ता और आधुनिक संसाधनों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आज विद्यालयों की थालियों में परोसा जा रहा भोजन केवल अन्न नहीं, बल्कि विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य का मजबूत संकल्प बन चुका है।

नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, योगी सरकार के प्रयास ला रहे रंग

लखनऊ.  सड़क सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद संजीदा हैं। हादसों को न्यूनतम करने की दिशा में वे समय-समय पर संबंधित विभागों की समीक्षा, सकारात्मक प्रयास, जागरूकता आदि पर जोर देते हैं। लिहाजा, सड़क सुरक्षा को लेकर योगी सरकार के प्रयास रंग ला रहे हैं। ई-डीएआर पोर्टल के मुताबिक, वर्ष 2025 की जनवरी से अप्रैल की समयावधि की अपेक्षा जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच दुर्घटनाओं और इससे होने वाली मृत्यु में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में पिछले वर्ष की तुलना में 3669 (21 प्रतिशत) दुर्घटनाएं कम हुई हैं, जबकि मृतकों की संख्या में भी 2212 (22 प्रतिशत) की कमी दर्शाई गई है। सीएम के निर्देश के उपरांत सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए लगभग 2000 स्थानों पर होर्डिंग लगाई गई और प्रचार-प्रसार के जरिए परिवहन विभाग आमजन को निरंतर जागरूक भी कर रहा है।   परिवहन निगम के 18 हजार से अधिक चालकों का हुआ चेकअप  सीएम योगी के निर्देश पर परिवहन निगम के चालकों की निरंतर स्वास्थ्य/नेत्र जांच की जा रही है। हर छमाही चेकअप किया जा रहा है। अप्रैल 2026 तक 18,975 वाहन चालकों का स्वास्थ्य परीक्षा किया जा चुका है। शेष 2560 चालकों की जांच भी चल रही है। सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत यूपीएसआरटीसी की बसों पर रेट्रो रिफ्लेक्टर टेप लगाया जा चुका है। ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण अनिवार्य किया गया है। वहीं 300 किमी. से अधिक यात्रा वाली बसों में दो चालक की ड्यूटी भी अनिवार्य की गई है। सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग/निगम काफी संजीदगी से प्रयासों को धरातल पर उतार रहा है।  जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) योजना भी हो रही कारगर  सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि को न्यूतनम करने के उद्देश्य से केंद्रीय सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के 20 जनपदों के 242 क्रिटिकल थानों को जीरो फैटेलिटी योजना के लिए चिह्नित किया गया था। यातायात निदेशालय के मुताबिक इस योजना के क्रियान्वयन के उपरांत 4 महीने में 566 व्यक्तियों की जान बचाई जा चुकी है। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों के 487 क्रिटिकल पुलिस थानों पर यह योजना लागू की गई है। इन 487 क्रिटिकल थानों में 573 क्रिटिकल कॉरिडोर टीम गठित की गई है। हर टीम में एक उपनिरीक्षक व 4 मुख्य आरक्षी/ आरक्षी (2865 पुलिसकर्मी) नियुक्त हैं, जो जीरो फैटेलिटी को सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रहे हैं।  होल्डिंग एरिया को भी किया गया चिह्नित  पहली जनवरी 2026 से 15 मई 2026 के बीच सभी 18 मंडलों मे होल्डिंग एरिया भी चिह्नित व नोटिफाइड किए गए। मंडलों में 656 होल्डिंग एरिया चिह्नित किए गए, इसमें से 630 को नोटिफाइड भी किया गया। आगरा मंडल में सर्वाधिक 121, बरेली में 103, मुरादाबाद में 75, आजमगढ़ में 62 होल्डिंग एरिया चिह्नित/नोटिफाइड किए गए हैं।  मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा को लेकर आम नागरिकों को निरंतर जागरूक कर रहा है। सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने की दिशा में संबंधित विभागों के साथ ठोस कदम भी उठाए जा रहे हैं। आम नागरिकों से भी निवेदन है कि हेलमेट, सीट बेल्ट व यातायात के नियमों का पालन करें। सड़क सुरक्षा, स्कूली वाहनों के फिटनेस आदि को लेकर जल्द ही फिर से अभियान प्रारंभ किया जाएगा।  आशुतोष निरंजन, परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश

मदरसा बोर्ड परीक्षा में 55,788 छात्र-छात्राएं सफल, छात्राओं का प्रदर्शन सबसे बेहतर

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा को आधुनिक, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में शनिवार को उ०प्र० मदरसा शिक्षा परिषद, लखनऊ द्वारा संचालित मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) तथा आलिम (सीनियर सेकेंडरी) बोर्ड परीक्षा वर्ष-2026 का परिणाम घोषित किया गया। इस वर्ष मदरसा बोर्ड परीक्षा का कुल परिणाम 88.26 प्रतिशत रहा। कुल 55,788 छात्र-छात्राएं सफल घोषित किए गए। खास बात यह रही कि छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों से बेहतर रहा। कुल 29,229 छात्राएं 94.30 प्रतिशत सफलता दर के साथ पास हुईं, जबकि 26,559 छात्र 85.13 प्रतिशत दर के साथ सफल हुए। सेकेंडरी में 41 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं पास सेकेंडरी यानी मुंशी-मौलवी परीक्षा में कुल 62,232 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इनमें से 47,036 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी, जिनमें 41,426 परीक्षार्थी सफल रहे। इस परीक्षा का कुल परिणाम 88.07 प्रतिशत रहा। सेकेंडरी में भी छात्राओं का प्रदर्शन शानदार रहा है। 21,407 छात्राएं 91.46 प्रतिशत सफलता दर के साथ पास हुईं, जबकि 20,019 छात्र 84.72 प्रतिशत अंक के साथ सफल घोषित किए गए। सीनियर सेकेंडरी में छात्राओं ने मारी बाजी वहीं सीनियर सेकेंडरी यानी आलिम परीक्षा में कुल 18,701 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें से 16,175 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। इनमें 14,362 छात्र-छात्राएं सफल हुए। इस स्तर पर कुल सफलता प्रतिशत 88.79 रहा। सीनियर सेकेंडरी में 7822 छात्राओं ने परीक्षा पास की, उनका रिजल्ट 90.88 प्रतिशत रहा। जबकि 6540 छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की। इस तरह 86.42 प्रतिशत छात्र पास हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोजित इस परीक्षा को नकलविहीन और तकनीकी निगरानी के बीच सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया है।  मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन में सरकार अल्पसंख्यकों के हित में कर रही काम अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने परिणाम घोषित करते हुए कहा कि हमारी सरकार की मूल नीति सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास के साथ सबका प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर से अल्पसंख्यकों में एक नए मनोबल को जीतना और विश्वास का संचार हुआ है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राओं के सशक्तीकरण की आधार नीति को यथार्थ धरातल पर लाने का काम योगी सरकार लगातार कर रही है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में हम लगातार अल्पसंख्यको के हित में काम कर रहे हैं।  आधिकारिक वेबसाइट पर देखें रिजल्ट छात्र-छात्राएं अपना रिजल्ट मदरसा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट https://madarsaboard.upsdc.gov.in पर देख सकते हैं। मदरसा बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 में कुल 80,933 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें से 63,211 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनकी निगरानी सीधे मदरसा बोर्ड मुख्यालय से की गई। योगी सरकार के सख्त इंतजामों के चलते परीक्षा शांतिपूर्ण और नकलविहीन वातावरण में संपन्न हुई।

पीस कमेटी बैठक में फैसला, भीड़ बढ़ने पर मस्जिदों में ही अदा होगी ईद की नमाज

लखनऊ ईदगाह में जगह पूरी तरह भर जाने की स्थिति में आसपास की अन्य मस्जिदों में जाकर नमाज अदा करने को कहा गया है.(File Photo: PTI) सड़क पर नमाज के मुद्दे पर सीएम योगी के सख़्त रुख के चलते, बकरीद को लेकर बुलाई गई पीस कमेटी की बैठक में साफ कहा गया कि किसी भी हाल में सड़क पर नमाज नहीं होगी. अगर ईदगाह में जगह पूरी तरह भर जाती है, तो बाहर नमाज पढ़ने के बजाय आसपास की दूसरी मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ने को कहा गया है. प्रशासन ने यह भी कहा कि कुर्बानी के बाद जानवर के अवशेष खुले में या नालियों में न फेंके. खुले में अवशेष फेंकने का मुद्दा विश्व हिन्दू परिषद की तरफ से उठाया गया था. बता दें, झांसी के शहर कोतवाली में एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में बकरीद त्यौहार को लेकर पीस कमेटी की बैठक हुई. जिसमें दोनों धर्मों के धर्मगुरुओं व विभिन्न संगठन के सदस्य मौजूद रहे. जिन्होंने कई समस्याओं के बारे में चर्चा की. वहीं प्रशासन ने जहां सड़क पर नमाज न पढ़ने पर फोकस किया तो वहीं हिन्दू संगठनों ने कुर्बानी के बाद जानवर का खून व वेस्ट मटेरियल नालियों में न बहाने की बात उठाई. मुस्लिम समाज के लोगों ने ईद के दिन बिजली और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और सफाई व्यवस्था पर जोर दिया. एसपी सिटी प्रीति सिंह ने कहा कि जो भी व्यवस्थाओं की बात कही गई है, उन्हें पूरा करने के निर्देश नगर निगम, बिजली व जल संस्थान के अधिकारियों को दे दिए गए हैं. साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि सड़क पर किसी भी दशा में नमाज न पढ़े और कुर्बानी के अवशेष खुले में न फेंके. कुर्बानी के बाद अवशेष का सही तरह से रखें पुलिस प्रशासन की ओर से सभी को अवगत करा दिया गया है कि कुर्बानी के बाद जानवरक के अवशेष सही तरह से बाहर रखा जाए ताकि जब नगर निगम की गाड़ी आए तो वह कचरे रूप में उठाकर ले जाए. अव्यवस्था रूप से न फेंका जाए, जिससे कोई कुत्ता या अन्य जानवर उसे उठाकर न ले जाए. अगर ऐसा हो जाता है तो अव्यवस्था का माहौल बन जाता है. साथ ही यह भी निर्देश दिए गए कि जो भी स्थानीय ईदगाह में नमाज सम्पन्न होती है वहां यदि क्षमता पूरी हो चुकी है तो आस-पास की मस्जिद में जाकर नमाज अदा कर लें, मस्जिद के बाहर किसी भी दशा में नमाज अदा न करें. वहीं पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर लक्ष्मीकांत गौतम ने भी कहा कि किसी भी दशा में मस्जिद के बाहर या फिर सड़क पर नमाज अदा न करें.

वाराणसी में प्रमुख सोलर कंपनियों द्वारा यूपी नेडा को दिए गए प्रस्ताव में सोलर दीदी को प्रति माह 14,196 रुपये वेतन

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिलाओं को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जनपद वाराणसी एक नई पहचान बना रहा है। वाराणसी की महिलाएं सोलर लीडर बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहीं हैं। सोलर दीदी पहल के माध्यम से महिलाओं को न केवल तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, बल्कि उन्हें रोजगार, सम्मान और ऊर्जा स्वावलंबन से भी जोड़ा जा रहा है। प्रमुख सोलर कंपनियों द्वारा यूपी नेडा को दिए गए प्रस्ताव के अनुसार चयनित सोलर दीदियों को वाराणसी में रहकर कार्य करने का अवसर मिलेगा। इस संबंध में यूपी नेडा डायरेक्टर रविन्दर सिंह ने बताया कि यूपीनेडा इम्पेनल्ड वेंडर्स द्वारा महिलाओं को ₹14,196 प्रति माह का वेतन दिया जाता है। इसके साथ ही वेंडर्स द्वारा प्रत्येक सोलर दीदी को लगभग ₹1.30 लाख मूल्य का 2 किलोवाट सोलर प्लांट निःशुल्क दिया जाएगा, जिससे वे अपने घर को सौर ऊर्जा से जोड़ सकेंगी। महिलाओं को आधुनिक ऊर्जा उपयोग से जोड़ने हेतु एक इंडक्शन स्टोव भी वेंडर्स द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा प्रत्येक सफल सोलर स्थापना पर ₹1000 की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी। विभाग की ओर से सभी प्रशिक्षुओं से अपील की गई है कि वे समय से प्रशिक्षण केंद्र पहुंचें, सात दिवसीय प्रशिक्षण को गंभीरता से पूरा करें तथा टेस्ट उत्तीर्ण कर इस अभियान का हिस्सा बनें। यह पहल केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि महिलाओं को ऊर्जा क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। वाराणसी में चल रही यह पहल अब पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनती दिखाई दे रही है, जहां महिलाएं सोलर दीदी बनकर हरित ऊर्जा क्रांति की अगुवाई कर रही हैं। प्रदेश में अब तक 5,44,810 से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित उत्तर प्रदेश में अब तक 5,44,810 से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। राज्य में कुल 9,68,548 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से बड़े पैमाने पर स्वीकृति एवं स्थापना सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही प्रदेश में 1,844.87 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता सृजित हुई है तथा ₹3,539.06 करोड़ की सब्सिडी केंद्र सरकार द्वारा एवं ₹1200 करोड़ से अधिक की सब्सिडी राज्य सरकार द्वारा जारी की जा चुकी है। प्रदेश में प्रतिदिन 82 लाख यूनिट से अधिक मुफ्त बिजली रूफटॉप सोलर के माध्यम से उत्पन्न हो रही है, जिसकी अनुमानित लागत 5 करोड़ रुपये से अधिक है।

मुख्यमंत्री योगी बोले – श्रमिक राज्य की प्रगति की सबसे बड़ी शक्ति, उन्हें सम्मान और सुरक्षा देना सरकार की प्राथमिकता

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रमिक कल्याण, कौशल विकास और रोजगार सृजन को और व्यापक तथा परिणाममुखी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उन्होंने बाल श्रमिक विद्या योजना को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में विस्तारित करने, ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को और प्रभावी बनाने, निर्माण श्रमिकों के लिए बड़े शहरों में आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र विकसित करने तथा रोजगार मिशन को वैश्विक अवसरों से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि श्रमिक केवल उत्पादन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और प्रगति की सबसे बड़ी शक्ति हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि श्रमिकों, युवाओं और कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित कार्य वातावरण और बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध हों। शनिवार को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और प्रस्तावित योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी बच्चा आर्थिक मजबूरी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को विद्यालयों से जोड़ा जाए और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के सहयोग से इन बच्चों के कौशल विकास की कार्ययोजना भी तैयार की जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2020 में प्रारंभ की गई इस योजना के तहत 8 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में योजना 20 जनपदों में संचालित है। मुख्यमंत्री ने इसे नए प्रावधानों के साथ प्रदेश के सभी 75 जनपदों में लागू करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को रोजगार और जनसुविधा का अभिनव मॉडल बताते हुए कहा कि तकनीक आधारित ऐसी व्यवस्थाएं युवाओं और कुशल कामगारों के लिए नए अवसर तैयार करती हैं। उन्होंने इसे और अधिक प्रभावी तथा जनोपयोगी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2021 से संचालित इस व्यवस्था के तहत नागरिक मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल अथवा कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में पोर्टल पर 1097 सेवा प्रदाता, 5049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं। मुख्यमंत्री ने सरकारी विभागों में भी आवश्यकता के अनुसार सेवामित्र व्यवस्था के उपयोग के प्रस्ताव को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री ने श्रम विभाग में हुए संस्थागत सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि उद्योगों के अनुकूल वातावरण और श्रमिक हितों के बीच संतुलन बनाना सरकार की नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक 32,583 कारखाने पंजीकृत हो चुके हैं। मार्च 2017 तक जहां यह संख्या 14,176 थी, वहीं अप्रैल 2017 के बाद 18,407 नए कारखानों का पंजीकरण हुआ है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 4860 कारखानों का पंजीकरण किया गया। विभाग को बीआरएपी सुधारों के क्रियान्वयन में ‘टॉप अचीवर’ के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है तथा उद्योग समागम 2025 में श्रम क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने निर्माण श्रमिकों के लिए सभी औद्योगिक शहरों में प्रस्तावित श्रमिक सुविधा केंद्रों यानी ‘लेबर अड्डों’ को व्यवस्थित रूप से विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों को केवल श्रमिकों के एकत्रीकरण स्थल के रूप में नहीं, बल्कि श्रमिक सहायता एवं सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में दूसरे क्षेत्रों से आने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित आवास सुविधा उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कानपुर में प्रस्तावित औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास योजना को कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना समय की मांग है। बैठक में बताया गया कि विष्णुपुरी स्थित भूमि पर 200 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला प्रशिक्षण संस्थान प्रस्तावित है, जहां कारपेंटरी, इलेक्ट्रिशियन, फिटर, प्लंबर, पेंटर और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन सहित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त बेनाझाबर स्थित भूमि पर 200 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला छात्रावास भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने रोजगार सृजन को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में बताते हुए कहा कि प्रदेश के युवाओं को स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। बैठक में बताया गया कि जुलाई 2025 में गठित ‘उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन’ के माध्यम से युवाओं को देश और विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। रोजगार मिशन को विदेश मंत्रालय से भर्ती एजेंसी का लाइसेंस भी प्राप्त हो चुका है। लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर में आयोजित रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से 27,555 युवाओं का चयन किया गया, जिनमें 2300 युवाओं का चयन विदेशों में रोजगार हेतु हुआ। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में 3030 रोजगार मेलों और कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रमों के माध्यम से 3,74,776 अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। इसी अवधि में आयोजित 4873 करियर काउंसलिंग कार्यक्रमों में 6,80,469 युवाओं ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रोजगार मेलों को केवल औपचारिक आयोजन न बनाकर उन्हें उद्योगों की वास्तविक मांग और युवाओं की क्षमता से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि इसे सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एंड एम्प्लॉयमेंट ज़ोन से भी जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने वैश्विक रोजगार अवसरों को लेकर किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा विश्वस्तरीय अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम है। बैठक में बताया गया कि जर्मनी, जापान और स्लोवाक गणराज्य सहित विभिन्न देशों में रोजगार की संभावनाएं चिन्हित की गई हैं। जापानी, जर्मन और अंग्रेजी सहित विभिन्न भाषाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ करने के लिए समझौते किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवायोजन विभाग को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक और डिजिटल रोजगार तंत्र के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने रोजगार संगम पोर्टल में एआई आधारित सेवाओं, डिजिटल जॉब मैचिंग और ऑनलाइन काउंसलिंग प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश दिए।

भीषण गर्मी का असर: यूपी में 669 मिलियन यूनिट बिजली खपत, सप्लाई पर दबाव बढ़ा

लखनऊ भीषण गर्मी से बिजली की खपत के सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए हैं। शुक्रवार (24 घंटे में) को प्रदेश में पहली बार 669 मिलियन (66.90 करोड़) यूनिट बिजली की खपत रही। बिजली की अधिकतम मांग भी शनिवार को 31 हजार मेगावाट के पार पहुंच गई है। दिन में तो मांग के मुताबिक बिजली की उपलब्धता है लेकिन शहर से लेकर गांव के ज्यादातर उपभोक्ताओं को तय शेड्यूल के अनुसार बिजली नहीं मिल पा रही है क्योंकि विद्युत वितरण सिस्टम में कहीं भी फाल्ट होने पर उसे जल्द ठीक करने के लिए पर्याप्त मैनपावर ही नहीं हैं। रात में मांग के मुताबिक पावर कारपोरेशन को कहीं से बिजली उपलब्ध न होने के कारण कई क्षेत्रों में घंटों कटौती हो रही है। बिजली कटौती से प्रदेशवासियों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को ऊर्जा विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई है। पारा चढ़ने से राज्य में इनदिनों 31 हजार मेगावाट से भी अधिक बिजली की मांग है। सुबह से ही पारा चढ़ने से स्थिति यह है कि सात बजे के आसपास भी बिजली की मांग 24-25 हजार मेगावाट से नीचे नहीं जा रही है। बिजली की बढ़ती मांग का ही नतीजा है कि पिछले वर्ष 12 जून को जहां 655.9 मिलियन यूनिट बिजली की खपत का रिकॉर्ड बना था वहीं अबकी 22 मई को ही 669 मिलियन यूनिट खपत का नया रिकॉर्ड बन गया है। पावर कारपोरेशन प्रबंधन का अनुमान है कि जून में बिजली की अधिकतम मांग 34 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है। प्रबंधन ने मांग के अनुमान के मुताबिक बिजली की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई अनुबंध तो पहले से किए ही हैं, बढ़ती मांग को देखते हुए पावर एक्सचेंज तथा विभिन्न राज्यों से बैंकिंग के जरिए भी बिजली का इंतजाम करने की कोशिश में है। हालांकि, देशभर में बिजली की मांग बढ़ने से एक्सचेंज से प्रबंधन को 10 रुपये यूनिट में भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। ऐसे में सौर ऊर्जा के सहारे दिन में तो शहर से लेकर गांव तक को बिजली की आपूर्ति हो जा रही है लेकिन रात में आपूर्ति के लिए 33 हजार मेगावाट तक बिजली ही उपलब्धता ही नही है। ऐसे में खासतौर से गांवों में रात में बिजली की कटौती की जा रही है। हालांकि, रात में कटौती के एवज में दिन में अतिरिक्त बिजली देने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन लोकल फाल्ट के चलते प्रदेशवासियों को घंटों बिजली कटौती से जूझना पड़ रहा है प्रबंधन का दावा जरूर है कि उद्योगों से लेकर महानगर, मंडल व जिला मुख्यालयों को 24 घंटे जबकि तय शेड्यूल से नगर पंचायतों को 22, तहसील को 21.52 घंटे, बुंदेलखंड को 21 घंटे बिजली दी जा रही है। कारपोरेशन की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार को गांवों को 18 घंटे 37 मिनट बिजली दी गई है।  

भाजपा की नई प्रदेश टीम लगभग तैयार, क्षेत्रीय अध्यक्षों को लेकर सबसे ज्यादा कश्मकश

 लखनऊ उत्तर प्रदेश भाजपा की नई टीम का खाका लगभग तैयार हो चुका है। दिल्ली में इसे अंतिम रूप देने की कवायद बीते चार दिनों से चल रही है। माना जा रहा है कि रविवार को इस पर फाइनल बैठक हो सकती है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के दिल्ली से बाहर होने के चलते अंतिम मुहर नहीं लग सकी है। आज मुहर लगने की पूरी संभावना जताई जा रही है। अध्यक्ष की हरी झंडी मिलने पर कल के बाद कभी भी इसका ऐलान हो सकता है। तमाम दावेदार भी दिल्ली में डेरा डाले हैं। सबसे ज्यादा कश्मकश क्षेत्रीय अध्यक्षों को लेकर है। वहीं विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी करने वाले कुछ चेहरे प्रदेश टीम से बाहर हो सकते हैं। कुछ मौजूदा प्रदेश महामंत्रियों की भूमिका बदलना भी तय माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि उन्हें उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है। भाजपा के राज्य मुख्यालय पर इन दिनों सन्नाटा है। यूपी के भाजपाई दिल्ली की ओर टकटकी लगाए हैं। दरअसल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम के गठन की कवायद चल रही है। लखनऊ में लंबी मशक्कत के बाद अब गेंद दिल्ली के पाले में है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह कई दिन से दिल्ली में ही हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष के साथ वार्ता हो चुकी है। मगर राष्ट्रीय अध्यक्ष के बाहर जाने के चलते फिर बैठक नहीं हो सकी है। प्रदेश की नई टीम और क्षेत्रीय अध्यक्षों के साथ ही भाजपा की नई मीडिया टीम को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। दरअसल मौजूदा मीडिया टीम में कई चेहरे प्रदेश पदाधिकारी बनने की दौड़ में पूरी शिद्दत से जुटे हैं। टिकट के लिए ताल ठोंकने वाले हो सकते हैं बाहर दरअसल पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए नई टीम के गठन की कवायद में जुटी है। यही कारण है कि आमूल-चूल परिवर्तन की जगह नए और पुरानों का सामंजस्य बनाने की तैयारी है। कुछ मौजूदा पदाधिकारियों का टीम से बाहर होना तय माना जा रहा है। इनमें कुछ ऐसे चेहरे भी शामिल हैं जिन्हें या तो पार्टी चुनाव लड़ाने का मन बना रही है या फिर वे खुद टिकट के लिए ताल ठोंक रहे हैं। वहीं कुछ मौजूदा प्रदेश महामंत्रियों को उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है। एक मौजूदा प्रदेश मंत्री दिल्ली की डोर के सहारे प्रमोशन की दौड़ में है। पार्टी प्रदेश की नई टीम और क्षेत्रीय अध्यक्षों के जरिए सामाजिक समीकरण भी साधेगी।

वक्फ संपत्तियों पर बड़ा एक्शन! उत्तर प्रदेश में 31 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन निरस्त

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में उम्मीद पोर्टल पर 31 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया. वक्फ संपत्तियों के दस्तावेजों में त्रुटियां और तकनीकी खामियां मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है. बता दें, उम्मीद पोर्टल पर अब तक कुल 31,328 वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन निरस्त किया जा चुका है।  प्रदेश में दर्ज 1,18,302 वक्फ संपत्तियों में से 31,328 का पंजीकरण रद्द हुआ. इनमें से 31,192 संपत्तियों के वक्फ दावों को भी निरस्त कर दिया गया है. जांच के दौरान कई संपत्तियों के खसरा नंबर वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए।  कई मामलों में राजस्व अभिलेखों में दर्ज रकबे में बदलाव पाया गया. दस्तावेजों के मिलान और रिकॉर्ड सत्यापन के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं।  बता दें, वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 'Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency and Development' पोर्टल लॉन्च किया था. इसे संक्षेप में उम्मीद पोर्टल कहा जाता है।  उत्तर प्रदेश ने केंद्र के ‘उम्मीद’ पोर्टल पर वक्फ प्रॉपर्टीज़ के डिजिटल रजिस्ट्रेशन में देश में शीर्ष स्थान हासिल किया. राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 तक 92,832 प्रॉपर्टीज़ का प्रोसेस पूरा किया।  केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने 6 जून 2025 को सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि 5 दिसंबर 2025 तक ‘उम्मीद’ पोर्टल पर वक्फ प्रॉपर्टीज का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित किया जाए. हालांकि बाद में डेडलाइन 6 महीने के लिए बढ़ा दी गई, लेकिन उत्तर प्रदेश ने यह काम तय समय से पहले ही पूरा कर लिया।