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राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला: दान काउंटिंग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लागू हुआ ‘नो-पॉकेट’ ड्रेस कोड

 लखनऊ,    राम मंदिर के दान काउंटिंग सिस्टम में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़ा बदलाव किया गया है. काउंटिंग हॉल में अब कर्मचारियों को सख्त सुरक्षा व्यवस्था और दोहरी जांच (डबल चेकिंग) के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, काउंटिंग कर्मचारियों के लिए अब नया ड्रेस कोड लागू किया गया है।  कर्मचारियों को बिना किसी जेब (पॉकेट) वाली डार्क ब्लू रंग की ड्रेस पहनना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही काउंटिंग हॉल में प्रवेश से पहले प्रत्येक कर्मचारी को दो चरणों की सुरक्षा जांच से गुजरना होगा।  वहीं, काउंटिंग का कार्य अब कुर्सी-मेज पर नहीं, बल्कि जमीन पर बैठकर कराया जाएगा. मोबाइल फोन, कैमरा, बैग और अन्य निजी सामान काउंटिंग हॉल के अंदर ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. कर्मचारियों को काउंटिंग हॉल में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल भी बाहर ही उतारने होंगे।  इस बीच, राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार नए खुलासों के साथ सुर्खियों में बना हुआ है. इस मामले में आरोपी अनुकल्प मिश्रा को लेकर अहम जानकारी सामने आई है. जानकारी के मुताबिक, अनुकल्प मिश्रा के नाम पर मंदिर में 'व्यवस्था कार्यकर्ता' के तौर पर एंट्री पास जारी किया जाता था।  आरोप है कि मंदिर में होने वाले हर विशेष कार्यक्रम के दौरान अनुकल्प मिश्रा के नाम से एंट्री पास बनाया जाता था. दावा किया जा रहा है कि इसी व्यवस्था कार्यकर्ता वाले पास के जरिए उसे मंदिर परिसर में प्रवेश मिलता था. आरोप यह भी हैं कि इसी पास के आधार पर वह चढ़ावे की राशि की गिनती की प्रक्रिया में शामिल होता था। 

UP News: CM योगी ने बढ़ाया मानसिक दिव्यांग और निराश्रितों का अनुदान, दिए कई अहम निर्देश

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने मानसिक रूप से दिव्यांग और निराश्रित लोगों के लिए बड़ा राहतभरा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्रों और हाफ वे होम में रहने वाले संवासियों की भरण-पोषण अनुदान राशि 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह करने के निर्देश दिए हैं।इस निर्णय का उद्देश्य संस्थागत देखभाल पर निर्भर दिव्यांगजनों को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है। सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसिक रूप से दिव्यांग और निराश्रित व्यक्ति पूरी तरह संस्थागत देखभाल पर आश्रित होते हैं। ऐसे में उनके लिए पौष्टिक भोजन, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित करने के निर्देश बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में नियमित रूप से दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पात्र लाभार्थियों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर तथा अन्य आवश्यक सहायक उपकरण समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उन्हें दैनिक जीवन में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। पुनर्वास और शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए मुख्यमंत्री ने श्रवण बाधित बच्चों की शीघ्र पहचान और कॉक्लियर इंप्लांट के बाद उनके प्रभावी पुनर्वास पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने के साथ-साथ उनके पुनर्वास और शिक्षा की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विशेष विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों की समयबद्ध नियुक्ति पर भी बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की सभी योजनाओं का मूल उद्देश्य दिव्यांगजनों को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना है। 12.23 लाख से अधिक दिव्यांगजन दिव्यांग पेंशन योजना से लाभान्वित समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 12.23 लाख से अधिक दिव्यांगजन दिव्यांग पेंशन योजना से लाभान्वित हुए हैं। इसी अवधि में 34,420 पात्र लाभार्थियों को 43,689 सहायक उपकरण वितरित किए गए। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि अब तक 226 श्रवण बाधित बच्चों का कॉक्लियर इंप्लांट कराया जा चुका है। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में 68 जिलों से 335 बच्चों की पहचान की गई है। इसके अलावा सरकार निश्शुल्क मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, विवाह प्रोत्साहन सहायता, दुकान संचालन सहायता तथा रोडवेज बसों में निश्शुल्क यात्रा जैसी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का भी संचालन कर रही है।  

योगी सरकार की नंदिनी योजना किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा अवसर

लखनऊ  खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी आय का मजबूत आधार बनाने की दिशा में महत्वाकांक्षी नंदिनी योजना किसानों, पशुपालकों और बेरोजगार युवाओं के लिए सुनहरा अवसर लेकर आई है। यूपी की योगी सरकार की इस योजना के माध्यम से जिले में छह आधुनिक डेयरी इकाइयों की स्थापना की जाएगी, जिनमें प्रत्येक इकाई में 10 उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली गायों का पालन किया जाएगा। 23.50 लाख रुपये की लागत वाली इस योजना पर सरकार 50 प्रतिशत अर्थात 11.80 लाख रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को नई गति मिलने के साथ किसानों की आय बढ़ाने और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का मार्ग प्रशस्त होगा। बलरामपुर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि बलरामपुर को इस वर्ष छह डेयरी इकाइयों का लक्ष्य आवंटित हुआ है। प्रत्येक इकाई की कुल लागत 23.50 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार 11.80 लाख रुपये सब्सिडी देगी। शेष राशि लाभार्थी स्वयं अथवा बैंक ऋण के माध्यम से जुटा सकेंगे। योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान, पशुपालक और बेरोजगार युवा 21 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पात्र अभ्यर्थियों का चयन पूरी पारदर्शिता के साथ लॉटरी प्रणाली से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नंदिनी योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक एवं आधुनिक डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना भी है। वर्तमान समय में खेती के साथ पशुपालन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का सबसे भरोसेमंद माध्यम बनकर उभर रहा है। यदि आधुनिक तकनीक, संतुलित पशु आहार और बेहतर नस्ल की गायों का उपयोग किया जाए तो डेयरी व्यवसाय किसानों की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है।आधुनिक डेयरी इकाइयों की स्थापना से जिले में दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे दुग्ध सहकारी समितियों को पर्याप्त मात्रा में दूध उपलब्ध होगा, दुग्ध प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। योजना ग्रामीण युवाओं को गांव में ही स्वरोजगार स्थापित करने का अवसर प्रदान करेगी, जिससे रोजगार के लिए शहरों की ओर होने वाले पलायन पर प्रभावी अंकुश लगेगा। सरकार पशुपालन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। नंदिनी योजना भी उसी कड़ी का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना है। डेयरी व्यवसाय से प्रतिदिन नकद आय प्राप्त होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति में स्थायित्व आता है और वे खेती के साथ अन्य आवश्यकताओं को भी आसानी से पूरा कर सकते हैं। विशेषज्ञ परामर्श के साथ मिलेगा वैज्ञानिक मार्गदर्शन योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को केवल अनुदान ही नहीं मिलेगा, बल्कि पशुपालन विभाग की ओर से तकनीकी प्रशिक्षण, आधुनिक डेयरी प्रबंधन की जानकारी, पशुओं के स्वास्थ्य संबंधी विशेषज्ञ परामर्श तथा वैज्ञानिक तरीके से डेयरी संचालन का मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे लाभार्थी डेयरी इकाइयों का सफल संचालन कर अधिक उत्पादन और बेहतर आय सुनिश्चित कर सकेंगे। 21 तक करें आवेदन जिले के किसानों, पशुपालकों और बेरोजगार युवाओं से अपील की कि वे अंतिम तिथि 21 जुलाई से पहले ऑनलाइन आवेदन अवश्य करें। आवेदन नंद बाबा दुग्ध मिशन के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने पहले से कामधेनु योजना, मिनी/माइक्रो कामधेनु योजना, नंदिनी कृषक समृद्धि योजना या मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना का लाभ लिया है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे। आवेदन की अंतिम तिथि: 21 जुलाई जनपद का लक्ष्य: 6 आधुनिक डेयरी इकाइयां प्रति इकाई: 10 उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली गायें कुल परियोजना लागत: 23.50 लाख रुपये सरकारी अनुदान: 11.80 लाख रुपये (50 प्रतिशत) शेष राशि: स्वयं अथवा बैंक ऋण के माध्यम से चयन प्रक्रिया: लॉटरी प्रणाली के माध्यम से पारदर्शी चयन अतिरिक्त सुविधा: तकनीकी प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन एवं आधुनिक डेयरी प्रबंधन का प्रशिक्षण बलरामपुर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि नंदिनी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय को नई दिशा देगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के अवसर सृजित होंगे। जिले में दुग्ध उत्पादन के साथ गोवंश संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार की मंशा है कि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।

800 से अधिक किस्मों की प्रदर्शनी, यूपी के आम बने वैश्विक पहचान: योगी आदित्यनाथ

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि उत्तर प्रदेश देश के कुल आम उत्पादन में 26 प्रतिशत का योगदान देता है, जबकि इस फसल के अंतर्गत क्षेत्र का केवल नौ प्रतिशत ही होता है। उन्होंने कहा कि देश मे जब आम की बात होती है उत्तर प्रदेश का अपना स्थान है। नौ प्रतिशत जमीन में 26 प्रतिशत आम का उत्पादन होता है। सात श्रेणियों के 56 वर्गों में 800 से अधिक आम की किस्में है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ शुक्रवार को यहां उत्तर प्रदेश आम महोत्सव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि महोत्सव में राज्य भर से आम की लगभग 800 किस्में प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें मलिहाबाद से दशहरी, वाराणसी और गोरखपुर से लंगड़ा, बागपत और सहारनपुर से रतोल और बस्ती से आम्रपाली शामिल हैं। आम की विविधता को 'उत्तर प्रदेश की ताकत' बताते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि प्रत्येक किस्म 'अपनी मिट्टी की खुशबू और अपने क्षेत्र की मिठास' को दर्शाती है। आम की खेती की आर्थिक क्षमता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, ''एक एकड़ आम की खेती ने साबित कर दिया है कि एक किसान लगभग 2.5 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर सकता है। अगर इसे मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण के साथ जोड़ा जाए, तो मुनाफा और बढ़ सकता है। अगर हम इसे निर्यात के लिए तैयार करते हैं, तो इसकी ताकत और किसानों की कमाई और भी बढ़ जाती है।' मलिहाबाद के दशहरी को मिला है जीआई का दर्जा आदित्यनाथ ने कहा कि यह महोत्सव किसानों के लिए अपनी उपज प्रदर्शित करने और खरीदार-विक्रेता बैठकों के माध्यम से खरीदारों से जुड़ने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है, जिससे वे अपने उत्पादों को वैश्विक बाजारों में ले जाने में सक्षम होते हैं। ब्रांडिंग पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मलिहाबाद के दशहरी आम को भौगोलिक संकेत (जीआई) का दर्जा मिला है और यह 'एक वैश्विक ब्रांड' बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने मलिहाबाद आम को 'काकोरी' ब्रांड के तहत भी बढ़ावा दिया है, जिसका नाम काकोरी ट्रेन कार्रवाई के शहीदों के नाम पर रखा गया है, ताकि फल को एक विशिष्ट वैश्विक पहचान प्रदान करते हुए उनके बलिदान का सम्मान किया जा सके। सीएम योगी ने आगे कहा, इसमें हमारे किसानों की कड़ी मेहनत से पैदा हुई मिठास के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना भी है।’ चार जिलों में स्थापित होंगे चार आधुनिक आम पैक हाउस आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने निर्यात के लिए आमों की ग्रेडिंग, छंटाई और पैकेजिंग के लिए सहारनपुर, लखनऊ, अमरोहा और वाराणसी में चार आधुनिक आम पैक हाउस स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य से आम अब ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया, सिंगापुर, कुवैत, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, कतर और रूस सहित अन्य देशों में निर्यात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2017 में उनकी सरकार के सत्ता संभालने के बाद शुरू किया गया आम महोत्सव किसानों, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात और केंद्र की 'वोकल फॉर लोकल' पहल को बढ़ावा देने के अलावा खरीदार-विक्रेता बैठकों की सुविधा और मशीनरी आपूर्तिकर्ताओं, एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों, कृषि और बागवानी वैज्ञानिकों के जुटने के लिए एक प्रमुख मंच बन गया है।

भाजपा ने बूथ स्तर पर शुरू किया डिजिटल प्रशिक्षण अभियान, 6 जुलाई बाद आएगा परिणाम

उलखनऊ  त्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए व्यापक डिजिटल प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है। पार्टी प्रदेश के सभी बूथों पर 20-20 कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की डिजिटल परीक्षा आयोजित करा रही है। इस परीक्षा के माध्यम से न केवल कार्यकर्ताओं की वैचारिक और संगठनात्मक समझ का आकलन किया जा रहा है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए सक्षम और प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं का चयन भी किया जाएगा। परीक्षा का परिणाम 6 जुलाई के बाद घोषित किया जाएगा। बीजेपी ले रही कार्यकर्ताओं की डिजिटल परीक्षा भाजपा की इस डिजिटल परीक्षा में अधिकांश प्रश्न केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की प्रमुख उपलब्धियों, भाजपा के इतिहास, संगठन की विचारधारा और विभिन्न योजनाओं से जुड़े हैं। परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं को डिजिटल प्रशिक्षण प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) प्रदान किया जाएगा। साथ ही उनकी योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर विधानसभा चुनाव के दौरान विशेष जिम्मेदारियां भी सौंपी जा सकती हैं। प्रदेश में भाजपा का संगठनात्मक ढांचा जिलों और मंडलों तक फैला है। पार्टी का मानना है कि चुनावी सफलता की सबसे मजबूत कड़ी बूथ स्तर का संगठन होता है। इसी कारण बूथ प्रबंधन और माइक्रोमैनेजमेंट पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पार्टी लगातार विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अभियानों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने के साथ उन्हें चुनावी रणनीति के अनुरूप तैयार कर रही है। 'सरल एप' के जरिए हो रही परीक्षा डिजिटल परीक्षा 'सरल एप' के माध्यम से आयोजित की जा रही है, जहां बूथ स्तर के कार्यकर्ता ऑनलाइन प्रश्नों के उत्तर दे रहे हैं। इस अभियान में महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा, अनुसूचित जनजाति मोर्चा और युवा मोर्चा के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं। भाजपा का उद्देश्य हर वर्ग के प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को संगठन की गतिविधियों से जोड़ना और चुनावी तैयारियों में उनकी प्रभावी भूमिका सुनिश्चित करना है। हाल ही 64 सदस्यीय प्रदेश कार्यकारिणी का गठन आपको बता दें इससे पहले 25 जून को भाजपा ने 64 सदस्यीय नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की थी, जिसमें छह क्षेत्रीय अध्यक्षों और छह मोर्चों को भी शामिल किया गया। नई टीम के गठन के बाद पार्टी संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने में जुटी है। इससे पहले पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के तहत 11 विषयों पर कार्यशालाएं आयोजित कर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया था। अब डिजिटल परीक्षा के माध्यम से ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान की जा रही है, जिन्हें भविष्य में चुनावी अभियानों, संगठनात्मक कार्यक्रमों और जनसंपर्क गतिविधियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकें। भाजपा का मानना है कि प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से दक्ष कार्यकर्ता ही बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत बनाकर चुनावी सफलता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।  

परमिट नवीनीकरण, नए परमिट और ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटरों पर छह जुलाई को फैसला

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) की महत्वपूर्ण बैठक छह जुलाई को परिवहन आयुक्त कार्यालय लखनऊ में आयोजित होगी। इसमें परमिटों के नवीनीकरण, परमिट हस्तांतरण, नए स्टेज कैरिज और अन्य परमिटों के आवेदन, प्रति हस्ताक्षर (काउंटर सिग्नेचर) से जुड़े प्रकरण, व मोटरयान अधिनियम-1988 की धारा 86 के तहत परमिटों को निरस्त या निलंबित किए जाने के मामलों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा जिन चालक प्रशिक्षण केंद्रों (ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर) को एक वर्ष से अधिक समय पहले लेटर आफ इंटेंट (एलओआइ) जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने अब तक केंद्र के प्रत्यायन (एक्रेडिटेशन) के लिए आवेदन नहीं किया है, उनके एलओआइ को निरस्त करने के प्रस्ताव पर भी निर्णय होगा। परिवहन विभाग ने संबंधित आवेदकों और पक्षकारों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखने की सुविधा दी है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति अपने जिले के परिवहन कार्यालय में निर्धारित समय पर उपस्थित होकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये राज्य परिवहन प्राधिकरण के समक्ष अपनी बात रख सकेंगे। अधिवक्ता भी अपनी सुविधा के अनुसार बैठक में शामिल होकर पक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में लिए जाने वाले निर्णयों का असर प्रदेश में बस संचालन, यात्री परिवहन, मालवाहक वाहनों के संचालन, परमिट व्यवस्था और ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्रों की मान्यता पर पड़ता है। नए परमिटों की मंजूरी, पुराने परमिटों के नवीनीकरण और नियमों का पालन न करने वाले मामलों में कार्रवाई से प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।

सीएम ने किया आम महोत्सव-2026 की स्मारिका का विमोचन

मुख्यमंत्री ने किया उत्कृष्ट किसानों का सम्मान सीएम ने किया आम महोत्सव-2026 की स्मारिका का विमोचन वाहन को हरी झंडी दिखाकर सीएम योगी ने रवाना किया यूपी का आम  लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को आम महोत्सव में उत्कृष्ट किसानों का सम्मान किया। सबसे पहले उन्होंने वाहन को हरी झंडी दिखाकर यूपी के आम को रवाना किया। मुख्य आयोजन में उन्होंने आम महोत्सव-2026 की स्मारिका का भी विमोचन किया। सीएम ने फीता काटकर महोत्सव का शुभारंभ किया।  मुख्यमंत्री के हाथों इनका हुआ सम्मान… 1- बसंत कुमार- ग्राम-रंडौल, सहारनपुर 2- आशा सिंह- ग्राम- महोतेपुर, सीतापुर  3- अचल कुमार मिश्र- ग्राम मेड़ईपुरवा, लखीमपुर खीरी 4- शैलेंद्र कुमार- ग्राम भानपुर, उन्नाव  5- गोपाल माहेश्वरी- ग्राम माधौपुरी, कासगंज 6- नर्वदेश्वर सिंह- ग्राम छबैला, गोरखपुर  7- अमरपाल सिंह- ग्राम अकबरपुर सादात, मेरठ 8- हर्षवर्धन त्यागी- ग्राम भदस्याना, हापुड़ 9- सूर्यमणि यादव- ग्राम-विशुनपुर, हापुड़  10- मो. रेयान सिद्दीकी- अमरोहा 11- मेसर्स अवध नर्सरी- मलिहाबाद, लखनऊ 12- एससी शुक्ल- गोमती नगर, लखनऊ  13- उपेंद्र कुमार सिंह- नवीपनाह, मलिहाबाद लखनऊ

आधा किलो वजनी आम ने खींचा सबका ध्यान, यूपी मैंगो फेस्टिवल में CM योगी ने की सराहना

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में 'उत्तर प्रदेश मैंगो फेस्टिवल 2026' का उद्घाटन कर राज्य के आम उत्पादकों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की. देश में आम की कुल खेती वाले क्षेत्रफल का मात्र 9 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद उत्तर प्रदेश देश का 26 फीसदी आम पैदा करता है. इस तीन दिवसीय महोत्सव का आयोजन किसानों, वैज्ञानिकों और खरीदारों को एक मंच पर लाने के लिए किया गया है. सरकार द्वारा बनाए गए आधुनिक पैक हाउसों के माध्यम से यूपी के आमों को दुनिया के कई बड़े देशों में एक्सपोर्ट किया जा रहा है।  सीएम योगी ने देखी आमों की विविधता  इस दौरान प्रदर्शनी में रखे करीब आधा किलो वजनी आम को देखकर सीएम योगी मुस्कुरा पड़े. उन्होंने दोनों हाथों में आम लेकर तस्वीर भी खिंचवाई. कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।  मुख्यमंत्री ने बताया कि इस महोत्सव में राज्य भर से आम की लगभग 800 किस्में प्रदर्शित की गई हैं. इसमें मलिहाबाद का दशहरी, वाराणसी और गोरखपुर का लंगड़ा, बागपत व सहारनपुर का रतौल और बस्ती का आम्रपाली शामिल है. आम की यह विविधता उत्तर प्रदेश की असली ताकत है. उन्होंने कहा कि एक एकड़ में आम की खेती से किसान करीब 2.5 लाख रुपये की शुद्ध आय कमा सकता है. अगर इसे वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट से जोड़ा जाए, तो किसानों का मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है।  'काकोरी' ब्रांड नाम से वैश्विक पहचान मलिहाबाद के प्रसिद्ध दशहरी आम को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई (GI) टैग मिला हुआ है, जिससे यह एक ग्लोबल ब्रांड बन चुका है. राज्य सरकार ने मलिहाबाद के आमों को 'काकोरी' ब्रांड नाम के तहत प्रमोट किया है. यह नाम काकोरी ट्रेन एक्शन के शहीदों के बलिदान को सम्मान देने के लिए रखा गया है, जो राष्ट्र के प्रति समर्पण और किसानों की मेहनत की मिठास को एक साथ दर्शाता है।  निर्यात बढ़ाने के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर यूपी के आमों को विदेशों में भेजने के लिए सहारनपुर, लखनऊ, अमरोहा और वाराणसी में चार आधुनिक मैंगो पैक हाउस स्थापित किए गए हैं. इनके जरिए आमों की ग्रेडिंग, छंटनी और पैकेजिंग की जा रही है. यूपी का आम अब ब्रिटेन, यूएई, मलेशिया, सिंगापुर, कुवैत, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, कतर और रूस जैसे देशों में निर्यात हो रहा है. इसके अलावा, जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कृषि उत्पादों के निर्यात की सुविधा के लिए एक इंटीग्रेटेड टेस्टिंग एंड ट्रीटमेंट पार्क भी विकसित किया जाएगा। 

CM योगी के संकल्प से बदली ‘खुशी’ की जिंदगी, इलाज-शिक्षा के बाद अब आय का भी हुआ इंतजाम

सीएम योगी के संकल्प से खुशहाल हुई 'खुशी' की जिंदगी, इलाज-शिक्षा के बाद अब आय का पक्का इंतजाम कभी सुनने-बोलने में असमर्थ थी और परिवार आर्थिक संकट में था, अब इलाज-शिक्षा के अलावा पिता को मिला अपना रोजगार जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट परिसर में खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपी खुशी बोली—‘थैंक यू योगी जी’, मां ने कहा—योगी जी के आशीर्वाद से अब परिवार की रोजी-रोटी सुरक्षित कानपुर  कभी अपनी जिंदगी में उजाले की एक किरण तलाशते हुए कानपुर से पैदल लखनऊ पहुंची 19 वर्षीय दिव्यांग खुशी गुप्ता की कहानी अब उम्मीद, संवेदना और सुशासन की मिसाल बन चुकी है। जिस बेटी के सामने कभी सुनने-बोलने की दिक्कत थी और जिसका परिवार आर्थिक अभावों से जूझ रहा था, आज उसी परिवार के चेहरे पर खुशी की मुस्कान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात के बाद शुरू हुई सहायता केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक-एक कर खुशी और उसके परिवार के जीवन की हर बड़ी चिंता का समाधान बनती चली गई। शुक्रवार को इस बदलाव की श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपी। जिलाधिकारी की पहल पर एनआरजे इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के तहत यह ई-रिक्शा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया। वाहन का पंजीकरण खुशी की मां गीता गुप्ता के नाम पर कराया गया है, जिससे परिवार को स्थायी और सम्मानजनक आजीविका का साधन मिल सके। यह सहायता ऐसे समय मिली है, जब परिवार आर्थिक संकट के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था। कल्लू गुप्ता वर्षों से किराये का ई-रिक्शा चलाकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। प्रतिदिन की कमाई का बड़ा हिस्सा वाहन के किराये में चला जाता था और शेष बची मामूली राशि से घर का खर्च चलाना पड़ता था। हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में पैर में चोट लगने के कारण उनकी आय का यह साधन भी प्रभावित हो गया। परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च और बेटी के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी। जैसे ही यह स्थिति जिलाधिकारी के संज्ञान में आई, उन्होंने कल्लू गुप्ता को ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की पहल की, जो अब परिवार के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन गया है। दरअसल, खुशी की संघर्षगाथा पिछले वर्ष उस समय पूरे प्रदेश के सामने आई थी, जब वह अपनी समस्याएं लेकर कानपुर से पैदल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ पहुंची थी। मुख्यमंत्री ने उससे आत्मीयता से मुलाकात की, उसकी पूरी बात सुनी और अधिकारियों को निर्देश दिए कि उसके उपचार, शिक्षा और पुनर्वास के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद प्रशासन ने संवेदनशीलता के साथ लगातार उसके जीवन को सामान्य बनाने की दिशा में कार्य किया। मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों के क्रम में फरवरी 2026 में खुशी का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया। लंबे समय तक सुनने और बोलने में असमर्थ रही खुशी अब पहले की तुलना में बेहतर सुन और समझ पा रही है। नियमित स्पीच थेरेपी के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और उसने बोलना भी शुरू कर दिया है। उसकी शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा लखनऊ के मोहान रोड स्थित समेकित विशेष माध्यमिक (आवासीय) विद्यालय में कक्षा-9 में उसका प्रवेश कराया गया है। शुक्रवार को ई-रिक्शा मिलने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर का माहौल भी भावुक हो उठा। कभी अपनी बात भी व्यक्त न कर पाने वाली खुशी ने मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा- "थैंक यू योगी जी।" उसकी मां गीता गुप्ता की आंखों में संतोष साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा, "पहले बेटी के इलाज की चिंता थी, फिर उसकी पढ़ाई की। इन समस्याओं के समाधान के साथ-साथ अब रोजी-रोटी की चिंता भी खत्म हो गई है। योगी जी के आशीर्वाद और प्रशासन के सहयोग से हमारे परिवार को नया जीवन मिला है।" जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश था कि खुशी के पुनर्वास में कोई कमी न रहे। उसी सोच के अनुरूप उपचार, शिक्षा और अब परिवार की आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि ऐसे परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है।

स्मार्ट मीटरों की शिकायतों पर सख्त आयोग, 5% चेक मीटरों की टेस्ट रिपोर्ट तलब

लखनऊ  नियामक आयोग ने सभी बिजली कंपनियों से स्मार्ट मीटरों की चेक मीटर से जांच व गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट तलब कर ली है। स्मार्ट मीटरों के तेज चलने की लगातार शिकायतें आती रही हैं। प्रीपेड मीटर के दौरान यह शिकायतें बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। उन्हीं मीटरों को अब पोस्ट पेड कर दिया गया है। ऐसे में शिकायतें भी बरकरार हैं। इसके अलावा वर्टिकल सिस्टम और घरों में छोटी दुकान चलाने वाले उपभोक्ताओं के संबंध में भी रिपोर्ट पावर कॉरपोरेशन से मांगी गई है। ऐसे में उम्मीद है कि बिजली ग्राहकों को राहत देने वाला कोई फैसला हो सकता है। प्रदेश में करीब 90 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। इनमें से तकरीबन पांच प्रतिशत पुराने मीटरों को चेक मीटर के तौर पर छोड़ने के आदेश थे। बिजली दरों पर सुनवाई के दौरान स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद व कई सामान्य उपभोक्ताओं ने सवाल उठाए थे। आयोग ने स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नियमानुसार इनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सभी बिजली कंपनियों से 5 प्रतिशत चेक मीटरों की जांच व गुणवत्ता परीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि स्मार्ट मीटरों के एक्यूरेसी टेस्ट के संबंध में हर जिले के आधार पर अलग-अलग गुणवत्ता व परीक्षण रिपोर्ट भी आयोग को उपलब्ध करवाई जाए ताकि मीटरों की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि इन आदेशों से उपभोक्ता हितों का संरक्षण होगा। घरों में छोटी दुकान करवाने वालों के लिए तीन महीने में मांगी रिपोर्ट बिजली दरों की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में छोटी दुकान करने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू बिजली ही इस्तेमाल करने की सहूलियत का मामला उठाया था। इससे राज्य के 35-40 लाख उपभोक्ता प्रभावित होंगे। अब तक इन्हें दुकान के लिए घरेलू बिजली इस्तेमाल करने की छूट नहीं है। लिहाजा कई बार ऐसे उपभोक्ताओं पर बिजली चोरी आदि धाराओं में कार्रवाई कर दी जाती है। टैरिफ आदेश में नियामक आयोग ने इस मामले में पावर कॉरपारेशन से तीन महीने में विस्तृत प्रस्ताव उपलब्ध करवाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने पहले भी पावर कॉरपोरेशन को इस संबंध में प्रस्ताव देने के निर्देश दिए थे, लेकिन कॉरपोरेशन ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया था। कॉरपोरेशन के प्रस्ताव के बाद ऐसे उपभोक्ताओं की दिक्कतों का स्थाई समाधान होने की उम्मीद है। वर्टिकल व्यवस्था मूल्यांकन करवाएं, फीडर पर रहें पर्याप्त कर्मचारी उपभोक्ता परिषद ने बिजली कंपनियों की वर्टिकल व्यवस्था के विफल होने और संविदा कर्मचारियों की छंटनी का भी मुद्दा उठाया था। आयोग ने टैरिफ आदेश में गुरुवार को पावर कॉरपोरेशन को आदेश दिए हैं कि पूरी वर्टिकल व्यवस्था का स्वतंत्र व पेशेवर एजेंसी से मूल्यांकन करवाने के आदेश दिए हैं। साथ ही उपकेंद्रों व फीडर स्तर तक रखरखाव के लिए पर्याप्त नियमित व संविदा कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2019 में निर्धारित मानव संसाधन मानकों का पूरा पालन किया जाए और प्रत्येक फीडर स्तर पर आवश्यक संख्या में कर्मचारी उपलब्ध कराए जाएं ताकि विद्युत व्यवस्था अधिक विश्वसनीय, जवाबदेह और उपभोक्ता हितैषी बन सके। 1912 पर आने वाली शिकायतों के निपटारे में लापरवाही पर नाराजगी नियामक आयोग ने 1912 पर आने वाली शिकायतों के निपटारे में बरती जा रही कोताही पर नाराजगी जताई है। आयोग ने कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के पारदर्शी व प्रभावी निस्तारण की व्यवस्था पर तीन माह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन पावर कॉरपारेशन ने कोई रिपोर्ट नहीं दी। 1912 पर शिकायतों के फर्जी या कागजी निपटारे की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न होने पर विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 142 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।