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मुख्य चयन परीक्षा की मेरिट लिस्ट में 558 खिलाड़ियों के नाम, जिसमें से 167 खिलाड़ी वेटिंग में

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। योगी सरकार ने खेल प्रतिभाओं को बेहतर मंच देने और चयन प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी एवं मेरिट आधारित बनाने का जो संकल्प लिया है, वह लगातार जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के पांच प्रतिष्ठित स्पोर्ट्स कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्य चयन परीक्षा की मेरिट सूची जारी उ.प्र. स्पोर्ट्स कॉलेजेज सोसाइटी लखनऊ के अधीन संचालित पांच प्रमुख स्पोर्ट्स कॉलेज गुरु गोबिंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज लखनऊ, बीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर, मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स कॉलेज सैफई, स्पोर्ट्स कॉलेज सहारनपुर और स्पोर्ट्स कॉलेज फतेहपुर में कक्षा 6, 9 और 11 में प्रवेश के लिए मुख्य चयन परीक्षा की मेरिट सूची जारी कर दी गई है। चयन समिति ने प्रत्येक प्रतिभागी के प्रदर्शन के आधार पर ऑनलाइन अंक प्रदान किए हैं।  चयनित खिलाड़ियों की होगी जैविक जांच प्रदेश के सभी 5 स्पोर्ट्स कॉलेजों में 14 खेलों के लिए कुल 518 सीटें रिक्त हैं। प्रवेश प्रक्रिया के तहत मुख्य चयन परीक्षा के बाद 558 खिलाड़ियों की मेरिट लिस्ट जारी की गई है। जारी सूची में 391 खिलाड़ियों का चयन फ्रेश लिस्ट में हुआ है, जबकि 167 खिलाड़ियों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया है। कक्षावार और खेलवार सूची जारी की गई है, जिसे अभ्यर्थी संबंधित पोर्टल से डाउनलोड कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया के अगले चरण में चयनित खिलाड़ियों की जैविक आयु जांच और मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। यह प्रक्रिया भी पूरी पारदर्शिता के साथ निर्धारित मानकों के अनुसार होगी। खिलाड़ियों की सीएमओ कार्यालय पर होगी जैविक जांच एथलेटिक्स, बैडमिंटन, क्रिकेट और फुटबॉल के खिलाड़ियों की जैविक आयु जांच मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय लखनऊ में कराई जाएगी। वहीं जिम्नास्टिक्स, हॉकी, जूडो, वॉलीबॉल और कुश्ती के खिलाड़ियों की जांच मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय गोरखपुर में होगी। इसके अलावा कबड्डी, तैराकी, हैंडबॉल, बॉक्सिंग और भारोत्तोलन के खिलाड़ियों की जैविक आयु जांच मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय सैफई/इटावा में कराई जाएगी। जैविक जांच में सफल खिलाड़ियों को काउंसलिंग के बाद दिया जाएगा प्रवेश संबंधित मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय द्वारा जैविक आयु जांच और मेडिकल परीक्षण की तिथि निर्धारित की जाएगी। इसके बाद संबंधित स्पोर्ट्स कॉलेज खिलाड़ियों को सूचना उपलब्ध कराएंगे। जांच में उपयुक्त पाए जाने वाले खिलाड़ियों को काउंसलिंग के माध्यम से अंतिम प्रवेश दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश स्पोर्ट्स कॉलेज प्रबंधन समिति के सचिव एवं लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज के प्रधानाचार्य दीपेंद्र यादव ने बताया कि जैविक जांच में सफल खिलाड़ियों को नियमानुसार काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए अलग से सूचना जारी की जाएगी। इस सत्र आये रिकॉर्ड आवेदन योगी सरकार की खेल नीति का प्रभाव इस बात से भी स्पष्ट है कि इस वर्ष स्पोर्ट्स कॉलेजों में प्रवेश के लिए रिकॉर्ड आवेदन प्राप्त हुए हैं। कुल 518 सीटों के लिए लगभग 2600 छात्रों ने आवेदन किया था, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह प्रदेश में खेलों के प्रति बढ़ती रुचि और सरकार की खेलोन्मुखी नीतियों पर बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। मुख्य चयन परीक्षा 3 जून से 6 जून 2026 तक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार खेलवार संबंधित स्पोर्ट्स कॉलेजों में आयोजित की गई थी। चयन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए खिलाड़ियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन ऑनलाइन माध्यम से किया गया है। इस सत्र से दो नए फतेहपुर स्पोर्ट्स कॉलेज और सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज की शुरुआत हो रही है।

सीएम योगी का ऐलान: 1500 एकड़ में फार्मा पार्क से बुंदेलखंड में हजारों रोजगार का दावा

ललितपुर ललितपुर से  सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिले के लोगों को बड़ी सौगात दी। सीएम योगी ने कहा, ललितपुर में यूपी का पहला फार्मा पार्क विकसित किया जाएगा। इस पार्क के बनने से हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। इस दौरान सीएम योगी ने विपक्ष पर भी जोरदार निशाना साधा। उन्होंने कहा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सरकारों ने वर्षों तक ललितपुर की उपेक्षा की, जबकि भाजपा सरकार एक ही दिन में 1500 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात दे रही है। मुख्यमंत्री तुवन मंदिर मैदान में राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित 1766 करोड़ रुपये लागत की 221 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पांच दशक और समाजवादी पार्टी ने कई बार प्रदेश में शासन किया, लेकिन इन दलों ने ललितपुर के विकास के लिए समुचित कार्य नहीं किया। भाजपा सरकार प्रदेश के 25 करोड़ नागरिकों को अपना परिवार मानकर कार्य कर रही है। आज युवाओं और बेटियों को मिल रही नौकरयािं सीएम योगी ने कहा कि बुंदेलखंड का ललितपुर प्राकृतिक सौंदर्य और संभावनाओं से भरपूर जनपद है। डबल इंजन सरकार यहां के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और हर क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान बुंदेलखंड के युवाओं को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ता था, जबकि आज प्रदेश में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से युवाओं और बेटियों को सरकारी नौकरियां मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले अवैध खनन, वन संपदा की लूट और माफियावाद को संरक्षण दिया जाता था, जिससे विकास बाधित होता था। ललितपुर अब नवाचार और विकास का केंद्र बन रहा ललितपुर मुख्यमंत्री ने कहा कि ललितपुर अब नवाचार और विकास का केंद्र बन रहा है। यहां प्रदेश का पहला फार्मा पार्क 1500 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज और अटल आवासीय विद्यालय जैसी सुविधाएं भी जनपद को मिली हैं। उन्होंने कहा कि 'हर घर जल' योजना के तहत बुंदेलखंड में घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा रहा है। अब महिलाओं को पानी के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती। साथ ही बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और डिफेंस कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई गति दे रही हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत को मिल रही नई पहचान योगी ने कहा कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के तहत उत्तर प्रदेश में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है, जो देश की रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि दशकों से लंबित अर्जुन सहायक परियोजना सहित विभिन्न सिंचाई योजनाओं को पूरा कर किसानों को लाभ पहुंचाया गया है। इससे बुंदेलखंड के किसानों की आय में वृद्धि हुई है और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान संचालित कर रही है, जिसके तहत बिना गारंटी के वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को मिला आकार, श्रद्धा पथ पर बढ़ीं सुविधाएं

अयोध्या भगवान राम की नगरी में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित छह प्रमुख आश्रमों का व्यापक विकास कार्य पूरा हो गया है। पर्यटन विभाग की पहल पर 20.64 करोड़ रुपये की लागत से इन आश्रमों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। इससे तीर्थयात्रियों को बेहतर ठहराव, खान-पान और पेयजल की व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी। इस परियोजना के तहत श्रवण कुमार आश्रम, आस्तिक आश्रम, ऋषि च्यवन आश्रम, मेधा ऋषि आश्रम, श्री बन्धू बाबा आश्रम और महर्षि बामदेव आश्रम में व्यापक निर्माण कार्य किया गया। इन स्थलों पर विश्राम गृह, शौचालय, पीने के पानी की सुविधा, खान-पान की दुकानें, स्तंभ, प्रवेश द्वार, साइनेजेस तथा सीटिंग इंटरप्रिटेशन वॉल का निर्माण पूरा किया गया है। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा यह कार्य 30 मई 2023 को शुरू किया गया था। यूपी प्रोजेक्ट्स कार्पोरेशन लिमिटेड अयोध्या के परियोजना प्रबंधक मनोज शर्मा ने बताया कि परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप यह परियोजना आस्था और आधुनिक सुविधाओं के अद्भुत संगम का प्रतीक बनकर उभरी है। चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग पर यात्रा करने वाले लाखों श्रद्धालुओं को अब इन आश्रमों में आरामदायक विश्राम, स्वच्छ शौचालय, शुद्ध पेयजल और स्थानीय व्यंजनों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। इंटरप्रिटेशन वॉल के माध्यम से भक्तों को इन पावन स्थलों के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी। यात्रियों को आश्रमों में रुककर आराम करने की सुविधा पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह विकास कार्य धार्मिक पर्यटन को नई गति प्रदान करेगा। अयोध्या धाम पहले से ही राम मंदिर, हनुमान गढ़ी, नया घाट और अन्य पावन स्थलों के कारण देश-विदेश से श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। चौरासी कोसी यात्रा पथ का विकास इन आश्रमों को और अधिक आकर्षक बनाएगा। यात्रियों को अब लंबी यात्रा के दौरान थकान महसूस होने पर इन आश्रमों में रुककर आराम करने और अपनी आस्था को और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। आधुनिक सुविधाओं से युक्त हुए आश्रम इन आश्रमों में निर्मित संरचनाएं पर्यावरण अनुकूल और पर्यटक-अनुकूल हैं। सुंदर प्रवेश द्वार, मजबूत स्तंभ, आकर्षक साइनेज और आरामदायक सीटिंग व्यवस्था यात्रियों के अनुभव को यादगार बनाएगी। खान-पान की दुकानों में स्थानीय और सात्विक भोजन की व्यवस्था की गई है, जिससे तीर्थयात्रियों को शुद्ध और स्वादिष्ट भोजन मिल सकेगा। शौचालय और पेयजल की सुविधाएं स्वच्छता के उच्च मानकों पर आधारित हैं। महर्षि बामदेव आश्रम, श्रवण कुमार आश्रम जैसे पावन स्थलों का स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। जहां पहले बुनियादी सुविधाओं की कमी थी, वहां अब आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है। यह विकास न केवल श्रद्धालुओं के लिए वरदान साबित होगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा। दुकानदारों, गाइड्स और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। परिक्रमा पथ की यात्रा देगी और अधिक सुखद अहसास राम मंदिर निर्माण के बाद आसपास के क्षेत्रों का विकास, सड़कें, रोशनी, स्वच्छता और अब चौरासी कोसी मार्ग पर आश्रमों का नवीनीकरण इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पर्यटन विभाग का लक्ष्य है कि अयोध्या न केवल धार्मिक केंद्र बने बल्कि एक समृद्ध सांस्कृतिक और पर्यटन हब के रूप में भी विकसित हो। श्रद्धालु अब इन आश्रमों में रुककर परिक्रमा पथ की यात्रा को और अधिक सुखद बना सकेंगे। इस परियोजना का पूरा होना अयोध्या धाम को और चमकाने वाला कार्य है। भक्तों का कहना है कि आस्था के साथ अब सुविधा भी जुड़ गई है, जिससे रामलला की नगरी में आने का उत्साह और बढ़ गया है।

एफएसडीए की बड़ी कार्रवाई, 25 ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने 6 दिन तक चलाया प्रदेश का सबसे बड़ा प्रवर्तन अभियान

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं, फिजिशियन सैंपल्स की अवैध बिक्री, सरकारी आपूर्ति की औषधियों की कालाबाजारी और एक्सपायर्ड दवाओं के कारोबार के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में चलाए गए विशेष अभियान में आगरा में 3.63 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की नकली, एक्सपायर्ड, फिजिशियन सैंपल और सरकारी सप्लाई की दवाएं जब्त की गई हैं। अब तक 8 अवैध गोदाम सील किए जा चुके हैं तथा 6 एफआईआर दर्ज कर कई आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दो चरणों में चला बड़ा अभियान एफएसडीए मुख्यालय लखनऊ द्वारा गठित 25 औषधि निरीक्षकों की विशेष टीमों ने 22 से 24 मई तथा 12 से 14 जून 2026 के बीच आगरा में व्यापक प्रवर्तन अभियान चलाया। अभियान के दौरान खत्री गली, फव्वारा, संजय प्लेस, कमला नगर, झूलेलाल मार्केट, दयालबाग सहित प्रमुख दवा व्यापार केंद्रों, गोदामों और आवासीय परिसरों की जांच की गई। इस दौरान 20 से अधिक दवा फर्मों, 12 गोदामों तथा कई संदिग्ध परिसरों की तलाशी ली गई। जांच में बड़े पैमाने पर फिजिशियन सैंपल्स, सरकारी अस्पतालों की दवाएं, डिफेंस सप्लाई, एक्सपायर्ड दवाएं तथा संदिग्ध नकली औषधियां बरामद हुईं।  जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अभियान अभियान के दूसरे चरण को स्वयं एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने लीड किया। उन्होंने बताया कि प्रदेशवासियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियां उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले दो सप्ताह में छह दिनों तक चले विशेष अभियान में 25 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने व्यापक जांच की। आगरा में अब तक 3.63 करोड़ रुपये मूल्य की नकली, एक्सपायर्ड, फिजिशियन सैंपल और सरकारी आपूर्ति की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। 6 एफआईआर दर्ज की गई हैं तथा आठ अवैध गोदाम सील किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दवा माफिया, नकली दवा नेटवर्क और जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। एफएसडीए का आगरा पर था विशेष फोकस डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि नकली दवाओं का नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं, जहां से नकली और संदिग्ध दवाएं उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा औषधि बाजार है, जहां थोक और खुदरा दवा वितरण का मजबूत नेटवर्क, बेहतर एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी, दिल्ली से निकटता और विशाल उपभोक्ता आधार इसे अवैध कारोबारियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाता है। आगरा इस पूरे नेटवर्क का एक प्रमुख ट्रांजिट और वितरण केंद्र बनकर उभरा है, जहां से दवाओं की खेप लखनऊ, कानपुर समेत प्रदेश के अन्य बड़े बाजारों तक पहुंचती है। इसी कारण एफएसडीए पिछले कुछ समय से आगरा पर विशेष फोकस करते हुए सूचनाएं एकत्र कर रहा था और सुनियोजित रणनीति के तहत यह व्यापक अभियान चलाया गया। ज्योति ड्रग हाउस से जुड़े गोदामों से 2.5 करोड़ की बरामदगी 22 और 23 मई को झूलेलाल मार्केट स्थित मेसर्स ज्योति ड्रग हाउस से जुड़े दो अवैध गोदामों पर की गई कार्रवाई में लगभग 2.5 करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं बरामद हुईं। जांच में बड़ी मात्रा में “फिजीशियन सैंपल – नॉट फॉर सेल” अंकित दवाएं, सरकारी एवं डिफेंस सप्लाई की औषधियां तथा जीवनरक्षक इंजेक्शन और वैक्सीन बिना कोल्ड चेन व्यवस्था के रखी मिलीं। एफएसडीए ने मौके से कई नमूने लेकर शेष स्टॉक को सील कर दिया। मामले में फर्म संचालक नारायण दास हंसराजनी, किशोर मेहता और पुनीत कटार सहित अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई। श्री मेडिकल एजेंसीज से नकली ऑक्सॉलजिन डीपी नेटवर्क का खुलासा एफएसडीए की जांच के दौरान “ऑक्सॉलजिन डीपी टैबलेट” नामक औषधि के नकली निर्माण, भंडारण और वितरण से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का भी पर्दाफाश हुआ। निर्माता कंपनी जाइडस लाइफसाइंसेज की शिकायत पर शुरू हुई जांच आगरा से अलीगढ़ और फिर उत्तराखंड के रुड़की तक पहुंची। जांच में मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, पैकेजिंग सामग्री और प्रिंटिंग अवशेषों के आधार पर यह सामने आया कि नकली दवा निर्माण और आपूर्ति का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था। श्री मेडिकल एजेंसीज के सीलबंद गोदाम से लगभग 50 लाख रुपये मूल्य की दवाएं बरामद की गईं। मामले में सुरेन्द्र गुप्ता, मयंक गुप्ता, अन्नू अरोरा और सैयम अरोरा के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज की गई। जून अभियान में फिर खुला अवैध कारोबार का जाल 12 से 14 जून के बीच चलाए गए दूसरे चरण के अभियान में एफएसडीए टीम ने 20 फर्मों और 12 गोदामों की जांच की। इस दौरान चार गोदाम ऐसे पाए गए जो जांच के बाद सील कर दिए गए। सबसे गंभीर मामला खत्री गली स्थित गौरव मेडिको से जुड़ा सामने आया, जहां एक पंजीकृत गोदाम का ड्रग लाइसेंस स्वतः निरस्त हो चुका था, लेकिन उसी परिसर का उपयोग अवैध रूप से मेसर्स सीएफ इंटरप्राइजेज के माध्यम से किया जा रहा था। जांच में लगभग 40 लाख रुपये मूल्य की दवाएं बरामद हुईं, जिनमें फिजिशियन सैंपल, सरकारी आपूर्ति की दवाएं तथा एक्सपायर्ड स्टॉक शामिल था। बिना लाइसेंस चल रहे थे गोदाम दयालबाग स्थित मनीष पंजवानी के आवास पर छापेमारी के दौरान सरकारी आपूर्ति की दवाएं, इंसुलिन और अन्य जीवनरक्षक औषधियां बिना किसी वैध लाइसेंस के रखी मिलीं। यहां री-लेबलिंग और मूल्य परिवर्तन के भी संकेत मिले। लगभग 5.20 लाख रुपये मूल्य की दवाएं जब्त की गईं। इसी प्रकार सुमित माधवानी के दो अवैध गोदामों से लगभग 12 लाख रुपये मूल्य के फिजिशियन सैंपल तथा सुमित गुप्ता के गोदाम से लगभग 15 लाख रुपये मूल्य की दवाएं बरामद हुईं। दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई। कोल्ड चेन उल्लंघन और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ अभियान के दौरान कई स्थानों पर इंसुलिन, रैबीज वैक्सीन और अन्य तापमान नियंत्रित दवाएं बिना कोल्ड चेन व्यवस्था के रखी मिलीं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में दवाओं की प्रभावशीलता समाप्त हो सकती है और मरीजों के जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। एफएसडीए ने ऐसे मामलों को जनस्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ मानते हुए संबंधित स्टॉक जब्त कर लिया तथा नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेज दिया। चार सीलबंद गोदामों को नोटिस … Read more

अलीगढ़ की ब्रास आर्ट को अंतरराष्ट्रीय पहचान, GI टैग से बढ़ेगा निर्यात और कारीगरों की आमदनी

अलीगढ़ अलीगढ़ की विश्व प्रसिद्ध धातु मूर्तियों को आधिकारिक तौर पर जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) टैग मिल गया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने चार नए जीआई टैग हासिल कर कुल 83 अंकों के साथ देश में पहला स्थान बरकरार रखा है। इसे अलीगढ़ की पारंपरिक शिल्पकला और स्थानीय कारीगरों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। अलीगढ़ ब्रास स्टेचू एंड आर्टवेयर सप्लायर एसोसिएशन के अध्यक्ष हनुमंत राम गांधी ने बताया कि उनकी एसोसिएशन ने जीआई मैन ऑफ इंडिया के रूप में विख्यात पद्मश्री डॉ. रजनी कांत के साथ मिलकर इस टैग के लिए आवेदन किया था। चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री की विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं, परीक्षणों और प्रस्तुतियों के बाद अलीगढ़ की इस कला को यह विशेष मान्यता प्राप्त हुई है। यहां बनी पीतल और अन्य धातुओं की मूर्तियां अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में बड़े पैमाने पर निर्यात की जाती हैं। वैश्विक बाजारों में भारतीय संस्कृति, देवी-देवताओं और पारंपरिक कलाकृतियों की भारी मांग के कारण इस उद्योग का विदेशी मुद्रा अर्जित करने में बड़ा योगदान है। जीआई टैग मिलने से अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रामाणिकता बढ़ी है, जिससे जालसाजी से सुरक्षा मिलेगी और स्थानीय कारीगरों व निर्यातकों को अपने उत्पादों के बेहतर दाम मिल सकेंगे। संगठन के सचिव कपिल वार्ष्णेय और कोषाध्यक्ष मोहित राठी ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व से जोड़ते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण बताया। देशभर में बना नया कीर्तिमान इस वित्तीय वर्ष में डॉ. रजनी कांत के तकनीकी सहयोग से देश के कई राज्यों में जीआई टैग की क्रांति आई है। लद्दाख में आठ, झारखंड में आठ, मध्य प्रदेश में 22, और बिहार, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, असम को मिलाकर रिकॉर्ड 84 नए जीआई पंजीकृत हुए हैं, जबकि 215 नए आवेदन विभिन्न चरणों में लंबित हैं।  

राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित 1766 करोड़ रु. की 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया सीएम योगी ने

ललितपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ललितपुर को आज एक साथ 1500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की सौगात मिल रही है। कांग्रेस ने पांच दशक और सपा ने चार बार प्रदेश में शासन किया, लेकिन इन दलों ने कुल मिलाकर 1500 करोड़ रुपये भी ललितपुर को नहीं दिए होंगे, क्योंकि उनमें विकास की सोच नहीं थी। सपा के लिए सैफई ही परिवार था और कांग्रेस के लिए दिल्ली का परिवार ही देश था। दोनों इससे बाहर नहीं निकल सकते। लेकिन, हमारे लिए 25 करोड़ जनता ही परिवार है और उसे विकास, सुरक्षा, सम्मान देना हमारा दायित्व है।  मुख्यमंत्री शनिवार को तुवन मंदिर मैदान में राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित 1766 करोड़ रुपये की 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर ललितपुर की विकास यात्रा पर लघु फिल्म भी दिखाई गई। सीएम ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात बुंदेलखंड के सुंदरतम जनपदों में से एक ललितपुर हमारे हृदय में बसता है। सीएम ने कार्यक्रम में उपस्थित जनता का अभिनंदन करते हुए आश्वासन दिया कि डबल इंजन सरकार यहां के विकास के लिए हरसंभव कदम उठाएगी। अब ललितपुर के युवाओं व बेटियों को मिलती है सरकारी नौकरी  सीएम ने कांग्रेस व सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि संकुचित सोच वाली इनकी सरकारों ने हर जनपद में एक-एक माफिया दिया था, जो जनता की गाढ़ी कमाई पर डकैती डालने के साथ अवैध खनन, वनों की अवैध कटान, गोतस्करी करते थे। प्रदेश को बंजर बनाते थे। इन लोगों ने यूपी को बीमारू बनाकर बुंदेलखंड के नौजवानों को पलायन पर मजबूर किया। बहन-बेटियों को कष्ट दिया था, लेकिन आज ललितपुर की बेटियां व नौजवान यूपी पुलिस समेत सरकारी नौकरियों में भर्ती होते हैं।  पिछली सरकारों की उपेक्षा का दंश झेलता था ललितपुर सीएम ने कहा कि पिछली सरकारों की उपेक्षा का दंश झेलने वाला ललितपुर विकास की योजनाओं से कोसों दूर था। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास परियोजनाएं नहीं थीं। पानी होने के बावजूद खेती के लिए सिंचाई, गरीब के लिए आवास की सुविधा नहीं थी। मिट्टी के घड़े में पानी ढोते-ढोते माता-बहनों की जिंदगी व्यतीत हो जाती थी। यहां के संसाधनों व वन संपदा में लूट होती थी और मुट्ठी भर लोग अवैध खनन कर अव्यवस्था पैदा करते थे।  अब नवाचार के लिए जाना जा रहा है ललितपुर सीएम ने कहा कि ललितपुर अब विकास की ऊंचाइयों को प्राप्त कर नवाचार के लिए जाना जा रहा है। प्रदेश की पहली गोशाला देकर ललितपुर ने बताया था कि सरकार भी गोशाला का संचालन कर सकती है। तुवन सरकार की कृपा से तत्कालीन जिला प्रशासन ने पहली गोशाला प्रारंभ की थी। अब वहां से कंपोस्ट का निर्यात अन्य देशों को होने जा रहा है। अब ललितपुर के पास मेडिकल कॉलेज, अटल आवासीय विद्यालय भी है। 1500 एकड़ में यूपी का पहला फार्मा पार्क ललितपुर में बनेगा, इसकी तैयारी हो चुकी है। इससे हजारों नौजवानों को नौकरी मिलेगी।  बुंदेलखंड में बसने जा रहा यूपी का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर  सीएम ने कहा कि अब बहन-बेटियां, माताएं सिर पर घड़ा लेकर नहीं जातीं, क्योंकि बुंदेलखंड में हर घर जल की योजना साकार हो रही है। हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। सीएम ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की चर्चा करते हुए कहा कि हम लोग यूपी का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर बुंदेलखंड में बसाने जा रहे हैं। पहले यहां का युवा पलायन करता था। ठोकर से घड़ा फूट जाता था तो माताएं-बहनें किस्मत पर रोती थीं। आपके पूर्वजों ने बुंदेलखंड को सजाया-संवारा था, लेकिन पिछली सरकारों के निकम्मेपन और माफियावृत्ति के कारण बुंदेलखंड पिछड़ा था। हर जनपद में माफिया नौजवानों की नौकरी पर डकैती डालता था। विकास योजनाओं पर गुंडों को बैठाकर जनता के हक को छीना जाता था, जिससे बुंदेलखंड ठगा महसूस करता था।  नए भारत को ताकत दे रहे पीएम मोदी सीएम ने याद दिलाया कि सरकार ने बुंदेलखंड को भी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के हब के रूप में विकसित करने की बात कही थी। अभी इस कॉरिडोर में यूपी के अंदर ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। ऑपरेशन सिंदूर में जब यह मिसाइल दागी गई तो पाकिस्तान त्राहिमाम करते हुए जान की भीख मांग रहा था। पीएम मोदी नए भारत को ताकत दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश समेत बुंदेलखंड का कायाकल्प हो रहा है। यहां की पहचान अब नौजवानों को नौकरी, बहन-बेटियों की सुरक्षा-समृद्धि से हो रही है। महिला स्वयंसेवी समूह की बहनें बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर के माध्यम से तेजी से कैसे आय बढ़ा सकती हैं, बुंदेलखंड, ललितपुर, झांसी इस मॉडल का प्रतीक बन रहा है। पूरी हो गई दशकों से लंबित अर्जुन सहायक परियोजना  सीएम ने कहा कि समग्र विकास का कोई विकल्प नहीं हो सकता। विकास ही जीवन में परिवर्तन लाएगा। नौजवान, किसान, कारीगर, हस्तशिल्पी, व्यापारी, बेटी-बहन समेत समाज के हर तबके को विकास का वाहक बनाना पड़ेगा, तब किस्मत बदलेगी और समृद्धि आएगी। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने यही कार्य किया। लंबित सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से बढ़ाया गया है। दशकों से लंबित अर्जुन सहायक परियोजना अब पूरी हो गई। रतौली बांध, बावनी बांध, कचनौदा बांध, चिल्ली सिंचाई आदि परियोजनाओं ने बुंदेलखंड के किसानों की किस्मत बदली है। किसानों की आमदनी अब कई गुना हो रही है।  गोरखपुर या उप मुख्यमंत्रियों के जनपदों को नहीं दिया मेडिकल कॉलेज सीएम ने कहा कि हमने गोरखपुर या उप मुख्यमंत्रियों के जनपदों के लिए नहीं, बल्कि ललितपुर के लिए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किया। सीएम युवा के माध्यम से युवा उद्यमी बनाए जा रहे हैं। पूर्वजों ने कहा था कि ललितपुर न छोड़ियो, जब तक मिले उधार। किंतु अब आपको उधार लेने की जरूरत नहीं, क्योंकि सरकार ब्याज-गारंटी मुक्त पैसा दे रही है। अपना व्यवसाय चलाइए और कुछ समय बाद पैसा वापस कर दीजिए। आपका व्यवसाय भी बढ़ेगा और आप उद्यमी भी हो जाएंगे। सीएम ने विधायकों व सांसद की जमकर तारीफ भी की सीएम ने कहा कि अच्छा कार्य तब होता है, जब अच्छी सरकार आती है। अच्छी सरकार तब आती हैं, जब अच्छे विधायक-सांसद चुने जाते हैं। सीएम ने मन्नू कोरी व रामरतन कुशवाहा को ईमानदार, मेहनती तथा जनसेवा के प्रति पूरी तरह समर्पति बताते हुए कहा कि वे दिन-रात काम करते हैं। हमने उनसे … Read more

भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल आकार ले रही है। अचल संपत्तियों के पंजीकरण, स्वामित्व सत्यापन और नामांतरण प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित एवं तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने व्यापक सुधारों का खाका प्रस्तुत किया।   भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस योगी सरकार लगातार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में संपत्ति पंजीकरण और नामांतरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए ऐसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जिनसे फर्जी स्वामित्व, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। प्रस्तुतीकरण में पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन कर नई धाराएं 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे संपत्ति के स्वामित्व और अधिकारों की पूर्व जांच अनिवार्य हो सकेगी।   हर संपत्ति को मिलेगी यूनिक पहचान योगी सरकार का लक्ष्य प्रदेश की सभी ग्रामीण एवं शहरी संपत्तियों के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करना है। इस आईडी को जीआईएस मैपिंग और आधिकारिक स्वामित्व अभिलेखों से जोड़ा जाएगा, जिससे किसी भी संपत्ति की पहचान, स्वामित्व और रिकॉर्ड की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत घरौनी तैयार करने का कार्य पहले से चल रहा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।  पंजीकरण के साथ ही स्वतः होगा नामांतरण प्रदेश सरकार नागरिकों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीकरण पूरा होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। इसके लिए विभिन्न विभागों के अभिलेखों का एकीकरण, एपीआई आधारित डेटा साझाकरण और रियल-टाइम रिकॉर्ड अपडेट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इससे लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और समय तथा संसाधनों की बचत होगी।  भू-आधार से जुड़ेगा हर भूमि पार्सल योगी सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं के अनुरूप भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर भी तेजी से कार्य कर रही है। इसके तहत प्रत्येक भूमि पार्सल को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) यानी ‘भू-आधार’ प्रदान किया जाएगा। यह जियो-रेफरेंस्ड पहचान संख्या भूमि अभिलेखों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और जीआईएस प्रणालियों से जोड़ने में मदद करेगी, जिससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड अधिक सटीक और अद्यतन रहेंगे।  बिजली, पानी और संपत्ति कर रिकॉर्ड होंगे एक जगह   इस प्रस्तावित सुधारों के तहत संपत्ति कर रजिस्टर को स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग, राजस्व विभाग, बिजली, पानी और सीवर विभागों के रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। कॉमन प्रॉपर्टी आईडी आधारित यह व्यवस्था विभिन्न विभागों के बीच डिजिटल डेटा साझा करने में सहायक होगी और कर संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएगी।  ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बल विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों के लागू होने से संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आएगी, नागरिकों को तेज और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। योगी सरकार की यह पहल न केवल डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करेगी, बल्कि ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी नई गति प्रदान करेगी। उत्तर प्रदेश को तकनीक आधारित भूमि और संपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अप्रूवल, रिजेक्शन और कार्ड डिसेबल जैसी प्रक्रियाओं के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे राजधानी के चक्कर

लखनऊ योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों के लिए एक बड़ी राहत भरी व्यवस्था लागू की गई है। अब आयुष्मान कार्ड से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए लाभार्थियों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) के लखनऊ स्थित कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उनकी समस्याओं का निस्तारण अब जिला स्तर पर ही किया जा सकेगा। सभी सीएमओ को उपलब्ध कराई गई तकनीकी आईडी साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रयास है कि आयुष्मान भारत योजना का वास्तविक लाभ तभी पात्र लोगों तक पहुंचे। उन्हें बिना किसी अनावश्यक परेशानी के समय पर सेवाएं उपलब्ध हों। यही वजह है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ), नोडल आयुष्मान अधिकारियों तथा जिला कार्यान्वयन इकाई की टीमों को विशेष तकनीकी आईडी उपलब्ध करा दी गई है। इसके माध्यम से अब जिला स्तरीय अधिकारी आयुष्मान कार्ड के अप्रूवल, रिजेक्शन और कार्ड को डिसेबल करने जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं का स्थानीय स्तर पर ही त्वरित समाधान कर सकेंगे। इस व्यवस्था से लाभार्थियों का समय और धन दोनों बचेगा तथा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेजी से उपलब्ध होंगी। राष्ट्रीय औसत से कम है यूपी का दावा निस्तारण एवं भुगतान का टाइम वहीं साचीज ने गुणवत्तापूर्ण उपचार और अस्पतालों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं। एजेंसी का उद्देश्य एक ओर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है तो दूसरी ओर ईमानदारी से कार्य करने वाले अस्पतालों को समय पर भुगतान देकर उन्हें प्रोत्साहित करना भी है। दावों (क्लेम) के निस्तारण और भुगतान प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में भुगतान लंबित होने को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है और लगभग 500 करोड़ रुपये की देयता ही लंबित है। उत्तर प्रदेश में दावा निस्तारण एवं भुगतान का औसत टर्न-अराउंड टाइम लगभग 57 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 73 दिन है। यह उपलब्धि प्रदेश में लागू की गई प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीकी सुधारों को दर्शाती है। अनियमितताओं के चलते 200 अस्पतालों पर कार्रवाई साचीज की सीईओ ने बताया कि कई बार अस्पतालों द्वारा आवश्यक दस्तावेज समय पर या पूर्ण रूप से प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण दावे अस्वीकृत हो जाते हैं। इससे अस्पतालों को भुगतान प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को दूर करने के लिए एजेंसी विभिन्न चरणों में ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इन प्रशिक्षणों में अस्पतालों को दावा प्रस्तुत करने की सही प्रक्रिया, आवश्यक अभिलेखों की जानकारी और स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन्स के अनुरूप उपचार एवं दावा प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अस्पताल पहली बार में ही सही और पूर्ण दावा प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे दावों की अस्वीकृति कम होगी और भुगतान प्रक्रिया और अधिक तेज एवं पारदर्शी बनेगी। इससे मरीजों और अस्पतालों दोनों को लाभ मिलेगा। दूसरी ओर केवल गुणवत्तापूर्ण और लाभार्थी हितैषी अस्पतालों को बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी भी की जा रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में गुणवत्ता मानकों का पालन न करने तथा विभिन्न अनियमितताओं के कारण लगभग 200 अस्पतालों को योजना से डी-एम्पैनल किया गया है। यह कार्रवाई स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। 300 अस्पतालों का कराया जा रहा फील्ड ऑडिट करीब 300 अस्पताल ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिनके विरुद्ध अपकोडिंग अथवा संदिग्ध दावों के माध्यम से अनुचित भुगतान प्राप्त करने की आशंका सामने आई है। ऐसे अस्पतालों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उनके विरुद्ध विस्तृत फील्ड ऑडिट कराया जा रहा है। जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इससे योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूती मिलेगी। साचीज का स्पष्ट लक्ष्य है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत केवल वही अस्पताल सक्रिय रहें, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान कर रहे हैं। ऐसे अस्पतालों को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा उनके दावों और भुगतान के निस्तारण को और अधिक व्यवस्थित एवं समयबद्ध बनाया जाएगा।

मोगली गर्ल’ एहसास का निधन, 9 साल बाद थम गया संघर्ष का सफर

बहराइच मोगली गर्ल यानी एहसास। अब दुनिया छोड़ गई। नौ साल पहले बंदरों के झुंड से घिरी एक 10 साल की बच्ची को वनकर्मियों ने बचाया था। बंदरों जैसी आवाज, पैर से खाना खाने की आदत और कपड़े न पहनने की शगल ने ही उसको मोगली गर्ल बनाया था। 15 जून को उसकी मौत की खबर पाकर एक बार फिर वर्ष 2017 की तस्वीर लोगों के सामने आ गई, जब वह देश के नामचीन अखबारों की सुर्खियां ही नहीं बनी थी। कतर्निया सेंचुरी के मोतीपुर रेंज के नैनिहा गांव के पास गश्त के दौरान तत्कालीन उपनिरीक्षक सुरेश कुमार ने एक 10 साल की बच्ची को बंदरों के झुंड के बीच देखा था। वह लड़की नंगी थी, नाखून-बाल बढ़े थे, दोनों हाथ-पैर से चलती थी और बंदरों की तरह चिल्लाती-गुर्राती थी। बंदरों ने उसे बचाने आए ग्रामीणों पर हमला कर दिया था। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उसे झुंड से निकाला। सामान्य जीवन जीने की कला सीख रही मोगली गर्ल का नौ साल बाद जिंदगी का सफर 15 जून को खत्म हो गया। वर्ष 2017 में जंगल से निकली बच्ची मोगली गर्ल शरीर पर खरोंचों के निशान थे।मिहीपुरवा सीएचसी से रेफर कर उसे बहराइच जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। आम लोगों की भाषा नहीं समझती थी मोगली गर्ल तत्कालीन सीएमएस रहे डॉ डीके सिंह ने बताया कि वह न भाषा समझती थी, न थाली में खाना खाती थी, बल्कि जमीन पर फैलाकर बंदरों की तरह उठाकर खाती थी। लिहाजा उसे मोगली गर्ल का नाम मिला था। इलाज करने वाले नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ एसके वर्मा बताते हैं कि पहली बार ऐसा मामला उनके सामने आया था। सारे अंग विकसित थे, लेकिन उसके हाव-भाव पूरी तरह से बंदरों जैसे थे। हालाकि यहां से जाने के बाद उसके भाषा, व्यवहार और शिक्षा पर काम हुआ। धीरे-धीरे उसने बोलना सीखा, कपड़े पहनना सीखा और सामान्य जीवन जीने लगी। लेकिन जब उन्हें भी यह जानकारी मिली कि उस बालिका की मौत हो गई तो वे भी हैरान रह गए। सांस की बीमारी से जूझ रही थी जंगल में मिली लड़की वैसे डॉ अनूप कुमार बताते हैं कि जंगल में वर्षों रहने का असर उसके फेफड़ों पर पड़ा था। जैसा की जानकारी सामने आई है कि लंबे समय से वह सांस की बीमारी से जूझ रही थी। दो दिन पहले लखनऊ में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। जिस बच्ची को वनकर्मियों ने मौत के मुंह से निकाला था, वह समाज की मुख्यधारा से जुड़ते-जुड़ते दुनिया छोड़ गई। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ संजय खत्री कहते है कि ऐसी घटनाएं हमेशा समाज में एक नई सीख देती है। एहसास की कहानी मानवता और प्रकृति के रिश्ते का सबसे अनोखा उदाहरण मानी जाएगी।

हाथरस दौरे से पहले सलेमपुर में जनसभा स्थल का निरीक्षण, सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर फोकस

हाथरस  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 23 जून को हाथरस आ रहे हैं। वह हाथरस में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री के आगमन की खबर पाकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। उनकी जनसभा कराने के लिए प्रशासन ने सभास्थल के लिए जगह चिन्हित कर ली है। मुख्यमंत्री के हाथरस आने की पुष्टि डीएम अतुल वत्स ने की है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री 23 जून को हाथरस में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। उनका विस्तृत कार्यक्रम एक-दो दिन में प्रशासन को मिलने की उम्मीद है। जनसभा के लिए स्थान तलाश रहा प्रशासन डीएम ने बताया कि जनसभा के लिए संभावित जनसभा स्थल की तलाश प्रशासन कर रहा है। सलेमपुर के पास जनसभा कराने को लेकर प्रशासन विचार कर रहा है। मुख्यमंत्री के आने की खबर से पुलिस और प्रशासन में खलबली मची है। मुख्यमंत्री अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था को लेकर बैठक भी ले सकते हैं। प्रशासन ने मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर विकास कार्यों की बुकलेट बनाना भी शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री का अभी तक कार्यक्रम जनसभा का है। प्रशासन को उनके विस्तृत कार्यक्रम का इंतजार है। डीएम ने दिए जरूरी निर्देश शुक्रवार को जिलाधिकारी अतुल वत्स और पुलिस अधीक्षक (एसपी) चिरंजीवनाथ सिन्हा ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर जनसभा के प्रस्तावित स्थल सलेमपुर औद्योगिक क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी अतुल वत्स ने कार्यक्रम स्थल पर मंच निर्माण, हेलीपैड, वीआईपी मूवमेंट और आम जनता के बैठने की व्यवस्था को लेकर मातहतों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। कड़े सुरक्षा घेरे की रूपरेखा की तैयार एसपी चिरंजीवनाथ सिन्हा ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए कार्यक्रम स्थल और उसके आसपास के इलाकों में कड़े सुरक्षा घेरे की रूपरेखा तैयार की। मुख्यमंत्री के दौरे को ऐतिहासिक बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी पूरी ताकत से जुट गए हैं।