samacharsecretary.com

फिटनेस आइकन से सफल कारोबारी तक: प्रतीक यादव की प्रेरणादायी कहानी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा नाम मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया। प्रतीक के जाने से न केवल यादव परिवार शोक में है, बल्कि लखनऊ के व्यावसायिक हलकों में भी सन्नाटा पसर गया है। जहां मुलायम सिंह का बेटा होने के नाते उनके लिए राजनीति का रास्ता सबसे आसान था, वहीं प्रतीक ने सत्ता की चकाचौंध से दूरी बनाकर अपनी मेहनत से 'व्यावसायिक साम्राज्य' खड़ा किया। लखनऊ में सबसे बड़ा जिम बनाया और रियल इस्टेट के कारोबार में भी खुद को मजबूत किया। पिता की विरासत नहीं, खुद का रास्ता चुना साल 2014 में जब मुलायम सिंह यादव ने आजमगढ़ और मैनपुरी दोनों सीटों से लोकसभा चुनाव जीता था, तब सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि रिक्त होने वाली एक सीट से प्रतीक यादव चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन प्रतीक ने इन कयासों पर विराम लगा दिया। उन्होंने पिता की राजनीतिक विरासत के बजाय अपने जुनून जिम और रियल एस्टेट को अपना करियर चुना। उन्होंने साबित किया कि एक बड़े राजनीतिक घराने का वारिस भी एक सफल कॉर्पोरेट लीडर बन सकता है। लखनऊ का सबसे बड़ा जिम और फिटनेस साम्राज्य प्रतीक यादव को 'फिट इंडिया' का पहला सियासी आइकन माना जाता है। उनके पास लखनऊ का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक जिम था। 11वीं में पढ़ने के दौरान ही 100 किलो से अधिक वजन के बाद भी प्रतीक ने अपनी फिटनेस यात्रा से सबको चौंका दिया था। उन्होंने न केवल वजन घटाया, बल्कि एक 'आयरन मैन' जैसी काया हासिल की। उनकी फिटनेस का लोहा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी माना गया और उनका सफर 'इंटरनेशनल फिटनेस मैगजीन' के कवर पेज तक पहुंचा। फिटनेस इंडस्ट्री में उनका बहुत बड़ा निवेश और प्रभाव था। रियल एस्टेट और 'प्रतीक एडुविज' का सफर प्रतीक की व्यावसायिक सूझबूझ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने विरासत में मिली संपत्ति को अपने टैलेंट से कई गुना बढ़ाया। लखनऊ के रियल एस्टेट मार्केट में उनका बड़ा नाम था। वे 'प्रतीक एडुविज' (Prateek Eduwiz) जैसी कंपनियों के जरिए कॉर्पोरेट जगत में सक्रिय थे। उनकी नेटवर्थ और व्यावसायिक पोर्टफोलियो में कई प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट्स शामिल थे। उन्होंने कभी भी अपने काम के लिए राजनीतिक प्रभाव का सहारा नहीं लिया, बल्कि अपनी व्यावसायिक योग्यता से अलग मुकाम हासिल किया। समाज सेवा और गो-सेवा का प्रेम प्रतीक और उनकी पत्नी अपर्णा यादव को पशु प्रेम के लिए भी जाना जाता है। लखनऊ के कान्हा उपवन में अपर्णा की एक बड़ी गोशाला है। इस गोशाला में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दौरा कर चुके हैं और सराहना भी की थी। प्रतीक इस गोशाला के प्रबंधन और समाज सेवा के कार्यों में भी सहयोग करते थे। इसके अलावा स्ट्रीट डॉग को लेकर भी वह चिंतित रहते और उनकी व्यवस्थाओं में भी कई कार्य किए थे। आज वे अपने पीछे एक सफल बिजनेस एम्पायर, करोड़ों की संपत्ति और फिटनेस की एक प्रेरणादायी कहानी छोड़ गए हैं।

दुखद खबर: अखिलेश यादव के भाई प्रतीक नहीं रहे, अस्पताल में इलाज के दौरान निधन

लखनऊ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के परिवार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव (38) का लखनऊ में निधन हो गया है. प्रतीक यादव, समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के छोटे बेटे थे. वे अखिलेश यादव के सौतेले भाई थे।  प्रतीक यादव को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया. वे बीजेपी लीडर अपर्णा यादव के पति थे. हालांकि, पिछले दिनों पति-पत्नी के बीच विवाद की भी खबरें आई थीं. हालांकि, मौजूदा वक्त में वे परिवार के साथ ही रह रहे थे लेकिन कहा जा रहा है कि पारिवारिक कलह जारी थी।  बीते कुछ दिनों से उनकी तबियत खराब थी और इलाज चल रहा था. आज यानी बुधवार को सुबह उन्हें हॉस्पिटल लाया गया और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. प्रतीक यादव के निधन की खबर मिलते ही यादव परिवार और समाजवादी पार्टी के समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है।  अपर्णा यादव के पति थे प्रतीक प्रतीक यादव, बीजेपी नेता अपर्णा यादव के पति थे और राजनीतिक तौर पर लो-प्रोफाइल रहते हुए बिजनेस और फिटनेस सेक्टर से जुड़े थे. फिलहाल इस खबर को लेकर परिवार की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि सामने नहीं आई है. मौत के कारणों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है और विस्तृत जानकारी का इंतज़ार किया जा रहा है।  शरीर पर चोट के कोई निशान हीं फिलहाल पुलिस मामले को गंभीरता से देख रही है. शव का पंचनामा किया जा रहा है और कुछ ही देर में डॉक्टरों का पैनल पोस्टमार्टम करेगा. सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव के शरीर पर किसी भी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं, जिससे मामला और रहस्यमय हो गया है।  फेफड़ों की समस्या से परेशान थे प्रतीक अधिकारियों का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी. जानकारी के मुताबिक प्रतीक लंबे वक्त से फेफड़ों की समस्या से परेशान थे. उनके लंग्स में क्लॉट था, जिसका इलाज मेदांता में चल रहा था. सुबह जब उनकी तबीयत बिगड़ी तो वो रिएक्ट नहीं कर रहे थे. तभी तुरंत परिजन सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे।  KGMU में होगा पोस्टमार्टम प्रतीक यादव के शव का पोस्टमार्टम किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों का पैनल करेगा, ताकि मौत की वजह साफ हो सके. बता दें कि 38 वर्षीय प्रतीक, मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना यादव के बेटे थे।  – समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने पोस्टमार्टम हाउस से निकलने के बाद प्रतीक यादव को लेकर एक भावुक बयान दिया. अखिलेश यादव ने कहा कि प्रतीक अपने स्वास्थ्य के प्रति काफी जागरूक था और हमेशा अपने बिजनेस में व्यस्त रहता था. उन्होंने बताया कि करीब दो महीने पहले उनकी प्रतीक यादव से मुलाकात हुई थी, जिस दौरान उन्होंने प्रतीक को अपने काम पर ध्यान देने की सलाह दी थी।  – अखिलेश यादव ने प्रतीक यादव को एक 'बहुत अच्छा लड़का' बताते हुए कहा कि वह परिवार के लिए हमेशा समर्पित रहा. बिजनेस के उतार-चढ़ाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार व्यापार में नुकसान होने पर व्यक्ति मानसिक रूप से प्रभावित हो जाता है।  – अखिलेश ने यादव परिवार की एकजुटता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि पूरा परिवार इस वक्त दुख में एक साथ खड़ा है. भविष्य की कार्रवाई के बारे में बात करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि परिवार जो भी फैसला करेगा, उसी के मुताबिक कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि जो भी परिवार कहेगा, उस पर ही आगे की प्रक्रिया और जांच की जाएगी।  – प्रतीक यादव के शव का पोस्टमार्टम लखनऊ में KGMU के डॉक्टरों का पैनल कर रहा है. जानकारी के मुताबिक, पोस्टमार्टम के लिए KGMU की डॉ. मौसमी और डॉ. शिवली के नाम तय किए गए हैं, जबकि एक सीनियर डॉक्टर पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे. पोस्टमार्टम से पहले वीडियोग्राफी की औपचारिक कार्रवाई पूरी कर ली गई है. अब कुछ ही देर में पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू की जाएगी. पूरे मामले को देखते हुए पोस्टमार्टम हाउस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।  क्यों हुई मौत? किस बीमारी की वजह से उनकी मौत हुई है यह पता नहीं चला है. कुछ वक्त पहले वे मेदांता में भर्ती किए गए थे. इस दौरान अपर्णा यादव और अखिलेश यादव मिलने भी पहुंचे थे. हालत स्थिर होने के बाद उन्हें वापस घर लाया गया था।  जिम करना, कई तरह की दवाइयां लेने जैसी बातें उन्हें लेकर कही जा रही थी. वे कुछ दिनों से पूरी तरह से स्वस्थ नहीं दिखाई दे रहे थे. लेकिन बीमारी जानलेवा हो सकती है, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।  प्रतीक यादव का शव अस्पताल में रखा हुआ है. मौके पर परिवार को लोग पहुंचे हैं।  जिम का बिजनेस अपने परिवार की राजनीतिक बैकग्राउंड से दूर, प्रतीक यादव रियल एस्टेट और फिटनेस एंटरप्रेन्योरशिप के सेक्टर में काम करते थे. उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के लंदन स्थित लीड्स यूनिवर्सिटी से MBA किया था।  प्रतीक यादव फिटनेस फ्रीक थे. लखनऊ में उनके जिम का बिजनेस भी है. उन्हें जिम करने और फिट रहने का बहुत ज्यादा शौक था।  प्रतीक ने अब तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ा और न ही पार्टी में कोई बड़ा पद संभाला था. वे आम तौर पर सक्रिय राजनीति से दूर ही रहे. साल 2017 में दिए गए एक इंटरव्यू में यादव ने कहा था कि वह जब तक संभव हो सकेगा, राजनीति से दूर रहेंगे और अपने कारोबार पर ध्यान देंगे. हालांकि, पार्टी के अंदरूनी हलकों से कभी-कभार उनके चुनाव लड़ने की मांग उठती रही, लेकिन उन्होंने कभी भी सियासत में अपना करियर बनाने के बारे में नहीं सोचा। 

UP में चुनावी रणनीति तेज: योगी कैबिनेट विस्तार के बाद BJP ने साधीं 60 महत्वपूर्ण सीटें

लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले साल मार्च-अप्रैल में होने हैं। इस तरह एक साल से भी कम का वक्त बचा है और भाजपा ने योगी कैबिनेट का विस्तार करने के बाद अब चुनाव पर फोकस कर दिया है। मंगलवार को हिमंत बिस्वा सरमा सरकार का शपथ समारोह है और उसके बाद भाजपा लीडरशिप तैयारी में जुट सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मंगलवार के बाद किसी भी दिन यूपी चुनाव को लेकर भाजपा की अहम बैठक हो सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने उन 50 से 60 सीटों पर फोकस करने के लिए कहा है, जहां पहले भाजपा नहीं जीत पाई थी। ये वह सीटें हैं, जहां भाजपा को 2012 से 2022 तक के तीन चुनावों में जीत नहीं मिल सकी है। पार्टी लीडरशिप का कहना है कि यदि इन सीटों में से करीब आधी भी जीत ली गईं तो नतीजे बदल सकते हैं। भाजपा जिन 60 सीटों पर जोर देने की बात कर रही है, उनमें से 22 तो पूर्वांचल के आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर में हैं। इसके अलावा 13 सीटें पश्चिम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बिजनौर और मुरादाबाद जैसे जिलों में हैं। पश्चिम यूपी के इन जिलों में मुस्लिम बहुल आबादी वाली सीटों पर ऐसी स्थिति है। इसके अलावा पूर्वांचल के जिलों की बात करें तो सपा यहां मजबूत रही है। अब यदि भाजपा ने यहां फोकस किया तो वह अपने गढ़ों के अलावा कमजोर इलाकों में भी ताकत बढ़ा पाएगी। समाजवादी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में इन 35 सीटों में से 22 पर जीत हासिल की थी। पूर्वी यूपी के मऊ, गाजीपुर जैसे जिलों में सपा की झोली भर गई थी और इसी के चलते 2017 के मुकाबले वह अच्छी स्थिति में आ गई थी। इस बार भाजपा की प्लानिंग यह है कि सपा को उसके ही मजबूत इलाकों में घेरा जाए। मैनपुरी, फर्रूखाबाद, इटावा जैसे जिलों में भाजपा तैयारियों में जुट गई है। बता दें कि चुनाव की महीनों पहले से ही तैयारी करने में भाजपा आगे रही है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में भी वह महीनों पहले से ऐक्टिव थी और जब उसे सत्ता मिली है तो उसकी सक्रियता को भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। क्यों बूथ लेवल रणनीति पर इतना फोकस करती है भाजपा यूपी में भाजपा एक बार फिर से बूथ लेवल पर रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी का कहना है कि बूथ लेवल पर फोकस करने से जमीनी स्तर तक कार्यकर्ता ऐक्टिव हो जाते हैं और वे वोटरों को घरों से निकालने में भी जुटते हैं। पहले के चुनावों में भी भाजपा को इस रणनीति का फायदा मिला है। अब नए तेवर और कलेवर के साथ एक बार फिर पार्टी इस रणनीति पर जुटने की तैयारी में है।

गाय संरक्षण पर सख्ती से बढ़ी अर्थव्यवस्था, यूपी में 36 हजार गिरफ्तारियां

लखनऊ भारतीय संस्कृति में गाय को जो स्थान प्राप्त है, वह न केवल आस्था का प्रश्न है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के अंतर्सबंधों की वह सुदृढ़ डोर है जिसने हजारों वर्षों से इस देश को जोड़े रखा है। भारतीय शास्त्र साहित्य में गाय की महिमा का गान अनगिनत स्थानों पर हुआ है और उन्हें विश्वस्य मातरः की संज्ञा दी गई है। अर्थात गाय पूरे विश्व की माता हैं। यही कारण है कि प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता के प्रति श्रद्धा का जो भाव है, वह पीढ़ी दर पीढ़ी, अनवरत प्रवाहित होता रहा। जब इस पवित्र परंपरा पर कोई आघात होता है तो वह केवल धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करता, बल्कि उस सभ्यतागत सूत्र को भी तोड़ने का प्रयास करता है जिस पर भारतीय समाज की नींव टिकी है। आज के समय में जब विकास की अंधी दौड़ में परंपराएं पीछे छूट रही हैं तो उत्तर प्रदेश में योगी सरकार गोसंरक्षण को सनातनी दृष्टि से स्थापित करती हुई दिखाई देती है। गोवंश की रक्षा का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संकल्प सिर्फ धार्मिक भावना तक ही नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा हुआ है। यह गोसंरक्षण से ग्रामोदय की राह है, जो व्यापक सामाजिक-आर्थिक अभियान के रूप में उभर आया है। गो संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल उत्तर प्रदेश में 2017 में जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो लोगों में विकास की उम्मीद के साथ यह आकांक्षा भी थी कि अब गोकशी के बढ़ते अपराधों, माफियाओं के आतंक और कानून के दुरुपयोग से मुक्ति मिलेगी। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही जनआकांक्षाओं को समझा और गोसंरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में सर्वोच्च स्थान दिया। अब जबकि सरकार के नौ साल पूरे हो चुके हैं, परिणाम सामने है। 2017 से 2025 के मध्य योगी सरकार ने गो हिंसा से जुड़े मामलों में लगभग 36 हजार आरोपितों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़े मात्र प्रशासनिक उपलब्धियां नहीं, इस बात का प्रमाण भी है कि राज्य अब अपराधियों के समक्ष निरुपाय नहीं खड़ा, बल्कि राज्य शक्ति सनातन मूल्यों के रक्षार्थ सुदृढ़ता से खड़ी है। इन गिरफ्तारियों के साथ-साथ 13,793 आरोपियों के विरुद्ध गुण्डा अधिनियम के अन्तर्गत कार्रवाई की गई। 178 अभियुक्तों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया और 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट का प्रयोग किया गया। इसके अतिरिक्त 83 करोड़ 32 लाख रुपये की सम्पत्ति जब्त की गई। इन कदमों से यह स्पष्ट संदेश गया कि गोमाता के प्रति हिंसा न केवल कानूनी दृष्टि से दंडनीय है, बल्कि सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध संगठित होकर साजिशें रचने वालों के खिलाफ राज्य पूरी कठोरता से कार्रवाई करेगा। अर्थव्यवस्था की रीढ़ गोमाता योगी सरकार की दृष्टि यह है कि जब गाय सुरक्षित रहेगी, जब वह स्वस्थ रहेगी, तो वह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकती है। वर्तमान में इसे सुनिश्चित वास्तविकता के रूप में देखा जा सकता है। योगी सरकार ने गोशालाओं को केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि उत्पादन केंद्रों के रूप में विकसित किया है। आज उत्तर प्रदेश में गाय के दूध से निर्मित पनीर, मक्खन, घी और अन्य दुग्ध उत्पाद न केवल स्थानीय बाजारों में बल्कि पूरे देश में अपनी पहचान बना रहे हैं। गोबर से बनाई जा रही जैविक खाद किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर किसान न केवल अपनी लागत कम कर रहे हैं बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ा रहे हैं। गोबर गैस संयंत्रों से ग्रामीण ऊर्जा आपूर्ति को नई दिशा मिल रही है। पर्यावरण के अनुकूल इस ऊर्जा का स्रोत न केवल ग्रामीण परिवारों की ईंधन समस्या हल कर रहा है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी में भी योगदान दे रहा है। पंचगव्य आधारित उत्पादों ने तो जैसे एक नई क्रान्ति ही ला दी है। आयुर्वेदिक औषधियों में गोघृत और पंचगव्य की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। गाय के गोबर से निर्मित दीये, अगरबत्ती, धूप और मूर्तियां धार्मिक बाजारों में बड़ी तेजी से स्थान बना रहे हैं। यह उद्योग न केवल राजस्व उत्पन्न कर रहा है, बल्कि लाखों ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी दे रहा है। गोवंश आधारित उत्पादों के निर्माण में महिलाओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन रही है। कई स्वयं सहायता समूह गोबर से दीये, अगरबत्ती और अन्य उत्पाद बनाकर बाजार में बेच रहे हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह मॉडल सामाजिक परिवर्तन का बड़ा माध्यम है गोकशी किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं यह समझना जरूरी है कि गोकशी पर रोक केवल एक धार्मिक या भावनात्मक प्रश्न नहीं है। यह एक संगठित अपराध जगत की अर्थव्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। पूर्ववर्ती सरकारों के कालखंड में जो माफिया तंत्र पनपा था, उसने गोकशी को एक सुनियोजित उद्योग का रूप दे दिया था। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश में गोकशी और अवैध पशु वध को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी नीति के तहत गोकशी, पशु तस्करी और अवैध बूचड़खानों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। सरकार ने कानून को और कठोर बनाते हुए उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 भी लागू किया जिसमें 10 वर्ष तक कठोर कारावास और 3 से 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया। समृद्धि व धर्म का आधार उत्तर प्रदेश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़ा है। गोसंरक्षण की नीति यह संदेश देती है कि विकास का मार्ग केवल आधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि परंपराओं के सम्मान से भी प्रशस्त होता है। जब सांस्कृतिक मूल्यों को आर्थिक विकास से जोड़ा जाता है, तब समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देते हैं। शास्त्रों में गाय को समृद्धि और धर्म का आधार माना गया है। उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण भविष्य की समृद्धि का आधार बना है जिसमें संस्कृति और करुणा निहित है।

प्रमाण पत्र जारी करने में लापरवाही पड़ी भारी, गोंडा के पंचायत सचिवों पर कार्रवाई तय

गोंडा उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में ग्राम पंचायत सचिवालयों से आमजन को मिलने वाली सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले ग्राम पंचायत सचिवों पर अब कार्रवाई तय मानी जा रही है। डीपीआरओ लालजी दूबे ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करते हुए सभी सहायक विकास अधिकारियों (पंचायत) और ग्राम पंचायत सचिवों को पंचायत भवनों से नियमित रूप से प्रमाण पत्र जारी कराने के निर्देश दिए हैं। डीपीआरओ ने चेतावनी दी है कि लापरवारी पर मई माह का वेतन रोकने की कार्रवाई की जाएगी। डीपीआरओ कार्यालय से जारी पत्र में कहा गया है कि शासन के निर्देशों के बावजूद जिले की कई ग्राम पंचायतों में सीएससी के माध्यम से प्रमाण पत्र जारी करने का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। विभागीय समीक्षा में सामने आया कि जिले की कुल 1192 ग्राम पंचायतों में से वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक केवल 431 ग्राम पंचायतों द्वारा ही प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि 761 ग्राम पंचायतों में अभी तक यह कार्य शुरू भी नहीं हो पाया है। पत्र में पंचायत सहायकों और वीएलई के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में हर माह कम से कम 100 प्रमाण पत्र जारी कराने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र शामिल हैं। विकासखंडवार समीक्षा में इटियाथोक, करनैलगंज और पंडरी कृपाल ब्लॉक की स्थिति बेहतर पाई गई, जबकि कई विकासखंडों में कार्य संतोषजनक नहीं मिला। डीपीआरओ लालजी दूबे ने चेतावनी देते हुए कहा कि मई माह तक जिन ग्राम पंचायतों में प्रमाण पत्र जारी नहीं होंगे, वहां कार्यरत संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया जाएगा। काम न करने वाली कार्यकत्रियों की संविदा होगी समाप्त मनकापुर ब्लाक सभागार में बाल विकास परियोजनाधिकारी रमा सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को बैठक का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि जिस कार्यकत्री के काम में लापरवाही मिली उसे नोटिस देने के बाद संविदा समाप्त करने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी। बैठक में ब्लॉक की समस्त आंगनबाडी कार्यकत्रियों के कार्यों की समीक्षा की गई। जिन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के कार्यों में शिथिलता पाई गई। उन्हें कडी फटकार लगाते हुए शासन की मंशानुसार काम पूरा करके पोर्टल पर अपलोड करने की हिदायत दी गई। सीडीपीओ ने प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना की समीक्षा के दौरान सभी गांवों से लाभार्थियों का आवेदन लेकर योजना का लाभ दिलवाने का निर्देश दिया। कहा कि इस योजना में कोताही कतई बर्दास्त नहीं किया जायेगा। अपार आईडी बनवाने पर विशेष जोर देने के साथ समुदाय आधारित गतिविधियों को सम्पन्न कराने का निर्देश दिया।

6000 एकड़ भूमि अधिग्रहण लक्ष्य के साथ नया गोरखपुर प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहजनपद गोरखपुर में विकास की तमाम योजनाएं परवान चढ़ रही हैं। इसी बीच नया गोरखपुर और वैदिक सिटी बसाने की योजनाएं भी अब जोर पकड़ने लगी हैं। इन योजनाओं के मूर्त रूप लेने पर बड़ी संख्या में लोगों के शानदार लाइफ स्टाइल के साथ स्वस्थ, साफ-सुथरा और सुखी जीवन जीने के सपने पूरे हो सकेंगे। गुरुकुल सिटी, वैदिक सिटी और ताल रिंग रोड जैसी प्रमुख परियोजनाओं को लेकर सोमवार को भूमि अर्जन विभाग की गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों और भू-स्वामियों से संवाद स्थापित कर अधिकतम भूमि आपसी सहमति से खरीदने पर जोर दें। बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और भूमि अधिग्रहण की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। बताया गया कि नया गोरखपुर में 6000 एकड़ भूमि के अधिग्रहण का लक्ष्य है। 25 गांव में इसके लिए जमीन अधिग्रहित होनी है। प्राधिकरण उपाध्यक्ष को बैठक में बताया गया कि नया गोरखपुर के तहत गुरुकुल सिटी परियोजना मानीराम, रहमतनगर, बलापार और बैजनाथपुर गांव में विकसित हो रही। यहां मानीराम में 66.92 हेक्टेयर में से 40.80 हेक्टेयर, बलापार में 68.70 हेक्टेयर में से 40.56 हेक्टेयर और रहमतनगर में 17.44 हेक्टेयर में से 9.59 हेक्टेयर भूमि खरीदी जा चुकी है। वहीं बैजनाथपुर में 176.75 हेक्टेयर में से अभी केवल 2.15 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हो सका है। बैठक में इन योजनाओं को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दूसरी ओर करीब 251.89 हेक्टेयर में कोनी, माड़ापार और तकिया-मेदिनीपुर गांव में वैदिक अवधारणा पर वैदिक सिटी विकसित की जाएगी। यहां नक्षत्र वाटिका, वैदिक ज्ञान केंद्र, स्थानीय हस्तशिल्प जोन और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित की जाएगी। कुसम्ही, रुद्रपुर, भैंसहा, अराजी मतौनी और अराजी बसदीला गांवों में भी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। बैठक में इन सब योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। जीडीए उपाध्यक्ष ने एक-एक योजना के बारे में जानकारी ली और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। ताल रिंग रोड परियोजना की भी हुई समीक्षा इसके अलावा बैठक में ताल रिंग रोड परियोजना की भी समीक्षा की गई। प्राधिकरण उपाध्यक्ष को बताया गया कि महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर-1 में 2.66 हेक्टेयर भूमि की जरूरत है, जिसमें अब तक 0.20 हेक्टेयर भूमि ही खरीदी जा सकी है। बैठक में भूमि अधिग्रहण विभाग की कार्यप्रणाली, राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों की जिम्मेदारियों, आपसी सहमति से भूमि खरीद की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। इस संबंध में गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

बिहार में दवा दुकानें रहेंगी बंद, ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ बड़ा आंदोलन

 पटना ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री और नई दवा नीति के विरोध में बिहार समेत देशभर के केमिस्ट संगठनों ने 20 मई को एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। इस दौरान थोक और खुदरा दोनों प्रकार की दवा दुकानें बंद रहेंगी। हड़ताल के कारण मरीजों और आम लोगों को दवाइयां खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन और पटना केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि आनलाइन दवा बिक्री से पारंपरिक दवा कारोबार प्रभावित हो रहा है। संगठनों की मांग है कि सरकार ऑनलाइन दवा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम लागू करें और छोटे दवा कारोबारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे। प्रदेश अध्यक्ष पीके सिंह और महासचिव राजेश आर्या ने बताया कि 19 मई की देर रात से ही दवा दुकानदार हड़ताल पर चले जाएंगे। 20 मई को दुकानें बंद रखकर प्रशासन के समक्ष रखेंगे मांग वहीं पटना इकाई के अध्यक्ष अर्जुन कुमार यादव ने सभी दवा विक्रेताओं से आंदोलन में एकजुट रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि 16 से 19 मई तक दवा दुकानदार काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे, जबकि 20 मई को दुकानें बंद रखकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखेंगे। संगठनों ने आम लोगों से अपील की है कि वे जरूरत की दवाइयां पहले से खरीदकर रख लें, ताकि हड़ताल के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो। दवा कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

वाहन फिटनेस सिस्टम में बड़ा बदलाव: अब बढ़ेंगे ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन

लखनऊ प्रदेश के सभी जिलों में आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) की संख्या का बैरियर खत्म होगा। अभी तक एक जिले में अधिकतम तीन एटीएस खोलने का नियम रहा है और एक आवेदक पूरे राज्य में अधिकतम तीन एटीएस ही संचालित कर सकता था। यह मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) परिवहन विभाग ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देशों की अनदेखी करके तैयार किया था। तीन साल बाद अब केंद्रीय मंत्रालय के नियमों को अपनाने के लिए एसओपी में संशोधन होने जा रहा है। परिवहन विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। तो इस वजह से हो रहा नियमों में बदलाव नियमों में बदलाव करने की नौबत इसलिए आई क्योंकि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने पांच जनवरी को प्रदेशभर में वाहनों की मैनुअल फिटनेस जांच पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया था। उस सयम फिटनेस के लिए आवेदन करने वालों को एटीएस से लगभग 100 किलोमीटर क्षेत्र को जोड़ा गया था, उस समय व्यावसायिक वाहनों को नजदीकी 13 निजी एटीएस आवंटित हुए थे। लखनऊ के बख्शी का तालाब स्थित एकेआरएस एटीएस प्राइवेट लिमिटेड केंद्र पर लखनऊ के वाहनों के साथ इस केंद्र को रायबरेली, उन्नाव, बाराबंकी, हरदोई व सीतापुर जिलों के व्यावसायिक वाहन भी आवंटित किए गए थे। आदेश से व्यावसायिक वाहन चालक व स्वामी परेशान थे, क्योंकि उन्हें लंबी दौड़ लगानी पड़ रही थी। केंद्रीय मंत्रालय के सचिव यतेंद्र कुमार ने 27 अप्रैल को जिलों को सशर्त मैनुअल फिटनेस जांच कराने का आदेश दिया। निर्देश है कि जिन जिलों में एटीएस जल्द तैयार हो रहे वहां उसी अवधि तक मैनुअल जांच होगी। यह समय सीमा अलग-अलग जिलों में 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई है। इसी बीच परिवहन विभाग ने यूपी में खुलने वाले एटीएस की एसओपी का नए सिरे से परीक्षण किया। इसमें सामने आया कि एसओपी में केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के नियम 175 के तहत देशभर में खोले जा रहे एटीएस से इतर यूपी में 2023 में नियम बनाए गए और 23 अगस्त 2023 से आवेदन मांगे गए थे। वहीं, केंद्र सरकार की नियमावली में जिलों में खुलने वाले एटीएस की संख्या ही निर्धारित नहीं की गई है। माना गया कि प्रदेश में एक जिले में अधिकतम तीन एटीएस की संख्या का बैरियर लगाने से एटीएस अपेक्षा के अनुरूप नहीं बन रहे और वाहन स्वामियों को दौड़ लगानी पड़ रही है। इतना ही नहीं एटीएस के लिए यूपी में दो एकड़ भूमि होने का नियम बना जबकि केंद्र सरकार इससे कम एरिया में एटीएस बनवा रही है। यूपी में कड़े नियम होने की वजह से 25 जिलों में एटीएस निर्माण के लिए एक भी आवेदन नहीं हो सका। अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन संजय सिंह ने बताया, परिवहन विभाग ने एटीएस निर्माण के लिए अब केंद्र सरकार की नियमावली को अपनाएगी। संशोधित प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।

नकली आधार-पैन और पासपोर्ट से विदेश यात्रा, ATS ने किया खुलासा

 बलिया उत्तर प्रदेश के बलिया में स्थानीय अदालत ने बांग्लादेश के रोहिंग्या समुदाय के एक व्यक्ति को दोषी करार देते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। दरअसल, कोर्ट ने फर्जी भारतीय दस्तावेज और पासपोर्ट के जरिए भारत में अवैध रूप से रहने, विदेश यात्रा करने और जमीन की रजिस्ट्री कराने के मामले में ये सजा सुनाई है। मामले में आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) की वाराणसी यूनिट ने 14 मार्च 2023 को कार्रवाई करते हुए बांग्लादेश के कॉक्स बाजार स्थित रोहिंग्या कैंप निवासी अब्दुल अमीन पुत्र अब्दुल कलाम और म्यांमार के मंडू अराकान निवासी मोहम्मद अरमान उर्फ अबू तल्हा को बलिया शहर के गड़वार मोड़ के पास से गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान आरोपियों के पास से भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, विदेशी सिम कार्ड, विदेशी मुद्रा और सिक्के बरामद किए गए थे। जांच में सामने आया कि अब्दुल अमीन ने स्थानीय लोगों की मदद से फर्जी तरीके से भारतीय दस्तावेज तैयार कराए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसने पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के पंडुआ क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री कराई और फर्जी पासपोर्ट बनवाकर दो बार बहरीन तथा दो बार सऊदी अरब की यात्रा भी की। इस मामले में एटीएस निरीक्षक भारत भूषण तिवारी की तहरीर पर शहर कोतवाली में भारतीय दंड संहिता और विदेशी अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के अनुसार, अपर जिला जज राम कृपाल की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अब्दुल अमीन को विदेशी अधिनियम समेत अन्य धाराओं में दोषी मानते हुए तीन साल की सजा और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इटावा में बांग्लादेशई किशोरी का मेडिकल उधर, इटावा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के नगला उदई के पास संदिग्ध हालत में मिली बांग्लादेश निवासी किशोरी का सोमवार को पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराया। अब उसकी उम्र का निर्धारण होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार यदि किशोरी नाबालिग पाई जाती है तो उसे जुवेनाइल कोर्ट के आदेश पर बालिका बाल सुधार गृह भेजा जाएगा, जबकि बालिग होने पर अवैध रूप से सीमा पार करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। प्रभारी निरीक्षक केके मिश्रा ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में किशोरी ने खुद को बांग्लादेश का निवासी बताया है। उसने बताया कि वह काम के सिलसिले में दो महिलाओं के साथ दिल्ली आई थी और वहां से बागपत जाने के लिए निकली थी, लेकिन रास्ता भटककर दूसरी ट्रेन में बैठ गई और इटावा पहुंच गई। नगला उदई क्षेत्र में घूमते देख स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस को किशोरी के पास से केवल ट्रेन टिकट मिला है, कोई पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज नहीं मिले। भाषा समझने में दिक्कत होने पर ट्रांसलेटर और एआई चैट की मदद से पूछताछ की गई। किशोरी ने बताया कि उसके परिवार में मां, दादी, एक बहन और तीन भाई हैं, जबकि पिता की मौत हो चुकी है। पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट में पेश कर आगे की कार्रवाई करेगी।

39 किलो गांजा बरामदगी मामले में पुलिसकर्मी की संलिप्तता उजागर, विभागीय जांच शुरू

 अलीगढ़  तीन दिन पहले क्वार्सी पुलिस ने गांजा तस्करी के आरोप में जिन छह लोगों को गिरफ्तार किया था उनसे थाने के सिपाही प्रबल प्रताप की संलिप्तता थी। एसपी सिटी की जांच में आरेाप सही पाए जाने पर एसएसपी ने सिपाही को निलंबित कर दिया है। विभागीय कार्रवाई के भी आदेश जारी किए हैं। क्वार्सी पुलिस ने 39 किलो गांजा समेत गिरफ्तार किए थे छह लोग क्वार्सी पुलिस ने शनिवार को क्षेत्र के शहंशाहबाद में गली नंबर एक निवासी आफताब उर्फ कप्तान, आफताब की पत्नी शहरीन व गुड़िया के अलावा मुहल्ले के नबील, अब्दुल्ला और बिलाल को 39 किलो गांजा के साथ गिरफ्तार किया था। एक अवैध तमंचा, बिक्री से प्राप्त 1.05 लाख रुपये के अलावा अन्य सामान भी बरामद किया था। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि गांजा का वह ओड़िसा से मंगाते थे। सस्ते दामों में मिलने वाले गांजा की पुड़िया बनाकर 100 में बेचते थे। इतने बड़े स्तर पर गांजा का धंधा होने की बीट कांस्टेबल प्रबल प्रताप की जानकारी में होना से ही अधिकारियों का माथा ठनका। बीट सिपाही की संदिग्ध स्थिति होने पर एसपी सिटी ने की थी जांच एसएसपी ने एसपी सिटी को पूरे मामले की जांच सौंपी। एसपी सिटी की जांच में सिपाही को आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों से मेलजोल रखने तथा अन्य संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त पाया गया। रिपोर्ट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में कहा गया है कि उक्त आरक्षी की गतिविधियों से पुलिस विभाग की छवि धूमिल हो रही थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने आरक्षी के विरुद्ध विभागीय जांच एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी है। मनोयोग से करें कार्यं, अवैध गतिविधियों में संलिप्तता पर होगी कार्रवाई एसएसपी नीरज जादौन ने सभी अधीनस्थ पुलिस कर्मियों को निर्देशित किया है कि वे पूर्ण मनोयोग एवं ईमानदारी के साथ जनहित में कार्य करें। चेतावनी दी कि यदि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनहीनता, लापरवाही अथवा अवैध गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप सामने आते हैं, तो संबंधित के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।