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जल संकट को लेकर प्रशासन अलर्ट: खराब हैंडपंप-पाइपलाइन जल्द दुरुस्त करने का आदेश

रायपुर. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी निकायों को पेयजल संकट के निवारण के निर्देश दिए हैं। विभाग ने राज्य के सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को परिपत्र जारी कर इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। विभाग ने सभी निकायों को हैंडपंपों, बोरवेल एवं अन्य जलप्रदाय प्रणालियों की एक सप्ताह में चेकिंग कर आवश्यक मरम्मत करने को कहा है। साथ ही पाइपलाइन में लीकेज या टूट-फूट को तत्काल सुधारने तथा नालियों से होकर गुजरने वाले पाइपलाइनों व हाऊस-सर्विस कनेक्शन को स्थानांतरित करने के भी निर्देश दिए हैं। डिप्टी सीएम ने पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के दिए थे निर्देश उप मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने हाल ही में निकायों की समीक्षा बैठक के दौरान गर्मियों में निरंतर और समुचित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके परिपालन में संचालनालय ने सभी निकायों को पेयजल संकट के निवारण तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति के लिए निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने ऐसे वार्डों एवं बस्तियों जहां ग्रीष्म काल में जलस्तर नीचे चला जाता है, उन्हें चिन्हित कर उचित माध्यम से जलप्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इन्हें बनाया गया नोडल अधिकारी नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को जारी परिपत्र में कहा है कि ग्रीष्मकालीन पेयजल संकट के निवारण के लिए नगर निगमों में आयुक्त तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी नोडल अधिकारी होगें। पेयजल संकट के समाधान के लिए वे प्रतिदिन स्वयं शिकायतों के निराकरण की समीक्षा करेगें। जल प्रदाय योजनाओं के संधारण एवं मरम्मत के लिए प्राप्त शिकायतों को रजिस्टर में दर्ज कर समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करेंगे। विभाग ने सभी निकायों को संचालनालय से जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए ग्रीष्म काल में लोगों को शुद्ध पेयजल प्रदान करना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निकायों को हैंडपंपों के जल को कीटाणुरहित करने ब्लीचिंग पावडर का घोल और सोडियम हाइपोक्लोराइड आवश्यक मात्रा में डालना सुनिश्चित करने को कहा है। जलप्रदाय में क्लोरीन की मात्रा का नियमित परीक्षण करने तथा आवश्यकतानुसार ओव्हरहेड टैंक में रि-क्लोरीनेशन सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देशित किया गया है। निकायों में स्थापित जल शोधन संयंत्रों, उच्च स्तरीय जलागारों एवं संपवेल के सिल्ट की सफाई एवं डिस-इन्फेक्शन भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने बस स्टैण्डों, बाजारों एवं अन्य प्रमुख स्थलों पर प्याऊ घर खोलने और वहां पानी की व्यवस्था के साथ मानव बल भी उपलब्ध कराने को कहा है। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं एवं एनजीओ से भी स्वेच्छानुसार सहयोग लिए जा सकते हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने 15वें वित्त आयोग एवं अन्य मद से स्वीकृत जल प्रदाय योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने को कहा है। ऐसी जल आवर्धन योजनाएं और अमृत मिशन के कार्य जो पूर्णता की स्थिति में हैं, उन्हे 15 दिनों में पूर्ण कर पेयजल आपूर्ति प्रारंभ कर कार्य पूर्णता वाली योजनाओं का तुरंत संचालन प्रारंभ करते हुए पेयजल आपूर्ति योजनाओं का लाभ नागरिकों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने के भी निर्देश निकायों को दिए गए हैं। निकायों को पशुधन के लिए भी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है। इस हेतु निस्तारी के लिए तालाबों में जल भराव के लिए जल संसाधन विभाग एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से समन्वय स्थापित कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने कहा गया है। विभाग ने निकायों को भू-जल स्तर बढ़ाने नलकूप या बोरवेल के समीप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग या रिचार्ज पिट का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए नियमित जल परीक्षण कर रिपोर्ट संचालनालय को भेजने कहा गया है। निकायों को महामारी फैलने की जानकारी प्राप्त होने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित कर उचित कार्यवाही करने कहा गया है। विभाग ने निकायों में संचालित डोर-टू-डोर अपशिष्ट संग्रहण वाहनों के माध्यम से जल के दुरूपयोग को रोकने व जल संचयन के लिए प्रचार-प्रसार करने के साथ ही जनप्रतिनिधियों, स्वयं सेवी संस्थाओं एवं नागरिक समूहों के सहयोग से प्रत्येक वार्ड में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए हैं।

​सुशासन तिहार: घुटनों के बल चलने की मजबूरी थमी, ट्राइसाइकिल से मिली जीवन लाल के सपनों को नई रफ़्तार

​सुशासन तिहार: घुटनों के बल चलने की मजबूरी थमी,  ट्राइसाइकिल से मिली जीवन लाल के सपनों को नई रफ़्तार ​धमतरी के दिव्यांग जीवन लाल के लिए 'उम्मीद की किरण' बना जनसमस्या निवारण शिविर; अब आत्मनिर्भरता के साथ तय करेंगे अपनी राह ​रायपुर       छत्तीसगढ़ सरकार की 'सुशासन' की संकल्पना अब धरातल पर उन चेहरों पर मुस्कान बनकर लौट रही है, जो वर्षों से अभावों में जी रहे थे। धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम सिवनीकला में आयोजित 'सुशासन तिहार' एक ऐसा ही मंच बना, जिसने दिव्यांग जीवन लाल साहू के संघर्षपूर्ण जीवन को नई गति और गरिमा प्रदान की है। ​     ​सिवनीकला निवासी जीवन लाल साहू बचपन से ही दोनों पैरों की गंभीर दिव्यांगता का दंश झेल रहे हैं। दशकों तक उन्होंने वह दर्द सहा है, जहाँ चंद कदमों की दूरी तय करने के लिए उन्हें घुटनों के बल रेंगना पड़ता था। शारीरिक अक्षमता के बावजूद जीवन लाल ने कभी खुद को बेबस नहीं माना। वे न केवल अपने परिवार की दो एकड़ कृषि भूमि की देखरेख में हाथ बंटाते हैं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी स्वाभिमान के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। ​शासन की योजनाओं का मिला संबल       जीवन लाल के परिवार को शासन की विभिन्न जनहितैषी योजनाओं का निरंतर लाभ मिल रहा है। दिव्यांग पेंशन के रूप में 500 रुपए की ​आर्थिक सहायता और राशन कार्ड के जरिए हर महीने मिलने वाला 35 किलो चावल मिल रहा है। सुशासन तिहार के माध्यम से मौके पर ही ट्राइसाइकिल की उपलब्धता से अब कही आने जाने में समस्या नही होगी। ​      जब जीवन लाल को ग्रामीणों से 'सुशासन तिहार' के बारे में पता चला, तो वे अपनी अर्जी लेकर समाज कल्याण विभाग के स्टॉल पर पहुँचे। जिला प्रशासन की संवेदनशीलता का आलम यह था कि उनके आवेदन पर बिना किसी विलंब के तत्काल कार्यवाही की गई और शिविर स्थल पर ही उन्हें निशुल्क ट्राइसाइकिल भेंट की गई। इस पर जीवन लाल ने कहा कि अब मुझे खेत जाने या गांव में कहीं भी आने-जाने के लिए दूसरों का मुँह नहीं ताकना पड़ेगा। यह सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि मेरे लिए नए पैर हैं जो मुझे आत्मनिर्भर बनाएंगे। ​संवेदनशील प्रशासन, सशक्त नागरिक     ​ट्राइसाइकिल पाकर भावुक हुए जीवन लाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि सरकार की इस संवेदनशीलता ने उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ दिया है।      ​धमतरी के इस सुशासन तिहार ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब प्रशासन द्वार तक पहुँचता है, तो अंतिम पंक्ति के व्यक्ति का जीवन वाकई बदल जाता है। जीवन लाल की यह कहानी प्रदेश के हजारों दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा और सुशासन के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। ​

बारिश और तेज आंधी का दौर शुरू: छत्तीसगढ़ में मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। मौसम विभाग ने प्रदेश के रायगढ़ और महासमुंद जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार दोनों जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है। अचानक मौसम बदलने से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विभाग ने किसानों, खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों और यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने को कहा है। वहीं आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए खराब मौसम के दौरान पेड़ों और खुले मैदानों से दूर रहने की अपील की गई है। प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने से तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा सकती है। पिछले 24 घंटों में पूरे प्रदेश में अधिकतम तापमान 1-2 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। वहीं अगले 5 दिनों तक पूरे प्रदेश में बादल छाए रहने, मेघगर्जन की संभावना रहेगी।11 मई से बादल गरजने की गतिविधी में कमी आएगी। अगले 3 दिनों तक अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होने की संभावना है। उसके बाद 2 दिनों में 2-3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। राजनांदगांव सबसे ज्यादा गर्म राज्य में सबसे अधिक तापमान 41.0 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया है। सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.9 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज किया गया है। बीते 24 घंटे में प्रदेश में 2 डिग्री तापमान में बढ़ोतरी हुई है। सुकमा में 38.8, रायपुर में 39.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया है। वहीं कवर्धा में 37.6, बेमेतरा में 38.2 डिग्री, बिलासपुर में 37.4, जगदलपुर में 36.4 डिग्री, रायगढ़ में 37, सरगुजा में 34.8 डिग्री तापमान दर्ज किया गया है। अगले 4 दिनों में तापमान में 2-4 डिग्री बढ़ोतरी की संभावना है।

सुशासन तिहार 2026: सिमड़ा शिविर में 4 हितग्राहियों को मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी

सुशासन तिहार 2026: सिमड़ा शिविर में 4 हितग्राहियों को मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की खुशियों की चाबी पक्के घर का सपना हुआ साकार, हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जताया आभार रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेशभर में आयोजित “सुशासन तिहार 2026” के तहत आमजन की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही पात्र हितग्राहियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी मौके पर प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में 4 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित आवासों की चाबी सौंपी गई। लाभान्वित हितग्राहियों में ग्राम सिमड़ा की जेरोम, मयूरचुंदी के बीरबल यादव, करडेगा के टूना राम तथा जगदीश यादव शामिल हैं। पक्के मकान की चाबी पाकर सभी हितग्राहियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें बारिश, धूप और अन्य कठिनाइयों से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से उनका सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का सपना साकार हुआ है और अब वे अपने परिवार के साथ नए घर में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करेंगे। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

सुशासन शिविर से मत्स्य पालन में नई राह, आधुनिक तकनीक ने बढ़ाई सुविधा

मत्स्य पालकों के लिए सुशासन शिविर बना वरदान आधुनिक तकनीक से मत्स्य पालन करना हुआ आसान   रायपुर,  दंतेवाडा जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में कलस्टर वार हो रहे सुशासन शिविरों से जहां मौके पर ही ग्रामीणों की अधिकतर समस्याओं का समाधान किया जा रहा हैं। वही विभिन्न विभागों द्वारा हितग्राहियों को आधुनिक तकनीकों से युक्त यंत्र उपकरण सामग्रियां निशुल्क वितरण की जा रही है। इससे हितग्राहियों में अच्छा खासा उत्साह देखा जा रहा है और अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित हो रहे हैं। इस क्रम में विगत दिवस भूसारास और हल्बारास में संपन्न हुए सुशासन शिविर में मत्स्य विभाग द्वारा मत्स्य पालकों को उन्नत जाल और आईस बाक्स वितरण करके उनके व्यवसाय को सुविधाजनक और आर्थिक अनुकूलन बनाने का सफल प्रयास किया जा रहा हैं।    विकासखंड कटेकल्याण अंतर्गत ग्राम भूसारास में 6 मई को हुए हितग्राही हिड़मा मण्डावी एवं महादेव मरकाम भी लाभान्वित ग्रामीणों में से एक है। इस संबंध में मत्स्य कृषक हिड़मा ने बताया कि वह विगत 10 वर्षों से अपने स्वयं की भूमि में 0.20 हे. का तालाब निर्माण कर भारतीय मेजर कार्प रोहू, कतला, मृगल का संचयन कर मछली पालन का कार्य कर रहा हैं। इनके द्वारा उसे प्रतिवर्ष 30 से 40 हजार रूपये मछली विक्रय कर आमदनी होती हैं। जैसा कि हिड़मा ने बताया कि पूर्व में इनके पास जाल उपलब्ध नहीं थे। जिसके फलस्वरूप किराये से जाल लाकर मत्स्याखेट करना पड़ता था। परन्तु राज्य शासन की योजनाओं के माध्यम से सुशासन तिहार 2026 में इन्हें मत्स्याखेट हेतु जाल प्रदाय किया गया जिससे मत्स्याखेट करने में कोई परेशानी नहीं होगी एवं किराये से जाल होने की स्थिति से बचकर वह बेहतर आय अर्जित करेगा।        इसी प्रकार एक और अन्य हितग्राही महादेव मरकाम पिता हड़मा ग्राम भूसारास वि.ख. कटेकल्याण के मत्स्य कृषक को सुशासन तिहार 2026 में विभागीय फुटकर मछली विक्रय योजना अंतर्गत मछली विक्रय हेतु आइस बॉक्स प्रदाय किया गया है। चूंकि इसके पहले कृषक महादेव को अपने तालाब से निकाली गई मछली को तुंरत आस-पास के स्थानीय बाजारों में ले जाना पड़ता था। और मछली स्टोरेज करने हेतु आईस बाक्स न होने से मछलियों के खराब होने की स्थिति आ जाती थी। लेकिन अब महादेव खुश है क्योंकि सुशासन शिविर में आईस बाक्स प्रदान किया गया। वह अपने तालाब की मछली को निकालकर विक्रय हेतु बाजार ले जाने में कोई परेशानी नहीं होगी और मछली खराब होने की स्थिति से राहत मिलेगा।     इसके अलावा ग्राम पंचायत हल्बारास वि.ख. कुआकोंडा में भी मत्स्य कृषक परमेश्वर राना पिता नवल राना एवं सुनील कुमार भोयर पिता सामनाथ भी मत्स्य सामग्रियों से लाभान्वित हुए। कृषक परमेश्वर राना द्वारा विगत 08 वर्षों से अपने स्वयं के भूमि में 0.50 हे. का तालाब निर्माण कर मछली पालन का कार्य किया जा रहा है जिससे उन्हें प्रतिवर्ष 60 से 70 हजार की आमदनी प्राप्त हो रही है। पूर्व में कृषक के पास मत्स्याखेट हेतु जाल उपलब्ध नही होने के कारण मछली पकड़ने में परेशानी हो रही थी। वर्तमान में कृषक को सरकार की मंशानुरूप आयोजित सुशासन तिहार 2026 में विभाग द्वारा मत्स्यासेट हेतु जाल प्रदाय किया गया जिससे कृषक को अब मछली पकड़ने में कोई परेशानी नही होगी। वही सुनिल कुमार के पास भी पूर्व में मछली विक्रय हेतु बाजार तक ले जाने का कोई साधन नहीं था जिससे मछली खराब होने की संभावना बनी रहती थी। परन्तु आईस बाक्स मिलने से जिससे कृषक को बाजार तक मछली ले जाने में दिक्कत नहीं होगा। इस प्रकार राज्य शासन की मंशानुरूप सुशासन शिविर ने हिड़मा मण्डावी, महादेव मरकाम, परमेश्वर राना, सुनील कुमार भोयर जैसे सैकड़ों हितग्राहियों की व्यवहारिक एवं आर्थिक दिक्कतों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूर दराज के ग्रामीणों के घर तक पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुनने समझने और इसके समाधान करने का यह अभिनव प्रयास सुशासन को सार्थक कर रहा हैं

काम में बरती ढिलाई पड़ी भारी: सीमांकन विवाद पर राजस्व निरीक्षक सस्पेंड

धमतरी. सीमांकन कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में भखारा भठेली के राजस्व निरीक्षक मोहित कुमार सोनी को कलेक्टर ने निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि सीमांकन कार्य को तय समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी काम पूरा नहीं किया गया। मामले में भारी लापरवाही सामने आई। इसे गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार ने राजस्व निरीक्षण को पहले नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने और कार्य में सुधार नहीं होने पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक मोहित कुमार सोनी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा है कि शासन के कार्यों में लापरवाही और समय सीमा का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अन्य कर्मचारियों में भी सख्ती का संदेश गया है।

लोक अदालत में मिल रहा त्वरित न्याय: राजीनामे के जरिए मामलों का हो रहा निराकरण

रायपुर. रायपुर. आपसी सुलह (राजीनामा) के जरिए मामलों का निपटारा करने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली के तत्वावधान में आज देशव्यापी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा) बिलासपुर द्वारा प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों एवं व्यवहार न्यायालयों में भी लोक अदालत आयोजित की जा रही है। यह कैलेण्डर वर्ष 2026 की दूसरी लोक अदालत है। लोक अदालत के दिन जिला न्यायालय एवं तालुका न्यायालय (व्यवहार न्यायालय) में लंबित शमनीय अपराध के प्रकरण मोटर दुर्घटना दावा से संबंधित प्रकरण, 138 एनआई एक्ट, के अंतर्गत चेक बाउंस का प्रकरण धारा 125 दण्ड प्रक्रिया संहिता तथा मेट्रोमोनियल डिस्प्युट के अलावा जल कर, संपत्ति कर, राजस्व संबंधी प्रकरण ट्रैफिक चालान, भाड़ा नियंत्रण आबकारी से संबंधित प्रकरणों के निराकरण किया जाएगा। इसी प्रकार बैंक विद्युत संबंधी प्री-लिटिगेशन प्रकरण, राजस्व न्यायालय खंडपीठ में खातेदारों के मध्य आपसी बंटवारे, वारिसों के मध्य बटवारे का निराकरण किया जाएगा। न्यायालयों में बड़ी संख्या में लंबित प्रकरणों में कमी लाने के उद्देश्य से तथा प्रभावित पक्षकारों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करने की दिशा में नेशनल लोक अदालत एक प्रभावशाली कदम है। नेशनल लोक अदालत के लिए खण्डपीठों का गठन कर विभिन्न प्रकरणों तथा प्री.लिटिगेशन का निराकरण किया जाएगा। लोक अदालत के माध्यम से न्यायालय में राजीनामा योग्य आपराधिक प्रकरणों धारा. 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों, बैंक रिकवरी प्रकरण, सिविल प्रकरण, निष्पादन प्रकरण, विद्युत संबंधी मामलों तथा पारिवारिक विवाद के मामलों का निराकरण किया जाता हैं। इसके अतिरिक्त राजस्व, बैंक, विद्युत विभाग दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री.लिटिगेशन प्रकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत किए जाएंगे। विधिवत पंजीयन उपरांत संबंधित पक्षकारों के प्रकरण लोक अदालत खण्ड पीठ में निराकृत किए जाएंगे। इस तरह पक्षकार अपने न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण लोक अदालत के माध्यम से करा सकते हैं। इसके अलावा लोक अदालत में दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद् में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री-लिटिगेशन प्रकरण, याददाश्त के आधार पर बंटवारा, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, बैंक रिकवरी प्रकरण, कब्जे के आधार पर बंटवारा से संबंधित प्रक्ररणों को निराकृत किया जाएगा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023) के अंतर्गत कार्यवाही के मामले, रेन्ट कंट्रोल एक्ट, सूखाधिकार से संबंधित मामलों के साथ-साथ विक्रय पत्र, दानपत्र और वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण के मामले तथा अन्य प्रकृति के सभी मामले सम्मिलित और चिन्हांकित कर आपसी राजीनामा के आधार पर नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। लोक अदालत के दिन जिला न्यायालय एवं तालुका न्यायालय (व्यवहार न्यायालय) में लंबित शमनीय अपराध के प्रकरण मोटर दुर्घटना दावा से संबंधित प्रकरण, 138 एनआई एक्ट, के अंतर्गत चेक बाउंस का प्रकरण धारा 125 दण्ड प्रक्रिया संहिता तथा मेट्रोमोनियल डिस्प्युट के अलावा जल कर, संपत्ति कर, राजस्व संबंधी प्रकरण ट्रैफिक चालान, भाड़ा नियंत्रण आबकारी से संबंधित प्रकरणों के निराकरण किया जाएगा। इसी प्रकार बैंक विद्युत संबंधी प्री-लिटिगेशन प्रकरण, राजस्व न्यायालय खंडपीठ में खातेदारों के मध्य आपसी बंटवारे, वारिसों के मध्य बटवारे का निराकरण किया जाएगा। न्यायालयों में बड़ी संख्या में लंबित प्रकरणों में कमी लाने के उद्देश्य से तथा प्रभावित पक्षकारों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करने की दिशा में नेशनल लोक अदालत एक प्रभावशाली कदम है। नेशनल लोक अदालत के लिए खण्डपीठों का गठन कर विभिन्न प्रकरणों तथा प्री.लिटिगेशन का निराकरण किया जाएगा। लोक अदालत के माध्यम से न्यायालय में राजीनामा योग्य आपराधिक प्रकरणों धारा. 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों, बैंक रिकवरी प्रकरण, सिविल प्रकरण, निष्पादन प्रकरण, विद्युत संबंधी मामलों तथा पारिवारिक विवाद के मामलों का निराकरण किया जाता हैं। इसके अतिरिक्त राजस्व, बैंक, विद्युत विभाग दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री.लिटिगेशन प्रकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत किए जाएंगे। विधिवत पंजीयन उपरांत संबंधित पक्षकारों के प्रकरण लोक अदालत खण्ड पीठ में निराकृत किए जाएंगे। इस तरह पक्षकार अपने न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण लोक अदालत के माध्यम से करा सकते हैं। इसके अलावा लोक अदालत में दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद् में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री-लिटिगेशन प्रकरण, याददाश्त के आधार पर बंटवारा, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, बैंक रिकवरी प्रकरण, कब्जे के आधार पर बंटवारा से संबंधित प्रक्ररणों को निराकृत किया जाएगा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023) के अंतर्गत कार्यवाही के मामले, रेन्ट कंट्रोल एक्ट, सूखाधिकार से संबंधित मामलों के साथ-साथ विक्रय पत्र, दानपत्र और वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण के मामले तथा अन्य प्रकृति के सभी मामले सम्मिलित और चिन्हांकित कर आपसी राजीनामा के आधार पर नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया जाएगा।

CGBSE D.P.Ed. Result 2026 आउट: फर्स्ट ईयर में 51% और सेकंड ईयर में छात्रों ने मारी बाजी

रायपुर. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से आयोजित D.P.Ed. परीक्षा 2026 का रिजल्ट गुरुवार 8 मई को घोषित कर दिया गया। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा डीपीएड परीक्षा के परिणाम जारी किए गए है। परीक्षार्थी सीजीबीएसई की वेबसाइट पर जाकर अपना परिणाम देख सकते है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा आयोजित डी.पी.एड. (DPEd-) परीक्षा वर्ष 2026 का परीक्षा परिणाम आज 08 मई 2026 को घोषित कर दिया गया है। उक्त परीक्षा में प्रथम वर्ष के 51 तथा द्वितीय वर्ष के 52 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए थे। सभी परीक्षार्थी मण्डल की आधिकारिक वेबसाइट https://www.cgbse.nic.in/ पर अपना अनुक्रमांक प्रविष्ट कर परीक्षा परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

सदस्यता अभियान के साथ युवा कांग्रेस ने बढ़ाई सक्रियता, चुनावी तैयारी भी तेज

 रायपुर  छत्तीसगढ़ में भारतीय युवा कांग्रेस के बहुप्रतीक्षित संगठनात्मक चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। प्रदेश से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक नई टीम के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। संगठन के भीतर नए नेतृत्व, नई रणनीति और युवा चेहरों को लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया से पहले बड़े स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इस बार संगठन का फोकस ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़कर जमीनी पकड़ मजबूत करने पर रहेगा। सदस्यता शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है, जिससे चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और संसाधनयुक्त बनाने की तैयारी मानी जा रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होगी संचालित युवा कांग्रेस इस बार पूरी चुनाव प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित करने की तैयारी में है। सदस्यता से लेकर मतदान तक अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से पूरी कराई जा सकती हैं। संगठन का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यकर्ताओं की भागीदारी पहले से ज्यादा होगी। ब्लॉक स्तर तक चुनाव कराकर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। प्रमुख दावेदारों का इंटरव्यू  जानकारी के अनुसार चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे। पहले चरण में मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में प्रमुख दावेदारों का इंटरव्यू लिया जाएगा। अंतिम चयन में संगठनात्मक सक्रियता, कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ और उम्र जैसे पहलुओं को अहम माना जाएगा। इधर चुनावी आहट के साथ ही प्रदेशभर में युवा नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। जिलों में लगातार बैठकों, संपर्क अभियानों और कार्यकर्ताओं के बीच समर्थन जुटाने का सिलसिला शुरू हो चुका है।  इन नामों पर हो रही चर्चा  इस बार जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही। है उनमें हन्नी बगा, आदित्य भगत ,निखिल कांत साहू , सत्येंद्र चेलक, प्रशांत बोकड़े, हर्षित बघेल, संदीप वोरा समेत कई युवा नेता शामिल हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डिजिटल चुनाव प्रणाली, बढ़े हुए सदस्यता अभियान और संगठन में नई ऊर्जा की कोशिशों के चलते इस बार युवा कांग्रेस का संगठनात्मक चुनाव पहले की तुलना में ज्यादा प्रतिस्पर्धी और दिलचस्प हो सकता है। साथ ही कई नए चेहरों को भी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

जांच एजेंसियां न जुटा पाईं सबूत, छत्तीसगढ़ में 76 CRPF जवानों की हत्या के सभी आरोपी हाईकोर्ट से बरी

रायपुर  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2010 के ताड़मेटला माओवादी हमले मामले में सभी आरोपियों की रिहाई के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। इस हमले में 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। अदालत ने अपने फैसले में प्रत्यक्ष सबूतों की कमी और जांच में प्रक्रियागत खामियों का हवाला दिया है। जांच में गंभीर खामियां नजर आईं चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एक खंडपीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें आरोपियों को बरी कर दिया गया था। पीठ ने जांच और अभियोजन पक्ष की कार्रवाई में गंभीर खामियों की ओर भी इशारा किया है। यह आदेश पांच मई को पारित किया गया था और गुरुवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। सीआरपीएफ कर्मियों पर बड़ा हमला आदेश में कहा गया है कि सीआरपीएफ कर्मियों पर हुए एक बड़े हमले के मामले में आरोपियों की रिहाई को बरकरार रखा गया। ऐसा प्रत्यक्ष सबूतों की कमी कि परिस्थितिजन्य सबूतों के अधूरेपन, जांच में प्रक्रियागत खामियों और अपराध की गंभीरता के बावजूद, आरोपियों के दोष को 'उचित संदेह से परे' साबित करने में अभियोजन पक्ष की विफलता के कारण किया गया है। अप्रैल 2010 में हुआ था हमला यह मामला छह अप्रैल, 2010 को हुए माओवादी हमले से जुड़ा है। यह हमला तत्कालीन दंतेवाड़ा जिले के चिंतागुफा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत ताड़मेटला गांव के जंगलों में हुआ था। यह जगह अब सुकमा जिले में है। सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन का एक दल, राज्य पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर इलाके में गश्त पर था। इसी दौरान भारी हथियारों से लैस माओवादियों ने कथित तौर पर उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में मारे गए थे 76 जवान सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन इस हमले में 76 सुरक्षाकर्मी मारे गए। इनमें 75 सीआरपीएफ के और एक राज्य पुलिस का जवान शामिल था। यह देश में सुरक्षा बलों पर हुए सबसे घातक माओवादी हमलों में से एक था। जांच के बाद, 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ कोंटा स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में आरोप पत्र दायर किया गया। बाद में इस मामले को दंतेवाड़ा स्थित सत्र न्यायालय को सौंप दिया गया। सभी 10 आरोपियों को कर दिया बरी सुनवाई के बाद सात जनवरी, 2013 को दंतेवाड़ा के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया। सत्र अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर लगाए गए आरोपों को 'उचित संदेह से परे' साबित करने में विफल रहा है। आरोपियों पर थें ये धाराएं आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों में आपराधिक षड्यंत्र, दंगा करना और हत्या के साथ डकैती डालना शामिल था। बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए, राज्य सरकार ने 2014 में उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। इस मामले के 10 आरोपियों जिन्हें सत्र अदालत द्वारा बरी कर दिया गया था, में से दो की मौत हो चुकी है। अहम सबूतों को नहीं समझ पाई अदालत हाईकोर्ट में महाधिवक्ता विवेक शर्मा और उप महाधिवक्ता सौरभ पांडे ने यह दलील दी कि निचली अदालत अहम सबूतों को ठीक से समझने में नाकाम रही। इन सबूतों में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज एक आरोपी का इकबालिया बयान और घटनास्थल से बरामद विस्फोटक शामिल थे। कोर्ट ने गवाही की अर्जी कर दी थी खारिज राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अदालत ने सीआरपीसी की धारा 311 के तहत दायर उस अर्जी को खारिज करके गलती की, जिसमें हमले के चश्मदीद गवाह रहे सीआरपीएफ के सात घायल जवानों की गवाही कराने की मांग की गई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने यह कहा कि आरोपियों को हत्याओं से जोड़ने वाला कोई सीधा सबूत या चश्मदीद गवाह की गवाही मौजूद नहीं थी, और किसी भी चश्मदीद गवाह ने उन्हें अपराधी के तौर पर नहीं पहचाना था। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिया गया कथित इकबालिया बयान किसी भी स्वतंत्र सबूत से पुष्ट नहीं होता है। घटनास्थल से नहीं बरामद हुए हथियार वहीं, अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा जिन विस्फोटकों और हथियारों का जिक्र किया गया था, वे अपराध स्थल से बरामद हुए थे, न कि आरोपियों के कब्ज़े से, साथ ही, जब्त की गई चीजों के विस्फोटक होने की पुष्टि करने वाली फ़ॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट भी अदालत के सामने पेश नहीं की गई थी। अदालत ने की तीखी टिप्पणी  इसके साथ ही खंडपीठ ने कहा कि यह देखकर अत्यंत पीड़ा होती है कि सीआरपीएफ के 75 कर्मियों की जान जाने के बावजूद, जिसमें राज्य पुलिस का एक सदस्य भी शामिल था, कथित तौर पर नक्सलियों द्वारा किए गए एक क्रूर हमले में, अभियोजन एजेंसियां अपराध के असली अपराधियों की पहचान स्थापित करने या इस तरह के बर्बर कृत्य के लिए उन्हें न्याय के दायरे में लाने में सक्षम नहीं हुई हैं। विश्वसनीय सबूत नहीं पेश किया अदालत ने कहा कि हमें यह देखकर भी उतना ही दुख हुआ कि इतने गंभीर मामले को, जिसमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ और राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ, अंततः इस तरह से निपटाया गया कि आरोपियों के खिलाफ कोई भी कानूनी रूप से मान्य और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं किया जा सका। नतीजतन, निचली अदालत को उन्हें बरी करने के लिए बाध्य होना पड़ा। इन परिस्थितियों में, हमारे पास यह मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है कि निचली अदालत द्वारा पारित बरी करने के आदेश को विकृत, अनुचित या तर्क या न्यायिक औचित्य को चुनौती देने वाला नहीं कहा जा सकता। हालांकि, उच्च न्यायालय ने जांच में पाई गई कमियों पर चिंता जाहिर की और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि भविष्य में होने वाली गंभीर अपराधों की जांच में, खासकर उन मामलों में जिनमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ हो और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो, जांच के उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने राज्य को यह निर्देश भी दिया कि वह जांच की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम … Read more