samacharsecretary.com

पत्नी और बच्चों के साथ सुरक्षित घर में रहने का मिला सुकून, बेहतर भविष्य की उम्मीदों को मिले नए पंख

प्रधानमंत्री आवास योजना से नवेद के परिवार का पक्के घर का सपना हुआ साकार, खुशियों से रोशन हुआ आशियाना पत्नी और बच्चों के साथ सुरक्षित घर में रहने का मिला सुकून, बेहतर भविष्य की उम्मीदों को मिले नए पंख पक्की छत से परिवार को मिली सुरक्षा और सम्मान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार रायपुर,   हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना एक पक्का घर हो, जहां वह परिवार के साथ सुरक्षित, सम्मानजनक और सुकून भरा जीवन बिता सके। विशेषकर बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए एक सुरक्षित आशियाना परिवार की सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल होता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) जरूरतमंद परिवारों के इसी सपने को साकार करने का माध्यम बन रही है। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत अमरताल निवासी नवेद कुमार मनहर के जीवन में भी इस योजना से खुशियों का नया अध्याय जुड़ा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने से अब उनका परिवार सुरक्षित वातावरण में बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ रहा है। पत्नी और बच्चों के लिए सुरक्षित आशियाना बना खुशियों का आधार नवेद कुमार मनहर के परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपने घर का सपना पूरा होना उनके लिए विशेष महत्व रखता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से मिला पक्का मकान अब उनके परिवार की सुरक्षा और बेहतर रहन-सहन का आधार बन गया है। पक्की छत होने से परिवार को धूप, बारिश और मौसम की अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाव मिल रहा है। साथ ही बच्चों को सुरक्षित वातावरण और परिवार को दैनिक जीवन में अधिक सुविधा प्राप्त हो रही है। नवेद कुमार के लिए यह आवास केवल ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं, बल्कि परिवार के सपनों, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीदों से जुड़ा अपना आशियाना है। पक्का घर मिलने से परिवार को स्थायित्व और सुकून मिला है। अब वे अपने बच्चों के भविष्य और परिवार की खुशहाली को लेकर अधिक विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। पक्की छत के साथ मिला सम्मानजनक जीवन का आधार प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पात्र ग्रामीण परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराकर उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवासीय सुविधा प्रदान करना है, ताकि वे बेहतर और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। नवेद कुमार मनहर के लिए भी पक्का आवास परिवार की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान का महत्वपूर्ण आधार बना है। अपने घर का सपना पूरा होने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्का आशियाना उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत नवेद कुमार मनहर की यह कहानी दर्शाती है कि अपना पक्का घर मिलने से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। सुरक्षित छत के साथ उन्हें बेहतर रहन-सहन, सम्मानजनक जीवन और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नई उम्मीद मिलती है।

सेवा की कहानी: हाउसिंग बोर्ड के कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में भैरव कुमार संतवानी को मिला कारोबार बढ़ाने का नया अवसर

सेवा संकल्प अभियान सेवा की कहानी: हाउसिंग बोर्ड के कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में भैरव कुमार संतवानी को मिला कारोबार बढ़ाने का नया अवसर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आवास के साथ व्यावसायिक अधोसंरचना के विकास को मिल रही गति वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में व्यापारियों को बेहतर लोकेशन और गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक परिसर उपलब्ध कराने की पहल बेहतरीन प्लानिंग, शानदार निर्माण गुणवत्ता और व्यापार के अनुकूल वातावरण से प्रभावित हितग्राही ने जताई संतुष्टि रायपुर,   किसी भी व्यापारी के लिए अपने व्यवसाय को स्थापित करने और आगे बढ़ाने में सही स्थान का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है। अच्छी लोकेशन, गुणवत्तापूर्ण निर्माण और व्यापार के अनुकूल सुविधाएं न केवल कारोबार को बेहतर बनाने में सहायक होती हैं, बल्कि भविष्य में व्यवसाय के विस्तार की संभावनाओं को भी मजबूत करती हैं। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की व्यावसायिक परियोजनाएं व्यापारियों को ऐसे ही अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हाउसिंग बोर्ड के कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में दुकान लेने वाले भैरव कुमार संतवानी की कहानी भी इसी विश्वास, संतुष्टि और बेहतर व्यावसायिक भविष्य की उम्मीद को सामने लाती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आवासीय सुविधाओं के विस्तार के साथ व्यावसायिक अधोसंरचना के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा बेहतर लोकेशन, सुव्यवस्थित प्लानिंग और गुणवत्तापूर्ण निर्माण के साथ व्यावसायिक परिसरों को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य व्यापारियों को कारोबार स्थापित करने के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराना और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है। बेहतर लोकेशन और निर्माण गुणवत्ता ने जीता व्यापारी का भरोसा हाउसिंग बोर्ड के कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में दुकान लेने वाले भैरव कुमार संतवानी बताते हैं कि इस परियोजना की लोकेशन और निर्माण गुणवत्ता ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया है। व्यवसाय के लिए सुविधाजनक स्थान की तलाश में उन्हें हाउसिंग बोर्ड का यह व्यावसायिक परिसर एक बेहतर विकल्प के रूप में मिला। संतवानी कहते हैं, “मैंने छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में अपनी दुकान ली है और मैं यहां की सुविधाओं, निर्माण गुणवत्ता और बेहतरीन लोकेशन से बेहद संतुष्ट हूं। इस प्राइम लोकेशन पर हाउसिंग बोर्ड द्वारा इतना शानदार कमर्शियल प्रोजेक्ट विकसित किया जाना हम जैसे व्यापारियों के लिए बहुत ही लाभदायक और सराहनीय पहल है।” उनका मानना है कि व्यापार के लिए अच्छी लोकेशन पर सुव्यवस्थित परिसर उपलब्ध होना व्यवसायियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इससे कारोबार के संचालन में सुविधा मिलने के साथ भविष्य में व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। बेहतरीन प्लानिंग और व्यापार के अनुकूल वातावरण बनी परियोजना की खासियत भैरव कुमार संतवानी के अनुसार इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सोच-समझकर की गई प्लानिंग है। व्यावसायिक गतिविधियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित परिसर, निर्माण की गुणवत्ता और उपलब्ध सुविधाएं इसे व्यापारियों के लिए उपयोगी बनाती हैं। वे कहते हैं, “इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी बेहतरीन प्लानिंग, शानदार निर्माण गुणवत्ता और व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण है। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में यह कॉम्प्लेक्स व्यापार और व्यवसाय के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।” संतवानी को उम्मीद है कि इस परिसर में आने वाले समय में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और यहां व्यवसाय करने वाले व्यापारियों को इसका लाभ मिलेगा। उनके अनुसार सुव्यवस्थित व्यावसायिक परिसर न केवल कारोबार के संचालन को सुविधाजनक बनाते हैं, बल्कि ग्राहकों के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध कराते हैं। व्यापारियों के लिए नए अवसरों का आधार बन रही व्यावसायिक परियोजनाएं छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आवासीय परियोजनाओं के साथ व्यावसायिक परिसरों के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से व्यापारियों को सुव्यवस्थित दुकानों और व्यावसायिक स्थानों के विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में व्यावसायिक अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के प्रयास स्थानीय व्यापार, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। बेहतर स्थानों पर विकसित व्यावसायिक परिसर छोटे और मध्यम व्यापारियों को अपने कारोबार के लिए स्थायी स्थान उपलब्ध कराने में सहायक हो सकते हैं। “व्यापारियों को बेहतर स्थान पर कारोबार का अवसर देने के लिए सरकार और हाउसिंग बोर्ड का आभार” भैरव कुमार संतवानी ने छत्तीसगढ़ सरकार और हाउसिंग बोर्ड के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मैं समस्त व्यापारी वर्ग की ओर से छत्तीसगढ़ सरकार एवं छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड का हृदय से धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने हम व्यापारियों को एक बेहतर स्थान पर अपना व्यवसाय स्थापित करने का इतना अच्छा अवसर प्रदान किया है।” संतवानी की यह कहानी बताती है कि सुव्यवस्थित व्यावसायिक अधोसंरचना का विकास व्यापारियों की जरूरतों को पूरा करने के साथ उनके भविष्य की योजनाओं को भी नई दिशा दे सकता है। उनके लिए हाउसिंग बोर्ड का कमर्शियल कॉम्प्लेक्स केवल एक दुकान का स्थान नहीं, बल्कि अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने, नए अवसरों का लाभ उठाने और बेहतर भविष्य की उम्मीदों को साकार करने का माध्यम है। बेहतर लोकेशन, गुणवत्तापूर्ण निर्माण और सुविधाजनक व्यावसायिक वातावरण से मिली संतवानी की संतुष्टि हाउसिंग बोर्ड की व्यावसायिक परियोजनाओं के प्रति हितग्राहियों के भरोसे को सामने लाती है।

CG में धान खरीदी से पहले बारदाने की व्यवस्था तेज, पीडीएस और राइस मिलरों से मदद ले रहा मार्कफेड

राजनांदगांव. समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारियों के बीच बारदानों की व्यवस्था को लेकर कवायद तेज हो गई है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से संबद्ध 96 सहकारी समितियों में धान खरीदी के लिए मार्कफेड द्वारा बारदानों की व्यवस्था की जा रही है। खरीदी के दौरान पर्याप्त बारदाने उपलब्ध रहें, इसके लिए पुराने बारदानों के उपयोग के साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और राइस मिलरों से बारदाने जुटाने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा नए बारदानों की व्यवस्था भी की जा रही है। उस पर भी विभाग द्वारा ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों की माने तो दशहरा पर्व के बाद समितियों में बारदानों की व्यवस्था की जाएगी, जिसकी तैयारी की जा रही है। धान खरीदी के दौरान बारदानों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। खरीदी केंद्रों में किसानों से बड़ी मात्रा में धान की आवक होती है, जिसके लिए लगातार बारदानों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में विभाग के सामने सभी 96 समितियों में जरूरत के अनुसार बारदाने उपलब्ध कराने की चुनौती रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मार्कफेड द्वारा अलग-अलग स्रोतों से बारदानों की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों की माने तो इस पर कार्य शुरू कर दिया गया है। पीडीएस और मिलरों से भी जुटाए जाएंगे बारदानें बारदानों की जरूरत पूरी करने के लिए पीडीएस दुकानों से खाली होने वाले बारदानों और राइस मिलरों से मिलने वाले बारदानों का उपयोग करने की तैयारी है। इसके साथ ही नए बारदानों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। पुराने बारदानों में से उपयोग योग्य बारदानों को खरीदी कार्य में लगाया जा सकता है। हालांकि, कटे-फटे बारदानों की स्थिति और उनके उपयोग की पात्रता के अनुसार ही उनका इस्तेमाल किया जाना जरूरी होगा। पूर्व वर्षों की तरह इस बार भी कटे-फटे बारदाने परेशानी पैदा कर सकते हैं। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से संबद्ध 96 समितियों के माध्यम से धान खरीदी की व्यवस्था को ध्यान में रख बारदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। खरीदी के बाद किसी केंद्र में बारदानों की कमी के कारण काम प्रभावित न हो, इसके लिए पहले से इंतजाम किए जा रहे हैं। अब सभी समितियों में तैयारी भी शुरू कर दी गई है। चबूतरे में भी भूसी से भरे बारदानों की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। मार्कफेड के प्रमुख बघेल का कहना है कि दशहरा पर्व के बाद समितियों में बारदानों की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी जिसकी तैयारी की जा रही है।

महतारी वंदन योजना बनी अनीता की आर्थिक मजबूती का सहारा, घरेलू खर्चों के साथ भविष्य के लिए भी कर रहीं बचत

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी महतारी वंदन योजना बनी अनीता की आर्थिक मजबूती का सहारा, घरेलू खर्चों के साथ भविष्य के लिए भी कर रहीं बचत हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये से छोटी-छोटी जरूरतें हो रहीं पूरी, आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे कदम मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की महतारी वंदन योजना से बढ़ा महिलाओं का आत्मविश्वास, अनीता ने जताया आभार रायपुर,  घर की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए कुछ बचत कर पाना हर महिला की इच्छा होती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना प्रदेश की महिलाओं की इसी आकांक्षा को पूरा करने में मददगार बन रही है। योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता महिलाओं को अपनी जरूरतों के लिए आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम अमोरा निवासी श्रीमती अनीता कश्यप भी इस योजना से लाभान्वित होकर घरेलू खर्चों का बेहतर प्रबंधन करने के साथ भविष्य के लिए छोटी-छोटी बचत कर रही हैं। घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ बचत की भी बनी आदत श्रीमती अनीता कश्यप को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त होती है। वे इस राशि का उपयोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं और परिवार के छोटे-मोटे घरेलू खर्चों को पूरा करने में करती हैं। इसके साथ ही खर्चों के बाद बची राशि को भविष्य की जरूरतों के लिए सुरक्षित रखने का प्रयास भी करती हैं। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार खर्चों की योजना बनाने में सुविधा हो रही है। अनीता के लिए महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि केवल घरेलू खर्चों में सहयोग का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने का अवसर भी है। छोटी-छोटी बचत के माध्यम से वे भविष्य में आने वाली आवश्यकताओं के लिए आर्थिक तैयारी कर पा रही हैं। इससे उन्हें अपनी जरूरतों के संबंध में निर्णय लेने और परिवार के खर्चों में योगदान देने का आत्मविश्वास मिल रहा है। हर महीने की सहायता से बढ़ रहा आर्थिक आत्मविश्वास श्रीमती अनीता कश्यप बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित राशि उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है। इससे वे अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ कुछ पैसे बचाने का भी प्रयास करती हैं। हर महीने सहायता राशि प्राप्त होने से घरेलू खर्चों का प्रबंधन करना आसान हुआ है और भविष्य की जरूरतों के लिए बचत करने की प्रेरणा भी मिली है। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली इस जनकल्याणकारी योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। श्रीमती अनीता कश्यप की यह कहानी दर्शाती है कि प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि भी महिलाओं के दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। घरेलू जरूरतों की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए बचत करने की उनकी पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक बदलाव का उदाहरण है।

सेवा सेतु से आसान हुई सरकारी सेवाओं की राह, अजय कुमार के पुत्र को कुछ ही दिनों में मिला स्थायी जाति प्रमाण पत्र

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी सेवा सेतु से आसान हुई सरकारी सेवाओं की राह, अजय कुमार के पुत्र को कुछ ही दिनों में मिला स्थायी जाति प्रमाण पत्र मोबाइल पर व्हाट्सऐप से मिली प्रमाण पत्र की डिजिटल प्रति, हार्ड कॉपी भी हुई उपलब्ध एक सदस्य का जाति प्रमाण पत्र बनने से परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी प्रक्रिया हुई आसान रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में शासकीय सेवाओं को सरल, सुगम और समयबद्ध बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का लाभ आम नागरिकों को मिल रहा है। सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से अब आवश्यक प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो रही है। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा तहसील अंतर्गत ग्राम सांकर निवासी अजय कुमार का अनुभव इसका उदाहरण है। उन्होंने अपने पुत्र के आय, निवास एवं जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सेवा सेतु केन्द्र अकलतरा में आवेदन किया था। आवेदन के कुछ ही दिनों के भीतर उनके पुत्र का स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो गया। प्रमाण पत्र की डिजिटल प्रति व्हाट्सऐप के माध्यम से उनके मोबाइल पर उपलब्ध कराई गई और हार्ड कॉपी भी शीघ्र प्रदान कर दी गई। कुछ ही दिनों में मिला प्रमाण पत्र, अनावश्यक इंतजार से मिली राहत अजय कुमार अपने पुत्र के आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए तहसील कार्यालय अकलतरा स्थित सेवा सेतु केन्द्र पहुंचे थे। उन्होंने आय, निवास और जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ ही दिनों में उनके पुत्र का स्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से प्रमाण पत्र की पीडीएफ प्रति सीधे उनके मोबाइल पर व्हाट्सऐप के जरिए प्राप्त हुई। इसके बाद प्रमाण पत्र की हार्ड कॉपी भी उपलब्ध करा दी गई। समय पर प्रमाण पत्र मिलने से अजय कुमार को अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ा। डिजिटल माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध होने के कारण प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया भी उनके लिए अधिक सुविधाजनक रही। परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया हुई आसान अजय कुमार ने बताया कि उनके पुत्र का स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनने से परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया आसान हुई है। परिवार में एक सदस्य का आवश्यक प्रमाण पत्र उपलब्ध होने से संबंधित दस्तावेजी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु केन्द्र के माध्यम से आवश्यक प्रमाण पत्र सरल तरीके से और समय पर उपलब्ध हो रहे हैं। इससे नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में सहूलियत हो रही है। अजय कुमार ने इस सुविधा पर संतुष्टि व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। डिजिटल तकनीक से नागरिकों के करीब पहुंच रही शासकीय सेवाएं सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों को आवश्यक शासकीय सेवाएं समयबद्ध और सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रमाण पत्रों की डिजिटल प्रतियां मोबाइल पर उपलब्ध होने से नागरिकों को दस्तावेज प्राप्त करने में सुविधा मिल रही है। अजय कुमार की यह कहानी दर्शाती है कि तकनीक आधारित नागरिक सेवाओं से सरकारी प्रक्रियाएं अधिक सरल और सुलभ बन रही हैं। सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध होने से नागरिकों के समय की बचत हो रही है और शासकीय सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान बन रही है।

कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की तैयारी, हर घर तक मुनगा पहुंचाने का अभियान होगा शुरू

कुपोषण और एनीमिया से मुक्ति के लिए छत्तीसगढ़ में शुरू होगा  हर-घर मुनगा, घर-घर मुनगा अभियान रायपुर,   छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्य में कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर समस्याओं को जड़ से समाप्त करने के लिए एक महत्वाकांक्षी हर-घर मुनगा, घर-घर मुनगा अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। मुनगा के औषधीय और पोषण संबंधी गुण     बैठक में बताया गया कि मुनगा (सहजन) की फलियों और पत्तियों में पोषक तत्वों का अपार भंडार होता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए और विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसे नियमित भोजन में शामिल करने से कुपोषण और एनीमिया की रोकथाम में काफी मदद मिलती है, विशेषकर कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह बेहद फायदेमंद है। अभियान की मुख्य रूपरेखा और निर्देश       अभियान के तहत राज्य के प्रत्येक घर में मुनगा के पौधे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे और हर घर में इनका रोपण व देखभाल सुनिश्चित की जाएगी। नर्सरी में पौधों का तैयार होना उद्यानिकी, कृषि एवं किसान कल्याण तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की नर्सरियों में मुनगा के पौधे तैयार किए जाएंगे। फरवरी से मार्च माह के दौरान इन्हें घर-घर वितरित कर रोपित किया जाएगा। सभी जिलों के कलेक्टर इसकी निगरानी करेंगे। आंगनबाड़ी, स्कूल और छात्रावासों में लगाए जाएंगे मुनगा के पौधे       राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, आश्रमों और छात्रावासों में भी मुनगा के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराकर लगाए जाएंगे। पौधों के रोपण, उनकी सुरक्षा और सिंचाई सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल जियो-टैगिंग और लाइव डैशबोर्ड मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि हर पौधे के जीवित रहने की दर और पोषण स्तर पर सीधी नजर रखी जा सके।      इस अभियान को सफल बनाने के लिए कई प्रमुख विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग इस अभियान का नोडल विभाग होगा, जो आंगनबाड़ी स्तर पर समन्वय, हितग्राही चयन, पोषण शिक्षा और दैनिक निगरानी करेगा। राज्य के करीब 23 हजार 500 स्कूलों में मुनगा पौधे का रोपण कर शाला पोषण वाटिका का निर्माण किया जाएगा और मध्याह्न भोजन में मुनगा भाजी शामिल की जाएगी।  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग       ग्राम पंचायत स्तर पर बाड़ियों की पहचान, नर्सरी तैयार करने और स्व-सहायता समूहों के सहयोग से जन-जन तक अभियान की जानकारी पहुंचाई जाएगी। उद्यानिकी एवं कृषि विभाग  गुणवत्तापूर्ण मुनगा कलम व उन्नत पौधे तैयार करने, रोपण तकनीक, जैविक खाद और पौध सुरक्षा में तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे। इसके लिए वन विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा।           बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव भूवनेश यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित वन, उद्यानिकी और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Bilaspur JD Office में स्वीकृत पदों से ज्यादा तैनाती, 3 के बजाय 7 सहायक संचालक संभाल रहे जिम्मेदारी

बिलासपुर. संभाग के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक व्यवस्थाओं की अजीब तस्वीर सामने आ रही है। एक ओर जहां जिले समेत पूरे संभाग के सरकारी हायर सेकेंडरी और हाई स्कूलों में प्राचार्यों के पद खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर संयुक्त संचालक (जेडी) कार्यालय में नियमों को ताक पर रखकर जरूरत से ज्यादा सहायक संचालकों का जमावड़ा लगा हुआ है। वहां 3 के स्थान पर 7 प्राचार्यों को सहायक संचालक बनाकर बैठा दिया गया है। एक तरफ जिला मुख्यालय पर अफसरों की फौज बैठी है, तो दूसरी तरफ जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कई शासकीय हायर सेकेंडरी और हाई स्कूलों में प्राचार्यों के पद खाली पड़े हैं। इन स्कूलों में प्रशासनिक नियंत्रण और शैक्षणिक मॉनिटरिंग के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूलों का संचालन प्रभावित हो रहा है। हालात यह हैं कि स्वीकृत पदों से दोगुने से अधिक सहायक संचालक केवल जेडी ऑफिस में जमे हुए हैं, जबकि मैदानी स्तर पर स्कूलों की कमान संभालने वाला कोई जिम्मेदार नहीं है। नियमानुसार जेडी कार्यालय में प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए सहायक संचालकों के मात्र 3 पद स्वीकृत हैं। इसके बावजूद वर्तमान में इस कार्यालय में पूरे 7 सहायक संचालक पदस्थ हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकांश अधिकारी प्राचार्य वर्ग के हैं, जिन्हें स्कूलों में शैक्षणिक और प्रशासनिक नेतृत्व संभालना चाहिए था, लेकिन वे कार्यालयीन व्यवस्थाओं में जमे हुए हैं। जब उच्च पदस्थ योग्य प्राचार्य और सहायक संचालक स्तर के अधिकारी कार्यालयों में ही बैठे रहेंगे, तो स्कूलों की व्यवस्था कौन संभालेगा। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि मैदानी अमले और शिक्षण संस्थानों में अमले की कमी न हो, इसके बावजूद प्रशासनिक कुप्रबंधन के चलते योग्य अधिकारियों को स्कूलों में भेजने के बजाय दफ्तरों में बैठाकर रखा गया है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस विसंगति को दूर कर कब तक प्राचार्यों को उनकी मूलस्थापना यानी स्कूलों में भेजता है ताकि शिक्षण व्यवस्था पटरी पर लौट सके। संयुक्त संचालक अश्विनी भारद्वाज ने बताया कि जेडी ऑफिस में तीन सहायक संचालकों के पद स्वीकृत है। उसके स्थान पर शासन ने सात सहायक संचालकों की पोस्टिंग की है। उक्त निर्णय शासन का है। इसलिए सभी सहायक संचालकों को आवश्यकतानुसार काम सौप दिए गए है। उक्त संबंध में उचित निर्णय शासन को लेना होगा।

कृषि मंत्री राम विचार नेताम के निर्देश पर हल्दी बीज वितरण में अनियमितता की शिकायत पर जाँच शुरू

कृषि मंत्री राम विचार नेताम के निर्देश पर हल्दी बीज वितरण में अनियमितता की शिकायत पर जाँच शुरू रकबा के सत्यापन के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने के निर्देश रायपुर,  कृषि विभाग के अनुशांगिक संस्था उद्यानिकी विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 में राज्य पोषित मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत हल्दी बीज वितरण में कथित अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीरता से लिया है।कृषि मंत्री राम विचार नेताम के निर्देशानुसार मामले की जाँच प्रारंभ कर दी गई है तथा जाँच के लिए संचालनालय स्तर से टीम भी गठित की गई है।          जिलों में हल्दी बीज वितरण से संबंधित शिकायतों के परिप्रेक्ष्य में संचालनालय, उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी द्वारा जिला अधिकारियों से हितग्राहीवार रोपित बीज की मात्रा, बीज प्रदायक संस्थाओं द्वारा प्रदाय बीज की मात्रा एवं गुणवत्ता तथा हल्दी बीज रोपण करने वाले कृषकों को भुगतान की गई अनुदान राशि की स्थिति सहित आवश्यक जानकारी और अभिलेख माँगे गए हैं।उद्यानिकी विभाग द्वारा संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कृषकों द्वारा रोपित किये गये हल्दी बीज से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज, भुगतान संबंधी विवरण तथा फसल के भौतिक सत्यापन की जानकारी निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराई जाए, ताकि शिकायतों की तथ्यात्मक जाँच कर शासन को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जा सके। डिजिटल क्रॉप सर्वे के भी निर्देश        जाँच प्रक्रिया के अंतर्गत किसानों के खेतों में रोपित हल्दी फसल की वास्तविक स्थिति,  रोपित रकबा का सत्यापन करने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही बीज वितरण से संबंधित अभिलेखों, बीज प्रदायक संस्थाओं के विवरण, देयकों, पंजीयन टैग तथा फसल के भौतिक सत्यापन की जानकारी का परीक्षण किया जाएगा। किसानों के खेतों में रोपित फसल के जीपीएस आधारित फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अभिलेखों और वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सके। अनुदान भुगतान पर रोक         उल्लेखनीय है कि राज्य में उद्यानिकी विभाग के माध्यम से राज्य पोषित योजनांतर्गत 1300 हेक्टेयर हल्दी क्षेत्र विस्तार का कार्यक्रम लिया जा रहा है। इस योजनांतर्गत स्वयं के स्तर से  प्रमाणित हल्दी बीज का रोपण करने वाले कृषकों को प्रति हेक्टेयर 46 हजार रूपए तक अनुदान देने का प्रावधान है। योजनांतर्गत बीज की व्यवस्था स्वयं कृषक द्वारा की जाकर अनुदान हेतु आवेदन जिला अधिकारी को प्रस्तुत करने पर मैदानी अमले से सत्यापन उपरांत अनुदान की राशि कृषक के बैंक खाते में भुगतान की जाती है। कृषकों द्वारा रोपित की गई हल्दी फसल के प्रमाणित बीज वितरण से संबंधित शिकायतों एवं सत्यापन की प्रक्रिया को देखते हुए विभाग द्वारा अनुदान भुगतान की कार्यवाही फिलहाल रोक दी गई है। कृषकों द्वारा प्रस्तुत किये गये अभिलेखों, रोपित बीज की मात्रा एवं रकबा तथा फसल की स्थिति के सत्यापन की जाँच के बाद ही आगे की भुगतान प्रक्रिया के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। जाँच में अधिकारी, कर्मचारी अथवा संबंधित संस्था दोषी पाए जाते हैं कानूनी  कार्रवाई की जायेगी        मंत्री नेताम के निर्देश पर प्रारंभ की गई जाँच का उद्देश्य योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा पात्र किसानों तक योजना का लाभ पहुँचाना है। विभाग ने निर्देशित किया है कि जाँच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी अथवा संबंधित संस्था दोषी पाए जाते हैं, उनके विरुद्ध कानूनी  कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी। जाँच पूरी होने तथा संबंधित तथ्यों की पुष्टि के बाद ही अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। जाँच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पारिवारिक हकत्याग की रजिस्ट्री में नेत्र प्रभा जोशी को मिली 81,648 रुपये की आर्थिक राहत

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी पारिवारिक हकत्याग की रजिस्ट्री में नेत्र प्रभा जोशी को मिली 81,648 रुपये की आर्थिक राहत पंजीयन शुल्क 0.8 प्रतिशत से घटकर हुआ मात्र 500 रुपये, पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण हुआ किफायती मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं में सुधार से नागरिकों को मिल रही सहूलियत रायपुर छत्तीसगढ़ में पारिवारिक संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के पंजीयन को सरल और किफायती बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सुधारों से नागरिकों को बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है। बस्तर जिले के जगदलपुर निवासी श्रीमती नेत्र प्रभा जोशी के लिए पारिवारिक हकत्याग की रजिस्ट्री में शुल्क संबंधी रियायत महत्वपूर्ण सहारा बनी। संयुक्त परिवार के सदस्यों के बीच हकत्यागनामा के पंजीयन शुल्क को संपत्ति के बाजार मूल्य के 0.8 प्रतिशत से घटाकर मात्र 500 रुपये किए जाने से उन्हें 81 हजार 648 रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक बचत हुई। इस राहत से पारिवारिक संपत्ति से संबंधित दस्तावेज का पंजीयन कम खर्च में पूरा हुआ और परिवार पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की पहल और मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। इन सुधारों में पंजीयन प्रक्रिया का सरलीकरण, शुल्क में रियायत, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों का विकास प्रमुख हैं। इन व्यवस्थाओं का लाभ आम नागरिकों तक किस प्रकार पहुंच रहा है, यह जानने के लिए विभाग द्वारा 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव संकलित किए जा रहे हैं। 81 हजार रुपये से अधिक की बचत ने दी परिवार को बड़ी राहत सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत अपना अनुभव साझा करते हुए श्रीमती नेत्र प्रभा जोशी ने बताया कि पारिवारिक हकत्याग से संबंधित रिलीज डीड का पंजीयन कराने के दौरान उन्हें शासन द्वारा निर्धारित रियायती पंजीयन शुल्क का लाभ मिला। इस व्यवस्था के कारण उनके 81,648 रुपये बच गए। संपत्ति संबंधी दस्तावेज के पंजीयन में इतनी बड़ी राशि की बचत उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक राहत साबित हुई। श्रीमती जोशी ने बताया कि पंजीयन शुल्क में कमी आने से पारिवारिक संपत्ति से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों का पंजीयन कराना पहले की तुलना में अधिक किफायती हुआ है। इससे परिवार को अतिरिक्त आर्थिक व्यय से राहत मिली है। उन्होंने इस सुविधा को आम नागरिकों के लिए उपयोगी बताते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया। पारिवारिक हकत्याग पर अब मात्र 500 रुपये पंजीयन शुल्क राज्य शासन द्वारा संयुक्त परिवार के सदस्यों के बीच पारिवारिक हकत्यागनामा के पंजीयन शुल्क में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले ऐसे दस्तावेजों के पंजीयन पर संपत्ति के बाजार मूल्य का 0.8 प्रतिशत शुल्क निर्धारित था, जिसे घटाकर अब मात्र 500 रुपये कर दिया गया है। इस निर्णय से पात्र परिवारों को संपत्ति संबंधी अधिकारों के व्यवस्थापन और हकत्याग के दस्तावेजों का पंजीयन कराने में आर्थिक सहूलियत मिल रही है। विशेष रूप से उन परिवारों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो रही है, जिन्हें पारिवारिक संपत्ति के हकत्याग से संबंधित दस्तावेजों के पंजीयन में पहले अधिक राशि खर्च करनी पड़ती थी। जगदलपुर की श्रीमती नेत्र प्रभा जोशी को मिली 81,648 रुपये की राहत इसका उदाहरण है। पंजीयन शुल्क में कमी से बची राशि परिवार की अन्य आवश्यकताओं के लिए उपयोग की जा सकती है। डिजिटल सुविधाओं से सरल और पारदर्शी बन रही पंजीयन प्रक्रिया वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल दस्तावेज, ऑनलाइन भुगतान और ऑटो म्यूटेशन जैसी व्यवस्थाओं से नागरिकों के लिए संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनाई जा रही है। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों के समय और धन की बचत के साथ पंजीयन कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है। प्रदेश में विकसित हो रहे सर्वसुविधायुक्त स्मार्ट पंजीयन कार्यालय राज्य में नागरिकों को बेहतर वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्मार्ट पंजीयन कार्यालय विकसित किए जा रहे हैं। इन कार्यालयों में वातानुकूलित प्रतीक्षालय, डिजिटल टोकन प्रणाली, हेल्प डेस्क, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, निःशुल्क वाई-फाई और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रथम चरण में सीबीडी नवा रायपुर, बेबीलोन टावर, श्रीराम बिजनेस पार्क सड्डू, अभनपुर, तिल्दा, रायगढ़, बिलासपुर, दुर्ग और कुनकुरी स्थित पंजीयन कार्यालयों को आधुनिक स्वरूप में विकसित किया जा चुका है। इन कार्यालयों में नागरिकों को सुविधाजनक वातावरण में पंजीयन कार्य पूरा करने और आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने की व्यवस्था की गई है। सेवा संकल्प अभियान से सामने आ रही बदलाव की कहानियां पंजीयन विभाग का 'सेवा संकल्प अभियान' नागरिकों के अनुभवों और सुझावों को जानने का माध्यम बन रहा है। अभियान के तहत हितग्राहियों से संवाद कर पंजीयन सेवाओं में हुए सुधारों के वास्तविक लाभ की जानकारी प्राप्त की जा रही है। जगदलपुर की श्रीमती नेत्र प्रभा जोशी की कहानी दर्शाती है कि पंजीयन शुल्क में किए गए सुधार किस प्रकार परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत प्रदान कर रहे हैं। पारिवारिक हकत्याग की रजिस्ट्री में 81,648 रुपये की बचत उनके लिए केवल शुल्क में रियायत नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक जरूरतों के लिए उपलब्ध हुई एक महत्वपूर्ण राशि भी है।

धान के पैरे से धनेश्वरी ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की नई पहचान, कला को बनाया कमाई का जरिया

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी धान के पैरे से धनेश्वरी ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की नई पहचान, कला को बनाया कमाई का जरिया बिहान योजना और नाबार्ड के प्रशिक्षण से निखरा हुनर, घर बैठे पैरा आर्ट से अर्जित कर रहीं अच्छी आमदनी खुद बनीं आत्मनिर्भर, अब दूसरी महिलाओं को भी सिखा रहीं हुनर और दिखा रहीं स्वरोजगार की राह रायपुर,   खेतों में धान की कटाई के बाद बचने वाला पैरा भी किसी के जीवन में खुशहाली और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन सकता है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम अवरीद निवासी श्रीमती धनेश्वरी धीवर ने अपनी मेहनत, लगन और रचनात्मकता से इसे सच कर दिखाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर उन्होंने पैरा आर्ट की कला सीखी और आज इसी हुनर के बल पर घर बैठे अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। कभी केवल अपनी रुचि के लिए सीखी गई कला अब उनकी आजीविका का आधार बन गई है। इतना ही नहीं, धनेश्वरी अब दूसरों को भी पैरा आर्ट का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। बिहान से मिला अवसर, नाबार्ड के प्रशिक्षण ने संवारा हुनर श्रीमती धनेश्वरी धीवर की आत्मनिर्भरता की यात्रा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद शुरू हुई। नाबार्ड के सहयोग से उन्हें पैरा आर्ट का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने पैरे से आकर्षक कलाकृतियां तैयार करने की बारीकियां सीखीं। अपनी रुचि और निरंतर अभ्यास के माध्यम से उन्होंने इस कला में दक्षता हासिल की। धीरे-धीरे उनका हुनर निखरता गया और उन्होंने पैरा आर्ट को स्वरोजगार के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। आज धनेश्वरी घर पर ही पैरा आर्ट की कलाकृतियां तैयार कर रही हैं और उनसे अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। इस कार्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्हें रोजगार के लिए घर से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ अपनी कला को समय देकर आय अर्जित कर पा रही हैं। इससे परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान देने के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अपने हुनर से दूसरों के सपनों को भी दे रहीं आकार धनेश्वरी धीवर की सफलता केवल स्वयं तक सीमित नहीं है। पैरा आर्ट में दक्षता हासिल करने के बाद वे अब प्रशिक्षक की भूमिका भी निभा रही हैं। वे अन्य लोगों को पैरा आर्ट की तकनीक और कलाकृतियां तैयार करने का प्रशिक्षण दे रही हैं, ताकि वे भी इस कला को सीखकर स्वरोजगार के अवसर विकसित कर सकें। इस तरह उनका हुनर न केवल उनकी अपनी आजीविका का माध्यम बना है, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार की संभावनाएं तैयार कर रहा है। श्रीमती धनेश्वरी बताती हैं कि पैरा आर्ट ने उन्हें घर बैठे काम करने और अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर दिया है। बिहान से जुड़ाव और नाबार्ड के प्रशिक्षण ने उनके हुनर को नई दिशा दी। आज वे अपनी कला के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और दूसरों को प्रशिक्षण देकर अपने अनुभव का लाभ भी पहुंचा रही हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता को मिल रहा प्रोत्साहन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं की रुचि और स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका गतिविधियां उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। श्रीमती धनेश्वरी धीवर ने अपने जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनकी कहानी इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को पहचान देकर न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार और आत्मविश्वास की नई राह खोल सकती हैं।