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बड़ा प्रशासनिक बदलाव: अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी, सरकारी आदेश जारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एक बार फिर प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल रहा है। यहां राज्य सरकार ने कई विभागों के अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल किया है। इन्हें नए प्रभार सौंपे गए है। इसके लिए प्रशासन ने आदेश जारी किया है। जारी आदेश के मुताबिक, अंकिता गर्ग को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। जबकि वह कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग में उप सचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाती रहेंगी। वहीं, खनिज साधन विभाग में उप सचिव के पद पर कार्यरत सरोज उईके को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब वे दोनों विभागों के कार्यों का समन्वय संभालेंगी।

हाईकोर्ट में सुनवाई व्यवस्था बदली, समर वेकेशन से पहले नया रोस्टर लागू

बिलासपुर. हाईकोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले रोस्टर में बदलाव किया गया है. आगामी गुरूवार 7 मई से चार डिवीजन बेंचों और 14 सिंगल बेंचों में नियमित सुनवाई की जाएगी. आज जारी रोस्टर के अनुसार पहली डीबी में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल रिट अपील, हेबियस कार्पस, पीआईएल, अपराधिक अवमानना, विशेष मामलों की सुनवाई करेंगे. जस्टिस संजय के अग्रवाल व जस्टिस संजय कुमार जायसवाल. की दूसरी डीबी में सभी क्रिमिनल मामले जो किसी अन्य डीबी में नहीं भेजे गए हों और वर्ष 2022 तक के अल्ट्रा वायरस मैटर सुने जायेंगे . जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस एन के व्यास की तीसरी डीबी में सभी इक्विटल अपीलें सन 2016 से लेकर अब तक सुनी जानी हैं. इसी तरह चौथी डिवीजन बेंच में जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत डीबी के सभी सिविल मामले जो किसी अन्य डीबी में न गए हों सुने जायेंगे. यही डीबी मेट्रीमोनियल फर्स्ट अपील, टेक्स मामले, आर्टिकल 323 ए और 323बी के तहत सभी रिट मामले सुनेगी. इसके साथ ही चीफ जस्टिस की स्पेशल बेंच समेत 14 सिंगल बेंचों में भी सुनवाई की जाएगी.

नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए खुशखबरी, राजनांदगांव जॉब फेयर में 794 वैकेंसी

राजनांदगांव. अगर आप भी नौकरी की तलाश में हैं, तो आपके लिए यह सुनहरा मौका बन सकता है. वीडियो एडिटर, होटल मैनेजमेंट, नर्सिंग स्टाफ जैसे 794 पदों पर भर्ती होने जा रही है. इस मेजॉब फेयर में अलग-अलग प्राइवेट कंपनियां हिस्सा लेंगी, जिससे विभिन्न सेक्टर में नौकरी के अवसर उपलब्ध होंगे. जिला रोजगार कार्यालय, राजनांदगांव  के माध्यम से बुधवार यानी 6 मई से सुबह 10.30 बजे से दोपहर 3 बजे तक सेफ इंटेलीजेंट सिक्योरिटी (150 गार्ड), टैंगो सिक्योरिटी (80 गार्ड), और अन्य संस्थाओं द्वारा सुपरवाइजर और फील्ड ऑफिसर के पद पर, एसआर हॉस्पिटल दुर्ग (नर्सिंग स्टाफ – 30 पद), स्टार आदर्श होम हेल्थ केयर (केयर टेकर – 100 पद) के पद पर, स्मार्ट मीटर टेक्निशियन (40 पद), वीडियो एडिटर, होटल मैनेजमेंट (केवल महिला – 50 पद), फायरमेन, ड्राइवर और अकाउंटेंट के पद पर भर्ती की जाएगी.  आवेदन की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए ई-रोजगार पोर्टल erojgar.cg.gov.in पर ऑनलाइन पंजीयन करना अनिवार्य है. मेले के दिन अभ्यर्थियों को शैक्षणिक योग्यता के मूल प्रमाण पत्र एवं छायाप्रति, आधार कार्ड, दो पासपोर्ट साइज नवीनतम फोटो अपने साथ लाने होंगे.  प्रशासन की अपील जिला प्रशासन ने अपील की है कि योग्य एवं इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित समय पर उपस्थित होकर इस अवसर का लाभ उठाएं. अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र (मॉडल कैरियर सेंटर), राजनांदगांव से संपर्क कर सकते हैं.

अखबार में प्रकाशित पेयजल संकट पर मुख्यमंत्री साय की त्वरित प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अखबार में प्रकाशित पेयजल समस्या की खबर पर लिया त्वरित संज्ञान सुबह अखबार पढ़ते ही कलेक्टर सरगुजा को फोन कर दिए समाधान के निर्देश मैनपाट के सपनादर स्थित चेराजोबला बस्ती में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र की चेराजोबला बस्ती में पेयजल समस्या से संबंधित समाचार पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने आज सुबह समाचार पत्रों का अवलोकन करते समय “नाला और ढोढ़ी के दूषित जल पर आज भी निर्भर हैं वनवासी” शीर्षक से प्रकाशित खबर को गंभीरता से लिया और सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत को फोन कर प्रभावित बस्ती में शीघ्र पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि चेराजोबला बस्ती में पेयजल संकट की स्थिति का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार हैंडपंप खनन, वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में प्राथमिकता के साथ कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के निवास वाले क्षेत्रों में पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका वास्तविक लाभ ज़मीन पर सुनिश्चित करना है।

कानून व्यवस्था को मजबूत करने सूरजपुर पुलिस में बदलाव, 12 ASI इधर से उधर

सूरजपुर. छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के पुलिस विभाग में फेरबदल हुआ है. जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए सहायक उपनिरीक्षकों स्तर के 12 पुलिसकर्मियों का तबादला किया गया है. इनमें से 3 को चौकी प्रभारी बनाया गया है, वहीं एक को रक्षित केंद्र भेजा गया है. इस संबंध में जिले के पुलिस कप्तान ने आदेश जारी किया है. किसे कहां की मिली जिम्मेदारी?  जारी तबादला सूची में शामिल पुलिसकर्मियों में संजय यादव को चौकी प्रभारी सलका से थाना झिलमिली भेजा गया है, जबकि गुड्डू कुमार को थाना विश्रामपुर से चौकी प्रभारी सलका  की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसी तरह संतोष सिंह को चौकी प्रभारी करंजी से चौकी प्रभारी खेड़ी बनाया गया है. विशाल मिश्रा को थाना विश्रामपुर से चौकी करंजी स्थानांतरित किया गया है. कृष्ण कुमार सिंह को चौकी प्रभारी खेड़ी से रक्षित केंद्र सूरजपुर भेजा गया है, जबकि अशोक साहू  को रक्षित केंद्र से थाना विश्रामपुर पदस्थ किया गया है. विवेकानंद सिंह को रक्षित केंद्र से थाना भटगांव स्थानांतरित किया गया है. हरिशंकर तिवारी को थाना प्रतापपुर  से थाना विश्रामपुर भेजा गया है. नंदलाल को थाना भटगांव  से थाना विश्रामपुर में पदस्थ किया गया है. सिप्रियन टोप्पो को रामानुजनगर से थाना प्रेमनगर स्थानांतरित किया गया है. विनोद कुमार को चौकी रेवटी  से थाना चंदौरा भेजा गया है. वहीं मानिक चंद को चौकी लोटरी से थाना भटगांव पदस्थ किया गया है. आदेश में यह भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सभी संबंधित अधिकारी तत्काल प्रभाव से अपने नवीन पदस्थापना स्थल पर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करें. पुलिस प्रशासन के इस कदम को जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है.

“अब नहीं सुनूंगा!” सांसद की डांट पर निरीक्षक का गुस्सा फूटा, किसानों के सामने छोड़ा माइक

कांकेर. सांसद भोजराज नाग का गुस्सा एक बार फिर चर्चा में है. गुस्से का शिकार बने मत्स्य विभाग के निरीक्षक ने किसानों के सामने जलील किए जाने पर बिना कोई जवाब दिए माइक छोड़कर निकल लिए, लेकिन इससे सांसद का पारा और चढ़ गया. अब जनप्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारी के बीच का तकरार आगे चलकर क्या रुख लेता है, इस पर लोगों की निगाहें टिकी हुई है. दरअसल, कांकेर जिले के ग्राम दसपुर में आयोजित विकसित कृषि संकल्प अभियान कार्यक्रम के दौरान सांसद भोजराज नाग किसानों से बातचीत कर रहे थे, और उन्होंने सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर जानकारी ली. इस दौरान उन्होंने मत्स्य विभाग के निरीक्षक से पूछा कि क्या किसानों को विभागीय योजनाओं का लाभ मिल रहा है. निरीक्षक इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए, जिस पर सांसद नाराज़ हो गए. सांसद ने मंच से ही माइक के माध्यम से निरीक्षक को फटकार लगाते हुए कहा कि “किसानों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, और आपको इसकी जानकारी तक नहीं है, यह गंभीर लापरवाही है. किसान दर-दर भटकने को मजबूर हैं”. सांसद की फटकार के बाद मत्स्य विभाग के निरीक्षक कार्यक्रम स्थल से माइक छोड़कर बिना जवाब दिए चले गए, जिससे सांसद और अधिक नाराज़ हो गए. गौरतलब है कि इस कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के अन्य अधिकारी भी अनुपस्थित रहे, जिसे लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. विकसित कृषि संकल्प अभियान जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों की अनुपस्थिति और जानकारी का अभाव किसानों के हितों पर असर डाल सकता है. इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर विभागीय कार्यप्रणाली और किसानों को मिलने वाले लाभों को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

वन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधारने के निर्देश

रायपुर मुख्य सचिव ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि कैम्पा मद के अंतर्गत वन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं जैसे- पुल-पुलियों, मार्गों और आवश्यक भवनों के निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने विशेष रूप से नक्सल मुक्त हुए क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए, ताकि वहां शासन की पहुंच और विकास की गति बढ़ सके।             छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ प्रतिकात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) की नवमीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य रूप से वर्ष 2024-25 और 2025-26 के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा आगामी भविष्य की योजनाओं पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। आगामी कार्ययोजना (2026-27) वन विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2026-27 के लिए 713 करोड़ 73 लाख रुपये की वार्षिक कार्ययोजना को अनुमोदित कर भारत सरकार (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) को अंतिम स्वीकृति हेतु भेज दिया गया है। कैम्पा के प्रमुख कार्यक्षेत्र अधिकारियों ने बैठक में बताया कि कैम्पा मद का उपयोग निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जा रहा है। सिंचित व असिंचित वृक्षारोपण और बांस वनों की पुनर्स्थापना किया जा रहा है। वनों के घनत्व में वृद्धि हेतु सिल्वीकल्चरल का कार्य किया जा रहा है। वन्यप्राणियों के रहवास में सुधार और भू-जल संरक्षण के प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश  मुख्य सचिव  विकासाशील ने आगामी मानसून को देखते हुए वन क्षेत्रों में चल रहे जरूरी कार्यों को बारिश शुरू होने से पहले शीघ्रता से पूर्ण करने की हिदायत दी है। कैम्पा वनीकरण, मृदा और जल संरक्षण के कार्यों को मानसून शुरू होने से पहले पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।  बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव मती ऋचा शर्मा, पीसीसीएफ  व्ही.निवास राव,  अरूण पांडे, प्रमुख सचिव (कृषि) मती शहला निगार, वित्त सचिव  मुकेश बंसल सहित राजस्व, आवास एवं पर्यावरण तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मतांतरण छोड़ 50 लोगों ने अपनाया हिंदू धर्म, तेंदुआ धाम में भावुक दृश्य

जांजगीर-चांपा शिवरीनारायण के समीप स्थित श्री राम मिलेंगे आश्रम तेंदुआ धाम में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के दौरान सोमवार को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के सान्निध्य में एक विशेष कार्यक्रम में लगभग 50 लोगों ने सनातन संस्कृति के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त करते हुए पुनः घर वापसी का संकल्प लिया। इस आयोजन में अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण और अपनी जड़ों से पुनः जुड़ने का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया। सांस्कृतिक पुनर्जागरण और श्रद्धा का अद्भुत संगम कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, विश्वास और सनातन परंपराओं के प्रति समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने भावुक माहौल में अपने पूर्वजों की संस्कृति को अपनाने और उसे आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव और अन्य वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन संस्कृति केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समृद्ध और व्यापक परंपरा है, जो समाज को एकता, नैतिकता और सकारात्मक दिशा प्रदान करती है। 'शबरी की निष्ठा' रामकथा में जुटे दिग्गज ज्ञात हो कि श्री राम मिलेंगे आश्रम तेंदुआ धाम में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के सान्निध्य में 27 अप्रैल से 5 मई तक ‘शबरी की निष्ठा’ विषय पर नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन किया गया है। इसी क्रम में सोमवार को सनातन संस्कृति से भटके हुए लोगों के लिए घर वापसी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डबरा मठ कोटमी सोनार के महंत सर्वेश्वर दास जी महाराज, समाजसेवी अंजू गबेल, आश्रम के संचालक डॉ. अशोक हरिवंश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। क्षेत्र में नई चेतना और सामाजिक समरसता का संचार शिवरीनारायण क्षेत्र के ग्राम गोधना, कुरियारी, तुस्मा, कटौद सहित आसपास गांव के लोग बड़ी संख्या में मतांतरित हो चुके हैं। क्षेत्र के भोले-भाले लोगों को लालच देकर ईसाई बनाया गया है। रामकथा के दौरान हुए इस घर वापसी के आयोजन ने क्षेत्र में नई चेतना का संचार करते हुए सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकजुटता का संदेश दिया, जो उपस्थित जनसमूह के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

बस्तर में इनोवेशन को मिलेगा बढ़ावा, महाकुंभ 1.0 से नई पहल – मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने जगदलपुर में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही मंच, मार्गदर्शन और अवसर की है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म मिल रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर के समग्र विकास के लिए तैयार रोडमैप का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें रोजगार, शिक्षा, स्टार्टअप और अधोसंरचना का विशेष ध्यान रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि “नियद नेल्ला नार योजना” का विस्तार कर इसे “नियद नेल्ला नार 2.0” के रूप में 10 जिलों में लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को इनोवेशन हब बनाने के उद्देश्य से “नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30” लागू की गई है। इस नीति के तहत युवाओं को आइडिया से लेकर व्यवसाय विस्तार तक हर स्तर पर सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता जैसी सुविधाओं से स्टार्टअप को बढ़ावा मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विकसित छत्तीसगढ़ का मार्ग विकसित बस्तर से होकर जाता है। उन्होंने कहा कि बस्तर में आदिवासी कला, लघु वनोपज, जैविक कृषि, पर्यटन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें तकनीक, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स से जोड़कर नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर में पर्यटन के बढ़ने से होमस्टे, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प और वनोपज की मांग बढ़ेगी, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विश्वास जताया कि बस्तर का युवा उद्यमिता के माध्यम से विकसित बस्तर, विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। कार्यक्रम में नवाचार करने वाले बेस्ट आइडिया और बेस्ट स्टार्टअप के विजयी प्रतिभागियों को  प्रोत्साहन राशि, प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि उद्यमिता और स्वरोजगार को अपनाकर युवा आगे बढ़ें, ताकि अपने घर-परिवार को खुशहाल बना सकें। उच्च शिक्षा मंत्री  वर्मा ने कहा कि इस इनोवेशन महाकुंभ के माध्यम से युवाओं को एक मंच मिला है, जिससे वे अपने नवाचार को आगे बढ़ाने के साथ ही आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि स्वयं का व्यवसाय या स्वरोजगार स्थापित कर नौकरी देने वाले बनें और अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनें। इस अवसर पर सांसद बस्तर  महेश कश्यप एवं विधायक जगदलपुर  किरण देव ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नवाचार के जरिये उद्यमिता एवं स्वरोजगार अपनाकर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सहभागिता निभाने के लिए युवाओं से आह्वान किया। कार्यक्रम के आरंभ में शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति प्रोफेसर मनोज वास्तव ने इनोवेशन महाकुंभ आयोजन के उद्देश्य और विश्वविद्यालय की स्थापना सहित संस्थान के विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों एवं नवोन्मेषी प्रयासों के बारे में विस्तारपूर्वक अवगत कराया। इस अवसर पर विधायक चित्रकोट  विनायक गोयल, छत्तीसगढ़ ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष  निवास मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष  रूपसिंह मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष मती वेदवती कश्यप, महापौर  संजय पांडेय सहित अन्य  जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे बीजापुर से राजमिस्त्री बने रमेश पासपुल, आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर  जनपद पंचायत बीजापुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत संतोषपुर, जो कभी लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहा, आज बदलाव और विकास की नई पहचान बनता जा रहा है। ‘‘नियद नेल्लनार योजना‘‘ के शुरू होने के बाद गांव में बुनियादी सुविधाओं और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस बदलाव की कहानी के केंद्र हैं संतोषपुर निवासी  रमेश पासपुल। कभी स्थायी रोजगार के अभाव में आर्थिक तंगी से जूझ रहे रमेश का जीवन आज पूरी तरह बदल चुका है। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच आय का कोई निश्चित साधन न होने से उनका भविष्य अनिश्चित नजर आता था। परिस्थितियां तब बदलीं जब  ‘‘नियद नेल्लनार योजना‘‘  के तहत उन्हें राजमिस्त्री (मेसन) का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की बारीकियों, तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल में दक्षता हासिल की। यह प्रशिक्षण उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। प्रशिक्षण के बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में रमेश को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की स्वीकृति मिली। पहली किश्त प्राप्त होते ही उन्होंने अपने घर का निर्माण स्वयं शुरू किया और निर्धारित समय-सीमा में इसे पूरा कर लिया। उनके कार्य की गुणवत्ता देखकर गांव के अन्य हितग्राहियों ने भी अपने-अपने आवास निर्माण के लिए उन्हें बुलाने लगे, जिससे उनके लिए नियमित आय का साधन तैयार हो गया। आज रमेश पासपुल एक कुशल राजमिस्त्री के रूप में गांव में पहचान बना चुके हैं। वे न केवल आत्मनिर्भर बने, बल्कि अन्य ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। उनकी बढ़ती मांग ने उनके जीवन में स्थिरता और खुशहाली ला दी है। रमेश की यह प्रेरक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा में मिला प्रशिक्षण और अवसर किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र से निकलकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने अपने परिश्रम और शासन की योजनाओं के सहयोग से इसे संभव कर दिखाया। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन की सशक्त मिसाल है।