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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ शक के आधार पर नहीं दी जा सकती सजा, सभी आरोपी बरी

बिलासपुर. जगदलपुर के ढाई दशक पुराने बहुचर्चित फर्जी वेतन आहरण और भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में विफल रहा। केवल संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। मामला जगदलपुर स्थित स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 1979 से 1985 के बीच कथित रूप से फर्जी वेतन बिल बनाकर सरकारी राशि निकालने से जुड़ा था, जिसमें करीब 42 हजार रुपये के गबन का आरोप था। अभियोजन के अनुसार, तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सेन और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर आरोप था कि उन्होंने मिलकर तीन सफाई कर्मचारी जयसिंह, लालमणि और मयाराम के नाम पर फर्जी वेतन बिल तैयार किए। कहा गया कि ये कर्मचारी वास्तविक रूप से काम नहीं कर रहे थे, फिर भी उनके नाम पर वेतन निकालकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। आरोप यह भी था कि वेतन बिलों में फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगाए गए। जगदलपुर की विशेष अदालत ने 28 जनवरी 2002 को इस मामले में आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) और 120-बी (साजिश) सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 2-2 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। मामले में गवाहों के बयान से यह सामने आया कि सभी कार्य तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. आरके सेन के निर्देश पर किए गए थे। कोर्ट ने माना कि अन्य आरोपी केवल अधीनस्थ कर्मचारी थे, जो अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन कर रहे थे। उनके खिलाफ कोई स्वतंत्र भूमिका या आपराधिक मंशा साबित नहीं हुई। उन्होंने केवल अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया, जिसे अपराध नहीं माना जा सकता। मामले में जिन कर्मचारियों के नाम पर वेतन निकाले जाने का आरोप था, उन्होंने भी स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि वे कब तक काम पर नहीं थे या उन्हें वेतन नहीं मिला। कई गवाहों ने कहा कि उन्हें काम के दौरान वेतन मिला और उन्होंने हस्ताक्षर कर भुगतान लिया। इससे अभियोजन का दावा कमजोर हो गया। हाईकोर्ट ने पूरे मामले की गहन समीक्षा के बाद पाया कि अभियोजन के पास आरोप साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। किसी भी आरोपी के खिलाफ यह साबित नहीं हुआ कि उसने फर्जी दस्तावेज तैयार किए या उनका उपयोग किया। हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान फर्जी होने का कोई विशेषज्ञ प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। कई दस्तावेज केवल कार्बन कॉपी थे, मूल रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप सिद्ध नहीं होते। हाईकोर्ट ने कहा कि संदेह कितना भी मजबूत क्यों न हो, वह कानूनी प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही जो आरोपी जमानत पर हैं, उनके जमानती बांड 6 महीने तक प्रभावी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

रोमांच के सहारे बदलेगी बस्तर की तस्वीर, बाइकर्स मीट से पर्यटन को नई उड़ान

जगदलपुर. बस्तर अब अपनी पहचान बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है, जहां पहली बार बस्तर राइडर्स मीट 2026 का आयोजन कर इसे एडवेंचर टूरिज्म के नए हब के रूप में पेश किया जाएगा. इस आयोजन में देश और विदेश के प्रोफेशनल राइडर्स हिस्सा लेंगे, और डर्ट बाइक रेस जैसे रोमांचक खेलों का प्रदर्शन करेंगे. करीब 500 से ज्यादा बाइकर्स ऊबड़ खाबड़ ट्रैक पर अपनी स्किल दिखाएंगे, वहीं 5 अप्रैल को चित्रकोट तक विशाल बाइक रैली निकाली जाएगी. आयोजन के दौरान स्थानीय संस्कृति खानपान और कला को भी मंच मिलेगा, जिससे बस्तर की सकारात्मक छवि सामने आएगी. जिला प्रशासन के सहयोग से यह इवेंट पर्यटन और स्थानीय प्रतिभाओं को नई पहचान देने का प्रयास है, जो बस्तर को राष्ट्रीय स्तर पर एक नए रूप में स्थापित कर सकता है. ज्ञात हो कि गत शुक्रवार को छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बस्तर के लिए बाइकर्स का ग्रुप राइडिंग पर निकल। बाइकर्स ग्रुप में शामिल युवाओं ने बताया कि छत्तीसगढ़ में तो कई खूबसूरत जगह है पर बस्तर की बात ही अलग है। यहां कि हरियाली देखते ही बनती है। साल के ऊंचे-ऊंचे पेड़ की बात कुछ और है। रास्ते भर दोनों ओर हरे भरे पेड़ जो सफर को और सुकून देते हैं। रास्ते में पड़ने वाली केशकाल की घुमावदार घाटी में बाइक राइड करना अद्भूत अनुभव देता है। बस्तर में कई ऐसी जगह हैं, जिन्हें लोग नहीं जानते। बस्तर कहते ही हमें चित्रकोट और तिरथगढ़ वॉटरफाल का दृश्य जहन में आता है। वहां पर और भी वॉटरफाल हैं। उनमें से एक नया नाम नबीं वॉटरफाल का आ रहा है। वही बस्तर की संस्कृति, वाद्य यंत्र और व्यंजनों को बढ़ावा देना इस सफर का एक उद्देश्य है। यहां पर टेंट और होम स्टे जैसी सुविधाएं भी अब उपलब्ध हैं। देश और राज्य के लोगों को बस्तर जाने में थोड़ी झिझक होती है पर अब हालात अलग हैं। बस्तर के लोगों को बेहतर रोजगार पर्यटन के माध्यम से मिले यही बाइकर्स का एक लक्ष्य हैं। ग्रुप में 25 बाइकर्स होंगे शामिल राजधानी में कई बाइकर्स ग्रुप हैं। इनमें से एक ग्रुप 36 राइडिंग क्लब के सदस्य बस्तर में नए पर्यटन स्थल को निहारने जाएंगे। इस ग्रुप के 25 सदस्य अपनी=अपनी बाइक लेकर सफर पर निकलेगें। इस ग्रुप में लड़कों के साथ ही लड़कियां भी शामिल हैं। ग्रुप में पेशे से कोई डॉक्टर तो इंजीनियर तो फायनेंस एक्सपर्ट है।

केआईटीजी 2026: मिडफील्ड की कमान से लेकर गोलकीपिंग के शानदार प्रदर्शन तक

केआईटीजी 2026: मिडफील्ड की कमान से लेकर गोलकीपिंग के कमाल तक  कप्तान किरण ने छत्तीसगढ़ को फुटबॉल फाइनल में पहुंचाया मेजबान महिलाएँ हॉकी में कांस्य के लिए भिड़ेंगीं रायपुर  कप्तान किरण पिस्दा की शानदार दोहरी भूमिका से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ की महिला फुटबॉल टीम ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले संस्करण के फाइनल में जगह बना ली है, जबकि राज्य की महिला हॉकी टीम ने भी कांस्य पदक मुकाबले में पहुंचकर अपनी उम्मीदें बरकरार रखी हैं। भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी किरण ने मंगलवार को स्वामी विवेकानंद कोटा स्टेडियम में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ खेले गए सेमीफाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए मैच की स्टार रहीं। उनके हरफनमौला खेल की बदौलत छत्तीसगढ़ ने निर्धारित समय के बाद 2-2 की बराबरी रहने पर पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से रोमांचक जीत दर्ज की। टूर्नामेंट में अब तक करीब 20 गोल कर चुकीं किरण ने एक बार फिर आक्रामक भूमिका निभाते हुए 18वें मिनट में गोल कर मेजबान टीम को 2-0 की बढ़त दिलाई।               हालांकि अरुणाचल प्रदेश ने 41वें और 86वें मिनट में गोल कर स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया और मैच को शूटआउट में पहुंचा दिया। इसके बाद किरण ने साहसिक फैसला लेते हुए नियमित गोलकीपर योगिता की जगह खुद दस्ताने पहनकर गोलपोस्ट संभालने का निर्णय लिया। उनका यह निर्णय कप्तानी की मिसाल बन गया, जब उन्होंने दो शानदार बचाव किए और खुद एक पेनल्टी भी सफलतापूर्वक गोल में बदली, जिससे टीम को फाइनल का टिकट मिला। अंतिम पेनल्टी के गोल के साथ ही मेजबान टीम ने मैदान पर जश्न मनाना शुरू कर दिया।             अपने प्रदर्शन पर किरण ने साई मीडिया से कहा, “मैं अपनी टीम को हर हाल में फाइनल में पहुंचाना चाहती थी। मुझे गोलकीपर के रूप में अच्छा करने का भरोसा था। मैंने पहले भी अपनी राज्य टीम के लिए यह भूमिका निभाई है। मेरी मेहनत सफल रही और हम फाइनल में हैं। यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है।” अब फाइनल में छत्तीसगढ़ का सामना झारखंड और गुजरात के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा। उल्लेखनीय है कि ग्रुप चरण में मेजबान टीम गुजरात को 2-1 से हरा चुकी है, जिसमें किरण ने भी एक गोल किया था।            वहीं, इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में चल रही प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की महिला हॉकी टीम 1 अप्रैल को पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के खिलाफ कांस्य पदक के मुकाबले में उतरेगी। सेमीफाइनल में मेजबान टीम को ओडिशा से 1-5 से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब कप्तान कुजूर अश्विन के मार्गदर्शन में टीम पदक जीतने के लिए तैयार है। हॉकी का फाइनल भी 1 अप्रैल को झारखंड और ओडिशा के बीच खेला जाएगा।

प्रदेश की लाइफलाइन हुई सशक्त: CM साय ने 370 नई एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडी

प्रदेश की लाइफलाइन हुई सशक्त: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 370 नई एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडी शहर में 15 और गांव में 30 मिनट में पहुंचेगी 108 सेवा: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल 300 BLS, 70 ALS के साथ पहली बार 5 नियोनेटल ALS — नवजात शिशुओं के लिए ‘चलते-फिरते ICU’ की शुरुआत रायपुर  प्रदेश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक पहल की गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 300 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एवं 70 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंसों को हरी झंडी दिखाकर प्रदेश के सभी जिलों के लिए रवाना किया। इसके साथ ही 108 एम्बुलेंस की समस्त सेवाएं प्रदेशभर में तत्काल प्रभाव से प्रारंभ हो गई हैं,  जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिकों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सहायता सुनिश्चित होगी। इस पहल के अंतर्गत पहली बार प्रदेश में 5 नियोनेटल ALS एम्बुलेंसों की शुरुआत की गई है, जो नवजात शिशुओं की आपातकालीन देखभाल के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह सेवा राज्य की नवजात सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा गंभीर स्थिति में नवजात शिशुओं को सुरक्षित रूप से उच्च स्तरीय उपचार केंद्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं निरंतर सुदृढ़ हो रही हैं और पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता का भरोसा सरकारी अस्पतालों में लगातार बढ़ा है, जहां उन्हें समय पर उपचार मिल रहा है। उप-स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण एवं उन्नयन के कारण अब लोगों को छोटे-छोटे इलाज के लिए दूर शहरों की ओर नहीं जाना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य है कि शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट के भीतर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाए, ताकि हर जरूरतमंद मरीज तक समय पर स्वास्थ्य सहायता पहुंच सके। उन्होंने कहा कि 108 एम्बुलेंस सेवा का यह विस्तार आम जनता के विश्वास को और सशक्त करेगा कि संकट की घड़ी में सरकार पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पहली बार शुरू की गई 5 नियोनेटल ALS एम्बुलेंस सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नवजात शिशुओं के जीवन की सुरक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से आज का दिन राज्य के लिए ऐतिहासिक है और इससे लाखों लोगों को त्वरित चिकित्सा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहां नियोनेटल एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार प्रकट करते हुए ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है और आने वाले समय में इसमें और तेजी देखने को मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि एम्बुलेंस सेवा में किसी भी प्रकार की देरी या कमी की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिसके लिए विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया गया है। प्रदेश में एम्बुलेंस सेवा की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट के भीतर एम्बुलेंस सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि प्रत्येक जरूरतमंद तक समय पर सहायता पहुंच सके। नियोनेटल एम्बुलेंस सेवा को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। इनमें प्रशिक्षित नवजात इमरजेंसी तकनीशियन, 24×7 ईएमटी एवं पायलट की उपलब्धता के साथ विशेषज्ञ चिकित्सक का ऑनलाइन मार्गदर्शन सुनिश्चित किया गया है। इन एम्बुलेंसों में इन्क्यूबेटर, वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर, सिरिंज पंप, नेब्युलाइज़र, सक्शन मशीन, पर्याप्त ऑक्सीजन सपोर्ट एवं 41 प्रकार की आपातकालीन दवाओं सहित सभी आवश्यक जीवनरक्षक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो इन्हें “चलते-फिरते नवजात आईसीयू” के रूप में स्थापित करती हैं। इसके अतिरिक्त, BLS एवं ALS एम्बुलेंसों में मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक एवं उन्नत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए बीपी मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर, ईसीजी मॉनिटर, ग्लूकोमीटर जैसी जांच सुविधाओं के साथ ऑक्सीजन सपोर्ट, नेब्युलाइजेशन एवं अन्य आपातकालीन उपचार व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। गंभीर मरीजों के सुरक्षित स्थानांतरण हेतु पोर्टेबल वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर मॉनिटर, सिरिंज पंप, लैरिंजोस्कोप सहित अन्य उन्नत उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। यह समग्र पहल प्रदेश के शहरी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभ, त्वरित एवं प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए नागरिकों के लिए एक मजबूत जीवनरक्षक तंत्र के रूप में स्थापित होगी। इस अवसर पर विधायक मोती लाल साहू, विधायक इंद्र कुमार साहू, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं संजीव झा, प्रबंध संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन रणबीर शर्मा, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा रितेश अग्रवाल सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में बड़ी सफलता: 8-8 लाख के इनामी 2 नक्सली AK-47 के साथ आत्मसमर्पण

कांकेर. छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में दो नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। सरेंड करने वाले नक्सलियों की पहचान हिड़मे और शंकर के रूप में की गई है। दोनों पर 8-8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इसकी पुष्टि एसपी निखिल राखेचा ने की है। जानकारी के अनुसार, दोनों नक्सली एके-47 जैसे घातक हथियार के साथ पुलिस के पास पहुंचे और मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई। पुलिस अधिकारियों ने आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें शासन की पुनर्वास नीति का लाभ देने की बात कही है। सरकार द्वारा निर्धारित नक्सलवाद समाप्ति की डेडलाइन के दिन ही यह आत्मसमर्पण हुआ है, जिसे सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। बताया जा रहा कि अब भी कांकेर के जंगलों में करीब 15 नक्सलियों की मौजूदगी बताई जा रही है, जिनके खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों से आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की अपील लगातार की जा रही है। आने वाले समय में और भी नक्सलियों के सरेंडर की उम्मीद है। ज्ञात हो कि, सुकमा और बीजापुर के रहने वाले 9 दुर्दांत नक्सलियों ने रविवार को आंध्र प्रदेश में सरेंडर कर दिया। इनमें 25 लाख का इनामी और 36 साल से आतंक का पर्याय बना स्टेट कमेटी मेंबर सुरेश भी शामिल है। छत्तीसगढ़ में सक्रिय घेराबंदी के कारण नक्सली अब पड़ोसी राज्यों में जाकर हथियार डाल रहे हैं। सरेंडर करने वाले 9 में से 8 नक्सली छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिले के हैं। नक्सल विचारधारा के थिंक-टैंक माने जाने वाले चेल्लुरी नारायण राव उर्फ सुरेश सचिव, एओबीएसजेडसी का सरेंडर संगठन के लिए किसी बड़ी हार से कम नहीं है। कुल 48 लाख रुपए के इनामी नक्सलियों ने हथियार छोड़े हैं। इसमें सुरेश 25 लाख के अलावा कार्तम लच्छू 5 लाख जैसे खूंखार नाम शामिल हैं। समर्पण के साथ नक्सलियों ने 1 इंसास राइफल, 5 .303 राइफल और 6 सिंगल शॉर्ट राइफल पुलिस को सौंपी। आत्मसमर्पण करने वाले कैडर्स ने पूछताछ में संगठन के भीतर मची भगदड़ और टूट के तीन मुख्य कारण बताए हैं। बड़े नेताओं की लगातार एनकाउंटर में मौत और गिरफ्तारियों से संगठन दिशाहीन हो गया है। बस्तर के अंदरूनी इलाकों में सडक़ और कैंप पहुंचने से ग्रामीणों का समर्थन अब नक्सलियों को नहीं मिल रहा। विधायक की हत्या का मास्टरमाइंड था सुरेश  सुरेश का इतिहास बेहद रक्तरंजित रहा है। वह 2018 में आंध्र प्रदेश के विधायक किदारी सर्वेश्वर राव और पूर्व विधायक सिवेरी सोमेश्वर राव की जघन्य हत्या का मुख्य आरोपी था। दर्जनों एंबुश और पुलिस मुठभेड़ों में शामिल रहे। सुरेश का सरेंडर यह बताता है कि अब संगठन के पास न तो सुरक्षित ठिकाने बचे हैं और न ही लडऩे का जज्बा।

कुश्ती शुरू करने के कुछ समय बाद ही पूनम का कंधा उतर गया था और फिर उन्हें एक साल तक मैट से दूर रहना पड़ा

असाधारण जज़्बे के साथ झारखंड की पहलवान पूनम ने करियर खत्म कर देने वाली चोट से पार पाते हुए 9 साल के खिताबी सूखे को किया समाप्त कुश्ती शुरू करने के कुछ समय बाद ही पूनम का कंधा उतर गया था और फिर उन्हें एक साल तक मैट से दूर रहना पड़ा   गेम्स शुरू होने से ठीक पहले उनके कंधे में फिर से परेशानी होने लगी थी, लेकिन इस बार उन्होंने दर्द को मात देकर गोल्ड मेडल जीता रायपुर  कुश्ती जैसे खेल में जहां फिटनेस और ताकत सबसे बड़ी जरूरत होती है, वहां चोटिल कंधे के साथ मैट पर उतरना अपने आप में बड़ा जोखिम है। लेकिन झारखंड की 19 वर्षीय पहलवान पूनम ऑरन ने इस जोखिम को चुनौती में बदला और दर्द के बावजूद मुकाबले दर मुकाबले जीत हासिल करते हुए पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।              फाइनल में भी पूनम बाएं कंधे पर पट्टी बांधकर उतरीं। हर मूव के साथ दर्द साफ नजर आ रहा था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अंत तक लड़ते हुए मुकाबला अपने पक्ष में किया। पूनम ने महिलाओं की 50 किग्रा वर्ग के फाइनल में तेलंगाना की के. गीता को हराकर स्वर्ण पदक जीता।             अपने करियर का पहला स्वर्ण पदक जीतने के बाद पूनम ने साई मीडिया से कहा, “हार कैसे मान लेती सर? जब नौ साल से हार नहीं मानी, तो अब कैसे मान लेती। मेरी यह चोट बहुत पुरानी है। छह साल पहले मेरा कंधा उतर गया था। बीच में ठीक हुआ, लेकिन फिर ट्रेनिंग के दौरान दोबारा चोट लग गई। इसके बावजूद मैंने वापसी की और अब मैंने यहां पर गोल्ड जीता है।" उन्होंने कहा,''अपने करियर की शुरुआत से ही मैं चोटों से जूझ रही हूँ, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। गोल्ड मेडल जीतना किसी सपने के सच होने जैसा लगता है। नौ साल तक गोल्ड न जीत पाने के दर्द के मुकाबले यह चोट कुछ भी नहीं है।'               झारखंड के चतरा जिले के सुइयाबार गांव की रहने वाली पूनम के लिए यह जीत किसी सपने के सच होने जैसी है। साल 2017 में जब उन्होंने कुश्ती की शुरुआत की थी, उसी दौरान एक गंभीर चोट ने उन्हें करीब एक साल तक मैट से दूर कर दिया। वापसी के बाद उन्होंने 2018 और 2019 में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) में कांस्य पदक जीते, लेकिन इसके बाद पदक जीतने का इंतजार लंबा चला।            पूनम बताती हैं कि इस प्रतियोगिता में उतरने से पहले भी वह पूरी तरह फिट नहीं थीं। उन्होंने कहा, '' घर वाले मना कर रहे थे, लेकिन कोच और सपोर्ट स्टाफ को मुझ पर भरोसा था। उनके सपोर्ट से ही मैं खेल पाई और गोल्ड जीत सकी। छह साल बाद कोई पदक जीतना मेरे लिए बहुत खास है और इसके पीछे मेरी दृढ़ इच्छाशक्ति है।'' वह पिछले करीब एक दशक से रांची के हॉस्टल में रहकर अभ्यास कर रहीं हैं।             ऑरन समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पूनम के लिए यह स्वर्ण पदक खास मायने रखता है। वह कहती हैं, '' इसके मुझे काफी लंबा इंतजार करना पड़ा है। करियर की शुरुआत से ही मैं चोट से जूझ रही हूं, लेकिन कभी हार नहीं मानी। इसके बाद कोई स्वर्ण पदक जीतना, मेरे लिए सपने के सच होने जैसा है।''         कुश्ती के साथ-साथ पढ़ाई में भी संतुलन बनाए रखते हुए, पूनम अभी रांची यूनिवर्सिटी से बीए (पॉलिटिकल साइंस) की पढ़ाई भी कर रही है। अब वह जूनियर नेशनल्स के लिए झारखंड टीम में जगह बनाने पर ध्यान दे रही हैं।        पूनम ने कहा,” मेरा अगला लक्ष्य जूनियर नेशनल ट्रायल्स के लिए क्वालीफाई करना है और मैं इस स्वर्णिम सफलता को आगे भी जारी रखना चाहती हूं।”

रायपुर बजट 2026: वर्किंग वूमन के लिए हॉस्टल, इलेक्ट्रॉनिक मार्केट और अन्य अहम घोषणाएं

रायपुर  शहर की सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। मेयर मीनल चौबे ने  रायपुर नगर निगम का करीब 2130 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इस दौरान शहर के विकास को लेकर मेयर ने कई बड़ी घोषणा की। मेयर ने पंडरी और नरैया तालाब में वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाने की घोषणा की है। इसके साथ ही शहर के 268 स्थानों पर सीसीटीवी लगवाने की घोषणा की गई है। बजट पेश होने से पहले कांग्रेस के पार्षदों ने जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस पार्षदों ने मेयर मीनल चौबे का विरोध किया और हाथों में तख्तियां लेकर खड़े थे। इन तख्तियों अलग-अलग स्लोगन लिखे थे। कई पार्षद हाथ में पोस्टर लेकर 'वादा तेरा वादा' गाना गाते हुए पहुंचे। कौन सी बड़ी घोषणाएं हुईं     नालंदा परिसर की तर्ज पर लाइब्रेरी और यूथ हॉस्टल बनाया जाएगा।     शंकर नगर और डूमरतराई में इलेक्ट्रॉनिक मार्केट बनेगा।     निगम 100 करोड़ का म्यूनिसिपल बांड जारी करेगा।     नगर निगम मुख्यालय और पंडरी में ऑटोमैटिक पार्किंग बनेगी।     5 करोड़ रुपए की लगत से महिला शांति गृह की होगी स्थापना।     शहर में खारुन महोत्सव का होगा शुभारंभ।     बूढ़ा तालाब धरना स्थल पर महिलाओं के लिए बनाया जाएगा वेंडिंग जोन।     शहीद स्मारक परिसर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए लगाई जाएगी लिफ्ट।     साफ सफाई के लिए 1 करोड़ 50 लाख की लगत से रोबोटिक सक्शन मशीन क्रय किया जाएगा।     राजधानी के सभी जोन में दो उद्यानों का होगा सौंदर्यीकरण।     हर वार्ड में होगी बर्तन बैंक की स्थापना। पिछले साल कितने का था बजट पिछले वित्तीय साल नगर निगम का बजट 1529.53 करोड़ रुपये था। इसमें 1528.73 करोड़ रुपए खर्च और करीब 79 लाख रुपए अधिशेष का अनुमान रखा गया था। किस मद में कितना खर्च होगा     जल कार्य विभाग के लिए लगभग 104.88 करोड़ रुपये।     स्वास्थ्य, सफाई और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 76.97 करोड़ रुपये।     बिजली और यांत्रिकी विभाग के लिए करीब 89.99 करोड़ रुपये। सभापति के साथ हुई बहस मेयर के बजट पेश करने के दौरान कांग्रेस के पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। जिसके बाद सभापति और एमआईसी सदस्य मनोज वर्मा के बीच तीखी बहस भी हुई। वहीं, विपक्ष के बार-बार टोकने से मेयर भी नाराज हुईं। पवन तिवारी

जगदलपुर निगम का 2.40 अरब रुपये का बजट: सड़कों, नालियों, पानी और सफाई पर होगा खर्च

जगदलपुर जगदलपुर नगर निगम के बजट सत्र में इस बार बजट पेश होने से पहले ही सदन में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। वर्ष 2026-27 के लिए 2 अरब 40 करोड़ 92 लाख 84 हजार रुपए का बजट अंतत: नारेबाजी और विरोध के बीच पेश किया गया, लेकिन इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव बना रहा। इस बजट में जहां शहरवासियों को पेयजल संकट से दूर करने के लिए 100 करोड़ का बजट रखा गया है। वहीं लोगों को शहर में ज्यादा झटके न लगें आवागमन सामान्य हो इसके लिए 35 करोड़ रुपए सड$क पर खर्च होंगे। वही इस बजट की खास बात यह रही कि आम जन के उपर कोई नए टैक्स का भार नहीं लगाया गया है। विपक्ष के नारों के बीच महापौर ने पेश किया बजट स्थगन के कुछ देर बाद जब सत्तापक्ष के सदस्य और महापौर संजय पांडे वापस सदन में लौटे, तब भी विपक्ष गर्भगृह में मौजूद रहा और नारेबाजी के बीच ही महापौर ने बजट पेश किया। बाद में अध्यक्ष ने शहर विकास को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए सभी पार्षदों से बजट का समर्थन करने को कहा। इस पर विपक्ष ने नैतिक समर्थन देते हुए अपनी सीट पर वापसी की। जलसंकट से राहत, पेयजल आपूर्ति होगी मजबूत नगर निगम ने बजट में सबसे अधिक प्राथमिकता जलप्रदाय व्यवस्था को दी है। शहर के कई इलाकों में लंबे समय से बनी जल समस्या को देखते हुए नई योजनाएं तैयार की गई हैं। पाइपलाइन विस्तार, जल स्रोतों के सुदृढ़ीकरण और नियमित सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि नागरिकों को सालभर पानी मिल सके। अधोसंरचना विकास, सड़कों और नालियों पर जोर शहर के विकास के लिए सड़क, नाली और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण और मरम्मत कार्यों को बजट में शामिल किया गया है। इससे न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि जलभराव और गंदगी की समस्या में भी कमी आएगी। नए विकास कार्यों से शहर की तस्वीर बदलने की तैयारी है। लाइटिंग और पार्किंग, सुविधा के साथ सुरक्षा भी नगर निगम ने शहर में स्ट्रीट लाइटिंग को और बेहतर करने का लक्ष्य रखा है। प्रमुख सड़कों और कॉलोनियों में नई लाइटें लगाई जाएंगी। साथ ही पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए भी प्लान तैयार किया गया है, जिससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और सुरक्षा में सुधार होगा। स्वच्छता पर फोकस, साफ-सुथरा शहर बनाने की पहल स्वच्छता को लेकर निगम ने अतिरिक्त संसाधन और बजट प्रावधान किए हैं। नियमित कचरा उठाव, सफाई व्यवस्था में सुधार और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे शहर को साफ और व्यवस्थित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। कर्मचारियों को राहत, समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित नगर निगम ने अपने कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के समय पर भुगतान को प्राथमिकता दी है। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और वे बेहतर ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे। नागरिक सुविधाओं का विस्तार, हर वार्ड तक पहुंचेगी सुविधा बजट में शहर के सभी वार्डों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पेयजल, सड़क, लाइटिंग और स्वच्छता जैसी सेवाओं का दायरा बढ़ाकर नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। निगम का दावा, विकास को मिलेगी नई रफ्तार नगर निगम के मेयर संजय पांडेय का दावा है कि इस बजट के जरिए शहर की प्रमुख समस्याओं का समाधान होगा और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। आने वाले समय में जगदलपुर को एक अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक शहर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। भाजपा ने बताया विकास का रोडमैप महापौर ने कहा कि युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखते हुए एक नई 'चौपाटी' (फूड स्ट्रीट) स्थापित करने का निर्णय लिया गया है. पहली बार, नगर निगम के अंतर्गत एक विशेष 'फूड जोन' बनाया जाएगा. इस पहल के लिए 4 करोड़ का बजट भी आवंटित किया गया है. यह परियोजना निश्चित रूप से पूरी की जाएगी. पिछले बजट में बताए गए लगभग 80 प्रतिशत काम पहले ही पूरे हो चुके हैं, और इसके लिए जरूरी धनराशि सरकार से प्राप्त कर ली गई है।  विपक्ष का आरोप  विपक्ष के नेता राजेश चौधरी ने आरोप लगाया कि BJP ने अपने बहुमत की ताकत पर भरोसा करते हुए बहस को दबा दिया और सीधे बजट पेश कर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि इस बजट में कोई नई योजना शामिल नहीं है. इसके बजाय, उन्होंने इसे पूरी तरह से 'कॉपी-पेस्ट' दस्तावेज बताया, जिसमें केवल आंकड़ों में बदलाव किया गया है. कांग्रेस पार्टी ने आगे कहा कि जब बजट पर विस्तार से चर्चा करने का मौका आया, तो सत्ताधारी दल के सदस्य सदन से बाहर चले गए. इस कदम को उन्होंने जवाबदेही से बचने की कोशिश का संकेत बताया. उनका दावा है कि पिछले बजट में की गई घोषणाओं का जमीनी स्तर पर कोई ठोस असर देखने को नहीं मिला है. आज भी शहर के निवासी सड़क, पानी की आपूर्ति और साफ-सफाई जैसे बुनियादी मुद्दों से जूझ रहे हैं। 

छत्तीसगढ़ में ओलावृष्टि और अंधड़ का अलर्ट: 2-3 डिग्री तापमान गिरने की संभावना, बिजली गिरने का भी खतरा

रायपुर  छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, आज प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना है। वहीं कुछ इलाकों में ओले गिरने और वज्रपात की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने बताया कि 4 अप्रैल तक ऐसा ही मौसम बना रहने की संभावना है। बारिश और बादलों के छाए रहने से दिन के तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी। प्रदेश में तापमान का हाल प्रदेश में सोमवार को रायपुर में अधिकतम तापमान 40.5°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 2.9°C अधिक है। न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 19.6°C रिकॉर्ड किया गया। वहीं बस्तर और बिलासपुर इलाकों में बारिश होने से लोगों को गर्मी से राहत मिली। कुछ इलाकों में ओले गिर सकते हैं, जिससे तापमान में 2-3 डिग्री की गिरावट आएगी। पश्चिम बंगाल से ओडिशा तक बने ट्रफ के असर से प्रदेश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में 4 अप्रैल तक आंधी-बारिश की स्थिति बनी रहेगी। रायपुर सहित कई जिलों में बादल छाए हुए हैं और हवाएं चल रही हैं। इससे पहले बिलासपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश हुई, वहीं दो जगह पेड़ गिरे और बिजली के तार टूटने से सप्लाई प्रभावित रही। प्रदेश में फिलहाल तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है। रायपुर में अधिकतम तापमान 40.5°C और अंबिकापुर में न्यूनतम 19.6°C रिकॉर्ड किया गया। रायपुर में बादल छाए हुए हैं। कुछ स्थानों पर बिजली चमकने के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तर ईरान और कैस्पियन सागर के ऊपर सक्रिय है, साथ ही एक द्रोणिका निम्न से ऊपरी क्षोभमंडल तक फैली हुई है। पंजाब और हरियाणा के आसपास एक प्रेरित चक्रीय परिसंचरण भी बना हुआ है। इसके अलावा एक प्रमुख द्रोणिका उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ होते हुए अंदरूनी ओडिशा तक विस्तारित है।  बारिश और ओले गिरने की संभावना पूर्वी भारत में भी सक्रियता बनी हुई है। एक पूर्व-पश्चिम द्रोणिका उत्तर-पूर्व बिहार से मणिपुर, बांग्लादेश, मेघालय और दक्षिण-पूर्व असम तक फैली है। इसके अलावा पश्चिमी विदर्भ से दक्षिण तमिलनाडु और बिहार से गंगेटिक पश्चिम बंगाल तक अन्य द्रोणिकाएं सक्रिय हैं। इन सभी मौसम प्रणालियों के प्रभाव से 31 मार्च को प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा और कुछ स्थानों पर गरज-चमक, अंधड़, वज्रपात और ओलावृष्टि की संभावना है। अधिकतम तापमान में हल्की गिरावट हो सकती है, हालांकि कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।