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Heat Wave Alert: रायपुर में स्कूलों का समय बदला, बच्चों को मिलेगी गर्मी से राहत

रायपुर. तेज धूप और गर्मी को देखते हुए रायपुर जिले में भी स्कूल का समय बदल दिया गया है। जिले के समस्त शासकीय और निजी स्कूल अब सुबह 7.30 बजे से पूर्वान्ह 11.30 बजे तक संचालित होंगे। परीक्षा और कार्यालयीन समय यथावत रहेगा। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण कई जिलों में स्कूल का समय बदल गया है। मंगलवार को रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी ने भी गर्मी को देखते हुए स्कूल का समय बदलने का आदेश जारी किया। जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय द्वारा जारी आदेश के अनुसार रायपुर जिले के समस्त शासकीय और अशासकीय स्कूल एक पाली वाले सोमवार से शनिवार तक प्रातः 7.30 बजे से पूर्वान्ह 11.30 तक संचालित होंगे। इसी तरह ऐसे स्कूल जो दो पाली में संचालित हो रहे हैं, वहां प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूल सुबह 7.30 बजे से 11.30 बजे तथा हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों का संचालन पूर्वान्ह 11.30 बजे से शाम 4.30 बजे तक होगा। परीक्षा और कार्यालयीन समय में किसा प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। यह आदेश 20 मार्च से प्रभावशील होगा। बता दें कि इन दिनों कक्षा 5वीं और 8वीं की परीक्षा चल रही है। इसके बाद स्थानीय कक्षाओं पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी, छठवीं, सातवीं और 9वीं-11वीं की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।  

समरसता का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने होली मिलन समारोह में भाग लिया

रंगों में घुला समरसता का संदेश: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय होली मिलन समारोह में हुए शामिल रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में होली मिलन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री  साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का पर्व है। यह पर्व आपसी मनमुटाव को भुलाकर रिश्तों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि होली बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है और हमें इस अवसर पर अपने भीतर की नकारात्मकताओं को त्यागकर सकारात्मकता को अपनाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने आह्वान किया कि युवा वर्ग सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाए, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को इन योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने प्रदेशवासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने   कहा कि होली का त्योहार परिवार और समाज के साथ मिलकर आनंद और अपनत्व के साथ मनाने की परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता को और मजबूत बनाते हैं। इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा, तकनीकी शिक्षा मंत्री  खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी रजवाड़े, विधायक  किरण देव,  मोतीलाल साहू,  अनुज शर्मा, रायपुर महापौर मती मीनल चौबे, धमतरी महापौर  रामू रोहरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित थे।

रींवा-रायपुर हवाई सेवा से विकास को मिलेगा नया बल: उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल

रींवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ेगी विकास की रफ्तार: उपमुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल रींवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ी नजदीकियां उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल का छत्तीसगढ़ दौरा रायपुर मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल दो दिवसीय प्रवास पर आज शाम रायपुर पहुंचें। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल अपने प्रवास के यहां कई धार्मिक, सामाजिक और शिष्टाचार भेंट कार्यक्रमों में शामिल होंगे।       आज शाम रायपुर पहुंचने के बाद उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर में दर्शन कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात वे क्वींस क्लब में विंध्य समाज द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में शामिल हुए, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया।     उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा से रायपुर के लिए शुरू हुई हवाई सेवा से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सड़कों और रेल सेवाओं का बेहतर होना जरूरी है। इससे पहले रीवा से दिल्ली और इंदौर के लिए हवाई सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं, जिससे व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने रीवा से दुर्ग तक ट्रेन सेवा जल्द शुरू करने के लिए सकारात्मक प्रयास करने का भरोसा दिलाया।      कार्यक्रम में विंध्याचल कल्याण सर्व समाज द्वारा  शुक्ल का अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच संबंध बहुत गहरे हैं। उन्होंने कहा कि यह हवाई सेवा केवल दूरी ही नहीं, बल्कि दिलों को भी जोड़ने का कार्य करेगी। विधायक  किरण सिंहदेव ने कहा कि रीवा से रायपुर के लिए हवाई सेवा शुरू होना एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे आवागमन आसान हो गया है।      ज्ञात हो कि उपमुख्यमंत्री  शुक्ल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 18 मार्च को वे सुबह 11.15 बजे छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से उनके निवास (स्पीकर हाउस) में सौजन्य भेंट करेंगे। इसके पहले वे नालंदा परिसर का निरीक्षण करेंगे। दोपहर 12.05 बजे पहुंना गेस्ट हाउस में विंध्य क्षेत्र के नागरिकों से मुलाकात कर क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।       कार्यक्रम में विधायक  मोतीलाल साहू, रीवा के पूर्व विधायक  के.पी. त्रिपाठी, समाज के संरक्षक  शंकर सिंह गहरवार, अध्यक्ष  कल्याण प्रसाद पांडेय, डॉ. व्यास मुनि द्विवेदी,  मधुकर द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्य सचिव विकासशील मंत्रालय में कार्य निष्पादन में गृह विभाग अव्वल

रायपुर ई-ऑफिस सम्मान समारोह मुख्य सचिव  विकासशील ने आज यहां मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित ई-ऑफिस सम्मान समारोह में जनवरी एवं फरवरी माह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभागों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से नस्तियों के त्वरित निस्तारण और समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर  सम्मानित किया गया। जनवरी माह की विभागीय रैंकिंग में गृह विभाग ने 92 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। समाज कल्याण विभाग ने 86.76 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि धर्मस्व विभाग ने 86.58 प्रतिशत अंक अर्जित कर तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि ई-ऑफिस के प्रभावी उपयोग से शासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने सभी विभागों से इसी प्रकार दक्षता के साथ कार्य करने और निरंतर बेहतर प्रदर्शन बनाए रखने की अपेक्षा की। समारोह में विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। जनवरी माह में ई-ऑफिस में उल्लेखनीय कार्य करने वाले में संयुक्त सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की मती जय जैन, द्वितीय स्थान में अनुसूचित जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव  अनुपम त्रिवेदी, उप सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान में सामान्य प्रशासन-एक के उप सचिव  किशोर कुमार भुआर्य, द्वितीय स्थान में सामान्य प्रशासन-6 के उप सचिव मती ऋतु वर्मा, तृतीय स्थान में समाज कल्याण विभाग के उप सचिव स्वर्गीय रामलाल खैरवार, अवर सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान में विधि एवं विधायी विभाग के अवर सचिव अरूण कुमार मिश्रा, द्वितीय स्थान में अवर सचिव गृह विभाग पूरन लाल साहू, तृतीय स्थान में अवर सचिव सामान्य प्रशासन-1 के कैलाश कुमार नेताम, तृतीय स्थान में लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त सचिव  सत्य नारायण वास्तव, अनुभाग अधिकारी श्रेणी में प्रथम स्थान में अनुभाग अधिकारी नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मणिराम रात्रे, द्वितीय स्थान में अनुभाग अधिकारी सामान्य प्रशासन-(1, 4 ) के नंद कुमार मेश्राम, तृतीय स्थान में अनुभाग अधिकारी पंचायत विभाग लीलाम्बर ओहदार, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में प्रथम स्थान में महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक दौलतराम वर्मा, द्वितीय स्थान में खेल विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक मुकेश राम प्रधान, तृतीय स्थान में गृह विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक रामगोपाल सेन, कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में प्रथम स्थान में सामान्य प्रशासन-1 के कनिष्ठ सचिवालय सहायक राम कुमार सिंग, द्वितीय स्थान में जल संसाधन विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक प्रदीप कुमार, तृतीय स्थान सामान्य प्रशासन विभाग-2 के कनिष्ठ सचिवालय सहायक  सुरेन्द्र कुमार, कम्प्यूटर ऑपरेटर श्रेणी में प्रथम स्थान में वन विभाग के डाटा एंट्री ऑपरेटर माया देवांगन, द्वितीय स्थान में स्कूल शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड-2 ललीत साहू, द्वितीय स्थान में (तकनीकी) कम्प्यूटर ऑपरेटर दीपेश कुमार साहू।  फरवरी माह में ई-ऑफिस में उल्लेखनीय कार्य करने वाले में संयुक्त सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान में आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव  भूपेन्द्र कुमार राजपूत, द्वितीय स्थान में अतिरिक्त सचिव  सत्यनारायण वास्तव, तृृतीय स्थान में परिवहन विभाग के संयुक्त सचिव  कमलेश बंसोड़, उप सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान में गृह विभाग के उप सचिव  रामप्रसाद चौहान, द्वितीय स्थान में सामान्य प्रशासन-1 के उप सचिव  किशोर कुमार भूआर्य, तृतीय स्थान में सामान्य प्रशासन-8 के उप सचिव अंशिका ऋषि पांडे, द्वितीय स्थान में लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त सचिव  सत्यनारायण वास्तव, अवर सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान गृह विभाग अवर सचिव पूरनलाल साहू, द्वितीय स्थान पंचायत विभाग अवर सचिव विश्वनाथ नाग, तृतीय स्थान में सामान्य प्रशासन-1 के अवर सचिव कैलाश कुमार नेताम, अनुभाग अधिकारी श्रेणी में प्रथम स्थान में सामान्य प्रशासन-(1, 4 ) अनुभाग अधिकारी  नंदकुमार मेश्राम, द्वितीय स्थान में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग अनुभाग अधिकारी मणिराम रात्रे, तृृतीय स्थान में पंचायत विभाग के अनुभाग अधिकारी  शिवकुमार गोड़, सहायक अनुभाग अधिकारी श्रेणी में प्रथम स्थान में धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के  ओंकार राम भूआर्य, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में प्रथम स्थान में मुख्य सचिव कार्यालय के वरिष्ठ सचिवालय सहायक  राकेश संतयाल, द्वितीय स्थान खेल विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक  श्याम लाल साहू, कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में प्रथम स्थान में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक  प्रमोद कुमार, द्वितीय स्थान में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक  सतकुमार भास्कर, तृतीय स्थान में सामान्य प्रशासन-1 के कनिष्ठ सचिवालय सहायक  रामकुमार सिंग, कम्प्यूटर ऑपरेटर श्रेणी में प्रथम स्थान में कम्प्यूटर ऑपरेटर (तकनीकी)  दीपेश कुमार साहू, द्वितीय वन विभाग डाटा एंट्री ऑपरेटर माया देवांगन, तृतीय स्थान में स्कूल शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड-2  ललित साहू। जनवरी माह में उपस्थिति में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले में प्रथम स्थान पर रहने वाले  आशीष कुमार शर्मा (अनुभाग अधिकारी),  छबि लाल साहू, (निज सचिव),  पवन कुमार साहू (सहायक अनुभाग अधिकारी), फरवरी माह में उपस्थिति में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले में प्रथम स्थान में 22 अधिकारी-कर्मचारी निम्न है- सहायक अनुभाग अधिकारी  अजित कुमार चंद्रवंशी, वरिष्ठ सहायक सचिवालय सु अंजू पटेल, सहायक अनुभाग अधिकारी  आशुतोष वर्मा, अनुभाग अधिकारी  बसंत कुमार धु्रर्वे, निज सहायक  बिरेन्द्र कुमार, सहायक अनुभाग अधिकारी  छवि राम साहू, अवर सचिव क्लेमेन्टीना लकरा, सहायक अनुभाग अधिकारी  देवेन्द्र साहू, अवर सचिव  हेमंत कुमार पांडे, सहायक अनुभाग अधिकारी  लोक नारायण शर्मा, वरिष्ठ सचिवालय सहायक  प्रदीप कुमार साव, वरिष्ठ सचिवालय सहायक प्रमिला यादव, वरिष्ठ सचिवालय सहायक  पुरूषोत्तम लाल निषाद, भृत्य  राज कुमार सोरी, अवर सचिव  राजीव कुमार झाड़े, अवर सचिव  रातु लाल धु्रव, वरिष्ठ सचिवालय सहायक सुनीता साहू, वरिष्ठ सचिवालय सहायक  सूरज कुमार साहू, वरिष्ठ सचिवालय सहायक तारा कुजूर, सहायक अनुभाग अधिकारी  विनोद कुमार अथनकर, सहायक अनुभाग अधिकारी  योगेन्द्र कुर्रे, अनुभाग अधिकारी  युवराज साहू कार्यक्रम में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

देशभर के टूर ऑपरेटरों ने देखी छत्तीसगढ़ की अनोखी झलक

रायपुर विभिन्न राज्यों से आए टूर ऑपरेटरों और ट्रैवल एजेंट्स ने बस्तर, मैनपाट और जशपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों के व्यापक प्रचार-प्रसार और राज्य की प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड द्वारा आयोजित फेम (FAM) ट्रिप के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों से आए टूर ऑपरेटरों और ट्रैवल एजेंट्स ने बस्तर, मैनपाट और जशपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। इस दौरान प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर को करीब से देखा और उसकी भूरी-भूरी प्रशंसा की। फेम ट्रिप के दौरान प्रतिनिधियों को बस्तर जिले के विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया साथ ही बोटिंग भी कराई गई, जिसने उनके अनुभव को और रोमांचक बना दिया। इसके साथ ही प्रतिनिधियों ने चित्रकोट स्थित प्राचीन शिव मंदिर के दर्शन भी किए। बस्तर की जीवंत लोक संस्कृति से परिचित कराने के लिए प्रतिनिधियों को यहां के प्रसिद्ध हाट-बाजार भी ले जाया गया, जहां उन्होंने पारंपरिक मुर्गा लड़ाई जैसे स्थानीय सांस्कृतिक आयोजनों को देखा और बस्तर की विशिष्ट जनजातीय परंपराओं को समझा। इस भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों को ऐतिहासिक नगरी बारसूर भी ले जाया गया, जहां उन्होंने प्रसिद्ध बत्तीसा मंदिर और भगवान गणेश की अद्भुत एवं प्राचीन मूर्तियों का अवलोकन किया। इन ऐतिहासिक धरोहरों ने प्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। फेम ट्रिप के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर संभाग के प्रशासनिक अधिकारियों से भी मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने बस्तर के कमिश्नर, आईजी और एसपी से भेंट कर क्षेत्र में पर्यटन विकास, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटन सुविधाओं पर चर्चा की। अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि बस्तर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसी क्रम में प्रतिनिधियों को मैनपाट के खूबसूरत पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण कराया गया। यहां उन्होंने करमा एथेनिक रिजॉर्ट और सैला रिसोर्ट का दौरा किया तथा मैनपाट की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण का अनुभव किया। इसके अलावा प्रतिनिधियों को कुनकुरी स्थित गिरजाघर, जशपुर का राजपुरी जलप्रपात तथा केरे विलेज जशपुर में स्थित महुआ होमस्टे जैसे आकर्षक पर्यटन स्थलों से भी परिचित कराया गया। इन स्थलों ने छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को उजागर किया। छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड द्वारा आयोजित यह फेम ट्रिप 13 मार्च से 18 मार्च तक आयोजित की जा रही है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 28 टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंट्स शामिल हैं। इन प्रतिनिधियों को दो समूहों में विभाजित कर राज्य के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार और पर्यटन बोर्ड का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों के टूर ऑपरेटरों को राज्य की पर्यटन संभावनाओं से सीधे परिचित कराना है, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार कर सकें। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड राज्य के पर्यटन को नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष  नीलू शर्मा तथा प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य के नेतृत्व में राज्य में पर्यटन सुविधाओं के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए कई नवाचार किए जा रहे हैं। इस फेम ट्रिप से जुड़े प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विविधता और यहां के लोगों के आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और वे अपने-अपने राज्यों में छत्तीसगढ़ को एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में बढ़ावा देंगे। फेम ट्रिप का समापन 18 मार्च को रायपुर में आयोजित कार्यक्रम के साथ होगा, जहां दोनों समूहों के प्रतिनिधि एकत्रित होंगे और छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की ओर से राज्य की पर्यटन संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी। इस पहल से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में भी खुले रहेंगे पंजीयन कार्यालय अवकाश के दिनों पर भी मिलेगी पंजीयन की सुविधा

रायपुर, राज्य के आम नागरिकों को पंजीयन संबंधी कार्यों में किसी प्रकार की असुविधा न हो और वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिनों में पंजीयन कार्यों का सुचारू एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा सके, इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य के सभी पंजीयन (स्टाम्प दस्तावेज) कार्यालय चयनित अवकाश दिवसों में भी संचालित (खुले) किए जाएंगे। जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के सभी पंजीयन कार्यालय 22 मार्च, 28 मार्च, 29 मार्च तथा 31 मार्च 2026 को भी सामान्य कार्यदिवसों की तरह खुले रहेंगे। इन तिथियों में दस्तावेजों के पंजीयन सहित अन्य सभी संबंधित सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध रहेंगी।        शासन के इस निर्णय का उद्देश्य नागरिकों को अतिरिक्त सुविधा प्रदान करना है, ताकि वे अपने लंबित पंजीयन कार्यों को समय पर पूरा कर सकें। विशेष रूप से वित्तीय वर्ष की समाप्ति के मद्देनज़र इन दिनों में पंजीयन कार्यों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है। राज्य सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस विशेष सुविधा का अधिकतम लाभ उठाते हुए निर्धारित तिथियों में अपने पंजीयन संबंधी कार्यों का निष्पादन कराएं, जिससे अनावश्यक भीड़ और अंतिम समय की परेशानी से बचा जा सके।

धान के बजाय मक्का से बढ़ा मुनाफा : किसान मालती मोहन बने उन्नत खेती की मिसाल किसान मालती मोहन

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम काडरो के किसान श्री मालती मोहन के रूप में सामने आया है। पूर्व में ग्रीष्मकालीन धान की खेती करने वाले कृषक श्री मालती मोहन ने इस बार कृषि विभाग के मार्गदर्शन में बदलाव करते हुए 2 एकड़ भूमि में मक्का फसल की खेती की। इस नवाचार से उन्हें बेहतर उत्पादन के साथ 88 हजार 200 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। किसान ने बताया कि मक्का की खेती में कुल 11 हजार 800 रुपये का खर्च आया, जिसमें बीज, खाद और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं शामिल हैं। मक्का की बिक्री से उन्हें लगभग 1 लाख रुपये की आय हुई, जिससे अच्छी-खासी शुद्ध कमाई संभव हो सकी। उन्होंने बताया कि धान की तुलना में मक्का की खेती में कम पानी और कम लागत लगती है, जबकि लाभ अधिक प्राप्त होता है। श्री मालती मोहन ने बताया कि ग्रीष्मकालीन धान की खेती में अधिक पानी की आवश्यकता होती है और लागत भी ज्यादा आती है, जबकि मक्का एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आया है। इस बदलाव से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि जल संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। किसान ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया है। उनकी यह सफलता अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है, जो अब धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों की खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

क्षेत्रीय भाषाओं में भी विज्ञान के अध्ययन और रिसर्च पेपर लाने की आवश्यकता- उपमुख्यमंत्री शर्मा

रायपुर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, नया रायपुर (IIIT-NR) में आयोजित 21वें छत्तीसगढ़ युवा वैज्ञानिक सम्मेलन (सीवाईएससी–2026) का शुभारंभ आज उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने किया। दो दिवसीय इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा ट्रिपलआईटी नया रायपुर द्वारा किया जा रहा है।       उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि राज्य के विकास में विज्ञान, नवाचार और शोध की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अपने छात्र जीवन और विज्ञान अध्ययन की यादें साझा करते हुए कहा कि विज्ञान पढ़ने से पहले मुझे अंग्रेजी पढ़नी पड़ती थी जिसके कारण कई लेक्चर मैंने छोड़ दिए पर धीरे धीरे सब सिख गया, आज जो रिसर्च पेपर आए हैं सभी अंग्रेजी में है और शायद परंपरागत शायद अंग्रेजी में ही होते हैं पर हमें अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी विज्ञान के अध्ययन और रिसर्च पेपर लाने की आवश्यकता है ताकि एक ग्रामीण परिवेश का व्यक्ति भी ज्ञान अर्जित कर सके इस पर ध्यान देना चाहिए।      उन्होंने भारत में विज्ञान के उद्भव पर चिंतन करते हुए कहा कि विभिन्न विषयों पर भारत के मनीषियों एवं ऋषियों ने उस समय कितने चिंतन कर लिए थे जो आज भी चिंतन का विषय है। किसी एक विषय को समझने के लिए आप प्रायोगिक तरीकों से भी जा सकते हैं और वैचारिक तरीकों से भी जा सकते हैं पर आपको उस विषय को समझना है तो प्रायोगिक के साथ वैचारिक तरीकों का समावेश आवश्यक है। आर्यभट्ट जी ने जो किताब लिखी तो चार भागों में उसमें तीन सूत्र दिए जिनमें न्यूटन के तीन नियमों के संबंध में जानकारी प्राप्त हो जाती है।        उन्होंने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ के यंग साइंटिस्ट के द्वारा प्रस्तुत किए गए 194 पेपर्स को जांचने के लिए देश भर से जो हमारे 45 परीक्षक आए हैं मैं उनका हृदय से आभार करना चाहता हूं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की सरकार ने राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहित करने के लिए शोधकर्ताओं को भारत के विज्ञान तीर्थों का दर्शन कराने के लिए विज्ञान तीर्थ दर्शन योजना शुरू की जा रही है। जिसमें विज्ञान के विद्यार्थी सीवी रमन, शांति स्वरूप भटनागर, बीरबल साहनी, जगदीश चंद्र बोस, डॉ. होमी जहांगीर भाभा, विक्रम सारा भाई, सत्येंद्रनाथ बोस, हरगोविंद खुराना, सुब्रमण्यम चंद्रशेखर, अबुल कलाम आजाद जैसे भारत के महान वैज्ञानिकों के कार्यस्थल को जाकर देख सकेंगें और विज्ञान के अनुसंधानों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।         प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने अपने संबोधन में कहा कि ने छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा समर्थित विभिन्न योजनाओं और शोध परियोजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि राज्य शासन किस प्रकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान अनुदान और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।         इस अवसर पर प्रो. ओम प्रकाश व्यास ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ट्रिपल आईटी नया रायपुर में इस सम्मेलन का आयोजन संस्थान की शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के बदलते स्वरूप और 'इंटरडिसिप्लिनरी' सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने उपमुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि वर्तमान में युवा वैज्ञानिक कांग्रेस में 20 विषय श्रेणियाँ निर्धारित हैं। 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरविषयी अनुप्रयोग' को 21वीं श्रेणी के रूप में जोड़ा जाए, ताकि उभरती डिजिटल तकनीकों में युवा प्रतिभाओं को विशेष मंच मिल सके।"        छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक  पी. कवीश्वर ने कहा कि छत्तीसगढ़ युवा वैज्ञानिक सम्मेलन राज्य की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करना और गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देना है। प्रो. एस. के. पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की भूमिका वैज्ञानिक सोच विकसित करने और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को प्रोत्साहित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, महानिदेशक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद  पी. कवीश्वर, पूर्व कुलपति पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय प्रो. एस. के. पांडेय तथा कुलपति एवं निदेशक ट्रिपल आई टी नया रायपुर प्रो. ओम प्रकाश व्यास  उपस्थित रहे।       इस सम्मेलन में ऑनलाइन सबमिशन पोर्टल के माध्यम से कुल 194 शोध-पत्र प्राप्त हुए, जो देश भर के युवा शोधकर्ताओं ने अपने शोध-पत्र 20 विविध वैज्ञानिक विषयों में प्रस्तुत किए हैं। इस दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान स्वीकृत शोध-पत्रों को उनके संबंधित विषय-क्षेत्र में विशेषज्ञों के पैनल के समक्ष प्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे शोधार्थियों को अपने कार्य पर विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ और सुझाव प्राप्त होंगे। निर्णायकगण विभिन्न विषय-धाराओं में प्रस्तुत शोध-पत्रों का मूल्यांकन कर प्रत्येक क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र का चयन करेंगे। इसके माध्यम से उभरते हुए युवा वैज्ञानिकों की पहचान कर उन्हें आगे के मार्गदर्शन, परामर्श और शोध के अवसरों के लिए प्रोत्साहित एवं सम्मानित किया जाएगा।        सम्मेलन के समापन समारोह में 18 मार्च को मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय भी शामिल होंगे। इस अवसर पर वे विभिन्न विषय-धाराओं में चयनित सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र प्रस्तुत करने वाले युवा वैज्ञानिकों को सम्मानित करेंगे और उन्हें पुरस्कार प्रदान करेंगे। इस समारोह में इटली की प्रतिष्ठित कंपनी स्मार्ट मी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. एंजेलो ज़ाइया भी शामिल होंगे।

कृषि विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों एवं वैज्ञानिकों के लिए ए आई पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्रारंभ

रायपुर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में शिक्षण एवं अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। कृषि महाविद्यालय रायपुर में 16 से 20 मार्च तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की विभिन्न प्रविधियों एवं उपकरणों का प्रभावी उपयोग कर इन क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करने के गुर सिखाये जा रहे हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित 17 महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।  प्रशिक्षण कार्यक्रम में आई.आई.टी. भिलाई, आई.आई.आई.टी. नया रायपुर, एन.आई.टी. रायपुर, आई. आई. एम. रायपुर, हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिर्वसिटी नया रायपुर, गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर, आई.सी.ए.आर. – नार्म हैदराबाद तथा आई.सी.ए.आर – एन.आई.बी.एस.एम. बरोण्डा जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को कृषि शिक्षा अनुसंधान में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस की विभिन्न टेकनिक्स एवं टूल्स के प्रभावी उपयोग के बारे में मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ इदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने किया।  इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.), भिलाई के निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश तथा आई.सी.ए.आर.-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (एन.आई.बी.एस.एम.) बरोण्डा के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कपिलदेव दीपक सहित कृषि विश्वविद्यालय के निदेशकगण तथा विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठातागण उपस्थित थे।     प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि विगत कुछ वर्षों में हमारे जीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग निरंतर बढ़ता जा रहा है और अब यह हमारी सामान्य दिनचर्या का एक हिस्सा बन गया है। उन्होंने कहा विशेषकर उच्च शिक्षा अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अहम योगदान दिया है। यह शिक्षण, शोध और अकादमिक कार्यों को अधिक प्रभावी बना रही है। डॉ. चंदेल ने कहा कि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कृषि शिक्षा जैसे पेशेवर क्षेत्रों में ए आई का उपयोग शिक्षण गुणवत्ता, नवाचार और शोध को बेहतर बनाने के लिए अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पाठ योजना निर्माण, पाठ्य सामग्री निर्माण, मूल्यांकन आदि शिक्षण संबंधी कार्यों तथा शोध लेखन, साहित्य समीक्षा, संदर्भ प्रबंधन आदि शोध संबंधी कार्यों के संबंध में विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जाएगी।  इस प्रशिक्षण में प्रतिभागी अपनी कक्षाओं, प्रयोगशाला तथा शोध कार्यों में विभिन्न ए आई तकनीक एवं टूल्स का प्रभावी उपयोग करना सीखेंगे जिससे उनकी कार्यक्षमता और नवाचार क्षमता वृद्धि होगी। आई.आई.टी. भिलाई के निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश ने इस अवसर पर कहा कि कोविड काल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ने लगा है। कोविड के दौरान आई.आई.टी. कानपुर ने विभिन्न ए आई टूल्स का उपयोग कर कोविड के केसेस के प्रतिदिन के आकड़ों तथा उसके पीक पीरियड के बारे में सटीक पूर्वानुमान जारी किए थे। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में भी ए आई तकनीक का उपयोग कर किसानों के लिए मौसम संबंधी पूर्वानुमान तथा कृषि सलाह उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न ए आई टूल्स के माध्यम से वर्षा जल एवं उपलब्ध भूजल के आंकड़ों का उपयोग कर किसानों के लिए उपयुक्त फसलों का चयन किया जा सकता है। इसके साथ ही विगत वर्षों में घटित कीट-बीमारियों के प्रकोप तथा वर्तमान जलवायविक परिस्थितियों का अध्ययन कर फसलों को कीटों एवं बीमारियों के प्रकोप से बचाया जा सकता है।  इसी प्रकार फसल उत्पादन एवं इनके विक्रय हेतु भी ए आई टूल्स का उपयोग किया सकता है। एन.आई.बी.एस.एम. के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। एन.आई.टी. रायपुर के निदेशक डॉ. एन.वी. रमन्ना ने भी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। गौरतलब है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दो प्रमुख घटकों में आयोजित किया गया है। पहला घटक नव नियुक्त संकाय सदस्यों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य उन्हें विश्वविद्यालय की दृष्टि, मिशन और शैक्षणिक ढांचे से परिचित कराना है। दूसरा घटक शिक्षण एवं अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर प्रशिक्षण है, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक ए आई टूल्स और तकनीकों से परिचित कराया जाएगा, ताकि वे इनका प्रभावी उपयोग कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, विस्तार गतिविधियों तथा अनुसंधान कार्यों में कर सकें। इन पाँच दिनों के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यान, विचार-विमर्श तथा प्रायोगिक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को आधारित शिक्षण एवं अनुसंधान की नवीनतम प्रवृत्तियों से अवगत कराया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम की संयोजक कृषि महाविद्यालय रायपुर की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे हैं।

प्रदेश में एलपीजी आपूर्ति सुचारु:कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए प्राथमिकता आधारित वितरण व्यवस्था लागू

रायपुर  खाद्य सचिव मती रीना बाबा साहेब कंगाले के दिशानिर्देश पर छत्तीसगढ़ में निर्बाध एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ कमर्शियल गैस कनेक्शन वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के लिए संतुलित और प्राथमिकता आधारित वितरण व्यवस्था केंद्रीय पेट्रोलियम एवं नैसर्गिक गैस मंत्रालय के अधीन लागू करने का निर्णय लिया गया है। खाद्य सचिव मती रीना कंगाले ने कहा कि प्रदेश में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रहे और आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार एवं ऑयल कंपनियों के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कमर्शियल उपभोक्ताओं को विगत माहों की खपत के आधार पर अधिकतम 20 प्रतिशत की सीमा के अंदर एलपीजी प्रदाय करने पर सहमति बनी है। कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों एवं चिकित्सालयों के साथ-साथ सैन्य एवं अर्द्धसैन्य कैंप, जेल, हॉस्टल, समाज कल्याण संस्थान, रेलवे एवं एयरपोर्ट कैंटीन को पूर्ण प्राथमिकता देते हुए 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वहीं शासकीय कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं उनके गेस्ट हाउस और कैंटीन के लिए 50 प्रतिशत, पशु आहार उत्पादक संयंत्र एवं बीज उत्पादक इकाई  तथा रेस्टोरेंट एवं होटल के लिए 20 प्रतिशत आपूर्ति निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि कमर्शियल एलपीजी के वितरण की दैनिक समीक्षा ऑयल कंपनियों द्वारा की जाएगी तथा इसकी जानकारी प्रतिदिन खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं प्रभावी बनी रहे।  खाद्य सचिव मती रीना बाबासाहेब कंगाले ने कहा कि आम नागरिकों को निर्बाध एलपीजी आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आवश्यक सेवाओं पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े, साथ ही सभी वर्गों तक संतुलित रूप से गैस की उपलब्धता बनी रहे।