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बड़ी कार्रवाई: गैस एजेंसी में अनियमितता मिली, 961 सिलेंडर किए गए जब्त

दुर्ग. जिले के एक और गैस एजेंसी में जांच के दौरान गड़बड़ी सामने आई है. खाद्य महकमा की टीम ने गोल्डन गैस एजेंसी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. जहां गड़बड़ी सामने आने पर कुल 961 नग खाली एवं भरा हुआ रसोई गैस सिलेंडर जप्त किए गए हैं. गौरतलब है कई गैस एजेंसियों में बुकिंग के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिलने की शिकायतें आ रही है. जिसके मद्देनजर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय, नवा रायपुर से प्राप्त निर्देशों के परिपालन में जिले में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडरों तथा पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता एवं आपूर्ति व्यवस्था की सतत निगरानी की जा रही है. इसी कड़ी में पद्मनाभपुर स्थित गोल्डन भारत गैस की भी निरंतर शिकायतें खाद्य महकमा को मिल रही थी . प्राप्त शिकायत पर खाद्य विभाग के जांच दल द्वारा जांच की गई. खाद्य नियंत्रक अनुराग सिंह भदौरिया से मिली जानकारी के मुताबिक गोल्डन गैस एजेंसी एक भागीदार फर्म है जिसके 2 भागीदार मोहन लाल धुव्र एवं अंशुमन मढरिया है. जांच में भौतिक सत्यापन में स्टाक में अंतर पाया गया इसके आधार पर घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 किग्रा) खाली 838 एवं भरे 48 नग, व्यावसायिक सिलेंडर (19 किग्रा) खाली 63 नग तथा 5 किग्रा सिलेंडर 22 नग (खाली) भागीदार अंशुमन मढरिया से जप्त किया गया. भदौरिया का कहना है कि प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिले में एलपीजी गैस तथा पेट्रोल- डीजल की आपूर्ति व्यवस्था सुचारू रूप से बनी रहे ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. इसके लिए विभाग द्वारा लगातार जांच की कार्रवाई जारी है आगे भी निरंतर जांच जारी रहेगा.

सहयोग से संपन्न हुआ बजट सत्र, CM साय बोले- सभी का आभार

रायपुर. विधानसभा के बजट सत्र के सफल समापन पर मंत्रीगण एवं विधायकगण ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में भेंट कर उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया और सफल सत्र के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के समन्वय और सहयोग से ही यह सत्र सार्थक और सफल बन पाया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का पावन मंदिर है और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाना ही इसका मूल दायित्व है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस बजट सत्र के दौरान लगभग 585 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने विधानसभा की कार्यवाही का अवलोकन किया जो एक अत्यंत प्रेरणादायक पहल है। इससे यह संदेश गया है कि राज्य सरकार भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है, जिसका सीधा संबंध राज्य की आंतरिक सुरक्षा, शांति और समृद्धि से है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट सत्र में कुल 15 बैठकें आयोजित हुईं और यह सत्र अत्यंत महत्वपूर्ण एवं परिणामकारी रहा। सत्र के दौरान माननीय राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन द्वारा कृतज्ञता व्यक्त की गई तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पारित किया गया। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी सम्पन्न हुए। उन्होंने कहा कि इस सत्र में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026, छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक-2026 तथा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक-2026 जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। साथ ही भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने संबंधी विधेयक तथा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक भी सर्वसम्मति से पारित हुए, जो युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती प्रणाली के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सत्र के दौरान सदन के सदस्यों ने अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की, प्रश्न पूछे और अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाया, जो लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वे भले ही अस्वस्थता के कारण सदन में उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने लगातार डिजिटल माध्यम से सदन की कार्यवाही पर नजर रखी।मुख्यमंत्री ने उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने सत्र के सफल संचालन के लिए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, सभी विधायकगण, विधानसभा सचिव दिनेश शर्मा, सुरक्षा कर्मियों एवं समस्त अधिकारियों-कर्मचारियों को विशेष धन्यवाद दिया। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि आप सभी ने सदन की महत्वपूर्ण कार्यवाही और जनहित के मुद्दों को जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अंत में मुख्यमंत्री साय ने चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

जमीन रजिस्ट्री में गिरावट के बावजूद बढ़ा राजस्व, सरकार ने छुट्टियों में भी काम का लिया फैसला

राजनांदगांव. पिछले साल से इस बार जमीन के कारोबार में कमी आई है. हालांकि, राजस्व में जरूरत बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है . इस कम रजिस्ट्री के आंकड़ों को पूरा करने शासन ने शनिवार और रविवार सहित अन्य अवकाश के दिनों में भी रजिस्ट्री किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं. छत्तीसगढ़ शासन के महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम माह में राजस्व संग्रहण और नागरिकों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए अवकाश के दिनों में भी पंजीयन कार्यालयों को खुला रखने का निर्देश दिया गया है. शासन की मंशा के अनुरूप आगामी छुट्टियों के दौरान पंजीयन कार्य की प्रक्रिया जारी रहेगी. जारी अधिसूचना के अनुसार, मार्च माह में पक्षकारों द्वारा कराए जाने वाले पंजीयन की अधिक संख्या को देखते हुए मार्च माह के चतुर्थ रविवार 22 मार्च 2026, अंतिम शनिवार 28 मार्च 2026, अंतिम रविवार अवसर पर 31 मार्च 2026 को भी सभी पंजीयन कार्यालयों में कामकाज सामान्य रूप से संचालित होगा. विभागीय अवकाश के दिनों में भी उप पंजीयक कार्यालयों में दस्तावेजों के पंजीयन की प्रक्रिया सुनिश्चित की गई है. साथ ही जिला पंजीयक, कोषालय अधिकारी और भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों को 31 मार्च तक बैंकों में शासकीय लेनदेन सुचारू रखने हेतु यथोचित निर्देशित किया गया है. आम जनता की सुविधा के लिए स्टॉक होल्डिंग कार्पोरेशन को ई-स्टाम्पों की निरंतर आपूर्ति और एनआईसी को सुचारू तकनीकी व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं. राजनांदगांव मुख्यालय में ही गिरा बाजार राजनांदगांव तहसील मुख्यालय में ही पिछले साल से 6 करोड़ 81 लाख की कम रजिस्ट्री हुई है. पिछले साल यहां 78 करोड़ 14 लाख रूपए था, जो इस बार घटकर 71 करोड़ 32 लाख रूपए हो गया. इसी तरह डोंगरगढ़ तहसील में 6 करोड़ 75 लाख से गिरकर इस बार 6 करोड़ 68 लाख रूपए रह गया. गंडई में 3 करोड़ 45 लाख से गिरकर इस बार 3 करोड़ 5 लाख रह गया. हांलाकि बाकी के छह तहसील में राजस्व अधिक मिले है. इसमें खैरागढ़ में पिछले साल 10 करोड़ 66 लाख था, जो बढ़कर इस बार 13 करोड़ 96 लाख हो गया. छुईखदान 53 लाख 27 हजार से बढ़कर इस बार 61 लाख 70 हजार हो गया. डोंगरगांव 4 करोड़ 15 लाख से बढ़कर 6 करोड़ 87 लाख और छुरिया में 1 करोड़ नौ लाख की बढ़ोत्तरी, मोहला में भी 93 लाख का राजस्व में पिछले साल से इजाफा दर्ज किया गया है. मिली जानकारी अनुसार पिछले साल फरवरी माह तक जहां 22270 रजिस्ट्री दर्ज की गई थी, वही इस बार यह आंकड़ा 21412 तक सिमट गया. हांलाकि कलेक्टर दर में रेट बढ़ाए जाने के चलते राजस्व में कम हुआ जमीन का कारोबार बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. पिछले साल फरवरी माह तक 109 करोड़ 29 लाख रूपए राजस्व प्राप्त किया गया था. जबकि इस बार 111 करोड़ 78 लाख रूपए का राजस्व मिला है. जो पिछले साल से 2 करोड़ 49 लाख रूपए ज्यादा हैं. उल्लेखनीय है कि, विगत बीस नवंबर को राज्य सरकार द्वारा डेढ़ सौ प्रतिशत तक जमीन के रेट बढाए गए थे.

RTE एडमिशन में नया बदलाव, अब सिर्फ 1425 बच्चों को मिलेगा दाखिला, केजी और नर्सरी बंद

दुर्ग  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जिले में आरटीई सीटों में भारी कटौती करते हुए संख्या घटाकर केवल 1425 कर दी गई है। पिछले वर्ष जहां 4267 सीटें उपलब्ध थीं, वहीं इस बार 2842 सीटें कम कर दी गई हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।  केजी-नर्सरी खत्म, अब सीधे पहली कक्षा में प्रवेश इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि केजी-1, केजी-2 और नर्सरी कक्षाओं को आरटीई दायरे से बाहर कर दिया गया है। अब केवल पहली कक्षा में ही प्रवेश दिया जाएगा। इससे पहले निजी स्कूलों में इन शुरुआती कक्षाओं में भी आरटीई के तहत दाखिले होते थे। विभाग को अब तक 2533 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जबकि सीटें सिर्फ 1425 ही हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में बच्चों का चयन नहीं हो पाएगा। इससे अभिभावकों के बीच प्रतिस्पर्धा और चिंता दोनों बढ़ गई हैं। निजी स्कूलों की संख्या भी घटी पिछले वर्ष जहां 540 निजी स्कूलों को आरटीई के तहत चिन्हांकित किया गया था, इस बार उनकी संख्या घटकर 528 रह गई है। इससे भी सीटों में कमी का असर साफ नजर आ रहा है। निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत वर्ष 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन की जा रही है। आरटीई पोर्टल के माध्यम से आवेदन और चयन की प्रक्रिया संपन्न होगी। पहले चरण का शेड्यूल जारी आरटीई प्रवेश प्रक्रिया के पहले चरण का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। इसके तहत ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि नोडल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 16 फरवरी से 31 मार्च तक चलेगी। इसके बाद 13 से 17 अप्रैल के बीच लॉटरी के माध्यम से सीटों का आबंटन किया जाएगा। चयनित छात्रों का स्कूल में प्रवेश 1 मई से 30 मई के बीच कराया जाएगा, वहीं 2025-26 सत्र की शुल्क प्रतिपूर्ति का सत्यापन कार्य 25 मई से 25 जून तक पूरा किया जाएगा। दूसरे चरण की समय-सारणी द्वितीय चरण के तहत आरटीई प्रवेश प्रक्रिया की समय-सारणी भी जारी कर दी गई है, जिसके अनुसार नए स्कूलों का रजिस्ट्रेशन 8 से 20 जून तक किया जाएगा। इसके बाद नोडल अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा सीटों का वेरिफिकेशन 8 जून से 25 जून तक किया जाएगा। छात्र पंजीयन की प्रक्रिया 1 से 11 जुलाई के बीच पूरी होगी, जबकि नोडल वेरिफिकेशन 1 से 15 जुलाई तक किया जाएगा। इसके पश्चात 27 से 31 जुलाई के बीच लॉटरी और सीटों का आबंटन किया जाएगा, वहीं चयनित छात्रों की स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया 3 से 17 अगस्त तक पूरी की जाएगी। अभिभावकों में बढ़ी चिंता सीटों में भारी कटौती और कक्षाओं के दायरे में बदलाव के कारण इस बार बड़ी संख्या में बच्चों को आरटीई का लाभ नहीं मिल पाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निजी स्कूलों में शिक्षा हासिल करने का अवसर सीमित हो सकता है, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए।

श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत: डोंगरगढ़ नवरात्रि स्पेशल ट्रेन का ऐलान, 63 स्टॉपेज के साथ सेवा शुरू

बिलासपुर चैत्र नवरात्रि के दौरान डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर में लगने वाले नवरात्रि मेले में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे प्रशासन ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) कोरबा के बीच मेमू स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन 23 से 28 मार्च तक चलेगी और इस दौरान 63 स्टेशनों पर रुकेगी। पूरी दूरी तय करने में ट्रेन को करीब 14 घंटे 30 मिनट लगेंगे। रेलवे के अनुसार ट्रेन नंबर 06883 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)–कोरबा मेमू स्पेशल सुबह 5 बजे इतवारी से रवाना होगी और मध्यवर्ती स्टेशनों से होते हुए शाम 7.30 बजे कोरबा पहुंचेगी। इसी तरह ट्रेन नंबर 06884 कोरबा–नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) मेमू स्पेशल कोरबा से सुबह 5.10 बजे रवाना होकर निर्धारित स्टेशनों पर रुकते हुए शाम 7.30 बजे इतवारी पहुंचेगी। सुबह 9.06 बजे पहुंचेगी डोंगरगढ़ इतवारी से चलकर ट्रेन सुबह 9.06 बजे डोंगरगढ़ पहुंचेगी और 9.11 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में कोरबा से आने वाली ट्रेन दोपहर 1.41 बजे डोंगरगढ़ पहुंचेगी और 5 मिनट ठहराव के बाद इतवारी के लिए रवाना होगी। इन प्रमुख स्टेशनों में होगा ठहराव कलमना, कामठी, कन्हान, भंडारा रोड, तुमसर रोड, तिरोड़ा, गोंदिया, आमगांव, सालेकसा, दरेकसा, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई नगर, भिलाई पावर हाउस, रायपुर, उरकुरा, तिल्दा नेवरा, भाटापारा, बिल्हा, चकरभाठा, बिलासपुर, अकलतरा, जांजगीर-नैला, चांपा, उरगा सहित कुल 63 स्टेशनों में ट्रेन का ठहराव रहेगा।

मुख्यमंत्री साय का ऐलान—अचल संपत्ति रजिस्ट्री पर उपकर खत्म, खर्च में राहत

  जमीन-मकान की रजिस्ट्री होगी अधिक सरल, सुलभ और कम खर्चीली-वाणिज्यिक कर मंत्री चौधरी छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित रायपुर,  छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को आज ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के पारित होने से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर बाजार मूल्य के आधार पर लगाया जाने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त हो गया है। वाणिज्यिक कर मंत्री ओ पी चौधरी ने बताया कि इस निर्णय से प्रदेश के आम नागरिकों, किसानों, मध्यमवर्गीय परिवारों तथा संपत्ति के क्रय-विक्रय से जुड़े लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।            छत्तीसगढ़ उपकर समाप्त होने से अब संपत्ति पंजीयन की लागत में कमी आएगी। उदाहरण के तौर पर एक करोड़ रुपये के बाजार मूल्य की संपत्ति पर नागरिकों को लगभग 60 हजार रुपये की सीधी बचत होगी, इससे जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक सुलभ, सरल और कम खर्चीली बनेगी। इस अवसर पर विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करते हुए मंत्री चौधरी  ने कहा कि यह विधेयक केवल एक विधिक संशोधन नहीं, बल्कि राज्य सरकार की जनहित, लोककल्याण और कर-व्यवस्था में न्यायपूर्ण सुधार के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का स्पष्ट मत है कि शासन का उद्देश्य केवल राजस्व अर्जित करना नहीं, बल्कि जनता के जीवन को सरल, सुलभ और सम्मानजनक बनाना है।           वाणिज्यिक कर मंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने सितंबर 2025 में जीएसटी 2.0 के माध्यम से आम जनता के उपयोग की वस्तुओं एवं सेवाओं पर व्यापक कर रियायतें प्रदान कीं, जिससे आम नागरिकों की निर्वाह लागत में कमी आई। इसी क्रम में पंजीयन विभाग में भी अनेक ऐतिहासिक, व्यावहारिक और जनहितकारी सुधार किए गए हैं, जिनका उद्देश्य आम जनता पर आर्थिक बोझ कम करना और सेवाओं को सरल बनाना है। उन्होंने बताया कि स्वतः नामांतरण व्यवस्था आम जनता के लिए अत्यंत राहतकारी सिद्ध हुई है। पंजीयन के बाद तत्काल नामांतरण होने से पक्षकारों को आर्थिक बचत के साथ-साथ महीनों चलने वाली नामांतरण प्रक्रिया से मुक्ति मिली है। मई 2025 से अब तक लगभग डेढ़ लाख दस्तावेजों का स्वतः नामांतरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है।           पंजीयन प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए सुगम मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जो संपत्ति की सही भौगोलिक स्थिति सुनिश्चित करने में सहायक है। साथ ही, फर्जी व्यक्ति द्वारा पहचान छुपाकर पंजीयन न कराया जा सके, इसके लिए पंजीयन कार्यालयों में आधार आधारित सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए विभाग द्वारा पंजीयन कार्यालयों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वीजा ऑफिस की तर्ज पर सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत नागरिकों को वातानुकूलित प्रतीक्षालय, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, निःशुल्क वाई-फाई तथा क्यू-आधारित त्वरित पंजीयन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में 10 पंजीयन कार्यालयों को पीपीपी मोड पर स्मार्ट पंजीयन कार्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके बाद अन्य कार्यालयों को भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट कार्यालय बनाया जाएगा।          चौधरी ने बताया कि सरकार ने पंजीयन शुल्क निर्धारण की व्यवस्था में सुधार किया है। पहले संपत्ति के पंजीयन में गाइडलाइन मूल्य एवं बाजार मूल्य से जो अधिक होता था, उसी पर शुल्क लिया जाता था। अब इस व्यवस्था को बदलते हुए पंजीयन शुल्क को आपसी लेनदेन की कीमत के बजाय गाइडलाइन मूल्य से जोड़ा गया है, इससे बड़ी संख्या में परिवारों को राहत मिली है। उदाहरण स्वरूप यदि किसी संपत्ति का गाइडलाइन मूल्य 10 लाख रुपये है, लेकिन दस्तावेज में बैंक ऋण आदि के कारण 25 लाख रुपये अंकित हैं, तो अब शुल्क केवल 10 लाख रुपये पर ही लगेगा। इस निर्णय से राज्य सरकार ने लगभग 170 करोड़ रुपये के राजस्व का त्याग किया है।          चौधरी ने बताया कि पहले परिवारजनों के मध्य दान, बंटवारा और हक-त्याग जैसी रजिस्ट्रियों पर बाजार मूल्य का 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे सरकार ने घटाकर मात्र 500 रुपये कर दिया है, चाहे संपत्ति का मूल्य कितना भी हो। उदाहरण के तौर पर, एक करोड़ रुपये की संपत्ति के दान पर पहले 80 हजार रुपये शुल्क लगता था, जो अब केवल 500 रुपये रह गया है, इससे सामान्य परिवारों और किसानों को व्यापक राहत मिली है। गाइडलाइन मूल्य निर्धारण में भी व्यापक जनहितकारी सुधार किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी भूमि पर भी अत्यधिक मूल्यांकन की स्थिति को समाप्त करते हुए वर्गमीटर आधारित मूल्यांकन व्यवस्था खत्म कर दी गई है और अब मूल्यांकन हेक्टेयर दर से किया जा रहा है, इससे आम जनता को 300 से 400 करोड़ रुपये तक के लाभ का अनुमान है।           मंत्री चौधरी ने बताया किसरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर लागू ढाई गुना मूल्यांकन, शहरों और गाँवों में कई प्रकार के अतिरिक्त मूल्यांकन तथा भूमि पर लगे वृक्षों के अलग मूल्यांकन जैसे प्रावधानों को भी समाप्त किया है, इससे जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम हुआ है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। शहरी मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देते हुए अब फ्लैट का मूल्यांकन सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय केवल बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही बाउंड्री वॉल, प्लिंथ आदि जैसे कारणों से होने वाले अनावश्यक अतिरिक्त मूल्यांकन को भी समाप्त किया गया है।             चौधरी ने बताया कि किसानों के हित में भी सरकार ने महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहले दो-फसली भूमि, नकदी फसल, मछली पालन हेतु तालाब जैसी स्थितियों में अतिरिक्त मूल्यांकन कर आर्थिक भार बढ़ा दिया जाता था। अब इन सभी प्रावधानों को समाप्त कर कृषि भूमि के लेनदेन को अधिक सहज, न्यायसंगत और किफायती बनाया गया है। मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ उपकर अधिनियम, 1982 के अंतर्गत स्थावर संपत्ति के अंतरण पर उपकर का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2023 में तत्कालीन सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन एवं राजीव गांधी मितान क्लब योजना के वित्तपोषण हेतु स्टांप शुल्क के अतिरिक्त 12 प्रतिशत की दर से उपकर अधिरोपित किया गया था। इसके कारण नागरिकों को संपत्ति के पंजीयन पर बाजार मूल्य का लगभग 0.60 प्रतिशत अतिरिक्त भार वहन करना पड़ रहा था।            वाणिज्यिक कर मंत्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान में राजीव गांधी मितान क्लब … Read more

भ्रष्टाचार पर सख्ती: CSEB दफ्तर में ACB की कार्रवाई, जेई, एई और ऑपरेटर गिरफ्तार

जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। यहां एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने CSEB (छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड) के ग्रामीण कार्यालय में छापा मारकर तीन कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, जेई राजेंद्र शुक्ला, एई विजय नोरगे और एक कंप्यूटर ऑपरेटर को 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया। यह रिश्वत एचटी लाइन विस्तार (HT Line Expansion) के लिए एक उपभोक्ता से मांगी गई थी पर उपभोक्ता रिश्वत देना नहीं चाहते थे। बिना रिश्वत के काम नहीं करने पर परेशान होकर उन्होंने एंटी करप्शन ब्यूरो कार्यालय बिलासपुर में मामले की शिकायत की थी। ACB को शिकायत मिली थी कि संबंधित अधिकारी काम के एवज में पैसे की मांग कर रहे हैं। शिकायत की पुष्टि के बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की। केमिकल युक्त नोटों के साथ प्रार्थी को रिश्वत देने बिजली ऑफिस में भेजा। जैसे ही सीएसईबी ग्रामीण कार्यालय में रिश्वत ली गई वैसे ही एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्यालय के बाहर तैनात टीम ने कार्यालय में छापा मारा। छापेमारी में जेई राजेंद्र शुक्ला, एई विजय नोरगे और कंप्यूटर ऑपरेटर को 35 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। एसीबी तीनों से कार्यालय में पूछताछ कर रही है।

छत्तीसगढ़ में 6 दिवसीय फेम ट्रिप संपन्न, रायपुर में पर्यटन को नई दिशा मिली

रायपुर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से राज्य के पर्यटन स्थलों के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से 13 से 18 मार्च तक आयोजित 6 दिवसीय विशेष फेम (FAM) ट्रिप सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। यह आयोजन राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच और पर्यटन को आर्थिक विकास के प्रमुख साधन के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस ट्रिप में देश के विभिन्न राज्यों—दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, ओडिशा, चेन्नई, बेंगलुरु एवं अंडमान-निकोबार से आए लगभग 30 टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट्स ने भाग लिया। इन प्रतिभागियों को दो समूहों में विभाजित कर उत्तर एवं दक्षिण छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया गया, जिससे उन्हें राज्य की विविध पर्यटन संभावनाओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ। उत्तर छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर, मैनपाट, रामगढ़ और जशपुर जैसे स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता एवं इको-टूरिज्म संभावनाओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। वहीं दक्षिण छत्तीसगढ़ में कांगेर घाटी, कोंडागांव, जगदलपुर, चित्रकोट, दंतेवाड़ा, बारसूर एवं धुडमारास जैसे स्थलों के माध्यम से बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक वैभव का अनुभव कराया गया। फेम ट्रिप के दौरान बस्तर स्थित विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात ने प्रतिभागियों को विशेष रूप से आकर्षित किया, जहां उन्होंने बोटिंग के साथ प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया। चित्रकोट के प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन कर उन्होंने आध्यात्मिक अनुभव भी प्राप्त किया। इसके अलावा स्थानीय हाट-बाजारों का भ्रमण कर प्रतिभागियों ने जनजातीय जीवनशैली, पारंपरिक आयोजनों और सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझा, जो छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान है। ऐतिहासिक नगरी बारसूर के बत्तीसा मंदिर एवं प्राचीन गणेश प्रतिमाओं का अवलोकन कर राज्य की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर संभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर पर्यटन विकास, सुरक्षा व्यवस्था एवं बुनियादी सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की, जिससे राज्य में पर्यटन के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण का विश्वास मजबूत हुआ। मैनपाट एवं जशपुर क्षेत्र में इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे मॉडल की संभावनाओं को प्रस्तुत करते हुए राज्य सरकार की योजनाओं और पहल की सराहना की गई। कुनकुरी का गिरजाघर, राजपुरी जलप्रपात तथा केरे विलेज के महुआ होमस्टे जैसे स्थलों ने यह सिद्ध किया कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन के विविध आयाम विकसित किए जा सकते हैं। फेम ट्रिप का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव यह है कि इसमें शामिल टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट्स अपने-अपने राज्यों में छत्तीसगढ़ को एक उभरते हुए और आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में प्रचारित करेंगे। इससे राज्य में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की प्रबल संभावना है। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, खासकर होटल, ट्रांसपोर्ट, गाइड सेवा, हस्तशिल्प एवं स्थानीय बाजारों को सीधा लाभ मिलेगा। जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन के बढ़ने से स्थानीय संस्कृति को संरक्षण एवं पहचान मिलेगी, साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके अतिरिक्त, इस प्रकार के आयोजनों से राज्य की सकारात्मक छवि राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होती है, जिससे निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलता है और पर्यटन अधोसंरचना के विकास को गति मिलती है। समापन समारोह में पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने ट्रैवल पार्टनर्स से छत्तीसगढ़ को देशभर में बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जा रही बेहतर सुविधाओं, सुरक्षित वातावरण और आतिथ्य की परंपरा पर विश्वास जताया। प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने भी प्रतिभागियों से अपने अनुभवों को व्यापक स्तर पर साझा करने और अधिक पर्यटकों को छत्तीसगढ़ लाने में सहयोग करने की अपील की। प्रतिभागियों ने छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए इसे “हिडन जेम” बताया और भविष्य में यहां अधिक पर्यटकों को लाने का भरोसा जताया। यह 6 दिवसीय फेम ट्रिप छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड एवं राज्य सरकार की प्रभावी रणनीति का प्रमाण है, जो राज्य को देश के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

राज्यपाल रमेन डेका से रक्षा महाविद्यालय के अध्ययन दल ने रायपुर में की सौजन्य भेंट

रायपुर  राज्यपाल रमेन डेका से आज रक्षा महाविद्यालय (NDC) नई दिल्ली के अध्ययन दल ने सौजन्य भेंट की। रक्षा महाविद्यालय द्वारा "National Security and Strategic Studies" विषय पर Understanding India Study Tour (UIST)  के अंतर्गत 16 सदस्यों का दल 15 से 20 मार्च तक छत्तीसगढ़ भ्रमण पर था। अपनी यात्रा के अंतिम दिन आज इस दल ने राज्यपाल डेका से मुलाकात की। अध्ययन दल में भारतीय सशस्त्र सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारीगण, मित्र देशों के सेनाधिकारी तथा कुछ सिविल सेवाओं के अधिकारीगण शामिल थे। इस दल ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न पर्यटक स्थलों, जैसे-बारनवापारा अभ्यारण्य, ट्राइबल म्यूजियम, पुरखैती मुक्तांगन, बस्तर के विभिन्न जलप्रताप, कोन्डागांव के शिल्पग्राम इत्यादि का भ्रमण किया।            राज्यपाल डेका ने अध्ययन दल के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ एक सुंदर प्रदेश है। आप सभी दोस्तों और परिवार के सदस्यों को अपने भ्रमण और छत्तीसगढ़ की खूबसूरती के बारे में बताएं, ताकि वे भी पर्यटक के रूप में यहां आ सकें। उन्होंने छत्तीसगढ़ की विशेषताओं के बारे में अध्ययन दल से चर्चा की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यहां पर धान की प्रजातियों को संरक्षित करके रखा गया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की शिल्प कला जैसे ढोकरा आर्ट, वुडन आर्ट, बैम्बु आर्ट के बारे मंे भी चर्चा की। इस प्रदेश में प्रतिभाशाली लोगों की भी कमी नही है, अमेरिका के ह्यूस्टन में छत्तीसगढ़ के हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी सेवाएं दे रहे है। इसके अलावा अमेरिका में बसे छत्तीसगढ़ के प्रवासी लोगों की संस्था नार्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन (NACHA) अमेरिका में स्वदेशी मेले का आयोजन करते है, जहां पर छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन किया जाता है। उन्होंने इस दौरान ऊर्जा के नवीनीकृत स्रोतों को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की बात कही। डेका ने छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के बारे में भी अध्ययन दल को अवगत कराया।           अध्ययन दल के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए छत्तीसगढ़ की सुंदर, संस्कृति, कला और परंपराओं की सराहना की। अध्ययन दल ने छत्तीसगढ़ के आतिथ्य की तारीफ करते हुए कहा कि यहां के लोग सीधे सरल और आत्मीय है। हम सभी को यहां आकर बहुत अच्छा लगा। अध्ययन  दल के सदस्यों ने प्रदेश में संचालित लोककल्याणकारी योजनाओं जैसे महतारी वंदन, कृषक उन्नति योजना, नक्सल पुनर्वास नीति आदि की सराहना की। 

ग्रामीण जल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम – मुख्यमंत्री साय

छत्तीसगढ़ में जल क्रांति का नया अध्याय: जल जीवन मिशन 2.0 पर ऐतिहासिक एमओयू ग्रामीण जल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम – मुख्यमंत्री साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केन्द्र और राज्य के बीच एमओयू कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल की वर्चुअल मौजूदगी में अधिकारियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर कर एक्सचेंज किया।           मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि “हर घर जल” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हुये एमओयू से इन कार्यों में गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के विस्तारित चरण, जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी है। इस चरण में जल सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ जनभागीदारी को भी सुनिश्चित किया जाएगा।               मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 41 लाख 30 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों, यानी लगभग 82.66 प्रतिशत घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। साय ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत दूरस्थ, वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था।            उन्होंने कहा कि मिशन 2.0 के तहत ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही जल संवर्धन, पुनर्भरण तथा योजनाओं के संचालन और रखरखाव को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि इस एमओयू के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक आधारित जल सेवा प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल वितरण और अधिक व्यवस्थित एवं सुदृढ़ होगा।              मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री से 1300 करोड़ रुपये की विशेष स्वीकृति का आग्रह भी किया। इस स्वीकृति से 70 समूह जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 3 हजार से अधिक गांवों तक पेयजल पहुंचाने में मदद मिलेगी। अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि सभी के सहयोग से छत्तीसगढ़ न केवल “हर घर जल” का लक्ष्य हासिल करेगा, बल्कि सतत जल प्रबंधन और ग्रामीण जल शासन में भी नए मानक स्थापित करेगा।                केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने कहा कि आज का दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण है और इस एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ में पाइप लाइन एवं संरचनाओं के माध्यम से प्रत्येक घर में पानी की पहुँच सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को इसके तहत सशक्त अधिकार प्राप्त होंगे और इन संरचनाओं के रख रखाव के लिए वे जिम्मेदार होंगे। पाटिल ने कहा कि जिला प्रशासन के जरिये पंचायत के कार्यों पर निगरानी रखी जाएगी एवं आवश्यकता होने पर सहायता भी करेंगे। उन्होंने बताया कि आज का यह एमओयू जल शक्ति मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन का साझा प्रयास का परिणाम है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर घर स्वच्छ एवं निर्बाध पानी की पहुँच का सपना साकार होगा।            कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश टोप्पो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।