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सफलता की कहानी: पलाश फूल से बढ़ती आजीविका और समृद्धि

सफलता की कहानी: पलाश फूल से बढ़ती आजीविका और समृद्धि रायपुर पलाश (टेसू या ढाक) का फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका और स्वास्थ्य के लिए एक बहुमूल्य संसाधन है। इसके नारंगी-लाल फूलों को जंगल की आग भी कहा जाता है, जो वसंत ऋतु में ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाते हैं। पलाश के फूल, बीज और गोंद (कमरकस) आयुर्वेद में चर्म रोग, पेट के कीड़े, डायबिटीज, और यौन स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्रयुक्त होते हैं। इन औषधीय उत्पादों को बेचकर भी ग्रामीण अपनी आय बढ़ाते हैं। औषधीय और सांस्कृतिक फूल है पलाश               पलाश फूल (ब्यूटिया मोनोस्पर्मा), जिसे टेसू, ढाक या “जंगल की आग” (फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट) भी कहा जाता है, भारत का एक महत्वपूर्ण औषधीय और सांस्कृतिक फूल है। बसंत ऋतु में खिलने वाले इसके आकर्षक नारंगी फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि औषधीय उपयोग, प्राकृतिक होली रंग और त्वचा की देखभाल में भी काम आते हैं। छत्तीसगढ़ के वन मण्डल कटघोरा में पलाश के वृक्ष बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। पसान, केन्दई, जटगा, एतमानगर, कटघोरा, चौतमा और पाली जैसे क्षेत्रों में इसकी भरपूर उपलब्धता है। यहां के आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए लघु वनोपज संग्रहण आजीविका का प्रमुख साधन है। पलाश फूल का संग्रहण मुख्यत मार्च-अप्रैल माह में किया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, रायपुर द्वारा वर्ष 2025 में इसका संग्रहण दर 11.50 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया। यह दर संग्राहकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने में मददगार साबित हुई है। कटघोरा वनमण्डल में पलाश फूल का संग्रहण लगातार बढ़ रहा है          वर्ष 2022-23 में 116 संग्राहकों से 402 क्विंटल, वर्ष 2023-24 में 40 संग्राहकों से 58 क्विंटल,वर्ष 2024-25 में 107 संग्राहकों से 147 क्विंटल और वर्ष 2025-26 में 20 संग्राहकों से 76 क्विंटल संग्रहण किया गया इसके साथ ही साथ पलाश के मूल्य में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में 900 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला पलाश वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इसके बाद संघ मुख्यालय द्वारा इसे 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से विक्रय किया गया, जिससे संग्राहकों को बेहतर लाभ मिला। 20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान             वन धन विकास केंद्र पसान, मोरगा, डोंगानाला, गुरसियां और मानिकपुर के माध्यम से संग्रहण कार्य को संगठित रूप दिया गया है। इन केंद्रों ने स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण, संग्रहण और विपणन में सहयोग प्रदान किया। वर्ष 2025-26 में पलाश फूल संग्रहण करने वाले 20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान किया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जीवन स्तर में सुधार आया। यह पहल शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें लघु वनोपज के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं। ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन पलाश के फूल        पलाश के फूल मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इन्हें पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इन्हें तिजोरी में रखने से धन-समृद्धि बढ़ती है। पलाश के पत्तों से बने पत्तल और दोने शादियों और अन्य आयोजनों में इको.फ्रेंडली विकल्प के रूप में बहुत लोकप्रिय हैं, जो ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन है। आगामी सीजन में कटघोरा वनमण्डल के सभी समितियों में व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को पलाश फूल संग्रहण से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल आजीविका के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि वन संसाधनों का सतत और समुचित उपयोग भी सुनिश्चित होगा। पलाश सिर्फ फूलों की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता,आजीविका और समृद्धि की नई उड़ान की कहानी है।  पलाश के फूलों से प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग          पलाश के फूलों का सबसे बड़ा व्यावसायिक उपयोग होली के लिए प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग बनाने में होता है। आदिवासी और ग्रामीण महिलाएं पलाश ब्रांड के माध्यम से इन फूलों से इको-फ्रेंडली रंग तैयार कर अपनी आजीविका बढ़ा रही हैं।

डिजिटल क्रांति: छत्तीसगढ़ में अब घर बैठे मिलेंगी भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन सेवाएं

राजस्व विभाग की नई पहल ​डिजिटल क्रांति: छत्तीसगढ़ में अब घर बैठे मिलेंगी भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन सुविधाएँ ​रायपुर          मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए भूमि और राजस्व संबंधी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 'सुशासन' के संकल्प को साकार करते हुए, अब नागरिकों को खसरा-बी-1, नामांतरण और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। नागरिकों की सुविधा हमारी प्राथमिकता-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजस्व विभाग की इस डिजिटल पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार तकनीक के माध्यम से शासन को जनता के द्वार तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। राजस्व सेवाओं का डिजिटलीकरण आम आदमी के समय और श्रम की बचत सुनिश्चित करेगा। यह पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। ​ भ्रष्टाचार मुक्त और सुगम राजस्व प्रशासन का लक्ष्य – राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा      राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने जानकारी दी कि विभाग अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन कर रहा है। हमारा उद्देश्य तकनीक के उपयोग से मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आए। 'डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम' (DILMP) के माध्यम से हम राज्य को अत्याधुनिक राजस्व तंत्र प्रदान कर रहे हैं, जिससे नागरिक घर बैठे अपनी भूमि का विवरण प्राप्त कर सकें। ​निःशुल्क डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रति ​मोबाइल ऐप की सुविधा और SMS से अपडेट       ​राजस्व विभाग द्वारा दी जा रही प्रमुख ऑनलाइन सुविधाओं में नागरिक अब ​निःशुल्क    खसरा और बी-1 की डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रति राज्य के किसी भी कोने से कभी भी बिल्कुल मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं। खसरा या बी-1 में किसी भी संशोधन या बदलाव की सूचना सीधे पंजीकृत मोबाइल नंबर पर रियल-टाइम SMS अलर्ट  के माध्यम से प्राप्त होती है, जो किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को रोकने में सहायक है। कृषि ऋण के लिए बैंक में गिरवी रखी गई भूमि की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे खरीद-बिक्री के समय पारदर्शिता बनी रहती है। अब नामांतरण के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ता। उप पंजीयक कार्यालय में पंजीयन होते ही स्वतः नामांतरण प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसी तरह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध विशेष मोबाइल ऐप के जरिए नागरिक कहीं से भी अपने स्मार्टफोन से जमीन का रिकॉर्ड देख और डाउनलोड कर सकते हैं। राजस्व विभाग के इन नवाचारों से छत्तीसगढ़ राज्य राजस्व प्रशासन में एक नई डिजिटल क्रांति का गवाह बन रहा है।       ​       अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित राजस्व प्रशासन DILMP के तहत राज्य की सभी तहसीलों में 'मॉडर्न रिकॉर्ड रूम' स्थापित कर राजस्व प्रशासन को पूरी तरह अत्याधुनिक और पेपरलेस बनाना है। इन सुविधाओं का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना और समय की बचत करना है। डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILMP) ​वर्ष 2008-09 में शुरू हुई। यह केंद्र-प्रवर्तित योजना 1 अप्रैल 2016 से पूर्णतः केंद्रीय योजना के रूप में संचालित है।​ वर्तमान में  राज्य के 20 हज़ार 286 गांवों के खसरा और 19 हज़ार 694 गांवों के नक्शों का कंप्यूटरीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इसके साथ ही, 'प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना' के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कर उन्हें अत्याधुनिक बनाया गया है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों के साथ ऑनलाइन जोड़कर एक एकीकृत नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे काम में गति और सटीकता आई है। ​असर्वेक्षित ग्रामों का सर्वेक्षण         राज्य के 1 हज़ार 89 ग्रामों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 1,018 का नक्शा उपलब्ध कराया गया है। प्रथम चरण में 717 गांवों का और 454 गांवों का द्वितीय चरण में सत्यापन पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही 233 गांवों का डेटा 'भुईयां' एवं 'भू-नक्शा' सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जा चुका है।         ​इसी तरह राज्य की 50 तहसीलों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर राजस्व सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 252 में से 172 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत हैं, जिनमें से 155 का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही राज्य के राजस्व ​कार्यालयों का डिजिटलीकरण एवं इंटरकनेक्टिविटी का कार्य तेजी से किया जा रहा है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को ऑनलाइन कर उन्हें तहसील कार्यालयों के साथ इंटरनेट के माध्यम से जोड़ दिया गया है। ​प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत राज्य के सभी राजस्व ग्रामों के खसरा नक्शों का जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 19,694 गांवों में से 18,959 गांवों में यह कार्य पूर्ण हो चुका है।       इस डिजिटल पहल से आम नागरिकों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिली है और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में स्पष्टता और सुगमता आई है, जो निश्चित रूप से राज्य के चहुंमुखी विकास में सहायक सिद्ध होगी।​

पुलिस विभाग में एक साथ 14 पुलिसकर्मियों का तबादला, जानें किसे कहां किया गया तैनात

रायपुर   छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा मरवाही जिले में एक बार फिर पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। यहां एक साथ 14 पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर के आदेश जारी हुए हैं। यह आदेश एसपी मनोज खेलारी द्वारा जारी किए गए। इसके तहत 5 टीआई (निरीक्षक), 2 सब इंस्पेक्टर (उप-निरीक्षक), 1 एएसआई (सहायक उप-निरीक्षक), 2 प्रधान आरक्षक और 4 आरक्षकों को इधर उधर किया गया है। नए आदेश के मुताबिक, ​ शनिप रात्रे को गौरेला थाना प्रभारी, शैलेंद्र सिंह को मरवाही थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं सिद्धार्थ शुक्ला को यातायात प्रभारी नियुक्त किया गया है, जो जिले की यातायात व्यवस्था को सुधारने का जिम्मा संभालेंगे। प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए अंजना केरकेट्टा को नवगठित अजाक थाना के साथ-साथ महिला थाना प्रभारी का दोहरा दायित्व दिया गया है। इसके साथ ही अजय वारे को शिकायत शाखा का प्रभारी और मनोज हनौतिया को साइबर सेल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गौरतलब है कि जिले में पहली बार अजाक (अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण) थाने का गठन किया गया है, जो विशेष शिकायतों के निवारण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। ​

मोबाइल मेडिकल यूनिट बनी वनांचलों की संजीवनी, साढ़े तीन महीनों में 2000+ ग्रामीणों का हुआ इलाज

​वनांचलों की 'संजीवनी' बनी मोबाइल मेडिकल यूनिट: साढ़े तीन माह में 2000 से अधिक ग्रामीणों का हुआ निःशुल्क उपचार ​विशेष पिछड़ी जनजातियों के द्वार तक पहुँचा अस्पताल  पीएम जनमन योजना से बदली दुर्गम क्षेत्रों की तस्वीर ​रायपुर     छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के लिए शासन की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) एक वरदान साबित हो रही है। 'अस्पताल खुद ग्रामीण के द्वार' की परिकल्पना को साकार करते हुए, इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों को उनके ही मोहल्ले में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। ​पैदल चलने की मजबूरी हुई खत्म    ​पूर्व में इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी कई मील पैदल चलना पड़ता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से संचालित यह यूनिट विशेष पिछड़ी जनजाति 'कमार' बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार और औराई सहित कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में निरंतर कैंप लगा रही है। अब सुदूर बस्तियों के लोगों को शहर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रह गई है। ​एक ही छत के नीचे जांच और दवा      ​इस चलते-फिरते अस्पताल में सुविधाओं का पूरा तामझाम मौजूद है। प्रत्येक यूनिट में एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स और ड्राइवर की दक्ष टीम तैनात रहती है। ​निःशुल्क जांच: बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें मौके पर ही की जाती हैं।अनुभवी डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा सलाह के साथ-साथ मुफ्त दवाइयां भी वितरित की जा रही हैं। ​नियोजित व्यवस्था और मुनादी से सूचना      ​प्रशासन द्वारा कैंप लगाने की तिथि और स्थान एक माह पूर्व ही निर्धारित कर लिया जाता है। ग्रामीणों को समय पर सूचना मिले, इसके लिए गांव-गांव में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवाई जाती है। इससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल में लंबी कतारों और परिवहन के सीमित साधनों के कारण पहले हमारा पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब घर के पास इलाज मिलने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है। ​परंपरा से आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम       ​इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों की सोच पर पड़ा है। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग जो पहले केवल बैगा-गुनिया या पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, अब उनमें आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रति विश्वास जागा है। लोग अब बीमारियों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।

जामगुड़ा में 3 हैंडपंप, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को मिल रहा पानी

जामगुड़ा में 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को मिल रहा पानी स्कूल के नलकूप की जल आवक क्षमता का परीक्षण कर गर्मियों के लिए वैकल्पिक रनिंग वाटर की व्यवस्था की जाएगी, सहायक अभियंता को व्यवस्था के निर्देश कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना से जामगुड़ा में होती है जल की आपूर्ति, ग्रीष्म ऋतु के कारण अभी नहीं भर पा रही टंकी रायपुर बस्तर जिले के पिपलावंड ग्राम पंचायत के जामगुड़ा बसाहट में अभी 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को पानी मिल रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने ग्रीष्म काल में रनिंग वाटर की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए स्कूल परिसर के नलकूप की जल आवक क्षमता का परीक्षण कर 2 हॉर्स-पॉवर का पंप लगाकर स्कूल के साथ ही जामगुड़ा बसाहट में कनेक्शन के निर्देश सहायक अभियंता को दिए हैं।   जल जीवन मिशन के अंतर्गत कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना से जामगुड़ा में पाइपलाइन से जल की आपूर्ति होती है। पहले से संचालित समूह जलप्रदाय योजना में रेट्रोफिटिंग के माध्यम से पिपलावंड में जल आपूर्ति की व्यवस्था बनाई गई है। रेट्रोफिटिंग योजना के तहत यहां 70 लाख 29 हजार रुपए की लागत से 3530 मीटर पाइपलाइन बिछाकर और दो सोलर जलापूर्ति सिस्टम स्थापित कर 237 एफ.एच.टी.सी. (Functional Household Tap Connection) प्रदान किए गए हैं, जिनके काम पूर्ण किए जा चुके हैं। पिपलावण्ड कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना का अंतिम छोर का गांव है, जिसके कारण ग्रीष्म काल में दो महीने टंकी नहीं भरने के कारण पेयजल व्यवस्था बाधित रहती है। अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने जामगुड़ा जाकर व्यवस्थाएं देखीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जगदलपुर परिक्षेत्र के अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने आज पिपलावंड एवं जामगुड़ा का दौरा कर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्थाएं देखीं तथा मैदानी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पेयजल के लिए एक हजार की आबादी वाले पिपलावंड में अभी 14 कार्यरत हैंडपंप, दो पॉवर पंप और दो सोलर पंप हैं। वहीं 300 जनसंख्या वाले गांव के जामगुड़ा बसाहट में 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को पानी मिल रहा है। सरपंच और दुलाय कश्यप से मिलकर जलापूर्ति की जानकारी ली अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने गांव पहुंचकर सरपंच श्री केशवराम बघेल और दुलाय कश्यप से मिलकर पेयजल व्यवस्था की जानकारी ली। दुलाय कश्यप ने बताया कि अमूमन रोड के पार बसे रिश्तेदार द्वारा लूज पाइप से पानी उनके घर तक पहुंचाया जाता है। वह कभी-कभी रोड पार कर पानी लाने जाती है। उन्होंने बताया कि समाज कल्याण विभाग से उसे बैटरीचलित ट्राइसिकल मिली है। इसका उपयोग कर वह पेयजल एवं निस्तारी के लिए अपने रिश्तेदार के निजी नलकूप या 200 मीटर दूर स्कूल के पॉवर पम्प से पानी लाती थी। उनका ट्राइसिकल पिछले दो माह से खराब है। समाज कल्याण विभाग और सरपंच को उन्होंने यह बात बताई है, परंतु सुधार नहीं हो पाने के कारण परेशानी हो रही है।

छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक

सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की बन रही नई पहचान छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक रायपुर हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर होता है। छत्तीसगढ़ में यह दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उनका योगदान पहले से अधिक प्रभावी होता जा रहा है।           राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं लंबे समय से कृषि कार्य, वनोपज संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ने और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में सक्रिय रही हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति निर्माण कार्य, घरेलू सेवाओं और लघु व्यवसायों में तेजी से बढ़ी है। यह बदलाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक पहचान और आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती दे रहा है। इसके बावजूद यह भी सच है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिला श्रमिकों को लंबे समय तक उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। वेतन असमानता, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभों की कमी और पारंपरिक सोच जैसी बाधाएं उनके सामने बनी रहीं।           मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। नई श्रमिक नीतियों के जरिए असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को लागू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। महिला शक्ति केंद्रों को केवल सहायता केंद्र नहीं, बल्कि परामर्श, कानूनी सहयोग और रोजगार मार्गदर्शन के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटर के जरिए हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और पुनर्वास की सुविधा मिल रही है।          राज्य में संचालित विभिन्न योजनाएं महिला श्रमिकों के जीवन में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति के बाद 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे आर्थिक दबाव कम होता है। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है।            महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों को, जिनका कम से कम तीन वर्षों का पंजीयन है, एक लाख रुपये तक की सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।           इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आय के साधन मिलने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है। राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम महिला श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहे हैं। घरेलू कामगारों, ठेका श्रमिकों और हमाल परिवारों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि सक्षम योजना के जरिए विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है।          आज छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिक केवल श्रमशक्ति नहीं रहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। उनकी भूमिका अब सहायक तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने तक पहुंच रही है। योजनाओं की बढ़ती पहुंच और जागरूकता के कारण उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे समाज में उनका सम्मान भी लगातार बढ़ रहा है।            छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों के लिए किए जा रहे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि संवेदनशील नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए सकारात्मक बदलाव संभव है। सुरक्षा, सम्मान और रोजगार के अवसरों के साथ महिला श्रमिक आज राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है। डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर उप संचालक (जनसंपर्क)

महिला आरक्षण बिल पर मंथन: छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में सीएम साय का बड़ा प्रस्ताव

रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए शासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश किया. आंसदी ने चर्चा के लिए 4 घण्टे का समय निर्धारित किया. मुख्यमंत्री साय के प्रस्ताव के बाद नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत अशासकीय संकल्प प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे आसंदी ने अग्राह्य कर दिया. इस पर डॉ. महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री तो निंदा प्रस्ताव लाने वाले थे, लेकिन यह शासकीय संकल्प प्रस्ताव तो निंदा पर नहीं है. इसके साथ ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सदन के बाहर और अंदर सत्ता पक्ष की ओर महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है. प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक लता उसेंडी ने कहा कि महिला आरक्षण पर रुकावट बनने का काम विपक्ष ने किया. महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में गिराने का काम विपक्ष ने किया. महिलाओं की भावनाओं और सम्मान का ख्याल नहीं रखा गया. कांग्रेस का पक्ष रखते हुए अनिला भेड़िया ने कहा कि महिला आरक्षण का कांग्रेस समर्थन करती है. महिला आरक्षण 2029 में लागू किया जाना चाहिए. 2023 में बिल पारित है. इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए. जिन्होंने नारी का अपमान किया उसका विनाश हुआ है. रामायण में माता सीता का हरण और रावण का विनाश नारी अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा और सम्मान का उदाहरण है.

बस्तर की पद्मा के घर लौटी रोशनी: साय सरकार की बिजली बिल समाधान योजना बनी सहारा

रायपुर  छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की जन-कल्याणकारी नीतियां अब धरातल पर बदलाव का पर्याय बनती जा रही हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 उन निर्धन परिवारों के लिए एक बड़ा संबल बनकर उभरी है, जो भारी भरकम बिजली बिल के कारण अंधकार में रहने को मजबूर थे। बस्तर जिले के ग्राम बालेंगा की रहने वाली पद्मा कश्यप की कहानी इस योजना की सफलता और संवेदनशीलता का जीता-जागता उदाहरण है। पद्मा का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। अपने माता-पिता को खो देने के बाद वह घर में अकेली रह गई थीं। सीमित संसाधनों और आय का कोई ठोस जरिया न होने के कारण उनके घर का बिजली बिल धीरे-धीरे बढ़कर 9,000 रुपये तक जा पहुँचा था। एक अनाथ बेटी के लिए इतनी बड़ी राशि का भुगतान करना लगभग असंभव था, जिससे घर की बिजली कटने का डर और अंधेरे का साया उनके भविष्य पर मंडराने लगा था। ऐसे कठिन समय में प्रदेश सरकार की बिजली बिल भुगतान समाधान योजना उनके लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई। इस योजना के अंतर्गत पद्मा को उनके बकाया बिल पर 4,000 रुपये की बड़ी राहत प्रदान की गई, जिससे उनकी आर्थिक चिंता काफी हद तक कम हो गई। इस सहायता ने न केवल उनके घर को फिर से रोशन किया, बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा का अहसास भी कराया। अपनी खुशी जाहिर करते हुए पद्मा कहती हैं कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के इस मानवीय निर्णय ने उनके जैसे कई जरूरतमंदों को सहारा दिया है। आज वह इस योजना की बदौलत अपना बकाया बिल चुकाने में सक्षम हो पाई हैं, जिसके लिए वह मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। यह योजना न केवल वित्तीय राहत दे रही है, बल्कि प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के मन में सरकार के प्रति अटूट विश्वास भी पैदा कर रही है।

हर हाथ को काम, हर श्रमिक को सम्मान: विष्णु देव सरकार की ठोस प्रतिबद्धता

(1 मई अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विशेष) हर हाथ को काम, हर श्रमिक को सम्मान: विष्णु देव सरकार की प्रतिबद्धता छगन लोन्हारे, उप संचालक जंनसंपर्क रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए लगातार आर्थिक मदद दी जा रही है। श्रम विभाग के तीनों मंडल-छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। इसी का परिणाम है कि बीते 02 साल 04 माह में श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगभग 800 करोड़ रूपए डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में अंतरित किए जा चुके हैं। इस वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में श्रमिकों के 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट निजी स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा।  मजदूर दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है। 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस या श्रमिक दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए संकल्प लेना है। यह दिन श्रमिकों के योगदान को याद करने और उनके संघर्षों को सम्मानित करने के लिए भी मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1886 में शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की याद में मनाया जाता है, जहां अनेक श्रमिकों ने 8 घंटे के कार्य दिवस की मांग की थी। सन् 1889 में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में घोषित किया था। इस दिन को मनाने का उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों को सुनिश्चित करना, सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए आवाज बुलंद करना है। भारत में मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत 1923 में चेन्नई (मद्रास) से हुई थी। भारतीय संविधान निर्माण सभा के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर ने श्रमिकों के काम का समय 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे किया। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं को प्रसूति अवकाश की सुविधा उपलब्ध कराई। मुख्यमंत्री साय का मानना है कि श्रम विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो बड़े पैमाने पर श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण भी तकनीक के माध्यम से किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है। प्रदेश के श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि प्रदेश में विष्णु देव सरकार के सुशासन में अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा। श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के हितों में अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार किट योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक कॉपी हेतु सहायता राशि योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित की जा रही है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच है कि हर हाथ को काम इस दिशा में प्रदेश के वाणिज्य उद्योग एवं श्रम विभाग द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। श्रम विभाग के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 256 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।  श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि विष्णु देव के सरकार की सोच है कि हर हाथ को काम मिले उसका उन्हें उचित दाम मिले और हर पेट को अन्न मिले यह हमारी सरकार की आदर्श नीति है। इस नीति को क्रियान्वित करने हेतु राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में 38 भोजन केन्द्र संचालित है। इस योजना के अंतर्गत श्रमिकों को 5 रूपये में गरम भोजन, दाल चावल, सब्जी, आचार प्रदाय किया जा रहा है, जिसका विस्तार चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में समस्त जिलों में किया जा रहा है। श्रमिक आवास की राशि प्रति आवास 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी है। इसी तरह ई-रिक्शा की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए की जाएगी।  उल्लेखनीय है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं तथा 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। एक प्रतिशत उपकर (सेस) से वर्ष 2025-26 में 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि मंडल गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का उपकर संग्रहित हुआ है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में व्यय किए जा चुके हैं। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। श्रम विभाग के अंतर्गत कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं का मुख्य दायित्व श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को भी चिकित्सा हित लाभ उपलब्ध कराया जाता है। कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के लिए 76 करोड़ 38 लाख रूपए का प्रावधान राज्य सरकार द्वारा किया गया है।

प्रयास विद्यालयों के विद्यार्थियों का सीजी बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन

राजधानी के बड़े निजी स्कूलों को टक्कर दिया, प्रदेश का प्रयास विद्यालय प्रयास विद्यालयों के विद्यार्थियों का सीजी बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन 10वीं एवं 12वीं में शत-प्रतिशत सफलता, मेरिट सूची में उल्लेखनीय स्थान 10वीं की छात्रा कु. दीपांशी ने 98.83 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया प्रयास विद्यालयों के 13 विद्यार्थियों ने टॉप-10 में बनाई जगह मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मंत्री रामविचार नेताम ने दी बधाई और शुभकामनाएं छत्तीसगढ़ के ‘प्रयास’ विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सीमित संसाधनों में रचा उत्कृष्टता का इतिहास: प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा रायपुर  छत्तीसगढ़ के आदिम जाति, अनुसूचित जाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग  एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग द्वारा संचालित ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालयों ने इस वर्ष छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में अभूतपूर्व सफलता हासिल कर न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मिसाल कायम की है। विभाग के निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन में सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद इन विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट परिणाम देते हुए बड़े निजी स्कूलों को कड़ी टक्कर दी है। प्रयास विद्यालयों के 13 बच्चों ने सीजी बोर्ड परीक्षा के टॉप-10 में जगह बनाने में सफलता हासिल की है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुल 17 प्रयास विद्यालय संचालित है। जिसमें नक्सल प्रभावित बच्चों से लेकर सभी वर्गों के बच्चें अध्ययनरत है। प्रयास आवासीय विद्यालय के माध्यम से बच्चों को एक नई हौसला मिला है, जो उनके सपनों को साकार करने में सार्थक हो रही है। बतादें कि प्रयास विद्यालय के माध्यम से बच्चों को पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा दी जाति है। साथ ही उच्चस्तर के कोचिंग संस्थाओं से प्रतियोगी परीक्षाओं एनआईटी, आईआईटी, नीट, जेईई एवं अन्य राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। प्रयास विद्यालय के इस सफलता के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, पिछड़ा वर्ग एवं अल्प कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल एवं विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता प्रयास आवासीय विद्यालयों की अवधारणा की सार्थकता को प्रमाणित करती है। आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु किए गए सतत प्रयास की सराहना की हैं। प्रयास आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की यह उपलब्धि राज्य के लिए गौरव का विषय है तथा यह अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगी। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रयास विद्यालय के बच्चों ने सीजी बोर्ड की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। विभाग हमेशा बच्चों के शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे जनजाति बहुल राज्य के लिए यह उपलब्धि न केवल गौरव का विषय है, बल्कि यह दर्शाती है कि सही दिशा, समर्पण और अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी बाधा को पार कर सकती है। यह सफलता शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रही है, जिसकी सराहना पूरे देश में हो रही है। प्रमुख सचिव बोरा ने जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को बताया कि प्रदेश के 50 मेरिट छात्रों में से 13 विद्यार्थी प्रयास विद्यालय के है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस बात के लिए प्रसन्नता जाहिर करते हुए भविष्य में और बेहतर कार्य करने को कहा। बोरा ने बताया कि हायर सेकेंडरी परीक्षा (कक्षा 12वीं) में प्रयास आवासीय विद्यालय के कुल 128 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं। रायपुर स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय, गुडियारी की 19 छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। कोरबा जिले की छात्रा कु. रागिनी कंवर ने 95 प्रतिशत अंक अर्जित कर विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जीव विज्ञान विषय में दो छात्राओं द्वारा 100 में 100 अंक अर्जित किया जाना विशेष उपलब्धि है। हाईस्कूल परीक्षा (कक्षा 10वीं) में भी विद्यार्थियों का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा। कुल 119 छात्राओं में से 48 छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। गणित विषय में 6 विद्यार्थियों ने शत-प्रतिशत अंक अर्जित किए। कु. दीपांशी ने 98.83 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। अनुसूचित जाति वर्ग के प्रयास आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी टॉप 10 मेरिट सूची में 97.5 प्रतिशत अंकों के साथ स्थान अर्जित किया। उल्लेखनीय है कि हाईस्कूल परीक्षा की प्रावीण्य सूची में कुल 42 विद्यार्थियों में से 21 विद्यार्थी आदिम जाति विकास विभाग द्वारा संचालित एकलव्य एवं प्रयास आवासीय विद्यालयों के हैं। इनमें प्रयास आवासीय विद्यालय के 11 विद्यार्थियों ने स्थान प्राप्त किया है, जो विभागीय प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।