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41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत

रायपुर छत्तीसगढ़ में विद्युत टैरिफ के वार्षिक संशोधन के बावजूद  छत्तीसगढ़ सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार को न्यूनतम रखने के लिए कई स्तरों पर राहत और संरक्षण की व्यवस्था की है। विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए औसतन 6.23 प्रतिशत अर्थात लगभग 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि स्वीकृत की गई है, लेकिन राज्य में मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना, बिजली बिल समाधान योजना और पीएम सूर्यघर योजना जैसी पहलों के कारण अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव काफी सीमित रहेगा। गौरतलब है कि विद्युत दरों का निर्धारण छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा किया जाता है, जो एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है। आयोग विद्युत कंपनियों की वार्षिक राजस्व आवश्यकता, उत्पादन लागत, कोयला, ट्रांसमिशन तथा वितरण व्यय सहित विभिन्न आर्थिक पहलुओं का अध्ययन कर दरों का निर्धारण करता है। नए टैरिफ में घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। हालांकि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के कारण प्रदेश के अधिकांश परिवारों पर इसका अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। प्रदेश में लगभग 51 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं। इनमें से 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा 26.5 लाख ऐसे उपभोक्ता, जिनकी मासिक खपत 400 यूनिट तक है, उन्हें 200 यूनिट तक की खपत पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इन राहतों के कारण लगभग 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का प्रभाव शून्य से लेकर मात्र 3.65 प्रतिशत तक ही होगा। किसानों पर अतिरिक्त व्यय भार नहीं राज्य के 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन इसकी प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में किए जाने के कारण किसानों पर इसका अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। कृषि पंपों के स्थायी प्रभार को भी यथावत रखा गया है। सौर ऊर्जा से हजारों परिवारों का बिल हुआ शून्य ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित पीएम सूर्यघर योजना का छत्तीसगढ़ राज्य में तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है। अब तक लगभग 66 हजार उपभोक्ता इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें से 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है। वर्तमान में लगभग 89 हजार घरों में सौर संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है। राज्य सरकार ने आगामी वर्षों में 5 लाख घरों में सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है, जिससे बिजली उपभोग की लागत में कमी आएगी। बिजली बिल समाधान योजना से मिली बड़ी राहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा 12 मार्च 2026 से मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत बीपीएल, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिलों में विशेष राहत प्रदान की जा रही है। बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तथा संपूर्ण सरचार्ज में छूट दी जा रही है। वहीं घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल राशि में 50 प्रतिशत तथा पूरे सरचार्ज में छूट का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही शेष राशि को अधिकतम 60 किस्तों में जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। योजना के तहत अब तक 6 लाख बीपीएल, 1.5 लाख घरेलू तथा 33 हजार कृषि उपभोक्ताओं ने आवेदन किया है। लगभग 1328 करोड़ रुपये के बकाया देयकों का समाधान किया जा चुका है, जिसमें 749 करोड़ रुपये की राहत उपभोक्ताओं को दी गई है। उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने पर भी जोर राज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए स्टील उद्योगों को लोड फैक्टर पर मिलने वाली 25 प्रतिशत छूट को पूर्ववत जारी रखा गया है। इससे राज्य के उद्योग अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक बने रहेंगे और उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों को विशेष राहत बस्तर एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को गैर-घरेलू श्रेणी से घरेलू श्रेणी में शामिल कर विशेष राहत प्रदान की गई है। इससे इन संस्थानों के संचालन व्यय में कमी आएगी। कम बिजली खर्च करने का नया अवसर 10 किलोवाट से अधिक भार वाले घरेलू, गैर-घरेलू, औद्योगिक तथा सार्वजनिक उपयोगिता उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग पर 5 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। वहीं पीक आवर्स में 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत का बेहतर प्रबंधन करने का अवसर मिलेगा। ऊर्जा अधोसंरचना को मजबूत करने बड़ा निवेश राज्य सरकार बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। वर्तमान में 2×660 मेगावाट क्षमता के सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र का कार्य प्रारंभ किया जा चुका है, जिसकी पहली इकाई मार्च 2029 तक शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा मड़वा में 800 मेगावाट क्षमता के नए विद्युत संयंत्र की योजना पर भी कार्य चल रहा है। आगामी वर्षों में 400/132 केवी के 4, 220/132 केवी के 17 तथा 132/33 केवी के 34 नए उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। वहीं वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 106 नए 33/11 केवी उपकेंद्रों का निर्माण जारी है तथा लगभग 300 अतिरिक्त उपकेंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है। उपभोक्ता हित और व्यवस्था दोनों का संतुलन ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उत्पादन एवं वितरण लागत, पूर्व वर्षों के वित्तीय दायित्वों तथा विद्युत अधोसंरचना विस्तार की आवश्यकताओं को देखते हुए किया गया यह संशोधन सीमित दायरे का है। राज्य सरकार ने सब्सिडी, राहत योजनाओं और सौर ऊर्जा कार्यक्रमों के माध्यम से आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखने का प्रयास किया है।

रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कोरबा और जगदलपुर में आधुनिक अधोसंरचना विकसित करने की तैयारी

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन की रिडेवलपमेंट नीति के तहत राज्य के विभिन्न शहरों में पांच प्रमुख रिडेवलपमेंट परियोजनाओं का टेंडर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा जारी कर दिया गया है। शहरी विकास, शासकीय परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग और आधुनिक नागरिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। राज्य शासन ने इन परियोजनाओं के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग तथा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को क्रियान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी है। मंडल द्वारा परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (पीपीआर) और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किए गए हैं। साथ ही निजी डेवलपर्स के चयन हेतु पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई है। 30 जून 2025 को मंत्रिपरिषद ने इन परियोजनाओं को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की थी। इसके बाद 27 मई 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सभी परियोजनाओं के अंतिम स्वरूप पर विस्तृत चर्चा कर अनुमोदन दिया गया। इन परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है तथा वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के अनुसार इनकी अनुमानित कीमत लगभग 250.30 करोड़ रुपये है। योजनाएं रायपुर के बीटीआई रोड शंकर नगर, महासमुंद के क्लब पारा, राजनांदगांव के कैलाश नगर, कोरबा के कटघोरा तथा जगदलपुर के चांदनी चौक फेज-2 क्षेत्र में विकसित की जाएंगी। राजधानी रायपुर की शंकर नगर स्थित परियोजना को विशेष महत्व दिया जा रहा है। बीटीआई ग्राउंड और सिंधु भवन के समीप स्थित यह क्षेत्र शैक्षणिक, प्रशासनिक, व्यावसायिक एवं आवासीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। परियोजना के विकसित होने से आधुनिक अधोसंरचना का विस्तार होगा और शासकीय परिसंपत्तियों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। रिडेवलपमेंट मॉडल के तहत जर्जर और अनुपयोगी सरकारी परिसंपत्तियों के स्थान पर आधुनिक एवं सुव्यवस्थित अधोसंरचना विकसित की जाएगी। इन परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि शासकीय भूमि के मूल्य का उपयोग ही वित्तीय संसाधन के रूप में किया जाएगा। इससे सरकारी भूमि का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित होने के साथ राज्य को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। रिडेवलपमेंट नीति के माध्यम से अनुपयोगी और जर्जर शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक एवं उपयोगी अधोसंरचना में बदला जाएगा, जिससे शहरों की कार्यक्षमता और सौंदर्य दोनों में वृद्धि होगी। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मंडल राज्य में रिडेवलपमेंट की नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहरी क्षेत्रों के समग्र कायाकल्प का प्रयास हैं। विशेष रूप से शंकर नगर स्थित परियोजना राजधानी रायपुर के लिए आदर्श शहरी विकास मॉडल साबित होगी। मंडल के आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने टीएल बैठक में परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अगले चरण की 8 नई रिडेवलपमेंट परियोजनाओं को शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। इससे राज्य में शहरी अधोसंरचना विकास की प्रक्रिया को और गति मिलने की संभावना है।

DMF मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, कारोबारी शाश्वत लुणावत समेत कई ठिकानों पर दबिश

रायपुर. छत्तीसगढ़ में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बड़ी कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में मंगलवार को ईडी ने एक साथ छापेमारी की कार्रवाई शुरू की। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कथित घोटाले की जांच के सिलसिले में की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक ईडी की टीमों ने रायपुर, दुर्ग, धमतरी, अंबिकापुर और महासमुंद सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर दबिश दी है। प्रदेशभर में करीब नौ ठिकानों पर छापेमारी की चर्चा है। कार्रवाई के बाद कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है। कारोबारी शाश्वत लुणावत के निवास पर भी ईडी की दबिश राजधानी रायपुर के वल्लभ नगर स्थित कारोबारी शाश्वत लुणावत के निवास पर भी ईडी की टीम ने सुबह से जांच शुरू की। जानकारी के अनुसार पांच अधिकारियों की टीम कई घंटों से घर के भीतर दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई DMF घोटाले से जुड़े पहलुओं की जांच के तहत की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि शाश्वत लुणावत प्रदेश के एक प्रतिष्ठित परिवार से जुड़े हैं और राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार संचालित करते हैं। ईडी की जांच केवल उनके निवास तक सीमित नहीं है, बल्कि उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की कार्रवाई जारी है। हालांकि ईडी की ओर से फिलहाल आधिकारिक रूप से कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन प्रदेशभर में चल रही इस बड़ी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

बरसात में मछलियों के प्रजनन को बचाने के लिए 15 अगस्त तक नहीं होगी मछली पकड़ने की अनुमति

जगदलपुर. मछलियों के संरक्षण और प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए 16 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है. बरसात का मौसम मछलियों के प्रजनन का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए नदी और नालों में मछली शिकार पर रोक लगाई गई है. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है. दोषी पाए जाने पर कारावास और आर्थिक दंड दोनों हो सकते हैं. हालांकि केज कल्चर गतिविधियों को छूट दी गई है. दूसरे राज्यों से मछली आयात और बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा. व्यापारियों को आयात से जुड़े दस्तावेज साथ रखना अनिवार्य होगा. बरसात में बड़ी संख्या में ग्रामीण मछली पकड़कर आय अर्जित करते हैं. इसी कारण प्रतिबंध अवधि में निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है. मत्स्य विभाग ने नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की है. उद्देश्य आने वाले वर्षों के लिए मत्स्य संसाधनों का संरक्षण करना है.

सामूहिक विवाह से सामाजिक बदलाव की मिसाल बना जगदलपुर, 17 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे

जगदलपुर. जगदलपुर के टाउन हॉल में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह सिर्फ शादी का कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 17 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे. वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच समारोह संपन्न हुआ. कार्यक्रम की सबसे खास तस्वीर दो पूर्व नक्सली जोड़ों की रही. आत्मसमर्पण के बाद दोनों जोड़ों ने गृहस्थ जीवन की नई शुरुआत की. यह कदम पुनर्वास नीति की सफलता के रूप में देखा जा रहा है. योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ा सहारा बन रही है. बेटियों के विवाह का आर्थिक बोझ कम करने में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है. समारोह में नवदंपत्तियों को सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया गया. जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की. बस्तर में शांति और सामाजिक समरसता का संदेश इस आयोजन से स्पष्ट दिखाई दिया. मुख्यधारा से जुड़ने की यह कहानी क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा पर त्वरित कार्रवाई, ग्रामीणों की मांगों को मिली मंजूरी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा पर त्वरित अमल, ग्रामीणों की मांगों को मिली स्वीकृति सुशासन तिहार में किए गए वादे हो रहे पूरे, पंचायत भवन, पीडीएस भवन और मुक्तिधाम निर्माण को मिली मंजूरी रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार केवल जनसंवाद का मंच नहीं, बल्कि जनआकांक्षाओं को शीघ्रता से पूरा करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। आम नागरिकों की समस्याओं और मांगों के त्वरित निराकरण के लिए राज्य शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा सरगुजा प्रवास के दौरान ग्रामीणों की मांगों पर की गई घोषणाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर अमल में लाया गया है। उल्लेखनीय है कि 03 मई 2026 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार के अंतर्गत सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत सिलमा के शांतिपारा पहुंचे थे। जन चौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उन्होंने क्षेत्र की आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली तथा विभिन्न विकास कार्यों की घोषणाएं की थीं। मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अनुरूप जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न निर्माण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की है। ग्राम सिलमा में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन, डीएमएफ मद से 2.50 लाख रुपये की लागत से मुक्तिधाम तथा मनरेगा मद से 11.63 लाख रुपये की लागत से नवीन पीडीएस भवन निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसी प्रकार ग्राम कुनकुरीकला में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणाओं पर त्वरित अमल के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया है। उनका कहना है कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन और प्रशासन सीधे जनता तक पहुंचकर न केवल समस्याएं सुन रहा है, बल्कि उनके समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई भी सुनिश्चित कर रहा है। राज्य शासन की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त मांगों और जनसमस्याओं के निराकरण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे विकास कार्यों का लाभ समय पर आमजन तक पहुंच रहा है और सुशासन की अवधारणा जमीनी स्तर पर साकार हो रही है।

डॉ. वर्णिका शर्मा की पहल रंग लाई, गंभीर रूप से बीमार बालिका को एम्स रायपुर में मिला उपचार

 डॉ .वर्णिका शर्मा की पहल से गंभीर रूप से बीमार बालिका को मिला एम्स रायपुर में उपचार     डॉ. वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर में भर्ती बालिका से की मुलाकात, चिकित्सकों से ली उपचार की विस्तृत जानकारी*  रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा गंभीर रूप से बीमार नाबालिग बालिका जोगेश्वरी कड़की के प्रकरण का संज्ञान लेते हुए उसके बेहतर उपचार हेतु लगातार पहल की गई, जिसके परिणामस्वरूप बालिका को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में उपचार हेतु भर्ती कराया गया है। उल्लेखनीय है कि बालिका की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी प्राप्त होने पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने दिनांक 05 जून 2026 को कलेक्टर, दंतेवाड़ा को पत्र प्रेषित कर बालिका को बेहतर उपचार हेतु तत्काल एम्स रायपुर भेजने तथा आवश्यक चिकित्सकीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। उक्त पत्र की प्रतिलिपि जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ), दंतेवाड़ा को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई थी। इसके अतिरिक्त डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा एम्स रायपुर के डायरेक्टर को भी पत्र लिखकर बालिका को समुचित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने तथा आवश्यक चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया था। आयोग के सतत प्रयासों, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के समन्वय से बालिका को उपचार हेतु एम्स रायपुर लाया गया। दिनांक 15 जून 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा स्वयं एम्स रायपुर पहुंचीं और उपचाररत बालिका से मुलाकात कर उसका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने बालिका एवं उसके परिजनों से चर्चा कर स्वास्थ्य स्थिति, उपचार संबंधी व्यवस्थाओं तथा उनकी आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। दौरे के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एवं संबंधित चिकित्सक दल से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बालिका की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, उपचार की प्रगति, किए जा रहे चिकित्सकीय परीक्षणों तथा आगामी उपचार योजना के संबंध में जानकारी प्राप्त की। चिकित्सकों ने अवगत कराया कि बालिका को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। इस अवसर पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने चिकित्सकीय दल से बालिका के उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहने देने तथा उसे सर्वोत्तम संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बालिका के स्वास्थ्य एवं उपचार से जुड़ा यह मामला आयोग की प्राथमिकता में है तथा आयोग द्वारा उपचार प्रक्रिया की सतत निगरानी की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर आयोग की ओर से हरसंभव सहयोग एवं समन्वय उपलब्ध कराया जाएगा। डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होना उसका अधिकार है तथा छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बच्चों के अधिकारों की रक्षा एवं उनके समग्र कल्याण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

शहरी विकास और पर्यटन पर जोर, दंतेवाड़ा के लिए तैयार होगा नया मास्टर प्लान

दंतेवाड़ा. दंतेवाड़ा को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की कवायद तेज हो गई है. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए शहर का मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. योजना का उद्देश्य यातायात, पार्किंग और स्वच्छता जैसी चुनौतियों का समय रहते समाधान करना है. मां दंतेश्वरी मंदिर के आसपास सुविधाओं का विस्तार भी प्रस्तावित है. नगर विकास को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. नदी प्रदूषण रोकने और सीवरेज प्रबंधन को लेकर भी गंभीर पहल की गई है. भैरम बाबा मंदिर क्षेत्र में नदी कटाव रोकने के निर्देश दिए गए हैं. शहर के चौक-चौराहों का नामकरण महापुरुषों के नाम पर करने की घोषणा हुई है. बच्चों के लिए मनोरंजन सुविधाओं के विस्तार की भी योजना बनाई गई है. इसी क्रम में करीब डेढ़ करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया. नई अधोसंरचनाओं से व्यापार, स्वच्छता और जनसुविधाओं को मजबूती मिलेगी. दंतेवाड़ा को धार्मिक और आधुनिक नगर के रूप में विकसित करने की दिशा में यह अहम कदम माना जा रहा है.

AI मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक है: डेका; समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का शुभारंभ

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहायक है, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं-डेका समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया राज्यपाल ने रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका आज डॉ सी.वी. रमन  विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर डेका ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ तकनीक भी निरंतर विकसित हो रही है। ऐसे समय में तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए होना चाहिए। एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित में करें            राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक युग की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो चिकित्सा, कृषि, अर्थव्यवस्था और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में मानव की सहायक बन सकती है, लेकिन यह मानव बुद्धि, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का स्थान नहीं ले सकती। तकनीक को जीवन में सहायक के रूप में अपनाया जाना चाहिए न कि उसे किसी खतरे के रूप में स्थान दिया जाना चाहिए।  उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित के कार्यों में करें। अपने संबोधन में उन्होंने इंटरनेट के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ नकारात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। डिजिटल एडिक्शन न हो यह कोशिश करनी चाहिए। आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग          राज्यपाल ने कहा कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नवाचार और वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से हुआ है। जिस प्रकार अग्नि की खोज ने मानव जीवन को नई दिशा दी, उसी प्रकार आधुनिक विज्ञान और तकनीक भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। स्टार्टअप और नवाचार केवल आर्थिक प्रगति के साधन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम भी हैं। नवाचार के जरिए दिव्यांगजनों के जीवन को सरल बनाया जा सकता है, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं तथा समाज को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और इको-फ्रेंडली जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपनाना आज की आवश्यकता है।  भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता          छत्तीसगढ़ की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक समृद्ध आदिवासी संस्कृति और अपार संभावनाओं वाला राज्य है। यहां के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और अवसरों से जोड़ने की है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि, वन उत्पाद, उद्योग और सेवा क्षेत्र सहित प्रत्येक क्षेत्र में वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर देना होगा। राज्यपाल ने कहा कि भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।  सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का कर रही है प्रयास           कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई की पढ़ाई प्रारंभ की गई है। जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है इस तरह तकनीकी क्षेत्र में भी राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं। आज कंपनियों को जिस तरह के कोर्स की आवश्यकता है उसी के अनुरूप तकनीकी संस्थानों में कोर्स संचालित करने के प्रयास हो रहे हैं। सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का प्रयास कर रही है जिससे  युवा जाब मांगने वाले नहीं बल्कि  देने वाले बने। राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को दिखाई हरी झंडी            कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने एआई के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव में पद्मअजय मांडवी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपना प्रेरक उदबोधन दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों को एआई की उपयोगिता, संभावनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी देगा, विशेष कर ग्रामीण युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई की निशुल्क व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब तैयार किया गया है। कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन            इस अवसर पर राज्यपाल ने आईसेक्ट के वार्षिक प्रतिवेदन एवं कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालक डॉ. ज्योति बाला गुप्ता  और आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी ने किया।  इस कॉन्क्लेव में विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, उद्योग एवं बैंक के अधिकारी, आईसेक्ट इंडिया गु्रप के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उद्यमी उपस्थित रहे।

नक्सली संगठन के दबाव में हुई नसबंदी, आत्मसमर्पित नक्सलियों का माइक्रोसर्जरी से उपचार

जगदलपुर. बस्तर में पुनर्वास की एक अनोखी पहल ने कई परिवारों के जीवन में नई खुशियां लौटाई हैं. महारानी अस्पताल में आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों के लिए विशेष सर्जिकल शिविर आयोजित किया गया. शिविर में रिवर्स वासेक्टॉमी जैसी जटिल माइक्रोसर्जरी की गई. ये वे लोग हैं, जिन्हें कभी नक्सली संगठन के दबाव में नसबंदी करानी पड़ी थी. देश के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वैच्छिक सेवाएं देकर ऑपरेशन किए. दो चरणों में अब तक 73 सफल सर्जरी पूरी की जा चुकी हैं. इस पहल का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को सामान्य पारिवारिक जीवन लौटाना है. चिकित्सकों ने इसे मानवीय सेवा का अनूठा उदाहरण बताया. अभियान के सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं. कुछ परिवारों में बच्चों की किलकारियां फिर गूंजने लगी हैं. पुलिस और प्रशासन इसे पुनर्वास मॉडल की बड़ी सफलता मान रहे हैं. बस्तर में बंदूक छोड़ चुके लोगों के जीवन में यह पहल नई उम्मीद लेकर आई है.