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तेन्दूपत्ता संग्राहकों को साप्ताहिक खरीदी के तीसरे दिन किया जाएगा भुगतान

रायपुर तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला तेन्दूपत्ता की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने के लिए संग्रहण (मार्च-अप्रैल) से पहले फरवरी-मार्च में वैज्ञानिक तरीके से शाखा-कर्तन किया जाता है। इस प्रक्रिया में झाड़ियों की कटाई-छंटाई की जाती है, जिससे नई कोमल पत्तियां (फड़) निकलती हैं, जो बीड़ी उद्योग के लिए उच्च गुणवत्ता वाली होती हैं।              वनमंडलाधिकारी कोरिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है। यह कार्य ऐसे समय में होता है जब ग्रामीण और संग्राहकों के पास अन्य रोजगार कम होते हैं, इसलिए यह उनके लिए आय का महत्वपूर्ण साधन बनता है। उन्होंने निर्देश दिए कि तेन्दूपत्ता खरीदी का भुगतान साप्ताहिक खरीदी के तीसरे दिन तक अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि संग्राहकों को समय पर लाभ मिल सके। कोरिया वनमंडल अंतर्गत जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित बैकुंठपुर द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य से पहले शाखा-कर्तन (बूटा कटाई) के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला बैकुंठपुर स्थित गेज रोपणी परिसर में आयोजित की गई। इसमें कोरिया वनमंडल के अंतर्गत आने वाली 17 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के 16 इकाइयों के फड़मुंशी, प्रबंधक, पोषक अधिकारी, फड़ अभिरक्षक सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।  तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला             परिक्षेत्र अधिकारी सोनहत जिला कोरिया वनमंडल ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन का कार्य कराया जाता है, जिससे बेहतर गुणवत्ता का पत्ता प्राप्त हो सके। यह कार्य प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से मार्च के प्रथम और द्वितीय सप्ताह में अनिवार्य रूप से पूरा किया जाएगा। साथ ही फड़मुंशी और फड़ अभिरक्षकों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की जानकारी भी दी गई। शाखा-कर्तन कार्य के लिए निर्धारित राशि के अनुसार 70 रुपये प्रति मानक बोरा भुगतान किया जाएगा, जिसका भुगतान समिति के पोषक अधिकारी और प्रबंधक द्वारा संयुक्त रूप से कार्य पूरा होने के तुरंत बाद किया जाएगा। परिक्षेत्र अधिकारी देवगढ़ ने तेन्दूपत्ता बूटा कटाई की तकनीकी जानकारी देते हुए फड़ों के चयन, शाखा-कर्तन की प्रक्रिया, तेन्दूपत्ता तोड़ाई, गड्डी बांधने तथा संग्रहण केंद्र में खरीदी की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति पटना के प्रबंधक ने भी तेन्दूपत्ता संग्रहण से लेकर क्रेता को पत्ता सुपुर्द करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। कार्यक्रम में जिला यूनियन कोरिया के अध्यक्ष ने अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च गुणवत्ता का तेन्दूपत्ता संग्रहित करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर परिक्षेत्र अधिकारी सोनहत अजीत सिंह ने कोरिया वनमंडल की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 के तेन्दूपत्ता सीजन के लिए वनमंडल की सभी लॉट अग्रिम निवर्तन में पहले ही विक्रय हो चुकी हैं इस अवसर पर उप प्रबंध संचालक अखिलेश मिश्रा, तकनीकी अधिकारी सी.पी. पटेल सहित वनमंडल के अधिकारी-कर्मचारी, फड़ अभिरक्षक, फड़मुंशी, समिति के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, अग्रिम क्रेता के प्रतिनिधि और स्व.सहायता समूहों के सदस्य उपस्थित रहे।

त्योहार पर भी कर्तव्य निभाते रहे वनकर्मी, होली पर जंगलों की सुरक्षा में तैनात

रायपुर सोनाखान के जंगलों में लगी आग पर पाया काबू वन केवल हमारी प्रकृति की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि जलवायु संतुलन, जैव विविधता और जीवन के लिए आवश्यक संसाधन भी प्रदान करते हैं। छत्तीसगढ़ के जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वन विभाग लगातार सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में वन अग्नि प्रबंधन को लेकर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।            होली के त्यौहार के दौरान भी वन विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी से अपने दायित्वों का निर्वहन करती रही। जब पूरा प्रदेश होली के उत्सव में व्यस्त था, उस समय वनकर्मी जंगलों को आग से बचाने के लिए फील्ड में तैनात रहे। बीती रात बलौदाबाजार वनमंडल के सोनाखान परिक्षेत्र अंतर्गत कसडोल-कोठारी मार्ग पर देवतराई और पौड़ी के बीच जंगल में आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की।        स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वनमंडलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर स्वयं मौके पर पहुंचे और टीम का नेतृत्व करते हुए आग पर काबू पाया। स्थानीय रेंज अधिकारी और बीट प्रभारियों ने फायर लाइन बनाकर, फायर बीटर और अन्य संसाधनों की मदद से आग को फैलने से रोक दिया। वनमंडलाधिकारी ने मौके पर मौजूद वनकर्मियों का उत्साह बढ़ाते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। वन विभाग का उद्देश्य बेहतर प्रबंधन, जागरूकता और जनसहभागिता के माध्यम से वनों को आग से सुरक्षित रखना और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है।

रायपुर: प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जमुना पाण्डे का घर सौर ऊर्जा से हो रहा रोशन

रायपुर : प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: जमुना पाण्डे का घर सौर ऊर्जा से हो रहा रोशन बिजली बिल से मिली राहत रायपुर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशानुरूप प्रत्येक घरों में छत पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाकर आमजनों को ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से  मुंगेली जिले के अनेक घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं और लोग बिजली खर्च से मुक्त होकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह योजना न केवल नागरिकों को आर्थिक राहत प्रदान कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो रही है।          नगर पंचायत सरगॉव की जमुना पाण्डे ने अपने आवास पर 02 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कराया है। सोलर संयंत्र के चालू होते ही उनका घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहा है। जमुना पाण्डे ने बताया कि सोलर पैनल स्थापना होने से बिजली बिल से राहत मिली है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सरल प्रक्रिया और सब्सिडी सुविधा ने उन्हें सोलर सिस्टम अपनाने के लिए प्रेरित किया। 02 किलोवाट सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद न केवल उनके घर के बिजली बिल में कमी आई है, बल्कि वे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भी अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने इस योजना को आम आदमी के लिए राहत और भविष्य के लिए निवेश बताते हुए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अन्य नागरिकों से भी अपील की कि वे सौर ऊर्जा को अपनाकर न केवल आर्थिक लाभ प्राप्त करें, बल्कि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में सहभागी बनें।            उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापना पर केन्द्र और राज्य शासन द्वारा 30 हजार रूपए से 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। 01 किलोवाट क्षमता पर 45 हजार रुपये, 02 किलोवाट पर 90 हजार रुपये तथा 03 किलोवाट क्षमता के सोलर सिस्टम पर 01 लाख 08 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। यह प्रावधान सोलर ऊर्जा को आम नागरिकों के लिए सुलभ और किफायती बना रहा है। आमजनों को योजना के लिए प्रोत्साहित करने शासन के निर्देशानुसार बैंकों द्वारा कम ब्याज दर पर आसान किश्तों में ऋण की सुविधा प्रदान की जा रही है। इससे आमजनों को योजना का लाभ लेना आसान हो गया है।

दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच, नारायणपुर में 107 ग्रामीणों का इलाज

रायपुर नारायणपुर के सुदूर गांवों में पहुंच रही हैं स्वास्थ्य सेवाएं नारायणपुर जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ग्राम पंचायत घमंडी के आश्रित ग्राम जटवर में सुशासन एक्सप्रेस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान लगाए गए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।            शिविर में ग्राम पंचायत घमंडी के अंतर्गत आने वाले जटवर, घमंडी, कोगालीं, ओरछापार, कारकाबेड़ा, हिकोनार, गोडेलेमाका और वाडापेंदा जैसे गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। दो दिनों तक चले इस शिविर में कुल 107 मरीजों का उपचार किया गया और उन्हें आवश्यक दवाइयों के साथ स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया गया।       स्वास्थ्य जांच के दौरान 84 लोगों की मलेरिया जांच की गई, जिनमें 15 मरीज पॉजिटिव पाए गए। इसके अलावा टीबी स्क्रीनिंग, रक्तचाप, शुगर, हीमोग्लोबिन और नेत्र जांच भी की गई। गर्भवती महिलाओं की विशेष एएनसी जांच कर उन्हें आवश्यक सलाह दी गई, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।            शिविर में मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी, बुखार, खुजली, दस्त, कमजोरी और दर्द से पीड़ित मरीजों को भी उपचार और आवश्यक दवाइयां प्रदान की गईं। साथ ही ग्रामीणों को विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी गई और उन्हें अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर 80 ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के तहत् आयुष्मान कार्ड भी वितरित किए गए।              इस स्वास्थ्य शिविर में 10 सदस्यीय स्वास्थ्य टीम ने सेवाएं दीं, जिसमें डॉ. बृजनंदन बनपुरिया, राजीव सिंह, डॉ. हेमेंद्र जुरी, प्रदीप देवांगन, सूरज साहू, रामनाथ उसेंडी, जयसिंह मांझी, नकुल पोटाई, कमलेश कुमार नाग और कु. चंद्रिका गोटा शामिल थे। शिविर का संचालन उप स्वास्थ्य केंद्र वाडापेंदा के माध्यम से किया गया।              दो दिवसीय सुशासन एक्सप्रेस कार्यक्रम के सफल आयोजन से ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हुईं। इससे न केवल लोगों को समय पर उपचार मिला, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ी। यह पहल दूरस्थ गांवों तक शासन की सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

किसानों की खुशहाली को मिला बल, अंतर राशि से शिक्षा और आवास कार्य को सहारा

रायपुर : कृषक उन्नति योजना से सशक्त हो रहे अन्नदाता किसानों की खुशहाली को मिला बल, अंतर राशि से शिक्षा और आवास कार्य को सहारा रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी प्रभावी नीतियों को अमल में लाया है, जिनसे अन्नदाताओं के जीवन में स्थायी और व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। इन पहलों ने न केवल किसानों की आय और आत्मविश्वास को सुदृढ़ किया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति और मजबूती प्रदान की है। सुशासन की प्रतिबद्धता को साकार करते हुए कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान विक्रय करने वाले किसानों को अंतर राशि का एकमुश्त भुगतान किया गया है।     मुख्यमंत्री  साय की मंशा के अनुरूप यह सुनिश्चित किया गया कि होली पर्व से पूर्व किसानों के खातों में राशि अंतरित की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ त्यौहार हर्षोल्लास और सम्मान के साथ मना सकें। शासन के इस संवेदनशील निर्णय से कोरबा जिले के किसानों में विशेष उत्साह का माहौल है।     कोरबा जिले के ग्राम दादरखुर्द निवासी कृषक श्री शैलेन्द्र कुमार थवाईत ने इस वर्ष लगभग 32 क्विंटल धान का विक्रय किया, जिसके एवज में उन्हें 23 हजार 392 रुपये की अंतर राशि प्राप्त हुई। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय किसानों के हित में है और सही समय पर मिली राशि से उन्हें बड़ी राहत मिली है। वे इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा तथा उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने में करेंगे, जिससे उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि होगी।     इसी प्रकार ग्राम कल्दामार के कृषक जिमी राठिया ने कहा कि होली से पूर्व राशि प्राप्त होना उनके लिए किसी उपहार से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि प्राप्त धनराशि का उपयोग घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति तथा प्रधानमंत्री आवास के निर्माण कार्य में किया जाएगा। शासन द्वारा समयबद्ध भुगतान किए जाने को उन्होंने किसानों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बताया।     कृषकों ने उन्होंने मुख्यमंत्री  साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के इस संवेदनशील और समयबद्ध निर्णय से किसानों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा की भावना बढ़ी है।  सरकार का यह प्रयास किसानों की समृद्धि ही प्रदेश की समग्र प्रगति का आधार है।

धमतरी: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष पहल, ब्रेल पुस्तकें और 3000 से अधिक ऑडियो बुक्स से दिव्यांग महिलाओं का सशक्तिकरण

धमतरी प्रतिवर्ष 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समाज में महिलाओं की उपलब्धियों, उनके अधिकारों और सशक्तिकरण को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है। इसी भावना को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ में दिव्यांग महिलाओं और बालिकाओं के शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल सामने आई है।   राजधानी रायपुर स्थित लोक भवन, सिविल लाइन में  पिछले माह जनवरी में आयोजित एक गरिमामय राज्य स्तरीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका के करकमलों से दो महत्वपूर्ण ब्रेल पुस्तकों—‘दिव्यांग महिलाओं की सफलता की कहानी’ और ‘छत्तीसगढ़ के वीर’—का विमोचन किया गया। साथ ही दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई 3000 से अधिक ऑडियो बुक्स का भी लोकार्पण किया गया। यह पहल विशेष रूप से उन दिव्यांग बालिकाओं और महिलाओं के लिए आशा की नई किरण बनकर सामने आई है, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में शैक्षणिक संसाधनों तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ब्रेल पुस्तकें और ऑडियो बुक्स अब उन्हें शिक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही हैं। कार्यक्रम में धमतरी जिला की समर्पित शिक्षिका श्रीमती प्रीति शांडिल्य को दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट और नवाचारी योगदान के लिए राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया। उनके प्रयासों से ब्रेल पुस्तकों और ऑडियो बुक्स के निर्माण का कार्य गति पकड़ सका, जिससे दृष्टिबाधित बच्चों विशेषकर बालिकाओं के लिए शिक्षा के नए द्वार खुले हैं।  लोकार्पित ऑडियो बुक्स में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के सभी विषयों के पाठ, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष सामग्री, सरगुजिया लोककथाएं, सामान्य ज्ञान, महिला सशक्तिकरण, तथा दिव्यांगजनों के लिए संचालित शासकीय योजनाओं से जुड़ी जानकारी शामिल की गई है। यह सभी सामग्री “वर्ल्ड ऑडियो बुक” यूट्यूब चैनल पर एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गई है, जिससे दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को निःशुल्क और सरल शैक्षणिक संसाधन मिल सकें।      तब राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षकों के इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि सामान्य पुस्तकों को ब्रेल और ऑडियो स्वरूप में उपलब्ध कराना समावेशी शिक्षा की उत्कृष्ट मिसाल है। उन्होंने कहा कि इस पहल को अन्य राज्यों तक भी पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि यह राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श मॉडल बन सके।   इस अभियान की प्रेरणा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित दुर्ग की शिक्षिका के. शारदा को वर्ष 2024 में मिले सम्मान के बाद मिली। 25 अक्टूबर 2024 से शुरू हुए इस अभियान में उन्होंने स्वयं 800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कीं। बाद में विभिन्न जिलों के शिक्षकों के सहयोग से यह संख्या बढ़कर 3100 से अधिक हो गई। पूर्व में के. शारदा और प्रीति शांडिल्य द्वारा संयुक्त रूप से तैयार ब्रेल पुस्तकों को छत्तीसगढ़ के 20 ब्रेल विद्यालयों में 100-100 प्रतियों के रूप में निःशुल्क वितरित किया जा चुका है।  कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले की शिक्षिका प्रीति शांडिल्य सहित सभी शिक्षक साथियों द्वारा दिव्यांगजनों के लिए किया जा रहा यह कार्य अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल शिक्षा को समावेशी बनाती है, बल्कि समाज में संवेदनशीलता, सेवा भावना और सकारात्मक सोच को भी मजबूत करती है।   इस ऑडियो बुक निर्माण अभियान में 30 शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही। राज्यपाल ने सभी योगदानकर्ता शिक्षकों को सम्मानित करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।    महिला दिवस के अवसर पर यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जब महिलाएं शिक्षा और सेवा के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों के लिए कार्य करती हैं, तो परिवर्तन की नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। ब्रेल पुस्तकों और ऑडियो बुक्स के माध्यम से दिव्यांग बालिकाओं और महिलाओं के लिए ज्ञान के द्वार खुल रहे हैं, जो उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की राह दिखा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ HC का बड़ा आदेश: हिंदू रीति से शादी करने वाले ST पर लागू होगा हिंदू मैरिज एक्ट

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करने वाले अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के लोगों को हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए जगदलपुर फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या था। क्या था मामला जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी। इस मामले में एक आदिवासी (ST) पति और अनुसूचित जाति (SC) की पत्नी ने आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दी थी। दोनों ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13बी के तहत विवाह खत्म करने के लिए जगदलपुर की फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन फैमिली कोर्ट ने उनकी अर्जी रद्द कर दी थी। कपल की शादी 15 अप्रैल 2009 को हुई थी और वे अप्रैल 2014 से अलग रह रहे थे। हालांकि, जगदलपुर फैमिली कोर्ट ने 12 अगस्त को उनकी अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 2(2) के अनुसार यह कानून अनुसूचित जनजाति (ST) पर तब तक लागू नहीं होता, जब तक केंद्र सरकार इसकी अधिसूचना न जारी करे। हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी शादी हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि दोनों पक्षों ने साफ कहा था कि उनकी शादी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था और इसमें ‘सप्तपदी’ जैसी पारंपरिक रस्में निभाई गई थीं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वे जनजातीय परंपराओं की बजाय हिंदू परंपराओं का पालन करते हैं। क्या बोला कोर्ट कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि किसी जनजाति के सदस्य स्वेच्छा से हिंदू रीति-रिवाज और परंपराएं अपनाते हैं, तो उन्हें 1955 के अधिनियम के प्रावधानों से बाहर नहीं रखा जा सकता। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 2(2) जनजातीय समुदायों की पारंपरिक प्रथाओं की रक्षा के लिए बनाई गई है, न कि उन लोगों को कानून के दायरे से बाहर रखने के लिए जो हिंदू रीति-रिवाज अपना चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का भी दिया हवाला अपने फैसले में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्णयों का भी हवाला दिया और कहा कि यदि साक्ष्यों से यह साबित होता है कि जनजातीय समुदाय के लोग हिंदू परंपराओं का पालन कर रहे हैं, तो उनकी शादी और उत्तराधिकार जैसे मामलों में उन पर हिंदू कानून लागू होगा।

माओवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई, अमित शाह ने बताया कब तक खत्म होगा खतरा

रायपुर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत के 31 मार्च तक माओवादियों से मुक्त हो जाने का दावा करते हुए शुक्रवार को कहा कि सुरक्षा बल आंध्र प्रदेश के तिरुपति से नेपाल के पशुपति तक लाल गलियारा बनाने का सपना देखने वालों को पराजित करेंगे। शाह ने कटक जिले के मुंडाली में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि सीआईएसएफ प्रमुख प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करके देश की आर्थिक वृद्धि में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, 'आज, मैं राष्ट्र को आश्वस्त करना चाहता हूं कि देश 31 मार्च तक माओवादियों से मुक्त हो जाएगा। हमारी सेनाएं तिरुपति से पशुपति तक लाल गलियारा बनाने का सपना देखने वालों को पराजित करेंगी।' शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा, 'हमारे सुरक्षा बल अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं और देश अब लाल विद्रोहियों का सफाया करने के कगार पर है।' पांच लाख रुपये का इनामी नक्सली ढेर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में पांच लाख रुपये का एक इनामी नक्सली मारा गया है। पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि मुठभेड़ बुधवार रात गीदम पुलिस थाना इलाके के जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में हुई, जब जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर फाइटर्स का एक संयुक्त दल नक्सल विरोधी अभियान पर निकला था। उन्होंने बताया कि मारे गए नक्सली की पहचान बीजापुर जिले के बुरजी गांव के निवासी राजेश पुनेम के रूप में हुई है, जो माओवादियों की भैरमगढ़ एरिया कमेटी का सदस्य था। उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। राय ने बताया कि सुरक्षाबलों को तीन मार्च को गीदम थाना क्षेत्र के गुमलनार, गिरसापारा और नेलगोड़ा के मध्य जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में नक्सली सामग्री और हथियार छिपाए जाने की जानकारी मिली थी। ओडिशा ने बलांगीर, बरगढ़ को नक्सल-मुक्त घोषित किया ओडिशा पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए राज्य के दो पश्चिमी जिलों बलांगीर और बरगढ़ को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किया है। पुलिस महानिदेशक वाई बी खुरानिया ने आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा की कि बलांगीर और बरगढ़ जिले अब नक्सल-मुक्त हो गये हैं। यह घोषणा उस समय की गई जब बरगढ़ से सटे महासमुंद जिले के 15 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। बताया गया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन में सक्रिय थे। उनके मुख्यधारा में लौटने के साथ ही इन दोनों जिलों में नक्सली गतिविधियों के पूरी तरह समाप्त होने की पुष्टि की गई।

छत्तीसगढ़ ने धान खरीद में ‘डेटा-संचालित मॉडल’ से एआई तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किया

रायपुर  छत्तीसगढ़ में धान खरीद व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) द्वारा अपनाई गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि तकनीक का सही दिशा में उपयोग किया जाए, तो न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाएं सुदृढ़ होती हैं, बल्कि सरकारी खजाने को भी बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विजन और मार्कफेड के चेयरमैन जितेंद्र कुमार शुक्ल (IAS) के नेतृत्व में इस तकनीकी पहल के माध्यम से राज्य ने बिना किसी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में कटौती किए, सिस्टम की कमियों को दूर कर लगभग ₹2,780 करोड़ की प्रत्यक्ष बचत सुनिश्चित की है। वित्तीय वर्ष 2025–26 की धान खरीद प्रक्रिया के समापन के बाद आए आंकड़े चौंकाने वाले और सुखद हैं। इस अवधि के दौरान राज्य में कुल 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई, जिस पर सरकार का कुल व्यय ₹43,720 करोड़ रहा। इसके विपरीत, यदि पिछले वित्तीय वर्ष 2024–25 के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो 149.24 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पर लगभग ₹46,500 करोड़ खर्च हुए थे। आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर पता चलता है कि इस बार खरीद की मात्रा में करीब आठ लाख मीट्रिक टन की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी उत्पादन घटने के कारण नहीं, बल्कि गैर-प्रामाणिक प्रविष्टियों, फर्जी पंजीकरण और अन्य सीमावर्ती राज्यों से लाये जाने वाले धान की अवैध रूप से ख़रीदारी पर कड़ाई से लगाए गए नियंत्रण का प्रत्यक्ष परिणाम है। चुनौतियां और तकनीकी समाधान: विगत वर्षों में धान खरीदी के दौरान फर्जी किसान पंजीकरण, रिकॉर्ड में हेराफेरी और भंडारण केंद्रों से धान की चोरी जैसी गंभीर चुनौतियां सामने आती रही थीं। विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, इस विशाल प्रक्रिया में यदि मात्र एक प्रतिशत की भी लीकेज या गड़बड़ी होती है, तो सरकारी खजाने को सालाना कई सौ करोड़ की चपत लगती है। इन्हीं गंभीर चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मार्कफेड ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम 'आईटीआई लिमिटेड' के साथ हाथ मिलाया। आईटीआई लिमिटेड ने इस परियोजना के लिए आवश्यक नेटवर्क प्रबंधन, अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना और निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान कर इस मॉडल को धरातल पर उतारा। ये कैमरे संदिग्ध गतिविधियों को स्वतः पहचानने में सक्षम हैं। रायपुर में एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष के रूप में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किया गया है, जहां लाइव फीड के जरिए पूरे प्रदेश की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर यहीं से तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए जाते हैं। मार्कफेड के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार शुक्ल ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि, “इस प्रणाली ने न केवल वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया है, बल्कि वास्तविक किसानों के हक को भी सुरक्षित किया है। अब बिचौलियों के लिए व्यवस्था में सेंध लगाना लगभग मुश्किल हो गया है।” महज़ ₹48.92 करोड़ की कुल लागत से तैयार इस परियोजना ने निवेश के अनुपात में कई गुना अधिक प्रतिफल (Return on Investment) सुनिश्चित किया है। आईटीआई लिमिटेड के अनुसार, “यह परियोजना 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस (Minimum government, maximum governance)' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। आज छत्तीसगढ़ का यह डेटा-संचालित मॉडल न केवल देश के अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मानक बन गया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि डिजिटल क्रांति कैसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।” छत्तीसगढ़ का यह मॉडल यह स्पष्ट करता है कि पारदर्शी सुशासन के लिए तकनीक का अपनाना अनिवार्य है। ₹2,780 करोड़ की यह बचत न केवल वित्तीय सफलता है, बल्कि यह उन हजारों किसानों की जीत है जिन्हें अब बिना किसी बिचौलिए या परेशानी के उनकी फसल का सही दाम मिल रहा है। यह सफलता 'डिजिटल इंडिया' के सपने को ग्रामीण स्तर पर हकीकत में बदल रही है।

बिलासपुर में पुलिस टीम पर भीड़ का हमला, महिला सिपाही की वर्दी फाड़ी, सात आरोपी गिरफ्तार

बिलासपुर बिलासपुर जिले के बिल्हा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम निपनिया में पुलिस कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। आरोपितों ने पुलिस जवानों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। इस घटना में एक आरक्षक की वर्दी फाड़ दी गई, जबकि कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं। पुलिस ने मामले में सात आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य की तलाश जारी है। मारपीट की शिकायत पर गांव पहुंची थी पुलिस जानकारी के अनुसार बिल्हा पुलिस को होली के दिन सूचना मिली कि पेंडरवा निवासी जलेश्वर साहू के साथ गांव के कुछ युवकों ने मारपीट की है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस की टीम गांव पहुंची और जलेश्वर साहू को अपने साथ थाने ले आई। वह मारपीट के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया कर रहा था। इसी दौरान जलेश्वर साहू की बेटी ने पुलिस को फोन कर बताया कि जिन लोगों ने उसके पिता से मारपीट की थी, वही लोग उसके घर के सामने हंगामा कर रहे हैं। आरोपितों की कार मिली क्षतिग्रस्त सूचना मिलने पर बिल्हा थाना प्रभारी अवनीश पासवान अपनी टीम के साथ गांव के लिए रवाना हुए। रास्ते में निपनिया के पास आरोपित युवकों की कार क्षतिग्रस्त हालत में मिली। पुलिस टीम कार चालक को पकड़कर थाने ले जा रही थी। पुलिस कार्रवाई का विरोध, जवानों से धक्का-मुक्की इसी दौरान गांव में रहने वाले जावेद, अजीम, कार्तिक श्रीवास, पप्पू और अन्य लोग वहां पहुंच गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध करने लगे। आरोपितों ने कार चालक को पुलिस के कब्जे से छुड़ाने की कोशिश की। बताया गया कि जावेद और अजीम ने गांव के श्याम बंसल, राहुल बंसल और अन्य लोगों को भी मौके पर बुला लिया। इसके बाद युवकों ने महिला आरक्षक चंदा यादव से धक्का-मुक्की की। साथ ही दूसरी आरक्षक मौसम साहू की वर्दी फाड़ दी और उनके साथ मारपीट की। बीच-बचाव करने पहुंचे आरक्षक संतोष मरकाम के साथ भी आरोपितों ने मारपीट की। स्थिति को संभालने के दौरान थाना प्रभारी अवनीश पासवान को भी चोटें आईं। अतिरिक्त बल पहुंचते ही भीड़ हुई तितर-बितर घटना की सूचना मिलने पर थाने से अतिरिक्त पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया। पुलिस बल को देखते ही वहां मौजूद भीड़ तितर-बितर हो गई। इसके बाद पुलिस टीम किसी तरह कार चालक को पकड़कर थाने ले आई। थाना प्रभारी की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। घटना में शामिल सात आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य लोगों की तलाश जारी है। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, 4 मार्च को होली ड्यूटी के दौरान पेंडरवा का रहने वाला जलेश्वर साहू शिकायत लेकर थाने पहुंचा था। इसी दौरान उनकी बेटी ने सूचना दी कि कुछ लोग शराब के नशे में उनके घर के पास आकर गाली-गलौज कर रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अवनीश पासवान पेट्रोलिंग टीम के साथ ग्राम पेंडरवा के लिए रवाना हुए। रास्ते में ग्राम निपनिया पीपल चौक के पास एक स्विफ्ट डिजायर कार (CG 10 N 2288) डिवाइडर से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। पुलिस ने आसपास के लोगों की मदद से कार को सड़क से हटवाया। इसके बाद ड्राइवर और गाड़ी को थाने ले जाने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान जावेद, अजिम, कार्तिक श्रीवास और पप्पू वहां पहुंचे और पुलिसकर्मियों से विवाद करने लगे। दोस्तों को बुलाकर पुलिस टीम को घेरा विवाद के दौरान आरोपियों ने अपने अन्य साथियों श्याम बंसल, राहुल बंसल और यश बंसल को भी मौके पर बुला लिया। इसके बाद सभी ने मिलकर पुलिसकर्मियों से बदतमीजी की, अश्लील गाली-गलौज की और सरकारी काम में बाधा डालते हुए मारपीट शुरू कर दी। समझाइश देने पर TI से भी की झूमाझटकी बदमाशों की संख्या अधिक होने के कारण टीआई अवनीश पासवान उन्हें समझाकर शांत कराने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन शराब के नशे में आरोपियों ने उन्हें भी घेर लिया और झूमाझटकी शुरू कर दी। जिससे उनकी कलाई में चोट आ गई। कॉन्स्टेबल की वर्दी फाड़ी, लेडी कॉन्स्टेबल से धक्का-मुक्की हंगामे के दौरान आरोपियों ने कॉन्स्टेबल मौसम साहू की वर्दी फाड़ दी। वहीं लेडी कॉन्स्टेबल चंदा यादव के साथ धक्का-मुक्की की गई। मारपीट में कॉन्स्टेबल संतोष मरकाम घायल हो गए। बाद में किसी तरह पुलिस टीम मौके से निकल पाई। 8 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज इस मामले में TI अवनीश पासवान ने बताया कि जावेद, अजिम, श्याम बंसल, राहुल बंसल, यश बंसल, कार्तिक श्रीवास और पप्पू सहित अन्य साथियों के खिलाफ BNS की धारा 115(2), 121(1), 132, 191(2), 221, 296 और 351(3) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस सभी आरोपियों की तलाश कर रही है।