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प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ में भू-जल संरक्षण कार्यों का किया अध्ययन प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों ने

रायपुर छत्तीसगढ़ में जल एवं मृदा संरक्षण के क्षेत्र में वन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्य अब राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण बनते जा रहे हैं। इन्हीं कार्यों के अध्ययन के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून से भारतीय वन सेवा (IFS) वर्ष 2025-26 बैच के 133 प्रशिक्षु अधिकारी अध्ययन दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। यह दल 8 से 15 मार्च तक प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर वन विभाग द्वारा किए गए भू-जल संरक्षण और जल संवर्धन कार्यों का अध्ययन कर रहे हैं। प्रशिक्षण के पहले चरण में 9 मार्च को दक्षिण सिंगपुर परिक्षेत्र के पम्पार नाला का भ्रमण कराया गया। यहां अधिकारियों को बताया गया कि किस प्रकार तकनीकी उपायों के माध्यम से मिट्टी के कटाव को रोका गया और जल स्तर बढ़ाने में सफलता मिली। इस दौरान अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक शालिनी रैना और मुख्य वन संरक्षक मणिवासगन एस. सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशिक्षु अधिकारियों को क्षेत्रीय कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। धमतरी वनमंडलाधिकारी श्री जाधव श्रीकृष्ण ने बताया कि पम्पार नाला क्षेत्र में ब्रशवुड चेकडेम, लूज बोल्डर संरचना और गेबियन संरचना बनाए गए हैं, जिनसे मिट्टी का कटाव कम हुआ है। साथ ही ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पानी और वन्यजीवों को सालभर जल उपलब्ध होने लगा है। प्रशिक्षु अधिकारियों को बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए उन्हें आठ समूहों में विभाजित किया गया है, जिनका मार्गदर्शन राज्य के विभिन्न जिलों से आए अनुभवी डीएफओ कर रहे हैं। अध्ययन दौरे के दौरान दल कुसुमपानी, कांसा और साजापानी नालों का भी भ्रमण करेगा तथा वनधन विकास केंद्र, दुगली में वन प्रबंधन से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त करेगा। यह अध्ययन दौरा इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और मृदा संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास देश के लिए एक मॉडल बनते जा रहे हैं।

सहायक उपकरण योजना से जीवन में आ रही सहजता

रायपुर प्रदेश में दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को सुगम और सम्मानजनक बनाने के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर सहायता प्रदान की जा रही है। इसी क्रम में सहायक उपकरण प्रदाय योजना के तहत मोहला जिले के ग्राम सोमटोला निवासी 80 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक एवं मांझी समाज प्रमुख  महाजन अठभैया को श्रवण यंत्र और वॉकिंग स्टिक प्रदान की गई। जिला मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह और कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने उन्हें सहायक उपकरण प्रदान किए। श्रवण यंत्र और वॉकिंग स्टिक प्राप्त कर  महाजन अठभैया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन और प्रशासन के प्रति आभार जताया।  शासन की योजनाओं का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक सहायता और सुविधाएं पहुंचाना है। विशेष रूप से दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस प्रकार की योजनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जो उनके जीवन को अधिक सरल और सम्मानजनक बनाती हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सहायक उपकरण प्रदाय योजना के अंतर्गत इस वर्ष प्रदेश में अब तक 1 हजार से अधिक दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण और कृत्रिम अंग प्रदान कर लाभान्वित किया गया है। इनमें श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, व्हीलचेयर और वॉकिंग स्टिक सहित अन्य आवश्यक उपकरण शामिल हैं। राज्य शासन का लक्ष्य है कि प्रदेश के सभी पात्र दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिकों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे, ताकि वे अपने दैनिक जीवन को अधिक सहजता और आत्मसम्मान के साथ जी सकें। इसके लिए प्रशासन द्वारा लगातार शिविरों और कार्यक्रमों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। यह पहल जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई उम्मीद और संबल का संचार कर रही है।  

14 मार्च को बिलासपुर से “गौधाम योजना” का शुभारंभ करेंगे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

प्रदेश के जिलों में 29 गौधाम का होगा उद्घाटन   रायपुर, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में निराश्रित और घुमंतू गौवंश के संरक्षण तथा उनके समुचित व्यवस्थापन के लिए “गौधाम योजना” की शुरुआत की जा रही है। इस योजना का औपचारिक शुभारंभ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 14 मार्च को बिलासपुर जिले के गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय प्रेक्षागार में आयोजित कार्यक्रम से करेंगे। योजना के अंतर्गत राज्य के अन्य जिलों में भी 29 गौधामों का शुभारंभ किया जाएगा। इस अवसर पर कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर पटेल सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहेंगे। उल्लखेनीय है कि गौधाम योजना के तहत राज्य के प्रत्येक विकासखंड में 10 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अनुसार पूरे राज्य में कुल 1460 गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जहां गौवंश के लिए शेड, फेंसिंग, पेयजल, बिजली जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत वर्तमान में शासन द्वारा 36 गौधामों की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें से 29 गौधामों का पंजीयन छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग में हो चुका है। इन गौधामों का औपचारिक शुभारंभ 14 मार्च 2026 को बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड के ग्राम लाखासार से मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा।इस अवसर पर 10 अन्य जिलों में स्थित 28 गौधामों का शुभारंभ वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा। गौधाम योजना  का मुख्य उद्देश्य निराश्रित, घुमंतू और जप्त किए गए गौवंश पशुओं का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित करना है। योजना के तहत उन शासकीय स्थलों का पंजीयन किया जाएगा जहां पहले से पशुधन संरक्षण के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना उपलब्ध है। इन स्थलों का पंजीयन छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग के माध्यम से किया जाएगा। गौधामों का संचालन पंजीकृत गौशाला समितियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, एनजीओ, ट्रस्ट, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों और सहकारी समितियों द्वारा किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा गौधामों के संचालन के लिए विभिन्न मदों में वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके तहत गौवंश के पोषण आहार के लिए पहले वर्ष 10 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु, दूसरे वर्ष 20 रुपये, तीसरे वर्ष 30 रुपये और चौथे वर्ष से 35 रुपये प्रतिदिन की सहायता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त अधोसंरचना निर्माण एवं मरम्मत के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। साथ ही चरवाहों को 10,916 रुपये तथा गौसेवकों को 13,126 रुपये प्रति माह मानदेय प्रदान किया जाएगा। गौधामों में चारा विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रति एकड़ 47 हजार रुपये प्रतिवर्ष की सहायता प्रदान की जाएगी। अधिकतम 5 एकड़ भूमि तक 2.35 लाख रुपये वार्षिक सहायता का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक गौधाम में लगभग 200 गौवंश को रखने की व्यवस्था निर्धारित की गई है। इस योजना से सड़कों और गांवों में घूमने वाले निराश्रित पशुओं की समस्या में कमी आएगी तथा गौवंश संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

मेडिकल कॉलेज रायपुर में शुरू होगी आईवीएफ सुविधा, जरूरतमंद दंपत्तियों को मिलेगा निःशुल्क लाभ

रायपुर मेडिकल कॉलेज रायपुर में शुरू होगी आईवीएफ सुविधा, जरूरतमंद दंपत्तियों को मिलेगा निःशुल्क लाभ प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार और प्रजनन संबंधी सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में राज्य पर्यवेक्षक मंडल की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 एवं एआरटी-सरोगेसी एक्ट 2021 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। मेडिकल कॉलेज रायपुर में शुरू होगी आईवीएफ सुविधा, जरूरतमंद दंपत्तियों को मिलेगा निःशुल्क लाभ बैठक में विधायक सु लता उसेंडी (कोंडागांव), मती रायमुनी भगत और मती गोमती साय सहित स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, आयुक्त शिक्षा रितेश अग्रवाल और अन्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक के दौरान संचालक महामारी नियंत्रण डॉ. सुरेन्द्र पामभोई ने दोनों अधिनियमों के प्रावधानों की जानकारी देते हुए प्रदेश में इनके क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में पीसीपीएनडीटी और एआरटी एक्ट का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि लिंग चयन जैसी अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। बैठक में लिंगानुपात की स्थिति सुधारने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। मंत्री  जायसवाल ने निर्देश दिए कि प्रदेश में सर्वाधिक और न्यूनतम सेक्स रेशियो वाले तीन-तीन जिलों का विस्तृत अध्ययन कराया जाए, ताकि असमानता के कारणों का पता लगाकर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेश में सोनोग्राफी सेवाओं की कमी को देखते हुए एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए छह माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिक से अधिक प्रतिभागियों को शामिल करने के निर्देश भी दिए, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में भी यह सुविधा उपलब्ध हो सके। बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रदेश में संचालित आईवीएफ और सरोगेसी केंद्रों की नियमित निगरानी और निरीक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि संबंधित हितग्राहियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। स्वास्थ्य मंत्री ने बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में गरीब और आमजन को बेहतर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी क्रम में पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, रायपुर में शीघ्र ही आईवीएफ सुविधा प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है, जिससे जरूरतमंद दंपत्तियों को निःशुल्क लाभ मिल सकेगा।

पानी की किल्लत पर पालिका सतर्क: नई टंकी चालू, टुल्लू पंप इस्तेमाल करने वालों को चेतावनी

बालोद मार्च का महीना आधा बीतते ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। इसी भीषण गर्मी में पानी संकट से निपटने के लिए बालोद नगर पालिका ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्य नगर पालिका अधिकारी मोबिन अली ने इस गर्मी में पानी की कोई समस्या न होने का आश्वासन दिया है। नगर पालिका ने खराब पानी के टैंकरों की मरम्मत करवा ली है। शहर में एक नया पानी टंकी भी आम जनता के लिए खोला जा रहा है। इससे वार्ड क्रमांक 14 और 15 सहित प्रमुख क्षेत्रों को शुद्ध पानी मिल सकेगा। कुंदरू पारा के नए पानी टंकी का परीक्षण शुरू हो चुका है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने बताया कि पेयजल व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई हैं। उन्होंने टुल्लू पंप चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने मीडिया के सामने जल्द ही बड़ी कार्रवाई की बात कही। टुल्लू पंप से पेयजल व्यवस्थाएं बाधित होती हैं। एक जगह पानी की चोरी से दस घर प्रभावित होते हैं। टुल्लू पंप पर कड़ी कार्रवाई मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने स्पष्ट किया कि टुल्लू पंप लगाने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए एक टीम भी बनाई गई है जो जल्द ही मैदान में उतरेगी। उन्होंने जनता से टुल्लू पंप का उपयोग बंद करने की अपील की है। कार्रवाई के तहत नल कनेक्शन काटने के साथ-साथ जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। अन्य जल स्रोतों पर निर्भरता बालोद नगर पालिका जलावर्धन योजना के तहत जलाशय से पानी प्राप्त करती है। गर्मी में जलाशय का जल स्तर कम हो जाता है क्योंकि इसका उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और उद्योगों के लिए भी होता है। इसलिए नगर पालिका ने जलाशय पर निर्भरता कम की है। भूमिगत जल स्रोतों की मरम्मत कर उन्हें सक्रिय कर दिया गया है।

‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ मैनपाट में विकसित होगा आधुनिक पर्यटन–आवासीय परिसर

मैनपाट में 4.80 हेक्टेयर भूमि आवंटित, पर्यटन को मिलेगा नया आयाम रायपुर, छत्तीसगढ़ के ‘शिमला’ नाम से प्रसिद्ध मैनपाट में पर्यटन सुविधाओं और आवासीय विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार द्वारा मैनपाट में 4.80 हेक्टर (12 एकड़) भूमि अटल विहार योजना हेतु छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को आवंटित की गई है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि इस भूमि पर आधुनिक एवं बहुउपयोगी पर्यटन–आवासीय परिसर का निर्माण शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। प्राकृतिक परिवेश के अनुरूप विकसित होने वाली यह परियोजना मैनपाट आने वाले पर्यटकों को बेहतर, सुरक्षित और किफायती ठहराव उपलब्ध कराएगी। सिंह देव ने कहा कि यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के सक्रिय प्रयासों से संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि मैनपाट में लगातार बढ़ते पर्यटक आगमन को देखते हुए इस तरह की सुविधाओं की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। प्रस्तावित परिसर में आधुनिक वेलनेस एवं मनोरंजन सुविधाएँ विकसित की जाएंगी। सिंह देव ने बताया कि परियोजना में केरल मॉडल पर आधारित वेलनेस सेंटर, प्राकृतिक पंचकर्म चिकित्सा, हर्बल स्पा और आयुष सेवाएं प्रस्तावित हैं। साथ ही 24×7 क्लब हाउस, मिलेट्स कैफे, जिम, स्विमिंग पूल, किड्स प्ले एरिया, स्टीम बाथ और एंटरटेनमेंट ज़ोन विकसित किए जाएंगे। पर्यावरण अनुकूल विकास के तहत ट्री हाउस, कॉटेज और स्थानीय जीवन एवं संस्कृति का अनुभव कराने वाला सांस्कृतिक क्षेत्र भी शामिल होगा। उन्होंने कहा कि परियोजना से मैनपाट में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होंगे और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नई संभावनाएं खुलेंगी। गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधा उपलब्ध होने से पर्यटकों का ठहराव समय बढ़ेगा, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मैनपाट छत्तीसगढ़ का विशिष्ट एवं उभरता हुआ पर्यटन गंतव्य है। तेजी से बढ़ रही पर्यटक संख्या को देखते हुए यहाँ आधुनिक सुविधाओं का विकास अत्यावश्यक है। हाउसिंग बोर्ड की यह पहल पर्यटन, आवास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी तथा मैनपाट को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित करेगी। पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना को छत्तीसगढ़ के पर्यटन विस्तार के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के विकास से पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा और राज्य का हॉस्पिटैलिटी सेक्टर मजबूत होगा। सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने इसे मैनपाट के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह परियोजना स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं व्यापार के अवसर उपलब्ध कराएगी और क्षेत्र की पहचान को नई ऊँचाई देगी। अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि यह पहल छत्तीसगढ़ में पर्यटन–आवास विकास के क्षेत्र में गृह निर्माण मंडल की ऐतिहासिक भूमिका को मजबूत करेगी और भविष्य में मैनपाट को एक प्रमुख राष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने का आधार बनेगी।  

आज से शुरू हो रहा स्वदेशी मेला, सीएम विष्णु देव साय की मौजूदगी में होगा उद्घाटन

 भिलाई  स्वदेशी जागरण फाउंडेशन की इकाई भारतीय विपणन विकास केंद्र CBMD द्वारा आयोजित होने वाले स्वदेशी मेले का भव्य शुभारंभ जयंती स्टेडियम के सामने मैदान में शुक्रवार शाम 7 बजे किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे और मेले का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। अध्यक्षता कैबिनेट मंत्री राम विचार नेताम करेंगे। कार्यक्रम में विशेष अतिथि कैबिनेट मंत्री टंक राम वर्मा, विशिष्ट अतिथि प्रेम प्रकाश पांडेय-पूर्व विधानसभा अध्यक्ष छत्तीसगढ़, विधायक ललित चंद्राकर, रिकेश सेन, देवेंद्र यादव, महापौर नगर निगम भिलाई नीरज पाल, महापौर नगर निगम दुर्ग अलका बाघमार, दीपक शर्मा अखिल भारतीय विचार विभाग प्रमुख, जगदीश पटेल, प्रांत संयोजक स्वदेशी जागरण मंच, अमर बंसल प्रांत स्वदेशी मेला प्रमुख, सतीश थोरानी अध्यक्ष छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ़ कॉमर्स उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, व्यापारी वर्ग, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में शहरवासी उपस्थित रहेंगे। स्वदेशी मेला प्रांत प्रमुख अमर बंसल, प्रबंधक सुब्रत चाकी, मेला संयोजक अजय भसीन ने बताया कि मेला स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने, स्थानीय उद्यमियों को मंच प्रदान करने और भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। मेले में 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें स्वदेशी उत्पाद, हस्तशिल्प, वस्त्र, घरेलू उद्योग, दैनिक उपयोग की सामग्री सहित कई नवाचारपूर्ण उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री की जाएगी। मेले में आने वाले लोगों के लिए मनोरंजन के विशेष आकर्षण भी रखे गए हैं। बच्चों और परिवारों के लिए आकर्षक झूले एवं मनोरंजन गतिविधियाँ उपलब्ध रहेंगी। इसके साथ ही स्वाद प्रेमियों के लिए एक विशेष फूड जोन बनाया गया है, जहाँ विभिन्न प्रकार के पारंपरिक और आधुनिक व्यंजन उपलब्ध होंगे। इसके अलावा मेले में ऑटोमोबाइल जोन भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा, जहाँ विभिन्न कंपनियों के नवीनतम वाहनों और तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। स्वागत समिति के अध्यक्ष दिनकर बसोतिया ने बताया कि स्वदेशी मेले में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, कला और परंपराओं की भी झलक देखने को मिलेगी, जिससे यह आयोजन केवल व्यापारिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक उत्सव का रूप लेगा। विपणन प्रबंधक जीआर जगत व जयेश पांचाल ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अपने परिवार और मित्रों के साथ मेले में पहुँचकर स्वदेशी उत्पादों को अपनाने, स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने में सहभागी बनें। मीडिया प्रभारी शंकर सचदेव के मुताबिक मेला काफी रोमांचक होने वाला है। शहरवासियों से अपील की गई कि परिवार संग जरूर आएं।

अफीम की खेती के खिलाफ कड़ा एक्शन, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिए सख्त निर्देश

संलिप्त लोगों के विरुद्ध की गई कड़ी कार्रवाई रायपुर, प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य में किसी भी कीमत पर अवैध मादक पदार्थों की खेती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने शासन और प्रशासन के सभी अधिकारियों को इस मामले की गंभीरता से जांच करने तथा इसमें संलिप्त लोगों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के परिपालन में आयुक्त, भू-अभिलेख छत्तीसगढ़ द्वारा सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी करते हुए कहा गया है कि अपने-अपने जिलों के संवेदनशील एवं संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराया जाए। कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि 15 दिवस के भीतर सर्वे पूर्ण कर अपने हस्ताक्षर से प्रमाण पत्र सहित विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजें, जिसमें यह स्पष्ट उल्लेख हो कि जिले में कहीं भी अवैध रूप से अफीम की खेती तो नहीं की जा रही है। प्रदेश में हाल ही में कुछ स्थानों पर अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आए हैं, जिन पर प्रशासन ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई की है। दुर्ग जिले के समोदा गांव में अवैध अफीम की खेती के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में अफीम के पौधों को जब्त कर नष्ट किया गया तथा आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।अवैध क़ब्ज़े के जेसीबी मशीन से हटाया गया । इसी प्रकार बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कोरंधा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तुर्रीपानी (खजुरी) में राजस्व, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा कार्रवाई करते हुए लगभग 1.47 एकड़ भूमि पर की जा रही अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़ किया गया। कार्रवाई के दौरान करीब 18 क्विंटल 83 किलोग्राम अफीम के पौधे (लगभग 2 करोड़ रुपये मूल्य) जब्त किए गए तथा दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 एवं 18 के तहत मामला दर्ज किया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अवैध मादक पदार्थों की खेती, भंडारण, परिवहन या कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

14 मार्च तक चुकाएं ई-चालान, नहीं तो लोक अदालत आदेशानुसार वाहन जब्त किए जाएंगे

रायपुर   अगर आपके वाहन का भी ई-चालान लंबे समय से लंबित है तो 14 मार्च की तारीख आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राजधानी समेत पूरे प्रदेश में इस दिन लोक अदालत का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यातायात पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि यह बकाया जुर्माना भरने का अंतिम अवसर है। इसके बाद पुलिस का डंडा चलना तय है। न्यायालय और पुलिस विभाग के समन्वय से आयोजित होने वाली यह लोक अदालत भौतिक और वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से संचालित होगी। रायपुर में अब तक छह हजार से अधिक ई-चालानों का पंजीयन किया जा चुका है। जो लोग कोर्ट नहीं पहुंच सकते, वे आनलाइन माध्यम से भी अपने मामलों का निराकरण करा सकेंगे। 135 दिन की मियाद खत्म, अब होगी सख्ती पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वाहन चालकों को चालान भरने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। नियमतः प्रथम 90 दिन पोर्टल पर भुगतान का समय दिया जाता है। इसके बाद अगले 45 दिनों में मामला कोर्ट ट्रांसफर होने के बाद की मोहलत मिलती है। कुल 135 दिनों की अवधि बीत जाने के बाद भी जुर्माना न भरने वालों के वाहन जब्त किए जाएंगे। 15 अक्टूबर से पहले जारी हुए चालानों का होगा निपटारा इस लोक अदालत में केवल उन्हीं ई-चालानों को शामिल किया गया है, जो 15 अक्टूबर 2025 से पहले जारी हुए हैं और वर्तमान में न्यायालय में लंबित हैं। यातायात पुलिस द्वारा संबंधित वाहन मालिकों को मोबाइल काल और व्हाट्सएप के माध्यम से लगातार सूचनाएं भेजी जा रही हैं, ताकि वे इस अवसर का लाभ उठा सकें। यातायात पुलिस के अधिकारियों ने अपील की है कि 14 मार्च को लोक अदालत में पहुंचकर अपने लंबित चालानों का निराकरण कराएं। इसके बाद बिना किसी रियायत के सघन चेकिंग अभियान चलाकर गाड़ियां जब्त की जाएंगी।

भारतीय संस्कृति में धरती मां समान, प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा, प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री रायपुर  छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और अब हमारा राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हरित सम्मेलन की उपयोगिता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसके माध्यम से पॉलिसी मेकिंग से जुड़े लोग, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थान, शोधकर्ता और पर्यावरणविद एक मंच पर आकर महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु संकट लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह आवश्यक है कि हम पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर केवल चिंतन ही न करें, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतारें। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार हमेशा से विरासत के साथ विकास की पक्षधर रही है। पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली हमारी हजारों वर्षों पुरानी परंपरा रही है और उसकी रक्षा के लिए सरकार नीतिगत स्तर पर लगातार ठोस कदम उठा रही है।    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की नीतियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों की जागरूकता और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी का परिणाम है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य में सोलर रूफटॉप योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को ऊर्जादाता बनाया जा रहा है और बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं उभर रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए संसाधनों का उपयोग करते समय पर्यावरण और धरती के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है और लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है।  साय ने बताया कि वनांचल में वृक्षों को सरना (देवता) के रूप में पूजा जाता है और सरना को राजस्व रिकॉर्ड में भी देवस्थल के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव और उसके संरक्षण का भाव जनजातीय समाज से सहज ही सीखा जा सकता है। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में हरित पहल पर विशेष जोर दिया गया है और इस दिशा में कार्य करने वाले उद्योगों को विशेष रियायतें भी दी जा रही हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट के मंच से प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने तथा इसकी शुरुआत स्वयं से करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों के संकलन पर आधारित पुस्तक “एब्स्ट्रेक्ट”, सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं पर आधारित “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” तथा जनजातीय कहानियों और परम्पराओं पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” का विमोचन किया। इस अवसर पर मेघालय के लोकायुक्त  सी पी मारक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, पीसीसीएफ  व्ही निवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष  शंखदीप चौधरी, विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, प्रबुद्धजन, स्कॉलर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।