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राजनांदगांव में 31 तक नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के कारण 14 यात्री ट्रेनें रद्द

राजनांदगांव. राजनांदगांव नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के कारण 24 से 31 जनवरी तक कई यात्री ट्रेनें कैंसिल रहेगी। राजनांदगांव-कलमना तीसरी रेल लाइन को तुमसर यार्ड से जोड़ने कार्य चलेगा। इस कारण कई ट्रेनें कैंसिल रहेगी तो वहीं कुछ देरी से रवाना होगी और गंतव्य से पहले समाप्त होगी। ऐसे में दुर्ग से नागपुर के बीच रेल यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। सप्ताहभर रेल यात्रियों को अपनी यात्रा पूरी करने दूसरे विकल्पों का सहारा लेना पड़ेगा। वहीं जो ट्रेनें चलेगी उसमें दबाव बढ़ने के कारण यात्रियों को कष्टदायक यात्रा करनी पड़ सकती है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर रेल मंडल में राजनांदगांव-कलमना तीसरी रेल लाइन परियोजना अंतर्गत अधोसंरचना विकास कार्य प्रगति पर है। यह परियोजना भविष्य में यात्री सुविधाओं के विस्तार, नई ट्रेनों के परिचालन तथा ट्रेनों की समय बद्धता बढ़ाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसी क्रम में तुमसर रोड यार्ड पर राजनांदगांव-नागपुर तीसरी लाइन परियोजना से संबंधित नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा। इस कार्य के कारण 24 से 31 जनवरी तक कुछ यात्री गाड़ियों के परिचालन पर प्रभाव पड़ेगा। जिससे यात्रियों की परेशानी और बढ़ सकती है। दुर्ग से गोंदिया और इतवारी तक इन ट्रेनों को किया रद्द रेलवे ने 24 से 31 जनवरी तक गाड़ी संख्या 58817 तुमसर रोड-तिरोडी पैसेंजर, 58816 तिरोडी-तुमसर रोड पैसेंजर, 58815 इतवारी-तिरोडी पैसेंजर, 58818 तिरोडी-तुमसर रोड पैसेंजर, 68715 बालाघाट- इतवारी तिरोडी मेमू, 68714 इतवारी- बालाघाट मेमू कैंसिल रहेगी। 28 से 31 जनवरी तक 68741 दुर्ग-गोंदिया मेमू, 68743 गोंदिया-इतवारी मेमू, 68744 इतवारी- गोंदिया मेमू, 68742 गोंदिया-दुर्ग मेमू, 68711 डोंगरगढ़- गोंदिया मेमू, 68713 गोंदिया- इतवारी मेमू, 68716 इतवारी- गोंदिया मेमू, 68712 गोंदिया-डोंगरगढ़ मेमू को कैंसिल किया गया है।

रायपुर पुलिस कमिश्नर की दौड़ में रामगोपाल गर्ग सबसे आगे

रायपुर. विष्णुदेव साय सरकार ने रायपुर में पुलिस कमिश्नर बिठाने का फैसला कर लिया था और आज शाम को राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद सेटअप के हिसाब से आईपीएस अफसरों की कुर्सी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि यह लिस्ट थोड़ी लंबी हो सकती है, क्योंकि पुलिस कमिश्नर के साथ कुंछ जिले के आईजी और पुलिस अधीक्षक भी प्रभावित हो सकते हैं। पुलिस कमिश्नर के रूप में दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग का नाम सबसे आगे है। सटीक अनुमान गर्ग पर भी लगाया नहीं जा सकता क्योंकि अमरेश मिश्रा तेज तर्रार अफसर माने जाते है, उनकी पुलिसिंग करने की तारीफ शासन द्वारा भी की जा चुकी है। अगर इनका आदेश जारी हुआ तो दुर्ग आईजी बदलना तय माना जा रहा है। इनके अलावा भी एकाध आईजी प्रभावित हो सकते हैं। बहरहाल, जिस रेंज के आईजी को कमिश्नर बनाया जाएगा, वहां नए आईजी की पोस्टिंग की जाएगी। पुलिस कमिश्नर के बाद सबसे ज्यादा चर्चा रायपुर ग्रामीण एसपी की तैनाती की हो रही है। इसके लिए अटकल लगाई जा रही है कि किसी प्रमोटिव आईपीएस अफसर को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है, यह अफसर डीआईजी स्तर का होगा। रायपुर पुलिस जोन में आईजी रहेंगे और वर्तमान आईजी अमरेश मिश्रा को ही यह प्रभार दिया जाएगा। ग्रामीण रेंज में रायपुर ग्रामीण, बलौदाबाजार, धमतरी, महासमुंद और गरियाबंद जिले रहेंगे। याने अमरेश मिश्रा के प्रभार में पांच जिले यथावत रहेंगे।

अंगदान को मिले राजकीय सम्मान की मांग: डॉ. रमन सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र”

अंगदान को मिले राजकीय सम्मान” विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र मृत्योपरांत अंगदान को बढ़ावा देने से चिकित्सीय क्षेत्र और मानवता का उत्थान संभव : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का मुख्यमंत्री से राजकीय सम्मान देने का आग्रह रायपुर,  छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने राज्य में अंगदान को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और मानवीय पहल करते हुए माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर यह आग्रह किया है कि मृत्योपरांत अंगदान करने वाले व्यक्तियों को “राजकीय सम्मान” प्रदान करने की नीति पर गंभीरता से विचार किया जाए। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने पत्र में श्री सुरेश खांडवे (अध्यक्ष सर्वधर्म सेवा संस्था, भिलाई) की माँग को आगे बढ़ाते हुए उल्लेख किया है कि देश में अंगदान की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। वर्तमान में प्रति 10 लाख जनसंख्या पर मात्र 0.34 प्रतिशत लोग ही अंगदान कर रहे हैं, जबकि आँख, किडनी, लीवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों की अनुपलब्धता के कारण हर वर्ष लाखों लोगों की असमय मृत्यु हो जाती है। यदि अंगदान को सामाजिक सम्मान और सरकारी मान्यता मिले, तो इस संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉ. रमन सिंह ने पत्र में यह भी लिखा है कि छत्तीसगढ़ राज्य अंगदान के मामले में देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में पीछे है, जबकि तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों ने अंगदाताओं को राजकीय सम्मान देने की घोषणा कर उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इन राज्यों में इस निर्णय के बाद अंगदान के प्रति जनजागरूकता और सहभागिता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। विधानसभा अध्यक्ष ने अपने पत्र में यह भी बताया कि सर्वधर्म सेवा संस्था, (छ.ग.) के अध्यक्ष श्री सुरेश खांडे द्वारा राज्य में मृत्योपरांत अंगदान करने वालों को राजकीय सम्मान दिए जाने की मांग की गई है, जिसे जनहित में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। डॉ. रमन सिंह ने माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए तथा संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देकर उपयुक्त कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि छत्तीसगढ़ में अंगदान को सामाजिक स्वीकृति, सम्मान और प्रेरणा मिल सके।

मुख्यमंत्री साय शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में हुए शामिल

शहीद गैंदसिंह के नाम पर चौक, मूर्ति स्थापना और सामाजिक केंद्रों की घोषणा रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के तत्वावधान में साइंस कॉलेज ग्राउंड रायपुर में आयोजित शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने महान जनजातीय नायक एवं स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत शहीद गैंदसिंह का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने शहीद गैंदसिंह के सम्मान में नया रायपुर में चौक के नामकरण एवं मूर्ति स्थापना, चंगोराभाटा स्थित समाज के सामुदायिक भवन के जीर्णोद्धार, तथा बालोद जिले के देवरी, कांकेर जिले के मरकाटोला, दानीटोला, नगरी, डोंगरगांव एवं बस्तर जिले के भानपुरी तथा करूटोला में हल्बा समाज के सामाजिक केंद्रों के निर्माण हेतु प्रत्येक स्थान के लिए 10-10 लाख रुपये प्रदान किए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही ग्राम कितूर में रंगमंच निर्माण तथा चपका बस्तर में श्रीराम मंदिर के जीर्णोद्धार की भी घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनजातीय समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि देश में स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत भले ही वर्ष 1857 से मानी जाती है, किंतु उससे बहुत पहले ही छत्तीसगढ़ की धरती पर जनजातीय क्रांतियों की गूंज सुनाई देने लगी थी। महान क्रांतिकारी शहीद गैंदसिंह अंग्रेजी हुकूमत से संघर्ष करते हुए वर्ष 1825 में शहीद हुए, और उस कालखंड में भी आदिवासी समाज ने आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में एक-दो नहीं बल्कि कुल 14 जनजातीय क्रांतियां हुईं, जिन्होंने अंग्रेजों की सत्ता की नींव हिला दी। यह धरती शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गैंदसिंह और वीर गुण्डाधुर जैसे महान जननायकों की भूमि रही है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश इन वीरों और जनजातीय नायकों को लंबे समय तक इतिहास के पन्नों में उचित स्थान नहीं मिला। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय नायकों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हुई 14 जनजातीय क्रांतियों पर आधारित ट्राइबल म्यूजियम नया रायपुर में निर्मित किया गया है, जिसका लोकार्पण स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। इस संग्रहालय में इन सभी क्रांतियों का सचित्र विवरण एवं गहन जानकारी प्रस्तुत की गई है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि सभी लोग इस म्यूजियम का अवश्य अवलोकन करें, ताकि छत्तीसगढ़ की बलिदानी धरती में जनजातीय नायकों के योगदान को भली-भांति समझा जा सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू आसीन हैं और छत्तीसगढ़ प्रदेश का नेतृत्व भी जनजातीय समाज के बेटे के हाथों में है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए। उनके नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया गया, जो आज हजारों करोड़ रुपये के बजट के साथ जनजातीय समाज के विकास को नई दिशा दे रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से जनजातीय समाज के कल्याण की नई इबारत लिखी जा रही है। जनजातीय बहुल क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता से किया जा रहा है। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे पुरखों ने शिक्षा को विकास का मूलमंत्र बताया है। शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आज प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान संचालित हो रहे हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्धजनों से शिक्षा को बढ़ावा देने, शासन की योजनाओं की जानकारी समाज तक पहुंचाने तथा युवाओं को अपने अधिकारों और लक्ष्यों के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल में नक्सलवाद लंबे समय तक विकास में सबसे बड़ी बाधा रहा है, किंतु डबल इंजन सरकार के संकल्प और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से इस बाधा को दूर किया जा रहा है। वर्षों से विकास से वंचित इस अंचल में अब विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि शहीद गैंदसिंह छत्तीसगढ़ के पहले वीर शहीद जननायक थे, जिन्होंने वर्ष 1824-25 में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा संसाधनों की लूट और आदिवासियों के शोषण के खिलाफ साहसिक संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों का योगदान अतुलनीय रहा है। कार्यक्रम में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र माहला, महामंत्री गिरवर सिंह ठाकुर, महेश गागड़ा सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित श्रीमंत शंकर देव शोध पीठ का हुआ लोकार्पण

श्रीमंत शंकर देव के विचार सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता की नींव : डेका श्रीमंत शंकर देव के लेखनी से पूरा देश गौरवान्वित हुआ है : साय रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका की पहल पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित महान संत, समाज सुधारक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता श्रीमंत शंकरदेव के विचारों, दर्शन और साहित्य को समर्पित शोध संस्थान का भव्य लोकार्पण आज गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल रमेन डेका ने की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, डॉ. कृष्ण गोपाल जी सह-सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित शिक्षा जगत के विद्वान, शोधार्थी, युवा वर्ग तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इसके साथ ही पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के मध्य एम.ओ.यू. पर भी हस्ताक्षर किया गया। एम.ओ.यू. के पश्चात दोनों ही विश्वविद्यालय के शोधार्थी एक-दूसरे विश्वविद्यालय में अंतरविषयक अनुसंधान कर सकेंगे। इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव के विचार आज भी समाज को जोड़ने, सामानता स्थापित करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देते हैं। डेका ने कहा कि इस शोध पीठ की स्थापना उत्तर पूर्वी भारत और मध्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को अकादमी एवं शोध के स्तर पर जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह शोध पीठ भारत की महान संत परंपरा, भक्ति आंदोलन और सामाजिक सुधारों पर केंद्रित अध्ययन का सशक्त केंद्र बनेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे अकादमिक प्रयास देश की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करते हैं। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस शोध पीठ के संचालन हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रूपये दिए गए हैं जिसके लिए उन्हांेने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया। राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव ने समाज सुधारक, शिक्षाविद, कलाकार, नाटककार, नाट्य निर्देशक, चित्रकार, साहित्यकार, गीतकार, संगीत और वैष्णव धर्म के प्रवर्तक व प्रचारक के रूप में ख्याति अर्जित की है। श्रीमंत शंकर देव को उत्तर पूर्व भारत के महान समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने जाति, वर्ग और धर्म से ऊपर उठ कर समरस समाज की कल्पना की। नामघर और सत्र परंपरा के माध्यम से उन्होंने समानता, करूणा और उदारता पर आधारित सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया। श्रीमंत शंकर देव द्वारा रचित साहित्य अंकिया नाट और बोरगीत आज भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उनके विचारों ने असमिया समाज को एक सूत्र में पिरोया और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पूज्य शंकरदेव जी का कार्यक्षेत्र भले ही असम था, लेकिन उनके द्वारा सामाजिक जागरण का जो कार्य किया गया, उसका प्रभाव संपूर्ण देश पर पड़ा। श्रीमंत शंकर देव जी द्वारा रचित साहित्य, नाटक, भजन में भारतीय संस्कृति का उद्घोष है।. हमारा देश अपनी एकता और अखंडता के लिए जाना जाता है। इसके पीछे शंकरदेव जी जैसे भारत माता के सपूत हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की संस्कृति को समर्पित किया। वर्तमान और नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के योगदान को बताकर हम एक सक्षम और समृद्ध भारत बना सकते हैं। इससे लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार होता है। शंकर देव जी ने अपनी एक रचना में कहा कि भारत भूमि में जन्म लेना सबसे सौभाग्य की बात है। उन्होंने 500 वर्ष पहले एक भारत का जो संदेश दिया, उसे आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘ का नारा देकर साकार कर रहे हैं। मुख्य वक्ता डॉ कृष्ण गोपाल जी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा असम राज्य विविधताओं से भरा हुआ है। यहां विविध प्रकार की जनजाति भौगालिक, नदी, पहाड़, जंगल, घने वन उपस्थित है। जिस कारण यहां हजारों वर्षों से दूर दूर विविध जनजाति निवास करते है। इन जनजातियों को एक सूत्र में बांधने का महत्वपूर्व कार्य श्रीमंत शंकर देव ने किया। उन्होंने कृष्ण भक्ति के माध्यम से किया लोगो को जोड़ा। वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख व्यक्तिव है उन्होंने भक्ति के साहित्य का लेखन किया, नाट्य, गायन खड़े प्रशिक्षण दिया। गांव गांव में नाम घर की स्थापना किए। आज असम के हर गांव है जिसे नाम स्थापित है। भक्ति, संस्कृति एवं सामाजिक सद्भाव का घर कहलाता है। उन्होंने श्रीमंत शंकर देव के योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव ने शिक्षा को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर उसे संस्कार और संस्कृति से जोड़ा। यह शोध संस्थान केवल भवन नहीं, बल्कि विचारों की कार्यशाला बनकर उभरेगा। यहाँ से निकलने वाले शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पहचान दिलाएंगे। कार्यक्रम के अंत में संस्थान की स्थापना से जुड़े सभी सहयोगियों और प्रबंधन समिति को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की गई कि यह केंद्र भविष्य में ज्ञान, नवाचार और सत्य की खोज का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा वसुधैव कुटुम्बकम् के संदेश को विश्व पटल पर स्थापित करेगा। गौरतलब है श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उत्तरपूर्वी भारत तथा मध्य भारत के भक्ति आन्दोलन से जुड़े महान संतों के योगदान एवं व्यापक प्रभाव को भारतीय जनमानस के समक्ष लेकर आना साथ ही दोनों ही क्षेत्रों के जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की मौखिक परंपरा को लेखबद्ध करना है। शोधपीठ के द्वारा शोधवृत्ति भी शोधार्थियों को प्रदान किया जाएगा। शोधपीठ में भाषा, साहित्य, इतिहास, प्राचीन भारतीय इतिहास, क्षेत्रीय अध्ययन, समाजशास्त्र एवं समाजकार्य के विषय के शोधार्थी शोधकार्य कर सकते हैं।  

मैक्स लाइफ इंश्योरेंस को 1 करोड़ का हर्जाना देने का आदेश: उपभोक्ता आयोग

बिलासपुर. बिलासपुर के उपभोक्ता आयोग ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को एक करोड़ से अधिक का हर्जाना देने का महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. कोविड से हुई मौत के मामले में बिलासपुर के उपभोक्ता आयोग ने फैसला जारी किया है. फोरम ने 1 करोड़ रुपए की बीमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने के निर्देश दिया है. फोरम ने मानसिक पीड़ा और केस के खर्च के तौर पर 2 लाख रुपए अलग से देने का भी आदेश जारी किया है. मामले पर आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल, सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ में हुई सुनवाई में यह निर्णय लिया गया. बता दें, कि बिलासपुर निवासी कौशल प्रसाद कौशिक ने पत्नी शैल कौशिक के नाम पर मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से प्लैटिनम वेल्थ प्लान लिया था. बीमा करने से पहले कंपनी ने सभी जरूरी मेडिकल जांच करवाई थी. सितंबर 2020 में शैल कौशिक कोविड-19 से ग्रसित पाई गईं और इलाज के दौरान 11 अक्टूबर 2020 को उनकी मृत्यु हो गई. जिसपर पति ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, बीमा कंपनी ने दावा खारिज कर दिया, कहा कि उनकी पत्नी को पहले से ही गंभीर बीमारी थी. आयोग ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि बीमा से पहले मेडिकल जांच में महिला स्वस्थ थी, लिहाजा मुआवजे की मांग उचित है.

छत्तीसगढ़ आबकारी नीति व प्रबंधन संस्थान को लीज पर जमीन को मिली मंजूरी

रायपुर. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई. नए साल में हुई पहली साय कैबिनेट की बैठक में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई. इसके बाद कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कैबिनेट ने मुहर लगाई है. 1) मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ आबकारी नीति वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रस्ताव का अनुमोदन तथा इससे संबंधित समस्त अनुषांगिक कार्यवाहियों के लिए विभाग को अधिकृत किया गया. 2) मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में उच्च कोटि का शैक्षणिक संस्थान स्थापित किये जाने हेतु श्री विले पारले कलावनी मंडल (SVKM) को उनके नरसी मोंजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान की स्थापना के लिए सेक्टर-18 में चिन्हांकित लगभग 40 एकड़ भू-खण्ड का आबंटन लीज के रूप में एकमुश्त 90 वर्षाें के लिए करने की स्वीकृति प्रदान की है. एसव्हीकेएम एक ख्याति प्राप्त संस्था है, जो वर्ष 1934 से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत तथा वर्तमान में 30 शैक्षणिक संस्थान संचालित है, जोकि एक लाख से अधिक छात्रों को प्रति वर्ष प्री-प्राइमरी से लेकर डॉक्टोरल कार्यक्रमों में शिक्षा प्रदान करता है. वर्ष 2025 में एनआईआरएफ यूनिवर्सिटी रैकिंग में इस संस्था को 52वां रैंक प्राप्त हुआ है. नवा रायपुर में इस राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की स्थापना से राज्य में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को और मजबूती मिलेगी. 3) मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में 04 नवीन उद्यमिता केन्द्रों की स्थापना के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ एमओयू का निर्णय लिया है. इससे राज्य में आईटी/आईटीईएस उद्योग तथा तकनीकी स्टार्ट-अप इको सिस्टम को प्रोत्साहित करने में यह एमओयू महत्वपूर्ण होगा. सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के 68 केन्द्र संचालित है, जिनमें 60 भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित है. सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया छत्तीसगढ़ सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से एआई, मेडटेक (हर्बल मेडिसिन एवं वन उत्पाद आधारित), स्मार्ट सिटी तथा स्मार्ट एग्री उद्यमिता केन्द्रों के माध्यम से आगामी तीन से पांच सालों में डोमेन विशेष के 133 स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देंगे. राज्य सरकार द्वारा छात्रों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं तथा उद्योगों को ईएसडीएम उत्पादों के प्रोटोटाइप विकसित करने में सहयोग प्रदान करने के लिए एसटीपीआई के माध्यम से एक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास (ईएसडीडी) केन्द्र स्थापित किया जाएगा, जो प्रति वर्ष 30 से 40 हार्डवेयर, स्टार्टअप और एमएसएमई को सभी सहायता प्रदान करेगा. 4) मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओ में गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने, वर्तमान संसाधनों को सुदृढीकरण करने तथा निर्धारित मानक के अनुसार जांच की संख्या बढ़ाने के लिए राज्य के जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में लैब के प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक निर्णय लिए गए हैं.

बच्ची से रेप के आरोपी का घर बुलडोजर से किया जमींदोज

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बुधवार सुबह नाबालिग से रेप के आरोपी अब्दुल सज्जाद अंसारी के घर पर नगर निगम का बुलडोजर चला है. नगर निगम ने आरोपी के घर पर नोटिस चस्पा करते हुए सात दिनों के भीतर मकान से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे. जिसके बाद आज सुबह राजा तालाब के झंडा चौक स्थित घर पर बुलडोजर से आरोपी के घर को जमींदोज कर दिया गया है. इस कार्रवाई के दौरान पुलिस बल, प्रशासन की टीम और पार्षद मौजूद रहे. पार्षद कैलाश बेहरा ने कहा कि इन लोगों पर ऐसे ही कार्रवाई की जानी चाहिए. लोगों में भारी आक्रोश है. उन्होंने कहा कि अगर उनके वार्ड में कोई भी ऐसा कृत्य होता है तो उस पर ऐसे ही कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. रायपुर की महापौर मीनल चौबे कुछ दिन पहले आई थी. उन्होंने आरोपी की दुकान और घर को तोड़ने के साफ निर्देश दिए थे. बता दें कि जानकारी के अनुसार, सिविल लाइन थाना क्षेत्र के मोहल्ले में आरोपी अब्दुल सज्जाद अंसारी की दुकान है, जहां वह चूड़ियां बेचता है. साथ ही वह चॉकलेट, नड्डा और मुर्रा भी बेचता था. आरोपी इन्हीं चीजों का लालच देकर 9 साल की बच्ची को अपने साथ रोज घर ले जाता था और पूरे कपड़े उतारकर गंदा काम करता था. आरोपी ने 7 जनवरी से 11 जनवरी के बीच मासूम के साथ कई बार दरिंदगी की.

गणतंत्र दिवस पर सीएम साय जिले में करेंगे ध्वजारोहण

बिलासपुर. कलेक्टर संजय अग्रवाल ने समय-सीमा की बैठक लेकर जिले में संचालित शासन की फ्लैगशीप योजनाओं, आगामी गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों एवं जनदर्शन के लंबित मामलों की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में कलेक्टर ने बताया कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिले में पहली बार मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय द्वारा ध्वजारोहण किया जाना संभावित है। कलेक्टर ने कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह को गरिमामय, सुव्यवस्थित एवं भव्य स्वरूप में मनाया जाएगा। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की। बैठक में एसएसपी  रजनेश सिंह, नगर निगम आयुक्त  प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत सीईओ  संदीप अग्रवाल, वनमण्डलाधिकारी श्री नीरज सिंह, सहायक कलेक्टर अरविंथ कुमारन, एडीएम कलेक्टर  शिवकुमार बनर्जी, मौजूद थे। बैठक में कलेक्टर ने गणतंत्र दिवस पर जिले के विकास कार्यों एवं शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित आकर्षक झांकियां तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे आम नागरिकों को जिले की उपलब्धियों की जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा कार्यक्रमों की पूर्व तैयारी समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाए। कलेक्टर ने बताया कि वंदे मातरम अभियान का द्वितीय चरण प्रारंभ है, जिसके अंतर्गत जिले में विभिन्न राष्ट्रभक्ति गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुलिस परेड ग्राउंड में सामूहिक वंदे मातरम गायन किया जाएगा। बैठक में कलेक्टर ने चावल उत्सव का आयोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को समय पर लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने जनदर्शन एवं समय-सीमा के लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रकरणों का जल्द निराकरण करें।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने दी नई आबकारी नीति को हरी झंडी, नवा रायपुर में NMIMS और स्टार्ट-अप हब की शुरुआत

 रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में आज कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में राज्य की आबकारी नीति, शिक्षा, आईटी स्टार्ट-अप, उद्यमिता और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मंत्रिपरिषद ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ आबकारी नीति के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इससे संबंधित समस्त अनुषांगिक कार्यवाहियों के लिए विभाग को अधिकृत किया। शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा निर्णय लेते हुए मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-18 में स्थित लगभग 40 एकड़ भूमि को श्री विले पारले कलावनी मंडल (SVKM) को 90 वर्षों की लीज पर आवंटित करने की स्वीकृति दी। यहां नरसी मोंजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान की स्थापना की जाएगी। यह संस्था वर्ष 1934 से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत है और देशभर में 30 शैक्षणिक संस्थान संचालित कर रही है। नवा रायपुर में इस राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की स्थापना से राज्य में उच्च गुणवत्ता वाली आधुनिक शिक्षा को मजबूती मिलेगी। आईटी और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर अटल नगर में चार नवीन उद्यमिता केंद्रों की स्थापना हेतु सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ एमओयू करने का निर्णय लिया। इसके तहत एआई, मेडटेक, स्मार्ट सिटी और स्मार्ट एग्री जैसे डोमेन में अगले तीन से पांच वर्षों में 133 स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही ईएसडीएम उत्पादों के प्रोटोटाइप विकास के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद ने राज्य के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की लैब व्यवस्था को मजबूत करने संबंधी आवश्यक निर्णय भी लिए।