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जशपुर को मिला ऐतिहासिक तोहफा: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बड़ी सिंचाई सौगात

किसानों के हित में 11 परियोजनाओं के लिए लगभग 199 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने सुशासन के दो वर्षों के दौरान जशपुर जिले के कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा देने की दिशा में एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। जिले में किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 11 महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं के लिए कुल 199 करोड़ 49 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय को स्थायी मजबूती मिलेगी। प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप जशपुर जिले में बैराज, एनीकट, तालाब एवं व्यपवर्तन योजनाओं के निर्माण, मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्यों को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से जिले के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और वर्षा पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी। जशपुर जिले को स्वीकृत प्रमुख सिंचाई योजनाओं में मैनी नदी, बगिया स्थित बैराज उद्वहन सिंचाई योजना के लिए 79 करोड़ 37 लाख रुपये, कुनकुरी ईब व्यपवर्तन योजना के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य हेतु 37 करोड़ 9 लाख रुपये, सहसपुर तालाब योजना के लिए 4 करोड़ 27 लाख रुपये तथा डुमरजोर (डुमरिया) व्यपवर्तन योजना हेतु 10 करोड़ 36 लाख रुपये की स्वीकृति शामिल है। इसी क्रम में तुबा एनीकट योजना के लिए 2 करोड़ 67 लाख रुपये, बारो एनीकट योजना हेतु 7 करोड़ 6 लाख रुपये, मेडरबहार तालाब योजना के लिए 5 करोड़ रुपये, पमशाला एनीकट योजना हेतु 28 करोड़ 2 लाख रुपये, कोनपारा तालाब (दलटोली डेम) के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार के लिए 3 करोड़ 47 लाख रुपये, अंकिरा तालाब योजना के मरम्मत एवं जीर्णोद्धार हेतु 3 करोड़ 47 लाख रुपये तथा कोकिया व्यपवर्तन योजना के लिए 16 करोड़ 17 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इन सिंचाई परियोजनाओं के पूर्ण होने से जिले के अनेक ग्रामों में खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे किसानों को खेती के लिए नियमित पानी मिलेगा, फसल उत्पादन बढ़ेगा और कृषि को स्थायी आजीविका का मजबूत आधार प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए सिंचाई, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। जशपुर जिले को मिली ये सिंचाई सौगातें सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनकल्याणकारी नीतियों का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इन योजनाओं से जिले के किसानों के जीवन में खुशहाली आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

आमाबेड़ा हिंसा के विरोध में बस्तर बंद, पर्व के दौरान दुकानों को बंद कराने पर तनाव, प्रशासन की पहल से हालात सामान्य

जगदलपुर कांकेर जिले के आमाबेड़ा गांव में शव दफनाने को लेकर हुई धार्मिक हिंसा ने पूरे बस्तर संभाग में तनाव का माहौल बना दिया है. इस विवाद पर सर्व समाज ने कड़ा आक्रोश जताते हुए आज प्रदेश बंद का ऐलान किया है. सुबह बंद के दौरान नगर में मेन रोड स्थित दुकानों बंद कराने के दौरान तनाव और बवाल की स्थिति बनी, लेकिन बाद में व्यापारियों के दुकानें बंद करने से मामला शांत हो गया. बंद का असर आज सुबह से ही बस्तर मुख्यालय जगदलपुर में साफ नजर आया. सुबह से ही सर्व समाज के पदाधिकारी और विभिन्न समाजों के प्रमुख जगदलपुर शहर में भ्रमण कर बंद का जायजा लेते नजर आए. बाजार, दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जिससे शहर की रफ्तार थमी हुई दिखाई दी. बंद को लेकर बस्तर चेंबर ऑफ कॉमर्स ने समर्थन का ऐलान किया है, लेकिन व्यापारियों के एक वर्ग ने इस पर नाराजगी भी जाहिर की. खासकर जगदलपुर के मेन रोड क्षेत्र में कुछ व्यापारियों ने त्यौहार से ठीक एक दिन पहले बंद कराए जाने पर आपत्ति जताई. व्यापारियों का कहना था कि क्रिसमस त्यौहार के चलते इस समय व्यापार चरम पर रहता है, और बंद से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. इसी मुद्दे को लेकर मेन रोड में कुछ समय के लिए तनाव और बवाल की स्थिति भी बनी, हालांकि बाद में व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं और मामला शांत हुआ. आमाबेड़ा की घटना से पूरा समाज आहत विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी रवि ब्रह्मचारी ने बंद को लेकर कहा कि कांकेर की आमाबेड़ा घटना से पूरा समाज आहत है और बस्तर में 100 प्रतिशत बंद का असर देखने को मिल रहा है. उन्होंने मांग की कि अमाबेड़ा में हिंदुओं पर हमला करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए. साथ ही एक विशेष जांच टीम गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिन अधिकारियों की इसमें भूमिका रही है, उन पर भी सख्त कार्रवाई की जाए.

विनोद कुमार शुक्ल को नम आंखों से श्रद्धांजलि, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पार्थिव शरीर को दिया कंधा

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के शैलेन्द्र नगर स्थित वरिष्ठ साहित्यकार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल के निवास पहुंचे और उनके अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. मुख्यमंत्री ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर नमन किया तथा ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय शुक्ल के पार्थिव शरीर को कंधा देकर उन्हें भावपूर्ण अंतिम विदाई दी. उन्होंने शोक संतप्त परिजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं तथा असंख्य पाठकों और साहित्य-प्रेमियों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी से उपजे महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन से हिंदी साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति पहुँची है. उनकी रचनाएँ संवेदनशीलता, मानवीय सरोकारों और सरल किंतु गहन अभिव्यक्ति की अनुपम मिसाल हैं. विनोद कुमार शुक्ल जी के निवास पहुँचकर उनके अंतिम दर्शन किया। उन्हें सम्पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गयी। यह एक ऐसे सृजनशील व्यक्तित्व की अंतिम यात्रा थी, जिन्होंने साहित्य जगत को ऐसी अनमोल कृतियाँ दीं, जो साहित्य संसार की थाती है। उन्होंने कहा कि शुक्ल की लेखनी ने हिंदी साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की. उनका साहित्य न केवल पाठकों को गहराई से स्पर्श करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बना रहेगा. साहित्य जगत में उनका अवदान सदैव स्मरणीय रहेगा. शुक्ल को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. इस अवसर पर कवि डॉ. कुमार विश्वास, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी अलोक सिंह, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार, जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी गण उपस्थित रहे.

राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा, रोजगार और खेल सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर : युवा ही प्रदेश और देश का भविष्य हैं: मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा, रोजगार और खेल सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय बिलासपुर में तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ राज्य युवा महोत्सव का भव्य शुभारंभ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026 के शुभंकर ‘मोर वीर’, थीम सॉन्ग और खेलो इंडिया टॉर्च का अनावरण मलखंब खिलाड़ियों को एक लाख रुपये प्रोत्साहन राशि सहित कई महत्वपूर्ण घोषणाएं रायपुर छत्तीसगढ़ के युवाओं की प्रतिभा, ऊर्जा और रचनात्मक क्षमता को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित राज्य स्तरीय युवा महोत्सव का आज बिलासपुर के बहतराई स्टेडियम में भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तीन दिवसीय इस महोत्सव का उद्घाटन करते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़ 2026 के शुभंकर ‘मोर वीर’, थीम सॉन्ग एवं खेलो इंडिया टॉर्च का रिमोट बटन दबाकर अनावरण किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। उद्घाटन समारोह में अबूझमाड़ क्षेत्र के खिलाड़ियों द्वारा मलखंब की उत्कृष्ट प्रस्तुति दी गई। महिला कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी एवं एथलेटिक्स खिलाड़ी श्री अमित कुमार द्वारा खेलो इंडिया टॉर्च का अनावरण किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं। राज्य सरकार शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और खेल सहित हर क्षेत्र में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यह युवा महोत्सव न केवल युवाओं की प्रतिभाओं को पहचान देने का मंच है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम भी है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर खेलो इंडिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि देने, मलखंब खिलाड़ियों को एक लाख रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान करने तथा अमेरिका गॉट टैलेंट में चयनित मलखंब खिलाड़ी अनतई पोटाई के अमेरिका आने-जाने का सम्पूर्ण व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस युवा महोत्सव में प्रदेशभर से 3,000 से अधिक युवा भाग ले रहे हैं, जो 14 सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विधाओंकृ8 दलीय एवं 6 एकलकृमें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। लोकनृत्य, लोकगीत, वाद-विवाद, चित्रकला और कविता लेखन की विजेता प्रतिभाएँ वर्ष 2026 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय युवा उत्सव में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता यह प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होकर शांति, विकास और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। जनजातीय अंचलों में खेलों की अपार संभावनाएँ हैं और सरकार इन क्षेत्रों की प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें आगे बढ़ा रही है। केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि युवाओं की सृजनशील सोच से ही देश आगे बढ़ता है और केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर  प्रयासरत हैं। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने घोषणा की कि आने वाले समय में सरगुजा अंचल में भी ओलंपिक-स्तरीय खेल आयोजनों का आयोजन किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर बदल रहा है और आज जनजातीय क्षेत्रों के युवा राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, विधायकगण श्री अमर अग्रवाल, श्री धर्मजीत सिंह, श्री धरमलाल कौशिक, श्री सुशांत शुक्ला, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, क्रेडा अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी, छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष श्री राजा पांडे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी और युवा उपस्थित थे।

रायपुर: स्वास्थ्य मंत्री ने किया जांजगीर-चांपा जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण, ओपीडी और एनआईसीयू का उद्घाटन

रायपुर : स्वास्थ्य मंत्री ने किया जिला चिकित्सालय जांजगीर-चांपा का औचक निरीक्षण, नई ओपीडी व एनआईसीयू का किया शुभारंभ रायपुर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने  जिला चिकित्सालय जांजगीर-चांपा का औचक निरीक्षण किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, संचालक संजीव झा एवं सहायक संचालक डॉ. सुरेंद्र पाम्भोई उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने अस्पताल की व्यवस्थाओं, स्वच्छता, दवाओं की उपलब्धता तथा मरीजों को मिल रही सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय में नवनिर्मित ओपीडी हॉल एवं नवजात शिशुओं के बेहतर उपचार हेतु 10 बेड के अत्याधुनिक एनआईसीयू वार्ड का विधिवत शुभारंभ  किया। उन्होंने कहा 10 बेड के एनआईसीय से अब क्षेत्र के नवजात शिशुओं को क्रिटिकल केयर हेतु बाहर नहीं जाना पड़ेगा।       स्वास्थ्य मंत्री मंत्री ने जीवनदीप समिति के माध्यम से स्वीकृत कार्यों की जानकारी लेते हुए कलेक्टर जन्मेजय मोहबे के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मरीजों की आवश्यकता के अनुरूप जीवनदीप समिति से समयबद्ध स्वीकृतियाँ देना सराहनीय कदम है, जिससे अस्पताल की सेवाएँ निरंतर सुदृढ़ हुई हैं। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यू.के. मरकाम, सिविल सर्जन डॉ. एस. कुजूर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक उत्कर्ष तिवारी, जिला अस्पताल प्रबंधक अंकित ताम्रकार, आरएमओ डॉ. संदीप साहू सहित जिला चिकित्सालय के समस्त अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

देश और प्रदेश में खेलों को लेकर बहुत ही उत्साहजनक वातावरण- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर : छत्तीसगढ़ में खेलों का विकास हमारी प्राथमिकता- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय देश और प्रदेश में खेलों को लेकर बहुत ही उत्साहजनक वातावरण- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री ने जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता का किया शुभारंभ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय यहां राजधानी रायपुर के कोटा रोड स्थित स्वामी विवेकानंद एथेलेटिक स्टेडियम में आयोजित 45वीं एनटीपीसी जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता के शुभारंभ किया। उन्होंने 45वीं एनटीपीसी जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं दी और खिलाड़ियों को उत्कृष्ठ प्रदर्शन के लिए उनका उत्साहवर्धन किया।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह सौभाग्य है कि प्रदेश को राष्ट्रीय ट्राइबल गेम्स के आयोजन का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया के माध्यम से देश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बहुत अच्छे अवसर मिल रहे हैं। साथ ही आज पूरे देश और प्रदेश में खेल को लेकर बेहतर वातारण तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलों का विकास हमारी प्राथमिकता मे शामिल है। सरकार द्वारा सभी खेलों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा को निखारने सभी सुविधाएं और प्रोत्साहन दिया जा रहा है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी खेलो इंडिया के नये परिसरों की शुरुआत की गई है, इससे खेल प्रतिभाओं को सभी जरुरी सुविधाएं मिल रही हैं। राज्य में खेल अलंकरण समारोह का आयोजन किया जाता है जिससे खिलाड़ियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है। हमारी सरकार ओलंपिक में शामिल होने वाले एथलीट को 21 लाख रुपये देगी। यदि हमारे प्रदेश का कोई युवा खिलाड़ी ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतता है तो उसे 3 करोड़, रजत पदक जीतने पर 2 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने वालों को एक करोड़ रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।  उल्लेखनीय है कि 45वीं एनटीपीसी जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन छत्तीसगढ़ प्रदेश आरचरी एसोसिएशन एवं छत्तीसगढ़ खेल एवं युवा कल्याण विभाग के तत्वावधान में किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता 22 से 30 दिसंबर तक आयोजित होगी। प्रतियोगिता में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 500 खिलाड़ी  हिस्सा ले रहे है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया, छत्तीसगढ़ प्रदेश आर्चरी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं  राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाश मोरारका, महासचिव आयुष मोरारका, ईश्वर प्रसाद अग्रवाल सहित विभिन्न प्रदेशों से आए खिलाड़ी, कोच,मैनेजर तथा गणमान्यजन व खेलप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

रत्नावली को भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बनने का मिला सम्मान

 रत्नावली को भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य की मिली जिम्मेदारी  महिलाओं को शिक्षित एवं सशक्त बनाने कटिबद्ध:कौशल रायपुर  अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण छत्तीसगढ़ शासन की पूर्व सदस्य रत्नावली कौशल को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष किरण सिंह देव एवं प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की अनुशंसा पर महिला मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष विभा अवस्थी ने प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नियुक्त किया है। नवनियुक्त प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रत्नावली कौशल ने कहा कि महिला मोर्चा की समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं के साथ छत्तीसगढ़ सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं को प्रदेश के अंतिम महिलाओं तक पहुंचाने के लिए कटिबद्ध हैं।   नवनियुक्त प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रत्नावली कौशल ने प्रेस व्यक्तव्य में कहा हम महिला मोर्चा की समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं को प्रदेश के अंतिम महिलाओं तक पहुंचाने के लिए काम करेंगे। हमारा लक्ष्य है कि हर महिला को सरकार की योजनाओं का लाभ मिले और वे आत्मनिर्भर बनें। रत्नावली कौशल ने आगे कहा,हम महिला मोर्चा के माध्यम से महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए काम करेंगे। हम महिलाओं को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए काम करेंगे ताकि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ सकें।  भाजपा महिला मोर्चा की नवनियुक्त प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रत्नावली कौशल ने भाजपा के समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं को आभार व्यक्त करते हुए कहा, हम साथ मिलकर महिला मोर्चा को मजबूत बनाएंगे और प्रदेश के विकास में योगदान देंगे। रत्नावली कौशल ने अपनी नियुक्ति पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय,केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू,उप मुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव,विजय शर्मा,कैबिनेट मंत्री द्वय गुरु खुशवंत साहेब,दयाल दास बघेल,ओपी चौधरी,रामविचार नेताम,केदार कश्यप,पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ विधायक पुन्नूलाल मोहले,भाजपा जिलाध्यक्ष दीनानाथ केशरवानी सहित भाजपा के समस्त वरिष्ठजनो का आभार व्यक्त किया है ।

रायपुर पुलिस कमिश्नर के पद के लिए आईजी स्तर के पांच आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चा में

 रायपुर  रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अगले साल एक जनवरी को लेकर सरकार के भीतर मंत्रणा चल रही है। एक जनवरी को अगर ना भी हुआ तो उस दिन कम-से-कम नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। वैसे सरकार के लोगों की कोशिश है कि एक जनवरी से पुलिस के इस बड़े रिफार्म का आगाज हो जाए। हालांकि, एक जनवरी में टाईम काफी कम बच गया है। मुश्किल से हफ्ता भर समय है। किस प्रकार का पुलिस कमिश्नर सिस्टम होगा, इस पर भी अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। हालांकि, चाहेगी तो हफ्ता भर काफी है। अब ज्यादा लेट होने की गुंजाइश इसलिए नहीं है कि मुख्यमंत्री के ऐलान किए सवा साल से अधिका हो गया है। सीएम विष्णुदेव साय ने 15 अगस्त 2024 के भाषण में पुलिस कमिश्नर सिस्टम शुरू करने की घोषणा की थी। उनके ऐलान के बाद काफी वक्त निकल चुका है। इसलिए, अब ज्यादा विलंब करने का प्रश्न नहीं उठता। छत्तीसगढ़ के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रारंभ करने चर्चाएं थीं मगर ऐन वक्त पर उसे टाल दिया गया। बाद में पता चला कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधयेक पारित कर एक्ट बनाया जाएगा। याने ओड़िसा की तरह काफी सशक्त पुलिस कमिश्नर प्रणाली बनाया जाएगा। किंतु उसके बाद विधानसभा का एक दिन का स्पेशल सत्र भी निकल गया और फिर शीतकालीन सत्र भी। रायपुर के फर्स्ट पुलिस कमिश्नर के लिए आईजी लेवल के पांच आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चाओं में हैं, उनमें पुलिस मुख्यालय में पोस्टेड अजय यादव, ब्रदीनारायण मीणा, बिलासपुर आईजी संजीव शुक्ला, दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग और सरगुजा आईजी दीपक झा का नाम प्रमुख है। हालांकि, महिला आईजी के तौर पर एक नाम नेहा चंपावत का भी है। उन्होंने एलएलबी करने के बाद यूपीएससी क्रैक किया। सरकार को अगर फर्स्ट पुलिस कमिश्नर के लिए महिला आईपीएस जंचेगी तो उन्हें मौका मिल सकता है। नेहा तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी हैं। एसपी के तौर पर उन्होंने सिर्फ एक जिला महासमुंद किया है। तेज महिलाएं पुलिस में सफल भी होती हैं, क्योंकि उनसे अकरण कोई हुज्जत नहीं करता। यद्यपि, रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा भी बेहतर चयन हो सकते हैं, मगर एसीबी और ईओडब्लू की जिम्मेदारियों के चलते सरकार शायद ही उनके नाम पर विचार करें। कोरबा में कुख्यात अपराधी का एककांउटर करने वाले सुंदरराज इस समय बस्तर आईजी हैं। नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के चलते उन्हें सरकार अभी टच नहीं करेगी। पांच नामों की चर्चा सबसे अधिक रायपुर पुलिस कमिश्नर के लिए वैसे पांच आईपीएस अधिकारियों की चर्चा सबसे अधिक है। अब सरकार नेहा चंपावत जैसा कोई नया प्रयोग कर चौंका दें तो बात अलग है। मगर इन नामों पर जोर ज्यादा है। चलिये बताते हैं इन पांचों आईपीएस अधिकारियों के बारे में कौन, किस-किस जिले में एसपी, आईजी रहे…. 1. अजय यादव 2004 बैच के आईपीएस अजय यादव सात जिलों के एसपी रहे। नारायणपुर से उनकी कप्तानी शुरू हुई थी, इसके बाद कांकेर, बिलासपुर जांजगीर, दुर्ग, रायपुर में एसएसपी रहे। प्रोफाइल के हिसाब से देखें तो अजय यादव काफी मजबूत स्थिति में हैं। वे रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा को मिलाकर तीन पुलिस रेंज के आईजी रह चुके हैं। इसके अलावा पुलिस महकमे में नेक्स्ट टू डीजीपी इंटेलिजेंस चीफ की भी पोस्टिंग वे कर चुके हैं। 2. बद्रीनारायण मीणा 2004 बैच के आईपीएस बद्री नारायण मीणा छत्तीसगढ़ में नौ जिले के एसपी रह चुके हैं। बलरामपुर से उनकी कप्तानी का सफर प्रारंभ हुआ। इसके बाद कवर्धा, राजनांदगांव, जगदलपुर, कोरबा, बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़ और दुर्ग। बद्री चार पुलिस रेंज के आईजी रह चुके हैं। वे पहले आईपीएस अधिकारी होंगे, जो दुर्ग के साथ रायपुर के भी आईजी रहे। इसके बाद फिर बिलासपुर के आईजी बनाए गए। बिलासपुर के बाद उन्हें फिर दुर्ग आईजी का दायित्व सौंपा गया। याने तीन पुलिस रेंज में वे चार बार आईजी रहे। वे डेपुटेशन पर तीन साल तक आईबी में भी रहे। 3. संजीव शुक्ला संजीव शुक्ला इस समय बिलासपुर पुलिस रेंज के आईजी हैं। वे पांच जिलों के पुलिस अधीक्षक रहे हैं। इनमें जशपुर, रायगढ़, राजनांदगांव, दुर्ग और रायपुर शामिल है। वे नक्सल प्रभावित इलाका कांकेर के डीआईजी भी रह चुके हैं। 4. रामगोपाल गर्ग 2007 बैच के आईपीएस रामगोपाल गर्ग सात साल सीबीआई में डेपुटेशन पर रहने के कारण ज्यादा जिलों के एसपी नहीं रह सके। दिल्ली जाने के बाद वे गरियाबंद के एसपी रहे। और जब लौटकर आए तो डीआईजी बन चुके थे। उन्हें अंबिकापुर पुलिस रेंज का प्रभारी आईजी बनाकर भेजा गया। वहां से फिर रायगढ़ का डीआईजी। फिर विधानसभा चुनाव के समय दुर्ग के एसएसपी बने। चुनाव के बाद दुर्ग के प्रभारी आईजी बने और फिर पिछले साल प्रमोशन होने पर वहीं आईजी बन गए। रामगोपाल का कैरियर बड़ा उतार-चढ़ाव वाला रहा। याने सरगुजा जैसे रेंज का आईजी रहने के बाद रायगढ़ का डीआईजी। इसके बाद दुर्ग का एसपी, फिर दुर्ग का प्रभारी आईजी, आईजी। 5. दीपक झा 2008 बैच के आईपीएस दीपक झा सात जिलों के एसपी रह चुके हैं। कोंडागांव से उनके कप्तानी का सफर प्रारंभ हुआ था, उसके बाद बालोद, महासमुंद, रायगढ़, जगदलपुर, बिलासपुर और फिर बलौदा बाजार। इसके बाद उन्हें नवगठित राजनांदगांव पुलिस रेंज का प्रभारी आईजी बनाया गया। पिछले साल उन्हें आईजी प्रमोट होने पर अंबिकापुर पुलिस रेंज के आईजी की जिम्मेदारी दी गई। नाम का पुलिस कमिश्नर पता चला है, एक जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रारंभ हो जाएगा। मगर इसके साथ यह भी जानकारी मिली है कि सोशल मीडिया और मीडिया में जो बातें चल रही हैं, उससे उलट सिर्फ नाम के लिए पुलिस कमिश्नर होगा। उसे प्रतिबंधात्मक धारा याने 151 के अलावा और कोई अधिकार देने के पक्ष में सिस्टम नहीं है। ओड़िसा सबसे बेस्ट देश में चूकि ओड़िसा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम ताजा लागू हुआ है, इसलिए उसका सिस्टम भी काफी तगड़ा है। ओड़िसा ने एक्ट बनाकर उसे क्रियान्वित किया है। लेकिन, छत्तीसगढ़ में एक वर्ग मध्यप्रदेश से ज्यादा अधिकार पुलिस कमिश्नर को देना नहीं चाहता। जाहिर है, एमपी में आईएएस लॉबी के तगड़े विरोध के चलते दंतविहीन पुलिस कमिश्नर सिस्टम बनाया गया, जिसका प्रदेश को कोई लाभ नहीं मिल रहा। वहां के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब ओड़िसा की तत्कालीन नवीन … Read more

1 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली, सरकार की तैयारियां अपराध नियंत्रण के लिए तैयार

रायपुर  रायपुर में 1 जनवरी से पुलिसिंग का चेहरा पूरी तरह बदलने वाला है। छत्तीसगढ़ की राजधानी में नए साल की शुरुआत के साथ ही पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू कर दी जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर इसकी सभी जरूरी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस नई व्यवस्था के प्रभावी होते ही छत्तीसगढ़ देश का 18वां ऐसा राज्य बन जाएगा जहां पुलिस कमिश्नर सिस्टम काम करेगा। जानकारों का कहना है कि इस बदलाव के लिए मध्य प्रदेश के मॉडल का अध्ययन किया गया है लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार रायपुर की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस को कुछ अतिरिक्त अधिकार देने की तैयारी में है। कानून-व्यवस्था और कर्फ्यू जैसे फैसलों पर होगा सीधा नियंत्रण पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद राजधानी की सुरक्षा और शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह कमिश्नर के कंधों पर होगी। अब तक शहर में तनाव या आपात स्थिति के दौरान कर्फ्यू लगाने जैसे बड़े फैसलों के लिए जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी पड़ती थी। नई व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर खुद हालात का जायजा लेकर धारा 144 लागू करने या कर्फ्यू जैसे कड़े कदम उठाने का निर्णय ले सकेंगे। इससे किसी भी गंभीर स्थिति में कागजी कार्रवाई में होने वाली देरी कम होगी और पुलिस तुरंत कार्रवाई कर पाएगी। फुलप्रूफ व्यवस्था बनाने में जुटे अफसर अब एक बार फिर से रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके साथ ही गृह विभाग लगातार समीक्षा में जुटा है, ताकि नए सिस्टम में किसी तरह की कमी न रह जाए.  विभागीय सूत्र के अनुसार, मौजूदा SP–CSP पैटर्न पर जिले का स्टाफ पहले से ही भारी दबाव में है. इसलिए नई व्यवस्था में बड़े रैंक के अधिकारियों की तैनाती बेहद आवश्यक मानी जा रही है. अक्टूबर में सौंपी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया था कि रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 500 से अधिक नए स्टाफ की नियुक्ति अनिवार्य होगी. इसके साथ ही कई विभागीय संरचनाओं में बदलाव, नई शाखाओं का गठन और ट्रैफिक व्यवस्था को पुनर्गठित करना भी जरूरी बताया गया है. अब जुलूस और धरना-प्रदर्शन की अनुमति भी मिलेगी पुलिस से प्रशासन ने तय किया है कि शहर में होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों, रैलियों और धरना-प्रदर्शनों की अनुमति देने का अधिकार अब कलेक्टर के बजाय पुलिस कमिश्नर के पास होगा। अक्सर देखा जाता है कि प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल में समय लग जाता है। अब कमिश्नर ही यह तय करेंगे कि किस मार्ग पर जुलूस निकलेगा और कहां प्रदर्शन की अनुमति दी जाएगी। इससे शहर के यातायात प्रबंधन और आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखकर फैसले लेना आसान होगा। अपराधियों को जिला बदर करने और लाइसेंस जारी करने की नई शक्ति अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रेट स्तर की शक्तियां प्राप्त होंगी। अब पुलिस के पास आदतन अपराधियों को जिला बदर करने और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए सीधे अधिकार होंगे। इसके अलावा शस्त्र अधिनियम के तहत हथियारों के लाइसेंस जारी करने या किसी उल्लंघन की स्थिति में उन्हें रद्द करने का काम भी पुलिस मुख्यालय से संचालित होगा। इन कड़े अधिकारों के जरिए राजधानी में बढ़ते संगठित अपराध और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने की योजना तैयार की गई है। दंगों पर नियंत्रण और बल प्रयोग के लिए मिलेगी पूरी छूट आपातकाल या दंगों जैसी संवेदनशील परिस्थितियों में बल प्रयोग से जुड़े फैसलों को लेकर पुलिस अब अधिक स्वतंत्र होगी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज या अन्य सुरक्षात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस को मौके पर ही फैसला लेने की छूट मिलेगी। प्रशासन का तर्क है कि रायपुर में बढ़ती आबादी और तेजी से होते शहरीकरण के कारण अपराधों का ग्राफ भी बदला है। पुलिस कमिश्नर सिस्टम आने से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ बढ़ेगा जिससे राजधानी अधिक सुरक्षित महसूस करेगी।

संवेदनशील फैसला: छुट्टी के बावजूद हाईकोर्ट की सुनवाई, रेप पीड़िता के 25 सप्ताह के गर्भपात को मंजूरी

बिलासपुर रेप पीड़िता नाबालिग किशोरी के गर्भपात को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया है। शीतकालीन अवकाश के दौरान भी हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने विशेष सुनवाई करते हुए पीड़िता को गर्भपात की अनुमति प्रदान की। जस्टिस पी.पी. साहू ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल (मेकाहारा) एवं पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिए हैं कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में गर्भपात कराया जाए और भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखा जाए। मामला रायपुर जिले की 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी से जुड़ा है, जिसे आरोपी युवक ने प्रेमजाल में फंसाकर शादी का झांसा दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। परिजनों को तब संदेह हुआ जब किशोरी के पेट का आकार बढ़ने लगा। पूछताछ में किशोरी ने आपबीती बताई, जिसके बाद परिजन उसे चिकित्सक के पास लेकर गए। मेडिकल जांच में सामने आया कि किशोरी लगभग छह माह (करीब 25 सप्ताह) की गर्भवती है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पीड़िता ने अपने परिजनों के माध्यम से हाईकोर्ट में गर्भपात की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर को डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल और जेएनएम मेडिकल कॉलेज को नोटिस जारी कर मेडिकल बोर्ड गठित कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि गर्भपात से पीड़िता को कोई गंभीर चिकित्सकीय जोखिम नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने शीतकालीन अवकाश के बावजूद विशेष पीठ का गठन कर सुनवाई की। जस्टिस पी.पी. साहू ने याचिका स्वीकार करते हुए गर्भपात की अनुमति प्रदान की। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दुष्कर्म पीड़िता को यह अधिकार और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए कि वह स्वयं यह निर्णय ले सके कि वह गर्भावस्था जारी रखना चाहती है या उसे समाप्त करना चाहती है। भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने के भी दिए निर्देश हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि पीड़िता और उसके परिजन अस्पताल अधीक्षक, स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं संबंधित मेडिकल कॉलेज प्रशासन से समन्वय स्थापित कर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करें। गर्भपात की प्रक्रिया मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट, 1971 के प्रावधानों के तहत, दो पंजीकृत चिकित्सकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में कराई जाएगी। साथ ही, भविष्य में साक्ष्य के रूप में उपयोग के लिए भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल कानूनन अहम है, बल्कि दुष्कर्म पीड़िताओं के अधिकार, गरिमा और मानसिक-शारीरिक सुरक्षा की दिशा में एक संवेदनशील और मानवीय पहल के रूप में देखा जा रहा है।