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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ प्रदेश मानिकपुरी पनिका समाज के शपथ ग्रहण एवं दीपावली मिलन समारोह में हुए शामिल

रायपुर : सामाजिक विकास का मूलमंत्र है शिक्षा, शिक्षा के बिना जीवन अधूरा – मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ प्रदेश मानिकपुरी पनिका समाज के शपथ ग्रहण एवं दीपावली मिलन समारोह में हुए शामिल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संदेश — शिक्षा ही सामाजिक विकास का आधार, इसके बिना जीवन अधूरा रायपुर शिक्षा के बिना जीवन अधूरा है। शिक्षा केवल नौकरी प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि सफल जीवन का मार्ग है। सामाजिक विकास का मूलमंत्र शिक्षा है। चाहे जीवन जीने की कला हो, व्यापार, कृषि या कोई अन्य क्षेत्र — प्रत्येक क्षेत्र में सफलता के लिए शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश मानिकपुरी पनिका समाज के शपथ ग्रहण एवं दीपावली मिलन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री  साय ने सभी नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई और उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रारंभ से ही शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। राज्य गठन के समय जहाँ केवल एक मेडिकल कॉलेज था, वहीं आज प्रदेश में लगभग 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इसी प्रकार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान — जैसे आईआईटी, ट्रिपल-आईटी, आईआईएम, लॉ यूनिवर्सिटी, एम्स और सिपेट — छत्तीसगढ़ में स्थापित किए गए हैं, जिनसे राज्य के स्थानीय विद्यार्थियों को शिक्षा और अवसर दोनों प्राप्त हो रहे हैं। मुख्यमंत्री  साय ने आगे कहा कि आज समाज को संगठित होने की आवश्यकता है, क्योंकि संगठित समाज से ही राष्ट्र मजबूत बनता है। उन्होंने कहा कि आपके समाज का कला और साहित्य के क्षेत्र में भी आदिकाल से अतुलनीय योगदान रहा है। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के दौरान काछनदेवी रस्म में देवी माँ जिस कन्या पर अवतरित होती हैं, वह भी पनिका समाज की होती है — यह निश्चित ही पूरे समाज के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी का मूलमंत्र है — सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास। उनके मार्गदर्शन में हमारी सरकार पिछले 22 महीनों से सभी वर्गों के कल्याण के लिए सतत रूप से कार्य कर रही है। हमने अन्नदाताओं के हित में कृषक उन्नति योजना, प्रत्येक व्यक्ति को पक्का मकान देने हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना, माताओं और बहनों को सशक्त बनाने के लिए महतारी वंदन योजना, तथा दूरस्थ अंचलों के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए शिक्षक युक्तियुक्तकरण जैसे कदम उठाए हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष  शम्भु नाथ चक्रवर्ती ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभी नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई दी। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ प्रदेश मानिकपुरी पनिका समाज के अध्यक्ष  भरत दास मानिकपुरी सहित समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक  उपस्थित थे।

रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा: दिव्यांगजनों को सशक्त बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

रायपुर : दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए सरकार संकल्पित – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री ने दिव्यांग बच्चों के संग बांटी दीपावली की खुशियां रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर स्थित एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ सीमेंट ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर जरूरतमंद दिव्यांग बच्चों के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए पूर्णतः संकल्पित है। उन्होंने कहा कि रायपुर में 5 एकड़ भूमि में दिव्यांगजनों के लिए सर्व-सुविधायुक्त पार्क का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग बच्चों से बड़ी आत्मीयता के साथ भेंट की और उन्हें दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। कोंपलवाणी और अर्पण दिव्यांग संस्था में अध्ययनरत बच्चों ने मुख्यमंत्री सहित उपस्थित अतिथियों के समक्ष साइन लैंग्वेज का सुंदर प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री साय ने बच्चों के इशारों को दोहराते हुए उनसे साइन लैंग्वेज में गुड मॉर्निंग और गुड आफ्टरनून जैसे शब्द सीखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दिव्यांगजनों के विकास के लिए सराहनीय कार्य हो रहा है। दिव्यांगजनों को निःशुल्क कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्हें स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऋण की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र खटीक ने रायपुर में दिव्यांग पार्क बनाए जाने की घोषणा की थी, और अब रायपुर में 5 एकड़ भूमि पर यह सर्व-सुविधायुक्त दिव्यांग पार्क विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग बच्चों के साथ दीपावली मिलन कार्यक्रम के आयोजन हेतु छत्तीसगढ़ सीमेंट ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन की सराहना की। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन द्वारा जनसेवा के कार्यों के माध्यम से सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट निर्वहन किया जा रहा है। पूर्व में एसोसिएशन द्वारा मरीजों के लिए एम्बुलेंस भी प्रदान की गई थी, जिसका लाभ अनेक जरूरतमंद लोगों को प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वर्ष छत्तीसगढ़ निर्माण का 25वां वर्ष है, जिसे हम रजत जयंती वर्ष के रूप में मना रहे हैं। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी राज्योत्सव का शुभारंभ करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है। उसी दिशा में हमें विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ना है। इस हेतु राज्य सरकार ने विकसित छत्तीसगढ़ विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। सभी के सहयोग से इस लक्ष्य को हम अवश्य प्राप्त करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य में सड़कों का निरंतर विस्तार किया जा रहा है, जिससे प्रदेश की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर–विशाखापत्तनम तथा रायपुर–धनबाद मार्गों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। महाराष्ट्र और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि मैं सांसद के रूप में दिव्यांगजनों के लिए गठित सोशल जस्टिस स्टैंडिंग कमेटी का सदस्य रहा हूँ। संसद में दिव्यांग बिल के लिए हमने व्यापक अध्ययन किया था। बिल पारित होने के पश्चात दिव्यांगजनों को मिलने वाली सुविधाओं में तीन गुना वृद्धि हुई। राज्यपाल रहते हुए मुझे दिव्यांगजनों के लिए कार्य कर रही संस्थाओं में जाने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की चुनौतियों को सामान्यजन अक्सर समझ नहीं पाते। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि इस बार जीएसटी दरों में कमी के कारण दीपावली का उत्सव और अधिक भव्य रूप में मनाया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया, जिसकी हम आज रजत जयंती मना रहे हैं। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत छत्तीसगढ़ का योजनाबद्ध विकास निरंतर हो रहा है। सभी के सहयोग से विकसित छत्तीसगढ़ का सपना साकार होगा। कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि दिव्यांगजनों के साथ दीपावली मिलन का आयोजन उत्तम सोच का प्रतीक है। खुशियां बांटने से बढ़ती हैं, और यह देखकर प्रसन्नता होती है कि एसोसिएशन जनसेवा में सक्रिय है तथा समाज के अन्य लोगों को भी इससे जोड़ रही है। मुख्यमंत्री के समक्ष पैरों से पेंटिंग करने वाले दिव्यांग चित्रकार गोकर्ण पाटिल ने अपनी अद्भुत कला का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ने उनकी कला की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों को गर्म कपड़ों का वितरण भी किया। इस अवसर पर विधायक इंद्र कुमार साहू, रायपुर की महापौर मती मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ सीमेंट ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अंजय शुक्ला सहित अन्य पदाधिकारीगण, कोंपलवाणी और अर्पण दिव्यांग संस्था के बच्चे तथा गणमान्यजन उपस्थित थे।

मंत्री टंक राम वर्मा का संदेश — किसान हैं विकसित भारत की रीढ़, तिलहन उत्पादन से बढ़ेगी आत्मनिर्भरता

रायपुर : 'किसान हैं विकसित भारत की रीढ़, तिलहन उत्पादन से बढ़ेगी आत्मनिर्भरता' — मंत्री टंक राम वर्मा रजत जयंती पर तिलहन कृषक मेला सह सम्मेलन का आयोजन रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सारंगढ़ कृषि उपज मंडी प्रांगण में ‘‘तिलहन कृषक मेला सह सम्मेलन’’ का आयोजन किया गया। नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल के अंतर्गत कृषि कार्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्व, आपदा प्रबंधन, पुनर्वास एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा शामिल हुए। रजत जयंती पर तिलहन कृषक मेला सह सम्मेलन का आयोजन मंत्री वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर अग्रसर हैं। इस दिशा में दलहन-तिलहन का अधिक उत्पादन देश को खाद्य तेल के आयात से मुक्ति दिलाएगा और आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत करेगा। इस अवसर पर मंत्री वर्मा ने कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी एवं मत्स्य विभाग द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन करते हुए हितग्राहियों, महिला स्व-सहायता समूहों और विभागीय अधिकारियों से उत्पादों एवं तकनीकों की जानकारी ली। उन्होंने किसानों को नई कृषि तकनीकें अपनाने, मृदा परीक्षण शिविरों में भाग लेने तथा कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि सारंगढ़ क्षेत्र की मिट्टी तिलहन उत्पादन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। तिलहन नगदी फसल है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार किसानों के लिए घोषित अधिकांश वादों को पूरा कर चुकी है, जिनमें भूमिहीन कृषकों को 10 हजार रुपये की सहायता राशि एक प्रमुख उपलब्धि है। कार्यक्रम में जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडेय एवं कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी किसानों को संबोधित किया। समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया तथा अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक आंजनेय वार्ष्णेय, अपर कलेक्टर प्रकाश सर्वे, पूर्व विधायक मती केराबाई मनहर तथा कृषि, मत्स्य, उद्यानिकी एवं पशुधन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में भयानक सड़क हादसा, तेज रफ्तार डिफेंडर ने ली तीन की जान

बेमेतरा छत्तीसगढ़ के बेमेतरा शहर में  डिफेंडर कार ने एक के बाद एक करके 5 गाड़ियों को टक्कर मार दी. जिससे 3 लोंगो की मौत हो गई. जबकि 5 लोग घायल हो गए. इस घटना से गुस्साए लोगों ने कार मालिक का घर घेर लिया और तोड़फोड़ कर दी.  वहीं बवाल के बाद पुलिस ने कार मालिक को हिरासत में ले लिया और आगे की कार्रवाई में जुटी है. डिफेंडर ने जिन पांच गाड़ियों को टक्कर मारी उनमें बाइक स्कूटी सहित 1 पिकअप शामिल है. डिफेंडर की चपेट में आने से पिकअप सवार 1 युवक की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि 7 घायल लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां 2 अन्य लोगों की भी मौत हो गई. कपड़ा व्यापारी की है डिफेंडर  शहर के अंदर तेज रफ्तार दौड़ते  डिफेंडर कार के कहर के बाद  लोंगो का गुस्सा फूट पड़ा. घटना से आक्रोशित सैकड़ों लोगों ने कार मालिक के घर में तोड़फोड़ कर दी. आरोपी कपड़ा व्यापारी है. जिसका नाम बंटी मालक सिंह है. शहर में बढ़ते आक्रोश और तनाव को देखते हुए बेमेतरा एसएसपी रामकृष्ण साहू मौके पर पहुंचे और लोंगो को समझाया. साथ ही उन्होंने आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया, तब जाकर लोग माने. मामले में बेमेतरा एसएसपी रामकृष्ण साहू ने बताया कि कार कौन चला रहा था, अभी तक नहीं चल पाया है. कार के मालिक को हिरासत में लिया गया है. जिससे पूछताछ जारी है. लोंगो से भी जानकारी जुटाया जा रहा है कि घटना के समय कार कौन चला रहा था? पुलिस अपना काम कर रही है, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. 

वंदेभारत फिर पटरी पर — इस बार 16 कोचों की पूरी ताकत के साथ दौड़ेगी

रायपुर बिलासपुर से नागपुर के बीच दौड़ रही वंदेभारत एक्सप्रेस ट्रेन में यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है. इसे देखते हुए रेलवे ने फिर से 16 कोच के साथ चलाना शुरु कर दिया है. रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार हर दिन इस ट्रेन में 800 से ज्यादा यात्री सफर कर रहे है. बता दें कि 11 दिसंबर 2022 को जब नागपुर के लिए वंदेभारत का परिचालन शुरू हुआ था तब इसमें 16 कोच थे, लेकिन इसमें टिकट महंगा होने के कारण कुछ समय बाद ही यात्रियों की संख्या कम होने लगी. इसके बाद रेलवे ने अप्रैल 2023 में 16 कोच को घटाकर 8 कोच कर दिया था. इसके बाद करीब 564 यात्री ट्रेन में सफर कर पा रहे थे, अब फिर से 1128 यात्री सफर कर पाएंगे. वंदेभारत में रायपुर और बिलासपुर से नागपुर तक सफर करने वाले काफी यात्री मिल रहे हैं. यहां तक की कई यात्री रायपुर से बिलासपुर कम समय में पहुंचने के लिए इसमें सफर करना पसंद कर रहे हैं. इसकी मुख्य वजह इस ट्रेन का समय पर पहुंचना है. साथ ही 16 कोच लगाने के बाद भी वर्तमान में यह ट्रेन पैक चल रही है. वहीं बाकि एक्सप्रेस ट्रेन की तुलना में यह ट्रेन रद्द नहीं हो रही है, इसलिए यात्रियों का भरोसा भी बढ़ा है. रविवार को भी इस ट्रेन के सीसी कोच में 54 और ईसी कोच में 6 वेटिंग चल रही है. इस ट्रेन में त्योहारी सीजन में यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है. नागपुर जाने के लिए बिलासपुर और रायपुर के लोगों को यह ट्रेन रास आ रही है.

नक्सलवाद को करारा झटका: 21 नक्सली हुए आत्मसमर्पण, विजय शर्मा ने किया स्वागत

रायपुर अंतागढ़ क्षेत्र में सक्रिय 21 नक्सलियों के आत्मसमर्पण का उप मुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्वागत करते हुए एक बार से दोहराया कि निर्धारित समय (मार्च 2026) तक नक्सलवाद समाप्त होगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आह्वान किया था. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्ग पर सेंट्रल टीम ने काम किया है. आर्म्ड फोर्स ने काम किया है. उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि 21 नक्सलियों ने हथियारों के साथ पुनर्वास किया है. इनमें 13 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल हैं. नक्सलियों से 3 AK 24, 2 इंसास, रायफल, लांचर सहित कुल 18 हथियारों के साथ भी मिले हैं . डीवीसीएम लेवल के 4 नक्सली है. मैं नक्सलियों के आत्मसमर्पण का स्वागत करता हूं. इन लोगों ने सैकड़ों जान को जाने से बचाया. गृह मंत्री ने कहा कि हाल ही में 210 नक्सलियों ने 129 हथियारों के साथ पुनर्वास किया था. 21 लोगों के पुनर्वास करने से पश्चिम बस्तर रीजन में स्थिति स्पष्ट हो गई है. छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को मिलाकर ये स्थिति स्पष्ट हुई. यह पुनर्वास शब्द का उपयोग है. पुनर्वास करने के बाद हथियार आप छोड़े. बस्तर के साथ मिलकर काम करना चाहिए. इसके साथ उन्होंने दोहराया कि आर्म्ड फॉर्स पूरी ताकत के साथ अपना काम करेगी. वहीं छत्तीसगढ़ महतारी के प्रतिमा को अज्ञात द्वारा तोड़ने पर विजय शर्मा ने कहा कि यह एक चिंतन का विषय है. पुलिस इस मामले में जांच कर रही है. वहीं इस मामले में कांग्रेस के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि इटली वालों भारत से क्या लेना-देना है. देख ले अपने आप को, फिर बात करें.

प्रकृति की गोद में बसा रानीदाह जलप्रपात — जहाँ हर बूंद कहती है कहानी

रायपुर, रानीदाह जलप्रपात का सबसे आकर्षक रूप मानसून के दौरान देखने को मिलता है, जब पानी का बहाव चरम पर होता है और चारों ओर हरियाली व वादियां निखर उठती हैं। एडवेंचर, फोटोग्राफी, और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान अद्भुत अनुभव देता है। यहाँ की स्वच्छ बूंदें, हरियाली भरी घाटियाँ और झरने की गूंज हर आगंतुक को मंत्रमुग्ध कर देती है।       रानीदाह जलप्रपात छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर जिला मुख्यालय से लगभग 15 से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह झरना घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों के मध्य स्थित है और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। बरसात के मौसम में यहाँ का नजारा अत्यंत मनोहारी होता है, झरने की धाराएं विशाल चट्टानों से गिरती हैं और एक विशाल जलकुंड में मिल जाती हैं। आसपास जंगल, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, और ऊँची-नीची पहाड़ियाँ इस जगह को रोमांचक बनाते हैं। यहाँ के माहौल में शांति, ताजगी और हरियाली छायी रहती है, जिससे यह पिकनिक और प्रकृति प्रेमियों का आदर्श स्थल है।       रानीदाह जलप्रपात से जुड़ी एक रोचक किंवदंती भी है। कहा जाता है कि उड़ीसा की रानी शिरोमणि अपने प्रेमी के साथ भागकर जशपुर आई थीं, जहाँ उन्होंने अपने भाईयों से छिपते हुए इसी झरने के समीप आत्मसमर्पण किया। इसी वजह से इस स्थल का नाम रानीदाह पड़ा। आज भी यहाँ रानी की समाधि और पंचमैया नामक स्थल देखने को मिलता है, जो रानी के पाँच भाईयों को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाता है। जलप्रपात के निकट एक शिव मंदिर भी है, जिससे इसका धार्मिक महत्त्व बढ़ जाता है।        यह जलप्रपात वर्ष पर्यन्त विशेष रूप से जून से फरवरी तक चालू रहता है। जशपुर से आरा मार्ग पर लगभग 18 किमी दूरी और मुख्य सड़क से 5 किमी अंदर की ओर स्थित इस स्थल तक सड़क मार्ग, ट्रेन (रांची व अंबिकापुर रेलवे स्टेशन), और हवाई यात्रा (रांची व रायपुर एयरपोर्ट) से पहुँचा जा सकता है। यहाँ जिला प्रशासन ने व्यू प्वाइंट, सीढ़ियाँ, एवं पिकनिक के लिए सुरक्षित व्यवस्था की है ताकि पर्यटक पूर्ण रूप से प्रकृति का आनंद उठा सकें।       रानीदाह जलप्रपात न केवल छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण बिंदु है, बल्कि प्रकृति, इतिहास और रोमांच से भरपूर एक अविस्मरणीय स्थल भी है। यहाँ आकर मनुष्य को प्रकृति के शांत, पवित्र एवं रमणीय स्वरूप का गहरा अहसास होता है।

मंत्री टंक राम वर्मा बोले – किसान हैं विकसित भारत की रीढ़, तिलहन उत्पादन से बढ़ेगी आत्मनिर्भरता

रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सारंगढ़ कृषि उपज मंडी प्रांगण में ‘‘तिलहन कृषक मेला सह सम्मेलन’’ का आयोजन किया गया। नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल के अंतर्गत कृषि कार्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्व, आपदा प्रबंधन, पुनर्वास एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा शामिल हुए।        मंत्री वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर अग्रसर हैं। इस दिशा में दलहन-तिलहन का अधिक उत्पादन देश को खाद्य तेल के आयात से मुक्ति दिलाएगा और आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत करेगा।     इस अवसर पर मंत्री वर्मा ने कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी एवं मत्स्य विभाग द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन करते हुए हितग्राहियों, महिला स्व-सहायता समूहों और विभागीय अधिकारियों से उत्पादों एवं तकनीकों की जानकारी ली। उन्होंने किसानों को नई कृषि तकनीकें अपनाने, मृदा परीक्षण शिविरों में भाग लेने तथा कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि सारंगढ़ क्षेत्र की मिट्टी तिलहन उत्पादन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। तिलहन नगदी फसल है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार किसानों के लिए घोषित अधिकांश वादों को पूरा कर चुकी है, जिनमें भूमिहीन कृषकों को 10 हजार रुपये की सहायता राशि एक प्रमुख उपलब्धि है।      कार्यक्रम में जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडेय एवं कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी किसानों को संबोधित किया। समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया तथा अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए।      इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक आंजनेय वार्ष्णेय, अपर कलेक्टर  प्रकाश सर्वे, पूर्व विधायक केराबाई मनहर तथा कृषि, मत्स्य, उद्यानिकी एवं पशुधन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय: बस्तर में शांति की स्थापना, जनविरोधी माओवादी विचारधारा पर रोक

कांकेर जिले में 21 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर किया आत्मसमर्पण रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में माओवाद की समाप्ति अब  वास्तविकता बनने की ओर अग्रसर है। “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी जनोन्मुख पहल ने बस्तर में शांति और विश्वास की नई बयार बहा दी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज कांकेर जिले में 21 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया, जो प्रदेश में चल रही “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति – 2025” तथा “नियद नेल्ला नार योजना” की सफलता का सशक्त प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवाद की झूठी और भ्रामक विचारधारा से भटके युवा अब समझने लगे हैं कि बंदूक नहीं, विकास की राह ही भविष्य का सही विकल्प है। सरकार इन आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास, पुनर्प्रशिक्षण और सामाजिक पुनर्संस्थापन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है, ताकि वे मुख्यधारा से जुड़कर समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें। मुख्यमंत्री ने  कहा कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर के लोगों का विश्वास जीता है। यही कारण है कि अब माओवादी संगठन तेजी से कमजोर पड़ रहे हैं और बड़ी संख्या में हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति को स्वीकार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल में अब नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और क्षेत्र तेजी से शांति, विकास और सशक्तिकरण की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सलमुक्त बनाना है और छत्तीसगढ़ इस दिशा में तेजी से अग्रसर है।

रायपुर का अमातालाब जहां छठ महापर्व की होती है भव्य पूजा

सूर्योदय और सूर्यास्त के समय दिखता है दिव्यता और आस्था का अद्भुत संगम रायपुर  छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का पवित्र पर्व है, जो पूरे देश में भक्ति और आस्था के साथ मनाया जाता है। राजधानी रायपुर के आमातालाब के घाट में इस पर्व की भव्यता के लिए प्रसिद्ध हैं। कार्तिक मास की अमावस्या को दीवाली मनाने के बाद मनाये जाने वाले इस चार दिवसीय व्रत की सबसे कठिन और महत्त्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल षष्ठी की होती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को यह व्रत मनाये जाने के कारण इसका नामकरण छठ व्रत पड़ा। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि, पंचमी तिथि, षष्ठी तिथि और सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है। रायपुर विश्वकर्मा समाज के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा ने बताया कि नहाय खाय के साथ ही निर्जला व्रत भी शुरू हो जाता है। छठ महापर्व का शुभारंभ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी शनिवार 25 अक्टूबर से हो गया है। इस दिन व्रती स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। राजधानी रायपुर की महिलाओं ने नहाय-खाय वाले दिन से ही पवित्र पर्व छठ का प्रसाद बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। व्रती के साथ घर के सदस्य मिलकर इसकी तैयारी रहे हैं। छठ का प्रसाद बनाने के लिए चूल्हा और बर्तन बिल्कुल अलग होता है। इसके अलावा व्रती और परिवार के सदस्यों को लहसुन, प्याज इत्यादि खाना वर्जित होता है। छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का पवित्र पर्व है, जो पूरे देश में भक्ति और आस्था के साथ मनाया जाता है। राजधानी रायपुर के आमातालाब के घाट में इस पर्व की भव्यता के लिए प्रसिद्ध हैं। कल दिनांक 27 अक्टूबर कार्तिक शुक्ल षष्ठी सोमवार को शाम 6.30 बजे डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। दिनांक 28 अक्टूबर कार्तिक शुक्ल सप्तमी को प्रातः 6 बजे उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत समाप्त किया जाएगा। रायपुर के आमातालाब में छठ पूजन हेतु घाट की साफ सफाई, विद्युत व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रम,पूजन व्यवस्था हेतु समाज के सदस्यों ने विशेष व्यवस्था की गई है। विशेष व्यवस्था हेतु समाज के युवा वर्ग से सुरज शर्मा,विनय शर्मा,रोहित,विश्वकर्मा संतोष विश्वकर्मा,शंकर शर्मा,सुनील शर्मा,सन्नी शर्मा,आकाश शर्मा एवं अन्य सदस्यों ने अपना योगदान दिया है। और समाज के सभी वर्ग के सदस्य,महिलाओं,बच्चों को इस आयोजन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने के लिए आग्रह किया है।