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रेलवे स्टेशन तक पहुंच होगी आसान, रायगढ़वासियों को मिलेगी नई सड़क की सौगात

रायगढ़ रायगढ़ शहर में रेलवे स्टेशन तक आवागमन को आसान बनाने और प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने की दिशा में नई सड़क की सौगात मिलने जा रही है। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी की पहल से अग्रसेन चौक से आरपीएफ पोस्ट होते हुए सीधे रेलवे स्टेशन तक नया सड़क मार्ग विकसित किया जा रहा है। इस वैकल्पिक मार्ग के तैयार होने से रेलवे स्टेशन की दूरी करीब 500 मीटर कम होने के साथ व्यस्त समय में यात्रियों के लगभग 10 मिनट तक बचने की उम्मीद है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने आज प्रस्तावित सड़क निर्माण स्थल का निरीक्षण कर कार्य की प्रगति एवं आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप गुणवत्ता के साथ तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। रेलवे स्टेशन के लिए मिलेगा सीधा और सुविधाजनक वैकल्पिक मार्ग प्रस्तावित सड़क अग्रसेन चौक से आरपीएफ पोस्ट होते हुए सीधे रेलवे स्टेशन तक पहुंचेगी। वर्तमान में चक्रधर नगर चौक सहित शहर के विभिन्न हिस्सों से रेलवे स्टेशन जाने वाला यातायात अग्रसेन चौक के बाद रामनिवास टॉकीज, सुभाष चौक और स्टेशन चौक की ओर जाता है। व्यस्त समय में इस मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ने से लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। नई सड़क बनने के बाद रेलवे स्टेशन जाने वाले यातायात के बड़े हिस्से को वैकल्पिक मार्ग पर डायवर्ट किया जा सकेगा। इससे सुभाष चौक, रामनिवास टॉकीज और गांधी पुतला क्षेत्र में यातायात का दबाव कम होने के साथ शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को भी राहत मिलेगी। करीब 500 मीटर कम होगी दूरी, यात्रियों का बचेगा समय नगर निगम आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय ने बताया कि नए मार्ग से रेलवे स्टेशन पहुंचने की दूरी वर्तमान मार्ग की तुलना में करीब 500 मीटर कम हो जाएगी। व्यस्त समय में लगभग 10 मिनट तक समय की बचत होने की उम्मीद है। इससे विशेष रूप से ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी। कलेक्टर चतुर्वेदी ने कहा कि शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए वैकल्पिक मार्गों का विकास जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को सड़क निर्माण से जुड़े कार्य प्राथमिकता से पूरा करने और निर्माण के दौरान नागरिकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने हरी झंडी दिखाकर द्वितीय साप्ताहिक ट्रेन को किया रवाना

रायपुर  छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के रेल यात्रियों को बड़ी सुविधा मिली है। अम्बिकापुर से हजरत निजामुद्दीन के बीच संचालित एक्सप्रेस ट्रेन की सेवा अब सप्ताह में एक दिन के स्थान पर दो दिन उपलब्ध होगी। मंगलवार को अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन से द्विसाप्ताहिक ट्रेन को सांसद  चिंतामणि महाराज ने हरी झंडी दिखाकर निर्धारित सुबह 7.30 पर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों से मुलाकात कर उन्हें पुष्प भेंट किए और सुखद यात्रा की शुभकामनाएं दीं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल द्वारा गाड़ी संख्या 22407 अम्बिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस का संचालन अब प्रत्येक मंगलवार एवं गुरुवार को किया जाएगा। ट्रेन अम्बिकापुर से प्रातः 7.30 बजे रवाना होगी। वहीं गाड़ी संख्या 22408 हजरत निजामुद्दीन-अम्बिकापुर एक्सप्रेस प्रत्येक रविवार एवं मंगलवार को रात्रि 11 बजे हजरत निजामुद्दीन से रवाना होगी। सेवा आवृत्ति बढ़ाए जाने से सरगुजा संभाग के यात्रियों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए सप्ताह में एक अतिरिक्त सीधी रेल सेवा उपलब्ध हो गई है। सरगुजा संभाग के यात्रियों की लंबे समय से थी मांगकृसांसद  चिंतामणि महाराज  सांसद  चिंतामणि महाराज ने कहा कि अम्बिकापुर से दिल्ली के लिए सप्ताह में दो दिन ट्रेन संचालन की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि रेल सेवा की आवृत्ति बढ़ने से पूरे सरगुजा संभाग के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि पहले सप्ताह में एक दिन ट्रेन चलने के कारण सभी यात्रियों को यात्रा का अवसर नहीं मिल पाता था। अब अतिरिक्त फेरा शुरू होने से यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रथम दिन भी यात्रियों में नई सेवा को लेकर उत्साह दिखाई दिया।    रायगढ़, जशपुर क्षेत्र सहित अन्य स्थानों से भी यात्री इस ट्रेन से यात्रा करने पहुंचे। उन्होंने इस सुविधा के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति सरगुजा संभाग की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया। यात्रियों की मांग पर बढ़ाई गई ट्रेन की आवृत्तिकृडीआरएम  राकेश रंजन डीआरएम  राकेश रंजन ने बताया कि क्षेत्र के लोगों द्वारा लंबे समय से दिल्ली के लिए संचालित रेल सेवा को सप्ताह में एक दिन से बढ़ाकर दो दिन करने की मांग की जा रही थी। जनप्रतिनिधियों की मांग के आधार पर रेल मंत्रालय द्वारा ट्रेन की आवृत्ति बढ़ाकर सप्ताह में दो दिन की गई है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल अम्बिकापुर बल्कि ट्रेन के मार्ग में आने वाले विभिन्न स्टेशनों के यात्रियों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र के लोग इस अतिरिक्त रेल सेवा का अधिक से अधिक उपयोग करेंगे। अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन में बढ़ेंगी सुविधाएं डीआरएम  रंजन ने अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन में किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि स्टेशन में नया प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है। रेलवे लाइनों का विस्तार करने के साथ ही बड़े फुट ओवरब्रिज (एफओबी) का निर्माण भी कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कोचिंग सुविधाओं में सुधार का कार्य किया जा रहा है। भविष्य में अम्बिकापुर से और ट्रेनों के संचालन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जरूरी अधोसंरचना और सुविधाओं के विस्तार पर कार्य किया जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के लिए आवागमन होगा आसान- महापौर नगर निगम महापौर अंबिकापुर के मती मंजूषा भगत ने कहा कि अम्बिकापुर से दिल्ली के लिए सप्ताह में दो दिन सीधी ट्रेन की सुविधा मिलना नगरवासियों और पूरे क्षेत्र के यात्रियों के लिए उपयोगी है। इससे दिल्ली आने-जाने वाले विद्यार्थियों, मरीजों, व्यापारियों सहित अन्य यात्रियों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। उन्होंने इस रेल सुविधा के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति नगरवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डीसीएम  एस. भारतीयन, एसआर डीआरएम  अहूजा, पार्षद  आलोक दुबे, पार्षद  रविकांत उरांव,  भारत सिंह सिसोदिया, मती अरुणा सिंह,  विनोद हर्ष सहित जनप्रतिनिधि, रेलवे के अधिकारी और वरिष्ठ नागरिक गण उपस्थित रहे।  

राज्यपाल रमेन डेका से महाराजा कमल चंद्र भंज देव ने की भेंट

रायपुर  राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में बस्तर राज परिवार के माटी पुजारी एवं रथपति महाराजा कमल चंद्र भंज देव ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने राज्यपाल को बस्तर के प्रसिद्ध ऐतिहासिक  दशहरा उत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। राज्यपाल को भंज देव ने  दशहरा उत्सव के अंतर्गत आयोजित होने वाले महाराजा नवाखाई एवं महाराजा बाहर रहनी कार्यक्रमों में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उन्होंने बस्तर दशहरा की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं तथा उत्सव के विभिन्न आयोजनों की जानकारी भी राज्यपाल को दी। राज्यपाल डेका ने आमंत्रण के लिए  आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और लोक आस्था का  प्रतीक है। इसकी अनूठी परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं।

कच्ची झोपड़ी से पक्के घर तक, पीएम जनमन आवास ने बदली रोन्हू के परिवार की जिंदगी

रायपुर, बारिश शुरू होते ही घास-फूस की छत से टपकता पानी, तेज आंधी में झोपड़ी के क्षतिग्रस्त होने का डर और ठंड के दिनों में परिवार की सुरक्षा की चिंता—सरगुजा जिले के रोन्हू के लिए कभी यही जीवन की हकीकत थी। अब कच्ची झोपड़ी की जगह पक्के घर ने ले ली है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना (ग्रामीण) से मिले पक्के आवास ने उनके परिवार को मौसम की मुश्किलों से राहत देने के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार दिया है। लुण्ड्रा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत ससौली निवासी विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के सदस्य रोन्हू, पिता सोनसाय को वर्ष 2023-24 में योजना के तहत आवास निर्माण के लिए 2 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई। पक्का घर बनने के बाद अब उनका परिवार हर मौसम में अधिक सुरक्षित और निश्चिंत होकर जीवन गुजार रहा है। बारिश में टपकती थी छत, आंधी में सताता था घर टूटने का डर पक्का मकान बनने से पहले रोन्हू का परिवार कच्ची दीवारों और घास-फूस की छत वाली झोपड़ी में रहता था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने लगता था। तेज हवा और आंधी आने पर घर के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी रहती थी, वहीं ठंड के मौसम में भी परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ता था। कच्चे मकान में कीड़े-मकौड़ों सहित अन्य जोखिमों का डर भी बना रहता था। परिवार को समय-समय पर झोपड़ी की मरम्मत और घास-फूस बदलने में मेहनत और पैसा खर्च करना पड़ता था। पक्का घर बनने के बाद इन परेशानियों से काफी हद तक राहत मिली है। पक्की छत के साथ मिली बुनियादी सुविधाएं नए आवास ने रोन्हू के परिवार को केवल मजबूत छत ही नहीं दी, बल्कि रहन-सहन को भी अधिक सुविधाजनक बनाया है। आवास के साथ बिजली, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता से परिवार को बेहतर वातावरण मिला है। अब बारिश, तेज हवा या ठंड के मौसम में घर की सुरक्षा को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहती। बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी अधिक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध हुआ है। सुरक्षित घर से बढ़ा सम्मान और भविष्य का भरोसा रोन्हू के लिए पक्का घर केवल ईंट और दीवारों से बना मकान नहीं, बल्कि वर्षों की असुरक्षा और परेशानी से मिली राहत है। कच्ची झोपड़ी से पक्के आवास तक का यह सफर उनके परिवार के लिए जीवन में आए बड़े बदलाव का प्रतीक है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के रोन्हू के परिवार तक पहुंची आवास सुविधा ने उन्हें सुरक्षित छत, बुनियादी सुविधाओं और बेहतर जीवन का आधार दिया है। आज अपने पक्के घर में परिवार के साथ रहते हुए रोन्हू भविष्य को लेकर अधिक निश्चिंत हैं। एक पक्की छत ने उनके जीवन में सुरक्षा के साथ सम्मान, सुकून और नई उम्मीद भी जोड़ी है।

बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन, 8-9 अक्टूबर को जगदलपुर में जुटेंगे देशभर के अधिकारी

बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन, 8 और 9 अक्टूबर को जगदलपुर में जुटेंगे देशभर के वरिष्ठ अधिकारी एम-पैक्स समितियों के गठन, डिजिटल सेवाओं, भंडारण और सहकारी बैंकिंग पर होगा मंथन उर्वरक वितरण और बहुराज्यीय सहकारिता पर भी चर्चा, छत्तीसगढ़ साझा करेगा अपनी उपलब्धियां रायपुर, बस्तर में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा 8 और 9 अक्टूबर को जगदलपुर में आयोजित सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ अधिकारी ‘सहकार से समृद्धि’ की कार्ययोजना पर मंथन करेंगे। सम्मेलन भारत सरकार के सहकारिता विभाग के सचिव आशीष कुमार भूटानी की अध्यक्षता में होगा। इसमें अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के प्रबंध संचालक पंकज बंसल तथा भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन भी शामिल होंगे। सम्मेलन में मल्टीपर्पस प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (एम-पैक्स) और दुग्ध समितियों के गठन, एम-पैक्स कंप्यूटरीकरण, सहकारिता में डिजिटल तकनीक के उपयोग, भंडारण क्षमता के विस्तार और सहकारी बैंकिंग के सशक्तिकरण पर विशेष चर्चा होगी। एम-पैक्स से उर्वरक वितरण और बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं से समन्वय पर भी विचार कर अगले तीन महीनों की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बताया कि सम्मेलन में 15 राज्यों के सचिव और 14 राज्यों के सहकारी समितियों के पंजीयक भाग लेंगे। सम्मेलन में सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आय और स्थानीय रोजगार को मजबूती देने पर जोर रहेगा। पहले दिन सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की समीक्षा की जाएगी। विभिन्न राज्य एम-पैक्स व दुग्ध समितियों के गठन, सदस्यता विस्तार, डिजिटल सेवाओं और ऋण उपलब्धता के अनुभव साझा करेंगे। विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना, कारोबार के विविधीकरण तथा प्राथमिक समितियों को राष्ट्रीय निर्यात, जैविक और बीज सहकारी संस्थाओं से जोड़ने पर भी चर्चा होगी। दूसरे दिन नाबार्ड और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम आगामी पांच वर्षों के वित्तीय सहयोग तथा राज्यवार लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। एम-पैक्स से उर्वरक व अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता और जिला स्तर के सफल सहकारी मॉडल साझा किए जाएंगे। अधिकारी बस्तर की एम-पैक्स, लघु वनोपज और जनजातीय सहकारी समितियों का भ्रमण भी करेंगे। नई समितियों और डिजिटल सेवाओं से बढ़ी पहुंच सचिव डॉ. प्रसन्ना ने बताया कि ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 515 नए एम-पैक्स, 356 मत्स्य, 364 दुग्ध, 153 लघु वनोपज और 63 महिला बहुउद्देशीय सहकारी समितियां गठित की गई हैं। ‘सहकारिताओं में सहकार’ अभियान के तहत जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में 3.18 लाख नए कृषकों के खाते खोले गए हैं। एम-पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में परिवर्तित किया गया है। राज्य के 2,058 एम-पैक्स में उपलब्ध माइक्रो एटीएम से अब तक 324 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन हुए हैं। गोदाम निर्माण से बढ़ रही भंडारण क्षमता राज्य में एम-पैक्स के लिए 200 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम बनाए जा रहे हैं। आरआईडीएफ योजना 2022 के तहत 725 एम-पैक्स में गोदामों का निर्माण किया गया है। वर्ष 2025 में जर्जर गोदाम वाले अथवा गोदाम विहीन 100 एम-पैक्स में गोदाम निर्माण की योजना स्वीकृत कर निर्माण एजेंसियां चयनित की गई हैं। नवगठित 515 एम-पैक्स में भी गोदाम निर्माण प्रस्तावित है। विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत राज्य के 46 एम-पैक्स चयनित हैं। इनमें 20 के लिए ऋण स्वीकृत हो चुका है, नौ को एएमआई सब्सिडी मिली है और छह में निर्माण शुरू हो गया है। राष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ाव राज्य शासन ने उपार्जन के लिए एनसीसीएफ को 14 और नाफेड को 15 जिलों में एजेंसी नियुक्त किया है। एनसीसीएफ में राज्य के 2,058 और नाफेड में 412 एम-पैक्स का पंजीयन हुआ है। वहीं, 1,681 एम-पैक्स को राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति, 1,633 को राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति और 1,746 को भारतीय बीज सहकारी समिति की सदस्यता मिली है। एथेनॉल संयंत्रों से मूल्य संवर्धन और रोजगार को बढ़ावा कोंडागांव में 80 केएलपीडी क्षमता के एथेनॉल संयंत्र से स्थानीय मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन और रोजगार सृजन हो रहा है। भोरमदेव में पीपीपी मॉडल पर संचालित 80 केएलपीडी संयंत्र सहकारी शक्कर कारखाने को नियमित और बढ़ती आय प्रदान कर रहा है। पंडरिया, अंबिकापुर और बालोद में तीन और एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। इनसे कृषि उपज के मूल्य संवर्धन, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। सम्मेलन में इन अनुभवों के आधार पर सहकारी समितियों की पहुंच, सेवाओं और कारोबार के विस्तार की आगामी दिशा पर विचार किया जाएगा।

सिंगापुर यात्रा में छत्तीसगढ़ को मिले ₹43,600 करोड़ के एफडीआई निवेश प्रस्ताव

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सिंगापुर यात्रा के अंतिम दिन छत्तीसगढ़ ने कौशल विकास और निवेश के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। प्रदेश के युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण देने के लिए सिंगापुर की ITE Education Services के साथ एमओयू किया गया। वहीं एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में ₹350 करोड़ का नया निवेश प्रस्ताव भी मिला। इसके साथ ही सिंगापुर यात्रा में छत्तीसगढ़ को मिले एफडीआई निवेश प्रस्तावों की राशि बढ़कर ₹43,600 करोड़ हो गई है। मुख्यमंत्री  साय ने सिंगापुर के विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालाकृष्णन से भी मुलाकात की। इसके अलावा दुनिया की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ निवेश और साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ ने विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के नामांकन पर पहले Singapore-India Network for Growth (SING) Forum 2026 में भाग लिया है। युवाओं को रोजगार से जोड़ने वाली स्किलिंग पर जोर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ सरकार और ITE Education Services, Singapore के बीच तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए एमओयू हुआ। मुख्यमंत्री और प्रतिनिधिमंडल ने ITE कॉलेज का भ्रमण कर वहां के उद्योग आधारित प्रशिक्षण मॉडल को भी समझा। सिंगापुर में Cisco, BYD और Singapore Airlines जैसी बड़ी कंपनियां ITE कॉलेजों के साथ मिलकर पाठ्यक्रम तैयार करने, प्रशिक्षण देने और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने में सहयोग करती हैं। इसी अनुभव का लाभ छत्तीसगढ़ में भी लिया जाएगा। इससे उद्योगों की जरूरत के मुताबिक पाठ्यक्रम तैयार करने, प्रशिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि “निवेश से उद्योग आते हैं और कुशल युवा उन उद्योगों की ताकत बनते हैं। सिंगापुर ने कौशल विकास का एक सफल मॉडल तैयार किया है। हम चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को भी उद्योगों की जरूरत के मुताबिक आधुनिक प्रशिक्षण मिले और वे अपने प्रदेश में ही बेहतर करियर बना सकें। प्रदेश में आने वाले उद्योगों को उनकी जरूरत के अनुसार कुशल युवा यहीं मिलें।” किसानों की उपज को मिलेगा बड़ा बाजार मुख्यमंत्री  साय ने सिंगापुर की Valency International Pte Ltd को छत्तीसगढ़ में ₹350 करोड़ के निवेश का आमंत्रण दिया। 22 देशों में कारोबार करने वाली यह कंपनी प्रदेश में इंटीग्रेटेड एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट हब स्थापित करेगी। इस हब में काजू, तिल, दलहन और मूंगफली की प्रोसेसिंग की जाएगी। इससे किसानों की उपज का प्रदेश में ही मूल्य संवर्धन होगा, उन्हें नए बाजार मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सिंगापुर के विदेश मंत्री से हुई मुलाकात मुख्यमंत्री  साय ने सिंगापुर के विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालाकृष्णन से मुलाकात की। दोनों के बीच छत्तीसगढ़ और सिंगापुर के बीच निवेश, कौशल विकास, शहरी नियोजन और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। सिंगापुर के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ के विकास में किस तरह लिया जा सकता है, इस पर भी विचार-विमर्श हुआ। 15 से अधिक वैश्विक कंपनियों के साथ निवेश पर चर्चा सीईओ राउंडटेबल में मुख्यमंत्री  साय ने 15 से अधिक वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों से संवाद किया। इनमें TCS, SMBC, Tolaram Group, Agrocorp, Indian Ocean Group और Blue Aqua शामिल थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें छत्तीसगढ़ की निवेश-अनुकूल नीतियों, सुधारों और बेहतर कारोबारी वातावरण की जानकारी दी। बैठक में टेक्नोलॉजी, बैंकिंग, एग्रीबिजनेस, एक्वाकल्चर और फूड सेक्टर में निवेश और साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई। AI और डिजिटल फाइनेंस में युवाओं को प्रशिक्षण देने पर चर्चा मुख्यमंत्री  साय ने Global Finance & Technology Network (GFTN) के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की। बैठक में GFTN के ग्रुप सीईओ  Sopnendu Mohanty, इंडिया, एशिया, जापान एवं ASEAN के सीईओ  James Boey और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर  Anthony Thomas सहित उनकी टीम शामिल हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ के युवाओं को AI और डिजिटल फाइनेंस में प्रशिक्षण देने, प्रदेश के स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों से जोड़ने और नई तकनीकों के लिए टेक लैब स्थापित करने में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इन महत्वपूर्ण समझौतों और बैठकों के साथ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सिंगापुर यात्रा संपन्न हुई। इस यात्रा ने निवेश के साथ-साथ कौशल, तकनीक और वैश्विक साझेदारी के नए अवसर छत्तीसगढ़ के लिए खोले हैं। प्रतिनिधिमंडल 7 अक्टूबर को रायपुर लौटेगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना ने बदली मरवाही के भर्रीडांड़ निवासी मंगसा दास की जिंदगी, वर्षों की परेशानी के बाद मिला अपना पक्का आशियाना

प्रधानमंत्री आवास योजना ने बदली मरवाही के भर्रीडांड़ निवासी मंगसा दास की जिंदगी, वर्षों की परेशानी के बाद मिला अपना पक्का आशियाना खपरैल की टपकती छत और मिट्टी की उखड़ती दीवारों से मिली मुक्ति, बेटे-बहू के साथ पक्के घर में सुकून से गुजर रही जिंदगी रायपुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने के संकल्प ने गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के एक बुजुर्ग की जिंदगी में खुशियों की नई रोशनी बिखेरी है। मरवाही विकासखंड के ग्राम भर्रीडांड़ निवासी 80 वर्षीय मंगसा दास ने जीवन का लंबा समय मिट्टी की दीवारों और खपरैल की छत वाले कच्चे मकान में गुजारा। उम्र के इस पड़ाव पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने के बाद अब वे अपने बेटे-बहू के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन बिता रहे हैं। अपने नए घर की बात करते हुए मंगसा दास के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ दिखाई देती है। वे बताते हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। सामान्य दिनों में तो किसी तरह गुजारा हो जाता था, लेकिन बारिश का मौसम आते ही मुश्किलें बढ़ जाती थीं। तेज बारिश में खपरैल की छत से पानी टपकता था। कई बार मिट्टी की दीवार का हिस्सा उखड़ जाता था और घर में रखा जरूरी सामान भी पानी से भीग जाता था। बारिश की आहट के साथ बढ़ जाती थी चिंता मंगसा दास ने कई बार अपने कच्चे मकान की मरम्मत भी कराई, लेकिन परेशानी का स्थायी समाधान नहीं हो सका। हर साल बारिश से पहले घर को ठीक करने की चिंता रहती थी। तेज बरसात में छत से टपकते पानी और कमजोर होती मिट्टी की दीवारों के बीच परिवार को सामान सुरक्षित रखने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ती थी। बढ़ती उम्र के साथ मकान की बार-बार मरम्मत कराना उनके लिए और कठिन होता चला गया। प्रधानमंत्री आवास योजना बनी नई उम्मीद मंगसा दास को जब प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। योजना की सूची में नाम आने के बाद उनके वर्षों पुराने पक्के घर के सपने को पूरा करने का रास्ता खुल गया। उन्होंने पुराने कच्चे मकान को हटवाकर पक्के आवास का निर्माण कराया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना आज मंगसा दास जैसे ग्रामीण परिवारों के जीवन में सुरक्षा और सम्मान का आधार बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में भी पात्र परिवारों तक आवास योजना का लाभ पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अब बारिश आती है तो डर नहीं लगता पक्का घर बन जाने के बाद मंगसा दास के जीवन की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक दूर हो गई है। अब बारिश होने पर न खपरैल से पानी टपकने का डर है, न मिट्टी की दीवार खराब होने की चिंता। घर का सामान सुरक्षित रहता है और परिवार को मौसम की मार से बचाने के लिए मजबूत छत मिल गई है। मंगसा दास के लिए यह पक्का आवास केवल ईंट, सीमेंट और छत से बना मकान नहीं है। यह उम्र के अंतिम पड़ाव में सुरक्षा, सम्मान और सुकून से जीवन जीने का भरोसा है। मंगसा दास पक्का आवास मिलने से बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय उनके बुढ़ापे का सहारा बने हैं। पक्का मकान मिलने से उनकी वर्षों पुरानी परेशानी समाप्त हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजना से उन्हें जीवन के इस पड़ाव पर सुरक्षित घर मिला है। पक्का घर बना सम्मान और सुरक्षित भविष्य का आधार प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को केवल छत उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार देना भी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में योजना का लाभ ग्रामीण अंचलों के जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच रहा है। 80 वर्षीय मंगसा दास की कहानी इसी बदलाव की एक भावनात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है। कभी बारिश की बूंदें उनके लिए चिंता का संदेश लेकर आती थीं। खपरैल से टपकते पानी के बीच घर का सामान बचाना और मिट्टी की दीवारों को संभालना उनकी मजबूरी थी। आज वही बुजुर्ग अपने बेटे-बहू के साथ मजबूत छत के नीचे सुकून से जीवन बिता रहे हैं। मंगसा दास के चेहरे की मुस्कान इस बदलाव को बयां करती है। पक्का घर केवल चार दीवारें और एक छत नहीं, बल्कि बुढ़ापे में सुरक्षा, सम्मान और निश्चिंत जीवन का भरोसा है। अब बारिश की बूंदें उनके लिए परेशानी नहीं, बल्कि अपने पक्के आशियाने में बैठकर सुकून से देखने वाला मौसम बन गई है।

पंचायत कर्मचारियों की पेंशन पर हाईकोर्ट का फैसला, नहीं मिलेगा सरकारी पेंशन का लाभ

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने पंचायत कर्मचारियों की पेंशन संबंधी याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं. जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता पेंशन पाने का कोई वैधानिक अधिकार स्थापित नहीं कर सके. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायत कर्मचारी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और उनके सेवा संबंधी मामले अलग नियमों से संचालित होते हैं. दरअसल, मामला प्रदेश के अलग-अलग जनपद पंचायतों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़ा था. याचिकाकर्ताओं ने लंबे समय तक सेवा करने और कुछ अन्य जनपद पंचायतों में कर्मचारियों को पेंशन मिलने का हवाला देते हुए पेंशन देने की मांग की थी. कोर्ट ने कहा कि कुछ जनपद पंचायतों द्वारा अपने स्तर पर पेंशन दिए जाने से सभी पंचायत कर्मचारियों को वैधानिक रूप से पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता. कोर्ट ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 131 केवल पहले से मौजूद वेतन, भत्ते और सेवानिवृत्ति लाभों को संरक्षण देती है, इससे नई पेंशन का अधिकार पैदा नहीं होता. याचिका कर्ताओं की सेवा शर्तों में सेवानिवृत्ति लाभ प्रोविडेंट फंड योजना के तहत थे, और वे कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड का लाभ ले रहे थे. ऐसे में पेंशन देने का कोई आधार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि दूसरे किसी प्राधिकरण द्वारा दिए गए लाभ के आधार पर वैधानिक अधिकार की मांग नहीं की जा सकती. सभी याचिकाओं में कोई मेरिट नहीं पाए जाने पर हाईकोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया और लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया.

एचसीएल टेक लखनऊ के 10वें स्थापना दिवस में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी, आईटी सिटी फेज-2 की रखी आधारशिला

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ को एआई, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी, कंप्यूटिंग और डीप टेक टेक्नोलॉजी का केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है। मंगलवार को एचसीएल टेक लखनऊ के 10वें स्थापना दिवस पर उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में लखनऊ को भारत की अग्रणी एआई इनोवेशन सिटी के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए कम से कम 50 विश्वस्तरीय एआई स्टार्टअप स्थापित कर उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचाने वाला इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी ने एचसीएल को भी इस अभियान में साथ आने का प्रस्ताव दिया।   मुख्यमंत्री योगी ने एचसीएल आईटी सिटी लखनऊ के फेज-2 की आधारशिला रखी और परियोजना मॉडल का उद्घाटन किया। करीब 500 करोड़ रुपये के निवेश वाले दूसरे चरण में लगभग छह हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। उन्होंने इमर्जिंग टेक स्किलिंग सेंटर का भी शुभारंभ किया। इसके जरिए छात्रों, शिक्षकों, वर्किंग प्रोफेशनल्स और सरकारी अधिकारियों को उभरती तकनीक में प्रशिक्षित किया जाएगा।   100 एकड़ के एचसीएल टेक लखनऊ परिसर में 12,520 से अधिक टेक कर्मचारी कार्यरत हैं और छह हजार से अधिक फ्रेशर्स को नौकरी का अवसर मिला है। टेकबी कार्यक्रम से 2,200 से अधिक युवाओं को इंडस्ट्री रेडी स्किल और टेक्नोलॉजी करियर से जोड़ा गया है।   आईटी-आईटीईएस निर्यात एक लाख करोड़ के पार मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक दशक पहले आईटी और आईटीईएस के माध्यम से 12 से 15 हजार करोड़ रुपये का निर्यात होता था, जो अब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है। अगले चार वर्ष में इसे 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी 3,800 करोड़ से बढ़कर 45 हजार करोड़ रुपये हो गया है और 2030 तक इसे दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।   उन्होंने कहा कि भारत की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट में प्रदेश का योगदान 60 प्रतिशत है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ और आगरा में आईटी पार्क चल रहे हैं। सात सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क कार्यरत हैं, जबकि वाराणसी, बरेली, कानपुर और गोरखपुर में नए आईटी पार्क बन रहे हैं। नोएडा और लखनऊ को यू-हब यानी डीप टेक हब के रूप में विकसित करने का भी निर्णय लिया गया है।   यूपी का युवा अब यहीं बना रहा दुनिया के लिए टेक्नोलॉजी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दस वर्ष पहले अच्छी डिग्री लेने वाले यूपी के युवाओं को करियर के लिए दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जाना पड़ता था। अब प्रदेश का युवा लखनऊ में रहकर दुनिया के लिए टेक्नोलॉजी बना रहा है और दुनिया के युवा भी यूपी आ रहे हैं। उन्होंने एचसीएल कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश का ब्रांड एंबेसडर बताया।   उन्होंने कहा कि शिव नादर ने एचसीएल की पांच दशक की यात्रा उत्तर प्रदेश से शुरू की थी, जो आज वैश्विक बन चुकी है। दस वर्ष पहले एचसीएल ने लखनऊ को चुना और लखनऊ ने एचसीएल को अपनाया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में एचसीएल ने अपने कार्यक्रम तीन हजार से अधिक गांवों और 50 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचाए हैं।   पहले वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया था : मुख्यमंत्री योगी पूर्ववर्ती सरकारों पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक दशक पहले यूपी में काम करना चुनौतीपूर्ण था। प्रदेश की छवि खराब थी, असुरक्षा का माहौल था, इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था और आईटी सेक्टर की बुनियादी जरूरत बिजली भी गायब थी। उन…

सेलूद कन्या विद्यालय में प्रार्थना शेड निर्माण के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत

सेलूद कन्या विद्यालय में प्रार्थना शेड निर्माण के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत  शिक्षा मंत्री की घोषणा पर त्वरित अमल रायपुर,  दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड अंतर्गत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेलूद की छात्राओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। स्कूल में प्रार्थना शेड के निर्माण हेतु लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ द्वारा 10 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। शिक्षा मंत्री की घोषणा पर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई        उल्लेखनीय है कि शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव द्वारा 05 अक्टूबर 2026 को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेलूद में प्रार्थना शेड के निर्माण की घोषणा की गई थी। इस घोषणा पर त्वरित और संवेदनशील पहल करते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने मात्र अगले ही दिन यानी 06 अक्टूबर को निर्माण कार्य के लिए राशि स्वीकृत करने का आदेश जारी कर दिया। छात्राओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएँ       इस प्रार्थना शेड का निर्माण ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के माध्यम से कराया जाएगा। दैनिक व सांस्कृतिक गतिविधियाँ, शेड बनने से विद्यालय में प्रतिदिन आयोजित होने वाली प्रार्थना सभा के साथ-साथ शैक्षणिक, सांस्कृतिक और अन्य सामूहिक गतिविधियों के संचालन में सुगमता होगी। विशेष रूप से चिलचिलाती धूप और बारिश के मौसम के दौरान छात्राओं को एक सुरक्षित, छायादार और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध हो सकेगा।