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कोर्ट में पूरी हुई मुराद, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने केजरीवाल और सिसोदिया ने कहा ‘हां’

नई दिल्ली  दिल्ली के कथित आबकारी नीति (शराब घोटाला) मामले से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण कानूनी अपडेट सामने आई है। हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के इस केस से अलग होने के बाद, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आखिरकार कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने के लिए राजी हो गए हैं। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान जस्टिस मनोज जैन के हाथों में आ गई है, जिनकी बेंच के सामने इस केस की नियमित सुनवाई शुरू हो चुकी है। केजरीवाल के साथ-साथ आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और विधायक दुर्गेश पाठक ने भी इस नई बेंच के सामने सुनवाई में शामिल होने के लिए अपनी हामी भर दी है। क्या था विवाद और क्यों बदला वकालतनामा? न्यायिक गलियारों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले काफी समय से आम आदमी पार्टी के नेता इस केस की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में होने को लेकर हिचकिचा रहे थे। लेकिन अब जैसे ही यह मामला दूसरी बेंच में ट्रांसफर हुआ, वैसे ही तीनों नेताओं के रुख में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सोमवार को जब सीबीआई (CBI) द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती वाले मामले को जस्टिस मनोज जैन की बेंच के सामने लिस्ट किया गया, तो कोर्ट रूम में एक नई प्रगति देखने को मिली। अदालत का रिकॉर्ड सुनवाई के दौरान जस्टिस मनोज जैन ने आधिकारिक तौर पर नोट किया कि अदालत को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से तीन नए 'वकालतनामा' (सुनवाई में शामिल होने का कानूनी पत्र) प्राप्त हो चुके हैं। यह इस बात का सीधा संकेत है कि आरोपी पक्ष अब इस बेंच के सामने जिरह के लिए पूरी तरह तैयार है। CBI की चुनौती पर अब 16 जुलाई को होगी अगली जंग गौरतलब है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने निचली अदालत (Trial Court) के एक फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी हुई है। इस मामले की गंभीरता और आरोपियों की ओर से वकालतनामा मिलने के बाद जस्टिस मनोज जैन की कोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी दलीलें तैयार करने का समय दिया है।

दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन केस में कांग्रेस नेता अलका लांबा पर कोर्ट का फैसला

नई दिल्ली राऊज एवेन्यू कोर्ट से महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा को बड़ा झटका लगा है. जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में कोर्ट ने महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा को दोषी ठहराया. 5 जून को अलका लांबा की सजा पर राऊज एवेन्यू कोर्ट में बहस होगी. जुलाई 2024 में अलका लांबा के नेतृत्व में महिला कांग्रेस ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था।  अलका लांबा के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है- कोर्ट पिछ्ली सुनवाई में कोर्ट ने कांग्रेस नेता के खिलाफ आपराधिक आरोप तय किया था. राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कहा था कि अलका लांबा के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।  कांग्रेस की महिला नेता पर सरकारी कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की, काम में बाधा डालने का आरोप , कानूनी आदेश की अवहेलना और सार्वजनिक रास्ता रोकने के आरोप, बीएनएस की धारा 132, 221, 223(a) और 285 के तहत केस चल रहा था. इसमें कोर्ट ने आज (25 मई 2026) दोषी करार दिया।  दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा का आदेश जारी करने के बावजूद अलका लांबा ने 29 जुलाई 2024 को जंतर-मंतर पर महिला कांग्रेस का महिला आरक्षण को लेकर प्रदर्शन किया था। अलका लांबा पर आरोप है कि उन्होंने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शनकारियों के साथ टालस्टाय मार्ग पर लगे बैरिकेड पर पहुंचीं और नारेबाजी की। लांबा संसद का घेराव करने पर आमादा थीं। मौके पर मौजूद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से निषेधाज्ञा के बारे में प्रदर्शनकारियों को जानकारी दी और प्रदर्शन खत्म करने की चेतावनी दी थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक अलका लांबा और उनके समर्थकों ने पुलिसकर्मियों को धक्का देकर बैरिकेड को पार किया और संसद मार्ग जाम कर दिया। पुलिस के काफी समझाने के बाद भी अलका लांबा और दूसरे समर्थक वहां से नहीं हटे, जिसके बाद गिरफ्तार कर लिया था। बाद में सब-इंस्पेक्टर अनीता सिंह के बयान पर अलका लांबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। 20 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने संबंधित घटना का वीडियो देखा था, जिसमें पाया गया कि अलका बलपूर्वक लोकसेवक को उसके काम में बाधा पहुंचा रही थीं। बिल्कुल स्वागत है, मैं डरने वाली नहीं हूं- अलका लांबा कोर्ट की तरफ से दोषी करार दिए जाने के बाद अलका लांबा ने कहा, "यही उम्मीद थी, यही होने वाला है. जुलाई 2024 का मामला है. मानसून सत्र चल रहा था. महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर मैं और मेरी सारी बहनें जंतर मंतर पर संवैधानिक अधिकार के तहत महिला आरक्षण लागू करो कि मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे. पुलिस पर दबाव कहूं या अपनी कुर्सी को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने मुझपर एफआईआर की. 2025 से 2026 इसी कोर्ट में मैं चक्कर काटती रही और आज पता लगता है कि मुझे दोषी पाया गया है. मेरा अपराध था कि मैंने महिला आरक्षण और महिला सुरक्षा के लिए जंतर मंतर पर पहुंचकर आवाज उठाई कैसे? मुझे 5 जून को सजा सुनाई जाएगी. बिल्कुल स्वागत है, डरने वाली नहीं हूं। 

AI से होगी प्रॉपर्टी की जांच, दिल्ली में पेपरलेस रजिस्ट्री सिस्टम लागू करने की योजना

नई दिल्ली  मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली में संपत्ति की रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। AI आधारित इस नई व्यवस्था से संपत्ति को लेकर बढ़ता विवाद खत्म होगा, भ्रष्टाचार की संभावना कम हो जाएगी, विवादित संपत्तियों के खरीद-फरोख्त पर रोक लगने के साथ साथ संपत्ति रजिस्ट्री की पूरी व्यवस्था पेपरलेस होगी। सीएम इन बदलावों को लेकर निजी कंपनियों के साथ बैठक भी कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि हम सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को आधुनिक पासपोर्ट सेंटर की तरह विकसित करना चाहते हैं। सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के वर्क कल्चर को बदलना चाहते हैं, जिससे भ्रष्टाचार, अनावश्यक देरी, लंबा इंतजार कम हो और पूरी व्यवस्था तकनीक पर आधारित हो। इससे पारदर्शिता बढ़ने के साथ जवाबदेही भी तय होगी AI से होगी मालिकाना हक की जांच सीएम ने बताया कि वह जिस प्रीमियम मॉडल का सब-रजिस्ट्रार ऑफिस चाहती हैं, वह डिजिटल और AI आधारित होगा। यानी आवेदन करने से लेकर प्रॉपर्टी के मालिकाना हक तक की जांच एआई आधारित व्यवस्था से होगी। आवेदकों को सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में सिर्फ बायोमीट्रिक व फोटो खिंचवाने के लिए आना होगा। अभी संपत्ति की रजिस्ट्री कराने के लिए दोनों पार्टी आपस में एग्रीमेंट करते हैं। इसके बाद नोटरी से दस्तावेज तैयार करवाए जाते हैं, फिर सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में समय लेकर आगे काम होता है। वेबसाइट पर भरी जाएगी फॉर्म की जानकारी नई व्यवस्था में दोनों पार्टियों के बीच होने वाले एग्रीमेंट की जानकारी वेबसाइट पर मौजूद फॉर्म में भरी जाएगी। अगर कोई विवादित संपत्ति है, या बुक्ड प्रॉपर्टी है तो AI उसके रिकॉर्ड से खुद मैच कर लेगी और उसपर रेड फ्लैग लगाएगी। इससे विवादित संपत्तियों के खरीद-फरोख्त पर रोक लगेगी। अगर संपत्ति में कोई समस्या नहीं है तो दोनों पक्ष सब-रजिस्ट्रार में जाएंगे। इसके बाद संपत्ति की रजिस्ट्री पर डिजिटल साइन होकर वह सीधे आवेदक के डिजी लॉकर में भी चला जाएगा। नए कॉन्सेप्ट के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में एसी वेटिंग रूम, डिजिटल हेल्प डेस्क, प्रशिक्षित स्टाफ, स्मार्ट टोकन सिस्टम और रीयल टाइम ऐप्लीकेशन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं होंगी। ये होगा फायदा     विवादित प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त नहीं हो पाएगी।     मालिकाना हक की जांच ऑनलाइन की जाएगी।     रजिस्ट्री के बाद सब-रजिस्ट्रार दस्तावेज को नहीं रोक सकेंगे।     रजिस्ट्री में होने वाले भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।

प्राइवेट स्कूलों को मिली राहत, नए सत्र में फीस बढ़ाने पर सरकार की अनुमति जरूरी नहीं

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने  शिक्षा निदेशालय (DoE) को बड़ा झटका देते हुए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि दिल्ली के प्राइवेट स्कूल और बिना सरकारी सहायता वाले मान्यता प्राप्त स्कूलों को नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने पर फीस बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय से पहले से अनुमति या मंजूरी लेने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है। एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की बेंच ने साफ किया कि पूर्व अनुमति केवल उसी स्थिति में जरूरी है, जब कोई स्कूल चालू शैक्षणिक सत्र के बीच में अचानक फीस बढ़ाना चाहता हो। कोर्ट ने यह कहा कि किसी स्कूल के खाते में केवल 'सरप्लस फंड' होने का मतलब यह कतई नहीं निकाला जा सकता कि वह स्कूल शिक्षा का व्यावसायीकरण कर रहा है। फीस बढ़ाने की स्वायत्तता पर हाईकोर्ट की मुहर हालांकि, बेंच ने अपने निर्देश में यह भी साफ कर दिया कि DoE को सौंपे गए बयानों में संबंधित स्कूलों द्वारा प्रस्तावित फीस में बढ़ोतरी केवल 2027 के शैक्षणिक सत्र से ही लागू होगी। बेंच ने कहा कि किसी भी स्कूल को पिछले शैक्षणिक सत्रों के लिए फीस या अन्य चार्जेस का कोई भी बकाया पिछली तारीख से मांगने या वसूलने की अनुमति नहीं होगी। DoE का काम स्कूलों के कामकाज को 'माइक्रो-मैनेज' करना नहीं बेंच ने यह साफ किया कि जो स्कूल किसी एकेडमिक सेशन की शुरुआत में फीस बढ़ाते हैं, उन्हें सेशन शुरू होने से पहले DoE को प्रस्तावित फीस का एक स्टेटमेंट जमा करना होगा। हालांकि, जस्टिस भंभानी ने कहा कि प्राइवेट, बिना सरकारी मदद वाले और मान्यता प्राप्त स्कूलों को अपनी वित्तीय आजादी का अधिकार बना रहेगा। शिक्षा निदेशालय का काम स्कूलों के रोजमर्रा के वित्तीय कामकाज को डिक्टेट करना या 'माइक्रो-मैनेज' करना नहीं है। DoE के रेगुलेटरी अधिकार बहुत सीमित हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निजी, बिना सरकारी मदद वाले और मान्यता प्राप्त स्कूलों में फीस तय करने के मामले में DoE के रेगुलेटरी अधिकार बहुत सीमित हैं और वे आम तौर पर दखल देने की इजाजत नहीं देते। कोर्ट ने कहा कि किसी स्कूल के खातों में सिर्फ ज्यादा पैसे होने के आधार पर DoE यह नतीजा नहीं निकाल सकता कि स्कूल कमर्शियलाइजेशन (मुनाफाखोरी) कर रहा है। DoE को 2 महीने में प्रस्तावों पर लेना होगा फैसला हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा कि जहां कोई स्कूल चल रहे एकेडमिक सेशन के दौरान फीस बढ़ाने का प्रस्ताव रखता है, तो उसे अपना प्रस्ताव DoE को उस तारीख से कम से कम दो महीने पहले जमा करना होगा, जिस तारीख से बदली हुई फीस लागू करने की मांग की जा रही है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि DoE को ऐसे प्रस्ताव पर उसी दो महीने के समय में फैसला करना होगा, ऐसा न करने पर प्रस्ताव को मंजूर माना जाएगा। 137 प्राइवेट स्कूलों की याचिका पर आया फैसला यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब दिल्ली के 137 प्राइवेट स्कूलों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इन स्कूलों ने वर्ष 2016-17 से 2022-23 के बीच समय-समय पर फीस बढ़ाने के प्रस्ताव दिए थे, जिन्हें शिक्षा निदेशालय (DoE) ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने सरकार के उन आदेशों को 'गलतफहमी पर आधारित' बताते हुए पूरी तरह से रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ किया कि जिन स्कूलों को सरकारी जमीन 'लैंड क्लॉज' (जमीन आवंटन की शर्त) के तहत मिली है, उन पर भी सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के लिए यही नियम लागू होगा।

आंधी-बारिश के चलते उड़ानों पर पड़ सकता है असर, इंडिगो ने फ्लाइट स्टेटस चेक करने की दी सलाह

नई दिल्ली  इंडिगो एयरलाइन ने शनिवार को दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की। राष्ट्रीय राजधानी में आंधी और बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए एयरलाइन ने कहा कि खराब मौसम के कारण उड़ानों के आगमन और प्रस्थान पर असर पड़ सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए इंडिगो एयरलाइन ने कहा कि दिल्ली के मौसम की स्थिति अस्थायी रूप से उड़ान संचालन को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, एयरपोर्ट और एयरलाइन की टीमें व्यवधान को कम करने के लिए पहले से तैयारी कर रही हैं। इंडिगो ने अपनी एडवाइजरी में क्या कहा इंडिगो ने कहा, 'दिल्ली में तेज आंधी के साथ बारिश की संभावना है, जिसके कारण उड़ानों के आगमन और प्रस्थान पर असर पड़ सकता है। हमारी टीमें संचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए पहले से तैयारी कर रही हैं, लेकिन मौसम की वजह से थोड़ी देरी हो सकती है।' एयरलाइन ने यात्रियों को सलाह दी कि वे एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए जरूर चेक कर लें। फ्लाइट्स की स्टेटस देखकर ही घर से निकलें इसके अलावा, यात्रियों से अतिरिक्त समय लेकर चलने को कहा गया है, क्योंकि बारिश और जलभराव के कारण शहर के कई हिस्सों में सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है। एयरलाइन ने कहा कि अगर आप आज यात्रा कर रहे हैं, तो एयरपोर्ट जाने से पहले हमारी वेबसाइट या ऐप पर अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक कर लें। इससे पहले शुक्रवार को भी एयरलाइन ने मुंबई आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भारी बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की थी। यात्रियों को असुविधा नहीं हो इसलिए एडवाइजरी यात्रियों से कहा गया था कि वे खराब मौसम के कारण संभावित देरी से बचने के लिए सामान्य समय से पहले एयरपोर्ट पहुंचें। एयरलाइन ने कहा था कि ट्रैफिक अपडेट पर नजर रखें और एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले ऐप या वेबसाइट पर अपनी फ्लाइट की स्थिति जांच लें। मई की शुरुआत में खराब मौसम का असर पूर्वी भारत में इंडिगो की उड़ानों पर भी पड़ा था। कोलकाता से पटना जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट को खराब मौसम के कारण पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने की अनुमति नहीं मिल सकी थी, जिसके बाद विमान को लखनऊ डायवर्ट करना पड़ा था।  

पूर्वी दिल्ली: संजय झील सूखने से मछलियों की बड़ी संख्या में मौत, पाइपलाइन खराबी बताई जा रही वजह

नई दिल्ली पूर्वी दिल्ली की संजय झील में सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि इसका कारण पानी की आपूर्ति में समस्याओं के चलते झील का सूखना हो सकता है। संजय झील के लिए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) द्वारा पानी की आपूर्ति की जाती है। इस विशाल जल निकाय का प्रबंधन करने वाले दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ‘‘झील के जलस्तर को बनाए रखने के लिए उपचारित पानी की आपूर्ति की जिम्मेदारी सरकारी स्वामित्व वाली एक जल आपूर्ति एजेंसी के पास है कोंडली से संजय झील में पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी डीडीए के अनुसार, पास के कोंडली मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) से उपचारित पानी को संजय झील तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी। घटनाक्रम से अवगत डीजेबी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि पाइपलाइन को हुए नुकसान और उसके बाद किए गए मरम्मत कार्यों के कारण झील में उपचारित पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। मरम्मत कार्यों के कारण 3 महीनों से झील में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही थी अधिकारी ने बताया कि मरम्मत कार्यों के कारण पिछले चार महीनों से झील में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि लगभग चार महीने पहले जलाशय में पानी पहुंचाने वाली पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, लेकिन तब तापमान इतना अधिक नहीं था और स्थिति नियंत्रण में थी। लेकिन अब भीषण गर्मी के कारण झील सूख गई है। जल विशेषज्ञ भीम सिंह रावत के अनुसार, डीजेबी की जल आपूर्ति लाइन में रिसाव के कारण झील के कुछ हिस्से सूख गए, जो बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत का कारण हो सकता है। यमुना एक्टिविस्ट ने क्या कहा यमुना कार्यकर्ता और 'साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल' के सदस्य रावत ने कहा, ‘‘हाल ही में झील की जल आपूर्ति पाइपलाइन में रिसाव हुआ, जिसके कारण झील का जलस्तर काफी कम हो गया है। रिसाव कब हुआ, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। अब तक झील के कुछ हिस्से पूरी तरह सूख चुके हैं। इसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत हुई है।’’

राशन कार्ड आवंटन में घूसखोरी का खुलासा, CBI ट्रैप में रंगे हाथ पकड़ा गया अधिकारी

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक असिस्टेंट कमिश्नर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी अधिकारी एशियन मार्केट, पुष्प विहार, नई दिल्ली स्थित फूड एंड सप्लाई विभाग में तैनात था। सीबीआई की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस मामले में 20 मई को केस दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी को शिकायत मिली थी कि आरोपी अधिकारी राशन कार्ड ों के आवंटन और वितरण के बदले रिश्वत की मांग कर रहा था। आरोप था कि वह प्रत्येक राशन कार्ड पर 100 रुपए की अवैध रकम मांग रहा था। क्या है पूरा मामला बताया गया कि कुल 475 राशन कार्ड अलग-अलग नजदीकी दुकानों को आवंटित किए जाने थे। इनमें शिकायतकर्ता की दुकान को भी करीब 120 राशन कार्ड मिलने थे। इसी आधार पर आरोपी अधिकारी ने शिकायतकर्ता से लगभग 12 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की और फिर जाल बिछाकर कार्रवाई की। 21 मई को सीबीआई की टीम ने ट्रैप ऑपरेशन चलाया। इस दौरान आरोपी असिस्टेंट कमिश्नर को शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया। मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई का बयान आया सामने सीबीआई ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। सीबीआई ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत मांगता है या भ्रष्टाचार से जुड़ी कोई जानकारी हो, तो उसकी शिकायत तुरंत करें। इसके लिए लोग सीबीआई एसीबी दिल्ली कार्यालय, सीजीओ कॉम्प्लेक्स, लोधी रोड, नई दिल्ली में संपर्क कर सकते हैं। साथ ही 011-24367887 और मोबाइल नंबर 9650394847 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला: पानी-सीवर इन्फ्रास्ट्रक्चर चार्ज घटा

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में अब घर बनाना सस्ता हो जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घर बनाने के दौरान पानी और सीवर पर लगने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर चार्ज (IFC) को 70 प्रतिशत तक घटाने का शुक्रवार को फैसला किया। यह चार्ज सिर्फ घर के निर्माण वाले हिस्से और पानी की वास्तविक मांग पर लिया जाएगा। पहले IFC चार्ज प्लॉट के आकार पर लगता था। इसमें पार्किंग जैसी खुली जगह (नॉन FAR) भी शामिल की जाती थी। यानी प्लॉट बड़ा तो यह चार्ज ज्यादा देना पड़ता था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि IFC चार्ज अब नई निर्माण परियोजनाओं या किसी संपत्ति में अतिरिक्त निर्माण पर ही लागू होगा। जिन रिडिवेलपमेंट प्रोजेक्ट्स में पानी की मांग नहीं बढ़ती, उन पर यह चार्ज नहीं लगेगा। सीएम ने कहा कि A-B कैटिगरी की कॉलोनियों में इन्फ्रा चार्ज में 59% की कमी की गई है। ई, एफ कैटिगरी में 50% और G-H कैटिगरी में 70% की कमी की गई है। दिल्ली में घर बनाने की मुख्य बातें अब प्लॉट के आकार के हिसाब से नहीं देना होगा चार्ज जितने में कंस्ट्रक्शन, उतने पर ही IFC लगेगा इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज क्या होता है?  घर, फ्लैट, या व्यावसायिक इमारत बनाने (या खरीदने) पर बिल्डर/अथॉरिटी द्वारा एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज ( EDC ) और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्ज (IDC) वसूला जाता है इसका उपयोग कॉलोनी या क्षेत्र में बाहर की मुख्य सड़कें, पार्क, और सीवरेज सिस्टम जैसी सुविधाएं देने के लिए किया जाता है।  जब आप किसी नए या बड़े प्लॉट पर पानी और सीवर का नया कनेक्शन लेते हैं, तो संबंधित जल बोर्ड (जैसे दिल्ली जल बोर्ड) द्वारा इन्फ्रास्ट्रक्चर शुल्क लगाया जाता है। इसके अलावा, सार्वजनिक या निजी स्थानों पर इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की सुविधा (चार्जिंग स्टेशन का सेटअप) से जुड़े शुल्क को भी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर चार्ज कहा जाता है।  

44–46 डिग्री तक पहुंच सकता है तापमान, दिल्ली में थार की गर्म हवाओं से बढ़ी परेशानी

नई दिल्ली  मई में गर्मी कहर बरपा रही है। शुक्रवार को लू नहीं चली, लेकिन तापमान काफी गर्म महसूस हुआ। मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ सब डिविजन में लू रहने की बात कही। गर्म हवाओं के थपेड़े सहन से परे रहे। 28 मई तक लू का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान तापमान 44 से 46 डिग्री तक रह सकता है। शुक्रवार को भी रात के समय भी लू के हालात रहे। न्यूनतम तापमान 29.3 डिग्री रहा। यह सामान्य से 2.9 डिग्री अधिक रहा। अधिकतम तापमान 43.3 डिग्री रहा। यह सामान्य से 3.1 डिग्री अधिक रहा। थार और पाकिस्तान से आ रही गर्म हवाएं तेजी से बढ़ रही इस गर्मी की वजह राजस्थान के थार और पाकिस्तान से आ रही गर्म शुष्क हवाएं है। यह हवाएं रात में भी दिल्ली को ठंडा होने से रोक रही हैं। अहम यह है कि पहाड़ों में जा कर भी आप गर्मी से राहत नहीं पा सकते। इस समय कई पहाड़ी इलाकों में भी लू का अलर्ट है। लू का ऑरेंज अलर्ट पूर्वानुमान के अनुसार 28 मई तक लू का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया हैं। इस दौरान तापमान 44 से 46 डिग्री तक जा सकता है। 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। दो दिनों तक बारिश की संभावना वहीं स्काईमेट के अनुसार आज बादलों के साथ बहुत हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों पर एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय है। इसके साथ ही पंजाब और उत्तर राजस्थान के ऊपर निचले स्तर पर एक चक्रवाती सिस्टम बना हुआ है। यह सिस्टम उत्तर प्रदेश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में बने दूसरे परिसंचरण से एक पूर्व-पश्चिम ट्रफ के जरिए जुड़ा हुआ है, जो फिलहाल दिल्ली के उत्तर से गुजर रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह ट्रफ अगले दो दिनों में थोड़ा दक्षिण की ओर खिसककर दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। इसकी वजह से दिल्ली-एनसीआर में शनिवार और रविवार बादल बनने की संभावना है। खासकर रविवार 23 मई को तेज धूलभरी हवाएं और झोंके चलने की संभावना अधिक रहेगी। कुछ इलाकों में हल्की बारिश भी हो सकती है।

जामिया नगर हिंसा केस में बड़ा फैसला, जांच पर उठे सवाल के बाद 12 लोग आरोपमुक्त

नई दिल्ली  दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट में स्थित एक विशेष अदालत ने 2007 के जामिया नगर दंगा मामले में 12 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया है। अदालत ने आरोपों पर सुनाएगए अपने फैसले में दिल्ली पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है। स्पेशल जज विशाल गोगने ने 95 पन्नों के आदेश में कहा कि मामले में पहचान परेड (TIP) नहीं कराई गई, जबकि ऐसे मामलों में यह एक बेहद अहम प्रक्रिया होती है। अदालत के अनुसार, इसके बिना केवल पुलिस गवाहों के आधार पर आरोपियों की पहचान को पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। जांच पर अदालत की टिप्पणी अदालत ने कहा कि जिन 12 आरोपियों को बरी किया गया, उनकी गिरफ्तारी घटना के अगले दिन अलग-अलग सार्वजनिक स्थानों से दिखाई गई थी। जज ने कहा कि रिकॉर्ड से यह जाहिर होता है कि गिरफ्तारी और पहचान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। अदालत ने इस पर भी गौर किया कि जांच में किसी स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह को शामिल नहीं किया गया। फैसले में कहा गया कि सार्वजनिक गवाहों की गैर-मौजूदगी और पहचान परेड न होने से अभियोजन का मामला कमजोर पड़ता है। हालांकि, अदालत ने 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। अभियोजन के अनुसार, ये आरोपी कथित रूप से भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे और उन पर दंगा, आगजनी, डकैती और हत्या की कोशिश जैसे आरोप हैं। जामिया नगर पुलिस चौकी पर हुआ था हमला लंबी चली कानूनी प्रक्रिया मामला 22 सितंबर, 2007 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, करीब 1,500 लोगों की भीड़ ने जामिया नगर पुलिस चौकी पर हमला किया था। आरोप था कि स्थानीय बाजार को हटाने की कार्रवाई के विरोध में हिंसा हुई, जिसमे आगजनी, पुलिसकर्मियों पर हमला और सरकारी सपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। करीब 20 साल पुराने इस मामले में पाच आरोपियों की मौत हो चुकी है, जिसके कारण उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई है। वहीं एक आरोपी अब भी फरार घोषित है।