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गगनप्रीत कौर को बड़ी राहत! BMW हादसे में अब कोर्ट ने सुनाई जमानत

नई दिल्ली दिल्ली के धौला कुआं के पास हुए बीएमडब्ल्यू हादसे की आरोपी गगनप्रीत कौर को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने गगनप्रीत को जमानत दे दी है। 14 सितंबर को हुए इस हादसे में वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी नवजोत सिंह की दर्दनाक मौत हो गई थी। जबकि उनकी पत्नी संदीप गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। पत्नी ने आरोप लगाया था कि गाड़ी में मौजूद आरोपी पति-पत्नी उन्हें पास के किसी अस्पताल ना ले जाकर 19 किलोमीटर दूर एक छोटे से अस्पताल ले गए जिससे उनके पति को समय पर इलाज नहीं मिल पाया और उनकी मौत हो गई। उन्होंने दावा किया था कि वह बार-बार उनसे गुहार लगाती रहीं कि मेरे पति को तुरंत इलाज की जरूरत हैं, प्लीज किसी पास के अस्पताल में ले चलिए लेकिन उन दोनों ने एक नहीं मानी। आदेश सुनाने से पहले कोर्ट ने कहा कि कुछ ही सेकंड में एक एम्बुलेंस वहां पहुंच गई थी और 30 सेकंड तक वहीं रही। लेकिन घायलों को अस्पताल नहीं ले जाया गया। जबकि उन्हें कोई इमरजेंसी भी नहीं थी और वे वह पास के आर्मी बेस अस्पताल जा रहे थे। इस एम्बुलेंस का क्या किया जाना चाहिए? अदालत ने पुलिस से पूछा, क्या वे लापरवाही से हुई मौत के आरोपी नहीं हैं? अदालत ने कहा कि पैरामेडिक के साथ एम्बुलेंस घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए बाध्य थी। अदालत ने कहा कि पैरामेडिक ने आसपास खड़े लोगों से पूछा कि क्या किसी को मदद चाहिए। वहां एक एंबुलेंस बिल्कुल तैयार थी जो 30 सेकंड के भीतर वहां से चली गई। क्या यह इलाज में लापरवाही नहीं है? इन शर्तों के साथ दी गई जमानत दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें एक लाख रुपए के मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानत पर बेल दी है। कोर्ट ने गगनप्रीत कौर को अपना पासपोर्ट जमा करने का भी निर्देश दिया है।  

सुप्रीम कोर्ट का दिवाली से पहले अहम फैसला, दिल्ली-NCR में चल सकेंगे ग्रीन पटाखे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले पटाखों को लेकर शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में उन निर्माताओं को ग्रीन पटाखे बनाने की इजाजत दे दी, जिनके पास नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) से प्रमाणित सर्टिफिकेट हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह शर्त रखी है कि ये निर्माता दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अगले आदेश तक किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री नहीं कर सकेंगे। निर्माताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए हलफनामा देना होगा कि वे दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री नहीं करेंगे। यह फैसला वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के मकसद से लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह हितधारकों के साथ मिलकर दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध से संबंधित समाधान तैयार करे और इसे 8 अक्टूबर तक कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे। इससे पहले, एससी ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध को चुनिंदा तरीके से लागू करने पर सवाल उठाया था। इसने कहा था कि अगर स्वच्छ हवा राष्ट्रीय राजधानी के कुलीन निवासियों का अधिकार है, तो यह पूरे देश के नागरिकों को भी मिलना चाहिए। चीफ जस्टिस बीआर गवई और जज विनोद चंद्रन की पीठ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों के विनियमन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट का तर्क और संतुलन सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बिहार में खनन पर प्रतिबंध लगाने से अवैध माफिया पैदा हो गए। ऐसे में दिल्ली-NCR में भी पटाखों पर पूर्ण पाबंदी से अवैध बाजार बढ़ रहा है। कोर्ट का कहना है कि इस मसले पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। बिक्री पर अभी भी संशय हालांकि राहत सिर्फ निर्माण तक सीमित है। कोर्ट ने अभी साफ नहीं किया है कि दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री और दागने की इजाजत होगी या नहीं। इस पर अंतिम फैसला 8 अक्टूबर की सुनवाई में हो सकता है। केंद्र सरकार को आदेश सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि सभी हितधारकों के साथ मिलकर पटाखों पर प्रतिबंध लागू करने की स्पष्ट नीति बनाई जाए। कोर्ट ने माना कि अब तक दिल्ली-NCR में पूरी तरह बैन लागू नहीं हो सका है। अब सभी की निगाहें 8 अक्टूबर पर दिल्ली-NCR की जनता में उत्सुकता है कि क्या दिवाली पर सालों बाद पटाखों की आवाज गूंजेगी। अब देखना होगा कि 8 अक्टूबर की सुनवाई में कोर्ट बिक्री और आतिशबाज़ी पर क्या फैसला सुनाता है। इससे कई सवाल खड़े हुए हैं कि क्या यह कदम प्रदूषण संकट को और बढ़ाएगा या फिर “ग्रीन पटाखे” सच में समाधान साबित होंगे। पटाखा बनाने वालों को देना होगा लिखित वचन बता दें कि पटाखा निर्माताओं को यह भी लिखित वचन देना होगा कि वे दिल्ली-एनसीआर में कोई पटाखा नहीं बेचेंगे। यह आदेश इसलिए दिया गया है क्योंकि इस क्षेत्र में दिवाली के समय प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ जाता है। इस मामले पर अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि आगे बिक्री पर क्या कदम उठाए जाएं। पूरे देश में नहीं लगा सकते रोक- बीआर गवई  बता दें कि, मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि वह पूरे देश में पटाखों की बिक्री और निर्माण पर पूरी तरह से रोक नहीं लगा सकता, क्योंकि केंद्र सरकार ने इस बारे में कोई राष्ट्रीय स्तर का प्रतिबंध प्रस्तावित नहीं किया है। राजधानी में 494 तक पहुंच गया था एक्यूआई शीर्ष अदालत का यह कदम दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए उठाया गया है। नवंबर 2024 में राजधानी का औसत एक्यूआई 494 तक पहुंच गया था, जिससे शहर घने स्मॉग की चादर में लिपट गया था और लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया था। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिवाली से ठीक पहले आया है, जब पटाखों की बिक्री और जलाने से प्रदूषण का स्तर और ज्यादा बढ़ सकता था। अब दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।  क्या NCR के शहर ही साफ हवा के हकदार? चीफ जस्टिस ने कहा, ‘अगर एनसीआर के शहर स्वच्छ हवा के हकदार हैं, तो दूसरे शहरों के लोग क्यों नहीं? जो भी नीति होनी चाहिए, वह अखिल भारतीय स्तर पर होनी चाहिए। हम केवल इसलिए दिल्ली के लिए नीति नहीं बना सकते कि वे देश के कुलीन नागरिक हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मैं पिछली सर्दियों में अमृतसर में था और वहां प्रदूषण दिल्ली से भी बदतर था। अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है, तो उन्हें पूरे देश में प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।’ सीनियर वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि कुलीन वर्ग अपना ख्याल खुद रखता है। प्रदूषण होने पर वे दिल्ली से बाहर चले जाते हैं। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग से इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त करने को कहा।

NHAI का बड़ा कदम: दिल्ली की सड़कों पर मिलेगी स्मूद ड्राइविंग, UER-II का विस्तार शुरू

 नई दिल्ली दिल्ली-NCR में बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए NHAI एक नया मार्ग विकसित कर रहा है। यह प्रोजेक्ट UER-II का 17 किलोमीटर लंबा विस्तार होगा, जो अलीपुर से शुरू होकर NH-709B (दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे) पर ट्रोनिका सिटी तक जाएगा। दिल्ली की रिंग रोड, NH-44, NH-48 और बरापुल्ला एलिवेटेड कॉरिडोर पर दबाव कम होगा। हरियाणा और राजस्थान से देहरादून की ओर जाने वाले ट्रैफिक के लिए तेज और सुगम रास्ता मिलेगा। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सड़कों की जाम समस्या में राहत मिलेगी। कितना बड़ा है ये प्रोजेक्ट? सितंबर को NHAI ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए बोली मंगाई। इसमें 5 महीने में फिजिबिलिटी स्टडी और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। इस स्टडी का खर्च 2.32 करोड़ रुपये होगा। अनुमान है कि इस 17 किलोमीटर लंबे हाईवे को बनाने में 3350 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आएगी। यह प्रोजेक्ट न केवल भव्य है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर की ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान भी साबित हो सकता है। क्या-क्या होगा खास? NHAI की योजना में इस हाईवे को बनाने से पहले हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखा जाएगा। पहले चरण में ट्रैफिक एनालिसिस, रास्ते के विकल्प और इलाके की टोपोग्राफी तय की जाएगी। लेन कॉन्फिगरेशन और बिजली-पानी की लाइनों, जंगल की मंजूरी जैसी पहलुओं पर भी निगरानी होगी। प्रोजेक्ट का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव भी जांचा जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। दूसरे चरण में कॉरिडोर का स्ट्रक्चरल डिजाइन, मिट्टी और पानी की जांच, चौराहों का डिजाइन, ड्रेनेज प्लान, ट्रैफिक साइनेज, लागत अनुमान और टोल स्कीम का निर्धारण इस हाईवे का निर्माण न केवल मजबूत होगा, बल्कि यह स्मार्ट और पर्यावरण के अनुकूल भी होगा। आवारा पशुओं का भी ध्यान राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हाईवे पर आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए सुरक्षित पशु आश्रय बनाने की योजना शुरू की है। योजना के तहत हाईवे के आसपास ऐसे स्थान विकसित किए जाएंगे, जहां पशुओं के लिए चारा भंडारण, खाने की जगह और केयरटेकर्स के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एनएचएआई का कहना है कि इस कदम से न केवल सड़क हादसों में कमी आएगी, बल्कि पशुओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। आवारा पशु अक्सर हाईवे पर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं, और इस पहल से उनकी सुरक्षा के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा भी बढ़ेगी। स्थानीय विरोध और चुनौतियां इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्तरी दिल्ली के कुछ गांवों में विरोध भी हो रहा है। मुंडका-बक्करवाला खंड पर टोल प्लाजा को लेकर स्थानीय लोग नाराज हैं। एनएचएआई को इन मुद्दों को सुलझाने के लिए कदम उठाने होंगे, ताकि प्रोजेक्ट सुचारू रूप से आगे बढ़ सके। एनएचएआई के मुताबिक, इस विस्तार के पूरा होने के बाद UER-II दिल्ली के उत्तर, पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम हिस्सों के साथ-साथ गुरुग्राम तक जाने वाले ट्रैफिक के लिए एक अहम बायपास बन जाएगा। यह द्वारका एक्सप्रेसवे के साथ मिलकर दिल्ली की रिंग रोड को बायपास करेगा। भविष्य में UER-II का दूसरा 65 किलोमीटर लंबा पूर्वी विस्तार ट्रोनिका सिटी से गाजियाबाद होते हुए नोएडा तक जाएगा।

दिल्ली मेट्रो में वीडियो शूटिंग पर सख्त कार्रवाई, रील और डांस पर अब रोक

नई दिल्ली दिल्ली मेट्रो जो हमेशा अपनी साफ-सुथरी और समय पर चलने वाली ट्रेनों के लिए जानी जाती थी, अब सोशल मीडिया स्टार्स के लिए फेवरेट लोकेशन बन चुकी थी। ट्रेनों में शूटिंग, डांस या कोई भी कंटेंट बनाने के मामले अक्सर वायरल वीडियो के रूप में सामने आते रहते थे। लेकिन अब मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सख्त कदम उठाते हुए ट्रेनों में सोशल मीडिया शूटिंग पर पाबंदी लगा दी है। DMRC ने ऐलान किया है कि रील्स शूट करना, डांस करना या कोई भी सोशल मीडिया कंटेंट बनाना सख्त मना है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा। मेट्रो में सुनाई देगा अलर्ट दिल्ली मेट्रो ने 14 सितंबर से नई मुहिम शुरू की है, जिसके तहत ट्रेनों में रील्स बनाना, डांस वीडियो बनाना या कोई भी सोशल मीडिया कंटेंट बनाना सख्ती से प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह मुहिम इस हफ्ते के अंत तक दिल्ली मेट्रो के हर कोने तक पहुंच जाएगी। यात्रियों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में सीधे-सीधे चेतावनी दी जाएगी कि यह गतिविधियाँ पूरी तरह से मनाही हैं।    DMRC के अधिकारियों का कहना है कि ये नई घोषणाएँ पुरानी चेतावनियों का हिस्सा हैं, जैसे फर्श पर बैठना या कोच में खाना खाने से मना करना। इन नियमों का उद्देश्य यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि मेट्रो सफर एक आरामदायक और व्यवस्थित अनुभव बने रहे। DMRC अधिकारियों का कहना है कि ये घोषणाएँ केवल चेतावनी नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे कानून का डंडा भी है। भले ही मेट्रो रेलवे अधिनियम 2002 में रील बनाने का कोई सीधा जिक्र नहीं है, लेकिन मेट्रो परिसर में असुविधा पैदा करने वाले प्रावधानों के तहत उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। यानी अगर आप पकड़े गए, तो आपकी जेब भी ढीली हो सकती है। क्यों उठाया गया यह कदम? DMRC के प्रधान कार्यकारी निदेशक, कॉर्पोरेट संचार, अनुज दयाल ने बताया कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यात्रियों को किसी भी तरह की असुविधा न हो। उन्होंने कहा, “हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी की वीडियो शूटिंग के कारण दूसरे यात्रियों को परेशानी न हो।” साथ ही, DMRC ने सोशल मीडिया अभियान भी शुरू किया है जिसमें यात्रियों से अपील की गई है कि वे अपने फोन पर तेज आवाज में संगीत बजाने से बचें। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम मेट्रो यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित बनाए रखने के लिए जरूरी है। पिछले कुछ सालों में दिल्ली मेट्रो सोशल मीडिया कंटेंट के लिए तेजी से लोकप्रिय स्पॉट बन गई है। कई लोग ट्रेन के अंदर नाच, लिप-सिंक और स्टंट वीडियो बनाते हैं, जो ऑनलाइन वायरल हो जाते हैं। लेकिन यह लोकप्रियता हमेशा सकारात्मक नहीं रही। कई बार ऐसे वीडियो अन्य यात्रियों के लिए परेशानी और असुरक्षा का कारण बने हैं। अप्रैल में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक व्यक्ति कोच के अंदर शराब पीते और उबला अंडा खाते हुए दिखा। वहीं, एक अन्य वीडियो में दो यात्रियों के बीच शर्टलेस झगड़ा देखने को मिला। 2023 में ही DMRC ने अपनी फ्लाइंग स्क्वॉड को निर्देश दिया था कि वे रील बनाने या आपत्तिजनक सामग्री शूट करने वाले यात्रियों पर निगरानी रखें। लेकिन इसके बावजूद ऐसे वीडियो लगातार वायरल होते रहे, जिससे यह साबित होता है कि पूरी तरह मैनेज करना आसान नहीं है। नियमित यात्रियों का कहना है कि यह समस्या केवल सोशल मीडिया ट्रेंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुविधा, आराम और सुरक्षा से भी जुड़ी है। DMRC यात्रियों के लिए कर रहा कोशिशें DMRC के प्रधान कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल ने कहा कि लगातार यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, चाहे तेज आवाज़ में संगीत बजाने पर रोक हो या वीडियो शूटिंग और डांस वीडियो बनाने पर प्रतिबंध, इन सभी पहलों का मकसद मेट्रो यात्रा को आरामदायक, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है। DMRC अधिकारियों ने बताया कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना अकेले पर्याप्त नहीं है। यात्रियों को समझाना और जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है। इसीलिए, मेट्रो में घोषणाओं के माध्यम से नियमित चेतावनी दी जा रही है और सोशल मीडिया पर भी यात्रियों को जागरूक करने के अभियान चलाए जा रहे हैं।

इन सब में न पड़ें, कुछ अच्छे काम करें – EVM याचिकाकर्ता को दिल्ली HC की नसीहत

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनावों में EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिका के जरिए मांग की गई थी कि चुनावों में EVM के इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाए। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को 'इन कामों में न पड़ने' की सलाह दी है। खास बात है कि विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। बार एंड बेंच के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनावों में मशीन के इस्तेमाल के खिलाफ पहुंची याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा, 'इन सब कामों में मत पड़िए। कुछ अच्छा काम करें।' चुनाव आयोग ने किए बदलाव EVM अब उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें होंगी और इसकी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनावों से होगी। वर्ष 2015 से EVM पर उम्मीदवारों की श्वेत-श्याम तस्वीरें होती थीं, जिन्हें पहचानना कई मतदाताओं के लिए मुश्किल होता था। निर्वाचन आयोग ने EVM मतपत्रों की स्पष्टता और पठनीयता बढ़ाने के लिए चुनाव संचालन नियम, 1961 की धारा 49बी के तहत EVM मतपत्रों के डिजाइन व मुद्रण के मौजूदा दिशानिर्देशों में संशोधन किया है। आयोग ने बीते सप्ताह बताया, 'अब से EVM पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें छपी होंगी। बेहतर दृश्यता के लिए उम्मीदवार का चेहरा तस्वीर के तीन-चौथाई हिस्से पर होगा।' उम्मीदवारों के क्रमांक और इनमें से कोई नहीं (नोटा) विकल्प भारतीय अंकों के अंतरराष्ट्रीय रूप में छपे होंगे। स्पष्टता के लिए फॉन्ट का आकार 30 होगा और बोल्ड में लिखा होगा। आयोग ने बताया कि एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए सभी उम्मीदवारों के नाम और ‘नोटा’ विकल्प एक ही फॉन्ट प्रकार और आसानी से पढ़े जाने योग्य बड़े आकार में छपे होंगे। EVM मतपत्र 70 जीएसएम कागज पर मुद्रित किए जाएंगे। विधानसभा चुनावों के लिए निर्दिष्ट ‘आरजीबी वैल्यू’ वाले गुलाबी रंग के कागज का उपयोग किया जाएगा। आयोग ने बताया कि आगामी चुनावों में उन्नत EVM मतपत्रों का उपयोग किया जाएगा, जिसकी शुरुआत बिहार से होगी। आयोग के मुताबिक, जब 10 साल पहले तस्वीरों का इस्तेमाल शुरू किया गया था, तब इसका उद्देश्य उन निर्वाचन क्षेत्रों में भ्रम की स्थिति से बचना था, जहां कई उम्मीदवारों के नाम एक जैसे थे या उनके नाम एक जैसे लगते थे। भारतीय निर्वाचन आयोग ने बताया कि मशीनों पर सीरियल नंबर भी अधिक प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।

जिसने खरीदा था प्लॉट 5 साल पहले, अब कमा रहा है मोटा मुनाफा – यमुना एक्सप्रेसवे पर 536% तक बढ़ी कीमतें

नई दिल्‍ली यमुना एक्सप्रेसवे, जो कभी सिर्फ एक रास्ता हुआ करता था, अब NCR का सबसे पसंदीदा रियल एस्टेट कॉरिडोर बन गया है, पिछले पांच सालों में यहां के अपार्टमेंट और प्लॉट की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. यहां प्लॉट की कीमतें 500% से ज़्यादा और अपार्टमेंट की कीमतें 158% तक बढ़ गई हैं. इनवेस्टोएक्सपर्ट (InvestoXpert) एडवाइजर्स  की ताज़ा RealX Stats रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 2025 के बीच इस कॉरिडोर पर अपार्टमेंट की कीमतें 158% बढ़ी हैं, जबकि प्लॉट की कीमतों में 536% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो पांच गुना से भी ज़्यादा है.   अपार्टमेंट की कीमतों में उछाल अपार्टमेंट खरीदना निवेशकों और खरीदारों, दोनों के लिए एक अच्छा दांव साबित हुआ है. 2020 में जहां एक वर्ग फुट की औसत कीमत 3,950 रुपये थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 10,200 रुपये हो गई. जब NCR के बाकी इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट आई, तब भी यमुना एक्सप्रेसवे पर कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, साल 2025 में ही यहां अपार्टमेंट की कीमतों में 7.37% की बढ़ोतरी देखी गई, जिससे यह साफ है कि यहां घर खरीदना एक बेहतर फैसला है. Chi 3 जैसे इलाकों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है, जहां ज़मीन की कीमतें दस गुना से भी ज़्यादा बढ़कर 1,200 रुपये प्रति वर्ग फुट से 12,950 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं हैं. सेक्टर 22D और Chi Phi में भी पांच साल में कीमतें 400% से ज़्यादा बढ़ी हैं. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कमाल यह जबरदस्त उछाल कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वजह से आया है. इन सबमें सबसे बड़ा कारण नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो जेवर में बन रहा है और जिसका उद्घाटन 30 अक्टूबर 2025 को होना है. उम्मीद है कि यह एयरपोर्ट यहां की ग्रोथ में सबसे बड़ा रोल अदा करेगा. इसके अलावा, UER-II एक्सप्रेसवे, YEIDA की इंडस्ट्रियल टाउनशिप, लॉजिस्टिक्स पार्क और बनने वाली फिल्म सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स ने भी यमुना एक्सप्रेसवे को एक आम इलाके से ग्रोथ के बड़े हब में बदल दिया है.  इनवेस्टोएक्सपर्ट एडवाइजर्स के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर, विशाल रहेजा कहते हैं, "यमुना एक्सप्रेसवे अब NCR के सबसे शानदार रियल एस्टेट कॉरिडोर में से एक बन गया है. प्लॉट की कीमतों में पांच गुना का उछाल दिखाता है कि निवेशकों को इस पर कितना भरोसा है और जेवर एयरपोर्ट और UER-II जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का यहां कितना असर हुआ है. इंडस्ट्रियल क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और प्लांड टाउनशिप के साथ, यह इलाका सिर्फ बढ़ नहीं रहा, बल्कि पूरे NCR का भविष्य तय कर रहा है." अब जब अपार्टमेंट की कीमतें 10,000 रुपये प्रति वर्ग फुट का आंकड़ा पार कर चुकी हैं और प्लॉट ने जबरदस्त रिटर्न दिया है, तो एक्सपर्ट्स का मानना है कि यमुना एक्सप्रेसवे की यह डबल-डिजिट ग्रोथ जारी रहेगी. एयरपोर्ट के खुलने से यहां विकास का एक नया दौर शुरू होने की उम्मीद है.

आश्रम में शोषण का खुलासा: 17 छात्राओं ने खोली बाबा और वार्डन की सच्चाई

नई दिल्ली दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के वसंतकुंज इलाके में स्थित एक प्रसिद्ध आश्रम के स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती नाम के संचालक पर 17 छात्राओं से छेड़छाड़ करने का आरोप लगा है। छात्राओं की शिकायत पर वसंतकुंज (नार्थ) थाना पुलिस ने मामला दर्जकर लिया है। जांच में पता चला कि आरोपी महंगी वोल्वो कार में एंबेसी का नंबर लगाकर घूम रहा था। पुलिस ने कार जब्त कर ली है और आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है। बताया जा रहा है कि संचालक की आखिरी लोकेशन आगरा में देखी गई। पता चला है कि मठ ने उसे कृत्य की जानकारी होते ही उसे आश्रम से निकाल दिया गया है। दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार दक्षिण भारत के प्रमुख मठ का एक आश्रम दिल्ली के वसंतकुंज इलाके में है। इसे चलाने के लिए स्वामी चैतन्यानंद नामक आरोपी को संचालक नियुक्त किया गया था। आश्रम में मैनेजमेंट की पढ़ाई होती है, जिसके दो बैच हैं। दोनों बैच में 35 से ज्यादा छात्राएं पढ़ती हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि छात्राओं ने अपनी शिकायत में बताया कि आश्रम में काम करने वाली कुछ वार्डन आरोपी से मिलवाती थीं। सभी छात्राओं के अदालत में जज समक्ष (183 के तहत) के बयान भी दर्ज हो गए हैं। मामला दर्ज होने का पता चलने के बाद आरोपी भाग गया है। एंबेसी का नंबर अपनी महंगी कार पर लगा रखा था पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने अपनी महंगी वोल्वो पर यूएन का नंबर लगा रहा था। उसने कार पर 39 यूएन 1 लिखा हुआ था। पुलिस ने इस बारे में जब यूएन से रिपोर्ट मांगी तो पता चला कि उसे कोई नंबर नहीं दिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार उसने खुद ही नंबर लिखा था। छात्राओं की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। दक्षिण भारत के प्रमुख मठ ने उसे आश्रम से निकाल दिया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।- अमित गोयल, पुलिस उपायुक्त, दक्षिण-पश्चिमी जिला दिल्ली पुलिस शृंगेरी शारदापीठ का बयान दक्षिणाम्नाय श्रीशारदापीठ, शृंगेरी ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर बताया कि स्वामी चैतन्यनंद सरस्वती (पूर्व नाम – स्वामी डॉ. पार्थसारथी) के खिलाफ गंभीर कदम उठाए गए हैं। पीठ ने साफ कहा है कि उनके आचरण और गतिविधियाँ अवैध, अनुचित और पीठ के हितों के खिलाफ रही हैं। इसी कारण उनसे पीठ के सभी संबंध समाप्त कर दिए गए हैं। पीठ की ओर से यह भी जानकारी दी गई है कि स्वामी चैतन्यनंद सरस्वती के अवैध कार्यों को लेकर संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराई गई है। साथ ही, शृंगेरी पीठ ने स्पष्ट किया है कि ‘श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट-रिसर्च’ (वसंत कुंज, नई दिल्ली) एआईसीटीई (AICTE) से मान्यता प्राप्त है और यह संस्था पीठ के अधीन चल रही है। संस्थान का संचालन पीठ द्वारा गठित गवर्निंग काउंसिल करती है, जिसकी अध्यक्षता प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. कृष्णा वेंकटेश कर रहे हैं। गवर्निंग काउंसिल ने आश्वासन दिया है कि छात्रों के हितों की पूरी सुरक्षा की जाएगी और उनकी पढ़ाई तथा कार्यक्रमों में किसी तरह की रुकावट नहीं आने दी जाएगी।

त्योहारी भीड़ में मिलेगी राहत: रेलवे की ओर से रिकॉर्ड 12,000 स्पेशल ट्रेनें

नई दिल्ली  दीवाली और छठ पूजा पर घर जाने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। इस साल फेस्टिव सीज़न पर घर के जाने वालों के लिए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव  ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि रेलवे का लक्ष्य  इस साल 12000 स्पेशल ट्रेनें चलाने का है, जबकि पिछले साल चलाई गई 7,500 ट्रेनों से काफ़ी ज़्यादा है। यह कदम त्योहारी सीजन में ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। 1 अक्टूबर से 15 नवंबर तक चलेंगी ट्रेनें- रेल मंत्री के अनुसार ये स्पेशनल ट्रेनें 1 अक्टूबर से 15 नवंबर तक चलाई जाएंगी। रेलवे ने अब तक 10,000 स्पेशल ट्रेनों की अधिसूचना जारी कर दी है। इन ट्रेनों में से 150 ट्रेनें पूरी तरह से अनारक्षित होंगी, ताकि आखिरी समय में यात्रा करने वाले यात्रियों को भी परेशानी न हो। वंदे भारत स्लीपर पर अपडेट अश्विनी वैष्णव ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वंदे भारत स्लीपर की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और दूसरी रेक का इंतजार किया जा रहा है, जो 15 अक्टूबर तक आ जाएगी। इसके बाद दो वंदे भारत स्लीपर कमीशनिंग  एक साथ शुरू की जाएंगी। रेल मंत्री ने कुछ नए रूट्स पर चलने वाली ट्रेनों के बारे में भी जानकारी दी है। लखनऊ जंक्शन और सहारनपुर के बीच नई वंदे भारत एक्सप्रेस यात्रा के समय को कम करेगी, जबकि मदार जंक्शन (अजमेर) और दरभंगा के बीच चलने वाली नई साप्ताहिक अमृत भारत एक्सप्रेस निम्न और मध्यम आय वर्ग के यात्रियों के लिए उपयोगी होगी। रेल मंत्री ने यह भी बताया कि भारतीय रेलवे की समय पालनता में सुधार हुआ है।  यह कदम दिवाली और छठ पूजा के दौरान लाखों लोगों की यात्रा को और आसान और सुविधाजनक बनाएगा।  

भ्रष्टाचार पर शिकंजा: सत्येंद्र जैन की करोड़ों की संपत्तियां ED ने जब्त कीं

नई दिल्ली  जाँच के परिणामस्वरूप, ईडी ने 31 मार्च 2022 को सत्येंद्र कुमार जैन के स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनियों की 4.81 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था और 27 जुलाई 2022 को अभियोजन शिकायत (पीसी) दर्ज की थी। माननीय न्यायालय ने 29 जुलाई 2022 को पीसी का संज्ञान लिया।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली के पूर्व मंत्री और आप नेता सत्येंद्र कुमार जैन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने कथित रूप से उनके द्वारा नियंत्रित कंपनियों से जुड़ी 7.44 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की हैं। यह कार्रवाई 15 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। ईडी ने 24 अगस्त को सीबीआई के मामले से सत्येंद्र कुमार जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि सत्येंद्र कुमार जैन ने दिल्ली सरकार में मंत्री के रूप में रहते हुए 14 फरवरी 2015 से 31 मई 2017 की अवधि के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित की थी। सीबीआई ने 3 दिसंबर 2018 को सत्येंद्र कुमार जैन, पूनम जैन और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। जांच के बाद, ईडी ने 31 मार्च 2022 को सत्येंद्र कुमार जैन के स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनियों की 4.81 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया और 27 जुलाई 2022 को अभियोजन शिकायत (पीसी) दर्ज की थी। कोर्ट ने 29 जुलाई 2022 को पीसी का संज्ञान लिया।  

एक और वंदे भारत एक्सप्रेस आएगी, राजपुरा-मोहाली कनेक्शन होगा सुपरफास्ट!

नई दिल्ली  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने मंगलवार को राजपुरा-मोहाली के बीच नई रेलवे लाइन की घोषणा की। साथ ही फिरोजपुर कैंट-बाटिंडा-पटियाला-दिल्ली के मार्ग पर नई वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने के प्रस्ताव का भी खुलासा किया है। यह परियोजनाएं क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी। ANI की खबर के मुताबिक, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को बताया कि पंजाब में रेलवे क्षेत्र में निवेश में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। जहां 2009 से 2014 के बीच यह निवेश सिर्फ ₹225 करोड़ था, वहीं अब यह बढ़कर ₹5,421 करोड़ हो गया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय केंद्रीय राज्य मंत्री (रेल) रवनीत सिंह बिट्टू को दिया, जिन्होंने इस परियोजना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।   486 किलोमीटर का सफर 6 घंटे 40 मिनट में  फिरोजपुर कैंट से दिल्ली के बीच चलने वाली नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन कुल 486 किलोमीटर की यात्रा सिर्फ 6 घंटे 40 मिनट में पुरी हो सकेगी। यह ट्रेन बुधवार को छोड़कर सप्ताह के बाकी छह दिन उपलब्ध होगी। राजपुरा-मोहाली नई रेल लाइन रेल मंत्री ने कहा कि राज्य की राजधानी से सीधे और शॉर्ट रेल कनेक्टिविटी की काफी समय से मांग की जा रही थी। इसको अब पूरा करने का वक्त है। राजपुरा-मोहाली के बीच की यह लाइन चंडीगढ़ को अम्बाला-अमृतसर मेन लाइन पर स्थित सराय बंजारा स्टेशन के जरिये राज्य के बाकी हिस्सों से कनेक्ट करेगी। यह लाइन फतेहगढ़ साहिब, पटियाला और पंजाब में एसएएस नगर से गुजरेगी। इस रूट की लंबाई 18 किलोमीटर है। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 443 करोड़ रुपये होगी।   नई रेल लाइन से फायदा इस लाइन के तैयार हो जाने पर राजपुरा और मोहाली के बीच सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी और सफर में करीब 66 किलोमीटर दूरी कम हो जाएगी। इससे इस रूट पर भारी ट्रैफिक से भी निजात पाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, टेक्सटाइल्स, मैनुफैक्चरिंग और कृषि सेक्टर को आगे बढ़ने में मदद हो सकेगी। इस एरिया से करीब कई टूरिस्ट प्लेस भी मौजूद हैं, जाहिर है, इसमें भी काफी तरक्की होगी।