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IAS अफसर के ठिकाने पर ED की छापेमारी, ₹2.5 करोड़ नकद मिलने का दावा

चंडीगढ़ पंजाब और चंडीगढ़ में दो दिन से ED की रेड चल रही है। टीम बुधवार देर रात दिल्ली के पूर्व मंत्री सतेंद्र जैन के चंडीगढ़ स्थित घर भी पहुंची।ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के पंजाब और चंडीगढ़ दफ्तरों में 2 दिन से ED की रेड चल रही है। ED ने मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के भांजे के घर लुधियाना में भी रेड की। देर रात टीम दिल्ली के पूर्व मंत्री सतेंद्र जैन के घर भी पहुंची।  सरकार ने हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने ED की छापेमारी की निगरानी के लिए वारंट ऑफिसर नियुक्त किया है। वारंट ऑफिसर को मौके पर जाकर छापेमारी की स्थिति देखने और इसकी रिपोर्ट अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। वारंट ऑफिसर किसी भी समय छापेमारी वाली जगह पर जाकर निरीक्षण कर सकता है। उसे गुरुवार दोपहर 2 बजे तक मामले की स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में सौंपनी होगी। इधर, एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि पंजाब के एक IAS अधिकारी के घर से करीब ढाई करोड़ कैश, सवा किलो सोना-चांदी और जमीन के कुछ दस्तावेज मिले हैं। इनकी जांच जारी है। ED की रेड के बीच पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व पंजाब के भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्‌टू ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट से खलबली मचा दी है। उन्होंने अपनी पोस्ट में दावा किया है कि पंजाब का एक मंत्री देश छोड़कर भाग गया है। बताया जा रहा है कि बिट्‌टू का इशारा मंत्री मुंडियां की तरफ है। हालांकि, इसकी ऑफिशियल पुष्टि नहीं हुई है। आज AAP करेगी टीमों का घेराव वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) आज मोहाली में GMADA दफ्तर पर ED की कार्रवाई के विरोध में केंद्रीय जांच एजेंसी की टीमों का घेराव करेगी। पार्टी ने आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनावों से पहले केंद्रीय एजेंसियों के जरिए पंजाब सरकार और अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। AAP नेताओं ने कहा कि लंबी छापेमारी के बावजूद ED को अब तक कुछ नहीं मिला। पार्टी ने ED की कार्रवाई के समय और तरीके पर सवाल उठाते हुए इसे अधिकारियों को डराने की कोशिश बताया। AAP ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही पंजाब में ED की सक्रियता बढ़ी है। भाजपा की धक्केशाही को पंजाब बर्दाश्त नहीं करेगा। मोहाली दफ्तर के 3 मंजिल सील किए ED ने मंगलवार सुबह मोहाली स्थित GMADA के फेज-8 में मुख्यालय में कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद ED और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान व अधिकारी मौके पर अब भी मौजूद हैं। ED अधिकारी सरकारी रिकॉर्ड खंगालने के साथ GMADA के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ कर रहे हैं। मोहाली दफ्तर के 3 मंजिलों को सील किए जाने और रिकॉर्ड जब्त किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी करवाई जा रही है। इसके अलावा IAS अधिकारी राजीव गुप्ता की सेक्टर-19 स्थित कोठी में टीम पहुंची थी। ED की टीम बुधवार देर रात सेक्टर-39 की कोठी नंबर 926 में भी पहुंच गई, जहां दिल्ली के पूर्व मंत्री सतिंदर जैन रहते रहे थे। मंत्री के रिश्तेदार के घर भी पहुंची ED इसी जांच के दौरान बुधवार को पंजाब के शहरी आवास एवं विकास मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के रिश्तेदार गुरप्रीत सिंह सैनी उर्फ प्रिंस के लुधियाना के साहनेवाल स्थित घर पर भी ED ने तलाशी ली। रिपोर्टों के अनुसार, वहां कार्रवाई दोपहर करीब ढाई बजे शुरू हुई और देर तक जारी रही। 26 ठिकानों पर सर्च और सर्वे ED के अनुसार, तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले में दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26 ठिकानों पर सर्च और सर्वे की कार्रवाई की गई है। इनमें कंपनी के प्रमोटर, निदेशक और उनसे जुड़े लोगों के ठिकाने शामिल हैं। ED के मुताबिक, GMADA और पंजाब सरकार के हाउसिंग एवं अर्बन डेवलपमेंट विभाग के कार्यालयों में भी PMLA के तहत सर्वे किया जा रहा है, ताकि संबंधित कंपनियों से जुड़े रिकॉर्ड और सबूत जुटाए जा सकें। 290 करोड़ के बैंक फ्रॉड और GMADA से जुड़े लेनदेन की जांच ED के मुताबिक, जांच में तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़े करीब 290 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड का मामला भी शामिल है। एजेंसी के अनुसार, मामले में नई दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित रेडिसन ब्लू होटल प्रोजेक्ट से जुड़े लेनदेन के साथ GMADA से कथित तौर पर वैधानिक बकाया में छूट और रद्द किए गए प्लॉट के दोबारा आवंटन की भी जांच की जा रही है। एजेंसी के अनुसार, रेमिगेट से जुड़े मामले में करीब 57 करोड़ रुपए का आर्थिक लाभ दिए जाने की भी जांच है। साथ ही जमीन अधिग्रहण से जुड़ी कथित अनियमितताओं में एक निजी कंसल्टेंसी फर्म की भूमिका और अधिकारियों से उसके संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। जांच अभी जारी है। ED की तलाशी और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

ड्रग तस्करी समेत कई मामलों में वांटेड राजजीत सिंह गिरफ्तार, पटियाला में आत्मसमर्पण

पटियाला करीब छह साल से फरार चल रहे बर्खास्त सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) राजजीत सिंह ने आज पटियाला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वह अक्तूबर 2019 से फरार बताए जा रहे थे। राजजीत सिंह नशा तस्करी और जबरन वसूली से जुड़े कई गंभीर मामलों में नामजद थे।राजजीत सिंह के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उनकी तलाश कर रही थी। उनके खिलाफ नशा तस्करी के एक बड़े रैकेट में शामिल होने के आरोप थे। इसके अलावा, उन पर जबरन वसूली के भी आरोप लगे थे।  राजजीत सिंह के खिलाफ वर्ष 2019 में ड्रग तस्करी, जबरन वसूली और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद से पुलिस को उसकी तलाश थी। अब पंजाब के DGP गौरव यादव ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है। राजजीत सिंह को अप्रैल 2023 में सेवा से बर्खास्त किया गया था। इसके बाद से वह अंडरग्राउंड हो गया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से गठित SIT की जांच में उसका नाम बर्खास्त इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह से जुड़े कथित ड्रग तस्करी और वसूली नेटवर्क में सामने आया था। इसके बाद विजिलेंस ब्यूरो और स्पेशल टास्क फोर्स ने उसके खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए। हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद वह फरार हो गया था। उसकी तलाश के लिए लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया था। निर्दोषों को फंसाने और वसूली के भी आरोप जांच रिपोर्टों में राजजीत सिंह पर ड्रग तस्करों को कथित संरक्षण देने, निर्दोष लोगों को ड्रग मामलों में फंसाने और उनसे वसूली करने जैसे आरोप लगाए गए थे। उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा मामला भी दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में इन आरोपों को जांच के दौरान सामने आए आरोपों के रूप में दर्ज किया गया है। 50 से ज्यादा NDPS सैंपल फेल होने का भी मामला मामले की जांच में उस अवधि के दौरान 50 से अधिक NDPS सैंपल फेल होने का मुद्दा भी सामने आया था, जब राजजीत सिंह तरनतारन के SSP और इंद्रजीत सिंह CIA प्रभारी के तौर पर तैनात थे। पंजाब सरकार ने SIT रिपोर्टों के आधार पर अप्रैल 2023 में राजजीत सिंह को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया था। जानिए, केस में कब-क्या हुआ     जून 2017 में हुआ रैकेट का भंडाफोड़: विशेष कार्य बल (STF) ने राजजीत सिंह के अधीनस्थ रहे सीआईए (CIA) प्रभारी इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह को गिरफ्तार किया था। उसके घर से 4 किलोग्राम हेरोइन, अन्य ड्रग्स और अवैध हथियार बरामद हुए। यहीं से पुलिस-ड्रग्स तस्कर नेक्सस का खुलासा हुआ।     नवंबर 2017 में SIT का गठन: इसके बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ड्रग्स तस्करी के मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (विशेषकर राजजीत सिंह) की संलिप्तता की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया।     2018 में सीलबंद रिपोर्ट सौंपी: SIT ने मामले की गहन जांच करने के बाद अपनी 3 स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट को सौंप दीं। ये रिपोर्ट कई सालों तक सीलबंद रहीं।     फरवरी 2018 में मामला दर्ज हुआ: 2018 में STF ने इस पूरे ड्रग्स-तस्करी, जबरन वसूली और आपराधिक साजिश को लेकर FIR दर्ज की।     मार्च-अप्रैल 2023 में रिपोर्ट्स खुलीं और बर्खास्तगी हुई: हाईकोर्ट के निर्देश पर जब बरसों पुरानी सीलबंद SIT रिपोर्ट खोली गईं, तो राजजीत सिंह और इंस्पेक्टर इंद्रजीत की संलिप्तता पूरी तरह उजागर हो गई। इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 17 अप्रैल 2023 को राजजीत सिंह को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया।     19-20 अप्रैल 2023 को FIR में नामजद व नया केस हुआ: राजजीत सिंह को आधिकारिक तौर पर 2018 के NDPS मामले में सह-आरोपी बनाया गया। ठीक अगले दिन 20 अप्रैल को विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का एक और नया केस दर्ज किया।     3 साल तक फरार रहा: गिरफ्तारी से बचने के लिए राजजीत सिंह लगातार अंडरग्राउंड रहा और पुलिस को चकमा देता रहा। पंजाब पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया। आरोपी राजजीत सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन उसकी याचिकाएं खारिज हो गईं।     10 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया: राजजीत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से कानूनी सुरक्षा मांगी। सुनवाई के दौरान उसके वकील ने अदालत को बताया कि वह आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार है। सुप्रीम कोर्ट ने उसे सरेंडर करने का कड़ा निर्देश दिया।     24 सितंबर 2026 को सरेंडर किया: सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए राजजीत सिंह ने पटियाला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद पंजाब पुलिस ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। वर्ष 2019 में, उन्हें आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में भी नामजद किया गया था। इस मामले के सामने आने के बाद से ही वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर थे। पंजाब पुलिस ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था। उनके आत्मसमर्पण को पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। अब पुलिस उनसे विभिन्न मामलों में पूछताछ करेगी। इस गिरफ्तारी से कई और खुलासे होने की उम्मीद है। 

9 साल चली कानूनी लड़ाई खत्म, 862 शिक्षकों को मिलेगा पे-स्केल का एरियर

चंडीगढ़. सुप्रीम कोर्ट के 21 अप्रैल 2026 को जारी निर्देशानुसार स्कूल शिक्षा विभाग के 862 शिक्षकों को छठे और सातवें पे स्केल का एरियर मिलेगा। छठे और सातवें पे स्केल का एरियर के यह निदेशक बुधवार को स्कूल शिक्षा विभाग नितिश सिंगला ने किए। गौरतलब है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने अगस्त 2015 में 1149 पदों पर एनटीटी, जेबीटी, टीजीटी शिक्षकों की भर्ती की थी। भर्ती के बाद मई 2017 में पेपर लीक होने की जानकारी सामने आई जिसके बाद भर्ती को प्रशासन ने रद्द कर दिया। शिक्षकों ने कैट में याचिका लगाई जहां पर प्रशासन के फैसले पर स्टे लगा दी गई। स्टे के विरूद्ध शिक्षा विभाग पहले पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट और अंत में सुप्रीम कोर्ट गया जहां पर फैसला शिक्षकों के पक्ष में रहा।

अमृतसर ग्रेनेड अटैक केस में बड़ा एक्शन, मास्टरमाइंड हरमन जख्मी; साथी फरार

अमृतसर. पंजाब में अमृतसर देहात पुलिस और बदमाशों के बीच बुधवार तड़के मत्तेवाल इलाके में मुठभेड़ हो गई। दोनों ओर से ताबड़तोड़ गोलीबारी हुई। पुलिस और बदमाशों के बीच ताबड़तोड़ गोलीबारी में गुरदासपुर में ग्रेनेड हमला करने का मुख्य आरोपी और कुख्यात बदमाश हरमन सिंह पुलिस की गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। जबकि उसका साथी पुलिस को गच्चा देकर फरार हो गया। एसएसपी कंवलप्रीत सिंह चाहल ने बताया कि मामले की जांच करवाई जा रही ह।घायल बदमाश का पहले इलाज करवाया जा रहा है। इसके बाद उससे पूछताछ की जाएगी। एसएसपी कंवलप्रीत सिंह ने घायल बदमाश की पहचान हरमन सिंह के रूप में बताई है। पता चला है कि आरोपित के खिलाफ गुरदासपुर और अमृतसर में कई केस दर्ज हैं। जांच में पता चला है कि हरमन सिंह ने कुछ समय पहले गुरदासपुर में ग्रेनेड हमला भी किया था।

प्रार्थना सभा को लेकर तनाव, CG का गांव तीन दिन से पुलिस छावनी में तब्दील

भानुप्रतापपुर. कांकेर जिले के आमाबेड़ा थाना क्षेत्र के बड़े तेवड़ा गांव में धर्मांतरण को लेकर एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है। एक ग्रामीण के घर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के पर प्रार्थना सभा और धर्मांतरण की आशंका पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने घर को घेर लिया। हालात की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची आमाबेड़ा पुलिस ने स्थिति को तो नियंत्रित कर लिया, लेकिन तनाव को देखते हुए तीन दिन बाद भी गांव में पुलिस बल तैनात है। दरअसल, बड़े तेवड़ा गांव में एक ग्रामीण के घर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बाद गांव में यह चर्चा फैल गई कि प्रार्थना सभा आयोजित करने के साथ धर्मांतरण का काम चल रहा है। चर्चा फैलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र होकर संबंधित घर के सामने पहुंच गए। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आमाबेड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। इस दौरान ग्रामीणों और घर मालिक के बीच विवाद की स्थिति भी बनी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला मुख्यालय से भी अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर भेजा गया। अंतागढ़ एसडीएम और एडिशनल एसपी भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। वहीं, घर मालिक का कहना था कि उसके घर में किसी तरह की प्रार्थना सभा या धर्मांतरण नहीं हो रहा था, बल्कि उसकी पुत्री का जन्मदिन मनाया जा रहा था। जन्मदिन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग घर पर पहुंचे थे। हालांकि, ग्रामीणों की ओर से घर में प्रार्थना सभा आयोजित होने और धर्मांतरण की आशंका जताई गई। बड़े तेवड़ा में पहले भी हो चुका है विवाद बता दें कि कुछ महीने पहले भी बड़े तेवड़ा गांव में धर्मांतरण के आरोप को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था। उस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी और जिले में कई दिनों तक तनाव का माहौल बना रहा था। इसी दौरान गांव में घटना भी सामने आई थी। उस घटना के बाद से ही जिला प्रशासन और पुलिस आमाबेड़ा क्षेत्र में धर्मांतरण से जुड़े मामलों को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। तीन दिन से गांव में पुलिस बल तैनात फिलहाल, प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की समझाइश के बाद स्थिति शांत है। एहतियात के तौर पर तीन दिन बाद भी गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। पुलिस पूरे मामले की जानकारी जुटा रही है और मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ भी की जा रही है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घर में वास्तव में किस तरह का आयोजन किया गया था।

CM मान का बड़ा कदम, पंजाब में 7वें वित्त आयोग का गठन

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए मजबूत वित्तीय ढांचे की वकालत की। उन्होंने वित्तीय स्थिरता और जमीनी स्तर पर प्रभावी शासन सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के लिए अनुशासित वित्तीय मार्ग और टिकाऊ वित्तीय संस्थाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। नवगठित सातवें पंजाब वित्त आयोग के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "आयोग का गठन पंचायतों/नगरपालिकाओं और राज्य के बीच करों, शुल्कों, रोड टैक्स और अन्य की हिस्सेदारी के लिए विशेष सिफारिशें करने के अलावा इन नागरिक संस्थाओं की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए अन्य सिफारिशें करने हेतु किया गया है।" मुख्यमंत्री ने कहा, "आयोग पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं को वित्तीय विकेंद्रीकरण सुनिश्चित करने का संवैधानिक माध्यम है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 73वें संविधान संशोधन के तहत बनाई गईं जमीनी स्तर की संस्थाओं के पास अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए वित्तीय क्षमता हो।" आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा, "राज्य वित्त आयोग के पास पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की जांच करने और स्थानीय सरकारों की वित्तीय देनदारियों तथा वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए एक ढांचे की सिफारिश करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।" उन्होंने कहा, "आवश्यक नागरिक सेवाएं प्रदान करने और स्थानीय बुनियादी ढांचे के निर्माण में पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों की बढ़ती जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए संसाधनों के आवंटन की एक पारदर्शी, न्यायसंगत और टिकाऊ प्रणाली की आवश्यकता है।" आयोग वित्तीय आवश्यकतों को मूल्यांकन करेगा: मान मुख्यमंत्री ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि आयोग स्थानीय निकायों की आय क्षमता, व्यय संबंधी जिम्मेदारियों और वित्तीय आवश्यकताओं का व्यापक मूल्यांकन करेगा और उनकी वित्तीय क्षमता को मजबूत करने तथा उन्हें अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से निभाने में सक्षम बनाने के लिए व्यावहारिक और भविष्य को ध्यान में रखकर सिफारिशें करेगा।" मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "आयोग के पास यह अधिकार है कि वह राज्य द्वारा लगाए जाने वाले करों, शुल्कों, टोल और फीस की कुल प्राप्ति को राज्य और पंचायतों/नगरपालिकाओं के बीच बांट सकता है।" उन्होंने कहा, "आयोग के महत्व का अंदाजा इस बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि यह सभी स्तरों पर पंचायतों/नगरपालिकाओं के बीच ऐसी प्राप्तियों में हिस्सेदारी के वितरण की सिफारिश भी करता है।" मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "पंचायतों/नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति सुधारने आवश्यक कदमों की सिफारिश करने के लिए भी आयोग बहुत जरूरी है।" सातवें पंजाब वित्त आयोग का गठन किया जाएगा इसी तरह मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "आयोग गैर-उत्पादक राजस्व व्यय को कम करने के उपायों और पूंजीगत संसाधनों के कुशल एवं प्रभावी उपयोग के लिए प्रशासन की गुणवत्ता तथा तकनीकी सहायता में सुधार करने के कदमों की सिफारिश भी करता है। इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने के लिए राज्य सरकार द्वारा पंजाब के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव के. शिव प्रसाद की अध्यक्षता में 'पंचायतों और नगरपालिकाओं के लिए पंजाब वित्त आयोग अधिनियम, 1994' की धारा 3(1) के तहत सातवें पंजाब वित्त आयोग का गठन किया गया है।" उन्होंने बताया, "आयोग में शौकत राय को विशेषज्ञ सदस्य, प्रशासनिक सचिव (ग्रामीण विकास एवं पंचायतें, पंजाब सरकार) और प्रशासनिक सचिव (स्थानीय निकाय, पंजाब सरकार) पदेन सदस्यों के रूप में तथा विशेष सचिव (वित्त, पंजाब सरकार) को एक्स ऑफिसिओ सदस्य सचिव के रूप में शामिल किया गया है।" राज्य सरकार दे रही सहयोग और सहायता आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष और सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "राज्य सरकार इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए आयोग को पूरा सहयोग और सहायता देगी।" मुख्यमंत्री ने कहा, "आयोग का पांच वर्ष का कार्यकाल 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होगा और यह 30 सितंबर, 2027 तक अपनी रिपोर्ट उपलब्ध करवाएगा। व्यापक जनहित में आयोग उस आधार का भी संकेत देगा, जिस पर वह अपने निष्कर्षों पर पहुंचा है।" इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर, सचिव ग्रामीण विकास, सचिव स्थानीय निकाय और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

टिकटों पर तेज हुई चर्चा, सचिन पायलट के आते ही ’50-अंडर-50′ समीकरण चर्चा में

चंडीगढ़. पंजाब में आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी बिसात बिछने लगी है। आम आदमी पार्टी, बीजेपी, अकाली दल और कांग्रेस सत्ता पर काबिज होने के लिए अपनी रणनीति को धार देने में जुटी हैं। इसी बीच, पंजाब कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए राजस्थान के फायरब्रांड नेता सचिन पायलट की एंट्री को पार्टी का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। पंजाब में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के खेमों के बीच चल रही गुटबाजी को साधने के साथ ही पायलट की मौजूदगी से 'उदयपुर डिक्लेरेशन 50-अंडर-50' (Udaipur Declaration 50-Under-50) का मुद्दा गरमा गया है। इस फॉर्मूले के कड़ाई से लागू होने की सुगबुगाहट ने पंजाब के कई पुराने और दिग्गज कांग्रेस नेताओं के टिकट कटने की चिंता बढ़ा दी है। जिन लोगों को नहीं पता वो आज के लेख में विस्तार से जानें कि क्या है 'उदयपुर डिक्लेरेशन 50-अंडर-50'? साथ ही पंजाब की राजनीति में कांग्रेस ने क्यों लगाया सचिन पर दाव?

अमृतसर में NRI मिलनी कार्यक्रम, विदेशों में बसे पंजाबियों की शिकायतों का होगा समाधान

अमृतसर. पंजाब सरकार की ओर से प्रवासी पंजाबियों (NRIs) की वर्षों से लंबित समस्याओं और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए अमृतसर में विशेष ‘एनआरआई मिलनी’ (NRI Milni) का आयोजन किया है। राजासांसी एयरपोर्ट के पास स्थित होटल ली मेरिडियन में होने वाले कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और मिलनी थोड़ी देर में शुरू होने वाली है। कार्यक्रम में अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट और तरनतारन जिलों से जुड़े प्रवासी पंजाबी अपनी शिकायतें और मामले सीधे सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के समक्ष रखेंगे। मौके पर संबंधित अधिकारियों की ओर से समस्याओं के समाधान को लेकर कार्रवाई भी की जाएगी। फिलहाल कार्यक्रम स्थल पर एनआरआई मामलों संबंधी मंत्री डा. रवजोत सिंह और विधायकों के पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। उनके पहुंचने के बाद मिलनी शुरू होगी। कार्यक्रम में शीर्ष प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के भी मौजूद रहने की संभावना है।

₹6000 करोड़ ड्रग्स केस के जांच अधिकारी रहे निरंजन सिंह की सियासी एंट्री

जालंधर एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) के पूर्व अधिकारी निरंजन सिंह आज पंजाब के खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होंगे। दोपहर 12 बजे वो चंडीगढ़ में पार्टी जॉइन करेंगे। निरंजन सिंह ने इसकी पुष्टि की।  उन्होंने अपने कार्यकाल में करीब 6 हजार करोड़ रुपए के चर्चित ड्रग केस की जांच की थी। इसी केस की जांच के दौरान उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से भी पूछताछ की थी। मजीठिया से पूछताछ के कुछ समय बाद निरंजन सिंह के ट्रांसफर को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। उन्होंने ट्रांसफर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती भी दी थी। वह जालंधर में ED ऑफिस में लंबे समय तक तैनात रहे। यहां से उन्होंने रिटायरमेंट ली। निरंजन सिंह की अहम बातें…     मेरे पास कोई और ऑप्शन नहीं थी: निरंजन कुमार ने कहा कि मेरे पास कोई और ऑप्शन नहीं थी। 10 साल पहले अकालियों की सरकार रही, उस वक्त भी लोगों को कोई रिलीफ नहीं मिला। उनसे भी पंजाब नहीं संभला। कैप्टन की सरकार आई लेकिन वह भी माफिया की सरकार थी। उन्होंने ड्रग वाले लोगों को प्रोटेक्ट किया।     सांसद अमृतपाल के पिता आए थे घर: उन्होंने कहा कि सभी सरकारें अपने वादे में फेल हुई हैं। सिर्फ नशा ही नहीं बल्कि करप्शन और लॉ एंड ऑर्डर का भी इश्यू है। अमृतपाल पर लगे आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा। कोर्ट फैसला करेगा। उन्होंने कहा कि सांसद अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह आज ही मेरे घर आए थे। उन्होंने मुझे अपने साथ आने की अपील की।     चुनाव लड़ने पर कहा- कोई विचार नहीं: निरंजन सिंह ने कहा कि अभी चुनाव लड़ने का मेरा कोई विचार नहीं है। अमृतपाल की कट्‌टरपंथी विचारों को लेकर उन्होंने कहा कि मैं कानून को मानने वाला हूं। पार्टी की विचारधारा भी कानून को मानने वाली है। कौन हैं निरंजन सिंह निरंजन सिंह ED के जालंधर ऑफिस में लंबे समय तक तैनात रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पंजाब से जुड़े कई मनी लॉन्ड्रिंग और FEMA मामलों की जांच की। 2013-14 के आसपास वह जगदीश सिंह भोला से जुड़े ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच से भी प्रमुख रूप से जुड़े रहे। 2016 में उन्हें असिस्टेंट डायरेक्टर से डिप्टी डायरेक्टर के पद पर पदोन्नत किया गया। 2018 में उन्होंने ED छोड़ने का फैसला किया, जबकि उस समय उनकी सेवानिवृत्ति में करीब तीन साल बाकी थे। बाद में वे 31 मई 2021 को औपचारिक रूप से सेवानिवृत्त हुए। राजा कंदोला से भोला ड्रग रैकेट तक जांच जानकारी के अनुसार, निरंजन सिंह ने 2012 में ड्रग तस्कर राजा कंदोला के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद 2013 में उन्होंने अनूप काहलों से जुड़े ड्रग मामले की जांच संभाली। आगे की जांच में यह मामला करीब 6,000 करोड़ रुपए के भोला ड्रग रैकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में तब्दील हो गया। ED ने 2013 में PMLA के तहत मामला दर्ज करके ड्रग कारोबार से कमाए पैसे, संपत्तियों और लेन-देन की जांच शुरू की। 2024 में इसी PMLA मामले की विशेष अदालत ने जगदीश सिंह भोला सहित 17 लोगों को दोषी ठहराया। निरंजन सिंह इस मामले में इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर (IO) रहे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 2013-14 से 2016 तक उन्होंने मामले की जांच की। बाद में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर पदोन्नति होने के बाद भी वह मामले की जांच की निगरानी करते रहे। 73 लोगों को चार्जशीट किया गया था निरंजन सिंह की जांच के दौरान 73 लोगों को चार्जशीट किया गया था। इनमें भोला के 11 परिवारजन भी शामिल थे। जांच के दौरान करीब 24 आरोपियों की 200 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां अटैच की गई थीं। 2024 में लंबे समय से चल रहे इस PMLA मामले में विशेष अदालत ने 23 आरोपियों में से 17 को दोषी ठहराया। ट्रायल के दौरान 4 आरोपियों की मौत हो गई, जबकि 2 को घोषित अपराधी यानी प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर घोषित किया गया। 2014 में बिक्रम मजीठिया से पूछताछ 26 दिसंबर 2014 को ED ने तत्कालीन पंजाब राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से भोला ड्रग-मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में जालंधर ऑफिस में पूछताछ की। पूछताछ में निरंजन सिंह के साथ ED के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। भोला ने मजीठिया का नाम लिया था। मजीठिया ने इन आरोपों से इनकार किया था। 2015 में कोलकाता ट्रांसफर विवाद 16 जनवरी 2015 को मजीठिया से पूछताछ के करीब तीन सप्ताह बाद ED ने निरंजन सिंह का जालंधर से कोलकाता ट्रांसफर कर दिया। उन्हें पश्चिम बंगाल के शारदा चिटफंड मामले में काम करने को कहा गया था। इसके बाद निरंजन सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी और दावा किया कि मजीठिया से पूछताछ करना ही उनके ट्रांसफर का कारण था। उनके वकील ने अदालत में यही तर्क रखा था। हाईकोर्ट का दखल और ट्रांसफर रद्द पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले में दखल दिया। कोर्ट में यह सवाल भी उठा कि जिस ड्रग केस की निगरानी अदालत कर रही थी, उस जांच के प्रमुख अधिकारी को अचानक बाहर कैसे भेजा जा सकता है। आखिरकार नवंबर 2015 में ED ने उनका ट्रांसफर रद्द कर दिया। ED के तत्कालीन निदेशक कर्नल सिंह ने पुष्टि की कि निरंजन सिंह जालंधर में रहकर ड्रग केस की जांच जारी रखेंगे। 2016 में मजीठिया को दोबारा समन निरंजन सिंह के अनुसार उन्होंने जांच छोड़ी नहीं। 2016 में उन्होंने मजीठिया को दोबारा समन किया। इस बार मजीठिया व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए और उन्होंने लिखित जवाब दिया। इसी साल निरंजन सिंह को असिस्टेंट डायरेक्टर से डिप्टी डायरेक्टर के पद पर पदोन्नत किया गया। पदोन्नति के बाद तकनीकी कारणों से उनके IO के रूप में काम करने की स्थिति बदली, क्योंकि ED में असिस्टेंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारी जांच अधिकारी होते हैं। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आगे की जांच असिस्टेंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारियों को दी गई, लेकिन निरंजन सिंह को मॉनिटरिंग रोल में रखा गया। 2017 में हाईकोर्ट ने ED को निर्देश दिया कि दो असिस्टेंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारियों के माध्यम से जांच आगे बढ़ाई जाए और निरंजन सिंह उसकी निगरानी करें। 2018 में निरंजन सिंह ने अदालत में कहा कि उन्होंने 2013 … Read more

पंजाब में कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, 8% बढ़ा DA; सितंबर से बढ़ेगी सैलरी

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (डीए) में आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। वित्त विभाग ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही कर्मचारियों का मौजूदा महंगाई भत्ता 42 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है। बढ़ा हुआ डीए एक सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा और इसका भुगतान सितंबर के वेतन के साथ किया जाएगा। सरकार के इस फैसले से राज्य के लाखों कर्मचारियों को सीधे वित्तीय लाभ मिलेगा। वित्त विभाग के वित्त कार्मिक-1 शाखा की ओर से जारी आदेश के अनुसार, पंजाब के राज्य सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते की दर में आठ प्रतिशत की वृद्धि की गई है। विभाग ने विशेष मुख्य सचिवों, अतिरिक्त मुख्य सचिवों, वित्तीय आयुक्तों, प्रधान सचिवों और प्रशासनिक सचिवों के अलावा विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को आदेश की प्रतियां भेज दी हैं। 42 से बढ़कर 50 प्रतिशत हुआ डीए वित्त विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारियों को अब मूल वेतन पर 50 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिलेगा। इससे पहले डीए की दर 42 प्रतिशत थी। नई दर एक सितंबर 2026 से लागू होगी। सितंबर का वेतन जारी होने के साथ कर्मचारियों को बढ़े हुए डीए का लाभ मिलने की उम्मीद है।