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पंजाब की राजनीति में हलचल, भाजपा नेता अनिल कुमार सेठी ने थामा आम आदमी पार्टी का दामन

चंडीगढ़  फाजिल्का जिले में भारतीय जनता पार्टी को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब भाजपा के सीनियर नेता अनिल कुमार सेठी अपने साथियों सहित आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अनिल कुमार सेठी को औपचारिक रूप से पार्टी का सिरोपा पहनाकर 'आप' परिवार में शामिल करवाया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार की लोक-पक्षीय नीतियों और विकास कार्यों से प्रभावित होकर दूसरी पार्टियों के ईमानदार नेता लगातार आम आदमी पार्टी से जुड़ रहे हैं। उन्होंने अनिल सेठी का स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से फाजिल्का इलाके में पार्टी के संगठन को नई ताकत मिलेगी।  

निकाय चुनाव को लेकर पंजाब में घमासान: भाजपा का आरोप- नियमों के खिलाफ हो रही प्रक्रिया

बरनाला  पंजाब में होने जा रहे नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पंजाब के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य चुनाव आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर वर्तमान चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग मिलकर लोकतांत्रिक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। भाजपा का यह प्रतिनिधिमंडल पंजाब भाजपा की राज्य कोर कमेटी के सदस्यों और राज्य उपाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में चुनाव आयुक्त से मिला। इस प्रतिनिधिमंडल में परमपाल कौर, रंजीत सिंह गिल, एन.के. वर्मा और मोहित गर्ग भी शामिल थे। भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग ने स्वयं 30 अप्रैल 2026 को एक शेड्यूल जारी किया था, जिसके अनुसार आपत्तियों के निपटारे के लिए 11 मई 2026 और मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के लिए 12 मई 2026 की तारीख तय की गई थी। क्यों लगे कानून के उल्लंघन के आरोप? लेकिन हैरानी की बात यह है कि कई जिलों में इस अवधि के समाप्त होने से पहले ही अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। भाजपा नेताओं ने कहा कि माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में सरकार ने आश्वासन दिया था कि वार्डबंदी और मतदाता सूची के संबंध में सभी आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा। लेकिन बिना किसी सुनवाई के अधिसूचना जारी करना अदालत की अवमानना है। भाजपा ने दावा किया है कि कई वार्डों में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या वहां की कुल जनसंख्या से भी अधिक दिखाई गई है, जो कि एक 'जनसांख्यिकीयअसंभव' बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्डों के आरक्षण में रोटेशन के नियमों को ताक पर रख दिया गया है। जहां एससी जनसंख्या अधिक है, उन वार्डों की अनदेखी कर कम जनसंख्या वाले वार्डों को आरक्षित कर दिया गया है। पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा दिखाई जा रही जल्दबाजी विपक्षी दलों को तैयारी का मौका न देने की एक साजिश है ताकि चुनावों की निष्पक्षता को खत्म किया जा सके। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने क्या कहा? भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि चुनाव आयोग ने तुरंत इन अवैध अधिसूचनाओं को वापस नहीं लिया और आपत्तियों का निपटारा नहीं किया, तो पार्टी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी और पूरी चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग करेगी। उन्होंने मांग की है कि चुनावी प्रक्रिया को तुरंत स्थगित किया जाए। आपत्तियों के निपटारे के लिए ''स्पीकिंग ऑर्डर'' जारी किए जाएं। मतदाता सूची के संशोधन के बाद उम्मीदवारों के चयन के लिए नया और उचित समय दिया जाए।  

बिना गार्ड वाले ATM बनते थे निशाना: जालंधर पुलिस ने लुटेरे गिरोह का किया पर्दाफाश

जालंधर जालंधर देहात पुलिस ने एटीएम लूट की बड़ी वारदातों को अंजाम देने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने भोगपुर के यूके बैंक और किशनगढ़ के एसबीआई बैंक के एटीएम को निशाना बनाने वाले तीन आरोपियों कमलजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह और हरप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया। जालंधर के एसएसपी हरविंदर सिंह विर्क ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि बीती 1 और 2 मई की मध्यरात्रि को अपराधियों ने दो अलग-अलग जगहों पर एटीएम लूटने की कोशिश की थी। पहली वारदात भोगपुर स्थित यूके बैंक के एटीएम में हुई और दूसरी किशनगढ़ में एसबीआई बैंक के एटीएम में। इन घटनाओं की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत विशेष टीमों का गठन किया। तकनीकी जांच और खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की और गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान कमलजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह और हरप्रीत सिंह के रूप में हुई है। ड्राइवर बनकर करते थे रेकी पुलिस पूछताछ में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी पेशे से ड्राइवर हैं। अपनी इसी नौकरी की आड़ में वे अलग-अलग रूटों पर जाते थे और ऐसे एटीएम की पहचान करते थे जहां सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता नहीं होते थे। एसएसपी विर्क ने बताया कि यह गिरोह विशेष रूप से उन एटीएम को टारगेट करता था, जहां रात के समय कोई सिक्योरिटी गार्ड तैनात नहीं होता था। वारदात से पहले आरोपी कई दिनों तक उस इलाके की रेकी करते थे ताकि पुलिस की गश्त और स्थानीय हलचल का पता लगा सकें। हथियार और वाहन बरामद गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वह गाड़ी भी बरामद की है, जिसका इस्तेमाल वे वारदात के बाद भागने के लिए करते थे। इसके अलावा, एटीएम मशीन को काटने और तोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कटर और अन्य लोहे के औजार भी पुलिस ने जब्त किए हैं। पुलिस का मानना है कि इन आरोपियों की गिरफ्तारी से इलाके में एटीएम लूट की घटनाओं पर लगाम लगेगी। आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने पहले कितनी और वारदातों को अंजाम दिया है। रिमांड पर शुरू हुई पूछताछ पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उन्हें माननीय अदालत में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने उनका रिमांड हासिल किया है। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ करेगी। पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा की गई पिछली वारदातों के बारे में भी अहम सुराग मिल सकते हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि चोरी किए गए कैश को वे कहां ठिकाने लगाते थे।  

‘आरोप साबित हुए तो सियासत छोड़ दूंगा’: AAP MLA का मजीठिया पर तीखा वार

लुधियाना लुधियाना हलका सेंट्रल से आम आदमी पार्टी के विधायक अशोक पराशर पप्पी ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार, ठगी और अवैध वसूली के गंभीर आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक दिन पहले अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और विधायक के कथित पूर्व पीए। घर को ही प्रेस क्लब बना लिया है प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विधायक अशोक पराशर पप्पी अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया पर जमकर बरसे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा मजीठिया ने अपने घर में ही एक प्रेस क्लब खोल रखा है। जो कोई भी झूठी कहानी लेकर उनके पास पहुंच जाता है, उसे वो अपने साथ बिठा लेते हैं और बिना किसी जांच-पड़ताल के प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देते हैं। विधायक ने बड़ी चुनौती देते हुए कहा कि अगर मजीठिया और निखिल सभरवाल अपनी बातों में जरा भी सच्चे हैं तो वे मेरे साथ गुरु घर (गुरुद्वारा साहिब) चलें। वहां पांच प्यारे बैठें और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें। अगर मैं इस जांच में दोषी या गलत पाया गया तो मैं उसी वक्त हमेशा के लिए सियासत छोड़ दूंगा। निखिल एक हैकर है, जिन खातों की बात हो रही वो मेरे हैं ही नहीं कल निखिल द्वारा मीडिया के सामने जारी की गई बैंक स्टेटमेंट पर सफाई देते हुए विधायक ने इसे पूरी तरह फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि जिन बैंक खातों के नंबर दिखाकर पैसे ट्रांसफर होने के दावे किए जा रहे हैं असल में उन बैंकों में उनका या उनके किसी परिवार वाले का कोई अकाउंट ही नहीं है। विधायक ने निखिल को एक शातिर इंसान और हैकर बताते हुए कहा कि इसने पहले भी एक अन्य व्यक्ति की आईडी हैक की थी। विधायक ने स्पष्ट किया कि वे इस पूरे झूठे प्रकरण को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। कल मजीठिया और निखिल ने लगाए थे ये आरोप यह सारा विवाद तब शुरू हुआ जब विधायक के दफ्तर इंचार्ज रहे निखिल सभरवाल जो की चाय का कम करता था बिक्रम सिंह मजीठिया से मुलाकात की। दोनों ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मजीठिया ने आम आदमी पार्टी को एक बिजनेस मॉडल बताते हुए विधायक और उनके बेटे पर करोड़ों रुपए ऐंठने का आरोप लगाया था। 30 लाख की ट्रांजेक्शन का दावा निखिल ने बैंक स्टेटमेंट सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया था कि 24 अप्रैल 2024 को नगर निगम के एक बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने उसके (निखिल के) खाते में 30 लाख रुपए डाले थे। उसका दावा था कि अगले ही दिन इसमें से 15 लाख रुपए विधायक पप्पी पराशर के खाते में और 99 हजार रुपए उनके बेटे के खाते में ट्रांसफर किए गए। बकाया 14 लाख रुपए कैश निकालकर उसने विधायक को सौंपे थे। मजीठिया ने सवाल उठाया था कि एक इंस्पेक्टर किस हैसियत से निखिल को 30 लाख रुपए दे रहा है? उन्होंने इस मामले में ED की जांच की मांग की थी। डीसी रेट पर भर्ती के लिए 1 लाख रुपए फीस निखिल ने खुद को विधायक के दफ्तर का इंचार्ज बताते हुए अपना आईडी कार्ड भी दिखाया था। उसने दावा किया कि विधायक की तरफ से डीसी रेट पर सरकारी विभागों (39 क्लर्क और 87 कर्मचारी) में भर्ती करवाने के लिए प्रति व्यक्ति एक लाख रुपए की फीस तय की गई थी। निखिल के मुताबिक, उसने 100 से ज्यादा लोगों से पैसे लेकर विधायक को पहुंचाए। नौकरी से निकाला और धमकियां दीं निखिल ने आरोप लगाया कि जब लोगों की भर्तियां नहीं हुईं और वे पैसे वापस मांगने विधायक के दफ्तर आने लगे (जिनमें निखिल के रिश्तेदार भी थे), तो खुद को फंसता देख विधायक ने 2 साल पहले उसे नौकरी से निकाल दिया। उलटा, एसीपी सेंट्रल से कहकर उसी पर ठगी का पर्चा (FIR) दर्ज करवा दिया और सारा दोष उसके सिर मढ़ दिया। निखिल ने वीडियो जारी कर यह भी कहा था कि विधायक ने उसे शहर छोड़ने की धमकी दी है और कहा है कि अगर उसने कहीं उनका नाम लिया तो उसके घर के 2-3 लोगों को मरवाने में उन्हें कोई हिचक नहीं होगी।  

ड्रग माफिया पर प्रशासन सख्त: गंभीर मामलों में आरोपी तस्कर के अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर

अमृतसर अमृतसर के मजीठा में नशा तस्करों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस और नगर काउंसिल ने संयुक्त रूप से एक नशा तस्कर के घर पर बुलडोजर चलाया। यह कार्रवाई मजीठा के खासा पत्ती इलाके में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में की गई। प्रशासन का कहना है कि यह मकान अवैध तरीके से बनाया गया था और पहले ही संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन तय समय के बावजूद निर्माण नहीं हटाया गया। इसके बाद प्रशासन को सख्त कदम उठाना पड़ा। SSP सुहेल मीर ने दी कार्रवाई की जानकारी SSP देहाती सुहेल मीर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्रवाई वार्ड नंबर 4 में स्थित उस संपत्ति पर की गई, जहां सुनील और उसका भाई करण उर्फ कन्नू रहते थे। सुनील के खिलाफ हरियाणा में यूएपीए एक्ट के तहत मामला दर्ज है और वह फिलहाल जेल में बंद है। वहीं करण उर्फ कन्नू के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत पांच मामले दर्ज हैं, जिनमें कमर्शियल मात्रा में नशा बरामद होने के केस भी शामिल हैं। कानून के मुताबिक होगी सख्त कार्रवाई एसएसपी सुहेल मीर ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा चलाए जा रहे “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान के तहत ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने साफ किया कि यह कार्रवाई केवल अवैध निर्माण के आधार पर की गई है। प्रशासन का कहना है कि जहां भी गैर-कानूनी कब्जे या अवैध निर्माण पाए जाएंगे, वहां कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

पंजाब निकाय चुनाव की तारीख तय: 26 मई को होगा मतदान, होशियारपुर और शाम चौरासी में चुनाव टला

पठानकोट प्रदेश  में नगर निकाय चुनावों का बिगुल बज गया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राज कमल चौधरी ने  घोषणा करते हुए बताया कि राज्य के 104 स्थानीय निकायों, जिनमें आठ नगर निगम शामिल हैं, के लिए मतदान 26 मई को कराया जाएगा। मतगणना 29 में को कराई जाएगी। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए नामांकन प्रक्रिया 13 मई से शुरू होकर 16 मई तक चलेगी। नामांकन पत्रों की जांच 18 मई को होगी, जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 19 मई निर्धारित की गई है। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने नामांकन दाखिल करने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने के आदेश भी दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कार्य पहले ही पूरा कर लिया है और अंतिम वोटर सूची 5 मई को प्रकाशित कर दी गई थी। इन चुनावों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में राजनीतिक माहौल गर्म है और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी विपक्ष के लगातार हमलों का सामना कर रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी रणनीति बनाने में लगी हुई है। सभी राजनीतिक दल अपने-अपने चुनाव चिन्ह पर चुनाव मैदान में उतरेंगे। माना जा रहा है कि नगर निकाय चुनावों में सभी प्रमुख दल पूरी ताकत झोंकेंगे और यह मुकाबला आगामी 2027 विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। जिन नगर निगमों में चुनाव होंगे उनमें बठिंडा, मोगा, पठानकोट, होशियारपुर, बटाला, मोहाली, अबोहर, बरनाला और कपूरथला शामिल हैं। राज्य सरकार ने पहले इन शहरी निकायों को भंग कर प्रशासकों की नियुक्ति की थी, जो चुनाव होने तक कामकाज संभाल रहे थे। होशियारपुर और शाम चौरासी में मतदान टला पंजाब में 104 स्थानीय निकायों के लिए आगामी 26 मई को मतदान और 29 मई को मतगणना होगी, लेकिन होशियारपुर और शाम चौरासी के मतदाताओं को अभी इंतजार करना होगा। राज्य चुनाव आयोग ने तकनीकी और प्रशासनिक कारणों के चलते इन दोनों स्थानों पर चुनाव फिलहाल स्थगित कर दिए हैं। होशियारपुर में मतदाता सूची का पेंच पंजाब के चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी ने सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि मतदाता सूची के संशोधन से जुड़े मुद्दों के कारण होशियारपुर में चुनाव तत्काल प्रभाव से नहीं करवाए जा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वहां चार से पांच महीने के भीतर चुनाव कराए जाने की संभावना है। शाम चौरासी में वार्ड आरक्षण की अड़चन होशियारपुर के साथ-साथ शाम चौरासी स्थानीय निकाय के चुनाव भी रोक दिए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, शाम चौरासी में वार्डों के आरक्षण संबंधी तकनीकी मुद्दों के चलते यह फैसला लिया गया है। इन तकनीकी खामियों को दूर करने के बाद ही यहां चुनाव प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। कार्यकाल पूरा होने पर भंग किए गए थे निगम गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने बठिंडा, मोगा, पठानकोट, होशियारपुर, बटाला, मोहाली, अबोहर, बरनाला और कपूरथला नगर निगमों का 5 साल का कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें भंग कर दिया था। नगर निगमों का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने चुनाव होने तक वहां प्रशासकों की नियुक्ति की हुई है। अब राज्य के बाकी निकायों में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने जा रही है, जबकि होशियारपुर और शाम चौरासी को अभी कुछ और महीनों का इंतजार करना पड़ेगा। एक नजर: बाकी 104 निकायों का चुनाव कार्यक्रम होशियारपुर और शाम चौरासी को छोड़कर, पंजाब के बाकी 104 स्थानीय निकायों (8 नगर निगमों सहित) के लिए चुनाव आयोग ने निम्नलिखित कार्यक्रम तय किया है:  नामांकन की शुरुआत: 13 मई नामांकन की अंतिम तिथि: 16 मई नामांकन पत्रों की जांच: 18 मई नाम वापसी की अंतिम तिथि: 19 मई मतदान की तिथि: 26 मई मतगणना (नतीजे): 29 मई

पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: अरोड़ा के मंत्रालय दूसरे मंत्रियों को सौंपे गए, जानें किसे क्या मिला

चंडीगढ़ ED द्वारा संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद पंजाब की राजनीति और प्रशासन में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद राज्य सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने और विभागीय कामकाज में किसी तरह की बाधा न आने देने के लिए तेजी से कदम उठाए। सरकार ने अरोड़ा के पास मौजूद विभागों का पुनर्वितरण करते हुए उन्हें अन्य मंत्रियों को सौंप दिया है। पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के विभागों को सोमवार को अन्य मंत्रियों अमन अरोड़ा, हरजोत सिंह बैंस और तरुणप्रीत सिंह सोंद के बीच बांट दिया। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत विभाग संभाल रहे अमन अरोड़ा को उद्योग एवं वाणिज्य तथा निवेश प्रोत्साहन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस को स्थानीय निकाय विभाग सौंपा गया है। ग्रामीण विकास, पंचायत, पर्यटन और श्रम मंत्री सोंद को विद्युत मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया है। ईडी ने नौ मई को पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को उनसे जुड़ी कुछ कंपनियों में कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये के जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया। शनिवार सुबह चंडीगढ़ के सेक्टर दो स्थित उनके आधिकारिक आवास पर छापेमारी के बाद 62 वर्षीय संजीव अरोड़ा को धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया। गुरुग्राम की एक विशेष पीएमएलए अदालत ने रविवार को अरोड़ा को एक सप्ताह के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया।

पंजाब विजिलेंस ऑफिस में CBI रेड: भुल्लर रिश्वत मामले में अधिकारी का रीडर पकड़ा गया

चंडीगढ़ सीबीआई ने निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े रिश्वत मामले में कार्रवाई करते हुए सोमवार देर शाम मोहाली स्थित पंजाब विजिलेंस ब्यूरो कार्यालय पर छापा मारा और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों में एक वरिष्ठ अधिकारी के रीडर को हिरासत में लिया। हालांकि, सीबीआई या पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की ओर से किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई, लेकिन अकाली नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक्स पर दावा किया कि केंद्रीय एजेंसी ने '20 लाख रुपये की रिश्वत कांड में एक विजिलेंस अधिकारी से 13 लाख रुपये बरामद किए हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि भगवंत मान को मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। विजिलेंस ब्यूरो या पंजाब पुलिस के किसी भी अधिकारी ने फोन कॉल या संदेशों का जवाब नहीं दिया।गौर हो कि पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी भुल्लर को अक्तूबर 2025 में सीबीआई ने रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया था।

पंजाब की राजनीति में हलचल: मंत्री संजीव अरोड़ा ने ED हिरासत को चुनौती देकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

चंडीगढ़ पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने मंगलवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत को अवैध और असंवैधानिक बताते हुए तत्काल रिहाई की मांग की। अरोड़ा को 9 मई को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था। अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी प्रथम दृष्टया 'मनमानी, यांत्रिक, अधिकार क्षेत्र से परे और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 के तहत प्राप्त अनिवार्य सुरक्षा उपायों का उल्लंघन' है। उन्होंने अदालत से गुरुग्राम के सेशन विशेष जज द्वारा दिये गये रिमांड आदेश को रद्द करने की भी मांग की। इस आदेश के तहत उन्हें 16 मई तक ईडी की हिरासत में भेजा गया है। यह याचिका अधिवक्ता विभव जैन, वीरेन सिब्बल और जसमन सिंह गिल के माध्यम से दायर की गई है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ के समक्ष होने की संभावना है। मामले की पृष्ठभूमि बताते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि वह Hampton Sky Realty Limited (HSRL) के प्रमोटर और चेयरमैन थे। कंपनी ने वित्त वर्ष 2023-24 से मोबाइल फोन के निर्यात का कारोबार शुरू किया था, जो उसके वैध व्यापार विस्तार और विविधीकरण का हिस्सा था। सभी निर्यात लेनदेन पारदर्शी और पूरी तरह दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत किए गए। याचिका में कहा गया कि सार्वजनिक पद पर निर्वाचित होने के बाद अरोड़ा ने कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था और उसके दैनिक संचालन, प्रबंधन या व्यापारिक मामलों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। यह भी कहा गया कि बाद में हुई तलाशी कार्रवाई के दौरान कोई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, नकदी, अघोषित संपत्ति या अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। ईडी अधिकारी 9 मई को तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के लिए उनके घर पहुंचे थे, जिसके बाद उनका बयान दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अरोड़ा ने दावा किया कि गिरफ्तारी के आधार पूरी तरह अस्पष्ट थे और उनमें ऐसा कोई ठोस तथ्य नहीं था जो यह साबित करे कि उन्होंने पीएमएलए के तहत कोई अपराध किया है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग अपराध के मूलभूत तत्व साबित करने में विफल रही। जिन लेनदेन का हवाला दिया गया, वे “पूरी तरह दस्तावेजीकृत निर्यात लेनदेन” थे, जो नियमित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किए गए और जिनके समर्थन में इनवॉइस, शिपिंग बिल, कस्टम जांच, बैंक रियलाइजेशन सर्टिफिकेट, जीएसटी रिटर्न और ऑडिटेड अकाउंट मौजूद हैं। याचिका में कहा गया कि संबंधित रिकॉर्ड पहले ही एजेंसियों के कब्जे में थे, अरोड़ा से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई और हिरासत में पूछताछ या गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं थी। दिहाड़ी मजदूर निकला करोड़ों की फर्म का मालिक! प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दावा किया है कि  संजीव अरोड़ा के खातों की जांच में पता चला कि है एक दिहाड़ी मजदूर कमल अहमद को करोड़ों की फर्म का मालिक बनाया गया था। ईडी ने सोमवार को गुरुग्राम की पीएमएलए स्पेशल कोर्ट में सुनवाई के दौरान ये तथ्य पेश किए। ईडी के मुताबिक, कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की कंपनी 'हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड' ने दिल्ली की एक फर्म को 27.73 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जिसका मालिक दिहाड़ी मजदूर है।दिल्ली के रहने वाले मजदूर कमल अहमद ने ईडी के सामने बयान दिया है कि वह ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है और उसे कंपनी वगैरह के बारे में कोई जानकारी नहीं है। ईडी के अनुसार, कमल ने बयान दिया है कि अजहर हैदर उर्फ ​​मोंटी नाम के एक व्यक्ति ने उसका आधार और पैन कार्ड लिया था तथा कागजों पर उसके दस्तखत भी करवाए थे। हैदर ने खुद माना है कि उसने यह काम डेढ़ से दो प्रतिशत कमीशन के आधार पर किया था। आरोप है कि संजीव अरोड़ा की फर्म ने अगस्त 2023 से जनवरी 2024 के बीच, दिहाड़ी मजदूर की फर्म 'एसके एंटरप्राइजेज़' के कई बैंक खातों में 41 आरटीजीएस पेमेंट्स के जरिये 27.73 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। अरोड़ा परिवार की फर्मों ने स्थानीय और विदेशी कंपनियों को 157.12 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन बेचने का दावा किया है। संजीव अरोड़ा फिलहाल ईडी की रिमांड पर हैं। अरोड़ा ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दी है।

CBI की बड़ी कार्रवाई: भाजयुमो नेता की गिरफ्तारी के बाद पंजाब विजिलेंस मुख्यालय पर उठे सवाल

मोहाली मोहाली स्थित पंजाब विजिलेंस ब्यूरो कार्यालय पर सोमवार रात सीबीआई की छापेमारी ने दो अलग-अलग मामलों को एक साथ जोड़ दिया है— एक तरफ मलोट के भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के नेता राघव गोयल की गिरफ्तारी और दूसरी तरफ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शरद सत्य चौहान का कार्यालय, जो पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद के लिए सबसे वरिष्ठ दावेदार माने जा रहे हैं।भाजपा से जुड़े और अक्सर पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ तस्वीरें साझा करने वाले राघव गोयल को 25 लाख रुपये के रिश्वत मामले में कथित बिचौलिए के रूप में गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि गोयल राजस्थान के भाजपा नेता गजेंद्र शेखावत के करीबी हैं। तीन दिन पहले ही उनकी पुलिस सुरक्षा वापस ले ली गई थी। यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि सुरक्षा केंद्रीय एजेंसियों की थी या पंजाब पुलिस की। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हाल के समय में पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) सरकार द्वारा अहम पदों पर नियुक्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करती रही है। हालांकि, इस मामले में निशाना एक भाजपा नेता बना है। सीबीआई ने गोयल के मलोट स्थित आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया। भाजपा सूत्रों के अनुसार, गोयल के बठिंडा और मलोट के कुछ भाजपा नेताओं से भी संबंध हैं। हालांकि, एक भाजपा नेता ने दावा किया कि गोयल को पार्टी में कोई आधिकारिक पद नहीं दिया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने पहले चंडीगढ़ के एक पांच सितारा होटल में छापा मारा और बाद में विजिलेंस ब्यूरो कार्यालय पहुंचकर 13 लाख रुपये बरामद किए। जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार के आरोप में चौहान के निजी रीडर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उसने एक केस को निपटाने के लिए सौदेबाजी कराने में भूमिका निभाई। चौहान के साथ पिछले पांच-छह वर्षों से तैनात इस रीडर को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। शरद सत्य चौहान को पिछले महीने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो का निदेशक नियुक्त किया गया था। लगभग एक दशक बाद उन्हें फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली थी। अप्रैल में यूपीएससी को भेजे गए पैनल में डीजीपी पद के लिए उनका नाम सबसे वरिष्ठ अधिकारी के रूप में शामिल था। मेरा नाम बेवजह घसीटा गया : चौहान विवाद पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में चौहान ने ‘ट्रिब्यून’ से कहा, 'मेरे रीडर की किसी भी संदिग्ध गतिविधि के लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं। मेरा नाम बेवजह इस मामले में घसीटा गया है। मैं शाम 6 बजे तक कार्यालय में था और आज भी कार्यालय जाऊंगा। मैं उपलब्ध हूं।' उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि क्या इस छापेमारी का यूपीएससी की लंबित चयन प्रक्रिया से कोई संबंध है। उन्होंने कहा कि उनका करियर हमेशा साफ-सुथरा रहा है।