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पंजाब में परविंदर झोटा की हत्या के विरोध में प्रदर्शन, समर्थकों ने रोका हाईवे

मानसा. परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद विभिन्न संगठनों और धार्मिक संस्थाओं की ओर से सिरसा मानसा नेशनल हाईवे को जाम कर दिया गया है। प्रदर्शन में लक्खा सिधाना, भाना सिद्धू, मोहनजीत शेरों के अलावा विपक्षी पार्टियों के नेता भी पहुंचे हुए हैं। लक्खा सिधाना ने आरोप लगाया है कि पंजाब पुलिस परविंदर झोटा का पोस्टमार्टम के बाद जबरन संस्कार करना चाहती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि परिवार की मर्जी के बिना कोई कार्रवाई न हो। इससे पहले शहर के 12 हट्टा चौक में प्रदर्शन के दौरान परविंदर झोटा के पिता पूर्व सैनिक भीम सिंह ने केंद्र सरकार और गृहमंत्री से अपने परिवार खासकर अपने 9 और 6 साल के छोटो दो पौतों की सुरक्षा करने की गुहार लगाई है। मानसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। परविंदर झोटा नशे के खिलाफ अभियान चलाते थे। जानकारी के मुताबिक एक मेडिकल स्टोर में नशे को लेकर बहस के दौरान मेडिकल स्टोर के संचालक ने उन्हें गोली मार दी। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई। फायरिंग की घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बहस के बीच परविंदर झोटा को गोली मारते हुए देखा जा सकता है। वहीं इस घटना के बाद से एक बार फिर नशे के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के सिलसिले में एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है। जल्द ही सभी ज़िलों के SSP और DC के साथ बैठक होगी। कैमरे के सामने मारी गोली दरअसल, नशे के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद करने वाले मशहूर समाजसेवी परविंदर झोटा की दिनदहाड़े हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि परविंदर झोटा नशे से जुड़े एक मामले को लेकर एक दुकान पर पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि इसी दौरान दुकान पर मौजूद एक व्यक्ति के साथ नशे को लेकर बहस हुई। इसके बाद दुकान पर मौजूद एक व्यक्ति ने कथित तौर पर उन पर फायरिंग कर दी। इस घटना से जुड़ा वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। परविंदर झोटा मानसा इलाके से संबंध रखते हैं और अक्सर नशे के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते नजर आते हैं।

नशे के दलदल से निकलकर दूसरों को राह दिखा रहे बॉक्सर परविंदर झोटा

मानसा. तकरीबन 39 साल का परविंदर सिंह झोटा एक पेशेवर बॉक्सर था, जिसने नशे की गिरफ्त से निकल इसके खिलाफ आवाज उठाई। तकरीबन 8 साल नशे से दूर रहने के बाद जब पंजाब के हालात बिगड़ते देखे तो अप्रैल 2023 में उसने मानसा में नशे बेचने वालों के खिलाफ मुहीम शुरू कर दी। उन्होंने इस मुहीम को शुरू करने से पहले किसान संगठनों का समर्थन व मार्ग दर्शन लिया। जिसके बाद मुहीम का नाम रखा गया- 'नशा रोको, रोजगार दो'। जैसे-जैसे परविंदर सिंह झोटा का विरोध आगे बढ़ा, उन्होंने गांवों में मेडिकल स्टोरों और घरों पर छापे मारने शुरू किए और लोगों को नशा न बेचने और नशा न करने की सलाह दी। वे मानसा और बठिंडा में फेमस होने लगा।जिसका असर यह हुआ कि मानसा और बठिंडा के गांवों में नागरिक 'नशा रोको समितियां' बनने लगीं।

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा बदलाव, 4 महीने में 13.60 लाख वोटर्स कम हुए

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद फाइनल लिस्ट जारी कर दी गई है। सूची में नौ जून, 2026 को 21461043 पंजीकृत मतदाता थे। लेकिन अंतिम सूची में यह संख्या 20100727 रह गई है यानी 1360316 वोटर्स कम हो गए हैं। अंतिम मतदाता सूची में पंजाब विधानसभा की 117 सीटों में 10376026 पुरुष, 9724195 महिलाएं और 506 थर्ड-जेंडर वोटर शामिल हैं। सीईओ अनिंदिता मित्रा ने कहा कि इससे यह साफ हुआ है कि सूची में एलिजिबल वोटर्स को जोड़ा गया है। इनमें 18 और 19 साल के 2.93 लाख पहली बार वोट देने वाले वोटर्स शामिल हैं। पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची की फिजिकल और सॉफ्ट कॉपी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को सौंप दी गई हैं। मतदाता CEO पंजाब पोर्टल (www.ceopunjab.gov.in) या नागरिक सेवा पोर्टल (www.voters.eci.gov.in) से सूची देख और डाउनलोड कर सकते हैं या फिर जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs), निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) और बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) के कार्यालयों में इसकी समीक्षा कर सकते हैं। 25 जून को हुई थी शुरुआत पंजाब में एसआईआर की शुरुआत 25 जून, 2026 को हुई थी। इस बीच बीएलओ ने घर-घर जाकर गणना की। 13 अगस्त को 19394435 मतदाताओं के साथ मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इसके बाद दावों और आपत्तियों के चरण में, 19 रोल ऑब्जर्वर, DEO और CEO ने बड़े पैमाने पर फील्ड इंस्पेक्शन और सुपर-चेकिंग की। जिन वोटर्स के रिकॉर्ड में कमियां थीं या जो अनमैप्ड थे, ऐसे 3549036 वोटर्स को नोटिस भेजे गए। गांव के लेवल पर सुनवाई और वेरिफिकेशन के बाद 86038 वोटर्स को 'स्पीकिंग ऑर्डर' के जरिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। एसआइआर: जालंधर में 1525450 वोटर, 124496 हुए कम वहीं, जालंधर जिले में आयोग द्वारा जारी की गई फाइनल वोटर सूची में जिले में 1525450 वोटर बचे हैं। एसआइआर सर्वे शुरू होने से पहले जिले में कुल 1649946 वोटर थे। इस हिसाब से सर्वे पूरा होने के बाद जिले में 124496 वोटर कम हो गए हैं। हालांकि, एसआइआर के प्रथम चरण के बाद जिले में 1464949 वोटर बचे थे। इस हिसाब से 184997 वोटर कम हुए थे। वहीं, दूसरे चरण के तहत 12 सितंबर तक दावे व आपत्तियां मांगी गई थी, जिसे दूर करने के बाद 60501 वोटरों की बढ़ोतरी के साथ 1525450 वोटर हो गए हैं। चुनाव आयोग द्वारा जिले में 25 जून को एसआइआर सर्वे की शुरू हुई थी। पहले चरण में बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर घर जाकर 1649946 वोटरों को इन्यूमरेशन फार्म बॉटे गए थे। इनमें से 1464949 वोटरों ने अपने इन्यूमरेशन फार्म विभाग को जमा करवा दिए, जबकि 184997 वोटरों द्वारा फार्म प्राप्त नहीं हुए। इस हिसाब से 184997 वोटर सूची से कम हो गए थे। 13 अगस्त को ड्राफ्ट सूची जारी करने तथा 12 सितंबर तक दावे च आपत्तियां लेने के बाद फिर से 50501 वोटरों की एंट्री के बाद 1525450 वोटर फाइनल सूची में शामिल हो गए हैं। हालांकि, नई वोट बनाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। वेबसाइट पर देखें अपना नाम अमनिदर कौर ने बताया कि अंतिम अधिकारी वोटर सूची मुख्य चुनाव अधि पंजाब की आधिकारिक वेबसाइट http://www.ceopunjab.gov.in/index और जिला जालंधर की वेबसाइट http://jalandhar.nic.in पर देखी जा सकती है। इसके अलावा वोटर सूची जिला चुनाव कार्यालय, विधानसभा चुनाव हलकों के कार्यालय व संबंधिता बूथ लेवल अधिकारी पास भी उपलब्ध है।

मोहाली की वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव, पिछले चुनाव के मुकाबले हजारों मतदाता कम

मोहाली  विधानसभा क्षेत्र मोहाली जो कि पंजाब की सबसे अहम सीट मानी जाती है की मतदाता सूची में आए बदलाव ने चुनावी गणित को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची में मोहाली हलके में 2,02,010 मतदाता दर्ज किए गए हैं। यह संख्या 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज 2,33,573 मतदाताओं से 31,563 कम है। वहीं, 2022 के विधानसभा चुनाव में हलके में 2,39,357 मतदाता थे। उस आंकड़े के मुकाबले मौजूदा सूची में 37,347 मतदाताओं का अंतर सामने आया है। जिले के खरड़ और डेराबस्सी विधानसभा क्षेत्रों के मुकाबले मोहाली हलके में पुराने चुनावी आंकड़ों और मौजूदा मतदाता सूची के बीच सबसे बड़ा अंतर दिखाई देता है। मोहाली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद वोटरों की संख्या 7.8% घट गई है। सोमवार को जारी अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक जिले में अब 7,47,569 वोटर हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह संख्या 8,10,719 थी। इस हिसाब से 63,150 वोटरों की कमी आई है। हालांकि यह हटाए गए वोटरों की वास्तविक संख्या नहीं है, क्योंकि अंतिम सूची में नए वोट भी जुड़े हैं। प्रशासन बाद में हटाए गए वोटरों का अंतिम आंकड़ा जारी करेगा। डिप्टी कमिश्नर-कम-जिला चुनाव अधिकारी कोमल मित्तल ने रोल ऑब्जर्वर मोहम्मद तैय्यब की मौजूदगी में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अंतिम मतदाता सूची जारी होने की जानकारी दी। प्रतिनिधियों को मतदाता सूची की प्रतियां भी सौंपी गईं। डेराबस्सी में सबसे ज्यादा वोटर अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक, डेराबस्सी विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 2,79,857 वोटर हैं। खरड़ में 2,65,702 और मोहाली में 2,02,010 वोटर दर्ज किए गए हैं। 13 अगस्त को जारी मसौदा मतदाता सूची में जिले के 7,00,719 वोटर थे। इनमें 3,62,751 पुरुष, 3,37,954 महिलाएं और थर्ड जेंडर के 14 वोटर शामिल थे। उस समय खरड़ में 2,46,922, मोहाली में 1,92,715 और डेराबस्सी में 2,61,082 वोटर थे। मसौदा सूची के मुकाबले अंतिम सूची में 46,850 वोटर बढ़े हैं। 84,795 वोटरों की नहीं हुई थी मैपिंग SIR के दौरान जिले में 84,795 ऐसे वोटर मिले, जिनकी मैपिंग नहीं हो पाई थी। इसके अलावा, 1,09,419 मामलों में तार्किक विसंगतियां मिली थीं। संबंधित वोटरों को नोटिस देकर जरूरी दस्तावेज जमा कराने और अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 13 अगस्त से 12 सितंबर तक थी। 25 जून से शुरू हुई थी प्रक्रिया नोटिस जारी करने और उनके निपटारे की प्रक्रिया 8 अक्टूबर तक चली। मोहाली जिले में SIR की प्रक्रिया 25 जून से शुरू हुई थी। 838 बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को 8,54,423 वोटरों तक पहुंचकर गणना फॉर्म भरवाने और जानकारी का सत्यापन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। बीएलओ ने 25 जून से 24 जुलाई तक घर-घर जाकर जानकारी जुटाई। इस दौरान अनुपस्थित, दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके, मृत और दोहरी एंट्री वाले वोटरों की जांच की गई। नाम नहीं तो फॉर्म-6 भरकर बनवा सकते हैं वोट अंतिम मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर पात्र व्यक्ति फॉर्म-6 भरकर नया वोट बनवा सकता है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने के अलावा संबंधित बीएलओ या निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी के कार्यालय में भी संपर्क किया जा सकता है। एसआईआर के लिए अर्हता तिथि 1 अक्टूबर 2026 रखी गई थी।  राजनीतिक दृष्टि से यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मतदाता सूची बूथ स्तर पर राजनीतिक दलों की तैयारी, मतदाताओं तक पहुंच और चुनावी प्रबंधन का आधार होती है। हालांकि, मतदाताओं की संख्या में कमी के आधार पर किसी राजनीतिक दल के समर्थन या चुनावी नतीजों पर असर का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। यहां एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मौजूदा सूची में कितने नाम हटाए गए, कितने नए मतदाता जुड़े और कितने नामों में संशोधन हुआ।  जिला प्रशासन की ओर से जारी अंतिम सूची के कुल आंकड़े इन सवालों का पूरा जवाब नहीं देते। एसआईआर के दौरान वास्तव में हटाए गए नामों की संख्या जानने के लिए पुनरीक्षण से पहले की सूची और अंतिम सूची का आधिकारिक तुलनात्मक ब्योरा जरूरी है।

पंजाब में नशा विरोधी मुहिम से जुड़े कार्यकर्ता की हत्या, गोली मारकर उतारा मौत के घाट

मानसा. पंजाब के मानसा जिले में मेडिकल स्टोरों से नशा बिक्री के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। ये गोली एक मेडिकल स्टोर मालिक ने ही चलाई। जिस समय परविंदर झोटा को गोली मारी गई, वह सोशल मीडिया पर लाइव थे और पूरी घटना उनके लाइव वीडियो में कैद हो गई। यह दर्दनाक घटना सुबह करीब 9:00 बजे की है। परविंदर झोटा शहर के रेलवे फाटक के नजदीक एक मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी के पास पहुंचे थे और नशा बेचने का आरोप लगाते हुए उससे बहस कर रहे थे। बहस इतनी बढ़ गई कि मेडिकल स्टोर मालिक ने अपनी पिस्तौल निकाल ली। पिस्तौल देखकर परविंदर झोटा और अधिक उग्र हो गए और उन्होंने संचालक को गोली मारने की चुनौती दे दी। इसके बाद गुस्साए मेडिकल स्टोर मालिक ने परविंदर पर गोलियां चला दीं। परविंदर के दो समर्थक भी घायल गोली लगने के बाद परविंदर जान बचाने के लिए सड़क की तरफ भागे और साथ की दुकान में जा गिरे। वहां मौजूद आसपास के लोगों ने तुरंत उन्हें एक गाड़ी में लादा और अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, इलाज के दौरान अस्पताल में परविंदर की मौत हो गई। इस घटना में परविंदर सिंह को तीन गोलियां लगी हैं। दो गोली पेट और एक टांग पर लगी, जिससे उसकी मौत हुई। इस घटना में एक अन्य दुकान के संचालक हैप्पी, कुलविंदर सिंह, बलदेव सिंह और गोविंद सिंह छर्रे लगे हैं और उनका इलाज सिविल अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल में सामाजिक संगठनों का प्रदर्शन शुरू घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीएसपी हरजिंदर सिंह तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लेते हुए मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। उधर, घटना से गुस्साए परविंदर के माता-पिता और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग सिविल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा जल्द इंसाफ की मांग की। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और लोग सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। 2023 में भी हो चुका विवाद परविंदर झोटा का इसी केमिस्ट शॉप मालिक से पहले भी विवाद हो चुका है। परविंदर झोटा ने इसी केमिस्ट शॉप मालिक को 2023 में मुंह काला कर जूतों की माला पहना कर सड़कों पर घुमाया था। उस समय पुलिस को केमिस्ट शॉप मालिक की दुकान से 39 नशे के पत्ते बरामद हुए थे और उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस घटना के बाद भी कई बार अश्विनी कुमार के साथ परविंदर झोटा की बहस हो चुकी है। एसएसपी अस्पताल में पहुंचे घटना के बाद एसएसपी वैभव चौधरी मानसा के सिविल अस्पताल पहुंचे। वहां परविंदर झोटा के समर्थकों की काफी समय बहस हुई। परविंदर झोटा के समर्थकों ने शहर बंद करने की घोषणा कर दी है। वहीं, एसएसपी मानसा ने साफ किया है कि अभी केमिस्ट शॉप मालिक अश्विनी कुमार फरार है, लेकिन उसे जल्द अरेस्ट कर लिया जाएगा।

पंजाब के फरीदकोट में पटाखा लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू, 23 तारीख को निकलेगा ड्रॉ

फरीदकोट. फरीदकोट में दिवाली, गुरुपर्व, क्रिसमस और नए साल के लिए पटाखा लाइसेंस के आवेदन 13 से 19 अक्टूबर 2026 तकअस्थायी लाइसेंस के लिए 23 अक्टूबर 2026 को ड्रॉदिवाली, गुरुपर्व, क्रिसमस और नए साल के अवसर पर पटाखे बेचने के लिए अस्थायी लाइसेंस लेने के इच्छुक व्यक्ति 13 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक आवेदन जमा करवा सकते हैं। यह जानकारी जिला मजिस्ट्रेट राहुल चाबा ने दी। उन्होंने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ के आदेशों और पंजाब सरकार के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए पटाखों की बिक्री के लिए अस्थायी लाइसेंस जारी किए जाएंगे। इसके लिए इच्छुक आवेदकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करना होगा।आवेदन के साथ आधार कार्ड की कॉपी और निर्धारित फीस के चालान की प्रति जमा करवाना अनिवार्य है। आवेदन मिनी सचिवालय, फरीदकोट स्थित सेवा केंद्र में 13 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 को शाम 4 बजे तक जमा करवाए जा सकते हैं।जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि प्राप्त आवेदनों में से योग्य आवेदकों को अस्थायी लाइसेंस जारी करने के लिए 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे ड्रॉ निकाला जाएगा। निर्धारित तारीख और समय के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाइसेंस प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण , पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और पंजाब सरकार की ओर से समय-समय पर जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य होगा। फरीदकोट में दिवाली, गुरुपर्व, क्रिसमस और नए साल के लिए पटाखा लाइसेंस के आवेदन 13 से 19 अक्टूबर 2026 तकअस्थायी लाइसेंस के लिए 23 अक्टूबर 2026 को ड्रॉदिवाली, गुरुपर्व, क्रिसमस और नए साल के अवसर पर पटाखे बेचने के लिए अस्थायी लाइसेंस लेने के इच्छुक व्यक्ति 13 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक आवेदन जमा करवा सकते हैं। यह जानकारी जिला मजिस्ट्रेट राहुल चाबा ने दी। उन्होंने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ के आदेशों और पंजाब सरकार के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए पटाखों की बिक्री के लिए अस्थायी लाइसेंस जारी किए जाएंगे। इसके लिए इच्छुक आवेदकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ आधार कार्ड की कॉपी और निर्धारित फीस के चालान की प्रति जमा करवाना अनिवार्य है। आवेदन मिनी सचिवालय, फरीदकोट स्थित सेवा केंद्र में 13 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 को शाम 4 बजे तक जमा करवाए जा सकते हैं।जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि प्राप्त आवेदनों में से योग्य आवेदकों को अस्थायी लाइसेंस जारी करने के लिए 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे ड्रॉ निकाला जाएगा। निर्धारित तारीख और समय के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाइसेंस प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण , पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और पंजाब सरकार की ओर से समय-समय पर जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य होगा।

पंजाब और चंडीगढ़ में बदलेगा मौसम, बारिश-आंधी के साथ ओलावृष्टि की चेतावनी

चंडीगढ़ चंडीगढ़ मौसम केंद्र ने राज्य के छह प्रमुख जिलों – पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब और बठिंडा में गरज-चमक, बिजली गिरने और आंधी को लेकर विशेष चेतावनी जारी की है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों और किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। दूसरी ओर, चंडीगढ़ में भी आसमान में बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में एक-दो बार तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। चंडीगढ़ में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किए जाने की उम्मीद है। तापमान का गणित और मौसम प्रणाली राज्य के औसतन अधिकतम तापमान में पिछले 24 घंटों के दौरान 4.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि यह अब भी सामान्य से 2.4 डिग्री सेल्सियस कम बना हुआ है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान भाखड़ा डैम क्षेत्र में 32.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय पाकिस्तान के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवातीय हवाओं का क्षेत्र) सक्रिय है। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश और उत्तरी हरियाणा के आसपास पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) बना हुआ है। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के कारण 14 और 15 अक्टूबर को भी पंजाब और चंडीगढ़ के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि की संभावना बनी रहेगी। मौसम बदलते ही पंजाब में बिजली की मांग में आई गिरावट मौसम में आई नरमी और तापमान में गिरावट का सीधा असर राज्य की बिजली खपत पर देखने को मिला है। पंजाब में बिजली की दैनिक मांग में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। मंगलवार सुबह के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बिजली की कुल मांग घटकर 8,202 मेगावाट रह गई। इस दौरान राज्य के अपने स्रोतों से 4,888 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ, जबकि 3,317 मेगावाट बिजली बाहरी ग्रिड से प्राप्त की गई। निर्धारित कोटे से वास्तविक ड्रॉअल 295 मेगावाट कम रहा, जिससे ग्रिड फ्रीक्वेंसी 49.98 हर्ट्ज पर स्थिर रही। मौसम विभाग के मुताबिक राज्य के औसत अधिकतम तापमान में 4.4 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, यह अभी भी सामान्य से 2.4 डिग्री नीचे है। सबसे अधिक अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री भाखड़ा डैम में दर्ज किया गया। 6 जिलों के लिए जारी किया अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार आज पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, फाजिल्का, मुक्तसर और बठिंडा में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, चंडीगढ़ में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और एक-दो बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। चंडीगढ़ में 13 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री रहने का अनुमान है। इस तरह की मौसम की स्थिति बनी मौसम विभाग के मुताबिक, पाकिस्तान में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है। वहीं, हिमाचल प्रदेश और उत्तरी हरियाणा के आसपास पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इन मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से पंजाब व चंडीगढ़ में बादल छाने, गरज-चमक के साथ बारिश होने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक पंजाब और चंडीगढ़ में 14-15 अक्टूबर को भी आंधी, बिजली गिरने व ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। गर्मी कम होने से पंजाब में बिजली की मांग घटी पंजाब में गर्मी कम होने से बिजली की मांग में कमी आई है। मंगलवार सुबह 6:51 बजे बिजली की मांग 8,202 मेगावाट दर्ज की गई। राज्य में 4,888 मेगावाट बिजली पैदा हुई, जबकि 3,317 मेगावाट बिजली बाहर से ली गई। तय सप्लाई 3,612 मेगावाट थी, लेकिन वास्तविक ड्रॉअल 295 मेगावाट कम रहा। बिजली की फ्रीक्वेंसी 49.98 हर्ट्ज दर्ज की गई।

पंजाब में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव, 2.14 करोड़ से घटकर 2.01 करोड़ हुए मतदाता

चंडीगढ़  पंजाब में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद करीब 13 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने यह जानकारी दी। एसआईआर की प्रक्रिया से पहले राज्य में करीब 2.14 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे, जबकि पुनरीक्षण के बाद यह संख्या घटकर लगभग 2.01 करोड़ रह गई है। मतदाता सूची में हुए इस बदलाव के बाद पंजाब में मतदाताओं की कुल संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। एसआईआर के तहत मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कर उनमें दर्ज नामों और संबंधित विवरणों की जांच की जाती है, ताकि सूची को अद्यतन किया जा सके।  मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया के बाद राज्य की मतदाता सूची में करीब 13 लाख मतदाताओं की कमी आई है। हालांकि, हटाए गए नामों के कारणों और अलग-अलग श्रेणियों में नाम कटने का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने नाम मृत मतदाताओं, स्थान परिवर्तन या अन्य कारणों से हटाए गए हैं।   मतदाता सूची में नाम दर्ज होना मतदान के अधिकार के लिए जरूरी है। ऐसे में मतदाताओं के लिए अपनी प्रविष्टियों की जांच करना महत्वपूर्ण है, ताकि आगामी चुनावों के दौरान उन्हें मतदान करने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।  घर-घर जाकर किया गया सत्यापन अनिंदिता मित्रा ने बताया कि बूथ लेवल अधिकारियों ने 25 जून से 3 अगस्त तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया. इस दौरान पंजीकृत मतदाताओं को एन्यूमरेशन फॉर्म दिए गए और उनसे वापस लिए गए. 13 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 1,93,94,435 मतदाता थे. उस समय कुल मतदाताओं में से 20,66,608 यानी 9.63 फीसदी मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट के तौर पर बंटवारा किया गया था।  दावों और आपत्तियों की अवधि के दौरान राज्यभर में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को ड्राफ्ट मतदाता सूची की प्रतियां दी गई थीं. 13 अगस्त से 12 सितंबर के बीच लोगों से अपनी जानकारी की जांच करने और जरूरत होने पर दावे या आपत्तियां दाखिल करने को कहा गया था. आवेदन ECINET मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन, बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से ऑफलाइन या चुनाव पंजीकरण अधिकारियों के कार्यालय में जमा किए जा सकते थे. इस दौरान पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, 19 रोल ऑब्जर्वर और जिला निर्वाचन अधिकारियों ने दावों और आपत्तियों की जांच के लिए फील्ड विजिट और सुपर-चेकिंग की।  86,038 मतदाताओं को किया गया अपात्र 13 अगस्त से 8 अक्टूबर तक दावों और आपत्तियों के निपटारे के चरण में ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए, जिनका मैपिंग नहीं हुआ था या जिनकी जानकारी में गड़बड़ी थी. अनिंदिता मित्रा ने बताया कि नोटिस पाने वाले 35,49,036 मतदाताओं में से 86,038 को विस्तृत सत्यापन और स्पीकिंग ऑर्डर के जरिए अपात्र पाया गया।   बढ़ाए गए मतदान केंद्र मतदाताओं की सुविधा बढ़ाने के लिए सभी जिलों में मतदान केंद्रों का पुनर्गठन किया गया. इसके तहत मतदान केंद्रों की संख्या 24,453 से बढ़ाकर 25,332 कर दी गई. मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए एक महीने की SVEEP योजना के तहत कई माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाया गया. मतदाताओं को अपनी जानकारी जांचने और जमा करने में मदद के लिए 7 जून, 11-12 जुलाई, 19 जुलाई और 16 अगस्त को मतदान केंद्रों पर स्पेशल शिविर लगाए गए. युवा मतदाताओं के पंजीकरण के लिए कॉलेजों और स्कूलों में भी विशेष शिविर आयोजित किए गए. राज्य और जिला स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठकें भी की गईं। 

जगतार हवारा को पैरोल नहीं मिलने पर CM मान ने जताई चिंता

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि प्रदेश सरकार बंदी सिंहों की रिहाई के लिए हर कानूनी व संवैधानिक रास्ता अपनाएगी। लंबे समय से लंबित इस मामले को अनिश्चितकाल तक अनसुलझा नहीं छोड़ा जा सकता। आप सरकार ने केंद्र और राज्यपाल को आश्वासन दिया था कि यदि जगतार सिंह हवारा को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल दी जाती है, तो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह बनाए रखी जाएगी। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने अभी तक मंजूरी नहीं दी। सोमवार को कौमी इंसाफ मोर्चा, किसान यूनियनों और अन्य समूहों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री मान ने कहा कि सरकार कानून के दायरे में हरसंभव सहायता के लिए तैयार है। बंदी सिंहों के मामले में आप सरकार की मंशा व प्रतिबद्धता बिल्कुल स्पष्ट है। हम न्याय के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं। हवारा को लेकर क्या बोले सीएम मान उन्होंने रामपुर खेड़ा के संत सेवा सिंह, बठिंडा के गुरदीप सिंह, भाई मोहकम सिंह, गुरसेवक सिंह काहनेके, बाबा भूपिंदर सिंह और किसान नेता बूटा सिंह बुर्जगिल सहित अन्य नेताओं के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार हवारा को पैरोल मिलने की स्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पंजाब सरकार ने पहले ही केंद्र सरकार और राज्यपाल से कहा है कि यदि हवारा को बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल दी जाती है, तो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखेंगे। हमने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को आश्वासन दिया, लेकिन केंद्र सरकार ने पैरोल नहीं दी। हवारा को कुछ दिन की पैरोल दी जाती है तो यह मिसाल बननी चाहिए कि राज्य में शांति और भाईचारा किस तरह कायम रखा जा सकता है। इससे अन्य बंदी सिंहों की रिहाई का रास्ता भी आसान हो सकता है। हर मामले की कानूनी पहलुओं से जांच उन्होंने सिख संगठनों से अपना संघर्ष शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि कुछ समूह जानबूझकर ऐसे आंदोलनों को पटरी से उतारने और सिखों की छवि खराब करने का प्रयास करते हैं। मुख्यमंत्री ने बुड़ैल जेल में बंद परमजीत सिंह भ्यौरा और जगतार सिंह तारा की पैरोल के मामले पर स्पष्ट किया कि मामला चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में है। वह इसे राज्यपाल के समक्ष उठाएंगे, जोकि चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं। मुख्यमंत्री ने बैठक में मौजूद पंजाब के महाधिवक्ता मनिंदरजीत सिंह बेदी से कहा कि वे हर मामले की कानूनी पहलुओं से जांच करें, ताकि उचित समाधान निकाला जा सके। बैठक में मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, गृह मामले विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर, विशेष डीजीपी (कानून व्यवस्था) पीके सिन्हा, जेल विभाग की प्रमुख सचिव भावना गर्ग, मुख्यमंत्री के विशेष प्रधान सचिव कुमार अमित तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

कनाडा के प्राइवेट कॉलेजों पर पुलिस जांच, 385 मिलियन डॉलर के घोटाले से हड़कंप

चंडीगढ़  कनाडा के ओंटारियो प्रांत में प्राइवेट करियर कालेजों को मिलने वाली स्टूडेंट फाइनेंशियल असिस्टेंस को लेकर जांच शुरू होने से पंजाबी समुदाय की चिंता बढ़ गई है।ओंटारियो सरकार ने ओंटारियो स्टूडेंट असिस्टेंस प्रोग्राम (ओएसएपी) के तहत वित्तीय सहायता के इस्तेमाल में संभावित अनियमितताओं को लेकर मामला ओंटारियो प्रोविंशियल पुलिस (ओपीपी) को भेज दिया है।शुरुआती आडिट में कई तरह की गड़बड़ियों की आशंका सामने आने के बाद सरकार ने व्यापक समीक्षा के लिए आडिट फर्म केपीएमजी को भी जिम्मेदारी सौंपी है। ओंटारियो के कालेज एवं यूनिवर्सिटी मंत्री नोलन क्विन के अनुसार, प्राइवेट करियर कालेजों में ओएसएपी के इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंताओं के बाद लक्षित निरीक्षण शुरू किए गए थे। शुरुआती जांच में कुछ कालेजों के साझा स्वामित्व, कालेजों और इमिग्रेशन सेवाएं देने वाली कंपनियों के बीच संबंध, स्टूडेंट्स के सत्यापन की कमजोर प्रक्रिया और कुछ खास भौगोलिक क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आवेदन आने जैसे मामले सामने आए हैं।पहले सामने आए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान सात करियर कालेजों को ओएसएपी के तहत करीब 385 मिलियन कनाडाई डालर की ग्रांट मिली थी। अब सरकार ने जांच पूरी होने तक प्राइवेट करियर कालेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए ओएसएपी भुगतान रोक दिया है। सरकार ने मामले की जानकारी आडिटर जनरल को भी दी है। हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी के खिलाफ आपराधिक आरोप तय किए जाने की घोषणा नहीं हुई है। पंजाब के स्टूडेंट्स पर क्या पड़ेगा असर? इस मामले पर पंजाब के युवाओं और उनके परिवारों की नजर है, क्योंकि ओंटारियो के कुछ प्राइवेट करियर कालेजों में पंजाबी समुदाय के स्टूडेंट्स की अच्छी-खासी भागीदारी है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स सामान्य तौर पर ओएसएपी के पात्र नहीं होते, इसलिए फंडिंग रोकने का फैसला सीधे तौर पर सभी अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स पर लागू नहीं होता। फिर भी, यदि जांच के दौरान कालेजों के खिलाफ कार्रवाई होती है तो पढ़ाई, दाखिले और स्टूडेंट सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल सरकार ने स्टूडेंट्स के खिलाफ किसी इमिग्रेशन संबंधी कार्रवाई की घोषणा नहीं की है। कालेजों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था करियर कालेजेज ओंटारियो ने सरकार से उन स्टूडेंट्स की फंडिंग बहाल करने की मांग की है, जिनके आवेदन पहले ही मंजूर हो चुके हैं और जो नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल हो रहे हैं। संस्था का कहना है कि यदि किसी संस्थान में वित्तीय सहायता के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो कार्रवाई संबंधित संस्थान के खिलाफ होनी चाहिए, न कि उन स्टूडेंट्स के खिलाफ जिन्होंने स्वीकृत सहायता के भरोसे अपनी पढ़ाई जारी रखी है। कैलगरी में भी विरोध कर चुके हैं पंजाबी स्टूडेंट्स इससे पहले जुलाई में एक हजार से अधिक पंजाबी स्टूडेंट्स ने पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (पीजीडब्ल्यूपी) नहीं मिलने के विरोध में कैलगरी में प्रदर्शन किया था। रिपोर्टों के अनुसार, इन स्टूडेंट्स को जालंधर की एक इमिग्रेशन फर्म के जरिए दाखिले के लिए प्रेरित किया गया था। इस फर्म के मालिक का कनाडाई इंस्टीट्यूट आफ ओस्टियोपैथिक थेरेपी (सीआईओटी) में सह-स्वामित्व होने की बात भी सामने आई थी। ओंटारियो में चल रही जांच के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि संभावित वित्तीय अनियमितताओं की जिम्मेदारी किसकी तय होती है और जांच पूरी होने तक पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स को राहत मिलती है या नहीं। फिलहाल सरकार की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट का इंतजार है।