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Air India Flight: हलवारा पहुंचने से पहले तकनीकी खराबी, फिर तूफानी मौसम ने बढ़ाई परेशानी

हलवारा दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से शनिवार सुबह 5:55 बजे हलवारा एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई एयर इंडिया फ्लाइट संख्या एआई-481 में एक ही उड़ान के दौरान दो ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने यात्रियों की धड़कनें बढ़ा दीं।  पहले उड़ान भरने के करीब 15 मिनट बाद विमान में तकनीकी खराबी आने पर उसे वापस दिल्ली एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा। इसके बाद यात्रियों को दूसरे विमान में बैठाकर सुबह करीब 9 बजे दोबारा रवाना किया गया। लेकिन हलवारा पहुंचने पर तेज बारिश, आंधी और खराब मौसम के कारण पहली बार लैंडिंग का प्रयास भी सफल नहीं हो सका। आखिरकार पायलट ने विमान को दोबारा नियंत्रित करते हुए दूसरी कोशिश में सुरक्षित लैंडिंग कराई, जिसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-481 निर्धारित समय पर सुबह 5:55 बजे दिल्ली से रवाना हुई थी। उड़ान भरने के लगभग 15 मिनट बाद विमान में तकनीकी खराबी का संकेत मिलने पर पायलट ने एहतियात के तौर पर विमान को वापस दिल्ली एयरपोर्ट ले जाने का निर्णय लिया। सुबह करीब 7 बजे विमान सुरक्षित रूप से रनवे पर उतार लिया गया। विमान के दिल्ली लौटने के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। एयर इंडिया की ओर से तकनीकी जांच के बाद यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें दूसरे विमान में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद सुबह लगभग 9 बजे वही फ्लाइट संख्या एआई-481 हलवारा के लिए दोबारा रवाना हुई। हालांकि यात्रियों की परीक्षा यहीं खत्म नहीं हुई। हलवारा पहुंचने पर एयरपोर्ट के आसपास तेज बारिश, आंधी और खराब मौसम के कारण विमान की पहली लैंडिंग का प्रयास सफल नहीं हो सका। पायलट ने विमान को हवा में नियंत्रित रखते हुए हलवारा के आसमान में दो चक्कर लगाए और मौसम की स्थिति का आकलन किया। कुछ देर बाद दूसरी बार लैंडिंग का प्रयास किया गया, जो सफल रहा और विमान सुरक्षित रूप से हलवारा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतर गया। पूरी उड़ान के दौरान विमान में सवार यात्रियों की सांसें अटकी रहीं। पहले तकनीकी खराबी और फिर खराब मौसम के कारण लैंडिंग में आई कठिनाई ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी। हालांकि विमान में यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने से स्थिति पूरी तरह नियंत्रित रही और किसी तरह की अफरा-तफरी नहीं मची। सभी यात्री सुरक्षित लैंडिंग की दुआ करते रहे। उड़ान में सवार यात्री डॉ. संजीव कुमार बक्शी ने बताया कि पहले विमान में आई तकनीकी खराबी के कारण उसे दिल्ली वापस लौटाना पड़ा। इसके बाद विमान बदलकर दूसरी उड़ान से रवाना किया गया, लेकिन हलवारा पहुंचने पर खराब मौसम के कारण पहली बार लैंडिंग नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि दोनों घटनाओं के कारण विमान में बैठे सभी यात्री काफी घबराए हुए थे। जब दूसरी कोशिश में विमान सुरक्षित उतर गया तो सभी यात्रियों ने राहत की सांस ली। पिछले एक वर्ष में एयर इंडिया की उड़ानों पर उठे सुरक्षा संबंधी सवाल बीते एक वर्ष के दौरान एयर इंडिया के विमानों में तकनीकी खराबी और परिचालन संबंधी समस्याओं के कई मामले सामने आए हैं। विभिन्न उड़ानों में इंजन, हाइड्रोलिक सिस्टम, एयर कंडीशनिंग, तकनीकी चेतावनी संकेत तथा अन्य तकनीकी कारणों से विमानों को बीच रास्ते से वापस लौटाना पड़ा या वैकल्पिक एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा। कई उड़ानों में यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा, जबकि कुछ मामलों में विमान बदलकर यात्रा पूरी कराई गई। हाल के महीनों में विमानन क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर बढ़ी संवेदनशीलता के बीच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) भी एयरलाइनों की तकनीकी निगरानी और सुरक्षा मानकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।  विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी खराबी की स्थिति में विमान को तत्काल वापस लौटाने या वैकल्पिक एयरपोर्ट पर उतारने का फैसला यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की स्थापित प्रक्रिया का हिस्सा है। शनिवार को दिल्ली से हलवारा की उड़ान में भी पायलट और एयरलाइन ने तकनीकी खराबी सामने आते ही एहतियात बरतते हुए विमान को वापस दिल्ली उतारा और बाद में दूसरा विमान उपलब्ध कराया।  

पंजाब में बारिश का कहर! चंडीगढ़ समेत कई शहरों में भारी बरसात, गुरदासपुर में बांध टूटने से खेत जलमग्न

चंडीगढ़ शुक्रवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में बारिश के दौरान छाता ओढ़कर साइकिल से गुजरता एक व्यक्ति। गुरदासपुर में बांध टूटने से पानी खेतों में चला गया।पंजाब और चंडीगढ़ में मानसून लगातार सक्रिय है। चंडीगढ़ मौसम विज्ञान केंद्र ने ट्राईसिटी (चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला) में अगले 3 घंटों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब और रूपनगर।  विभाग के मुताबिक, 9 जुलाई तक मौसम ऐसे ही बना रहेगा। पंजाब के कई जिलों में भारी बारिश, बिजली चमकने और तेज हवाएं चल सकती है। आज पंजाब के ज्यादातर जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान चंडीगढ़ के साथ गुरदासपुर, पठानकोट, फरीदकोट, मोहाली, पटियाला और अमृतसर में में बारिश दर्ज की गई। इससे तापमान में गिरावट आई है और लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। शुक्रवार को गुरदासपुर में भारी बारिश हुई, जिससे बहरामपुर में धुसी बांध टूट गया। इसका पानी गांव मुगलानिचक के खेतों में भर गया। हालांकि, अब पानी निकलने लगा है और हालात सामान्य हो रहे हैं। यह बांध पिछले साल आई बाढ़ में टूटा था, जिसे विभाग ने पक्के तौर पर ठीक नहीं किया था। सीटीईटी कॉलेज के हॉल का एक हिस्सा ढहा चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित सीटीईटी कॉलेज के मल्टीपर्पज हॉल का एक हिस्सा शुक्रवार को ढह गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है, क्योंकि भवन को पहले ही असुरक्षित घोषित कर उपयोग के लिए बंद कर दिया गया था। पिछले 24 घंटे में इन जिलों में हुई बारिश मौसम विभाग के अनुसार, पंजाब के माझा क्षेत्र और आसपास के जिलों में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई। इसमें गुरदासपुर में 48.2 मिमी, पठानकोट में 27.2 मिमी, फरीदकोट में 10.4 मिमी मोहाली में 8.5 मिमी, पटियाला में 6.1 मिमी, चंडीगढ़ में 4.6 मिमी और अमृतसर में 2.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है। बारिश के कारण कई इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। बठिंडा रहा सबसे ठंडा दिन और रात दोनों के तापमान में कमी दर्ज की गई है। दिन के समय पंजाब का सबसे अधिक तापमान सामराला (लुधियाना) में 36.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि चंडीगढ़ में अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं रात के समय बठिंडा पंजाब का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने जारी की एडवाइजरी मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ ने लोगों को खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार, गरज-चमक और बिजली कड़कने के दौरान खुले स्थानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। इसके अलावा भारी बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों में वाहन चलाते समय सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की भी सलाह दी गई है। अगले कुछ दिनों तक पंजाब और चंडीगढ़ में मानसून की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

‘सीनियर नेताओं को किया जा रहा इग्नोर’… पंजाब कांग्रेस में रंधावा का बड़ा हमला, हाईकमान पर साधा निशाना

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मौजूदा हालात पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर तीन-चार दौर की बैठकों के बावजूद पार्टी में डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो पा रहा है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। रंधावा ने कहा कि कांग्रेस के पास अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं की कोई कमी नहीं है, इसके बावजूद पार्टी के भीतर लगातार बढ़ रहे मतभेद चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग आज भी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर की कांग्रेस को पसंद करते हैं, इसलिए पार्टी नेतृत्व को मौजूदा हालात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दरअसल, विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत कांग्रेस हाईकमान ने ऑब्जर्वर टीम गठित की थी। इसके बाद दिल्ली में दो से तीन दौर की बैठकों में पंजाब के लगभग सभी वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया गया। चन्नी के करीबी सोर्स के मुताबिक नेता ने भरोसा दिलाया कि राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश से लौट आएंगे, उसके बाद चन्नी की उनसे मीटिंग करा दी जाएगी। दूसरी तरफ कल शुक्रवार को दिल्ली में अमित शाह से मिलकर आए गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर रंधावा ने हाईकमान पर ही सवाल खड़े किए। एक इंटरव्यू में रंधावा ने कहा- लीडरशिप को देखना चाहिए कि ऐसी बातें क्यों हो रही हैं। इतने पदाधिकारियों के बावजूद डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो रहा। 3-4 मीटिंग के बाद भी ऐसा होना, यह किसका फेलियर है। इंदिरा गांधी-राजीव गांधी के वक्त 3 जनरल सेक्रेटरी होते थे, अब पता नहीं कितने हैं। सीनियर कांग्रेसियों को नजरअंदाज किया जाता है, इसलिए ऐसी बातें होती हैं। वहीं पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल भी इसको लेकर हरकत में आ गए हैं। वह आज या फिर अगले कुछ ही दिनों में चंडीगढ़ पहुंचकर मौजूदा प्रधान सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व CM सांसद चरणजीत चन्नी से मुलाकात कर सकते हैं। वहीं शुक्रवार को सांसद अमरिंदर राजा वड़िंग को प्रधान बनाए रखने पर पूर्व CM चरणजीत चन्नी ने कांग्रेस हाईकमान को तीखे तेवर दिखाए। शुक्रवार को अपने घर मोरिंडा में 50 से ज्यादा नेता इकट्‌ठे कर हाईकमान का फैसला रिजेक्ट कर दिया। चन्नी गुट ने कहा कि एक हफ्ते के बाद वह हाईकमान से मुलाकात करेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे। चन्नी इस वक्त ठीक उसी स्टाइल में पार्टी हाईकमान पर प्रेशर बना रहे हैं, जैसे नवजोत सिद्धू ने प्रधान रहते 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को CM की कुर्सी से हटवा दिया था। हालांकि उसके बाद सिद्धू की जगह चन्नी सीएम बन गए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि चन्नी के इस स्टैप से कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी सड़क पर आ गई है। अब वह हाईकमान पर प्रेशर बनाने में कामयाब होते हैं या नहीं, लेकिन इसका खामियाजा कांग्रेस को विधानसभा चुनाव 2027 में झेलना ही पड़ेगा। इसे देखते हुए कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल भी आज चंडीगढ़ आ सकते हैं। 3 पॉलिटिकल एक्सपर्ट से जानिए, चन्नी के फैसले से कांग्रेस को क्या फायदा और नुकसान होगा… राजा वड़िंग को लेकर बहस तेज इसके बावजूद प्रदेश इकाई में असंतोष कम होने के बजाय और खुलकर सामने आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर भी बहस तेज हो गई है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि पंजाब कांग्रेस में मौजूदा स्थिति पहले सामने आए कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के टकराव जैसी बनती जा रही है। अब चन्नी और वड़िंग समर्थकों के बीच बढ़ती खींचतान ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि कांग्रेस के भीतर यह भी माना जा रहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में अब तक लिए गए बड़े संगठनात्मक फैसलों को वापस लेने की परंपरा नहीं रही है। ऐसे में हाल ही में घोषित संगठनात्मक सूची में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि इस स्तर पर बदलाव करने से विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। सात जुलाई को विदेश दौरे पर लौटेंगे राहुल गांधी सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश दौरे से लौटने के बाद पंजाब कांग्रेस के हालात की समीक्षा कर सकते हैं। इसके साथ ही संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस हाईकमान कुछ वरिष्ठ नेताओं को चंडीगढ़ भेज सकता है। प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल और सह-प्रभारियों की चन्नी तथा वड़िंग गुट के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक कर संगठन में बढ़ते विवाद को शांत करने और डैमेज कंट्रोल की कोशिश की जा सकती है। पंजाब मामलों के सह प्रभारी सूरज ठाकुर चरणजीत चन्नी से मुलाकात के लिए चंडीगढ़ आ सकते हैं।  

चन्नी बन सकते थे पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष! पर्यवेक्षक समिति की सिफारिश के बावजूद हाईकमान ने बदला फैसला

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस के भीतर एक बार फिर नेतृत्व को लेकर खींचतान तेज हो गई है. जानकारी के मुताबिक, पंजाब के राजनीतिक हालात का आकलन करने के लिए गठित कांग्रेस के तीन सदस्यीय ऑब्जर्वर पैनल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की पुरजोर सिफारिश की थी।  हालांकि, कांग्रेस हाईकमान ने इस आंतरिक फीडबैक को दरकिनार करते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को ही पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा. इस फैसले के बाद पार्टी के एक धड़े में भारी नाराजगी देखी जा रही है।  अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव की सदस्यता वाली इस हाई-प्रोफाइल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंपी थी. कमेटी ने नेताओं को अलग-अलग समूहों में बांटा और उनसे अलग-अलग मुलाक़ात की. हर नेता से खास तौर पर पूछा गया कि क्या पंजाब में पार्टी के नेतृत्व में बदलाव होना चाहिए।  तमाम बड़े से छोटे नेताओ तक से ली थी राय कमेटी ने पंजाब के करीब 67 वरिष्ठ नेताओं से गहन विचार-विमर्श किया, जिसमें सीडब्ल्यूसी सदस्य, पूर्व मंत्री, विधायक, सांसद और जिला अध्यक्ष शामिल थे. जिनमें कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य, पूर्व मंत्री, विधायक, सांसद और DCC अध्यक्ष शामिल थे. उन्होंने अंबिका सोनी जैसे वरिष्ठ नेताओं से भी उनके आवास पर जाकर उनकी राय जानी।  सूत्रों के मुताबिक, इस गुप्त मंथन के दौरान एक अधिकांश नेताओं ने पिछले साढ़े चार साल से पद पर काबिज राजा वड़िंग के कामकाज पर असंतोष जाहिर किया और चन्नी को कमान सौंपने की वकालत की. कमेटी ने नेताओं के बयानों को ज्यों का त्यों शामिल किया और अपनी रिपोर्ट में चन्नी को सबसे लोकप्रिय चेहरा बताया था. इस प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि चन्नी काफ़ी लोकप्रिय हैं और राज्य के अन्य कांग्रेस नेताओं की तुलना में पार्टी के भीतर सबसे ज़्यादा लोकप्रिय नेता हैं।  हाईकमान के फैसले पर उठे सवाल पैनल की रिपोर्ट के बाद चन्नी कैंप को पूरा भरोसा था कि पंजाब में लीडरशिप में बदलाव तय है, लेकिन हाईकमान ने यथास्थिति बनाए रखते हुए राजा वड़िंग को अध्यक्ष बनाए रखा और चन्नी को केवल चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया।  इस फैसले से हैरान कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, "यह पूरी तरह से एक विफलता  है. जब नेतृत्व बदलने का कोई इरादा ही नहीं था, तो नेताओं से रायशुमारी करने का यह पूरा नाटक क्यों रचा गया? इसका मतलब है कि यह पूरी कवायद सिर्फ एक दिखावा थी।  चन्नी की ताकत पर दूसरे धड़े का पलटवार दूसरी तरफ, पंजाब कांग्रेस के भीतर एक दूसरा धड़ा इस राय से इत्तेफाक नहीं रखता. पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने चन्नी की वास्तविक पकड़ पर सवाल उठाते हुए कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि चन्नी कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से हैं और वे सभी निर्वाचन क्षेत्रों के नेताओं से संपर्क साध रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि वास्तव में उनके बुलाने पर कितने लोग आ रहे हैं? जब वे बैठकें बुलाते हैं, तो बमुश्किल चार-पांच विधायक पहुंचते हैं. हमारा मुकाबला भगवंत मान से है, ऐसे में अगले कुछ दिनों में तस्वीर साफ हो जाएगी कि चन्नी के साथ कितने लोग टिकते हैं।  पंजाब कांग्रेस में हाईकमान के इस फैसले ने संगठन के भीतर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखने वाली बात होगी कि यह असंतोष आगे चलकर शांत होता है या चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी के लिए नई चुनौती बनता है। 

Punjab Land Pooling Policy: किसानों के हित में बदलाव, जानिए नई नीति से क्या होंगे फायदे

 चंडीगढ़ पंजाब में मान सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी में बदलाव कर दिए हैं। जमीन मालिकों की चिंताओं को दूर करने और जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को अधिक फायदा देने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने जमीन मालिकों के लाभों से संबंधित मौजूदा नीति में संशोधनों को मंजूरी दे दी है तथा राहत के लिए कई अन्य कदमों की भी शुरुआत की है। लैंड पूलिंग पॉलिसी से क्या होंगे बदलाव? संशोधित नियमों के अनुसार, लैंड पूलिंग में आवासीय व व्यावसायिक श्रेणी चुनने वाले जमीन मालिकों को प्रति एकड़ 1,000 वर्ग गज के आवासीय प्लॉट मिलते रहेंगे। कमर्शियल जगह को 200 वर्ग गज से बढ़ा 210 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दिया गया है। जो सिर्फ आवासीय श्रेणी चुनेंगे, उन्हें अब 1,600 की जगह 1,630 वर्ग गज प्रति एकड़ मिलेगा। व्यावसायिक जगह 800 वर्ग गज से 840 वर्ग गज कर दी है। आउस्टी पॉलिसी में संशोधन के तहत वह जमीन मालिक जिनकी एक एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाती है, वे 200 वर्ग गज प्लाट के हकदार होंगे। 1-2.5 एकड़ तक के मालिकों को 300 वर्ग गज प्लाट मिलेगा 12.5 एकड़ से अधिक पर 500 वर्ग गज प्लॉट मिलेगा। छोटे किसानों के लिए विशेष लेटर आफ इंटेंट की व्यवस्था। 'सुविधा सर्टिफिकेट' अवधि दो साल से बढ़ा चार साल कर दी है। विकसित प्लाट लेने वाले असली मालिकों को स्टांप ड्यूटी या अन्य खर्च नहीं देने पड़ेंगे। वे कहीं भी स्टांप ड्यूटी छूट का लाभले सकते हैं। ट्यूबवेल कनेक्शन भी मिलेगा। किसान प्राथमिक स्थानों पर प्लाट आबंटन के योग्य होंगे। कमर्शियल जगह को 200 वर्ग गज से बढ़ाकर 210 किया संशोधित नियमों के अनुसार लैंड पूलिंग के तहत रिहायशी और कमर्शियल कैटेगरी चुनने वाले जमीन मालिकों को प्रति एकड़ 1,000 वर्ग गज के रिहायशी प्लॉट मिलते रहेंगे, जबकि कमर्शियल जगह को 200 वर्ग गज से बढ़ाकर 210 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दिया गया है। जो लोग केवल रिहायशी कैटेगरी चुनते हैं, उन्हें अब 1,600 वर्ग गज की जगह 1,630 वर्ग गज प्रति एकड़ मिलेगा, जबकि कमर्शियल कैटेगरी के प्रोजेक्ट्स के लिए कमर्शियल जगह 800 वर्ग गज से बढ़ाकर 840 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दी गई है। आउस्टी पॉलिसी में संशोधनों को भी मंजूरी कैबिनेट ने आउस्टी पॉलिसी में संशोधनों को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत वह जमीन मालिक जिनकी 1 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाती है, वे 200 वर्ग गज के प्लॉट के हकदार होंगे। जिनकी अधिग्रहित जमीन 1 एकड़ से अधिक और 2.5 एकड़ तक है, उन्हें 300 वर्ग गज का प्लॉट मिलेगा। वहीं जिनकी अधिग्रहित जमीन 2.5 एकड़ से अधिक है, वे 500 वर्ग गज के प्लॉट के हकदार होंगे। किसानों के लेटर ऑफ इंटेंट की व्यवस्था कैबिनेट ने छोटे किसानों के लिए विशेष लेटर ऑफ इंटेंट की व्यवस्था को भी मंजूरी दी है और 'सुविधा सर्टिफिकेट' की अवधि दो साल से बढ़ाकर चार साल कर दी है। इसके अलावा इस नीति के तहत विकसित प्लॉट लेने वाले असली जमीन मालिकों को रजिस्ट्रेशन या कन्वेयंस डीड के समय स्टांप ड्यूटी या अन्य खर्च नहीं देने पड़ेंगे। वैकल्पिक रूप से वे अधिग्रहित जमीन के कलेक्टर रेट पर गणना किए गए मूल्य तक पंजाब में कहीं भी जमीन खरीदते समय स्टांप ड्यूटी की छूट का लाभ ले सकते हैं। योग्य जमीन मालिकों को एक तरजीही ट्यूबवेल कनेक्शन भी मिलेगा, जबकि इस नीति में भाग लेने वाले किसान प्राथमिक स्थानों पर प्लॉटों की आबंटन के योग्य होंगे। संशोधित लैंड पूलिंग नीति का विरोध शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब सरकार की संशोधित लैंड पूलिंग नीति को किसानों की जमीन हड़पने की साजिश करार दिया है। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार चुनाव नजदीक आते देख अपने राजनीतिक हितों को साधने में जुटी है। सरकार उन लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रही है, जिनसे पहले कथित तौर पर विभिन्न प्रकार के समझौते किए गए थे। किसानों के अधिकारों की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता सुखबीर ने कहा कि पंजाब की उपजाऊ जमीन और किसानों के अधिकारों की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता है। पहले भी किसानों की जमीनों को लेकर की गई ऐसी कोशिशों का विरोध किया गया था और आगे भी किसानों के हितों के खिलाफ किसी भी कदम को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों और उनकी जमीनों की सुरक्षा के लिए पूरे पंजाब में व्यापक जन आंदोलन और संघर्ष चलाया जाएगा। इसके तहत किसानों को जागरूक करने और सरकार की नीति के विरोध में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

अमित शाह से सुखजिंदर रंधावा की मुलाकात से सियासी चर्चाएं तेज, सांसद ने किया बड़ा खुलासा

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है। कांग्रेस में रार उभरने लगी है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश पार्टी प्रधान बनाए रखने के फैसले के बाद कई वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी है। इसी बीच सांसद और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा गुरुवार को दिल्ली पहुंचे। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। मुलाकात के बाद रंधावा ने कहा कि मैंने शाह से पंजाब की कानून व्यवस्था पर बात की। सूत्रों के अनुसार, शाह से रंधावा की मुलाकात राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने करवाई है।   पत्र के बाद बैठक के लिए बुलाया गया मुलाकात के बाद रंधावा ने कहा कि उन्होंने लगभग दो महीने पहले, चार जून को प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था और उसकी एक कॉपी गृह मंत्री को भी भेजी थी। इसमें पंजाब के हालात, खासकर गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन और पठानकोट जैसे सीमावर्ती जिलों की स्थिति का जिक्र था। मैंने बिगड़ती कानून-व्यवस्था, पाकिस्तान-समर्थित आतंकवाद, नार्को-टेररिज्म, गैंगस्टरों और राजनेताओं के बीच सांठ-गांठ और पंजाब पुलिस के राजनीतिक इस्तेमाल जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया था। उस शुरुआती पत्र के साथ, मैंने अपने इलाके में सक्रिय एक कुख्यात गैंगस्टर के बारे में भी जानकारी दी थी।  मैंने 23 जून को एक और पत्र भी भेजा, जिसमें बताया गया था कि गुरदासपुर और अन्य इलाकों में गैंगस्टर कैसे काम कर रहे हैं। इन पत्रों के आधार पर मुझे एक बैठक के लिए बुलाया गया, जिसमें हमने मेरे पिछले पत्र के आखिरी पैराग्राफ में बताए गए निष्कर्षों पर चर्चा की।  रंधावा ने कहा कि मैंने इंटेलिजेंस ब्यूरो, मिलिट्री इंटेलिजेंस, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन जैसी केंद्रीय एजेंसियों की मौजूदगी का जिक्र किया। मैंने इस बात पर भी जोर दिया कि आज पूरे पंजाब में जबरन वसूली और धमकियां आम हो गई हैं। बैठक के दौरान, उन्होंने माना कि बड़े पैमाने पर जबरन वसूली और धमकियां हो रही हैं, और जेलों के अंदर से लगभग लगातार मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। मेरा मानना है कि अगर भारत सरकार यह मानती है कि मौजूदा स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और पाकिस्तान इसमें सीधे तौर पर दखल दे रहा है, तो वह अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती। वहीं पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी ने मोरिंडा स्थित निवास स्थान पर अपने समर्थकों की आज बैठक बुलाई है। इसमें भारत भूषण आशु समेत कई बड़े नेता पहुंचे हैं।  पंजाब भाजपा अध्यक्ष बोले-भाजपा में सबका स्वागत वहीं रंधावा-शाह की मुलाकात पर पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि भाजपा बहुत बड़ा परिवार है, यहां जो आएगा उसका स्वागत है। ढिल्लों ने कहा कि सुखविंदर सिंह रंधावा एक सांसद है और अमित शाह भी सांसद हैं। दिल्ली में सांसद अक्सर मिलते रहते हैं। रंधावा को अमित शाह से कोई काम होगा इसलिए वे उनसे मिलने गए हैं।

ऐतिहासिक गुरुद्वारे को नुकसान पहुंचाने के आरोप पर SGPC सख्त, केंद्र से उठाई कार्रवाई की मांग

अमृतसर  पाकिस्तान के फरुखाबाद स्थित करीब 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के एक हिस्से को बुलडोजर से गिराए जाने के मामले में नया खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार, जिस स्थानीय कारोबारी ने गुरुद्वारे के ढांचे को ध्वस्त कराया, उसने संबंधित सरकारी विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) अथवा अन्य वैधानिक अनुमति प्राप्त नहीं की थी। इस जानकारी के सामने आने के बाद सिख संगठनों में घटना को लेकर नाराजगी और बढ़ गई है। घटना के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। कमेटी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर पाकिस्तान सरकार के समक्ष इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित कराने की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई किए जाने की भी अपील की गई है। सिख समुदाय की भावनाओं को पहुंची ठेस एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाले गुरुद्वारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं विश्वभर के सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाती हैं। उनका कहना है कि यदि किसी भी ऐतिहासिक धार्मिक स्थल से जुड़ा कोई निर्माण कार्य या बदलाव किया जाना हो, तो उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय कारोबारी ने बिना आवश्यक सरकारी स्वीकृति के बुलडोजर चलवाकर गुरुद्वारे के ऐतिहासिक ढांचे के एक हिस्से को गिरा दिया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय सिख समुदाय और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। पाकिस्तान सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग इस मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। मंत्रालय ने पाकिस्तान सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने और क्षतिग्रस्त ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा को उसके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित करने की मांग की है। इसके साथ ही पाकिस्तान में स्थित सभी धार्मिक स्थलों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों के संरक्षण का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक विरासत की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और जांच के बाद कौन से तथ्य सामने आते हैं।

पंजाब में झमाझम बारिश का दौर, 4 दिन यलो अलर्ट जारी; तापमान गिरा, बिजली की मांग भी घटी

अमृतसर  मानसून की सक्रियता से पंजाब के अधिकतर हिस्से बुधवार देर रात हुई बारिश से तर हो गए। बारिश के बाद राज्य के अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई और सबसे अधिक पारा 35.2 डिग्री सेल्सियस रोपड़ में रिकॉर्ड हुआ।  मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान सामान्य से 2.5 डिग्री नीचे पहुंच गया है, जबकि न्यूनतम तापमान में 3.6 डिग्री की कमी आने से यह सामान्य से 3.4 डिग्री नीचे दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने बताया कि मानसून पंजाब के अधिकतर हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। अगले छह दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। विभाग ने पांच जुलाई से चार दिनों के लिए भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इससे आने वाले दिनों में तापमान में छह डिग्री तक और गिरावट आ सकती है। बारिश के आंकड़ों में फरीदकोट में 89.0 मिमी, लुधियाना में 82.5 मिमी, फिरोजपुर में 68.0 मिमी, मोगा में 57.5 मिमी और बठिंडा में 56.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई। वीरवार को अमृतसर का तापमान 33.1 डिग्री, लुधियाना का 33.2 डिग्री, पटियाला का 32.4 डिग्री और बठिंडा का 34.9 डिग्री रहा। सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री बठिंडा में दर्ज किया गया। बारिश से घटी बिजली की मांग पंजाब में मानसून की एंट्री के साथ हुई बारिश ने बिजली की मांग में बड़ी राहत दी है। वीरवार को प्रदेश में अधिकतम बिजली मांग घटकर 15682 मेगावाट दर्ज की गई। इससे एक दिन पहले बुधवार को यह 17112 मेगावाट थी। यानी 24 घंटे में बिजली की मांग 1430 मेगावाट कम हो गई। पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और धान की सिंचाई के पीक सीजन के कारण मांग लगातार 17 हजार मेगावाट से ऊपर बनी हुई थी। रिकॉर्ड मांग के चलते पावरकाम पर बिजली आपूर्ति का दबाव बढ़ गया था। घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं को अघोषित कटौती का सामना करना पड़ रहा था जबकि खेतीबाड़ी के लिए दिन में केवल चार घंटे बिजली आपूर्ति मिल रही थी। बुधवार रात हुई बारिश के बाद तापमान में गिरावट आने से एसी का उपयोग कम हुआ और सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों की जरूरत भी घटी। इससे बिजली की मांग में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। वीरवार को इस मांग को पूरा करने के लिए पावरकाम के पास अपने सभी स्रोतों से 5222 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही। इसमें सरकारी थर्मल प्लांटों से 1695 मेगावाट, हाइडल परियोजनाओं से 810 मेगावाट और निजी थर्मल संयंत्रों से 2682 मेगावाट बिजली मिली। शेष करीब 10648 मेगावाट बिजली नॉर्दर्न ग्रिड से ली गई। हालांकि रोपड़ थर्मल प्लांट की 210 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट और रणजीत सागर बांध की 150 मेगावाट क्षमता वाली एक यूनिट बंद रहने से 360 मेगावाट उत्पादन प्रभावित रहा। पावरकाम अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है जिससे बिजली की मांग और कम रह सकती है।  

पंजाब कांग्रेस में चन्नी की ताकत का प्रदर्शन, समर्थकों की जुटी भीड़; बराड़ का बड़ा बयान

चंडीगढ़  पंजाब में 2027 चुनाव से पहले कांग्रेस में फिर बगावत शुरू हो गई है। प्रदेश प्रधान न बनाए जाने से पूर्व CM चरणजीत चन्नी बेहद नाराज हैं। इसी वजह से कैंपेंनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाए जाने पर चन्नी ने हाईकमान का धन्यवाद तक नहीं किया। उन्होंने आज, शुक्रवार को मोरिंडा स्थित घर में मीटिंग बुलाई है। जिसमें सांसदों, विधायकों और हलका इंचार्जों को बुलाया गया है। चन्नी के बुलावे पर लुधियाना से पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू, पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी, पूर्व MLA गुरप्रीत कांगड़, नाजर सिंह मानशाहिया, दविंदर सिंह घुबाया, इंदरवीर सिंह बुलारिया, लखबीर लक्खा, तरसेम डीसी और बाघापुराना से पूर्व MLA दर्शन बराड़ चन्नी, हरमिंदर सिंह गिल और पूर्व सांसद मोहम्मद सदीक के घर पहुंच चुके हैं। बराड़ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर चन्नी को प्रधान न बनाया गया तो पंजाब में कांग्रेस की सरकार नहीं बन सकती। चन्नी के इस रुख से लग रहा है कि पंजाब कांग्रेस में आज कोई बड़ा धमाका हो सकता है। चन्नी के एक करीबी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया- प्रधान न बनाए जाने से चन्नी बहुत खफा हैं और अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का फैसला कर दिया है। वह शक्ति प्रदर्शन कर हाईकमान को अपनी ताकत का एहसास कराना चाहते हैं। वड़िंग हटाओ, कैप्टन की तरह प्रधान बनाओ पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि पंजाब कांग्रेस में एक प्रचलन रहा है कि जो पार्टी प्रधान होता है, वही सीएम बनता है। कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों बार चुनाव से पहले अध्यक्ष बनाए गए और जब पार्टी ने चुनाव जीता तो उन्हें ही सीएम बनाया गया। इसी कुर्सी पर नजर रखते हुए चन्नी गुट लंबे समय से राजा वड़िंग के विरोध में रहा है, यह किसी से छुपा नहीं है। पार्टी की इंटरनल मीटिंग हो या फिर हाईकमान के सामने सब जगह चन्नी राजा वड़िंग को फेल लीडर बता चुके हैं और उन्हें प्रधान पद से हटाने की वकालत भी कर चुके हैं। 2017 में जब कांग्रेस की सरकार आई तो इसी तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बनाया था कि उन्हें प्रधान बनाएं। जब प्रताप बाजवा को प्रधान पद से हटाया गया था। प्रधान बनने का मकसद साफ होता है कि टिकट बंटवारे में उनकी ही चले और जब विधायक जीतकर आएं तो ज्यादातर विधायक उनके समर्थक हों और उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी का रास्ता साफ रहे। कैप्टन ने इसके लिए जाट महासभा तक को एक्टिव कर दिया था। चन्नी भी कैप्टन के रास्ते पर हैं। वह चाहते हैं कि हाईकमान उन्हें प्रधान बनाए ताकि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो राजा वड़िंग ये क्रेडिट न ले सकें कि प्रधान होने के नाते यह जीत उनकी अगुआई में हुई है। फिर वह सीएम कुर्सी पर भी दावा ठोक सकते हैं। प्रधान नहीं तो मुझे 'सीएम चेहरा' घोषित करो 2022 में नवजोत सिद्धू प्रधान थे और चरणजीत चन्नी मुख्यमंत्री, इसीलिए तब हाईकमान पर दबाव डाला गया कि सीएम चेहरा घोषित करें। इसकी वजह ये थी कि प्रधान सिद्धू थे और सीएम चन्नी। चन्नी पंजाब कांग्रेस के ट्रेंड से वाकिफ थे कि अगर सिद्धू की प्रधानगी में चुनाव जीते तो सीएम कुर्सी मिलनी मुश्किल है। इसलिए सिद्धू को उकसाया गया और अंदरूनी तौर पर चन्नी लॉबिंग करते रहे। फिर पहली बार कांग्रेस ने पंजाब में औपचारिक तौर पर चन्नी को सीएम चेहरा घोषित करना पड़ा। माना जा रहा है कि चन्नी उसी पैटर्न पर चल रहे हैं। वह चाहते हैं कि हाईकमान उन्हें प्रधानगी की कुर्सी दे। अगर ऐसा नहीं होता तो चाहे राजा वड़िंग प्रधान रहें लेकिन पिछली बार की तरह उन्हें CM चेहरा घोषित किया जाए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि कांग्रेस जट्‌टसिखों को नाराज नहीं करना चाहती थी। इसलिए वड़िंग को नहीं हटाया। इसीलिए चन्नी अब पार्टी हाईकमान पर उन्हें सीएम फेस घोषित करने का दबाव बना रहे हैं। चन्नी के पास समर्थक नेताओं की लंबी फौज है। ऐसे में समर्थकों और 31% दलित वोट बैंक के जरिए वह हाईकमान पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। चन्नी की दोनों मांगें दरकिनार तो क्या रास्ता बचा? पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि चरणजीत चन्नी पहले तो कांग्रेस पर पूरा दबाव बनाएंगे कि या तो उन्हें अध्यक्ष बनाया जाए या फिर सीएम फेस घोषित किया जाए। अगर दोनों में से कुछ भी नहीं हुआ तो उनके पास प्लान बी है। प्लान बी के तहत वो अपने समर्थकों के साथ नई पार्टी का गठन कर सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान माना जाएगा। उनका कहनना है कि चन्नी के साथ एक बड़ा दलित वर्ग जुड़ा है। 2021 में उनके 111 दिन के कार्यकाल से भी अच्छी छवि बनी है। अगर चन्नी बगावत करते हैं या अलग पार्टी बनाते हैं, तो कांग्रेस के पारंपरिक दलित और गरीब तबके में मैसेज जाएगा कि उनके नेता की सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में यह वोट बैंक पूरी तरह से खिसक जाएगा, जिसका सीधा फायदा विरोधी दलों को मिलेगा। चन्नी गुट के दिग्गज नेताओं का इस फैसले पर क्या रवैया चन्नी गुट के किसी भी नेता ने हाईकमान के फैसले पर कोई धन्यवाद नहीं किया। इनमें MLA राणा गुरजीत, MLA परगट सिंह, पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी, पूर्व MLA भारत भूषण आशू प्रमुख नेता हैं। कपूरथला से MLA राणा गुरजीत की एक रील भी सुर्खियों में है, जिसमें उन्होंने ‘पातशाही दा वा रखदे हां, खंडियां दी धार ते नचदे हां, सानू औंदा है बदला लैंणा’ सॉन्ग लगा रखा है। इससे ये कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भी चन्नी की लड़ाई में उनके साथ हैं। राणा गुरजीत ने 2022 में AAP की आंधी के बावजूद न केवल अपनी सीट जीती बल्कि अपने बेटे राणा इंदरप्रताप को भी सुल्तानपुर लोधी से निर्दलीय जिता दिया।

पंजाब की बेटी का कमाल! अमृतसर की छात्रा अंतरराष्ट्रीय शक्तिसैट मिशन में करेगी प्रतिनिधित्व

अमृतसर अमृतसर के सरकारी स्कूल ऑफ एमिनेंस, मॉल रोड की छात्रा टिया की असाधारण उपलब्धि ने पूरे पंजाब का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।12वीं कक्षा की मेडिकल स्ट्रीम की छात्रा टिया का चयन अंतरराष्ट्रीय "शक्तिसैट" सैटेलाइट मिशन के लिए हुआ है। इस प्रतिष्ठित अभियान में दुनिया के 108 देशों से छात्रों को चुना गया, और पंजाब के भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर टिया को मिला है। इस सफलता के पीछे टिया की लगातार मेहनत, अनुशासन और सीखने का जुनून है। उन्होंने करीब 10 महीने तक इस मिशन की तैयारी की। प्रिंसिपल मंदीप कौर के नेतृत्व और रसायन विज्ञान के प्रवक्ता कमल कुमार के मार्गदर्शन ने भी इस सफर को नई दिशा दी। शिक्षकों के सहयोग और टिया के समर्पण ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया। अंतरराष्ट्रीय ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लेंगी टिया अब अगस्त महीने में दिल्ली के पास आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय ट्रेनिंग कैंप में टिया हिस्सा लेंगी। इस विशेष प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सैटेलाइट की डिजाइनिंग, असेंबली और टेस्टिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की बारीकियां सिखाई जाएंगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद दुनिया भर के चयनित छात्रों द्वारा तैयार किए गए सैटेलाइट को चंद्रमा की कक्षा में भेजने की योजना है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक और वैज्ञानिक उपलब्धि होगी।