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लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश, असम सरकार और केंद्र पर बरसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

असम  असम सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सभा करने की अनुमति नहीं दी गयी. उन्हें असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा में सभा करना था. पीएम के कार्यक्रम की वजह से उनके हैलीकॉप्टर को उड़ने की इजाजत नहीं दी गयी. इसके ठीक एक दिन पहले कल्पना सोरेन को तीन जगहों पर सभा करने की अनुमति नहीं दी गयी. असम में जब सभा करने नहीं दिया गया तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मोबाइल फोन से ही जनता को संबोधित किया. सीएम ने सोशल मीडिया किया पोस्ट सीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि असम की वीर और क्रांतिकारी धरती पर लोकतंत्र की आवाज को दबाने की फिर कोशिशें की गयी. कल कल्पना जी को सभा करने से रोका गया, आज मुझे असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा के अपने भाई-बहनों से मिलने नहीं दिया गया.क्या सच में विरोधियों को लगता है कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर ऐसे षड्यंत्र से वे तीर-धनुष की ताकत को रोक पाएंगे? असम में आदिवासी समाज को रोकने की कोशिश: हेमंत सोरेन सीएम ने कहा कि इतने वर्षों तक तो चाय बागान के मेरे लाखों शोषित, वंचित आदिवासी समाज के भाइयों बहनों को रोकने की नाकाम कोशिश की है, और कितना रोक पाओगे?इतिहास गवाह है, जब-जब आवाज दबाई गई है, वह और बुलंद होकर उभरी है. आगामी नौ अप्रैल के दिन मेरे ये लाखों भाई-बहन अपने संघर्ष का हिसाब लेकर रहेंगे. विरोधियों को चुनाव प्रचार करने से रोकते हैं: हेमंत सीएम ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि असम की क्रांतिकारी धरती ने कभी झुकना नहीं सीखा है.प्रधानमंत्री जी का कार्यक्रम बताकर आज मुझे प्रचार के लिए जाने नहीं दिया गया. हमलोगों को जहां है वहीं पर रहने का आदेश दिया गया. पीएम अपने कुर्सी व राजनीतिक ताकत के बदौलत चुनाव के अंतिम चरण में विरोधियों को प्रचार-प्रसार करने से इसी तरह रोकते हैं. ये लोग ऐन-केन प्रकारेण चुनाव जीतने का प्रयास करते हैं. कभी वोट चोरी कर जीतते हैं. झामुमो पहली बार यहां चुनाव लड़ रहा है. जय भारत पार्टी के साथ हैं. लोकतंत्र की आड़ बंद किया जायेगा: सीएम क्या लोकतंत्र अब कार्यक्रमों की आड़ में बंद किया जायेगा? और यह सब कैसे हो रहा है? संवैधानिक संस्थाओं का खुलेआम दुरुपयोग कर, एजेंसियों को हथियार बनाकर. हमारे पुरखों ने हमें झुकना नहीं, संघर्ष करना सिखाया है. हम लड़ते आए हैं और हर लड़ाई जीतकर ही आगे बढ़े हैं. अब यह समाज चुप नहीं रहेगा सीएम ने कहा कि असम का शोषित, वंचित, आदिवासी, दलित और पिछड़ा समाज अब जाग चुका है. चाय बागान में रहने वाले लोग भी अब आगे बढ़कर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं. अब यह समाज चुप नहीं रहेगा, अपने अधिकार लेकर ही रहेगा.इसलिए साथियों, हमें एकजुट होना है. हमारी एकजुटता ही विरोधियों के लिए सबसे बड़ा जवाब है, और यही एकजुटता पहले ही इनके डर का कारण बन चुकी है. 250 रुपये में जहर भी नहीं मिलता सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि चाय बगान को मजदूरों को एक दिन की मजदूरी 250 रुपये मिलती है. इतनी राशि में तो जहर भी नहीं मिलता.राज्य सरकार ने चाय बगान के मजदूरों को न जीने के लिए छोड़ा है और न ही मरने के लिए छोड़ा है. नौ अप्रैल को अत्याचार का बदला वोट से देगी जनता सीएम ने कहा कि याद रखिये, जितना हमें रोकोगे, हम उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेंगे क्योंकि हमारे तीर-धनुष की ताकत सिर्फ प्रतीक नहीं, यह हमारे आत्मसम्मान और संघर्ष की पहचान है.आगामी नौ अप्रैल को हमारा यह संघर्षी समाज अपने ऊपर वर्षों से हुए शोषण और अत्याचार का बदला वोट की ताकत के साथ लेकर रहेगा.

पर्यावरण और सतत विकास पर महा-संवाद, झारखंड समेत चार राज्यों की चुनौतियों पर होगा मंथन

 रांची पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्था ‘सीड’ (CEED) आगामी 8 और 9 अप्रैल को रांची में ‘एकम डायलॉग्स संवाद से निर्माण’ नामक एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रही है. सोमवार को राजधानी में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान संस्था के सीईओ रमापति कुमार ने बताया कि इस गरिमामयी कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्र सरकार के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ करेंगे. इस आयोजन की विशिष्टता यह है कि इसमें देश के 11 पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए व्यक्तित्व भी अपने अनुभवों को साझा करेंगे. कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 27 ‘चेंज मेकर्स’ को ‘एकम संवाद’ सम्मान से विभूषित किया जाएगा, जिन्होंने जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव की इबारत लिखी है. 11 सत्रों में होगा मंथन: खेती से लेकर क्लाइमेट फाइनांस तक दो दिनों तक चलने वाले इस महा-संवाद में कुल 11 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे. सीड के सीईओ ने स्पष्ट किया कि चर्चा का दायरा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें इको रिस्टोरेशन (पारिस्थितिकी बहाली), ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती के सफल प्रयोगों पर गहन विमर्श होगा. इसके अतिरिक्त, स्वच्छ उद्योगों की स्थापना, वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन, क्लाइमेट फाइनांस और नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन (Policy Implementation) जैसे जटिल विषयों पर भी शोधकर्ता और नीति-निर्माता एक साझा मंच पर विचार-विमर्श करेंगे. सामुदायिक ज्ञान और नवाचार का संगम आयोजन के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए रमापति कुमार ने कहा कि ‘एकम डायलॉग्स’ महज एक औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि एक समावेशी मंच है. यहाँ नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों, शोधकर्ताओं और सिविल सोसाइटी के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है. इसका प्राथमिक लक्ष्य सामुदायिक पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक नवाचारों के बीच की खाई को पाटकर क्षेत्रीय विकास के व्यावहारिक समाधान खोजना है. यह पहल पूर्वी भारत के राज्यों के साझा सांस्कृतिक और पारिस्थितिक ताने-बाने को आधार बनाकर जलवायु-अनुकूल भविष्य के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी. चार राज्यों की साझा चुनौतियों पर नजर झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और ओडिशा जैसे राज्य जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं. सीड की डायरेक्टर (पॉलिसी) सृष्टि पल्लव ने बताया कि ‘एकम डायलॉग्स’ इन राज्यों की साझा भौगोलिक और पर्यावरणीय चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. सम्मेलन के निष्कर्षों को एक ‘श्वेत पत्र’ (White Paper) के रूप में संकलित किया जाएगा, जिसे भविष्य की नीतियों के निर्माण के लिए संबंधित सरकारों के साथ साझा किया जा सकता है. रांची में होने जा रहा यह आयोजन निश्चित रूप से पर्यावरण और सतत विकास के क्षेत्र में एक नई चेतना जागृत करेगा.

घर-घर पूछे जाएंगे विशेष सवाल, शादीशुदा सदस्यों की संख्या और मुखिया की जाति शामिल

आरा. भोजपुर जिले में होने वाली जनगणना 2027 कि तैयारी तेजी से पूरी की जा रही है। इस दौरान राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग कई प्रकार के निर्देश जारी किया है। 17 अप्रैल से स्वगणना शुरू होगी। इसमें क्या-क्या सवाल रहेंगे और इसके बाद होने वाले मकान सूचीकरण में क्या-क्या जानकारी लेनी है, इसकी गाइडलाइन जारी की गई है। इस बार जनगणना के दौरान परिवार की बागडोर स्त्री या पुरुष के हाथों में है, इसकी पड़ताल की जाएगी। परिवार के भोजन में मुख्य अनाज क्या है, यह भी जनगणना में दर्ज किया जाएगा। मकान सूचीकरण से पहले स्वगणना होनी है। स्वगणना 17 अप्रैल से एक मई तक होनी है। मकान सूचीकरण का काम दो मई से 31 मई तक चलेगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने निर्देश दिया है कि घर के फर्श, छत की सामग्री, घर का उपयोग, इन सबका ब्योरा स्वगणना के दौरान लिया जाएगा। इसके अलावा घर में कितने लोग रहते हैं, एक घर में कितने विवाहित परिवार रहते हैं, इसकी भी जानकारी जुटाई जाएगी। परिवार के मुखिया स्त्री हैं या पुरुष, इसे भी रिकॉर्ड किया जाएगा। परिवार के मुखिया की जाति को भी दर्ज करना है। वहीं, बुनियादी जरूरतों से जुड़ी 10 बिन्दुओं का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसमें पेयजल का स्रोत, पेयजल की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय की सुलभता, किस प्रकार का शौचालय है, गंदे पानी के निकासी की क्या व्यवस्था है, स्नानगृह की उपलब्धता क्या है, रसोई घर की उपलब्धता (एलपीजी है या पीएनजी), खाना पकाने का मुख्य साधन क्या है और परिवार के खाने का मुख्य अनाज क्या है, इन सबकी पड़ताल की जाएगी। ऑनलाइन माध्यम से होगी स्वगणना स्वगणना में लोगों को खुद ही जनगणना फॉर्म को ऑनलाइन या डिजिटल माध्यम से भरना है। इसमें डिजिटल पोर्टल पर अपनी और परिवार की जानकारी जैसे नाम, उम्र, लिंग, शिक्षा और निवास स्थान दर्ज करना है। खुद जानकारी भरने में गलती कम होगी। मकान सूचीकरण के दौरान स्वगणना की सत्यता की जांच भी फील्ड अधिकारी करेंगे। फील्ड प्रगणक एवं पर्यवेक्षकों की ट्रेनिंग 13 अप्रैल से शुरू होनी है। आठ घरेलू उपकरणों की भी जुटाई जाएगी जानकारी जनगणना के दौरान आठ घरेलू उपकरणों में से किसके पास क्या है, यह भी पता किया जाएगा। इसमें रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट सुविधा, लैपटाप-कंप्यूटर, टेलीफोन-मोबाइल-स्मार्ट फोन, साइकिल-स्कूटर-मोटरसाइकिल-मोपेड में क्या है, कार-जीप-वैन में क्या है, इसकी जानकारी भी जुई जाएगी। मोबाइल नंबर भी इसमें दर्ज किया जाएगा। स्वगणना 17 अप्रैल से शुरू होगी – जिले में तेरह अप्रैल से सभी प्रगणक एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। इसके लिए नया शिड्यूल्ड डीएम के द्वारा जारी किया गया है। स्वगणना इस महीने की 17 अप्रैल से शुरू होगी। सभी तैयारी डीएम के मार्गदर्शन में चल रहा है। – मदन नारायण सिंह, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी

पलामू के 148 छात्रों का चयन, नवाचार के क्षेत्र में जिले ने फिर रचा नया इतिहास

 पलामू झारखंड के पलामू जिले ने एक बार फिर शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुए इंस्पायर अवार्ड मानक योजना 2025-26 में झारखंड में लगातार छठवीं बार पहला स्थान हासिल किया है. इस उपलब्धि ने न सिर्फ जिले का गौरव बढ़ाया है, बल्कि राज्य स्तर पर भी एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. जिले के छात्रों की इस सफलता ने शिक्षा जगत में उत्साह का माहौल बना दिया है. 148 प्रतिभागियों का चयन, राज्य में सबसे अधिक भागीदारी इस सत्र में पलामू जिले से कुल 148 प्रतिभागियों का चयन किया गया है. पूरे झारखंड से चयनित 1160 प्रतिभागियों में से 12.76 प्रतिशत छात्र-छात्राएं केवल पलामू जिले से हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि जिले के छात्र विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहे हैं. शिक्षकों और छात्रों की मेहनत का परिणाम जिला शिक्षा पदाधिकारी सौरव प्रकाश ने इस सफलता का श्रेय छात्रों की मेहनत और शिक्षकों के समर्पण को दिया है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि जिले के मेधावी छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के निरंतर प्रयासों का नतीजा है. साथ ही उन्होंने सहायक जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. राजीव कुमार सिंह के कुशल नेतृत्व की भी सराहना की, जिनकी भूमिका इस सफलता में अहम रही है. मध्य विद्यालय से ही दिख रहा बेहतर प्रदर्शन जिला शिक्षा अधीक्षक संदीप कुमार ने बताया कि पलामू के छात्र केवल उच्च विद्यालय स्तर पर ही नहीं, बल्कि मध्य विद्यालय स्तर से ही बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. यह दर्शाता है कि जिले में प्रारंभिक स्तर से ही बच्चों को विज्ञान और नवाचार के प्रति प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उनका आत्मविश्वास और क्षमता दोनों बढ़ रहे हैं. इंस्पायर मानक योजना क्या है? सहायक जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि इंस्पायर अवार्ड मानक योजना भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत संचालित होती है. इसे नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन द्वारा लागू किया जाता है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर तकनीकी नवाचार और पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देना है. इस योजना के तहत छात्र-छात्राएं अपने विचारों और प्रोजेक्ट्स को विद्यालय स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक प्रस्तुत करते हैं. चयनित छात्रों को मिलती है आर्थिक सहायता इस योजना के अंतर्गत वर्ग 6 से 12 तक के चयनित प्रतिभागियों को जिला स्तर पर प्रोटोटाइप निर्माण के लिए 10,000 रुपये की राशि दी जाती है. इसके अलावा आगे की तैयारी के लिए आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है. इसका उद्देश्य छात्रों को अपने नवाचार को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का मौका इंस्पायर अवार्ड के तहत चयनित छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिलता है. अंतिम रूप से चयनित प्रतिभागियों को जापान तक जाने का मौका भी मिलता है, जहां वे अपने नवाचार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत कर सकते हैं. यह छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर साबित होता है. नवाचार के क्षेत्र में पलामू बना रोल मॉडल लगातार छठवीं बार प्रथम स्थान हासिल कर पलामू जिले ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलें, तो ग्रामीण क्षेत्र के छात्र भी बड़े स्तर पर सफलता हासिल कर सकते हैं. यह उपलब्धि अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है और झारखंड को शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है.

मॉडल स्कूलों के छात्रों को नई ड्रेस, शिक्षकों के लिए जारी होंगे पहचान पत्र

भागलपुर. राज्य भर के मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए अब अलग ड्रेस लागू की जाएगी। जिले के 16 मॉडल स्कूलों समेत पूरे बिहार के 534 मॉडल विद्यालयों के लिए यह ड्रेस बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा डिजाइन की जाएगी। इस संबंध में दो अप्रैल को हुई बैठक में माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने राज्य परियोजना निदेशक को आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मॉडल विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के लिए अलग पहचान पत्र बनाया जाएगा, जिससे विशिष्ट पहचान सुनिश्चित हो सके। यह सुझाव अररिया के जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार द्वारा दिया गया था, जिसे स्वीकार करते हुए इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी बिहार शिक्षा परियोजना परिषद को सौंपी गई है। मॉडल स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा 10 अप्रैल को पुनः प्रवेश परीक्षा आयोजित करने का भी आदेश दिया गया है। इसके अलावा जिन विद्यालयों में कम लागत में मरम्मत या आधारभूत संरचना सुधार की आवश्यकता है, वहां बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड के माध्यम से कार्य कराने का निर्देश दिया गया है। इसको लेकर मिली जानकारी के मुताबिक जिले के आधा दर्जन से अधिक विद्यालयों में इस तरह के कार्य की जरूरत बताई गई है। वहीं, शौचालय निर्माण को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि कक्षाओं के सामने निर्माण न कर एकांत स्थान, विशेषकर बालिका शौचालय सुरक्षित जगह पर बनाया जाए। जिला शिक्षा पदाधिकारी को सभी मॉडल स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट क्षेत्रीय शिक्षा निदेशक को सौंपने और उसकी सत्यता की पुष्टि करने का निर्देश दिया गया है। मॉडल स्कूलों के संचालन के लिए प्रबंधन इकाई गठित जिले के 16 सहित राज्य के 534 मॉडल स्कूलों के सुचारू संचालन के लिए विभागीय स्तर पर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट का गठन किया गया है। यह इकाई प्रत्येक बुधवार को बैठक कर सभी विद्यालयों की प्रगति की समीक्षा करेगी। समीक्षा के दौरान किसी प्रकार की समस्या आने पर उसके समाधान के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक को सूचित किया जाएगा, ताकि समय पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

पीटीपीएस जमीन अधिग्रहण को लेकर झारखंड में तनाव, ग्रामीण तैयार नहीं घर छोड़ने के लिए

पतरातू/रांची. झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड के हेसला पंचायत स्थित पीटीपीएस की अधिग्रहित जमीन पर बने आवासीय परिसर को खाली कराने की तैयारी को लेकर आज  सोमवार को माहौल तनावपूर्ण हो गया. प्रशासनिक कार्रवाई की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर विरोध करने लगे. पीटीपीएस पावर प्लांट बंद होने के बाद यह जमीन सरकार द्वारा झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण को सौंप दी गई है. जियाडा ने इस भूमि को निजी कंपनियों को उद्योग स्थापना के लिए आवंटित कर दिया है, जिसके चलते आवास खाली कराने की प्रक्रिया चल रही है. न्यायालय का दावा बनाम प्रशासन, पटेल चौक पर जुटे लोग कॉलोनी वासियों का कहना है कि कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जबकि प्रशासन को ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है. इसी को लेकर लोग पटेल चौक पर जुटे हैं और साफ कह रहे हैं कि वे किसी भी हालत में घर खाली नहीं करेंगे.  प्रशासन अलर्ट, स्थिति पर नजर क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहा है. समाचार भेजे जाने तक प्रशासन के लोग नहीं पहुंचे हैं.

‘बड़े भाई’ वाले बयान पर विजय सिन्हा ने दी सफाई, कहा- मैं सीएम की रेस में नहीं

पटना. बिहार की राजनीति में इन दिनों नए मुख्यमंत्री को लेकर कयासों का दौर तेज है। सत्ता परिवर्तन की अटकलों के बीच कई वरिष्ठ नेताओं ने यह संकेत दिया है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा से हो सकता है। हालांकि, पार्टी की ओर से अब तक किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। इसी बीच उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने खुद को मुख्यमंत्री पद की दौड़ से अलग बताया है। सेवक की भूमिका में हैं, क‍िसी रेस में नहीं पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह 'सेवक की भूमिका' में हैं, किसी पद की रेस में नहीं। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार पहले भी एनडीए की थी, अब भी है और आगे भी रहेगी। गठबंधन की एकजुटता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें न कोई बड़ा भाई है, न छोटा, सभी बराबरी के भागीदार हैं। उनके अनुसार, यही भावना सामाजिक सद्भाव को मजबूत करेगी और राज्य के विकास को गति देगी। 10 अप्रैल को राज्‍यसभा की शपथ लेंगे नीतीश उधर, मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की तैयारी ने सियासी हलचल और बढ़ा दी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के मुताबिक, नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा की शपथ ले सकते हैं। माना जा रहा है कि इसके बाद वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे राज्य में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ होगा। इधर, उत्तराधिकार को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। निशांत कुमार को राजनीति में सक्रिय करने और उन्हें विधान परिषद के रास्ते आगे बढ़ाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ हलकों में उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी उठ रही है, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति फिलहाल संभावनाओं और अटकलों के दौर से गुजर रही है, जहां आने वाले कुछ दिन बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

बिहार की ‘स्वीट सिटी’ पहुंची पंजाब के किसानों की टोली, नाबार्ड के सहयोग से लीची की उन्नत खेती का प्रशिक्षण शुरू

मुजफ्फरपुर बिहार का मुजफ्फरपुर, जिसे ‘स्वीट सिटी’ के नाम से जाना जाता है, अब सिर्फ अपनी मशहूर शाही लीची के लिए ही नहीं बल्कि किसानों के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी पहचान बना रहा है. खेती के क्षेत्र में अग्रणी राज्य पंजाब से 22 किसानों का एक दल इन दिनों मुजफ्फरपुर पहुंचा है. ये किसान यहां की प्रसिद्ध 'शाही लीची' की उन्नत खेती तकनीक सीख रहे हैं, ताकि अपने राज्य में उत्पादन बढ़ाकर बेहतर मुनाफा कमा सकें. पठानकोट से आए ये किसान राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिकों से विशेष प्रशिक्षण ले रहे हैं. प्रशिक्षण के दौरान उन्हें लीची की उन्नत किस्मों, पौध प्रबंधन, रोग नियंत्रण, सिंचाई तकनीक और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी दी जा रही है. खास बात यह है कि किसानों को हाई डेंसिटी प्लांटेशन मॉडल सिखाया जा रहा है. इस तकनीक में 10×15 फीट की दूरी पर पौधे लगाए जाते हैं, जिससे कम जगह में ज्यादा उत्पादन संभव होता है. साथ ही नियमित छंटाई से पेड़ छोटे रहते हैं और फल अधिक लगते हैं. पंजाब से आए किसान यशपाल सिंह, अजीत सिंह, हड़पाल सिंह और भूपेंद्र सिंह का कहना है कि वे पहले भी मुजफ्फरपुर की तकनीक अपनाकर अच्छा मुनाफा कमा चुके हैं. लेकिन इस बार उन्हें और उन्नत तरीके सीखने का मौका मिला है, जिससे उनकी आमदनी और बढ़ सकती है. दिलचस्प बात यह भी है कि पंजाब में मुजफ्फरपुर की लीची को ‘देहरादून लीची’ के नाम से बेचा जाता है, जहां इसकी मांग काफी ज्यादा है. सीमित उत्पादन के कारण किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलती है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े फल वैज्ञानिक डॉ. मनु त्यागी के मुताबिक, मुजफ्फरपुर की लीची की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है और बिहार इस उत्पादन में अग्रणी है. ऐसे में पंजाब जैसे राज्यों में इसकी खेती का विस्तार किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. वहीं पौध संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. विनय पठानिया ने बताया कि किसानों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तरह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अपने क्षेत्र में बेहतर उत्पादन और रोग नियंत्रण कर सकें. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक द्वारा प्रायोजित है. विशेषज्ञों का मानना है कि हाई डेंसिटी प्लांटेशन जैसी तकनीकों ने पारंपरिक खेती को बदल दिया है. पहले जहां 40-50 फीट की दूरी पर पौधे लगाए जाते थे, वहीं अब कम जमीन में ज्यादा उत्पादन संभव हो रहा है. इससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है. कुल मिलाकर, मुजफ्फरपुर की ‘शाही लीची’ अब बिहार तक सीमित नहीं रही, बल्कि देशभर के किसानों के लिए एक नया अवसर बनती जा रही है.  

बिहार की राजनीति में नए युग की शुरुआत, 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य पद की शपथ लेंगे नीतीश कुमार

 पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को कैबिनेट बैठक बुलाई है. इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक उनके कार्यकाल की आखिरी कैबिनेट बैठक भी हो सकती है. यह बैठक मुख्य सचिवालय में होगी. इसमें सभी मंत्री और उपमुख्यमंत्री शामिल रहेंगे. इसमें कुछ महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लग सकती है. नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं. इसके बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा भी दे दिया है. जानकारी के अनुसार, 10 अप्रैल को वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे. इसके बाद वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मिल सकते हैं. सत्ता परिवर्तन की आहट राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि बिहार में जल्द ही सत्ता परिवर्तन हो सकता है. बताया जा रहा है कि एनडीए के अंदर नई रणनीति बन रही है और मुख्यमंत्री पद किसी नए चेहरे को दिया जा सकता है. भाजपा के सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय, दिलीप जायसवाल और विजय कुमार सिन्हा के नाम इस दौड़ में सामने आ रहे हैं. अभी तक किसी भी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है. कब मिलेगा बिहार को नया सीएम? सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 13 अप्रैल के आसपास मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और इसके बाद 14 अप्रैल को एनडीए की बैठक में नए नेता का चयन हो सकता है. यह भी कहा जा रहा है कि 16 अप्रैल के बाद बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है. इन सभी बातों पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि बिहार में बड़ा बदलाव होने वाला है.

सफर का नया अंदाज: अमृत भारत ट्रेनों ने उड़ान जैसी सुविधाओं से किया यात्रियों को मंत्रमुग्ध

चक्रधरपुर  भारतीय रेलवे अपने यात्रियों के सफर को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। शनिवार को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली स्टेशन पर 'नेक्स्ट जेनरेशन अमृत भारत कोच' के प्रस्तावित इंटीरियर डिजाइन और कलर स्कीम वाले सैंपल कोच का गहन निरीक्षण किया।  चक्रधरपुर रेल मंडल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन कोचों को विशेष रूप से यात्रियों की सुविधा और विजुअल अपील (सुंदरता) को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।  आधुनिक डिजाइन और समन्वित कलर थीम नए अमृत भारत कोच की सबसे बड़ी विशेषता इसका समन्वित (Coordinated) कलर थीम है। कोच के भीतर पीवीसी फ्लोरिंग से लेकर सीटों, बर्थ के रेक्सीन, स्नैक टेबल, पर्दे और यहां तक कि शौचालय क्षेत्र को भी एक ही कलर स्कीम में ढाला गया है। यह नया डिजाइन न केवल देखने में वैश्विक स्तर का लगता है, बल्कि यह बेहद टिकाऊ और रखरखाव में भी आसान है। सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान (HL-3 फायर सेफ्टी)  यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कोच निर्माण में इस्तेमाल की गई सभी सामग्री HL-3 फायर सेफ्टी स्टैंडर्ड के अनुरूप है। इससे आग लगने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा न्यूनतम हो जाएगा।  इसके अलावा, सीटों और बर्थों पर उच्च गुणवत्ता वाले रेक्सीन का उपयोग किया गया है, जो लंबे समय तक खराब नहीं होंगे और यात्रियों को बेहतर कुशनिंग का अनुभव देंगे। चक्रधरपुर रेल मंडल ने स्पष्ट किया कि रोलिंग स्टॉक को आधुनिक बनाने की यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी ताकि भारतीय रेल वैश्विक मानचित्र पर अपनी नई पहचान बना सके।  हर वर्ग के यात्री का रखा गया ख्याल रेलवे का यह बदलाव किसी खास श्रेणी के लिए नहीं, बल्कि जनरल और स्लीपर क्लास सहित सभी वर्गों के लिए है। स्नैक टेबल को आकर्षक रंग दिए गए हैं और शौचालयों के डिजाइन में भी व्यापक सुधार किया गया है ताकि स्वच्छता बनी रहे। कोच की दीवारों और सामग्री को इस तरह तैयार किया गया है कि साफ-सफाई आसानी से की जा सके, जिससे कोच लंबे समय तक नए जैसे बने रहेंगे। वर्ल्ड क्लास यात्रा अनुभव का लक्ष्य निरीक्षण के दौरान रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे का मुख्य उद्देश्य हर श्रेणी के यात्रियों को 'वर्ल्ड क्लास' यात्रा अनुभव देना है। नेक्स्ट जेनरेशन अमृत भारत कोच इसी विजन का हिस्सा हैं। आने वाले समय में देश के विभिन्न रेल मार्गों पर इन आधुनिक कोचों को लगाने की योजना है, जिससे आम आदमी का रेल सफर सस्ता, सुरक्षित और अधिक सुखद बन सके।