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उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने भूमि सर्वे पर ‘लास्ट चांस’ का प्लान किया लॉक

पटना. बिहार में जमीन से जुड़े विवादों और उलझनों को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ शब्दों में एलान किया है कि राज्य में चल रहा विशेष भूमि सर्वेक्षण किसी भी हाल में वर्ष 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा. इस लक्ष्य में अब कोई ढिलाई, बहाना या लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. 2011 में रखी गई नींव, अब दिखेगा जमीन पर असर विजय कुमार सिन्हा ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2011 में बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण की नींव रखी थी. उद्देश्य स्पष्ट था—भूमि अभिलेखों को दुरुस्त करना, मालिकाना हक को साफ करना और दशकों से चले आ रहे जमीन विवादों का समाधान निकालना. अब सरकार चाहती है कि यह लंबित काम तय समय सीमा में अपने अंजाम तक पहुंचे. उपमुख्यमंत्री ने आम नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी. यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी, त्रुटि या मनमानी सामने आती है तो लोग विभाग में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं. ऐसी शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लिया जाएगा और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी. उनका कहना साफ था—सर्वे सुधार का माध्यम बने, विवाद का नहीं. पहले चरण में लगभग पूरा, दूसरे चरण में रिकॉर्ड स्वघोषणाएं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों में किस्तवार का काम 99.92 प्रतिशत और खानापुरी 94.4 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है. करीब 31 प्रतिशत गांवों में अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं. वहीं दूसरे चरण में 36 जिलों के 444 अंचलों में हवाई सर्वेक्षण और ग्राम सभा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और रैयतों से 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं. जमीन से जुड़ी अनिश्चितता खत्म करने की कोशिश भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के अनुसार शुरुआती दौर में तकनीकी मार्गदर्शिका में देरी से काम प्रभावित हुआ, लेकिन अब प्रक्रिया रफ्तार पकड़ चुकी है. सरकार का दावा है कि सर्वे पूरा होते ही जमीन से जुड़े मुकदमे, धोखाधड़ी और भ्रम की बड़ी समस्या का समाधान संभव हो सकेगा.

बिहार विधानसभा में चर्चा के केंद्र में NEET मामला और बजट

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र का आज तीसरा दिन है और सदन का माहौल गरम रहने के आसार हैं। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के साथ ही नीतीश सरकार द्वारा पेश बजट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे। वहीं NEET छात्रा की मौत के मामले में विपक्ष सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है, जिससे सदन में हंगामे की संभावना जताई जा रही है। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नोत्तर काल से शुरू होगी। इस दौरान विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों का संबंधित मंत्री जवाब देंगे। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत विधायक श्याम रजक ने उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े सवाल उठाए हैं, जिन पर विभागीय प्रभारी मंत्री को जवाब देना होगा। इसके अलावा जल संसाधन विभाग से जुड़े मुद्दों पर विधायक राणा रंधीर, अनिल सिंह समेत पांच विधायकों ने सरकार का ध्यान खींचा है। NEET छात्रा मौत पर विपक्ष का आक्रामक रुख NEET परीक्षा से जुड़ी छात्रा की मौत का मामला आज सदन में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में खामियों के कारण छात्र मानसिक दबाव में हैं। सरकार से इस मामले पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्ष हंगामा कर सकता है। बजट पर होगी तीखी बहस बजट सत्र के दूसरे दिन नीतीश सरकार ने 2026-27 के लिए 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। यह पिछले बजट से करीब 30,694 करोड़ रुपये अधिक है। सरकार ने बजट को विकासोन्मुख बताते हुए पांच नए एक्सप्रेस-वे, सिंगल लेन सड़कों को डबल लेन करने और पटना मेट्रो के विस्तार जैसी घोषणाएं की हैं। शिक्षा और किसानों पर खास फोकस इस बजट में शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग को सबसे अधिक 68,216.95 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं किसानों के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की गई है। इसके तहत केंद्र की पीएम किसान सम्मान निधि के साथ मिलाकर अब किसानों को सालाना 3,000 रुपये मिलेंगे। इससे 75 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने का दावा किया गया है। कल्याण, स्वास्थ्य और उद्योग की बड़ी योजनाएं स्वास्थ्य विभाग के लिए 21,270 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। PMCH में पहले चरण में 1100 बेड तैयार हो चुके हैं और 10 नए जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा हुई है। इसके साथ ही बंद चीनी मिलों को चालू करने, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर पार्क और मेगा टेक सिटी जैसे औद्योगिक प्रोजेक्ट्स का भी ऐलान किया गया है। सदन में सियासी तल्खी भी दिखी बजट पर चर्चा के दौरान सियासी तल्खी भी सामने आई। बीजेपी विधायक भगवान कुशवाहा ने राजद विधायकों पर तीखा हमला बोलते हुए पुराने दौर के नरसंहार और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया। इस बयान से सदन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया। आज के सत्र पर सबकी नजर राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा, बजट की समीक्षा और NEET मामले पर संभावित हंगामे के चलते आज का सत्र काफी अहम माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार विपक्ष के सवालों का कैसे जवाब देती है और सदन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।

देवघर की शिव बरात में साइबर ठगी के खिलाफ ‘हैकर दैत्य’ झांकी करेगी जागरूक

देवघर. महाशिवरात्रि 15 फरवरी को है। इस माैके पर देवघर में शाम में निकलने वाली शिव बरात में समाज से भटक गयी पीढ़ी को संदेश देने वाली झांकी आपको अपनी ओर खींच लेगी। साइबर अपराध में देवघर पहचान बना रहा है। द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक बाबा बैद्यनाथ की नगरी में महाशिवरात्रि के दिन 32 साल से अदभुत शिव बारात निकलता है। बारात में हर साल आकर्षक झांकी निकलती है। वह किसी ना किसी थीम पर आधारित होती है। साल 2026 के शिव बरात का मुख्य आकर्षण में एक समाज को जागरूक करता हैकर दैत्य होगा। कलाकार ने साइबर क्राइम करने वाले को दानव के तुल्य माना है। जिसकी झांकी तैयार हो रही है। हैकर दैत्य को लैपटाप पर क्राइम करते दर्शाया जाएगा। कलाकार लक्ष्मण राउत बताते हैं कि युवा पीढ़ी में आए भटकाव को रोकने के लिए यह जागरूक करती झांकी होगी। साइबर क्राइम करने वाले समाज में दैत्य की तरह हैं जो किसी की खून-पसीने की कमाई को चट कर जाते हैं। आज बदलते जमाने में साइबर ठगी की घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो गयी है। एक से एक तकनीक का इजात कर वह भोले भाले लोगों को मिनटों में ठग लेते हैं। उनकी जीवन भर की गाढ़ी कमाई को उनके बैंक एकाउंट से उड़ा देते हैं। इधर सरकारी रिपोर्ट को देखें तो साइबर ठगी में देवघर तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है। नेशनल क्राइम इंडेक्स की मानें तो साइबर ठगी के मामले में देवघर देश में पांचवें स्थान पर पहुंच चुका है। सुलगता मुंड के माथा से आग और मुंह से निकलेगा धुंआ शिव बरात में निकलने वाली झांकी व साज-सज्जा के अध्यक्ष मार्कण्डेय जजवाड़े बताते हैं कि बरात की हर एक झांकी समाज को संदेश देने वाली होगी। सबसे भयावह और डरावना सुलगता मुंड होगा। जो 12 फीट लंबा और पांच फीट चौड़ा होगा। सुलगता मुंड चारों ओर घूमता रहेगा। जिसके माथा और कान से आग निकलेगा। जबकि वह मुंह खोलेगा तो धुंआ निकलेगा। एक झांकी में यह दिखाया जाएगा कि पिंजरा में एक झूला लगा है और उस पर कंकाल झूल रहा है। यह उन युवाओं को सचेत करेगा जो नशा का सेवन कर रहे हैं। एक समय ऐसा आएगा कि वह इसी तरह एक पिंजरे में बंद होकर बैठे रहेंगे। अंतरिक्ष में शिव की पूजा का एक दृश्य होगा। यह बाबा मंदिर में स्थापित शिवलिंग को केंद्रित कर होगी।  पहली बार महाकाल का विकराल आकार शिव बरात में पहली बार महाकाल का विकराल आकार दिखेगा। यह लाइव होगा। जिसकी तैयारी चल रही है। शिव बारात को 1999 से आकार देने वाले और झांकी को नयी दिशा देने वाले ख्याति प्राप्त कलाकार मार्कण्डेय जजवाड़े बताते हैं कि नारी शक्ति को केंद्रत करती एक झांकी होगी। भारत ने अभी विश्व कप जीता है। समिति के अध्यक्ष अभिषेक आनंद के सुझाव पर नारी शक्ति को खेल में आगे बढ़ाने वाली झांकी होगी। झांकी में नरभक्षिणी को गुड्डा राउत आकार दे रहे हैं। जिसमें नरभक्षिणी बारात में खड़े लोगों पर झपट्टा मारती दिखेगी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट में रखे जाएंगे एक दर्जन प्रस्ताव

रांची. हजारीबाग जिले के बड़कागांव एवं केरेडारी प्रखंड तथा रामगढ़ जिले के पतरातू क्षेत्र में खनन परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों की समस्याओं को लेकर झारखंड कांग्रेस द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच समिति की गतिविधियों में आंशिक बदलाव किया गया है। एकाएक राज्य कैबिनेट की बैठक आहूत होने के कारण पांच फरवरी को प्रस्तावित कांग्रेस जांच दल का बड़कागांव–केरेडारी दौरा फिलहाल टाल दिया गया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि यह दौरा दो-तीन दिनों के भीतर नई तिथि तय कर किया जाएगा। गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में इससे जुड़ा मुद्दा उठेगा। बुधवार को रांची में झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू और जांच समिति के संयोजक सह मंत्री राधाकृष्ण किशोर की उपस्थिति में एक अहम उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव एवं पूर्व विधायक अंबा प्रसाद भी मौजूद रहे। बैठक में बड़कागांव, केरेडारी और पतरातू क्षेत्र में खनन कंपनियों द्वारा विस्थापितों के कथित शोषण और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर गंभीरता से चर्चा की गई। कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने विस्थापन से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं की विस्तृत समीक्षा की और निर्देश दिया कि गठित जांच समिति कांग्रेस मुख्यालय, रांची में गुरुवार को आंतरिक बैठक करे। इस बैठक में विस्थापितों से जुड़े मुद्दों, कानूनी पहलुओं और समाधान के संभावित रास्तों पर चर्चा करते हुए राज्य कैबिनेट में प्रस्ताव रखने की रणनीति तय की जाएगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बृहस्पतिवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र की विस्थापन संबंधी समस्याओं को औपचारिक रूप से रखा जाएगा। कांग्रेस का उद्देश्य है कि मुख्यमंत्री के स्तर पर भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन, विस्थापन आयोग की भूमिका, स्थानीय मजदूरों को एचपीसी नियमों के तहत भुगतान, पतरातू विद्युत निगम लिमिटेड और पतरातू छाई डैम से जुड़े मुद्दों का समग्र समाधान निकाला जा सके। जांच समिति ने जानकारी दी कि कैबिनेट बैठक से संबंधित पत्र मिलने के बाद दौरा स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा। हालांकि मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भरोसा दिलाया कि कैबिनेट में मुद्दे रखने के तुरंत बाद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया जाएगा। इसके पश्चात विस्थापितों की समस्याओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कांग्रेस प्रभारी के. राजू के माध्यम से सरकार को सौंपी जाएगी और त्रिपक्षीय वार्ता के जरिए ठोस निर्णय सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जाएगा।

2027 तक पूरा होगा काम: उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने भूमि सर्वे के लिए ‘लास्ट चांस’ योजना को किया लॉक

पटना  बिहार में जमीन से जुड़े विवादों और उलझनों को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ शब्दों में एलान किया है कि राज्य में चल रहा विशेष भूमि सर्वेक्षण किसी भी हाल में वर्ष 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा. इस लक्ष्य में अब कोई ढिलाई, बहाना या लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. 2011 में रखी गई नींव, अब दिखेगा जमीन पर असर विजय कुमार सिन्हा ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2011 में बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण की नींव रखी थी. उद्देश्य स्पष्ट था—भूमि अभिलेखों को दुरुस्त करना, मालिकाना हक को साफ करना और दशकों से चले आ रहे जमीन विवादों का समाधान निकालना. अब सरकार चाहती है कि यह लंबित काम तय समय सीमा में अपने अंजाम तक पहुंचे. उपमुख्यमंत्री ने आम नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी. यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी, त्रुटि या मनमानी सामने आती है तो लोग विभाग में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं. ऐसी शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लिया जाएगा और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी. उनका कहना साफ था—सर्वे सुधार का माध्यम बने, विवाद का नहीं. पहले चरण में लगभग पूरा, दूसरे चरण में रिकॉर्ड स्वघोषणाएं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों में किस्तवार का काम 99.92 प्रतिशत और खानापुरी 94.4 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है. करीब 31 प्रतिशत गांवों में अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं. वहीं दूसरे चरण में 36 जिलों के 444 अंचलों में हवाई सर्वेक्षण और ग्राम सभा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और रैयतों से 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं. जमीन से जुड़ी अनिश्चितता खत्म करने की कोशिश भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के अनुसार शुरुआती दौर में तकनीकी मार्गदर्शिका में देरी से काम प्रभावित हुआ, लेकिन अब प्रक्रिया रफ्तार पकड़ चुकी है. सरकार का दावा है कि सर्वे पूरा होते ही जमीन से जुड़े मुकदमे, धोखाधड़ी और भ्रम की बड़ी समस्या का समाधान संभव हो सकेगा.

बिहार में अश्लील गानों पर होगी FIR, सम्राट चौधरी ने दिया सख्त निर्देश

पटना  बिहार में अश्लील गाना बजाने पर अब कार्रवाई होगी. अगर कोई इसे हल्के में लिया तो ऐक्शन तय है. सार्वजनिक जगहों पर दोहरे अर्थ वाले अश्लील गाना बजाने पर एफआईआर की चेतावनी दी गई है. यह आदेश बिहार के डिप्टी सीएम सह गृह विभाग के मंत्री सम्राट चौधरी ने दिया है. उन्होंने इस संबंध में पुलिस को सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है.  आदेश का पालन नहीं किया तो जाना पड़ेगा जेल डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने चेतावनी दी है कि बस, ट्रक, ऑटो रिक्शा या सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील और दोहरे अर्थ वाले भोजपुरी, मगही, मैथिली या अन्य भाषाओं के गाने बजाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. ऐसे में अब साफ हो गया है कि इस आदेश का पालन नहीं करने वालों को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. समाज और बच्चों पर पड़ता है बुरा प्रभाव इस विषय पर सम्राट चौधरी का कहना है कि सार्वजनिक तौर पर बजने वाले अश्लील गानों से समाज व बच्चों को बुरा प्रभाव पड़ता है. इन अश्लील गाने से न केवल महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में फूहड़ता को भी बढ़ावा मिलता है. उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों पर इन गानों का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे उनके मानसिकता पर गलत असर पड़ रहा है. इसके अलावा महिला के सुरक्षा के लिए भी अश्लील गानों पर लोग लगाना अनिवार्य हो गया है. सभी जिलों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश सम्राट चौधरी ने अश्लील गानों पर रोक लगाने के लिए सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है. साथ ही उन्होंने इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ  पुलिस को सख्त कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया है. बता दें कि बिहार में खास कर भोजपुरी भाषा में दो अर्थ वाले गाने सुनने को मिल जाते हैं. लिखने वाले चोली-भौजी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर गाना लिख देते हैं और पटना में कुकुरमुत्ते की तरह खुले स्टूडियो में इसकी रिकॉर्डिंग हो जाती है. ऐसे में अगर लोग इस तरह के गानों को सुनना बंद कर दें तो इस पर रोक लग सकती है. अब देखना होगा कि नए आदेश का बिहार में कितना असर होता है.

बिहार में मजदूरी को लेकर हुआ विवाद, 200 ब्राह्मणों पर SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज

दरभंगा  दरभंगा जिले के हरिनगर गांव में मजदूरी भुगतान के विवाद ने बड़ा रूप ले लिया है. इसी विवाद के बाद गांव के ब्राह्मण समुदाय के 200 से अधिक लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है जिसमें नामजद अभियुक्त बनाए गए हैं. मामले में अब तक 12 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है और गांव में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. गांव के ही एक दलित परिवार ने आरोप लगाया कि घर के निर्माण कार्य के लिए की गई मजदूरी की लगभग ₹2.5 लाख की राशि का भुगतान नहीं किया गया. इसको लेकर गांव में 30 जनवरी को पंचायत भी हुई थी लेकिन मामला नहीं सुलझा. इसी बात को लेकर 31 जनवरी दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक और फिर मारपीट की घटना सामने आई. गौरतलब है, 30 जनवरी को ही ब्राह्मणों के तरफ से पुलिस में शिकायत भी की गई थी लेकिन आरोप है कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. SC ST समुदाय के लोगों ने शिकायत में जातीय गालियों और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है. जो गांव में नहीं रहते उन पर भी FIR  पीड़ित पक्ष ने अपनी शिकायत में 70 लोगों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज कराए, जबकि 140 से अधिक “अज्ञात” का उल्लेख किया. इस आधार पर पुलिस ने गांव के बड़े हिस्से खासकर ब्राह्मण समुदाय को FIR में शामिल कर लिया. चौंकाने वाली बात यह है कि कई ऐसे नाम भी FIR में हैं जो वर्षों से गांव में रहते ही नहीं हैं, जिसके बाद मामला और विवादित हो गया है. अब तक 12 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की तनावपूर्ण स्थिति न बने. पुलिस का कहना है कि मामला संवेदनशील है और 'साक्ष्य के आधार पर ही आगे गिरफ्तारी होगी.' ग्रामीणों की प्रतिक्रिया गांव के लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक आर्थिक विवाद था, लेकिन इसे जातीय रंग देकर पूरे समुदाय पर मुकदमा कर दिया गया. कई लोगों ने FIR में शामिल किए गए नामों पर आपत्ति जताई है और आरोप लगाया है कि “बिना जांच के सामूहिक रूप से नाम जोड़ दिए गए.”  पुलिस अधिकारियों के अनुसार, “मामला गंभीर है. SC/ST एक्ट के तहत दर्ज शिकायत की जांच की जा रही है. किसी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन कानून के अनुसार कार्रवाई होगी.”दरभंगा पुलिस लगातार दोनों पक्षों से बयान ले रही है और घटना से जुड़े वीडियो व अन्य सबूतों की भी जांच कर रही है. प्रशासन स्थिति शांत बनाए रखने के लिए गांव में राउंड लगाता रहा.  

धनबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बोर्ड परीक्षा शुरू

धनबाद. झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र धनबाद में बुधवार 4 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो गई हैं. परीक्षा को शांतिपूर्ण और नकलमुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क नजर आया. धनबाद के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी तरह का व्यवधान परीक्षा प्रक्रिया में न आए. परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेध धारा लागू बोर्ड परीक्षा को लेकर सभी परीक्षा केंद्रों के चारों ओर 100 मीटर की परिधि में निषेध धारा लागू कर दी गई है. इस दौरान अनावश्यक भीड़, फोटो स्टेट मशीन, मोबाइल फोन और किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है. पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ मजिस्ट्रेट भी केंद्रों पर मौजूद रहे, ताकि नियमों का कड़ाई से पालन हो सके. शहीद शक्ति नाथ महतो इंटर कॉलेज में विशेष व्यवस्था धनबाद के शहीद शक्ति नाथ महतो इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर अलग ही दृश्य देखने को मिला. यहां परीक्षा देने पहुंचे छात्र-छात्राओं का गुलदस्ता देकर स्वागत किया गया. कॉलेज प्रबंधन की इस पहल से परीक्षार्थियों का मनोबल बढ़ा और वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा हॉल में प्रवेश करते नजर आए. सघन जांच के बाद ही मिला प्रवेश परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले छात्र-छात्राओं की बारी-बारी से सघन जांच की गई. इस दौरान बैग, घड़ी, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और चिट-पुर्जा की गहन तलाशी ली गई. जांच के बाद ही परीक्षार्थियों को स्कूल कैंपस में प्रवेश की अनुमति दी गई. महिला परीक्षार्थियों की जांच के लिए महिला कर्मियों की भी तैनाती की गई थी. सैकड़ों छात्र-छात्राएं परीक्षा में हुए शामिल बोर्ड परीक्षा के पहले दिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं विभिन्न केंद्रों पर परीक्षा में शामिल हुए. प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के समन्वय से परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने की पूरी कोशिश की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा अवधि के दौरान सुरक्षा और निगरानी इसी तरह सख्त बनी रहेगी.

जमशेदपुर के नामी स्कूल में 7वीं के बच्चे ने साथी को मारा बका

जमशेदपुर. सिदगोड़ा थाना क्षेत्र स्थित रामकृष्ण मिशन स्कूल में मंगलवार को सातवीं कक्षा के दो छात्रों के बीच हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गया। झगड़े के दौरान एक छात्र ने दूसरे छात्र पर चापड़ से हमला कर दिया, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में एक छात्र घायल हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल के शिक्षक और कर्मचारियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर दोनों छात्रों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद सिदगोड़ा थाना की पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों छात्रों को अपने साथ थाना ले गई, जहां उनसे पूछताछ की गई। हमला करने वाले छात्र ने चापड़ को अपने मोजे में छिपाकर रखा था। किसी बात को लेकर दोनों छात्रों के बीच विवाद हो गया था। पुलिस ने घटनास्थल से चापड़ बरामद कर लिया है। घायल छात्र को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत स्थिर बताई गई। इलाज के बाद छात्र को पुनः स्कूल लाया गया। पुलिस ने दोनों छात्रों के अभिभावकों को थाना बुलाया। आपसी बातचीत के बाद और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अभिभावकों ने आपसी सहमति से मामले में सुलह कर ली। हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने इस घटना को अनुशासनहीनता का गंभीर मामला मानते हुए दोनों छात्रों को नोटिस जारी किया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्र के पास चापड़ कैसे पहुंचा और विवाद की असली वजह क्या थी। गौरतलब है कि शहर में हाल के दिनों में चापड़बाजी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे पहले कदमा थाना क्षेत्र और बिष्टुपुर स्थित मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल में भी छात्रों के आपसी विवाद के दौरान इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। चापड़ क्या है और क्यों खतरनाक? चापड़ (या चापड़बाजी) एक छोटा, छिपाने में आसान तेज धार वाला हथियार है, जो अक्सर स्कूलों में छात्रों के बीच झगड़ों में इस्तेमाल होता है। यह चाकू से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है क्योंकि इसे आसानी से छिपाया जा सकता है और एक झटके में गहरी चोट पहुंचा सकता है। शहर में हाल के महीनों में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जो जुवेनाइल हिंसा और स्कूल सेफ्टी की बड़ी समस्या दर्शाती हैं। जमशेदपुर में गलत ट्रेंड यह पहली घटना नहीं है। हाल ही में कदमा थाना क्षेत्र और बिष्टुपुर के मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल में भी छात्रों के विवाद में चापड़/चाकू जैसी घटनाएं सामने आई हैं। इससे साफ है कि शहर के कुछ स्कूलों में छोटे-छोटे विवाद हिंसक रूप ले रहे हैं, जिसके पीछे एंगर मैनेजमेंट की कमी, पीयर प्रेशर, सोशल मीडिया प्रभाव या घरेलू माहौल जैसी वजहें हो सकती हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झामुमो के 54वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल

धनबाद. झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) आज बुधवार को अपना 54वां स्थापना दिवस मना रहा है। 4 फरवरी, 1973 को धनबाद में झामुमो की स्थापना हुई थी। इस खास माैके पर धनबाद के रणधीर वर्मा स्टेडियम (गोल्फ ग्राउंड) में आयोजित समारोह में भाग लेने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष व राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन धनबाद पहुंचे हैं। रांची से धनबाद पहुंचने पर मुख्यमंत्री का धनबाद हवाईपट्टी पर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री के साथ मंत्री हफीजुल हसन भी धनबाद पहुंचे थे। झारखंड मुक्ति मोर्चा का स्थापना दिवस समारोह इस बार भव्य तरीके से मनाया जाएगा। धनबाद स्थित गोल्फ मैदान में विशाल और आकर्षक पंडाल तैयार किया जा रहा है, जहां करीब 5 हजार से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। समारोह की तैयारियों को लेकर बीते मंगलवार को गोल्फ मैदान में झामुमो जिला कमेटी की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक का नेतृत्व सचेतक सह टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने किया। बैठक में पार्टी समर्थित प्रत्याशी चंद्रशेखर अग्रवाल, जिलाध्यक्ष लखी सोरेन, जिला सचिव मन्नू आलम समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।