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Bhagalpur ROB Update: तकनीकी स्वीकृति मिली, अगले साल शुरू होगा सुगम सफर

भागलपुर. भागलपुर शहर सहित बाइपास को जोड़ने वाले भागलपुर-गोराडीह मार्ग में बौंसी रेल पुल संख्या-टू पर बन रहे रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के लिए रेलवे ने बेयरिंग फोर्स कैलकुलेशन को मंजूरी दे दी है। पूर्व रेलवे के मुख्य ब्रिज इंजीनियर (CBE) ने मंजूरी दी है। इस स्वीकृति के साथ इस परियोजना के तकनीकी पहलू को हरी झंडी मिल गई है। बेयरिंग फोर्स कैलकुलेशन में पुल पर पड़ने वाले भार और दबाव का आकलन किया जाता है। अभियंता (Engineer) यह सुनिश्चित करते हैं कि संरचना ट्रेन के दबाव को सुरक्षित रूप से सह सके। अधिकारियों के अनुसार, रेलवे ब्रिज में लगे बेयरिंग का काम पुल पर पड़ने वाले भार को सुरक्षित तरीके से नीचे तक पहुंचाना होता है। इसके लिए अभियंता यह गणना करते हैं कि ट्रेन गुजरने के दौरान कितना दबाव पड़ेगा और क्या संरचना उसे सुरक्षित रूप से संभाल सकती है। इस कैलकुलेशन के सही पाये जाने के बाद ही निर्माण कार्य को अंतिम रूप दिया जाता है। 2027 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य इधर, रेलवे की मंजूरी से परियोजना की सुरक्षा और मानकों की पुष्टि भी हो गई है। यह स्वीकृति परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी चरण माना जा रहा है। रेलवे की मंजूरी मिलने से अब ROB निर्माण कार्य को गति मिलेगी। पांचवें पिलर को खड़े करने का काम चल रहा है। पिलर के कैब की ढलाई की गई है। अब तक 30 प्रतिशत फाउंडेशन का कार्य पूरा कर लिया गया है। यह कार्य शत प्रतिशत पूरा होने के बाद सब स्ट्रक्चर व सुपर स्ट्रक्चर का कार्य कराया जाएगा। 2027 तक आरओबी का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है। शहर की कनेक्टिविटी में होगा सुधार मिरजानहाट शीतला स्थान से भीखनपुर गुमटी नंबर तीन के बीच बन रहे भोलानाथ फ्लाइओवर से यह आरओबी जुड़ेगा। कचहरी चौक से भोलानाथ आरओबी होते हुए बाइपास तक सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी। जिससे लोगों को बिना किसी परेशानी के कचहरी चौक से बाइपास रोड तक पहुंचना आसान होगा। इसके साथ ही आवागमन अधिक सुगम हो जाएगा और मुख्य शहर से दक्षिणी इलाके की कनेक्टिविटी भी बेहतर हो जाएगी।

डाकबंगला में रामनवमी का भव्य आयोजन, नीतीश कुमार की मौजूदगी में एक मंच पर दिखे पिता-पुत्र

पटना आज देशभर में रामनवमी का पावन पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पटना में भी विभिन्न पूजा समितियों की तरफ से भव्य शोभायात्राओं का आयोजन किया गया है। ये सभी झांकियां धीरे-धीरे पटना के डाकबंगला चौराहा स्थित श्रीराम चौक पर पहुंच रही हैं। समारोह के लिए डाकबंगला चौराहे पर एक विशाल मंच तैयार किया गया है, जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उनके पुत्र निशांत कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय चौधरी और संजय सरावगी समेत एनडीए के कई दिग्गज नेता उपस्थित हैं। जय श्री राम के नारे से गूंजा क्षेत्र भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंच पर मौजूद सभी नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नितिन नवीन द्वारा वहां पहुंच रही झांकियों को सम्मानित किया जा रहा है। नीतीश कुमार के मंच पर चढ़तेही जय श्री राम के नारे लगने लगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद नितिन नवीन पहली बार इस भव्य कार्यक्रम का हिस्सा बनकर झांकियों का स्वागत कर रहे हैं। मौसम ने ली करवट इस साल रामनवमी पर पटना की 52 पूजा समितियां अपनी मनमोहक झांकियां निकाल रही हैं। सुबह के वक्त तेज धूप से लोग बेहाल थे, लेकिन शोभायात्रा शुरू होने से ठीक पहले मौसम ने अचानक करवट ली। हल्की बूंदाबांदी और तेज हवाओं ने मौसम को बेहद सुहाना बना दिया, जिससे लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिली। मौसम मेहरबान होने की वजह से श्रीराम चौक पर भक्तों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा है। लगातार आ रहे श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यहां करीब 5 लाख से ज्यादा लोगों के जुटने की उम्मीद है। इस बार का आयोजन कई मायनों में बेहद खास है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रामानंद सागर की 'रामायण' में भगवान राम का अमर किरदार निभाने वाले मशहूर अभिनेता अरुण गोविल हैं, जो मंच पर मौजूद हैं। उनके साथ-साथ दिग्गज भोजपुरी गायक और भाजपा नेता मनोज तिवारी भी इस समारोह में मौजूद हैं। इतनी बड़ी भीड़ को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के लिए प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए हैं और चप्पे-चप्पे पर करीब 1500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।  

चुनावी रण में CM हेमंत की कमान, असम में रहकर साधेंगे वोटरों को

रांची झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष हेमंत सोरेन असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सीधे चुनावी अभियान की कमान संभालेंगे। वे 28 मार्च से असम में रहकर पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं करेंगे। पार्टी का लक्ष्य स्थानीय मुद्दों, आदिवासी अस्मिता और क्षेत्रीय अधिकारों को प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाना है। झामुमो ने अपने सभी स्टार प्रचारकों को निर्देश दिया है कि वे 27 मार्च तक असम पहुंच जाएं और चुनावी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं। पार्टी की असम में सक्रियता केवल चुनावी उपस्थिति तक सीमित नहीं है। झामुमो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करना चाहती है और खासकर पूर्वोत्तर के आदिवासी बहुल इलाकों में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। झारखंड मॉडल, जिसमें स्थानीय संसाधनों पर अधिकार, भूमि संरक्षण और सामाजिक न्याय शामिल हैं, असम में भी प्रचारित किया जाएगा। पार्टी अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहना चाहती पार्टी महासचिव विनोद पांडेय पहले से ही असम में रहकर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे रहे हैं। उनका काम स्थानीय संगठन को सक्रिय करना, बूथ स्तर तक नेटवर्क तैयार करना और उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाना है। झामुमो ने भारत निर्वाचन आयोग को 20 स्टार प्रचारकों की सूची भी सौंप दी है। इस सूची में हेमंत सोरेन के अलावा डॉ. सरफराज अहमद, सुप्रियो भट्टाचार्य, जोबा मांझी, अभिषेक प्रसाद, पंकज मिश्रा, दीपक बिरुवा, विजय हांसदा और अन्य नेता शामिल हैं। असम में झामुमो की यह सक्रियता संकेत देती है कि पार्टी अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहना चाहती। हेमंत सोरेन का सीधा नेतृत्व इस अभियान को और मजबूत बनाता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि झामुमो का यह प्रयास चुनावी नतीजों पर कितना असर डालता है और पार्टी के लिए नए राजनीतिक अवसर खोलता है या नहीं।  

सूत्रों का दावा: CM नीतीश कुमार 30 तारीख को विधान परिषद से इस्तीफा दे सकते हैं

पटना  बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होने की अटकलें तेज हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं. बताया जा रहा है कि 29 मार्च तक विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही अवकाश पर है, जिसके बाद 30 मार्च सोमवार को वे अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।  बिहार में कौन होगा अगला मुख्यमंत्री ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार नालंदा के बिहारशरीफ स्थित सर्किट हाउस पहुंचे और मीडिया से बातचीत में कहा कि 9 अप्रैल तक का समय है, उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी. उन्होंने यह भी कहा कि नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला एनडीए की बैठक में लिया जाएगा और नीतीश कुमार की इच्छा के अनुसार ही अगला मुख्यमंत्री चुना जाएगा. हालांकि अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर केवल अटकलें ही लगाई जा रही हैं।  नियम क्या कहते हैं? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद राज्यसभा जा रहे हैं. सवाल यह है कि वह राज्यसभा में कब शपथ लेंगे. राज्यसभा का मौजूदा सत्र 2 अप्रैल तक चलेगा. उम्मीद है कि वह इसी दौरान शपथ ले सकते हैं. ऐसे में उनका दिल्ली जाना भी तय माना जा रहा है. संविधान के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति राज्यसभा का सदस्य बनता है, तो उसे 14 दिनों के अंदर अपनी राज्य की सदस्यता छोड़नी होती है. इस हिसाब से माना जा रहा है कि नीतीश कुमार को 30 मार्च तक विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा।  कब सामने आएगा अगले मुख्यमंत्री का नाम नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं. 14 दिनों के अंदर इस्तीफा नहीं देने पर नियमानुसार राज्य सभा की सदस्यता खुद खत्म हो जाती है. नए सीएम की बात की जाए तो, माना जा रहा है कि खड़मास खत्म होने के बाद, यानी 14 अप्रैल के बाद ही नई सरकार को लेकर फैसला हो सकता है. फिलहाल मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. हालांकि, पिछले कुछ समय से नीतीश कुमार इशारों में सम्राट चौधरी का नाम आगे बढ़ाते नजर आए हैं। 

मौसम का कहर! अगले दो दिन भारी, तेज बारिश और तूफान की चेतावनी

पटना  बिहार में मौसम ने करवट बदल ली है और अगले 48 घंटे राज्य के लिए भारी पड़ सकते हैं। भीषण गर्मी के बीच बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और पश्चिमी विक्षोभ के मिलन ने राज्य में 'प्री-मानसून' हलचल तेज कर दी है। मौसम विभाग ने आज राज्य के सभी 38 जिलों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है, जिसमें वज्रपात (आकाशीय बिजली) और तेज आंधी की विशेष चेतावनी दी गई है। प्रमुख जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, राज्य को दो श्रेणियों में बांटा गया है: ऑरेंज अलर्ट (12 जिले): पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, वैशाली और समस्तीपुर जिले में 60 किमी/घंटा की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चलने और भारी बारिश की संभावना है। प्रशासन ने इन क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। येलो अलर्ट (26 जिले): नालंदा, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, गया, नवादा, जहानाबाद, अरवल, लखीसराय, शेखपुरा, बेगूसराय, खगड़िया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया, भागलपुर, बांका, मुंगेर और जमुई में यहां हल्की से मध्यम बारिश के साथ मेघगर्जन और बिजली गिरने की आशंका है। क्यों बदला मौसम का मिजाज? मौसम वैज्ञानिकों ने इस अचानक बदलाव के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं: नमी और ऊष्मा का टकराव: बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी वाली हवाएं और दिन के बढ़ते तापमान के कारण वायुमंडल में अस्थिरता पैदा हुई है। पश्चिमी विक्षोभ : उत्तर-पश्चिम भारत से आ रहे विक्षोभ का असर बिहार के आसमान पर साफ दिख रहा है। दबाव क्षेत्र: हवा की दिशा में लगातार बदलाव और स्थानीय स्तर पर कम दबाव का क्षेत्र बनने से ओलावृष्टि (Hailstorm) की स्थिति बन रही है। राजधानी पटना का हाल पटना में आज दोपहर बाद मौसम के बिगड़ने के आसार हैं। अगले दो दिनों तक आसमान में बादलों का डेरा रहेगा और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 28 मार्च तक रुक-रुक कर बारिश होने से तापमान में गिरावट आएगी, जिससे स्थानीय लोगों को तपती गर्मी से अस्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।

गोमो रेलवे स्टेशन पर ट्रेन मैनेजर की मौत, ड्यूटी के बीच गिरे; ओवरटाइम जांच के घेरे में

गोमो  झारखंड के नेताजी सुभाष चंद्र बोस गोमो रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान एक ट्रेन मैनेजर की अचानक मौत से रेलवे विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। गोमो रेलवे स्टेशन पर 42 वर्षीय ट्रेन मैनेजर (गार्ड) दीपक कुमार पासवान की ड्यूटी के दौरान अचानक मौत हो गई। दर्दनाक दृश्य को देखकर भावुक हुए लोग घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही रेलकर्मी मौके पर पहुंचे और डॉक्टर को बुलाया गया, लेकिन जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। रेल थाना पुलिस और आरपीएफ के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर थाना लाया गया। दीपक पासवान बिहार के गया जिले के रहने वाले थे। घटना की खबर मिलते ही उनकी पत्नी प्रीति देवी अपने परिजनों के साथ सुबह गोमो पहुंचीं। थाना में शव देखते ही परिवार के लोग रोने लगे। पत्नी अपने पति के शव से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थीं। इस दर्दनाक दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। दीपक पासवान करीब 15 साल से रेलवे में काम कर रहे थे। गार्ड एसोसिएशन और लोको रनिंग स्टाफ के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए धनबाद भेज दिया है। मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा जानकारी के मुताबिक, दीपक पासवान की ड्यूटी देर रात 2:15 बजे लगी थी। उन्हें गोमो से मालगाड़ी लेकर गया जाना था। लेकिन ट्रेन पर चढ़ने से पहले ही वे प्लेटफॉर्म नंबर 4 के पास गिरे हुए मिले। ट्रेन चालक ने उनसे कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब वह पास पहुंचा, तो दीपक पासवान मृत पाए गए। प्राथमिक जांच में उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है। रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि लगातार ओवरटाइम ड्यूटी की वजह से रनिंग स्टाफ में दिल की बीमारी का खतरा बढ़ रहा है। हाल ही में एक अन्य ट्रेन मैनेजर की भी ड्यूटी के दौरान मौत हो चुकी है। सहकर्मियों ने दीपक पासवान को श्रद्धांजलि दी और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।  

रांची के तपोवन मंदिर पहुंचे सीएम हेमन्त सोरेन, पत्नी के साथ की विशेष पूजा-अर्चना

रांची झारखंड के हेमन्त सोरेन ने रामनवमी के पावन अवसर पर रांची के प्रसिद्ध तपोवन मंदिर में पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपनी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन के साथ रामनवमी के मौके पर रांची के श्री राम जानकी तपोवन मंदिर, निवारणपुर में विधि-विधान से पूजा की। भगवान श्रीराम सभी की मनोकामनाएं पूरी करें मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के चरणों में नमन करते हुए राज्य की उन्नति, सुख-शांति और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को रामनवमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम सभी की मनोकामनाएं पूरी करें। उन्होंने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी उन्हें तपोवन मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला है। मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और विभिन्न अखाड़ों की शोभायात्रा भी यहां आ रही है। तपोवन मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है मुख्यमंत्री हेमन्त ने लोगों से अपील की कि वे इस पर्व को श्रद्धा, उत्साह और खुशी के साथ मनाएं और भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं। साथ ही सामाजिक सद्भाव और भाईचारे के साथ इस पर्व को खास बनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि तपोवन मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है और इसकी अलग पहचान है। सरकार मंदिर के सौंदर्यीकरण का काम तेजी से कर रही है, ताकि इसे और भव्य बनाया जा सके। उन्होंने भगवान श्रीराम से प्रार्थना की कि यह कार्य जल्द पूरा हो।  

क्या नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने वाले हैं? ताबड़तोड़ परियोजनाओं के उद्घाटन के बीच खरमास का इंतजार

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य चुने जा चुके हैं, लेकिन सीएम पद की कुर्सी नहीं छोड़ी है. दो दशकों से सत्ता की बागडोर संभाल रहे नीतीश ने  केंद्र की राजनीति में लौटने का फैसला किया है और राज्यसभा जा रहे हों, लेकिन बिहार में अपनी सियासी पकड़ को कमजोर नहीं होने देना चाहते. ऐसे में नीतीश बिहार के अलग-अलग जिलों की यात्रा कर रहे और ताबड़तोड़ विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे हैं।   नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद पूरी तरह से एक्टिव रहने के चलते सवाल यही है कि मुख्यमत्री पद कब छोड़ेंगे? क्या खरमास के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन होना. बिहार के नए सीएम को लेकर बीजेपी के कई नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन सबके मन में एक ही सवाल है कि नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे? उसके बाद ही मुख्यमंत्री और सरकार गठन की असल तस्वीर साफ हो सकेगी?  नीतीश कुमार 21 साल बाद दिल्ली करेंगे कूच नीतीश कुमार अपने राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं, 21 साल पहले सांसद रहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार ने अपने बेटे निशांत को राजनीतिक पारी शुरू कराने के साथ ही बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के व्यापक दौरे कर विकास परियोजनाओं का लगातार उद्घाटन कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य सीधे जनता से संवाद स्थापित करना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करना है।  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का फैसला किया और सदस्य चुन लिए भी गए हैं. इसके बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने हुए हैं और बिहार के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ेंगे, चर्चा है कि नीतीश एक साथ बिहार की राजनीति नहीं छोड़ेंगे, बल्कि दो किस्तों में इस्तीफा देंगे।   नीतीश अभी मुख्यमंत्री होने के साथ ही बिहार विधान परिषद के सदस्य भी हैं. वे राज्यसभा सदस्य भी चुन लिए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद की कुर्सी नहीं छोड़ा. ऐसे में सवाल यही है कि कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे।  नीतीश कुमार कब देंगे सीएम पद से इस्तीफा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101(2)के तहत प्रावधान है कि कोई व्यक्ति एक ही समय में एक ही सदन का सदस्य रह सकता है. संसद के लोकसभा, राज्यसभा और राज्य के विधानमंडल के विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य एक साथ नहीं सकता है.अगर ऐसा होता है तो उसे एक निश्चित समयसीमा के अंदर एक सदन से त्यागपत्र देना होगा. समयसीमा का निर्धारण राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम से तय होगा।  प्रोहिबिशन ऑफ सिमुल्टेनियस मेंबरशिप रूल्स 1950 में तय की गई है. इस नियम के तहत दो सदनों के सदस्य निर्वाचित होने की स्थिति में व्यक्ति को 14 दिनों के अंदर अपना पद छोड़ना होगा. चुनाव नतीजों के परिणाम के केंद्रीय या राज्य गजट में प्रकाशन की तारीख से से समय तय होता है. निर्वाचन की तारीख और गजट का प्रकाशन का समय अलग-अलग होता है।  नियम कहता है कि कोई भी व्यक्ति गजट नोटिफिकेशन के 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देने के लिए बाध्य होता है, न कि निर्वाचन की तारीख से. राज्यसभा चुनाव के परिणामों का गजट प्रकाशन अब तक नहीं हुआ है, ऐसे में नीतीश कुमार पर विधान परिषद की सदस्यता त्यागने की बाध्यता फिलहाल नहीं है. इसके चलते नीतीश कुमार विधान परिषद सदस्य के साथ-साथ राज्यसभा सदस्य हैं. इसके चलते मुख्यमंत्री भी बने हुए हैं।   नीतीश कुमार ने 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव जीता था. इसीलिए कहा जा रहा है कि नीतीश 30 मार्च तक बिहार विधान परिषद की सदस्यता नहीं छोड़ते हैं, तो संसद के उच्च सदन के सदस्य नहीं बन पाएंगे. इसलिए उनका एमएलसी पद से इस्तीफा की बात कही जा रही थी, लेकिन अभी तक गजट ही जारी नहीं हुआ है तो वो एक साथ दोनों पद पर बने हुए हैं।  खरमास के बाद क्या छोड़ें सीएम की कुर्सी नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद न छोड़ने की पीछे कहीं खरमास वजह तो नहीं है, जिसके चलते वो किसी नए सफर की तरफ अपने कदम नहीं बढ़ा रहे. खरमास का महीना 13 अप्रैल को खत्म हो रहा है. इसके बाद 14 अप्रैल की सुबह से सभी मांगलिक और शुभ कार्य किए जा सकेंगे. बीजेपी नया और शुभ काम खरमास के महीने में नहीं करती है. नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद बीजेपी को फौरन अपने किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाना है, जिसके चलते ही खरमास खत्म होने का इतंजार किया जा रहा है।  बिहार के पांच राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो रहा है, जिनकी सीटों पर 16 मार्च को चुनाव हुए हैं और नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद चुने गए हैं. इसके चलते ही माना जा रहा है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से खरमास खत्म होने के साथ ही इस्तीफा दे देंगे ताकि दूसरे दिन बीजेपी बिहार में सरकार गठन कर लगे।  बिहार में सरकार गठन का क्या होगा फॉर्मूला नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलती है तो पहली बार होगा जब बीजेपी का अपना सीएम होगा. बीजेपी से कई नेताओं के नाम सीएम की रेस में चल रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी नाम पर फाइनल मुहर नहीं लगी है. सम्राट चौधरी से लेकर नित्यानंद राय तक के नाम चर्चा में है. देखना है कि बीजेपी किसे सीएम बनाती है।  बिहार में बीजेपी का सीएम बनता है तो फिर जेडीयू से बिहार में डिप्टी सीएम पद मिलेगा. सियासी गलियारे में ऐसी चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. इसके अलावा पार्टी के किसी सीनियर लीडर को दूसरा उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है. बीजेपी से 15 और जेडीयू से 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। 

Jharkhand Doctor Bharti: राज्य में बड़े पैमाने पर भर्ती, स्वास्थ्य व्यवस्था होगी सशक्त

रांची राज्य के मेडिकल कॉलेजों, सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में शीघ्र ही 942 चिकित्सकों की नियुक्ति होगी। स्वास्थ्य विभाग ने रिक्त पड़े कुल 942 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत कुल 276 पदों पर नियुक्ति के लिए कार्मिक विभाग के माध्यम से अधियाचना झारखंड लोक सेवा आयोग को भेजी गई है। वहीं, शेष 666 पदों के लिए जेपीएससी को अधियाचना भेजने के लिए कार्मिक विभाग से अनुरोध किया गया है। राज्य के मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 180 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी, जिनमें 155 पद नियमित तथा 25 पद बैकलॉग श्रेणी के हैं। ये नियुक्तियां 24 विभिन्न विभागों में की जाएंगी, जिनमें मेडिसिन, सर्जरी, निश्चेतना, स्त्री एवं प्रसव रोग तथा शिशु रोग जैसे महत्वपूर्ण विभाग सम्मिलित हैं। यह नियुक्ति प्रक्रिया झारखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा नियमावली, 2018 (संशोधित 2021) तथा राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के नवीनतम मानकों अनुरूप संपन्न होगी, जिससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके साथ ही राज्य के पांच प्रमुख मेडिकल कालेजों धनबाद, जमशेदपुर, हजारीबाग, पलामू और दुमका में सुपर स्पेशियलिटी विभागों को सशक्त बनाने के लिए 96 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी। इन पदों में न्यूरो सर्जरी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी और आंकोलॉजी जैसे अत्याधुनिक चिकित्सा क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इस पहल से राज्य में जटिल एवं गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें अपने ही राज्य में उन्नत उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी।इसी तरह, स्वास्थ्य सेवाओं के जमीनी स्तर को मजबूत करने के लिए राज्य के विभिन्न जिला एवं अनुमंडल अस्पतालों में 666 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी, जिनमें 506 पद नियमित तथा 160 पद बैकलाग के हैं। इस संबंध में विभाग के द्वारा कार्मिक विभाग को पत्र लिखा गया है कि जेपीएससी को अधियाचना भेजी जाए ताकि नियमित नियुक्ति हो सके। इनमें सर्वाधिक पद फिजिशियन (226) और शिशु रोग विशेषज्ञ (224) के हैं, जबकि निश्चेतक और स्त्री रोग विशेषज्ञ के बड़ी संख्या में पद सम्मिलित हैं। स्वास्थ्य विभाग इसके अतिरिक्त 335 चिकित्सा पदाधिकारियों की भी नियुक्ति की जानी है, जिसके लिए अधियाचना जेपीएससी को भेजने की तैयारी चल रही है।  

भावुक हुआ माहौल: ‘अपने जैसा CM बनाकर जाएं’—जीविका दीदियों की नीतीश से गुहार

नालंदा. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को नालंदा में अपनी स्मृद्धि यात्रा का समापन किया। नालंदा जिले को उन्होंने 810 करोड़ की योजनाओं की सौगात दी। इस दौरान सीएम ने विशाल जनसभा को भी संबोधित किया। जनसभा में भारी तादात में महिलाएं भी दिखीं। कुछ महिलाएं नीतीश कुमार के भाषण के दौरान भावुक भी हो गईं। दीपनगर स्टेडियम में समृद्धि यात्रा के दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला। जीविका दीदियों और स्थानीय महिलाओं की आंखें नम थीं। राज्यसभा और दिल्ली की राजनीति की चर्चाओं के बीच महिलाओं ने कहा कि नीतीश बाबू हमारे गार्जियन हैं, उनके जाने से ऐसा लग रहा है जैसे सिर से साया उठ रहा हो। महिलाओं ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार दिल्ली जाने से पहले अपने जैसा सीएम बनाकर जाएं। हम उनको बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं। उन्होंने बिहार की महिलाओं के लिए बहुत कुछ किया है और रोजगार देने का काम किया। विपक्ष पर बोला हमला बता दें कि सीएम नीतीश कुमार ने जनसभा के दौरान विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2005 से पहले का बिहार किस हाल में था, ये सब जानते हैं। बिहार 2005 के बाद बदला है। नीतीश कुमार ने इस दौरान केंद्र सरकार और पीएम मोदी की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज बिहार को केंद्र से लगातार सहायता मिल रही है। सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी सरकार ने अब तक 50 लाख युवाओं को नौकरी और रोजगार दिया है और अगले 5 वर्षों में 1 करोड़ रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। नीतीश जाएंगे राज्यसभा, कौन बनेगा बिहार का सीएम? बता दें कि आने वाले 5 दिनों में नीतीश कुमार एमएलसी के पद से इस्तीफा दे देंगे। वहीं, 10 अप्रैल तक वह राज्यसभा की शपथ भी ले लेंगे। इसके बाद बिहार में नई सरकार का गठन होगा। नया मुख्यमंत्री बीजेपी के कोटे से हो सकता है। वहीं, सूत्र बता रहे हैं कि जदयू निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाना चाहती है और विधानसभा अध्यक्ष पद भी दावेदारी पेश करेगी।