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धनबाद मेयर चुनाव के लिए भाजपा ने घोषित किया प्रत्याशी

धनबाद. धनबाद नगर निगम में मेयर चुनाव को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए प्रतिष्ठा का विषय बना गया है। वैसे कई भाजपा समर्थक दावेदार हैं। 4 फरवरी की शाम तक दावेदारों का सारा खुलासा हो जाएगा। उसके बाद मान-मनौवल का काम भाजपा की ओर से शुरू किया जाएगा। इससे पहले धनबाद नगर निगम के लिए भाजपा की ओर से संजीव अग्रवाल के नाम की घोषणा हो चुकी है। चिरकुंडा में नेता की पत्नी को समर्थन  चिरकुंडा नगर पंचायत के लिए भी पूर्व नगर पंचयात अध्यक्ष डब्ल्यु बाउरी की पत्नी बर्नाली बाउरी को अपना समर्थित प्रत्याशी घोषित किया है। यहां भी स्थिति धनबाद नगर निगम के दावेदारी की तरह है। आगामी फरवरी 2026 के चुनावों को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर रणनीति और कमान संभालने की तैयारी तेज है। धनबाद में प्रतिष्ठा की जंग धनबाद नगर निगम चुनाव 2026 के लिए भाजपा ने अपनी बिसात बिछा दी है। इसे केवल एक स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि पार्टी के लिए प्रतिष्ठा की जंग माना जा रहा है। झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और प्रमंडलीय प्रभारी इस चुनाव की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। पार्टी ने धनबाद क्षेत्र के लिए विधायक राज सिन्हा, और पूर्व मंत्री अमर बाउरी, बिरंची नारायण जैसे दिग्गजों की एक रायशुमारी समिति बनाई है, ताकि कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चुनाव में काम किया जा सके। नामांकन में शामिल होंगे प्रदेश अध्यक्ष सहित कई दिग्गज धनबाद नगर निगम व चिरकुंडा नगर पंचायत के लिए भाजपा समर्थित प्रत्याशी चार फरवरी को नामांकन का समय तय किया गया है। इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू सहित भाजपा के कई बड़े नेता शामिल होंगे। साथ ही वैसे लोगों के लिए भी प्रतिष्ठा दांव पर है कि वे परिवार वाद के नामांकन में शामिल होते हैं या फिर अपनी दावेदारी वापसी करते है। इसमें सांसद ढुल्लू महतो की पत्नी सावित्री देवी, झरिया विधायक रागनी सिंह की पति व पूर्व विधायक संजीव सिंह को लेकर भी धनबाद की जनता देख रही है। 4 फरवरी को दाखिल करेंगे नामांकन  इधर भाजपा धनबाद महानगर जिला मंत्री सह मीडिया प्रभारी पंकज सिन्हा ने जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय जनता पार्टी धनबाद नगर निगम चुनाव में मेयर पद के भाजपा समर्थित प्रत्याशी संजीव अग्रवाल आगामी 4 फरवरी 2026 (मंगलवार) को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर भाजपा झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद आदित्य साहू भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन देंगे। पंकज सिन्हा की अपील पंकज सिन्हा ने कहा कि धनबाद नगर निगम चुनाव में जनता का व्यापक समर्थन भाजपा समर्थित प्रत्याशी श्री संजीव अग्रवाल जी को मिल रहा है। उनके नेतृत्व में धनबाद में विकास, स्वच्छता, पारदर्शिता एवं जनकल्याण को नई दिशा मिलेगी।

फ्री मेडिकल-इंजीनियरिंग व क्लैट की आकांक्षा परीक्षा की बढ़ी तारीख

रांची. झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी आकांक्षा परीक्षा 2026 पर्याप्त आवेदन नहीं मिलने के कारण इस बार समय पर परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी। अब फिर से आवेदन की तिथि बढ़ायी गई है ताकि परीक्षार्थी आवेदन कर सकें और पर्याप्त संख्या में आवेदन मिलने के बाद परीक्षा का आयोजन हो सके। झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) ने स्पष्ट किया है कि अपेक्षित संख्या में अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र प्राप्त नहीं हुए, जिसके कारण अब परीक्षा आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 फरवरी कर दी गई है। आकांक्षा योजना राज्य सरकार की वह पहल है, जिसके तहत मेधावी विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें मेडिकल, इंजीनियरिंग व क्लैट की तैयारी के लिए निश्शुल्क कोचिंग दी जाती है। ऐसे में आवेदन की कम संख्या ने योजना के क्रियान्वयन पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, शिक्षकों का कहना है कि यदि योग्य विद्यार्थियों तक सूचना समय पर और प्रभावी तरीके से पहुंचती, तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। परिषद ने पूर्व में जारी विज्ञापन के संदर्भ में जिलावार आनलाइन रिपोर्ट की समीक्षा की थी। इसी समीक्षा में सामने आया कि कई जिलों से आवेदन अपेक्षा से काफी कम आए हैं। अब परिषद ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को लक्ष्य के अनुरूप आवेदन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। नोटिस के अनुसार परीक्षा आवेदन पत्र आनलाइन भरने की तिथि विस्तारित की गई है। जिसके बाद जिन परीक्षार्थियों ने आवेदन किया है वे अब संकोच में दिख रहे हैं। कुल 175 सीट हैं निर्धारित झारखंड में आकांक्षा योजना के तहत इंजीनियरिंग (जेईई), मेडिकल (नीट) और क्लैट की निश्शुल्क कोचिंग के लिए कुल 175 सीटें निर्धारित हैं। इसमें 75 इंजीनियरिंग के लिए, 50 मेडिकल के लिए और 50 सीटें क्लैट (कानून) के लिए उपलब्ध हैं। यह परीक्षा झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा कक्षा 10वीं पास मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित की जाती है। इग्नू सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों में नामांकन की तिथि 15 तक बढ़ी संवाद सहयोगी, रामगढ़। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में जनवरी सत्र 2026 में ओडीएल (ओपन डिस्टेंस लर्निंग) और मास्टर, स्नातक डिग्री एवं विभिन्न सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों में नामांकन की तिथि 15 फरवरी तक बढ़ा दी गई है । साथ ही जनवरी 2026 के पुनः रजिस्ट्रेशन की तिथि भी 15 फरवरी तक बढ़ा दी गई है। जो भी इच्छुक अभ्यर्थी इग्नू में नामांकन या पुनः नामांकन कराना चाहते हैं वे वेबसाइट पे जा कर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ज्ञात हो रामगढ़ महाविद्यालय अध्ययन केंद्र इग्नू मास्टर, बैचलर एवं सर्टिफिकेट कोर्स संचालित हैं, जो अभ्यर्थी इस संबंध में कोई भी जानकारी प्राप्त करना चाहते हों वो सेंटर पर आकर इस संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसकी जानकारी इग्नू स्टडी सेंटर समन्वयक डॉ. बक्शी ओम प्रकाश सिन्हा ने दी।

बिहार बोर्ड इंटर परीक्षा में पहले दिन कई जगह हंगामा

पटना. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षा सोमवार से प्रारंभ हो गई। यह परीक्षा 13 फरवरी तक चलेगी। राजधानी के परीक्षा केंद्रों पर सुबह 7.30 बजे से ही विद्यार्थी आने लगे थे। सुबह आठ बजे तक गेट पर विद्यार्थियों की काफी भीड़ जुट गई। विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्रों में सुबह 8.30 से 8.59 बजे तक प्रवेश दिया गया। ठीक सुबह नौ बजते ही केंद्रों का गेट बंद कर दिया गया। उसके बाद भी विद्यार्थियों के आने का सिलसिला जारी रहा। हालांकि, काफी प्रयास करने के बाद भी विद्यार्थियों को नौ बजे के बाद केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया। राजधानी में स्थित बांकीपुर बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय केंद्र पर तीन छात्राएं नौ बजे के बाद केंद्र पर पहुंचीं, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं मिला। कुछ देर बाद दो छात्राएं गेट फांदकर अंदर प्रवेश कर गई। इसी तरह रघुनाथ बालिका उच्च माध्यमिक, कंकड़बाग में 10, कमला नेहरू बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में 10, राजेंद्र बालक उच्च माध्यमिक विद्यालय में चार, पटना कोलजिएट में तीन और बीएन कालेजिएट स्कूल में चार छात्र विलंब से आने के कारण परीक्षा देने से वंचित हो गए। परीक्षा से वंचित छात्राओं का रो-रोकर बुरा हाल बांकीपुर बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय परीक्षा केंद्र पर उत्क्रमित सेकेंडरी स्कूल कुकरी, फुलवारीशरीफ की एक और कमला नेहरू बालिका उच्च माध्यमिक माध्यमिक विद्यालय, यारपुर, गर्दनीबाग की दो छात्राएं पांच मिनट विलंब से परीक्षा देने पहुंची। उनके आते-आते परीक्षा केंद्र का गेट बंद हो चुका था। केंद्र के अंदर प्रवेश नहीं मिलने पर तीनों छात्राएं रोने लगीं। छात्राओं को रोते देख अभिभावकों ने हंगामा किया, लेकिन उनकी एक नहीं चली, तब तक सुबह 9.30 परीक्षा प्रारंभ हो चुकी थी। परीक्षा केंद्र के अंदर लाउडस्पीकर से घोषणा की गई कि परीक्षा प्रारंभ हो चुकी है, अभिभावक गेट से हट जाएं। तैनात पुलिस कर्मियों ने हंगामा कर रहे अभिभावकों को वहां से हटाया। दो बार परीक्षार्थियों की हुई जांच, 15 मिनट दिया अतिरिक्त समय परीक्षार्थियों को जांच के बाद ही परीक्षा केंद्रों में जाने की इजाजत दी गई। गेट पर ही मजिस्ट्रेट की देखरेख में चिट-पुर्जे व मोबाइल की तलाशी ली गई। जिन छात्रों के पास चिट-पुर्जे मिले, उन्हें अगली बार ऐसी गलती नहीं करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया। इंटर परीक्षा में पहले दिन 26 विद्यार्थी किए गए निष्कासित इंटरमीडिएट परीक्षा पहले दिन पूरे राज्य से कदाचार के आरोप में 26 विद्यार्थियों को परीक्षा से निष्कासित किया गया। वहीं, शेखपुरा जिले से एक छात्र को दूसरे के बदले परीक्षा देते हुए पकड़ा गया। बिहार बोर्ड के अनुसार गया से एक, जहानाबाद से तीन, नवादा से 13, गोपालगंज से तीन, मधेपुरा से दो, भागलपुर से दो, अररिया और कटिहार से एक-एक विद्यार्थी को कदाचार के आरोप में परीक्षा से निष्कासित किया गया है। हेलमेट से डीईओ की गाड़ी का शीशा तोड़ा इंटरमीडिएट परीक्षा का निरीक्षण करने पहुंचे जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) साकेत रंजन को अभिभावकों के गुस्सा का शिकार होना पड़ा। डीईओ कमला नेहरु बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, यारपुर गर्दनीबाग केंद्र परीक्षा का निरीक्षण करने पहुंचे। इस बीच जिनकी बच्चों की परीक्षा छूटी उनके अभिभवकों ने उनके गाड़ी की पीछे वाले हिस्से पर हेलमेट से हमला कर दिया। इस वजह से गाड़ी के पीछे का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया। अभिभावकों का आरोप था कि प्रवेश पत्र पर परीक्षा केंद्र का गलता पता अंकित होने के कारण केंद्र खोजने में विलंब हो गया और परीक्षा छूट गई। इसके बाद दर्जनों अभिभावकों ने डीईओ की गाड़ी घेर लिया।  डीईओ ने आश्वासन दिया कि जिनकी परीक्षा छूटी उनको फिर से मौका दिया जाएगा। अभिभावकों ने डीईओ की बातों को मानने से इन्कार दिया। कोई बड़ी घटना घटती इससे पहले डीईओ यहां चले गए।

नीट छात्रा की मौत पर विपक्ष ने विधानसभा में सरकार को घेरा

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन नीट छात्रा की मौत के मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विधानसभा पोर्टिको में राजद, कांग्रेस और वाम दलों के सदस्यों ने पोस्टर लहराते हुए नारेबाजी की और सरकार से इस गंभीर मामले पर चुप्पी तोड़ने की मांग की। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि नीट छात्रा की मौत ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 25 विधायकों ने एकजुट होकर सरकार पर अपराध नियंत्रण में विफल रहने का आरोप लगाया। जांच में लापरवाही का आरोप प्रदर्शन कर रहे नेताओं का कहना था कि सरकार मामले को शुरू से हल्के में लेती रही और जांच प्रक्रिया में लगातार लापरवाही बरती गई। नीट छात्रा की मौत के बाद सरकार ने पहले विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था, लेकिन बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी गई। आरोपियों को बचाने का आरोप  हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि जांच एजेंसियों के गठन के बावजूद अब तक सच्चाई सामने नहीं आई है और दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित की जाए तथा जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

जेल से एंबुलेंस से विधानसभा पहुंचे अनंत सिंह ने ली शपथ

पटना. बाहुबली नेता अनंत सिंह ने मंगलवार को बिहार विधानसभा में विधायक पद की शपथ ली। स्वास्थ्य कारणों से उन्हें बेऊर जेल से एंबुलेंस के जरिए विधानसभा लाया गया। शपथ ग्रहण के दौरान विधानसभा परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पूरे कार्यक्रम पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी रही। किसी भी तरह की भीड़ को अनुमति नहीं दी गई। बिना शपथ पत्र पढ़े दिलाई गई शपथ अनंत सिंह ने शपथ पत्र पढ़े बिना ही विधायक पद की शपथ ली। शपथ पूरी होते ही वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनके माथे पर लगे तिलक के बारे में भी पूछा। इसके बाद अनंत सिंह अपनी निर्धारित सीट पर जाकर बैठ गए। सदन में मौजूद सदस्य यह दृश्य देखते रहे। तबीयत खराब होने का दिया हवाला मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं होने के कारण शपथ लेने में देरी हुई। उन्होंने बताया कि अदालत की अनुमति मिलने के बाद ही वे विधानसभा पहुंचे हैं। अनंत सिंह ने साफ कहा कि जेल से बाहर आना उनके हाथ में नहीं है। उन्होंने कहा कि जब जज साहब चाहेंगे, तभी वे जेल से बाहर आएंगे। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं। कोर्ट ने सिर्फ शपथ के लिए दी इजाजत पटना सिविल कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह के शपथ ग्रहण का रास्ता साफ हुआ। हालांकि कोर्ट ने उन्हें केवल शपथ लेने की ही अनुमति दी है। दुलारचंद यादव हत्याकांड में उन्हें अब तक जमानत नहीं मिली है। शपथ समारोह के अलावा किसी भी अन्य गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है। शपथ के बाद उन्हें वापस बेऊर जेल भेजा जाएगा। वे दोबारा न्यायिक हिरासत में रहेंगे। विधानसभा परिसर छावनी में तब्दील अनंत सिंह को जेल से विधानसभा तक लाने और वापस ले जाने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। एस्कॉर्ट वाहन और क्विक रिस्पॉन्स टीम को तैनात किया गया था। विधानसभा परिसर के अंदर और बाहर अतिरिक्त पुलिस बल मौजूद रहा। सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी गई। समर्थकों के किसी भी तरह के जमावड़े पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी। प्रवेश द्वारों पर सघन जांच की गई। हाईकोर्ट में जमानत पर अब भी इंतजार अनंत सिंह पिछले करीब तीन महीनों से बेऊर जेल में बंद हैं। सिविल कोर्ट से उनकी जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने 24 दिसंबर को पटना हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। जिस पीठ में मामले की सुनवाई सूचीबद्ध हुई थी, उस कोर्ट के जज ने सुनवाई से इनकार कर दिया। अब इस मामले को दूसरी पीठ में सूचीबद्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। जमानत पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है। संविधान के तहत शपथ लेना था जरूरी संविधान के अनुच्छेद 188 के अनुसार हर विधायक को पदभार संभालने से पहले शपथ लेना अनिवार्य है। शपथ लिए बिना कोई विधायक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकता। शपथ तक विधायक को वेतन और भत्ते का भी अधिकार नहीं मिलता। अनुच्छेद 193 के तहत बिना शपथ सदन में शामिल होने पर जुर्माने का प्रावधान है। इसी कारण अनंत सिंह के लिए शपथ लेना जरूरी था। शपथ के साथ उनकी सदस्यता औपचारिक रूप से पूरी हो गई। मोकामा से बड़ी जीत के बाद शपथ अनंत सिंह मोकामा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं। उन्होंने 28,206 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। अनंत सिंह को कुल 91,416 वोट मिले थे। राजद की प्रत्याशी वीणा देवी दूसरे स्थान पर रहीं, जिन्हें 63,210 वोट प्राप्त हुए थे। जीत के बाद अनंत सिंह शपथ न ले पाने के कारण सदन से बाहर थे। मंगलवार को शपथ लेने के साथ ही उनकी विधायकी औपचारिक रूप से शुरू हो गई।

बिहार पुलिस रेडियो में एएसआई के 462 पदों पर होगी भर्ती

पटना. बिहार पुलिस में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सुनहरा अवसर आया है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) ने बिहार पुलिस रेडियो (वितंतु) संवर्ग में सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) के 462 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया चार फरवरी से शुरू होगी और चार मार्च तक चलेगी। पुरुष, महिला और मंगलामुखी सभी श्रेणी के अभ्यर्थी इस भर्ती में आवेदन कर सकेंगे। शैक्षणिक योग्यता और पात्रता तय इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से भौतिकी विषय के साथ विज्ञान में स्नातक (बीएससी) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों को 45 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होना होगा। आयोग ने साफ किया है कि शैक्षणिक योग्यता की जांच सभी चरणों में की जाएगी। ऊंचाई और शारीरिक मानकों का निर्धारण भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक मानकों को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। अनारक्षित और पिछड़ा वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 165 सेंटीमीटर तय की गई है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पुरुष उम्मीदवारों के लिए यह मानक 160 सेंटीमीटर रखा गया है। सभी वर्गों की महिला उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 155 सेंटीमीटर निर्धारित की गई है। तीन चरणों में होगी पूरी चयन प्रक्रिया एएसआई भर्ती की चयन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा आयोजित होगी, जिसमें 100 अंकों का एक प्रश्न पत्र होगा। इस परीक्षा में सामान्य ज्ञान एवं समसामयिक विषयों से 40 प्रश्न और भौतिकी से 60 प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा की अवधि दो घंटे की होगी और प्रश्न वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पीय होंगे। 30 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए अयोग्य माने जाएंगे। मुख्य परीक्षा में दो प्रश्न पत्र प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलेगा। मुख्य परीक्षा में पहला प्रश्न पत्र सामान्य भाषा ज्ञान का होगा, जिसमें सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी से 50-50 अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे। यह परीक्षा इंटरमीडिएट स्तर की होगी और डेढ़ घंटे की होगी। इसमें न्यूनतम 30 अंक लाना अनिवार्य होगा, हालांकि इसके अंक मेरिट में नहीं जोड़े जाएंगे। दूसरा प्रश्न पत्र स्नातक स्तर की भौतिकी का होगा, जिसमें 100 अंकों के 100 प्रश्न होंगे और परीक्षा की अवधि तीन घंटे की रहेगी। नेगेटिव मार्किंग और शारीरिक दक्षता परीक्षा प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों में प्रत्येक गलत उत्तर पर 0.2 अंक काटे जाएंगे। मुख्य परीक्षा के भौतिकी प्रश्न पत्र में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। इसके आधार पर रिक्तियों के अधिकतम पांच गुना अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। तीसरे चरण की यह परीक्षा अर्हक प्रकृति की होगी, जिसमें कोई अंक नहीं दिए जाएंगे, लेकिन सभी मानकों में सफल होना अनिवार्य होगा। युवाओं के लिए बड़ा मौका बीपीएसएससी की यह भर्ती बिहार पुलिस में तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए बड़ा अवसर मानी जा रही है। आयोग ने अभ्यर्थियों से समय पर आवेदन करने और आधिकारिक अधिसूचना को ध्यान से पढ़ने की अपील की है, ताकि किसी भी तरह की गलती से बचा जा सके।

रूपेश पांडेय केस में फैसला: तीन दोषी, दो बरी

हजारीबाग हजारीबाग के बहुचर्चित रूपेश पांडेय हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने इस मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है, जबकि दो अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।   अदालत ने दोषियों की सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 5 फरवरी की तिथि निर्धारित की है। मामले में मोहम्मद असलम अंसारी (उर्फ असलम उर्फ पप्पू मियां), मोहम्मद कैफ और मोहम्मद गुफरान को दोषी ठहराया गया है। वहीं, मोहम्मद इरफान और इस्तखार मियां को कोर्ट ने बरी कर दिया अभियोजन पक्ष के अनुसार, 6 फरवरी 2022 की शाम करीब पांच बजे रूपेश पांडेय अपने चाचा के साथ बरही में सरस्वती पूजा देखने गए थे। विसर्जन के दौरान एक हिंसक भीड़ ने रूपेश पांडेय की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी, जिसके बाद पूरे राज्य में भारी आक्रोश फैल गया था घटना के बाद बरही थाने में 27 नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2022 को इसकी जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया था

हजारों छात्र सड़क पर, यूजीसी नियमों पर विरोध-समर्थन में पुलिस से भिड़ंत

पटना यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद सियासत चरम पर है। बिहार की राजधानी पटना में यूजीसी नियमों के समर्थन में सोमवार को हजारों की संख्या में छात्र सड़क पर उतर गए। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में यूजीसी के नए समानता नियमों से रोक हटाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान पटना पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प हो गई। पुलिस ने दो छात्र नेताओं को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए छात्र नेताओं में अमर आजाद और मनीष यादव शामिल हैं। पुलिस दोनों को पकड़कर कोतवाली थाने ले गई। दरअसल, यूजीसी नियमों के समर्थन में छात्र संगठनों की ओर से सोमवार को पटना में मार्च निकाला गया। पटना कॉलेज से गांधी मैदान तक मार्च कर रहे स्टूडेंट्स को पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर रोक दिया। प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग को हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। इस दौरान गहमागहमी की स्थिति बन गई। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। वाटर कैनन की गाड़ियां भी बुलाई गई हैं। प्रदर्शनकारी भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। पटना यूनिवर्सिटी के विभिन्न छात्रावासों में रहने वाले हजारों छात्र इस मार्च में शामिल हुए। बता दें कि यूजीसी ने पिछले महीने यूनिवर्सिटी एवं कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्र-छात्राओं के साथ भेदभाव को रोकने के लिए नए नियमों को लागू किया था। सवर्ण वर्ग के छात्र-छात्राओं ने इस पर आपत्ति जताई और वापस लेने की मांग की गई। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट गया तो शीर्ष अदालत ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। यूजीसी नियमों का जहां सवर्ण वर्ग के लोग विरोध कर रहे हैं, वहीं दलित एवं पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राएं एवं संगठन इसके समर्थन में हैं। फिलहाल अदालत ने यूजीसी और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

नीट छात्रा हत्याकांड: पटना HC ने जांच में हस्तक्षेप से किया इनकार, परिवार को दी कानूनी विकल्प की सलाह

पटना बिहार के चर्चित नीट छात्रा की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को पटना हाईकोर्ट से झटका लगा है। उच्च न्यायालय ने फिलहाल इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि यह केस सीबीआई को सौंप दिया गया है। ऐसे में इस मामले में दखल देने का कोई औचित्य नहीं बनता है। पटना हाईकोर्ट में छात्रा के पिता की ओर से न्याय की गुहार लगाते हुए पिछले सप्ताह रिट याचिका दायर की गई थी। जस्टिस अरुण कुमार झा की एकलपीठ में सुनवाई के लिए इसे मंजूर किया गया था। सोमवार को इस मामले पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका को निष्पादित कर दिया। हाईकोर्ट से परिवार को क्या विकल्प? पटना हाईकोर्ट ने नीट छात्रा के परिवार को विकल्प देते हुए कहा कि अगर वे सीबीआई की जांच से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। मृतका के पिता की ओर से दायर इस याचिका में हॉस्टल संचालक, मकान मालिक, निजी अस्पतालों के डॉक्टर जहां छात्रा भर्ती थी, थानेदार से लेकर पटना एसएसपी और डीजीपी तक को प्रतिवादी बनाया गया था। क्या है मामला? बता दें कि पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा पिछले महीने अपने कमरे में बेहोश पाई गई थी। 4 दिन बाद पटना के एक निजी अस्पताल में उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। पुलिस ने पहले इसे सुसाइड बताया, लेकिन परिजन ने रेप के बाद हत्या का आरोप लगाया। जब छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसमें यौन उत्पीड़न का खुलासा हुआ। इसके बाद हंगामा बढ़ गया। पुलिस ने एसआईटी का गठन कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को विस्तृत अध्ययन के लिए एम्स भेजा गया। हॉस्टल मालिक को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान पता चला कि छात्रा नाबालिग थी, तो इस केस में पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं। छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने की भी बात सामने आई। एसआईटी की ओर से कई लोगों के डीएनए सैंपल लिए गए। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस मामले का खुलासा जल्द करने का दावा ही कर रही थी कि पिछले सप्ताह इस केस को नीतीश सरकार ने सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया। हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि वह सीबीआई को मामला सौंपे जाने से संतुष्ट नहीं हैं। वह हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में एक निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उन्होंने हॉस्टल, पुलिस और अस्पताल के स्टाफ की मिलीभगत का भी आरोप लगाया। फिलहाल केंद्रीय एजेंसी केस की जांच कर रही है।

उपेंद्र कुशवाहा का ‘फैमिली पॉलिटिक्स प्लान’? घर की बहू साक्षी मिश्रा भी क्या संभालेंगी मोर्चा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव तक परिवार को राजनीति से दूर रखने वाले समाजवादी नेता और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा अब बेलाग परिवारवादी हैं। राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की विधायक बीवी स्नेहलता कुशवाहा और मंत्री बेटे दीपक प्रकाश के बाद उनकी बहू साक्षी मिश्रा कुशवाहा भी जनता के बीच नजर आ रही हैं। कोई चुनाव और मौका फिलहाल तो नहीं दिख रहा है, लेकिन साक्षी मिश्रा कुशवाहा के राजनीति में उतरने की अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि कुशवाहा परिवार के सुरक्षित राजनीतिक भविष्य के लिए बीवी और बेटे को राजनीति में उतारने के लिए उपेंद्र कुशवाहा को साक्षी मिश्रा ने ही मनाया था।   कुशवाहा परिवार से बीवी और बेटा राजनीति में लॉन्च तो हो गए हैं, लेकिन विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को बंपर सीट मिलने के बाद उनकी भावी राजनीति पर चर्चा शुरू है। एक तरफ जहां कुशवाहा का सांसद कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है, तो दूसरी तरफ दीपक प्रकाश को मंत्री पद पर बने रहने के लिए 20 मई से पहले विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा। नई चर्चा है कि बीजेपी विधानसभा के बदले सीट-गणित के दम पर कुशवाहा पर खुद की राज्यसभा या दीपक की विधान परिषद की सीट में से कोई एक चुनने का दबाव डाल सकती है। पार्टी दफ्तर के कार्यक्रम से आम लोगों के मंच तक नजर आ रही हैं साक्षी मिश्रा साक्षी मिश्रा कुशवाहा पहली बार सास स्नेहलता के चुनाव प्रचार के दौरान लोगों की नजर में आईं, जब वो सासाराम सीट पर उनके लिए वोट मांगने मैदान में उतरीं। दीपक प्रकाश के मंत्री बनने के बाद वो उनके साथ सार्वजनिक सभाओं और सामाजिक कार्यों में दिख रही हैं। मसलन, जब दही-चूड़ा के मौके पर कुशवाहा ने अपने गांव में भोज रखा, तो वहां साक्षी ना सिर्फ खाना परसोते दिखीं, बल्कि मंच पर माला और माइक के साथ भी सहज रहीं। पार्टी दफ्तर में लाल बहादुर शास्त्री और ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में वो कार्यकर्ताओं के साथ शामिल रहीं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बड़े नेता इंद्रेश कुमार जब उपेंद्र कुशवाहा के आवास गए थे, तब बातचीत के दौरान साक्षी सक्रिय दिखी थीं। उत्तर प्रदेश के एक रिटायर्ड अफसर की बेटी साक्षी और दीपक की लव मैरिज हुई है। दोनों इस समय राज्य के सबसे ज्यादा चर्चित राजनीतिक कपल हैं। बड़े नेताओं के बच्चों में चिराग पासवान और निशांत कुमार ने अभी तक शादी नहीं की है, जबकि तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री यादव घर से बाहर राजनीतिक कदम कम ही रखती हैं। ऐसे में ‘जनेऊधारी ब्राह्मण की बेटी और चंद्रगुप्त मौर्य के वंशज की पतोहू’ साक्षी मिश्रा कुशवाहा अगर राजनीति में आती हैं, तो बिहार की परिवारवादी राजनीति में नया अध्याय शुरू हो सकता है।