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प्रति प्रसव 600 रुपये की दर से बढ़ा भुगतान, 25 हजार ममता कार्यकर्ताओं को फायदा

 पटना चालू वित्तीय वर्ष में ममता कार्यकर्ताओं को बतौर प्रोत्साहन राशि 6.60 करोड़ रुपये मिलेंगे। आवश्यकता पड़ने पर अंतिम पूरक अनुदान में भी प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था हो सकती है। उल्लेखनीय है कि बिहार की ममता कार्यकर्ता को अभी प्रति प्रसव 600 रुपये दिए जा रहे हैं। उसे ही प्रोत्साहन राशि कहा जाता है। राज्य के मेडिकल कालेज, सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल और रेफरल अस्पतालों के साथ ममता कार्यकर्ता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सेवा दे रही हैं। राज्‍य में 25 हजार ममता कार्यकर्ता संस्थागत प्रसव, सुरक्षित मातृत्व, और प्रसवोत्तर देखभाल में वे सहायता कर रहीं। अभी उनकी संख्या लगभग 25000 है। उनके सहयोग से स्वास्थ्य मानकों में सुधार हुआ है और संस्थागत प्रसव के प्रति रुझान बढ़ा है। प्रतिदान यह कि इस योजना से हजारों ग्रामीण महिलाओं को नियमित रोजगार मिला है। यह योजना वर्ष 2008 में शुरू हुई थी। तब ममता कार्यकर्ता को प्रति प्रसव 100 रुपये मिलते थे। 2016-17 से 2024-25 के मध्य तक यह राशि 300 रुपये रही। विधानसभा चुनाव से पहले वर्ष 2025 में छह अगस्त को स्वास्थ्य विभाग ने संकल्प जारी कर प्रोत्साहन राशि 600 रुपये कर दी गई। प्रोत्साहन राशि का इतिहास यह योजना वर्ष 2008 में शुरू हुई थी। उस समय ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 100 रुपये मिलते थे। वर्ष 2016-17 से 2024-25 तक यह राशि 300 रुपये रही। विधानसभा चुनाव से पहले 6 अगस्त 2025 को स्वास्थ्य विभाग ने संकल्प जारी कर इसे बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया। ममता कार्यकर्ता की तीन प्रमुख भूमिकाएं     प्रसव में सहयोग : गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रेरित करना और प्रसव के दौरान सहायता करना।     जच्चा-बच्चा देखभाल : प्रसव के बाद 48 घंटे तक मां और नवजात की देखभाल, पोषण और स्वच्छता की जानकारी देना।     जागरूकता फैलाना : ग्रामीण महिलाओं को सुरक्षित प्रसव, स्तनपान और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जागरूक करना। 2026-27 में जिला/संस्था वार प्रोत्साहन राशि (रुपये में) सिविल सर्जन कार्यालय-राश‍ि गया (1): 14,57,000 गया (2): 23,91,000 पूर्वी चंपारण: 16,93,000 सारण: 25,04,000 समस्तीपुर: 25,04,000 मधुबनी: 23,56,000 दरभंगा: 20,07,000 पश्चिम चंपारण: 21,82,000 कटिहार: 28,08,000 सीतामढ़ी: 23,56,000 भागलपुर: 25,04,000 बक्सर: 15,84,000 जमुई: 14,11,000 बांका: 16,23,000 औरंगाबाद: 10,02,000 सहरसा: 20,07,000 पूर्णिया: 25,31,000 नवादा: 13,65,000 अरवल: 5,66,000 शिवहर: 12,29,000 खगड़िया: 14,83,000 किशनगंज: 15,85,000 लखीसराय: 13,20,000 नालंदा: 15,40,000 बेगूसराय: 18,89,000 सिवान: 13,65,000 रोहतास: 13,65,000 वैशाली: 20,64,000 मुजफ्फरपुर: 22,38,000 कैमूर: 18,89,000 सुपौल: 11,91,000 मधेपुरा: 11,91,000 गोपालगंज: 12,96,000 भोजपुर: 13,20,000 शेखपुरा: 7,40,000 जहानाबाद: 6,70,000 मुंगेर: 11,91,000 अररिया: 11,45,000 मेडिकल कॉलेज व अस्पताल मेडिकल कॉलेज, बेतिया: 8,14,000 भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान, पावापुरी: 99,000 जेएलएनएमसीएच, भागलपुर: 3,49,000 एएनएमएमसीएच, गया: 6,98,000 राजकीय मेडिकल कॉलेज व अस्पताल, पूर्णिया: 2,93,000 प्रभावती अस्पताल, गया: 1,05,000 गुरु गोविंद सिंह सदर अस्पताल, पटना सिटी: 80,000  

रांची के तीन लापता बच्चों का मामला, CCTV बंद होने से बढ़ी जांच की मुश्किलें

रांची धुर्वा क्षेत्र से लापता तीन बच्चों करण, अर्जुन और शिवा नायक की तलाश में जुटी पुलिस जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पुलिस जांच के अनुसार, तीनों बच्चे 3 जून को हटिया रेलवे स्टेशन पहुंचे थे और दोपहर तक स्टेशन परिसर में मौजूद थे। हालांकि, जिस समय उनके गायब होने की आशंका है, उसी दौरान स्टेशन का सीसीटीवी सिस्टम करीब तीन घंटे तक बंद रहा, जिससे जांच में बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पुलिस को मिले सीसीटीवी फुटेज के अनुसार तीनों बच्चे स्टेशन के प्रवेश द्वार से अंदर गए थे। कुछ समय तक स्टेशन परिसर में रहने के बाद वे बाहर निकले और यार्ड क्षेत्र की ओर चले गए। बाद में वे दोबारा स्टेशन के अंदर आए। इस दौरान तीनों बच्चों को स्टेशन परिसर स्थित प्याऊ में पानी पीते हुए भी देखा गया। इसके बाद वे स्टेशन परिसर में बैठे नजर आए। जांच में पता चला है कि दोपहर करीब डेढ़ बजे तक तीनों बच्चों की गतिविधियां सीसीटीवी कैमरों में रिकार्ड हो रही थीं। लेकिन डेढ़ बजे से लेकर शाम साढ़े चार बजे तक स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरे तकनीकी खराबी के कारण बंद रहे। इसी तीन घंटे की अवधि में तीनों बच्चे लापता हो गए। जब साढ़े चार बजे के बाद कैमरे दोबारा चालू हुए, तब तक बच्चों का कोई पता नहीं था। बच्चों की तलाश में रांची पुलिस की टीम पहुंची पुरी पुलिस का कहना है कि यदि उस समय सीसीटीवी कैमरे चालू रहते तो यह स्पष्ट हो सकता था कि बच्चे स्टेशन से बाहर निकले थे या फिर किसी ट्रेन में सवार होकर चले गए। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं तीनों बच्चे उसी दौरान हटिया स्टेशन से गुजरने वाली तपस्विनी एक्सप्रेस में तो नहीं चढ़ गए थे। बच्चों की तलाश के लिए रांची पुलिस की एक टीम ओडिशा के पुरी भेजी गई है। पुलिस विभिन्न राज्यों में भी संभावित सुरागों की जांच कर रही है। बच्चों को घर भेजने के नाम 18 सौ रुपये ठगी करने का हुआ प्रयास इस मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। करण की मां को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर दावा किया कि यदि उसे 1800 रुपये भेजे जाएं तो वह बच्चों का टिकट कटाकर उन्हें वापस भेज देगा। पुलिस ने जब उस मोबाइल नंबर की जांच की तो उसका लोकेशन हैदराबाद में मिला। जांच में सामने आया कि फोन करने वाला व्यक्ति साइबर ठग था, जो बच्चों के लापता होने की घटना का फायदा उठाकर ठगी करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, करण की मां ने उसकी बातों में आकर कोई पैसा नहीं भेजा। बच्चों की सकुशल वापसी की मांग को लेकर भाजपा ने निकाला मशाल जुलूस धुर्वा क्षेत्र से लापता तीन मासूम बच्चों करण, अर्जुन और शिवा नायक की सकुशल बरामदगी की मांग को लेकर शनिवार को भाजपा धुर्वा मंडल के तत्वावधान में विशाल मशाल जुलूस निकाला गया। मंडल अध्यक्ष उमेश यादव के नेतृत्व में शालीमार बाजार (स्टेडियम रोड) से पुराना विधानसभा चौक तक निकाले गए इस जुलूस में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, स्थानीय नागरिक, महिलाएं, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। जुलूस के दौरान प्रतिभागियों ने बच्चों की शीघ्र बरामदगी की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और खोज अभियान में तेजी लाने की मांग की। उपस्थित लोगों ने मशाल जलाकर बच्चों की सकुशल घर वापसी के लिए प्रार्थना भी की। इस अवसर पर भाजपा रांची महानगर अध्यक्ष वरुण साहू ने कहा कि तीन मासूम बच्चों का कई दिनों से लापता रहना बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन को इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ युद्धस्तर पर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है और इतने दिनों बाद भी कोई ठोस सुराग नहीं मिलना चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से विशेष जांच दल गठित कर सभी संभावित पहलुओं की गंभीरता से जांच करने और बच्चों की जल्द बरामदगी करने की मांग की। साथ ही कहा कि जब तक बच्चे सकुशल अपने परिवारों के पास नहीं लौटते, भाजपा इस मुद्दे को उठाती रहेगी। भाजपा नेताओं ने कहा कि यह केवल तीन परिवारों का मामला नहीं बल्कि पूरे रांची शहर और झारखंड की चिंता का विषय बन गया है। मशाल जुलूस के माध्यम से जनता ने यह संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षित वापसी तक समाज और भाजपा परिवार चुप नहीं बैठेगा। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि बच्चों की जल्द बरामदगी नहीं होती है तो पार्टी चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगी। जुलूस में पूर्व जिला अध्यक्ष केके गुप्ता, महामंत्री बलराम सिंह, जितेंद्र वर्मा, उमेश यादव, राकेश भास्कर, पंकज शहदेव, गुमशुदा बच्चों की मां डोली देवी, उमेश रंजन साहू, राजू सिंह, बीना मिश्रा, संकेत तिवारी, रेखा महतो, लगन राम, नयन परमार, चंदन पटेल, अजय मुंडा, अभय राम, पैरों देवी, मंजू उपाध्याय, राधिका देवी, गीता गुप्ता सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

पटना कोचिंग विवाद से जुड़ा मामला, नेपाल में संदिग्ध हालात में मौत

पटना खान सर कोचिंग सेंटर विवाद मामले में आरोपी पटना के चर्चित ज्ञान बिंदु जी.एस. एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद के भाई की अचानक में मौत हो गई है। रौशन आनंद के भाई की नेपाल में मौत हुई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि नेपाल के एक होटल में रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव ठहरे हुए थे। लेकिन रविवार की सुबह अचानक प्रिंस यादव की मौत की बात सामने आई है। प्रिंस यादव की ब्रेन हेमरेज से मौत की बात सामने आ रही है। यह भी कहा जा रहा है कि खान सर के कोचिंग सेंटर से जुड़े विवाद में प्रिंस यादव भी आरोपी थे। कहा जा रहा है कि रौशन आनंद सर के भाई की मौत के बाद उनके साथ होटल में मौजूद सभी युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस हिरासत में लिए गए युवकों से पूछताछ कर रही है। कहा जा रहा है कि नेपाल पुलिस इस मामले की गहनता से छानबीन कर रही है। प्रिंस यादव की मौत की पुष्टि के बाद उनके शव को भारत लाया जा रहा है। प्रिंस यादव रौशन आनंद सर के छोटे भाई बताए जा रहे हैं। पटना में फैजल खान उर्फ खान सर के कोचिंग सेंटर खान ग्लोबल इंस्टीच्यूट पर 2 जून को हुए हमले और तोड़फोड़ के मामले में केस दर्ज होने के बाद से रौशन आनंद पटना के बेऊर जेल में बंद हैं। इस पूरे विवाद में दर्ज एक दूसरे केस में खान सर भी आरोपी हैं। हालांकि, खान सर ने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर रखी है और फिलहाल कोर्ट ने 20 जून तक खान की गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि नेपाल के होटल में प्रिंस यादव के साथ उनके 6-7 दोस्त भी थे। नेपाल पुलिस सभी से पूछताछ कर रही है और प्रिंस की मौत की पड़ताल कर रही है। कहा यह भी जा रहा है कि साल 2021 में भी रौशन आनंद सर के भाई प्रिंस यादव पर खान सर की कोचिंग सेंटर पर हमले का आरोप लगा था। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि खान सर के कोचिंग सेंटर पर हुए हमले के बाद पुलिस प्रिंस यादव को भी तलाश रही थी लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रिंस यादव नेपाल चले गए थे। सुपौल यादव बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले थे। बहरहाल अभी प्रिंस यादव की मौत की जांच चल रही है। क्या है खान सर के कोचिंग सेंटर पर हमले का विवाद आपको बता दें कि 2 जून की रात खान सर के कोचिंग सेंटर पर हमला, तोड़फोड़ और मारपीट की घटना हुई थी। एक गार्ड को वहां बुरी तरह पीटा गया था। इस मामले में खान सर ने आरोप लगाया था कि पास ही स्थित ज्ञान बिंदु कोचिंग सेंटर के लोगों ने इस हमले को अंजाम दिया है। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में ज्ञान बिंदू के निदेशक रौशन आनंद समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। रौशन आनंद सर की जमानत याचिक अदालत से खारिज हो गई थी। इस घटनाक्रम के बाद खान कोचिंग सेंटर पर बवाल का एक अन्य वीडियो भी वायरल हुआ था। इस वायरल वीडियो में नजर आ रहा था कि दो सुरक्षा गार्ड वहां फायरिंग कर रहे थे। इस फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने खान सर के कोचिंग सेंटर पर दबिश दी थी। पुलिस ने फायरिंग के आरोप में खान सर के दो अंगरक्षकों को अरेस्ट किया था। दोनों ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने खान सर के कहने पर ही फायरिंग की थी। इसके बाद पुलिस ने खान सर पर आर्म्स ऐक्ट तथा हत्या के प्रयास से संबंधित संगीन धाराओं में केस दर्ज किया था। हालांकि, खान सर ने कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर रखी है। अदालत ने 20 जून तक खान सर की गिरफ्तारी पर रोक लगाई है।

नालंदा, गया और भोजपुर की विरासत का बढ़ा सम्मान, तीन अनूठे उत्पाद GI टैग से हुए सम्मानित

पटना बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य के तीन विशिष्ट और पारंपरिक उत्पादों को भारत सरकार की ओर से भौगोलिक संकेतक यानी जीआई (GI) टैग प्रदान किया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, इस गौरवशाली सूची में नालंदा की विश्वप्रसिद्ध 'बावन बूटी साड़ी-फैब्रिक', गयाजी का अनूठा 'पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट' तथा भोजपुर की ऐतिहासिक 'पीढ़िया पेंटिंग' शामिल हैं। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और बिहार सरकार के संयुक्त व अथक प्रयासों से बिहार की इस अनमोल हस्तशिल्प विरासत को यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त हुआ है। इस जीआई टैग के मिलने से अब इन पारंपरिक कलाओं से जुड़े स्थानीय बुनकरों, मूर्तिकारों और कलाकारों को वैश्विक बाजार में एक नई पहचान और आर्थिक मजबूती मिलेगी। पद्मश्री डॉ. रजनीकांत के मार्गदर्शन से पूरी हुई पंजीकरण प्रक्रिया इन पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और जीआई पंजीकरण की इस बेहद जटिल कानूनी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में देश के जाने-माने विशेषज्ञों का बड़ा योगदान रहा है। नाबार्ड ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि बिहार के इन तीनों उत्पादों के जीआई पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया में वाराणसी के ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव और पद्मश्री डॉ. रजनीकांत का अमूल्य मार्गदर्शन और विशेष तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है। उनके कुशल दिशा-निर्देशन और वैज्ञानिक दस्तावेजों की तैयारी के कारण ही बिहार के इन तीन बेजोड़ शिल्पों को भौगोलिक संकेतक की सूची में शामिल कराना संभव हो पाया। बावन बूटी, पत्थरकट्टी और पीढ़िया पेंटिंग का बढ़ेगा दुनिया में मान इस ऐतिहासिक टैग के मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब दुनिया भर के बाजारों में बिहार के इन तीनों विशिष्ट उत्पादों की प्रामाणिकता और शुद्धता पर कोई सवाल नहीं उठा सकेगा। बौद्ध कला के प्रतीकों को समेटने वाली नालंदा की बावन बूटी साड़ी, पहाड़ों को तराशकर बनाई जाने वाली गयाजी की पत्थरकट्टी कला और भोजपुर की लोक परंपरा को दर्शाने वाली पीढ़िया पेंटिंग के नाम पर अब कोई भी नकली उत्पाद नहीं बेच पाएगा। कला समीक्षकों का मानना है कि इस उपलब्धि से न केवल बिहार के पर्यटन और हस्तशिल्प उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा, बल्कि नई पीढ़ी के स्थानीय युवाओं को भी अपने पारंपरिक रोजगार से जुड़ने की एक नई प्रेरणा मिलेगी।

बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव: 12 रेंज को फिर चार जोन में बांटने की योजना

 पटना बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. राज्य में 7 साल पहले खत्म की गई जोनल व्यवस्था को फिर से लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है. इसके लिए पुलिस मुख्यालय की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिलने की बात सामने आ रही है. 12 पुलिस रेंज को फिर बांटा जाएगा जोन में फिलहाल बिहार में 12 पुलिस रेंज काम कर रही हैं. नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन रेंजों को फिर से जोन में विभाजित किया जाएगा. इससे फील्ड पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने और प्रशासनिक निगरानी मजबूत करने में मदद मिलेगी. जल्द लागू हो सकती है नई व्यवस्था सूत्रों के मुताबिक, गृह विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद नई व्यवस्था को जल्द लागू किया जा सकता है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, पहले की तरह चार जोन बनाए जा सकते हैं. हालांकि, वर्तमान जरूरतों को देखते हुए कुछ बदलाव भी किए जा सकते हैं. 2019 में खत्म हुई थी जोनल व्यवस्था बिहार पुलिस में जुलाई 2019 में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया था. उस समय जोनल सिस्टम को समाप्त कर केवल रेंज व्यवस्था लागू की गई थी. साथ ही बेगूसराय को नया रेंज बनाकर कुल रेंज की संख्या 11 से बढ़ाकर 12 कर दी गई थी. अभी किन जिलों को संभालती हैं रेंज? वर्तमान में पटना रेंज में पटना और नालंदा शामिल हैं. मगध रेंज में गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल आते हैं. भागलपुर रेंज में भागलपुर, बांका और नवगछिया पुलिस जिला शामिल है. तिरहुत रेंज में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिले आते हैं. कोसी रेंज में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा हैं. वहीं पूर्णिया रेंज में पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिले शामिल हैं. मुंगेर रेंज में मुंगेर, जमुई, लखीसराय और शेखपुरा आते हैं. बेगूसराय रेंज में बेगूसराय और खगड़िया जिले शामिल हैं. 37 साल तक लागू रही थी जोन व्यवस्था बिहार पुलिस में जोनल सिस्टम की शुरुआत 1982 में हुई थी. उस समय राज्य को चार जोन- पटना, भागलपुर, कोसी और तिरहुत में बांटा गया था. यह व्यवस्था करीब 37 वर्षों तक लागू रही. जोन में आईजी रैंक के अधिकारी और रेंज में डीआईजी रैंक के अधिकारी तैनात किए जाते थे. पुलिसिंग को और मजबूत करने की कवायद सरकार का मानना है कि जोनल व्यवस्था लागू होने से पुलिस प्रशासन की निगरानी और जवाबदेही बढ़ेगी. साथ ही कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा. इसी उद्देश्य से पुराने सिस्टम को नए स्वरूप में फिर से लागू करने की तैयारी की जा रही है.

बिहार में अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस: सम्राट चौधरी बोले- बड़ा हो या छोटा, कार्रवाई तय

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में चल रहे बुलडोजर ऐक्शन पर दो-टूक कहा कि अतिक्रमण है तो तोड़ा ही जाएगा। लोगों द्वारा उनकी तुलना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से किए जाने के सवाल पर भी उन्होंने बखूबी अंदाज में जवाब दिया। मीडिया ने सीएम से पूछा कि क्या आप दूसरे योगी आदित्यनाथ हैं? इस पर बिहार सीएम ने कहा- मेरा नाम सम्राट चौधरी है। उनके इस बयान की चर्चा सियासी गलियारों में होने लगी है। दरअसल, केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के अवसर पर पटना में शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को पटना में मीडिया संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। भाषण की समाप्ति के बाद सीएम ने विभिन्न पत्रकारों से अनौपचारिक रूप से बातचीत की। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे बिहार में अतिक्रमण हटाने को लेकर चल रहे बुलडोजर ऐक्शन वाले अभियान पर सवाल किया। इस पर उन्होंने कहा कि मेरा नाम सम्राट चौधरी है। राज्य में जहां भी अतिक्रमण है, चाहे वह किसी उद्योगपति का हो या बड़े व्यक्ति का, उसे तोड़ा ही जाएगा। बुलडोजर बाबा और योगी मॉडल… जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने लगभग दो दशक तक बिहार की सत्ता के मुखिया रहने के बाद 14 अप्रैल को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके अगले दिन, सम्राट चौधरी ने बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पहले सीएम के रूप में शपथ ली थी। सम्राट के शपथग्रहण के दिन भी पटना स्थित लोकभवन के बाहर बुलडोजर बाबा जिंदाबाद के नारे लगाए थे। इससे पहले लगभग 5 महीने तक सम्राट, नीतीश सरकार में गृह मंत्री रहे। पुलिस और कानून-व्यवस्था की कमान हाथ में आने के बाद सम्राट चौधरी ने राज्य भर में अतिक्रमण के खिलाफ सख्त मुहिम छेड़ रखी थी। अब सम्राट खुद सीएम बन गए तो उन्होंने गृह विभाग अपने पास ही रखा। राज्य भर में जगह-जगह बुलडोजर ऐक्शन जारी है। विपक्ष इसकी आलोचना भी करता रहा है और बिहार में योगी मॉडल लागू होने का आरोप लगाता रहा है। वहीं, सम्राट चौधरी लगातार अधिकारियों को सख्त निर्देश दे रहे हैं कि अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाए। इसके लिए राज्यवापी अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने सख्त लहजे में कह दिया है कि अतिक्रमण करने वाला कितना भी बड़ा आदमी क्यों ना हो, प्रशासन कार्रवाई जरूर करेगा। दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी सीमावर्ती जिलों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की पूरी रणनीति बना चुके हैं। उस पर भी प्रशासन काम कर रहा है।

जमशेदपुर रेलवे प्रोजेक्ट: टाटानगर को मिलेगा हाईटेक वंदे भारत कोचिंग डिपो

जमशेदपुर  टाटानगर रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के रख-रखाव और नए कोचिंग डिपो के विस्तार की योजना अंतिम चरण में पहुंच गई है। दक्षिण-पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल ने इस पूरी परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। 383.78 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल रेलवे बोर्ड के पास प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी के लिए विचाराधीन है। दक्षिण पूर्व रेलवे ने सूचना के अधिकार के तहत रेलवे पैसेंजर कमेटी के सदस्य शशांक शेखर स्वाई को यह जानकारी दी है। वर्तमान में टाटानगर रेलवे स्टेशन से ट्रेन नंबर 20893/ 21893 / 21895 टाटा-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस, 20891 टाटानगर – ब्रह्मपुर वंदे भारत एक्सप्रेस चलती है। इसके अलावा 20898 रांची-हावड़ा और 20872 हावड़ा-राउरकेला वंदे भारत एक्सप्रेस टाटानगर से होकर गुजरती है। कोचिंग डिपो का होगा स्थानांतरण प्रस्ताव के मुताबिक, टाटानगर स्टेशन के मौजूदा कोचिंग डिपो को स्थानांतरित (रि-लोकेट) किया जाएगा। नए स्थान (लोको कालोनी) पर अत्याधुनिक और पूर्ण बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। इस नए डिपो का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक वंदे भारत ट्रेन सेटों का सुचारू रूप से मेंटेनेंस और तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित करना है। जमशेदपुर को मिलेगा बड़ा फायदा इस हाईटेक डिपो के निर्माण से टाटानगर स्टेशन की क्षमता में भारी इजाफा होगा। भविष्य में जमशेदपुर से अन्य रूटों पर भी नई वंदे भारत ट्रेनें शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके अलावा, डिपो के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। चक्रधरपुर मंडल के अधिकारियों के अनुसार, रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलते ही इस परियोजना के लिए टेंडर की प्रक्रिया और धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा।  

बिहार पुलिस में सुधार: फील्ड पुलिसिंग मजबूत करने को जोनल ढांचा फिर बनेगा

पटना सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत पुरानी जोनल व्यवस्था को फिर से लागू किया जाएगा, जिसे 7 साल पहले खत्म कर दिया गया था। इसके बाद राज्य में फील्ड पुलिसिंग को अलग-अलग रेंज में बांटा गया था। अब फिर से बिहार के 12 पुलिस रेंज को जोन में बांट दिया जाएगा। फील्ड पुलिसिंग को सुदृढ़ करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जोनल सिस्टम फिर से लागू करने को लेकर पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेजा गया था जिसे मंजूरी मिलने की बात कही जा रही है। बहुत जल्द इसे लागू कर दिया जाएगा। नई व्यवस्था में पहले की तरह ही चार जोन बनाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उसमें कुछ सुधार की भी संभावना है। अभी हैं 12 पुलिस रेंज बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव जुलाई 2019 में किया गया था, तब 4 जोन को खत्म कर सिर्फ रेंज रहने दिया गया था। बेगूसराय को नया रेंज बनाकर तत्कालीन 11 रेंज को बढ़ाकर 12 कर दिया गया था। वर्तमान रेंज के जिलों की बात करें तो पटना रेंज में पटना और नालंदा, मगध रेंज में गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल जिले शामिल हैं। भागलपुर रेंज में भागलपुर, बांका और नवगछिया पुलिस जिला शामिल है। वहीं, तिरहुत रेंज में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिले आते हैं। कोसी रेंज में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा हैं। पूर्णिया रेंज में पूरा सीमांचल यानी पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिले आते हैं। मुंगेर रेंज में मुंगेर, जमुई, लखीसराय और शेखपुरा, तो बेगूसराय रेंज में बेगूसराय एवं खगड़िया जिले शामिल हैं। इन सभी रेंज में आईजी रैंक के अधिकारियों की तैनाती की जाती है। 2019 से पहले थे 4 जोन बिहार पुलिस में जोन की व्यवस्था 37 साल तक चली। 1982 में जोनल सिस्टम को लागू किया गया था। कुल चार जोन बनाए गए थे। पटना, भागलपुर, कोसी और तिरहुत जोन हुआ करते थे। जुलाई 2019 तक यही व्यवस्था थी और कुल 11 रेंज को तत्कालीन चार जोन में बांटा गया था। रेंज में डीआईजी जबकि जोन में आईजी बैठते थे। तत्कालीन भागलपुर जोन की बात करें तो उस समय इस जोन में भागलपुर और मुंगेर रेंज के 9 जिले शामिल थे। भागलपुर के अंतिम आईजी विनोद कुमार थे।

औद्योगिक विकास पर बड़ा प्लान: बिहार में स्टार्टअप और इंडस्ट्री को मिलेगा 30 दिन में क्लियरेंस

पटना बिहार में इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं ला रही है. इस बीच आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में इंवेस्टमेंट को लेकर बड़ी जानकारी दी. सीएम सम्राट ने कहा, बिहार में 85 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. देश के किसी भी कोने में आप कश्मीर से कन्याकुमारी तक चले जाएं सबसे अच्छी ग्रामीण सड़क आपको बिहार में ही मिलेगी. शहरी इलाकों में भी सड़कों को बेहतर बनाया जा रहा. 12 नई टाउनशिप से आएगा 6.5 लाख करोड़ का निवेश सीएम सम्राट ने यह भी कहा कि आज से 30-40 साल पहले प्रतियोगिता दर्पण में यह सामान्य ज्ञान हुआ करता था कि एशिया की सबसे बड़ी कॉलोनी कंकड़बाग, पटना है. हमलोग 12 नई टाउनशिप विकसित कर रहे हैं इसके लिए 6 लाख 25 हजार एकड़ भूमि पर काम शुरू किया जा रहा है. जिसमें 6.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश आने वाला है. विकसित होने वाले 12 टाउनशिप में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, इंडस्ट्रियल पार्क भी विकसित किया जाएगा. इसमें जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित होगी उन्हें सरकार उचित मुआवजा देगी. हमने कहा है कि किसी व्यक्ति की जमीन टाउनशिप क्षेत्र में आती है और उनके घर में अगर बेटी की शादी है या वह किसी भी विपदा से जूझ रहे हैं तो वे डीएम को आवेदन दें. उनके खाते में मुआवजे की राशि तत्काल भेजी जाएगी ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है. उद्योग या स्टार्टअप के लिए 30 दिनों के अंदर क्लियरेंस मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए पिछले कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया है. पहले ऐसी व्यवस्था थी कि आवेदन देने के बाद भी नगर निगम और अग्निशमन में आवेदन लंबित रहते थे. अब हमने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि उद्योग या स्टार्टअप लगाने के लिए आवेदन देने के 30 दिनों के अंदर क्लियरेंस मिलेगा. इस तरह से बिहार में युवाओं को बंपर रोजगार मिल सकेगा. जमीन अधिग्रहण को लेकर दिखे सख्त इससे पहले सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार की विकास योजनाओं को लेकर भी कड़ा आदेश दिया था. खासकर उद्योग और टाउनशिप की जमीन को लेकर वे सख्त दिखे. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जमीन अधिग्रहण को लेकर अगर कहीं भी बाधा आ रही है तो उसे तुरंत दूर किया जाए. इस तरह से उन्होंने जमीन अधिग्रहण से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित समय-सीमा के अंदर पूरा कराने का अधिकारियों को निर्देश दिया है.

JDU के पत्र से बढ़ी सियासी हलचल, लालू के जन्मदिन पर मिले हीरे के कंगन की जांच की उठी मांग

पटना  राजद सुप्रीमो लालू यादव के बर्थडे पर भोजपुरी सिंगर छोटू छलिया को कंगन देने का मामला राजनीतिक विवाद से होते हुए ईओयू के पाले में चला गया है। रबड़ी देवी ने सिंगर के गाना पर खुश होकर दो कंगन नजराने में दिए थे जिसे छोटू छलिया ने हीरे का बताया था। जदयू के मुख्य प्रवक्ता सह एमएलसी नीरज कुमार ने आर्थिक अपराध इकाई(ईओयू) के एडीजी को पत्र भेजकर मामले की छानबीन की मांग की है। कहा है कि रबड़ी देवी ने हीरे का कंगन कैसे प्राप्त किया इसकी जांच होनी चाहिए। नीरज ने छह बिंदुओं पर जांच की मांग की है। नीरज कुमार ने ईओयू को पत्र लिख कर लालू परिवार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। वीडियो बयान जारी कर उन्होंने पूछा है कि इतना महंगा कंगन उनके पास कहां के आया यह रबड़ी देवी को बताना चाहिए। इसी लिए ईओयू के एडीजी पत्र लिखा है कि इसकी जांच होना चाहिए। नीरज ने कहा है कि लालू परिवार की नियती है कि इन लोगों ने भ्रष्टाचार करके अकूत संपत्ति बनाई है। यह कंगन भी कहीं उसी का हिस्सा तो नहीं है। कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों, संबंधित वीडियो, मीडिया रिपोर्ट्स, विभिन्न लोगों के बयानों के आधार पर मामले की जांच कर ईओयू उचित कार्रवाई करे। नीरज ने पत्र की कॉपी प्रधान आयकर आयुक्त, प्रवर्तन निदेशालय, और लोक आयुक्त बिहार के पास भी भेजा है। पहले से कई मामलो में ईडी, सीबीआई, ईओयू की चल रही जांच के बीच लालू परिवार के लिए यह नया संकट दिख रहा है। 11 जून को लालू यादव के 79वें जन्मदिन के मौके पर राबड़ी आवास में रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलाकार छोटू छलिया का गाना सुनकर राबड़ी देवी ने अपने हाथों से दो कंगन निकालकर उसे गिफ्ट कर दिया। कलाकार ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि राबड़ी देवी उन्हें बेटा मानती हैं और हीरे का कंगन देकर सम्मानित किया। हीरे का कंगन गिफ्ट किए जाने का मामला जैसे ही चर्चा में आया कि राजनैतिक फसाद हो गया। इधर राजद और कांग्रेस रबड़ी देवी के बचाव में उतर गई है। राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा है कि बीजेपी के नेतृत्व में चल रही एनडीए सरकार पहले राज्य में चल रहे सरकारी भ्रष्टाचार की जांच करे। नीरज जी इतना उद्वेलित और विचलित नहीं होना चाहिए। कांग्रेस पार्टी इसे राजनैतिक बदले की भावना से उठाया गया कदम करार दिया है।