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प्रचंड धूप और लू से तप रहा उत्तर प्रदेश, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

लखनऊ यूपी में प्रचंड धूप, गर्म हवाओं ने शुक्रवार को भी 25 शहरों को झुलसाया। बांदा 46.4 और प्रयागराज 46.2 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहे। मौसम विभाग ने चार जिलों के लिए रेड, 18 के लिए ऑरेन्ज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और लू चलने की चेतावनी जारी की है। क्या है वजह मध्य भारत में प्रति चक्रवात, शुष्क पछुआ से समूचा प्रदेश तप रहा है। कहां असर चार जिलों के लिए लू का रेड, 18 में ऑरेन्ज अलर्ट। तापमान अधिकतम 42.4 डिग्री, न्यूनतम सामान्य से 3.3 डिग्री 28.8 डिग्री यहां रेड अलर्ट बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी और प्रयागराज। आगे क्या: दो दिन बाद पछुआ और बढ़ाएगी तपिश मौसम विभाग के अनुसार हवा के ऊपरी क्षोभमंडल में पुरवा ने जोर पकड़ लिया है। इससे हवा में नमी बढ़ गई, जिसके कारण ज्यादातर शहरों के अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री तक की कमी आई है। मौसम मुख्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि यह राहत 48 घंटे की है, इसके बाद फिर गर्म पछुआ जोर पकड़ेगी और तपिश चढ़ेगी। आसमान से बरसती आग को कम नहीं कर सका एक डिग्री गिरा पारा भीषण गर्मी के बीच शुक्रवार को पश्चिम यूपी में दिन के तापमान में 1.3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट भी राहत नहीं दे सकी। दिनभर चिलचिलाती धूप और लू के बीच वेस्ट यूपी में प्रचंड गर्मी का प्रकोप जारी रहा। अब तक दिन में जारी भीषण गर्मी का असर अब रात को भी होने लगा है। मेरठ में शुक्रवार को न्यूनतम मापमान 29.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ जो इस सीजन का सर्वाधिक है। गुरुवार की रात मेरठ में सीजन की सबसे गर्म रही। आने वाले 24-48 घंटे में दिन-रात के तामपान में और बढ़ोतरी के आसार हैं। रात में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। मेरठ में अभी नियंत्रण में वेट 24 मई को राहत की आस निजी एजेंसी स्काईमेट वेदर के अनुसार 24 मई के आसपास दिल्ली और वेस्ट यूपी के कुछ हिस्सों में आंधी एवं हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं। इससे तापमान में कुछ समय के लिए गिरावट हो सकती है, लेकिन भीषण गर्मी से राहत की उम्मीद कम है। वेट बल्ब तापमान सामान्य भीषण गर्मी के बीच मेरठ में राहत की बात सिर्फ इतनी है कि यहां अभी वेट बल्ब तापमान सामान्य सीमा में है। वेट बल्ब तापमान हवा के तापमान और उसकी आर्द्रता यानी नमी का संयुक्त माप है जो बताता है कि पसीना आने पर शरीर स्वयं को कितना ठंडा रख सकता है। थर्मामीटर पर गीला कपड़ा लपेटकर मापा जाता है। जब गर्म हवा में नमी अधिक होती है तो पसीना वाष्पीकृत नहीं हो पाता और शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम काम करना बंद कर देता है। ऐसे में हमें सामान्य से कहीं अधिक भीषण गर्मी का अहसास होता है। वैज्ञानिक स्थिति में 35 डिग्री सेल्सियस का वेट बल्ब तापमान मानव शरीर के लिए अधिकतम सीमा है। वेट बल्ब तापमान ऊपर चला जाता है तो पसीना वाष्पीकृत होना पूरी तरह बंद हो जाता है और मौत तक हो सकती है। शुक्रवार को मेरठ में वेट बल्ब तापमान 27.01 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ जो अभी सहनीय श्रेणी में है। 25-30 डिग्री का वेट बल्ब तापमान असहज की स्थिति पैदा करता है 30-31 डिग्री सेल्सियस उच्च जोखिम स्तर लाता है। 31-35 डिग्री सेल्सियस अत्यधिक जोखिम श्रेणी है।

रांची: 30 जून से शुरू होगा विशेष मतदाता पुनरीक्षण, CEO ने दूर की भ्रांतियां

रांची झारखंड में 30 जून से शुरू होनेवाले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR ) के तहत सूची से नाम कटने को लेकर डरने की कोई बात नहीं है। बीएलओ से लेकर SIR में लगे ऊपर तक कोई पदाधिकारी किसी मतदाता का गलत ढंग से मतदाता सूची से नाम हटा नहीं सकता। SIR को लेकर लागू सिस्टम इतना भरोसेमंद है कि किसी भी स्तर पर गलत ढंग से नाम कटने या जुड़ने की कोई संभावना नहीं है। साथ ही इस प्रक्रिया के दौरान लोगों को नोटिस का जवाब देने, यहां तक कि अपील करने का भी पूरा मौका मिलेगा। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने गुरुवार को धुर्वा स्थित निर्वाचन सदन में आयोजित मीडिया उन्मुखीकरण कार्यक्रम में SIR को लेकर उत्पन्न होनेवाली हर भ्रांति को दूर किया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, SIR में सबसे महत्वपूर्ण राज्य में इससे पूर्व वर्ष 2003 में हुए SIR के बाद तैयार मतदाता सूची है। जिन मतदाताओं के नाम इस सूची में है, उन्हें सत्यापन के दौरान कोई दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं है। घर-घर जाएंगे बीएलओ उन्हें सिर्फ गणना प्रपत्र (इन्यूमरेशन फार्म) भरना होगा, जो बीएलओ के माध्यम से घर तक पहुंचेगा। वर्तमान मतदाताओं में 73 प्रतिशत की इस सूची से मैपिंग हो चुकी है। वैसे मतदाता जिनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें गणना प्रपत्र भरने के साथ-साथ घोषणापत्र और निर्धारित 11 दस्तावेज की सूची में कोई एक दस्तावेज देना होगा। 18 वर्ष पूरे कर चुके नए मतदाताओं को फार्म-6 के साथ घोषणापत्र भी जमा करना होगा। वहीं, दूसरे राज्यों से आनेवाले मतदाताओं को फार्म-8 के साथ घोषणापत्र देना होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मतदाताओं, एसआइर में लगे कर्मियों, सभी मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए से SIR में सक्रिय सहयोग की अपील की ताकि मतदाता सूची अधिक स्वच्छ समावेशी एवं त्रुटिरहित बन सके। इस अवसर पर अपर मुख्यवनिर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, प्रशिक्षण के नोडल पदाधिकारी देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनीलकुमार उपस्थित रहे। गणना प्रपत्र लेने न्यूनतम 3 बार आपके घर जाएंगे बीएलओ 30 जून से बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस क्रम में वे सभी को गणना प्रपत्र देंगे, जिन्हें भरकर उन्हें देना है। यह पहले से आंशिक रूप से भरा रहेगा। अगर किसी घर में ताला बंद है तो इस प्रपत्र को बीएलओ अंदर डाल देंगे। गणना प्रपत्र भराने तथा घोषणा पत्र व दस्तावेज लेने बीएलओ न्यूनतम तीन बार आपके घर जाएंगे। गणना प्रपत्र जमा करनेवाले मतदाताओं की सूची प्रारुप मतदाता सूची में वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग या बिना मैपिंग के रूप में अलग-अलग शामिल किए जाएंगे। यदि किसी मतदाता का गणना प्रपत्र नहीं मिलता है या उसका नाम अब्सेंट, शिफ्टेड, डेड, डुप्लीकेट (एएसडीडी) सूची में शामिल है तो उसका नाम प्रारुप मतदाता सूची में सम्मिलित नहीं किया जाएगा। गण्ना प्रपत्र भरने में बीएलओ सहयोग करेंगे। एसआइआइ में क्या खास? एक-एक घर में गणना प्रपत्र बीएलओ के माध्यम से पहुंचेगा। उसमें बीएलओ का नाम तथा मोबाइल नंबर भी होगा। इसे कम से कम भरकर तथा हस्ताक्षर कर बीएलओ को जरूर जमा करें। मतदाता सूची से किसी का नाम सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना नहीं हटाया जाएगा। अपील दो स्तर पर की जाएगी। पहली अपील जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त तथा दूसरी अपील मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पास होगी। आधार कार्ड के आधार पर मतदाता होने का दावा नहीं किया जा सकता। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने आधार एक्ट तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि आधार सिर्फ किसी व्यक्ति की पहचान है न कि नागरिक होने का। समय पर पूरा होगा SIR , नहीं मांगेंगे अवधि विस्तार मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि राज्य में SIR समय पर पूरा होगा। इसके लिए चुनाव आयोग से अवधि विस्तार नहीं मांगा जाएगा। किसी भी विसंगति को सिस्टम तुरंत पकड़ेगा वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग सही ढंग से हुई है या नहीं, किसी मतदाता का नाम गलत ढंग से सूची से कट गया या जुड़ गया हो तो उसे सिस्टम तुरंत पकड़ लेगा। इसमें कुल 15 प्रकार की होनेवाली विसंगतियां चिह्नित की गई हैं, जिन्हें सिस्टम बता देगा ताकि उसे दूर किया जा सके। गलत करने पर दंड का भी प्रविधान SIR के क्रम में बीएलओ से लेकर ऊपर तक के कोई पदाधिकारी गलत करता है, तो उसके विरुद्ध दंड का भी प्रविधान है। इसके तहत जुर्माना सहित न्यूनतम तीन माह की जेल हो सकता है, जिसे दो वर्ष तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। इन 11 दस्तावेज में से कोई एक देना होगा अनिवार्य  केंद्र, राज्य सरकार या पीएसयू द्वारा नियमित कर्मचारी या पेंशनर को जारी प्रमाणपत्र एक जुलाई 1987 से पहले सरकार, स्थानीय प्राधिकार, बैंक, डाकघर, एलआइसी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र  पासपोर्ट मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र वन अधिकार प्रमाणपत्र  ओबीसी, एससी, एसटी या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी कोई भी जाति प्रमाणपत्र  राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां भी मौजूद है) राज्य/स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर सरकार द्वारा कोई भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र कब क्या होगा? 23 मई : सभी मतदान केंद्रों पर उन मतदाताओं की सूची का प्रकाशन जिनकी मैपिंग 2003 की मतदाता सूची से नहीं हुई है। 20 जून से 29 जून : SIR में संलग्न कर्मियों का प्रशिक्षण 30 जून से 29 जुलाई : बीएलओ द्वारा घर-घर दौरा 29 जुलाई तक : मतदान केंद्रों का युक्तिकरण 05 अगस्त : प्रारुप मतदाता सूची का प्रकाशन 05 अगस्त से 04 सितंबर : दावा एवं आपत्ति 05 अगस्त से 03 अक्टूबर : दावों और आपत्तियों की 07 अक्टूबर : मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन। बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा आयोग चुनाव आयोग SIR में संलग्न बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। एक सवाल के जवाब में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि बीएलओ के कार्य में बाधा डालनेवाले के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।  

झारखंड: शिक्षकों के हित में हाईकोर्ट का अहम फैसला, सरकार को समयसीमा में निर्णय का निर्देश

रांची झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश में राज्य के प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षकों को एमएसीपी योजना का लाभ दिए जाने के मामले में सरकार को 16 सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है। एकल पीठ ने जामताड़ा जिले के 84 शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश पारित किया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स और शिवम पाठक ने अदालत को बताया कि राज्य के अन्य स्कूलों (जैसे अल्पसंख्यक स्कूल, आवासीय विद्यालय) तथा बिहार राज्य के शिक्षकों को एमएसीपी का लाभ पहले से दिया जा रहा है, जबकि प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को यह सुविधा नहीं मिल पाई है। याचिका में राज्य सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे इन शिक्षकों को भी एमएसीपी का लाभ दें। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि सरकार ने सात अगस्त 2024 को झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ को पत्र लिखकर एमएसीपी की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि चूंकि अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को यह लाभ मिल रहा है और सरकार ने इस विषय पर विचार-विमर्श शुरू भी कर दिया है, इसलिए यह आवश्यक है कि प्राथमिक शिक्षकों के संबंध में भी जल्द से जल्द फैसला लिया जाए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सरकार इस मामले में अंतिम निर्णय लें। पूरी प्रक्रिया इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 16 सप्ताह के भीतर पूरी की जाए। अदालत ने याचिका निष्पादित कर दी। 16,290 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन देने का आदेश हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने पूर्वी सिंहभूम जिले के 80 प्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षकों की याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें 16,290 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन देने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता मैट्रिक और इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक हैं, जिन्होंने वर्ष 2006 से पहले सेवा में आए थे। उनकी मांग थी कि छठें वेतन आयोग की संस्तुतियों के तहत जारी वित्त विभाग के प्रस्ताव के अनुसार उनका प्रारंभिक वेतन एक जनवरी 2006 से 16,290 रुपये निर्धारित किया जाए। शिक्षकों ने शिक्षा विभाग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि यह वेतनमान केवल झारखंड सचिवालय के सहायकों पर लागू होता है। अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि यह मामला पूर्व में एक मामले में कोर्ट के निर्णय (27 नवंबर 2025) से पूरी तरह आच्छादित है। अदालत ने शिक्षकों के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए विभाग के 10 जून 2024 के सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि वह इन याचिकाकर्ताओं को वही, लाभ प्रदान करे जो पिछले मामले के याचिकाकर्ताओं को दिए गए थे। सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पिछले संबंधित मामले के निर्णय के खिलाफ सरकार ने खंडपीठ में अपील दायर कर दी है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि अपील के आदेश से शिक्षकों न्यूनतम वेतनमान प्रभावित होगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह ने पक्ष रखा।

निवेशकों को मिलेगा अटका पैसा, उपभोक्ता आयोग ने सहारा पर कसा शिकंजा

बोकारो  जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सहारा क्रेडिट को-आपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के मामले में फैसला सुनाते हुए निवेशकों को परिपक्व राशि भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग के अध्यक्ष जय प्रकाश नारायण पांडेय व सदस्य बेबी कुमारी ने यह दिया है। जरीडीह बाजार निवासी राज कुमार प्रसाद एवं उनकी पुत्री रजनी कुमारी ने गोल्डन ए डबल एंड ग्लोबल योजना में राशि निवेश की थी। निवेश के एवज में में बांड और प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। योजनाओं की अवधि पूरी होने के बाद भी निवेशकों को भुगतान नहीं किया गया। परिवादियों ने आयोग में शिकायत दर्ज कर 34 लाख 27 हजार 982 रुपये की परिपक्वता राशि, 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान का अनुरोध किया। एक लाख रुपये मुआवजा एवं 10 हजार रुपये वाद खर्च की मांग की थी। विपक्षी पक्ष की ओर से कहा गया कि मामला मल्टी स्टेट को-आपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत आता है तथा भुगतान केंद्रीय रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाना है। दूसरा मामला चीरा चास निवासी मोहम्मद अलीमुद्दीन व इनके पुत्र दानिश हसन ने किया था। सहारा ई शाइन योजना के तहत पचास हजार रुपये जमा किया था। इसी परिपवक्ता राशि एक लाख 13 हजार और अलीमुद्दीन की पत्नी स्वर्गीय फहमिया बानो ने साठ हजार रुपये निवेश किया था। समय पूरा होने पर भुगतान नहीं हुआ। इसमें भी राशि को भुगतान का आदेश आयोग ने दिया। आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि निवेश, परिपक्वता अवधि तथा देय राशि संबंधी तथ्यों को विपक्षी पक्ष ने विवादित नहीं किया। भुगतान नहीं करना सेवा में कमी आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि उपभोक्ता आयोग को ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार है तथा भुगतान नहीं करना सेवा में कमी है। आयोग ने आदेश दिया कि राज कुमार प्रसाद को 19 लाख 92 हजार रुपये तथा रजनी कुमारी को दो लाख 90 हजार 684 रुपये 31 दिसंबर 2026 तक केंद्रीय रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों के माध्यम से भुगतान किया जाए। निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं होने पर छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।  

सम्राट सरकार की नई ट्रांसफर लिस्ट जारी, गृह विभाग समेत कई अहम पदों पर बदलाव

पटना बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से बड़े पैमाने पर प्रशासनिक अधिकारियों का फेरबदल हो रहा है। सम्राट सरकार ने शुक्रवार को एक बार फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट निकाल दी। इसके तहत 11 आईएएस का तबादला किया गया है। इसमें कुछ विभागों के अपर मुख्य सचिव भी बदले गए हैं। वरीय आईएएस दीपक कुमार को लोकभवन भेज दिया गया है। वहीं, गृह विभाग के एसीएस अरविंद कुमार को मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग में भेजा गया है। कुंदन कुमार को गृह विभाग का सचिव बनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को आईएएस अधिकारियों की नई पोस्टिंग की अधिसूचना जारी की। इसके तहत 1992 बैच के आईएएस दीपक कुमार को राज्यपाल का प्रधान सचिव बनाया गया है, उनके पास सामान्य प्रशासन विभाग के महानिदेशक और मुख्य जांच आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार रहेगा। अरविंद चौधरी का गृह विभाग से ट्रांसफर 1995 बैच के आईएएस अधिकारी गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी का तबादला कर उन्हें मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग का एसीएस नियुक्त किया गया है। उनके पास बिहार कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष और बिहार राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद के परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार का ट्रांसफर कर गृह विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। 1995 बैच के एक और वरीय अधिकारी एवं सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव बी राजेंदर को निगरानी विभाग के एसीएस का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वित्त विभाग के सचिव संजय कुमार सिंह को सामान्य प्रशासन विभाग के जांच आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। सीमा त्रिपाठी और निलेश देवरे की नई पोस्टिंग बिहार मानवाधिकार आयोग की सचिव सीमा त्रिपाठी को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का सचिव बनाया गया है। सिविल विमानन विभाग के विशेष सचिव निलेश रामचंद्र देवरे को बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंप गया है। 2012 बैच की आईएएस इनायत खान को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड का प्रबंध निदेशक हैं। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के विशेष सचिव अरविंद कुमार वर्मा को उद्योग विभाग में विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक राजीव कुमार श्रीवास्तव का ट्रांसफर कर उन्हें वित्त विभाग का अपर सचिव लगाया गया है। गोपाल मीणा सेंट्रल डेप्युटेशन पर गए राज्यपाल के मौजूदा प्रधान सचिव गोपाल मीणा को बिहार सरकार ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए विरमित कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। उन्हें केंद्र सरकार ने नोएडा का विकास आयुक्त बनाया है।

बिहार को मिल सकती है अपनी IPL टीम, वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने जताई इच्छा

पटना इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में बिहार की क्रिकेट टीम आ सकती है। मशहूर उद्योगपति एवं वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स की तरह बिहार की भी एक क्रिकेट टीम होनी चाहिए। उन्होंने इसके लिए पूरा सहयोग देने का भी ऐलान किया है। वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी अनिल अग्रवाल की इस बात का समर्थन करते हुए इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। अनिल अग्रवाल ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "बिहार की मिट्टी ने देश को बहुत से बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं। पटना में जन्मे ईशान किशन ने सबसे कम गेंदों में वनडे में दोहरा शतक लगाया। समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में आईपीएल डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने। गोपालगंज के साधारण परिवार में जन्मे साकिब हुसैन की शानदार गेंदबाजी पर आज पूरी दुनिया की नजरें हैं।" उन्होंने कहा कि बिहार को क्रिकेट में अब भी वह नाम और पहचान नहीं मिल पा रही, जिसका यह हकदार है। यह बात हमेशा खलती है। अग्रवाल ने कहा, "मेरा हमेशा से यह सपना और प्रयास रहा है कि बिहार के युवाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले, हमारे खिलाड़ियों को भी वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और सपोर्ट बिहार में ही मिलना चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि अगर हमारे बच्चों को सही प्रेरणा और सुविधाएं मिलें, तो हमारे बिहार से बनने वाली टीम दुनिया की बेस्ट टीम होगी।" पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल ने कहा कि वह इस काम में बिहार के युवाओं के साथ खड़े हैं। बिहार की क्रिकेट टीम और यहां के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए वह अपनी तरफ से पूरा सहयोग देंगे। उन्होंने कहा कि बिहार उनके लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि एक इमोशन है। अब वक्त आ गया है कि हमारी मिट्टी का टैलेंट मैदान पर दिखे। अनिल अग्रवाल के इस पोस्ट के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि भविष्य में आईपीएल के अंदर बिहार की भी अलग क्रिकेट टीम होगी। बिहार से नई आईपीएल टीम बनने पर इसका मालिकाना हक वेदांता ग्रुप के पास रह सकता है, क्योंकि इसके चेयरमैन इसमें खुद रुचि दिखा रहे हैं। सम्राट चौधरी ने दिया समर्थन सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अनिल अग्रवाल के इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने अनिल से कहा कि वह उनकी बात से पूरी तरह सहमत हैं। बिहार के बिहार के क्रिकेट इमोशन के लिए सरकार स्पष्ट विजन के साथ मिशन मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद अनिल अग्रवाल ने सीएम से कहा कि उनका पूरा समर्थन और सहयोग सरकार के साथ है। उन्होंने बिहार के खिलाड़ियों को शुभकामनाएं भी दीं। राजगीर में तैयार हो रहा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम नालंदा जिले के राजगीर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तैयार हो रहा है। आने वाले समय में यहां पर इंटरनेशनल, रणजी और आईपीएल के मैच हो सकेंगे। बताया जा रहा है कि यह स्टेडियम बिहार की क्रिकेट टीम का नया घरेलू मैदान होगा। वहीं, पटना में भी मोइन उल हक स्टेडियम का लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। बिहार सरकार ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को इसे 30 साल के लिए लीज पर दिया है। यहां पर विश्व स्तरीय सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

झारखंड: बोकारो हवाई अड्डे के संचालन में तेजी के निर्देश, 15 दिनों में अहम कदम संभव

बोकारो  बोकारो हवाई अड्डे के संचालन को लेकर गुरुवार को राज्य सरकार स्तर पर महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। राज्य के नागरिक उड्डयन विभाग की सचिव वंदना दादेल ने बोकारो एयरपोर्ट परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को लंबित प्रक्रियाओं में तेजी लाने का निर्देश दिया। बैठक में बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल), एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने जानकारी दी कि अगले 15 दिनों के भीतर बीएसएल की ओर से डीजीसीए लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया जाएगा। बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य सरकार की ओर से किए जाने वाले अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं। सतनपुर पहाड़ी पर ऑब्स्ट्रक्शन लाइट लगाने सहित अन्य आवश्यक कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। हालांकि सीटीओ, सुरक्षा मंजूरी और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर अब भी कुछ औपचारिकताएं शेष हैं, जिन्हें जल्द पूरा करने का दावा किया गया। हवाई सेवा प्रदान करने वाली कंपनी की तलाश भी एक बड़ी समस्या है। अब पश्चिम बंगाल भी दौड़ में हवाई परियोजना बोकारो एयरपोर्ट की वर्षों से धीमी प्रगति के बीच अब पड़ोसी पश्चिम बंगाल भी क्षेत्रीय हवाई सेवा की प्रतिस्पर्धा में उतर चुका है। बोकारो सीमा से सटे पुरूलिया के छर्रा एयरफिल्ड, जो द्वितीय विश्व युद्ध काल का हवाई अड्डा है, के जीर्णोद्धार को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और प्रशासनिक सक्रियता बढ़ी है। वर्ष 2023 में पश्चिम बंगाल सरकार ने इसका सर्वे कराया था। इसके बाद अगस्त 2025 में भाजपा पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष सौमिक भट्टाचार्य ने राज्यसभा में मामला उठाया, जिसके बाद करीब 150 करोड़ रुपये का जीर्णोद्धार प्लान तैयार किया गया। फरवरी 2026 में पुरूलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने भी लोकसभा में इस मुद्दे को उठाया था। केंद्र सरकार के जवाब में बताया गया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने छर्रा एयरफिल्ड के विकास को लेकर पूर्व व्यवहार्यता रिपोर्ट पश्चिम बंगाल सरकार को सौंप दी है। छर्रा एयरफील्ड के पास पर्याप्त जमीन उपलब्ध है और इसकी दूरी बोकारो से करीब 40 किलोमीटर है। ऐसे में यदि झारखंड सरकार ने बोकारो एयरपोर्ट परियोजना में तेजी नहीं दिखाई, तो क्षेत्रीय हवाई सेवा का लाभ पश्चिम बंगाल को मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

रांची: तंबाकू निषेध पर सख्ती, पूरे राज्य में छापेमारी और जनजागरूकता अभियान शुरू

 रांची  राज्य में तंबाकू के विरुद्ध एक माह विशेष अभियान 26 मई से 26 जून तक चलाया जाएगा। विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) के अवसर पर यह आयोजन होगा। इस दौरान न केवल तंबाकू तथा उससे जुड़े उत्पादों के उपयोग नहीं करने को लेकर जनजागरुकता अभियान चलाया जाएगा, बल्कि विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। साथ ही व्यापक छापेमारी भी चलाई जाएगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान, झारखंड के निदेशक शशि प्रकाश झा ने इसे लेकर सभी उपायुक्तों, सिविल सर्जनों एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से 'तंबाकू और निकोटीन की लत से लड़ने की अपील को सामने लाएं' थीम तय की गई है। इसी थीम के आधार पर राज्य के सभी जिलों में जागरूकता कार्यक्रम, छापेमारी अभियान और सामुदायिक गतिविधियां आयोजित होंगी। 26 मई से 30 मई तक विशेष अभियान इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को तंबाकू और निकोटिन की लत से दूर रखना है। जारी दिशा-निर्देश के अनुसार, पहले चरण में 26 मई से 30 मई तक चौक-चौराहों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लगाए जाएंगे। साथ ही प्रचार-प्रसार की अन्य गतिविधियां होंगी। इस दौरान लोगों को कोटपा एक्ट और झारखंड तंबाकू संशोधन अधिनियम 2021 की जानकारी दी जाएगी। सरकारी भवनों में नो स्मोकिंग जोन के बोर्ड लगाए जाएंगे और स्कूलों के आसपास तंबाकू बिक्री के विरुद्ध विशेष जांच अभियान चलेगा। 31 मई को मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा। इस दौरान सरकारी कार्यालयों, पुलिस थानों और स्वास्थ्य केंद्रों में अधिकारियों और कर्मचारियों को तंबाकू सेवन नहीं करने की शपथ दिलाई जाएगी। स्वास्थ्य केंद्रों में कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह की विशेष जांच भी होगी। दो से छह जून तक जिला और प्रखंड स्तर पर तंबाकू नियंत्रण समितियों की बैठकें आयोजित की जाएंगी। 10 से 17 जून तक ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। पंचायत प्रतिनिधियों और वार्ड सदस्यों को अभियान से जोड़ा जाएगा। 18 से 26 जून तक तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान स्कूलों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू बिक्री रोकने के लिए पीली रेखा का चिह्न अंकित किया जाएगा। इस बीच 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भी धूम्रपान और तंबाकू छोड़ने का संदेश दिया जाएगा।

एनटीपीसी क्षेत्र में रातभर चला अवैध खनन, 15 फीट गहरे गड्ढे मिले

पटना पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित एनटीपीसी थाना क्षेत्र के ढीबर गांव के पास गंगा किनारे अवैध मिट्टी खनन का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां लगातार तीन रातों तक अवैध मिट्टी कटाई होती रही, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रही। जिस जगह मिट्टी की कटाई की जा रही है, वहीं से एनटीपीसी प्लांट के लिए पानी की सप्लाई भी होती है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और पुलिस की गश्ती व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रातभर चलता रहा अवैध खनन स्थानीय लोगों के अनुसार, ढीबर गांव के दियारा इलाके में लगातार रातभर गंगा बालू और मिट्टी की कटाई की जा रही थी। लोगों का आरोप है कि एनटीपीसी थाना की मिलीभगत से यह अवैध खनन हो रहा है, जिससे खनन माफियाओं का मनोबल बढ़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को सबकुछ पता होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। एसडीपीओ की छापेमारी, लेकिन माफिया फरार मामले की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ रामकृष्णा ने देर रात मौके पर छापेमारी की। हालांकि, छापेमारी की भनक लगते ही सभी खनन माफिया मौके से फरार हो गए। छापेमारी के दौरान खेतों में करीब 15 फीट तक गहरे गड्ढे पाए गए। इसके बाद एसडीपीओ ने तुरंत खनन विभाग को इसकी जानकारी दी। पहले भी हो चुके हैं हादसे स्थानीय लोगों ने बताया कि इससे पहले बारिश के दौरान खेतों में बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से कई लोगों की डूबकर मौत हो चुकी है। अब एनटीपीसी डैम के पास खुदाई होने से ग्रामीण किसी बड़े हादसे की आशंका से डरे हुए हैं। किसान रातभर कर रहे खेतों की रखवाली अवैध मिट्टी कटाई से परेशान किसान अब रातभर जागकर अपने खेतों की निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी थाना से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर यह अवैध खनन चल रहा था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। रोज लाखों की कमाई का आरोप एक स्थानीय व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जिस जमीन से मिट्टी काटी जा रही है, उसे एनटीपीसी ने अधिग्रहित कर रखा है। हालांकि, मुआवजा नहीं मिलने के कारण किसान अभी भी उस जमीन पर खेती कर रहे हैं।  उसने बताया कि खनन माफिया एक ट्रिप मिट्टी 800 रुपये में बेचते हैं। इसमें 300 रुपये ट्रैक्टर मालिक को दिए जाते हैं, जबकि 500 रुपये माफिया के पास बचते हैं। बताया गया कि करीब 20 ट्रैक्टर लगाए गए हैं और हर ट्रैक्टर लगभग 20 ट्रिप मिट्टी की ढुलाई करता है। इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 400 ट्रिप मिट्टी बेची जा रही है और माफिया रोज लगभग दो लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। स्थानीय व्यक्ति ने यह भी आरोप लगाया कि छह दिनों तक लगातार मिट्टी कटाई हुई और माफियाओं ने लगभग “50 प्रतिशत पर थाना मैनेज” कर रखा था। एसडीपीओ ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी एसडीपीओ रामकृष्णा ने बताया कि ढीबर दियारा में मिट्टी कटाई की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की गई थी। मौके पर कोई व्यक्ति नहीं मिला, लेकिन मिट्टी कटाई के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अवैध कटाई से पर्यावरण समेत कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। अब पुलिस खुद इस पूरे इलाके की निगरानी करेगी। एसडीपीओ ने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी अवैध मिट्टी कटाई हो रही हो तो तुरंत सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने खनन माफियाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि नियम और कानून के तहत ही कोई काम किया जाए। अगर कोई अवैध गतिविधि पाई गई तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

रांची में राज्यस्तरीय कार्यशाला: पेसा नियमावली 2025 को लेकर अधिकारियों को दिए गए निर्देश

रांची  पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 को लेकर राज्यस्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा है कि ग्राम सभा को अधिकार दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्हाेंने पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर कार्यशाला के दौरान इसकी बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया। मंत्री ने कहा कि राज्य में 25 साल बाद पेसा कानून लागू हुआ है और अब बारी गांव-गांव तक बेहतर क्रियान्वयन की है। बैठक में जिलों के उप विकास आयुक्त, समाहर्ता, बीडीओ – सीओ सहित पदाधिकारी शामिल हुए। धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन के एनेक्सी सभागार में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि अब पारंपरिक ग्राम सभा को उनका अधिकार दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए गांव-गांव तक पेसा नियमावली के बेहतर एवं मजबूत क्रियान्वयन की आवश्यकता है। पेसा कानून के दायरे में आने वाले जिलों के अधिकारियों को अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि इस कानून को धरातल पर उतारने के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्य करना आवश्यक है। दीपिका ने बताया कि देश के दस राज्यों में पेसा कानून लागू होना था, जिनमें झारखंड का कानून सबसे बेहतर और प्रभावी माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून को लेकर कुछ स्थानों पर भ्रम फैलाने की कोशिश हो रही है, ऐसे में सभी संबंधित लोगों को इसके प्रविधानों का गहन अध्ययन करना चाहिए। गांव के लोगों के हर सवाल और परेशानियों का जवाब पेसा नियमावली के पन्नों में दर्ज है। उन्होंने निर्देश दिया कि पारंपरिक व्यवस्था के तहत तीन महीने के भीतर ग्राम प्रधानों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि आगे की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से लागू की जा सकें। स्थानीय लोगों तक जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचे : सचिव कार्यशाला को संबोधित करते हुए पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने कहा कि नियमावली लागू होने के बाद से ही इसे जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों तक इसकी जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचे इसके लिए नियमावली का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद कराया गया है। कानून के विभिन्न प्रविधानों को राज्यभर में प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 125 मास्टर ट्रेनरों को तैयार किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर जागरूकता बढ़ा रहे हैं। निदेशक की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी गठित की गई है, जो कानून के लागू होने में आने वाली बाधाओं का अध्ययन कर रही है। मनोज कुमार ने कहा कि पारंपरिक न्याय व्यवस्था का भी गहन अध्ययन किया जा रहा है, ताकि स्थानीय संदर्भों को ध्यान में रखते हुए नियमावली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। कार्यशाला में पंचायती राज निदेशालय की निदेशक बी. राजेश्वरी ने बताया कि इस कानून को लागू करने से पहले कई आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं, लेकिन इसके क्रियान्वयन के दौरान विभिन्न प्रकार की चुनौतियां भी सामने आई हैं। इन बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर सुधार की प्रक्रिया जारी है।