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प्रशासनिक सेवा से धरातल तक: मंडला में कलेक्टर-मंत्री की अनोखी पहल, लोगों ने की सराहना

मंडला  मध्य प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके और कलेक्टर सोमेश मिश्रा का अलग अंदाज को देखने मिला. मंत्री और कलेक्टर नैनपुर प्रवास के बाद चिराईडोंगरी पहुंचे. यहां पर शासकीय कृषि प्रक्षेत्र चिरईडोंगरी में खेतिहर मजदूरों द्वारा धान के रोपे लगाए जा रहे थे. कृषकों को देखकर मंत्री संपतिया उइके और कलेक्टर सोमेश मिश्रा उनके बीच जाकर धान की रोपाई करने लगे. वहीं, किसान महिलाओं ने मंत्री और कलेक्टर को अपने बीच पाकर उत्साह से पाटा गीत गाया. इस अवसर पर मंत्री उइके ने कहा कि, ''इस प्रदेश का हर एक किसान अपनी मिट्टी, खेत और फसल से अत्यधिक लगाव रखता है.'' उन्होंने प्रार्थना की कि, ''हम सभी किसानों की फसलें खूब लहलहाएं धन धान्य से परिपूर्ण रहें. कृषि हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है.'' खेती की तकनीकी में आया बदलाव कैबिनेट मंत्री ने कहा, ''हम चाहे किसी भी पद पर क्यों ना पहुंच जायें, अपने इस मूल काम को कभी नहीं छोड़ना चाहिए. यह सीख हमें आने वाली पीढ़ियों को देने की जरूरत है. समय के साथ खेती की तकनीकी में भी बदलाव आया है. पहले हम पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई करते थे. अब इसका स्थान पैडी ट्रांसप्लांटर ने ले लिया है. यह खेती का आसान और किफायती तरीका है. किसान भाइयों को अपनी खेती में इनका इस्तेमाल करना चाहिए.'' इसी दौरान कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने पैडी ट्रान्सप्लांटर मशीन चलाकर धान की रोपाई की. मंत्री और कलेक्टर की इस अभिनव पहल की चारों तरफ तारीफ हो रही है. कुम्भार सशक्तिकरण जागरूकता शिविर का आयोजन मंत्री संपतिया उइके ने गुरुवार को नैनपुर के शासकीय स्नातक महाविद्यालय में ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत आयोजित कुम्भार सशक्तिकरण जागरूकता शिविर में सहभागिता की. यह योजना पारंपरिक कुम्भार शिल्प को संरक्षित करने तथा इससे जुड़े कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है. मंत्री ने कुम्हारों की मिट्टी की कला के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 270 व्यक्तियों को दिए प्रमाण पत्र दिए. शिविर के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक उपकरणों, तकनीकों एवं डिज़ाइन नवाचारों की जानकारी दी गई, इससे वे अपनी उत्पादन क्षमता और बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकेंगे. आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनेगा प्रशिक्षण मंत्री ने कहा, ''यह प्रशिक्षण न केवल उनके आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनेगा, बल्कि स्वरोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा. साथ ही युवाओं को ग्रामोद्योग के माध्यम से स्वावलंबन की प्रेरणा भी मिलेगी.'' कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, महाविद्यालय स्टाफ तथा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कुम्भार भाई-बहन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. स्कूल में किया पौधरोपण वहीं कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके ने नैनपुर के रेलवे स्कूल प्रांगण में एक साथ 2 हजार पौधे रोपे. शिविर के दौरान माध्यमिक शिक्षा मंडल की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर मंत्री संपतिया उइके तथा कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने सम्मानित किया. कृषि विभाग की ओर से प्रकाशित की गई लघु धान्य पौष्टिक व्यंजन पत्रिका का विमोचन भी किया गया. मंत्री संपतिया उइके नैनपुर में आयोजित जन शिकायत निवारण शिविर में भी शामिल हुईं. इस दौरान उनके साथ नगर पालिका परिषद अध्यक्ष नैनपुर कृष्णा पंजवानी, कलेक्टर सोमेश मिश्रा, श्रेयांश कूमट मौजूद रहे. सभी ने लोगों की समस्या सुनीं. 

मारपीट केस में सख्ती: हाई कोर्ट ने पुलिस को दिया घायल के फोटो का अनिवार्य आदेश

इंदौर   पुलिस की कार्यप्रणाली अक्सर चर्चा में रहती है. एक बार फिर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस के काम करने के तरीके पर हैरानी जताई. इंदौर खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि जिस व्यक्ति द्वारा अग्रिम जमानत याचिका पेश की गई है, उसने गंभीर अपराध किया है. इसके बाद भी पुलिस द्वारा सामान्य धाराओं में केस दर्ज किया गया. घायल व्यक्ति की तस्वीरें लेगी पुलिस जिस व्यक्ति के साथ आरोपी पक्ष द्वारा मारपीट की गई, उस फरियादी के गंभीर चोटों से संबंधित फोटो भी पुलिस ने नहीं लिए. हाई कोर्ट जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने डीजीपी को आदेश दिए "मारपीट के मामले में किसी व्यक्ति को चोट लगती है तो पुलिस थाने में उसकी फोटो भी ली जाए. इससे कोर्ट भी देख सके कि जिसने जमानत के लिए अर्जी लगाई है, उस पर किन धाराओं में केस दर्ज हुआ है." गंभीर केस में हल्की धाराएं क्यों लगाईं कोर्ट ने यह भी कहा "मध्य प्रदेश में पुलिस अधिकारियों द्वारा इस तरह के मामलों में रैंकिंग पैटर्न अपना रखा है. गंभीर चोट के मामले में भी हल्की धाराओं में केस दर्ज हो रहे हैं. ऐसे सभी मामलों में पुलिस अधिकारी और डॉक्टर घायल की तस्वीर लेंगे." कोर्ट ने कहा "एक तरफ तो पुलिस पूरे मामले को गंभीर मान रही थी लेकिन इसी मामले में मामूली धाराओं में प्रकरण दर्ज किया." एमएलसी से पूरी तस्वीर साफ नहीं होती अधिवक्ता वरुण रावल के मुताबिक "गंभीर चोट लगने के बाद एमएलसी की जाती है. इस रिपोर्ट में चोट की गंभीरता का जिक्र नहीं किया जाता है. शरीर के जिस हिस्से में चोट लगती है, उसके बारे में लिख दिया जाता है. फोटो अनिवार्य किए जाने से पुलिस और मेडिकल अफसर बंध जाएंगे. वहीं पीड़ित पक्ष के परिजन भी खुद भी फोटो लेकर विकल्प के रूप में साक्ष्य रख सकेंगे, जो उनको सुनवाई के दौरान काफी राहत पहुंचाएंगे." 

कई इलाकों में मूसलधार बारिश का असर, बाढ़ की चेतावनी से हड़कंप

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 487.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 67% ज़्यादा है। विंध्य और निमाड़ क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात हैं। हरदा में एक सब-इंस्पेक्टर की गाड़ी बह गई, लेकिन वह कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। खंडवा में अजनाल नदी के पुल पर पानी आने से हाईवे बंद है। डिंडोरी और मऊगंज में स्कूल बंद कर दिए गए हैं।  सतना-मैहर जलसमाधि में, ग्वालियर-चंबल में रेड अलर्ट सतना और मैहर ज़िले पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं। रामघाट और भरतघाट की 100 से ज़्यादा दुकानें पानी में डूब गईं। 50 से ज़्यादा नदियां और नाले उफान पर हैं और 100 गांवों का ज़िला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। उत्तर प्रदेश से आ रहे मौसमी सिस्टम के चलते ग्वालियर, मुरैना, भिंड और दतिया में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने यहाँ 10 इंच तक बारिश का अनुमान जताया है। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।  22 जिलों के लिए IMD का अलर्ट जारी  मॉनसून इस बार खूब मेहरबान है। प्रदेश में जगह-जगह झमाझम बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने आज 7 जिलों में अति भारी, 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, दतिया, मुरैना और भिंड में बारिश का ऑरेंज अलर्ट, यहां 24 घंटे के दौरान 8 इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस दौरान तेज हवाएं भी चलने का अनुमान है। भारी बारिश और तूफानी हवाओं के मद्देनजर मौसम विभाग ने लोगों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। 200 परिवार फंसे छतरपुर जिले में उर्मिल नदी उफान पर है। यहां ओरछा रोड थाना क्षेत्र का गांव धामची पानी से लबालब हो गया है। इसके चलते करीब 2000 परिवार फंसे हुए हैं। ग्रामीण जान बचाने को घरों की छतों पर चढ़ गए हैं। पानी भरने से मुख्य मार्गों से गांव का संपर्क पूरी तरह कट गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उन्हें सुरक्षित गांव से बाहर निकलवाने की की अपील की है। गांव में पानी भरने से बिजली सप्लाई ठप हो गई है। साथ ही मोबाइल फोन नेटवर्क भी दिक्कत कर रहे हैं। इस बीच पूरे छतरपुर जिले में 12 घंटे से हो रही तेज तेज बारिश के चलते लोगों के घरों में पानी घुस गया। लोग कार को हाथों से उठाते नजर आए। पूर्व विधायक अलोक चतुर्वेदी के घर के पीछे लोगों के घरों में पानी घुसा हुआ है। दो लोगों की मौत इस बीच, प्राकृतिक आपदा में दो लोगों की मौत की भी खबर है। ग्राम ढिलापुर में रात में मकान में सो रहीं मां-बेटी के ऊपर कच्चा ढह गया। इस हादसे में बेटी की मौत हो गई, जबकि मां घायल हो गई। वही हतना में घर के अंदर जानवर छोड़ने गए युवक पर कच्चा घर गिर गया। दोनों जगह मलबे में दबने से मौत हुई है। मौसम विभाग ने भारी बारिश और तूफानी हवाओं के मद्देनजर लोगों को कुछ सुझाव भी दिए हैं। सुझाए गए कार्य     भारी वर्षा के कारण दृश्यता कम हो सकती है, जिससे सड़क और हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है।     सड़कों और अंडरपास सहित निचले इलाकों में जलभराव की संभावना है, जिससे यातायात जाम और देरी हो सकती है।     भारी वर्षा से जमा हुआ पानी जलजनित रोगों के खतरे को बढ़ा सकता है।     झोंकेदार तेज हवाओं के कारण उड़ने वाला मलबा और कम दृश्यता हो सकती है, जिससे यात्रा और परिवहन प्रभावित हो सकते हैं। यदि संभव हो तो यात्रा करने से बचें।     परिवहन व्यवस्था सहित निकासी के तरीके के बारे में पहले से योजना बना लें।     वाहन धीरे चलाएं और स्टीयरिंग व्हील को मजबूती से पकड़ें, पुलों और ऊंची खुली सड़कों से बचें।     मचान (स्कैफोल्डिंग) और निर्माण स्थलों से दूर रहें। ऊंचे या खुले इलाकों में न जाएं। खुले खेतों और बाहरी गतिविधियों के दौरान बिजली गिरने का खतरा बना रहता है।     पेड़, बिजली के खंभे, अस्थायी शेड और कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की संभावना है। आंधी-तूफान के दौरान खुले खेतों में कार्य करने से बचें।     गरज-चमक के दौरान घर के अंदर रहें, खिड़कियां और दरवाजे बंद करें और यदि संभव हो तो यात्रा से बचें।     आपातकालीन किट में आवश्यक वस्तुएं जैसे कि जल्दी खराब न होने वाला भोजन, पानी, दवाइयां, टॉर्च, बैटरी और प्राथमिक मेडिकल किट रखें।     सुरक्षित स्थानोंं पर आश्रय लें; पेड़ों के नीचे शरण न लें तथा तूफान के दौरान जल निकायों से तुरंत बाहर निकलें। पेड़ों और बिजली की तारों से दूर रहें।     कंक्रीट के फर्श पर न लेटें और कंक्रीट की दीवारों का सहारा न लें। इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग निकाल दें एवं उन सभी वस्तुओं से दूर रहें जो बिजली का संचालन करती हैं।     पशुओं का विशेष ध्यान रखें, सभी जानवरों को रात के दौरान विशेष रूप से संरक्षित और सुरक्षित पशु शेड में रखा जाना चाहिए।     अगले 24 घंटों में अपेक्षित वर्षा के कारण मानचित्र के अनुसार कुछ पूर्ण रूप से संतृप्त मिट्टी और निचले इलाकों में सतही अपवाह /जलप्लावन हो सकता है।     स्थानीय अधिकारियों द्वारा निर्धारित निकटतम बाढ़ आश्रयों, निकासी मार्गों और सभा स्थलों के बारे में जानें।     सरकार द्वारा जारी बाढ़ की चेतावनियों और सलाह पर अपडेट रहें। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और स्थानीय अधिकारियों जैसे आधिकारिक स्रोतों से मौसम के पूर्वानुमान और अलर्ट पर नजर रखें।  भोपाल में बादलों का डेरा राजधानी भोपाल में गुरुवार को दिन भर बादल छाए रहे। अरेरा हिल्स में 25 मिमी और बैरागढ़ में 12 मिमी बारिश दर्ज की गई। दृश्यता भी घटकर 2000 मीटर रह गई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। हल्की से मध्यम बारिश जारी है। अगले 24 घंटे के लिए अलर्ट जारी आज राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार एक सक्रिय मॉनसून ट्रफ और लो प्रेशर एरिया बारिश को और उग्र बना रहा है, जिससे आने वाले दिनों में बारिश की संभावना बनी हुई है। इसी बीच, रीवा और मऊगंज जिलों में भारी … Read more

अचार बनाने की वजह से सरसों तेल की डिमांड ज्यादा, प्रतिदिन 20 टन की हुई खपत

भोपाल   बारिश में तेजी आने के साथ ही सरसों तेल में भी तेजी आ गई है। इसी माह में ही अब तक सरसों तेल करीब 18 फीसदी महंगा हो चुका है। हालांकि सोयाबीन, सींगदाना, सनफ्लावर जैसे खाद्य तेलों की वजह से सरसों तेल की महंगाई परेशान नहीं कर रही। इसलिए डिमांड में है ये दोनों आइटम इन दिनों अचार बनाने की वजह से सरसों तेल की डिमांड ज्यादा है। लेकिन कमजोर फसल, स्टॉक की कमी और आयात नहीं होने से सरसों तेल के भाव ऊपर जा रहे हैं। बिहार, उत्तरप्रदेश और दक्षिण भारत के राज्यों डिमांड के अनुरूप सरसों तेल मंगाना पड़ रहा है। प्रतिदिन 20 टन की खपत थोक कारोबारी कृष्ण कुमार बांगड के अनुसार राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सामान्य दिनों में जहां 10 से 12 टन की रोजाना खपत है।  सूरजमुखी और पॉम ऑयल भी महंगा खाद्य आपूर्ति मंत्रालय के डेटा के मुताबिक 14 जुलाई को रिटेल मार्केट में सरसों तेल के दाम 177.56 रुपए प्रति किलो रहा। जो एक साल पहले 140 रुपए प्रति किलो था। यानी एक साल में 27 फीसदी सरसों तेल महंगा हुआ। एक महीने पहले 16 जून को 171.48 रुपए प्रति किलो सरसों तेल का भाव था। सनफ्लावर ऑयल रिटेल मार्केट में 160.41 रुपए प्रति किलो में मिल रहा है जो एक साल पहले 122.25 रुपए प्रति किलो में मिल रहा था। यानी 31.21 फीसदी सूरजमुखी का तेल महंगा हुआ है। भाव पर एक नजर (थोक मंडी भाव प्रति लीटर) खाद्य तेल         -1 जुलाई               -17 जुलाई    सरसों तेल       155-160 रु.         से 175 180 रु. सोयाबीन तेल      120-125 रु.        से 128130 रु.     सनफ्लावर –   132-135 रु.         से 135-140 रु.     पाम तेल –      118-120 रु.         से 128-130 रु.     सींगदाना       150-160 रु          से 150-160 रु.     वनस्पति        110-115 रु          से 120-125 रु.

राज्यपाल पटेल ने राजभवन में रोपा तुलसी का पौधा

भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शुक्रवार को राजभवन उद्यान में तुलसी का पौधा लगाया। उन्होंने गमले में तुलसी के बीज बोकर पर्यावरण-संरक्षण का संदेश भी दिया।

छांगुर बाबा पर फूटा बीजेपी विधायक का गुस्सा, कहा- मिलनी चाहिए क्रूरतम सज़ा

इंदौर  मध्य प्रदेश की महू से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण के आरोपी छांगुर बाबा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि छांगुर बाबा नरपिशाच है। उसने कई बेटियों के साथ गलत किया है। उसके तो हाथ-पैर और प्रजनांग काट देने चाहिए और शरीयत जैसी कठोर होनी चाहिए। उषा ठाकुर का विस्फोटक बयान महू से बीजेपी विधायक उषा ठाकुर ने छांगुर बाबा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, 'ऐसे नरपिशाचों के हाथ-पैर और प्रजनांग तक काट देने चाहिए ताकि कोई और ऐसा दुस्साहस न करे।' उन्होंने कहा कि ये नरपिशाच बेटियों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं और ये भारत के संविधान को भी नहीं मानते, ये शरीयत को मानते हैं, तो फिर इन्हें सजा भी शरीयत जैसी कठोर मिलनी चाहिए।' क्यों भड़कीं उषा ठाकुर? उषा ठाकुर ने छांगुर बाबा के कथित अपराधों को लव जिहाद और धर्मांतरण का षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग देश के संविधान और कानून का सम्मान नहीं करते और समाज की एकता को तोड़ने का काम करते हैं। ठाकुर ने यह भी जोड़ा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ऐसे अपराधियों पर शिकंजा कस रही है और इस तरह के लोगों को कठोर सजा मिलनी चाहिए। छांगुर बाबा कौन है? जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले का रहने वाला एक स्वयंभू धर्मगुरु है, जिस पर अवैध धर्मांतरण, मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध के गंभीर आरोप हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, छांगुर बाबा ने खाड़ी देशों से 100 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग हासिल की और इसका इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को जबरन धर्म बदलवाने के लिए किया। उत्तर प्रदेश एटीएस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उसे और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि छांगुर बाबा के 40 से अधिक बैंक खातों में मध्य पूर्व और संभवतः पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से फंडिंग आई। ईडी ने बलरामपुर और मुंबई में 14 ठिकानों पर छापेमारी की। बलरामपुर के मधुपुर गांव में छांगुर बाबा की आलीशान कोठी, जो सरकारी जमीन पर बनी थी, को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।

किन्नर बनकर अब्दुल ने रची नई पहचान, बांग्लादेश से आकर भोपाल में छिपा था

 भोपाल  बांग्लादेशी अवैध रूप से भारत में घुसकर यहां पहचान छिपाकर रह रहे हैं। इसी तरह का एक बांग्लादेशी अवैध रूप से भोपाल में रहते हुए पकड़ा गया है। बांग्लादेश का निवासी अब्दुल कलाम भोपाल में किन्नर बनकर वर्षों से रह रहा था। अब्दुल खुद का नाम नेहा किन्नर रखा था, वह इस नाम से पहचान पत्र भी बनवा चुका है और उसी का उपयोग कर वह खुद को भारतीय बताता था। केंद्र सरकार द्वारा बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों की तलाश शुरू की गई, तब भोपाल में अब्दुल कलाम के छिपे होने का खुलासा हुआ। अब अब्दुल कलाम को डिपोर्ट किए जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। वह बुधवारा क्षेत्र में रहता था। उसके खिलाफ तलैया पुलिस ने कार्रवाई की है। फिलहाल, वह भोपाल पुलिस की सुरक्षा में रह रहा है। खुलासा हुआ है कि अब्दुल जांच एजेंसियों से बचने के लिए किन्नर बनकर राजधानी में घूमता रहता था। यह कार्रवाई इंटेलीजेंस यूनिट द्वारा की गई है। पहचान छिपाने के लिए उसने लड़की का भेष बना रखा है और अपना नाम भी नेहा रखा है।  पुलिस सूत्रों के अनुसार बांग्लादेशी नागरिक अब्दुल को भोपाल के बुधवारा इलाके से पकड़ा गया है। उसका असली नाम अदुल कलाम है। वह भोपाल में नेहा के नाम से रह रहा था। चोरी छुपे भोपाल में वह कई साल से रह रहा था। वह किन्नर बनकर शहर में यहां-वहां निकलता था। अब्दुल कलाम उर्फ नेहा ने बकायदा फर्जी तरीके से परिचय-पत्र भी बनवा लिया था। इसके संबंध में भी अंदरखाने पड़ताल की जा रही है। क्योंकि वह परिचय पत्र बनाने में कैसे सफल हो गया, बड़ा सवाल है। उससे लगभग भोपाल पुलिस पूछताछ कर रही है। पूछताछ भी बेहद गोपनीय तरीके से की जा रही है। विशेष निगरानी में है अब्दुल, कोई नहीं मिल सकता अब्दुल के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड की भी जांच भी इंटेलीजेंस यूनिट कर रही है। उसके मोबाइल को जब्त कर सायबर क्राइम की मदद से चौटिंग से लेकर बातचीत की जानकारी जुटाई जा रही है। उसके जिन लोगों के साथ संपर्क थे, उनसे भी क्राइम ब्रांच में एक स्पेशल टीम अलग से पूछताछ कर रही है। अब्दुल कलाम के भोपाल में होने की जानकारी केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी भेज दी गई है। अदुल कलाम को तलैया थाने में रखा गया है। थाना प्रभारी के अलावा दो महिला आरक्षकों को ही आने-जाने की अनुमति है।  खुद को महिला बताता है, इसलिए महिला आरक्षक तैनात पुलिस सूत्रों ने बताया कि वह पुरूष है, लेकिन वह वर्षों से महिला किन्नर के भेष में छिपा था। वह हावभाव भी महिलाओं जैसा दिखाता है, इसलिए महिला आरक्षकों को भी तैनात किया गया है। उसने भारत आने और अपने अन्य साथियों के भी संबंध में जानकारी दी है। इस मामले में पुलिस के आला अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि समय-समय पर संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है। जब तक पूरी जांच नहीं हो जाती, कुछ नहीं कहा जा सकता।  

रीवा जिले के मनमोहक जलप्रपातों पर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कोटवार और पुलिस के साथ अब पटवारियों की भी ड्यूटी लगा दी

रीवा  रीवा जिले के मनमोहक जलप्रपातों पर बढ़ती पर्यटक संख्या के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कोटवार और पुलिस के साथ अब पटवारियों की भी ड्यूटी लगा दी है। बता दें कि, जिले में पूर्वा, क्योंटी और चचाई तीन प्रमुख जलप्रपात हैं, जहां वीकेंड पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है। हालांकि, पूर्वा जलप्रपात को छोड़कर चचाई और क्योंटी में अभी तक सुरक्षा रेलिंग तक नहीं लगाई गई है। वीकेंड पर लगेगी पुलिस-पटवारियों की ड्यूटी कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि शनिवार और रविवार को विशेष सावधानी की जरूरत होती है। इसलिए वीकेंड पर कोटवार, पुलिस और ग्राम पंचायत कर्मियों के अलावा पटवारियों को भी तैनात किया जाएगा। साथ ही खतरनाक स्थानों पर रेलिंग लगाने का काम भी किया जाएगा। लोग बोले- इससे पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रशासन का यह कदम पर्यटकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अक्सर रोमांच या लापरवाही के चलते दुर्घटनाएं होती हैं। इन उपायों से जलप्रपातों की सुंदरता का आनंद लेने के साथ पर्यटकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।    

इंदौर सफलता के पीछे रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल, रिफ्यूज, रिथिंक, रिपेयर, रिपर्पस और रिनोवेशन की महत्वपूर्ण भूमिका

इंदौर ने एक बार फिर स्वच्छता में अपनी श्रेष्ठता की साबित ,सुपर स्वच्छ लीग में नंबर वन का स्थान  इंदौर की सफलता के पीछे गीला और सूखा कचरा अलग करने की आदत एक महत्वपूर्ण कारक  इंदौर सफलता के पीछे रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल, रिफ्यूज, रिथिंक, रिपेयर, रिपर्पस और रिनोवेशन की महत्वपूर्ण भूमिका  इंदौर  इंदौर ने एक बार फिर बता दिया कि स्वच्छता में उसका कोई सानी नहीं है। गुरुवार सुबह जब दिल्ली के विज्ञान भवन में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, निगमायुक्त शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों से सम्मान स्वीकार कर रहे थे, हर इंदौरी खुद को गौरवांवित महसूस कर रहा था। जिन अष्टसिद्धियों को पाने का संकल्प हमने 11 मार्च 2024 को स्वच्छता का सातवां आसमान छूते वक्त लिया था, उन्हें आखिर पा ही लिया। अब तक स्वच्छ सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में शामिल रहे इंदौर को इस बार सुपर स्वच्छ लीग में रखा गया था, लेकिन पिछले सात वर्ष की तरह इंदौर ने यहां भी खुद को पहले स्थान पर कायम रखा। इस बार प्रतियोगिता में 4,989 शहर थे। इन सबमें इंदौर को सबसे ज्यादा अंक मिले। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई मौकों पर कह चुके हैं कि इंदौरियों को नंबर वन पर रहने की आदत है, गुरुवार को यह बात एक बार फिर साबित हो गई। कहा जाता है कि नंबर वन पर पहुंचना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल है इस पर लगातार बने रहना। इंदौर ने इस चुनौती को स्वीकारा और जीत हासिल की। कोई शहर यूं ही नहीं नंबर वन बन जाता। दरअसल स्वच्छता इंदौरियों के संस्कार में हैं, यहां के नागरिकों के रग-रग में रची-बसी है। आने वाले समय में चुनौतियां और कठिन होंगी। अष्टसिद्धि पाने के साथ ही इंदौर अब नई भूमिका में आ चुका है। अब खुद को स्वच्छ बनाए रखने के साथ-साथ इंदौर की जिम्मेदारी एक अन्य शहर को भी स्वच्छ बनाने की है। निश्चित ही इंदौर इस कठिन परीक्षा में भी सफल होगा। आखिर हमारी आदत है नंबर वन आने की। सुपर स्वच्छ लीग में शीर्ष पर रहने के मायने स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हुए इस बार सुपर स्वच्छ लीग में पांच अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई थीं। दस लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर के साथ 11 अन्य शहर प्रतिस्पर्धा में शामिल थे। पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में सूरत ने इंदौर को कड़ी चुनौती दी थी। इंदौर को पहला स्थान उसके साथ साझा तक करना पड़ा था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। पिछली बार से सबक लेते हुए इंदौर ने इस बार ऐसी तैयारी की कि सूरत उसके आसपास भी नहीं पहुंच सका। सुपर स्वच्छ लीग में शीर्ष पर रहने से इंदौर की जिम्मेदारी बढ़ गई है। वह अब बड़े भाई की भूमिका में आ गया है। परिवार के सदस्यों का ध्यान रखना उसकी जिम्मेदारी हो गई है। इंदौर की सफलता के पीछे गीला और सूखा कचरा अलग करने की आदत एक महत्वपूर्ण कारक  आठ साल पहले इंदौर ने स्वच्छता का संकल्प ले सड़क किनारे के कचरे के ढेर व कचरा पेटियों को हटाया और हर घर से गीला व सूखा कचरा अलग-अलग लेने (सोर्स सेग्रिगेशन) का नवाचार किया। नगर निगम द्वारा किए गए इस बदलाव का साथ शहरवासियों ने दिया। उन्होंने अपने घर में गीले व सूखे कचरे का डिब्बा अलग रखा। कचरा पृथक्करण की इस मूल आदत के कारण इंदौर सात साल से स्वच्छता में नंबर-1 रहा। वहीं आठवीं बार सुपर लीग में शामिल होने के बाद भी देश के सभी शहरों में इंदौर सबसे आगे रहा। घर-बाजार से गीला-सूखा नहीं, छह तरह का कचरा अलग देने की शहरवासियों की आदत ही इंदौर को दूसरे शहरों से आगे बनाए हुए है। अलसुबह 6.30 बजे से शहर की कालोनियों में पहुंचने वाली डोर टू डोर कचरा संग्रहण की गाड़ियां देर रात छप्पन दुकान व सराफा बाजार के बंद होने के पहले उनका कचरा एकत्र कर ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचाती हैं। इस कार्य में हर दिन दो हजार से ज्यादा कर्मचारी इन वाहनों के साथ मौसम की परवाह किए बगैर नियमित जिम्मेदारी निभाते हैं। साल के 365 दिन शहरवासियों व निगम के कर्मचारियों की शहर को नंबर एक बनाने के प्रण की यह जीवटता ही जो इंदौर को हर मुकाबले में सिरमौर बनाती है। गीला-सूखा कचरा अलग-अलग लेने से आगे रहा इंदौर सुपर स्वच्छ लीग में शामिल इंदौर के शामिल होने के कारण इस बार इंदौर किसी भी शहर से नंबर-1 के खिताब के लिए मुकाबला नहीं था। इस सर्वेक्षण में देश के अन्य शहरों के साथ इंदौर का स्कोर कार्ड भी जारी किया गया। लीग में शामिल सूरत व इस बार का नंबर-1 स्वच्छ शहर अहमदाबाद भी स्वच्छता के अन्य मापदंडों पर इंदौर की तरह शत प्रतिशत अंक लाए हैं। सोर्स सेग्रिगेशन यानि घर-बाजारों से गीला-सूखा कचरा अलग-अलग मिलने वाली श्रेणी में इंदौर को 98 प्रतिशत अंक मिले। वहीं सूरत को 92 व अहमदाबाद को 94 प्रतिशत अंक मिले। यानी इंदौर के मुकाबले सूरत, अहमदाबाद व अन्य शहरों को गीला-सूखा कचरा पूर्ण रूप से अलग-अलग नहीं मिल पा रहा है। इसी वजह से सोर्स सेग्रिगेशन ने इंदौर को स्कोर कार्ड में सबसे ऊपर खड़ा कर दिया।  इंदौर सफलता के पीछे रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल, रिफ्यूज, रिथिंक, रिपेयर, रिपर्पस और रिनोवेशन की महत्वपूर्ण भूमिका  स्वच्छता के जिन सितारों को अपने दामन में संजोने का स्वप्न देखते-देखते देश के बड़े शहरों की आंखे पथरा गईं उन सितारों को इंदौर ने अपने आसमान पर संजो लिया है। गुरूवार को दिल्ली में जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इंदौर को सुपर लीग श्रेणी में देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया तो मालवा के सिरमौर शहर इंदौर के लोगों ने कुछ यही पंक्तियां याद करते हुए बड़े गर्व से अपनी सफलता को सराहा। स्वच्छता की दौड़ में अपने मानक ऊंचे कर इंदौर इतना आगे निकल आया है कि प्रतिस्पर्धा करने वाले शहर सशंकित ही रहते हैं कि स्पर्धा में नंबर वन तो इंदौर को ही आना है, उन्हें दूसरा-तीसरा स्थान भी मिल जाए तो बात बन जाए। सफलता की सही कसौटी उसकी निरंतरता ही होती है। स्वच्छता की अष्टसिद्धि प्राप्त करके इंदौर ने दुनिया को बता दिया कि यूं ही कोई शहर इंदौर नहीं हो जाता। इसके … Read more

कर्मचारियों को राहत: प्रमोशन के बाद डिमोशन नहीं, हाई कोर्ट का बड़ा निर्णय

ग्वालियर  मध्यप्रदेश हाई कोर्ट(MP High Court) ने पुलिस विभाग की दो अलग-अलग कार्रवाइयों को अवैध करार देते हुए अहम फैसले सुनाए हैं। कोर्ट ने एक मामले में प्रमोशन के बाद डिमोशन(Demotion After Promotion) को असंवैधानिक बताया, वहीं दूसरे मामले में पहले से सजा हो चुके कर्मियों के खिलाफ दोबारा विभागीय जांच(second Departmental Inquiry) शुरू करने को नियम विरुद्ध ठहराया है। मामला 1: प्रमोशन के बाद डिमोशन अवैध यह केस प्रमोद कुमार दुबे से जुड़ा है, जिन्हें वर्ष 2010 में सहायक उपनिरीक्षक (एमटी) से उपनिरीक्षक (एमटी)के पद पर प्रमोट किया गया था। लेकिन बाद में विभाग ने यह कहकर उनका प्रमोशन रद्द कर दिया कि वर्ष 2007 में उन पर एक वेतनवृद्धि रोकने की सजा लगाई गई थी, जिसका प्रभाव 5 वर्षों तक माना गया। विभाग का आरोप था कि उन्होंने सेवा पुस्तिका में इस सजा का रिकॉर्ड छिपाया। लेकिन याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि प्रमोशन के लिए केवल पिछले 3 वर्षों में कोई बड़ी सजा नहीं होनी चाहिए, न कि 5 वर्षों की। कोर्ट ने यह तर्क मानते हुए कहा कि तीन साल की शर्त पूरी होती है, और विभाग का यह दावा कि सजा का प्रभाव 5 साल तक माना जाएगा, कानूनी और नीतिगत रूप से अस्थिर है। अतः कोर्ट ने डिमोशन का आदेश रद्द कर प्रमोशन को वैध घोषित किया। मामला 2: दोबारा विभागीय जांच अवैध दूसरे मामले में हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्ति से पहले दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ दोबारा विभागीय जांच शुरू करने को अवैध बताया है। यह मामला उपनिरीक्षक मनीराम नादिर और प्रधान आरक्षक ओमवीर सिंह की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उनके खिलाफ पहली विभागीय जांच 14 दिसंबर 2020 को पूरी हो चुकी थी, जिसमें मनीराम पर 10 हजार रुपये का जुर्माना और ओमवीर सिंह की एक वेतनवृद्धि 6 महीने के लिए रोकी गई थी। इसके बावजूद विभाग ने 26 अक्टूबर 2022 को दोबारा जांच का नोटिस जारी किया, जिसे कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र से बाहर और अवैध करार दिया। शासन पक्ष इस दोबारा जांच को न्यायोचित ठहराने में असफल रहा। कोर्ट ने साफ कहा कि एक बार सजा देने के बाद, बिना पूर्व आदेश रद्द किए दोबारा जांच करना कानूनन गलत है।