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क्रिकेट की दुनिया में धोखा: युवा खिलाड़ी से रणजी और आईपीएल में जगह दिलाने के नाम पर ठगी

इंदौर  अंडर-19 क्रिकेटर से आईपीएल और रणजी टीम में सिलेक्शन के नाम पर धोखाधड़ी हो गई। भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों से नजदीकी बताकर एक अन्य क्रिकेट खिलाड़ी ने पीड़ित से 12 लाख 50 हजार रुपये ठग लिए। लसूड़िया पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आरोपित ने कई युवाओं से ठगी की है। टीआई तारेश सोनी के मुताबिक मानसरोवर नगर (इंदौर) निवासी एक क्रिकेटर की शिकायत पर आरोपित अभिषेक गैंगवार निवासी मानसरोवर कॉलोनी मुरादाबाद (उप्र) के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया है। आरोपित फिलहाल महालक्ष्मी अपार्टमेंट, सचिवालय कॉलोनी, केदारपुर, देहरादून (उत्तराखंड) में रहता है। पीडि़त ने पुलिस को बताया कि आरोपित अभिषेक से क्रिकेट मैच के दौरान नागपुर (महाराष्ट्र) में परिचय हुआ था। उसने प्रैक्टिस देखकर कहा कि तुम्हारा प्रदर्शन अच्छा है। वह आईपीएल और रणजी टीम में सिलेक्शन करवा सकता है। अभिषेक ने सिलेक्शन में खर्च करने का झांसा देकर किस्तों में 12 लाख 50 हजार रुपये ले लिए। सिलेक्शन न होने और रुपये न लौटाने पर जानकारी निकाली तो पता चला अभिषेक सौराष्ट्र, उप्र, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कई युवाओं से ठगी कर चुका है। उसके कोच भी इसी तरह की धोखाधड़ी में गिरफ्तार किया गया है। राष्ट्रीय खिलाड़ियों को वीडियो काल कर ठगता है आरोपित पीड़ित ने पुलिस को बताया कि वह अंडर-19 खेलता था। आरोपित भी क्रिकेट खिलाड़ी है। एक ही टीम में खेलने के दौरान दोस्ती हो गई थी। उसने कोविड के दिनों में कई दिनों तक झांसेबाजी की। वह उसके सामने ही राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट खिलाड़ियों से वीडियो कॉल पर बात करता था। इससे उसकी बातों पर आसानी से भरोसा हो गया। आरोपित ने पीड़ित से ऑनलाइन रुपये उसकी पत्नी आकांक्षा के खाते में जमा करवाए हैं।

एक पेड़, एक ज़िंदगी अभियान को उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सराहा

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि विकास और पर्यावरण संतुलन एक साथ आवश्यक हैं। सुखद, समृद्ध और सुरक्षित भविष्य के लिए प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के पुनीत कार्य में सभी की सहभागिता ज़रूरी है। पौधारोपण व्यक्ति को जीवन और प्रकृति के बीच आत्मीय संबंध की गहरी अनुभूति भी कराता है। प्रदेश में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनचेतना के लिए मीडिया समूह के “एक पेड़, एक ज़िंदगी” अभियान की उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सराहना की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि यह अभियान हरियाली बढ़ाने में सहायक होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि मीडिया समूह द्वारा जनसामान्य को तुलसी के बीज वितरित कर आयुर्वेदिक परंपरा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच के संबंध को भी सशक्त किया जा रहा है। यह नवाचार न सिर्फ सराहनीय है, बल्कि प्रेरणादायक भी है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली भूमिका निभाई है। मध्यप्रदेश में “जल-गंगा संवर्धन अभियान”, “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से जनभागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति वृक्षारोपण को अपनी भावनाओं और स्मृतियों से जोड़ता है, तो उसका संरक्षण भी स्वाभाविक रूप से होता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पर्यावरण और विकास विरोधी तत्व नहीं, बल्कि एक दूसरे के पूरक हैं। जितना आवश्यक अधोसंरचना, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में विकास है, उतना ही महत्वपूर्ण स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और हरियाली को संरक्षित रखना भी है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नागरिकों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों से जुड़ें और अपने आसपास हरियाली बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

मेयर पुष्यमित्र का दावा: इंदौर लगातार 9वीं बार बनेगा स्वच्छता चैंपियन

इंदौर  स्वच्छता लीग में शीर्ष अंक हासिल करने के बाद मेयर पुष्य मित्र भार्गव, निगमायुक्त शिवम वर्मा शुक्रवार को दिल्ली से इंदौर लौटे। अवार्ड मिलने की खुशी में इंदौर में जश्न मनाया गया। एयरपोर्ट से राजवाड़ा तक निकली रैली का जगह-जगह स्वागत शहरवासियों ने किया। इस मौके पर राजवाड़ा पर आयोजित कार्यक्रम में मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि स्वच्छता अब हमारा संस्कारों में शामिल हो गई है। हमने सफाई में अष्ठसिद्धि प्राप्त की। अब नौवीं बार भी हम स्वच्छता के शीर्ष पर होंगे। स्वच्छता में अब हम और भी नवाचार करने जा रहे है। शहरवासी एप के माध्यम से कचरा वाहन घर पर बुलवा सकेंगे। मेयर ने कहा कि सफाईकर्मियों के लिए भी सुविधाएं बढ़ाने का काम नगर निगम करेगा। तनख्वाह में एक हजार रुपये की बढ़ौत्री की मांग हमने सरकार से की है। दिल्ली से मिली ट्राॅफी के साथ महापौर परिषद सदस्यों व पार्षदों ने फोटों खिंचावाई। नाचकर मनाया जश्न राजवाड़ा पर नगर निगम कर्मचारी, सफाई मित्रों ने ढोलक की थाप पर नाच कर अपनी खुशी का इजहार किया। इसके अलावा मिठाई भी बांटी गई। एयरपोर्ट से जब मेयर का काफिला निकाला तो कालानी नगर चौराहे पर भी स्वागत हुआ। इसके अलावा अन्य जगह भी मंच लगे हुए थे। राजवाड़ा के बाद दिल्ली से मिले अवार्ड को नगर निगम परिसर में गया। उधर गुरुवार रात को प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी इंदौर आए थे तो उनका भी भाजपा समर्थकों ने राजवाड़ा पर स्वागत किया।  

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 23 जुलाई को समीक्षा बैठक

भोपाल सड़क दुर्घटना पीड़ितों का नकदी रहित उपचार स्कीम, 2025 एवं राह-वीर योजना  की प्रगति की समीक्षा बैठक 23 जुलाई 2025 को मुख्य सचिव की अघ्यक्षता में आयोजित की जायेगी। बैठक में परिवहन, पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा दोनों योजनाओं के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया जायेगा

सीएम यादव की स्पेन यात्रा: निवेश और सांस्कृतिक साझेदारी की ओर कदम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पेन में की निवेश, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग की नई पहल स्पेन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की बड़ी पहल, निवेश-शिक्षा-संस्कृति को मिलेगी नई दिशा सीएम यादव की स्पेन यात्रा: निवेश और सांस्कृतिक साझेदारी की ओर कदम स्पेन में डॉ. यादव की तीन मोर्चों पर पहल, निवेश, शिक्षा और संस्कृति पर खास फोकस कैटलोनिया के विदेश मंत्री जैम डच गुइलोट के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक अकादमिक साझेदारी की दिशा में नया संवाद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पेन यात्रा के तीसरे दिन बार्सिलोना में कैटलोनिया सरकार के विदेश मंत्री जैम डच गुइलोट से भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थान आईआईटी इंदौर और IISER भोपाल को बार्सिलोना के विश्वविद्यालयों से जोड़ते हुए अकादमिक और शोध सहयोग को बढ़ाने की बात कही। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश विश्वस्तरीय अनुसंधान और नवाचार केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेश और औद्योगिक सहयोग के लिए आमंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कैटलोनिया की अग्रणी कंपनियों को मध्यप्रदेश में निवेश और तकनीकी सहयोग के लिए आमंत्रण दिया। उन्होंने प्रदेश की नई औद्योगिक नीति, मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और युवा शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सही समय है जब यूरोपीय कंपनियाँ मध्यप्रदेश को अपने निवेश गंतव्य के रूप में देखें। खेल, पर्यटन और संस्कृति में साझेदारी के नए आयाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एफसी बार्सिलोना फाउंडेशन जैसे संगठनों के साथ मिलकर खेल, नेतृत्व और जीवन कौशल पर आधारित कार्यक्रमों की साझेदारी की संभावनाएं साझा कीं। साथ ही मध्यप्रदेश के विश्व धरोहर स्थलों साँची, खजुराहो और भीमबेटका को यूरोप में प्रमोट करने के लिए संयुक्त पर्यटन अभियान पर भी सहमति बनी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी सुझाव दिया कि दोनों सरकारें प्रदर्शन कला, सिनेमा, साहित्य और संग्रहालयों के माध्यम से सांस्कृतिक संवाद को और सशक्त बनाएं। तकनीकी सहयोग और नीति-स्तरीय समन्वय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्मार्ट सिटी, ग्रीन बिल्डिंग्स और शहरी परिवहन में कैटलोनिया की विशेषज्ञता का लाभ लेने के लिए तकनीकी सहयोग प्रस्तावित किया। उन्होंने दोनों सरकारों के बीच एक संयुक्त कार्य समूह गठित करने की बात कही, जो प्रमुख परियोजनाओं की पहचान कर उन्हें लागू करने में सक्रिय भूमिका निभाएगा। वैश्विक मंच पर मध्यप्रदेश की सशक्त उपस्थिति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस मुलाकात को प्रदेश की वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब निवेश, शिक्षा, खेल और संस्कृति के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के लिए तैयार है, और स्पेन यात्रा प्रदेश के विकास में नए अध्याय जोड़ेगी।  

मुस्लिम धर्मगुरु मुफ्ती ए आजम का खत, मुस्लिम समाज से बोले दस्तावेज रखें तैयार- जानें पूरा मामला

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुफ्ती-ए-आजम का एक खत वायरल हो रहा है, जिससे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का मुद्दा फिर उठता दिख रहा है. मुफ़्ती-ए-आजम ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील की है कि अपने सभी दस्तावेज तैयार कर लें.  दरअसल, मध्य प्रदेश मुफ्ती-ए-आजम डॉ. मौलाना मोहम्मद मुजाहिद रज़ा पत्र जारी कर मुसलमानों से आग्रह किया है कि सभी देश की नागरिकता साबित करने संबंधित और अपनी पहचान संबंधित सभी दस्तावेज चेक कर लें और कोई चूक है तो उसे सुधरवा लें.  मुस्लिम समाज को दस्तावेजी तैयारी के नसीहत वाला मुस्लिम धर्मगुरु का पत्र चर्चा में है। जिसमें उन्होंने अपनी पहचान से जुड़े पेपर तैयार कराने के लिए कहा है। मुफ्ती ए आजम मप्र डॉ. मौलाना मुशाहिद रजा कादरी की ओर से जारी इस पत्र में यह चिंता साफ नजर आ रही है। जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 16 जुलाई के इस पत्र में कहा गया है कि सभी मुसलमानों को देश की नागरिकता सिद्ध करने वाले तमाम कागजात पहले से दुरुस्त कर लेने चाहिए। क्योंकि एनआरसी की पड़ताल बहुत जोरों से चल रही है। एनआरसी, सीएए और एनपीआर के मुद्दों को लेकर भाजपा हुकूमत बहुत उत्सुकता से गौर फिक्र कर रही है। यह बात अच्छे से अपने दिमाग में बैठा कर सोच फिक्र रखना होगा, क्योंकि हमारा नाम हर लिस्ट में नं 01 पर रखा गया है। एनआरसी किसी भी समय हमारे सूबे मध्य प्रदेश में शुरू हो जाएगी। जिससे पहले हमें अपनी नागरिकता को भारतीय साबित करने के लिए कागजात की तैयारी पूरी करना होगा। उन्होंने मूल निवास, आधार, वोटर कार्ड, पैन कार्ड, राशनकार्ड सहित पासपोर्ट व दूसरे दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाण पत्र, निकाहनामा व प्रॉपर्टी के रेकॉर्ड भी शामिल है। उसे अपने पास दुरुस्त कराकर रखने की ताकीद की है। कोई शाब्दिक त्रुटि हो तो ठीक करवा लें। 'एमपी सरकार शुरू कर सकती है NRC' उन्होंने कहा कि जन्म, जाति, शादी, संपत्ति, निवासी, मृत्यु से संबंधित सभी दस्तावेज मुसलमानों को अब तैयार कर लेने चाहिए, क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार कभी भी NRC शुरू कर सकती है. Mufti-e-Azam MP : उनका कहना है- आमजनों को शासकीय कार्यवाहियों में जरूरी दस्तावेज तैयार रखने की गुजारिश की है। यह पत्र जागरूकता के लिए जारी किया गया है।     मौलाना मुशाहिद रजा कादरी,मुफ्ती-ए-आजम मप्र   NRC और NPR क्या है, CAA के बाद क्यों चल रही चर्चा केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 11 मार्च 2024 को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसके साथ ही सीएए के नियम देशभर में लागू हो गए। सीएए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है, जहां लोग पोर्टल के माध्यम से सीएए के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सीएए को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता (संशोधन) कानून को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि देश में धर्म के आधार पर कानून नहीं बनाया जा सकता। सीएए को एनआरसी और एनपीआर के साथ जोड़कर देखने की जरूरत है। भाजपा का मुख्य उद्देश्य देश में एनपीआर और एनआरसी लागू करना है। आइए जानते हैं क्या होता है एनपीआर (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर) और एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर)। एनपीआर क्या है? What is NPR Bill Meaning एनपीआर की फुल फॉर्म राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर है। एनपीआर देश के सामान्य निवासियों की एक सूची है। भारत के प्रत्येक सामान्य निवासी के लिए एनपीआर में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसमें भारतीय नागरिक और विदेशी नागरिक दोनों शामिल हैं। एनपीआर का उद्देश्य देश के प्रत्येक सामान्य निवासी का डेटाबेस बनाना है। इसे नागरिकता अधिनियम 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियम 2003 के प्रावधानों के तहत स्थानीय (गांव/उप-नगर), उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए डेटा पहली बार 2010 में भारत सरकार द्वारा एकत्र किया गया था और इसे हर 10 साल में दोहराया जाएगा। इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक सामान्य निवासी का एक व्यापक पहचान डेटाबेस बनाना है। डेटाबेस में जनसांख्यिकीय के साथ-साथ बायोमेट्रिक विवरण भी शामिल होंगे। एनपीआर के लिए किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि जनसंख्या रजिस्ट्रार में डेटा प्रविष्टि के लिए स्व-घोषणा को पर्याप्त माना जाएगा। सीएए यानी नागरिकता संशोधन अधिनियम पर चल रहे विवाद के बीच लोगों की मन में बहुत विभ्रांति उत्पन्न हो गई है, बहुत से लोग नहीं जान पा रहे हैं कि आखिर यह राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एनपीआर क्या है और उसे क्यों अपडेट किया जा रहा है? हम आपको समझते हैं कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर क्या है? एनपीआर देश के सभी नागरिकों की जनसंख्या विवरण का डेटा है। सभी नागरिकों के लिए एनपीआर में पंजीकरण और सरकार को सही विवरण बताना अनिवार्य है। भारत में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के तहत कारगिल समीक्षा समिति ने गैर नागरिकों और नागरिकों के अनिवार्य पंजीकरण सिफारिश को 2001 में स्वीकार किया गया था। वर्तमान में प्रक्रिया असम को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में की जाएगी। दरअसल केंद्र और राज्य सरकार कल्याणकारी योजनाएं बनती है, लेकिन सरकार को कोई योजना बनाने से पहले यह जानना जरूरी होता है कि जिन लोगों के लिए कोई योजना बनाई जा रही है उन लोगों की संख्या कितनी है? उनकी आर्थिक स्थिति कैसी है? उनकी क्या आवश्यकता है? इत्यादि। एनपीआर का मूल उद्देश्य क्या है? What is NPR Objective जनगणना आयोग के अनुसार, एनपीआर का उद्देश्य प्रत्येक सामान्य निवासी का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है। एनपीआर में किस तरह का डेटा शामिल किया जाएगा?     राष्ट्रीयता घोषित व्यक्ति का नाम     जन्म तिथि     जन्म स्थान     मां का नाम     पिता का नाम     लिंग     वैवाहिक स्थिति     पति का नाम यदि विवाहित है तो     स्थाई आवासीय पता     शैक्षिक योग्यता     व्यवसाय वर्तमान पता पर रहने की अवधि     सामान्य निवास का पता     घर के मुखिया से संबंध आदि एनपीआर की वर्तमान स्थिति क्या है? राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए डेटा 2010 में भारत की जनगणना 2011 के साथ एकत्र किया गया था। जनगणना के दौरान एकत्र किए गए डेटा को 2015 में … Read more

IAS मीणा की सुरक्षा याचिका ठुकराई हाईकोर्ट ने, मणिपुर जाने से इनकार नहीं

जबलपुर  मणिपुर-त्रिपुरा कैडर के आईएएस एमएल मीणा को हाईकोर्ट की जबलपुर बैंच से करारा झटका लगा है. IAS मीणा की वह याचिका निरस्त कर दी गई है, जिसके जरिए उन्होंने अपने मूल कैडर मणिपुर से दूसरे राज्य में ट्रांसफर की मांग की थी. उन्होंने याचिका दायर करते हुए कहा था कि दो विधायकों से मारपीट के कारण उनकी जान को खतरा है. हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस डीके पालीवाल की युगलपीठ ने इस मामले में सुनवाई की. क्या है IAS मीणा का ट्रांसफर मामला? दरअसल, आईएएस अधिकारी एम एल मीणा की ओर से दायर याचिका में अपने मूल कैडर मणिपुर से दूसरे राज्य में ट्रांसफर किए जाने की राहत चाही गई थी. याचिका में कहा गया था कि उनका वर्ष 2006 में मणिपुर में दो विधायकों द्वारा उनके साथ कथित मारपीट की गई थी. मणिपुर में उनकी जान को खतरा है और सुरक्षा कारणों से उन्हें मणिपुर में वापस भेजा जाना अनुचित है. सुनवाई में कोर्ट ने क्या पाया? हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि 2001 बैच के आईएएस अधिकारी मीणा का मूल कैडर मणिपुर-त्रिपुरा है. उनका स्थानांतरण पूर्व में मध्य प्रदेश कर दिया गया था. इसके बाद उन्हें उनके मूल कैडर में वापस भेजने के आदेश जारी किए गए थे. वह विगत चार सालों से ड्यूटी से अनुपस्थित हैं, साल 2020 की आईबी रिपोर्ट में याचिकाकर्ता को मणिपुर में खतरा होने का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया. सरकार जिम्मेदारी तय करने के लिए स्वतंत्र युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सरकार यह तय करने के लिए स्वतंत्र है कि अधिकारी को किस स्थान पर कार्य करना है. युगलपीठ ने याचिकाकर्ता पर कथित हमले के संबंध में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों पर भी संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि याचिका में किसी विधायक के विरुद्ध की गई एफआईआर नंबर, थाना या अन्य विवरण का उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे पता चले कि आपराधिक मामला दर्ज भी हुआ था.

पहचान बदलकर 19 साल तक रही फरार, बैंक घोटाले की आरोपी महिला गिरफ्तार

इंदौर   कहते भी हैं कि आरोपी कितना भी शातिर क्यों न हो, एक न एक दिन वह पुलिस की गिरफ्त में आ ही जाता है. ये बात एक बार फिर साबित हो गई. बेंगलुरु के एक सरकारी बैंक को एक महिला ने अपने पति के साथ मिलकर गच्चा दिया. बैंक को 8 करोड़ की चपत लगाकर दंपती लगातार फरार चल रहे थे. इस दौरान महिला के पति की मौत हो गई. 19 साल से फरार महिला गिरफ्तार महिला ने इसके बाद अपनी फेस सर्जरी करवाई और कई शहरों में छिपी रही. आखिरकार 19 साल से फरार चल रही महिला को सीबीआई नई तकनीक के आधार पर इंदौर से दबोच लिया. उसे बेंगलुरु ले जाया गया है. महिला ने अपनी पहचान छुपाई लेकिन सीबीआई ने इमेज सर्च एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर की मदद से सफलता पाई. कंपनी बनाकर लगाया बैंक को चूना मामले के अनुसार धोखाधड़ी का ये मामला 2002 से 2005 के बीच का है. महिला ने अपने पति के साथ मिलकर बेंगलुरु के एक सरकारी बैंक से 8 करोड रुपए की धोखाधड़ी की. 1 अगस्त 2006 को सीबीआई की बेंगलुरु शाखा ने दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज की. मामला दर्ज होते ही दंपती अपनी पहचान छुपाकर रहने लगे. इस दौरान दंपती ने इंदौर को मुख्य अड्डा बनाया. ये महिला उस समय खुद के द्वारा बनाई गई एक कंपनी की डायरेक्टर थी. इसी कंपनी के सीईओ उसके पति रामानुजन मुथुरामलिंगम शेखर थे. नाम बदलकर रहने लगे आरोपी पति-पत्नी इसी कंपनी के नाम पर दंपती ने बैंक को चूना लगाया. धोखाधड़ी के बाद ये दंपती कई शहरों में छुपते रहे. साथ ही इन लोगों ने इंदौर में डेरा डाल लिया. पति ने अपना नाम कृष्ण कुमार गुप्ता और पत्नी ने अपना नाम गीता कृष्ण कुमार गुप्ता रख लिया. वहीं, सीबीआई लगातार दोनों आरोपियों की तलाश कर रही थी. इसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी दंपती इंदौर में रह रहे हैं. इसके बाद जांच पड़ताल की तो जानकारी सही पाई गई. आरोपी महिला को बेंगलुरु की जेल भेजा सीबीआई को ये भी पता चला कि आरोपी महिला के पति रामानुजम की 2008 में मौत हो गई थी. इसके बाद आरोपी महिला ने अपने फेस सर्जरी करवाई और बेफिक्र होकर रहने लगी. लेकिन सीबीआई ने इमेज सर्च एनालिसिस सॉफ्टवेयर और अन्य तकनीक का प्रयोग करते हुए महिला की फोटो का मिलान किया और उसके बाद गिरफ्तार कर लिया. महिला को बेंगलुरु ले जाया गया, वहां पर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. 

प्रशासनिक सेवा से धरातल तक: मंडला में कलेक्टर-मंत्री की अनोखी पहल, लोगों ने की सराहना

मंडला  मध्य प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके और कलेक्टर सोमेश मिश्रा का अलग अंदाज को देखने मिला. मंत्री और कलेक्टर नैनपुर प्रवास के बाद चिराईडोंगरी पहुंचे. यहां पर शासकीय कृषि प्रक्षेत्र चिरईडोंगरी में खेतिहर मजदूरों द्वारा धान के रोपे लगाए जा रहे थे. कृषकों को देखकर मंत्री संपतिया उइके और कलेक्टर सोमेश मिश्रा उनके बीच जाकर धान की रोपाई करने लगे. वहीं, किसान महिलाओं ने मंत्री और कलेक्टर को अपने बीच पाकर उत्साह से पाटा गीत गाया. इस अवसर पर मंत्री उइके ने कहा कि, ''इस प्रदेश का हर एक किसान अपनी मिट्टी, खेत और फसल से अत्यधिक लगाव रखता है.'' उन्होंने प्रार्थना की कि, ''हम सभी किसानों की फसलें खूब लहलहाएं धन धान्य से परिपूर्ण रहें. कृषि हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है.'' खेती की तकनीकी में आया बदलाव कैबिनेट मंत्री ने कहा, ''हम चाहे किसी भी पद पर क्यों ना पहुंच जायें, अपने इस मूल काम को कभी नहीं छोड़ना चाहिए. यह सीख हमें आने वाली पीढ़ियों को देने की जरूरत है. समय के साथ खेती की तकनीकी में भी बदलाव आया है. पहले हम पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई करते थे. अब इसका स्थान पैडी ट्रांसप्लांटर ने ले लिया है. यह खेती का आसान और किफायती तरीका है. किसान भाइयों को अपनी खेती में इनका इस्तेमाल करना चाहिए.'' इसी दौरान कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने पैडी ट्रान्सप्लांटर मशीन चलाकर धान की रोपाई की. मंत्री और कलेक्टर की इस अभिनव पहल की चारों तरफ तारीफ हो रही है. कुम्भार सशक्तिकरण जागरूकता शिविर का आयोजन मंत्री संपतिया उइके ने गुरुवार को नैनपुर के शासकीय स्नातक महाविद्यालय में ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत आयोजित कुम्भार सशक्तिकरण जागरूकता शिविर में सहभागिता की. यह योजना पारंपरिक कुम्भार शिल्प को संरक्षित करने तथा इससे जुड़े कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है. मंत्री ने कुम्हारों की मिट्टी की कला के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 270 व्यक्तियों को दिए प्रमाण पत्र दिए. शिविर के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक उपकरणों, तकनीकों एवं डिज़ाइन नवाचारों की जानकारी दी गई, इससे वे अपनी उत्पादन क्षमता और बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकेंगे. आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनेगा प्रशिक्षण मंत्री ने कहा, ''यह प्रशिक्षण न केवल उनके आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनेगा, बल्कि स्वरोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा. साथ ही युवाओं को ग्रामोद्योग के माध्यम से स्वावलंबन की प्रेरणा भी मिलेगी.'' कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, महाविद्यालय स्टाफ तथा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कुम्भार भाई-बहन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. स्कूल में किया पौधरोपण वहीं कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके ने नैनपुर के रेलवे स्कूल प्रांगण में एक साथ 2 हजार पौधे रोपे. शिविर के दौरान माध्यमिक शिक्षा मंडल की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर मंत्री संपतिया उइके तथा कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने सम्मानित किया. कृषि विभाग की ओर से प्रकाशित की गई लघु धान्य पौष्टिक व्यंजन पत्रिका का विमोचन भी किया गया. मंत्री संपतिया उइके नैनपुर में आयोजित जन शिकायत निवारण शिविर में भी शामिल हुईं. इस दौरान उनके साथ नगर पालिका परिषद अध्यक्ष नैनपुर कृष्णा पंजवानी, कलेक्टर सोमेश मिश्रा, श्रेयांश कूमट मौजूद रहे. सभी ने लोगों की समस्या सुनीं. 

मारपीट केस में सख्ती: हाई कोर्ट ने पुलिस को दिया घायल के फोटो का अनिवार्य आदेश

इंदौर   पुलिस की कार्यप्रणाली अक्सर चर्चा में रहती है. एक बार फिर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस के काम करने के तरीके पर हैरानी जताई. इंदौर खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि जिस व्यक्ति द्वारा अग्रिम जमानत याचिका पेश की गई है, उसने गंभीर अपराध किया है. इसके बाद भी पुलिस द्वारा सामान्य धाराओं में केस दर्ज किया गया. घायल व्यक्ति की तस्वीरें लेगी पुलिस जिस व्यक्ति के साथ आरोपी पक्ष द्वारा मारपीट की गई, उस फरियादी के गंभीर चोटों से संबंधित फोटो भी पुलिस ने नहीं लिए. हाई कोर्ट जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने डीजीपी को आदेश दिए "मारपीट के मामले में किसी व्यक्ति को चोट लगती है तो पुलिस थाने में उसकी फोटो भी ली जाए. इससे कोर्ट भी देख सके कि जिसने जमानत के लिए अर्जी लगाई है, उस पर किन धाराओं में केस दर्ज हुआ है." गंभीर केस में हल्की धाराएं क्यों लगाईं कोर्ट ने यह भी कहा "मध्य प्रदेश में पुलिस अधिकारियों द्वारा इस तरह के मामलों में रैंकिंग पैटर्न अपना रखा है. गंभीर चोट के मामले में भी हल्की धाराओं में केस दर्ज हो रहे हैं. ऐसे सभी मामलों में पुलिस अधिकारी और डॉक्टर घायल की तस्वीर लेंगे." कोर्ट ने कहा "एक तरफ तो पुलिस पूरे मामले को गंभीर मान रही थी लेकिन इसी मामले में मामूली धाराओं में प्रकरण दर्ज किया." एमएलसी से पूरी तस्वीर साफ नहीं होती अधिवक्ता वरुण रावल के मुताबिक "गंभीर चोट लगने के बाद एमएलसी की जाती है. इस रिपोर्ट में चोट की गंभीरता का जिक्र नहीं किया जाता है. शरीर के जिस हिस्से में चोट लगती है, उसके बारे में लिख दिया जाता है. फोटो अनिवार्य किए जाने से पुलिस और मेडिकल अफसर बंध जाएंगे. वहीं पीड़ित पक्ष के परिजन भी खुद भी फोटो लेकर विकल्प के रूप में साक्ष्य रख सकेंगे, जो उनको सुनवाई के दौरान काफी राहत पहुंचाएंगे."