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ग्वालियर के स्कूलों में आधार अपडेशन कैंप, किशोरों का होगा बायोमैट्रिक अपडेट

 ग्वालियर स्कूली बच्चों को पहले से ही बता दें कि आधार अपडेशन के लिये कौन-कौन से दस्तावेजों की जरूरत होगी, जिससे स्कूलों में लगने जा रहे आधार शिविरों में सभी बच्चों के आधार संबंधी काम हो सकें। यह निर्देश कलेक्टर रुचिका चौहान ने आधार शिविरों की तैयारियों की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिस स्कूल में शिविर लगने जा रहा है उस स्कूल सहित अन्य जनप्रतिनिधि स्कूलों में भी शिविर की तिथियों के बारे में जानकारी दी जाए। सोमवार को कलेक्ट्रेट के सभागार में आयोजित हुई बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य शिक्षा केन्द्र की पहल पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के समन्वय से 'विद्यार्थी के लिए आधार, अब विद्यालय के द्वार' अभियान के तहत जिले के सभी विकासखंडों के अंतर्गत कुल 32 स्कूलों में 10–10 दिवसीय आधार शिविर लगने जा रहे हैं। शिविरों की तिथियां निर्धारित कर दी गई हैं। इन शिविरों में 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग के स्कूली बच्चों का अनिवार्य बायोमैट्रिक अपडेट-2 खासतौर पर किया जायेगा। साथ ही आधार पर सुधार संबंधी अन्य कार्य भी कराए जायेंगे। यह पहल मुख्य रूप से बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) पर केंद्रित है। इसमें उनके आधार में उंगलियों के निशान, आईरिस स्कैन और एक तस्वीर अपडेट करना शामिल है। पहला अपडेट तब आवश्यक है जब बच्चा 5 वर्ष का हो जाए। पहला एमबीयू 5 से 7 वर्ष की आयु के बीच पूराहोने पर निःशुल्क रखा गया है। विद्यार्थी के उम्र 7 वर्ष की आयु से अधिक होने के बाद शुल्क लागू होगा। दूसरा एमबीयू तब आवश्यक है जब विद्यार्थी 15 वर्ष का हो जाएगा। तीसरा एमबीयू 15 से 17वर्ष की आयु के बीच पूरा होने पर निःशुल्क है, लेकिन 17 वर्ष की आयु के बाद शुल्क लागू होगा।

181 और 1098 हेल्पलाइन बन रही महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की कड़ी

जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों के लिए हैल्पलाइन 181 और 1098 बनी संबल महिलाओं और बच्चों के लिए 181 व 1098 हैं अब भरोसेमंद सहारा जरूरतमंदों के लिए मदद का संदेश: 181 और 1098 बनी संबल 181 और 1098 हेल्पलाइन बन रही महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की कड़ी भोपाल  जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों के लिए प्रदेश में चलाई जा रही हैल्पलाइन 181 और 1098 संबल बन गई है। महिला एवं बाल विकास सचिव श्रीमती जी.व्ही. रश्मि ने सोमवार को विभागीय नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण कर हैल्पलाइन नम्बर 181 (महिला हैल्पलाइन) और 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन) की कार्यप्रणाली का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कॉल प्रबंधन, शिकायत पंजीकरण एवं उनके निराकरण की प्रक्रिया का विस्तृत अवलोकन किया। सचिव श्रीमति रश्मि ने कॉल रिस्पॉन्स, डेटा प्रबंधन प्रणाली तथा आपात स्थितियों में विभिन्न विभागों के साथ समन्वय की कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने नियंत्रण कक्ष में कार्यरत कर्मचारियों से चर्चा कर उनकी चुनौतियों की जानकारी भी प्राप्त की। श्रीमती रश्मि ने कहा कि हैल्पलाइन का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं है, बल्कि प्रत्येक पीड़ित महिला और बच्चे को सुरक्षा, सहयोग और न्याय दिलाना है। दोनों हेल्पलाइनें पूरी निष्ठा और सेवा-भाव से कार्य करते हुए समय पर सहायता सुनिश्चित कर रही हैं। उन्होंने 181 और 1098 टीम की प्रतिबद्धता को सराहते हुए भविष्य में कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए दिशा-निर्देश भी दिए। इस अवसर पर संयुक्त संचालक डॉ. प्रज्ञा अवस्थी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।  

मध्यप्रदेश की नदियाँ हैं भारत की संस्कृति की धारा, मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश की नदियाँ भारत की सनातन संस्कृति की संवाहक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश है नदियों का मायका भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत का हृदय मध्यप्रदेश, यहां के अप्रतिम प्राकृतिक सौंदर्य और अथाह, अविरल जल राशि के लिए समूचे विश्व में जाना जाता है। मध्यप्रदेश में बहने वाली नदियां भारत की सनातन संस्कृति की संवाहक हैं, जिनके किनारे सदियों से हमारी शाश्वत सभ्यता फल फूल रही है। यहाँ की पहचान केवल प्राचीन धरोहरों, मंदिरों, किलों और जनजातीय संस्कृति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ की छोटी-बड़ी 750-800 नदियों से भी है।प्रदेश की इस समृद्ध जल राशि के कारण ही मध्यप्रदेश को ‘नदियों का मायका’ कहा जाता है। मध्यप्रदेश से उद्गमित छोटी-बड़ी नदियाँ, गंगा, नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी, माही और महानदी जैसे विशाल नदी प्रवाह तंत्रों में समाहित होकर पूरे भारत की जीवन-रेखा बनाती हैं। मध्यप्रदेश की नदियाँ केवल भौतिक जल स्रोत नहीं, बल्कि संस्कृति की वाहक भी हैं। नदियों के किनारे प्राचीन नगरों, धार्मिक स्थलों और व्यापारिक मार्गों का विकास हुआ। क्षिप्रा नदी के तट पर बसा उज्जैन प्राचीन समय से ही खगोल विज्ञान और श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लंग के कारण धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। प्राचीन उज्जयिनी सिंहस्थ ‘कुंभ’ समागम का तीर्थ क्षेत्र भी है। नर्मदा नदी के तट पर बसे महेश्वर और ओंकारेश्वर शहर शैव परंपरा के प्रमुख तीर्थ-स्थल हैं। ओंकारेश्वर 12 ज्योर्तिलिंगों में एक है। बेतवा नदी के तट औऱ प्रवाह क्षेत्र के ओरछा, सांची और विदिशा मध्यकालीन भारत की सांस्कृतिक यशोगाथा के प्रतीक होने के साथ ही बौद्ध संस्कृति के उदयावसान के साक्षी भी रहे हैं। मध्यप्रदेश का अधिकांश भूभाग विंध्य और सतपुड़ा की पहाड़ियों से आच्छादित है। यही कारण है कि यह अनेक महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम स्थल है। नर्मदा और ताप्ती पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ हैं, जबकि सोन, क्षिप्रा, चंबल, बेतवा उत्तर और पूर्व की ओर बहकर अपनी अथाह जलराशि के साथ गंगा-यमुना में समाहित हो जाती हैं। माही, वैंगंगा, तवा जैसी नदियाँ भी अलग-अलग बेसिन को जल-पोषित करती हैं। इस भौगोलिक विविधता ने ही प्रदेश को नदी समृद्ध राज्य के रूप में प्रतिष्ठा दी है। पुण्य सलिला मां नर्मदा का दूसरा नाम रेवा भी है।भगवान शिव की पुत्री मानी जाने वाली रेवा मध्यप्रदेश और गुजरात दोनों की जीवन रेखा है। मान्यता है कि मां नर्मदा के दर्शन मात्र से ‘गंगा स्नान’ का पुण्य मिलता है। श्रद्धालुओं के लिए 3000 किमी से अधिक लंबी नर्मदा परिक्रमा जीवन का सबसे बड़ा तप माना जाता है। मां नर्मदा अमरकंटक से जन्म लेकर लेकर जबलपुर में धुआंधार जलप्रपात बनाती हुई गुजरात को अभिसिंचित कर लगभग 1312 किलोमीटर की यात्रा तय कर अरब सागर की खंभात की खाड़ी में विराम पाती हैं। महाभारत काल में चंबल नदी का नाम चर्मणवती था। यह भगवान परशुराम के जन्म-स्थल जानापाव से निकली। यह राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा बनाती है। जानापाव से निकलकर चंबल नदी मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित ‘पंचनदा’ संगम पर यमुना में परिमित जलराशि के साथ समाहित हो जाती है। बेतवा (वेत्रवती)  को मध्यप्रदेश की गंगा भी कहा जाता है। इसके तट पर राम राजा का ऐतिहासिक शहर ओरछा बसा है। विदिशा और सांची जैसे नगरों को भी इसने पोषित किया है। विंध्यांचल पर्वत से निकल कर लगभग 590 किलोमीटर दूरी तय कर यमुना नदी में जा मिलती है।  मोझदायिनी क्षिप्रा नदी के तट पर प्राचीन उज्जयिनी शहर बसा है। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर और सिंहस्थ कुम्भ समागम का यह तीर्थ क्षेत्र विश्वविख्यात है। क्षिप्रा को भी मालवा की गंगा कहा जाता है। क्षिप्रा नदी इंदौर जिले में उज्जैनी-मुंडला गांव के ककड़ी-बड़ली नामक स्थान से निकल कर लगभग 195 किलोमीटर की यात्रा के बाद चंबल नदी में मिल जाती है। रामायण और महाभारत में सोन नदी का उल्लेख मिलता है। इसे पुरुष वाचक ‘नद’ की संज्ञा भी दी गई है। महर्षि वाल्मीकि ने इसे सुभद्र कहा है। यह नदी प्रदेश में शहडोल और रीवा के क्षेत्रों को सींचती हुई बिहार में प्रवेश कर लगभग 784 किलोमीटर लंबी यात्रा के बाद पतितपावनी गंगा से संगम करती है। ताप्ती नदी सतपुड़ा की पहाड़ियों से निकलकर गुजरात तक जाती है और लगभग 724 किलोमीटर की दूरी तय कर खंभात की खाड़ी में मिल जाती है। माही नदी की विशेषता है कि यह कर्क रेखा को दो बार पार करती है। माही नदी भी मध्यप्रदेश से गुजरात तक 583 किलोमीटर की यात्रा कर खंभात की खाड़ी में मिल जाती है। मध्यप्रदेश से उद्गम पाने वाली अन्य प्रमुख नदियों में वैंनगंगा गोंडवाना क्षेत्र की जीवनरेखा है। तवा नर्मदा की सहायक नदी है, जिस पर मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा बाँध बना है। कालीसिंध, पार्वती, केन, शक्कर, जोहिला  स्थानीय कृषि और वन्य जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। मध्यप्रदेश की नदियों पर अनेक सिंचाई एवं जलविद्युत परियोजनाएँ बनी हैं, जिनसे लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है। चंबल-पार्वती-कालीसिंध रिवर लिंक परियोजना मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों के साझा महत्व की परियोजना है। केन-बेतवा रिवर लिंक परियोजना मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए समृद्धि की गंगोत्री मानी जा रही है। ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्च परियोजना मध्यप्रदेश के बुरहानपुर एवं खंडवा और महाराष्ट्र के अकोला, अमरावती और बुलढाणा ज़िलों के भू-जल संकट और अनियमित वर्षा की समस्या का स्थायी समाधान मानी जा रही है। बाणसागर परियोजना सोन नदी पर बनी है। इससे शहडोल, रीवा और सीधी जिलों को लाभ पहुंच रहा है। तवा परियोजना नर्मदा की सहायक तवा पर निर्मित है। इससे होशंगाबाद क्षेत्र को सिंचाई और पेयजल की पूर्ति हो रही है। गांधीसागर परियोजना चंबल नदी पर बनाई गई है। इससे  जलविद्युत बनाई जा रही है, साथ ही बड़े क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। ओंकारेश्वर एवं बरगी परियोजना नर्मदा नदी पर निर्मित है। यह प्रदेश की ऊर्जा और जल आपूर्ति के प्रमुख आधारों में से एक है।

MP में बारिश का कहर: नदी के उफान से ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, युवकों का रेस्क्यू

बैतूल ग्रामीणों की मदद से सुरक्षा उपकरण और रस्सियों का इस्तेमाल कर नदी के बीच करीब 30 मीटर दूर चट्टान तक पहुंचकर तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।  ट्रैक्टर में सवार पांच लोगों में से दो युवक तैरकर बाहर निकल आए, जबकि तीन युवक ट्रैक्टर-ट्रॉली के सहारे नदी के बीच फंसे रह गए। सूचना मिलते ही थाना चोपना से पुलिस टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से सुरक्षा उपकरणों और रस्सियों का उपयोग कर पुलिस टीम ने अपनी जान जोखिम में डालते हुए करीब 30 मीटर दूर चट्टान तक पहुंच बनाई। साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ग्राम गुवाड़ी निवासी सुरेश उइके, आदित्य उइके, आयुष उइके, पीयूष उइके एवं शर्मा भलावी ने पुलिस को बताया कि वे अपने पिता के सेवानिवृत्त होने पर उनका सामान सारणी से लेकर गांव लौट रहे थे। रात होने के कारण रपटे पर पानी के बहाव का अंदाजा नहीं लगा पाए और हादसे का शिकार हो गए। बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम की वजह से अगस्त महीने के आखिरी दिनों में पूरा मध्यप्रदेश भीगेगा। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के जिलों में ज्यादा असर देखने को मिलेगा। यहां 21 अगस्त से अति भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे में आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में भारी बारिश हो सकती है। यहां साढ़े 4 इंच तक पानी गिरने का अनुमान है। इसके बाद सिस्टम और स्ट्रॉन्ग होगा। 21 और 22 अगस्त को दक्षिणी और पूर्वी हिस्सा तरबतर हो जाएगा। नदी में ट्रॉली पलटी, चट्टान में फंसे 3 युवक बैतूल के चोपना थाना क्षेत्र में भड़ंगा नदी में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे बटकीडोह-नारायणपुर के बीच भड़ंगा नदी के रपटे पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पानी के तेज बहाव में पलट गई। ट्रॉली पर सवार 5 युवकों में से 2 तैरकर बाहर निकल आए, जबकि 3 युवक नदी के बीच चट्टान पर फंस गए। सूचना मिलते ही चोपना टीआई नरेंद्र सिंह परिहार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू कराया। ग्रामीणों की मदद से सुरक्षा उपकरण और रस्सियों का इस्तेमाल कर नदी के बीच करीब 30 मीटर दूर चट्टान तक पहुंचकर तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। 

साढ़े 82 किमी लंबे ग्वालियर-झांसी हाईवे की मरम्मत होगी, खर्च होगा 1.72 करोड़

ग्वालियर ग्वालियर से झांसी के बीच 101 किमी. लंबे फोरलेन हाइवे की मरम्मत का काम नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) द्वारा कराया जाएगा है। एनएचएआइ इस हाइवे पर टोल की वसूली तो कर ही रही है, लेकिन अब हाइवे पर जगह-जगह गड्ढों की समस्या पैदा हो गई है। ऐसे में अब 1.72 करोड़ रुपये की लागत से साढ़े 82 किमी की लंबाई में गड्ढों को भरने और जहां-जहां जरूरत है, वहां पेवर्स लगाने का काम भी किया जाएगा। इससे पूर्व में लगभग 1.75 करोड़ रुपये की लागत से वर्षा के दौरान ग्वालियर-आगरा हाइवे की मरम्मत का काम कराया गया था, लेकिन अब ग्वालियर-झांसी हाइवे पर भी मरम्मत की जरूरत पड़ रही है।   बारिश में भारी वाहन से सड़क हो जाती है खराब दरअसल, वर्षा के सीजन में हाइवे पर निकलने वाले भारी वाहनों के कारण सड़कों की हालत खराब होती है। गड्ढों के कारण ब्लैक स्पॉट के साथ ही एक्सीडेंट स्पॉट भी तैयार हो जाते हैं। इनके कारण हाइवे पर एक्सीडेंट होने की संभावना बनी रहती है। इसके अलावा इंटरचेंज के आसपास भी ब्रेक लगने के कारण सड़क खराब होती है। इसके चलते इन स्थानों पर काम कराया जाएगा। ग्वालियर-झांसी हाइवे पर हर दिन 30 हजार से अधिक वाहनों का आवागमन होता है। इसके कारण सड़क की स्थिति जल्द खराब हो जाती है। तीन माह में होगी मरम्मत, तीन साल का रखरखाव भी शामिल एनएचएआइ ने हाइवे के गड्ढों को भरने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की है, जिसकी शर्तों के अनुसार चयनित कंपनी को तीन माह में साढ़े 82 किमी. लंबाई में जगह-जगह खराब हुई सड़क को ठीक करना होगा। इसके अलावा तीन वर्षों तक इस कार्य का रखरखाव भी करना होगा। यदि किया गया कार्य खराब होता है, तो अगले तीन साल तक उसे दोबारा करना होगा। सांसद ने भी की थी मांग सांसद भारत सिंह कुशवाह ने गत जुलाई माह में भोपाल में एनएचएआइ के क्षेत्रीय अधिकारियों से मुलाकात कर नेशनल हाइवे 44 के ही ग्वालियर-झांसी खंड के अंतर्गत डबरा से ग्वालियर के बीच बिलौआ तिराहा और अरु तिराहा पर बने हुए ब्लैक स्पॉट खत्म करने के साथ ही हाइवे की मरम्मत की भी मांग की थी। सांसद ने मांग की थी कि इन दोनों स्थानों पर फ्लाइओवर का निर्माण कर दिया जाए, ताकि यहां हो रहे हादसों की संभावना काफी कम हो जाए। एनएचएआइ के अधिकारियों ने भी इस दिशा में काम करने का आश्वासन दिया था।

श्रीमद्भागवत गीता को मिलेगा विश्वविद्यालयों में स्थान, छात्रों को तीन क्रेडिट अंक

भोपाल युवाओं के मन में नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना के लिए मध्य प्रदेश सरकार श्रीमदभागवत गीता की ओर मुड़ी है। तय हुआ है कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्नातक स्तर की कक्षाओं में नियमित तौर पर श्रीमदभागवत गीता पढ़ाई जाएगी। इसकी कक्षाएं ऑनलाइन चलेंगी और इसके लिए विद्यार्थियों को तीन क्रेडिट अंक दिए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा में ही इस पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है। 18 अध्यायों को पांच भागों में विभाजित किया इसके तहत गीता के 18 अध्यायों को पांच भागों में विभाजित कर पाठ्यक्रम तय किया गया है। इन्हें 45 घंटों में पूरा किया जाना है। इन कक्षाओं को सप्ताह में पांच दिन चलाया जाएगा। कक्षाएं ऑनलाइन चलेंगी और विद्यार्थियों को यह सुविधा होगी कि अपने सुविधा के अनुसार कक्षा का समय और भाषा चुन लें। यह पाठ्यक्रम हिंदी, अंग्रेजी सहित 13 भाषाओं में उपलब्ध होगा। पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थी को क्रेडिट अंक दिए जाएंगे।   पाठ्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं और महाविद्यालयों के प्राचार्यों को इस पाठ्यक्रम के लिए विद्यार्थियों के पंजीयन का आदेश जारी कर दिया है। शिक्षा मंत्रालय के स्वयं पोर्टल पर यह पंजीयन 31 अगस्त तक होना है। सभी विश्वविद्यालयों औैर महाविद्यालयों से इस पाठ्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया है ताकि इसकी निगरानी भी उच्च स्तर से की जा सके। मुख्यमंत्री ने दिया था विचार श्रीकृष्ण पाथेय योजना के क्रियान्वयन को लेकर पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बैठक की थी। इसमें मुख्यमंत्री का ही विचार था कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान होने वाली प्रतियोगिताओं को विस्तार दिया जाए। अब केवल प्रतियोगिता की जगह विद्यार्थियों को आनलाइन ही गीता पढ़ाई भी जाए ताकि नई पीढ़ी में उस ज्ञान का विस्तार हो। स्वयं पोर्टल पर ऐसे पाठ्यक्रम भी – किशोर स्वास्थ्य – अपना आहार – प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और सुरक्षा प्रबंधन – परिचयात्मक नीतिशास्त्र – योग शिक्षक प्रशिक्षण (इन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के लिए भी क्रेडिट अंक निर्धारित हैं) अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा ने कहा नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा और मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर है। इसी में श्रीमदभागवत गीता का अध्ययन शामिल किया गया है। इससे विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों और भारतीय चिंतन परंपरा के प्रति समझ बढ़ेगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से जीआईएस में हुए एमओयू को मिला ठोस स्वरूप

जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने मध्यप्रदेश में एआई, नवाचार और अनुसंधान एवं विकास के अवसर तलाशे मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से जीआईएस में हुए एमओयू को मिला ठोस स्वरूप जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने मध्यप्रदेश में एआई और नवाचार के नए अवसर तलाशे मध्यप्रदेश में अनुसंधान और विकास के अवसरों पर जर्मनी की खास नजर एआई, नवाचार और R&D में साझेदारी की संभावनाओं को लेकर जर्मन टीम का दौरा मैं चाहूँ तो इसे शॉर्ट और सोशल मीडिया फ्रेंडली हेडलाइन में भी बदल सकता हूँ भोपाल  इंदौर स्थित इन्फोबीन्स कैंपस में सोमवार को “एमपी-ग्लोबल इनोवेशन एवं अनुसंधान और विकास एक्सचेंज प्रोग्राम-2025” की शुरुआत उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। पाँच दिवसीय इस आयोजन के प्रथम दिवस पर जर्मन व्यवसायिक प्रतिनिधिमंडल ने कॉर्पोरेट इंटरैक्शन की श्रृंखला में भाग लिया और मध्यप्रदेश में नवाचार तथा अनुसंधान और विकास की संभावनाओं का गहन अवलोकन किया। यह कार्यक्रम एमपीआईडीसी और जर्मन-इंडिया इनोवेशन कोर (जीआईआईसी) के बीच हुए समझौते का ठोस स्वरूप है, जिसे इन्क्यूबेशन मार्क्स के सहयोग से आयोजित किया गया। नवंबर 2024 में मुख्यमंत्री की जर्मनी यात्रा तथा भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के दौरान हुए इस एमओयू ने द्विपक्षीय सहयोग को नए आयाम दिए हैं। इसके तहत जर्मन निवेशकों को मध्यप्रदेश में प्रमुख निवेश स्थान के रूप में आकर्षित करने, नवाचार और अनुसंधान को सशक्त बनाने तथा तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम में “भारत से वैश्विक स्तर के डिजिटल उत्पाद बनाना”, "भारतीय नवाचार परिदृश्य" और “एजिलिटी के साथ स्केलिंग- भारतीय और जर्मन दृष्टिकोण” विषयों पर फायरसाइड चैट आयोजित की गई। इस दौरान दोनों पक्षों के विशेषज्ञों ने नवाचार, अनुसंधान और विकास तथा सीमा-पार कारोबारी सहयोग पर अपने विचार साझा किए। प्रतिनिधियों ने टैलेंट एक्विज़िशन प्रैक्टिस, कल्चर-फोकस्ड एचआर मॉडल और शक्ति महिला सशक्तिकरण पहल का भी अवलोकन किया। भारतीय यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स जैसे जोहो, फ्रेशवर्क्स और ब्राउज़रस्टैक की सफलता का उल्लेख करते हुए जर्मन प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश में एआई विकास, तकनीकी साझेदारी, संभावित अनुसंधान एवं विकास केंद्र और युवाओं के लिए रोजगार अवसर तलाशने में गहरी रुचि दिखाई।  

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस MLA आरिफ मसूद पर फर्जीवाड़े की FIR 3 दिन में दर्ज करने का निर्देश दिया

भोपाल  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं. यह मामला इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता के लिए फर्जी सेल डीड जमा करने से जुड़ा है. अदालत ने शुरुआती रूप से इसे धोखाधड़ी (IPC की धारा 420, 467, 468) का मामला माना है. जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान भोपाल पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ तीन दिन के अंदर एफआईआर दर्ज की जाए. विधायक आरिफ मसूद का भोपाल में इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज संचालित हो रहा है जिसमें कई गड़बड़ी मिली थी। इस पर उच्च शिक्षा विभाग ने इसकी मान्यता रद्द कर दी थी। छात्रहित को देखते हुए कॉलेज को कंटिन्यू कर दिया गया पर यहां नए प्रवेश पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई। 3 दिन में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश विधायक आरिफ मसूद के इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने सख्त रूप दिखाया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इतने सालों तक कोई भी कॉलेज ऐसे हाल में बिना राजनीतिक संरक्षण के नहीं चल सकता है। मामले में हाईकोर्ट ने विधायक आरिफ मसूद पर केस दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने भोपाल कमिश्नर को 3 दिन में एफआईआर दर्ज कर इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही जांच की निगरानी के लिए पुलिस महानिदेशक को SIT (विशेष जांच दल) गठित करने का आदेश भी दिया गया है. यह टीम 90 दिनों में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी. इस मामले में लापरवाही बरतने वाले विभागीय अधिकारियों पर भी आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा. यह मामला शिक्षा विभाग द्वारा कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने के बाद सामने आया. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फर्जी सेल डीड के आधार पर पिछले 20 साल से चल रहे कॉलेज मामले में कड़ा रुख दिखाया है. कोर्ट ने कॉलेज में नए एडमिशन पर भी रोक लगा दी है. नए सत्र के एडमिशन पर रोक वहीं, इस पूरे मामले में हाई कोर्ट ने छात्रों के भविष्य को देखते हुए कहा कि फिलहाल आरिफ मसूद का कॉलेज जारी रखा जाएगा। हालांकि, हाई कोर्ट ने नए सत्र के लिए एडमिशन देने पर रोक लगा दी है। वहीं, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद हाई कोर्ट के स्पेशल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं। हो सकता है 20 साल से चल रहा हो ये फर्जीवाड़ा- कोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधर की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। जज ने हैरानी जताते हुए कहा कि संभव नहीं है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के चलते इस तरह से 20 सालों से फर्जीवाड़ा चल रहा हो। कांग्रेस विधायक ने फर्जी सेल डीड दी हाई कोर्ट ने कहा कि आरिफ मसूद के राजनीतिक कनेक्शन ऐसे हैं कि साल 2004 में आरिफ मसूद ने फर्जी सेल डीड दी। उसके बाद भी सरकार ने आरिफ मसूद को दोबारा सेल डीड जमा करने के निर्देश दिए लेकिन दोबारा जमा की गई सेल डीड को 20 साल तक किसी ने भी जांचने की हिम्मत नहीं जुटाई। हाई कोर्ट ने कहा है कि मामले में न केवल आरिफ के खिलाफ कार्रवाई हो बल्कि उन अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई होना चाहिए, जिनकी इस पूरे मामले में भूमिका है। रद्द कर दी गई थी मान्यता दरअसल, भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की अमन एजुकेशन द्वारा संचालित कॉलेज की पिछले दिनों मान्यता रद्द कर दी गई थी। उच्च शिक्षा विभाग ने इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके पहले कॉलेज को अंतरिम मान्यता मिली थी, लेकिन कॉलेज की ओर से जरूरी कागजात और शर्तें पूरी नहीं करने पर विभाग ने मान्यता रद्द कर दी थी। कांग्रेस विधायक मसूद पर आरोप है कि उन्होंने संस्था के फर्जी दस्तावेज लगाकर कॉलेज की मान्यता ली थी जिसमें संबंधित अधिकारियों की भी नीली भगत के आरोप लगे थे। क्या था पूरा मामला? 9 जून को राज्य सरकार ने भोपाल के इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता को रद्द कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ विधायक आरिफ मसूद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. सुनवाई के दौरान अदालत ने कॉलेज की जमीन और मान्यता से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए थे. हाईकोर्ट में जो डाक्यूमेंट पेश किए गए उनकी जांच में खुलासा हुआ कि 2 अगस्त 1999 को अमन एजुकेशन सोसायटी की तरफ से समिट की गई पहली सेल डीड फर्जी थी. इसके बाद में पेश की गई दूसरी सेल डीड भी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं पाई गई. कोर्ट ने कहा कि इतने सालों तक जाली दस्तावेजों के सहारे कॉलेज का संचालन प्रशासनिक और राजनीतिक समर्थन के बिना संभव नहीं था.  

मुख्यमंत्री के निर्णय से युवाओं में खासा उत्साह, आगामी वर्ष से पुलिस में भर्तियां करेगा पुलिस भर्ती बोर्ड

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत आगामी 3 वर्षों में पुलिस विभाग में 22500 पदों पर भर्ती की जाएगी। अभी तक पुलिस विभाग में भर्तियां कर्मचारी चयन मंडल द्वारा होती हैं। पुलिस को जल्द से जल्द मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए अब मध्यप्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड' का गठन किया जाएगा और यही बोर्ड पुलिस की भर्तियां करेगा। इससे पुलिस भर्ती में तेजी, पारदर्शिता और परफेक्शन आएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा से युवाओं में खासा उत्साह है और वे इसके लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. ने कहा कि वर्ष 2025 के लिए पुलिस में स्वीकृत पदों की भर्ती 'मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड' की ओर से 'कर्मचारी चयन मंडल' करेगा। वर्ष 2026 से ये भर्तियां 'पुलिस भर्ती बोर्ड' द्वारा ही की जाएंगी। प्रतिवर्ष पुलिस के रिक्त 7500 पदों पर भर्ती की जाएगी और इस प्रकार आगामी 3 वर्ष में पुलिस विभाग के सभी रिक्त 22,500 पद भर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गृह विभाग से जुड़ी सभी सेवाओं के आधुनिकीकरण एवं भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए शीघ्र ही गृह एवं वित्त विभाग की संयुक्त बैठक कर सभी लंबित मामलों का समुचित समाधान कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस, जेल और नगर सेवा एवं सुरक्षा तीनों विभागों के शहीदों की विधवाओं और बच्चों के लिए स्नातक स्तर के सभी पाठ्यक्रमों में विभिन्न प्राथमिकता श्रेणियां में एक अतिरिक्त सीट पर आरक्षण दिये जाने की घोषणा भी की है। वीवीआइपी ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों सहित उप पुलिस अधीक्षक और इससे उच्च अधिकारियों को भी पात्रता अनुसार निर्धारित विशेष भत्ता एवं जोखिम भत्ता दिये जाने का निर्णण भी लिया गया है। पुलिस विभाग को दी जा रही इन सहुलियतों से विभाग की कार्यप्रणाली में सक्रियता आयेगी और अधिकारी एवं कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत होगी और आमजन को सुरक्षा कवच मिलेगा।

उज्जैन : राजसी सवारी मार्ग पर पालकी पर की गई हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा

उज्जैन नगर भ्रमण पर निकले राजाधिराज बाबा महाकाल राजसी सवारी मार्ग पर पालकी पर की गई हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा राजसी सवारी मार्ग पर उमड़ा देश के कोने-कोने से आये भक्तों का जनसैलाब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभामंडपम् में भगवान चंद्रमोलेश्वर का किया पूजन-अर्चन राजसी सवारी में त्रिनेत्रधारी भगवान श्रीमहाकाल के दर्शन कर भाव-विभोर हुए भक्तजन मुख्यमंत्री ने सवारी मार्ग पर डमरु और झांझ बजाकर रजत पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर का किया स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को उज्जैन में निकली राजाधिराज बाबा महाकाल की राजसी सवारी के अवसर पर देश एवं प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से प्रदेशवासियों के कल्याण और मंगलमय जीवन की कामना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देशभर में श्रावण मास में पूर्णिमा से पूर्णिमा तक महादेव की सवारियां निकलती हैं। लेकिन उत्तर और दक्षिण परम्पराओं के अनुसार भादवा (भाद्रपद) के दो सोमवार तक भी बाबा महाकाल की सवारी निकलती है। आज उज्जैन में बाबा महाकाल ने आखिरी (राजसी) सवारी कर नगर भ्रमण किया और अपनी प्रजा (जनता) के हाल-चाल जाने। बाबा ने अपने राजाधिराज स्वरुप में भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से बाबा की भव्य राजसी सवारी के लिए सभी व्यवस्थाएं की गईं और धूमधाम से सवारी की अगवानी की गई। बाबा की सवारी सहित सवारी पथ पर पुष्पवर्षा भी की गई। इस वर्ष विजयादशमी पर्व पर बाबा महाकाल एक बार फिर सवारी के साथ जनदर्शन के लिए पधारेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से कामना करते हुए कहा कि बाबा का शुभाशीष प्रदेशवासियों पर हमेशा बना रहे। कृपावंत भगवान महाकाल सबका कल्याण करें, सबके दुःख हर लें। भगवान महाकालेश्वर की इस वर्ष की श्रावण-भाद्रपद माह में निकलने वाली सवारियों के क्रम में सोमवार,18 अगस्त को सायं 4 बजे राजसी सवारी धूमधाम से निकाली गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभामंडपम में भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन-अर्चन किया। रजत पालकी में विराजित चंद्रमौलेश्वर भगवान अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले तो सम्पूर्ण उज्जयिनी भगवान महाकालेश्वर की जय-जयकार से गुंजायमान हो गई। चारों दिशाओं में भगवान श्रीमहाकाल की भक्ति में लीन भक्तों के नेत्र त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की एक झलक पाकर भाव-विभोर हो उठे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने सवारी निकलने के पूर्व महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप में भगवान चन्द्रमौलेश्वर का पूजन-अर्चन विधिवत रूप से किया। सभा मंडप में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक सतीश मालवीय, विधायक महेश परमार, महापौर मुकेश टटवाल, सभापति श्रीमती कलावती यादव ने भी भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन किया और आरती में सम्मिलित हुए। पूजन के बाद निर्धारित समय पर भगवान महाकाल की पालकी को नगर भ्रमण के लिये रवाना किया गया। पूजन-अर्चन पुजारी पं. घनश्याम शर्मा व अन्य पुजारियों द्वारा सम्पन्न करवाया गया। इस अवसर पर सभा मंडप में पूजन-अर्चन के दौरान संजय अग्रवाल, रवि सोलंकी आदि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंशानुरुप सवारी के मुख्य द्वार पर पहुंचने पर रजत पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई। रजत पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर जैसे ही मुख्य द्वार पर पहुंचे असंख्य श्रद्धालुओं ने भगवान महाकालेश्वर का स्वागत-वन्दन किया। सशस्त्र पुलिस बल के जवानों तथा प्रदेश के विभिन्न बटालियनों के जवानों द्वारा सवारी को सलामी दी गई। पालकी के आगे घुड़सवार दल, सशस्त्र पुलिस बल के जवान आदि की टुकडियां मार्च पास्ट करते हुए चल रही थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सवारी में शामिल हुए और सवारी मार्ग पर उन्होंने ड़मरु और झांझ बजाया। राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर की सवारी में असंख्य श्रध्दालुओं ने सवारी मार्ग पर ड़मरु, झांझ-मंजीरे बजाकर अवंतिकानाथ भगवान महाकालेश्वर की जय जयकार की। भगवान श्रीमहाकाल ने भक्तों को छह रूपों में दिये दर्शन राजसी सवारी में भगवान महाकालेश्वर ने छह विभिन्न स्वरूपों में अपनें भक्तों को दर्शन दिये। भगवान श्रीमहाकाल की राजसी सवारी में रजत पालकी में चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद एवं षष्ठम् सवारी में सप्तधान मुखारविंद के रूपों में भक्तों को दर्शन दिए। भगवान श्रीमहाकालेश्वर की सवारी परम्परागत मार्गों से होती हुई रामघाट पहुंची। रामघाट पर भगवान महाकाल का क्षिप्रा के जल से जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की गई। पूजन-अर्चन पं. घनश्याम शर्मा और अन्य पुजारियों के द्वारा सम्पन्न कराया गया। पूजन के दौरान प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, महापौर मुकेश टटवाल,वैभव यादव सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। 70 भजन मण्डलियां सवारी में हुई शामिल श्रीमहाकालेश्वर भगवान की प्रमुख राजसी सवारी के चल समारोह में सबसे आगे श्रीमहाकालेश्वर मंदिर का प्रचार वाहन चला। उसके बाद यातायात पुलिस, तोपची, भगवान महाकालेश्वर का रजत ध्वज, घुडसवार, विशेष सशस्त्र बल सलामी गार्ड, स्काउट / गाइड सदस्य, सेवा समिति बैंड के बाद उज्जैन के अतिरिक्त मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों से परंपरागत रूप से सवारी सम्मिलित होने वाली 70 भजन मंडलियां चल समारोह में प्रभु का गुणगान करते हुए शामिल हुई। साथ ही नगर के साधु-संत व गणमान्य नागरिक, पुलिस बैंड, नगर सेना के सलामी गार्ड की टुकड़ी, महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी व पुरोहितगण सवारी के साथ रहे। उनके बाद महाकालेश्वर भगवान (चंद्रमौलेश्वर) की प्रमुख पालकी, भारत बैंड, रथ पर गरुड़ पर विराजित शिव-तांडव, रमेश बैंड, नंदी रथ पर उमा महेश स्वरुप, गणेश बैंड, रथ पर होल्कर स्टेट मुखारविंद, आर.के. बैंड, रथ पर सप्तधान मुखारविंद के पश्चात राजकमल म्युजिकल ग्रुप बैंड व मनमहेश स्वरुप हाथी पर विराजित रहे। चलित रथ के माध्यम से श्रद्धालुओं ने करे दर्शन भगवान श्रीमहाकालेश्वर की सवारी के सुगमतापूर्वक दर्शन के लिये चलित रथ की व्यवस्था की गई। जिसके दोनों ओर एलईडी के माध्यम से सवारी का लाईव प्रसारण किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को भगवान के सहज दर्शन का लाभ मिला। साथ ही उज्जैन के अन्य स्थानों फ्रीगंज, नानाखेड़ा, दत्तअखाड़ा आदि क्षेत्रों में भी सवारी का लाइव प्रसारण किया गया। सवारी में जनजातीय एवं लोक नृत्य कलाकारों ने दीं आकर्षक प्रस्तुतियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप बाबा श्रीमहाकालेश्वर की सवारी को भव्य स्वरुप देने के लिए जनजातीय कलाकारों के दल ने महाकालेश्वर भगवान की राजसी सवारी में सहभागिता की। इसमें लामूलाल धुर्वे अनूपपुर के नेतृत्व में ढुलिया जनजातीय गुदुमबाजा नृत्‍य, भुवनेश्वर से अभिजीत दास नेतृत्व में श्रृंगारी लोक नृत्‍य, सुमित … Read more