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बाबा बागेश्वर ने खोली ‘पर्ची’, कहा- PM मोदी से पहले ही बंद कर दिया था ये काम; नया चुनाव मॉडल जरूरी

छतरपुर बाबा बागेश्‍वर धीरेंद्र कृष्‍ण शास्‍त्री ने कहा कि भारत को अब “एक देश, एक चुनाव” की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ना चाहिए. उनके अनुसार देश में बार-बार होने वाले चुनाव न केवल हजारों करोड़ रुपये खर्च करवा रहे हैं, बल्कि प्रशासनिक मशीनरी और सुरक्षा बलों को भी लंबे समय तक चुनावी ड्यूटी में उलझाए रखते हैं. उनका ऐसा बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है. बद्रीनाथ धाम में कठिन साधना पूरी करने के बाद अपने अनुयायियों को संबोधित करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस बार किसी धार्मिक विषय के बजाय देश की चुनावी व्यवस्था पर खुलकर अपनी राय रखी।  धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में “वन नेशन, वन इलेक्शन” को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस जारी है. बागेश्वर महाराज ने कहा कि यदि पंच, सरपंच, पार्षद, मेयर, विधायक और सांसद तक के चुनाव एक साथ कराए जाएं तो देश का समय, धन और संसाधन तीनों बच सकते हैं. उन्होंने इसे केवल राजनीतिक सुधार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से जुड़ा विषय बताया. उनके इस बयान ने समर्थकों के बीच उत्साह और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।  चुनावी खर्च पर उठाया बड़ा सवाल धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि देश में लगभग हर साल किसी न किसी स्तर पर चुनाव होते रहते हैं. लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय और पंचायत चुनावों की वजह से लगातार सरकारी संसाधन खर्च होते हैं. उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव कराने में हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिनका उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकता है।  पंच से सांसद तक एक साथ चुनाव की वकालत बागेश्वर महाराज का कहना है कि यदि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं तो उम्मीदवारों को भी राहत मिलेगी. एक ही चुनावी अभियान में गांव के पंच से लेकर सांसद तक के उम्मीदवार जनता के बीच जा सकेंगे. इससे चुनावी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और कम खर्चीली बन सकती है।  प्रशासन और सुरक्षा बलों पर भी पड़ता है दबाव उन्होंने कहा कि हर चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अमला चुनावी ड्यूटी में लग जाता है. इससे कई बार नियमित प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं. यदि चुनाव एक साथ हों तो सुरक्षा बलों और सरकारी मशीनरी पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी कम होगा।  PM मोदी के कहने से पहले ही बंद कर दिया था यह काम बागेश्वर बाबा के नाम से प्रसिद्ध धीरेंद्र शास्त्री ने सीना ठोककर दावा किया है कि, यदि देश में डीजल पेट्रोल बचाने में सबसे ज्यादा योगदान किसी का है तो वह मैं हूं। उन्होंने कहा कि, यदि कोई कहे तो मैं लिखकर देने को तैयार हूं कि एक महीने में एक लीटर डीजल भी नहीं फूंका। बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री अपने तर्क और बयानों के लिए भी पहचाने जाते हैं। वे अल्हड़ और देसी और चुटीले अंदाज में बोलने के लिए फेमस है। उनका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे दावा कर रहे हैं कि देश में यदि डीजल-पेट्रोल बचाने की बात आएगी तो सीना ठोक के कह सकता हूं कि सबसे ज्यादा मेरा योगदान हैं। वे पीएम मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का जिक्र करते हुए बात कर रहे थे। सीना ठोककर बोले, मैं लिखकर देने को तैयार हूं धीरेंद्र शास्त्री कथा के दौरान यह बात पंडाल में मौजूद लोगों से कर रहे थे। उन्होंने पीएम मोदी की डीजल-पेट्रोल बचाने की अपील का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोई यदि कहे तो मैं लिखकर देने को तैयार हूं, एक महीने में मैंने एक लीटर भी डीजल नहीं फूंका। बद्रीनाथ में गुप्ता साधना के बाद कथा कर रहे आपको बता दें कि धीरेंद्र शास्त्री बीते 25 दिन से उत्तराखंड देवभूमि में साधना कर रहे हैं। भगवान बद्रीनाथ के धाम में नारायण पर्वत की गुप्ता में एकातिंक साधना में लीन थे। एक छोटी सी गुफा में बर्फीले पहाड़ों के बीच वे साधना में ली थे। दो दिन पहले ही वे साधना पूरी कर नीचे आए और फिर नारायण पर्वत की 13 किलोमीटर की दुर्गम परिक्रमा भी की है।  आर्थिक मजबूती से जोड़ा मुद्दा अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देश की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि दुनिया में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और ऐसे समय में भारत को संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करना चाहिए. उनके अनुसार चुनावी खर्च में कमी लाकर विकास और बुनियादी ढांचे पर ज्यादा निवेश किया जा सकता है।  क्यों चर्चा में है ‘एक देश, एक चुनाव’? देश में लंबे समय से यह बहस चल रही है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं या नहीं. समर्थकों का तर्क है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा और प्रशासनिक संसाधनों की बचत होगी. वहीं आलोचकों का मानना है कि इससे संघीय ढांचे और क्षेत्रीय मुद्दों पर असर पड़ सकता है. बागेश्वर महाराज का बयान इस बहस को धार्मिक और सामाजिक मंच से भी नई ऊर्जा देता दिखाई दे रहा है। 

‘विवाहित बेटी परिवार का हिस्सा है तो तलाकशुदा क्यों नहीं?’ हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह साफ कर दिया है कि तलाकशुदा बेटी भी पिता के परिवार का हिस्सा होती है और संपत्ति में भी उसका अधिकार है। हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ होम गार्ड्स के डायरेक्टर जनरल के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें एक रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट की तलाकशुदा बेटी को फैमिली पेंशन के लिए उनकी नॉमिनी मानने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट कहा है कि सरकारी कर्मचारी की तलाकशुदा बेटी को परिवार के सदस्य का दर्जा देने से इनकार करना, समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। जस्टिस विशाल धागत ने कहा कि जब एक शादीशुदा बेटी परिवार का सदस्य हो सकती है, तो एक तलाकशुदा बेटी क्यों नहीं हो सकती? यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के मामले पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता मृतक सरकारी कर्मचारी पर आश्रित थी तो फैमिली पेंशन के उसके आवेदन को मंजूर किया जाए। बेंच ने होमगार्ड्स डीजी से 90 दिन के अंदर इस संबंध में एक आदेश पारित करने को कहा है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, होम गार्ड्स डीजी ने याचिकाकर्ता ज्योति श्रीवास्तव को उनके पिता शंकरलाल श्रीवास्तव की फैमिली पेंशन के लिए नॉमिनी मानने से इस आधार पर इनकार कर दिया था कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के मुताबिक तलाकशुदा बेटी कर्मचारी के परिवार का हिस्सा नहीं होती है। याचिकाकर्ता के पिता शंकरलाल श्रीवास्तव का 2017 में निधन हो गया था। इसके बाद उनकी तलाकशुदा बेटी ज्योति ने फैमिली पेंशन पाने के लिए आवेदन किया था। होम गार्ड्स डीजी ने 16 दिसंबर 2021 को ज्योति के आवेदन को खारिज कर दिया था। डीजी के आदेश में कहा गया था कि पेंशन नियमों के अनुसार, एक तलाकशुदा बेटी कर्मचारी पर आश्रित नहीं होती है। इसके बाद ज्योति ने होमगार्ड्स डीजी के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बेटियों को समान व्यवहार मिलना चाहिए जस्टिस धागत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा, “पेंशन नियम 1976 के प्रावधानों को देखने पर यह पाया गया कि तलाकशुदा बेटी को परिवार की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, विवाहित बेटियों को 1976 के पेंशन नियमों के नियम 44(5) के तहत परिवार की परिभाषा में शामिल किया गया है।” बेंच ने कहा कि अविवाहित बेटी, विवाहित बेटी या तलाकशुदा बेटी के बीच कोई अंतर नहीं है। ऐसा करना अनुच्छेद 14 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। बेंच ने कहा कि यदि एक विवाहित बेटी को परिवार के सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है, तो तलाकशुदा बेटी को परिवार की परिभाषा से बाहर रखने का कोई कारण नहीं है। जज ने कहा कि एक तलाकशुदा बेटी के साथ भी 1976 के नियमों के नियम 44(5) में बताई गई बेटियों के समान ही व्यवहार किया जाना चाहिए।

MP सरकार में बदलाव की आहट, किन मंत्रियों पर गिरेगी गाज और कौन बनेगा नया चेहरा?

भोपाल  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) की तस्वीर बदलने जा रही है। जून के अंत तक कैबिनेट में बड़ा फेरबदल (Major Cabinet Reshuffle) होना लगभग तय है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कम से कम 5-6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है तो 7-8 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 2023 में मोहन यादव के नेतृत्व में बनी सरकार के कैबिनेट में पहली बार बदलाव होने जा रहा है। कैबिनेट में इस समय मोहन यादव समेत कुल 31 सदस्य हैं। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) कई बार दिल्ली पहुंचे हैं और शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकातों के दौरान कैबिनेट में फेरबदल की रूपरेखा पर सहमति बन चुकी है। 19 मई को मोहन यादव की मुलाकात जगदलपुर में गृहमंत्री अमित शाह के साथ हुई थी। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय भी बुलाए गए थे। मुख्यमंत्री की दिल्ली में भी शाह से मुलाकात हुई। वह पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से भी मिले। सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में कैबिनेट के नए स्वरूप पर विस्तार से बातचीत हुई है। बताया जा रहा है कि 20 से 30 जून के बीच कभी भी पुराने मंत्रियों से इस्तीफा लिया जा सकता है और इसके तुरंत बाद शपथग्रहण होगा। कैलाश विजयवर्गीय का क्या होगा? कैबिनेट फेरबदल में जिन मंत्रियों पर सबसे ज्यादा नजरे हैं उनमें कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हैं। कैबिनेट में सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल कैलाश विजयवर्गीय को लेकर अटकलें हैं कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है। वहीं प्रह्लाद सिंह को केंद्रीय संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। बताया जाता है कि वरिष्ठता की वजह से ये मंत्री कैबिनेट में सहज नहीं हैं। भाजपा के पूर्व महासचिव रह चुके कैलाश विजयवर्गीय को जब विधनसभा चुनाव में उतारा गया था तो उन्हें संभावित मुख्यमंत्रियों की सूची में भी प्रमुखता से गिना जा रहा था, लेकिन बाजी मोहन यादव की लगी जो कहीं रेस में नहीं दिख रहे थे। और किन मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी मोहन यादव कैबिनेट से जिन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, उनमें सबसे प्रबल नाम विजय शाह का है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री को लेकर पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार तीखी टिप्पणियां की हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, पंचायती राज्य मंत्री राधा सिंह, शहरी प्रबंधन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी, वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार शामिल हो सकते हैं। नए चेहरों को मिल सकता है मौका कैबिनेट विस्तार में कई नए विधायकों और नेताओं को अवसर मिलने की चर्चा है. पार्टी क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए नामों का चयन कर सकती है. सागर और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से कुछ नेताओं के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं. इसके अलावा महिला, युवा और आदिवासी वर्ग को बेहतर प्रतिनिधित्व देने पर भी भाजपा विचार कर सकती है. माना जा रहा है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाने के लिए नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।  प्रदर्शन के आधार पर होगा फैसला सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की है. इसी मूल्यांकन के आधार पर मंत्रिमंडल में बदलाव का फैसला लिया जा सकता है. पार्टी का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले सरकार की कार्यक्षमता और जनसंपर्क को और मजबूत बनाना है. ऐसे में जून का अंतिम सप्ताह मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए काफी अहम साबित हो सकता है, क्योंकि कैबिनेट फेरबदल से कई नए राजनीतिक संदेश और समीकरण सामने आने की संभावना है।  किन्हें मंत्री बनाए जाने की चर्चा सागर जिले से आने वाले विधायकों शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को पद मिलना लगभग तय माना जा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाने वाले प्रमुराम चौधरी को भी मंत्री बनाया जा सकता है। पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा कुछ नए और युवा चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है। महिला और आदिवासी समुदाय को भी साधने की कोशिश होगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि पुराने कुछ मंत्रियों को हटाकर जहां नए चेहरों को जगह दी जाएगी, वहीं विभागों में भी बड़े पैमाने पर फेरबदल होगा। कुछ मंत्रियों से मौजूदा विभाग लेकर नए मंत्रालय दिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों के कामकाज की गहन समीक्षा की है और इसी आधार पर बड़े और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

MP का डिंडौरी बना जल संरक्षण का मॉडल, 55 जिलों को पछाड़ देश में हासिल किया दूसरा स्थान

 डिंडौरी मध्य प्रदेश का आदिवासी बहुल डिंडौरी जिला जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है. राष्ट्रीय स्तर पर जारी आंकड़ों के अनुसार डिंडौरी ने जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. साथ ही मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों में प्रथम स्थान हासिल कर जिले ने प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।  ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें जल संरक्षण का महत्व समझाया। उन्हें बताया गया कि पानी रोकने से ही बचेगा और फिर से उपलब्ध होगा। इस समझ के बाद, लोगों ने स्वयं प्रेरित होकर अपने घरों में जल संचय के कार्य शुरू कर दिए हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने दो गांवों का दौरा कर जमीनी हकीकत जानी। बजाग जनपद पंचायत की सिंहपुर ग्राम पंचायत में लगभग साढ़े तीन सौ मकान हैं। यहां हर घर में सोखता पिट और छतों से बारिश के पानी को रोकने के लिए पाइप के जरिए वाटर हार्वेस्टिंग की तैयारी की गई है। जिला प्रशासन की इस पहल को देशभर में जनभागीदारी आधारित जल प्रबंधन के प्रेरणादायक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है. डिंडौरी की यह उपलब्धि न केवल जल संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी मानी जा रही है. डिंडौरी जिले में शासन के निर्देशानुसार संचालित 'जल गंगा संवर्धन अभियान' एवं 'जन भागीदारी अभियान' के तहत जल संरक्षण और भूजल संवर्धन की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं. जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कुओं, नदियों, नालों, हैंडपंपों, ट्यूबवेल, बावड़ियों और तालाबों के आसपास व्यापक जल संरक्षण संरचनाएं विकसित की गई हैं, जिससे वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर बढ़ाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।  गांव की महिला मेकिन बाई ने बताया कि पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन सरपंच दीपचंद पूषाम और अधिकारियों ने उन्हें जल का महत्व समझाया। इसके बाद उन्होंने स्वयं मेहनत कर और थोड़ा पैसा खर्च कर पाइप खरीदे तथा घर के सामने सोखता पिट बनाया, जिसमें अब निस्तार का पानी जा रहा है। जमुना खैरवार ने बताया कि वे पहले पानी का महत्व नहीं जानते थे और सोचते थे कि पानी उपलब्ध कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। लेकिन सरपंच और अधिकारियों द्वारा यह समझाने पर कि थोड़ी मेहनत से पानी कैसे बचाया जा सकता है और धरती को रिचार्ज किया जा सकता है। उन्होंने अपने घर में दो सोखता पिट बनवाए। अब वे गांव में जाकर अन्य लोगों को भी जागरूक कर रही हैं ताकि बारिश का पानी रोका जा सके और आने वाली पीढ़ी के लिए पानी बच सके। आजीविका परियोजना से जुड़ी कृषक सखी सुदामा सुरेश्वर ने बताया कि 'मां की बगिया' योजना के तहत पांच हितग्राही हैं। एक बगिया में 15 नींबू और 35 आम के पेड़ लगाए गए हैं, जिन्हें टपक पद्धति (ड्रिप इरिगेशन) से पानी दिया जा रहा है। पेड़ों को टपक पद्धति से पानी देना का काम शुरू किया आजीविका परियोजना से जुड़ी कृषक सखी सुदामा सुरेश्वर कहती है कि ‘मां की बगिया’ के पांच हितग्राही है। एक बगिया में 15 नींबू और 35,आम के पेड़ लगवाए है। पानी को बचाने और पेड़ो को सुरक्षित रखने के लिए हितग्राहियों को जागरूक किया। इसके बाद उनको टपकना, हांडी और स्लाइन की बोतल से पेड़ो को पानी देने के बारे में बताया। अब हितग्राही स्वयं पेड़ों की सुरक्षा और सिंचाई कर रहे हैं। जनभागीदारी से जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, अब पौधरोपण की तैयारी जनपद सदस्य धर्म सिंह धुर्वे, उपसरपंच रघु परस्ते बताते है कि गांव में चार तालाब, 12 स्टॉप डैम पहले से है। ग्रामीणों की मदद से इनका जीर्णोद्धार कराया है। 4पहाड़ियों मद लगभग साढ़े तीन सौ कंट्रूल ट्रेंच खुदवाए है। हैंड पंप के पास सोखता पिट और लीज फिट बनवाया गया ताकि निस्तार का पानी सीधे जमीन के नीचे जाए। अब बारिश में पहाड़ियों में भी जनभागीदारी से ही पौधरोपण करवाना है। पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी अब स्वयं हमको उठानी पड़ेगी। ग्रामीण खुद के खर्चे से बना रहे जल संरचनाएं, टीम कर रही निगरानी अमरपुर जनपद के भाखा मॉल ग्राम पंचायत में लगभग 928 आवास है। 55 ग्रामीणों ने रेन वाटर सोखता गढ्ढा, 262 कंट्रूल ट्रेंच, 8 तालाबों का जीर्णोद्धार, 13 लीज फिट, 7 हितग्राहियों ने ‘एक बगिया मां’ के नाम पर आम नीबू के पौधे लगाकर टपकना, हांडी और स्लाइन बोतल के जरिए पौधों को पानी दे रहे है। एसिस्टेंट इंजीनियर प्रियंका ने बताया कि शुरुआती दौर में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष नहीं समझ रहे थे। चौपाल लगाकर जल के महत्व को समझाया और उसे धरती के नीचे समाहित करने की नसीहत दी। अब धीरे धीरे ग्रामीण अपनी इच्छा से काम कर रहे हैं। भौगोलिक स्थिति ऐसी,वाटर टेबिल कम ,17 प्रतिशत सिंचित रकबा कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि जिले की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है, लोग पठार और छोटे छोटे टोले में रहते है। जल शक्ति मंत्रालय ने वीडियो कांफ्रेंस की बैठक में मार्च के महीने में जन सहयोग से जल संरचनाओं का निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए निर्देशित किया था। जिले के अधिकारियों की बैठक कर प्लानिंग की। इसके बाद गांव गांव जाकर पानी चौपाल, रात्रि चौपाल लगाकर प्रेरित किया। इस कार्य में सभी विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों का सहयोग मिला है। आंध्र प्रदेश का अल्लूरी सीताराम राजू जिला 6 लाख 89 हजार 113 जल संरचनाएं बनाकर पहले स्थान पर है। जबकि डिंडौरी दूसरे स्थान पर है। जल संरचनाओं के निर्माण से होगा फायदा, बड़ी संरचना बने तो बेहतर चंद्र विजय कालेज में भूगोल की प्रोफेसर डॉक्टर रश्मि गौतम कहती है कि जिले की भौगोलिक स्थिति पठारी और उबड़ खाबड़ है। पथरीला होने के चलते पानी जमीन के अंदर नहीं जा पाता है। छोटी छोटी जल संरचनाओं के निर्माण से कुछ फायदा तो होगा। बारिश का पानी सीधे नदी नालों में न जाकर रुक रुक कर जाएगा। हालांकि जिले में बड़ी संरचना बनने पर ही पानी की समस्या से पूर्णत निजात मिल सकेगी। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित अभियान के अंतर्गत पहाड़ी एवं बंजर भूमि पर कंटूर ट्रेंच निर्माण, नदी-नालों में बोरी बंधान, ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर सोखता टैंक तथा शासकीय और अर्धशासकीय भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग … Read more

रतलाम के डायल-112 हीरोज सड़क दुर्घटना में घायल 02 व्यक्तियों को त्वरित सहायता से पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  रतलाम जिले के थाना जावरा शहर क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्पर एवं संवेदनशील कार्रवाई से मोटर साइकिल दुर्घटना में घायल दो व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस त्वरित कार्रवाई से घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिल सकी। 29 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना जावरा शहर क्षेत्र अंतर्गत महू-नीमच हाईवे रोड पर पुलिस बटालियन के सामने एक मोटर साइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई है, जिसमें दो व्यक्ति घायल हो गए हैं एवं तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना जावरा शहर क्षेत्र में तैनात डायल 112 वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक  जितेन्द्र व्यास एवं पायलट  मंगलेश्वर सूर्यवंशी ने मौके पर पहुँचकर पाया कि दुर्घटना में दो व्यक्ति घायल हो गये थे, जिनमें से एक को गंभीर चोटें आई थीं। डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए दोनों घायलों को तत्काल डायल 112 की सहायता से शासकीय सिविल चिकित्सालय, जावरा पहुँचाया। डायल-112 की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से दोनों घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में आमजन की सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।  

पूर्व संध्या पर होगा वृद्धजनों का सम्मान, विशाल भजन संध्या एवं सेवा कार्यक्रमों का आयोजन

भोपाल  भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है। उनके सम्मान, सेवा और आशीर्वाद को जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य माना जाता है। इन्हीं संस्कारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से भाजपा के संस्थापक सदस्य, पूर्व सांसद एवं जनसेवा के पर्याय रहे स्व.  कैलाश नारायण सारंग जी की जयंती 2 जून को इस वर्ष भी देशभर में मातृ–पितृ भक्ति दिवस के रूप में श्रद्धा, सम्मान और सेवा भाव के साथ मनाई जाएगी। सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग के आह्वान पर इस अवसर पर देशभर में वृद्धजनों के सम्मान, सेवा और संस्कार जागरण के विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा द्वारा विभिन्न राज्यों में वृद्धजनों के चरण पखारकर, उन्हें शाल एवं फल भेंट कर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही सेवा, समर्पण और श्रद्धा के अनेक कार्यक्रम आयोजित होंगे। मंत्री  सारंग ने बताया कि पूज्य पिताजी स्व.  कैलाश नारायण सारंग का सम्पूर्ण जीवन समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा। उनका सपना था कि समाज का कोई भी वृद्ध स्वयं को अकेला महसूस न करे और प्रत्येक घर में माता-पिता को सर्वोच्च सम्मान मिले। उन्होंने कहा कि मातृ–पितृ भक्ति दिवस केवल एक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परिवार व्यवस्था और संस्कारों को सशक्त बनाने का संकल्प है, जो नई पीढ़ी को अपने माता-पिता एवं बुजुर्गों के प्रति कर्तव्यबोध का संदेश देगा। नरेला विधानसभा में तीन दिवसीय सेवा कार्यक्रम नरेला विधानसभा के विभिन्न वार्डों में 1 से 3 जून तक वृद्धजनों का सम्मान और अन्य सेवा कार्य आयोजित किए जाएंगे। दिनांक 01 जून को वार्ड 76 (खेड़ापति हनुमान मंदिर), 79 (सरदार पटेल स्कूल), 75 (केनरा बैंक के सामने करोंद), 77 (शिव मंदिर पुलिस चौकी करोंद), 78 (पानी की टंकी के पास विश्वकर्मा नगर करोंद), 37 (मरई माता मंदिर द्वारका नगर) व 38 (साईंराम कॉलोनी) में वृद्धजनों का सम्मान किया जाएगा। वार्ड 38, साईंराम कॉलोनी में विशाल भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। दिनांक 02 जून को वार्ड 71 (स्वामी विवेकानंद चौराहा), वार्ड 39-40 (चाणक्यपुरी), वार्ड 59 (अन्ना नगर), वार्ड 58 (सर्जना पार्क), वार्ड 44 (हनुमान मंदिर आचार्य नरेंद्र देव नगर), वार्ड 70 (पिंक टॉवर के सामने), वार्ड 69-41 (नर्मदा चौरहा) एवं वार्ड 36 (जैन मंदिर के पास शंकराचार्य नगर) में वृद्धजनों का सम्मान किया जाएगा। दिनांक 03 जून को वार्ड 38 कैलाश सारंग पार्क एकतापुरी में सायं 07:00 बजे स्व. कैलाश नारायण सारंग की मूर्ति का अनावरण, भजन संध्या एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। देशभर में सेवा और सम्मान कार्यक्रम अखिल भारतीय कायस्थ महासभा द्वारा भी स्व. कैलाश नारायण सारंग जी की जयंती को देशभर में मातृ–पितृ भक्ति दिवस के रूप में मनाया जाएगा। विभिन्न राज्यों में वृद्धजनों के सम्मान के साथ-साथ सेवा, स्वास्थ्य, सहयोग एवं जनकल्याण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जनसेवा के प्रकल्प आज भी दे रहे हैं संस्कार और सेवा का संदेश मंत्री  सारंग ने बताया कि स्व. कैलाश सारंग ने अपने पैतृक ग्राम बरेली में वृद्धाश्रम की स्थापना कर बेसहारा बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया। इसके अतिरिक्त रायसेन जिले के ग्राम घाटपिपरिया स्थित नर्मदा तट पर परिक्रमावासियों के लिए आश्रम की स्थापना कर सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके द्वारा प्रारंभ किए गए सेवा, संस्कार और जनकल्याण के अनेक प्रकल्प आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। आइए, माता-पिता के चरणों में श्रद्धा अर्पित करें मंत्री  विश्वास सारंग ने सभी नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि 2 जून को अपने माता-पिता एवं परिवार के सभी वरिष्ठजनों का सम्मान करें, उनका आशीर्वाद प्राप्त करें तथा अपने बच्चों को भी सेवा, संस्कार और श्रद्धा की इस महान परंपरा से जोड़ें। उन्होंने आग्रह किया कि इस अवसर पर अपने अनुभव, फोटो एवं वीडियो सोशल मीडिया पर #सारंग_मातृ_पितृ_भक्ति_दिवस के साथ साझा करें।  

कार्रवाई नहीं होने पर दी चेतावनी, बोले- जवाब नहीं मिला तो खुद पहुंचूंगा जनसुनवाई में

नीमच जनपद पंचायत जावद के अध्यक्ष गोपाल चारण के रिश्वत लेते पकड़े जाने के मामले में लगभग तीन साल तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कलेक्टर और एसपी को संबोधित पोस्ट करते हुए कई सवाल किए हैं और जवाब नहीं मिलने की दशा में कहा कि अन्यथा मुझे आपकी जनसुनवाई में आना पड़ेगा। सोशल मीडिया पर उठाए सवाल दिग्विजय सिंह ने 30 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और फेसबुक पर पोस्ट की है, जिसमें उन्होंने जावद के अध्यक्ष के रिश्वत लेते पकड़े जाने पर गिरफ्तार नहीं किए, पद से नहीं हटाए जाने और सरपंच व सचिव के भ्रष्टाचार की जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद पंचायत अधिनियम के तहत पद से बेदखल नहीं करने जैसे सवाल उठाए हैं। नीमच कलेक्टर व एसपी से सवालों के जवाब मांगे हैं।  

मध्यप्रदेश भवन में 2 दिवसीय समर वर्कशॉप का सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन

भोपाल  नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित मध्यप्रदेश भवन में आयोजित 2 दिवसीय समर वर्कशॉप का समापन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ गत दिवस हुआ। समापन समारोह में सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव  शिवशेखर शुक्ला ने प्रतिभागियों के उत्साह और रचनात्मक प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास में मदद मिलती है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पद्म कालूराम बामनिया द्वारा प्रस्तुत कबीर गायन तथा  महेश कुलश्रेष्ठ की मनमोहक ‘फूलपाती’ नृत्य प्रस्तुति रही। इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मध्यप्रदेश की समृद्ध लोक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। कार्यशाला में प्रतिभागियों के लिए हीटलेस कुकिंग (बिना आग के खाना बनाना), फैब्रिक पेंटिंग, मधुबनी पेंटिंग कला तथा डीआईवाई (DIY) क्रॉफ्ट सत्र जैसी रचनात्मक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों का आयोजन किया गया। समारोह में ट्रेज़र हंट प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए तथा कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र वितरित कर सम्मानित किया गया। दो दिनों तक चली इस कार्यशाला ने प्रतिभागियों को सीखने, सृजनात्मकता विकसित करने और मनोरंजन के साथ नई गतिविधियों का अनुभव प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम का समापन उत्साह, उमंग और मधुर स्मृतियों के साथ हुआ।  

प्रदर्शन के दौरान NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष घायल, पुलिस कार्रवाई पर विपक्ष का हमला

भोपाल नीट (NEET) पेपर लीक मामले के विरोध में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने जा रहे एनएसयूआई (NSUI) कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने वॉटर कैनन का उपयोग कर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज कर दिया। इस हिंसक झड़प में NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए 'सिद्धांत' हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। प्रदर्शन के दौरान लगाए गए बैरिकेड्स नीट परीक्षा में हुई विसंगतियों और पेपर लीक के खिलाफ एनएसयूआई द्वारा आयोजित इस उग्र प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन ने पहले से ही मजबूत बैरिकेड्स लगा रखे थे। जैसे ही कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने के लिए इन बैरिकेड्स को पार करने का प्रयास किया, पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के नाम पर किए गए लाठीचार्ज में प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार को गंभीर चोटें आईं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की गिरफ्तारी इस बड़े विरोध-प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और गर्मा गया जब प्रदर्शन स्थल पर मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को पुलिस ने विधिक हिरासत में लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के इस आंदोलन को वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का पूरा विधिक समर्थन मिल रहा था, जिसके चलते पेपर लीक मामले के विरोध में हुई इस गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है।  

म.प्र. महाराष्ट्र के बीच बढ़ेगा सम्पर्क

भोपाल  मध्यप्रदेश के तेजी से विकसित हो रहे कृषि क्षेत्र और मध्य भारत के केले के प्रमुख केन्द्र खंडवा और बुरहानपुर में प्रतिवर्ष 1.7 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक केले का उत्पादन होता है। यहां से प्रतिदिन 140 भारी-भरकम ट्रक घरेलू बाजारों और अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों तक केले पहुंचाते हैं। वर्षों से इन ट्रकों को संकरी और जर्जर सड़कों से होकर गुजरना पड़ता था। इससे आवागमन धीमा हो जाता था, यात्रा का समय बढ़ जाता था और परिवहन एक कठिन कार्य बन जाता था। लेकिन महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत एनएच-753एल के बोरगांव से शाहपुर खंड के आधुनिक चार-लेन वाले राजमार्ग गलियारे के रूप में विकसित होने से अब यह स्थिति बदलने वाली है। एनएच-753एल का बोरगांव से शाहपुर तक का खंड रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है और यह महाराष्ट्र में बोरगांव बुजुर्ग से मुक्तईनगर तक फैले एक बड़े गलियारे का हिस्सा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा विकसित इस गलियारे से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच अंतर-राज्यीय संपर्क को नया रूप मिलने की उम्मीद है। लगभग 944 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा यह गलियारा लगभग 47 किलोमीटर लंबा है और इसका 85 प्रतिशत निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। पूर्ण रूप से निर्मित होने के बाद, यह मार्ग इंदौर और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के बीच एक तेज, सुरक्षित एवं  अधिक कुशल वैकल्पिक संपर्क के रूप में उभरेगा और क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करते हुए अंतर-राज्यीय परिवहन की एक प्रमुख धुरी बन जाएगा। खेत से बाजार तक के संपर्क को मजबूती यह परियोजना केले, कपास, सोयाबीन और गेहूं जैसी फसलों के लिए प्रसिद्ध कृषि प्रधान क्षेत्रों से होकर गुजरती है। स्थानीय किसानों और ट्रांसपोर्टरों के लिए, इन बेहतर सड़कों का सीधा लाभ यह होगा कि उनकी बाजार तक तेजी से पहुंच संभव होगी और परिवहन लागत में कमी आएगी। इस क्षेत्र के गांवों के लिए, यह राजमार्ग पहले से ही दैनिक जीवन में एक बड़ा सुधार साबित हो रहा है। बुरहानपुर जिले की झीरी पंचायत की सरपंच आशा कैथवास बताती हैं कि पुरानी सड़क की खराब हालत के कारण परिवहन कितना कठिन हो गया था। उनके अनुसार, क्षतिग्रस्त सतहों और गड्ढों के कारण भारी वाहनों की आवाजाही पहले बेहद चुनौतीपूर्ण थी। नए राजमार्ग के बनने से ट्रकों की आवाजाही काफी सुगम हो गई है। इससे किसानों और ट्रांसपोर्टरों, दोनों को कृषि उपज को अधिक कुशलता से ले जाने में मदद मिल रही है। इस गलियारे में 1 रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी), 7 बड़े पुल, 20 छोटे पुल, 98 पुलिया, 3 हल्के वाहनों के लिए अंडरपास (एलवीयूपी), 5 छोटे वाहनों के लिए अंडरपास (एसवीयूपी) और 6 वाहनों के लिए अंडरपास (वीयूपी) शामिल हैं। इनमें से कई संरचनाओं को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि स्थानीय संपर्क बाधित न हो और गांवों, खेतों एवं आसपास के इलाकों के बीच आवागमन सुचारू व निर्बाध बना रहे। शहरों को करीब लाना शाहपुर-बुरहानपुर इलाके के कोल्ड स्टोरेज संचालक गोपाल कडुतेमकर बताते हैं कि जलगांव लगभग 90 किलोमीटर दूर है, जबकि महाराष्ट्र की सीमा यहां से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर है। उनका मानना ​​है कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इसके पूरा होने के बाद इंदौर और मालवा क्षेत्र एक-दूसरे के बेहद करीब महसूस करेंगे। तेज यात्रा, परिवहन की लागत में कमी और सुगम आवागमन से स्थानीय व्यवसायों, आपातकालीन यात्रा तथा दैनिक आवागमन को लाभ होने की उम्मीद है। शाहपुर और बुरहानपुर के आसपास रहने वाले कई निवासियों के लिए, महाराष्ट्र से संपर्क हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि यह क्षेत्र राज्य की सीमा के निकट है। पूरा होने पर, यह नया राजमार्ग आसपास के शहरों और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच को काफी आसान बना देगा। परियोजना का संक्षिप्त विवरण: एनएच-753एल का बोरेगांव-शाहपुर खंड     परियोजना की लागत: 944 करोड़ रुपये     कुल लंबाई: लगभग 47 किलोमीटर     निर्माण में प्रगति: लगभग 85 प्रतिशत पूर्ण     जुड़ने वाले प्रमुख राज्य: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र     प्रमुख संपर्क मार्ग: इंदौर – खंडवा – बुरहानपुर – जलगांव – छत्रपति संभाजीनगर     प्रमुख अवसंरचना: 1 आरओबी, 7 बड़े पुल, 20 छोटे पुल, 98 पुलिया, 14 अंडरपास     कस्बों और शहरी क्षेत्रों में भीड़ कम करने के लिए लगभग 26 किलोमीटर का बाईपास     सुरक्षित स्थानीय आवागमन हेतु 19 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड तेज और सुरक्षित आवागमन हेतु डिजाइन किया गया इस परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में से एक इसका सुनियोजित भविष्योन्मुखी अवसंरचना विकास है। इसमें लगभग 26 किलोमीटर लंबी एक व्यापक बाईपास प्रणाली का विकास शामिल है, जो कुल मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारी एवं द्रुत यातायात को शहरों और आबादी वाले क्षेत्रों से दूर मोड़ना है। इससे शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़, प्रदूषण और यात्रा में होने वाली देरी में कमी आएगी। साथ ही, स्थानीय यातायात की सुरक्षित और सुगम आवाजाही के लिए 19 किलोमीटर लंबी सर्विस रोडों का निर्माण किया जा रहा है। ये सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों, कृषि क्षेत्रों और छोटी बस्तियों को जोड़ेगी। इससे स्थानीय यात्री मुख्य राजमार्ग पर आए बिना सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकेंगे। अंतर-राज्यीय संपर्क को बढ़ावा यह मार्ग महाराष्ट्र के मुक्तईनगर क्षेत्र की ओर आगे बढ़ता है, जिससे एक मजबूत अंतर-राज्यीय संपर्क स्थापित होता है। यह गलियारा स्थानीय संपर्क से कहीं आगे बढ़कर इंदौर, खंडवा, बुरहानपुर, जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर को जोड़ने वाले एक सुव्यवस्थित परिवहन नेटवर्क के निर्माण में योगदान देता है। इस परियोजना का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच एक सशक्त वैकल्पिक आर्थिक गलियारे के रूप में इसकी भूमिका है। वर्तमान में, इंदौर और छत्रपति संभाजीनगर के बीच यातायात काफी हद तक पारंपरिक मार्गों पर निर्भर करता है, जहां अक्सर जाम, संकरी सड़कें और लंबी यात्रा अवधि जैसी समस्याएं होती हैं। इससे यात्री और माल ढुलाई, दोनों प्रभावित होती हैं। बोरगांव बुजुर्ग से मुक्तईनगर तक के पूरे मार्ग को आधुनिक चार-लेन वाले गलियारे के रूप में विकसित करने से एक तेज, सुरक्षित और अधिक कुशल वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा, विशेष रूप से भारी वाहनों और माल परिवहन के लिए। इस गलियारे के विकास से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवाओं जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। आशा की एक नई किरण शाहपुर-बुरहानपुर … Read more