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ऐतिहासिक गोंड महल को पर्यटक आकर्षण में बदला जाएगा, जगदीशपुर में मिलेगा लग्जरी अनुभव

भोपाल  इतिहास, स्थापत्य कला और विरासत को आधुनिक पर्यटन से जोड़ने की दिशा में मध्य प्रदेश में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राजधानी भोपाल के पास स्थित गोंड महल को अब आलीशान हेरिटेज होटल में बदला जाएगा। करीब 400 साल पुरानी यह ऐतिहासिक इमारत जल्द ही नए स्वरूप में पर्यटकों का स्वागत करती नजर आएगी। मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और विकास की योजना पर काम कर रहा है। निगम महल के हस्तांतरण, सुंदरीकरण और संचालन के लिए निजी साझेदार की तलाश में जुटा है, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए इसे विश्वस्तरीय हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया जा सके। गोंड और राजपूत स्थापत्य का अद्भुत संगम भोपाल से करीब 15 किलोमीटर दूर बैरसिया रोड स्थित जगदीशपुर (पूर्व नाम इस्लाम नगर) का यह महल लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित है और गोंड व राजपूत स्थापत्य शैली का शानदार उदाहरण माना जाता है। तीन मंजिला इस भव्य इमारत की खासियतें इसे बेहद खास बनाती हैं: – विशाल केंद्रीय आंगन – मेहराबदार बरामदे – अलंकृत लकड़ी के स्तंभ – प्राचीन हम्माम (भाप स्नान) – जल पंप और अस्तबल – छोटी गौशाला – जालीदार खिड़कियां और पुष्प आकृतियां महल आज भी अपनी ऐतिहासिक भव्यता और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। इतिहास के पन्नों से जुड़ा जगदीशपुर जगदीशपुर का इतिहास 15वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। इस किलेबंद बस्ती की स्थापना गोंड शासकों ने की थी और वर्ष 1715 तक यहां गोंड राजाओं का शासन रहा। बाद में भोपाल रियासत के संस्थापक दोस्त मोहम्मद खान ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर इसका नाम बदलकर इस्लाम नगर कर दिया था। वर्ष 2023 में राज्य सरकार ने इसका ऐतिहासिक नाम पुनः बहाल करते हुए इसे फिर से जगदीशपुर नाम दिया। भोपाल की दूसरी हेरिटेज होटल परियोजना गोंड महल भोपाल संभाग की दूसरी ऐतिहासिक इमारत होगी जिसे हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे पहले सदर मंजिल को होटल में बदला जा चुका है। वहीं मिंटो हाल को कन्वेंशन सेंटर और मोती महल को संग्रहालय के रूप में नया स्वरूप दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि गोंड महल को हेरिटेज होटल में बदलने से न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान भी वैश्विक स्तर पर मजबूत होगी।  

हाईकोर्ट में सुरक्षित फैसला, प्राइमरी शिक्षक भर्ती की नई मेरिट लिस्ट बनेगी

जबलपुर  प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी और अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से फीसदी बोनस अंक दिए जाने के आरोप लगा है। बीते दिन इस मामले को लेकप मप्र हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। बता दें कि मामले में आरोप है कि बिना आवश्यक आरसीआई (RCI) सर्टिफिकेट के करीब 15 हजार उम्मीदवारों को बोनस अंक दे दिए गए, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह भर्ती प्रक्रिया कुल 13,089 पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिसके बाद जारी की गई मेरिट लिस्ट को अब अदालत में चुनौती दी गई है। ये है पूरा मामला नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया एवं अन्य दो उम्मीदवारों ने याचिका में कहा कि प्राइमरी स्कूल शिक्षक चयन परीक्षा 2025 भर्ती विज्ञापन के तहत केवल उन उम्मीदवारों को 5 फीसदी बोनस अंक मिलने थे, जिनके पास भारतीय पुनर्वास परिषद से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा में डिप्लोमा है। चयन सूची में लगभग 14,964 उम्मीदवारों ने खुद को इस श्रेणी में दिखाकर बोनस अंक प्राप्त कर लिए हैं। भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआइ) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया गया कि पूरे प्रदेश में आरसीआइ के पोर्टल पर केवल 2,194 कार्मिक और 3,077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं। लगभग 15,000 उम्मीदवारों का विशेष शिक्षा प्रमाणपत्र धारक होना प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत होता है। याचिका में 27 फरवरी, 2026 को जारी दोषपूर्ण मेरिट लिस्ट को निरस्त करने की मांग की गई। केवल वैध आरसीआई प्रमाण-पत्र धारकों को ही बोनस अंक देकर नई मेरिट सूची जारी करने के निर्देश देने का आग्रह किया गया। संचालनालय को संदेह लोक शिक्षण संचालनालय ने भी जनवरी 2026 में विभाग को आगाह किया था कि लगभग 18,000 उम्मीदवारों ने हां का विकल्प चुना है, जो अत्यधिक प्रतीत होता है। सुधार के लिए पोर्टल खोलने के बाद भी मंडल के द्वारा उम्मीदवारों से आरसीआई की पंजीकरण संख्या या प्रमाणपत्र नहीं मांगा गया। इसके चलते बड़ी संख्या में फर्जी बोनस वाले अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट में आ गए। याचिका में 27 फरवरी 2026 को जारी मेरिट लिस्ट को रद्द करने की मांग की गई। भर्ती प्रकिया पर उठे सवाल इस पूरे विवाद नें शिक्षक भर्ती प्रकिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही सरकारी चय प्रणाली पर भी गंभीर सवार खड़े कर दिए गए हैं। हाइकोर्ट ने जो संकेत दिए हैं उससे लगता है कि मेरिट लिस्ट दोबारा से बनानी पडे़गी।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जल जीवन मिशन, ग्रामीण जीवन बदलने में समूह योजनाओं की भूमिका

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जल जीवन मिशन को गति, ग्रामीण जीवन में परिवर्तन का आधार बन रहीं समूह योजनाएं श्योपुर में सुदृढ़ जल अधोसंरचना का विस्तार, हर घर तक नल जल पहुंचाने की दिशा में हो रहे तेज प्रयास : मंत्री श्रीमती उइके भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण पेयजल व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके के मार्गदर्शन में श्योपुर जिले में समूह जल प्रदाय योजनाएं तेजी से आकार ले रही हैं, जो दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन योजनाओं के माध्यम से हर घर तक नल से जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में व्यापक सुधार हो रहा है। श्योपुर चंबल समूह जल प्रदाय योजना, बड़े स्तर पर जल आपूर्ति की सुदृढ़ व्यवस्था म.प्र. जल निगम मर्यादित द्वारा क्रियान्वित श्योपुर चंबल समूह जल प्रदाय योजना जिले की प्रमुख पेयजल परियोजनाओं में शामिल है। 782.11 करोड़ रु. की लागत से विकसित यह योजना 377 गांवों को कवर करते हुए 8 लाख से अधिक आबादी को लाभान्वित करने की दिशा में कार्य कर रही है। योजना के अंतर्गत 26 हजार से अधिक घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे घर-घर जल उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित हो रही है। योजना में ग्राम बरोठा, जिला मुरैना में 90.51 एमएलडी क्षमता का इंटेक वेल तथा ग्राम श्यारदा, विकासखण्ड विजयपुर में 71.44 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र विकसित किया जा रहा है। साथ ही 86 उच्चस्तरीय टंकियों के निर्माण का कार्य निर्धारित है, जिनमें से कई पर कार्य प्रगति पर है। जल आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए विस्तृत पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। इसमें रॉ वाटर पंपिंग मेन, क्लीयर वाटर पंपिंग मेन तथा ग्रेविटी मेन के माध्यम से सैकड़ों किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इसके अतिरिक्त एचडीपीई पाइप आधारित जल वितरण नेटवर्क गांवों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे प्रत्येक घर तक जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में योजना के विभिन्न घटकों पर कार्य प्रगति पर है और चरणबद्ध तरीके से अधोसंरचना विकसित की जा रही है। मूँझरी समूह जल प्रदाय योजना, ग्रामीण अंचलों के लिए प्रभावी समाधान श्योपुर जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत मूँझरी समूह जल प्रदाय योजना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 171.24 करोड़ रु. की लागत से विकसित यह योजना 120 गांवों को कवर करते हुए लगभग 1.70 लाख आबादी को लाभान्वित करने के उद्देश्य से क्रियान्वित की जा रही है। योजना में लगभग 10 हजार घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों को सीधे घर पर जल उपलब्ध हो सकेगा। योजना का जल स्रोत मूँझरी बांध है, जो क्षेत्र में स्थायी जल आपूर्ति का आधार बन रहा है। योजना के विभिन्न घटकों पर कार्य प्रगति पर है और अधोसंरचना निर्माण के साथ जल वितरण प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान में योजना की भौतिक प्रगति 31.66 प्रतिशत तथा वित्तीय प्रगति 25.42 प्रतिशत है, जो इसके सुव्यवस्थित क्रियान्वयन को दर्शाती है। ग्रामीण जीवन में बदलाव का आधार बन रहीं योजनाएं श्योपुर जिले में इन समूह जल प्रदाय योजनाओं का क्रियान्वयन केवल पेयजल उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में व्यापक बदलाव का आधार बन रहा है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य स्तर में सुधार हो रहा है, महिलाओं और बच्चों को जल संग्रहण के श्रम से राहत मिल रही है और गांवों में समग्र विकास को गति मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रत्येक परिवार तक नल से जल पहुंचाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्री श्रीमती उइके के मार्गदर्शन में विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में श्योपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति की मजबूत और स्थायी व्यवस्था स्थापित हो सके।  

देशभर से 15 करोड़ श्रद्धालु सिंहस्थ में, 7800 ट्रेनों का विशेष इंतजाम

उज्जैन   सिंहस्थ में 15 करोड़ लोगों के आने के अनुमान को देखते हुए रेलवे ने अभी से तैयारी तेज कर दी है। देशभर से उज्जैन और उसके आसपास के रेलवे स्टेशनों के लिए 7800 ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसी सिलसिले में पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक रामाश्रय पाण्डेय ने उज्जैन समेत आसपास के 10 रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण किया और निर्माण कार्यों की अपडेट जानकारी ली। महाप्रबंधक, पश्चिम रेलवे रामाश्रय पाण्डेय रतलाम मंडल के उज्जैन प्रवास पर शहर आए। आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का विस्तृत निरीक्षण किया। उज्जैन रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म 1 से 8 तक का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सांसद अनिल फिरोजिया भी मौजूद रहे। महाप्रबंधक पाण्डेय ने कहा कि कुंभ के लिए देशभर से करीब 7800 ट्रेनें चलाई जाएंगी। इस बार 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। नवनिर्मित ट्रेन संचालन नियंत्रण केंद्र देखा निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक ने स्टेशन परिसर में उपलब्ध विभिन्न यात्री सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने रनिंग रूम, हेल्थ यूनिट, लिफ्ट एवं एस्केलेटर की कार्यशीलता की जांच की, साथ ही सर्कुलेटिंग एरिया, पे एंड यूज़ टॉयलेट, बुकिंग कार्यालय एवं प्रतीक्षालय आदि का निरीक्षण किया। इसके अतिरिक्त प्लेटफार्म क्रमांक 8 की ओर नवनिर्मित ट्रेन संचालन नियंत्रण केंद्र एवं प्रस्तावित क्राउड होल्डिंग एरिया का भी अवलोकन किया गया। 6 से अधिक स्टेशनों का निरीक्षण किया महाप्रबंधक पाण्डेय ने उज्जैन स्टेशन के अतिरिक्त सिंहस्थ के दृष्टिगत महत्वपूर्ण स्टेशनों पिंगलेश्वर, पंवासा, नई खेड़ी, चिंतामण गणेश, मोहनपुरा एवं विक्रम नगर का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान इन स्टेशनों पर प्रस्तावित एवं प्रगतिरत निर्माण कार्यों जैसे – हाई लेवल प्लेटफार्म, कवर शेड, फुट ओवर ब्रिज, क्राउड होल्डिंग एरिया, बाउंड्री वॉल एवं अप्रोच रोड आदि की समीक्षा की गई। सभी निर्माण कार्य 2027 तक पूर्ण कर लिए जाएंगे वीआइपी कक्ष में मीडिया से चर्चा करते हुए महाप्रबंधक रामाश्रय पाण्डेय ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के दौरान संभावित अत्यधिक यात्री संख्या को ध्यान में रखते हुए रेलवे द्वारा सभी आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी निर्माण कार्य वर्ष 2027 के अंत तक पूर्ण कर लिए जाएंगे। इस अवसर पर क्षेत्रीय रेल उपभोक्ता सलाहकार समिति के सदस्य महेंद्र गादिया एवं विजय अग्रवाल ने महाप्रबंधक का स्वागत किया। निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान अपर मंडल रेल प्रबंधक (इंफ्रा) अक्षय कुमार सहित रतलाम मंडल के सभी शाखाधिकारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। प्रमुख बिन्दू -पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक रामाश्रय पाण्डेय का दौरा -उज्जैन सहित 10 स्टेशनों के कार्यों का निरीक्षण -प्लेटफार्म 1 से 8 तक का गहन निरीक्षण -रनिंग रूम, हेल्थ यूनिट, लिफ्ट एवं एस्केलेटर का निरीक्षण -सर्कुलेटिंग एरिया, पे एंड यूज़ टॉयलेट का निरीक्षण -बुकिंग कार्यालय एवं प्रतीक्षालय का निरीक्षण -निरीक्षण के दौरान सांसद फिरोजिया भी थे -15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान -देशभर से करीब 7800 ट्रेनें चलाई जाएंगी -सभी निर्माण 2027 तक पूरे हो जाएंगे

BPL कार्ड अपडेट: भोपाल में 1.50 लाख परिवारों को मिलेगा निरस्तीकरण का नोटिस

भोपाल  दो दशक से अधिक की सत्ता में अब तक भाजपा के आम कार्यकर्ताओं ने सत्ता की रेवड़ी का स्वाद तक नहीं चखा, लेकिन मोहन सरकार में उनकी लॉटरी खुलने वाली है। मुख्यमंत्री की विशेष रुचि के चलते जिला स्तर पर बनने वाली समिति सहकारी समितियों का गठन होने जा रहा है। प्रदेश संगठन के निर्देश पर जिला इकाई ने सभी विधायकों से नाम मांग लिए हैं। माना जा रहा है कि इस माह सभी घोषणाएं हो जाएंगी। भाजपा की सत्ता और संगठन में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चाहते थे कि सरकारी के सभी निगम, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्ति हो जाए जिससे पार्टी नेताओं को भी सरकार के होने का अहसास रहे। उनके लगातार प्रयास और संगठन से चले लंबे मंथन के बाद बड़ी संख्या में नेताओं को उपकृत किया गया और बची हुई नियुक्तियां भी पाइप लाइन में है। जहां पर विवाद की स्थिति है उनका निराकरण कर वे घोषणाएं हो जाएगी। एक सप्ताह तक दें पूरी सूची ये नियुक्तियां बड़े नेताओं की हो रही है, लेकिन जल्द ही अब आम कार्यकर्ता को भी उपकृत करने की तैयारी है ताकि उन्हें भी लगे कि वे सत्ताधारी संगठन से ताल्लुक रखते हैं। इसको लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में सभी जिला अध्यक्षों को 25 से अधिक समितियों में नियुक्तियों को लेकर नाम की फेहरिस्त मांग ली है। इसके चलते नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने सभी विधायकों के अलावा कोर कमेटी के सदस्यों से कार्यकर्ताओं के नाम मांग लिए हैं। एक सप्ताह में पूरी सूची बनाकर देने का कहा गया है जिसमें सभी नेताओं का समन्वय होना चाहिए। जिला स्तर पर बनने वाली समितियों में प्रमुख रूप से आरटीओ समिति, उद्यानिकी विभाग की समिति, जेल विभाग में अशासकीय संदर्शक समिति व विजिटर बोर्ड, पशु क्रूरता निवारण समिति, जिला पशु रोगी कल्याण समिति, मछुआ कल्याण व मत्स्य समिति, जिला शहरी विकास अभिकरण में प्रबंधकारिणी व निगरानी समिति, आइटीआइ में जिला कौशल समिति, शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय अनुदान व निर्णायक समिति, खाद्य विभाग की सतर्कता समिति, जिला योजना समिति, अंत्योदय समिति, कॉलेज में जनभागीदारी समिति, पुलिस शिकायत बोर्ड, जिला व्यापार एवं उद्योग बोर्ड, सामाजिक न्याय व निशक्त जन समिति, खेल प्रशिक्षण समिति, जिला जल व स्वच्छता समिति, खनिज निधि समिति, मुख्यमंत्री ऋण माफी योजना, सिटी फॉरेस्ट योजना सहित कुल 25 समितियां हैं। अधिकांश समितियां उमा भारती के मुख्यमंत्री रहते बनी थीं। उसके बाद शिवराज सिंह चौहान के सीएम रहते कुछ समितियों का ही गठन हुआ था। हर बार कार्यकर्ताओं के नाम बुलाए गए, लेकिन घोषणा नहीं हो सकी। एक समय था जब संगठन आधारित सत्ता होती थी, लेकिन अब उल्टा हो गया है। सत्ता हो या संगठन की नियुक्ति उसमें विधायकों की पसंद से दिए गए नामों को ही उपकृत किया जाता है। बूथ से लेकर मंडल अध्यक्ष तक उनके समर्थक रहते हैं तो बची कसर अब सत्ता में भी पूरी हो जाएगी। उनके दिए गए नामों को ही पार्टी सत्ता में भी उपकृत करेगी। उन कार्यकर्ताओं की कोई पूछपरख नहीं है जो कि गुटबाजी में न पड़ कर संगठन के लिए समर्पित है। मजेदार बात ये है कि विधायक ऐसे कार्यकर्ताओं का विरोध कर हाशिए पर पहुंचा देते हैं। फिर मांगे एल्डरमैन के नाम वैसे तो महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व वाली नगर निगम परिषद को एक साल ही शेष रह गया है। इस पर अब पार्टी एल्डरमैन की नियुक्ति करने जा रही है। इसको लेकर पहले भी दो बार नाम लिए जा चुके हैं, लेकिन संगठन में कुछ नाम ऐसे थे जो पदाधिकारी बन गए। इस वजह से फिर से सूची मांगी गई है। 12 पदों को लेकर विधायक चाहते हैं कि उनकी पसंद से ही बने, लेकिन सांसद शंकर लालवानी और महापौर भार्गव भी अपने समर्थकों को उपकृत करना चाहते हैं। उनका तर्क है कि एक-एक एल्डरमैन विधायकों की पसंद से हो जाए तो बाकी छह एल्डरमैन के लिए हमारे नामों को तवज्जो दी जाना चाहिए।

मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष केशव सिंह बघेल ने किया पदभार ग्रहण

भोपाल म.प्र. राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष केशव सिंह बघेल ने गुरुवार को भोपाल स्थित निगम कार्यालय पहुंचकर पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर सांसद ग्वालियर  भारत सिंह कुशवाह, पूर्व मंत्री मती इमरती देवी सहित ग्वालियर संभाग के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह में विशेष अतिथि के रूप में डॉ. उमेश शर्मा, अध्यक्ष भारतीय पशु चिकित्सा परिषद नई दिल्ली, डॉ. पी. एस. पटेल, संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग, डॉ. संजय गोवानी, प्रबंध संचालक, एम.पी.सी.डी.एफ, डॉ. अनुपम अग्रवाल रजिस्ट्रार मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड, डॉ. एम.के. गौतम, संयुक्त संचालक राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान, डॉ. एस.एन. शुक्ल, प्रबंध संचालक म.प्र. राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम तथा डॉ. प्रवीण शिंदे, कार्यपालिक संचालक निगम उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त निगम एवं संचालनालय, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।  

9.09 लाख किसानों से 53.40 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 9 लाख 9 हजार किसानों से 53 लाख 40 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जाता है। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि अभी तक 14 लाख 81 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 9525.70 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।  

राज्य शिक्षा केंद्र ने बीएड, डीएलएड सहित विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की प्रवेश तिथियां की जारी

भोपाल  राज्य शिक्षा केन्द्र, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए समय-सारणी जारी कर दी गई है। अभ्यर्थियों को एमपी ऑनलाइन के माध्यम से आवेदन करना होगा। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार एम.एड., एम.ए. मनोविज्ञान (व्यवहारिक), पी.जी.डी.जी.सी., बी.एड., डी.एल.एड., डी.पी.एस.ई. एवं पी.जी.डी.ई.एल.टी. पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में होगी। प्रवेश प्रक्रिया प्रदेश के प्रगत शैक्षिक अध्ययन संस्थान, शासकीय अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, आंग्ल भाषा प्रशिक्षण संस्थान, पूर्व प्राथमिक प्रशिक्षण संस्थान, मनोविज्ञान शिक्षा एवं संदर्शन महाविद्यालय जैसी प्रदेश की विभिन्न शासकीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाओं में संचालित पाठ्यक्रमों के लिए होगी। राज्य शिक्षा केन्द्र के अपर संचालक डॉ. अरुण सिंह ने बताया कि इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथियों के अनुसार राज्य शिक्षा केन्द्र की वेबसाइट rsk.mponline.gov.in पर ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं। प्रवेश कार्यक्रम की तिथियां     डी.एल.एड. : 15 मई से 14 अगस्त 2026     बी.एड. : 25 मई से 27 जुलाई 2026     एम.एड. : 1 जून से 30 जुलाई 2026     पी.जी.डी.ई.एल.टी. : 3 जून से 22 जून 2026 तक     डी.पी.एस.ई. : 8 जून से 31 जुलाई 2026 तक     एम.ए. मनोविज्ञान एवं पी.जी.डी.जी.सी. : 8 जून से 31 जुलाई 2026 तक

विदिशा पुलिस की अभिनव पहल से पारिवारिक एवं संपत्ति विवादों का संवेदनशील निराकरण

भोपाल  समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान, सुरक्षा एवं संवेदनशीलता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विदिशा पुलिस द्वारा संचालित “सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत” एक प्रभावी एवं जनहितकारी पहल के रूप में सामने आई है। जिले में यह पहल बुजुर्गों के लिए न्याय और विश्वास का ऐसा मंच बन चुकी है, जहाँ उनकी समस्याओं को न केवल गंभीरता से सुना जा रहा है, बल्कि पारिवारिक समन्वय, सामाजिक संवेदनशीलता एवं कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से त्वरित समाधान भी सुनिश्चित किया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक  रोहित काशवानी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे के मार्गदर्शन में संचालित इस पहल के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े विवादों एवं समस्याओं की नियमित रूप से सुनवाई की जा रही है। पंचायत की बैठकों में कोर कमेटी के सदस्य  आर. कुलश्रेष्ठ,  प्रमोद व्यास, डॉ. सचिन गर्ग,  विनोद शाह,  अतुल शाह एवं  डी.के. वाजपेयी सक्रिय सहभागिता निभा रहे हैं। सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत की शुरुआत 23 जनवरी 2025 को की गई थी। तब से लेकर 15 अप्रैल 2026 तक कुल 54 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में कुल 187 प्रकरण प्राप्त हुए, जिनमें से 131 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया है। शेष मामलों में दस्तावेज, साक्ष्य एवं संबंधित पक्षों की उपस्थिति के आधार पर विधिसम्मत कार्यवाही एवं आगामी सुनवाई की प्रक्रिया जारी है। हाल ही में आयोजित बैठक में कुल 10 प्रकरणों की सुनवाई की गई। पंचायत के माध्यम से कई जटिल पारिवारिक मामलों का आपसी समझाइश एवं संवाद के जरिए समाधान कराया गया। एक प्रकरण में शमशाबाद क्षेत्र के एक वरिष्ठ नागरिक ने शिकायत की थी कि उनके बेटे द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि निकालकर खर्च कर दी गई तथा उनकी जमीन पर खेती की जा रही है। सुनवाई के दौरान पंचायत ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर सहमति बनाई, जिसके तहत बेटे ने 15 दिनों के भीतर शेष राशि लौटाने पर सहमति व्यक्त की। एक अन्य मामले में विधवा बुजुर्ग महिला ने अपने बेटे द्वारा डराने-धमकाने एवं घर के बाहर खड़ी बाइक में आग लगाने की शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को विधिसम्मत आपराधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार पारिवारिक हस्तक्षेप, वैवाहिक तनाव एवं संपत्ति विवादों से जुड़े मामलों में भी दोनों पक्षों को सुनकर समाधान के प्रयास किए गए। कई मामलों में आपसी सहमति से विवाद समाप्त हुए तथा परिवारों में सौहार्दपूर्ण वातावरण स्थापित हुआ। सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत की विशेषता यह है कि यहाँ केवल शिकायतों की सुनवाई ही नहीं होती, बल्कि बुजुर्गों को मानसिक संबल, सामाजिक सुरक्षा एवं पारिवारिक सम्मान दिलाने का प्रयास भी किया जाता है। कई मामलों में पुलिस एवं पंचायत सदस्यों की पहल से टूटते पारिवारिक संबंध पुनः सामान्य हुए हैं तथा बुजुर्गों को अपने ही परिवार में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिला है। मध्यप्रदेश पुलिस का मानना है कि वरिष्ठ नागरिक समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव, संस्कार एवं योगदान समाज की दिशा तय करते हैं। ऐसे में उनका सम्मान, सुरक्षा एवं भरण-पोषण सुनिश्चित करना केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक एवं नैतिक जिम्मेदारी भी है। विदिशा पुलिस की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है। सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत न केवल वरिष्ठ नागरिकों को न्याय दिलाने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि समाज में पारिवारिक मूल्यों एवं संवेदनशीलता को भी मजबूत कर रही है। सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को यह विश्वास मिल रहा है कि पुलिस उनके अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।  

वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद, सामान्य शव वाहन में ले जाए गए मोर पर सवाल

रतलाम  सैलाना नगर के कुमावतपुरा क्षेत्र में गुरुवार सुबह राष्ट्रीय पक्षी मोर की करंट लगने से मौत हो गई। मामले में वन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वन्यजीव नियमों के अनुसार मोर की मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य होता है, लेकिन विभाग ने बगैर पोस्टमार्टम कराए ही मोर का अंतिम संस्कार कर दिया। विभाग की ओर से मोर के शव का क्षत–विक्षत होने का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन घटना के बाद जो वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए उनमें मोर का शव सामान्य देखा जा सकता है। जानकारी के अनुसार कुमावतपुरा के मुख्य मार्ग पर एक मोर उड़कर एक स्थान से दूसरे स्थान जा रहा था। इसी दौरान वह विद्युत तारों में उलझ गया और करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय नागरिकों ने सड़क पर मृत अवस्था में पड़े मोर को देखा तो वन विभाग को सूचना दी। करीब एक घंटे बाद वन विभाग का कर्मचारी मौके पर पहुंचा और मोर को वहां से उठाकर ले गया। बाद में अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार के दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी राधेश्याम जोशी, वनपाल नारायण कटारा, कार्यवाहक वनपाल रघुवीर सिंह चुंडावत एवं सुरक्षा चौकीदार कालू मौजूद रहे। दरअसल वन्यजीव कानून के तहत राष्ट्रीय पक्षी की मौत होने पर अंतिम संस्कार से पहले पोस्टमार्टम कराना आवश्यक होता है, ताकि मृत्यु के कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सके। इसके बावजूद विभाग ने नियमों का पालन नहीं किया। वन परिक्षेत्र अधिकारी राधेश्याम जोशी ने बताया कि मोर का शव क्षत–विक्षत हो चुका था, इसलिए पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। वहीं पशु चिकित्सक बीएल पाटीदार ने कहा कि मोर की मौत के 24 घंटे के भीतर किसी भी स्थिति में पोस्टमार्टम किया जा सकता है। वन विभाग की ओर से पोस्टमार्टम कराने संबंधी कोई पत्र उन्हें प्राप्त नहीं हुआ।