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अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए राज्य सरकार ने शुरू किया ऑनलाइन प्रशिक्षण

अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने राज्य सरकार ने उठाये कदम, दिया ऑनलाइन प्रशिक्षण विशेषज्ञों ने संबद्ध अधिकारियों को दिया ऑनलाइन प्रशिक्षण भोपाल आगामी अक्षय तृतीया 20 अप्रैल के अवसर पर होने वाले बाल विवाहों की संभावनाओं को पूरी तरह से रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। विभाग द्वारा 'बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006' के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये प्रदेश भर के नामित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम, शुक्रवार को संचालनालय महिला बाल विकास भोपाल में हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करना और सूचना मिलते ही वैधानिक प्रक्रियाओं को गति देना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की किशोर न्याय समिति के वरिष्ठ सलाहकार एवं अधिवक्ता श्री गुरमुख सिंह लाम्बा तथा यूनिसेफ, मध्यप्रदेश के बाल संरक्षण अधिकारी श्री गोविंद बेनीवाल उपस्थित रहे। विषय विशेषज्ञों ने बाल विवाह प्रतिषेध कानून की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों को संविधान प्रदत्त उनकी शक्तियों और कर्तव्यों का बोध कराया। वरिष्ठ सलाहकार श्री लाम्बा ने कानूनी प्रावधानों के तहत त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया, वहीं श्री बेनीवाल ने सामाजिक दृष्टिकोण और प्रशासनिक तालमेल के महत्व को रेखांकित किया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को विस्तृत रूप से बताया गया कि बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही किस प्रकार निषेधाज्ञा जारी करवाई जाए और यदि विवाह संपन्न हो चुका हो, तो उसे शून्य घोषित कराने की विधिक प्रक्रिया क्या होनी चाहिए। विशेषज्ञों ने पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर की जाने वाली त्वरित कार्रवाइयों और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा की जाने वाली विभिन्न वैधानिक प्रक्रियाओं के बारे में भी ओरिएंटेशन किया। प्रशिक्षण में अधिकारियों ने फील्ड में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और चुनौतियों को साझा किया, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान करते हुए मार्गदर्शन प्रदान किया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अक्षय तृतीया के दौरान निगरानी तंत्र को अत्यंत संवेदनशील और सक्रिय रखा जाएगा जिससे किसी भी मासूम का भविष्य असुरक्षित न हो। इस महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्रशिक्षण में विभाग के राज्य और जिला कार्यालयों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया।  

सफलता की मिसाल: ड्रोन के साथ हौसलों को नई उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा

सफलता की कहानी: ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा आर्थिक तंगी से उभरकर आत्मनिर्भर बनीं और आजीविका मिशन से मिली पहचान भोपाल सरकार द्वारा संचालित आजीविका मिशन ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इस मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से महिलाएं अब अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। रायसेन जिले के सांची विकासखण्ड के ग्राम रतनपुर गिरधारी निवासी श्रीमती सरूपी मीणा आजीविका मिशन से जुड़कर आज आर्थिक रूप में ना सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत भी हैं। श्रीमती सरूपी मीणा द्वारा सांची में रूरल मार्ट का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने ड्रोन दीदी के नाम से भी अपनी अलग पहचान बनाई है। आर्थिक तंगी से उभरकर आत्मनिर्भर बनीं सरूपी मीणा श्रीमती सरूपी मीणा ने बताया कि वे 10वीं तक शिक्षित थीं। उनके पति कृषि कार्य करते थे, जिससे बड़ी मुश्किल से परिवार का भरण-पोषण हो पाता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपनी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सकीं, जबकि उनकी इच्छा पढ़ाई जारी रखने की थी। कुछ वर्ष पहले आजीविका मिशन के कर्मचारियों ने गांव में भ्रमण कर महिलाओं को स्व-सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उस समय सरूपी मीणा बेरोजगार थीं और आगे बढ़ने के अवसर तलाश रही थीं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की और समूह से ऋण लेकर अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू की। साथ ही, उन्होंने समूह निर्माण और सर्वे कार्य सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) के रूप में काम करना शुरू किया, जिससे उन्हें मानदेय मिलने लगा। समूह से प्राप्त ऋण और मानदेय के सहयोग से उन्होंने एक किराना दुकान प्रारंभ की। इसके अलावा, उन्हें बैंक सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिससे उनके समूह का सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) भी स्वीकृत हुआ। इन सभी कार्यों से उनकी मासिक आय 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच गई। बाद में उन्होंने सीएससी सेंटर का संचालन भी शुरू किया, जिससे उनकी आय में और वृद्धि हुई। निरंतर मेहनत और लगन के चलते श्रीमती सरूपी मीणा ने अपनी शिक्षा जारी रखते हुए स्नातक तक की पढ़ाई पूर्ण कर ली। आजीविका मिशन से मिली पहचान, ड्रोन तकनीक से बढ़ी आय श्रीमती सरूपी मीणा की लगन और मेहनत के कारण उन्हें सांची में रूरल मार्ट का संचालन करने का अवसर मिला। वह रूरल मार्ट में दीदी समूहों के उत्पादों का विक्रय एवं अन्य सामग्री का विक्रय करने का कार्य करती है। इसके अतिरिक्त श्रीमती सरूपी मीणा को वर्ष 2023-24 में नमो ड्रोन योजना का भी लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि नमो ड्रोन योजना में चयनित होने के बाद उन्हें ग्वालियर में ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद उन्हें निःशुल्क ड्रोन दिया गया। कम्पनी से आए इंजीनियर ने भी उन्हें ड्रोन चलाने का पूरा प्रशिक्षण दिया। जिसके बाद वह खेतों में ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव करने लगी। इस प्रकार उन्हें प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख रू की आमदनी हो जाती है। श्रीमती सरूपी मीणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि आजीविका मिशन महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ ही समाज में उनका मान-सम्मान भी बढ़ा है।  

गुना में मंत्री विश्वास कैलाश सारंग का भव्य स्वागत: ऐतिहासिक पहल

गुना में मंत्री विश्वास कैलाश सारंग का भव्य स्वागत: ऐतिहासिक पहल गुना आज गुना अल्पप्रवास पर पधारे मध्यप्रदेश शासन के खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग जी का गुना बायपास पर भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता श्री विश्वनाथ सिंह सिकरवार के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने गर्मजोशी के साथ उनका अभिनंदन किया। मंत्री  सारंग जी के आगमन पर कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों, पुष्प वर्षा एवं जयकारों के साथ उनका स्वागत किया गया, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय हो गया। इस स्वागत कार्यक्रम में प्रमुख रूप से  मनीष कृष्णानी, शेरा राजावत, देवकीनंदन सोनी, सरदार रंजीत सिंह, सतेंद्र सिकरवार, मुनेश धाकड़, विकास राठौर, अमित जाट, जगदीश नामदेव, भूपेंद्र सोलंकी, रोहन सेन, प्रदीप कुशवाह सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान  सारंग जी ने सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का यह स्नेह और समर्थन उन्हें प्रदेश के विकास के लिए और अधिक समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देता है।

जनगणना में गलत नाम भरने पर नहीं मिलेगा सुधार का मौका, सावधानी से भरें फार्म

भोपाल  जनगणना 2027 के तहत गुरुवार से स्वगणना का पोर्टल एसईडॉटसेंससडॉटजीओवीडॉटइन se.census.gov.in खुल गया है। यहां स्वगणना के प्रति खासा उत्साह रहा, लेकिन ऑनलाइन फार्म में तकनीकी दिक्कतें आने से लोगों को परेशान होते भी देखा गया। तीसरे पेज पर जैसे ही घर की लोकेशन जियो टैगिंग से करने का बॉक्स आया, फार्म अटक गया। यहां दर्ज किए पते के आधार पर खुद ही जियो टैगिंग के लिए मैप खुलता है। इसमें लोग बार- बार सटीक लोकेशन को लेकर प्रयास करते रहे। स्व गणना में नाम भरने में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है अन्यथा गलत नाम ही जुड़ जाएगा। इसमें स्पष्ट बताया जा रहा है कि नाम सुधारने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा। लोकेशन को लैटिट्यूड- लॉन्गिट्यूड में बताकर कंफर्म करने का पूछा जा रहा है। इसमें लोग भ्रमित हो रहे हैं। अरेरा कॉलोनी में रहने वाले अवधेश सिंह ने बताया कि आधे से पौन घंटे तक टैगिंग की कोशिश की। लोकेशन में दिक्कत आई। काम पर जाना था, इसलिए फिर नहीं किया। अब शुक्रवार को फिर कोशिश करेंगे। ऐसे समझें जनगणना की टाइम लाइन स्व गणना के लिए 30 अप्रैल 2026 तक पार्टल खुला रहेगा। प्रगणक घर-घर जाकर मकान सूचीकरण का काम 1 मई से शुरु करेंगे। यह कार्य 30 मई 2026 तक होगा। पोर्टल पर राज्य का चयन कर परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। यहां ऑनलाइन मैप पर घर की जियो टैंगिंग होगी। स्व गणना के तहत ऑनलाइन पोर्टल पर खुद की डिटेल जमा करेंगे तो आखिर में 11 अंकों की एक विशिष्ट स्व गणना पहचान संख्या बनेगी। ये मोबाइल और ई-मेल पर भी प्राप्त होगी। जनगणना के दौरान इसकी जरूरत पड़ेगी। किसी भी व्यक्ति को अपने परिवार की महिला सदस्य का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। फार्म में नाम बिल्कुल सही दर्ज करें, उसे सुधारने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा स्व गणना में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसमें स्पष्ट बताया जा रहा है कि फार्म में नाम बिल्कुल सही दर्ज करें, उसे सुधारने का दूसरा मौका नहीं मिलेगा। गलत नाम ही जनगणना में जुड़ जाएगा। सुबह फार्म खुल रहा था, लेकिन दोपहर बाद इसमें बाधा आने लगी। बताया जा रहा है देशभर से लोग इसे ओपन करने की प्रक्रिया करने लगे, जिससे ये अटकता रहा। जिला प्रशासन के संबंधित अफसरों के अनुसार एक बैठक में 20 से 22 मिनट में फार्म भरा जा सकता है। थोड़े धैर्य के साथ काम करेंगे तो दिक्कत नहीं होगी। एक बार लोकेशन को सर्च करने के बाद उसे पुख्ता करने के लिए पूछा जाता है।

5 हजार करोड़ की योजना से प्रदेश के शहरों में आएगा बदलाव, फंड का हुआ इंतजाम

भोपाल   केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) की गाइडलाइन जारी होने के बाद अब प्रदेश के सभी नगरीय निकाय अपने यहां विकास कार्यों को गति देने करोड़ों की योजनाएं बना सकते हैं। प्रदेश के बड़े चारों नगर निगम जहां 2 हजार करोड़ तक की परियोजना बना सकते हैं, वहीं छोटी नगर परिषद 50 करोड़ की योजना बनाकर अपने यहां बदलाव ला सकती है। नगरीय विकास विभाग ने यूसीएफ में अपने हिस्से की राशि देने के लिए द्वारका योजना के 5 हजार करोड़ का फंड सुरक्षित रखा है। निकायों को केवल 10 से 15 प्रतिशत राशि देना पड़ेगी। 25 प्रतिशत केन्द्र, 50 प्रतिशत राशि बाजार से लेना जरूरी है और शेष 25 प्रतिशत में कुछ सहयोग राज्य सरकार करेगी और कुछ निकाय मिलाएंगे। भोपाल में शहरी सुधार कार्यशाला में यह जानकारी दी। प्रदेश के नगरीय निकायों में इसके लिए जरूरत के अनुसार कार्ययोजना बनाने का काम गुरुवार को शुरू हुआ। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शहरी सुधार कार्यशाला का आयोजन किया है। राजधानी में आयोजित यह कार्यशाला दो दिन चलेगी। "शहरी सुधार कार्यशाला" का प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रदेश के नगरीय निकायों के अधिकारियों को दूरदर्शी नेतृत्व और कर्मठता के साथ नगरों के कायाकल्प करने का आह्वान किया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन केवल नियमों से नहीं, बल्कि उचित व्यवहार से चलता है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शहरी केंद्रों को 'विकास केंद्र' के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अब केवल सुदृढ़ सड़क और स्वच्छ जल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें शहर में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। राजस्व वृद्धि पर विशेष बल शहरों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण पर चर्चा करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भूमि मुद्रीकरण और भूमि के कुशल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाला समय शहरीकरण का है। यदि अधिकारी पारदर्शिता और जन-भागीदारी के साथ नए कार्य करेंगे और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देंगे, तो जनता भी कर वृद्धि जैसे निर्णयों में सहर्ष साथ देगी। अर्बल चेलेंज फंड और द्वारका योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से नगरीय निकायों के कायाकल्प की संभावना अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आगामी वर्ष के लिए एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना तैयार करना और नियोजित विकास के साथ नागरिक जागरूकता विकसित करना इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने अर्बल चेलेंज फंड और द्वारका योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से नगरीय निकायों के कायाकल्प की संभावनाओं पर भी बल दिया। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विभाग एक परिवार और सामूहिक भावना के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के आयुक्त, मुख्य नगरपालिका अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी इस कार्यशाला में सम्मिलित हैं। कार्यशाला का मुख्य केंद्र नागरिक संतुष्टि और मूलभूत सिद्धांतों पर कार्य करना है।

Census 2027: ऑनलाइन प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल, जानें पूरी जानकारी

भोपाल  देश की डिजिटल कुंडली यानी जनगणना 2027 का आगाज गुरुवार से हो गया है। इस बार आपको प्रगणक के घर आने और घंटों पूछताछ का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। स्व-गणना के जरिए अब नागरिक खुद पोर्टल पर अपनी और अपने परिवार की जानकारी अपडेट कर सकते हैं। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में एक यूनिक एसई आईडी सबसे अहम कड़ी होगी, जिसे संभालकर रखना आपकी जिम्मेदारी होगी। 34 सवालों के जवाब और लोकेशन का मैप ऑनलाइन जनगणना की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे तकनीक से जोड़ा गया है। इसमें मोबाइल नंबर और ईमेल पर ओटीपी वेरिफिकेशन के साथ ही गूगल मैप के जरिए घर की सटीक लोकेशन भी दर्ज करनी होगी। परिवार के सदस्यों की शिक्षा, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े करीब 34 सवालों के जवाब देने होंगे। डिजिटल जनगणना: ऐसे करें खुद का पंजीकरण चरण प्रकिया स्टेप 1-2 पोर्टल पर मोबाइल नंबर/ईमेल दर्ज कर ओटीपी से वेरिफिकेशन। स्टेप 3-4 परिवार के मुखिया का विवरण और गूगल मैप पर घर की लोकेशन। स्टेप 5-6 सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार और आय से जुड़े 34 सवालों के जवाब। स्टेप 7-8 जानकारी का प्रीव्यू कर फाइनल सबमिट और 'एसई आइडी' सुरक्षित करना। क्यों जरूरी है आइडी: मई माह में जब प्रगणक आपके घर सत्यापन के लिए आएगा, तो आपको बस यह आइडी दिखानी होगी। भूल गए तो क्या होगा: यदि आप आइडी गुम कर देते हैं या नहीं दिखा पाते, तो आपकी ऑनलाइन मेहनत बेकार जाएगी। प्रगणक को दोबारा शुरुआत से आपका डेटा मैनुअल भरना पड़ेगा। ग्राउंड जीरो पर तैयारी: प्रगणकों को मिल रही ट्रेनिंग एक तरफ नागरिक ऑनलाइन डेटा भर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने सत्यापन के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की फौज तैयार कर ली है। शहर में आइआइटीटीएम और शिक्षा महाविद्यालय हजीरा में सघन प्रशिक्षण चल रहा है। ग्रामीण इलाकों में तहसील और विकासखंड स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स कर्मचारियों को डिजिटल डेटा हैंडलिंग के गुर सिखा रहे हैं। 30 अप्रैल तक चलेगी स्व-गणना की प्रक्रिया मध्यप्रदेश में 16 से 30 अप्रैल तक ऑनलाईन स्व-गणना का कार्य होगा। एक से 30 मई तक मकान सूचीकरण होगा। यह प्रक्रिया डिजिटल रूप से होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में आयोजित कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व-गणना पोर्टल se.census.gov.in पर प्रारंभिक पंजीकरण कर प्रदेश में स्व-गणना प्रक्रिया का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों की प्रक्रिया नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य को सही दिशा देने का महत्वपूर्ण कदम है। इससे हम जान सकेंगे कि विकास की धारा समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सुगमता से पहुंच रही है या नहीं। यह जनगणना हमारी अगली पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के लिए है।

सरकार द्वारा प्रदेश में नई तहसीलें, सीमाओं का नया निर्धारण शुरू

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। तहसीलों की सीमाएं नए सिरे से तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राजधानी भोपाल से इसकी शुरुआत हुई। भोपाल में अभी तीन तहसीलों में 8 नजूल क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों को ही तहसील का दर्जा देते हुए आम जनता की सुविधा के अनुसार इनकी सीमाएं नए सिरे से तय की जाएगी। इसके लिए बाकायदा जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इस संबंध में अगले दो माह तक जनता से सुझाव लिए जाएंगे। 15 जून 2026 तक पुनर्गठन आयोग के पोर्टल पर जाकर सुझाव दिए जा सकते हैं। इसलिए ये प्रक्रिया सरकार का मानना है कि तहसीलों के पुनर्गठन से राजस्व, नामांतरण, जाति-आय प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी मामलों सहित अन्य प्रशासनिक सेवाएं लोगों को आसानी से मिल सकेंगी। आम जनता को अपने राजस्व या प्रशासनिक कार्यों के लिए बहुत दूर न जाना पड़े। सुझाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव तैयार कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। भोपाल में पुनर्गठन इसलिए जरूरी भोपाल के कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं, जहां के निवासियों को तहसील कार्यालय पहुंचने 50-60 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। पुनर्गठन से कार्यालय उनके करीब आएंगे। भोपाल की हुजूर जैसी तहसीलें बहुत बड़ी हैं, जिनका प्रबंधन कठिन है। इन्हें काटकर छोटी और व्यवस्थित इकाइयां बनाना। खसरा, खतौनी और जाति प्रमाण पत्र जैसे कामों के लिए 10-15 किमी के भीतर कार्यालय मिलेगा। बावडिय़ा कलां जैसे क्षेत्रों को हटाकर चंदनपुरा और मेंडोरा जैसे क्षेत्रों को जोडऩे का प्रस्ताव है। एमपी नगर, गोविंदपुरा और बैरागढ़ जैसे नजूल क्षेत्रों की सीमाओं को भी फिर से परिभाषित किया जा रहा है। भोपाल के लिए विशेष प्रस्ताव संभागायुक्त के माध्यम से शासन को भेजे जा चुके हैं। भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के मुताबिक शासन की मंशा के अनुसार प्रस्ताव भेजे गए थे। अब इन पर प्रक्रिया बढ़ी है। आमजन को इसमें अपने हिस्सेदारी करना चाहिए। बैरागढ़ नजूल पहुंचे कलेक्टर, फाइल की पेंडेंसी की डिटेल ली भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जिले का कामकाज समझने की शुरुआत बैरागढ़ नजूल कार्यालय से की। नजूल पहुंचकर उन्होंने उपस्थित कर्मचारियों से उनके नाम व काम को लेकर पूछताछ की। राजस्व प्रकरण से जुड़ी फाइल भी उठाई। उसकी पेंडेंसी के बारे में पूछा। ऑनलाइन प्रक्रिया में ऑफलाइन फाइल का क्या काम, इस पर भी चर्चा की। पूरी तरह से ई- ऑफिस सिस्टम लागू करने व ऑनलाइन ही काम करने को कहा। वे नजूल शहर वृत्त भी गए। इस दौरान तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह, आलोक पारे, प्रेमप्रकाश गोस्वामी भी उपस्थित रहे।

एमपी में लघु उद्योगों में महिलाएं भी बना रही हैं कमाल, 8.87 लाख में से हर चौथा उद्योग महिला के पास, 6 साल में रोजगार 6 गुना बढ़ा

भोपाल  देश में महिला आरक्षण को लेकर चर्चा के बीच अब महिलाओं की आर्थिक ताकत के आंकड़े भी सामने आ रहे हैं। मध्य प्रदेश में महिलाओं ने सिर्फ घर तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि कारोबार की दुनिया में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में हर चौथा लघु उद्योग अब महिलाओं के हाथ में है, जो बदलाव की साफ तस्वीर दिखाता है। यह आंकड़े लोकसभा में पेश किए गए हैं, जिन्हें सांसद विजय सिंह बघेल ने सामने रखा। इन आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि महिलाएं अब सिर्फ नौकरी करने तक सीमित नहीं हैं बल्कि खुद रोजगार देने वाली बन रही हैं। एमपी में 8.87 लाख MSME 28 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में कुल 8,87,087 पंजीकृत MSME इकाइयां हैं। इनमें से 2,28,959 इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं। यानी प्रदेश की लगभग हर चौथी MSME इकाई महिला उद्यमियों के हाथ में है, जो आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत संकेत है। 6 साल में 6 गुना बढ़ा महिला रोजगार महिला उद्यमियों की बढ़ती संख्या का असर रोजगार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में जहां MSME क्षेत्र में 1,53,493 महिलाएं कार्यरत थीं, वहीं 2026 तक यह संख्या बढ़कर 10,07,995 हो गई है। यह छह गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाती है कि महिलाएं न केवल खुद आगे बढ़ रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। 6 साल में 10 लाख महिलाओं को मिला काम महिला उद्यमियों की बढ़ती संख्या का असर रोजगार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2020-21 में MSME सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं की संख्या 1,53,493 थी। लेकिन 28 फरवरी 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 10,07,995 पहुंच गया। यानी सिर्फ 6 सालों में 6 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। यह दिखाता है कि महिलाएं न केवल खुद बिजनेस शुरू कर रही हैं बल्कि दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। इससे राज्य में आर्थिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। उद्यम पोर्टल के बाद तेजी से बढ़ी संख्या महिला उद्यमियों की संख्या में यह उछाल अचानक नहीं आया बल्कि इसके पीछे सरकारी पहल भी बड़ी वजह है। उद्यम पोर्टल लॉन्च होने के बाद महिलाओं ने बड़ी संख्या में अपने बिजनेस रजिस्टर कराए। 2020-21 में जहां महिला स्वामित्व वाले MSME की संख्या सिर्फ 14,239 थी, वहीं 2022-23 में यह बढ़कर 2,07,795 हो गई। 2023-24 में यह संख्या और बढ़कर 7,44,746 तक पहुंच गई। हालांकि ताजा आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में 2,28,959 यूनिट्स पंजीकृत हैं, जो अब भी एक मजबूत संख्या मानी जा रही है। देश में भी महिलाओं का बढ़ता दबदबा अगर पूरे देश की बात करें तो महिला उद्यमिता तेजी से बढ़ रही है। MSME रजिस्ट्रेशन के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है, जहां सबसे ज्यादा यूनिट्स पंजीकृत हैं। वहीं महिला नेतृत्व वाले MSME में आंध्र प्रदेश शीर्ष पर है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी इस मामले में मजबूत स्थिति में हैं। देशभर में उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ से ज्यादा महिला उद्यमी MSME पंजीकृत हो चुके हैं, जो महिलाओं के बढ़ते योगदान को दिखाता है। उद्यम पोर्टल से मिली गति वर्ष 2020-21 में उद्यम पोर्टल शुरू होने के बाद महिला उद्यमियों की संख्या में तेजी आई। उस समय 14,239 महिला स्वामित्व वाले MSME थे। 2022-23 में यह बढ़कर 2,07,795 और 2023-24 में 7,44,746 तक पहुंच गई। 2025-26 में यह संख्या 2,28,959 पर दर्ज की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रहा महिलाओं का दबदबा देशभर में भी महिला उद्यमिता तेजी से आगे बढ़ रही है। उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ महिला नेतृत्व वाले MSME पंजीकृत हो चुके हैं। महाराष्ट्र MSME पंजीकरण में अग्रणी है, जबकि महिला नेतृत्व वाले उद्यमों में आंध्र प्रदेश शीर्ष पर है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी इस सूची में मजबूत स्थिति में हैं। आर्थिक सशक्तिकरण की नई तस्वीर एमपी के ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं अब सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यवसाय और उद्योग में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। यह बदलाव नारी शक्ति के सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाता है। एमपी में महिला उद्यमियों की संख्या ऐसे बढ़ी     2020-21: उद्यम पोर्टल लॉन्च होने के बाद पहले वर्ष में राज्य में महिला स्वामित्व वाले एमएसएमई की संख्या 14,239 थी ।     2022-23: यह संख्या बढ़कर 2,07,795 तक पहुंच गई ।     2023-24: वर्ष 2023-24 में राज्य में महिला उद्यमियों की संख्या अपने उच्चतम स्तर 7,44,746 पर पहुंच गई ।     2025-26: 28 फरवरी 2026 तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में महिला नेतृत्व वाले 2,28,959 एमएसएमई पंजीकृत हैं। देश में सबसे ज्यादा एमएसएमई महाराष्ट्र में एमएसएमई और महिला नेतृत्व में अग्रणी राज्ययदि राष्ट्रीय स्तर पर तुलना करें, तो एमएसएमई पंजीकरण के मामले में महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, जहां कुल पंजीकृत इकाइयों की संख्या सबसे अधिक है । वहीं, महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई (Woman-owned MSMEs) के मामले में आंध्र प्रदेश ने बाजी मारी है, जो देश में सर्वाधिक महिला उद्यमियों वाला राज्य बना हुआ है। इन अग्रणी राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। पूरे देश की बात करें तो उद्यम पोर्टल पर अब तक 3.07 करोड़ महिला नेतृत्व वाले एमएसएमई पंजीकृत हो चुके हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था में महिलाओं के बढ़ते योगदान को प्रमाणित करते हैं।

अब तक 2937 स्थानों पर हुई जांच, 4527 गैस सिलेंडर जब्त किए गए

भोपाल  खाद्य, नागरिकआपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिये निरंतर कार्यवाही की जा रही है, अभी तक 2937 स्थानों पर जांच की गई, 4527 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किये गए तथा 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई। प्रदेश के 7 64 रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) की जांच कराई गई है। इसमें 1 प्रकरण में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। प्रदेश के समस्त जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को सतत् रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध है। मंत्री राजपूत ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि पीएनजी पाइपलाइन जिन क्षेत्रों में बिछ चुकी है, उस क्षेत्र के उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन जरूर लें। इससे उन्हें गैस सिलेंडर लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। गैस की सतत आपूर्ति होगी। उपभोक्ताओं से आग्रह है कि किसी तरह का भ्रम नहीं पालें। पीएनजी पूरी तरह से सुरक्षित है। भारत में कच्चे तेल (Crude Oil)का पर्याप्त भण्डार है, देश एवं प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की निरंतर सप्लाई हो सके एवं सप्लाई में कोई रुकावट न आए। मध्यप्रदेश और पूरे देश में एलपीजी (LPG) पेट्रोल, डीजल, पीएनजी एवं सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मंत्री राजपूत ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित 70% सीमा के अधीन संस्थाओं एवं प्रतिष्ठानों को तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार सप्लाई निरंतर जारी रखने के निर्देश दिये हैं। यह भी ध्यान रखा जाये कि सड़क पर कारोबार कर रहे छोटे व्यवसायी (स्ट्रीट वेण्डर) को भी उक्त अनुसार कमर्शियल सिलेण्डर प्रदाय किये जायें। ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय ( Extended Hours) तक काम कर रहे हैं। प्रदेश के जिलों में स्थित बॉटलिंग प्लांट तथा वितरकों के पास उपलब्धता एवं प्रदाय की सतत् रूप से समीक्षा की जा रही है। साथ ही माइग्रेन्ट लेबर, छात्रों आदि के लिए खाना पकाने के लिये 05kgके सिलेण्डेर ऑयल कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आम जनता से अपील की गई है कि वह वैकल्पिक साधनों, जैसे इंडक्शन, सोलर कुकर, बायो गैस, गोबर धन तथा स्वससहायता समूहों द्वारा उत्पादित गो-काष्ठ का उपयोग करें। वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग को उनके यहां रजिस्‍टर्ड 44 कम्‍प्रेस्‍ड बायोगैस (सीबीजी) प्रोजेक्‍ट को चालू करने के निर्देश दिये गये हैं। इसी प्रकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 44 जिलों में 136 बायोगैस प्‍लांट संचालित होना बताया गया है। इन बायोगैस प्‍लांटों को क्रियाशील करने के निर्देश भी दिये गये हैं। रसोई गैस की स्थिति रसोई गैस का प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के विरूद्ध एलपीजी सिलेण्डर का प्रदाय निरंतर रूप से किया जा रहा है। साथ ही कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार आवंटन प्रतिशत के आधार पर कॉमर्शियल गैस सिलेण्डरों की सप्लाई सतत् रूप से की जा रही है। घरेलू एवं कॉमर्शियल की सप्लाई में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। घरेलू एवं कॉमर्शियल सिलेण्डर की सप्लाई एवं वितरण सामान्य है। पीएनजी गैस सीजीडी संस्थाओं तथा ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी द्वारा विशेष अभियान चलाकर जिन घरों में पाइप लाइन की अधोसंरचना उपलब्ध है, एवं सप्लाई प्राप्त नहीं कर रहे है, ऐसे घरों को आगामी 03 माह में पीएनजी से कनेक्ट करने के लिये निर्देशित किया गया। इस के लिये सभी सीजीडी संस्था एवं शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कैम्प लगाए जाएं, जिसमें जिला प्रशासन, खाद्य विभाग नगर निगम/नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी संस्थाओं के जिला अधिका‍री को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे सभी घरों एवं व्यवसाईयों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराई जाये। अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन स्थानों पर पूर्व से पीएनजी की पाइप लाइन है, सर्वप्रथम उन्हें प्राथमिकता से कनेक्शन दिए जाएं। साथ ही नई पाइन लाइन डालकर कनेक्श‍न का कार्य भी साथ-साथ किया जाए। सीजीडी संस्थाओं द्वारा अवगत कराया गया कि उन्होंने जिला कलेक्टर्स के माध्यम से आवश्यक मैन पॉवर प्राप्त करने की कार्यवाही कर ली है तथा आगामी माहों में लक्ष्य् के अनुसार नये पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध करा दिए जाएंगे। भारत सरकार के निर्देशानुसार जिन स्थानों से पीएनजी की पाइन लाइन गई है, उसके आस पास के घरेलू एवं कॉमर्शियल उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन प्राप्त कर लें क्योंकि पीएनजी कनेक्शन प्राप्त न करने की स्थिति में आगामी 03 माह में एलपीजी की सप्लाई बंद की जा सकती है। समस्त सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरूद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शन की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य शासन द्वारा पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिए सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन किये जाने के 24 घंटे के अंदर पाइप लाइन बिछाने की आरओयूस्वी्कृतियां जारी की जा रही हैं। अभी तक प्राप्त सभी स्वीकृतियां जारी की जा चुकी है तथा कोई भी आवेदन शेष नहीं है। गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थाओं/सुधार ग़ृ़हों के साथ-साथ पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस इस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्यं प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय, पुलिस कॉलोनी, आदि में जहां से आस-पास पाइप लाइन बिछी हुई है, उनको प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में जहां आस-पास पाइप लाइन गई है, उन क्षेत्रों की औद्योगिक इकाइयों की पहचान की जाकर पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश सीजीडी संस्थाओं को दिये गये हैं।  

डॉ. मोहन यादव बोले – समाज के हर वर्ग तक संवाद एवं संपर्क बढ़ाना आवश्यक

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने शुक्रवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में संभाग और जिला प्रभारियों की बैठक को संबोधित किया। बैठक में पार्टी के आगामी कार्यक्रमों, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण वर्ग-2026 पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यकर्ताओं की एकजुटता से ही भाजपा के उद्देश्यों की प्राप्ति संभव- डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी के कार्यक्रमों को धरातल पर उतारने के लिए कार्यकर्ताओं की मेहनत और एकजुटता अनिवार्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र और प्रदेश सरकार के विकासोन्मुखी योजनाओं को समाज के हर वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के लिए सभी कार्यकर्ताओं को पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ जुटना है। जब तक हम सब मिलकर पार्टी के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एकजुट होकर काम नहीं करेंगे, तब तक हमारी योजनाओं में सफलता नहीं मिल सकती। पार्टी की सफलता केवल चुनावी जीत में नहीं, बल्कि समाज में भाजपा की स्थायी पहचान और सेवा की भावना से भी जुड़ी हुई है। हमें समाज के हर वर्ग से संवाद बढ़ाना होगा, उनकी समस्याओं को समझते हुए पार्टी की नीतियों का लाभ समाज तक पहुंचाना होगा। भाजपा का विचार और उसकी नीतियां समाज के हर वर्ग के हितों की रक्षा करते हुए अधिक प्रभावी बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है। चुनौतियों का सामना करते हुए हमें पार्टी के उद्देश्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि यही भाजपा की असली ताकत है और यही पार्टी के भविष्य की सफलता सुनिश्चित करेगा। संगठन के कार्यकर्ता ही पार्टी की असली ताकत – हेमंत खण्डेलवाल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन के कार्यकर्ता ही पार्टी की असली ताकत हैं। पार्टी की सफलता कार्यकर्ताओं की मेहनत, निष्ठा और एकजुटता पर निर्भर करती है। हमारी सरकार और संगठन की योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए हमें एकजुट होकर काम करना होगा, ताकि भाजपा की नीतियों और योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके। भाजपा की जीत केवल चुनावी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि समाज में पार्टी की स्थायी पहचान और सेवा की भावना से जुड़ी हुई है। पार्टी की सफलता का आधार सिर्फ चुनावी जीत नहीं है, बल्कि समाज के प्रति हमारी सेवा और भाजपा की स्थायी पहचान भी है। हमें सिर्फ चुनावी सफलता ही नहीं, बल्कि समाज में स्थायित्व और विकास के लिए सक्रिय रूप से काम करना होगा। संगठन के संभाग और जिला प्रभारी संगठन की गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे हमारा संगठन जमीनी स्तर पर सशक्त होता है। 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित करना भाजपा की प्राथमिकता है। यह महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा और उन्हें समाज में समान अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में इस दिशा में किए गए ऐतिहासिक कदमों की सराहना करते हुए कहा कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक दूरदर्शी पहल है। पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण वर्ग-2026 पार्टी के कार्यकर्ताओं को नई दिशा और प्रेरणा देगा, संगठन को अधिक मजबूत करेगा और हमारे कार्यकर्ताओं को पार्टी के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए तैयार करेगा। बैठक में पार्टी के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी एवं गौरव रणदिवे मंचासीन रहे।