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MP को बड़ी सौगात! इंदौर-अबू धाबी फ्लाइट 15 जुलाई से शुरू, एयर इंडिया एक्सप्रेस ने जारी किया शेड्यूल

इंदौर  अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का असर पूरे विश्व में किसी न किसी क्षेत्र में देखने मिला है. चाहे पेट्रोल-डीजल हो, चाहे गैस सिलेंडर हो, महंगाई हो फिर हवाई यातायात हो. इन सब समस्याओं से भारत को भी दो-चार होना पड़ा है. इंदौर में भी लंबे समय से इंदौर-शारजाह इंटरनेशनल फ्लाइट बंद हो गई थी, लेकिन लंबे समय के बाद अच्छी खबर यह है कि इंदौर-शारजाह इंटरनेशनल फ्लाइट की जगह अब इंदौर से अबू धाबी के लिए नई फ्लाइट शुरू होगी. लिहाजा 17 जुलाई से यात्री अबू धाबी के लिए उड़ान भर सकेंगे।  एयर इंडिया ने शुरू की इंदौर-अबूधाबी फ्लाइट इंदौर से दुबई और अन्य अरब देशों की एयर कनेक्टिविटी के चलते अब तक एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट चल रही थी, जिसे युद्ध के कारण 27 फरवरी से अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा था, हालांकि कंपनी ने इसे सुचारु रखने का प्रयास किया, लेकिन संचालन नहीं हो सका. अब शारजाह के स्थान पर एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इंदौर से आबू धाबी के लिए नई फ्लाइट शुरू करने का फैसला किया है. जिसका शेड्यूल जारी किया गया है।  हफ्ते में इन 4 दिन चलेगी फ्लाइट एयर इंडिया एक्सप्रेस की यह फ्लाइट सप्ताह में 4 दिन यानि रविवार, सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चलेगी. बताया जा रहा है कि शारजाह के अलावा अबू धाबी के लिए फ्लाइट का शड्यूल पेंडिंग था, हालांकि बीच ही शारजाह की फ्लाइट बंद होने से कंपनी को अब नई फ्लाइट शुरू करना पड़ा. जिससे कि यात्री इंदौर से अबू धाबी के जरिए दुबई और शारजाह की ओर उड़ान भर सकें।  2019 में दुबई के लिए शुरू हुई थी फ्लाइट, हुई बंद आपको बता दें कि इंदौर से 19 जुलाई 2019 को दुबई के लिए फ्लाइट शुरू हुई थी, लेकिन विभिन्न कारण से यह फ्लाइट बंद करनी पड़ी. इसके बाद इंदौर से शारजाह की फ्लाइट शुरू की गई. जिसे अब युद्ध के कारण नियमित नहीं रखा जा सका, लेकिन अब अबू धाबी के लिए फिर फ्लाइट शुरू होने से दुबई और शारजाह की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को इंदौर से अबू धाबी के लिए सीधी फ्लाइट मिल सकेगी।  ऐसा रहेगा फ्लाइट का शेड्यूल इंदौर से अबू धाबी की फ्लाइट इंदौर एयरपोर्ट से 7:50 पर टेक ऑफ करेगी. जो अबू धाबी और संयुक्त अरब अमीरात के समय के अनुसार रात 9:35 पर अबू धाबी एयरपोर्ट पर लैंड करेगी. इसी प्रकार अबू धाबी से इंदौर के लिए संयुक्त अरब अमीरात के समय के अनुसार रात 10:35 पर टेक ऑफ करेगी. जो रात भारतीय समय के अनुसार रात 3:20 पर इंदौर एयरपोर्ट पर लैंड करेगी।  माना जा रहा है कि इंदौर से अबूधाबी तक 3:15 घंटे का सफल रहेगा. जिसका किराए करीब 16500 रुपए बताया गया है. ट्रैवल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रमुख हेमेंद्र सिंह जादौन ने बताया "इस फ्लाइट से यात्रियों को दुबई और शारजाह जाने का नया विकल्प उपलब्ध हो सकेगा. वहीं इस रूट पर पर्यटन गतिविधियां भी पहले की तरह सुचारू रह सकेंगी। 

15 हजार राशन कार्डधारकों की बढ़ी मुश्किलें, जीवित होने का प्रमाण नहीं दिया तो अटक सकता है राशन

 दतिया सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन प्राप्त करने वाले हजारों हितग्राहियों के लिए जून माह बेहद महत्वपूर्ण है। शासन के निर्देश पर जिले में पांच वर्ष पहले कराई गई ई-केवाईसी को दोबारा अपडेट करने का अभियान चलाया जा रहा है। निर्धारित समय सीमा के भीतर बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं कराने वाले हितग्राहियों को राशन वितरण में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खाद्य विभाग के अनुसार जिले में 55 हजार से अधिक ऐसे हितग्राहियों की पहचान की गई है, जिनकी पुरानी ई-केवाईसी अब अमान्य मानी जा रही है। अब तक लगभग 35 हजार हितग्राहियों (MP Ration Beneficiary) का पुन: सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 15 हजार से अधिक हितग्राही अभी भी प्रक्रिया से बाहर हैं। विभाग ने दतिया के सभी उचित मूल्य दुकान संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे पात्र परिवारों को जागरूक कर जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूर्ण कराएं। शिकायतों के बाद उठाया कदम विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया (MP Ration Distribution Update)का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों के नाम पर राशन जारी हो रहा है, वे वास्तव में पात्र और जीवित हैं। कई मामलों में मृत्यु, स्थानांतरण अथवा अपात्रता के बावजूद नाम सूची में बने रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। दोबारा बायोमेट्रिक सत्यापन से ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी और वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचेगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य को आधार कार्ड के साथ उचित मूल्य दुकान पर पहुंचकर बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। पीडीएस मशीन में जिन सदस्यों के नाम पीले अक्षरों में दिखाई दे रहे हैं, उनके लिए ई- केवाईसी कराना अनिवार्य है। किन लोगों को तुरंत करानी होगी ई-केवाईसी  पीडीएस मशीन में जिन हितग्राहियों के नाम पीले अक्षरों में दिखाई दे रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से दोबारा ई-केवाईसी करानी होगी। इसके लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से जिले या राज्य से बाहर रहने वाले हितग्राही भी देश की किसी भी उचित मूल्य दुकान पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। खाद्य विभाग ने अपील की है कि जून माह के भीतर ई-केवाईसी जरूर करा लें, ताकि राशन वितरण में किसी प्रकार की बाधा न आए और पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिलता रहे। फैक्ट फाइल कुल हितग्राही : 5,32,413 अब तक पूर्ण ई-केवाईसी : 4,39,898 शेष हितग्राही : 15,489 पुन: सत्यापन वाले हितग्राही : 55 हजार से अधिक ब्लॉकवार शेष ई-केवाईसी  दतिया : 5,489 सेवढ़ा : 5,419 भांडेर : 4,541 पारदर्शिता और प्रभावी होगी रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से जिले अथवा राज्य से बाहर रह रहे हितग्राही देश के किसी भी उचित मूल्य दुकान पर जाकर अपनी ई- केवाईसी करा सकते हैं। इसके लिए मूल राशन दुकान पर उपस्थित होना आवश्यक नहीं है। दोबारा सत्यापन से राशन वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। -जिला खाद्यआपूर्ति अधिकारी, दतिया

उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी! MP पुलिस में दोबारा शुरू हुई डायरेक्ट भर्ती प्रक्रिया

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए बड़ी सौगात देते हुए पुलिस विभाग में खेल कोटे से सीधी भर्ती प्रक्रिया को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गृह विभाग ने ‘मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021’ में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। संशोधित नियमों की अधिसूचना 15 जून 2026 को राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत अब प्रतिवर्ष पुलिस विभाग में खेल कोटे से 60 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। इनमें उप निरीक्षक (एसआई) के 10 और आरक्षक (कांस्टेबल) के 50 पद शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब ओलम्पिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल तथा विश्व कप या विश्व चैम्पियनशिप में भाग लेने वाले खिलाड़ी भी सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे। पहले मुख्य रूप से पदक विजेताओं को ही प्राथमिकता मिलती थी।  संशोधित नियमों के अनुसार उत्कृष्ट खिलाड़ियों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, ऊंचाई संबंधी शारीरिक मापदंड, लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) से भी छूट प्रदान की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया पुलिस मुख्यालय की चयन एवं भर्ती शाखा द्वारा हर वर्ष नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। उप निरीक्षक पद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले अथवा सहभागिता करने वाले खिलाड़ी पात्र होंगे। वहीं आरक्षक पद के लिए राष्ट्रीय खेलों और अधिकृत राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ी आवेदन कर सकेंगे।  इस निर्णय से खिलाड़ियों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलेंगे और वे खेल गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इसे खिलाड़ियों के हित में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय बताया है।  

ATS का बड़ा ऑपरेशन: कई राज्यों में फैले आतंकी मॉड्यूल पर शिकंजा, 6 गिरफ्तारी, पाकिस्तान कनेक्शन की जांच तेज

भोपाल  तारीख 11 जून… वक्त तड़के का था और भोपाल का काजी कैंप अभी नींद में था। तभी अचानक एटीएस की एक विशेष टीम चुपचाप इलाके में दाखिल हुई। न कोई सायरन, न कोई हलचल। कुछ ही मिनटों में नन्हें बी की मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद फराज को हिरासत में ले लिया गया। ऑपरेशन इतना गोपनीय था कि स्थानीय पुलिस तक को इसकी भनक नहीं लगी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ठीक उसी समय, भोपाल से करीब 1000 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भी एटीएस की टीमें एक और संदिग्ध पर शिकंजा कस रही थीं। आखिर ऐसा क्या सुराग मिला था जिसने दो राज्यों में एक साथ यह हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन शुरू करवा दिया? इसके पीछे के चेहरे कौन थे और इस पूरे नेटवर्क का मकसद क्या था? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की अंदरूनी कहानी।  सबसे पहले समझते हैं कि मामला क्या था?  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) देशभर में संदिग्ध गतिविधियों, विदेशी एप्लीकेशनों, डार्क वेब नेटवर्क और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय समूहों की लगातार निगरानी करती है। इसी दौरान एनआईए को भोपाल के काजीकैंप क्षेत्र निवासी मोहम्मद फराज तथा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं।प्रारंभिक जांच के बाद दोनों की निगरानी शुरू की गई और आगे की जांच की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) को सौंपी गई। एटीएस ने 11 जून की तड़के कार्रवाई करते हुए मोहम्मद फराज को भोपाल से हिरासत में लिया। वहीं, उत्तर प्रदेश एटीएस और एसटीएफ की मदद से नईम अब्दुल्ला को देवबंद से गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया। दोनों को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया। बाद में 16 जून को फराज को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया, जबकि नईम अब्दुल्ला 20 जून तक एटीएस रिमांड पर है। अब जानते हैं इस कथित नेटवर्क का उद्देश्य क्या था? जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों पर पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से प्राप्त कट्टरपंथी साहित्य और जिहादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने का आरोप था। उनका उद्देश्य बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रभावित कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करना था। जांच में यह भी सामने आया है कि युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें देशविरोधी गतिविधियों, सामाजिक अशांति, टारगेट किलिंग और हिंसक घटनाओं के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा था। साथ ही शरिया कानून के समर्थन में वैचारिक अभियान चलाने के संकेत भी मिले हैं। अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं? इस मामले में अब तक छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हाल-फिलहाल में बिहार के मधुबनी जिले से इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया गया है। उसे भोपाल लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से 20 जून तक एटीएस रिमांड पर भेजा गया है।  फराज ने क्या-क्या उगला? फराज की पूछताछ में कई चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। वह मध्यप्रदेश के बाहर भी अपना स्लीपर सेल खड़ा कर रहा था। इसके लिए उसे नईम और पाकिस्तान के साथ एक खाड़ी देश में बैठे हैंडलर डायरेक्शन दे रहे थे। फराज की पूछताछ के बाद एटीएस ने धार निवासी हाजी अहजर को गिरफ्तार किया है। एमपी एटीएस ने हरियाणा के नूंह से भी एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वह भी फराज के संपर्क में कई महीनों से था और जिहादी नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर खड़ा करने का प्रयास कर रहा था। हालांकि नूंह में हिरासत में लिए गए युवक की अधिकृत गिरफ्तारी अभी नहीं की है। विदेशी फंडिंग और डिजिटल उपकरणों की जांच एटीएस ने फराज और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों को हो रही विदेशी फंडिंग की भी बहुत गहनता से जांच कर रही है। इसी जांच में गिरोह का खुलासा हुआ है। वहीं उसके पास से बरामद मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स की जांच की जा रही है। मध्यप्रदेश में नेटवर्क खड़ा करने, गरीब और बैचलर युवकों का ब्रेनवॉश करने और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी सोच फैलाने का टास्क फराज को मिला था। फराज के संपर्क में अब तक करीब आधा दर्जन युवकों  के होने का पता चला है। पुलिस उन सभी युवकों की सोशल मीडिया प्रोफाइल खंगालने के साथ उनकी हर गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। टेलीग्राम-वाट्सएप ग्रुप से युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा था। शनिवार से ही उसका परिवार काजीकैंप स्थित मकान में ताला बंद कर फरार हो गया है। वहीं कॉलोनी की जिस क्लीनिक पर फराज काम करता था, उसमें भी शनिवार से ताला लटका हुआ है।  डार्क एप्स और सोशल मीडिया गतिविधियां भी जांच के दायरे में सूत्रों के अनुसार, आरोपी कुछ डार्क एप्स के माध्यम से संदिग्ध समूहों के संपर्क में था। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि उसने गाजा के समर्थन में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं। हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है और एजेंसियां आरोपी के डिजिटल नेटवर्क तथा संभावित विदेशी संपर्कों के हर पहलू की गहनता से जांच कर रही हैं।   आगे जांच की दिशा क्या होगी? अब तक पांच राज्यों में इस कथित मॉड्यूल के नेटवर्क से जुड़े तार मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ और संदिग्धों की गिरफ्तारी हो सकती है। फिलहाल नईम अब्दुल्ला, शाकिर और इजहार-उल-हक एटीएस रिमांड पर हैं। जांच एजेंसियां मोहम्मद फराज, नईम अब्दुल्ला, शाकिर मेव और इजहार-उल-हक को इस नेटवर्क की प्रमुख कड़ियों के रूप में देख रही हैं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।  

खुले बोरवेल वालों की खैर नहीं! MP सरकार का सख्त फैसला, लापरवाही पर होगी कानूनी कार्रवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने खुले और असुरक्षित बोरवेल से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों पर अमल करते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग ने बोरवेल सुरक्षा को लेकर एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है. इस नई व्यवस्था का मकसद बोरवेल से जुड़े खतरों को कम करना और लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।  खुला बोरवेल छोड़ना पड़ेगा भारी नई SOP के अनुसार किसी भी व्यक्ति या संस्था को बिना मंज़ूरी के नया बोरवेल खोदने की इजाज़त नहीं होगी. निर्माण से पहले संबंधित विभाग से जरूरी मंजूरी लेना अनिवार्य है. इसके अलावा अगर इस्तेमाल के बाद बोरवेल को खुला छोड़ दिया जाता है या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता है, तो ज़िम्मेदार व्यक्ति के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इन नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और जेल, दोनों का प्रावधान किया गया है।  खुले बोरवेल की शिकायत अब ऐप से करें इसके अलावा सरकार ने लोगों की भागीदारी बढ़ाने और निगरानी को मजबूत करने के लिए 'PARAKH' ऐप भी लॉन्च किया है. इस ऐप के जरिए नागरिक खुले, छोड़े गए या खतरनाक बोरवेल की जानकारी सीधे प्रशासन को दे सकते हैं. शिकायत मिलने पर संबंधित विभाग तुरंत जांच करेगा और कार्रवाई करेगा. सरकार को उम्मीद है कि इस नए सिस्टम से बोरवेल से जुड़े हादसों में कमी आएगी और सुरक्षा के मामले में जवाबदेही तय होगी।  नया बोरवेल खोदने से पहले रजिस्ट्रेशन और अनुमति अनिवार्य होगी, जबकि खुले या सूखे बोरवेल को समय सीमा में बंद नहीं करने पर जुर्माने के साथ जेल की कार्रवाई भी की जाएगी। हादसा होने पर रेस्क्यू ऑपरेशन का खर्च भी संबंधित जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी से वसूला जाएगा। 90 दिन में बोरवेल बंद कर पोर्टल पर डालना होगा फोटो अब तक बोरवेल हादसों में सिर्फ मामूली धाराओं में कार्रवाई होती थी, लेकिन अब नियम बेहद सख्त कर दिए गए हैं। नए नियम के तहत यदि बोरवेल में पानी नहीं निकलता है तो जमीन मालिक को 90 दिनों के भीतर उसे मिट्टी या कंक्रीट से स्थायी रूप से बंद करना होगा और उसकी फोटो पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। पहली बार 10 हजार, दूसरी बार 25 हजार जुर्माना पहली बार लापरवाही पर 10,000 और दूसरी बार पकड़े जाने पर 25,000 रुपए का जुर्माना व जेल होगी। यदि खुला बोरवेल मिलने पर कोई दुर्घटना होती है तो मकान/जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी पर सीधे FIR दर्ज होगी। यही नहीं, रेस्क्यू ऑपरेशन में आने वाला लाखों का खर्च भी दोषी से ही वसूला जाएगा। 'परख एप' (PARAKH) से सीधे शिकायत कर सकेंगे नागरिक अपने आस-पास खुले पड़े बोरवेल की फोटो खींचकर इस एप पर शिकायत कर सकते हैं। सरकारी जमीन पर लापरवाही मिलने पर अफसरों पर भी कार्रवाई होगी। बोरवेल में गिरने से कई मासूमों की जा चुकी है जान  बता दें कि पिछले कुछ सालों में मध्य प्रदेश में खुले और असुरक्षित बोरवेल की वजह से कई मासूम बच्चों की जान गई है. सीहोर, विदिशा, सागर, रीवा और राजगढ़ जैसे जिलों में बच्चों के बोरवेल में गिरने की घटनाओं ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया था. कई मामलों में घंटों या दिनों तक बचाव अभियान चलाने पड़े, फिर भी कुछ बच्चों को बचाया नहीं जा सका. इन दुखद घटनाओं के बाद सरकार ने बोरवेल की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है. अब बिना मंजूरी के बोरवेल खोदने और बोरवेल को खुला छोड़ने के काम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सरकार का मानना ​​है कि नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और मॉनिटरिंग सिस्टम से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।  तीन दिन में फाइल नहीं भेजी तो कार्रवाई नए हैंडपंप लगाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए हर स्तर पर टाइम लाइन तय कर दी गई है।     3 दिन में भेजना होगी फाइल: आवेदन मिलते ही कार्यपालन यंत्री को 3 कार्यदिवस के भीतर फाइल सहायक यंत्री को भेजनी होगी।     3 दिन में मौका ए मुआयना: उपयंत्री (Sub-Engineer) 3 दिन के अंदर गांव जाकर गूगल मैप और 'घन' पोर्टल की मदद से जगह की मार्किंग करेंगे।     1 हफ्ते में अंतिम रिपोर्ट: सारी रिपोर्ट मिलने के बाद 1 सप्ताह के भीतर कार्यपालन यंत्री कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति के सामने प्रस्ताव रखेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए क्या है खास?     पानी की उपलब्धता को प्राथमिकता: जिन गांवों में नल कनेक्शन नहीं हैं और 300 मीटर के दायरे में प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी नहीं मिल रहा है, वहां विभाग खुद नया बोरवेल खोदेगा।     बजट की कमी नहीं बनेगी रोड़ा: अगर सरकारी बजट कम पड़ता है तो कलेक्टर की सहमति से विधायक निधि, सांसद निधि या खनिज मद से पैसा PHE विभाग को ट्रांसफर किया जा सकेगा।     कारण बताना होगा अनिवार्य: यदि जिला समिति ग्रामीणों की हैंडपंप की मांग को खारिज करती है तो विभाग को लिखित में कारण बताना होगा कि आवेदन क्यों रिजेक्ट हुआ। शुद्ध पानी की गारंटी और नया विकल्प     जांच के बाद ही मिलेगा पानी: नया हैंडपंप खोदने के बाद पानी का सैंपल सरकारी लैब भेजा जाएगा। BIS मानकों के तहत पानी शुद्ध होने और कीटाणुशोधन (Bleaching) के बाद ही इसे जनता को सौंपा जाएगा।     सिंगल फेज मोटरपंप का विकल्प: जहां पानी का स्तर ज्यादा गहरा है और हैंडपंप काम नहीं कर सकता, वहां ग्राम पंचायत की सहमति से सिंगल फेज मोटरपंप लगाया जा सकेगा, जिसका रख-रखाव पंचायत करेगी।

सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन हुआ निरस्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की “जीरो टॉलरेंस” नीति अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और विधि के शासन के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के साथ राज्य शासन ने सोम डिस्टिलरीज समूह की इकाइयों द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत विभिन्न आबकारी लाइसेंसों के नवीनीकरण संबंधी आवेदन निरस्त कर दिए हैं। नवीनीकरण के आवेदनों के निरस्तिकरण का यह निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उस स्पष्ट और दृढ़ प्रशासनिक नीति का प्रतिबिंब है, जिसके तहत भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार, नियमों के उल्लंघन, राजस्व अपवंचन तथा जनहित के प्रतिकूल किसी भी गतिविधि के प्रति पूर्णतः जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाया जा रहा है। प्रदेश सरकार का स्पष्ट मानना है कि निवेश, उद्योग और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ कानून का कठोर एवं निष्पक्ष अनुपालन भी उतना ही आवश्यक है। आबकारी आयुक्त, द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि किसी भी लाइसेंस का नवीनीकरण स्वचालित अथवा अधिकार स्वरूप प्राप्त होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए संबंधित संस्था के समग्र आचरण, विधिक अनुपालन, लाइसेंस की शर्तों के पालन, नियामकीय पात्रता, उपलब्ध अभिलेखों की सत्यता और सार्वजनिक हित से जुड़े पहलुओं का समग्र परीक्षण किया जाना आवश्यक है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915, उससे संबंधित नियमों, उपलब्ध अभिलेखों तथा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का विस्तृत परीक्षण किया गया। निर्णय प्रक्रिया के दौरान यह तथ्य भी महत्वपूर्ण रहे कि संबंधित समूह से जुड़े मामलों में पूर्व में अवैध शराब परिवहन, कूटरचित परमिटों के उपयोग, शासकीय राजस्व को क्षति पहुँचाने तथा आबकारी कानूनों के गंभीर उल्लंघन से संबंधित प्रकरण न्यायालयों के समक्ष विचारित हुए थे। उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों, जांच प्रतिवेदनों और न्यायिक अभिलेखों का परीक्षण करते हुए संबंधित पक्ष के समग्र आचरण और विधिक अनुपालन की समीक्षा की गई। इसके उपरांत नवीनीकरण आवेदनों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। माननीय उच्च न्यायालय ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि लाइसेंस नवीनीकरण के प्रकरणों का परीक्षण उपलब्ध तथ्यों, विधिक प्रावधानों तथा संबंधित पक्ष के आचरण के आधार पर स्वतंत्र एवं कारणयुक्त तरीके से किया जाना चाहिए। न्यायालय द्वारा नवीनीकरण का कोई स्वचालित अधिकार प्रदान नहीं किया गया था। इसी विधिक दृष्टिकोण के अनुरूप सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रकरण का परीक्षण कर निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की स्पष्ट मंशा के अनुरूप मध्यप्रदेश में विकास और निवेश की गति को तेज करने के साथ-साथ पारदर्शी, जवाबदेह और नियम आधारित प्रशासन सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहाँ ईमानदार उद्यमों और नियमों का पालन करने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन मिले, जबकि कानून और जनहित के विरुद्ध कार्य करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और विधिक अनुशासन को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। शासन की यह नीति न केवल कानून के शासन को मजबूत कर रही है, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास को भी सुदृढ़ बना रही है कि प्रदेश में प्रत्येक निर्णय विधिसम्मत, निष्पक्ष और जनहित सर्वोपरि की भावना के साथ लिया जा रहा है। सोम डिस्टिलरीज प्रकरण में लिया गया यह निर्णय प्रदेश सरकार की “जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट इल्लीगल एक्टिविटीज” नीति का एक सशक्त उदाहरण है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि मध्यप्रदेश में किसी भी व्यक्ति, संस्था या प्रतिष्ठान को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा तथा नियमों के उल्लंघन, अवैध गतिविधियों और सार्वजनिक हित के प्रतिकूल आचरण के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।  

मेट्रो और फ्लाइओवर प्रोजेक्ट्स से बढ़ी परेशानी, भोपाल में 15 किलोमीटर तक ट्रैफिक का दबाव

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों बड़े बुनियादी ढांचागत विकास के दौर से गुजर रही है, लेकिन मानसून की आहट के बीच यही विकास आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गया है। शहर में करीब 15 किलोमीटर के दायरे में मेट्रो रेल, सड़कों और फ्लाइओवर का काम सक्रिय रूप से चल रहा है। इस भारी निर्माण कार्य के कारण सबसे बड़ी समस्या विभिन्न जिम्मेदार विभागों जैसे मेट्रो कॉर्पोरेशन, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के बीच आपसी समन्वय की कमी के रूप में सामने आ रही है। विभागों में आपस में मढ़ा जा रहा दोष बीते मंगलवार को भेल क्षेत्र में लगे भीषण जाम को लेकर मेट्रो अधिकारियों और ट्रैफिक पुलिस के बीच तीखी बहस देखने को मिली। ट्रैफिक पुलिस ने जहां जाम के लिए मेट्रो निर्माण को जिम्मेदार ठहराया, वहीं एमपीएमआरसीएल के अधिकारियों ने इन आरोपों पर हैरानी जताई। मेट्रो अधिकारियों का दावा है कि वे 2 जून को लिखे पत्र और प्रशासन के साथ पूर्व में हुई बैठकों के अनुसार सभी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पूरी तरह पालन कर रहे हैं। इन प्रमुख इलाकों में स्थिति सबसे गंभीर वर्तमान में करौंद से मंडी, भदभदा से रंगमहल और रत्नगिरि से जेके रोड जैसे व्यस्त रूटों पर एलिवेटेड मेट्रो का काम चल रहा है। इसके साथ ही अयोध्या बायपास, कोलार और शाहपुरा क्षेत्रों में फ्लाइओवर और सड़कों के चौड़ीकरण का काम एक साथ चलने से पूरा शहर ट्रैफिक के मोर्चे पर ब्लॉक हो गया है। स्थानीय निवासी राजेश के मुताबिक, करौंद से ऑफिस पहुंचने में अब रोजाना 40 मिनट से ज्यादा का समय बर्बाद हो रहा है। भोपाल मेट्रो की रफ्तार बढ़ेगी, जुलाई से दोनों ट्रैक पर संचालन भोपाल मेट्रो को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अपनी धीमी रफ्तार और कम फ्रीक्वेंसी के कारण चर्चा में रही भोपाल मेट्रो जल्द ही नए अंदाज में दिखाई देगी। मेट्रो के सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है और जुलाई से इसके पूरी क्षमता के साथ संचालन की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का दावा है कि नए सिस्टम के लागू होने के बाद न केवल मेट्रो की गति बढ़ेगी, बल्कि ट्रेनों के फेरे भी बढ़ जाएंगे और यात्रियों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार सुभाष नगर से एम्स तक करीब सात किलोमीटर लंबे ट्रैक पर आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। इसके बाद अब कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है। संभावना है कि अगले सप्ताह यह टीम भोपाल पहुंचकर पूरे सिस्टम का परीक्षण करेगी। यदि निरीक्षण के बाद हरी झंडी मिल जाती है तो जुलाई से नए सिस्टम के साथ मेट्रो का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। भोपाल मेट्रो एक सीमित व्यवस्था के तहत संचालित हो रही है। वर्तमान में सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण मेट्रो केवल एक ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। अभी ट्रेनें दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सीमित समय के लिए चलाई जा रही हैं और उनकी फ्रीक्वेंसी लगभग 75 मिनट रखी गई है। इससे कई लोग मेट्रो का नियमित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अभी सुभाष नगर से एम्स तक डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में संचालित की जा रही है। यानी जिस ट्रैक से ट्रेन आगे जाती है, उसी ट्रैक से वापस भी लौटती है। अप ट्रैक का उपयोग नहीं हो पाने के कारण मेट्रो की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यही वजह है कि ट्रेनों की संख्या और गति दोनों प्रभावित हो रही हैं। सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यह सिस्टम तय करता है कि ट्रेन किस गति से चलेगी, ट्रेनों के बीच कितना अंतर रहेगा और किसी भी आपात स्थिति में किस प्रकार नियंत्रण किया जाएगा। आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के बिना एक साथ कई ट्रैक पर सुरक्षित संचालन संभव नहीं होता। भोपाल मेट्रो में अब जो तकनीक लागू की जा रही है, वह दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक व्यवस्था पर आधारित है। इस तकनीक के लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि मेट्रो दोनों ट्रैक पर एक साथ दौड़ सकेगी। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को हर थोड़ी देर में मेट्रो उपलब्ध हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे मेट्रो की लोकप्रियता भी बढ़ेगी और यात्री संख्या में इजाफा होगा।  कई यात्रियों का कहना है कि 75 मिनट का इंतजार सार्वजनिक परिवहन के लिए काफी लंबा समय है। ऐसे में लोग बस, ऑटो या निजी वाहनों को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन नए सिस्टम के बाद यह स्थिति बदल सकती है। मेट्रो प्रबंधन की योजना है कि सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया टाइम टेबल जारी किया जाए। इसमें सुबह और शाम के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। खासतौर पर कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और नियमित यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो आने वाले महीनों में भोपाल मेट्रो शहर के प्रमुख सार्वजनिक परिवहन साधनों में शामिल हो सकती है। भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत कुल लगभग 30 किलोमीटर लंबे रूट पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में केवल सीमित हिस्से में संचालन हो रहा है, लेकिन धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है। ऐसे में सिग्नलिंग सिस्टम का पूरा होना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यात्रियों को अब CMRS की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। निरीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद भोपाल मेट्रो न सिर्फ तेज रफ्तार से दौड़ेगी, बल्कि अधिक ट्रेनों और बेहतर समय-सारिणी के साथ शहर की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने का काम भी करेगी।

राष्ट्रपति मुर्मु ने ओंकारेश्वर तीर्थ और ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर के दर्शन कर किया अभिषेक

भोपाल  राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को म.प्र. यात्रा के पहले दिन तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर तीर्थ और द्वादश ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर के दर्शन कर अभिषेक भी किया। उन्होंने ममलेश्वर और ओंकारेश्वर भगवान के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति  मुर्मु ने 12 ज्योतिर्लिंग में से एक ममलेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश से पहले नंदी प्रतिमा पर बेलपत्र अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद मुख्य गर्भगृह में मुख्य पुजारियों द्वारा वैदिक रीति-रिवाज और विशेष मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का अभिषेक और पूजन किया। राष्ट्रपति  मुर्मु ने देशवासियों के कल्याण, सुख-समृद्धि तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। ओंकारेश्वर तीर्थ के दर्शन के पहले राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद खंडवा कलेक्टर  ऋषव गुप्ता ने स्मृति चिह्न भेंट किया। क्षेत्रीय सांसद  ज्ञानेश्वर पाटिल ने भी राष्ट्रपति  मुर्मु को स्मृति चिन्ह के रूप में नर्मदेश्वर शिवलिंग, शंख और भगवान ओंकारेश्वर तीर्थ का छायाचित्र भेंट किया। इस अवसर पर जनजाति कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह, क्षेत्रीय विधायक  नारायण पटेल, इंदौर संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, आईजी  अनुराग सिंह व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

एटीएस खंगाल रही नेटवर्क की पूरी कड़ी, देशभर में फैले संपर्कों की जांच जारी

भोपाल  देश विरोधी गतिविधियों के आरोपितों से पूछताछ में मप्र आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) को नई जानकारी मिली है। सोशल मीडिया और वाट्सएप पर पाकिस्तानी हैंडलर इन लोगों से कहता था कि नियमित जिम जाकर फिटनेस सही करो। लड़ाके बनने के लिए यह जरूरी है। इसी तरह से उन्हें पासपोर्ट बनवाने के लिए कहा गया था। शीघ्र ही प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजने की तैयारी थी। हालांकि, अभी तक अकेले फराज के पास ही पासपोर्ट मिला है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में एटीएस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार है। इनमें फराज को भोपाल, नईम अब्दुल्ला उप्र के सहारनपुर, शाकिर मेव अलवर(राजस्थान) और इजहार उल हक को मधुबनी (बिहार) से गिरफ्तार किया है। सबसे पहले फराज को गिरफ्तार किया गया था, जिसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पूछताछ में मप्र एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि देश विरोधी गतिविधियों के आरोपित किसी आतंकी संगठन से तो नहीं जुड़े हैं। अभी तक की पूछताछ में वे बड़े संगठन से जुड़े होने से मना करते रहे हैं। इसके लिए एटीएस उनके पास से जब्त डिजिटल डिवाइस जैसे मोबाइल फोन, लैपटाॅप आदि का डाटा निकालने जा रही है। साथ ही सोशल मीडिया में उनके संपर्क और बातचीत का विवरण निकाला जा रहा है। इनके संपर्क में रहे अन्य लोगों से भी पूछताछ की तैयारी है। ऐसे में आरोपितों की संख्या और बढ़ सकती है। एटीएस सूत्रों ने बताया कि अभी तक आरोपितों को किसी एजेंसी या व्यक्ति से देश विरोधी गतिविधियों के लिए फंडिंग के प्रमाण नहीं मिले हैं। उनके बैंक खातों की जानकारी निकाली जा रही है।  

भिंड के डायल-112 हीरोज परिजनों से बिछड़े 03 वर्षीय मासूम को सुरक्षित तलाश कर परिवार से मिलाया

भोपाल  भिंड जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से परिजनों से बिछड़ गए 03 वर्षीय मासूम को सुरक्षित तलाश कर उसके परिवार से मिलाया गया। समय पर की गई सहायता से बालक सकुशल अपने घर पहुँच सका। 17 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत झाँसी मोहल्ला से एक 03 वर्षीय बालक गुम हो गया है। बालक के परिजन काफी समय से उसकी तलाश कर रहे थे तथा उन्हें तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना कोतवाली क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री अनुराग एवं पायलट श्री संजय सिंह भदौरिया मौके पर पहुँचकर परिजनों से बालक के संबंध में आवश्यक जानकारी एवं उसका फोटो प्राप्त किया। इसके उपरांत टीम ने आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय रूप से तलाश एवं पूछताछ प्रारंभ की। तलाश के दौरान बालक के संबंध में जानकारी प्राप्त होने पर डायल-112 जवानों ने उसे सुरक्षित संरक्षण में लिया और उसके घर पहुँचकर आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत परिजनों के सुपुर्द किया। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।