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संबल योजना में आयु संशोधन पर सख्ती, मृत्यु के बाद बदलाव अब पूरी तरह प्रतिबंधित

भोपाल मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना में पंजीकृत श्रमिकों की आयु संबंधी प्रावधानों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि समग्र पोर्टल में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर ही संबल पोर्टल पर श्रमिक की आयु की गणना की जाएगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, किसी भी पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु के बाद उसकी आयु (जन्म तिथि) में किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा। अपर सचिव श्रम विभाग संजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि यह नियम संबल योजना में भी सख्ती से लागू रहेगा। उन्‍होंने बताया है कि  समग्र पोर्टल पर मृत्यु प्रविष्टि दर्ज करने से पहले संबंधित हितग्राही की जन्म तिथि का गहन परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए। एक बार मृत्यु दर्ज हो जाने के बाद किसी भी परिस्थिति में आयु परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी श्रमिक की आयु पोर्टल पर त्रुटिपूर्ण पायी जाती है, तो उसके सुधार के लिए आवेदन केवल आईटी विभाग के माध्यम से ही किया जा सकेगा। अन्य किसी माध्यम से आयु संशोधन मान्य नहीं होगा।  

मध्यप्रदेश में महिला नेतृत्व को बढ़ावा, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 91% लक्ष्य पूरा

भोपाल  मध्यप्रदेश में महिला-नेतृत्व विकास की दिशा में लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सहयोग को ध्यान में रखते हुए संचालित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत राज्य ने 91 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भुरिया ने कहा कि यह सफलता राज्य सरकार के महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध प्रयासों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है। योजना के माध्यम से न केवल मातृ स्वास्थ्य को सुदृढ़ किया जा रहा है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह योजना भारत सरकार द्वारा 01 जनवरी 2017 से लागू की गई है, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अनुरूप संचालित है। योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को आंशिक वेतन हानि की भरपाई हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करना तथा विशेष रूप से दूसरी संतान के रूप में बालिका जन्म को प्रोत्साहित करना है। योजना में प्रथम प्रसव पर महिलाओं को 5,000 रुपये की राशि दो किश्तों में प्रदान की जाती है, जबकि दूसरी संतान के रूप में बालिका के जन्म पर 6,000 रुपये की राशि एकमुश्त दी जाती है। उल्लेखनीय उपलब्धियां प्रदेश में योजना की शुरुआत से अब तक 52.5 लाख से अधिक हितग्राही पंजीकृत किए जा चुके हैं। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6.61 लाख के लक्ष्य के विरुद्ध 6.01 लाख हितग्राहियों का पंजीयन किया गया, जो कि 91 प्रतिशत उपलब्धि को दर्शाता है।  

नारी शक्ति वंदन: मध्यप्रदेश में लखपति दीदी पहल के जरिए महिलाओं का हुआ आर्थिक सशक्तिकरण

नारी शक्ति वंदन: लखपति दीदी पहल से मध्यप्रदेश में महिलाओं को मिली आर्थिक सशक्तिकरण की नई दिशा भोपाल  मध्यप्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित “लखपति दीदी” पहल उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का लक्ष्य स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उनकी वार्षिक आय कम से कम 1 लाख रुपये तक पहुंचाना है। राज्य सरकार ने आगामी दो वर्षों में 16.41 लाख परिवारों को “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में 12.49 लाख महिलाएं इस श्रेणी में पहुंच चुकी हैं, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है। इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 526 मास्टर ट्रेनर और 20 हजार 517 लखपति सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) को प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षित कर्मी महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों में प्रशिक्षण देने के साथ उनकी आय-व्यय योजना तैयार करने और वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं। योजना के तहत महिलाओं को कम से कम दो या अधिक आय स्रोतों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे जोखिम कम हो और आय में स्थिरता बनी रहे। कृषि क्षेत्र में पहल महिलाओं को व्यावसायिक सब्जी उत्पादन, मसाला खेती (हल्दी, धनिया, मिर्च आदि) और फलदार वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ड्रिप सिंचाई, पॉली मल्चिंग और पॉलीहाउस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, जैविक खाद और कीटनाशक निर्माण को भी बढ़ावा मिल रहा है। “ड्रोन दीदी” पहल के माध्यम से महिलाएं फसलों पर छिड़काव कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। गैर-कृषि क्षेत्र में विस्तार स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम, माइक्रो एंटरप्राइज डेवलपमेंट और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण योजना जैसे कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। पारंपरिक उत्पाद जैसे हैंडलूम, टेराकोटा, जरी-जरदोजी और स्थानीय अनाज (कोदो, कुटकी, रागी) को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है। पशुपालन में सशक्तिकरण पशुपालन क्षेत्र में “पशुसखी” तैयार की जा रही हैं, जिन्हें तकनीकी प्रशिक्षण देकर आजीविका के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। क्लस्टर आधारित विकास और किसान उत्पादक कंपनियों के माध्यम से बाजार से जुड़ाव सुनिश्चित किया जा रहा है। समग्र विकास की दिशा में कदम यह पहल केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को सम्मानजनक जीवन, वित्तीय प्रबंधन और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बना रही है। विभिन्न विभागों के समन्वय से योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। “लखपति दीदी” पहल मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण का एक सफल मॉडल बनकर उभर रही है, जो आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करेगी। महिलाओं की आर्थिक उड़ान: 5 लाख स्व-सहायता समूहों से 59 लाख परिवार सशक्त प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में स्व-सहायता समूह (SHG) एक मजबूत आधार बनकर उभरे हैं। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लगभग 5 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर करीब 59 लाख परिवार आज आजीविका से सशक्त हो रहे हैं। डिजिटल आजीविका रजिस्टर (DAR) में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक “लखपति दीदी” योजना के तहत अब तक करीब 12.49 लाख महिलाएं इस श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि ग्रामीण महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है और वे आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने और नेतृत्व की भूमिका में भी आगे बढ़ाया है। छोटे-छोटे बचत समूह अब बड़े आर्थिक नेटवर्क में बदलते जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। महिलाएं अब कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं। समूह आधारित गतिविधियों ने उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा है, जिससे वे ऋण लेकर अपने कार्यों का विस्तार कर पा रही हैं। सरकारी योजनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाओं को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से लाभ मिल रहा है। DAR में हो रही नियमित एंट्री से यह भी सुनिश्चित हो रहा है कि योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचे।  

पॉलिटेक्निक कालेज के विद्यार्थियों को मिलेगी सौ सीटर छात्रावास की सुविधा : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने नवीन सर्किट हाउस सभागार में आयोजित बैठक में विभिन्न निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पॉलिटेक्निक कालेज के विद्यार्थियों के लिए सौ सीटर छात्रावास निर्माण के लिए 11 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। छात्राओं के लिए कालेज परिसर तथा छात्रों के लिए राजस्व अधिकारी द्वारा निराला नगर में चिन्हित जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कराएं। इसके साथ पॉलिटेक्निक कालेज को 144 लाख रुपए की लागत से स्पोर्ट्स काम्पलेक्स निर्माण की भी मंजूरी दी गई है। तकनीकी अधिकारी स्वीकृत कार्यों को तत्काल शुरू कराएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बायपास मार्ग में पुल के सुधार का कार्य 15 दिन में अनिवार्य रूप से पूरा कराएं। पुल से आवागमन बंद होने के कारण रीवा शहर तथा आसपास के क्षेत्रों में जाम लगने के कारण आमजन को कठिनाई हो रही है। रात में भी विवाह समारोहों के कारण सड़कों पर चहल-पहल रहती है। ऐसे में भारी वाहनों को शहर से निकालना भी कठिन है। बायपास रोड के चौड़ीकरण का कार्य भी तय समय सीमा में पूरा कराएं। कलेक्टर निर्माण कार्यों की सतत निगरानी करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सोहागी घाट में दुर्घटनाएं रोकने के लिए सुधार कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति जारी हो गई है। इसके लिए 14 करोड़ रुपए से अधिक की राशि मंजूर कर दी गई है। वन मण्डलाधिकारी निर्माण कार्यों के लिए शीघ्र स्वीकृति जारी कराएं, जिससे निर्माण कार्य शुरू किया जा सके। बैठक में एमपीआरडीसी के प्रभारी जीएम अंशुल करोड़िया ने बताया की बायपास में पुल के सुधार का कार्य 30 अप्रैल तक पूरा हो जाएगा। सोहागी घाटी में निर्माण कार्य के लिए वन विभाग द्वारा पूर्व में अनुमति दी गई थी। नवीन कार्य के लिए ऑनलाइन आवेदन किया गया है। अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, प्रभारी आयुक्त नगर निगम मेहताब सिंह गुर्जर, वन मण्डलाधिकारी लोकेश निरापुरे, शैलेन्द्र शुक्ला, एसडीएम हुजूर डॉ. अनुराग तिवारी तथा निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

69554 किसानों से 30 लाख 79 हजार 96 क्विंटल गेहूँ उपार्जित : मंत्री राजपूत

भोपाल.  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक 69 हज़ार 554 किसानों से 30 लाख 79 हजार 96 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 178 करोड़ 57 लाख रुपए का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। गेहूँ का उपार्जन सभी संभागों में शुरू हो चुका है। अभी तक 3 लाख 32 हजार 58 किसानों द्वारा 1 करोड़ 45 लाख 92 हजार 76 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। किसान गेहूँ बिक्रय के लिये 24 अप्रैल 2026 तक स्लॉट बुक कर सकते हैं। खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूँ की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। उपार्जन केन्द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके, इसके लिये प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूँ विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 1500 क्विंटल की गई है। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिये गेहूँ बिक्री की सभी सुविधाएं मंत्री राजपूत ने बताया है कि जिन जिलों में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, वहाँ गेहूँ विक्रय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन केन्द्रों में छायादार स्थान में बैठने और पेय जल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र में बारदाने, तौल कांटे सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छनना आदि की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूं में से 20 लाख 43 हजार 438 क्विंटल गेहूँ का परिवहन किया जा चुका है। प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।  

धीरेंद्र शास्त्री की संस्था को मिली केंद्र सरकार की मंजूरी, विदेशों से भी आएगा दान

छतरपुर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम को अब विदेश से पैसा (दान) लेने की सरकारी मंजूरी मिल गई है. यह मंजूरी भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के तहत दी है. यानी अब बागेश्वर धाम से जुड़ी संस्था विदेश में रहने वाले लोगों से भी कानूनी तरीके से दान ले सकेगी. पहले ऐसा करने के लिए खास अनुमति जरूरी होती थी, जो अब मिल गई है।  धीरेंद्र शास्त्री की देखरेख में काम करने वाली धार्मिक संस्था बागेश्वर जन सेवा समिति ग्राम गड़ा जिला छतरपुर मध्य प्रदेश में स्थित है. यह संस्था धार्मिक (हिंदू), सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्रों में काम करती है. अब विदेश से मिलने वाले फंड का उपयोग इन सभी कामों को आगे बढ़ाने में किया जा सकेगा।  बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पिछले कुछ समय से काफी चर्चा में हैं. उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और उनके अनुयायी भारत ही नहीं, विदेशों में भी मौजूद हैं. ऐसे में यह मंजूरी उनके लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है।  विदेशी भक्त अब दे सकेंगे दान दरअसल, अभी यह नियम था कि विदेशी चंदा के लिए सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी। अब यह अनुमित लेने की जरूरत नहीं है। विदेशी भक्त उनकी संस्था के खाते में सीधे दान की राशि डाल सकते हैं। इस धार्मिक संस्था का नाम बागेश्वर जन सेवा समिति गड़ा में स्थित है। यह संस्था सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्रों में काम करती है। बागेश्वर धाम प्रबंधन विदेशी फंड का उपयोग सभी कामों के लिए किया जा सकेगा। विदेशी दान का रखना होगा हिसाब वहीं, विदेशों से मिलने वाली राशि का हिसाब संस्था को रखना होगा। साथ ही यह भी बताना होगा कि उन पैसों को कहां खर्च किया गया। इसकी जानकारी केंद्र की सरकार को देनी होती है। साथ ही दान की यह राशि एक ही खाते में आएगी। विदेशों में भी है बाबा की प्रसिद्धि     बाबा बागेश्वर की प्रसिद्धि देश ही नहीं विदेश में भी है     यूएई से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक में होती है बाबा की कथाएं     अब विदेशी भक्तों से बाबा की संस्था को मिल सकेगा दान 15 एनजीओ को मिली है अनुमति गौरतलब है कि 15 अप्रैल को 38 एनजीओ को एफसीआरए रजिस्ट्रेशन दिया गया है। ये संस्थाएं विदेशों से दान ले सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें पश्चिम बंगाल के बोलपुर, बिहार के पूर्णिया में रामकृष्ण मिशन, दिल्ली में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, कर्नाटक के धर्मस्थल द इंस्टीट्यूशन और यूपी के आगरा में राधा स्वामी सस्संग शामिल हैं। पांच साल तक वैध होता है यह रजिस्ट्रेशन एफसीआरए रजिस्ट्रेशन पांच साल के लिए वैध होता है। इसके बाद इसे रिन्यू करवाने के लिए एनजीओ को फिर से आवेदन करना होता है। वहीं, 2015 से अब तक 18000 से ज्यादा एनजीओ को एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द किए जा चुके हैं। मुनेश्वर कुमार हालांकि, इस मंजूरी के साथ कुछ जरूरी नियम भी जुड़े होते हैं. FCRA के तहत जो भी संस्था विदेश से पैसा लेती है, उसे पूरा हिसाब रखना होता है. यानी पैसा कहां से आया और कहां खर्च हुआ, इसकी जानकारी सरकार को देनी होती है. साथ ही, एक तय बैंक खाते के जरिए ही यह लेन-देन करना होता है और समय-समय पर रिपोर्ट भी जमा करनी पड़ती है।  संस्था को सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा. इस फैसले से बागेश्वर धाम की सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. यह संस्था दान के जरिए मिलने वाले फंड से शिक्षा, सेवा और अन्य योजनाओं पर काम करती है।  इन संस्थाओं को भी मिली मंजूरी  बागेश्वर धाम के अलावा, इस कैटेगरी के तहत रजिस्टर्ड अन्य संस्थाओं में पश्चिम बंगाल के बोलपुर और बिहार के पूर्णिया में रामकृष्ण मिशन, दिल्ली में 'दिव्य ज्योति जागृति संस्थान', कर्नाटक के धर्मस्थल में 'द इंस्टीट्यूशन' और उत्तर प्रदेश के आगरा में 'राधा स्वामी सत्संग' शामिल हैं। FCRA रजिस्ट्रेशन पांच साल के लिए वैध होता है, जिसके बाद NGO को इसे रिन्यू करवाने के लिए आवेदन करना होता है। 2015 से अब तक 18,000 से ज्यादा NGO के FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द किए जा चुके हैं। 15 अप्रैल तक, देश में 14,538 FCRA-रजिस्टर्ड NGO सक्रिय हैं। नए विधेयक पर सरकार को झटका संसद के बजट सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने 2010 के अधिनियम में संशोधन करने के लिए 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) संशोधन विधेयक, 2026' पेश करने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, विपक्षी दलों के हंगामे के बाद, इस पर चर्चा और इसे पारित करने का काम टाल दिया गया। चुनावी राज्यों तमिलनाडु और केरल के मुख्यमंत्रियों एवं ईसाई समूहों ने इस विधेयक का विरोध किया। यह मंत्रालय को किसी NGO की संपत्ति और परिसंपत्तियों को अपने कब्ज में लेने का अधिकार देता है, यदि उस NGO का FCRA पंजीकरण रद्द या निलंबित कर दिया जाता है।

सीधी जिले में 1641 करोड़ रूपये की समूह जल प्रदाय योजना से 9.67 लाख से अधिक आबादी को मिलेगा लाभ

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा पेयजल उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर सुधारने का आधार स्वच्छ और पर्याप्त जल आपूर्ति है, इसी सोच के साथ ऐसी योजनाओं को गति दी जा रही है। सीधी जिले में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से एक व्यापक और दीर्घकालिक पहल के रूप में सीधी बाणसागर समूह जल प्रदाय योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। सीधी के ग्रामीण क्षेत्रों में 1641.52 करोड़ रूपये की लागत से स्वीकृत यह परियोजना क्षेत्रों में पेयजल संकट को स्थायी रूप से दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने बताया कि यह परियोजना केवल पेयजल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक-आर्थिक सुधार का माध्यम भी बनेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि किसी भी गांव में पेयजल की समस्या न रहे और हर घर में नल से जल उपलब्ध हो। योजना के माध्यम से जिले की 9 लाख 67 हजार 119 की आबादी को लाभ मिलेगा, जिसमें 97 हजार 763 परिवार शामिल हैं। योजना के अंतर्गत रामपुर नैकिन विकासखण्ड के 185 ग्राम, सीधी विकासखण्ड के 193 ग्राम और सिहावल विकासखण्ड के 299 ग्राम को जोड़ा गया है, इस प्रकार कुल 677 ग्रामों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। योजना में बाणसागर जलाशय से जल लेकर 125 एमएलडी क्षमता का इंटेक वेल तथा 3500 मीटर लंबी रॉ वॉटर पंपिंग मेन के माध्यम से जल संग्रह किया जाएगा। इसके बाद 100 एमएलडी क्षमता के आधुनिक जल शोधन संयंत्र में जल का शुद्धिकरण कर 25 हजार 340 मीटर लंबी क्लीयर वॉटर पंपिंग मेन के जरिए विभिन्न जल संरचनाओं तक पहुंचाया जाएगा। इसके अंतर्गत एक पी.एम.बी.आर. और 12 एम.बी.आर. का निर्माण किया जा रहा है, साथ ही 1356.233 किलोमीटर लंबी ग्रेविटी मेन और 3172.350 किलोमीटर लंबी जल वितरण नलिकाओं का विस्तृत नेटवर्क विकसित किया जाएगा। योजना में 208 उच्चस्तरीय टंकियों का निर्माण भी शामिल है, जो जल भंडारण और वितरण को सुचारू बनाएंगी। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि योजना के अंतर्गत 97 हजार 763 घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे, जिससे प्रत्येक परिवार तक सीधे नल से जल पहुंच सकेगा। इससे ग्रामीणों को दूरस्थ स्रोतों से पानी लाने की समस्या से मुक्ति मिलेगी और ग्रामीणों के समय एवं श्रम की बचत होगी। योजना लगभग एक वर्ष में पूर्ण हो जाएगी। यह योजना न केवल पेयजल आपूर्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह राज्य सरकार के उस संकल्प को भी दर्शाती है, जिसमें हर नागरिक को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सीधी जिले के लिए यह योजना विकास की नई धारा लेकर आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और स्वस्थ बनाएगी।  

बेटियों की पूजा व नारियों के सम्मान से ही देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि बेटियों की पूजा व नारियों के सम्मान से ही देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महिलाओं को संसद में आरक्षण देने के संबंध में जो विधेयक प्रस्तुत किया गया है। उससे भारत की आधी आवादी को देश हित के निर्णय में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी। शुक्ल ने नारी शक्ति पथ संचलन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। कृष्णा राजकपूर आडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री जी ने स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने के उपरांत अब संसद में भी प्रतिनिधित्व देने का जो संकल्प लिया है वह अभिनंदनीय है जिसके माध्यम से नारी शक्ति को समुचित सम्मान मिलेगा। शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के हित में अनेक योजनाएँ व कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं जिसके माध्यम से महिलाएँ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ नारी की पूजा व सम्मान होता है वहां देवता भी वास करते हैं अत: नारी शक्ति का सम्मान करते हुए मजबूत इच्छा शक्ति के साथ उनके हक के लिये कार्य किये जा रहे हैं। शुक्ल ने कहा कि विन्ध्य की महिलाएँ किसी से पीछे नहीं हैं देश की पहली महिला फाइटर पायलट हमारे यहाँ की हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने हम महिलाओं के हित में हमेशा ही कार्य किया है। उनका संकल्प है कि हर घर की महिला जागरूक हो, आगे आये और बराबरी के साथ चले। लखपती दीदी, स्वसहायता समूहों में महिलाओं की भागीदारी के साथ ही स्थानीय निकायों में हमें प्रतिनिधित्व मिला और अब नई राह खुल रही है। कार्यक्रम में महिला विदुषी ज्ञानवती अवस्थी ने कहा कि हमारी संस्कृति में मातृ वंदना होती है। मातृ शक्ति को ही सृष्टि की रचना का श्रेय दिया गया है इसलिए वह वंदनीय है। नारी अपने चरित्र से पुरूषों को प्रेरणा देती है इस लिए उसका स्थान सर्वोपरी हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी नयन सिंह ने बताया कि नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा में 10 से 25 अप्रैल तक महिलाओं के सम्मान में अनेक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। इसी कड़ी में संभाग स्तर का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में महिलाओं ने अपने मोबाइल फोन से मिस्डकाल कर महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया। अवसर पर मातृ शक्तियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक पन्नाबाई प्रजापति, जिला पंचायत सदस्य पूर्णिमा तिवारी, गीता माझी, विधायक मनगवां इंजी. नरेन्द्र कुमार प्रजापति, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, सीईओ जिला पंचायत मेहताब सिंह गुर्जर, संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास शशिश्याम उइके, दर्शना वाकड़े, आशीष द्विवेदी, जीवेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में विभागीय अधिकारी, कर्मचारी व मातृ शक्तियाँ उपस्थित रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरती तिवारी ने किया।

मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड ने सुपर 100 प्रवेश परीक्षा का परिणाम किया घोषित

भोपाल.  मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड ने सुपर-100 प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया है। विद्यार्थी परीक्षा परिणाम ओपन स्कूल की बेवसाइड mpsos.nic.in पर देख सकते हैं। बोर्ड द्वारा यह परिणाम बीते 15 अप्रैल को घोषित किया गया है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए संचालित की जा रही है। विभाग की यह एक महत्वपूर्ण योजना हैं। मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कक्षा 10वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए सुपर-1०० प्रवेश परीक्षा का 22 मार्च 2026 को आयोजन किया गया था। यह परीक्षा प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर हुई थी। अब 15 अप्रैल को बोर्ड द्वारा इसका रिजल्ट भी जारी कर दिया गया हैं। परीक्षा में प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कक्षा 10वीं में अध्ययनरत विद्यार्थी ही हिस्सा ले सकते हैं। परीक्षा के आधार पर चयनित बच्चों को प्रदेश के दो विद्यालयों शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भोपाल एवं शासकीय मल्हार आश्रम उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, इंदौर में कक्षा 11वीं में प्रवेश दिया जाता है। जहां पर विद्यार्थी अपनी नियमित पढ़ाई के साथ-साथ JEE एवं NEET की कोचिंग करते हैं, जो ख्याती प्राप्त चयनित संस्थानों के द्वारा दी जाती है। दोनों संस्थाओं में JEE एवं NEET के लिए 76-76 सीटें उपलब्ध होती है। इस वर्ष JEE में 5152 एवं NEET परीक्षा के लिए 5011 विद्यार्थियों ने अपने आवेदन फार्म जमा किये थे।  

आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश में कुटीर एवं ग्रामोद्योग की उल्लेखनीय भूमिका : राज्य मंत्री जायसवाल

भोपाल.  कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा है कि ‘आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ के संकल्प को साकार करने में कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग की भूमिका अत्यंत उल्लेखनीय है। विभाग के प्रयासों से प्रदेश के लाखों कारीगर, बुनकर, शिल्पी और ग्रामीण उद्यमी स्वरोजगार से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं। राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि विभाग द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, संत रविदास स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री कारीगर समृद्धि योजना और एक जिला-एक उत्पाद जैसे कार्यक्रमों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। पिछले तीन वर्षों में विभाग के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक हितग्राहियों को स्वरोजगार के लिए ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हुए। प्रमुख उपलब्धियां हथकरघा एवं हस्तशिल्प को बढ़ावा : चंदेरी, महेश्वरी, बाग प्रिंट और गोंड पेंटिंग जैसे पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंच मिला। ‘एमपी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम’ के माध्यम से 1800 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार किया गया। माटी कला एवं बांस शिल्प का पुनरुद्धार : कुम्हारों और बांस शिल्पियों को आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया गया। इससे 35 हजार से अधिक परिवारों को सीधा लाभ मिला। महिला सशक्तिकरण : स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 1.2 लाख महिलाओं को अगरबत्ती, मसाले, अचार, दोना-पत्तल और सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्यों से जोड़ा गया। डिजिटल मार्केटिंग : ‘मृगनयनी’ और ‘ओडीओपी’ उत्पादों को एमेजॉन, फ्लिपकार्ट और जीईएम पोर्टल से जोड़कर कारीगरों को देशभर का बाजार उपलब्ध कराया गया। राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ के विजन को कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग जमीन पर उतार रहा है। हमारा लक्ष्य है कि हर गांव का हुनर, हर हाथ को काम मिले। उन्होंने कहा कि विभाग जिला स्तरीय क्लस्टर विकास, कारीगरों के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर और निर्यात प्रोत्साहन पर विशेष फोकस करेगा, जिससे मध्यप्रदेश के पारंपरिक हुनर को वैश्विक पहचान बनाए रखने में मदद मिलेगी।