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एमपी की पूर्व आइएएस अधिकारी की अवैध संपत्ति में संलिप्तता, ईडी ने दायर किया पूरक अभियोग

भोपाल   मध्यप्रदेश के आइएएस पति पत्नी अवैध संपत्ति मामले में ऐसे फंसे हैं कि सालों बाद भी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। एमपी कैडर के पूर्व आइएएस दिवंगत अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ ईडी ने पूरक अभियोग पेश किया है। पूर्व आइएएस दंपत्ति पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में यह कार्यवाही की गई है। ईडी ने दिवंगत अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ दूसरी सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (SPC) दाखिल की। भोपाल स्थित विशेष PMLA न्यायालय में 31 मार्च को इस संबंध में शिकायत पेश की गई थी। ईडी का आरोप है कि जोशी दंपत्ति ने 41.87 करोड़ रुपए की अवैध चल अचल संपत्ति जुटाई। दिवंगत आइएएस अधिकारी अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस भोपाल द्वारा प्रकरण दर्ज किया गया था। इसके आधार पर सन 2002 में ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की जांच की शुरुआत की। ईडी ने जांच में पाया कि दोनों अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति बनाई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व आइएएस दंपती अरविंद जोशी और टीनू जोशी के खिलाफ दूसरी पूरक अभियोग शिकायत दायर की है। ईडी ने लोकायुक्त में जोशी दंपति के खिलाफ दर्ज मामले के आधार पर जांच शुरू की थी। इसमें उन पर 41.87 करोड़ की चल- अचल संपत्ति रखने का आरोप था। जो उनकी वैध आय से कई गुना ज्यादा थी। इसके बाद ईडी की जांच में खुलासा हुआ था कि अरविंद जोशी और टीनू जोशी ने अपने नाम और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर करोड़ों की चल और अचल संपत्ति जमा कर रखी थी। इससे पहले ईडी ने अवैध रूप से अर्जित करीब 8.60 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने के लिए तीन अस्थायी कुर्की आदेश भी जारी किए ईडी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया था कि अरविंद जोशी ने कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम पर भी संपत्तियां बनाई। इस दौरान संपत्ति के स्वामित्व को छिपाने के लिए जानबूझकर तीसरे पक्ष को शामिल किया। बता दें इससे पहले ईडी ने अरविंद जोशी और उनके परिवार के सदस्यों की अवैध रूप से अर्जित करीब 8.60 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने के लिए तीन अस्थायी कुर्की आदेश भी जारी किए थे। इसके बाद 28 जनवरी को एक और अंतरिम कुर्की आदेश जारी किया गया। जिसमें जोशी और उनके परिवार के सदस्यों की लगभग 5 करोड़ की संपत्तियां कुर्क की गईं।

14 से 18 वर्ष तक के बच्चों का खतरनाक उद्योगों में नियोजन अब प्रतिबंधित

14 से 18 वर्ष तक के बच्चों का खतरनाक उद्योगों एवं प्रक्रियाओं में नियोजन प्रतिबंधित श्रम स्टार रेटिंग के लिये बाल श्रम अथवा बंधक श्रम नहीं होने की घोषणा आवश्यक भोपाल प्रदेश में 14 वर्ष से 18 वर्ष तक के बच्चों का खतरनाक उद्योगों एवं प्रक्रियाओं में नियोजन प्रतिबंधित है। श्रम विभाग द्वारा श्रम स्टार रेटिंग के तहत बाल श्रम अथवा बंधक श्रम पाये जाने की स्थिति में ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत संबंधित संस्थान को शून्य अंक दिये जाने की व्यवस्था की गई है एवं इस संबंध में सभी श्रम अधिकारियों को निर्देश दिये गये है। साथ ही यह भी निर्देश दिये गये है कि ऐसे संस्थान जिनमें बाल श्रमिक अथवा बंधुआ श्रमिक नियोजित नहीं किये गए है, उनमें यदि अन्य मापदण्डों की पूर्ति थोडी कम भी हो, तो उन्हें भी श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया जाये। इस संबंध में श्रम विभाग द्वारा वेदा पहल के अंतर्गत प्रदेश में बाल श्रम का पूरी तरह उन्मूलन कर बच्चों को शिक्षा, पुर्नवास, सुरक्षा और अवसर प्रदान करने के संबंध में नियमित रूप से प्रत्येक शुक्रवार को समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है एवं अभियोजन मामलों की कड़ी निगरानी की जा रही है। इसी प्रकार चाइल्ड हेल्प लाइन नम्बर 1098 (टोल-फ्री 24/7) पर प्राप्त शिकायतों की मॉनीटरिंग की जा रही है। उल्लेखनीय है कि माननीय न्यायालय द्वारा बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत मामलों में जुर्माना 20 हजार रूपये से 50 हजार रूपये तथा कारावास 6 माह से 2 वर्ष तक सजा का प्रावधान है। इसी प्रकार माननीय न्यायालय द्वारा बंधक श्रम पद्धति (उत्सादन) अधिनियम, 1976 के अंतर्गत अधिकतम कारावास (3 वर्ष) की सजा या अधिकतम जुर्माना 2 हजार रूपये का प्रावधान है। बंधक श्रमिकों के पुर्नवास हेतु केन्द्र प्रवर्तित योजना 2021 में वयस्क पुरूष बंधक श्रमिक हितग्राहियों को एक लाख रूपये की पुनर्वास सहायता तथा अनाथ बच्चों (संगठित क्षेत्र अथवा बल पूर्वक कार्य) तथा महिला बंधक श्रमिकों को दो लाख रूपये की पुनर्वास सहायता दिये जाने के प्रावधान हैं वहीं शारिरिक शोषण अथवा मानव तस्करी से पीडितों को तीन लाख रूपये पुनर्वास सहायता दिये जाने के प्रावधान है। प्रत्येक जिले में बंधक श्रमिकों के पुनर्वास हेतु कार्पस फंड का गठन किया गया है।  

आयुक्त भोंडवे का निर्देश: विभागीय समन्वय और समयबद्ध कार्ययोजना के तहत करें कार्य

विभागीय समन्वय और समयबद्ध कार्ययोजना के साथ कार्य करें : आयुक्त भोंडवे बेतवा नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए में उच्च स्तरीय बैठक हुई भोपाल बेतवा नदी के पावन जल को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखने के पुनीत उद्देश्य से गुरुवार को पालिका भवन में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य ध्येय नदी के पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के प्रयासों को सूत्रबद्ध करना था। विभागीय समन्वय से सिद्ध होगा संकल्प नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि बेतवा का पुनर्जीवन केवल एक प्रशासनिक लक्ष्य नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि नदी के संरक्षण के लिये एक समेकित कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका स्पष्ट और समन्वित हो। आयुक्त भोंडवे ने इस बात पर विशेष बल दिया कि योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर दिखाई देना चाहिए, जिसके लिए वे स्वयं समय-समय पर कार्यों की समीक्षा करेंगे। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन का सहयोग बैठक जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के सहयोग से आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के कार्यकारी निदेशक (परियोजना) बृजेन्द्र स्वरूप विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने नदी संरक्षण के विविध तकनीकी आयामों और वैश्विक मानकों पर प्रकाश डालते हुए केंद्र की ओर से हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहयोग का आश्वासन दिया। प्रदूषण मुक्ति और जल संवर्धन पर गहन विमर्श बेतवा नदी में मिल रहे अपशिष्टों को रोकने के लिए आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की स्थापना, जल भराव क्षेत्रों का संरक्षण और तटवर्ती क्षेत्रों में वृक्षारोपण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चिंतन-मनन किया गया। आयुक्त भोंडवे ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नगरीय निकायों को और अधिक उत्तरदायी बनाया जाएगा। बैठक में जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन विभाग और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंधित नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों उपस्थित रहें।  

मध्य प्रदेश में 12 लाख कर्मचारियों को राहत, DA में 3% की बढ़ोतरी, मई में मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी

भोपाल  अप्रैल की शुरुआत मध्य प्रदेश के 12 लाख कर्मचारियों के लिए खुशखबरी लेकर आई है। प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 3 फीसदी महंगाई भत्ता और राहत भत्ता बढ़ाने को लेकर आदेश जारी कर दिया है। आगे अब एरियर 6 किस्तों में मिलेगा, 4200 रुपए तक सैलरी में बढ़ोतरी होगी, बढ़ी हुई राशि अप्रेल की सैलरी में जोड़कर मई में दी जाएगी। सरकार ने पेंशनरों को भी बड़ी सौगात दी है, उनकी मंहगाई राहत 58% और 257% तक बढ़ गई है। जारी आदेश के अनुसार सातवें वेतनमान के अंतर्गत कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता अब दिनांक एक जुलाई 2025 से (भुगतान माह अगस्त 2025 से) 55 प्रतिशत से 3 प्रतिशत बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया गया है। महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत होगा वित्त विभाग के परिपत्र के अनुसार यह बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2025 से कुल 58 प्रतिशत देय माना जाएगा। सरकार द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 3 प्रतिशत की इस वृद्धि के बाद कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत हो जाएगा। यह निर्णय राज्य के लाखों कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत लेकर आएगा। 6 किश्तों में होगा एरियर का भुगतान वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों को महंगाई भत्ते में हुई वृद्धि का लाभ एक जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक की एरियर राशि का भुगतान 6 समान किश्तों में दिया जाएगा। इन किश्तों का भुगतान मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में किया जाएगा। सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान वित्त विभाग ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनका निधन हो गया है, उन्हें अथवा उनके नामांकित सदस्य को एरियर की पूरी राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी। भुगतान संबंधी अन्य निर्देश महंगाई भत्ते की गणना में 50 पैसे या उससे अधिक राशि को अगले पूर्ण रुपए में जोड़ा जाएगा। जबकि 50 पैसे से कम राशि को छोड़ दिया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि महंगाई भत्ते का कोई भी हिस्सा किसी अन्य प्रयोजन के लिए वेतन का भाग नहीं माना जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि महंगाई भत्ते के भुगतान पर होने वाला व्यय संबंधित विभाग के स्वीकृत बजट प्रावधान के भीतर ही सुनिश्चित किया जाए।

ईरान से सूखे मेवे की सप्लाई ठप, रेट बढ़े, उपभोक्ताओं पर बढ़े दामों का असर

इंदौर  इंदौर में युद्ध का प्रभाव कारोबार पर दिखाई दे रहा है। वैश्विक सप्लाई चेन, तेल की कीमतों व व्यापारिक माहौल में आई अनिश्चितता ने शहर के व्यापारियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इससे रोजमर्रा की कई चीजें महंगी हो जाएंगी। तेल की कीमतें बढ़ने से बाजारों का आर्थिक गणित गड़बड़ाने लगा। युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हो गया है। इसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ा है। इंदौर में माल ढुलाई महंगी होने से व्यापारियों की लागत बढ़ गई है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। आयात-निर्यात क्षेत्र भी इस संकट से अछूता नहीं है। मध्य-पूर्व के देशों से आने-जाने वाले व्यापारिक मार्गों में बाधा आने से कई वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हुई है। कपड़ा, मशीनरी, केमिकल सेक्टर में देरी व लागत बढ़ने की समस्या आ रही है। व्यापारियों को ऑर्डर में देरी और कैंसिलेशन का सामना करना पड़ रहा है। निर्यात हो रहा प्रभावित इंदौर और पीथमपुर के कुल वार्षिक निर्यात को जोड़ लिया जाए तो आंकड़ा 2000 करोड़ रुपए तक पहुंचता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ पीथमपुर से ही बीते वित्त वर्ष में 17,850 करोड़ रुपए का निर्यात हो चुका है। युद्ध के बाद से निर्यात प्रभावित हो गया है। 5,000 से अधिक उद्योगों में उत्पादन प्रभावित कच्चे माल की उपलब्धता पर भी असर पड़ा है। वैश्विक स्तर पर एल्यूमिनियम, गैस और अन्य औद्योगिक संसाधनों की सप्लाई में व्यवधान से इंदौर की मैन्युफैक्चरिंग इकाइ‌यों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। महंगाई का 'ट्रिपल' अटैक तेल की कीमतों में यह वैश्विक उछाल केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके चार और खतरनाक प्रभाव हो रहे हैं…. ट्रांसपोर्टः माल ढुलाई महंगी होने से हर छोटी-बड़ी चीज की कीमत बढ़ने लगी हैं। खेतीः फर्टिलाइजर खासकर यूरिया उत्पादन महंगा होने से अनाज के दाम बढ़ रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग : फैक्ट्रियों में लागत बढ़ने से सामान की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे 2008 जैसी वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो सकता है। लोहा, स्टील, सीमेंट और केमिकल जैसी बड़ी फैक्ट्रियों में भारी मशीनें चलाने के लिए डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल होता है। ईंधन महंगा होने से सामान बनाने की लागत बढ़ रही है। सूखे मेवे: युद्ध से सूखे मेवों का आयात बंद हो गया है। खासकर ईरानी सूखे मेवों की आपूर्ति ठप हो गई है जिससे कीमतें आसमान छू रही हैं। बाजार में बढ़ते दाम मूंगफली तेल- 210 सोयाबीन तेल- 180 सरसो तेल- 190 चना दाल-110 तुवर दाल- 145 चावल बासमती- 95 ईरानी पीस्ता- 2500 कच्चे माल में उछाल कॉपर रिंग्स- 17.1 % एल्युमि. पाउडर- 17.5% पीतल- 24.1% कॉपर वायर- 20.7 % लूज तेल- 30%

भोपाल मेट्रो का संचालन समय बदला, अब सुबह 11 बजे से शाम 4.30 बजे तक ही चलेगी

भोपाल  राजधानी में मेट्रो यात्रियों के लिए समय में बदलाव किया गया है।आज 3 अप्रैल, शुक्रवार से मेट्रो ट्रेनें अब सुबह 11 बजे से शाम 4:30 बजे तक संचालित होंगी। अब तक मेट्रो सेवाएं दोपहर 12 बजे से शाम 7:30 बजे तक चल रही थीं। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी काम पूरा होते ही समय को फिर से सामान्य किया जा सकता है। मेट्रो का संचालन फिलहाल सुभाष नगर स्टेशन से लेकर एम्स तक हो रहा है, जिसमें कुल आठ स्टेशन शामिल हैं। यह रूट शुरुआत से ही ट्रायल और सीमित संचालन के तहत चलाया जा रहा है।  टनल बनाने का काम जल्द होगा शुरू मेट्रो परियोजना के तहत अंडरग्राउंड टनल बनाने का काम भी अब तेजी पकड़ने वाला है। टनल बोरिंग मशीन (TBM) अगले दो-तीन दिनों में खुदाई शुरू करेगी। मशीन को हाल ही में 24 मीटर गहराई तक उतारा गया है और फिलहाल उसकी तकनीकी सेटिंग का काम चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मशीन प्रतिदिन करीब 14 मीटर तक खुदाई कर सकती है, लेकिन भोपाल की पथरीली जमीन को देखते हुए यह गति घटकर 5 से 7 मीटर प्रतिदिन रहने की संभावना है। पहली मशीन द्वारा करीब 50 मीटर टनल तैयार करने के बाद दूसरी TBM  को भी उतारा जाएगा। दोनों मशीनों के जरिए टनल निर्माण का काम आगे बढ़ाया जाएगा। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम शुरू हुआ है। करीब 30 किमी के लिए हुए 800 करोड़ रुपए के टेंडर का यह पहला चरण है। अभी सिग्नलिंग सिस्टम नहीं होने के कारण मेट्रो प्रबंधन को मजबूरन केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) पर ट्रेन चलानी पड़ रही हैं। यही वजह है कि ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी 75 मिनट रखी गई है, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। सिग्नलिंग के काम के चलते ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर का ट्रैक प्रभावित रहेगा। हालांकि, प्रबंधन ने यह साफ नहीं किया है कि काम कब तक चलेगा और मेट्रो कब तक इसी टाइमिंग पर चलती रहेगी। 20 दिसंबर-25 को शुरू हुई थी मेट्रो भोपाल मेट्रो का उद्घाटन पिछले साल 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्‌टर ने किया था। इसके अगले दिन यानी, 21 दिसंबर से कमर्शियल रन शुरू हो गया। इस दिन से आम लोग मेट्रो में सफर करने लगे। मेट्रो को शुरुआत में अच्छे पैसेंजर मिले, लेकिन बाद में संख्या घटती गई। वर्तमान में मेट्रो में न के बराबर यात्री सफर कर रहे हैं। 5 जनवरी को पहली बार टाइमिंग और फेरे बदले गए थे। शुरुआत में 17 फेरे और सुबह 9 बजे से मेट्रो दौड़ने लगी थी। जब बदलाव हुआ तो फेरे घटकर 13 हो गए। वहीं, टाइमिंग दोपहर 12 से शाम 7.30 बजे तक कर दी गई थी। वर्तमान में इसी टाइमिंग पर मेट्रो का संचालन हो रहा था। तीसरी बार शेड्यूल बनने के बाद फेरे 13 से घटकर 9 हो गए हैं। इनमें एम्स से सुभाषनगर के बीच 5 और सुभाषनगर से एम्स के बीच 4 फेरे शामिल हैं। डेढ़ साल तक चलेगा निर्माण कार्य टनल की खुदाई पूरी होने में करीब दो महीने लग सकते हैं, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। पूरा निर्माण कार्य पूरा होने में कम से कम डेढ़ साल का समय लगने का अनुमान है। यह टनल ओल्ड रेलवे स्टेशन क्षेत्र से पुल पातरा की ओर निकलेगा और इसमें अप और डाउन दोनों दिशाओं के लिए अलग-अलग मेट्रो लाइन बनाई जाएंगी।  भोपाल में लागू हुई नई कलेक्टर गाइडलाइन, मेट्रो ट्रैक के किनारे जाम जस के तस!  नये फाइनेंशियल ईयर के शुरू होने के साथ ही राजधानी भोपाल में नई कलेक्टर गाइडलाइन भी लागू हो गई है. जिसके बाद अब भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदने से लेकर रजिस्ट्री कराना महंगा हो गया है. नई गाइडलाइन में भोपाल मेट्रो ट्रैक के प्रॉपर्टी रेट को लगातार दूसरे साल भी नहीं बढ़ाया गया है. जिसके पीछे वजह इन इलाकों में रेट कम रखकर यहां तेजी से डेवलपमेंट करना बताई जा रही है. कलेक्टर गाइडलाइन में तय दर 13 हजार रुपए वर्गमीटर से लेकर 40 हजार वर्गमीटर तक तय हुई है. जिसके बाद हर वर्गफीट 1300 रुपए से लेकर 4000 रुपए पंजीयन शुल्क लगेगा।  भोपाल मेट्रो के किनारे तेज होगा डेवलपमेंट वर्क, एक ही जगह रेजिडेंशियल-कॉमर्शियल स्पेस और मार्केट बनाने की प्लानिंग मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकार भोपाल मेट्रो कॉर्रिडोर के आस-पास ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) वर्क को बूस्ट देने के लिए लगातार दूसरे साल कलेक्टर गाइडलाइन में मेट्रो के किनारे की जमीन के रेट नहीं बदले गए हैं. प्रदेश सरकार इन इलाकों में एक ही जगह पर रेजिडेंशियल-कॉमर्शियल और मार्केट स्पेस बनाने पर प्लांनिग कर रही है।  पुराने भोपाल इतना हुआ प्रति वर्गमीटर प्रॉपर्टी का रेट अगर बात की जाए मेट्रो कॉर्रिडोर किनारे सबसे महंगी जमीन की तो भोपाल में करोंद इलाके में रेट सबसे हाई हैं. जहां नई गाइडलाइन में करोंद इलाके में रजिस्ट्री दर 40 हजार रुपए वर्गमीटर निर्धारित की गई है. इसके अलावा पुराने भोपाल में नए प्रॉपर्टी के रेट 12 हजार रुपए वर्गमीटर से 15 हजार वर्गमीटर निर्धारित किया गया है। 

विधायक संजय पाठक पर 443 करोड़ वसूली का दबाव, कलेक्टर का जारी हुआ अंतिम नोटिस

जबलपुर   मध्य प्रदेश की विजयराघवगढ़ विधानसभा से भाजपा विधायक संजय पाठक की मश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। 443 करोड़ रुपए की राशि जमा करने में लेट लतीफी की वजह से विधायक संजय पाठक और उनके परिवार से जुड़ी फर्मों को पहले नोटिस जारी किया गया था। लेकिन, इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया और न ही राशि जमा नहीं की गई। अब जबलपुर कलेक्टर न्यायालय ने इस मामले में इन फर्मों को आखिरी मौका के साथ समय समाप्ति नोटिस जारी किया है। यदि इस नोटिस का जवाब नहीं दिया गया तो इसके बाद सख्त कार्रवाई (जुर्माना, संपत्ति कुर्की आदि) हो सकती है।  मामला क्या है? संजय पाठक और उनके परिवार से जुड़ी फर्मों पर आरोप है कि उन्होंने तय सीमा से काफी अधिक आयरन ओर (लौह अयस्क) का खनन किया। जांच में सामने आया कि करीब 84.57 लाख टन अतिरिक्त खनन हुआ। इसके बदले सरकार को 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार रुपए रुपये की राशि वसूलनी है। तीन फर्मों को जारी किया गया नोटिस     निर्मला मिनरल्स (परिवार से जुड़ी)     आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन (परिवार से जुड़ी)     पेसिफिक एक्सपोर्टर्स (संचालक: सुमित अग्रवाल)  ये सभी फर्म मध्य प्रदेश के सिहोरा क्षेत्र में खनन कार्य कर रही थीं अभी क्या स्थिति है? पहले नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया। न ही राशि जमा की गई। अब जबलपुर कलेक्टर न्यायालय ने अंतिम मौका (Time Expiry Notice) दिया है नियम क्या कहते हैं? नियमों के मुताबिक, खनन के लिए पर्यावरण और सरकारी अनुमति जरूरी होती है। तय सीमा से ज्यादा खनन करना गैरकानूनी है। ऐसी स्थिति में सरकार अतिरिक्त खनन की कीमत के साथ जुर्माना वसूलती है। जांच कैसे हुई? मामला पहले स्थानीय स्तर पर नहीं पकड़ा गया । शिकायत के बाद राज्य स्तरीय समिति ने जांच की गई जिसके बाद 2004 से 2017 तक के रिकॉर्ड (उत्पादन, अनुमति, पर्यावरण क्लीयरेंस) की जांच हुई । इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता और अतिरिक्त खनन पाया गया । आगे क्या हो सकता है? अगर फर्में पैसा जमा नहीं करतीं हैं तो संपत्ति जब्त हो सकती है  या कानूनी कार्रवाई और केस मजबूत हो सकता है  और अगर जवाब देती हैं तो कोर्ट में अंतिम फैसला होगा।

अब कूलरों में भी मिलेगी स्टार रेटिंग, ‘AC’ की तरह कम होगा बिजली बिल

भोपाल  गर्मी आते ही कूलर, एसी की डिमांड अचानक से बढ़ गई है। कूलिंग इंडस्ट्री ग्राहकों की सोच में आए परिवर्तन से एक बार फिर सेलिंग में जुटी हुई है। इस बार कूलर थोड़े अलग देखने को मिल रहे हैं। जानकारी के लिए बता दें कि मार्केट में पहली बार स्टार रेटिंग कूलर बाजार में आए हैं। इनकी खासियत है बिजली की खपत कम करना। इससे कस्टमर सस्ता ही नहीं बल्कि स्टार रेटिंग पावर सेविंग ले सुविधा के साथ बिजली बचाने वाले उपकरण यथा सोलर ऑप्शन वाले फ्रीज, सोलर खरीद रहा है। इससे बिजली बिल में भी कमी आएगी। कारोबारी के अनुसार इस साल कूलिंग प्रोडक्ट्स की डिमांड में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। ग्राहक अब ज्यादा पावर सेविंग प्रोडक्ट्स चुन रहे हैं। देशभर में बढ़ती गर्मी और 2026 में संभावित हीटवेव के चलते एसी, एयर कूलर, फ्रीज और फैन की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। एसी, फ्रीज और आइसक्रीम पार्लर इक्विपमेंट की सेल 8 से 10 फीसदी तक बढ़ी हुई है। सोलर इक्विपमेंट की डिमांड ज्यादा सोलर इक्विपमेंट खासकर सोलर इन्वर्टर की डिमांड में खासा इजाफा हुआ है। कारोबारी बताते हैं कि गर्मी और बिजली बचत के कारण लोग अब ज्यादा एनर्जी-एफिशिएंट और सोलर बेस्ड प्रोडक्ट्स खरीद रहे हैं। वैसे भी सरकार ने 1 जनवरी 2026 से कई प्रोडक्ट्स पर स्टार रेटिंग अनिवार्य कर दी है। उन्होंने बताया कि कई उपभोक्ता अब घरों में सोलर इन्वर्टर और सोलर पावर सिस्टम लगवाने को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि बिजली कटौती के समय भी निर्बाध बिजली मिल सके और लंबे समय में बिजली खर्च में भी बचत हो सके। कीमत की मार नए नियमों के कारण एसी 7 से 10 प्रतिशत एवं फ्रीज 3 से 5 फीसदी महंगा बिक रहा है। तेजी की वजह कॉपर और कच्चे माल की कीमतें बढऩा है। सीलिंग में सबसे ज्यादा डिजाइन है। दो दर्जन से अधिक वैरायटी है। कूलर में स्टार रेटिंग पहली बार पानी से संचालित कूलर में भी स्टार रेटिंग व सेविंग मॉडल आ रहे हैं। कारोबारी बताते हैं कि स्टार रेटिंग होने से कूलर जहां बिजली की खपत कम करेगा वहीं यह सेफ्टी के लिहाज से बेहतर हैं। प्लास्टिक कोटिंग वाले इस कूलर की कीमत सामान्य मिलने वाले कूलर से अधिक है। फिलहाल इसे ग्राहकों की मांग पर बुलवा रहे हैं। इसमें इन्वर्टर और लोपॉवर कंजप्शन प्रोडक्ट्स की मांग उम्मीद से अधिक है। गौर करें ये बातें मार्केट में पहली बार स्टार रेटिंग कूलर सेफ्टी के लिहाज से बेहतर होगा ये कूलर कम होगी बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है मांग

विक्रमोत्सव 2026 में एमपी टूरिज्म पवेलियन होगा मुख्य आकर्षण, पर्यटन स्थलों की होगी विस्तार से जानकारी

उज्जैन विक्रमोत्सव 2026 के तहत मध्य प्रदेश के उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आगामी 3 से 5 अप्रैल के बीच वाराणसी में महानाट्य का मंचन किया जा रहा है, जिसका भव्य शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में होगा। सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से बी.एल.डब्ल्यू. मैदान आयोजित होने वाले इस महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे। आयोजन में हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन विधाओं का जीवंत प्रदर्शन होगा। वहीं इस दौरान मध्य प्रदेश की पारंपरिक कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत के साथ पर्यटन स्थलों के आकर्षक रूप में प्रदर्शित करता एमपी टूरिज्म पवेलियन आकार्षण का केंद्र होगा। सीएम की परिकल्पना से तैयार हुआ 'सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य' मुख्यमंत्री डॉ. यादव की परिकल्पना से तैयार पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित द्वारा रचित और राजेश कुशवाहा द्वारा निर्मित और संजीव मालवी के भाव निर्देशन में प्रस्तुत महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य भारत की सांस्कृतिक चेतना को जगाने वाला अनुभव है। इसमें 200 से ज्यादा कलाकार हाथी, घोड़े, रथ, पालकियां भव्य युद्ध लाइट शो, आतिशबाजी नृत्य और बाबा महाकाल की भस्म आरती की दिव्या झलकियां शामिल है। महान सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से राजतिलक तक की गाथा, विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महा काव्य कथा इस महानाट्य में जीवंत होती है। प्रदेश की विविधता और वैभव से परिचित कराएगा आयोजन सचिव, मुख्‍यमंत्री और पर्यटन डॉ. इलैयराजा टी. ने कहा कि, विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत वाराणसी में आयोजित यह महानाट्य केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, न्यायप्रियता और गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। इस विशेष अवसर पर एमपी टूरिज्म पवेलियन इस दिशा में एक आकर्षक केंद्र बनेगा, जो आगंतुकों को प्रदेश की विविधता और वैभव से परिचित कराएगा। एमपी टूरिज्म पवेलियन बनेगा आकार्षण का केंद्र 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में एमपी टूरिज्म पवेलियन में प्रदेश की पारंपरिक कला और अद्भुत कारीगरी देखने को मिलेगी। खजूर की पत्तियों से बनी टेराकोटा कलाकृतियां भी लोगों का ध्यान आकर्षित करेगी। बुंदेली, गोंड और भील पेंटिंग्स में जनजातीय संस्कृति की झलक भी दिखेगी। एमपी के पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल्स मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल्स भी लगेंगे। फूट कोर्ट में इंदौर के प्रसिद्ध पोहा–जलेबी, मक्के के कीस, मालवा की कचौरी, डिंडौरी के उड़ल दाल व कोदो भात और कुटकी के गुड वाली खीर–जलेबी, बघेलखंडी निमोना और पुड़ी, बेड़ई पुड़ी और हींग वाले आलू जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ बुंदेलखंडी स्ननाटा छाछ, लेमन पुदिना, आम पना, सब्जा शिकंजी, गुलाब मलाई लस्सी, मावा बाटी जैसे शीतपेयों और मिष्ठान का नागरिक आनंद ले सकेंगे।  

12वें चरण की शराब दुकान नीलामी कल, आबकारी विभाग को मिलेगा पांच हजार करोड़ का राजस्व, टेंडर आज 2 बजे खुलेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत 1 अप्रैल से शराब के नए ठेके भले ही शुरू हो गए हों, लेकिन अब भी 650 समूह और दुकानें नीलामी से बाहर हैं। हालांकि इनमें से कई दुकानों को होल्ड पर रखा गया है, जिन्होंने आरपी से 20 प्रतिशत से ज्यादा पर आॅफर दिए हैं। कई बची हुई दुकानों के लिए बुधवार को 11वें राउंड की नीलामी आयोजित की गई। आबकारी विभाग के अनुसार, 11वें राउंड में 21 शराब दुकानें 130.97 करोड़ रुपए में बिकीं, जबकि इनका कुल रिजर्व प्राइस (आरपी) 150.60 करोड़ रुपए था। यानी इस राउंड में नीलामी आरपी से कम दर पर हुई। वहीं 10वें और 11वें राउंड में आरपी से 20 प्रतिशत से अधिक कम दर पर आए ऑफर को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। इनके बारे में सरकार एक-दो दिनों  में निर्णय लेगी। जिन दुकानों की नीलामी नहीं हो सकी, वहां फिलहाल आबकारी अमले द्वारा अस्थाई रूप से शराब की बिक्री की जा रही है, ताकि राजस्व प्रभावित न हो। विभाग के सामने अब भी सालाना लक्ष्य पूरा करने की चुनौती है, जिसके लिए करीब 5,080 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाना बाकी है। प्रदेश में कुल 3,553 शराब दुकानें हैं, जिनमें से अब तक 11 राउंड 1200 समूहों और दुकानों की नीलामी पूरी हो चुकी है। बची हुई दुकानों के लिए अब 12वें राउंड की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 3 अप्रैल दोपहर 2 बजे तक ई-टेंडर भरे जाएंगे और इसके तुरंत बाद टेंडर खोले जाएंगे।  बीओक्यू की शर्त फिर लागू, 30  फीसदी कम पर दे सकते हैं ऑफर 12वें राउंड में इस बार केवल ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी, यानी नीलामी (आॅक्शन) नहीं होगी। साथ ही बीओक्यू की शर्त को फिर से लागू कर दिया गया है। अब ठेकेदारों को आरपी से 30 प्रतिशत कम तक आॅफर देने की अनुमति होगी। इससे पहले के राउंड में यह सीमा हटा दी गई थी, जिसके चलते कई जगह 50 प्रतिशत तक कम आॅफर आए थे। आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-टेंडर में ऑफसेट प्राइस आरक्षित मूल्य से अधिकतम 30% कम तक ही मान्य होगा। यानी 70% से कम का कोई भी ऑफर स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे न्यूनतम बोली की सीमा तय की गई है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 10वें और 11वें चरण में प्राप्त ऐसे प्रस्ताव, जो आरक्षित मूल्य के 80% या उससे अधिक हैं, उन्हें स्वीकृति प्रक्रिया में शामिल किया जाए। वहीं 80% से कम के उच्चतम ऑफर्स को फिलहाल होल्ड पर रखा जाएगा। ऐसे आवेदकों को दोबारा ईएमडी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। समूह और इकाई स्तर पर होगी नीलामी इस चरण में शराब दुकानों की नीलामी समूह के साथ-साथ समूह में शामिल प्रत्येक दुकान के लिए अलग-अलग भी की जाएगी। राजस्व संतुलन बनाए रखने के लिए जिला समितियां सीमित संख्या में समूहों का पुनर्गठन करेंगी, जिसे आबकारी आयुक्त की मंजूरी जरूरी होगी। जिन जिलों का आरक्षित मूल्य 200 करोड़ रुपए से अधिक है, वहां किसी भी समूह का मूल्य जिले के कुल आरक्षित मूल्य के 20% से ज्यादा नहीं रखा जाएगा। ई-टेंडर का शेड्यूल ऑनलाइन टेंडर फॉर्म डाउनलोड और ऑफर जमा करने की प्रक्रिया आज सुबह 11 बजे से शुरू हुई है, जो 3 अप्रैल को दोपहर 2 बजे तक चलेगी। टेंडर खोलने की प्रक्रिया 3 अप्रैल को दोपहर 2:05 बजे से शुरू होगी। अब तक 1200 समूहों की नीलामी 29 मार्च तक 1200 समूहों की नीलामी पूरी हो चुकी है, जिससे लगभग 15,409.94 करोड़ रुपए का राजस्व तय हुआ है। यह आरक्षित मूल्य से 3.61% अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में इसमें 24.34% की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य स्तर पर 19,952.89 करोड़ रुपए के लक्ष्य में से अब तक 77.23% नीलामी हो चुकी है, जबकि करीब 5,080.35 करोड़ रुपए का कार्य अभी शेष है। विभाग को उम्मीद है कि लगातार ई-टेंडर प्रक्रिया के जरिए राजस्व में स्थिर बढ़ोतरी बनी रहेगी। अब तक की नीलामी का आंकड़ा –  वर्ष 2026-27 लक्ष्य: 19,952 करोड़ रुपए – कुल नीलामी: 1200 समूह – रिजर्व प्राइस: 14,872.54 करोड़ रुपए – प्राप्त राजस्व: 15,409.94 करोड़ रुपए – आरपी से वृद्धि: 3.61 प्रतिशत – पिछले वर्ष से वृद्धि: 24.34 प्रतिशत – अभी बाकी राजस्व: 5,080 करोड़ रुपए