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ओलावृष्टि और बारिश से 42 जिलों में फसलों की तबाही, 14 जिलों में आज भी जारी है खतरा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने अचानक ऐसा करवट ली है कि हालात चिंताजनक बन गए हैं। India Meteorological Department (IMD) के अनुसार पिछले 72 घंटों से सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के कारण पूरे प्रदेश में बेमौसम बारिश, तेज़ आंधी और ओलावृष्टि का दौर जारी है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर समेत 42 जिलों में इसका असर साफ देखने को मिला है। शुक्रवार को कई शहरों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में पारा अचानक 23.9°C तक पहुंच गया, जो एक ही दिन में 10.6 डिग्री की गिरावट दर्शाता है। मौसम में इस बदलाव ने गर्मी से राहत तो दी, लेकिन नुकसान कहीं ज्यादा हुआ। सबसे ज्यादा मार किसानों पर पड़ी है। ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने गेहूं, केला, पपीता और संतरे जैसी तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में खेत पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। तेज आंधी ने बढ़ाई तबाही बारिश के साथ चली तेज आंधी ने हालात और खराब कर दिए। आगर-मालवा में 74 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं, जबकि सीहोर में 54 किमी और नरसिंहपुर में 46 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार दर्ज की गई। तेज हवाओं के कारण फसलें टूटकर गिर गईं और खेतों में पानी भर गया। धार और खरगोन में सबसे ज्यादा नुकसान धार जिले के मनावर क्षेत्र में तेज आंधी-बारिश से केले और पपीते की फसल पूरी तरह तबाह हो गई। एक किसान के करीब 2 हजार केले के पेड़ गिर गए, जिससे लाखों रुपए का नुकसान हुआ। वहीं खरगोन में तेज हवा से मक्का की फसल चौपट हो गई। किसानों का कहना है कि फसल तैयार थी, लेकिन मौसम ने पूरी मेहनत बर्बाद कर दी।  रायसेन में हाईवे पर बर्फ जैसी चादर रायसेन जिले में ओलावृष्टि इतनी तेज हुई कि नेशनल हाईवे पर बर्फ जैसी सफेद परत जम गई। सड़क पर जमी ओलों की चादर ने लोगों को हैरान कर दिया। हालांकि यह नजारा देखने लायक था, लेकिन किसानों के लिए यह भारी नुकसान का संकेत बन गया। तापमान में गिरावट, ठंड का अहसास बारिश और ठंडी हवाओं के चलते प्रदेश के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। पचमढ़ी 12.6 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडा रहा। वहीं इंदौर में 15 डिग्री और भोपाल में 16.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। कई जिलों में न्यूनतम तापमान में 3 डिग्री तक की कमी आई है।  किसानों पर संकट, मुआवजे की मांग तेज बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। खड़ी और कटी दोनों फसलें प्रभावित हुई हैं, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ गया है। कई किसान कर्ज में डूबने की आशंका जता रहे हैं और सरकार से जल्द मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।  आगे भी ऐसा ही रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों तक प्रदेश में आंधी, बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रह सकता है। इससे जहां लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं किसानों की चिंता अभी कम होती नजर नहीं आ रही है। IMD ने शनिवार को 14 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसमें टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर जैसे जिले शामिल हैं, जहां तेज़ आंधी और बारिश का खतरा बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह सिस्टम अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और 22 मार्च (रविवार) से प्रदेश में मौसम साफ होने की संभावना है। तब तक लोगों को सतर्क रहने और किसानों को अपनी बची फसल को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के 40 से ज्यादा जिलों में करीब 70 स्थानों पर बारिश दर्ज की गई है, जबकि 11 जिलों में ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। अचानक बदले इस मौसम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रकृति के आगे सभी तैयारियां छोटी पड़ जाती हैं।

व्यापार, शिक्षा और समाज सेवा में सिंधी समाज का महत्वपूर्ण योगदान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

व्यापार, शिक्षा और समाज सेवा सभी क्षेत्रों में सिंधी समाज ने महत्वपूर्ण योगदान दिया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास में होगी सिंधी समाज की पंचायत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी चेटीचंड पर्व की मंगलकामनाएं भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर आगे बढ़ रही है। हर समुदाय की परंपराओं और संस्कृति को सम्मान देना और सभी को समान अवसर उपलब्ध कराना हमारा उद्देश्य है। चाहे व्यापार हो, शिक्षा हो या समाज सेवा, सिंधी समाज ने अपने परिश्रम समर्पण और सकारात्मक सोच से समाज को नई दिशा देते हुए प्रदेश और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शीघ्र ही मुख्यमंत्री निवास में सिंधी समाज की विशेष पंचायत आयोजित की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंधी समाज के नववर्ष के रूप में मनाये जाने वाले भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव चेटीचंड के अवसर पर रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाज बंधुओं को पर्व की मंगलकामनाएं दीं। विधायक भगवान दास सबनानी तथा सिंधी सेंट्रल पंचायत के प्रतिनिधि कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प वर्षा का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में भजन और सांगीतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चेटीचंड नव वर्ष के आरंभ का प्रतीक होने के साथ आस्था, एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतिबिंब है। यह पर्व हमें भगवान झूलेलाल की शिक्षाओं के अनुरूप सद्भाव, सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधी समाज ने संघर्ष और कठिनतम परिस्थितियों में स्वयं को पुनः स्थापित करने के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। लगभग 1200 वर्ष पहले राजा दाहिर द्वारा विधर्मियों से धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए किया गया योगदान इतिहास में दर्ज है। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश विभाजन की कठिनाइयों का भी सिंधी समाज ने दृढ़ता और साहस के साथ सामना किया तथा संघर्ष कर पुन: स्वयं को स्थापित कर अपनी पहचान बनाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहीद हेमू कालानी का स्मरण किया और भारतीय राजनीति में लालकृष्ण आडवानी के योगदान की सराहना की। विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव आम आदमी की समस्याओं की प्रति संवेदनशील हैं। उनके नेतृत्व में व्यापार, उद्योग, कृषि सहित सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है और प्रदेशवासियों को इसका लाभ भी मिल रहा है। कार्यक्रम में महापौर श्रीमती मालती राय सहित समाज के वरिष्ठजन उपस्थित थे।  

भोपाल में ईद के बाद नारे – अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद, सुन्नी और शिया मस्जिदों में अलग-अलग आयोजन

 भोपाल  ईद की नमाज के बाद भोपाल में शिया समुदाय ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। नमाज अदा करने के बाद सड़कों और इमामबाड़ा परिसर में “अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद” के नारे गूंज उठे। शिया समुदाय के लोग काली पट्टी बांधकर सादे और पुराने कपड़ों में इमामबाड़ा पहुंचे और इस बार ईद को शोक के साथ मनाने का फैसला किया। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शिया समुदाय पूरे देश में गम में डूबा हुआ है। भोपाल में भी राष्ट्रीय मुस्लिम त्यौहार कमेटी और स्थानीय शिया संगठनों ने ‘काली ईद’ का ऐलान कर दिया। लोगों ने ईद की रौनक छोड़कर सादगी अपनाई नए कपड़े नहीं पहने, घरों में पारंपरिक स्वीट्स नहीं बनाईं और नमाज के दौरान काली पट्टी बांधकर शोक जताया। भोपाल में शिया समुदाय ने फतेहगढ़ इमामबाड़ा में काली ईद मनाई। नमाज के बाद में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। लोग काली पट्टी बांधकर सादे और पुराने कपड़ों में पहुंचे, जिससे गम का माहौल दिखा। इमामबाड़ा में आयतुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर रखकर श्रद्धांजलि दी गई। तकरीर में मौलाना राजी उल हसन ने जुल्म के खिलाफ खड़े होने की बात कही। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के रुख का जिक्र करते हुए उनके विचारों की सराहना भी की। इसके अलावा फतेहगढ़ इमामबाड़ा में भी काली पट्टी बांधकर ईद मनाई गई। करौंद स्थित शिया जामा मस्जिद और अन्य इमामबाड़ों में ईद की नमाज के बाद श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित हुईं। इमाम मौलाना अजहर हुसैन रिजवी ने कहा, “खामेनेई साहब जालिम के खिलाफ और मजलूम के साथ खड़े रहने वाले निडर रहबर थे। उनकी शहादत से उम्मत-ए-मुसलमान खुद को यतीम महसूस कर रही है, लेकिन शहादत विचारधारा को कमजोर नहीं करती, बल्कि मजबूत बनाती है।” इमाम बाकर हुसैन ने भी संबोधित करते हुए कहा, “पूरी दुनिया जानती है कि उन्होंने जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई और इस्लामी इंकलाब के सिद्धांतों को आगे बढ़ाया। इतिहास गवाह है कि एक व्यक्ति की शहादत से आंदोलन नहीं रुकता।” सभा में खामेनेई जिंदाबाद, अमेरिका मुर्दाबाद और इजराइल मुर्दाबाद के नारे लगे। शिया समुदाय के नेताओं ने तीन दिवसीय शोक की घोषणा की है। उन्होंने अपील की कि ईद की नमाज सादगी से अदा की जाए और फिलिस्तीन-ईरान के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ एकजुट रहा जाए। भोपाल के अलावा इंदौर, दिल्ली, लखनऊ और अन्य शहरों में भी इसी तरह का मातम देखा जा रहा है।  

जरही में कुदरत का कहर, आंधी तूफान वा बारिश के साथ गिरे ओले

जरही में कुदरत का कहर, आंधी तूफान वा बारिश के साथ गिरे ओले राजेंद्रग्राम  मुख्यालय परिसर से लगभग 8 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत जरही में करीब 7:00 बजे अचानक बदला मौसम ने किसानो की चिंता बढ़ा दी और हवा तूफान के साथ गरज चमक शुरू हो गई बारिश कुछ ही देर में तेज वर्षा में बदल गई इस दौरान बड़े आकार के ओले गिरने से हजारों एकड़ में लगी फसल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है तेज हवा और बिजली की चमक के साथ करीब 20 मिनट तक बारिश हुई बे मौसम वर्षा के साथ गिरे ओलों ने खेतों में खड़ी कटी हुई गेहूं दलहन फसल जैसे चना,मसूर,तुअर एवम तिलहन फसल अलसी को भारी नुक्सान पहुंचाया है। इस समय क्षेत्र में फसल कटाई का दौरा चल रहा है ऐसे में अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि ने किसने की मेहनत पर पानी फेरने का खतरा बढ़ा दिया है खेतों में रखी फसल के भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होना की आशंका है। बारिश के कारण खेतों में पड़ी फसल भींगने से गेहूं की फसल भींगने से चलिए गेहूं की फसल में चमक और गुणवत्ता में प्रभावित होने की आशंका बताई जा रही है। जिससे किसानों को उचित दाम मिलने मे परेशानी हो सकती है।

एमपी के इस जिले में 30 एकड़ पर निर्माण होगा, 2000 घर और 200 दुकानें मिल गई मंजूरी

 जबलपुर  मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में नर्मदा रोड स्थित तिलहरी क्षेत्र में शहर की पहली सैटेलाइट सिटी विकसित की जाएगी। 30 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस प्रोजेक्ट को राजस्व विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। निर्माण एजेंसी हाउसिंग बोर्ड की ओर से जमीन के एवज में 11 करोड़ रुपए की राशि पहले ही जमा कराई जा चुकी है। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, सेटेलाइट सिटी का उद्देश्य एक सुव्यवस्थित और आधुनिक शहर विकसित करना है, जो बेंगलुरु की इलेक्ट्रॉनिक सिटी और गुरुग्राम की तर्ज पर होगा। यहां रेसिडेंशियल, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सभी प्रकार की सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराई जाएंगी। शहर को मिलेंगे कई फायदे सेटेलाइट सिटी बनने से शहर में भीड़भाड़ कम होगी और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही रोजगार और औद्योगिक अवसर बढ़ेंगे तथा लोगों को बेहतर और शांत जीवनशैली मिलेगी। अभी यह है स्थिति     2 हजार आवासीय भवन और 200 दुकानों का निर्माण प्रस्तावित     11 करोड़ रुपए हाउसिंग बोर्ड द्वारा राजस्व विभाग को दिए जा चुके     एमआईजी, एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के आवास होंगे शामिल     8 गार्डन विकसित कर क्षेत्र को हरित बनाया जाएगा ऐसा होगा स्वरूप – बेहतर सड़क और परिवहन -किफायती से लेकर लग्जरी हाउसिंग -आइटी पार्क, उद्योग और संभावित एसईजेड -उच्चस्तरीय शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं -हरित क्षेत्र, पार्क और ओपन स्पेस स्पोर्ट्स क्लब, क्लब हाउस सेटेलाइट सिटी के लिए जमीन को राजस्व विभाग से मंजूरी मिल गई है। राशि का आवंटन होते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। यहां विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग और आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, साथ ही 8 गार्डन भी बनाए जाएंगे। सुनील उपाध्याय, प्रोजेक्ट प्रभारी, हाउसिंग बोर्ड आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी सिटी सेटेलाइट सिटी में बेहतर रोड कनेक्टिविटी के लिए 9 से 12 मीटर चौड़ी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक ब्लॉक में सर्विस एरिया, अंडरग्राउंड पार्किंग और पेयजल, बिजली जैसी सभी यूटिलिटीटी अंडरग्राउंड रहेंगी। कनेक्टिविटी के लिहाज से यह क्षेत्र और भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यहां से रिंग रोड और डुमना एयरपोर्ट तक सीधी और सुगम पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। इससे न केवल स्थानीय निवासियों को लाभ मिलेगा, बल्कि बाहरी क्षेत्रों से आने-जाने वालों के लिए भी यह स्थान सुविधाजनक बनेगा। इसके अलावा, क्षेत्र को एक पूर्ण विकसित शहरी क्षेत्र के रूप में तैयार करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बेहतर व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, शॉपिंग मॉल और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा, ताकि यहां रहने वाले लोगों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।

किसानों को मिलेगा ₹4000 का लाभ, खाते में एक साथ आएगी राशि, जानें पूरी जानकारी

भोपाल मध्य प्रदेश के किसानों के लिए मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना (CM Kisan Kalyan Yojana) को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। इस योजना के तहत किसानों को हर साल ₹6000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में ₹2000-₹2000 के रूप में सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। हालांकि, राज्य के किसानों को अब तक 14वीं किस्त का इंतजार है, जबकि केंद्र की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी हो चुकी है। क्यों अटकी है 14वीं किस्त? पिछली 13वीं किस्त अगस्त 2025 में जारी की गई थी। इसके बाद से अब तक योजना के तहत अगली किस्त किसानों के खातों में नहीं आई है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही 14वीं और 15वीं किस्त को एक साथ जारी कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो किसानों के खाते में एक साथ ₹4000 ट्रांसफर किए जा सकते हैं। किन किसानों को नहीं मिलेगा लाभ? जिनकी e-KYC पूरी नहीं है जिनका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है जिनका भूमि रिकॉर्ड सत्यापित नहीं है जिनका नाम पीएम किसान सूची से हट चुका है कैसे चेक करें अपना नाम? किसान अपना स्टेटस देखने के लिए SAARA पोर्टल (saara.mp.gov.in) पर जाकर “Chief Minister Kisan Kalyan Yojana Beneficiary Status” विकल्प चुन सकते हैं। फिलहाल, सरकार की ओर से किस्त जारी करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही किसानों के खाते में राहत की रकम पहुंच सकती है।

उज्जैन में नैवेद्य लोक है लजीज व्यंजनों का नया ठिकाना, मिलेगा इंदौर की छप्पन दुकान जैसा स्वाद

उज्जैन   इंदौर की छप्पन दुकान की तरह उज्जैन में भी नैवेद्य लोक की शुरुआत हुई है। सीएम मोहन यादव ने नैवेद्य लोक का लोकार्पण किया है। भव्य नैवेद्य लोक उज्जैन के नानाखेड़ा में स्थित है। यहां 34 दुकानें बनाई गई हैं। नैवेद्य लोक में आपको शुद्ध शाकाहारी और लजीज व्यंजन मिलेंगे। यह उज्जैन वासियों के लिए बड़ी सौगात है। 18 करोड़ रुपए से हुआ है निर्माण वहीं, नैवेद्य लोक में बने इन दुकानों की साइज 62 वर्गफीट से लेकर 180 वर्गफीट तक है। इन सभी दुकानों की निर्माण लागत 18 करोड़ रुपए बताई जा रही है। दुकानों का निर्माण उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया है। 28 हजार स्क्वायर फिट में बने नैवेद्य लोक में दुकानों के साथ ही यहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सुसज्जित ओपन थियेटर, साउंड सिस्टम, महिला, पुरुष, दिव्‍यांग जनों के उपयोगार्थ नवीन सेंसर उपकरण के साथ प्रसाधन कक्ष, सीसीटीवी कैमरा-सर्वर रूम, आपातकालीन विद्युत व्यवस्था के लिए डीजी सेट, पार्किंग, अंडर ग्राउंड विद्युत व्यवस्था, सीवरेज और लैंडस्केपिंग आदि सुविधाएं विकसित की गई हैं। लजीज व्यंजनों के साथ रोजगार भी मिलेगा वहीं, नैवेद्य लोक के लोकार्पण के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि इस नैवेद्य लोक में व्यंजनों के स्वाद के साथ ही रोजगार भी मिलेगा। इस कार्य के लिए मेरी ओर से सभी को बधाई। अति पिछड़े इलाके को किया गया विकसित नैवेद्य लोक की विशेषता बताते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी ने बताया कि यहां अति पिछड़े इलाके को विकसित किया गया है। पहले यहां काफी गंदगी हुआ करती थी। इस नैवेध लोक के माध्यम से उज्जैन में महाकाल दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक विशेष सुविधा प्रदान करेगा। श्रद्धालु यहां मालवा के व्यंजनों का लुत्फ उठा सकेंगे। सीईओ संदीप सोनी ने कहा कि इसे पूरी तरह से मॉल वाला लुक दिया गया है। लोग आएंगे तो उन्हें शानदार एंबियंस मिलेगा। गौरतलब है कि लोकार्पण के दिन ही वहां के लोगों की भीड़ उमड़ी है। इसके साथ ही सीएम मोहन यादव ने भी यहां व्यंजनों का स्वाद चखा है।

टाइगर कॉरीडोर बरेठा घाट को फोर-लेन बनाने के लिए मिली केंद्र से मंजूरी, 51 हादसों में 18 मौतें

बैतूल  मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के बरेठा घाट से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-46 (NH-46) के महत्वपूर्ण हिस्से को अब फोरलेन बनाने की मंजूरी मिल गई है। यह वही इलाका है, जहां पिछले दो साल में सड़क हादसे हुए और 18 लोगों की जान चली गई। लगातार बढ़ते हादसों और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस सड़क को चौड़ा और सुरक्षित बनाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यह सड़क ग्वालियर से बैतूल तक करीब 634 किलोमीटर लंबा एक अहम हाईवे है, जो पूरी तरह मध्यप्रदेश के अंदर आता है। यह राज्य के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ने वाला बड़ा मार्ग है और भोपाल से नागपुर जाने वाले कॉरिडोर का भी हिस्सा है। इस पर ज्यादातर काम पूरा हो चुका है, लेकिन बरेठा घाट समेत करीब 21 किलोमीटर का हिस्सा बाकी था।  हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू होगा काम  दरअसल, यह इलाका टाइगर कॉरिडोर में आता है, यानी यहां से जंगली जानवरों की आवाजाही होती है। इसी कारण 1 अप्रैल 2022 को हाईकोर्ट ने यहां सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को वन्यजीव और पर्यावरण से जुड़ी कई मंजूरियां लेनी पड़ीं। अब वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र सरकार से सभी जरूरी अनुमति मिल चुकी है। जैसे ही हाईकोर्ट से स्टे हटाने का अंतिम आदेश आएगा, निर्माण काम शुरू कर दिया जाएगा। संकरी और घुमावदार सड़क, लगता है जाम  बरेठा घाट का यह हिस्सा अभी केवल दो लेन का है, जो बहुत संकरा और घुमावदार है। यहां भारी वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। साथ ही, दो जगह ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां बार-बार हादसे होते हैं। कम चौड़ाई, तेज मोड़, ढलान और कम विजिबिलिटी इस रास्ते को और खतरनाक बनाते हैं। ब्लैक स्पॉट को ठीक करने भी बनाया प्लान  पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच यहां 51 एक्सीडेंट हुए, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और करीब 62 लोग घायल हुए। कई छोटे हादसे तो रिकॉर्ड में भी नहीं आ पाते, जिससे असली स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब इस पूरे हिस्से को 4 लेन में बदला जाएगा, जिससे सड़क चौड़ी होगी और ट्रैफिक आसानी से चल सकेगा। इसके साथ ही ब्लैक स्पॉट्स को ठीक करने के लिए खास प्लान बनाया गया है। यहां 3 छोटे पुल (माइनर ब्रिज), 38 बॉक्स कलवर्ट, 1 रेलवे अंडरब्रिज, 2 रोड ओवरब्रिज और 1 व्हीकल अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे ट्रैफिक सुचारू होगा और दुर्घटनाओं में कमी आएगी। वन्य जीवों की सुरक्षा का ख्याल, बनेंगे 10 अंडरपास, 1 ओवरपास  सबसे खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में वन्यजीवों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। जानवरों की आवाजाही के लिए 10 अंडरपास और 1 ओवरपास बनाए जाएंगे, ताकि वे बिना खतरे के सड़क पार कर सकें। इसके अलावा सड़क पर क्रैश बैरियर, साइन बोर्ड, रंबल स्ट्रिप, नॉइज बैरियर और फेंसिंग जैसी सुविधाएं भी लगाई जाएंगी, जिससे यात्रियों और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा हो सके। पर्यटन स्थलों पर पहुंच भी बेहतर होगी  इस परियोजना के पूरा होने से न सिर्फ सड़क हादसे कम होंगे, बल्कि व्यापार, पर्यटन और आवागमन भी आसान हो जाएगा। सांची, भीमबेटका, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी। साथ ही, उद्योगों और व्यापार को भी इसका बड़ा फायदा मिलेगा। कुल मिलाकर, बरेठा घाट का यह फोरलेन प्रोजेक्ट आम लोगों के लिए सुरक्षित और आसान सफर की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। 

किसानों के लिए राहत, नए भूमि अधिग्रहण कानून से मुआवजे में होगा ये बदलाव”

इंदौर  नए वित्त वर्ष से उन लोगों के लिए एक अच्छा नियम लागू होने जा रहा है जिनकी भूमि विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही है। इस नए नियम से किसानो के साथ ही बहुत बड़े स्तर पर लोगों को एक नई राहत मिलने वाली है। दरअसल इस नए नियम लागू होने के बाद जमीन देने वाले किसानों और अन्य भू-स्वामियों को पूरी राशि बिना किसी कर कटौती के मिल सकेगी। इससे उन्हें फायदा होगा। सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवज़ा राशि नए वित्त वर्ष से  Tax Free दरअसल अब सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवज़ा राशि नए वित्त वर्ष (New FinancialYear) से कर-मुक्त (Tax Free ) होगी। केंद्र सरकार के इस नए प्रावधान को एक बड़े राहत भरे फैसले को तौर पर देखा जा रहा है।  खासकल उन लोगों के लिए ये फायदा देने वाले है जिनकी जमीन विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही है। भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवज़ा राशि टैक्स फ्री होने से उनको काफी लाभ होगा। पश्चिमी बाइपास, अयोध्या बाइपास, मेट्रो परियोजना से जुड़े भूमि मालिको को लाभ इस नए नियम से शहर में चल रहे तीन मेन प्रोजेक्टों पश्चिमी बाइपास, अयोध्या बाइपास और मेट्रो परियोजना से जुड़े भूमि स्वामियों को डायरेक्ट लाभ मिलेगा। इन परियोजनाओं के लिए करीब 400 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। प्रभावित लोगों जो मुआवज़ा राशि मिलेगी वो अब टैक्स के दायरे से बाहर रहेगी। नए नियम लागू होने के बाद जमीन देने वाले किसानों और अन्य भू-स्वामियों को पूरी राशि बिना किसी कर कटौती के मिल सकेगी। लिहाजा नए साल पर लागू होने वाले इस नियम से किसानों को फायदा होगा। 

सीएम मोहन यादव जयपुर में निवेशकों से करेंगे मुलाकात, टेक्सटाइल से लेकर EV तक के अवसरों पर चर्चा

भोपाल  पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश सरकार निवेश बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mp cm dr mohan yadav) शनिवार को देश के उद्योगपतियों से सीधा संवाद करेंगे। जयपुर में 21 मार्च को बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है। जिसमें टेक्सटाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन के क्षेत्र में काम करने वाले निवेशक शामिल हो रहे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर में रहेंगे। वे जयपुर के आईटीसी राजपूताना में आयोजित निवेशकों के बड़े कार्यक्रम (Investment Summit) में उद्योगपतियों से वन टू वन संवाद करेंगे। कार्यक्रम का नाम 'इंटरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश' है। इस कार्यक्रम में खास प्रोजेक्ट और निवेश की नई योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। सीएम मोहन यादव उद्योगपतियों से मीटिंग कर टेक्सटाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग और टूरिज्म के क्षेत्र में निवेश पर बात करेंगे। जयपुर में दूसरा बड़ा आयोजन एमपी सरकार (mp govt) की मंशा है कि मध्यप्रदेश में अधिक से अधिक उद्योग आएं और युवाओं के लिए रोजगार बढ़े। मोहन सरकार ने इसके लिए मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए नई औद्योगिक नीति भी बनाई है। इसमें उद्योग लगाने की और निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाया है। इससे निवेशकों को पूरी कागजी कार्यवाही में परेशानी न हो। कुछ दिन पहले भीलवाड़ा में एक्सटाइल सेक्टर को लेकर इसी प्रकार का आयोजन हो चुका है, इसके बाद यह दूसरा बड़ा आयोजन जयपुर में हो रहा है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट संदेश है कि मध्यप्रदेश अब संभावनाओं तक सीमित राज्य नहीं रहा, बल्कि नीतिगत स्पष्टता, त्वरित निर्णय क्षमता और मजबूत औद्योगिक आधार के साथ निवेश को धरातल पर उतारने वाला अग्रणी राज्य बन चुका है। उनका मानना है कि निवेश केवल पूंजी का प्रवाह नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और समग्र क्षेत्रीय विकास का माध्यम है। एमपी में चल रहा है काम मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में कई जिलों में नए उद्योग विकसित किए जा रहे हैं। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क, ग्वालियर में फुटवियर पार्क, जबलपुर में डिफेंस हब और धार में पीएम मित्रा पार्क बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा आईटी पार्क और स्किल डेवलपमेंट सेंटर पर भी काम तेजी से चल रहा है। राज्य सरकार ने साल 2026 को ‘कृषि वर्ष’ घोषित किया है, जिससे खेती और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिल सके। जयपुर (jaipur) में होने वाले इस बड़े आयोजन का मकसद भी यह है कि राजस्थान और आसपास के निवेशकों को मध्यप्रदेश में आकर्षित किया जा सके और उनसे निवेश कराया जा सके। इससे मध्यप्रदेश में विकास बढ़े और रोजगार के नए-नए अवसर भी निर्मित हों।