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विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा, HC ने दिए अपने ही फैसले पर स्टे

श्योपुर  मध्य प्रदेश का श्योपुर विधानसभा क्षेत्र में बीते 2-3 दिनों से चर्चाओं में बना हुआ है. इसकी वजह है, सोमवार यानि 9 मार्च को हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ का सुनाया गया फैसला. जहां कोर्ट ने विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर फैसला सुनाते हुए बीजेपी के हारे हुए प्रत्याशी रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था, जबकि कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य की थी. वहीं हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद विवेक तंखा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए अपने ही फैसले पर 15 दिन का स्टे लगा दिया है. जिसके बाद कांग्रेस अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। अपने ही फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाया स्टे विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद विवेक तंखा ने तुरंत कोर्ट का रूख किया. जहां विवेक तंखा की याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने अपने ही फैसले को 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया है. जिसका मतलब है कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में अपील करके स्थगन आदेश प्राप्त करने का मौका दिया गया है. यह स्थगन RP एक्ट के प्रावधान अनुसार दिया गया है. यानि तब तक मुकेश मल्होत्रा विजयपुर से कांग्रेस विधायक रहेंगे. जस्टिस एसजी अहलूवालिया ने मुकेश मल्होत्रा ​​की इस दलील पर सहमति जताई कि अगर फैसले के असर और अमल पर रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें भारी नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि "फैसले के असर और अमल पर 15 दिनों के लिए रोक लगाने की अर्ज़ी न्याय के हित में है, ताकि प्रतिवादी मुकेश मल्होत्रा ​​सुप्रीम कोर्ट से रोक का आदेश ले सकें। जीतू पटवारी ने बताया लोकतांत्रिक लड़ाई जीतू पटवारी ने कहा कि हम लोकतांत्रिक तरीके से फिर से कांग्रेस का विधायक बनवाएंगे. कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे लोकतंत्र बचाने की इस लड़ाई बताया है. उन्होंने कहा कि हम राज्यसभा सांसद के साथ मजबूती से लगे हुए हैं. साथ ही कहा कि बीजेपी दलित, आदिवासी और आरक्षण विरोधी है. बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में विवेक तंखा और अभिषेक मनु संघवी मामले की पैरवी करेंगे। क्या है मुकेश मल्होत्रा और रामनिवास का पूरा मामला दरअसल, विजयपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा को जीत मिली थी, जबकि बीजेपी रामनिवास रावत को हार का सामना करना पड़ा था. हार के बाद रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ याचिका लगाई थी, जिसमें दावा किया गया था कि कांग्रेस विधायक ने आपराधिक जानकारी छिपाई है. मामले में सोमवार को ग्वालियर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए मुकेश मल्होत्रा द्वारा आपराधिक जानकारी छिपाने की बात सही पाई गई, जिसके बाद कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य कर दी और रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया।

जीवाजी विश्वविद्यालय में परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सेवानिवृत्त IAS-IPS अधिकारी लगाएंगे उड़नदस्ता

ग्वालियर  ग्वालियर-चंबल अंचल लंबे समय तक परीक्षाओं में नकल की घटनाओं के लिए बदनाम रहा है। हालांकि स्कूली परीक्षाओं में लगातार सख्ती के कारण नकल पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है, लेकिन विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षाओं में अभी भी नकल के मामले सामने आते रहते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक अभिनव पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय अब स्नातक परीक्षाओं के दौरान नकल रोकने के लिए सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की सेवाएं लेने जा रहा है। इन अधिकारियों को उड़नदस्तों में शामिल कर परीक्षा केंद्रों की निगरानी कराई जाएगी, जिससे नकल पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। 26 मार्च से शुरू होने वाली परीक्षाओं में लागू होगी व्यवस्था विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह नई व्यवस्था 26 मार्च से शुरू होने वाली स्नातक परीक्षाओं में लागू की जाएगी। इसके लिए ग्वालियर-चंबल अंचल में रहने वाले सेवानिवृत्त प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की सूची तैयार कर ली गई है। उनसे अनुमति लेने की प्रक्रिया भी जारी है। विश्वविद्यालय का मानना है कि प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारियों की मौजूदगी से परीक्षा केंद्रों पर अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ेगी। चार सेवानिवृत्त अधिकारियों ने दी सहमति अब तक चार सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने उड़नदस्ते में शामिल होने के लिए सहमति दे दी है। इसके अलावा करीब 10 अन्य सेवानिवृत्त प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के नाम भी सूची में शामिल किए गए हैं। आईएएस (सेवानिवृत्त) विनोद शर्मा का कहना है कि उड़नदस्तों में अनुभवी अधिकारियों की मौजूदगी एक सकारात्मक पहल है। इससे न केवल उड़नदस्तों को मजबूती मिलेगी, बल्कि परीक्षा केंद्रों पर सख्ती भी बढ़ेगी और नकल की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। मुरैना और भिंड में बढ़ेगी विशेष सख्ती विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले के पीछे मुरैना और भिंड जिलों में पहले सामने आती रही नकल की घटनाओं को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में उड़नदस्तों की विशेष निगरानी रखी जाएगी। माना जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर जान-पहचान और मेलजोल के कारण कभी-कभी विश्वविद्यालय के अधिकारी अपेक्षित सख्ती नहीं कर पाते, जिससे नकल की घटनाएं सामने आती हैं। साथ ही सूचनाएं लीक होने का भी खतरा बना रहता है। कुलसचिव और कुलगुरु ने बताया सकारात्मक कदम जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा के अनुसार उड़नदस्ते में बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और कुलगुरु से अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारियों की सहायता लेने से परीक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। वहीं कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने भी इसे सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि इस प्रस्ताव को सहमति दी जाएगी और आगामी परीक्षाओं में इसे लागू किया जाएगा।  

MP की 2 महिला सरपंचों को दिल्ली में मिला सम्मान, निधि और ज्योति बनीं प्रेरणा का स्रोत

छतरपुर  राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में पंचायती राज मंत्रालय द्वारा आयोजित पंचायतों की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में छतरपुर जिले की दो महिला सरपंचों ने सहभागिता कर जिले का प्रतिनिधित्व किया। नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC) में आयोजित इस कार्यक्रम में सशक्त पंचायत नेत्री अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में छतरपुर जिले की ग्राम पंचायत ईशानगर की सरपंच निधि मिश्रा (बीकन लीडर) और ग्राम पंचायत गोरा की सरपंच ज्योति मिश्रा ने भाग लिया। उनके साथ जनपद पंचायत बड़ामलहरा के सीईओ ईश्वर सिंह वर्मा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान महिला सरपंचों को सम्मानित किया गया। साथ ही महिला एवं बालिका हितैषी पंचायत के तहत गांवों में किए गए कार्यों और बदलावों पर आधारित शॉर्ट फिल्म दिखाई गई। इस दौरान महिला सरपंचों ने अपनी पंचायतों में महिला और बालिका हित में किए गए कार्यों, सामने आने वाली चुनौतियों और अपने अनुभवों को साझा किया। यह सम्मेलन पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएस) और यूएनएफपीए के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य पंचायतों में महिला नेतृत्व को मजबूत करना और उन्हें महिला व बालिका हितैषी ग्राम पंचायत के रूप में विकसित करना है। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने अपने संबोधन में कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से जमीनी लोकतंत्र मजबूत होता है और विकास की प्राथमिकताएं पानी, पोषण, स्वच्छता और शिक्षा जैसे मूलभूत मुद्दों पर केंद्रित होती हैं। सम्मेलन में पंचायती राज मंत्रालय के अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी ने महिला नेतृत्व की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब महिलाएं पंचायतों का नेतृत्व करती हैं तो ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ती है और निर्णय प्रक्रिया अधिक समावेशी बनती है। कार्यक्रम में महिला नेतृत्व की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के माध्यम से पंचायतों को सशक्त बनाने पर पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इस चर्चा की अध्यक्षता युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल ने की। वहीं आदर्श महिला हितैषी ग्राम पंचायत के विकास विषय पर आयोजित पैनल चर्चा की अध्यक्षता राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सचिव मीता राजीव लोचन ने की।

एमपी में LPG संकट, 15% गैस ही उपलब्ध, भोपाल-इंदौर मेट्रो को नहीं मिलेगी गैस, घरेलू सिलेंडर के लिए लंबी वेटिंग

भोपाल   मध्य प्रदेश में रसोई गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। प्रदेश में LPG की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। प्रदेश में LPG का स्टॉक सामान्य से भी काफी कम रह गया है। वहीं कई जिलों में घरेलू गैस सिलेंडर की डिलिवरी के लिए लोगों को 5-7 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। सिर्फ 15% स्टॉक, प्राथमिकता के आधार पर मिलेगा सिलेंडर जानकारी के मुताबिक प्रदेश में इस समय कुल मांग के मुकाबले करीब 15% LPG का स्टॉक ही उपलब्ध है। इसे भी मुख्य रूप से इमरजेंसी जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा गया है। ऐसे में प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर घरेलू गैस उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का फैसला किया है। यही कारण है कि फिलहाल औद्योगिक उपयोग और अन्य परियोजनाओं के लिए गैस सप्लाई सीमित कर दी गई है। LPG की कमी की आंच अब किचन तक पहुंच गई है। 3 दिन से प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप है। घरेलू सिलेंडर की वेटिंग भी 5 से 7 दिन की हो गई है। ऑयल कंपनियों ने 15% गैस ही उपलब्ध होने की बात कही है, जो इमरजेंसी सेवा और घरों के लिए ही उपयोग हो सकेगी। ऐसे में गुरुवार से पूरे प्रदेश में गैस का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इधर, ऑयल कंपनियों की सप्लाई के बाद कमर्शियल सिलेंडर सिर्फ अस्पताल, सेना-पुलिस की कैंटीन, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट स्थित कैंटीन, बस स्टैंड स्थित भोजनालय को ही मिलेंगे। हालांकि, खाद्य विभाग को जरूरत के हिसाब से ऑयल कंपनियों को लिस्ट देना होगी। दूसरी ओर होटल, मैरिज गार्डन, सराफा कारीगरों के साथ भोपाल और इंदौर मेट्रो को कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल सकेंगे। दोनों ही शहरों में मेट्रो का काम चल रहा है, जिसमें वेल्डिंग के लिए एलपीजी का उपयोग होता है। भोपाल-इंदौर मेट्रो को भी नहीं मिलेगी गैस गैस की कमी (LPG Shortage) का असर राज्य की बड़ी परियोजनाओं पर भी पड़ रहा है। भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं को फिलहाल एलपीजी की सप्लाई नहीं दी जाएगी। सरकार का कहना है कि जब तक सप्लाई सामान्य नहीं हो जाती, तब तक गैस का उपयोग सिर्फ जरूरी आवश्यकताओं के लिए ही किया जाएगा। घरेलू सिलेंडर डिलिवरी में देरी गैस एजेंसियों के मुताबिक सप्लाई कम (LPG Shortage) होने की वजह से बुकिंग के बाद सिलेंडर को डिलिवरी में 5-7 दिन तक का समय लग रहा है। कुछ शहरों में यह इंतजार और भी बढ़ सकता है। एजेंसी संचालकों का कहना है कि जैसे ही गैस की नई खेप पहुंचेगी, डिलीवरी की स्थिति सामान्य होने लगेगी। पहले घरों को गैस, फिर इंडस्ट्री को सप्लाई का संकट (LPG Shortage) देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद ही उद्योग और प्रोजेक्ट्स को गैस उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कुछ दिनों में ही सप्लाई आने की उम्मीद है, जिसके बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी। स्टॉक इतना कि 48 घंटे तैसे-जैसे निकलेंगे भोपाल होटल एसोसिएशन के तेजकुल पाल सिंह पाली का कहना है कि राजधानी में ही डेढ़ हजार से ज्यादा होटल और रेस्टॉरेंट हैं। जहां हर रोज 2 से ढाई हजार सिलेंडर उपयोग होते हैं। जिन होटल या रेस्टॉरेंट में स्टॉक है, वहां 48 घंटे ही तैसे-जैसे निकल पाएंगे। इसके बाद होटल और रेस्टॉरेंट बंद हो जाएंगे। सरकार से मांग की है कि होटल, रेस्टॉरेंट और रेहड़ी वालों को कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति की जाए, लेकिन सरकार ने सिर्फ इमरजेंसी सेवा के लिए गैस देने की बात कही है। मार्च में ही 20 हजार से ज्यादा शादियां प्रदेश में मार्च में ही 20 हजार से ज्यादा शादियां होना हैं। इनमें कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग होता है, लेकिन ये 3 दिन से नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में शादियों में भोजन पकाने में दिक्कतें खड़ी हो रही हैं। भोपाल में 3 हजार आभूषण कारीगर हैं। इन्हें महीने में 9000 हजार सिलेंडर की जरूरत होती है। दाल, मसाले और ड्राई फ्रूट्स हुए महंगे ईरान-इजरायल के बीच युद्ध का असर भोपाल के बाजारों में भी दिख रहा है। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री एवं कैट के पूर्व प्रवक्ता विवेक साहू ने बताया कि दालों में तेजी बनी हुई है। हरी मूंग करीब 100 रुपए प्रति क्विंटल, मसूर 100 रुपए, चना 150 रुपए, मूंग मोगर लगभग 125 रुपए और चना दाल करीब 100 रुपए प्रति क्विंटल तक तेज बताई जा रही है। वहीं, तूअर दाल के भाव में भी करीब 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मसालों के बाजार में भी तेजी देखने को मिल रही है। थोक व्यापारी अनिल कुकरेजा के मुताबिक, मिर्ची लगभग 50 रुपए प्रति किलो और धनिया करीब 40 रुपए प्रति किलो तक महंगी हो गई है। वहीं थोक ड्राई फ्रूट व्यापारी किशोर राजदेव के अनुसार, पिस्ता करीब 250 रुपए प्रति किलो, अंजीर 100 रुपए प्रति किलो, केसर लगभग 20 हजार रुपए प्रति किलो और दाल चीनी करीब 5 रुपए प्रति किलो तक महंगी हो चुकी है। ईरान के रास्ते आती हैं सामग्री भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री के मुताबिक, पिस्ता, अंजीर, दाल, चीनी सहित कई ड्राई फ्रूट्स ईरान के रास्ते भारत आते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर इनके दामों पर पड़ा है। वहीं, भारत से जाने वाले कुछ उत्पादों के दामों में गिरावट भी देखी जा रही है। खोपरा पाउडर करीब 50 रुपए, मखाने 100 रुपए और हरी इलायची लगभग 200 रुपए प्रति किलो तक सस्ती हुई है। पैकेजिंग व्यापार से जुड़े मोतीलाल आडवाणी ने बताया, क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से कच्चा माल महंगा हो गया है, जिसके कारण पैकेजिंग से जुड़े सामानों के रेट में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसके चलते प्लास्टिक से बने अधिकांश पैकेजिंग आइटम महंगे हो गए हैं।

गर्मी का कहर, सीजन में पहली बार पारा 40 डिग्री पार, राज्य के कई शहरों में तापमान बढ़ा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे हफ्ते में ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मौसम विभाग  के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के कई शहरों में तापमान सामान्य से 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया है। बुधवार को कई जिलों में पारा 38 से 40 डिग्री के करीब पहुंच गया है, जिससे दिन में तेज गर्मी का अहसास होने लगा है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रतलाम में दर्ज किया गया, जहां पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके अलावा नर्मदापुरम में 39.9°C और धार में 39.4°C तापमान रिकॉर्ड किया गया। गुना में 38.1°C और इंदौर में 38°C तापमान दर्ज किया गया, जो सामान्य से ज्यादा है।  राजधानी भोपाल में भी बढ़ी गर्मी राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से करीब 4 डिग्री ज्यादा है। ग्वालियर में 37.7°C और उज्जैन में भी 37.7°C तापमान दर्ज किया गया। वहीं खंडवा, खरगोन और शाजापुर जैसे शहरों में भी तापमान 37 डिग्री के आसपास रहा। महाकौशल और विंध्य में भी चढ़ा पारा पूर्वी मध्यप्रदेश के जिलों में भी गर्मी का असर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दमोह में 37.8°C, खजुराहो में 38.2°C और टीकमगढ़ में 38.4°C तापमान दर्ज किया गया। मंडला में 37.5°C और सागर में 37.4°C पारा रिकॉर्ड हुआ। मौसम विभाग के अनुसार इन इलाकों में भी तापमान सामान्य से 5 से 6 डिग्री ज्यादा है। रात में अभी हल्की ठंड बरकरार दिन में गर्मी बढ़ने के बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में रात का तापमान अभी अपेक्षाकृत कम बना हुआ है। भोपाल में न्यूनतम तापमान 16°C और इंदौर में 15.8°C दर्ज किया गया। वहीं कई जिलों में न्यूनतम तापमान 16 से 20 डिग्री के बीच रहा। आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है गर्मी मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। प्रदेश के कई जिलों में दिन का तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिससे मार्च में ही गर्मी का असर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अबकी बार अप्रैल और मई में हीट वेव यानी, लू चलेगी। 15 से 20 दिन तक लू चल सकती है, लेकिन मार्च में लू चलने का अलर्ट नहीं है। मार्च के शुरुआती दिनों में पारा बढ़ा हुआ है। मौसम विभाग ने इस साल अप्रैल और मई में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ने का अनुमान जताया है। इन दो महीने के अंदर ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में पारा 45 डिग्री के पार पहुंच सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग भी गर्म रहेंगे। 

108 एम्बुलेंस की तत्परता से बची हजारों जानें, समय पर मदद से मरीजों को मिला जीवन

“108 एम्बुलेंस बनी जीवन रक्षक – समय पर पहुंचकर हजारों मरीजों की बचाई जान” दो महीनों में 13,977 सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाया, गोल्डन आवर में मिली चिकित्सा सहायता भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में 108 एम्बुलेंस सेवा घायलों के लिए एक सच्ची जीवन रक्षक सेवा बनकर सामने आई है। आपातकालीन कॉल मिलते ही तेज़ी से घटनास्थल पर पहुंचकर 108 एम्बुलेंस की टीम न केवल घायलों को अस्पताल पहुंचा रही है बल्कि मौके पर ही प्राथमिक उपचार देकर कई गंभीर मामलों में मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान प्रदेशभर में 13,977 सड़क दुर्घटना (रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट) मामलों में 108 एम्बुलेंस ने घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। इसमें जनवरी 2026 में 7,335 और फरवरी 2026 में 6,642 दुर्घटना पीड़ितों को एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया। विशेष बात यह है कि इन मामलों में औसतन हर दिन 230 से अधिक घायलों को 108 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से त्वरित चिकित्सा सहायता मिल रही है। समय पर एम्बुलेंस पहुंचने के कारण कई गंभीर घायलों की जान बच पाई। गोल्डन आवर में जीवन रक्षक साबित हो रही 108 सेवा स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में “गोल्डन आवर” यानी दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस समय के भीतर यदि मरीज को प्राथमिक उपचार और अस्पताल तक पहुंचा दिया जाए तो जीवन बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। 108 एम्बुलेंस सेवा इसी गोल्डन आवर में तेजी से पहुंचकर घायलों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने का कार्य कर रही है, जिससे यह सेवा आम नागरिकों के लिए “जीवन रेखा” साबित हो रही है। प्रशिक्षित टीम मौके पर देती है प्राथमिक उपचार 108 एम्बुलेंस में तैनात प्रशिक्षित ईएमटी (Emergency Medical Technician) और पायलट की टीम घटनास्थल पर पहुंचते ही मरीज की स्थिति का आकलन कर प्राथमिक उपचार प्रदान करती है। कई मामलों में गंभीर रूप से घायल मरीजों को मौके पर ही ऑक्सीजन सपोर्ट, ब्लीडिंग कंट्रोल और बेसिक लाइफ सपोर्ट देकर उनकी स्थिति को स्थिर किया जाता है, जिसके बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। इन जिलों में सबसे अधिक दुर्घटना मामले प्रदेश के कई जिलों में दुर्घटनाओं के मामले अधिक दर्ज किए गए। इनमें सागर में 844, इंदौर में 591, भोपाल में 576, जबलपुर में 510, रीवा में 499 और सतना में 451 मामलों में 108 एम्बुलेंस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। इसके अलावा धार, छिंदवाड़ा, खरगोन, सीधी, उज्जैन और विदिशा सहित कई जिलों में भी बड़ी संख्या में एम्बुलेंस सेवाएं प्रदान की गईं। 15 से 20 मिनट में पहुंच रही एम्बुलेंस आपातकालीन कॉल प्राप्त होने के बाद 108 एम्बुलेंस की टीम औसतन 15 से 20 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच रही है। तेज़ प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय के कारण दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार मिल पा रहा है। सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को कम करने के लिए यातायात नियमों का पालन, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग, तेज गति से वाहन न चलाना और मोबाइल फोन का उपयोग न करना बेहद जरूरी है। आंकड़ों में 108 एम्बुलेंस सेवा ▪ जनवरी 2026 – 7,335 सड़क दुर्घटना मामलों में घायलों को सहायता ▪ फरवरी 2026 – 6,642 सड़क दुर्घटना मामलों में घायलों को सहायता ▪ दो महीनों में कुल – 13,977 दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाया ▪ औसतन प्रतिदिन – 230 से अधिक घायलों को मिली त्वरित सहायता ▪ औसत रिस्पॉन्स टाइम – 15 से 18 मिनट में घटनास्थल पर पहुंची एम्बुलेंस सबसे अधिक दुर्घटना मामले वाले जिले ▪ सागर – 844 ▪ इंदौर – 591 ▪ भोपाल – 576 ▪ जबलपुर – 510 ▪ रीवा – 499 ▪ सतना – 451 जीवन रक्षक उपकरणों से लैस हैं 108 एम्बुलेंस मध्यप्रदेश में संचालित 108 एम्बुलेंस अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस हैं। 108 एम्बुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर, मध्यप्रदेश, तरुण सिंह परिहार ने बताया कि प्रदेशभर में संचालित सभी एम्बुलेंस में आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं और एम्बुलेंस स्टाफ पूरी निष्ठा एवं प्रतिबद्धता के साथ अपनी सेवाएं दे रहा है। एम्बुलेंस में अम्बुवैग, ब्लड प्रेशर मापने की मशीन, पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर (शुगर जांच उपकरण), थर्मोमीटर तथा जीवन रक्षक ऑक्सीजन की समुचित व्यवस्था रहती है। इसके साथ ही आपातकालीन स्थिति में उपयोग होने वाली आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध रहती हैं, जिनका उपयोग प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) द्वारा विशेषज्ञ चिकित्सकों के मार्गदर्शन में किया जाता है। 108 एम्बुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर, मध्यप्रदेश, तरुण सिंह ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में निजी वाहन के बजाय एम्बुलेंस सेवा का उपयोग करें, क्योंकि एम्बुलेंस में जीवन रक्षक उपकरणों के साथ प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ मौजूद होता है, जो रास्ते में ही मरीज को प्राथमिक उपचार प्रदान कर उसकी स्थिति को स्थिर करने में मदद करता है।उन्होंने कहा कि किसी भी दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति में तुरंत 108 एम्बुलेंस सेवा पर कॉल करें। हमारी संस्था और एम्बुलेंस कर्मचारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ नागरिकों की सेवा में सदैव तत्पर हैं।

CM मोहन ने किया हटा का नाम बदलने का ऐलान, 405 करोड़ के विकास कार्यों का उद्घाटन भी किया

सागर   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जहां बेटियां जन्म से लेकर आजीवन पूजी जाती हैं, वह सिर्फ़ और सिर्फ़ अपना मध्यप्रदेश ही है। नारी सदैव पूजनीय हैं। हम अपने देश को भी जननी मानकर भारत माता की जय कहकर पूजते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बेटियों और महिलाओं के समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सरकार की योजनाएं महिलाओं के जीवन में हर कदम पर पक्की सहेली बनकर उनके साथ खड़ी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को दमोह जिले के हटा में महिला सशक्तिकरण सम्मेलन सह शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के कारण प्रदेश के लिंगानुपात में व्यापक सुधार हुआ है। साथ ही बेटियों के प्रति समाज की सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों की प्रगति और आशीर्वाद से ही प्रदेश में समृद्धि आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से दमोह जिले के लिए 405 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की लागत के 13 विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। इसमें लगभग 232 करोड़ रूपए की लागत से हटा से गैसाबाद सिमरिया मार्ग (एसएच-55) के 73 किमी मार्ग के टू-लेन रोड के रूप में उन्नयन एवं चौड़ीकरण, 74 करोड़ 44 लाख रूपए की लागत से मडियादो से बर्धा किशनगढ़ सड़क निर्माण और 48 करोड़ 89 लाख रूपये की लागत से मड़ियादो से रजपुरा मार्ग के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन शामिल है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विरासत से विकास के मूल मंत्र को अपनाते हुए प्रदेश में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। विगत वर्ष बुंदेलखंड क्षेत्र के वैश्विक पर्यटन स्थल खजुराहो में स्टेट कैबिनेट की मीटिंग कर सरकार ने 27 हजार 500 करोड़ रूपए से अधिक के विकास कार्यों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाल में ही सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन का टीकाकरण शुरू हुआ है। उन्होंने सभी माताओं-बहनों से अपील करते हुए कहा कि अपनी 14 वर्ष से अधिक उम्र कीबेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं और दूसरे लोगों को भी ऐसा ही करने के लिए जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है, इससे हमारी बेटियों का भविष्य आजीवन सुरक्षित रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एचपीवी वैक्सीन का टीका लगवाने वाली हटा की 8 बेटियों को मंच से प्रमाण पत्र भी सौंपे। मुख्यमंत्री ने पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।     हटा अ‍ब बनेगा शिवकाशी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटावासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करते हुए हटा का नाम बदलकर इसे शिवकाशी नाम देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हटा श्री श्री 1008 देवश्री गौरीशंकर की नगरी है, इसलिए अब इसे शिवकाशी के रूप में ही जाना जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटावासियों को और भी कई सौगातें दीं। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि हटा में नवीन आईटीआई भवन बनाया जाएगा। हटा में सर्वसुविधायुक्त नवीन नगर पालिका भवन एवं भव्य गीता भवन भी निर्मित किया जाएगा।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में कार्य का दायदा बहुत विस्तृत है, इसलिए हटा के महाविद्यालय में अब कृषि, उद्यानिकी एवं पशुपालन संकाय/विषय भी पढ़ाये जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विनती-मड़ियादौ-चौरईया मार्ग का चौड़ीकरण कराया जाएगा। हटा के शासकीय पीएमश्री महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल में इंडोर ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पटेरा में नया महाविद्यालय खोले जाने की घोषणा करते हुए कहा कि मड़ियादो एवं देवरी फतेहपुर में नया हायर सेकेण्डरी भवन बनाया जाएगा। इसी प्रकार नगर परिषद तेंदूखेड़ा में तारादेही तिराहे से चौरई तक मार्ग चौड़ीकरण एवं सौन्दर्यीकरण कार्य कराए जाएंगे। नगर परिषद तेंदूखेड़ा में वार्ड क्रमांक 3 में सी.सी. रोड निर्माण कराया जाएगा। गहरा से चौपरा-सिमरी तक मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह जिले में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना के जरिए बुंदेलखंड के हर खेत को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। खेतों में फसलें लहलहाएंगी, अब हटा से कोई रोजगार की तलाश में बाहर नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा अब 55 लाख हैक्टेयर तक पहुंच गया है। इसमें 10 लाख हैक्टेयर रकबा तो पिछले 2 साल में ही बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना है। बेटियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के लिए हम कोई कसर नहीं रखेंगे। महिलाओं की खुशहाली में ही प्रदेश की खुशहाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने 2 दिन पहले महिला दिवस मनाया है। अब आगे नवरात्रि आ रही है। राज्य सरकार नारी कल्याण के लिए समर्पित है। प्रदेश की एक करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों को हर माह सम्मानपूर्वक 1500 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द लोकसभा और विधानसभा में बहनों को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। राज्य में नगरीय निकायों में यह आरक्षण 50 प्रतिशत तक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हटा विधायिका उमादेवी खटीक को जन्मदिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे हटावासियों की दीर्घकाल तक सेवा करती रहें।  हटा विधायिका खटीक ने स्वागत संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहली बार हटा विधानसभा क्षेत्र आए हैं। साथ में 405 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की सौगातें भी लाये हैं। उन्होंने कहा कि नारी पूरे समाज के विकास की प्रमुख आधारशिला होती है। आज हमारी महिलाएं शिक्षा, सेना और हर क्षेत्र में देश को गौरव दिला रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में माताओं-बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मजबूती से काम हो रहा है। प्रदेश में हर बेटी का सम्मान और हर महिला को रोजगार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आज दमोह जिले के लिए अनेक विकास कार्यों का भूमि-पूजन पूरा हुआ है। इससे इस क्षेत्र के विकास को नए पंख लगेंगे।  कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री एवं दमोह जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार, प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) … Read more

अल रशीद चैरिटेबल हॉस्पिटल पर अनियमितताओं का आरोप, आयुष्मान भारत योजना से किया गया निलंबित

अल रशीद चैरिटेबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर भोपाल अनियमितताओं एवं धोखाधड़ी मामले में आयुष्मान भारत "निरामयम्" योजना से निलंबित राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा की जा रही है सतत निगरानी भोपाल  राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा आयुष्मान भारत "निरामयम्" योजना अंतर्गत पात्र एवं जरूरतमंद हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने तथा योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से सतत निगरानी की जा रही है। भोपाल के अल रशीद चैरिटेबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के विरुद्ध गंभीर वित्तीय अनियमितताओं एवं धोखाधड़ी के मामले पर संज्ञान लेते हुए तत्काल प्रभाव से आयुष्मान भारत "निरामयम्" योजना से निलंबित किया गया है। एजेंसी ने परीक्षण में पाया गया कि संबंधित चिकित्सालय द्वारा आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत उपलब्ध पैकेजों का दुरुपयोग किया गया, अनाधिकृत आर्थिक लाभ लेने का प्रयास किया गया तथा मरीजों को अनावश्यक रूप से अधिक दिनों तक भर्ती रखकर योजना का अनुचित लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया गया। इसके अतिरिक्त गुणवत्तापूर्ण एवं नियमानुसार क्लेम प्रस्तुत न करने जैसी गंभीर कमियाँ भी सामने आईं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी इस चिकित्सालय पर 69,800 रूपये का अर्थदण्ड अधिरोपित किया जा चुका है। बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद अनियमितताओं की पुनरावृत्ति किए जाने पर व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए अल रशीद चैरिटेबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को तत्काल प्रभाव से आयुष्मान भारत "निरामयम्" योजना से निलंबित किया गया है। साथ ही संबंधित चिकित्सालय को योजना से असम्बद्ध किए जाने की कार्रवाई भी की जाएगी। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान भारत "निरामयम्" योजना में पात्र हितग्राहियों तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनियमितता, धोखाधड़ी अथवा बाधा को गंभीरता से लिया जाएगा तथा दोषी संस्थानों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

बैतूल के 20 श्रमिक और हरदा के 4 श्रमिकों की सुरक्षित हुई घर वापसी

तमिलनाडु में बंधुआ बनाए गए 24 श्रमिकों का प्रशासन ने कराया सफल रेस्क्यू बैतूल के 20 श्रमिक और हरदा के 4 श्रमिकों की सुरक्षित हुई घर वापसी सभी ने राज्य सरकार का माना आभार प्रत्येक को मिलेगी 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता बैतूल रेलवे स्टेशन पर कलेक्टर एवं एसपी ने किया श्रमिकों का आत्मीय स्वागत भोपाल मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीबों के कल्याण के कार्य निरंतर कर रही हैं। तमिलनाडु के इरोड जिले में बंधुआ बनाकर रखे गए बैतूल जिले के 20 और हरदा के 4 श्रमिकों को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, जिला प्रशासन तथा वनवासी कल्याण आश्रम  के त्वरित एवं समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। सभी श्रमिकों के बैतूल रेलवे स्टेशन पहुंचने पर स्थानीय कलेक्टर  नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी एवं पुलिस अधीक्षक  वीरेंद्र जैन ने आत्मीय स्वागत किया। वनवासी कल्याण आश्रम के जिला अध्यक्ष  महेश्वर भलावी, जिला श्रम पदाधिकारी  धम्मदीप भगत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। स्टेशन पर सभी श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित की गई। कलेक्टर  सूर्यवंशी ने श्रमिकों से चर्चा करते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि प्रशासन द्वारा उनके सुरक्षित घर पहुंचने की समुचित व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए राजस्व, पुलिस और श्रम विभाग निरंतर उनके संपर्क में रहेंगे। साथ ही श्रम पदाधिकारी को निर्देशित किया कि श्रमिकों से संपर्क बनाए रखते हुए आर्थिक सहायता स्वीकृति हेतु आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए जाएं। रेलवे स्टेशन से सभी श्रमिकों को उनके गृह ग्राम तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई तथा भोजन की भी व्यवस्था की गई।सुरक्षित वापसी पर श्रमिकों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन  आभार व्यक्त किया। जिला श्रम पदाधिकारी  धम्मदीप भगत ने बताया कि उक्त श्रमिक काम करने के लिए तमिलनाडु के इरोड जिले गए थे, जहां होली पर्व पर अवकाश मांगने पर उन्हें छुट्टी नहीं दी गई और बंधुआ बनाकर कार्य कराया जा रहा था। मामले की जानकारी राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य  प्रकाश ऊईके माध्यम से मिलते ही बैतूल जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए श्रम, पुलिस एवं राजस्व विभाग के संयुक्त समन्वय से इरोड जिला प्रशासन से संपर्क स्थापित किया और सभी श्रमिकों को मुक्त कराया। रेस्क्यू किए गए प्रत्येक श्रमिक को शासन द्वारा 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की जाएगी, जिससे वे अपने जीवन को पुनः व्यवस्थित कर सकें। जिला प्रशासन द्वारा उनके पुनर्वास एवं आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है। उन्होंने बताया कि कुल 24 श्रमिकों में से 4 हरदा जिले तथा 20 बैतूल जिले के निवासी हैं। बैतूल के सभी श्रमिक भीमपुर ब्लॉक के काबरा, बोरकुंड, बीरपुरा और बासिंदा ग्राम के रहने वाले हैं। हरदा जिले के चार श्रमिकों को सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की गई। उक्त कार्य में समाजसेवी  प्रवीण ढोलके ओर विक्रांत कुमरे ने भी सक्रिय भूमिका निभाई ।  

लोक अदालत में बिजली चोरी के 10 लाख तक के मामले होंगे समझौते के लिए तैयार

लोक अदालत में बिजली चोरी के 10 लाख रूपए तक के लंबित प्रकरणों के होंगे समझौते नेशनल लोक अदालत 14 मार्च को भोपाल  आगामी 14 मार्च को आयोजित नेशनल लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अन्‍य अनियमितताओं के प्रकरण को समझौते के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि विद्युत अधिनियम 2003 धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के लंबित प्रकरणों एवं विशेष न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों के निराकरण के लिए अप्रिय कानूनी कार्यवाही से बचने हेतु अदालत में समझौता करने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय से संपर्क करें। विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के बनाए गए लंबित प्रकरण एवं अदालत में लंबित प्रकरणों का निराकरण के लिये निम्नदाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट तक के गैर घरेलू एवं 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रकरणों में ही छूट दी जाएगी। प्रि-लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के बाद प्रत्‍येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।  लिटिगेशन स्तर पर  कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के बाद प्रत्येक छःमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि नेशनल लोक अदालत में छूट कुछ नियम एवं शर्तों के तहत दी जाएगी जो आकलित सिविल दायित्‍व राशि रू. 10 लाख तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल ‘‘लोक अदालत‘‘ 14 मार्च 2026 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी।