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ट्रैवल मार्ट में हुई 10 हजार से अधिक बी2बी मीटिंग्स से प्रदेश की पर्यटन संभावनों को मिली वैश्विक पहचान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व, विकासपरक नीतियों और सतत प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश आज वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक सशक्त, गतिशील और बहुआयामी गंतव्य के रूप में स्थापित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि राज्य की विपुल प्राकृतिक संपदा, समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, पावन आध्यात्मिक केंद्रों, सघन वन्य जीव अभयारण्यों और अनूठी जनजातीय संस्कृति को केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित न रखकर इसे स्थानीय आजीविका, रोजगार सृजन और राज्य के समग्र आर्थिक सशक्तिकरण का मुख्य आधार बनाया जाए। उनके मार्गदर्शन और समग्र विकास दृष्टि का प्रत्यक्ष प्रमाण मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 की ऐतिहासिक सफलता के रूप में सामने आया है। राजधानी भोपाल में कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में हुए ‘मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट-2026’ (एमपीटीएम) का 7वां संस्करण राज्य के पर्यटन विकास के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। इस तीन दिवसीय महाकुंभ में 34 देशों के 100 से अधिक एवं देश के 180 से अधिक टूर ऑपरेटर्स होटल व्यवसायियों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं के साथ प्रदेश के 250 से अधिक ट्रैवल टूर ऑपरेटर, होटलियर और एग्जीबिटर्स को एक ही मंच पर लाकर 10 हजार से अधिक बी2बी मीटिंग्स ने प्रदेश की असीम पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक पहचान दिलाई। आयोजन ने वन्य जीव, हेरिटेज, आध्यात्म, साहसिक और ग्रामीण पर्यटन के विविध आयामों को वैश्विक खरीदारों के समक्ष पूरी भव्यता के साथ प्रस्तुत किया।  ट्रैवल मार्ट में 3,729 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्तावों से राज्य में सशक्त होगी आधुनिक पर्यटन अधोसंरचना ट्रैवल मार्ट के 7वें संस्करण में निजी क्षेत्र से लगभग 3,729 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जो मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं। ये प्रस्ताव लक्जरी होटलों, वेलनेस रिसॉर्ट्स, गोल्फ कोर्स, वॉटरफ्रंट रिट्रीट्स और वन्यजीव लॉज के विकास से जुड़े हैं। इन पूंजीगत निवेशों से न केवल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों की आतिथ्य क्षमता में विश्वस्तरीय वृद्धि होगी, बल्कि राज्य के दुरस्थ अंचलों में आधुनिक अधोसंरचनात्मक का विस्तार होगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे।  व्यावसायिक नेटवर्किंग के दौरान 10,263 बी2बी बैठकों का ऐतिहासिक कीर्तिमान: 14% की हुई वृद्धि व्यावसायिक संवाद और साझेदारी के दृष्टिकोण से यह आयोजन ऐतिहासिक रहा, जिसमें कुल 10,263 सफल बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) बैठकें संपन्न हुईं। वर्ष 2025 में आयोजित ट्रैवल मार्ट में लगभग 9,000 बैठकें हुई थीं, जिसकी तुलना में इस वर्ष 14 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्ध दर्ज की गई। इन बैठकों ने स्थानीय टूर प्रमोटर्स, होटल मालिकों और ग्रामीण होमस्टे संचालकों को अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय खरीदारों से सीधे जोड़कर आगामी वर्षों के लिए दीर्घकालिक व्यावसायिक अनुबंधों का सुदृढ़ आधार तैयार किया।  34 देशों के 100 विदेशी टूर ऑपरेटर्स ने दिखाई गहरी रुचि, 7 नए देश हुए शामिल ट्रैवल मार्ट में 34 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 100 प्रमुख विदेशी टूर ऑपरेटर्स ने सक्रिय सहभागिता की। पिछले वर्ष जहां 27 देशों के 90 विदेशी प्रतिनिधि शामिल हुए थे, वहीं इस बार 7 नए देश ट्रैवल मार्ट में शामिल हुए। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया,और स्पेन सहित विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता और स्मारकों का गहन अध्ययन किया, जिससे आने वाले पर्यटन सत्रों में विदेशी पर्यटकों की संख्या में निश्चित ही वृद्धि होगी।  15 राज्यों के 180 घरेलू टूर ऑपरेटर्स की भागीदारी से अंतर-प्रादेशिक नेटवर्क हुआ सुदृढ़ राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों के प्रवाह को गति देने के लिए देश के 15 राज्यों से 180 घरेलू टूर ऑपरेटर्स ने मार्ट में हिस्सा लिया। वर्ष 2025 के 150 घरेलू टूर ऑपरेटरों की तुलना में इस बार 20 प्रतिशत वृद्धि देखी गई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए इन प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश के प्रमुख व उभरते पर्यटन केंद्रों को अपने यात्रा कार्यक्रमों में शामिल करने के लिए स्थानीय भागीदारों से अनुबंध किए। इससे राज्य के लिए एक सुदृढ़ अंतर-प्रादेशिक पर्यटन नेटवर्क स्थापित हुआ।  ट्रैवल मार्ट एग्जिबिशन में 177 स्टॉल्स की आधुनिक आतिथ्य और पारंपरिक हस्तशिल्प की दुनिया ट्रैवल मार्ट के विशाल परिसर में ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़े 177 भव्य स्टॉल्स लगाए गए। इन स्टॉल्स के माध्यम से मध्यप्रदेश सहित देश-विदेश के प्रतिष्ठित होटलों, रिसॉर्ट्स, ट्रैवल एजेंसियों, साहसिक खेल अकादमियों, पारंपरिक शिल्पकारों और उभरते हुए ग्रामीण होमस्टे को एक साझा व्यावसायिक मंच मिला। प्रदर्शनी ने खरीदारों और सेवा प्रदाताओं के बीच पारदर्शी संवाद का माध्यम बनकर पर्यटन उद्योग के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को एक ही स्थान पर जीवंत कर दिया।  सीहोर के रामगढ़ में ए.आर.एम. फूड्स का 848.40 करोड़ रूपये का निवेश एमओयू निवेश संवर्धन के क्षेत्र में सबसे बड़ा मील का पत्थर सीहोर जिले के रामगढ़ में स्थापित होने वाली मेगा परियोजना रही, जिसके लिए ए.आर.एम. फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 848.40 करोड़ रूपये के निजी निवेश का एमओयू किया गया। कंपनी के चेयरमैन एवं निदेशक  अतुल अग्रवाल के नेतृत्व में प्रस्तावित इस परियोजना में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का गोल्फ कोर्स, विला, वेलनेस रिसॉर्ट और लक्जरी होटल विकसित किया जाएगा। यह महत्वाकांक्षी उपक्रम क्षेत्र में 920 से अधिक कुशल व अकुशल युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करेगा।  बांधवगढ़, सतपुड़ा और कान्हा में राजसन होटल्स का 520 करोड़ रूपये का वन्य जीव निवेश प्रदेश के गौरवशाली वन्य जीव पर्यटन को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से राजसन होटल्स प्राइवेट लिमिटेड और मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के बीच 520 करोड़ रूपये के निवेश का महत्वपूर्ण समझौता हुआ। कंपनी के निदेशक  विनोद सिंह राजपुरोहित द्वारा प्रस्तुत कार्य योजना अंतर्गत बांधवगढ़, सतपुड़ा और कान्हा टाइगर रिजर्व के परिधीय क्षेत्रों में अत्याधुनिक वन्य जीव रिसॉर्ट्स विकसित किए जाएंगे। धारणीय पर्यटन मानकों पर आधारित इस परियोजना से लगभग 375 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। धरोहर संरक्षण, पर्यटक प्रशिक्षण और लक्जरी रिसॉर्ट्स में बड़े निवेश की पहल ओरछा की धरोहर संरक्षण के लिए एसपीए, नई दिल्ली और ‘द्रोणह’ की मती शिखा जैन के साथ एमओयू किए गए। आईआईटीटीएम, ग्वालियर के साथ भोपाल के 100 पर्यटक वाहन चालकों को प्रशिक्षण देने तथा टेकनपुर बीएसएफ अकादमी में सैन्य पर्यटन के उन्नयन के लिए भी समझौते हुए। निवेश प्रस्तावों में एटमॉस्फियर ग्रुप ने उज्जैन, इंदौर और वन्यजीव क्षेत्रों में 500 करोड़ रूपये, रेनी ग्रुप ने मांडू की 350 वर्ष पुरानी लुनेरा सराय को 130 करोड़ रूपये में ‘वेलकम होटल बाय आईटीसी’ के रूप में विकसित करने और खजुराहो के कुटनी डैम पर वॉटरफ्रंट रिसॉर्ट सहित 290 करोड़ रूपये से अधिक तथा सर्व ग्रुप ने … Read more

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की नई पहल : अनाथ बच्चों की शिक्षा प्रोत्साहन के लिए रु. 21 लाख से अधिक की सहायता

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप कार्य करते हुए राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड ने मुस्लिम समाज के अनाथ (यतीम) बच्चों की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रखने के उद्देश्य से ऐतिहासिक निर्णय लिया है।योजना के अंतर्गत भोपाल में निवासरत ऐसे 289 बच्चों की स्कूल फीस के लिए 21 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। प्रत्येक चयनित बच्चे की पढ़ाई के लिए 10 हजार रुपये तक की फीस का भुगतान वक्फ बोर्ड द्वारा सीधे किया जाएगा। यह सहायता राशि मंगलवार, 13 अक्टूबर को वक्फ बोर्ड कार्यालय परिसर स्थित यतीमखाना ग्राउंड पर आयोजित कार्यक्रम में प्रदान की जाएगी। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा सामाजिक कल्याण, शैक्षणिक उत्थान एवं निरंतर प्रगति के संकल्प को दोहराते हुए एक अभूतपूर्व एवं अनुकरणीय पहल की गई है। पारदर्शी प्रक्रिया से हुआ बच्चों का चयन मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यतीमखाना संपत्ति से प्राप्त आय का उपयोग वाकिफ (दानदाता) की मूल मंशानुरूप भोपाल के यतीम (अनाथ) बच्चों की भलाई और शैक्षणिक विकास के लिए किया जा रहा है। योजना का लाभ सभी पात्र बच्चों तक पहुँचाने के लिए बोर्ड द्वारा प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रकाशित कर आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदनों के सूक्ष्म परीक्षण एवं निष्पक्ष पारदर्शी सत्यापन के बाद 289 विद्यार्थियों को सहायता के लिए योग्य पाया गया। अवैध कब्जों से मुक्ति और वक्फ संपत्तियों का जनहित में उपयोग अध्यक्ष मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड डॉ. सनवर पटेल ने बताया कि नए वक्फ संशोधन प्रावधानों के बाद राज्य में वक्फ संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने का सघन अभियान चलाया गया है। संपत्तियों से प्राप्त हो रही वैध आय का ही परिणाम है कि इतनी बड़ी संख्या में ज़रूरतमंद और अनाथ बच्चों के भविष्य को संवारने में इस राशि का उपयोग बच्चों की स्कूल फीस भरने में किया जा रहा है। देशभर में मिसाल बना मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड यह संपूर्ण देश में अपनी तरह का पहला और अनूठा नवाचार है, जहाँ कोई राज्य वक्फ बोर्ड अपनी अर्जित आय का सीधे उपयोग मुस्लिम समाज के अनाथ एवं वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कर रहा है। बच्चों की शिक्षा को निरंतर जारी रखने के पवित्र उद्देश्य के साथ किया जा रहा यह प्रयास न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में सामाजिक सरोकार और जनकल्याण की एक अनुकरणीय मिसाल पेश करता है।  

निवेशकों, स्टार्टअप्स और युवाओं को सहभागिता के लिए आमंत्रित

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास विभाग आयुक्त  संकेत भोंडवे ने कहा कि ‘अर्बन कॉन्क्लेव-2026‘ ऐसे अभिनव विचारों, अत्याधुनिक तकनीकों और निवेश प्रस्तावों को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जो प्रदेश के शहरी विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।कॉन्क्लेव में सहभागिता के इच्छुक निवेशक, स्टार्टअप्स और युवा आधिकारिक पोर्टल ugconclave.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। मध्यप्रदेश के शहरों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़, आधुनिक और समृद्ध बनाने के उद्देश्य से नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा आगामी 28 अक्टूबर 2026 को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 'अर्बन कॉन्क्लेव-2026' का आयोजन किया जा रहा है। नवाचार और युवाओं की भागीदारी पर विशेष बल अर्बन कॉन्क्लेव-2026 का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश में नगरीय विकास के क्षेत्र में निवेश, नवाचार, तकनीक और मजबूत स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, प्रदेश के विकास में युवाओं और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करना है। इंदौर के एक दिवसीय समागम में नगरीय विकास के विविध आयामों, भविष्य की शहरी आवश्यकताओं, तकनीक आधारित समाधानों, निवेश की नई संभावनाओं तथा नवाचारों पर विषय-विशेषज्ञों द्वारा गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।  

मध्यप्रदेश में पहली बार 21 फीट की पंचमुखी महाकाली प्रतिमा, 10 अक्टूबर को निकलेगी भव्य शोभायात्रा

 भोपाल  शारदीय नवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर झीलों की नगरी भोपाल में आस्था, भक्ति और कला का अनोखा दृश्य देखने को मिलने जा रहा है। नेहरू नगर स्थित प्रसिद्ध करुणाधाम आश्रम में मध्य प्रदेश की पहली 21 फीट ऊंची विशाल 'पंचमुखी महाकाली' (मां बड़ी अम्मा) की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। इस ऐतिहासिक और अलौकिक प्रतिमा के भोपाल आगमन पर शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 की शाम को भव्य स्वागत समारोह और शोभायात्रा का आयोजन किया जा रहा है। 10 अक्टूबर की शाम 6:30 बजे प्लैटिनम प्लाजा पर भव्य स्वागत और आरती प्रतिमा के नगर आगमन पर 10 अक्टूबर को शाम 06:30 बजे प्लैटिनम प्लाजा चौराहे पर भव्य स्वागत समारोह आयोजित होगा। करुणाधाम आश्रम के पीठाधीश्वर श्री सुदेश शांडिल्य जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति में मां पंचमुखी महाकाली का शास्त्रीय विधि-विधान से पूजन और 108 या विशेष आरती संपन्न होगी। बारेलाल बैंड की सुमधुर धुनों के बीच निकलेगी भव्य शोभायात्रा प्लैटिनम प्लाजा चौराहे पर स्वागत आरती के उपरांत प्रसिद्ध बारेलाल बैंड की सुमधुर भक्ति धुनों के साथ एक विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा प्लैटिनम प्लाजा से प्रारंभ होकर माता मंदिर चौराहा और मैनिट (MANIT) चौराहा होते हुए नेहरू नगर स्थित करुणाधाम आश्रम पहुंचेगी, जहां प्रतिमा को गर्भगृह/पंडाल में विराजित किया जाएगा। 'नौ रातें, नौ रंग और नौ दिव्य रूप' थीम पर आधारित महोत्सव करुणाधाम आश्रम की युवा समिति के अध्यक्ष शाश्वत शांडिल्य के अनुसार:     विशिष्ट थीम: इस वर्ष का शारदीय नवरात्रि महोत्सव 'नौ रातें, नौ रंग और नौ दिव्य रूप' की भव्य थीम पर मनाया जा रहा है।     भक्तों में उत्साह: प्रदेश में पहली बार 21 फीट ऊंची पंचमुखी महाकाली के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह है। नवरात्रि के दौरान पूरे नौ दिनों तक प्रतिदिन विशेष धार्मिक अनुष्ठान, महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  

‘बलराम कृषि महोत्सव’ किसानों को कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों, आधुनिक तकनीकों एवं नवाचारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बिहार के बोधगया से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा शाजापुर जिले में आयोजित ‘बलराम कृषि महोत्सव’ में सहभागिता की। उन्होंने किसानों से संवाद कर कृषि क्षेत्र के विकास एवं किसानों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवाद करते हुए कहा कि शाजापुर कृषि, नवाचार और विकास के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। जिले की पहचान प्याज, आलू, सोयाबीन जैसी फसलों के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों और सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी प्रभावी रूप से बन रही है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सड़क और एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं से शाजापुर जिले के विकास को गति मिलेगी तथा किसानों और स्थानीय व्यापारियों के लिए बाजारों तक पहुंच आसान होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कहा कि कृषक कल्याण वर्ष अंतर्गत राज्य सरकार कृषि को लाभकारी बनाने के लिए सिंचाई, बिजली, सोलर पंप, भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दे रही है। किसानों को नई सड़कों के लिए 4 गुना मुआवजा, दिन में बिजली उपलब्ध कराने, सोलर पंपों को प्रोत्साहित करने तथा कृषि उपज के उचित मूल्य और भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर जोर देते हुए बताया कि जिले में प्राकृतिक खेती के लिए किसानों का चयन और कृषि सखियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान भाइयों से कहा कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, फूलों की खेती, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों को अपनाकर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सांची दुग्ध संघ को सशक्त बनाया जा रहा है। गौशालाओं के संचालन के लिए प्रति गौमाता प्रतिदिन सहायता दी जा रही है तथा पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतियोगिताएं और पुरस्कार योजनाएं भी संचालित की जाएंगी। आलू और प्याज की प्रोसेसिंग, भंडारण तथा फूड पार्क की स्थापना से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस योजना के माध्यम से गांव-गांव तक बस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस योजना के माध्यम से गांव-गांव तक बस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण परिवारों के आवासों की नि:शुल्‍क रजिस्ट्री की सुविधा तथा किसानों को सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार निर्णय ले रही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बोनस सहित खरीदी और भावांतर योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार निर्णय ले रही है। किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई का रकबा विस्तारित करने और कृषि क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। ‘बलराम कृषि महोत्सव’ किसानों को कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों, आधुनिक तकनीकों एवं नवाचारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा‍कि ‘बलराम कृषि महोत्सव’ किसानों को कृषि क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों, आधुनिक तकनीकों एवं नवाचारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजनों से किसानों को नई जानकारियां प्राप्त करने, उन्नत कृषि पद्धतियों को समझने तथा खेती में नवीन तकनीकों के उपयोग के प्रति जागरूक होने का अवसर मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से संवाद के माध्यम से कृषि क्षेत्र को सशक्त करने तथा अन्नदाताओं की खुशहाली सुनिश्चित करने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने शाजापुर जिले के किसानों और कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। म.प्र. राज्य सहकारी बैंक मर्यादित भोपाल (अपेक्स बैंक) प्रशासक  महेन्द्र सिंह यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और किसान देश की समृद्धि का आधार हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में कृषि, पशुपालन और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों को सीधे आर्थिक सहायता मिल रही है। विधायक  अरुण भीमावद ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के हर जिले में ‘भगवान बलराम कृषि महोत्सव’ आयोजित हो रहा है। कृषि प्रधान शाजापुर जिले में यह महोत्सव खेती को उन्नत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।  

किसानों की समृद्धि पर CM डॉ. मोहन यादव का जोर, बलराम कृषि महोत्सव से खेती को मिल रही नई दिशा

किसानों की समृद्धि ही हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव नई तकनीक से खेती कर समृद्धि की ओर बढ़ रहे किसान तरक्की की नई राह बना बलराम कृषि महोत्सव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में बलराम कृषि महोत्सव महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा  कि किसानों की बेहतरी के लिए राज्य सरकार हरसंभव कदम उठा रही है। वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। शुक्रवार, 9 अक्टूबर तक प्रदेश के 55 में से करीब 43 जिलों में जिला स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव आयोजन हो चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि ही हमारा लक्ष्य है, हमारी प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और जिला अधिकारी सीधे किसानों से संवाद कर रहे हैं। किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, आधुनिक कृषि यंत्रों और खेती में नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि कम निवेश में अधिक आमदनी प्राप्त करने के गुर सीखकर किसान अमल कर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलते समय में खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए परम्परागत तरीकों के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। कृषि विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही नई जानकारियां किसानों को बेहतर उत्पादन, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध करा सकती हैं। उन्होंने किसानों से बलराम कृषि महोत्सव में अवश्य भाग लेकर कृषि विशेषज्ञों की सलाह का भरपूर लाभ उठाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और कृषि क्षेत्र में समृद्धि के नए अवसर पैदा करना है। इसके लिए सभी जरूरी उपाय और प्रबंधन किये जा रहे हैं। खेती को लाभकारी बनाने का सशक्त मंच इस वर्ष 15 जुलाई 2026 से शुरू हुए बलराम कृषि महोत्सव आयोजन की श्रृंखला में अब तक हजारों किसान इस महोत्सव से लाभान्वित हो चुके हैं। बलराम कृषि महोत्सव खेती-किसानी को घाटे से उबारने, आधुनिक तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने और किसानों को सफलता एवं लाभ के नए आयामों से जोड़ने का सशक्त मंच बन रहा है।  

मध्यप्रदेश में 27% OBC आरक्षण क्यों नहीं हुआ लागू? हाईकोर्ट ने फैसले में उठाए ये 5 अहम सवाल

 जबलपुर  मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की कानूनी लड़ाई में हाई कोर्ट ने संवैधानिक प्रावधानों, सामाजिक पिछड़ेपन, सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व और आरक्षण बढ़ाने के लिए पेश किए गए आंकड़ों सहित कई अहम पहलुओं पर विचार किया। अदालत के 159 पृष्ठों के आदेश में स्पष्ट हुआ कि किसी वर्ग को आरक्षण देने का अधिकार और आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने का औचित्य दो अलग-अलग सवाल हैं। इन्हीं कसौटियों पर 27 प्रतिशत आरक्षण को उचित ठहराने के लिए प्रस्तुत आधारों की समीक्षा की गई। मामले में याचिकाकर्ताओं ने संवैधानिक सीमा का हवाला देते हुए आरक्षण बढ़ाने के निर्णय को चुनौती दी, जबकि राज्य सरकार और आरक्षण समर्थकों ने सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व तथा राज्य के नीतिगत अधिकारों के पक्ष में दलीलें रखीं। अंततः हाई कोर्ट ने 14 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था कायम रखी और नियुक्तियों से जुड़े मामलों में भी निर्देश दिए। आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा बनी प्रमुख आधार 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं की प्रमुख दलील थी कि इससे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए कुल आरक्षण 63 प्रतिशत हो जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को भी जोड़ने पर कुल आरक्षण का अनुपात और बढ़ जाता है। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले का हवाला देते हुए कहा कि सामान्य परिस्थितियों में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे आगे बढ़ने के लिए असाधारण परिस्थितियों और ठोस संवैधानिक आधार का होना जरूरी है। केवल किसी वर्ग की आबादी अधिक होने के आधार पर आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। सरकार ने सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का दिया तर्क राज्य सरकार ने 27 प्रतिशत आरक्षण के फैसले का बचाव करते हुए ओबीसी वर्ग की सामाजिक स्थिति और सरकारी सेवाओं में उसकी भागीदारी को आधार बनाया। सरकार का पक्ष था कि पिछड़े वर्गों को पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने के लिए आरक्षण की व्यवस्था जरूरी है और इसके निर्धारण में राज्य की नीतिगत भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लेकर भी संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया गया। सरकार की ओर से तर्क रखा गया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 15(6) और 16(6) के तहत दिया गया है। इसलिए इसकी संवैधानिक स्थिति का परीक्षण अन्य आरक्षण प्रावधानों से जुड़े सवालों के समान आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। वर्ष 2021 में हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता ने भी सरकार का पक्ष रखा था। भाजपा सरकार से पूछा सवाल चौधरी ने मध्यप्रदेश के सीएम और भाजपा सरकार से सवाल पूछा है कि वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार OBC के 27% आरक्षण के पक्ष में मजबूत कानूनी आधार क्यों नहीं तैयार कर सकी? अगस्त 2025 में सर्वदलीय बैठक में 27% आरक्षण के समर्थन पर सहमति बनी थी, तो उस सहमति को कानूनी परिणाम में बदलने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए? जिन युवाओं ने परीक्षाएं दीं, मेहनत की और वर्षों तक नियुक्तियों का इंतजार किया, उनके भविष्य की जवाबदेही कौन लेगा? समीक्षा करें सरकार OBC आरक्षण कोई राजनीतिक एहसान नहीं, सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का सवाल है। सरकार को अब बयानबाजी से आगे बढ़कर फैसले के कानूनी पहलुओं की समीक्षा करनी चाहिए, उपलब्ध वैधानिक विकल्पों पर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए और लंबित भर्तियों पर स्पष्ट समयबद्ध कार्ययोजना जनता के सामने रखनी चाहिए। OBC को केवल आश्वासन नहीं, अधिकारों की प्रभावी पैरवी चाहिए। युवाओं को भाषण नहीं, अपने भविष्य का जवाब चाहिए। ओबीसी मुद्दे पर क्या बोली एमपी कांग्रेस इधर, मध्यप्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर कहा है कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकारों की मंशा और ओबीसी आरक्षण को लेकर उनकी भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सरकार की कमजोर पैरवी और आधी-अधूरी जानकारी प्रस्तुत किए जाने के मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी जी ने 8 अक्टूबर 2025 को दिल्ल्ली में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से मुलाकात की थी और सरकार को समय रहते चेताया था। लेकिन, सरकार नहीं जागी और आखिरकार 27% ओबीसी आरक्षण को लेकर माननीय हाईकोर्ट का फैसला सामने आया। ओबीसी समाज के अधिकारों की रक्षा में सरकार की विफलता ने भाजपा की नीयत और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रदेश की जनता जवाब चाहती है। ओबीसी समाज को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए सरकार ने समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए? आरक्षण समर्थकों ने पिछड़ेपन और अवसरों पर दिया जोर 27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में पक्षकारों ने दलील दी कि ओबीसी वर्ग की सामाजिक एवं शैक्षणिक स्थिति और सरकारी सेवाओं में उसकी भागीदारी का आकलन किए बिना आरक्षण का प्रतिशत तय नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि सामाजिक न्याय की संवैधानिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल सभी को समान अवसर देने की औपचारिक घोषणा करना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से पिछड़े वर्गों को वास्तविक अवसर उपलब्ध कराना भी है। आरक्षण समर्थकों ने इसी आधार पर राज्य सरकार के निर्णय को उचित ठहराने का प्रयास किया। पुरानी रिपोर्ट और आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल मामले में आरक्षण बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए गए आंकड़ों और आयोगों की रिपोर्ट की प्रासंगिकता भी अहम मुद्दा बनी। वर्ष 2019 के निर्णय में वर्ष 1983 की महाजन आयोग रिपोर्ट पर निर्भरता को लेकर सवाल उठे। याचिकाकर्ताओं की ओर से पुरानी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण बढ़ाने के औचित्य पर प्रश्न खड़े किए गए। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श नहीं किए जाने का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान सामने आया। इसके अलावा, बाद में पेश की गई विस्तृत रिपोर्ट का भी परीक्षण हुआ। हाई कोर्ट ने रिपोर्ट के सीमित नमूने और तुलनात्मक आधार की कमी को ध्यान में रखते हुए उसे 27 प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में पर्याप्त ठोस आधार नहीं माना। हाई कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला हाई कोर्ट ने आरक्षण देने के अधिकार और उसके प्रतिशत में वृद्धि के औचित्य के बीच अंतर किया। अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर सरकारी सेवाओं में ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व को पर्याप्त माना और आरक्षण की सीमा 27 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए आवश्यक असाधारण परिस्थितियां … Read more

जबलपुर को मिलेगी ट्रैफिक जाम से राहत! मार्च 2027 तक पूरा होगा 113 किमी आउटर रिंग रोड का काम

 जबलपुर  जबलपुर में यातायात का दबाव कम करने और शहर के बाहर से वाहनों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए प्रस्तावित आउटर रिंग रोड का निर्माण पांच पैकेज में किया जा रहा है। बरेला से मानेगांव सहित अलग-अलग हिस्सों में विभाजित इस 113 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना पर करीब 3500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना को पहले दिसंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन अब इसकी समयसीमा बढ़ाकर मार्च 2027 कर दी गई है। पांच पैकेज में होगा निर्माण परियोजना को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर निर्माण की योजना बनाई गई है। इसमें बरेला से मानेगांव, मानेगांव से एनएच-45 यानी बेलखाड़ू क्षेत्र, एनएच-45 से कुशनेर, कुशनेर से अमझर और अमझर से वापस बरेला तक का हिस्सा शामिल है। इन पांचों पैकेज के माध्यम से पूरी रिंग रोड का निर्माण किया जाएगा। इन प्रमुख मार्गों से जुड़ेगी रिंग रोड रिंग रोड का एक हिस्सा बरेला से मानेगांव तक रहेगा। इसके बाद सड़क मानेगांव से एनएच-45 तक पहुंचेगी। आगे एनएच-45 से कुशनेर तक का हिस्सा होगा, जहां से वाराणसी-सिरोनाबाद मार्ग की ओर संपर्क मिलेगा। कुशनेर से अमझर तक का हिस्सा अमरकंटक मार्ग से जुड़ेगा। इसके बाद अमझर से बरेला तक सड़क का अंतिम हिस्सा होगा। दिसंबर 2025 की जगह अब मार्च 2027 की समयसीमा परियोजना को मूल रूप से दिसंबर 2025 तक पूरा करने की योजना बनाई गई थी। अब संशोधित लक्ष्य के अनुसार मार्च 2027 तक निर्माण पूरा करने की बात कही गई है। करीब 3500 करोड़ रुपये की इस परियोजना के पूरा होने से शहर के बाहर से गुजरने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिलने और प्रमुख मार्गों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।  

दिवाली से पहले मेट्रो यात्रियों को सौगात, भोपाल और इंदौर में टिकट पर 25% डिस्काउंट

इंदौर/भोपाल   भारी भरकम खर्च और यात्रियों की बेरुखी से जूझ रही मेट्रो रेल कंपनी ने त्योहार के अवसर पर ट्रेन के टिकट पर 25% तक की छूट देने का ऐलान किया है. इतना ही नहीं अब ट्रेन के ग्रुप टिकट लेने की प्रक्रिया को भी आसान किया गया है. नवरात्रि के दिन से यह ऑफर शुरू हो रहा है।  त्योहार के अवसर पर डिस्काउंट का ऐलान मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने यात्रियों को मेट्रो यात्रा पर सीधा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से भोपाल और इंदौर मेट्रो में टिकट पर त्योहारों के अवसर पर डिस्काउंट का ऐलान किया है. इस विशेष प्रमोशनल डिस्काउंट व्यवस्था के तहत यात्रियों को मौजूदा छूट के अतिरिक्त 25 प्रतिशत छूट का लाभ मिलेगा. यह व्यवस्था 11 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक लागू होगी।  ग्रुप टिकट की सुविधा को भी यात्रियों के लिए आसान बनाया गया है. पहले ग्रुप टिकट लेने के लिए कम से कम 8 यात्रियों का होना आवश्यक था, जिसे अब घटाकर केवल 2 यात्री कर दिया गया है. इससे परिवार और दोस्तों के साथ यात्रा करने वाले यात्री भी ग्रुप टिकट का लाभ ले सकेंगे. 20 रुपए के सिंगल जर्नी टिकट पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत छूट लागू नहीं होगी।  रिटर्न टिकट पर 30% और ग्रुप टिकट पर कुल 35% छूट     सिंगल जर्नी टिकट (SJT): टिकट पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट.     रिटर्न जर्नी टिकट (RJT): पहले मिलने वाली 5 प्रतिशत छूट के स्थान पर अब कुल 30 प्रतिशत छूट.     ग्रुप टिकट (GT): पहले मिलने वाली 10 प्रतिशत छूट के स्थान पर अब कुल 35 प्रतिशत छूट. नई छूट से यात्रियों को होगा दोहरा फायदा MPMRCL मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-वॉलेट रिचार्ज करने पर यात्रियों को पहले से ही रिचार्ज राशि के अनुसार 8 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक बोनस राशि का लाभ दिया जा रहा है. इसके अंतर्गत ₹200 से ₹499 तक के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत, ₹500 से ₹999 तक पर 10 प्रतिशत, ₹1000 से ₹1499 तक पर 12 प्रतिशत और ₹1500 से ₹2000 तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस राशि मिलती है।  अब इस मौजूदा ई-वॉलेट बोनस सुविधा के साथ नई प्रमोशनल टिकट छूट का लाभ मिलने से यात्रियों को टिकट पर अधिकतम लगभग 44 प्रतिशत का लाभ प्राप्त हो सकता है. इस पहल के साथ भोपाल और इंदौर मेट्रो में यात्रियों को देश की अन्य मेट्रो सेवाओं की तुलना में आकर्षक अतिरिक्त किराया छूट का लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है. डिजिटल टिकटिंग और ई-वॉलेट का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से लाभदायक होगी।      डिजिटल टिकटिंग और कैशलेस भुगतान से स्मार्ट यात्रा भोपाल एवं इंदौर मेट्रो में यात्रियों की सुविधा के लिए ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन प्रणाली पहले से संचालित है। यात्री MPMRCL के मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल टिकट प्राप्त कर सहज, सुरक्षित और कैशलेस यात्रा कर सकते हैं. टिकट का भुगतान यूपीआई, क्यूआर कोड, ई-वॉलेट और एमपी मेट्रो मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जा सकता है।  इस डिजिटल व्यवस्था से टिकट खरीदने की प्रक्रिया सरल और तेज होती है और नकद भुगतान की आवश्यकता भी नहीं रहती. मौजूदा डिजिटल टिकटिंग और ई-वॉलेट बोनस सुविधा के साथ नई प्रमोशनल छूट यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। 

रीवा के सरई कला-रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट पर विवाद, ग्रामीणों से बैठक बेनतीजा

रीवा  रीवा जिले की सिरमौर तहसील के सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर आज कंपनी, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। बोरहोल का काम कराने पहुंची टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। परियोजना स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, कंपनी प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच विरोध की स्थिति बनी। सरई कला, रोझौही और आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचे। उनका कहना था कि जब वे परमाणु बिजलीघर के पक्ष में नहीं हैं, तो उनकी आपत्तियों का निराकरण किए बिना आगे की प्रक्रिया क्यों की जा रही है। अधिकारियों ने समझाया, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े मौके पर सिरमौर तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव, एमपीआईडीसी के अधिकारी यूके तिवारी, एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक श्री जैन और टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसर चाहिए, लेकिन परमाणु बिजलीघर से जुड़े संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों पर भी उनकी चिंताओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में दूसरे उद्योग स्थापित करने का विकल्प देने की मांग की। कथित फर्जी एनओसी की जांच कराने की मांग सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने सरपंच के नाम पर जारी कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का मामला उठाया। उन्होंने पत्र क्रमांक 170/2026 की जांच कराने की मांग की। द्विवेदी के मुताबिक, ग्राम सभा में 3 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए थे। उन्होंने कहा कि जब ग्राम सभा और स्थानीय ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो उनकी सहमति और आपत्तियों को स्पष्ट किए बिना आगे की प्रक्रिया कैसे की जा सकती है। ग्रामीणों ने भी ग्राम सभा के प्रस्तावों और एनओसी से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। विकास चाहिए, लेकिन रेडिएशन का खतरा नहीं! प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़े संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, रेडिएशन और परमाणु कचरे को लेकर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना से उनके स्वास्थ्य, खेती, जलस्रोतों और आने वाली पीढ़ियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन के सामने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसरों का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन उनकी सहमति और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज कर परियोजना आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारी, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े बोरहोल की प्रक्रिया के दौरान मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बल, एमपीआईडीसी, एनपीसीआईएल और टाटा कंपनी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने और उनकी आशंकाएं दूर करने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। विरोध के चलते बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ सका। मौके पर सिरमौर तहसीलदार/नायब तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव, एमपीआईडीसी के यूके तिवारी, एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक श्री जैन तथा टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। स्थानीय सरपंच, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और सामाजिक कार्यकर्ता भी विरोध के दौरान उपस्थित थे। कथित फर्जी एनओसी का मामला उठा, निष्पक्ष जांच की मांग प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरपंच के नाम पर जारी बताए जा रहे पत्र क्रमांक 170/2026 की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका सवाल है कि यदि संबंधित ग्रामसभा और ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो फिर एनओसी किस आधार पर जारी की गई? शिवानंद द्विवेदी ने दावा किया कि 3 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को ग्रामसभा में इस परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए थे। उन्होंने शासन-प्रशासन से ग्रामसभा के निर्णयों और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से लेने की मांग की। हालांकि, एनओसी के फर्जी होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ग्रामीणों की चेतावनी—परियोजना निरस्त होने तक जारी रहेगा आंदोलन लगातार विरोध के बीच अब प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का मुद्दा स्थानीय स्तर पर और अधिक गरमा गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक परियोजना को निरस्त नहीं किया जाता और उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों, ग्रामसभा के प्रस्तावों और कथित एनओसी विवाद की निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर परियोजना को लेकर टकराव आगे भी जारी रहेगा? फिलहाल, रोझौही और सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना को लेकर विरोध जारी है। ग्रामीण विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और ग्रामसभा के अधिकारों पर स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं। मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन जारी रखने की चेतावनी विरोध प्रदर्शन में सरई कला की सरपंच कोमल सिंह, लालगांव उपसरपंच प्रतिनिधि लवकुश तिवारी, सरपंच पति संजय सिंह,सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। ग्रामीणों के विरोध के चलते बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने कहा कि परियोजना को लेकर उनकी आपत्तियों का निराकरण और मांगों पर निर्णय होने तक विरोध जारी रहेगा। फिलहाल बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी है। अब परियोजना की आगे की प्रक्रिया और ग्रामीणों की आपत्तियों पर प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी।