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पहचान छिपाकर विवाह विवाद में बड़ा फैसला, पत्नी और बेटी को हर महीने ₹20 हजार देने होंगे

 इंदौर  धार्मिक पहचान छिपाकर विवाह करने और बाद में मतांतरण के लिए दबाव बनाने से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।न्यायमूर्ति गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने कहा कि यदि किसी महिला से धार्मिक पहचान छिपाकर विवाह किया और उससे संतान भी जन्मीं हो, तो केवल विवाह की वैधता के तकनीकी आधार पर महिला को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पीड़िता और उसकी अवयस्क पुत्री के लिए 10-10 हजार रुपये, यानी कुल 20 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण मंजूर किया है। याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता राजेश जोशी ने बताया कि 23 फरवरी 2020 को कोरोना के दौरान मुस्तफा ने स्वयं को हिंदू बताकर एक महिला से मंदिर में विवाह किया था। जब महिला गर्भवती हुई, तब उसे आधार कार्ड के माध्यम से पति की वास्तविक धार्मिक पहचान का पता चला। आरोप है कि इसके बाद पति ने उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट भी की गई। महिला ने परिवार न्यायालय में भरण-पोषण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन 2023 में परिवार न्यायालय ने यह कहते हुए उसका आवेदन निरस्त कर दिया कि वह कानूनी रूप से विवाहित पत्नी नहीं है। अदालत ने केवल उसकी पुत्री के लिए दो हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण मंजूर किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए महिला ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। जिसके बाद अदालत ने परिवार न्यायालय के फैसले को पलटते हुए दोनों के लिए प्रतिमाह 20 हजार रुपये भरण-पोषण की राशि का आदेश दिया।  

भोपाल के ईशान ने बढ़ाया प्रदेश का मान, CA इंटरमीडिएट में हासिल की ऑल इंडिया टॉप-15 रैंक

भोपाल  द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने सीए इंटरमीडिएट परीक्षा मई 2026 के परिणाम जारी कर दिए हैं. इस परीक्षा में भोपाल परीक्षा केंद्र के छात्र ईशान मुकेश मंगल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में 15वीं रैंक हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है. ईशान मुकेश मंगल ने 600 में से 476 अंक (79.33 प्रतिशत) हासिल कर भोपाल में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।  ईशान मुकेश ने देश में रोशन किया भोपाल का नाम वहीं, भोपाल में दूसरे स्थान पर मान्या गोस्वामी (64.50 प्रतिशत) रहीं. जबकि मोहित कछवानी और नंदिनी गुप्ता ने 62.83 प्रतिशत अंकों के साथ संयुक्त रूप से तीसरा और सक्षम अग्रवाल (58.67 प्रतिशत) ने चौथा स्थान प्राप्त किया है. इस परीक्षा में भोपाल से दोनों ग्रुप में शामिल हुए 215 उम्मीदवारों में से 13 छात्रों ने दोनों ग्रुपों को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की है।  9 महीने की मेहनत में पाई सफलता ईशान ने ईटीवी भारत को बताया, "सीए फाउंडेशन का परिणाम जारी होते ही आगे की पढ़ाई का एक खाका खींच लिया था. 9 महीनों में समय का पूरा सदुपयोग किया. इसके लिए सिलेबस को भी छोटे-छोटे भागो में बांट कर पढ़ाई की. शुरुआत के चार महीनों में ग्रुप-2 के सभी विषयों के साथ-साथ टैक्सेशन के पाठ्यक्रम को पूरा किया।  शॉर्ट फॉर्म तकनीक ने दिलाई सफलता उन्होंने आगे बताया, "ग्रुप-1 की पढ़ाई के साथ ही रिवीजन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी और अंतिम ढाई महीने केवल रिवीजन पर केंद्रित रखा. टैक्सेशन विषय को बार-बार प्रोविजन्स पढ़कर मजबूत किया. वहीं, ऑडिट जैसे थ्योरी विषय को सरल रूप में याद रखने के लिए शिक्षकों द्वारा सिखाई गई शार्ट फॉर्म तकनीक का उपयोग किया।  रोजाना 9 से 10 घंटे अध्ययन ईशान ने आगे बताया, "नियमित दिनचर्या में रोजाना 9 से 10 घंटे अध्ययन करते थे, जिसे मुख्य परीक्षा से एक महीना पहले बढ़ाकर 12 घंटे तक कर दिया था. विषयों को समझने के लिए क्लासेस की मदद ली और खुद के मूल्यांकन के लिए सेल्फ स्टडी का सहारा लिया. वहीं, अंतिम समय में किसी भी तरह के मानसिक तनाव से बचने के लिए कोई भी नया टॉपिक नहीं छुआ. बस पहले से पढ़े गए नोट्स का ही अभ्यास किया. इस दौरान इंस्टाग्राम जैसे मनोरंजन आधारित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से पूरी तरह दूरी बना ली थी। 

छतरपुर के 54 गांवों की जमीन अधिग्रहित होगी, केन-बेतवा प्रोजेक्ट पर तेजी से बढ़ा काम

छतरपुर  बुंदेलखंड क्षेत्र के कायाकल्प के लिए प्रस्तावित महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना अब तेजी से धरातल पर उतर रही है। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए छतरपुर जिले के 54 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ने तीव्र गति पकड़ ली है। वहीं, परियोजना के विस्तार के क्रम में उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में भी प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो गई है। कलेक्टर की वर्तमान गाइडलाइन दर का चार गुना मुआवजा मिलेगा। छतरपुर में धारा 11 का प्रकाशन पूरा छतरपुर जिले में परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया ने बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। परियोजना की कार्यपालन यंत्री उमा गुप्ता ने बताया कि जिले के 54 प्रभावित गांवों के लिए भूमि अधिग्रहण की धारा 11 वैधानिक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। धारा 19 की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नहर परियोजना प्रभावित किसानों को उनकी जमीन के बदले सरकारी गाइडलाइन से चार गुना अधिक मुआवजा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। प्रशासन अब मुआवजा वितरण को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए तत्पर है। उत्तर प्रदेश में भी प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार परियोजना की व्यापकता को देखते हुए अब उत्तर प्रदेश में भी कार्य ने गति पकड़ी है। केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में आने वाले गांवों की भूमि की नपाई (सीमांकन) के लिए 15 जून 2026 को निविदा जारी कर दी गई है। यह निविदा झांसी जिले में केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना के तहत नहर निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश के हिस्से में आने वाले गांवों की भूमि की नपाई के कार्य के लिए जारी की गई है, जिससे परियोजना के इस हिस्से में भी निर्माण कार्य की नींव रखी जा सके। पारदर्शिता का अधिकार मुआवजे की राशि तय करने के लिए गांव की सरकारी गाइडलाइन और क्षेत्र में हाल ही में हुई जमीनों की रजिस्ट्री की औसत दर में से जो भी अधिक होगा, उसी को आधार मानकर भुगतान किया जाएगा। एक्सपेरिमेंट ने बर्बाद किए कीमती दो साल परियोजना से जुड़े सूत्रों के अनुसार शुरुआत में अधिकारियों ने 218 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के एक बड़े हिस्से (लगभग 65 किमी) को भूमिगत सुरंग के जरिए ले जाने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रयोगात्मक मॉडल के पीछे तर्क दिया गया था कि इससे भूमि अधिग्रहण कम होगा और पानी का वाष्पीकरण रुकेगा। लेकिन हकीकत के धरातल पर यह योजना अत्यधिक महंगी और जोखिम भरी साबित हुई। लंबे समय तक चले विचार-मंथन के बाद अंतत: इस टनल प्रस्ताव को अव्यावहारिक मानकर निरस्त कर दिया गया है। इस तकनीकी हेर-फेर के चक्कर में परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से लिंक नहर का काम दो साल पिछड़ गया है। नहर का मार्ग आबादी वाले क्षेत्रों के बाहर से निर्धारित किया गया है. जिससे किसी भी गांव के पूर्ण विस्थापन का संकट नहीं है। नहर की मुख्य संरचना और सर्विस रोड के निर्माण के लिए 100 मीटर चौड़ी पट्टी में भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल बुंदेलखंड के सिंचाई संकट को दूर करेगी, बल्कि कानून के तहत मिलने वाले उचित मुआवजे से स्थानीय किसानों के आर्थिक स्तर में भी बड़ा सकारात्मक बदलाव लाएगी। 218 किमी लंबी नहर और चार गुना मुआवजा केन नदी पर निर्माणाधीन ढोड़न बांध से बेतवा नदी तक बनने वाली यह 218 किलोमीटर लंबी लिंक नहर बुंदेलखंड के सिंचाई संकट को दूर करने के लिए संजीवनी साबित होगी। छतरपुर जिले से होकर गुजरने वाले इसके 107 किलोमीटर के हिस्से के लिए किसानों को मध्य प्रदेश भूमि अर्जन पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 के तहत मुआवजा दिया जा रहा है। जिसको लेकर राज्य केबिनेट ने भी बीते माह चार गुना मुआवजा पर मुहर लगाई थी। परियोजना के लिए कुल 1488.42 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है जिसमें 54 गांवों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है। विकासखंड/तहसील गांवों की संख्या मुख्य प्रभावित गांव छत्तरपुर विकासखंड 17-बंधीकला, ईशानगर, लहेरा, दिदौल, राजापुरवा आदि महाराजपुर तहसील 12-मऊ, नुना, पड़वाहा आदि राजनगर विकासखंड 11- गंज, करी, पहरा, सीलोन, कोटा, बरद्वाहा आदि नौगांव विकासखंड 07 – लुगासी, नयागांव, तिंदनी आदि बिजावर व सटई तहसील 07-करोदिया, दिदौनियां आदि

निर्धन परिवार, वृद्धजन और दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बुजुर्गों और असहाय लोगों का आदर करना हमारा धर्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव निर्धन परिवार, वृद्धजन और दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अंत्योदय का संकल्प हो रहा है सिद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 33 लाख 92 हजार 695 सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए 203 करोड़ 56 लाख रुपये मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय से हितग्राहियों को किया वर्चुअली संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि घर में बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद होना, तपती धूप में ठंडी छांव के समान होता है। हमारी संस्कृति में बुजुर्गों, असहायों और समाज के सबसे कमजोर वर्ग को आदर देना केवल कर्तव्य नहीं बल्कि हमारा धर्म माना गया है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी कोशिश है कि राज्य का कोई भी निर्धन परिवार, माताएं, बहनें या हमारे दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में अंत्योदय का संकल्प सिद्ध हो रहा है। इसी दिशा में राज्य सरकार भी गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के कल्याण में जुटी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरण के लिए मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम से विभिन्न जिलों के हितग्राही वर्चुअली जुड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 33 लाख 92 हजार 695 से अधिक भाई-बहनों और बुजुर्गों के खातों में माह मई महीने की 203 करोड़ 56 लाख रुपये की सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, संजय शुक्ला, मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर कार्यक्रम में उपस्थित थी। सामाजिक सुरक्षा पेंशन सरकार के स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन केवल आर्थिक सहायता नहीं है, अपितु निर्धन परिवारों, दिव्यांग साथियों में आपके प्रति सरकार का स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है। राज्य सरकार सभी को अपने परिवार का हिस्सा मानती है। सरकार प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में राज्य सरकार ने किसान हितैषी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश के किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज दिया जाएगा और इसे चुकाने की समयावधि 31 मार्च नहीं होगी, बल्कि किसान जिस तारीख को कर्ज लेंगे, उसे अगले 12 माह की अवधि में ऋण भरना होगा। 10 साल में देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोग बाहर आए गरीबी से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहा है। पिछले 10 वर्षों में देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से 80 करोड़ से अधिक लोगों को हर महीने मुफ्त राशन मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास, आयुष्मान भारत, जल-जीवन मिशन, उज्जवला योजना जैसी योजनाओं ने जन-कल्याण का इतिहास लिखा है। राज्य सरकार अधिकांश कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी है। सरकार गरीब, युवा, नारी और किसान कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से वरिष्ठजन, माताएं-बहनें और हितग्राही वर्चुअली सम्मिलत हुए।  

संपत्ति विवाद पर सियासत तेज, कांग्रेस के आरोपों के बीच CM मोहन यादव के समर्थन में मंत्री मैदान में

भोपाल  सीएम मोहन यादव और उनके परिवार पर जमीनों की खरीद फरोख्त के आरोप पर बीजेपी ने अब हमलावर रुख अपना लिया है। मामले में सीएम के बचाव में प्रदेश के मंत्रियों की फौज उतर आई। बीजेपी ने राज्य सरकार के आधा दर्जन मंत्रियों के बयानों के वीडियो जारी किए जिसमें सीएम मोहन यादव पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है। बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह से लेकर तुलसी सिलावट, चेतन काश्यप, कृष्णा गौर, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इंदर सिंह परमार ने इस मामले में कांग्रेस पर पलटवार किया। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने तो सीएम CM Mohan Yadav पर गलत आरोप लगाने पर कांग्रेस को मानहानि का नोटिस देने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, सीएम के रिश्तेदारों की संपत्ति भी जोड़ रही है। प्रदेश कांग्रेस ने सीएम डॉ. मोहन यादव व उनके परिवार के सदस्यों पर कई एकड़ जमीन खरीदने के आरोप लगाए हैं। बुधवार को इस मामले में बीजेपी नेताओं और मंत्रियों ने न केवल सीएम पर लग रहे आरोपों का बचाव किया बल्कि रॉबर्ट वाड्रा के बहाने कांग्रेस को ही घेरा। प्रदेश के लोक निर्माण विभाग यानि पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने सीएम मोहन यादव पर बेबुनियाद आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने का षड्यंत्र रचा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजनीतिक दिवालियापन के दौर से गुजर रही है। सीएम मोहन यादव के रिश्तेदारों की संपत्ति को उनसे जोड़ा मंत्री राकेश सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि जब रॉबर्ट वाड्रा का नाम भूमि घोटालों में आता है तो कांग्रेसी इसे व्यक्तिगत बताते हुए किनारा करते हैं जबकि सीएम मोहन यादव के रिश्तेदारों की संपत्ति को उनसे जोड़ा जाता है। उन्होंने मामले में कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि उसे मानहानि का नोटिस देंगे। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सरकारी और निजी ट्रस्ट में अंतर होता है, यह कांग्रेस समझ नहीं पाई। जिस वीर भारत न्यास को 1 रुपए में उज्जैन में भूमि देने का आरोप लगाया जा रहा है, वह संस्कृति विभाग का हिस्सा है, न कि निजी न्यास। उन्होंने बताया कि अब लीगल सेल पूरे प्रकरण को देख रहा है। बीजेपी ने सभी मंत्रियों के बयानों के बाकायदा वीडियो जारी किए सरकार के अन्य वरिष्ठ मंत्रियों तुलसी सिलावट, चेतन काश्यप, कृष्णा गौर, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इंदर सिंह परमार ने भी जमीन विवाद पर सीएम मोहन यादव का पक्ष प्रस्तुत किया। इससे पहले शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी मामले में कांग्रेस पर सवाल दागे थे। बीजेपी ने सभी मंत्रियों के बयानों के बाकायदा वीडियो जारी किए हैं।

छिंदवाड़ा से शिवसेना का बड़ा ऐलान, MP की हर सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी

छिन्दवाड़ा   शिवसेना मध्य प्रदेश में हर तरह के चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी उतारेगी. ये कहना है शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अडसूल का. छिंदावाड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे अभिजीत ने कहा कि शिवसेना अब पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा और लोकसभा में भी अपने कैंडिडेट उतारकर चुनाव लड़वाने जा रही है. इसके लिए पार्टी ने तैयारियां शुरू कर दी है।  उद्धव के घमंड से टूट गई शिवसेना : अभिजीत शिंदे गुट शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव और महाराष्ट्र के पूर्व विधायक अभिजीत अडसूल ने छिन्दवाड़ा में पार्टी कार्यकर्ताओं को भी संबोधित किया. कार्यकर्ताओं के इस सम्मेलन में उन्होंने पार्टी विस्तार की रणनीति के साथ ज्यादा से ज्यादा सदस्यों को पार्टी से जोड़ने और सदस्यता अभियान चलाने की बात कही. महाराष्ट्र में चले ऑपरेशन टाइगर पर अभिजीत ने कहा, '' शिवसेना UBT को छोड़कर 6 सांसद शिवसेना शिंदे में शामिल हो गए हैं. इसका सबसे बड़ा कारण उद्धव ठाकरे की अकड़बाजी (घमंड) है क्योंकि वे कार्यकर्ताओं से ठीक से व्यवहार और उनसे मुलाकात भी ठीक से नहीं करते थे, जिसकी वजह से कार्यकता दूर होते गए और फिर उन्होंने लोकप्रिय नेता एकनाथ शिंदे का साथ पकड़ लिया।  2 साल पहले भी चला था एक ऑपरेशन अभिजीत अडसूल ने कहा, '' 2 साल पहले भी एक ऐसा ही ऑपरेशन महाराष्ट्र में चला था क्योंकि शिवसेना के हाई कमान राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यकर्ताओं को वक्त नहीं देते थे. 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ अलग हुए. शिंदे मुख्यमंत्री बने थे और हमने पार्टी को खड़ा करने के लिए बहुत मेहनत की लेकिन अपनी आंखों के सामने पार्टी की स्थिति खराब होती देखना पसंद नहीं था. इसलिए हमें उद्धव ठाकरे को अलग करना पड़ा क्योंकि बाला साहब ठाकरे ने जिस उद्देश्य से पार्टी का गठन किया था, वो अपने उद्देश्यों से भटक रही थी।  बीजेपी और शिंदे शिवसेना के विचार एक : अभिजीत शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अडसूल ने कहा, '' बालासाहेब ठाकरे के सपनों को सत्ता के लिए उद्धव ठाकरे ने उसी दिन तोड़ दिया था, जब कांग्रेस और NCP ने मिलकर सरकार बनाई थी, जिससे महाराष्ट्र का विकास रुक रहा था. शिंदे की सरकार बीजेपी के साथ बनी तो महाराष्ट्र ने फिर से विकास की रफ्तार पकड़ ली क्योंकि बीजेपी के साथ विचार भी मिलते हैं. अब केंद्र की सरकार और राज्य की सरकार मिलकर विकास कर रही है। 

जल नायक CM डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल-आत्मनिर्भरता की राह पर मध्यप्रदेश

जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल-आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश भोपाल  भारतीय संस्कृति में जल को केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का साक्षात स्वरूप और चेतना का प्रतीक माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में 'अपः पुरुषरूपेण' कहकर जल की वंदना की गई है, जिसका सीधा अर्थ है कि जल में ही साक्षात ईश्वर का वास है। इसी पावन और दूरदर्शी सोच को आत्मसात करते हुए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने जल को विकास का प्रमुख पैमाना बनाते हुए ‘हर घर जल’ के संकल्प को साकार किया। उनके मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय का गठन, जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी ऐतिहासिक पहलें हुईं, जिन्होंने देश को जल संरक्षण की एक नई दिशा दी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के इसी वैश्विक और दूरदर्शी दृष्टिकोण को धरातल पर उतारते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में जल क्रांति का सूत्रपात किया है। उन्होंने जल संरक्षण को एक सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाते हुए संस्कृति, आदत और राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बना दिया है, जिसके कारण आज उन्हें संपूर्ण प्रदेश में एक जनप्रिय 'जल नायक' के रूप में देखा जा रहा है। उज्जैन विकास प्राधिकरण से मुख्यमंत्री पद तक: 22 वर्षों से अधिक का भागीरथ संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. यादव की जल संपदा को सहेजने और पर्यावरण संरक्षण की यह यात्रा कोई तात्कालिक प्रयास नहीं है, बल्कि इसके पीछे 22 वर्षों से अधिक का अथक परिश्रम, संवेदनशीलता और दूरगामी सोच है। इस यात्रा की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने उज्जैन की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने को अपने जीवन का मुख्य ध्येय बना लिया। महान सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, उनके नवरत्नों की गौरवशाली परंपरा तथा मालवा की जीवनदायिनी माँ शिप्रा के संरक्षण और जल संवर्धन के प्रति उनकी गहरी आस्था ने एक व्यापक सांस्कृतिक चेतना को जन्म दिया। उनके द्वारा आरंभ की गयी शिप्रा तीर्थ परिक्रमा धार्मिक आस्था को सशक्त करने के साथ-साथ उज्जैन और शिप्रा नदी से जुड़े सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं पर्यटन महत्व को पुनर्स्थापित कर रही है। इस पहल के माध्यम से शिप्रा के घाटों, तीर्थ स्थलों और प्राचीन परंपराओं को जनभागीदारी से जोड़ते हुए नदी संरक्षण महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार धार्मिक परंपराओं के संरक्षण, स्थानीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा जन सामान्य सीधे जुड़ रहा है। एक युवा जननेता के रूप में उन्होंने तत्कालीन समय में ही यह समझ लिया था कि बिना जल स्रोतों के संरक्षण के किसी भी सभ्यता या नगर का विकास दीर्घकालिक नहीं हो सकता और अगर इस चिंता पर समाधान के कार्य नहीं किए गए तो भविष्य के लिए सकंट पैदा होगा। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री पद तक की अपनी यात्रा में डॉ. मोहन यादव ने हमेशा जल संवर्धन के मुद्दों को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा। वे समय-समय पर तत्कालीन मुख्यमंत्रियों और नीति-निर्माताओं को माँ शिप्रा के संरक्षण एवं जल संवर्धन के लिए प्रेरित करते रहे। वर्षों से उनके मन में नदियों और पर्यावरण के प्रति जो संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता रही, वही आज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' जैसे विराट जनआंदोलन के रूप में साकार हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले दो दशकों में जल संरक्षण के जो बीज बोए थे, वे आज एक विशाल वटवृक्ष बनकर पूरे मध्यप्रदेश को अपनी शीतलता और समृद्धि से सराबोर कर रहे हैं। उनकी इसी सजगता, दूरदर्शिता और अटूट निष्ठा ने उन्हें मध्यप्रदेश के 'जल नायक' के रूप में स्थापित किया है। आस्था की जीवनदायिनी माँ शिप्रा का पुनरुद्धार और अविरल प्रवाह मध्यप्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है और इसी मायके की सबसे पवित्र और पूजनीय नदियों में से एक है माँ शिप्रा। मालवा की गंगा कही जाने वाली और प्राचीन नगरी अवंती को अपने आंचल में समेटने वाली शिप्रा नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है। इसी पावन तट पर विश्व प्रसिद्ध 'सिंहस्थ' महापर्व का आयोजन होता है, जहाँ बाबा महाकाल की छत्रछाया में देश-विदेश से आए श्रद्धालु पुण्य लाभ कमाते हैं। परंतु, समय के साथ बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विकास के कारण शिप्रा के आंचल पर प्रदूषण का साया मंडराने लगा था। इंदौर से आने वाली खान नदी और सीवरेज का गंदा पानी इसमें मिलने से इसकी पवित्रता प्रभावित हो रही थी। जब आस्था की इस जीवनदायिनी पर संकट आया, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे अपनी व्यक्तिगत और शासकीय प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखा। इंदौर जिले के निकट काकरी बर्डी पहाड़ी से निकलने वाली 195 किलोमीटर लंबी इस पवित्र नदी को प्रदूषण मुक्त और अविरल बनाना उनके जीवन का सबसे बड़ा संकल्प बन गया। साल 2024 की शुरुआत से ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिप्रा नदी के जीर्णोद्धार के लिए स्वयं कमान संभाली और एक के बाद एक कई उच्च स्तरीय बैठकें कर कड़े निर्णय लिए। उन्होंने 7 जनवरी 2024 को उज्जैन में आयोजित पहली बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सीवरेज का गंदा पानी शिप्रा में मिलना तुरंत रोका जाए। इसके लिए उन्होंने सांवेर, रामवासा, पंथपिपलई और राघौपिपल्या में स्टॉपडैम और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की व्यापक कार्ययोजना तैयार करवाई। टाटा प्रोजेक्ट्स के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि नृसिंह घाट से लेकर रामघाट तक गंदगी का एक कतरा भी दिखाई नहीं देना चाहिए। इसके बाद 13 फरवरी 2024 को हुई दूसरी बैठक में उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि कान्ह नदी के गंदे पानी का ट्रीटमेंट धर्मपुरी से ही शुरू किया जाए और उस साफ किए गए पानी को डायवर्ट कर किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाए, ताकि नदी में केवल शुद्ध जल ही प्रवाहित हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह मुहिम यहीं नहीं रुकी। उन्होंने 2 जुलाई 2024 को तीसरी उच्च स्तरीय बैठक लेकर प्रगति की समीक्षा की और कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए। जल संरक्षण के प्रति उनकी इसी प्रतिबद्धता का परिणाम था कि 1 दिसंबर 2024 को उज्जैन में केंद्रीय मंत्री श्री जेपी नड्डा की गरिमामयी उपस्थिति में … Read more

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका अहम, राज्यपाल पटेल ने अवसर बढ़ाने पर दिया जोर

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं को मिले अधिक से अधिक अवसर : राज्यपाल पटेल विद्यार्थियों में कौशल, योग और सामाजिक सरोकार करें विकसित   विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक लोकभवन में भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकसित भारत@2047 की संकल्पना को साकार करने की दिशा में प्रदेश के युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों द्वारा अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिये सभी वर्गों से सतत् विचार-विमर्श करते रहे है जिसमें युवा भी शामिल है। विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण के जज्बे को और अधिक सुदृढ़ करने में अपना सक्रिय योगदान दें। राज्यपाल पटेल गुरूवार को लोकभवन में आयोजित विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के संचालन एवं समन्वय संबंधी विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई। राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालयों को सेवायोजित पूर्व विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक 2 वर्ष में प्लेसमेंट सम्मेलन आयोजित करने की सलाह दी है। प्लेसमेंट सम्मेलन में वर्तमान छात्र-छात्राओं को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। विश्वविद्यालय का गौरव भी बढ़ेगा। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व के लगभग 200 देशों में किये गये योगाभ्यास से योग की वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को योग को नियमित गतिविधियों को मासिक साप्ताहिक आयोजन के क्रम में शुरू करना चाहिए। इसकी शुरुआत छात्रावासों से की जा सकती है। उन्होंने रोजगारोन्मुखी प्रमाण-पत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को गरीब एवं वंचित परिवारों की आत्मनिर्भरता में व्यवहारिक पहल बताया। कृषि संबद्ध विभिन्न कार्यों के लिए भी प्रमाणन व्यवस्था विकसित किए जाने पर बल दिया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के विश्वास के साथ उन्हें विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने भेजते हैं। इस विश्वास को बनाये रखना कुलगुरुओं और प्राध्यापकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ज्ञान और कौशल के साथ सामाजिक संवेदनशीलता से भी जोड़ना जरूरी है। विश्वविद्यालय गाँव को गोद लेकर ग्रामीणों के साथ संवाद और विकास गतिविधियों में विद्यार्थियों को सहभागी बनाएं। पिछड़े समुदायों एवं क्षेत्रों के विकास की अभूतपूर्व योजना पीएम-जनमन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विद्यार्थियों को भी जोड़े। महाविद्यालयीन और विश्वविद्यालयीन छात्रों को गाँवों का भ्रमण करवाएं। इससे प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों को भावी जीवन में वंचित और गरीब वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विश्वविद्यालयों द्वारा वित्तीय प्रबंधन को व्यवस्थित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रावधानों और निर्देशों का उल्लंघन गंभीर अनियमितता है। कुलगुरू वित्तीय निर्देशों की सीमा का कड़ाई से पालन करें। मंत्री परमार ने कहा कि कॉमन पोर्टल के माध्यम से एकीकृत ई-प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ना निजी विश्वविद्यालयों के लिए स्वैच्छिक है, किन्तु विश्वविद्यालय में प्रवेश होने की सूचना आयोग के पोर्टल पर प्रदर्शित होने की ऑटोमेडेट व्यवस्था की जाना अनिवार्य है। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, लोकभवन एवं उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

इमरजेंसी की बरसी पर BJP का बड़ा अभियान, प्रदेशभर में मनाया जा रहा ‘संविधान हत्या दिवस’

भोपाल  आज आपातकाल की 51वीं बरसी है. भारतीय जनता पार्टी इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रुप में मनाती है. आज प्रदेशभर में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, संगोष्ठियों की प्रदर्शनी, व्याख्यान, छात्र युवा कार्यक्रम और जन जागरूकता गतिविधियां बीजेपी की ओर से आयोजित की जा रही हैं। आपातकाल दिवस के अवसर पर गुरुवार को राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और उनके परिजनों का सम्मान करेंगे। समारोह में लोकतंत्र सेनानी संघ के पदाधिकारी, विभिन्न जिलों से आए मीसाबंदी परिवारों के सदस्य और बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे। आयोजकों के अनुसार करीब दो हजार परिवार इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंच से लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित कर उनके योगदान को याद करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उन लोगों के प्रति सम्मान प्रकट करना है जिन्होंने उस दौर में कठिन परिस्थितियों का सामना किया।  इंदिरा सरकार के अहंकार ने आपातकाल लगाया- सीएम  इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 25 जून, 1975… देश में लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन, जब इंदिरा सरकार के अहंकार ने आपातकाल लगाया। इस विभीषिका के विरुद्ध डटकर खड़े होने वाले लोकतंत्र के प्रहरियों को सादर नमन करता हूं। आइए, संकल्प लें कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव समर्पित होकर देश की सेवा करते रहेंगे।  25 जून 1975 को लागू हुआ था आपातकाल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन देश में आपातकाल लागू किया गया था, जो मार्च 1977 तक प्रभावी रहा। इस अवधि में कई नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए थे और अनेक राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा हर वर्ष आपातकाल दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।  आपातकाल दिवस क्या है? 'इमरजेंसी डे' भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के एक अहम और विवादित दौर की याद दिलाता है. यह उस समय को दर्शाता है जब 25 जून 1975 की रात को पूरे देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लागू किया गया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में घोषित यह आपातकाल लगभग 21 महीनों तक, यानी 21 मार्च 1977 तक लागू रहा. इस दौरान कई मौलिक अधिकारों पर रोक लगा दी गई, प्रेस और मीडिया की आज़ादी पर कड़े नियंत्रण लागू किए गए और सेंसरशिप लागू की गई थी.  इसके अलावा सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले कई विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था. यह दौर भारतीय राजनीति और लोकतंत्र के इतिहास में एक अहम अध्याय के तौर पर याद किया जाता है। 

राहुल गांधी ने जताया खेद, कहा- मेरे बयान का संबंध शिवराज और कार्तिकेय से नहीं था

जबलपुर  कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान के बीच चल रहे बहुचर्चित मानहानि विवाद में समझौते की संभावनाओं के संकेत उभरते दिखाई दिए हैं। हाई कोर्ट में राहुल गांधी ने एक विस्तृत लिखित आवेदन प्रस्तुत कर कहा है कि उनके वर्ष 2018 के चुनावी भाषण को गलत संदर्भ में लिया गया, जबकि उनका आशय न तो तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से था और न ही कार्तिकेय सिंह चौहान से। बुधवार को न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने राहुल गांधी का आवेदन रिकॉर्ड पर लेते हुए कार्तिकेय सिंह चौहान से लिखित जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की सुनवाई 25 जून को पुनः होगी। 'राहुल गांधी ने पैर पकड़ कर माफी मांगी' बीजेपी नेता और भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव तेजिंदर बग्गा ने एक्स पर लिखा है कि राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह से 'पैर पकड़ कर माफी मांगी' है। बग्गा ने दावा किया है कि राहुल गांधी ने शिवराज सिंह चौहान के बेटे के खिलाफ झूठे आरोप लगाए और इसकी वजह से उन्हें मानहानि के केस का सामना करना पड़ा। राहुल गांधी के आवेदन में क्या था? अब वहीं, राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में दायर आवेदन में कहा गया है कि उनका बयान कार्तिकेय सिंह के संबंध में नहीं था. उनके वकील ने कोर्ट में बताया कि जिस टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ, उसका संबंध कार्तिकेय सिंह से नहीं था और अगर किसी तरह की गलतफहमी हुई है तो इसके लिए उन्हें बहुत खेद है।  BJP ने साधा राहुल गांधी पर निशाना वहीं, इस मामले को लेकर बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राहुल गांधी को शायद अपने नाम के साथ ‘सॉरी’ जोड़ लेना चाहिए, क्योंकि उन्हें कई बार अपने बयानों पर माफी मांगनी पड़ी है. अमित मालवीय ने कहा कि अगर राहुल गांधी का बयान कार्तिकेय सिंह के बारे में नहीं था, तो फिर उनका नाम क्यों लिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अक्सर बिना वजह बड़े-बड़े आरोप लगाते हैं और बाद में कोर्ट या तथ्यों के सामने आने पर अपने बयान से पीछे हट जाते हैं।  मालवीय ने आगे कहा कि विपक्ष के नेता जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति से जिम्मेदार व्यवहार की उम्मीद की जाती है. उनका कहना है कि राजनीतिक नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान देते समय फैक्ट्स की जांच कर लेनी चाहिए।  तेजिंदर बग्गा का दावा बीजेपी नेता और भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव तेजिंदर बग्गा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया है कि राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह से जुड़े मानहानि मामले में पैर पकड़कर माफी मांगी है।      राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी के बेटे कार्तिकेय सिंह से पैर पकड़ कर माफ़ी माफ़ी । राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह पर झूठे आरोप लगाए थे और मानहानि का केस झेल रहे थे । बग्गा का आरोप है कि राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह के खिलाफ झूठे आरोप लगाए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ. हालांकि, मामले में कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है और अदालत में सुनवाई चल रही है।  राहुल के वकील ने दी यह दलील राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा व अजय गुप्ता ने दलील दी कि झाबुआ में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित बयान में मध्य प्रदेश नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के एक पूर्व मुख्यमंत्री का संदर्भ था। आवेदन में यह भी कहा गया कि बयान को लेकर यदि कोई भ्रम उत्पन्न हुआ, तो उस पर पहले ही खेद व्यक्त किया जा चुका है।  कार्तिकेय सिंह ने लगाया मानहानि केस दरअसल, कार्तिकेय सिंह चौहान ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स प्रकरण का उल्लेख करते हुए ऐसा वक्तव्य दिया, जिससे उनकी सार्वजनिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। इसी आधार पर भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का मामला दायर किया था। कोर्ट से राहुल गांधी को समन जारी हुआ था।  इसी समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी हाई कोर्ट पहुंचे हैं। अब उनके ताजा स्पष्टीकरण के बाद अदालत ने प्रतिपक्ष का पक्ष जानना जरूरी माना है। राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा है कि मामला टकराव के बजाय सहमति के रास्ते की ओर बढ़ सकता है। आज की सुनवाई इस बहुचर्चित विवाद की दिशा तय कर सकती है। राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह से खेद जताया     दरअसल, लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक याचिका डाली है।     इस याचिका में उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह के खिलाफ अपने कथित अपमानजनक बयान के लिए खेद प्रकट किया है।     याचिका में राहुल गांधी की ओर से कहा गया है कि कांग्रेस नेता ने जो टिप्पणी की थी, उसका कार्तिकेय सिंह से संबंध नहीं था। राहुल गांधी के खिलाफ किया मानहानि केस     इससे पहले कार्तिकेय सिंह ने भोपाल की एक अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत की थी।     उनका आरोप है कि राहुल गांधी के बयान से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है।     एमपी-एमएलए कोर्ट में कार्तिकेय सिंह की ओर से दायर शिकायत में कहा गया कि 2018 में झाबुआ की एक चुनावी रैली में राहुल गांधी ने पनामा पेपर लीक स्कैंडल का जिक्र करते हुए, उससे उनका नाम जोड़ दिया।     इसी शिकायत के आधार पर अदालत ने राहुल गांधी को उसके सामने निजी तौर पर पेश होने के लिए समन जारी किया था।     लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसी समन और मानहानि की कार्यवाही को खारिज करने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया है।