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मजदूर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का संकल्प, मंत्री पटेल का बड़ा बयान

मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल की 64वीं बैठक हुई भोपाल मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल की 64वीं बैठक में श्रमिकों के बच्चों के शैक्षणिक उत्थान को केंद्र में रखते हुए मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन देने और प्रारंभिक स्तर पर कॅरियर काउंसलिंग की व्यवस्था विकसित करने पर प्राथमिकता दी गई। श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना मंडल की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मंडल की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों को इन अवसरों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। बैठक में मंडल का आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट माननीय सदस्यों द्वारा चर्चा उपरांत सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक में श्रम सचिव रघुराज राजेन्द्रन, कल्याण आयुक्त संजय कुमार एवं श्रमिकों एवं नियोजकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंत्री पटेल ने कहा कि श्रमिकों और कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखना शासन की जिम्मेदारी है। वेतनमान से जुड़े मामलों में देरी कार्यकुशलता को प्रभावित करती है, इसलिए सभी लंबित प्रकरणों की सूची बनाकर त्वरित कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के समाधान और सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा न करने वाले प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण, श्रमिक कल्याण योजनाओं की प्रगति, खेल एवं कौशल विकास गतिविधियों तथा नवीन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में श्रम सचिव रघुराज राजेन्द्रन ने बताया कि श्रम कल्याण बोर्ड में संपूर्ण कंप्यूटरीकरण एमपीएसईडीसी के माध्यम से किया जा रहा है। श्रम विभाग द्वारा नवीन श्रम संहिताओं पर संभागीय स्तर की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें से एक भोपाल में संपन्न हो चुकी है। इन संहिताओं के आधार पर राज्य में श्रम कानूनों में संशोधन किए जा रहे हैं। सिलाई केंद्रों का पुनः संचालन, 17 केंद्र सक्रिय बैठक में बताया गया कि चचाई और इंदौर में सिलाई केंद्रों को पुनः प्रारंभ किया जा रहा है। वर्तमान में 27 श्रम कल्याण केंद्रों में से 17 में सिलाई-कढ़ाई केंद्र संचालित हो रहे हैं। कौशल विकास विभाग द्वारा प्रशिक्षणार्थियों का परीक्षण कराया गया है। मंडल के अंतर्गत संचालित श्रम कल्याण केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण, राष्ट्रीय पर्व, विश्वकर्मा जयंती जैसे आयोजन नियमित रूप से किए जा रहे हैं। श्रमिकों के लिए कंप्यूटर केंद्र भी संचालित हैं। खेलों को बढ़ावा, समयावधि बढ़ाने का प्रस्ताव बैठक में खेल प्रतियोगिताओं की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। बताया गया कि खेलों के माध्यम से श्रमिकों का सर्वांगीण विकास संभव है। साथ ही नियमित कर्मचारियों को समयमान वेतनमान के एरियर भुगतान को शीर्ष प्राथमिकता देने की बात कही गई। भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के निराकरण पर भी चर्चा हुई। अंत में सभी सदस्यों ने श्रमिक एवं कर्मचारी हितों को सर्वोपरि रखते हुए निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प लिया।  

‘एमपी पेवेलियन’ में एआई गवर्नेंस मॉडल ने खींचा सबका ध्यान

भोपाल  इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट–2026 ‘सशक्त भारत के लिए एआई आधारित सुशासन’ के विजन पर आधारित मध्यप्रदेश के 14 प्रमुख स्टार्ट-अप और विभिन्न शासकीय विभागों के नवाचारों के प्रदर्शन से नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट–2026’ में ‘एमपी पेवेलियन’ विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पेवेलियन में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, औद्योगिक स्वचालन, डिजिटल हेल्थ केयर, संचार प्रशिक्षण और रोबोटिक्स जैसे विविध क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक उपयोग की सशक्त झलक प्रस्तुत की गई है। स्टार्ट-अप श्रेणी में नोवोसएज (एग्रीदूत)ने एआई, एमएल, आईओटी और जीआईएस आधारित प्रिसीजन फार्मिंग प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किया, जो किसानों को रीयल-टाइम खेत-स्तरीय जानकारी, फसल रोग पूर्वानुमान और उपग्रह आधारित विश्लेषण उपलब्ध कराता है और 15 से अधिक एफपीओ और 15,000 से अधिक किसानों को सेवा दे रहा है। नुआइग ने हेल्थ टेक और वृद्धजन देखभाल के लिए एआई एजेंट, प्रिडिक्टिव केयर इंजन और डॉक्टर–रोगी संवाद के स्वचालित सारांश जैसे समाधान प्रस्तुत किए। क्वासी इंटेलिजेंस ने ‘क्वासी विज़न प्लेटफॉर्म’ के माध्यम से चौबीस घंटे औद्योगिक सुरक्षा निगरानी, उत्पादन ट्रैकिंग और वेयरहाउस विश्लेषण की सुविधा प्रदर्शित की, जबकि ग्रेडिन डॉट एआई ने प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस तकनीक से उद्योगों की परिचालन लागत में 15–20 प्रतिशत तक कमी की संभावनाएं दर्शाईं। आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन (आईआईटी इंदौर) ने हाई-फिडेलिटी पेशेंट सिम्युलेटर, पोर्टेबल टेस्ट किट और एआई डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल हेल्थ केयर नवाचार प्रस्तुत किए। कॉमोनिफाई (कॉमन स्कूल) ने एआई-आधारित इमर्सिव कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के माध्यम से इंटरव्यू, मीटिंग और पेशेवर प्रशिक्षण के लिए रीयल-टाइम फीडबैक आधारित समाधान प्रदर्शित किया। आरएसईएनएल एआई फिल्म्स ने जनरेटिव एआई आधारित सिनेमैटिक स्टोरीटेलिंग मॉडल प्रस्तुत किया, जो कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले विजुअल निर्माण को संभव बनाता है। यंगोवेटर ने रोबोटिक्स एवं स्टेम शिक्षा के लिए ह्यूमनॉइड और थ्रीडी प्रिंटेड रोबोट सहित इंटरैक्टिव लैब प्रदर्शित की, जिसने अब तक 25,000 से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया है। जैंगोह (न्यूज़ेरा टेक लैब्स) ने सॉवरेन एआई आधारित समाधान जैसे भीड़ विश्लेषण, बहुभाषीय अनुवाद और सरकारी योजना सहायता प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किए। आस्कगैलोर ने थ्रीडी एआई डिजिटल ह्यूमन असिस्टेंट प्रदर्शित किए जो बहुभाषीय और संदर्भ-संवेदनशील संवाद में सक्षम हैं। रिमोट फिज़ियोस ने आईओटी और एआई आधारित टेली-रिहैबिलिटेशन प्लेटफॉर्म के माध्यम से घर बैठे विशेषज्ञ निगरानी में उपचार की सुविधा दिखाई। ट्रायोसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज़ ने एआई-सक्षम एक्सआर इनडोर नेविगेशन सिस्टम का प्रदर्शन किया जो जटिल परिसरों में जीपीएस रहित मार्गदर्शन प्रदान करता है। प्लांटिक्स ने एआई आधारित डिजिटल क्रॉप इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किया, जो 800 से अधिक फसल रोगों का उच्च सटीकता से निदान कर 22 मिलियन किसानों को सशक्त बना रहा है। समिट में मध्यप्रदेश के शासकीय विभागों ने भी एआई-सक्षम शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण के अभिनव मॉडल प्रस्तुत किए। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड ने डिजिटल पर्यटन प्रचार उपकरणों का प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने तपेदिक जोखिम पूर्वानुमान ‘पाटो’, एआई आधारित जांच एवं ‘सुमन सखी’ जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य समाधान प्रदर्शित किए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (मनरेगा) ने एआई आधारित जिला प्रदर्शन प्रणाली प्रस्तुत की, जबकि नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने ‘एमपी अर्बन लॉकर’ सहित शहरी शासन से जुड़े डिजिटल नवाचारों का प्रदर्शन किया। एमपी पेवेलियन राज्य की तकनीकी प्रगति, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और एआई-सक्षम सुशासन की दिशा में उठाए जा रहे ठोस कदमों का प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा है।  

केला निर्यात में फ्रूट केयर और पैक हाउस अपनाने से बढ़ेगा निर्यात

भोपाल  कृषक कल्याण वर्ष-2026 जिले को केले के एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय कृषि उन्नयन संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय कृषि विशेषज्ञों, निर्यातकों और प्रगतिशील किसानों सहित बड़ी संख्या में जिले के प्रेक्षक सम्मिलित हुए, जहाँ जिले के केले को वैश्विक मानकों पर खरा उतारने के लिए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। अंतर्राष्ट्रीय केला विशेषज्ञ  के. बी. पाटिल ने किसानों को कहा कि जिस प्रकार बच्चों को संभाला जाता है, उसी प्रकार पैकिंग के दौरान केले की फ्रूट केयर जरूरी है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अब स्पॉटलेस और फ्रेश केले की मांग है। केला निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आधुनिक फ्रूट केयर और वैज्ञानिक पैकेजिंग पर ध्यान देना ज़रूरी हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में निर्यात और प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। क्योंकि पहले केला आंखों से देखा जाता है, इसके बाद खाया जाता है। क्योंकि अब वह ज़माना गया जब फल विक्रेता केलों को यह कहकर बेचते थे कि ले जाइए साहब छींटे वाला केला है, परतु वास्तविक में यह पकने की नहीं बल्कि सड़न की प्रक्रिया की शुरूआत होती है।  पाटिल ने कहा कि पैक हाउस के महत्व को बताते हुए कहा कि केले की पैकिंग खेतों के बजाय पैक्स हाउस में की जानी चाहिए जिससे वे लंबे समय तक ताजे रहें। उन्होंने कहा कि कृषकों एवं उद्योग के दृष्टिकोण से केले के उत्पादन संबंधी चुनौतियों,संभावनाओं एवं उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। जिले में लगभग 3,600 हेक्टेयर में केले की खेती हो रही है, जिसकी उत्पादकता 850 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यहाँ के किसानो ने क्लाइमेट चेंज को मात देने वाले मॉडल्स अपनाए हैं। किसानों को टिश्यू कल्चर के लाभों और उद्योग की चुनौतियों को समझते हुए चहुमुखी प्रयास करने होंगे। केला निर्यात विशेषज्ञ  अमोल महाजन ने बताया कि भारत दुनिया का 26 प्रतिशत केला उत्पादित करता है, लेकिन निर्यात के मामले में हम अभी 9वें स्थान पर हैं। भौगोलिक स्थिति के आधार पर फिलीपींस और इक्वाडोर जैसे देशों की तुलना में भारत से मिडिल ईस्ट देशों तक माल पहुँचाना आसान और कम समय लेने वाला है। निर्यात के क्षेत्र में एक बहुत अच्छा अवसर है। निर्यात एवं व्यापार में नए अवसर के लिये पैक हाउस,कोल्ड स्टोरेज, फ्रूट सर्विस, ट्रांसपोर्ट, वेंडर एवं मटेरियल सप्लाई के लिये प्रयास किए जाए तो सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। साथ ही, पैकिंग कार्यों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। मिर्च एक्सपोर्ट की जानकारी खरगोन के  अभिषेक पाटीदार ने दी। उन्होंने मार्केट चेन, कृषि लागत ,जैविक एवं प्राकृतिक खेती के सम्बन्ध में भी अपनी विचार साझा किए। कृषि संवाद कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा किसानों को कृषि के क्षेत्र में मार्गदर्शन दिया गया। इस क्रम में जैन इरीगेशन जलगांव के अंतर्राष्ट्रीय केला विशेषज्ञ  केबी पाटिल, एग्रोनॉमिस्ट  अजहर जैदी, जैन कृषि तीर्थ जलगांव के डॉ. सुधीर भोंगले द्वारा टिश्यू कल्चर तकनीक पर, मुंबई एवं बुरहानपुर के केला एक्सपोर्टर  अमोल महाजन द्वारा केला एक्सपोर्ट, खरगोन के  अभिषेक पाटीदार, वैज्ञानिक डॉ. महेन्द्र सिंह, रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ. व्हायके जैन, अवार्ड टू बनाना फॉर्मर ऑफ इंडिया  संतोष लछेटा द्वारा केला उत्पादन तकनीक एवं जिले के प्रगतिशील किसान  भरत पाटीदार,  बलराम जाट एवं कृषि विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया गया। कार्यक्रम के दौरान कृषि, उद्यानिकी और पशुपालन विभाग द्वारा आधुनिक कृषि यंत्रों और उन्नत बीजों की प्रदर्शनी लगाई गई। पात्र किसानों को कृषि उपकरणों के लिये अनुदान सहायता राशि के प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में लोकसभा सांसद  गजेन्द्र सिंह पटेल,जिला पंचायत अध्यक्ष  बलवंत सिंह पटेल ,पूर्व कैबिनेट मंत्री  प्रेम सिंह पटेल, कलेक्टर मती जयति सिंह सहित अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की उपस्थिति में किसानों को आधुनिक खेती और वैश्विक बाजार से जुड़ने की रणनीतियां बताई गई।  

विगत पांच दिनों में त्वरित पुलिस कार्यवाही से चार अलग-अलग घटनाओं में नागरिकों को मिला जीवनदान

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस ने विगत 5 दिनों के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में घटित चार गंभीर घटनाओं में तत्परता, साहस एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए समय पर राहत एवं बचाव कार्य कर तीन नागरिकों को सुरक्षित बचाया। इन घटनाओं में पुलिसकर्मियों की त्वरित प्रतिक्रिया एवं समर्पित सेवा भावना के चलते संभावित बड़े हादसों को टालते हुए पीड़ितों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई। थाना सनावद जिला खरगौन दिनांक 16 फरवरी को थाना सनावद क्षेत्र में भ्रमण के दौरान प्रधान आरक्षक श्री गंभीर मीणा एवं आरक्षक श्रीकृष्ण बिरला ने ढकलगांव रोड के समीप एक व्यक्ति को मोटर साइकिल से अचेत अवस्था में सड़क पर गिरा हुआ देखा, जिसके पास एक महिला घबराई हुई स्थिति में खड़ी थी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पुलिसकर्मियों ने बिना समय गंवाए तत्परता दिखाई। आरक्षक श्रीकृष्ण बिरला द्वारा तत्काल व्यक्ति को सीपीआर प्रदान किया गया, वहीं प्रधान आरक्षक श्री गंभीर मीणा द्वारा तुरंत डायल-112 एम्बुलेंस सेवा से संपर्क कर मौके पर बुलाया गया। पुलिस द्वारा समय रहते दिए गए CPR जैसी जीवनरक्षक तकनीक का उपयोग करते हुए जीवनरक्षक प्रयास शुरू किए। कुछ ही मिनटों की सतर्कता और निरंतर प्रयासों से युवक की धड़कनें सामान्य हुईं। इसके बाद उसे तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया, जहां चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार प्रदान किया गया। राजगढ़- थाना लीमा चौहान दिनांक 14 फरवरी 2026 को ग्राम निपानिया में प्रधानमंत्री रोजगार सड़क निर्माण योजना अंतर्गत नाली निर्माण कार्य के दौरान साइड की कच्ची दीवार की मिट्टी अचानक धंसने से दो मजदूर मिट्टी में दब गए। घटना की सूचना मिलते ही थाना लीमा चौहान पुलिस द्वारा तत्काल पुलिस बल एवं दो जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंचकर बिना विलंब रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया गया। कड़ी मशक्कत के बाद दोनों मजदूरों को बाहर निकाला गया। इस दौरान कार्यवाहक आरक्षक 226 श्री अमितेंद्र रघुवंशी एवं कार्यवाहक प्रधान आरक्षक 659 श्री दिवाकर वर्मा द्वारा मौके पर ही सीपीआर (CPR) प्रदान कर एक मजूदर को बचाया। तत्पश्चात उसे तत्काल उपचार हेतु अस्पताल भिजवाया। दुर्भाग्यवश दूसरे मजूदर को मृत अवस्था में निकाला गया, जिनका पोस्टमार्टम कर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। थाना खिलचीपुर, जिला राजगढ़ 15 फरवरी 2026 को थाना खिलचीपुर क्षेत्र अंतर्गत झारखंडेश्वर मंदिर जाने वाले मार्ग पर स्टॉप पानी डेम के समीप पैदल पुल पार करते समय 15-16 वर्ष की किशोरी संतुलन बिगड़ने से नदी में गिर गई। सूचना प्राप्त होते ही ड्यूटी पर तैनात आरक्षक 53 श्री अविनाश शर्मा, थाना खिलचीपुर तथा एसडीईआरएफ जवान 89 श्री संजय वर्मा द्वारा तत्परता एवं साहस का परिचय देते हुए नदी में उतरकर किशोरी को सुरक्षित बाहर निकाला। समय पर की गई त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया। किशोरी पूर्णतः सुरक्षित है। थाना कनाडिया, जिला इंदौर दिनांक 13 फरवरी 2026 को थाना कनाडिया क्षेत्रांतर्गत स्नेह जीव मैरिज गार्डन में विद्युत सुधार कार्य के दौरान एक व्यक्ति दो मंजिला टावर से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही एसीपी खजराना श्री कुंदन मंडलोई, थाना प्रभारी कनाडिया डॉ. सहर्ष यादव एवं पुलिस स्टाफ द्वारा तत्परता से घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उपचार उपलब्ध कराया। उपरोक्त घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि मध्यप्रदेश पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं, बल्कि संकट की प्रत्येक घड़ी में नागरिकों के साथ खड़ी है। मानवीय संवेदना, साहस एवं त्वरित निर्णय क्षमता के बल पर मध्यप्रदेश पुलिस निरंतर जनसेवा के अपने दायित्व का निर्वहन कर रही है और समाज में सुरक्षा, विश्वास व सहयोग की सुदृढ़ भावना को सशक्त कर रही है।  

अहिल्याबाई होल्कर के आदर्शों पर चलकर देश को आगे बढ़ाएं : राज्यपाल पटेल

भोपाल. राज्यपाल एवं कुलाधिपति  मंगुभाई पटेल ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर राजनीतिक शुचिता, महिला सशक्तिकरण और सेवा की प्रतिमूर्ति थी। उन्होंने अनेक कल्याणकारी सेवा कार्य किए। लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर ने गुजरात के जूनागढ़ के 60 परिवारों को इंदौर में बसाया। लोकमाता का व्यक्तित्व और कृतित्व लगभग 300 वर्षों के बाद आज भी प्रेरणादायक है। विद्यार्थी, लोकमाता देवी अहिल्या बाई के जीवन से प्रेरणा लेकर निरंतर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। राज्यपाल  पटेल मंगलवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि और पदक प्रदान करने के साथ बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि दीक्षांत उपाधि केवल प्रमाण-पत्र नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र को आगे ले जाने की जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज उपाधियां प्राप्तकर्ताओं में बेटों के मुकाबले बेटियों की संख्या अधिक है। यह “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने विद्यार्थियों का आहवान किया कि हमेशा सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता की भावना के साथ गरीब, वंचित और जरूरतमंदों की मदद करें। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास और प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 में भारत को विकसित बनाने में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान होगा। राज्यपाल  पटेल ने विश्वविद्यालय द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन प्रयासों की सराहना की। रामायण के हर पात्र से शिक्षा ग्रहण करें विद्यार्थी राज्यपाल  पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि विपरीत परिस्थितियों में हमेशा अडिग रहे। ईमानदार रहे। सच्चाई के रास्ते पर चलें। कभी असत्य नहीं बोलें। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरूषोत्तम राम के जीवन में भी अनेक कठिनाईयां आई थी। इसके बाद भी उन्होंने अपनी मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा कभी नहीं छोड़ी। माता-पिता ने भगवान  राम को जो आदेश दिया, उसका उन्होंने अक्षरश: पालन किया। विद्यार्थियों को रामायण के हर पात्र से शिक्षा ग्रहण करना चाहिए। दीक्षांत समारोह में स्थानीय सांसद  शंकर लालवानी ने भारत को विकसित बनाने में योगदान देने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का आहवान किया। पद्म से सम्मानित  नारायण व्यास ने कहा कि विद्यार्थी अपने जीवन का लक्ष्य बनाए और उसे पूरा करने के लिये परिश्रम करें। उत्कृष्ट पढ़ाई करें जिससे कि उन्हें रोजगार के समुचित अवसर मिल सके। विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने विश्वविद्यालय द्वारा उच्च शिक्षा के उन्मुखीकरण और गुणवत्तापूर्ण मूल्य संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। समारोह में कुल सचिव, प्राचार्य, प्रोफेसर्स, विद्यार्थी, उनके परिजन तथा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय कार्य परिषद के सदस्य उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- समावेशी विकास के साथ तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था वाला राज्य बना मप्र

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था समावेशी विकास के साथ अत्यंत गतिशील अर्थव्यवस्था बन गई है। वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी प्रशासन और दूरदर्शी नीतियों के साथ मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। मध्यप्रदेश विधान सभा में मंगलवार को प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध रूप से संतुलित और परिणामोन्मुखी है। प्रमुख बिंदु 1. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित मूल्यों पर ₹16,69,750 करोड़ अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹15,02,428 करोड़ की तुलना में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 2. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद स्थिर (2011-12) मूल्यों पर ₹7,81,911 करोड़ अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹7,23,724 करोड़ की तुलना में 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है। 3. वित्तीय वर्ष 2011-12 से वित्तीय वर्ष 2025-26 की अवधि के दौरान मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति शुद्ध आय प्रचलित मूल्यों पर ₹38,497 से बढ़कर ₹1,69,050 हो गई तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर ₹38,497 से बढ़कर ₹76,971 हो गई, जो वास्तविक आय स्तर में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है। 4. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) की क्षेत्रीय संरचना प्रचलित मूल्यों पर इस प्रकार रही—प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत। 5. स्थिर (2011-12) मूल्यों पर इनकी हिस्सेदारी क्रमशः प्राथमिक क्षेत्र 33.54 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र 26.18 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र 40.28 प्रतिशत रही। 6. वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 43.09 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 33.54 प्रतिशत रही। प्रचलित मूल्यों पर इस क्षेत्र का कुल मूल्य वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹6,33,532 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹6,79,817 करोड़ हो गया, जो 7.31 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 7. वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत फसलों का सर्वाधिक योगदान 30.17 प्रतिशत रहा, इसके बाद पशुधन 7.22 प्रतिशत, वानिकी 2.13 प्रतिशत, मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि 0.61 प्रतिशत तथा खनन एवं उत्खनन 2.96 प्रतिशत रहा। 8. वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 19.79 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 26.18 प्रतिशत रही। द्वितीयक क्षेत्र का कुल GSVA वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹2,84,125 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹3,12,350 करोड़ हो गया, जो प्रचलित मूल्यों पर 9.93 प्रतिशत तथा स्थिर मूल्यों पर 6.87 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 9. वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र के अंतर्गत निर्माण क्षेत्र का सर्वाधिक योगदान 9.22 प्रतिशत रहा, इसके बाद विनिर्माण का 7.22 प्रतिशत तथा विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगिता सेवाओं का 3.35 प्रतिशत योगदान रहा। 10. वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीयक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 37.12 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 40.28 प्रतिशत रही। तृतीयक क्षेत्र का कुल GSVA वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹5,05,679 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹5,85,588 करोड़ हो गया, जो प्रचलित मूल्यों पर 15.80 प्रतिशत तथा स्थिर मूल्यों पर 12.07 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 11. वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीयक क्षेत्र के अंतर्गत व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट का सर्वाधिक योगदान 10.35 प्रतिशत रहा। इसके पश्चात अन्य सेवाएँ 7.80 प्रतिशत, अचल संपत्ति, आवास स्वामित्व एवं व्यावसायिक सेवाएँ 4.98 प्रतिशत, लोक प्रशासन 4.96 प्रतिशत, वित्तीय सेवाएँ 3.73 प्रतिशत, परिवहन एवं भंडारण 2.80 प्रतिशत, संचार एवं प्रसारण संबंधी सेवाएँ 1.68 प्रतिशत तथा रेलवे का 0.82 प्रतिशत योगदान रहा। अन्य क्षेत्रों में प्रमुख उपलब्धियाँ लोक वित्त, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थान वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹2,618 करोड़ के राजस्व आधिक्य का अनुमान है। राजकोषीय घाटा GSDP का 4.66 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि राजस्व प्राप्तियाँ GSDP के 17.16 प्रतिशत के बराबर आंकी गई हैं। कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत वृद्धि अपेक्षित है तथा ऋण–GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कृषि एवं ग्रामीण विकास वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 7.66 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उद्यानिकी क्षेत्र 28.39 लाख हेक्टेयर रहा, जिसमें 425.68 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुँचा। कुल 72,975 किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया तथा 40.82 लाख ग्रामीण आवास पूर्ण किए गए। औद्योगिक विकास, एमएसएमई एवं अधोसंरचना द्वितीयक क्षेत्र में 9.93 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र में 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिनमें ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश से लगभग 1.7 लाख रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सहायता ₹22,162 करोड़ रही। राज्य में 1,723 स्टार्टअप तथा 103 इनक्यूबेशन केंद्र संचालित हैं। सीएसआर व्यय ₹2,600.47 करोड़ रहा तथा पर्यटन आगमन 13.18 करोड़ रहा। नगरीय विकास अमृत 2.0 के अंतर्गत ₹24,065 करोड़ का आवंटन किया गया, जिसमें 1,134 परियोजनाएँ स्वीकृत हुईं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 8.75 लाख आवास पूर्ण किए गए। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राज्य को आठ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) 2021-22 के अनुसार कुल स्वास्थ्य व्यय ₹34,112 करोड़ रहा, जो GSDP का 3 प्रतिशत है। नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। मातृ मृत्यु अनुपात 379 (2001-03) से घटकर 142 (2021-23) प्रति लाख जीवित जन्म हो गया। शिक्षा एवं कौशल विकास वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल बजट का 10.37 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.00 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है, जबकि कक्षा 6-8 में यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को SWAYAM पोर्टल पर मॉडल राज्य घोषित किया गया। तकनीकी संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई है। मुख्यमंत्री मेधावी योजना के अंतर्गत 45,668 विद्यार्थियों को ₹500 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए फार्म पॉन्ड व सहकारिता मॉडल पर जोर

भोपाल मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार ने सोमवार को भोपाल स्थित मध्यप्रदेश राज्य मत्स्य महासंघ (सहकारी) मर्यादित के सभागार में विभाग की समीक्षा की। बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति, प्रदेश में मत्स्य उत्पादन की वर्तमान स्थिति एवं आगामी कार्य योजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार आगामी 2 वर्षों में प्रदेश में मत्स्य उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। राज्यमंत्री  पंवार ने कहा कि “किसान कल्याण वर्ष” में मत्स्य पालकों की आर्थिक समृद्धि के लिए विशेष कार्य योजना तैयार की जाए तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले मछुआरों को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जाए। राज्यमंत्री  पंवार ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिला स्तर पर मत्स्य महासंघ के माध्यम से मछुआरों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जाए तथा रोजगार के नवीन अवसर सृजित किए जाएं। राज्यमंत्री  पंवार ने मत्स्य पालन एवं एक्वाकल्चर को प्रोत्साहित करने के लिये "फार्म पॉन्ड मॉडल" की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर बल दिया। साथ ही सहकारिता के माध्यम से मछली पालन के साथ सिंघाड़ा, कमलगट्टा एवं मखाना जैसी पूरक गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए, जिससे मत्स्य पालकों की आय में बहुआयामी वृद्धि सुनिश्चित हो सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए। राज्यमंत्री  पंवार ने बताया कि वर्तमान में विभिन्न वर्गों की 2645 मछुआ समितियां पंजीकृत हैं, जिनकी कुल सदस्य संख्या 1,00,197 है। प्रदेश में 4.42 लाख हैक्टेयर जलक्षेत्र उपलब्ध है, जिसमें से 99 प्रतिशत क्षेत्र को मत्स्य पालन के अंतर्गत लाया जा चुका है। मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की है। मंत्री  पंवार ने कहा कि जिन तालाबों में 6 से 9 महीने तक पानी रहता है, वहां बोनसाई सीड के जरिए मत्स्य उत्पादन किया जाए। मत्स्य समितियों की जांच कर फर्जी और निष्क्रिय सदस्यों को हटाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि असली मछुआरों को लाभ मिल सके। समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव  स्वतंत्र कुमार सिंह, एमडी  अनुराग चौधरी, डायरेक्टर  मनोज कुमार पथरोलिया उपस्थित रहे। बैठक में प्रदेश को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प के साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया।  

आरडीएसएस अंतर्गत पश्चिम मप्र में 7500 नए ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली वितरण क्षमता बढ़ाई

भोपाल. शासन की महत्वपूर्ण योजना रिवेम्प्ड डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत पश्चिम मप्र यानि मालवा निमाड़ में अब तक 7500 नए ट्रांसफार्मर लगाए गए है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि इन नए ट्रांसफार्मरों से औद्य़ोगिक क्षेत्र, व्यापारिक क्षेत्र, कृषि क्षेत्र, आबादी क्षेत्र की बिजली वितरण क्षमता का विस्तार किया गया हैं। लाखों उपभोक्ताओं की बिजली वितरण व्यवस्था में गुणात्मक सुधार किया गया है। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया कि आरडीएसएस के तहत 100 केवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर कंपनी क्षेत्र के इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर, शाजापुर में स्थापित कर उपभोक्ताओं की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की गई है। प्रबंध निदेशक श्री सिंह ने बताया कि इंदौर जिले में 900 से ज्यादा ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं। उज्जैन जिले में 1200, देवास जिले में 940, रतलाम 540, खरगोन 496, धार 490, खंडवा 485, झाबुआ 400, आलीराजपुर 381, मंदसौर 403, शाजापुर 333, नीमच 290, बुरहानपुर 289 में, बड़वानी में 229 स्थानों पर ट्रांसफार्मर लगाकर वितरण क्षमता विस्तार किया गया है। इसी तरह अन्य जिलों में भी ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं।  

दिव्यांगजनों के लिये तहसील स्तर पर शिविर, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अंत्येष्टि सहायता राशि बढ़ाने का प्रस्ताव

सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण विभाग की परामर्शदात्री समिति की बैठक सम्पन्न भोपाल दिव्यांगजनों के चिन्हांकन के लिये तहसील स्तर पर शिविर आयोजित करने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अंत्येष्टि सहायता योजना की राशि बढ़ाये जाने का प्रस्ताव सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई परामर्शदात्री समिति की बैठक में पारित किया गया। बैठक में समिति सदस्य विधायक सर्वश्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह, प्रीतम लोधी और भैरो सिंह बापू उपस्थित रहे। मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सामाजिक रूप से कमजोर और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिये अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। योजनाओं के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के लिये विधायकगणों को परामर्शदात्री समिति के सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है। इनके महत्वपूर्ण सुझाव और अनुभवों के माध्यम से सामाजिक न्याय विभाग जरूरतमंदों को योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचा सकेगा। उन्होंने कहा कि जन-प्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में भागीदारी के लिये आमजन को प्रेरित किया जाना आसान होता है। उन्होंने समिति सदस्यों से अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों और जिलों में मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के नये प्रावधानों अनुसार आयोजित कराने की अपेक्षा की। नये प्रावधानों के तहत सामूहिक विवाह/निकाह योजना में न्यूनतम 11 और अधिकतम 200 जोड़ों को शामिल कर आयोजन किया जा सकता है। चालू वित्त वर्ष में इस योजना के अंतर्गत 54 हजार से अधिक जोड़ों का विवाह/निकाह करावाएं जा चुके हैं। बैठक में सदस्यों ने दिव्यांगजनों के चिन्हांकन के लिये तहसील स्तर पर शिविर आयोजित करने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि बढ़ाने तथा अंत्येष्टि सहायता योजना की राशि बढ़ाए जाने का सुझाव दिया। समिति द्वारा उक्त प्रस्ताव राज्य शासन को भेजने का निर्णय लिया गया। बैठक में प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की कार्य-प्रणाली और प्रगति के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह योजना के अंतर्गत 551 हितग्राहियों को 11 करोड़ 2 लाख रुपये, दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना में 736 हितग्राहियों को 13 करोड़ 38 लाख रुपये, दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक उपकरण वितरण में 17 हजार 503 हितग्राहियों को 8 करोड 75 लाख रुपये के उपकरण प्रदान किये गये हैं। विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत 53 लाख से अधिक हितग्राहियों को 325 करोड़ रुपये की राशि प्रतिमाह उनके खातों में अंतरित की जा रही है। साथ ही विभाग द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण के लिये अनेक योजनाएँ भी संचालित की जा रही हैं।  

मजदूर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना सरकार का लक्ष्य : पटेल

भोपाल  मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल की 64वीं बैठक में श्रमिकों के बच्चों के शैक्षणिक उत्थान को केंद्र में रखते हुए मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन देने और प्रारंभिक स्तर पर कॅरियर काउंसलिंग की व्यवस्था विकसित करने पर प्राथमिकता दी गई। श्रम मंत्री  प्रहलाद पटेल ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना मंडल की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मंडल की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों को इन अवसरों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। बैठक में मंडल का आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट माननीय सदस्यों द्वारा चर्चा उपरांत सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक में श्रम सचिव  रघुराज राजेन्द्रन, कल्याण आयुक्त  संजय कुमार एवं श्रमिकों एवं नियोजकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंत्री  पटेल ने कहा कि श्रमिकों और कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखना शासन की जिम्मेदारी है। वेतनमान से जुड़े मामलों में देरी कार्यकुशलता को प्रभावित करती है, इसलिए सभी लंबित प्रकरणों की सूची बनाकर त्वरित कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के समाधान और सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा न करने वाले प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण, श्रमिक कल्याण योजनाओं की प्रगति, खेल एवं कौशल विकास गतिविधियों तथा नवीन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में श्रम सचिव  रघुराज राजेन्द्रन ने बताया कि श्रम कल्याण बोर्ड में संपूर्ण कंप्यूटरीकरण एमपीएसईडीसी के माध्यम से किया जा रहा है। श्रम विभाग द्वारा नवीन श्रम संहिताओं पर संभागीय स्तर की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें से एक भोपाल में संपन्न हो चुकी है। इन संहिताओं के आधार पर राज्य में श्रम कानूनों में संशोधन किए जा रहे हैं। सिलाई केंद्रों का पुनः संचालन, 17 केंद्र सक्रिय बैठक में बताया गया कि चचाई और इंदौर में सिलाई केंद्रों को पुनः प्रारंभ किया जा रहा है। वर्तमान में 27 श्रम कल्याण केंद्रों में से 17 में सिलाई-कढ़ाई केंद्र संचालित हो रहे हैं। कौशल विकास विभाग द्वारा प्रशिक्षणार्थियों का परीक्षण कराया गया है। मंडल के अंतर्गत संचालित श्रम कल्याण केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण, राष्ट्रीय पर्व, विश्वकर्मा जयंती जैसे आयोजन नियमित रूप से किए जा रहे हैं। श्रमिकों के लिए कंप्यूटर केंद्र भी संचालित हैं। खेलों को बढ़ावा, समयावधि बढ़ाने का प्रस्ताव बैठक में खेल प्रतियोगिताओं की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। बताया गया कि खेलों के माध्यम से श्रमिकों का सर्वांगीण विकास संभव है। साथ ही नियमित कर्मचारियों को समयमान वेतनमान के एरियर भुगतान को शीर्ष प्राथमिकता देने की बात कही गई। भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के निराकरण पर भी चर्चा हुई। अंत में सभी सदस्यों ने श्रमिक एवं कर्मचारी हितों को सर्वोपरि रखते हुए निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प लिया।