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बड़ी मुश्किल में बॉलीवुड सितारे: पान मसाले में महंगा केसर मिलने पर कोर्ट ने बुलाया शाहरुख, अक्षय, अजय और टाइगर

गुना  क्या 10 रुपए के गुटखे में 4 लाख रुपए किलो वाला असली केसर होना मुमकिन है? इसी सवाल ने अब बॉलीवुड के दिग्गज सुपरस्टार्स को कानूनी कटघरे में खड़ा कर दिया है। मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक फेमस 'पान मसाला' के विज्ञापनों में 'दाने-दाने में केसर का दम' के दावे को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने गुटखा में 'केसर' के दावे को लेकर फिल्म स्टार अक्षय कुमार, अजय देवगन, शाहरूख खान और टाइगर श्रॉफ को तलब किया है। दरअसल 'दाने-दाने में केसर का स्वाद' के दावे को गुना के एक विट्ठल अहिरवार ने कोर्ट में चैलेंज किया है। उन्होंने आयोग में केस दाखिल किया है। गुना निवासी विट्ठल अहिरवार ने अपने मित्र के लिए एक फेमस पान मसाला का पाउच खरीदा था। विज्ञापन में बॉलीवुड स्टार्स अक्षय कुमार, शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को यह कहते सुना कि इसमें 'केसर' है, लेकिन जब विट्ठल ने पाउच के कंटेंट्स (सामग्री) की जांच की, तो उसमें केसर का कोई जिक्र नहीं मिला। उपभोक्ता विट्ठल ने अपने अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह यादव के माध्यम से पहले जिला उपभोक्ता फोरम, गुना में परिवाद पेश किया। हालांकि, वहां से अभिनेताओं के नाम हटाने का आदेश मिलने के बाद, विट्ठल ने अधिवक्ता अनुराग खासकलम के माध्यम से राज्य उपभोक्ता आयोग (Case No – FA/25/1678) में अपील दायर की थी। 5 मार्च को होना होगा पेश मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित पान मसाला निर्माता कंपनी और इसके विज्ञापन करने वाले सितारों को यह साबित करना होगा कि उत्पाद में वाकई केसर है। बता दें कि पिछली तारीख 20 जनवरी 2026 को किसी भी पक्ष की ओर से जवाब नहीं आया। आयोग ने अब अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को रखी है। इसमें सभी ब्रांड एंबेसडर और गुना के पान मसाला विक्रेता को पेश होने का अंतिम आदेश दिया है। पान मसाला में 'केसर के दावे' को चैलेंज करने का तर्क पान मसाला के विज्ञापन और उसमें फिल्म स्टार द्वारा किए गए 'दाने दाने में केसर का दम' के दावे को चैलेंज करते हुए अपीलकर्ता विट्ठल अहिरवार ने कई तर्क दिए हैं। इसमें कहा गया है कि असली केसर की कीमत 4 लाख से 4.5 लाख रुपए प्रति किलो है। ऐसे में 10 रुपए के पाउच में केसर का दावा पूरी तरह भ्रामक है।     उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि युवा इन सितारों को अपना रोल मॉडल मानते हैं। उनके प्रभाव में आकर युवा गुटखे के आदी हो रहे हैं, जिससे 20 से 40 वर्ष की उम्र में ही वे कैंसर और शारीरिक कमजोरी जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।     अपीलकर्ता ने मांग की है कि ऐसे भ्रामक विज्ञापनों के जरिए जनता को गुमराह करने वाले सितारों से उनके 'पद्मश्री' पुरस्कार वापस लिए जाने चाहिए और इन विज्ञापनों पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। यदि साबित नहीं कर सके तो, जुर्माना-प्रतिबंध लग सकता है उपभोक्ता मामलों के जानकार वरिष्ठ अधिवक्ता पवन नन्हौरिया बताते हैं कि गुना के विटठ्ल अहिरवार द्वारा उठाया गया मुद्दा समाज हित में है। कंपनियां सितारों को मोटी रकम देकर कुछ भी भ्रामक और झूठे दावे कराती हैं। जबकि वे सत्यता से परे होते हैं। इस मामले में पान मसाला कंपनी, विक्रेता और सिने स्टार को यह सिद्ध करना होगा कि विज्ञापन में जो दावा किया जा रहा है, वह सत्य और सही है। उनके प्रोडक्ट में वे तत्व मौजूद हैं, जिनका दावा किया गया है। यदि वे ऐसा करने में विफल रहे तो कंपनी सहित उन पर जुर्माना लग सकता है। वहीं कंपनी के इस विज्ञापन पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।

Mohan Yadav ने उज्जैन बायपास रेल लाइन परियोजना की मंजूरी पर रेल मंत्री का जताया आभार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन बायपास रेलवे लाइन परियोजना की स्वीकृति के लिए रेल मंत्री  वैष्णव का माना आभार नईखेरी-चिंतामन गणेश को जोड़ने वाली 8.60 किमी लंबी बायपास रेलवे लाइन से निर्बाध रेल आवागमन होगा सुनिश्चित उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रेल मंत्रालय द्वारा उज्जैन बायपास लाइन को स्वीकृति प्रदान करने के लिए रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव का आभार माना है। कुल 8.60 किमी की नईखेड़ी-चिंतामन गणेश रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली इस लाइन के प्रारंभ होने से उज्जैन के समीप वैकल्पिक रेल मार्ग उपलब्ध होगा। इससे उज्जैन से ट्रेनों को वापस मोड़ने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और ट्रेनों में विलंब नहीं होगा। यह व्यवस्था 'सिंहस्थ-2028' के दौरान श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाएगी। उल्लेखनीय है कि भारतीय रेल द्वारा 189.04 करोड़ रुपये की इस परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है।  

12 साल छोटे प्रेमी को पत्नी से खरीदने का मामला, महिला अधिकारी पर विवादित आरोप

भोपाल  भोपाल के कुटुंब न्यायालय में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने 90 के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'जुदाई' की यादें ताजा कर दीं। भोपाल के एक परिवार में शांति बहाली के लिए रिश्तों का बाकायदा वित्तीय समझौता किया है। एक महिला ने अपनी गृहस्थी में जहर घोल रही 'सौतन' से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की संपत्ति और कैश लेकर अपने पति को हमेशा के लिए उसके नाम कर दिया। शहर के न्यायिक गलियारों में इस 'महंगे तलाक' की चर्चा हर तरफ है। सरकारी विभाग में हैं कार्यरत मामला केंद्रीय सरकारी विभाग का है। यहां तैनात एक 42 वर्षीय अधिकारी का प्रेम प्रसंग अपनी ही सहकर्मी के साथ शुरू हुआ। दिलचस्प बात यह है कि प्रेमिका की उम्र 54 वर्ष है, जो अधिकारी से उम्र में 12 साल बड़ी है। इस प्रेम के परवान चढ़ते ही अधिकारी ने अपने घर, पत्नी और दो मासूम बेटियों की अनदेखी शुरू कर दी। घर में आए दिन होने वाले विवादों ने वातावरण को बोझिल बना दिया था। बेटियों पर पड़ रहा था असर माता-पिता के बीच हर दिन होने वाली 'महाभारत' का सबसे बुरा असर 16 और 12 साल की दो बेटियों पर पड़ रहा था। मानसिक अवसाद से जूझ रही बड़ी बेटी ने हिम्मत दिखाई और मामले को कुटुंब न्यायालय तक ले गई। काउंसलिंग सत्र के दौरान पति ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि वह अपनी पत्नी के साथ खुश नहीं है और उसे अपनी सहकर्मी (प्रेमिका) के साथ ही मानसिक शांति मिलती है। जब रिश्ता जुड़ना नामुमकिन है, तो पत्नी ने एक व्यावहारिक रास्ता चुना। मान ली यह शर्त उसने मांग रखी कि बेटियों के भविष्य और गुजर-बसर के लिए उसे एक शानदार डुप्लेक्स मकान और 27 लाख रुपये नकद दिए जाएं। हैरत की बात यह रही कि पति की प्रेमिका ने बिना किसी हिचकिचाहट के यह शर्त मान ली। प्रेमिका का तर्क था कि वह अपने साथी के परिवार को बेसहारा नहीं देखना चाहती, इसलिए वह अपनी जीवन भर की जमापूंजी इस सौदे में लगाने को तैयार है। पारिवारिक मामलों के काउंसलर्स का मानना है कि जहां भावनाएं खत्म हो जाएं, वहां जबरन साथ रहने से बेहतर सम्मानजनक विदाई होती है। यह निर्णय भले ही समाज को अजीब लगे, लेकिन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा के नजरिए से यह एक तार्किक कदम है। जब रिश्ता केवल बोझ बन जाए तो शांति के लिए अलग होना ही अच्छा है।

अन्नपूर्णा मंडप में रात के समय बागेश्वर महाराज ने किया किचन का काम, भक्तों के लिए बनाई प्रसादी

छतरपुर बुंदेलखंड के प्रसिद्ध आस्था केंद्र बागेश्वर धाम में आयोजित होने जा रहे सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 13 और 14 फरवरी को हल्दी एवं मेहंदी की रस्में संपन्न होंगी, जबकि 15 फरवरी को 300 बेटियों की बारात धाम पहुंचेगी। पिछले एक महीने से दिन-रात चल रही तैयारियों के बीच 12-13 फरवरी की आधी रात को अचानक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की हकीकत परखी गई। रात 3:30 बजे अन्नपूर्णा मंडप में महाराज पहुंचे।  मध्य रात्रि के दरमियान बागेश्वर महाराज मोटरसाइकिल से अचानक अन्नपूर्णा मंडप पहुंचे। उस समय सैकड़ों महिला-पुरुष कार्यकर्ता और सेवादार आगामी मंडप के दिवस पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी और भंडारे की तैयारी में जुटे थे। महाराज के अचानक पहुंचने से वहां मौजूद सेवादार, कार्यकर्ता आश्चर्यचकित रह गए। इस दौरान महाराज श्री ने स्वयं भट्टी पर बैठकर पूड़ियां तलीं और भंडार गृह, प्रसाद वितरण, प्रसाद पाने आदि व्यवस्था को पैदल घूमकर देखा।  तदोपरांत अन्नपूर्णा मंडप के बाद महाराज सीधे उस मुख्य विवाह मंडप में पहुंचे, जहां 300 कन्याओं का पाणिग्रहण संस्कार होना है। मंडप की साज-सज्जा, बैठने की व्यवस्था, आवागमन मार्ग और सुरक्षा इंतजाम, सज सज्जा सहित आदि जगहों का बारीकी से अवलोकन किया गया। वहीं बगल में लगे 57 मायने वाले बेटियों के उपहार सामग्री कक्ष प्रांगण में जाकर विवाह हेतु तैयार किए गए सामान की जानकारी ली और वीडियो के माध्यम से व्यवस्थाओं को साझा किया। बागेश्वर महाराज हर वर्ष रात्रि निरीक्षण करते हैं। धाम में हर वर्ष आयोजित होने वाले सामूहिक कन्या विवाह से पूर्व एक-दो दिन पहले बागेश्वर महाराज स्वयं रात्रि निरीक्षण करते हैं। उद्देश्य यह रहता है कि आने वाले श्रद्धालुओं और बारातियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो चाहे वह प्रसाद, आवास, पेयजल या आवागमन से जुड़ी हो। निरीक्षण के दौरान समिति को आवश्यक निर्देश भी दिए गए, ताकि कार्यक्रम सुचारु और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके। समिति द्वारा महाराज के निर्देशों के अनुरूप व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 300 जरूरतमंद बेटियों के विवाह को लेकर पूरे धाम में सेवा और समर्पण का वातावरण है। हल्दी, मेहंदी और विवाह समारोह के साथ यह आयोजन आस्था, सामाजिक समरसता और सेवा भावना का अद्भुत उदाहरण बन रहा है। कार्यक्रम में शामिल होंगे मुख्यमंत्री मोहन यादव हल्दी, मेहंदी कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शुक्रवार को दोपहर 3 बजे बागेश्वर धाम आएंगे। धाम के सेवादार नितेंद्र चौबे ने बताया कि दोपहर 3 बजे मुख्यमंत्री के आने की सूचना है। अधिकृत जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 3.45 पर हेलीकॉप्टर से बागेश्वर धाम पहुंचेंगे और बाद में खजुराहो एयरपोर्ट से शाम 5.20 बजे विमान से भोपाल रवाना हो जाएंगे। शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा देने के उद्देश्य से पूज्य संतों की उपस्थिति में शुक्रवार को गुरुकुलम का शुभारंभ हो रहा है। वैदिक शिक्षा के साथ यहां पढऩे वाले विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से भी अवगत कराया जाएगा। गुरुकुलम का शुभारंभ करने अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक रमेश भाई ओझा एवं प्रदीप मिश्रा सीहोर वाले बागेश्वर धाम आ रहे हैं। दोनों प्रख्यात संत पहली बार बागेश्वर धाम आ रहे हैं। गुरुकुलम की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी है। गौशाला में इसकी शुरुआत होगी। पूरी तरह से प्राकृतिक परिवेश में 31 बच्चों को गुरुकुल परंपरा के तहत शिक्षा दी जाएगी। बनारस के प्रकांड विद्वान आचार्य द्वारा गुरुकुलम के बच्चों को शिक्षित किया जाएगा। 

अचानक बढ़े बिजली बिल से घरवालों की नींद उड़ी, स्मार्ट मीटर मामले में आयोग ने आदेश जारी किए

 ग्वालियर  ग्वालियर में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के खिलाफ दायर एक महत्वपूर्ण प्रकरण में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने स्मार्ट मीटर लगाने के बाद अचानक बढ़े बिजली बिल को सेवा में कमी मानते हुए बिजली कंपनी को संशोधित बिल जारी करने और क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए हैं। स्मार्ट मीटर लगते ही बढ़ गया बिल प्रकरण में सामने आया कि स्मार्ट मीटर लगाने के दो दिन के भीतर ही उपभोक्ता का बिजली बिल चार गुना बढ़ गया। अप्रैल 2025 में 159 यूनिट खपत पर 437 रुपए का बिल जारी हुआ था, लेकिन दो दिन बाद ऑनलाइन पोर्टल पर 157 यूनिट खपत के साथ 1830 रुपए की राशि दर्शा दी गई। दो दिन में चार गुना बढ़ा बिल शशि वाजपेयी ने आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि बिजली कंपनी ने बिना स्पष्ट सहमति के उनका पुराना मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर स्थापित कर दिया। विरोध के बाद पुराना मीटर दोबारा लगाया गया, लेकिन इसका सही रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया। आयोग ने माना कि एक ही माह में दो अलग बिल जारी करना और शिकायत के बावजूद सुधार न करना सेवा में कमी है। आयोग ने मानी कमी आयोग ने कंपनी को 45 दिनों में वास्तविक खपत के आधार पर संशोधित बिल जारी करने के आदेश दिए। साथ ही 2,000 रुपए मानसिक क्षति और 2,000 रुपए वाद व्यय देने के निर्देश दिए। स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ता विवाद शहर में अब तक करीब 23 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का आरोप है कि इनसे बिजली बिल बढ़ रहा है। विरोध के चलते फिलहाल स्मार्ट मीटर लगाने का काम रोक दिया गया है। ये स्थिति केवल ग्वालियर शहर में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में बनी हुई है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद लगातार दो-तीन गुना बिल बढ़ने की शिकायतें बिजली विभाग तक पहुंच रही हैं।

MP के ‘धन-कुबेर’ IPS अफसर: किराए से आमदनी सैलरी से ज्यादा, संपत्ति हुई सार्वजनिक

भोपाल  मध्यप्रदेश कैडर के कई आईपीएस अधिकारी अपनी सैलरी से ज्यादा कमाई किराए और संपत्तियों से कर रहे हैं। यह खुलासा केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को सौंपे गए वार्षिक संपत्ति विवरण (Annual Property Return) से हुआ है। नियम के मुताबिक सभी आईपीएस अधिकारियों को अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा देना अनिवार्य होता है। ताजा आंकड़ों में सामने आया है कि प्रदेश के कई वरिष्ठ अधिकारी करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं और हर साल लाखों-करोड़ों रुपए किराए से कमा रहे हैं। अजय शर्मा के पास 11.65 करोड़ की संपत्ति पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष अजय शर्मा के पास करीब 11 करोड़ 65 लाख रुपए की संपत्ति दर्ज है। उन्हें हर महीने लगभग 3 लाख 80 हजार रुपए किराया प्राप्त होता है। भोपाल और दिल्ली सहित अन्य शहरों में भी उनकी अचल संपत्तियां बताई गई हैं। उपेंद्र जैन और वरुण कपूर भी करोड़पति आईपीएस उपेंद्र जैन के पास 8 करोड़ 39 लाख रुपए की संपत्ति है। इंदौर, बड़वाह और भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र में उनकी संपत्तियां दर्ज हैं। जेल डीजी वरुण कपूर के पास 8 करोड़ 43 लाख रुपए की अचल संपत्ति है। उन्हें हर साल करीब 5 लाख 12 हजार रुपए किराए से आय होती है। जयदीप प्रसाद और अनिल कुमार की भी बड़ी संपत्ति एडीजी, एससीआरबी जयदीप प्रसाद के पास 5 करोड़ 32 लाख रुपए की चल संपत्ति दर्ज है। रांची, हजारीबाग, भोपाल, सीहोर और गुड़गांव में उनकी संपत्तियां हैं। उन्हें हर साल करीब 74 लाख रुपए की आय इन संपत्तियों से होती है। महिला शाखा के स्पेशल डीजी अनिल कुमार के पास 4 करोड़ 81 लाख रुपए की संपत्ति बताई गई है। नियम क्या कहते हैं? केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के नियमों के अनुसार हर आईपीएस अधिकारी को अपनी संपत्ति का पूरा ब्यौरा देना अनिवार्य है। इसी प्रक्रिया के तहत यह जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में आई है।मध्यप्रदेश में कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं और नियमित वेतन के अलावा किराए से भी बड़ी आय अर्जित कर रहे हैं। संपत्ति विवरण के खुलासे के बाद प्रशासनिक हलकों में इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है।

नगर परिषद भरोसा के कर्मचारियों को भुगतान न मिलने से हो रही परेशानी

इंदौर नगर परिषद भोरासा जिला देवास मध्य प्रदेश यहां के कर्मचारी संघ के कर्मचारी गण ने बताया कि 6 महीने से अधिक समय हो गया है ! अभी तक हमारी तनख्वा आप प्राप्त है कर्मचारियों ने पूछा कि हमारी तनक अभी तक क्यों नहीं मिल पा रही है? तो जवाब में आया कि अभी तक ऊपर से तनख्वाह नहीं आई तो हम आपको कहां से दें ? यह भी प्राप्त हुआ कि उनमें से एक कर्मचारी बहुत ज्यादा परेशान होकर मुख्यमंत्री मोहन यादव जी से विनती कर रहा है कि हमारे बच्चों को स्कूल से निकाला जा रहा है और परीक्षा नजदीक आ रही है ऐसे में हमारे हमारे बच्चों का भविष्य भी अंधकार में होगा अगर हम लोगों ने स्कूल की फीस भरने में असमर्थ हैं? और इतना ही नहीं हमारे घर में किराने का सामान नहीं है कुछ कर्मचारी है बोल रहे कि इस स्थिति में हम जहर खा लेंगे उसके बाद भी तो हमें आप पैसा दोगे अगर हमें पैसा नहीं दिया तो अगला कदम वही होगा जो हमने बोला है? उसके बाद हम मरे या जिए इस से कोइ फरक नही पड़ रहा है !सुनील ठाकुर कर्मचारी नगर परिषद ने कहा कि समय रहते भुगतान करें ताकि हमारे साथ-साथ हमारे परिवार का भी भविष्य उज्जवल में हो सके कर्मचारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि नगर परिषद भरोसा के कर्मचारियों का भुगतान अति शीघ्र कराया जाए।

महाकाल की भक्ति में सुविधा: महाशिवरात्रि पर चलेंगी तीन मेला स्पेशल ट्रेनें

उज्जैन  महाशिवरात्रि महापर्व पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और सीहोर (कुबेरेश्वर धाम) जाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी राहत दी है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए उज्जैन से भोपाल और संत हिरदाराम नगर के मध्य तीन जोड़ी मेला स्पेशल ट्रेनें (Special Mela Trains) चलाने का निर्णय लिया है। मंडल रेल प्रवक्ता मुकेश कुमार ने बताया कि ये ट्रेनें 13 से 23 फरवरी तक संचालित की जाएंगी। ट्रेनों का शेड्यूल -1. उज्जैन संत हिरदाराम नगर उज्जैन (09305/09306) संचालनः 13 से 22 फरवरी तक प्रतिदिन । समयः उज्जैन से सुबह 09:00 बजे चलकर दोपहर 13:30 बजे संत हिरदाराम नगर पहुंचेगी। वापसी में वहां से दोपहर 14:30 बजे चलकर शाम 19:30 बजे उज्जैन आएगी। स्टॉपेजः तराना रोड, मक्सी, बेरछा, कालीसिंध, अकोदिया, शुजालपुर, कालापीपल और सीहोर।     उज्जैन भोपाल उज्जैन (09307/09308) संचालनः 13 से 23 फरवरी तक प्रतिदिन। समयः उज्जैन से रात 21:00 बजे चलकर रात 02:10 बजे भोपाल पहुंचेगी। वापसी में भोपाल से सुबह 03:10 बजे चलकर सुबह 08:00 बजे उज्जैन आएगी। स्टॉपेजः उपरोक्त स्टेशनों के साथ संत हिरदाराम नगर पर भी ठहराव।     उज्जैन संत हिरदाराम नगर उज्जैन (09313/09314) – संचालनः 13-22 फरवरी तक रोज समयः उज्जैन से शाम 16:00 बजे चलकर रात 21:40 बजे संत हिरदाराम नगर पहुंचेगी। वापसी में रात 22:30 बजे चलकर अगले दिन रात 2 बजे उज्जैन पहुंचेगी। स्टॉपेजः तराना रोड, मक्सी, बेरछा, कालीसिंध, अकोदिया, शुजालपुर, कालापीपल और सीहोर। कोच और सुविधा रेलवे प्रशासन के अनुसार, इन मेला स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए सामान्य और स्लीपर श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे। इससे कम बजट में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत मिलेगी। 

एमपी में रेलवे विस्तार पर पर्यावरण चिंता, लाखों पेड़ों की कटाई को केंद्र की हरी झंडी बाकी

इंदौर मध्यप्रदेश में महत्वाकांक्षी महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना के तहत घने जंगलों में निर्माण शुरू करने के लिए रेलवे ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति मांगी है। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद दो जिलों में फैले घने जंगलों में बड़ी रेल लाइन के निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा। दरअसल, भारतीय रेलवे ने मध्य प्रदेश में महू-खंडवा लाइन का गेज बदलने का काम शुरू करने के लिए केंद्र से आखिरी मंजूरी मांगी है। इस काम में 1.24 लाख से ज्यादा पेड़ों को काटा जाएगा। एक बार केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी मिल जाने के बाद, दो जिलों के जंगलों में ब्रॉड गेज लाइन के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि 156 km की ब्रॉड-गेज लाइन, आज़ादी से पहले रियासतों के समय बिछाए गए 118 km के नैरो-गेज ट्रैक की जगह लेगी.गेज बदलने का काम चल रहा है और अगले दो साल में पूरा होने की उम्मीद है.एक बयान में वेस्टर्न रेलवे के रतलाम डिवीजन के PRO मुकेश कुमार ने कहा, लगभग 90 km के महू (डॉ. अंबेडकर नगर)-ओंकारेश्वर रोड सेक्शन के बाकी गेज बदलने के काम के लिए केंद्रीय मंत्रालय से आखिरी मंज़ूरी की जरूरत है.उन्होंने कहा, “महू और मुख्त्यारा-बलवाड़ा के बीच करीब 454 हेक्टेयर जंगल की जमीन पर कंस्ट्रक्शन होगा. जमीन खरीदने के लिए, रेलवे ने पहले ही फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में 100.08 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं और मिनिस्ट्री से इन-प्रिंसिपल मंजूरी ले ली है.” दो साल में पूरा होगा काम अधिकारियों ने बताया कि 156 किमी की ब्रॉड-गेज लाइन, आजादी से पहले रियासतों के समय बिछाए गए 118 किमी के नैरो-गेज ट्रैक की जगह लेगी। गेज बदलने का काम चल रहा है और अगले दो साल में पूरा होने की उम्मीद है। वन विभाग को मिले 100.08 करोड़ एक बयान में वेस्टर्न रेलवे के रतलाम डिवीजन के पीआरओ मुकेश कुमार ने कहा कि लगभग 90 किमी के महू (डॉ. अंबेडकर नगर)-ओंकारेश्वर रोड सेक्शन के बाकी गेज बदलने के काम के लिए केंद्रीय मंत्रालय से आखिरी मंजूरी की जरूरत है। महू और मुख्त्यारा-बलवाड़ा के बीच 454 हेक्टेयर जंगल की जमीन पर कंस्ट्रक्शन होगा। जमीन खरीदने के लिए, रेलवे ने पहले ही वन विभाग में 100.08 करोड़ रुपए जमा कर दिए हैं और मिनिस्ट्री से इन-प्रिंसिपल मंजूरी ले ली है। मुआवजे के तौर पर लगाएंगे डबल पौधे रेलवे अधिकारियों ने कहा कि महू-खंडवा गेज कन्वर्जन से उत्तरी और दक्षिणी भारत के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे पैसेंजर सर्विस और माल ढुलाई दोनों में सुधार होगा। वहीं वन विभाग के एक अधिकारी ने अनुमान लगाया कि इंदौर और पड़ोसी खरगोन जिलों में बाकी कंस्ट्रक्शन के लिए 1.24 लाख पेड़ काटने पड़ सकते हैं। डिपार्टमेंट ने पर्यावरण पर असर कम करने और बड़ी संख्या में पेड़ों को बचाने के लिए एक डिटेल्ड प्लान तैयार किया है। एनवायरनमेंटल नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावित एरिया से दोगुने एरिया में मुआवजे के तौर पर पेड़ लगाए जाएंगे।

HC ने 28 सप्ताह की गर्भावस्था में 13 साल की लड़की को अबॉर्शन की मंजूरी दी, विवादित फैसला

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 24 हफ्ते की सीमा पार हो जाने के बाद भी 13 साल की एक रेप पीड़िता को अबॉर्शन कराने की इजाजत दी है। बच्ची 28 सप्ताह की प्रेग्नेंट है। पीड़िता और उसके परिवार की इच्छा को तरजीह देते हुए अदालत ने डॉक्टरों को सुरक्षित तरीके से अबॉर्शन करने को कहा है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच में जस्टिस विशाल मिश्रा ने कहा कि कानून 24 सप्ताह के बाद मेडिकल टर्मिनेशन (MTP) को बाधित करता है, पर गर्भ को जारी रखने का फैसला गर्भवती पर निर्भर है। इस केस में नाबालिग बच्ची और उसके माता-पिता ने साफ तौर पर कहा है कि वे गर्भ को जारी नहीं रखना चाहते हैं। इस मामले को सागर जिले के खुराई स्थित एक अदालत ने हाई कोर्ट के सामने पेश किया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने रेखांकित किया कि गर्भ को जारी रखने और जन्म देने के लिए गर्भवती की सहमति सबसे ऊपर है, नाबालिग के मामले में भी। अदालत ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के मेडिकल बोर्ड के विचार का भी संज्ञान लिया जिसमें कहा गया है कि चिकित्सकीय गर्भपात संभव है। हालांकि, कुछ जोखिम जरूर है। अदालत ने मेडिकल बोर्ड से कहा है कि बच्ची और उसके परिजनों को जोखिमों के बार में बताया जाए और एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम के द्वारा गर्भपात कराया जाए।