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युवा नवाचार करें, अनुसंधान करें और प्रदेश को सतत विकास की ओर ले जाने के लिये आयें आगे : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

प्रबंधन और वाणिज्य में नवीन अनुसंधान और सतत विकास विषय पर अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का किया शुभारंभ भोपाल प्रबंधन और वाणिज्य में नवीन अनुसंधान और सतत विकास विषय पर अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का शुभारंभ करते हुए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अनुसंधान आधारित विकास लाभप्रद है। हमें अपनी सनातन संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहकर विकास करना होगा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के एमबीए विभाग द्वारा पं. शम्भूनाथ शुक्ल सभागार में आयोजित कांफ्रेंस में उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि आर्थिक तरक्की के लिये भारतीय मूल्यों को दाव पर न लगायें। युवा नवाचार करें, अनुसंधान करें। प्रदेश और देश को सतत विकास की ओर ले जाने के लिये आगे आयें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हमें अपनी भारतीय ज्ञान परंपरा से हटकर कार्य नहीं करना चाहिए यदि हम रास्ते से भटके तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। प्राकृतिक खेती अनुसंधान से ही निकला ज्ञान है जिसके माध्यम से हम अपने और परिवार के साथ ही धरती को स्वस्थ रख पायेंगे। उन्होंने कहा कि मंथन से निकला ज्ञान छात्रों के साथ ही समाज के लिये लाभदायक होगा। हमारा देश विश्वगुरू बनने की ओर अग्रसर है। हम 2047 तक विश्वगुरू तो बनेंगे ही साथ ही आने वाले समय में विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बनेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना की और कहा कि वह नौकरी देने वाले बनें नौकरी करने वाले नहीं। प्रभारी कुलगरू प्रो. सुनील तिवारी ने कहा कि सतत विकास ही सनातन की परिकल्पना है। लगातार हो रहे वर्ग संघर्ष के इस दौर में मानवता को संरक्षित रखने की आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति ही विश्व में शांति स्थापित करने में सक्षम है। उन्होंने टिकाऊ व सतत विकास की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. पद्मेश कुमार ने कहा कि नवीन शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा को जोड़ने का कार्य किया गया है। प्रबंधन और वाणिज्य मुनाफे तक सीमित न रहे। प्रभाव आधारित अनुसंधान उपयोगी है। बिना नवाचार के विकास अधूरा है। अमेरिका से आयीं डॉ. प्रतिभा सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि आधुनिक विकास में नवीन शोध व स्थायी विकास आवश्यक है। अडानी ग्रुप की एनेट एफ विश्वास ने कहा कि मैनेजमेंट व वाणिज्य एक दूसरे को लाभ प्रदान करते हैं। विकास ऐसा हो जो आने वाली पीढ़ी के लिये वरदान बने। जिम्मेदार संस्थान राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विभागाध्यक्ष एमबीए विभाग डॉ. अतुल पाण्डेय ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में 110 रिसर्च स्कालर उपस्थित है और 85 ऑनलाइन जुड़ेंगे। इस दौरान 100 से अधिक शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण होगा। उन्होंने बताया कि 6 देशों के प्रतिनिधि भी इसमें भाग ले रहे हैं। कुल सचिव श्री सुरेन्द्र सिंह परिहार सहित देश, विदेश के विषय विशेषज्ञ, प्राध्यापक तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

सहकारिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना सरकार की प्राथमिकता : मंत्री सारंग

कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा देगा स्टेट फोकस पेपर : मंत्री कंषाना राज्य ऋण संगोष्ठी : नाबार्ड के स्टेट फोकस पेपर 2026–27 का हुआ विमोचन भोपाल राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), मध्यप्रदेश द्वारा शुक्रवार को राज्य ऋण संगोष्ठी का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना द्वारा किया गया। इस अवसर पर स्टेट फोकस पेपर 2026–27 (मध्यप्रदेश) का विधिवत विमोचन किया गया। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना सरकार की प्राथमिकता मंत्री सारंग ने स्टेट फोकस पेपर 2026–27 के विमोचन अवसर पर कहा कि यह दस्तावेज ग्रामीण एवं कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए आगामी वर्षों का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि एवं सहकारिता है और सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि इन दोनों क्षेत्रों को सशक्त बनाया जाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर तीव्र गति से आगे बढ़ रही है। जनधन योजना के माध्यम से देश के प्रत्येक नागरिक को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है, जिससे न केवल योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचा है, बल्कि बैंकिंग प्रणाली भी मजबूत हुई है। कमजोर सहकारी बैंकों को सहायता से मिले सकारात्मक परिणाम मंत्री श्री सारंग ने बताया कि कुछ कमजोर जिला सहकारी बैंकों के कारण कृषकों को पूर्ण वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में कठिनाइयाँ आ रही थीं। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2024–25 में 6 कमजोर जिला सहकारी बैंकों – रीवा, सतना, जबलपुर, ग्वालियर, शिवपुरी एवं दतिया को ₹50-50 करोड़, कुल ₹300 करोड़ की अंशपूंजी सहायता प्रदान की गई। इस सहायता के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इन बैंकों द्वारा गत वर्ष की तुलना में लगभग ₹675 करोड़ का अल्पकालीन कृषि ऋण 75,000 कृषकों को वितरित किया गया। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिसके लिए 16 विभागों को मिलाकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष भी कृषि क्षेत्र में निवेश धरातल पर उतरेंगे। ग्रामीण उद्यमियों तक ऋण पहुँचना आवश्यक-मंत्री श्री कंषाना मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि नाबार्ड का स्टेट फोकस पेपर 2026–27 आगामी वित्तीय वर्ष के लिए एक ठोस ब्लूप्रिंट है, जो प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दिशा प्रदान करेगा। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाना आवश्यक है। इसके लिए ग्रामीण उद्यमियों तक समय पर एवं पर्याप्त ऋण पहुँचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वर्ष 2026–27 मध्यप्रदेश को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। स्टेट फोकस पेपर 2026–27 की प्रमुख विशेषताएँ स्टेट फोकस पेपर के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026–27 में मध्यप्रदेश के लिए कुल प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्षमता ₹3,75,384.29 करोड़ आंकी गई है। यह राज्य की कृषि, MSME एवं ग्रामीण विकास से जुड़ी आवश्यकताओं का व्यापक आकलन प्रस्तुत करता है। इसमें से ₹2,08,743.78 करोड़ कृषि क्षेत्र के लिए प्रस्तावित हैं, जिनमें फसल ऋण, कृषि अवसंरचना एवं सहायक गतिविधियाँ शामिल हैं। ₹1,46,269.36 करोड़ MSME क्षेत्र के लिए संभावित ऋण क्षमता के रूप में आंके गए हैं। शेष ₹20,371.15 करोड़ निर्यात ऋण, शिक्षा, आवास, सामाजिक अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा एवं अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए अनुमानित हैं। स्टेट फोकस पेपर में उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान बना हुआ है, जो राज्य के सकल घरेलू राज्य उत्पाद (GSDP) में 44.36% का योगदान देती है। विशाल कृषि योग्य भूमि एवं अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ इसे सुदृढ़ आधार प्रदान करती हैं। इसके अनुरूप SFP में कृषि ऋण क्षमता ₹1,79,589.97 करोड़, कृषि अवसंरचना के लिए ₹6,461.67 करोड़ तथा सहायक गतिविधियों के लिए ₹22,692.14 करोड़ का अनुमान लगाया गया है। मध्यप्रदेश गेहूं, चावल, सोयाबीन, चना, दालों एवं तिलहनों के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, जिससे फसल उत्पादन, कृषि मशीनीकरण, सिंचाई एवं वैल्यू चेन विकास के लिए संस्थागत ऋण की निरंतर आवश्यकता स्पष्ट होती है। राज्य की अर्थव्यवस्था एवं बैंकिंग परिदृश्य वित्तीय वर्ष 2024–25 में राज्य का GSDP ₹15.03 लाख करोड़ रहा, जिसमें 6.05% की विकास दर दर्ज की गई। इस अवधि में प्रति व्यक्ति आय ₹1,52,615 रही। प्रदेश के बैंकिंग नेटवर्क में ग्रामीण, अर्ध-शहरी एवं शहरी क्षेत्रों में कुल 8,779 बैंक शाखाएँ तथा 8,882 एटीएम कार्यरत हैं। मार्च 2025 तक राज्य का कुल क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात 83.51% तक पहुँच गया है। ये सभी संकेतक एक मजबूत एवं सक्षम वित्तीय इकोसिस्टम को दर्शाते हैं, जो वित्तीय वर्ष 2026–27 में अनुमानित बढ़ी हुई ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है। संगोष्ठी के दौरान कृषि एवं सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न विभागों, सहकारी बैंकों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं लघु उद्यमियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती सी. सरस्वती, भारतीय रिजर्व बैंक की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री रेखा चंदनवेली, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के संयोजक श्री धीरज गोयल सहित वरिष्ठ बैंकर, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि एवं विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए विदेश में रोजगार के अवसरों का बढ़ा दायरा

अब जापान ही नहीं, अन्य देशों में भी मिलेगी नौकरी भोपाल मध्यप्रदेश कैबिनेट ने ‘पिछड़ा वर्ग के बेरोजगार युवक-युवतियों को विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की योजना–2022’ में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी है। अब यह योजना ‘अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिये विदेश में रोजगार नियोजन योजना–2026’ के नाम से संचालित की जाएगी। सरकार ने इस योजना के अंतर्गत जापान के साथ अन्य देशों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। जापान के साथ अन्य देशों में भी मिलेंगे अवसर प्रदेश के युवाओं को जापान के साथ दुनिया के अन्य देशों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। युवाओं को अलग-अलग मान्य कार्यक्रमों के माध्यम से विदेश भेजा जाएगा। योजना के तहत हर वर्ष पिछड़ा वर्ग के 600 युवाओं को विदेश भेजने का लक्ष्य रखा गया है। पहले युवाओं को केवल 'टेक्निकल इंटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम'  के अंतर्गत जापान भेजा जाता रहा है। योजना के लिए पात्रता इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना अनिवार्य है। साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का नॉन-क्रीमीलेयर जाति प्रमाण-पत्र आवश्यक होगा। प्रशिक्षण के चयन के समय आयु 17 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए, जबकि विदेश में नौकरी जॉइन करते समय न्यूनतम आयु 18 वर्ष पूर्ण होना आवश्यक है। आवेदक के विरुद्ध कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज या विचाराधीन नहीं होना चाहिए तथा संबंधित ट्रेड/कौशल के अनुसार न्यूनतम शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता अनिवार्य होगी। महिलाओं और दिव्यांगजनों को आरक्षण, प्रशिक्षण शुल्क सरकार वहन करेगी योजना के अंतर्गत 35 प्रतिशत सीटें बेटियों के लिए और 6 प्रतिशत सीटें दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित की गई हैं। प्रति युवा अधिकतम 2 लाख रुपये तक का प्रशिक्षण शुल्क सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। प्रशिक्षण पूर्णतः आवासीय होगा। यदि हॉस्टल सुविधा उपलब्ध नहीं होती है, तो प्रशिक्षुओं को 2,000 रुपये प्रतिमाह किराया भत्ता प्रदान किया जाएगा। सर्टिफिकेशन परीक्षा के पहले प्रयास की फीस भी संस्था द्वारा वहन की जाएगी। 12 माह का समग्र प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को कुल 12 माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें सॉफ्ट स्किल्स, डोमेन-स्पेसिफिक स्किल्स तथा संबंधित देश की विदेशी भाषा का प्रशिक्षण शामिल होगा। योजना के वित्तपोषण के लिए बजट के अतिरिक्त सोशल इम्पैक्ट बॉण्ड (SIB) और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का भी उपयोग किया जाएगा।

CM का बड़ा फैसला: संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर मिली खुशखबरी

भोपाल  मध्यप्रदेश के लाखों संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राजधानी भोपाल में आयोजित संविदा कर्मचारियों के विशाल महासम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नियमितीकरण को लेकर बड़ा और अहम ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविदा कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार एक विशेष समिति का गठन करेगी, जो उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। सरकार को संविदा कर्मियों की जरूरत, जैसे श्रीराम को हनुमान की 30 जनवरी को न्यू दशहरा मैदान में आयोजित इस महासम्मेलन में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने संविदा कर्मचारियों की भूमिका को सरकार की रीढ़ बताते हुए कहा सरकार की हर योजना को जमीन पर उतारने में संविदा कर्मचारियों का सबसे बड़ा योगदान है। सरकार को संविदा कर्मियों की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी श्रीराम को हनुमान की थी। मुख्यमंत्री के इस बयान पर सम्मेलन स्थल पर मौजूद हजारों कर्मचारियों ने तालियों के साथ स्वागत किया। संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर हुआ महासम्मेलन इस महासम्मेलन का आयोजन संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के संयुक्त आवाहन पर किया गया। कार्यक्रम के आयोजकों में प्रदेश संयोजक दिनेश तोमर, डी. के. उपाध्याय, महामंत्री सजल भार्गव,अभय वाजपेई, सुरेन्द्र रघुवंशी, संस्थापक प्रांताध्यक्ष के. के. शर्मा एवं अरविंद यादव शामिल रहे। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि यह सम्मेलन संविदा कर्मचारियों के वर्षों पुराने संघर्ष को नई दिशा देने का काम करेगा। सभी विभागों से उमड़ा संविदा कर्मियों का सैलाब संविदा संयुक्त मंच के जिला अध्यक्ष कृष्ण कुमार उपाध्याय ने बताया कि महासम्मेलन में प्रदेशभर से हजारों संविदा अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। इनमें सर्व शिक्षा अभियान, स्वास्थ्य विभाग, आजीविका मिशन, मनरेगा, महिला एवं बाल विकास, वाटरशेड, कृषि विभाग सहित शासन की लगभग सभी योजनाओं और विभागों के संविदा कर्मी मौजूद रहे। ऐतिहासिक फैसलों की उम्मीद मंच का दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारियों की एकजुटता सरकार को नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा और स्थायित्व जैसे मुद्दों पर ऐतिहासिक और सकारात्मक निर्णय लेने के लिए मजबूर करेगी।

राज्य मंत्री गौर बोली पिछड़ा वर्ग की कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध

भोपाल. आज हम सब यहां एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण अवसर पर एकत्रित हुए हैं। आज पिछड़ा वर्ग महापंचायत का स्थापना दिवस है। यह न केवल एक संगठन की स्थापना का दिन है, बल्कि हमारे सामूहिक संकल्प एकता और संघर्ष की विजय का भी प्रतीक है। यह बात पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री ( स्वतंत्र प्रभार ) कृष्णा गौर ने हिंदी भवन भोपाल में आयोजित पिछड़ा वर्ग महापंचायत के स्थापना दिवस एवं सम्मान समारोह में कहीं।  राज्यमंत्री गौर ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति के लिए उसका संगठित होना अनिवार्य है। महापंचायत ने पिछले वर्षों में पिछड़ा वर्ग के हितों की रक्षा और उनकी आवाज को सरकार तक पहुंचने में सेतु का कार्य किया है। हाल ही में कैबिनेट ने पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए 'विदेश रोजगार योजना 2025' को मंजूरी दी है, जिसके तहत हर साल 600 युवाओं को विदेशी बाजारों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।  उन्होंने कहा कि हमारी सरकार पिछड़ा वर्ग के कल्याण के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है । इस डेढ़ वर्ष में ऐतिहासिक निर्णय प्रदेश के पिछड़े वर्गों के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी ने लिए हैं। मुख्यमंत्री जी का सबसे बड़ा फोकस पिछड़ा वर्ग के बच्चों को शिक्षित करना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और आर्थिक मदद करना है और इस दृष्टि से लगातार ओबीसी के बच्चों को छात्रवृत्ति देने का  काम सरकार कर रही है। इस कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग के प्रदेश अध्यक्ष राजेश विश्वकर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री चिंतामणि राठौर, भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष श्याम ट्रेलर, पवन पाटीदार सहित सभी जिलों के पदाधिकारीगण मौजूद रहे।

पैक्स कम्प्यूटराईजेशन में देश में प्रथम स्थान हेतु नाबार्ड द्वारा अपेक्स बैंक पुरस्कृत

भोपाल.  राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) मध्यप्रदेश द्वारा आज मिन्टो हॉल में राज्य ऋण संगोष्ठी – स्टेट फोकस 2026-27 हेतु आयोजित कार्यक्रम में म.प्र.शासन के माननीय सहकारिता तथा खेल व युवा कल्याण मंत्री   विश्वास कैलाश सारंग, कृषि मंत्री   एंदल सिंह कंसाना, नाबार्ड, म.प्र. की मुख्य महाप्रबंधक  मती सी.सरस्वती एवं भारतीय रिजर्व बैंक की क्षेत्रीय संचालक  मती रेखा चंदानवेली द्वारा अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक   मनोज गुप्ता को मध्यप्रदेश की सभी पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों) के कम्प्यूटराईजेशन कराने हेतु पुरस्कृत किया गया । उल्लेखनीय है कि पैक्स कम्प्यूटराइजेशन योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। प्रबंध संचालक ने इस उपलब्धि के लिए माननीय मुख्यमंत्री, माननीय सहकारिता मंत्री, प्रमुख सचिव सहकारिता एवं आयुक्त सहकारिता के मार्गदर्शन हेतु आभार व्यक्त किया। साथ की सफल क्रियान्वयन के लिए बैंक के   केटी सज्जन, डीजीएम एवं आई टी हेड अरविंद बौद्ध, ओएसडी को शील्ड सौंपकर बधाई दी। इसी प्रकार जिला सहकारी बैंक शिवपुरी एवं सतना के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को टर्न अराउण्ड प्लान के बेहतर क्रियान्वयन एवं अच्छे प्रदर्शन हेतु तथा जिला सहकारी बैंक मंदसौर व बालाघाट के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को अंकेक्षण में उत्कृष्ठ प्रदर्शन के लिये भी पुरूस्कृत किया गया।  

राज्यमंत्री टेटवाल बोले: डिग्री के साथ जरूरी है व्यवहारिक कौशल और कार्य अनुभव

डिग्री के साथ व्यवहारिक कौशल और कार्य स्थल का अनुभव जरूरी:राज्यमंत्री  टेटवाल फिक्की सेंट्रल इंडिया एड स्किल्स समिट में प्रशिक्षण संस्थानों के ट्रेनर्स एवं औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल ने कहा कि वर्तमान समय में कौशल विकास और रोजगार सृजन देश और प्रदेश की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि तेजी से बदलते आर्थिक और तकनीकी परिवेश में युवाओं को केवल शैक्षणिक डिग्री तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें व्यावहारिक कौशल, तकनीकी ज्ञान और कार्यस्थल का अनुभव देना आवश्यक है, जिससे वे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें। राज्यमंत्री  टेटवाल कोर्टयार्ड मैरियट में आयोजित FICCI सेंट्रल इंडिया एड-स्किल्स एजुकेशन समिट को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है और राज्य सरकार इन पहलों को प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुसार जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से आगे बढ़ा रही है। समिट के दौरान शिक्षा, कौशल विकास और उद्योग जगत के बीच समन्वय को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। चर्चा के दौरान यह सामने आया कि उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, परिणामोन्मुख और रोजगार से जुड़ा बनाना समय की आवश्यकता है, जिससे प्रशिक्षण पूर्ण करते ही युवाओं को कार्यस्थल के लिए तैयार किया जा सके। राज्यमंत्री  टेटवाल ने बताया कि मध्यप्रदेश में कौशल विकास को सुदृढ़ करने के लिए संस्थागत स्तर पर लगातार कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड, संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क, सरकारी आईटीआई, पॉलिटेक्निक और निजी प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से युवाओं को आधुनिक तकनीकों से युक्त और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। अप्रेंटिसशिप और ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग को बढ़ावा देकर उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच व्यावहारिक साझेदारी विकसित की जा रही है, जिससे युवाओं को वास्तविक कार्य अनुभव प्राप्त हो सके। उन्होंने बताया कि युवा संगम मेलों और रोजगार से जुड़े कौशल कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को वेतन आधारित रोजगार के साथ स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। रोजगार कार्यालयों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से सशक्त कर उद्योगों और युवाओं के बीच सीधा और प्रभावी समन्वय स्थापित किया गया है, जिससे रोजगार की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुलभ बनी है। मंत्री  टेटवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश में ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, नवीकरणीय ऊर्जा और एमएसएमई क्षेत्रों में हो रहे निवेश से बड़े पैमाने पर रोजगार की संभावनाएँ बन रही हैं। ऐसे में शैक्षणिक और प्रशिक्षण संस्थानों को उद्योगों के साथ मिलकर कौशल आधारित पाठ्यक्रम विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की दूरी को कम किया जा सके। समिट के दौरान समावेशी कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया। महिलाओं, ग्रामीण युवाओं, जनजातीय समुदायों और पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों को कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया। फिक्की सेंट्रल इंडिया एड-स्किल्स एजुकेशन समिट में हुए संवाद, सहभागिता और विचार-विमर्श को मध्यप्रदेश में कौशल विकास और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।  

इंदौर में साइबर क्राइम: शादी से मना करने पर इंजीनियर ने युवती की बदनामी की, आरोपी अरेस्ट

इंदौर   इंदौर क्राइम ब्रांच ने सिविल इंजीनियर व डाटा एनालिस्ट का काम करने वाले युवक को गिरफ्तार किया है. वह सनकी आशिक की तरह गंदी हरकतें कर रहा था. उसने क्राइम के कई सीरियल देखकर युवती को बदनाम करने की साजिश रची. उसने युवती के एडिट न्यूड फोटोग्राफ इंदौर के विभिन्न सुलभ शौचालय में चस्पा किए. युवती व परिजनों की शिकायत पर उसे दबोचा गया. शादी नहीं होने से बौखलाया इंजीनियर इंदौर क्राइम ब्रांच पुलिस के अनुसार आरोपी आयुष अग्निहोत्री सिविल इंजीनियर है. वह डाटा एनालिस्ट के रूप में काम करता है. बीते दिनों परिवार वालों ने उसकी शादी मैट्रिमोनियल साइट के जरिए बाणगंगा क्षेत्र में रहने वाली एक युवती से तय की. कुंडली का मिलान नहीं होने के कारण युवती से रिश्ता तय नहीं हो पाया.  आरोपी आयुष अग्निहोत्री को आशंका थी कि युवती के परिजनों ने उसकी शादी नहीं होने दी. इसके बाद वह युवती और उसके परिवार को बदनाम करने की साजिश रचने लगा. क्राइम के सीरियल देखकर रची साजिश आरोपी ने क्राइम के कई एपिसोड देखे. इस दौरान उसने एक एपिसोड देखा, जिसमें युवती को बदनाम करने के लिए साजिश रची जाती है. आरोपी आयुष अग्निहोत्री ने युवती और उसके परिवार की कुछ महिलाओं के फोटो सोशल मीडिया से निकाले. इन फोटो को एडिट कर इंदौर के विभिन्न सुलभ शौचालयों और अन्य जगहों पर चस्पा कर दिए. इस दौरान कई आपत्तिजनक बातों का जिक्र भी युवती और उसकी परिवार की महिलाओं के बारे में किया. आपत्तिजनक फोटो डाक से युवती के घर भेजे जब युवती और उसके परिवार को एक के बाद एक कई फोन आने लगे तो वे परेशान हो गए. इसकी शिकायत बाणगंगा पुलिस थाने में की. पुलिस ने जब कोई कार्रवाई नहीं की तो परिजनों ने इंदौर क्राइम ब्रांच से शिकायत की. क्राइम ब्रांच ने जांच पड़ताल कर 25 दिन में आरोपी आयुष अग्निहोत्री को गिरफ्तार कर लिया. आरोपी ने पूछताछ में बताया कि जब युवती से उसकी शादी नहीं हुई तो वह उसे बदनाम करने के लिए ये कृत्य करने लगा. युवती के घर के आसपास भी फोटो चस्पा किए आरोपी ने बताया "उसने युवती और उसके परिजनों के कुछ न्यूड फोटो बनाए. इसे वह डाक विभाग के माध्यम से भेजता था. वह देवास व उज्जैन जाता था. वहां से डाक के माध्यम से युवती और उसके परिजनों को पोस्ट कर देता था. इसके अलावा कई जगहों पर न्यूड फोटो चस्पा किए. युवती के घर के आस-पास भी ये फोटो चस्पा किए. डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने बताया "आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है. उसके घर से कुछ आपत्तिजनक सामग्री भी जब्त की है." 

डॉ. यादव ने किया नोहलेश्वर महोत्सव के 5 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे 5 दिवसीय नोहलेश्वर महोत्सव का शुभारंभ नोहलेश्वर महोत्सव होगा भव्य और ऐतिहासिक : राज्य मंत्री  लोधी 11 से 15 फरवरी 2026 तक कला, संस्कृति और साहित्य की ख्यातनाम हस्तियां होंगी शामिल भोपाल संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सांस्कृतिक रूप से चरमोत्कर्ष पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए बुंदेलखंड के दमोह जिले में नोहटा स्थित नोहलेश्वर मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला नोहलेश्वर महोत्सव इस वर्ष अधिक भव्यता के साथ मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 11 से 15 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस 5 दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इस महोत्सव में कला, संस्कृति, साहित्य एवं भक्ति संगीत जगत की ख्यातनाम हस्तियां अपनी प्रस्तुतियां देंगी।   राज्य मंत्री  लोधी ने बताया कि बुंदेलखंड की धार्मिक आस्था के इस केंद्र पर होने जा रहे नोहलेश्वर महोत्सव में प्रसिद्ध गायक  कैलाश खेर जहां भक्ति गीत प्रस्तुत करेंगे, वहीं भगवान भोलेनाथ के शिव तांडव नृत्य, शास्त्रीय नृत्य, जय राम नृत्य नाटिका आदि मनभावन प्रस्तुतियां होगी। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में जहां हरिओम पवार, जानी बैरागी जैसे राष्ट्रीय कवि रचनापाठ करेंगे। समापन समारोह में प्रसिद्ध भजन गायिका सु आशा वैष्णव प्रस्तुति देंगी। राज्य मंत्री  लोधी ने बताया कि संस्कृति विभाग द्वारा इस समूचे आयोजन को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रहीं हैं। इसमें यहाँ आने वाले प्रदेश और देश के श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो, स्थानीय प्रशासन भी इस आयोजन को और भव्यता देने के लिए पूरी तरह जुटा हुआ है।  राज्य मंत्री  लोधी ने कहा कि नोहलेश्वर महोत्सव की शुरुआत 2 वर्ष पूर्व की गई थी। इस वर्ष यह महोत्सव अपनी भव्यता और विशेषता के साथ प्रारंभ होने जा रहा है। मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड अपने गौरवशाली इतिहास और समृद्धशाली परंपराओं के लिए समूचे भारत में अपनी अलग पहचान रखता है। बुंदेलखंड की शौर्य गाथाएं एवं सांस्कृतिक कला कौशल का वर्णन देश के साहित्यकारों, कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बखूबी किया है, यहाँ की पुरातन संस्कृति आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने का कार्य करती है।  राज्य मंत्री  लोधी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि नोहलेश्वर महोत्सव के माध्यम से प्रदेश और देश में बुंदेलखंड की विशेष पहचान बने। राज्य मंत्री  लोधी ने प्रदेश की जनता से इस आयोजन में शामिल होकर बुंदेलखंड की कला संस्कृति से रूबरू होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन आपकी आस्था के साथ ही समूचे परिवार के साथ मनोरंजन का केंद्र भी होगा। महोत्सव में हॉट एयर बलून जैसी रोमांचक गतिविधियां भी उपलब्ध होंगी।  

राजकोष में बढ़ोतरी, जीएसटी में कमी: मध्य प्रदेश की वित्तीय तस्वीर

भोपाल मध्य प्रदेश के बजट का बड़ा आधार केंद्रीय करों में हिस्सा और राज्य के स्वयं के करों से आय होती है। केंद्रीय करों में भी जीएसटी बड़ा माध्यम है। पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 26,000 करोड़ रुपये जीएसटी मिला था, जबकि इस बार दिसंबर तक 25,250 करोड़ रुपये मिला है। इसमें तीन प्रतिशत की कमी है। वहीं, राज्य के करों की बात करें तो इसने राजकोष भरने का काम किया है। वैल्यू एडेड टैक्स (वैट), आबकारी, पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क के माध्यम से सरकार को 32,660 करोड़ रुपये मिले हैं, जो पिछले वर्ष इस अवधि में प्राप्त राजस्व से अधिक है। प्रदेश को केंद्रीय करों के हिस्से में एक लाख 11 हजार करोड़ और राज्य के करों से एक लाख नौ हजार करोड़ रुपये 31 मार्च, 2026 तक प्राप्त होने का अनुमान बजट में लगाया गया था। तीसरी तिमाही में देखें तो जीएसटी को छोड़कर राजस्व संग्रहण की स्थिति ठीक चल रही है। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी जीएसटी में तीन प्रतिशत की कमी है। एक फरवरी को पेश होगा बजट एक फरवरी को आम बजट प्रस्तुत होना है, इसमें साफ हो जाएगा कि जीएसटी की दरों में संशोधन का कितना असर राजस्व संग्रहण पर पड़ा है। भारत सरकार 2026-27 के बजट के साथ-साथ 2025-26 का पुनरीक्षित अनुमान भी प्रस्तुत करेगी। इससे स्पष्ट होगा कि प्रदेश को केंद्रीय करों के हिस्से में कितनी राशि इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति में प्राप्त होगी। वहीं, अगले वित्तीय वर्ष में क्या स्थिति बनेगी। प्रदेश का अनुमान है कि इस वर्ष पांच हजार करोड़ रुपये तक जीएसटी का नुकसान हो सकता है। हालांकि, संतोष की बात यह है कि राज्य के टैक्स का संग्रहण लक्ष्य से अधिक चल रहा है। पेट्रोल, डीजल आदि से प्राप्त होने वाला वैट 14 हजार करोड़ रुपये दिसंबर तक प्राप्त हुआ है, जो गत वर्ष इसी अवधि में 13,500 करोड़ रुपये था। इसी तरह आबकारी से आय में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे अभी तक 10,500 करोड़ रुपये खजाने में आए हैं। पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क में 8,660 करोड़ रुपये मिले हैं, इसी मद में पिछले वर्ष 7,750 करोड़ रुपये मिले थे। करों में वृद्धि के आसार नहीं जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के पास कर लगाने के अवसर सीमित हो गए हैं। सरकार बिजली से लेकर जितने भी माध्यमों से टैक्स ले सकती है, वह लगाए जा चुके हैं। संभावना जताई जा रही है कि सरकार कर में वृद्धि के स्थान पर संग्रहण की व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर देगी।