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कार में छिपाकर ले जा रहे थे 12 किलो MD ड्रग्स, केंद्रीय नारकोटिक्स टीम ने पकड़ा तस्कर

 नीमच  केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो मध्य प्रदेश की टीम ने एक कार से 12 किलो एमडी ड्रग पकड़ी है। एक आरोपित को मौके से गिरफ्तार कर कार व एमडी ड्रग जब्त की है। मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है। यह कार्रवाई महू-नसीराबादहाई-वे पर ढोढर के पास टोल टैक्स पर 16 दिसंबर की रात की गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो मध्य प्रदेश की टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रतलाम-मंदसौर की ओर से एक गुजरात की ओर मादक पदार्थ की तस्करी की जाने वाली है। इस सूचना के बाद टीम ने नाकाबंदी और सर्चिंग करते हुए टोल टैक्स पर चित्तौड़गढ़ पासिंग एक स्विफ्ट कार को रोका और तलाशी ली तो कार से 10 पैकेट में भरी 12 किलो 55 ग्राम एमडी ड्रग मिली। इस पर कार और एमडी ड्रग जब्त कर कार में सवार एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। आरोपित से एमडी ड्रग लाने और ले जाने के संबंध में पूछताछ की जा रही है।  

240 मीटर नाले के काम में भारी लोहे का उपयोग, भोपाल नगर निगम में खुला बड़ा घोटाला

भोपाल  भोपाल नगर निगम में एक बार फिर भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। इस बार आरोप नाले की ड्रेन कवरिंग के काम में भारी अनियमितताओं को लेकर हैं, जहां महज 240 मीटर लंबे नाले पर 16 हजार किलोग्राम से अधिक लोहे का इस्तेमाल किया गया है। इस संदिग्ध माप और बिलिंग के आधार पर करीब 13.34 लाख रुपये का पेमेंट हुआ, जिसने निगम के रिकॉर्ड और इंजीनियरिंग कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के जोन-13 अंतर्गत वार्ड 53 का है। कृष्णा आर्केड और वैष्णव कांप्लेक्स, भेल संगम कॉलोनी क्षेत्र में स्थित नाला लगभग तीन फीट चौड़ा और 240 मीटर लंबा है। इतनी सीमित संरचना के बावजूद माप पुस्तिका में 16 हजार किलोग्राम लोहे के उपयोग का उल्लेख किया गया है। काम का वर्क ऑर्डर क्रमांक-2400032045 सिविल विभाग द्वारा 25 जून 2025 को जारी किया गया था और निर्माण कार्य हाल ही में पूरा बताया गया है। रिकॉर्ड के अनुसार इस कार्य की माप और सामग्री का विवरण प्रभारी सहायक यंत्री निशांत तिवारी और उपयंत्री रूपांकन वर्मा द्वारा दर्ज किया गया, लेकिन दर्ज की गई लोहे की मात्रा को लेकर अब घोटाले की आशंका जताई जा रही है। कोर कटिंग से खुलेगा गायब लोहे का राज मामले की गंभीरता को देखते हुए निगमायुक्त संस्कृति जैन ने आरसीसी ढांचे की कोर कटिंग कराए जाने के आदेश दिए हैं। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से यह जांचना है कि वास्तव में निर्माण में इतनी अधिक मात्रा में लोहा इस्तेमाल हुआ या नहीं। साथ ही जांच दल कथित गायब लोहे की भी पड़ताल कर रहा है। ईई की भूमिका पर भी सवाल प्रभारी कार्यपालन यंत्री (ईई) बृजेश कौशल पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने निर्माण कार्य की न तो नियमित निगरानी की और न ही एक बार भी मौके पर जाकर निरीक्षण किया। 5 दिसंबर को नोटिस और 8 दिसंबर को साइट निरीक्षण के बावजूद कोर कटिंग रिपोर्ट दबाए रखने के आरोप हैं। रिपोर्ट सौंप दी गई कोर कटिंग रिपोर्ट समय पर तैयार कर ईई को सौंप दी गई थी। – निशांत तिवारी, सहायक यंत्री ननि रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई ईई ब्रजेश कौशल की रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है और आयुक्त के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। -सुबोध जैन, अधीक्षण यंत्री, नगर निगम

पेड़ों की कटाई और ऑक्सीजन की जिम्मेदारी: जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकारी खजाने में मुआवजे का मुद्दा उठाया

जबलपुर   मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एनजीटी कमेटी की अनुमति बिना प्रदेश में एक भी पेड़ नहीं काटने के आदेश को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट ने दिनों पेड़ों की कटाई को लेकर सख्त है और कई मामलों में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रह है. इसी बीच स्ट्रैटटेक मिनरल रिसोर्सेज की एक याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें धिरौली कोल ब्लॉक के लिए 6 लाख पेड़ों की कटाई किए जाने का प्रस्ताव है. इस कोल ब्लॉक के लिए अबतक 20 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं. 6 लाख पेड़ काटे जाने का प्रस्ताव स्ट्रैटटेक मिनरल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड के धिरौली कोल ब्लॉक मामले में कंपनी की ओर से ये याचिका दायर की गई कि पेड़ कटाई के संबंध में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न हो. याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया कि इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 20 हजार पेड़ काटे गए हैं, वहीं 6 लाख पेड़ काटने का प्रस्ताव है. कंपनी की ओर से एक आवेदन पेश कर दलील दी गई कि ये कोल ब्लॉक वन क्षेत्र में आता है और ऐसे में कंपनी के उस प्रोजेक्ट में हस्तक्षेप नहीं किया जाए. चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा कि जब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी और ट्री ऑफिसर की अनुमति के आधार पर ही पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है, तो इस व्यवस्था को बदला नहीं जा सकता। यदि किसी पक्षकार को इससे आपत्ति या परेशानी है, तो वह एनजीटी के समक्ष अपनी बात रखे। कोर्ट ने अगली सुनवाई 14 जनवरी को तय करते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सिंगरौली में 6 लाख पेड़ों की कटाई का मुद्दा भी उठा बुधवार की सुनवाई में सिंगरौली के घिरौली कोल ब्लॉक में करीब 6 लाख पेड़ों की कटाई का मामला भी उठाया गया। यह याचिका बैढन जनपद पंचायत की अध्यक्ष सविता सिंह द्वारा दायर की गई है। कंपनी की ओर से कहा गया कि प्रस्तावित कटाई के बदले हर पेड़ का मुआवजा दिया जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस की बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मुआवजे की राशि सरकार के खजाने में जाएगी, लेकिन उन पेड़ों के कटने से लोगों को मिलने वाली ऑक्सीजन का जिम्मेदार कौन होगा—यह बड़ा सवाल है। सरकार के ट्रांसलोकेशन दावे पर सवाल सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि काटे गए पेड़ों को भोपाल के चंदनपुरा क्षेत्र में 9.71 हेक्टेयर भूमि पर ट्रांसलोकेट किया गया है। इस पर बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो किया गया है, वह ट्रांसलोकेशन नहीं है। भोजपुर रोड और अन्य मामलों पर लिया गया था संज्ञान दरअसल, रायसेन जिले के भोजपुर मार्ग पर स्थित 448 पेड़ों की कटाई के मामले में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में सुना था। इसके अलावा भोपाल में विधायकों के आवास निर्माण के लिए 244 पेड़ और रेलवे परियोजना के लिए करीब 8000 पेड़ों की कटाई का मामला भी सामने आया था। चीफ जस्टिस की बेंच ने पहले 20 नवंबर को भोपाल में और फिर 26 नवंबर को पूरे मध्यप्रदेश में पेड़ों की कटाई पर सशर्त रोक लगा दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल एनजीटी की एक्सपर्ट कमेटी और ट्री ऑफिसर की अनुमति से ही पेड़ों की कटाई की जा सकती है। पेड़ कटाई के कई मामलों में हाईकोर्ट सख्त इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पेड़ कटाई के कई मामलों सुनवाई कर रहा है. राजधानी भोपाल के पास भोजपुर-बैरसिया सड़क निर्माण के लिए बिना अनुमति के ही सैकड़ों पेड़ काटने के मामले में हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की है. वहीं, पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अखबार में प्रकाशित उस खबर पर भी संज्ञान लिया था, जिसमें सागर कलेक्ट्रेट में एक हजार पेड़ काटने का खुलासा किया गया था. कलेक्टर कार्यालय में दो अतिरिक्त कक्ष बनाने के लिए सिर्फ दस घंटे में ये पेड़ काट दिए गए थे. इसके अलावा भोपाल में एमएलए क्वार्टर्स निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट में कितने पेड़ काटे गए हैं और कितने और काटे जाने इस संबंध में विधानसभा सचिव को स्टेटस रिपोर्ट पेश कराने के निर्देश दिए गए. याचिका की सुनवाई के दौरान बताया गया कि प्रोजेक्ट के लिए पूर्व में 112 पेड़ काटे गए हैं और 132 पेड़ और काटा जाना है. सरकार ने इन्हें शिफ्ट करने और वृक्षारोपण की कार्ययोजना का प्लान भी प्रस्तुत किया. वहीं, धिरौली कोल ब्लॉक मामले पर अगली सुनवाई 14 जनवरी को निर्धारित की गई है.

इंदौर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, 10 महीने में सिर्फ एक हिस्से की रेलिंग हट पाई

 इंदौर  बीआरटीएस की रेलिंग हटाने, इंदौर के बिगड़ते ट्रैफिक और नियम विरुद्ध प्राइवेट वाहनों में हूटर लगाने के मामले में लगी जनहित याचिकाओं के मामले में बुधवार को हाईकोर्ट की डबल बेंच में सुनवाई हुई। इसमें कमेटी ने बीआरटीएस को लेकर रिपोर्ट पेश की। इंदौर बीआरटीएस हटाने का फरवरी 2025 से आदेश होने के बाद भी आज दिनांक तक पूरी तरह नहीं हटा है। इसी मामले को लेकर हाईकोर्ट ने इसे लेकर सख्त आदेश जारी करना शुरू कर दिए हैं। अधिकारियों को कोर्ट में लगातार तलब किया जा रहा है। एक दिसंबर की सुनवाई में 16 दिसंबर तक एक तरफ की रैलिंग हटाने और फिर सुनवाई में कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त दिलीप यादव व डीसीपी ट्रैफिक आनंद कलादगी को पेश होने के लिए कहा गया था, लेकिन अधिकारियों ने आवेदन लगाकर छूट ले ली। हाईकोर्ट ने नई तारीख अगले दिन 17 दिसंबर की लगा दी। लेकिन इसके लिए भी फिर SIR (निर्वाचन) काम की व्यस्तता का बोलकर छूट लेने की बात कही गई। इस पर हाईकोर्ट सख्त हुआ और अधिकारियों को दोपहर ढाई बजे उपस्थित होने के आदेश दिए गए। इसके बाद यह अधिकारी डबल बैंच के सामने पेश हुए।  सुनवाई के दौरान कमेटी की रिपोर्ट आई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट द्वारा वकीलों की बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट आई। इसमें यह तो कहा गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद रैलिंग हटाने का काम हुआ है, लेकिन अभी दूसरी ओर की नहीं हटी है। साथ ही जो पेंचवर्क हुआ है वह सही नहीं हुआ है और इससे सड़क अनईवन हो रही है। बस स्टाप के पास सुरक्षा के मानक सही नहीं है। वहां सामान पड़ा हुआ है। इससे रास्ता ब्लाक हो रहा है और दुर्घटना की भी आशंका बनी हुई है।  इस तरह हुई बहस, यह दिए आदेश हाईकोर्ट बेंच ने इस मामले में एक बार अधिकारियों से पूछा कि भोपाल में नौ दिन में बीआरटीएस हट गया था यहां इतनी देर क्यों हो रही है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि क्योंकि वह भोपाल था और यह इंदौर है। वहीं बागड़िया ने कहा कि रैलिंग एक ओर की हटी है लेकिन दूसरी ओर की नहीं हटी है। इसअधिवक्ता अजय बागड़ियाके चलते रास्ता एक और तो बहुत चौड़ा है वहीं दूसरी ओर तंग है। अभी तक बीच में डिवाइडर नहीं लगे हैं। सीमेंट ब्लाक की लागत बहुत ज्यादा, खत्म हो गए इस पर जस्टिस ने कहा कि सीमेंट के ब्लाक लगा दिए जाएं, जैसे जीपीओ पर लगाए हैं। इस पर निगमायुक्त दिलीप यादव ने कहा कि इन ब्लाक की लागत बहुत ज्यादा आती है। एक किमी में करीब एक करोड़ होती है। जो अभी थे वह 500 मीटर में लगा दिए हैं। इस पर जस्टिस ने कहा कि जो रैलिंग निकाली है क्या उसका उपयोग कर बीच में डिवाइडर नहीं कर सकते हैं। इस पर कलेक्टर ने कहा कि जो टेंडर दिया है वह एजेंसी ही इस निकले माल को रखेगी और इसे ही बेचकर वह टेंडर की राशि भरेगी, इसलिए इनका उपयोग सही नहीं है। इस पर बागड़िया ने कहा कि रस्सी बांधकर या ट्रैफिक पुलिस के बैरिकेडिंग लगाकर व्यवस्था की जाए। इससे अधिकारियों ने एक्सीडेंट होने की आशंका जताई।  कोर्ट की सख्ती के बाद उपस्थित हुए आला अफसर फिर ढाई बजे कलेक्टर शिवम वर्मा, निगम कमिश्नर दिलीप यादव, ट्रैफिक डीसीपी आनंद कलांदगी डिवीजन बेंच के सामने पेश हुए। मामले में याचिकाकर्ता राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से एडवोकेट अजय बागडिया ने सबसे पहले कोर्ट को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आपके आदेश के कारण ही इतना काम हो पाया है। इसके लिए उन्होंने शहर की ओर से भी धन्यवाद दिया। मामले में अब सुनवाई 12 जनवरी को तय की गई है। एक ओर की रेलिंग नहीं हटाने से ट्रैफिक बदहाल याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अजय बागडिया ने कहा कि वर्तमान में बीआरटीएस की एक हिस्से की रेलिंग हटाने से सड़क चौड़ी जरूर हुई है। इससे भंवरकुआ से विजय नगर की ओर आने वाले वाहनों चालकों को अब 1/3 हिस्सा मिल भी रहा है। दूसरी ओर विजय नगर से भंवरकुआ जाने वाले हिस्से की रेलिंग नहीं हटने से रास्ता काफी संकरा हो गया है, जिससे ट्रैफिक का दबाव वहां ज्यादा है। अस्थायी डिवाइडर नहीं लगाए जा सकते याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया कि वहां कि रेलिंग भी हटाकर बीच में डिवाइडर बनाए जाए। इस पर अधिकारियों की ओर से बताया कि इतनी जल्दी डिवाइडर नहीं बन पाएगा क्योंकि अभी हिस्से की रेलिंग को तोड़ा है और यह जगह अभी डिवाइडर के लिए ही छोड़ी गई है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से सुझाव दिया गया कि अभी जीपीओ चौराहा से शिवाजी नगर प्रतिमा तक बीच में डिवाइडर के रूप में सीमेंट के जो ब्लॉक लगाए हैं वैसे ही बाकी हिस्से में भी लगा दें। इस पर निगम कमिश्नर ने कहा कि इसकी लागत बहुत ज्यादा है। निगम के पास जो था वह लगा दिया गया है। अधिकारी बोले- इससे तो दुर्घटनाएं बढ़ेंगी मामले इसे लेकर याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया कि ऐसे में पुलिस की जो बैरिकेडिंग होती है वह लगा दी जाए या प्लास्टिक बैरिकेड्स भी लगाए जा सकते हैं। अगर ये भी उपलब्ध नहीं हैं तो तब तक बीच में खंभे लगाकर रस्सी बांध दी जाए और दूसरी ओर रेलिंग भी तोड़ी जाए। इस पर अधिकारियों ने कहा कि यह जोखिमपूर्ण होगा और दुर्घटनाएं होंगी। लोग इससे कूदकर दूसरी ओर आएंगे। लोग पालन नहीं करते तो दूसरे कैसे जिम्मेदार मामले में याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया कि ये वे लोग हैं जो ट्रैफिक रूल्स का पालन नहीं करते। अगर वे ऐसा करते हैं तो खुद की रिस्क पर करते हैं। अगर कोई घटना होती है तो दूसरा (प्रशासन) कैसे जिम्मेदार होगा। ऐसे लोगों के कारण पूरे शहर के लोग परेशानी क्यों भुगतें। इसलिए बीच में डिवाइडर बनाया जाए जो बहुत जरूरी है। अब 12 जनवरी को पेश होगी स्टेटस रिपोर्ट सभी तर्क सुनने के बाद हाईकोर्ट बेंच ने कहा कि अधिकारी वकीलों की बनी कमेटी के साथ बैठक कर इसमें और क्या होना चाहिए इस पर बात करें। कमेटी से भी सुझाव लें। साथ ही 12 जनवरी को इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। जो कमेटी ने अपनी रिपोर्ट … Read more

भोपाल-इंदौर-ग्वालियर में ठंड की मार, ट्रेनें और सड़क यातायात कोहरे से लेट

भोपाल   मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड का कहर जारी है। उत्तर से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक शीतलहर से राहत नहीं मिलने की चेतावनी दी है। साथ ही कई जिलों में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे विजिबिलिटी मात्र 200 मीटर तक रहने की संभावना है। दिल्ली से मध्यप्रदेश आने वाली ट्रेनें कोहरे की वजह से 30 मिनट से 8 घंटे तक लेट चल रही हैं। गुरुवार को पंजाब मेल, शताब्दी, झेलम, सचखंड, मालवा, छत्तीसगढ़, कोल्हापुर एसएफ, मंगला लक्षद्वीप समेत कई ट्रेनें अपने तय समय से देरी से चल रही हैं। दूसरी ओर आज सुबह भोपाल, ग्वालियर-उज्जैन समेत 12 जिलों में कोहरा छाया रहा। रीवा और सागर में विजिबिलिटी 1 से 2 किलोमीटर दर्ज की गई। भोपाल, गुना, ग्वालियर, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, उज्जैन खजुराहो, मंडला में विजिबिलिटी 2 से 4 किमी तक रही। उत्तरी हिस्से के अन्य जिलों में भी कोहरे का असर देखा गया। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार-गुरुवार की रात में कई शहरों में पारे में गिरावट का दौर जारी रहा। इंदौर प्रदेश में सबसे ठंडा रहा। 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 5.4 डिग्री, इंदौर में 4.5 डिग्री, ग्वालियर में 9.3 डिग्री, उज्जैन में 7.3 डिग्री और जबलपुर में पारा 9.2 डिग्री रहा। अन्य प्रमुख शहरों का तापमान इस प्रकार रहा      ग्वालियर: 9.8 डिग्री     उज्जैन: 8.0 डिग्री     दमोह: 8.5 डिग्री     जबलपुर: 8.6 डिग्री     खजुराहो: 8.2 डिग्री     मंडला: 8.5 डिग्री     नरसिंहपुर: 8.6 डिग्री     रीवा: 7.3 डिग्री     सतना: 8.4 डिग्री मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत की पहाड़ियों पर बर्फबारी से ठंडी हवाएं एमपी पहुंच रही हैं, जिससे शीतलहर का प्रभाव बढ़ गया है। घने कोहरे के कारण सड़क, रेल और हवाई यातायात पर असर पड़ सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटों में तापमान में और गिरावट आ सकती है।  शाजापुर में 50 मीटर बाद कुछ नहीं दिखा, भोपाल-ग्वालियर में भी कोहरा इससे पहले बुधवार सुबह भोपाल, ग्वालियर समेत 22 जिलों में कोहरा छाया रहा। कोहरे की वजह से ट्रेनें-फ्लाइट भी डिले हुई। भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, कटनी, जबलपुर, दमोह, सागर और विदिशा में घना कोहरा छाया रहा। ग्वालियर, नर्मदापुरम, उज्जैन, मंडला, रीवा, सतना में 1 से 2 किलोमीटर तक विजिबिलिटी रही। वहीं, भोपाल, जबलपुर, खजुराहो, नौगांव, मलाजखंड, दतिया, गुना, इंदौर, रतलाम में 2 किमी के बाद कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। कोहरा छाने के दौरान वाहनों को सावधानी से चलाने की समझाइश भी दी गई। शाजापुर में इतना कोहरा था कि 50 मीटर के बाद कुछ भी नहीं दिख रहा था।   मंदसौर-शाजापुर सबसे ठंडे, पारा 4 डिग्री से नीचे मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार-बुधवार की रात प्रदेश के कई शहरों में पारे में खासी गिरावट देखी गई। 5 बड़े शहरों की माने तो इंदौर में सबसे कम 4.9 डिग्री रहा। भोपाल में 5.1 डिग्री, ग्वालियर में 9.8 डिग्री, उज्जैन में 8 डिग्री और जबलपुर में 8.6 डिग्री रहा। मंदसौर प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री पहुंच गया। शाजापुर में पारा 3.8 डिग्री रहा। वहीं, राजगढ़ में 4.4 डिग्री, पचमढ़ी-नौगांव में 5.4 डिग्री, उमरिया-मलाजखंड में 5.6 डिग्री, रायसेन में 6.6 डिग्री, छिंदवाड़ा में 6.8 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, मंडला में 8.1 डिग्री, खंडवा-सतना में 8.4 डिग्री, दमोह-बैतूल में 8.5 डिग्री, नरसिंहपुर में 8.6 डिग्री, खजुराहो, रतलाम-गुना में 9.6 डिग्री और दतिया में 9.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह कोहरा…इसलिए गाड़ी संभलकर चलाने की सलाह प्रदेश में कोहरा छा रहा है। ऐसे में एक्सपर्ट ने लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग करने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने हेल्थ और फसलों को लेकर एडवाइजरी भी जारी की है।     ट्रैफिक – कोहरा होने पर गाड़ी चलाते समय या किसी ट्रांसपोर्ट के जरिए ट्रैवल करते समय सावधान रखें। ड्राइविंग धीरे करें और फॉग लाइट का इस्तेमाल करें।     हेल्थ– तेज ठंड होने पर शरीर की गर्माहट बनाए रखने के लिए सिर, गर्दन, हाथ-पैर की उंगलियों को अच्छे से ढंके। फ्लू, सर्दी, खांसी-जुकाम होने पर डॉक्टर को दिखाए। विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं।     कृषि- जहां मिट्‌टी में पर्याप्त नमी हो, वहां गेहूं, चना, सरसों-मटर की बुआई करें। जहां बुआई हो चुकी है, वहां जरूरत पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लें। पिछली फसलों के अवशेष यानी, ठूंठ को कभी न जलाएं। 19 दिसंबर से फिर नया सिस्टम, ठंड बढ़ेगी मौसम विभाग के अनुसार, नए नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) 19 दिसंबर से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करने की संभावना है। जिसका असर एमपी में अगले दो-तीन दिन में दिखाई देने लगेगा। इसके पीछे ही एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस आ रहा है। इससे ठंड का असर और भी बढ़ेगा। जेट स्ट्रीम की रफ्तार 185 किमी प्रतिघंटा वर्तमान में जेट स्ट्रीम भी चल रही है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर है। बुधवार को यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 185 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। बीते दिनों रफ्तार 222 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच चुकी है। क्या होती है जेट स्ट्रीम? मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इस बार रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा सर्दी बढ़ा रही है। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही हो रहा है।

पुलिसिंग में नवाचार और सुधार पर चर्चा: मुख्यमंत्री की डीजी-आईजी कांफ्रेंस आज

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज का दिन बेहद व्यस्त रहने वाला है। वे पुलिस मुख्यालय (PHQ) में आयोजित डीजी/आईजी कॉन्फ्रेंस से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेंगे और स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल होंगे। सुबह 11 बजे पुलिस मुख्यालय (PHQ) में स्टेट लेवल कॉन्फ्रेंस ऑन इम्प्लीमेंटेशन फॉर डिसेमिनेशन ऑफ आउटकम्स ऑफ डीजी/आईजी कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय स्तर पर हुई डीजी/आईजी कॉन्फ्रेंस के निष्कर्षों को राज्य स्तर पर लागू करने और प्रसारित करने पर विस्तृत चर्चा होगी। मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल होंगे और पुलिस अधिकारियों को दिशा-निर्देश देंगे। इसके बाद दोपहर 1:35 बजे सीएम हाउस में एक अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग मुख्यमंत्री का अभिनंदन करेंगे। दोपहर 3 बजे सीएम हाउस में ही जनजातीय क्षेत्र आरोग्य सेवा संकल्प सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का फोकस जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, चुनौतियों का समाधान और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर होगा। मुख्यमंत्री इस सम्मेलन में संकल्प के साथ नई योजनाओं और पहलों की घोषणा कर सकते हैं। ये आयोजन राज्य में कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और जनजातीय क्षेत्रों के स्वास्थ्य विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।  मॉडर्न पुलिसिंग और साइबर सुरक्षा पर होगा मंथन  आज सुबह 11 बजे भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) में स्टेट लेवल कॉन्फ्रेंसआयोजित की जा रही है। ये कॉन्फ्रेंस राष्ट्रीय स्तर पर हुई डीजी और आईजी कॉन्फ्रेंस के फैसलों को लागू करने के लिए बुलाई गई है। सीएम मोहन यादव इस बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य  मध्यप्रदेश में सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को सुधारना है। सीएम यहां मॉडर्न पुलिसिंग, साइबर सुरक्षा और राज्य की इन्ट्रिंसिक सेफ्टी को लेकर नए दिशा-निर्देश भी जारी करेंगे।  जन-संवाद का कार्यक्रम PHQ Bhopal की बैठक के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 1:35 बजे सीएम हाउस पहुंचेंगे, जहां एक खास स्वागत समारोह होगा। इस कार्यक्रम में समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग सीएम से मिलकर उनके अब तक के काम के लिए उन्हें सम्मानित करेंगे। इसके बाद, दोपहर 3 बजे सीएम हाउस में 'जनजातीय क्षेत्र आरोग्य सेवा संकल्प सम्मेलन' होगा। इस सम्मेलन में सीएम यादव जनजातीय इलाकों में स्वास्थ्य की चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। इसमें डॉक्टरों की उपलब्धता, नई स्वास्थ्य योजनाओं और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बारे में बातचीत होगी। इसके साथ ही, सीएम इस अवसर पर जनजातीय क्षेत्रों के लिए नई मोबाइल मेडिकल यूनिट्स या विशेष हेल्थ सेंटर्स की घोषणा भी कर सकते हैं। इन दोनों कार्यक्रमों के जरिए राज्य सरकार अपनी सुरक्षा और सेवा के वादे पर काम करने की कोशिश कर रही है। सरकार की प्राथमिकताएं बताएंगे सीएम मुख्यमंत्री डॉ. यादव अधिकारियों को कानून व्यवस्था को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं से भी अवगत कराएंगे। साथ ही बालाघाट, डिंडोरी और मंडला जिलों में नक्सलवाद के खात्मे के बाद वहां के लोगों की जीवनशैली में आए बदलाव और आगे की कार्ययोजना पर भी चर्चा करेंगे। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने फील्ड में पदस्थ अधिकारियों को नियमित फील्ड विजिट करने और थानों में आने वाले नागरिकों की शिकायतों को संवेदनशीलता और सह्रदयता से सुनने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री इस विषय पर भी अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा करेंगे। बैठक में डीजीपी कैलाश मकवाणा सहित सभी डीजी, एडीजी और आईजी स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहेंगे। सीएम मोहन यादव का आज का कार्यक्रम      सुबह 11:00 बजे: पुलिस मुख्यालय (PHQ) में 'स्टेट लेवल कॉन्फ्रेंस' में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।     सुबह 11:30 बजे: राष्ट्रीय डीजी/आईजी कॉन्फ्रेंस के निष्कर्षों को राज्य में लागू करने पर पुलिस अफसरों से चर्चा करेंगे।     दोपहर 12:30 बजे: साइबर सुरक्षा और मॉडर्न पुलिसिंग को लेकर नए दिशा-निर्देश और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स जारी करेंगे।     दोपहर 01:35 बजे: मुख्यमंत्री निवास (CM House) आगमन और विभिन्न समाज प्रमुखों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में हिस्सा लेंगे।     दोपहर 02:15 बजे: समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर जन-संवाद और उनकी समस्याओं पर चर्चा करेंगे।     दोपहर 03:00 बजे: सीएम हाउस में 'जनजातीय क्षेत्र आरोग्य सेवा संकल्प सम्मेलन' का शुभारंभ करेंगे।     दोपहर 03:45 बजे: जनजातीय क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी और स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान पर विशेषज्ञों से संवाद करेंगे।     शाम 04:30 बजे: आदिवासी इलाकों के लिए नई मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्पेसिफिक हेल्थ सेंटर्स की बड़ी घोषणा कर सकते हैं।

जनकल्याण के लिए जो कहा, वही करके दिखाया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनकल्याण के लिए जो कहा, वही करके दिखाया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव कथनी नहीं करनी में विश्वास: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जनकल्याण संदेश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनकल्याण के लिए जो बात कही गई, उस पर अमल भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में नागरिकों की समृद्धि के लिए दो वर्ष में किए गए विशेष कार्यों और अर्जित उपलब्धियों की बिंदुवार जानकारी बुधवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में दिए गए संबोधन में सदन में प्रस्तुत की। इन में प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार है:-     पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल जी की जन्म वर्षगांठ पर आगामी 25 दिसम्बर को ग्वालियर में उद्योग वर्ष के समापन अवसर पर 2 लाख करोड़ के निवेश से विभिन्न इकाईयों के भूमि पूजन का कार्य हो रहा है।     मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के क्षेत्रों में संयुक्त चीता कॉरीडोर बनाने की पहल। गांधी सागर और नौरादेही में भी चीते बसाएंगे।     शिवपुरी में 9वें टाइगर रिजर्व पार्क की शुरूआत।     रीजनल औद्योगिक कॉन्क्लेव के साथ ही रेडिमेड और खिलौना निर्माण इकाईयों में कार्य करने वालों को प्रोत्साहन राशि।     आने वाले समय में सेटेलाइट के माध्यम से किसानों के खेतों और खसरा खतोनी की जानकारी प्राप्त कर घर बैठे खाद पहुंचाने का संकल्प।     स्वास्थ्य क्षेत्र में चिकित्सा अधिकारियों सहित अन्य पदों पर लगभग 42 हजार नियुक्तियों की स्वीकृति।     वर्ष 1956 में प्रदेश में 5 मेडिकल कॉलेज थे। गत डेढ़ वर्ष में 6 नए कॉलेज प्रारंभ, पीपीपी मोड पर 14 कॉलेजों के लिए निविदा की कार्यवाही। दिसम्बर 2025 में 4 मेडिकल कॉलेजों का भूमि पूजन निर्धारित। प्रदेश में 52 मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे। सभी जिलों में कॉलेज होगा।     प्रत्येक संभाग में वन्य प्राणी संग्रहालय और रेस्क्यू सेंटर प्रारंभ करने की पहल।     राजधानी भोपाल में बड़ी झील में शिकारों से पर्यटकों और नागरिकों को कश्मीर का सुखद अहसास।     इंदौर में मेट्रो प्रारंभ। भोपाल में मेट्रो ट्रेन संचालन शीघ्र।     प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जन्म वर्षगांठ 17 सितम्बर को धार जिले में पीएम मित्रपार्क की आधारशीला रखी।     प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण की ठोस पहल कर पीढ़ियों को गंभीर जन्मजात रोग से बचाने का प्रयास।     भगोरिया को राष्ट्रीय पर्व की मान्यता दी गई। उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी में जनजातीय वर्ग की भागीदारी की शुरूआत की। जनजातीय गौरवशाली विभूतियों के सम्मान में जबलपुर, सिंग्रामपुर और पचमढ़ी में मंत्रिपरिषद की बैठकें की गईं।     राज्य में तेज ध्वनि यंत्रों पर नियंत्रण की पहल।     गौ-संरक्षण के राज्य में ठोस प्रयास किए गए।  

समृद्ध मध्यप्रदेश विजन@2047 आठ प्रमुख बिंदुओं पर होगा केंद्रित

सुखद, संपन्न मध्यप्रदेश की कल्पना को बिना भेदभाव के खुला दृष्टिकोण रखकर करेंगे साकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव समृद्ध मध्यप्रदेश विजन@2047 आठ प्रमुख बिंदुओं पर होगा केंद्रित केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित डेडलाइन के पहले किया नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिया समृद्ध मध्यप्रदेश विजन 2047 पर केंद्रित संबोधन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुखद और सम्पन्न मध्यप्रदेश की कल्पना को बिना भेदभाव के खुले दृष्टिकोण के साथ कार्य करते हुए साकार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मध्यप्रदेश विधान सभा के विशेष सत्र के समापन अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि पक्ष और विपक्ष के साथ नागरिकों के सुझावों और सहयोग के आधार पर प्रदेश के समग्र  विकास के लिए कार्य होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के विजन के अनुसार मध्यप्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में क्रियान्वयन किया जाएगा। मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के विजन को क्रियान्वित करने के लिए 8 प्रमुख विषयों पर तैयार किए गए दृष्टि-पत्र पर कार्य करेगा। दृष्टि-पत्र के इन 8 विषयों में 300 बिंदु निर्धारित किए गए हैं। आठ प्रमुख विषयों में सतत औद्योगिक विकास, अगली पीढ़ी की उन्नत कृषि, सेवाओं के क्षेत्र में विकास, विश्व स्तरीय शिक्षा और कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य और पोषण, शहरी और ग्रामीण बुनियादी ढांचा, सुशासन और सुगम नागरिक सेवा और नवीन वित्त पोषण और निवेश शामिल है।  इसके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन में अपने संबोधन में प्रदेश में गत 2 वर्ष में अर्जित उपलब्धियों का भी विस्तार से उल्लेख किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्य रूप से राज्य के नागरिकों की समृद्धि के लिए कृषि, महिला सशक्तिकरण, वन्य-प्राणी संरक्षण, सांस्कृतिक अभ्युदय, शासकीय विभागों में पदों पर नियुक्तियां, नक्सलवाद पर केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित डेडलाइन के पूर्व  नियंत्रण की प्रभावी कार्यवाही , शहरी विकास, ग्रामीण विकास, ऊर्जा उत्पादन, सड़कों के निर्माण, स्वास्थ्य क्षेत्र में नई सुविधाओं, जनजातीय नायकों के सम्मान, मजरों-टोलों तक बिजली पहुंचाने, अन्तर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोनाओं के संबंध में विस्तार से जनकारी दी।      

उज्जैन सिंहस्थ महापर्व की तैयारी तेज: प्रयागराज मॉडल से सीखेंगे बिजली प्रबंधन के गुर

इंदौर  उज्जैन में वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ महापर्व के सफल आयोजन के लिए बिजली वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में ठोस प्रयास शुरू हो गए हैं। इसी क्रम में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान बिजली प्रबंधन का अनुभव रखने वाले अधिकारियों का एक दल मध्य प्रदेश के इंदौर और उज्जैन के दौरे पर आया है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान निर्बाध, सुरक्षित और प्रभावी विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपने अनुभव साझा करना और स्थानीय अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना है। इंदौर और उज्जैन में बिजली वितरण व्यवस्था का होगा अवलोकन मंगलवार को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम, लखनऊ के वरिष्ठ अधिकारियों का दल इंदौर पहुंचा। यह दल पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों के साथ मिलकर इंदौर और उज्जैन में बिजली वितरण से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं का अवलोकन करेगा। साथ ही सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इन अधिकारियों के सुझावों और तकनीकी मार्गदर्शन के आधार पर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देगी। इंदौर और उज्जैन में कार्यशालाओं का आयोजन भी करेंगे उल्लेखनीय है कि पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों का एक दल पहले ही प्रयागराज जाकर महाकुंभ के दौरान की गई बिजली व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अध्ययन कर चुका है। अब उसी अनुभव को व्यवहार में लाने के लिए प्रयागराज से आए विशेषज्ञ अधिकारी चार दिवसीय दौरे के दौरान इंदौर और उज्जैन में कार्यशालाओं का आयोजन भी करेंगे। इन कार्यशालाओं में वे अधिकारी शामिल होंगे, जिन्होंने महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन में विद्युत आपूर्ति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी।  

नर्मदा प्रगतिपथ से जुड़े 10 शहर, दो राज्यों को जोड़ेगा 867 किमी लंबा एक्सप्रेस वे

अमरकंटक मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से झाबुआ तक निर्माणाधीन नर्मदा एक्सप्रेस-वे (नर्मदा प्रगति पथ) नर्मदापुरम को प्रदेश के 10 शहरों से जोड़ देगा। इसके जरिए जिले की औद्योगिक विकास होने के साथ व्यापारिक गतिविधियां सुलभ होंगी। सीहोर के बाड़ी से बुदनी के बीच प्रगति पथ के फोरलेन सड़क का निर्माण शुरू किया है। नर्मदा नदी के किनारे 867 किमी के इस पथ का बाड़ी से बुदनी तक 64 और बुदनी से भैरुंदा तक 51 किमी का हिस्सा नर्मदापुरम की सीमा से गुजरेगा। मोहासा औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा लाभ नर्मदापुरम के मोहासा औद्योगिक क्षेत्र और रिन्युएबल एनर्जी पार्क के चलते नर्मदा प्रगति पथ महत्वपूर्ण साबित होगा। इस पथ से उद्योगों को हवाई अड्डे से बंदरगाह तक का सफर आसान होगा। इसके अलावा प्रगति पथ पर्यटन को बढ़ाने में भी अहम साबित होगा। छवीसगढ़ की सीमा से गुजरात तक सफर आसान बनाने वाले इस प्रोजेक्ट से उद्योगों और पर्यटन में सकारात्मक परिणाम क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ाएंगे। 2026 तक पूरा होगा निर्माण एनएचएआइ के मुताबिक 2026 तक इस एक्सप्रेस वे को तैयार करने का लक्ष्य लेकर निर्माण किया जा रहा है। एनएचएआई देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे की तरह नर्मदा प्रगति पथ को अत्याधुनिक बना रही है। इस पर सफर करने वाले राहगीरों, वाहन चालकों को हर जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। यह एक्सप्रेस-वे डिंडौरी, जबलपुर, बड़वाह, इंदौर, धार, सरदारपुर, झाबुआ से गुजरात सीमा तक जाएगा। छवीसगढ़ से गुजरात तक एक कनेक्टिविटि बनाएगा। प्रदेश के 10 जिले सीधे नर्मदापुरम से भी जुड़ जाएंगे। इससे बुदनी, शाहगंज, से बाड़ी बकतरा, रेहटी, नसरूल्लागंज तक आवागमन सुलभ होगा। नर्मदा प्रगति पथ का निर्माण शुरू बाड़ी से बुदनी तक नर्मदा प्रगति पथ का निर्माण शुरू हो गया है। इस फोरलेन सडक़ का निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे नर्मदा किनारे के 10 शहर आपस में जुडेंगे। – आकाश चौकसे, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआइ नर्मदापुरम